अयोध्या: लिबरल गैंग का छलका दर्द, कहा- SC के फ़ैसले ने VHP को किया पुरस्कृत

नंदिनी सुंदर ने हिन्दू पक्ष को पूरी जमीन दिए जाने के फ़ैसले की निंदा करते हुए लिखा कि सुप्रीम कोर्ट ने मस्जिद गिराने के लिए विश्व हिन्दू परिषद (VHP) को पुरस्कृत किया है, यह शर्म की बात है।

अयोध्या भूमि विवाद मामले में आज सुप्रीम कोर्ट की पाँच जजों की पीठ ने अपना ऐतिहासिक फ़ैसला सुना दिया। पीठ ने विवादित ज़मीन पर रामलला के हक़ में निर्णय सुनाया। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को राम मंदिर बनाने के लिए तीन महीने में ट्रस्ट बनाने का निर्देश दिया है। साथ ही मुस्लिम पक्ष को नई मस्जिद बनाने के लिए अलग से पाँच एकड़ ज़मीन देने का निर्देश भी दिया है। इसके अलावा, कोर्ट ने निर्मोंही अखाड़े और शिया वक़्फ़ बोर्ड के दावों को ख़ारिज कर दिया। हालाँकि, निर्मोही अखाड़े को ट्रस्ट में जगह देने की अनुमति को स्वीकार कर लिया गया है।

ज्यादातर तबकों में इस फैसले का स्वागत हो रहा है। लेकिन एक समूह ऐसा भी है जिसे फैसला पच नहीं रहा। इस समूह ने अपने दुख का राग अलापना शुरू कर दिया है। निखिल थाटे ने ट्वीट किया कि 1986 में बाबरी मस्जिद के ताले को किसने खोला उन्हें कभी नहीं भूलना चाहिए। इसके अलावा उन्होंने यह भी लिखा कि भूमि विवाद मामले में 27 साल पहले न्याय की मौत हो गई थी और आज अंतत: उसे दफ़ना दिया गया।

नंदिनी सुंदर ने हिन्दू पक्ष को पूरी जमीन दिए जाने के फ़ैसले की निंदा करते हुए लिखा कि सुप्रीम कोर्ट ने मस्जिद गिराने के लिए विश्व हिन्दू परिषद (VHP) को पुरस्कृत किया है, यह शर्म की बात है। 

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फासिस्ट फकीरा ने सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले को ‘न्याय’ न बताकर ‘निर्णय’ करार दिया और लिखा कि INDIA को आज आधिकारिक रूप से HINDU REPUBLIC घोषित किया गया है।

काकवाणी यूज़र ने अपने सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले को RSS का फ़ैसला करार देते हुए लिखा कि मालिकाना हक़ का मामला था, तो मालिक़ाना हक़ किसी एक पक्ष को दिया जाता। लेकिन जब ज़मीन पर मुसलमानों का मालिकाना हक़ है ही नहीं तो 2.77 एकड़ ज़मीन के बदले मुस्लिम पक्ष को पाँच एकड़ ज़मीन दिए जाने का क्या मतलब है?

आदित्य मेनन ने भी लिखा कि अयोध्या फैसले को संतुलित कहना गलत है। पाँच एकड़ जमीन सुन्नी वक्फ बोर्ड के लिए कुछ नहीं है। इतना तो मुस्लिम बिना कोर्ट की मदद के भी कर सकते हैं। यह उस विशेष मस्जिद की बात है जिसे एक क्रिमिनल एक्ट में ध्वस्त कर दिया गया अगर ऐसा नहीं होता तो क्या ये फैसला आता।

ग़ौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने साफ़ कर दिया कि 1857 से पहले हिन्दू यहाँ पूजा करते थे। यानी, अंग्रेजों के आने से पहले ही राम चबूतरा, सीता रसोई और विवादित ज़मीन के बाहरी हिस्से में हिन्दू पूजा किया करते थे। अर्थात, आउटर कोर्टयार्ड हिन्दुओं की पूजा का मुख्य बिंदु था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सारा विवाद अंदर के हिस्से को लेकर है।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि मुस्लिम पक्ष विवादित ज़मीन के भीतरी हिस्से पर अपना दावा साबित करने में विफल रहा है और सारा विवाद भीतरी हिस्से को लेकर ही है। यानी, बाहरी हिस्से पर हिन्दू काफ़ी पहले से पूजा करते आ रहे हैं, इसमें कोई विवाद नहीं है।

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"हिन्दू धर्मशास्त्र कौन पढ़ाएगा? उस धर्म का व्यक्ति जो बुतपरस्ती कहकर मूर्ति और मन्दिर के प्रति उपहासात्मक दृष्टि रखता हो और वो ये सिखाएगा कि पूजन का विधान क्या होगा? क्या जिस धर्म के हर गणना का आधार चन्द्रमा हो वो सूर्य सिद्धान्त पढ़ाएगा?"

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