Tuesday, November 30, 2021
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अयोध्या, सबरीमाला, राफेल और… सिर्फ 8 दिनों में 7 अहम मामलों पर फैसला: CJI गोगोई उसके बाद होंगे रिटायर

राम मंदिर, सबरीमाला, राफेल के अलावा खुद CJI पर लगे यौन उत्पीड़न के आरोप और राहुल गाँधी के 'चौकीदार चोर है' संबंधित अवमानना याचिका से लेकर फायनेंस एक्ट जैसे अहम मामलों के फैसले इन्हीं 8 दिनों में आएँगे।

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई 17 नवंबर को सेवानिवृत्त होने वाले हैं। लेकिन शनिवार-रविवार और छुट्टियों को हटा दें तो उनके पास आधिकारिक कार्य करने के लिए सिर्फ 8 दिन ही बचे हैं। इन 8 दिनों में सुप्रीम कोर्ट में चल रहे 7 ऐसे बड़े मामलों के फैसले आने हैं, जो धर्म, रक्षा और राजनीति जैसे विषयों से संबंधित हैं। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि फिलहाल दिवाली की छुट्टियों के तहत बंद सुप्रीम कोर्ट जब 4 नवंबर को खुलेगा, तो किस मामले में कैसा फैसला आएगा।

अयोध्या-बाबरी मस्जिद मामला

रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि के विवादित 2.77 एकड़ जमीन के स्वामित्व के लिए हिंदू और मुस्लिम पक्षकारों द्वारा दायर की गई अपील पर 40 दिन सुनवाई चली। CJI रंजन गोगोई की अध्यक्षता में 5 जजों वाली पीठ ने इस मामले पर 16 अक्टूबर को अपना फैसला सुरक्षित रखा था। इस मामले में दोनों पक्षों ने इतिहासकारों, ऐतिहासिक यात्रियों, गैजेटियर, अंग्रेज के जमाने से चले आ रहे जमीन संबंधी कागजातों के साथ अपनी-अपनी आस्था का पक्ष भी रखा। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की रिपोर्टों को भी सुनवाई के दौरान जजों के समक्ष रखा गया। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सितंबर 2010 के अपने फैसले में विवादित भूमि को तीन हिस्सों में बाँटा था – राम लला, निर्मोही अखाड़ा और सुन्नी वक्फ बोर्ड।

सबरीमाला रिव्यू पिटिशन

इस मामले में भी 5 जजों की पीठ है। पीठ की अध्यक्षता करेंगे CJI गोगोई। दरअसल 28 सितंबर 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने केरल स्थित सबरीमाला मंदिर में रजस्वला (10 से 50 साल की ऐसी स्त्रियाँ, जिन्हें मासिक धर्म/पीरियड आते हों, आ सकने की संभावना हो) को मंदिर में प्रवेश पर लगे रोक को हटा दिया था। सर्वोच्च न्यायालय के इस फैसले के खिलाफ 65 याचिकाएँ दायर की गईं। तर्क यह दिया गया कि अदालत ने “सदियों पुरानी” धार्मिक मान्यता के साथ हस्तक्षेप किया है। और यह भी कि सबरीमाला देवता एक “नैष्ठिक ब्रह्मचारी” हैं, जिनकी तपस्या मासिक धर्म होने वाली महिला उपासकों के प्रवेश से भंग नहीं होनी चाहिए। याचिकाकर्ताओं ने अपने तर्क में यह बात भी रखी कि सभी वर्गों (लिंग-आधारित) के पूजा का अधिकार होना आवश्यक है लेकिन जिसकी पूजा की जा रही है, और जिस मंदिर विशेष में की जा रही है, उसके अधिकारों को भी ध्यान में रखना उतना ही जरूरी है।

इस मामले में CJI गोगोई 5 जजों की समीक्षा पीठ के साथ यह तय करेंगे कि सितंबर 2018 में सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसले को यथावत रखना है या उसे बदल कर नया फैसला सुनाना है।

राफेल रिव्यू पिटिशन

सुप्रीम कोर्ट के सीनियर अधिवक्ता प्रशांत भूषण, पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण शौरी और यशवंत सिन्हा ने राफेल फाइटर प्लेन सौदे से संबंधित रिव्यू पिटिशन दायर की थी। यह याचिका सुप्रीम कोर्ट के द्वारा राफेल मामले में ही पिछले साल 14 दिसंबर को दिए गए फैसले के विरोध में दाखिल की गई थी। तब सुप्रीम कोर्ट ने राफेल डील में भ्रष्टाचार संबंधी आरोप पर जाँच के आदेश देने से इनकार कर दिया था।

