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हिंदू बन मंदिर आए, ब्लेड से करने वाले थे संत की हत्या… CM योगी ने खोली मुस्लिम युवकों की साजिश, जानिए कैसे मौलाना चला रहे थे इस्लामी धर्मांतरण रैकेट

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री गोरखपुर यूनिवर्सिटी में चल रहे राष्ट्रवादी छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के अधिवेशन में शामिल हुए। यहाँ उन्होंने दीपेश नायर को प्रा. यशवंत राव युवा पुरस्कार सम्मान से सम्मानित किया। इस दौरान योगी आदित्यनाथ ने धर्मांतरण के खिलाफ जारी लड़ाई को लेकर नागरिकों के कर्तव्यों पर भी बात की। उन्होंने इस दौरान बाटला हाउस के उस मौलवी और उसके धर्मांतरण रैकेट के बारे में भी बात की, जिसके गिरोह को कुछ समय पहले सजा हुई थी और मौलाना कलीम, मौलाना उमर समेत 12 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी।

सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा, “अभी 3 महीने पहले कोर्ट ने एक कुख्यात मौलवी और उसके साथियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। सजा इसलिए नहीं दी गई थी कि वो मौलवी था, बल्कि वो छद्म तरीके से धर्मांतरण करता था।” उन्होंने आगे बताया, “घटना 2019-20 की है, मेरे पास रिपोर्ट आई कि संत से मिलने 2 युवक जा रहे थे, जाँच में उनके पास से सर्जिकल ब्लेड निकली। एसपी और डीजीपी से पूछने पर पता चला कि दोनों हिंदू युवक थे। उनके पास 2 इंच की ब्लेड थी, जिससे किसी का गला भी कट जाए।”

उन्होंने आगे बताया, “मैंने पुलिस अधिकारियों से कहा कि वो इतने खतरनाक इरादों से जा रहे लोगों को हल्के में ले रहे हैं। मैंने बैकग्राउंड चेक करने के लिए बोला, तो दोनों बाहर के निकले। एक दिल्ली और एक हैदराबाद। तीसरे दिन पता चला कि वो बाटला हाउस जाते हैं। बाटला हाउस वही जगह है, जहाँ 2008 में एनकाउंटर हुआ था। मैंने पुलिस अधिकारियों से कहा कि बाटला हाउस जाने वाले युवा हिंदू नहीं है। कड़ाई से पूछताछ में पता चला कि वो हिंदू संत की हत्या करने जा रहे थे। जाँच शुरू हुई, तो बड़ा रैकेट सामने आया, जिसमें मूक-बधिर बच्चे धर्मांतरण के लिए उनके निशाने पर थे।”

सीएम योगी आदित्यनाथ ने 2 घटनाओं के बारे में बताया। पहली शिकायत गुरुग्राम से आई थी, जिसमें माँ-बाप ने शिकायत की थी कि बच्चा मूक-बधिर था। जो दिल्ली की संस्था में पढ़ाई करता था। उसे जबरन इस्लाम स्वीकार करा दिया गया। दूसरी शिकायत कानपुर से आई थी, जिसमें मूक-बधिर बच्चा उसी संस्था में पढ़ता खा। कोरोना काल में वो घर आया, तो दिन में कुछ नहीं खाता था। रख लेता था और सुबह 4 बजे खाता था। माँ को शक हुआ, जाँच हुई तो पता चला कि वो नमाज पढ़ता था।

योगी आदित्यनाथ ने आगे बताया, “जाँच में पता चला कि बाटला हाश से संचालित संस्था ऐसे बच्चों को स्मार्टफोन देकर बरगला रहा था। वो कोट-वर्ड के जरिए ट्रेनिंग देती थी और धर्मांतरण कराती थी। इसी केस का पर्दाफाश हम लोगों ने किया। उस संस्था ने 500 परिवारों को अपने चंगुल में फंसा रथा था। इसी केस में कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई।” 28:20 मिनट से उस घटनाक्रम के बारे में सीएम योगी बता रहे हैं, उसे खुद सुन सकते हैं।

क्या था पूरा मामला, जिसका सीएम योगी आदित्यनाथ ने किया जिक्र

बता दें कि 11 सितंबर 2024 को लखनऊ स्थित NIA की कोर्ट ने देश में अवैध धर्मांतरण का रैकेट चलाने वाले वाले मौलाना कलीम सिद्दीकी और उमर गौतम सहित 12 दोषियों को उम्रकैद की सजा दी थी, इसके अलावा, चार दोषियों राहुल भोला, मन्नू यादव उर्फ अब्दुल मन्नान, मोहम्मद सलीम, कुणाल अशोक चौधरी उर्फ आतिफ को 10-10 साल की सजा सुनाई थी। NIA-ATS कोर्ट ने इन्हें धारा 417, 120B, 153A, 153B, 295A, 121A, 123 और अवैध धर्मांतरण की धारा 3, 4, और 5 के तहत दोषी पाया

ये सभी दोषी उत्तर प्रदेश एवं अन्य जगहों पर धर्मांतरण का रैकेट चलाते थे। ये लोगों को लालच देकर उन्हें इस्लाम में धर्मांतरित करते थे। ये दोषी लोगों को उनके मूल धर्म के बारे में भ्रम, नफरत और भय पैदा करके उनका ब्रेनवॉश करते थे। इसके बाद उन्हें इस्लाम की खूबियाँ बताते थे और मुस्लिम बनाते थे। ये यूट्यूब चैनल भी चलाते थे। इन सबको राज्य के अलग-अलग जिलों से गिरफ्तार किया गया था।

ये गिरोह उन लोगों को अपना टारगेट बनाते थे, जो आर्थिक रूप से कमजोर और दिव्यांग होते थे। इसके अलावा महिलाएँ भी इनके निशाने पर होती थीं। इनके रैकेट को चलाने के लिए इन्हें खाड़ी सहित दुनिया भर से पैसे आते थे। बहला-फुसलाकर, डरा धमकाकर और दबाव बनाकर धर्मांतरण कराते थे। धर्मांतरण करने के बाद उन पर दबाव बनाया जाता था कि वो और हिंदुओं का धर्म परिवर्तन कराएँ।

यह गिरोह इस बात का भी ख्याल रखता था कि धर्म परिवर्तन करके मुस्लिम बने लोग फिर से अपने धर्म में वापसी ना कर लें। इसके लिए उन्हें विशेष तौर पर ट्रेनिंग दी जाती थी। उन्हें देश के अलग-अलग मस्जिदों एवं मदरसों में रखा जाता था। जो इस्लाम छोड़ने की कोशिश करते, उन्हें धमकी भी दी जाती थी।

मुजफ्फरनगर के रतनपुरी थाना क्षेत्र स्थित फुलत गाँव का कहने वाला कलीम सिद्दीकी पिकेट इंटर कॉलेज से 12वीं करने के बाद मेरठ कॉलेज से बीएससी की शिक्षा ली है। इसके बाद दिल्ली के एक मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस करने लगा। बीच में ही पढ़ाई छोड़कर वह इस्लामी स्कॉलर बन गया और इस्लाम का प्रचार-प्रसार करने लगा।

कलीम सिद्दीकी दिल्ली के शाहीन बाग में 18 साल से अपना ठिकाना बना रखा था। मौलाना कलीम सिद्दीकी को 22 सितंबर 2021 को गिरफ्तार किया था। मौलाना कलीम सिद्दीकी को 562 दिनों तक जेल में रहने के बाद अप्रैल 2023 में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने जमानत दे दी थी। जमानत के दौरान उस पर कई तरह की पाबंदियाँ भी लगाई गई थीं।

