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संभल की मस्जिद में 13 साल की लड़की से रेप की कोशिश, मौलाना के भाई ने बनाया बंधक: चीखती-चिल्लाती रही पीड़िता, करता रहा गंदी हरकत

उत्तर प्रदेश के संभल जिले की एक मस्जिद में नाबालिग बच्ची को बंधक बना कर रेप की कोशिश की गई है। पीड़िता की चीख पुकार सुन कर राहगीरों ने उसे बचाया। बच्ची की माँ ने इस मामले में मस्जिद के मौलाना और उसके नाबालिग भाई के खिलाफ तहरीर दी गई है। घटना शुक्रवार (29 नवंबर 2024) की है। पुलिस ने आरोपित मौलाना को गिरफ्तार कर उसके भाई को भी कस्टडी में ले लिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह मामला संभल जिले के थानाक्षेत्र गुन्नौर का है। यहाँ ढलान वाली नाम से एक मस्जिद है। मस्जिद का मौलाना आसपास के बच्चों को दीनी तालीम देता है। इसी तालीम को हासिल कर रहा एक छात्र शुक्रवार को मस्जिद गया था। छात्र की 13 वर्षीया नाबालिग बहन अपने भाई से मिलने शाम लगभग 7 बजे मस्जिद पहुँची। आरोप है कि इसी दौरान बच्ची को मौलाना के नाबालिग भाई ने दबोच लिया।

पीड़िता ने छूटने की कोशिश की, तो उसे एक कमरे में बंद कर दिया गया। यहाँ बच्ची के साथ अश्लील हरकतें शुरू कर दी गईं। इधर लड़की के लापता होते ही परिजनों ने खोजबीन शुरू कर दी। तलाश के दौरान लोगों को मस्जिद के अंदर से पीड़िता की चीख-पुकार सुनाई दी। पीड़िता के परिजन उस कमरे तक पहुँच गए जिसमें लड़की को बंधक बनाया गया था। दरवाजा खोला गया तो अंदर मौलाना का नाबालिग भाई पीड़िता के साथ आपत्तिजनक हालात में मिला।

डरी-सहमी पीड़िता ने बताया कि उसके साथ रेप की भी कोशिश की गई थी। बच्ची की माँ ने मामले की शिकायत पुलिस में की। शिकायत में उन्होंने मस्जिद के मौलाना को भी अपने भाई के साथ घिनौनी करतूत में शामिल बताया है। पुलिस ने यह केस पॉक्सो एक्ट सहित अन्य धाराओं में दर्ज कर लिया है। आरोपित मौलाना को गिरफ्तार कर उसके नाबालिग भाई को हिरासत में ले लिया गया है। मामले में जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

राजस्थान के कॉन्ग्रेस नेता के खिलाफ महिला ने बंधक बनाने और बार-बार रेप करने का दर्ज कराया मुकदमा: इसके पहले दोनों का वायरल हुआ था वीडियो

राजस्थान के चित्तौड़गढ़ में कॉन्ग्रेस नेता संदीप शर्मा पर एक महिला ने बंधक बनाने, मारपीट करने और बलात्कार का मामला दर्ज कराया है। चित्तौड़गढ़ नगर परिषद के सभापति रह चुके संदीप शर्मा और पीड़ित महिला के व्यक्तिगत फोटो और वीडियो पहले वायरल हो चुके हैं। शिकायत मिलने के बाद मुख्यालय के सदर थाना पुलिस ने कॉन्ग्रेस नेता के खिलाफ मामला दर्ज करके जाँच शुरू कर दी है।

जब आरोपित और पीड़िता के फोटो और वीडियो वायरल हुए थे, तब पीड़िता ने चित्तौड़गढ़ से विधायक चंद्रभान सिंह और एक महिला एवं एक पुरुष के खिलाफ वायरल करने की थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। पीड़ित महिला ने तीनों लोगों पर उसका निजी फोटो-वीडियो वायरल करने का आरोप लगाया था। वीडियो में संदीप शर्मा महिला की माँग में सिंदूर और गले में चेन पहनाते हुए नजर आए थे।

निजी फोटो वायरल मामले की जाँच कर रही सीआईडी क्राइम ब्रांच की टीम 10 दिन पहले महिला का बयान दर्ज करने के लिए चित्तौड़गढ़ आई थी। इस टीम के साथ क्राइम ब्रांच से अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक भी चित्तौड़गढ़ पहुँचे थे। टीम ने महिला से संपर्क करके बयान देने के लिए कहा तो पीड़िता ने मानसिक हालत ठीक नहीं होने की बात कहकर बयान देने से मना कर दिया था।