The Hindu ने कथित डॉक्युमेंट्स लीक किए थे, जिनके आधार पर याचिकाकर्ताओं ने पुनर्विचार याचिका डाली थी। अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने तर्क दिया था कि चूँकि वे दस्तावेज़ अवैध तरीके से प्राप्त किए गए हैं, अतः उनकी अदालत में कोई प्रमाणिकता नहीं हो सकती। अदालत ने इस तर्क को ख़ारिज कर दिया था, लेकिन राफेल सौदे पर याचिकाकर्ताओं के मन-मुताबिक कोई त्वरित फैसला भी नहीं दिया।रिव्यू पिटिशन पर 10 मई 2019 को कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

जिस पीठ ने यह फैसला सुरक्षित रखा था, उसमें मुख्य न्यायाधीश गोगोई भी शामिल थे। याचिका में यह भी आरोप लगाया गया कि केंद्र सरकार ने अदालत को गुमराह किया, जिसके बाद 14 दिसंबर, 2018 को कोर्ट की ओर से इस तरह (जाँच के आदेश देने से इनकार) का आदेश आया।

राहुल गाँधी पर अवमानना का मुकदमा

इसी राफेल मामले में अदालत द्वारा फैसला सुरक्षित कर लेने के बाद तत्कालीन कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी ने मीडिया से दावा किया था कि अदालत ने कह दिया ‘चौकीदार (प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी) चोर है’। भाजपा नेत्री मीनाक्षी लेखी ने राहुल गाँधी द्वारा अपने शब्द अदालत के होने का दावा करने को अदालत की अवमानना मानते हुए मुकदमा किया, जिसके बाद राहुल को माफ़ी माँगनी पड़ी थी। उन्होंने कहा था कि चुनावी गर्मागर्मी में उनकी ज़बान फिसल गई थी। CJI गोगोई इस मामले पर भी अपना फैसला सुनाएँगे।

क्या RTI मुख्य न्यायाधीश पर लागू होगा?

सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने 4 अप्रैल को सीजेआई के आरटीआई के अंतर्गत आने पर फैसला सुरक्षित कर लिया था। 5 जजों की संविधान पीठ सुप्रीम कोर्ट के महासचिव द्वारा दिल्ली हाई कोर्ट के सीजेआई को आरटीआई में लाने के फैसले (2010) के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। सेवानिवृति से पहले रंजन गोगोई के अहम फैसले में से एक यह भी होगा।

फाइनेंस एक्ट 2017 की वैधता

10 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने रेवेन्यू बार असोसिएशन द्वारा दायर याचिका पर फैसला सुरक्षित कर लिया था। याचिका में फाइनेंस एक्ट 2017 के उन प्रावधानों को चुनौती दी गई थी, जिनसे विभिन्न न्यायिक ट्रिब्यूनलों जैसे एनजीटी, इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल, नेशनल कम्पनी लॉ ट्रिब्यूनल आदि की ताकत और संरचना प्रभावित हो रही थी।

सीजेआई के खिलाफ यौन उत्पीड़न की शिकायत

पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज एके पटनायक जाँच कर रहे थे इस बात की कि क्या सीजेआई गोगोई के खिलाफ यौन उत्पीड़न की शिकायत कोई साजिश थी? जस्टिस अरुण मिश्रा, आरएफ नरीमन और दीपक गुप्ता की विशेष पीठ ने जस्टिस पटनायक की नियुक्ति की थी। जाँच का आधार अधिवक्ता उत्सव बैंस की वह शिकायत थी, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि उनसे फिक्सरों, कॉर्पोरेट लॉबीइस्टों और सुप्रीम कोर्ट के नाराज कर्मचारियों ने सीजेआई के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने के लिए संपर्क किया था। खबरों के मुताबिक जस्टिस पटनायक ने जाँच पूरी कर अपनी रिपोर्ट अदालत को सौंप दी है। यह फैसला भी अपने आप में ऐतिहासिक होगा।

 

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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