सीएम योगी ने दीपेश नायर को किया सम्मानित

सीएम योगी आदित्यनाथ ने ऐसे ही मामलों को लेकर सजगता से काम कर रहे युवाओं को सम्मानित किया। सीएम योगी ने दीपेश नायर को प्रा. यशवंत राव युवा पुरस्कार सम्मान से सम्मानित करते हुए कहा, “आप ही के बीच में छिपे हुए ऐसे लोग, जो छद्म रूप में धर्मांतरण की राष्ट्र विरोधी गतिविधियों को संचालित करते हैं। वो लोग सेवा की सौदेबाजी कर रहे हैं। इस पर रोक लगाना समाज के प्रबुद्ध जनों का, जागरुक नागरिकों का दायित्व बनता है, ये सिर्फ सरकार का नहीं, बल्कि हर जागरुक नागरिक का नाम होना चाहिए। ये काम दीपेश नायर जैसे नौजवानों के माध्यम से कर रहे हैं। मैं दीपेश नायर जैसे युवाओं का सम्मान करता हूँ। आपको प्रा. यशवंत राव युवा पुरस्कार सम्मान से सम्मानित करने से इस सम्मान का गौरव बढ़ा है। छद्म रूप से धर्मांतरण करने वाले लोगों को अपनी संस्था के माध्यम से रोका और रोक रहे हैं। ये सबकी जिम्मेदारी बनती है।”

सीएम योगी आदित्यनाथ अधिवेशन के आखिरी दिन मुख्य मेहमान के तौर पर पहुँचे थे। इस दौरान उन्होंने खुद के एबीवीपी से जुड़ाव को भी याद किया। सीएम योगी आदित्यनाथ ने दीपेश नायर को प्राध्यापक यशवंतराव केलकर युवा पुरस्कार से सम्मानित किया, जो सामाजिक जीवन में परिवर्तन लाने के लिए उल्लेखनीय काम करने के लिए दिया जाता है। दीपेश नायर ने सैकड़ों दिव्यांगों को उच्च शिक्षा के लिए रास्ता दिखाया है।

बता दें कि 22 नवंबर 2024 से गोरखपुर यूनिवर्सिटी में एबीवीपी के राष्ट्रीय अधिवेशन की शुरुआत हुई थी। इसमें 1500 से अधिक प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया, जो देश भर के 44 प्रांतों और मित्र राष्ट्र नेपाल से यहाँ पहुँचे। इस अधिवेशन में शिक्षा, समाज, पर्यावरण, संस्कृति जैसे विषयों पर देश भर से आए विद्यार्थियों, प्राध्यापकों और शिक्षाविदों ने विमर्श किया।

पत्थरबाजी, आगजनी, फायरिंग… संभल में दंगाइयों ने सब कुछ किया, पर रोक नहीं पाए जामा मस्जिद का सर्वे: जानिए कौन हैं विष्णु शंकर जैन, मुस्लिम भीड़ की घेराबंदी में कैसे फँसे?

उत्तर प्रदेश के संभल की जामा मस्जिद में कोर्ट के आदेश पर दोबारा सर्वे करने के लिए रविवार (24 नवंबर 2024) की सुबह टीम पहुँची, जिसे घेरकर मुस्लिम कट्टरपंथियों की भीड़ ने पत्थरबाजी की और जमकर बवाल काटा। करीब ढाई घंटे तक चले सर्वे के दौरान बाहर भारी पत्थरबाजी होती रही, जिसे काबू करने के लिए प्रशासन को लाठीचार्ज करना पड़ा और आँसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। इस दौरान एक व्यक्ति की मौत हो गई।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस बवाल में अज्ञात व्यक्ति की भी जान चली गई है। मीडिया रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि ये गोली गली की तरफ से आई, जो पुलिस पर पथराव और फायरिंग कर रही थी। इस दौरान डिप्टी कलेक्टर, एसपी के पीआरओ और सिपाही भी घायल हो गए हैं। पुलिस ने मुश्किल से हालात पर काबू पाया। किसी भी प्रकार के उपद्रव को रोकने के लिए पुलिस के साथ PAC और रैपिड एक्शन फ़ोर्स (RAF) के जवान तैनात हैं।

पत्थरबाजी की घटना को लेकर संभल के डीएम राजेंद्र पेन्सिया ने कहा, “सर्वेक्षण पूरा हो गया है। सर्वेक्षण दल को सुरक्षित निकाल लिया गया है। स्थिति को नियंत्रण में लाया जा रहा है। शरारती तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।”

मस्जिद में फंसे थे विष्णु शंकर जैन, पुलिस ने सुरक्षित बाहर निकाला

सर्वे टीम में शामिल वकील विष्णु शंकर जैन को पुलिस ने सुरक्षा के बीच बाहर निकाला। विष्णु शंकर जैन वही वकील हैं जिनकी याचिका पर कोर्ट ने 19 नवंबर को मस्जिद में सर्वे का आदेश दिया था और उसी शाम को पहली बार सर्वे भी हुआ था। उस दिन भी माहौल तनावपूर्ण हो गया था। इस मामले में एडवोकेट कमिश्नर 29 नवंबर तक अपनी रिपोर्ट कोर्ट में जमा करेंगे।

विष्णु शंकर जैन ने बताया, “19 नवंबर को पारित न्यायालय के आदेश के अनुपालन में आज एडवोकेट कमिश्नर द्वारा दूसरे दिन का सर्वेक्षण सुबह 7:30 बजे से 10:00 बजे तक किया गया। इस सर्वेक्षण के दौरान सभी विशेषताओं का अध्ययन किया गया। न्यायालय द्वारा निर्देशित वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी का अनुपालन किया गया है और अब यह सर्वेक्षण पूरा हो गया है। रिपोर्ट 29 नवंबर से पहले या 29 नवंबर को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी।”

पिता के रास्ते पर चलने वाले कर्मयोगी विष्णु शंकर जैन

बता दें कि वकील विष्णु शंकर जैन ने ही संभल की जामा मस्जिद पर श्री हरि हर मंदिर होने का दावा जिला कोर्ट में किया है। वरिष्ठ वकील हरिशंकर जैन और उनके बेटे विष्णु शंकर जैन की पिता-पुत्र की जोड़ी श्रीकृष्ण जन्मभूमि, ज्ञानवापी शृंगार गौरी समेत 110 मामलों की पैरवी कर रही है। श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह मामले में भी विष्णु जैन हिंदू पक्ष की पैरवी कर रहे हैं।

हरिशंकर जैन यूपी की राजधानी लखनऊ से ताल्लुक रखते हैं। 1976 में उन्होंने वकालत शुरू की थी, इस पेशे में वह करीब 48 साल से सक्रिय हैं. उनके बेटे विष्णु जैन भी पिता के नक्शेकदम पर चल रहे हैं। उन्होंने साल 2010 में बालाजी लॉ कॉलेज से डिग्री लेकर वकालत शुरू की। तब से वह पिता के साथ हैं। विष्णु जैन ने श्रीराम जन्मभूमि मामले से प्रैक्टिस शुरू की थी।

अधिवक्ता हरि शंकर जैन (जन्म 27 मई 1954) वर्ष 1976 से वकालत कर रहे हैं। उन्होंने लखनऊ कोर्ट से अपनी प्रैक्टिस शुरू की और धीरे-धीरे हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में भी मुकदमे लड़ते गए। उनके बेटे विष्णु शंकर जैन (जन्म 9 अक्टूबर 1986) ने बचपन से ही अपने पिता को हिंदू हित में मुकदमे लड़ते देखा और फिर पिता के नक्शेकदम पर चल पए। विष्णु शंकर जैन ने 2010 में अपनी कानून की पढ़ाई पूरी की और तब से अपने पिता के मुकदमों में उनकी सहायता कर रहे हैं, जो सामान्य रूप से भारतीय समाज और विशेष रूप से भारतीय सभ्यता में अद्वितीय महत्व रखते हैं।