बता दें कि चित्तौड़गढ़ नगर परिषद के सदस्यों का कार्यकाल पूरा होने के बाद कॉन्ग्रेस नेता संदीप शर्मा लगभग डेढ़ महीने पहले ही सभापति पद से हटे हैं। शुक्रवार (29 नवंबर 2024) को पीड़ित महिला ने थाने में शिकायत देकर कहा कि संदीप शर्मा ने उसे बंधक बनाया और दिल्ली, गोवा, मुंबई के होटलों में ले जाकर मारपीट की और उसका रेप किया।

महिला ने यह भी आरोप लगाया कि नेतागिरी का डर दिखाकर संदीप शर्मा ने उसे सेंथी में स्थित एक होटल में दो माह तक बंधक बना कर रखा। महिला ने आरोप लगाया कि इस दौरान उसके साथ दुष्कर्म किया गया और इसकी अश्लील वीडियो भी बना लिए गए। महिला ने आरोप लगाया कि उसने संदीप शर्मा से वीडियो डिलीट करने के लिए कहा तो वह चले गए और फोन बंद कर लिया।

इस मामले में पुलिस उपाधीक्षक मुख्यालय विनय चौधरी और थाना अधिकारी गजेंद्र सिंह ने मामला दर्ज होने की पुष्टि की है। इस मामले की जाँच जिला मुख्यालय के सदर थाना अधिकारी गजेंद्र सिंह द्वारा की जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार, जिस वक्त पीड़ित महिला संदीप शर्मा के खिलाफ थाने में शिकायत देने के लिए आई थी, उस वक्त संदीप शर्मा भी वहाँ मौजूद थे।

इस साल अक्टूबर में वायरल हुए फोटो और वीडियो को संदीप शर्मा ने फेक बताया था। लगभग 52 साल के कॉन्ग्रेस नेता संदीप शर्मा इस वीडियो में 24 साल की पीड़ित महिला साथ में दिख रहे थे। उनका यह फोटो-वीडियो सोशल मीडिया साइट्स पर वायरल हुआ था। कहा जाता है कि पीड़िता पहले चित्तौड़गढ़ नगर परिषद में अस्थायी कर्मचारी के रूप में काम करती थी। बाद में उसे हटा दिया गया था। 

तब नगर परिषद में प्रतिपक्ष के भाजपा नेता छोटू सिंह ने आरोप लगाया था कि संदीप शर्मा पर पिछले 3 साल में भ्रष्टाचार के लगभग दो दर्जन मामले दर्ज हुए हैं। उन्होंने शर्मा पर 20 मामले में करोड़ों रुपए का भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था। लव अफेयर का मामला सामने पर छोटू सिंह ने संदीप शर्मा को चरित्रहीन बताते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई की माँग की थी। 

मिशनरी के अनाथ आश्रम में रहती थी हिंदू लड़की, ईसाई लड़के ने कर लिया अगवा: NCPCR के पूर्व अध्यक्ष बोले- धर्मांतरण का था इरादा, इसलिए संस्था ने नहीं कराई FIR

मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिले में एक ईसाई मिशनरी संस्था पर गंभीर आरोप लगे हैं, जिसमें धर्मान्तरण की साजिश और नाबालिग हिन्दू लड़की के अपहरण का मामला सामने आया है। यह आरोप राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग (NCPCR) के पूर्व अध्यक्ष प्रियांक कानूनगो ने लगाए हैं। प्रियांक ने दावा किया है कि एक ईसाई लड़के ने इस अनाथ आश्रम में रह रही एक हिन्दू लड़की का अपहरण किया था, और इस घटना के पीछे धर्मान्तरण की साजिश हो सकती है। उनका यह भी कहना था कि इस घटना में यौन शोषण का भी पहलू हो सकता है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह मामला नर्मदापुरम के इटारसी क्षेत्र में स्थित “जीवोदय बाल देखरेख संस्था” से जुड़ा हुआ है, जो ईसाई मिशनरी संस्था द्वारा संचालित है। इस संस्था को सिस्टर क्लारा एनीमोट्टी संचालित करती हैं, जो इस विवाद के केंद्र में हैं। इस संस्था पर शुक्रवार (29 नवंबर 2024) को राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग (NCPCR) के पूर्व चेयरपर्सन प्रियांक कानूनगो ने गंभीर आरोप लगाए हैं।

प्रियांक कानूनगो ने बताया कि जीवोदय संथा में पल रही OBC समुदाय की हिन्दू लड़की का एक ईसाई लड़के ने अपहरण कर लिया। अपहरण का मकसद पीड़िता का यौन शोषण बताया गया है। इस अपहरण के पीछे धर्मान्तरण की साजिश की आशंका जताते हुए प्रियांक कानूनगो ने अपहरण के बाद जीवोदय संस्था द्वारा FIR न दर्ज कराने पर सवाल खड़े किए हैं। अपहरण के 2 दिनों के बाद पीड़िता को गैरकानूनी ढंग से बरामद कर लिया जाता है।

