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छात्रों को तिलक लगाने और ‘जय श्रीराम’ ने रोका: हिमाचल प्रदेश के संस्कृत विश्वविद्यालय में हिंदू संगठनों का विरोध प्रदर्शन, कहा- प्रोफेसर के खिलाफ हो कठोर कार्रवाई

हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में 22 नवंबर, 2024 में परागपुर के बलाहर में राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान के छात्रों ने प्रदर्शन किया। छात्र एक प्रोफेसर द्वारा कथित तौर पर माथे पर तिलक लगाने और जय श्री राम का नारा लगाने से मना करने को लेकर नाराज थे।

छात्रों ने इससे पहले संस्थान निदेशक प्रोफेसर सत्यम कुमारी को एक शिकायत सौंपी थी। उन्होंने इस मामले की जाँच अनुशासन समिति से करने को कहा था। छात्रों के अनुसार, प्रोफेसर ने उन्हें तिलक लगाने और ‘जय श्री राम’ कहने से रोका है।

प्रोफेसर ने कहा है कि जय श्री राम बोलना राजनीतिक है। प्रोफेसर की हरकतों से छात्रों में असंतोष है। उन्होंने प्रोफेसर पर बदतमीजी और भेदभाव का भी आरोप लगाया है। इस मामले में हिन्दू संगठनों ने भी छात्रों का समर्थन किया है। हिन्दू संगठनों ने छात्रों के साथ मिलकर प्रदर्शन किया है।

विश्व हिंदू परिषद (VHP), बजरंग दल और ब्राह्मण सभा जैसे अन्य हिंदू समूहों ने संस्थान के मुख्य गेट पर विरोध प्रदर्शन किया है। उन्होंने जय श्री राम के नारे लगाए और भगवान राम के भजन भी गाए। उन्होंने मामले पर चर्चा करने के लिए प्रोफेसर कुमारी से भी मुलाकात की और प्रोफेसर के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग की है।

संस्कृत संस्थान की प्रोफेसर कुमारी ने कहा, “छात्रों की शिकायत हमें मिल गई है और अनुशासन समिति का गठन किया गया है। प्रोफेसर और छात्रों दोनों को समिति के सामने अपना बयान देने के लिए कहा गया है। प्रोफेसर को पहले ही नोटिस जारी किया जा चुका है।”

उन्होंने आश्वासन दिया कि मामले को जल्द ही सुलझा लिया जाएगा और स्थिति के लिए गलतफहमी को जिम्मेदार ठहराया। अनुशासन समिति की रिपोर्ट जल्द ही सामने आएगी। हिंदू जागरण मंच के नेता भी राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान के परिसर में पहुँचे और प्रदर्शनकारी छात्रों का समर्थन किया है।

विहिप कार्यकर्ताओं ने प्रोफेसर के व्यवहार की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि प्रोफेसर ने हिंदू भावनाओं को ठेस पहुंचाई है। विहिप के एक सदस्य ने कहा, “हम अपने धार्मिक अधिकारों का किसी भी तरह से दमन बर्दाश्त नहीं करेंगे।” इस बीच, छात्रों ने चेतावनी दी कि अगर एक्शन नहीं लिया गया तो वह विरोध प्रदर्शन जारी रखेंगे।

महाराष्ट्र चुनाव 2024 में महायुति की प्रचंड जीत से महाविकास आघाड़ी में हड़कंप: स्वरा भास्कर ने EVM पर सवाल उठाए, पूर्व CM चव्हाण ने कॉन्ग्रेस नेतृत्व को घेरा

महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में महायुति (बीजेपी, शिंदे गुट की शिवसेना और अजित पवार की एनसीपी) ने प्रचंड जीत दर्ज कर इतिहास रच दिया है। 288 सीटों वाली विधानसभा में महायुति ने 200 से अधिक सीटें जीती हैं। अकेले भाजपा ने 127 सीटों पर बढ़त बनाई है, जबकि शिंदे गुट की शिवसेना 55 और अजित पवार की एनसीपी 37 सीटों पर आगे है।

यह जीत न केवल महायुति के लिए ऐतिहासिक है, बल्कि विपक्ष के लिए करारी शिकस्त भी है। वहीं, हार से बौखलाए विपक्षी नेता ईवीएम, सरकार और पूंजीपतियों पर दोष मढ़ते नजर आ रहे हैं। संजय राउत ने तो इसे जनता पर ‘थोपा गया नतीजा’ तक बता दिया। यही नहीं, सपा से एनसीपी-शरद पवार में आए फवाद अहमद की एक्ट्रेस बीवी स्वरा भास्कर ने तो ईवीएम पर ही उंगली उठा दी और मशीन में खराबी का घिसा-पिटा राग अलापने लगी।

महाविकास आघाड़ी की हार के साथ ही सामने आई बौखलाहट

महायुति की प्रचंड जीत ने महाविकास आघाड़ी (एमवीए) को हिलाकर रख दिया है। आघाड़ी सिर्फ 55 सीटों तक सिमटती दिख रही है। हार से आहत एमवीए के नेता अब हार के लिए बाहरी कारणों को जिम्मेदार ठहराने लगे हैं। शिवसेना (उद्धव गुट) के सांसद संजय राउत ने नतीजों पर सवाल उठाते हुए कहा, “यह जनता का फैसला नहीं हो सकता। पूरी मशीनरी का दुरुपयोग हुआ है।” उन्होंने अडानी के नाम का जिक्र करते हुए भाजपा पर भ्रष्टाचार के मामलों से ध्यान भटकाने का आरोप भी लगाया।