विष्णु शंकर जैन ‘हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस’ के प्रवक्ता हैं। उन्होंने अयोध्या के श्री राम जन्मभूमि मामले से अपनी वकालत शुरू की, और 2011 में इलाहाबाद हाई कोर्ट के 2010 के फैसले को चुनौती दी। इस मामले में उन्होंने अपने पिता हरि शंकर जैन की सहायता की। 2016 में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड की परीक्षा पास की और 2016 में ही अयोध्या के श्री राम जन्मभूमि मामले में सुप्रीम कोर्ट में अपनी पहली उपस्थिति दर्ज कराई। विष्णु शंकर जैन यह बताना कभी नहीं भूलते कि वह और उनका परिवार, खासकर उनके पिता और मार्गदर्शक हरि शंकर जैन खुद को भाग्यशाली मानते हैं कि उन्हें वह काम करने का मौका मिला, जिसमें वे लगे हुए हैं।

हिंदुओं से संबंधी करीब 110 मामले ऐसे हैं जिनमें हरिशंकर जैन और विष्णु जैन में से कोई एक या फिर दोनों अदालत में पेश हुए हों। इनमें सबसे पुराना मामला साल 1990 का है। दिलचस्प बात ये है कि ज्यादातर केसों को पिता-पुत्र की जोड़ी ने जिता कर ही दम लिया। वहीं कुछ हैं जो अब भी चल रहे हैं। इसमें संभल का मामला सबसे नया है और संभल के मामले को लेकर विष्णु शंकर जैन ने बेहद कम समय में काफी सफलताएँ हिंदू पक्ष के लिए पाई हैं।

भारत ने 1 दिन में गिने 64 करोड़ वोट, डोनाल्ड ट्रंप जीत गए पर 18 दिन में भी 1.5 करोड़ वोट गिन नहीं पाया है अमेरिका: जानिए एलन मस्क क्यों हुए भारतीय सिस्टम के फैन

एलन मस्क का नाम जब आता है, तो उनके हैरान करने वाले और कभी-कभी विरोधाभासी बयानों की चर्चा ज़रूर होती है। अब उन्होंने भारतीय चुनाव प्रणाली की तारीफ करते हुए इसे अमेरिका के लिए एक सबक बताया है। दरअसल, एक व्यक्ति ने लोकसभा चुनाव 2024 के नतीजों के दौरान के एक समाचार का स्क्रीनशॉट शेयर किया था, जिसमें पूरे देश के लिए मतगणना एक ही दिन में समाप्त हो गई थी। इस पर मस्क ने हैरानी जताई और कहा कि भारत में 64 करोड़ मतों की गिनती एक दिन में, और यहाँ कैलिफोर्निया में 1.5 करोड़ वोटों की गिनती 18 दिन में भी पूरी नहीं हो पाई।

यह वही मस्क हैं जिन्होंने कुछ महीने पहले इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) पर गंभीर सवाल उठाए थे और इसे चुनावी धांधली का कारण बताया था। इन दोनों बयानों को जोड़कर देखें तो मस्क की राय का यह विरोधाभास केवल उनका नजरिया ही नहीं, बल्कि तकनीकी और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं पर बहस को भी उजागर करता है।

भारत के चुनाव तंत्र की तारीफ, कैलिफोर्निया पर साधा निशाना

एलन मस्क ने रविवार (24 नवंबर 2024) को भारत के चुनाव तंत्र की तेजी पर हैरानी जताई। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि भारत ने एक दिन में 64 करोड़ वोट गिनकर परिणाम घोषित कर दिए, जबकि अमेरिकी राज्य कैलिफोर्निया में 1.5 करोड़ वोटों की गिनती 18 दिन बाद भी पूरी नहीं हो पाई। यह टिप्पणी अमेरिका के धीमे चुनावी तंत्र और भारत की तेज़ प्रक्रिया के बीच एक स्पष्ट तुलना है।

इस दौरान उन्होंने भारत की EVM आधारित प्रणाली को सराहा, जो इतने बड़े पैमाने पर तेज़ और सटीक चुनावी परिणाम देने में सक्षम है। मस्क की यह टिप्पणी महाराष्ट्र और झारखंड के हाल ही में संपन्न विधानसभा और उपचुनावों के संदर्भ में आई, जहां एक ही दिन में वोट गिने गए और परिणाम घोषित हुए।

मस्क के बयान का संदर्भ अमेरिका में हाल ही में हुए राष्ट्रपति चुनावों से जुड़ा है। 5-6 नवंबर को मतदान हुआ था, लेकिन कई राज्यों में गिनती अब तक जारी है। जबकि भारत की EVM प्रणाली इस संदर्भ में कहीं अधिक तेज़ और प्रभावी नजर आती है।

मस्क ने पहले EVM को बताया था ‘खतरनाक’

अगर मस्क के कुछ महीने पहले के बयानों पर नजर डालें तो अक्टूबर 2024 में मस्क ने अमेरिका में एक टाउन हॉल में कहा था कि EVM चुनावों में धांधली का बड़ा माध्यम बन सकती हैं। उन्होंने डोमिनियन कंपनी की मशीनों का उदाहरण देते हुए फिलाडेल्फिया और एरिज़ोना में रिपब्लिकन पार्टी की हार को इन मशीनों से जोड़ा।

मस्क ने तब कहा था, “मैं तकनीक का हिस्सा हूँ, इसलिए मुझे पता है कि इसे हैक करना कितना आसान हो सकता है। EVM से चुनाव कराना खतरनाक है। हमें मतपत्रों पर वापस लौटना चाहिए, जहां गिनती भी हाथ से हो।”

भारत में EVM पर मस्क की नई राय: विरोधाभास या तारीफ?

मस्क के हालिया बयान और उनके पुराने विचार एक-दूसरे के विरोधाभासी लग सकते हैं, लेकिन गहराई से देखें तो वे अलग संदर्भों में दिए गए हैं। एलन मस्क ने भारत की EVM प्रणाली की तारीफ उसके तेज़ और सटीक परिणामों के लिए की। भारत में चुनाव प्रक्रिया का डिजिटलीकरण और इतने बड़े पैमाने पर इसे प्रभावी ढंग से प्रबंधित करना, विश्व के लिए एक मिसाल है। वहीं, मस्क का EVM के प्रति अविश्वास मुख्यतः अमेरिकी प्रणाली और डोमिनियन जैसी कंपनियों से जुड़ा है। उन्होंने अमेरिका में चुनावी पारदर्शिता पर सवाल उठाए, जो भारत की प्रणाली से बिल्कुल अलग है।

भारत और अमेरिका के चुनाव तंत्र में अंतर: EVM बनाम बैलट पेपर

भारत में EVM का उपयोग 2000 के दशक से हो रहा है, जो तेज़ और कुशल गिनती की प्रक्रिया को सुनिश्चित करता है। भारत की EVM प्रणाली में गिनती के दौरान गड़बड़ी की संभावना बेहद कम है। VVPAT (वोटर वेरिफाइड पेपर ऑडिट ट्रेल) जैसी तकनीकों ने इसे और अधिक पारदर्शी बनाया है।

वहीं, अमेरिका के अधिकांश राज्यों में अभी भी बैलट पेपर का उपयोग होता है, जिसमें गिनती की प्रक्रिया लंबी और जटिल हो जाती है। अमेरिका में बैलट पेपर और गिनती के लंबे समय के कारण विवाद और संदेह पैदा होते हैं।

मस्क ने स्पष्ट किया कि अमेरिका को भारत की तरह तेज़ और प्रभावी चुनावी तंत्र अपनाने की आवश्यकता है। यह बयान अमेरिका के लोकतांत्रिक तंत्र के लिए एक प्रकार का ‘स्लो क्लैप’ जैसा है।

मस्क ने दिया भारत के लिबरलों को झटका?