प्रियांक ने आगे बताया कि बरामदगी के बाद एक पंचनामा बनवा कर पीड़िता को आरोपित की बहन मोना मसीह के हवाले कर दिया जाता है। इस पंचनामे का स्क्रीनशॉट भी प्रियांक कानूनगो ने शेयर किया है। दावा है कि मोना मसीह के पास पीड़िता 4 दिनों तक रही। इसके बाद अपहरण का आरोपित पीड़िता को अपने घर ले कर चला गया। आरोप है कि जिले के स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों ने भी सब जानते हुए संस्था को बचाने और मामले को दबाने की कोशिश की।

चित्र साभार- X/प्रियांक कानूनगो

प्रियांक कानूनगो ने आरोप लगाया कि इस दौरान नर्मदापुरम के स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने मामले को दबाने की कोशिश की। उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस ने मिशनरी संस्था को क्लीन चिट दे दी, जिससे यह मामला और भी संदिग्ध हो गया। प्रियांक ने इसे मानव तस्करी और धर्मान्तरण के रैकेट का हिस्सा बताया और आरोप लगाया कि प्रशासन ने संस्था को बचाने की कोशिश की। उन्होंने बच्चों के अधिकारों पर अक्सर बयानबाजी करने वाले संगठनों को चर्च के टुकड़ों पर पलने वाला बताया है और उनकी चुप्पी पर सवाल खड़े किए हैं।

इसके बाद सिस्टर क्लारा का बयान सामने आया, जिसमें उन्होंने इन आरोपों को झूठा और बेबुनियाद बताया। सिस्टर क्लारा ने अपनी संस्था को पूरी तरह से पाक-साफ बताया और इस लापरवाही का दोष चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (CWC) पर मढ़ा। उनका कहना था कि अगर कोई गलती हुई है, तो इसके लिए CWC जिम्मेदार है, न कि उनकी संस्था।

पुलिस ने अब इस मामले में केस दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है। जीवोदय संस्था की सुपरवाइजर को इस मामले में नामजद किया गया है, और पुलिस ने मामले की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए जाँच शुरू कर दी है।

SHO गौरव सिंह के मुताबिक, मिले सबूतों के आधार पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इस मामले में अब आगे की जाँच जारी है और पुलिस ने सबूतों के आधार पर उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

16 साल से कम है उम्र तो अब सोशल मीडिया पर नहीं कर सकेंगे ‘तमाशा’, यूज किया तो देना होगा ₹275 करोड़ तक जुर्माना: ऑस्ट्रेलिया ने लगाया है जो प्रतिबंध उसके बारे में जानिए सब कुछ

ऑस्ट्रेलिया ने हाल में ऐतिहासिक कदम उठाते हुए 16 साल से कम उम्र वाले बच्चों के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा दिया। ऑस्ट्रेलिया के इस कदम के बाद वो ऐसा फैसला लेने वाला पहला देश बन गया। उन्होंने इस कानून को बनाने के लिए संसद में बिल पारित किया, जिसको संसद में पक्ष-विपक्ष दोनों का समर्थन मिला और नया कानून बना।

सोशल मीडिया बैन के नियम

इस नए कानून के अनुसार, ऑस्ट्रेलिया में अब से नाबालिग बच्चे (16 साल से कम उम्र के बच्चे) सोशल मीडिया साइट्स जैसे एक्स (पूर्व में ट्विटर), टिकटॉक, फेसबुक और इंस्टाग्राम आदि नहीं चला पाएँगे। और अगर वो इन नियमों का पालन नहीं करते या इस मामले में कुछ गड़बड़ करते पाए जाते हैं तो उन पर 32.5 मिलियन डॉलर (लगभग 275 करोड़ रुपए) तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

अभिभावकों के अनुरोध पर ऑस्ट्रेलिया सरकार ने लिया फैसला

खास बात ये है कि यह कानून माता-पिता की सहमति या पहले से मौजूद खातों के लिए कोई छूट नहीं देता। प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीस ने इस बिल का समर्थन करते हुए कहा कि वे चाहते हैं कि युवा लोग अधिक खेल गतिविधियों में भाग लें और फोन से दूर रहें।

उन्होंने बताया कि कैसे वो माता-पिता जिन्होंने फोन के दुष्परिणामों के कारण अपने बच्चों को गँवाया, वो उन्हें फोन करक आपबीती बताते थे और वो सब सुनना असहनीय हो जाता था। उन्होंने कहा- “ये हमारी जिम्मेदारी थी कि इस मामले पर हम एक्शन लें। हमारी सरकार ने वही किया भी। मैं बहुत धन्यवाद देना चाहता हूँ सभी को।”