राउत ने कहा, “शिंदे के सारे उम्मीदवार कैसे जीत सकते हैं? यह नतीजे जनता पर थोपे गए हैं।” उन्होंने लाडकी बहन योजना का मजाक उड़ाते हुए कहा, “यहाँ लाडले नाना, दादा और भाई हैं। असली जनता का मन ऐसा नहीं हो सकता।”

तहसीन पूनावाला ने संजय राउत को आड़े हाथ लिया

कॉन्ग्रेस समर्थक और राजनीतिक विश्लेषक तहसीन पूनावाला ने हार के लिए एमवीए और विशेष रूप से संजय राउत को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा, “राउत हार का ठीकरा ईवीएम और उद्योगपतियों पर फोड़ रहे हैं, जबकि असल में वह खुद एमवीए की छवि खराब करने के लिए जिम्मेदार हैं। उनकी बयानबाजी ने गठबंधन की छवि खराब की।”

स्वरा भास्कर ने ईवीएम पर उठाए सवाल

चुनाव के नतीजों के बीच अणुशक्ति नगर सीट पर स्वरा भास्कर के शौहर फहाद अहमद को हार मिली है। 19 में से 18 राउंड की गिनती पूरी होने पर वो 1500 वोटों से पिछड़ गए थे, जिसके बाद स्वरा ने ईवीएम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए सोशल मीडिया पर कहा, “पूरा दिन मतदान के बावजूद EVM मशीन 99% चार्ज कैसे हो सकती है? जैसे ही ये मशीनें खोली गईं, एनसीपी (बीजेपी समर्थित) को वोट मिलने लगे। चुनाव आयोग इस पर जवाब दे।”

कॉन्ग्रेस में कलह: पृथ्वीराज चव्हाण ने लीडरशिप पर उठा दिए सवाल

चुनावी नतीजों के बीच कॉन्ग्रेस में अंदरूनी कलह खुलकर सामने आ गई है। पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण, जो खुद दक्षिण कराड़ सीट से पीछे चल रहे हैं, ने कॉन्ग्रेस नेतृत्व को सीधे निशाने पर लिया। उन्होंने कहा, “हमारी लीडरशिप बेहद खराब रही। शायद यही हार का बड़ा कारण है।”

चव्हाण ने आरएसएस की रणनीति और भाजपा के अनुशासन की तारीफ करते हुए कहा, “आरएसएस की मदद से भाजपा ने अपना वर्चस्व स्थापित किया। इसके विपरीत, कॉन्ग्रेस में समन्वय और योजना का अभाव था।”

स्वरा का यह बयान भी विपक्ष के नेताओं की उस नाराजगी को दर्शाता है, जहाँ हार का ठीकरा तकनीक और प्रक्रिया पर फोड़ा जा रहा है।

महायुति की रणनीति: भाजपा की ताकत और सहयोगियों का साथ

इस जीत में भाजपा की रणनीति और सहयोगी दलों के तालमेल ने बड़ी भूमिका निभाई। भाजपा ने 148 सीटों पर चुनाव लड़ते हुए 127 पर बढ़त हासिल की, जो 85% की स्ट्राइक रेट है।

शिंदे गुट की शिवसेना ने भाजपा के साथ मिलकर मजबूत मोर्चा बनाया और मराठा क्षेत्रों में अपनी पकड़ मजबूत की। वहीं, अजित पवार की एनसीपी ने पश्चिमी महाराष्ट्र और शहरी क्षेत्रों में अपना प्रभाव बनाए रखा।

एमवीए की हार के प्रमुख कारण

संगठन में कमजोरी: एमवीए की तीनों पार्टियों (कॉन्ग्रेस, एनसीपी-शरद पवार और शिवसेना उद्धव गुट) के बीच तालमेल की कमी थी।

भाजपा की रणनीति: भाजपा ने विकास और सामाजिक योजनाओं, जैसे लाडकी बहन योजना, का कुशल प्रचार किया, जिससे उसे जनता का समर्थन मिला।

अंतर्कलह: कॉन्ग्रेस और एमवीए के अन्य दलों में आरोप-प्रत्यारोप ने जनता के बीच नकारात्मक संदेश भेजा।

महायुति की आक्रामक प्रचार नीति: महायुति ने चुनावी प्रचार में स्थानीय मुद्दों और विकास को प्रमुखता दी, जबकि विपक्ष इन मुद्दों पर कमजोर दिखा।
आगे का रास्ता

महायुति की इस ऐतिहासिक जीत ने महाराष्ट्र की राजनीति में नए समीकरण स्थापित कर दिए हैं। भाजपा इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की नीतियों की जीत बता रही है। दूसरी ओर, महाविकास आघाड़ी को अपनी कमजोरियों पर आत्ममंथन करना होगा। हार के कारणों का विश्लेषण और संगठन को पुनर्गठित करना एमवीए के लिए अनिवार्य है।