एलन मस्क के ये बयान उन लिबरल लोगों के लिए भी एक झटका हैं, जो भारत की EVM प्रणाली पर सवाल उठाते रहे हैं। खासकर जुलाई में मस्क के EVM विरोधी बयान का जिक्र करते हुए कई विपक्षी दलों ने इसे आधार बनाकर EVM पर अविश्वास जताया था। लेकिन अब मस्क की भारत की चुनाव प्रक्रिया की तारीफ उनकी ही विचारधारा को चुनौती देती है।

एलन मस्क के बयानों से यह स्पष्ट है कि भारत का चुनावी तंत्र केवल देश में ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी सराहा जाता है। उनकी तारीफ भारतीय लोकतंत्र और चुनाव आयोग के लिए गर्व का विषय है। भारत की प्रणाली जहाँ तेज़ और शानदार है, वहीं अमेरिका को इससे सबक लेने की जरूरत है।

जामा मस्जिद का सर्वे करने आई टीम, घेराबंदी कर मुस्लिम भीड़ ने की पत्थरबाजी: लाठी-आँसू गैस के गोलों से पुलिस ने संभल में हालात पर पाए काबू

रविवार (24 नवंबर 2024) को संभल की जामा मस्जिद का दोबारा से सर्वे हुआ। यह सर्वे कोर्ट के आदेश पर हो रहा है, क्योंकि हिंदुओं ने हरिहर मंदिर बता इस पर दावा किया है। सुबह के समय जैसे ही सर्वे करने के लिए टीम मस्जिद पहुँची इस्लामी कट्टरपंथियों की भीड़ ने घेराबंदी कर पत्थरबाजी शुरू कर दी।

भीड़ में नाबालिग से लेकर बुजुर्ग तक शामिल थे। हालात पर काबू पाने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। आँसू गैस के गोले दागने पड़े। खबर लिखे जाने तक सर्वे टीम मस्जिद के अंदर थी और हालत पर पुलिस ने नियंत्रण पा लिया था। किसी भी प्रकार के उपद्रव को रोकने के लिए पुलिस के साथ PAC और रैपिड एक्शन फ़ोर्स (RAF) के जवान तैनात किए गए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सर्वे टीम रविवार सुबह 6 बजे जामा मस्जिद पहुँची। इस टीम के साथ संभल के जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक व अन्य सीनियर अधिकारी भी थे। जैसे ही सर्वे टीम मस्जिद के अंदर पहुँची, कट्टरपंथी भीड़ ने मस्जिद को घेर लिया।

मुस्लिम भीड़ मस्जिद के आसपास की संकरी गलियों से निकल कर सर्वे करने वाली टीम की तरफ बढ़ने लगी। पुलिस और RAF के जवानों ने रोकने की कोशिश की तो भीड़ ने नारेबाजी शुरू कर दी। कई ने अपने चेहरे ढक रखे थे।

कुछ देर बाद भीड़ ने पत्थरबाजी शुरू कर दी। हालत बिगड़ते देख पुलिस ने लाठीचार्ज किया। उपद्रवियों पर आँसू गैस के गोले छोड़े। इसके बाद भीड़ तितर-बितर हुई। उपद्रव के वायरल हो रहे फुटेज में सड़क पर फेंके गए पत्थर देखे जा सकते हैं। पुलिस ने कुछ लोगों को हिरासत में भी लिया है।

गौरतलब है कि संभल की जामा मस्जिद का मंगलवार (19 नवंबर 2024) की शाम को कलेक्टर की उपस्थिति में पहली बार सर्वे हुआ था। इस दौरान भारी पुलिस फोर्स की मौजूदगी में वीडियोग्राफी भी की गई थी। जामा मस्जिद के हरिहर मंदिर होने का दावा करते हुए हिंदू पक्ष ने कोर्ट में एक वाद दायर किया था। इसके बाद कोर्ट ने एडवोकेट कमिश्नर को नियुक्त करते हुए पूरे परिसर का सर्वे कराने का आदेश दिया था। 29 नवंबर को कोर्ट में सर्वे रिपोर्ट दाखिल की जानी है।

हिंदू पक्ष द्वारा 95 पेज के वाद में दावा किया गया है कि हरिहर मंदिर को तोड़कर जामा मस्जिद बनवाया गया है और मस्जिद समिति इसका अनाधिकृत उपयोग कर रही है। हिंदू पक्ष का दावा है कि आक्रमणकारी बाबर ने 1529 में इस मंदिर को तोड़कर मस्जिद में परिवर्तित कर दिया था। विष्णु शंकर जैन ने कहा कि उन्होंने ऐतिहासिक साक्ष्यों और हिन्दू आस्था के आधार पर यह याचिका दाखिल की है।

इस सर्वे के बाद जुमे की नमाज पर शुक्रवार (22 नवम्बर, 2024) को जामा मस्जिद में भारी भीड़ देखी गई थी। इसी मस्जिद में नमाज पढ़ने वाले एक वकील ने मीडिया को बताया था कि सामान्य तौर पर मस्जिद में 500-600 लोग जुमे की नमाज पढ़ने आते थे। लेकिन मुकदमे और सर्वे के बाद जुमे को 4000 से अधिक लोग पहुँचे।

खालिस्तानी प्रेम में पहले भारत से पंगा, अब निज्जर हत्याकांड में दे रहे क्लीनचिट: अपने ही बुने जाल में उलझे जस्टिन ट्रूडो, बचने के लिए कनाडा के अधिकारियों को किया कुर्बान

खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या का आरोप भारत और पीएम मोदी पर लगाने के बाद कनाडा की जस्टिन ट्रूडो सरकार बैकफुट पर है। खुद संसद और विभिन्न मंचों से भारत पर आरोप लगाने वाले प्रधानमंत्री ट्रूडो अब कनाडा के अधिकारियों को बलि का बकरा रहे हैं। निज्जर की हत्या से पीएम मोदी को जोड़ने वाली एक फर्जी रिपोर्ट की जानकारी लीक करने के लिए अपने खुफिया अधिकारियों को ‘अपराधी’ कहा है।

एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बिना सबूत के पीएम मोदी को लेकर स्टोरी छापने के सवाल पर ट्रूडो ने कहा, “मीडिया में टॉप सीक्रेट जानकारी लीक करने वाले अपराधियों ने लगातार उन कहानियों को गलत पाया है। इसीलिए हमने विदेशी हस्तक्षेप की एक राष्ट्रीय जाँच की, जिसमें इस बात पर प्रकाश डाला गया कि मीडिया को जानकारी लीक करने वाले अधिकारी अपराधी होने के साथ-साथ अविश्वसनीय भी हैं।”

ट्रूडो का बयान कनाडा के प्रसिद्ध अखबार ‘द ग्लोब एंड मेल’ की एक रिपोर्ट को लेकर आया है। उस अखबार में भारत पर आरोप लगाते हुए कहा गया था कि खालिस्तानी आतंकी निज्जर की हत्या की साजिश केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने रची थी। इसमें यह भी कहा गया था कि प्रधानमंत्री मोदी, विदेश मंत्री जयशंकर और एनएसए अजीत डोभाल को इस योजना की जानकारी थी।