कैसे किया जाएगा बच्चों को सोशल मीडिया से दूर

ऑस्ट्रेलिया के इस कदम के बाद हर जगह इस फैसले पर चर्चा हो रही है। सवाल हो रहे हैं कि आखिर बच्चों को सोशल मीडिया से दूर रखना कैसे संभव होगा। तो, इसके लिए जानकारी सामने आई है कि ऑस्ट्रेलिया हर इंटरनेट यूजर के लिए एक डिजिटल आईडी बनाएगा जिसके बिन इस्तेमाल के कोई इंटरनेट नहीं चला पाएगा।

सोशल मीडिया पर लोग माँग कर रहे हैं कि ऐसा फैसला हर जगह लागू होना चाहिए। हाँ, इसी बीच कुछ आलोचक ऐसे भी हैं जो इस विधेयक की प्रक्रिया पर चिंता जताते दिखे। मगर, अच्छी बात ये देखने को मिली कि ऑस्ट्रेलिया की 77% आबादी बच्चों को सोशल मीडिया से दूर रखने के समर्थन में थी।

कानून लागू होने में लगेगा 1 साल तक का समय

जानकारी के लिए बता दें कि इस कानून को लागू करने के लिए सोशल मीडिया कंपनियों को एक वर्ष का समय दिया गया है। जनवरी 2025 से इस कानून का परीक्षण चरण शुरू होगा, जिसके बाद इसे पूरी तरह से लागू किया जाएगा। यह कदम युवा लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर सोशल मीडिया के प्रभाव को संबोधित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है। हालाँकि कुछ स्थानीय इस फैसले के विरोध में अपनी नाराजगी जता रहे हैं।

लोगों का क्या है नए कानून पर कहना

सोशल मीडिया बैन पर कानून बनने के बाद जहाँ एक पक्ष का कहना है कि ये फैसला ऐसा है जैसे लोकतंत्र खत्म हो गया हो। उनका कहना है कि सरकार आखिर कैसे इस तरह के नियमों को बना सकती है। कैसे बच्चों से उनके अधिकार छीने जा सकते हैं। वहीं दूसरे पक्ष का कहना ये है कि ये सोशल मीडिया पर इस प्रकार प्रतिबंध लगना बिलकुल सही फैसला है। ये बच्चों के लिए कहीं से कहीं तक ठीक नहीं था। उसपर बहुत सी चीजें आती हैं जो एक उम्र के बच्चों को नहीं देखनी चाहिए थी तो ये फैसला बिलकुल ठीक है।

छत्तीसगढ़ के जिस गाँव को वामपंथी आतंकियों ने अंधेरे में कर रखा था कैद, उसे BJP सरकार ने पहली बार बिजली से किया रोशन: सुरक्षा बलों ने नक्सलियों से कराया मुक्त

आजादी के 78 साल के बाद छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित एक गाँव में बिजली पहुँची है। राज्य के सुदूर इलाके में बसा छुटवाही नाम का यह गाँव एक साल पहले तक नक्सलियों के कब्जे में था। यहाँ गुरुवार (28 नवंबर 2024) को पहली बार बिजली पहुँची। इस गाँव तक सड़क भी नहीं है। सरकार ने अगले साल तक यहाँ सड़क बनाने की योजना बनाई है।

छुटवाही गाँव बीजापुर जिले में स्थित है। यह बीजापुर मुख्यालय से करीब 50 किलोमीटर दूर है। दो महीने पहले सुरक्षाबलों ने इस इलाके को माओवादियों से पूरी तरह मुक्त कराने के लिए बड़े पैमाने पर नक्सल विरोधी अभियान था। इस दौरान यहाँ कई मुठभेड़ों को अंजाम दिया गया था। इलाके को नक्सलियों से मुक्त कराने के बाद यहाँ एक सुरक्षा शिविर स्थापित किया गया था।

बीजापुर के जिलाधिकारी संबित मिश्रा ने कहा, “आजादी के बाद पहली बार हम ग्रामीणों को बिजली उपलब्ध कराने में सक्षम हुए हैं, क्योंकि बीजापुर में नए सुरक्षा शिविर बनने से हम यहाँ तक पहुँच पा रहे हैं। हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता यहाँ बुनियादी सुविधाएँ उपलब्ध कराना है, ताकि गाँवों तक हमारी पहुँच बने। अगले साल तक हम उन्हें सड़क से जोड़ने का प्रयास करेंगे।”

जिलाधिकारी संबित मिश्रा ने आगे बताया, “नियाद नेल्लनार योजना के तहत बिजली के अलावा हम उन्हें मोबाइल टावर, स्कूल, आँगनवाड़ी केंद्र, सार्वजनिक वितरण प्रणाली और जल जीवन मिशन के तहत पानी की आपूर्ति प्रदान कर रहे हैं।” तमाम तरह की चुनौतियों को पूरा करते हुए भारी सुरक्षा घेरे में इंजीनियर और कर्मचारियों ने बिजली के खंभे और ट्रांफॉर्मर आदि स्थापित किए।