चुनाव परिणाम महाराष्ट्र में भाजपा के बढ़ते दबदबे और कॉन्ग्रेस की कमजोर होती पकड़ का स्पष्ट संकेत हैं। विपक्ष को अब संगठनात्मक सुधार पर ध्यान देना होगा, तो उसे जनता से जुड़े मुद्दों पर भी काम करने की जरूरत है, वरना महाराष्ट्र में भाजपा का वर्चस्व और मजबूत होगा।

दीनी तालीम ले रही नाबालिग छात्रा को दबोचा, अर्धनग्न करके रेप की कोशिश की: मदरसे के अय्याश मौलवी इरशाद को कुशीनगर पुलिस ने दबोचा

उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले में एक मदरसे के अंदर नाबालिग छात्रा से दुष्कर्म का प्रयास किया गया है। यह आरोप मदरसे में पढ़ाने वाले मौलवी इरशाद पर लगा है। दुष्कर्म में असफल रहने पर इरशाद ने 15 वर्षीया बच्ची को बेरहमी से पीटा। मौलवी को अय्याश बताते हुए बच्ची की माँ ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। शुक्रवार (22 नवंबर 2024) को पुलिस ने मौलवी इरशाद को गिरफ्तार कर लिया।

मामला कुशीनगर जिले के थाना क्षेत्र खड्डा का है। यहाँ बुधवार (20 नवंबर) को एक महिला ने पुलिस में दी गई शिकायत में बताया कि उसकी 15 वर्षीया बेटी बंजारी पट्टी स्थित मदरसे में कक्षा 6 में पढ़ती है। अहलेसुन्नत मिफ्ताहुल ओलुम नाम के इस मदरसे में कई छात्र-छात्राओं को दीनी तालीम दी जाती है। सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त इस मदरसे में उसी इलाके का रहने वाला मौलवी इरशाद बच्चों को पढ़ाता है।

महिला ने बताया कि मंगलवार (19 नवंबर) की दोपहर 12 बजे उसकी बेटी मदरसे के कार्यालय में ग्लास रखने गई थी। तभी इरशाद ने गंदी नीयत से उसे दबोच लिया और पीड़िता को अर्धनग्न करके रेप का प्रयास करने लगा। पीड़िता शोर मचाने लगी। इस पर मौलवी भड़क गया। उसने पीड़िता को बेरहमी से पीट कर चुप करवा दिया। साथ ही घटना के बारे में किसी को भी बताने पर कत्ल की धमकी दी।

जैसे-तैसे लड़की अपने घर पहुँची और परिजनों को सारी बात बताई। मौलवी इरशाद को अय्याश बताते हुए पीड़िता की माँ ने कड़ी कार्रवाई की माँग की है। पुलिस ने इस शिकायत का संज्ञान लेकर FIR दर्ज कर ली है। यह FIR भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 75 और 115 (2) के साथ पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज हुई है। ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है।

नौकरी के नाम पर हिंदू लड़की को नेपाल से लाया, रेप के बाद भाइयों को सौंपा: पुलिस ने जबरन मुस्लिम बनाने के आरोपित अमजद को दबोचा, अम्मी-भाई की तलाश

उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले में नेपाल की हिन्दू लड़की से रेप और फिर उसका धर्मान्तरण का कराने के आरोपित अमजद को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। अमजद पर 9 सितंबर 2024 को FIR दर्ज हुई थी। इस FIR में उसकी अम्मी और भाई सहित कुल 5 आरोपित नामजद हैं। फरार चल रहे अन्य आरोपितों की तलाश जारी है। केस दर्ज होने के बाद से अमजद भी फरार चल रहा था।

घटना पीलीभीत जिले के थाना क्षेत्र पूरनपुर कोतवाली की है। कोतवाली प्रभारी नरेश त्यागी ने बताया कि फरार चल रहे अमजद की तलाश में जुटी पुलिस को 21 नवंबर को उसकी लोकेशन की जानकारी मिली। इसके दबिश देकर उसे गिरफ्तार कर लिया गया। इस केस में अमजद की अम्मी कैसर जहाँ, मामा, भाई चंगेज और रंगीला भी नामजद हैं। ये सभी फरार हैं।

क्या था पूरा मामला

नेपाल के धनघड़ी की रहने वाली एक हिन्दू महिला ने 9 सितंबर 2024 को पीलीभीत के पूरनपुर कोतवाली में शिकायत दर्ज करवाई थी। शिकायत में पीड़िता ने बताया था कि साल 2013 में वह नेपाल के धनघड़ी में जॉब करती थी। पीलीभीत का टैक्सी ड्राइवर अमजद अक्सर वहाँ आता-जाता था। उसने खुद को अजय बताकर उसे दोस्ती की और दिल्ली में नौकरी दिलाने का झाँसा दिया।