अखबार में यह रिपोर्ट एक अनाम कनाडाई अधिकारी के हवाले से छापी गई थी। हालाँकि, रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि इसको लेकर कनाडा के पास प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ कोई सबूत नहीं है। इस मीडिया रिपोर्ट को विदेश मंत्रालय ने 20 नवंबर को खारिज कर दिया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि इस तरह के बेतुके बयानों को खारिज कर देना चाहिए।

इस रिपोर्ट के बाद ट्रूडो सरकार ने एक बयान जारी करके इस रिपोर्ट का खंडन किया था। कनाडा सरकार ने बयान जारी कर कहा था कि खालिस्तानी आतंकी निज्जर की हत्या में भारत के शामिल होने का उसके पास कोई सबूत नहीं है। ट्रूडो सरकार ने कहा था कि उसने प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोवाल पर कभी कोई आरोप नहीं लगाया है।

प्रिवी काउंसिल के डिप्टी क्लर्क और प्रधानमंत्री ट्रूडो के राष्ट्रीय सुरक्षा एवं खुफिया सलाहकार नथाली जी ड्रौइन ने कहा था, “सार्वजनिक सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण और जारी खतरे के कारण RCMP (रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस) और अधिकारियों ने 14 अक्टूबर को कनाडा में भारत सरकार के एजेंटों द्वारा की गई गंभीर आपराधिक गतिविधि के सार्वजनिक आरोप लगाने का असाधारण कदम उठाया।”

प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो की सरकार ने आगे कहा था, “कनाडा सरकार ने प्रधानमंत्री मोदी, विदेश मंत्री जयशंकर या NSA डोवाल को कनाडा के भीतर गंभीर आपराधिक गतिविधि से जोड़ने के बारे में कभी नहीं कहा है और ना ही इससे जुड़े सबूतों की उसे जानकारी है। इसके विपरीत, कोई भी सुझाव काल्पनिक और ग़लत दोनों है।”

इस तरह जस्टिन ट्रूडो ने इस पूरी घटना को अधिकारियों की गलती बताकर दुनिया भर में हो रही अपनी किरकरी से बचने की कोशिश की है। जस्टिन ट्रूडो उन्हें बलि का बकरा बनाने की कोशिश कर रहे हैं। हालाँकि, शुरू से ही इस मामले में कनाडा के पास भारत के खिलाफ कोई सबूत नहीं थे। इसके बावजूद ट्रूडो खुद संसद से लेकर तमाम जगहों पर भारत को इसके लिए जिम्मेदार ठहराते रहे हैं।

इस साल 14 अक्टूबर को ही प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने भारत सरकार पर अपमानजनक आरोप लगाए थे और कनाडा की धरती पर हत्याओं को अंजाम देने का दावा किया था। RCMP के हवाले से उन्होंने कनाडा में दक्षिण एशियाई समुदाय, खालिस्तान समर्थक आंदोलन से जुड़े लोगों को निशाना बनाने वाले हिंसक खतरों की एक श्रृंखला खोज निकालने का दावा किया था।

इस बयान में उन्होंने ‘भारत सरकार’ का 10 बार जिक्र किया गया था, जबकि भारत का 13 बार। पीएम ट्रूडो ने पिछले साल कनाडा की संसद में बोलते हुए भी निज्जर की हत्या का आरोप भारत पर लगाया था। इसके बाद दोनों देश के बीच तनाव बढ़ गया था। भारत ने ट्रूडो और उनकी पार्टी पर खालिस्तानियों को लुभाने के लिए वोट बैंक की राजनीति करने का आरोप लगाया था।


महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में BJP की अगुवाई वाली महायुति ने रचा इतिहास, यूपी-बिहार-राजस्थान उपचुनावों में INDI गठबंधन को दी पटखनी: जानिए 15 राज्यों के उपचुनावों के नतीजे

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव, झारखंड विधानसभा चुनाव और कई राज्यों में हुए विधानसभा उप-चुनाव के नतीजों ने देश की सियासी तस्वीर को बदलकर रख दिया है। महाराष्ट्र में महायुति गठबंधन ने महाविकास आघाड़ी गठबंधन को बुरी तरह से हराया, तो झारखंड में इंडी गठबंधन ने एनडीए को रोकने में कामयाबी पाई। ये चुनाव न सिर्फ राजनीतिक दलों के लिए अहम साबित हुए बल्कि जनता के मूड का भी साफ संकेत देते हैं। आइए विस्तार से जानते हैं इन चुनावों के बड़े नतीजे और उनका असर।

महाराष्ट्र में महायुति का जलवा, महाविकास अघाड़ी ध्वस्त

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के नतीजे बीजेपी और शिंदे के नेतृत्व वाली महायुति के लिए शानदार रहे। 288 सीटों वाली विधानसभा में महायुति ने 223 सीटें जीतकर इतिहास रच दिया। वहीं महाविकास अघाड़ी सिर्फ 55 सीटों पर सिमट गई।

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में बीजेपी, शिवसेना (शिंदे गुट), और एनसीपी (अजित पवार गुट) की तिकड़ी ने जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए बहुमत से सरकार बनाने का रास्ता साफ किया। दूसरी ओर, विपक्षी INDI गठबंधन, जिसमें कॉन्ग्रेस, एनसीपी (शरद पवार गुट), और उद्धव ठाकरे की शिवसेना शामिल थी, उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाया।

बीजेपी और शिवसेना (शिंदे गुट) की बड़ी जीत ने महाविकास अघाड़ी के अस्तित्व पर सवाल खड़े कर दिए हैं। वर्ली सीट से शिवसेना (उद्धव गुट) के आदित्य ठाकरे ने जीत हासिल की, लेकिन बाकी गुट की हालत भी खस्ता रही। कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता बालासाहेब थोराट संगमनेर सीट से चुनाव हार गए। कॉन्ग्रेस की इस चुनाव में बुरी गति दिखी, राहुल गाँधी और महाविकास आघाड़ी गठबंधन बुरी तरह से फ्लॉप साबित हुआ।

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में जीत के बाद मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने मतदाताओं का धन्यवाद दिया, जबकि देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि सीएम पद पर फैसला महायुति करेगी। बताया जा रहा है कि महायुति सरकार 25 नवंबर को शपथ ले सकती है। अजित पवार की एनसीपी ने भी सरकार को समर्थन पत्र देने की तैयारी कर ली है।

यह जीत न केवल महायुति के लिए ऐतिहासिक है, बल्कि विपक्ष के लिए करारी शिकस्त भी है। वहीं, हार से बौखलाए विपक्षी नेता ईवीएम, सरकार और पूंजीपतियों पर दोष मढ़ते नजर आ रहे हैं। संजय राउत ने तो इसे जनता पर ‘थोपा गया नतीजा’ तक बता दिया। यही नहीं, सपा से एनसीपी-शरद पवार में आए फवाद अहमद की एक्ट्रेस बीवी स्वरा भास्कर ने तो ईवीएम पर ही उंगली उठा दी और मशीन में खराबी का घिसा-पिटा राग अलापने लगी।

झारखंड में हेमंत सोरेन का दम, इंडी गठबंधन की बड़ी जीत

झारखंड में हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाले इंडी गठबंधन ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 81 में से 55 सीटें जीतीं। बीजेपी और एनडीए महज 25 सीटों पर सिमट गए।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन बरहेट सीट से आगे चल रहे हैं, तो जेएमएम के स्टीफन मरांडी ने महेशपुर सीट से बड़ी जीत दर्ज की। वहीं, बीजेपी ने कोडरमा से अपनी उम्मीदवार डॉ. नीरा यादव को जीत दिलाई। परिवार की सियासत पर नजर डालें, तो सोरेन परिवार के 4 सदस्यों में से 3 चुनाव हार गए। केवल हेमंत सोरेन अपनी सीट बचा सके।