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, अधिकारी ने बताया कि बीजापुर के 100 से अधिक गाँवों में अभी भी बिजली कनेक्शन नहीं है। अधिकारी ने कहा कि जैसे-जैसे सुरक्षाबल आगे बढ़ेंगे और गाँवों को माओवादियों से मुक्त कराएँगे, वैसे-वैसे प्रशासन वहाँ के निवासियों को बिजली-सड़क सहित केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के तहत अन्य लाभ प्रदान करने में समर्थ हो पाएगा।

बता दें कि इस साल छत्तीसगढ़ में सुरक्षाबलों ने 210 माओवादियों को मार गिराया है। 1 नवंबर 2000 को राज्य के गठन के बाद से एक साल में माओवादियों को हुई ये सबसे बड़ी क्षति है। इस अवधि में राज्य के बस्तर क्षेत्र में माओवादी हिंसा में 17 सुरक्षाकर्मी और 62 नागरिक मारे गए हैं। बस्तर क्षेत्र में बीजापुर सहित सात जिले आते हैं।

हिंदू लड़की को प्यार में फँसाकर गोमांस खिलाने की कोशिश, नमाज पढ़ने को किया मजबूर: साबिर अंसारी गिरफ्तार, दो बार गर्भपात भी कराया

मध्य प्रदेश के कटनी जिले में एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहाँ एक हिन्दू लड़की ने शादी का झांसा देकर शारीरिक शोषण, दो बार गर्भपात कराने और गोमांस खाने व नमाज़ पढ़ने के लिए मजबूर करने का आरोप लगाया है। शिकायत के बाद पुलिस ने आरोपित साबिर अंसारी को गिरफ्तार कर लिया है।

इंस्टाग्राम से शुरू हुई बातचीत, शादी का वादा कर बनाए संबंध

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रंगनाथ नगर थानाक्षेत्र की रहने वाली पीड़िता ने बताया कि तीन साल पहले उसकी साबिर अंसारी से इंस्टाग्राम पर दोस्ती हुई थी। उसने फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार की, जिसके बाद बातचीत शुरू हो गई। जल्द ही साबिर ने प्रेमजाल में फंसा लिया और शादी का वादा करने लगा।

कुछ ही दिनों के अंदर लड़की और साबिर में फोन पर बातें होने लगीं। दोनों ने मिलने-जुलने लगे। इस दौरान साबिर और पीड़िता के बीच कई बार शारीरिक संबंध बने। जब भी लड़की विरोध करती, साबिर शादी का झाँसा देकर उसे चुप करवा देता। पीड़िता का दो बार गर्भपात कराया गया। साबिर ने उसे नमाज़ पढ़ने और गोमांस खाने के लिए भी मजबूर किया।

साबिर कर रहा था कहीं और निकाह, तब लड़की ने दर्ज कराई शिकायत

कुछ समय बाद लड़की को पता चला कि साबिर का निकाह कहीं और हो रहा है। यह जानने के लिए वह साबिर के घर गई, जहाँ उसे धमकी दी गई कि अगर उसने मुँह खोला तो जान से मार दिया जाएगा। दी गई। इसके बाद पीड़िता ने अपने परिजनों को पूरी बात बताई, जिसके बाद वे थाने पहुँचे। पुलिस ने तहरीर के आधार पर साबिर के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया। पुलिस ने इस तहरीर पर केस दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी।

महिला थाना प्रभारी रश्मि सोनकर ने बताया कि केस भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 87, 64(1), 64(2)m और 351(2) के तहत दर्ज किया गया है। गुरुवार (28 नवंबर 2024) को रंगनाथ क्षेत्र के बवाली टोला में दबिश के दौरान पुलिस ने साबिर अंसारी को गिरफ्तार कर लिया। मामले की जाँच जारी है और आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा रही है।

गैंगस्टर और AAP विधायक नरेश बालियान के बीच बातचीत का भाजपा ने जारी किया ऑडियो: बिल्डर से वसूली करके हवाला के जरिए बाँटने की बात, BJP बोली- ऐसे 3 क्लिप और हैं

भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने दिल्ली के उत्तम नगर से आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक नरेश बालियान का एक ऑडियो क्लिप जारी किया है, जिसमें वह किसी गैंगस्टर से बात कर रहे हैं। भाजपा का कहना है कि बालियान का गैंगस्टर से संबंध है और वो वसूली गैंग चलाते हैं। पार्टी ने विधायक पर पैसों की लेनदेन का भी आरोप लगाते हुए बालियान पर कार्रवाई की माँग की है।