अजय बने अमजद ने नौकरी दिलाने के नाम पर पीड़िता को भारत बुलवाया और पीलीभीत के कलीमनगर में अपने जीजा वाहिद खान के यहाँ रखा। यहाँ पर पीड़िता से न सिर्फ तमंचे की नोक पर रेप किया, बल्कि उस धर्मांतरण के बाद मुस्लिम बनकर उससे निकाह करने का भी दबाव बनाया गया। इसमें अमजद के परिजनों ने भी साथ दिया। इस दौरान पीड़िता का पीलीभीत में अलग-अलग जगहों पर रखा जाता था।

धर्मांतरण के लिए जब पीड़िता तैयार नहीं हुई तो अमजद ने उसे कहा कि वह या तो मुस्लिम बने या फिर वह उसकी हत्या कर देगा। उसने पीड़िता को इस्लाम और मौत में से एक चुनने का विकल्प दिया। जान बचाने के लिए पीड़िता ने इस्लाम कबूल कर लिया। यह धर्मान्तरण बरेली में हुआ था। धर्मांतरण के बाद पीड़िता का नाम मेहरुन्निशा कर दिया गया। उस पर गोमांस खाने का भी दबाव बनाया गया।

धर्मांतरण के बाद अमजद ने पीड़िता का निकाह अपने भाई एवं 4 बच्चों के तलाकशुदा अब्बा फ़िरोज़ से करवा दिया। जब पीड़िता ने विरोध किया तो अमजद के भाई फ़िरोज़ और रंगीला उसे बेरहमी से मारा। इनका एक अन्य भाई चंगेज भी पीड़िता से कई बार दुष्कर्म कर चुका है। पीड़िता ने यह भी बताया कि चंगेज घर में कई सिख और हिन्दू लड़कियों को भी लाया करता था।

इनके घर कई मौलाना भी गिफ्ट लेकर आते थे। साल 2022 में पीड़िता पर तलवार से भी हमला किया गया। आखिरकार पीड़िता ने तंग आकर इनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने इस मामले में पुलिस से कड़ी कार्रवाई की माँग की थी। तब सभी आरोपितों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 64, 352, 351 (3), 115 (2), और 76 के तहत कार्रवाई की गई थी।

शेख हसीना के तख्ता पलट के बाद बांग्लादेश का इस्लामीकरण: सरकार बनाएगी मदीना की तरह मस्जिद, इस्लाम और पैगंबर मुहम्मद की निंदा पर सजा-ए-मौत की सिफारिश

बांग्लादेश में प्रधानमंत्री शेख हसीना के सत्तापलट के बाद देश का इस्लामीकरण तेज हो गया है। इस इस्लामीकरण में अब युनुस सरकार के साथ ही देश की न्यायपालिका भी शामिल हो गई है। बांग्लादेश के हाई कोर्ट ने इस्लाम या पैगंबर की निंदा पर मौत की सजा लागू करने कि सिफारिश की है। वहीं युनुस सरकार में शामिल एक मौलाना ने कहा है कि वह देश में एक मस्जिद को सऊदी अरब की मस्जिद की तरह विकसित करने जा रहे है।

बांग्लादेश हाई कोर्ट दे रहा मौत की सजा की सिफारिश

बांग्लादेश हाई कोर्ट के जस्टिस एम.आर. हसन और जस्टिस फहमीदा कादर की बेंच ने कहा, “कुरान और पैगंबर मुहम्मद के खिलाफ इस तरह के गैर-जरूरी, बेशर्म, अड़ियल, भड़काऊ भाषण और आचरण के लिए मृत्युदंड या आजीवन कारावास जैसी सजा का प्रावधान होना चाहिए, इस पर संसद को विचार करना चाहिए।”

हाई कोर्ट ने आगे कहा, “किसी भी ऐसे भड़काऊ भाषण या ऐसे कामों को खत्म करने के लिए, जो किसी भी मजहब के लोगों को ठेस पहुँचा सकता है, या फिर उनमें से डर, आतंक, परेशानी या आशंका पैदा करता है, इनके लिए सजा बढ़ाने और गैर जमानती बनाने पर विचार किया जाना चाहिए।”

जहाँ कोर्ट अपने बयान में एक तरह कह रहा है कि पैगंबर मुहम्मद और कुरान के खिलाफ बयानों पर मौत की सजा होनी चाहिए, वहीं दूसरी तरफ उसने अपने इस्लामी कट्टरपंथ को सहारा देने के एजेंडे को सेक्युलर रंग देने के लिए बाद में ‘किसी भी मजहब’ का जुमला जोड़ दिया। यह पूरी दुनिया को पता है कि किस मजहब के लोग ईशनिंदा को लेकर सड़कों पर उतरते हैं।

बांग्लादेश का इस मामले में रिकॉर्ड भी कुछ ख़ास नहीं है। हाल ही में एक हिन्दू युवक को इस्लामी कट्टरपंथियों की भीड़ ने बीच सड़क पर मार मार कर अधमरा कर दिया था। उस पर भी ईशनिंदा का आरोप लगाया गया था। उसे बाद में अस्पताल में भर्ती करवाया गया था।

यह कोई अकेली घटना नहीं है। इसके अलावा भी बांग्लादेश में कई बार हिन्दुओं को बांग्लादेश में निशाना बनाया जा चुका है। बांग्लादेश हाई कोर्ट की नई सिफारिश पर यदि युनुस सरकार कानून बनाती है, तो इसका असर सबसे अधिक हिन्दुओं पर ही पड़ेगा।