उप-चुनाव में बीजेपी ने दिखाया दम

विधानसभा उप-चुनाव में बीजेपी ने परचम लहराया, लेकिन कुछ झटके भी लगे। 15 राज्यों में हुए 48 विधानसभा सीटों और 2 लोकसभा सीटों के उप-चुनावों में बीजेपी ने अपना दबदबा बनाए रखा। खासकर उत्तर प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों में पार्टी ने बढ़त हासिल की।

उत्तर प्रदेश में बीजेपी और ने 9 में से 7 सीटें जीत लीं। कुंदरकी सीट पर बीजेपी की बड़ी जीत रही, जो 2002 से सपा के कब्जे में थी।

राजस्थान की झुंझुनूं, देवली, रामगढ़ और खींवसर जैसी सीटों पर बीजेपी ने जीत दर्ज की। कॉन्ग्रेस ने दौसा सीट पर बढ़त बनाए रखी।

बिहार उपचुनाव में NDA ने किया क्लीनस्वीप

बिहार उप चुनाव में एनडीए ने क्लीनस्वीप किया है। बिहार की 4 विधानसभा सीटों पर हुए उप-चुनाव में से 2 पर बीजेपी ने जीत हासिल की है, तो 2 पर उसकी सहयोगी पार्टियों ने। बीजेपी ने बिहार की तरारी और रामगढ़ विधानसभा सीटों पर जीत दर्ज की है। वहीं, इमामगंज विधानसभा सीट पर हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) की दीपा कुमारी ने जीत हासिल की है, वहीं बेलागंज में जेडीयू की मनोरमा देवी ने जीत हासिल की है। बिहार विधानसभा उप-चुनाव में न सिर्फ आरजेडी को, बल्कि नई नवेली पार्टी लेकर मैदान में उतरे प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी को भी मुँह की खानी पड़ी है।

पंजाब, पश्चिम बंगाल, केरल और असम का हाल

पंजाब में आम आदमी पार्टी (AAP) ने 4 सीटें जीतकर अपनी ताकत दिखाई, तो पश्चिम बंगाल में तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) ने सभी 6 सीटें अपने नाम कीं। वहीं, असम में बीजेपी और उसके गठबंधन ने कई सीटों पर कब्जा किया, जबकि केरल की वायनाड लोकसभा सीट पर कॉन्ग्रेस की प्रियंका गाँधी वाड्रा ने जीत दर्ज की।

चुनाव के प्रमुख मुद्दे और असर

इन चुनावों में अलग-अलग राज्यों के अपने मुद्दे थे। महाराष्ट्र में जहां विपक्ष की कमजोर रणनीति बीजेपी की जीत का बड़ा कारण बनी, वहीं झारखंड में हेमंत सोरेन ने अपने गठबंधन के जरिए आदिवासी और ग्रामीण वोटों को साधा।

महाराष्ट्र: महाविकास अघाड़ी के गुटबाजी और नेतृत्व के संकट ने उन्हें भारी नुकसान पहुँचाया।

झारखंड: एनडीए को आदिवासी क्षेत्रों में खासा नुकसान हुआ, जबकि सोरेन सरकार ने इन इलाकों में अच्छा प्रदर्शन किया।

उत्तर प्रदेश: बीजेपी की सरकार ने लोकसभा चुनाव में खराब प्रदर्शन के बाद उप-चुनावों में वापसी की। बीजेपी और आरएलडी ने 9 में से 7 सीटों पर जीत हासिल की है, तो सपा को सिर्फ 2 सीटों पर जीत मिली।

पश्चिम बंगाल: ममता बनर्जी की TMC ने एक बार फिर अपनी पकड़ मजबूत दिखाई और सभी 6 सीटों पर हुए उप चुनाव में जीत हासिल की।

चुनावों से जुड़ी कुछ रोचक बातें

वर्ली सीट से जीत: आदित्य ठाकरे ने 8801 वोटों से जीत हासिल की, जो उनके लिए राहत लेकर आई।

सोरेन परिवार का प्रदर्शन: झारखंड में सोरेन परिवार के तीन सदस्य चुनाव हार गए, जो परिवार की राजनीति के लिए बड़ा झटका है।

लोकसभा उप-चुनाव: वायनाड सीट से प्रियंका गाँधी ने जीत दर्ज की, जिससे कॉन्ग्रेस को नई ऊर्जा मिली। हालाँकि विधानसभा उप-चुनावों में कॉन्ग्रेस का प्रदर्शन बेहद निराशा जनक रहा

भविष्य की राजनीति पर असर

महाराष्ट्र: बीजेपी की अगुवाई में महायुति को मिली यह जीत उन्हें लोकसभा चुनाव 2029 के लिए मजबूत आधार देगी।

झारखंड: इंडी गठबंधन की जीत विपक्षी दलों को एकजुट रहने का संदेश देती है।

उत्तर प्रदेश: उप-चुनाव में बीजेपी की वापसी 2027 के विधानसभा चुनाव की दिशा तय करेगी।

सिर्फ परफॉर्मेंस और रणनीति से मिलेगी जीत, हवाबाजी से नहीं

इन चुनावों ने साफ कर दिया कि राजनीति में अब सिर्फ परफॉर्मेंस और रणनीति से जीत मिलती है। महाराष्ट्र में बीजेपी और शिंदे गुट की बड़ी जीत ने दिखाया कि गुटबाजी और कमजोर नेतृत्व विपक्ष को कितना नुकसान पहुँचा सकता है। वहीं, झारखंड में हेमंत सोरेन के इंडी गठबंधन ने साबित किया कि जनता के मुद्दों पर काम करने से भरोसा कायम रहता है। उप-चुनावों में भी बीजेपी ने यूपी और राजस्थान जैसे राज्यों में दमदार वापसी की। हालाँकि, बंगाल और पंजाब जैसे राज्यों में क्षेत्रीय दलों का दबदबा जारी है।

कुल मिलाकर ये नतीजे लोकसभा 2029 के चुनावों की तैयारी का ट्रेलर लगते हैं। अब देखना ये है कि पार्टियाँ इन जीत-हार से क्या सीखती हैं और जनता के लिए क्या नया लाती हैं। क्योंकि आखिरकार जीत उसी की होगी जो जनता के दिल में जगह बनाएगा।

मोख्तार का अफेयर माँ से और भाई आरिफ का नाबालिग बेटी से: निकाह से इनकार के बाद रची भाइयों ने रची कत्ल की साजिश, 5 साल के बच्चे पर भी नहीं किया रहम

छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में 27 सितंबर 2024 को एक हिन्दू महिला की उसके 2 नाबालिग बच्चों के साथ हत्या कर दी गई थी। तीनों के कंकाल 15 नवंबर को पुलिस ने बरामद किए थे। इस मामले में मोख्तार अंसारी नाम के युवक को गिरफ्तार किया गया था। इस मामले में नया खुलासा हुआ है। कत्ल में मोख्तार के साथ उसका भाई आरिफ भी शामिल था। दोनों भाइयों के माँ-बेटी से अवैध संबंध थे।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, मुख्य आरोपित झाड़-फूँक का काम करता था। इसी बहाने से कौशल्या नाम की मृतक महिला के घर उसका आना-जाना था। कुछ ही दिनों में मोख्तार और कौशल्या में प्रेम संबंध बन गए। इसी दौरान मोख्तार का छोटा भाई आरिफ भी कौशल्या के घर आने-जाने लगा। उसने कुछ ही दिनों में कौशल्या की 17 वर्षीया नाबालिग बेटी मुस्कान को अपने प्यार के जाल में फँसा लिया।