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव भाटिया ने कहा, “AAP के नरेश बालियान या एक्टॉर्शनिस्ट MLA एक गैंगेस्टर से बात कर रहे हैं। इनका व्यवहार ऐसा है, जैसे एक माता से 2 भाई हों। ऑडियो में कहा जा रहा है कि बिल्डर को धमकाकर उससे मिले पैसे को हवाला का फैसला बाँट लेंगे। अराजक पार्टी को ये समझना होगा कि जनता ने इसलिए नहीं चुना कि आप कभी मदिरा घोटाला करें या एक्सटॉर्शन रैकेट चलाएँ।”

भाजपा ने ऑडियो क्लिप जारी करते हुए लिखा है, “ये हैं आप के ‘कट्टर ईमानदार’… आम आदमी पार्टी के विधायक नरेश बालियान एक गैंगस्टर से बातचीत कर रहे हैं। गैंगस्टर पूछता है कि आप नेता ने उसके खिलाफ शिकायत क्यों दर्ज कराई है। बालियान जवाब देते हैं कि गैंगस्टर और उसके गुंडे उसे ब्लैकमेल कर रहे हैं। गैंगस्टर जवाब देता है कि वह बालियान की कोई रिकॉर्डिंग वायरल कर देगा।”

गौरव भाटिया ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में AAP को गैंगस्टर और वसूली वाली पार्टी बताते हुए कहा कि ‘कट्टर बेईमान AAP’ अब ‘कट्टर गुंडों’ की पार्टी बन गई है। इस पार्टी का सबसे बड़ा समर्थक गैंगस्टर हैं, जो खुलेआम वसूली करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अरविंद केजरीवाल की मंजूरी से ये वसूली दिल्ली सरकार के MLA करवाते हैं। उन्होंने दावा किया कि भाजपा के पास इस तरह के तीन ऑडियो क्लिप हैं।

ऑडियो क्लिप सामने आने के बाद दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने नरेश बालियान पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि जाँच एजेंसी को इस मामले की पूरी जाँच करनी चाहिए। जो सबूत मिले हैं, उसके आधार पर विधायक के फरार होने से पहले उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। सचदेवा ने कहा कि दिल्ली की जनता ने जिन्हें चुना है, वे राष्ट्रीय राजधानी की जनता को लूट रहे हैं।

वीरेंद्र सचदेवा ने कहा कि इसके तार रोहिंग्या और बांग्लादेशियों से भी जुड़ते हैं। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी के नेता और विधायक जो खेल खेल रहे हैं, वो दिल्ली के लोगों की सुरक्षा के लिए बहुत बड़ी चुनौती है। उन्होंने कहा कि अरविंद केजरीवाल की पार्टी ने दिल्ली को अपराधियों और भ्रष्टाचारियों का अड्डा बना दिया है।

 

जान लेने की नीयत से मारा पत्थर: संभल हिंसा मामले में अब डिप्टी कलेक्टर की FIR ने खोली इस्लामी भीड़ की मंशा, 800-900 हमलावरों पर केस दर्ज

उत्तर प्रदेश के संभल जिले में रविवार (24 नवंबर) को मुस्लिम भीड़ द्वारा की गई हिंसा के बाद इलाके के हालात अब सामान्य हो चले हैं। बाजारों में दोबारा हलचल है, जनजीवन पटरी पर आ गया है। पुलिस भी फरार चल रहे दंगाइयों को पकड़ने के लिए दबिश दे रही हैं। इस बीच हिंसा में घायल डिप्टी कलेक्टर द्वारा दी गई तहरीर सामने आई है। डिप्टी कलेक्टर ने शिकायत में बताया है कि उस दिन हिंसक भीड़ उनको घेर कर मार डालना चाहती थी।

यह तहरीर संभल जिला मुख्यालय में तैनात डिप्टी कलेक्टर रमेश बाबू द्वारा दी गई है। रविवार को दी गई शिकायत में उन्होंने बताया कि वो सर्वे टीम की सुरक्षा के मद्देनगर 24 नवंबर को अपने अर्दली व सुरक्षाकर्मी होमगार्ड जवान के साथ जामा मस्जिद पर मौजूद थे। सुबह के करीब 9:10 के आसपास 800 से 900 हमलावरों की एक भीड़ मस्जिद के पास जमा होने लगी। इस भीड़ के पास घातक हथियार मौजूद थे।

शिकायत के अनुसार, यह भीड़ किसी भी हालत में चल रहे सर्वे को रोकने पर आमादा थी। भीड़ में कोई भी अधिकारियों की बात सुनने को तैयार नहीं था। वह समझाने के लिए आगे बढ़े पुलिस बल पर हमलावर हो गई। ईंट और पत्थरों की बौछार होने लगी। हिंसक भीड़ की हरकतों की वजह से स्थानीय निवासी सहम गए। डिप्टी कलेक्टर रमेश बाबू के मुताबिक भीड़ में से कुछ हमलावरों ने उनको टारगेट पर ले लिया था।