ऐसा इसलिए नहीं होगा क्योंकि बांग्लादेश में हिन्दू ईशनिंदा करते हैं। बल्कि इसलिए होगा क्योंकि बांग्लादेश में अब सत्ता इस्लामी कट्टरपंथियों के हाथ में है। बांग्लादेश के भीतर अब किसी भी हिन्दू को निशाना बनाने के लिए ईशनिंदा एक टूलकिट के तौर पर उपयोग होने लगा है। एक बार आरोप लग जाने के बाद, चाहे वह झूठा हो या सच्चा, भीड़ किसी की नहीं सुनती।

युनुस सरकार ने मस्जिद बनाने का किया ऐलान

मोहम्मद युनुस की सरकार में शामिल AFM खालिद हुसैन ने चटगाँव में एक मस्जिद को सऊदी अरब की मदीना मस्जिद की तरह विकसित करने का ऐलान किया है। AFM खालिद हुसैन ने कहा, “अंदरकिला शाही जामे मस्जिद मुगल वास्तुकला का एक अनूठा उदाहरण है। इसे स्थानीय मुस्लिम समुदाय की आकांक्षाओं के अनुरूप एक शानदार मस्जिद के रूप में विकसित किया जाएगा।” युनुस सरकार इस पर ₹10 करोड़ का खर्च करेगी। इसके बाद जरूरी होगा तो और भी पैसा लगाया जाएगा।

‘अल्लाह की मेहरबानी से जन्नत मिलेगी’: नौकरी का लालच और जहन्नुम का डर दिखाकर शाकिर ने हिन्दू लड़की को कबूल करवाया इस्लाम, गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद का शाकिर ने फर्जी नाम और पहचान से एक हिन्दू लड़की को अपने प्यार के जाल में फँसाया और फिर उसका दुष्कर्म किया। आरोपित ने दबाव डालकर 20 वर्षीया पीड़िता को इस्लाम भी कबूल करवा दिया। लड़की को इस्लाम छोड़ने पर नरक जाने और फिर पूरे परिवार को कत्ल करने की भी धमकी दी। गुरुवार (21 नवंबर 2024) को पुलिस ने FIR दर्ज कर शाकिर को गिरफ्तार कर लिया।

घटना मुरादाबाद के कटघर थाना क्षेत्र की है। यहाँ रहने वाली एक महिला ने 21 नवंबर को दी गई अपनी शिकायत में बताया कि उसकी बेटी को बिजनौर के शाकिर ने हनी नाम बताकर संपर्क किया। इसके बाद नौकरी दिलाने का झाँसा देकर अपने प्रेम जाल में फँसा लिया। हनी बने शाकिर ने अपना पता बिजनौर जिला बताया था, जबकि वह मूलतः रामपुर का निवासी है। उसने हनी नाम से फर्जी आधार कार्ड भी बनवा रखा था।

यही आधार कार्ड पीड़िता और उसकी माँ को भी दिखाया गया था। थोड़े समय बाद शाकिर ने हिन्दू लड़की से निकाह कर दिया। उसे अल्लाह की मेहरबानी से जन्नती सुकून मिलने जैसी बातें करके आरोपित अपने साथ ले गया। वह लड़की के साथ कटघर इलाके में ही किराए के एक मकान में रहने लगा। यहाँ उसने पीड़िता से कई बार रेप किया। 20 नवंबर को पीड़िता शाम को अपनी माँ के पास आई।

यहाँ पता चला कि लड़की को कलमा पढ़वा दिया गया है। लड़की ने यह भी बताया कि अगर उसने इस्लाम छोड़ा तो शाकिर न सिर्फ उसको नौकरी से निकाल देगा, बल्कि तलाक भी दे देगा। इस दौरान लड़की ने अपनी माँ से कहा, “मैं हिन्दुओं के बीच रहकर नरक नहीं जाऊँगी। आप काफिर हो। आप भी धर्मान्तरण कर लो वरना जहन्नुम (नरक) में जाओगी।”

अपनी बेटी के मुँह से ऐसी बातें सुनकर माँ हैरान रह गई। वह बेटी के साथ शाकिर के पास उलाहना लेकर गई। तब शाकिर ने कहा, “तुम हिन्दुओं को कितना भी समझा लो, तुम्हें समझ नहीं आएगा।” आरोपित ने महिला को धमकी दी कि अगर वो अपनी बेटी को को साथ ले गई तो पूरे परिवार का कत्लेआम कर दिया जाएगा। पीड़िता ने अपनी शिकायत में शाकिर के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की है।

पुलिस ने शिकायत का संज्ञान लेकर 21 नवंबर को शाकिर के खिलाफ नामजद FIR दर्ज कर ली। यह FIR भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 319 (2), 318 (4), 336 (3) और 351 (3) के साथ उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म सम्परिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम 2021 के सेक्शन 3/5(1) के तहत दर्ज की गई है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है।