आरिफ ने मुस्कान से निकाह का प्रस्ताव रखा, लेकिन मुस्कान ने ठुकरा दिया। आरिफ को लगा कि मुस्कान का किसी और लड़के से अफेयर है। इससे नाराज आरिफ ने मुस्कान की हत्या की साजिश रची। इस साजिश में उसने अपने भाई मोख्तार को भी शामिल कर लिया। हालाँकि, कुछ रिपोर्ट में कहा गया है कि आरिफ के साथ प्रेम संबंध से मोख्तार मुस्कान से नाराज हो गया था।

जो भी हो, मोख्तार 26 सितंबर को मुस्कान के घर पहुँचा। उसने मुस्कान, उसके 5 वर्षीय भाई मिंटू और 37 साल की माँ कौशल्या को बेतला नेशनल पार्क घुमाने का झाँसा दिया। तीनों तैयार हो गए तो मोख्तार इन सबको एक बाइक पर बैठाकर कुसुमी से बलरामपुर अपने घर ले आया। यहाँ इन्हें आरिफ भी मिला। थोड़े समय के बाद आरिफ कहीं चला गया। वह रात में लौटकर फिर आया।

रात में 38 वर्षीय मोख्तार, आरिफ, कौशल्या, मुस्कान और मिंटू ने एक साथ खाना खाया। जब कौशल्या अपनी बेटी और बेटे के साथ गहरी नींद में सो गई, तब वहाँ आरिफ आया। उसने मुस्कान के पेट में चाकू घोंप दिया। मुस्कान की चीख सुनकर उसकी माँ कौशल्या जाग गई। तभी मोख्तार ने कौशल्या के सिर पर कुल्हाड़ी मार दी। इसी दौरान कौशल्या का बेटा मिंटू भी जाग गया।

मूलत: झारखंड के रहने वाले मोख्तार और आरिफ ने मिंटू को भी कुल्हाड़ी से वार करके मार डाला। उन्होंने तीनों की लाश को पास के ही एक खेत के नाले में फेंक दिया। खेत से लौटकर मोख्तार और आरिफ घर में फैले खून को साफ किया। इसके बाद दोनों अलग-अलग ठिकानों की तरफ फरार हो गए। लम्बे समय तक खेतों में कोई नहीं गया था। इसलिए तीनों मृतकों के शरीर पानी में गल गए और सिर्फ कंकाल बचे।

पुलिस ने कंकाल को बरामद करके जाँच शुरू की थी तो आखिरकार इस कत्ल की गुत्थी सुलझ गई। मोख्तार के बाद अब उसके भाई आरिफ अंसारी को भी गिरफ्तार कर लिया गया है। दोनों आरोपितों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103(1), 238, 140(3) और 138(2) के तहत कार्रवाई की गई है। कत्ल में प्रयोग हुई कुल्हाड़ी और चाकू को भी पुलिस ने बरामद कर लिया है।

बताते चलें कि मोख्तार अंसारी ने गिरफ्तारी के बाद पुलिस को अलग ही कहानी गढ़ कर गुमराह करने की कोशिश की थी। तब उसने बताया था कि मुस्कान के प्यार में फँसकर उसका भाई आरिफ अंसारी घर पर पैसे नहीं भेज रहा था। माहौल को और इमोशनल बनाने के लिए उसने इस पैसे से अपने बीमार अब्बा का इलाज होने की बात भी कही थी। आखिरकार कुछ समय बाद इस झूठी कहानी का भंडा फूट गया।

अडानी के बाद अमेरिका के निशाने पर एक और भारतीय: न्याय विभाग ने संजय कौशिक पर अमेरिकी एयरक्राफ्ट तकनीक रूस को बेचने का लगाया आरोप

अमेरिका में अडानी समूह के बाद एक और भारतीय व्यक्ति को निशाना बनाया गया है। संजय कौशिक नाम के एक और भारतीय नागरिक को गिरफ्तार किया गया है। यह मुकदमा 20 नवंबर, 2024 को जारी किया गया है। 57 वर्षीय संजय कौशिक नामक पर आरोप है कि उन्होंने अमेरिका में झूठ बोल कर विमानों के कुछ पुर्जे खरीदे और उन्हें रूस में बेचने का प्रयास किया। इसी के चलते उन्हें अमेरिकी कानूनों का उल्लंघन करने का आरोपित बनाया गया है।

अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा जारी की एक प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया कि कौशिक ने अमेरिका के आयात नियंत्रण नियमों का उल्लंघन किया है। यह मुकदमा संजय कौशिक के खिलाफ 20 ओरेगन जिले में दायर किया गया है। संजय कौशिक वर्तमान में अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों की गिरफ्त में हैं। उन्हें अक्टूबर, 2024 में गिरफ्तार किया गया था।

अमेरिका के न्याय विभाग ने दावा किया है कि कि कौशिक ने रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद मार्च 2023 में कई लोगों के साथ मिलकर साजिश रची। कौशिक और अन्य पर झूठे बहाने से अमेरिका से अवैध रूप से एयरोस्पेस तकनीक हासिल करने का आरोप लगाया गया है। न्याय विभाग ने आरोप लगाया कि अमेरिकी कम्पनी से यह कह कर तकनीक हासिल की गई कि यह भारत में उपयोग की जाएगी लेकिन इसे बाद में रूस भेजने का प्रयास किया गया।

मुकदमे में कहा गया है कि उन्होंने कई पुर्जे और तकनीक खरीदे। इनमें से एटीट्यूड हेडिंग रेफरेंस सिस्टम (AHRS) था। यह विमानों में लगाया जाता है। इससे विमान उड़ाने वाले को पता लगता है कि वह कितनी उड़ाई पर विमान उड़ा रहा है तथा किस दिशा में जा रहा है। विमान की स्थिति हवा में क्या है, इसकी जानकारी इससे ही हासिल होती है। ओरेगन स्थित कम्पनी से हासिल किए गए यह पुर्जे और तकनीक रूस भेजने की अनुमति वर्तमान में नहीं है। इन्हें रूस में बेचने के लिए पहले अमेरिकी सरकार की अनुमति जरूरी होती है।

अमेरिकी न्याय विभाग ने आरोप लगाया है कि संजय कौशिक ने यह कह कर यह सभी पुर्जे और तकनीक हासिल किए कि उनकी भारत में एक प्राइवेट हेलिकॉप्टर फर्म है। हालाँकि, यह झूठ था। संजय कौशिक की फर्म ने लाइसेंस का उल्लंघन करते हुए अमेरिका से रूस सामान भेजा। हालाँकि, अमेरिकी एजेंसियों ने यह सामान अमेरिका में ही रोक लिया और रूस में नहीं पहुँचने दिया।

अगर कौशिक को इस मामले में दोषी पाया जाता है तो उन्हें 20 साल तक की जेल और 1 मिलियन अमेरिकी डॉलर का जुर्माना देना पड़ सकता है।

पप्पू सिंह बनकर मुराद अली ने हिंदू महिला से की शादी, 24 साल तक किया प्रताड़ित: पीड़िता का दावा- कई हिन्दू लड़कियों से हैं आरोपित के अफेयर, हुआ गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में मुराद अली नाम के एक अधेड़ मुस्लिम शख्स पर पप्पू सिंह बनकर हिन्दू महिलाओं को फँसाने का आरोप लगा है। 55 वर्षीय आरोपित सऊदी अरब भी आता-जाता रहता है। मुराद अली के साथ पिछले 24 सालों से रह रही एक हिन्दू महिला ने चूड़ी-बिंदी पहनने से रोकने का आरोप लगाते हुए मुराद के खिलाफ पुलिस में तहरीर दी है। पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है।