शिकायत में आगे बताया गया है कि भीड़ में शामिल किसी हमलावर ने डिप्टी कलेक्टर की हत्या के मकसद से उनको निशाना बनाकर पत्थर मारे। इस पथराव में रमेश बाबू गंभीर रूप से घायल हो गए। उनके बाएँ पैर और बाएँ हाथ की कोहनी में घाव हो गया। डिप्टी कलेक्टर ने हमलावरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की है। इस तहरीर के आधार पर पुलिस ने 800 से 900 अज्ञात हमलावरों के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है।

यह FIR भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 191 (2), 191 (3), 190, 221, 132, 121 (1) , 121 (2), 109 (1), 125 और 223 (b) के साथ आपराधिक कानून संसोधन अधिनियम 1932 की धारा 7 के तहत दर्ज हुई है। मामले की जाँच शुरू कर दी गई है। घायल SDM का इलाज चल रहा है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है।

कश्मीरी पंडित महिलाओं से नहीं छीन सकते ‘विस्थापित’ का दर्जा: हाई कोर्ट का फैसला, Non-Migrants से शादी के कारण नौकरी देने से इनकार कर रहा था जम्मू-कश्मीर प्रशासन

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाई कोर्ट ने घाटी में 1989 से शुरू हुए आतंकवादी हमलों से बचने के लिए पलायन करने वाली हिंदू महिलाओं के मामले में महत्वपूर्ण फैसला दिया है। हाई कोर्ट ने कहा कि सुरक्षा कारणों से घाटी से पलायन करने वाली कोई कश्मीरी पंडित महिला अगर किसी गैर-विस्थापित (Non-Migrant) से शादी करती है, तो भी उसका विस्थापित (Migrant) दर्जा खत्म नहीं होगा।

बता दें कि 1990 के दशक में जम्मू-कश्मीर में हिंदुओं के खिलाफ हुए नरसंहार एवं हमलों के कारण हजारों की संख्या में कश्मीरी हिंदू घाटी छोड़कर भाग गए थे। इसके बाद समय-समय पर सरकार ने उनके लिए कई तरह के कार्यक्रम शुरू किए। साल 2009 में जम्मू-कश्मीर ने घाटी छोड़ने वाले ‘प्रवासियों’ के लिए विशेष नौकरियों की घोषणा की थी, ताकि वे कश्मीर में वापस लौट सकें।

इस मामले में दो कश्मीरी पंडित महिलाओं ने इस योजना के तहत नौकरी के लिए आवेदन किया था। यह आवेदन राज्य के आपदा प्रबंधन, राहत, पुनर्वास और पुनर्निर्माण विभाग में कानूनी सहायकों के पद के लिए था। इन दोनों महिलाओं को चुन लिया गया, लेकिन अंतिम चयन सूची से उनका नाम हटा दिया गया। इसके लिए तर्क दिया गया कि दोनों महिलाओं ने गैर-प्रवासियों से शादी की थी।

राज्य सरकार ने तर्क दिया कि महिलाओं ने इस तथ्य का खुलासा नहीं किया था कि शादी के कारण उनकी विस्थापित वाली स्थिति बदल गई है। हालाँकि, महिलाओं ने कहा कि विस्थापित के रूप में उनकी स्थिति बरकरार रहनी चाहिए। दोनों महिलाओं ने सरकार के निर्णय को केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (CAT) में चुनौती दी। CAT ने राज्य सरकार को दोनों महिलाओं को नियुक्त करने के लिए कहा।

इसके बाद जम्मू-कश्मीर सरकार ने CAT के आदेश के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील दायर की। CAT के फैसले को बरकरार रखते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि शादी करने से महिलाओं के विस्थापित दर्जे में कोई बदलाव नहीं हुआ है। विवाह की स्थिति का खुलासा नहीं करने का तर्क कोई महत्व नहीं रखता है, क्योंकि नौकरी के विज्ञापन नोटिस में इस आधार पर उम्मीदवारी रद्द करने का प्रावधान नहीं था।

गैर-विस्थापित से शादी के बाद विस्थापित का दर्जा खत्म होने या बरकरार रहने को लेकर जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति मोहम्मद यूसुफ वानी की खंडपीठ ने सुनवाई की। खंडपीठ ने 11 नवंबर को दिए अपने फैसले में कहा, “यहाँ प्रतिवादी महिलाएँ हैं और उन्हें बिना किसी गलती के कश्मीर घाटी में अपना मूल निवास स्थान छोड़ना पड़ा था।”

कोर्ट ने कहा, “उनसे (कश्मीरी महिलाओं से) यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि वे केवल विस्थापित के रूप में कश्मीर घाटी में नौकरी पाने के लिए अविवाहित रहेंगी। विस्थापन के कारण हर कश्मीरी महिला को कश्मीरी जीवनसाथी नहीं मिल पाया होगा। ऐसी स्थिति में यह मान लेना कि महिला विस्थापित के रूप में अपना दर्जा खो देगी, यह घोर भेदभावपूर्ण और न्याय की अवधारणा के विरुद्ध होगा।”