इस मामले की जानकारी मिलते ही मुरादाबाद के हिन्दू संगठनों ने हंगामा शुरू कर दिया। वो आरोपित के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग पर अड़ गए। वायरल हो रहे एक वीडियो में हिन्दू संगठन के सदस्यों से घिरे शाकिर को लड़की के साथ देखा जा सकता है। लड़की ने काला लिबास पहन रखा है। पुलिस ने शाकिर को गिरफ्तार कर लिया है। उसके पास से 2 आधार कार्ड भी बरामद हुए हैं।

शहवाज ने इंस्टाग्राम पर 2 नाबालिग हिंदू बहनों को फँसाया, फिर ब्लैकमेल कर शुरू कर दी उगाही: परेशान लड़कियों ने दी जान, आरोपित UP से गिरफ्तार

उदयपुर के गोगुंदा में एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहाँ 19 वर्षीय शहवाज ने इंस्टाग्राम के जरिए दो नाबालिग चचेरी बहनों को अपने जाल में फंसा लिया। शहवाज ने सोशल मीडिया पर दोस्ती कर उन्हें ब्लैकमेल करना शुरू किया। उसने बहाने बनाकर करीब ₹12,000 ऐंठे और और भी पैसे माँग रहा था। तनाव से तंग आकर दोनों बहनों ने जहर खाकर अपनी जान दे दी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शहवाज ने दोनों बहनों से इंस्टाग्राम पर दोस्ती की और धीरे-धीरे उनकी भावनाओं के साथ खेला। वह कभी मोबाइल खराब होने का बहाना बनाता तो कभी अन्य कारण से पैसे माँगता। इसके बाद, फोन पर बात करने और मिलने का दबाव डालता था। जब लड़कियाँ उसकी माँगें पूरी करने में असमर्थ रहीं, तो उसने उन्हें ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया।

दोनों बहनें पिछले कुछ समय से तनाव में थीं। उन्होंने अपनी परेशानी परिवार को भी नहीं बताई। घटना वाले दिन दोनों के शव घर से थोड़ी दूरी पर मिले। उनके गले में काला-सफेद धागा बंधा हुआ था, जिससे परिवार ने इसे हत्या की ओर भी इशारा किया।

शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने छानबीन शुरू की और शहवाज को उत्तर प्रदेश के हापुड़ से गिरफ्तार किया। जाँच में पता चला कि वह दोनों लड़कियों को आत्महत्या के लिए उकसा रहा था। पुलिस ने उसके सोशल मीडिया अकाउंट खंगाले तो ब्लैकमेलिंग और पैसे ऐंठने की पुष्टि हुई।

इस मामले में लव जिहाद की भी आशंका जताई जा रही है, क्योंकि शहवाज का मकसद लड़कियों को फंसाकर उनका शोषण करना था। पुलिस इस एंगल से भी जाँच कर रही है। पुलिस अब मामले की गहराई से जांच कर रही है और इस तरह के सोशल मीडिया अपराधों पर सख्त कार्रवाई की तैयारी कर रही है।

गोगुंदा में सितंबर में भी हुआ था बवाल, नाबालिग को भगा ले गया था मुस्लिम

बता दें कि उदयपुर के गोगुंदा में सितंबर 2024 की शुरुआत में भी लव जिहाद का मामला सामने आया था, जहाँ एक मुस्लिम युवक नाबालिग हिंदू लड़की को अपनी जाल में फंसाकर भगा ले गया था। उस मामले में काफी तनाव पैदा हो गया था और स्थानीय लोगों ने बाजार बंद कर प्रदर्शन भी किया था। 2 बहनों के मामले में पुराने विवाद का भी साया हो सकता है, क्योंकि लव जिहाद के मामले में 2 माह पहले हुआ बवाल उनके मन में घूम रहा होगा।

संभल में मस्जिद का हुआ सर्वे तो जुमे पर उमड़ आई मुस्लिम भीड़, 4 गुना पहुँचे नमाजी: सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम, ड्रोन निगरानी

उत्तर प्रदेश के संभल में विवादित जामा मस्जिद में जुमे की नमाज पर भारी भीड़ उमड़ी। इस मस्जिद में इतने मुस्लिम आए कि अंदर जगह तक नहीं बची। लोगों ने बताया कि हिन्दुओं के दावे के बाद कई गुना नमाजी यहाँ आए। प्रशासन ने भारी पुलिस बल लगाकर भीड़ को नियंत्रित किया। इस मस्जिद पर हिन्दुओं ने कहा है कि यह हरि हर मंदिर को तोड़कर बनाई गई है।

यह भीड़ शुक्रवार (22 नवम्बर, 2024) को उमड़ी। इसी मस्जिद में नमाज पढ़ने वाले एक वकील ने मीडिया से बताया कि सामान्यतः यहाँ 500-600 लोग जुमे की नमाज पढ़ने आते थे लेकिन मुकदमे और सर्वे के बाद जुमे को यहाँ 4000 से अधिक लोग पहुचे। इनमें से 2000 मस्जिद में अंदर गए जबकि बाकी को रोकना पड़ा।

संभल की विवादित जामा मस्जिद में बढ़ी भीड़ के पीछे सोशल मीडिया पर फैलाया गया मैसेज कारण बताया गया। कहा गया कि सोशल मीडिया पर पोस्ट करके मुस्लिमों से बड़ी संख्या में जुमे को जामा मस्जिद पहुँचने को कहा गया था।