यह मामला फतेहपुर जिले के कोतवाली नगर का है। यहाँ एक 50 वर्षीया हिन्दू महिला ने 17 नवंबर को पुलिस में तहरीर दी थी। शिकायत में पीड़िता ने बताया कि लगभग 25 वर्ष पहले उसके पति की टीबी से मौत हो गई थी। उस समय वह प्राइवेट जॉब करती थी। इसी दौरान उसकी मुलाकात पप्पू सिंह से हुई, जो अधिकारियों की गाड़ियाँ चलाता था। यह जान-पहचान बाद में दोस्ती और फिर प्यार में बदल गई।

पीड़िता 2 बेटों व एक बेटी की माँ है। तब पप्पू सिंह ने बच्चों को एक पिता की तरह सहारा देने का वादा किया था। कुछ समय तक साथ रहने के बाद पीड़िता को पप्पू सिंह पर शक होने लगा। वह कभी अपने सुल्तानपुर स्थित पैतृक घर पीड़िता को नहीं ले जाता था। लगभग 23 साल पहले पीड़िता ने पीछा करते हुए पप्पू सिंह के घर का पता लगाया। तब पता चला कि पप्पू सिंह का असली नाम मुराद अली है।

पीड़िता ने बताया कि सच जानकर वह मुराद अली से दूरी बनाने लगी। तब मुराद अली ने पीड़िता से वादा किया कि वह हिन्दू धर्म अपना कर हमेशा के लिए पप्पू सिंह बन जाएगा। पीड़िता उसकी बातों में फिर आ गई। उसने आरोपित को एक और मौक़ा दिया। मुराद अली अपने वादे पर लम्बे समय तक टिक नहीं पाया। पीड़िता ने ऑपइंडिया को बताया कि वह आए दिन अलग-अलग हिन्दू लड़कियों के साथ दिखने लगा।

जब पीड़िता इसका विरोध करती तो उसके साथ अभद्रता और गाली-गलौज करता था। कुछ दिनों के बाद मुराद अली ने पीड़िता के हिन्दू तौर-तरीकों पर सवाल खड़े करने शुरू कर दिए। मुराद और उसके परिजनों ने पीड़िता की बिंदी और पैरों के महावर आदि पर भी आपत्ति जतानी शुरू कर दिया। अपनी बातें न मानने पर उसने पीड़िता से कई बार मारपीट की और जान से मार डालने की धमकी भी दी।

कुछ दिनों के बाद मुराद अली ने पप्पू सिंह के नाम से आधार कार्ड भी बनवा लिया। इसे दिखाकर वह दूसरी हिन्दू महिलाओं को झाँसे में लेता था। शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि मुराद अली ने अपने फर्जी पहचान पत्र के जरिए अभी हाल ही में एक और हिन्दू लड़की से शादी की है। महिला ने दावा है कि एक बार एक लड़की के साथ पकड़े जाने पर मुराद अली जेल भी जा चुका है।

मुराद अली को बेहद शातिर बताते हुए पीड़िता ने कहा कि मुराद को कई बार पुलिस ने अलग-अलग लड़कियों से पकड़ा था, लेकिन अधिकारियों की गाड़ी चलाने की वजह से वह अपने प्रभाव का इस्तेमाल करके छूट जाता था। मुराद अली ने उसके तमाम गहने भी हड़प लिए हैं। महिला का दावा है कि मुराद अली का लगातार सऊदी अरब आना-जाना है।

पीड़िता ने ऑपइंडिया को बताया कि साल 2014 में मुराद अली ने उसकी नाबालिग बेटी से दुष्कर्म का प्रयास किया। इसके बाद पीड़िता ने पुलिस में शिकायत की थी। आरोप है कि तत्कालीन अधिकारियों ने इस मामले को दबा दिया। इस घटना के बाद पीड़िता और आरोपित के रिश्तों में हमेशा के लिए खटास आ गई। मुराद ने कहीं शिकायत करने पर पीड़िता को कत्ल करने की धमकी भी दी है।

पुलिस ने पीड़िता की शिकायत का संज्ञान लेकर मुराद अली के खिलाफ नामजद FIR दर्ज कर ली है। उस पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 82 (2), 115 (2) और 351 (2) के तहत कार्रवाई की गई है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है। गुरुवार (21 नवंबर) को पुलिस ने मुराद अली को गिरफ्तार कर लिया है। पीड़िता का दावा है कि गिरफ्तारी के ही दिन मुराद अली सऊदी अरब जा रहा था।

छात्रों को तिलक लगाने और ‘जय श्रीराम’ ने रोका: हिमाचल प्रदेश के संस्कृत विश्वविद्यालय में हिंदू संगठनों का विरोध प्रदर्शन, कहा- प्रोफेसर के खिलाफ हो कठोर कार्रवाई

हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में 22 नवंबर, 2024 में परागपुर के बलाहर में राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान के छात्रों ने प्रदर्शन किया। छात्र एक प्रोफेसर द्वारा कथित तौर पर माथे पर तिलक लगाने और जय श्री राम का नारा लगाने से मना करने को लेकर नाराज थे।

छात्रों ने इससे पहले संस्थान निदेशक प्रोफेसर सत्यम कुमारी को एक शिकायत सौंपी थी। उन्होंने इस मामले की जाँच अनुशासन समिति से करने को कहा था। छात्रों के अनुसार, प्रोफेसर ने उन्हें तिलक लगाने और ‘जय श्री राम’ कहने से रोका है।

प्रोफेसर ने कहा है कि जय श्री राम बोलना राजनीतिक है। प्रोफेसर की हरकतों से छात्रों में असंतोष है। उन्होंने प्रोफेसर पर बदतमीजी और भेदभाव का भी आरोप लगाया है। इस मामले में हिन्दू संगठनों ने भी छात्रों का समर्थन किया है। हिन्दू संगठनों ने छात्रों के साथ मिलकर प्रदर्शन किया है।

विश्व हिंदू परिषद (VHP), बजरंग दल और ब्राह्मण सभा जैसे अन्य हिंदू समूहों ने संस्थान के मुख्य गेट पर विरोध प्रदर्शन किया है। उन्होंने जय श्री राम के नारे लगाए और भगवान राम के भजन भी गाए। उन्होंने मामले पर चर्चा करने के लिए प्रोफेसर कुमारी से भी मुलाकात की और प्रोफेसर के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग की है।

संस्कृत संस्थान की प्रोफेसर कुमारी ने कहा, “छात्रों की शिकायत हमें मिल गई है और अनुशासन समिति का गठन किया गया है। प्रोफेसर और छात्रों दोनों को समिति के सामने अपना बयान देने के लिए कहा गया है। प्रोफेसर को पहले ही नोटिस जारी किया जा चुका है।”

उन्होंने आश्वासन दिया कि मामले को जल्द ही सुलझा लिया जाएगा और स्थिति के लिए गलतफहमी को जिम्मेदार ठहराया। अनुशासन समिति की रिपोर्ट जल्द ही सामने आएगी। हिंदू जागरण मंच के नेता भी राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान के परिसर में पहुँचे और प्रदर्शनकारी छात्रों का समर्थन किया है।

विहिप कार्यकर्ताओं ने प्रोफेसर के व्यवहार की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि प्रोफेसर ने हिंदू भावनाओं को ठेस पहुंचाई है। विहिप के एक सदस्य ने कहा, “हम अपने धार्मिक अधिकारों का किसी भी तरह से दमन बर्दाश्त नहीं करेंगे।” इस बीच, छात्रों ने चेतावनी दी कि अगर एक्शन नहीं लिया गया तो वह विरोध प्रदर्शन जारी रखेंगे।