कोर्ट ने कहा कि यह भेदभाव और बढ़ जाता है, क्योंकि एक पुरुष अगर गैर-विस्थापित से विवाह करता है तो वह विस्थापित बना रहता है। खंडपीठ ने कहा, “ऐसी स्थिति केवल मानव जाति में व्याप्त पितृसत्ता के कारण उत्पन्न हुई है। राज्य/केंद्रशासित प्रदेश के तहत रोजगार से संबंधित मामलों में ऐसा भेदभाव बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।” अदालत ने दोनों महिलाओं को चार हफ्ते में नियुक्त करने के लिए कहा।

बांग्लादेश के रास्ते भारत में घुसा रोहिंग्या मुस्लिम, बंगाल में निकाह कर बनाए फर्जी दस्तावेज: ज्ञानवापी समेत वाराणसी के 4 जगहों पर की रेकी, ATS ने दबोचा

उत्तर प्रदेश आतंकवाद निरोधक दस्ते (ATS) ने शुक्रवार (29 नवंबर 2024) को वाराणसी से म्यांमार के रोहिंग्या घुसपैठिए मोहम्मद अब्दुल्ला को गिरफ्तार किया। यह व्यक्ति न केवल भारत में घुसपैठ करवाने में शामिल था, बल्कि वाराणसी में ज्ञानवापी सहित चार मस्जिदों की रेकी कर चुका था। अब्दुल्ला ने भारतीय पहचान के लिए फर्जी दस्तावेज बनवा रखे थे, जिनमें आधार कार्ड, पैन कार्ड और वोटर कार्ड शामिल हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अब्दुल्ला पश्चिम बंगाल के मेदनीपुर जिले के दुर्गबनकटी इलाके में रह रहा था। गुरुवार (28 नवंबर 2024) को वह ट्रेन से वाराणसी पहुँचा और शहर में विभिन्न स्थानों पर घूमता रहा। उसने वक्फ बोर्ड के मामलों पर जानकारी जुटाने के लिए यूपी कॉलेज का दौरा किया और दालमंडी समेत तीन मस्जिदों का निरीक्षण किया। शुक्रवार को वह ज्ञानवापी पहुँचा और वहाँ के लोगों से संपर्क साधने की कोशिश करने लगा।

ATS को उसके संदिग्ध गतिविधियों की सूचना मिलने पर अलर्ट किया गया। टीम ने उसे वाराणसी कैंट स्टेशन से गिरफ्तार किया, जब वह पश्चिम बंगाल लौटने के लिए ट्रेन पकड़ने वाला था। म्यांमार निवासी इस रोहिंग्या का नाम मोहम्मद अब्दुल्ला अपनी कौम और म्यांमार के अन्य घुसपैठियों को बांग्लादेश के भारत सीमा पार करवाने में मदद भी करता था। मोहम्मद अब्दुल्ला ने अब्दुल सलाम मंडल नाम से भारतीय पहचान पत्र भी बनवा रखे थे। इन पहचान पत्रों में आधार, पैन और वोटर कार्ड भी शामिल हैं।

पूछताछ में अब्दुल्ला ने कबूला कि वह बांग्लादेश के रास्ते भारत में घुसपैठ करवाने में मदद करता है। उसने बताया कि वह म्यांमार के अकयाब जिले के मांगडू का निवासी है। फिलहाल के तौर पर उसने अपना घर पश्चिम बंगाल के मेदनीपुर जनपद स्थित दुर्गबनकटी में बनवा लिया है। अब्दुल्ला तमाम फर्जी कागजातों के सहारे साल 2018 से मेदनीपुर में रह रहा था। यहाँ उसे असद भी कहा जाने लगा। इसी दौरान उसने निकाह भी किया था। अब ATS मोहम्मद अब्दुल्ला की बीवी की भी जानकारी खंगाल रही है।

ATS ने उसके पास से मोबाइल फोन, तीन मेमोरी कार्ड, अब्दुस सलाम मंडल के नाम का आधार, वोटर और पैन कार् के साथ यूएनएचसीआर (संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी) का कार्ड और 1070 रुपए कैश बरामद किए हैं। मोहम्मद अब्दुल्ला के ऊपर ATS के थाना लखनऊ में पहले भी केस दर्ज है। यह केस सहारनपुर के देवबंद से गिरफ्तार घुसपैठियों के नेटवर्क से जुड़े होने के आरोप में दर्ज हुआ था। इस केस के अन्य आरोपित अबू सलेह मंडल, अब्दुल्ला गाजी और शेख नजीबुल हक हैं।