संभल में जामा मस्जिद में बढ़ी नमाजियों की संख्या के कारण आम जनजीवन प्रभावित हो गया। कई स्कूलों में जल्दी छुट्टी हुई तो वहीं कई दुकानें भी बंद रहीं। अनहोनी की आशंका के चलते प्रशासन ने मस्जिद की तरफ जाने वाले रास्तों पर बैरिकेड लगा दिए थे।

प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया था कि मस्जिद में वही लोग जाएँगे जो स्थानीय हैं। जामा मस्जिद में बढ़ी भीड़ के चलते कमिटी को खुद ऐलान करना पड़ा कि लोग अंदर ना आएँ। मस्जिद कमिटी ने बढ़ी संख्या से परेशान होकर कहा कि नमाजी दूसरी मस्जिद में जाएँ।

गौरतलब है कि 19 नवम्बर, 2024 को कोर्ट के आदेश पर संभल की मस्जिद में सर्वे किया गया था। यह आदेश हिन्दू पक्षकारों की याचिका पर दिया गया था। हिन्दू पक्षकारों ने इस मस्जिद को लेकर एक मुकदमा दायर किया है। हिन्दू पक्ष का कहना है कि जहाँ आज मस्जिद है, वहाँ कभी भगवान विष्णु को समर्पित एक मंदिर हुआ करता था।

हिन्दुओं ने कहा है कि बाबर के शासनकाल में यहाँ मंदिर को उसके एक कमांडर ने तोड़ दिया था। इसके बाद यहाँ मस्जिद बनाई गई। हिन्दू पक्ष ने इस बात को साबित करने के लिए बाबरनामा, आइन-ए-अकबरी और अंग्रेज अफसर कनिंघम के रिकॉर्ड रखे हैं।

बांग्लादेश में हिंदुओं पर फिर हमला, कई घायल, खून से लथपथ: प्रदर्शन करने जा रहे अल्पसंख्यकों पर टूट पड़ी इस्लामी कट्टरपंथी भीड़, देखती रही पुलिस-सेना

बांग्लादेश के रंगपुर डिवीजन में एक प्रदर्शन रैली में शामिल होने जा रहे हिंदुओं पर इस्लामी कट्टरपंथियों की भीड़ ने हमला कर दिया। ये हमले शुक्रवार (22 नवंबर 2024) को हुए, जब महिगंज कॉलेज ग्राउंड की ओर जा रहे हिंदू जा रहे थे। कट्टरपंथियों की भीड़ ने हिंदुओं को बसों में यात्रा करने और प्रदर्शन स्थल तक पहुँचने से रोका। हमले में कई हिंदू घायल हो गए, लेकिन डराने-धमकाने के बावजूद, बड़ी संख्या में हिंदू प्रदर्शन में शामिल हुए।

पीड़ित हिंदू ‘बांग्लादेश सम्मिलित सनातनी जागरण जोट’ द्वारा आयोजित एक प्रदर्शन रैली में शामिल होना चाहते थे। यह रैली मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार से अल्पसंख्यकों के अधिकारों और संरक्षण के लिए 8 माँगों को लागू करने की अपील को लेकर आयोजित की गई थी।

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, बांग्लादेश इस्लामी छात्र शिबिर से जुड़े कट्टरपंथियों ने हिंदुओं पर हमला किया, जिससे कई लोग घायल हो गए और खून से लथपथ हो गए।

सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में दिख रहा है कि हिंदुओं को बसों से यात्रा करने और प्रदर्शन स्थल तक पहुँचने से रोका गया।

सूत्रों के अनुसार, कई बसों पर हमला किया गया। इस दौरान पुलिस और सेना के अधिकारियों ने इस उग्र इस्लामी कट्टरपंथियों की भीड़ के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की।

हालाँकि, डराने-धमकाने के इन प्रयासों के बावजूद, हिंदू प्रदर्शन में शामिल हुए और अपनी 8 माँगों को लागू करने की अपील की। ये माँगे थीं:

  • अल्पसंख्यकों पर अत्याचार के मामलों का तेजी से निपटारा और पीड़ितों को उचित मुआवजा और पुनर्वास।
  • अल्पसंख्यक संरक्षण अधिनियम का निर्माण।
  • अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय का गठन।
  • हिंदू वेलफेयर ट्रस्ट को हिंदू फाउंडेशन में अपग्रेड करना।
  • प्रॉपर्टी रिकवरी एंड प्रिजर्वेशन एक्ट और ट्रांसफर ऑफ एंट्रस्टेड प्रॉपर्टी एक्ट का सही तरीके से लागू करना।
  • हर शैक्षणिक संस्थान में अल्पसंख्यकों के पूजा स्थलों का निर्माण और हर हॉस्टल में प्रार्थना कक्ष का आवंटन।
  • संस्कृत और पाली शिक्षा बोर्ड का आधुनिकीकरण।
  • दुर्गा पूजा पर 5 दिनों की अनिवार्य छुट्टी।

मुस्लिम लड़की और हिन्दू लड़के ने की मंदिर में शादी, अब्बू ने ‘दामाद’ पर ही करवा दी रेप की FIR: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने दी जमानत, कहा- बाहर जाकर करो नियम-कानून से विवाह

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक हिन्दू युवक को मुस्लिम लड़की से शादी करने के आधार पर जमानत दे दी। कोर्ट ने आदेश दिया कि हिन्दू युवक जेल से छूट कर मुस्लिम लड़की से स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत कोर्ट में शादी करेगा। हिन्दू युवक पर उसकी मुस्लिम प्रेमिका के अब्बू ने रेप और अपहरण के मामले में FIR दर्ज करवा दी थी। इस चक्कर में हिन्दू युवक को जेल जाना पड़ा था।

इलाहाबाद हाई कोर्ट में जस्टिस राजेश सिंह चौहान ने 14 नवम्बर, 2024 को दिए गए आदेश में कहा, “ऐसा लगता है कि लड़की के जीवन की सुरक्षा के लिए युवक उससे विशेष विवाह अधिनियम के तहत विवाह कर सकता है, जिसके लिए उसे चार महीने की अवधि के लिए अंतरिम जमानत दी जा सकती है।”

क्या था मामला?

यह मामला उत्तर प्रदेश के अम्बेडकर नगर से जुड़ा हुआ है। यहाँ के एक हिन्दू युवक ने एक मुस्लिम लड़की के साथ मंदिर में शादी की थी। इसके लिए मुस्लिम लड़की ने अपना घर छोड़ दिया था। हालाँकि, दोनों के धर्म अलग होने की वजह से मुस्लिम लड़की के घरवालों को यह पसंद नहीं आया।

लड़की के अब्बू ने अपनी बेटी के प्रेमी के खिलाफ इसके बाद अम्बेडकर नगर की टांडा कोतवाली में एक FIR दर्ज करवा दी। इस FIR में आरोप लगाया गया कि उनकी बेटी का हिन्दू युवक ने अपहरण किया है। इसके अलावा हिन्दू युवक पर रेप का आरोप लगाया गया। लड़की के अब्बू ने दावा किया कि उनकी बेटी नाबालिग थी, इसलिए हिन्दू युवक पर POCSO की धाराएँ भी लगी।

इसके बाद जुलाई, 2024 में युवक को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया गया। वहीं मुस्लिम लड़की ने अपने घर नहीं गई और वह लखनऊ के एक अनाथालय में रहने लगी। इसके बाद हिन्दू युवक ने इलाहाबाद हाई कोर्ट ने इस संबंध में अंतरिम जमानत के लिए याचिका लगाई।

हिन्दू युवक ने याचिका में कहा कि वह अपनी पत्नी के साथ रहना चाहता है लेकिन उसके घर वाले उसे नहीं रहने दे रहे। लड़की ने भी यही बात कही। इस मामले की सुनवाई के दौरान मुस्लिम लड़की ने कहा कि उसके हिन्दू पति के विरुद्ध लगाए गए सभी आरोप झूठे और निराधार हैं।

मुस्लिम लड़की ने कोर्ट को बताया कि उसने हिन्दू युवक के साथ मंदिर में शादी की थी और अब आगे उसी के साथ रहना चाहती है। मुस्लिम लड़की ने बताया कि उसके हिन्दू युवक के साथ शादी करने के कारण दकियानूसी मुस्लिम परिजन उससे गुस्सा हैं और उन्होंने इस शादी को मंजूर नहीं किया है।

लड़की ने बताया कि उसकी उम्र 18 साल है लेकिन उसके पास इस बात को सिद्ध करने के लिए कोई कागज नहीं है। कोर्ट ने इस मामले में मेडिकल जाँच करवाई जिसमें लड़की को लगभग 16-17 साल का बताया गया। हालाँकि, लड़की ने इस बात पर जोर दिया कि वह 18 साल की है।

कोर्ट ने क्या फैसला दिया?

लड़की की दलीलों को सुनने के बाद हाई कोर्ट ने कहा, “दोनों पक्ष सुनने के बाद, लगता है कि भविष्य में लड़की के जीवन की रक्षा के लिए युवक उससे विशेष विवाह अधिनियम के तहत विवाह कर सकता है, जिसके लिए उसे चार माह की अवधि के लिए अंतरिम जमानत दी जा सकती है।”

हाई कोर्ट ने आदेश दिया कि आरोपित को 4 महीने के लिए छोड़ दिया जाए और वह जेल से बाहर निकल कर पहले लड़की को अनाथालय से अपने पास लाए और फिर उससे विशेष विवाह अधिनियम के तहत विवाह करे। हाई कोर्ट ने युवक को ₹20,000 के दो मुचलके पर जमानत दी है।

कोर्ट ने कहा कि अगली सुनवाई पर दोनों पति-पत्नी शादी के सबूत के साथ कोर्ट में आएँ। कोर्ट ने इसी के साथ हिन्दू युवक को हिदायत दी कि वह जमानत का गलत फायदा ना उठाए। इस सुनवाई में मुस्लिम लड़की के अब्बू ने कहा कि अब उन्होंने अपनी बेटी से सारे रिश्ते तोड़ लिए हैं।