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राम के अयोध्या में जन्म की बात पर जज ने पूछा- किसी कोर्ट में जीसस के जन्म पर बात हुई है?

सुप्रीम कोर्ट में राम मंदिर मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने वादियों में से एक के वकील से पूछा कि क्या दुनिया में कभी किसी अदालत को जीसस बेथलेहम में ही पैदा हुए थे या नहीं, राम अयोध्या में पैदा हुए थे या नहीं जैसे सवालों का सामना करना पड़ा है। वादी गोपाल विशारद की ओर से पेश वकील के परासरण ने सुप्रीम कोर्ट के जज एसए बोबडे के इस सवाल का तुरंत जवाब दे पाने में असमर्थता जताई। उन्होंने अदालत से कहा कि उन्हें तुरंत तो इस मामले की कोई जानकारी नहीं है, उन्हें देखना पड़ेगा।

रामायण के ज़िक्र से निकला सवाल

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार यह सवाल परासरण द्वारा रामायण को उद्धृत किए जाने पर आया था। परासरण ने अपनी बहस के दौरान एक बिंदु यह भी रखा था कि रामायण में कम-से-कम तीन बार यह ज़िक्र है कि भगवान श्री राम अयोध्या में पैदा हुए थे। इसपर जस्टिस बोबडे ने पूछा कि क्या जीसस क्राइस्ट बेथलेहम में पैदा हुए थे, ऐसा या इससे मिलता-जुलता कोई सवाल कभी कोर्ट में आया है क्या। तो परासरण ने कहा कि उन्हें जानकारी नहीं है, वह इसे देखेंगे

मालूम हो कि अयोध्या विवाद में मध्यस्थता असफल रहने के बाद शीर्ष अदालत ने 6 अगस्त से रोज़ाना सुनवाई कर मामले का निपटारा करने का निर्णय लिया था। इसके पहले 2010 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने तीनों पक्षों को विवादित भूमि का एक-एक तिहाई दिया था। फैसले से नाखुश तीनों पक्षों ने सुप्रीम कोर्ट में इसके इसके विरुद्ध याचिका दायर की थी।

पहले नान-टिमाटर के भाव ठीक कर लो, जिहाद तो हमें पता है कयामत तक करोगे

अनुच्छेद-370 (Article 370) पर भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है, कम से कम पाकिस्तानी सेना को तो यही लगता है। आजकल अनुच्छेद-370 को खत्म करने के भारत के फैसले से पाकिस्तान से सबसे ज्यादा प्रतिक्रियाएँ आ रही हैं। ये वही पाकिस्तान है जो कुछ दिन पहले नान-रोटी के लिए उच्चस्तरीय बैठकें बुलवा रहा था।

इस मुद्दे पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान इस बीच राष्ट्रीय सुरक्षा समिति की एक और बैठक की अध्यक्षता की है। अब भारत के आर्टिकल 370 पर लिए गए फैसले से बौखलाए पाकिस्तान ने कहा है कि वह भारत के इस कदम का मुकाबला करने के लिए सभी संभावित विकल्पों का इस्तेमाल करेगा।

इस विकल्प के बारे में इमरान खान सरकार में मंत्री फवाद चौधरी भारत को युद्ध की धमकी दी है। फवाद चौधरी ने कहा है कि अब भारत को खून और आँसू से जवाब देना होगा। वहीं, पाकिस्तान आर्मी प्रवक्ता ने कल शाम एक ट्वीट किया है, जिसमें वो कश्मीर को किसी भी तरीके से वापस लेने की बात करते हुए नजर आ रहे हैं। हालाँकि, गफूर द्वारा अभी यह स्पष्टीकरण देना बाकी है कि उन्होंने ये ट्वीट भाँग के नशे में किया था या घोड़े की लीद फूँक कर…

सबसे मजेदार बात इस सबके बीच ये है कि भारत के खिलाफ युद्ध की पूरी तैयारियाँ होने की बात वो देश कर रहा है जो अंतरराष्ट्रीय कर्ज के चलते अपनी जनता को दो जून की नान-रोटी और टिंडे-टिमाटर उपलब्ध करा पाने तक की गेरेंटी नहीं दे पा रहा है। जिस पाकिस्तान से उनकी जनता रोटियाँ और सस्ते टिमाटर माँग रही है वो कश्मीर के नागरिकों को उनका अधिकार दिलाने की खुली घोषणा कर रहे हैं।

पाकिस्तान की धमकियों के बीच अगर पाकिस्तान का वर्तमान में कोई खुलकर समर्थन कर सकता है तो वो भारत में ही बैठे अनुच्छेद 370 से दुखी प्रदर्शनकारी हैं। हालाँकि, इस सबसे अलग कुछ लोगों का तो यह भी मत है कि पाकिस्तान को वाकई में जल्द से जल्द भारत पर हमला करने पर गंभीरता से विचार कर ही लेना चाहिए, ताकि इस बार का स्वतन्त्रता दिवस पर तिरंगा इस्लामाबाद में फहराया जा सके।

पाकिस्तान को यह जरूर ध्यान रखना चाहिए कि जिन ‘गणनाओं’ के भरोसे वह युद्ध जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर रहा है, वो बीते समय की बात हो चुकी है। कश्मीर और POK पर भारत के रुख का समर्थन दुनिया का हर बड़ा देश इस समय कर रहा है। इस समय पाकिस्तान को सिर्फ अपनी ‘रोटी-नान’ से हटकर शायद ही किसी विषय पर ध्यान देना चाहिए।

भारत इन ‘पाक कलाकारों’ को कितनी ही ऊँचाई पर क्यों न पहुँचा दे, लेकिन ये रहेंगे पाकिस्तानी ही!

पुलवामा हमले पर चुप्पी साध लेने वाले पाकिस्तानी कलाकार जिस तरह IAF द्वारा बालाकोट पर की गई कार्रवाई के बाद सोशल मीडिया पर भारत को नैतिकता का पाठ पढ़ाने लगे थे, ठीक उसी तरह वह जम्मू-कश्मीर पर फैसला आने के बाद सक्रिय हुए हैं। इस सूची में आतिफ असलम, वीना मलिक, माहिरा खान जैसे कलाकारों के नाम शामिल हैं।

ये वह लोग हैं जिन्होंने नाम और शोहरत भारत से कमाई लेकिन जब बात अपने मुल्क की आई तो कर्मभूमि पर शब्दों से हमला करने से ये नहीं चूँके।

आतिफ असलम

आतिफ असलम आज पाकिस्तानी गायकों में से वो नाम है जिन्हें भारत में शोहरत मिली और पाकिस्तान समेत पूरे विश्व ने उन्हें उनके फन के कारण सराहा। लेकिन जब बात कश्मीर की आई तो उनसे निष्पक्ष नहीं रहा गया। आतिफ ने अपने हज जाने की खुशी को सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए लिखा, “कुछ बड़ा आप लोगों के साथ शेयर करते हुए खुशी हो रही है। इंशाअल्लाह, मैं जल्द ही अपनी जिंदगी के सबसे जरूरी सफर पर निकलने वाला हूँ। हज पर जाने से पहले मैं सभी से माफी माँगता हूँ, चाहे वह मेरे फैन्स हों, परिवार हो या दोस्त हों। अगर मैंने किसी की भावनाओं को ठेस पहुँचाई है तो माफ कर दें। कृपया दुआओं में मुझे याद रखें।”

आतिफ असलम के पोस्ट का स्क्रीनशॉठ

यहाँ तक बात ठीक थी लेकिन आगे आतिफ अपने पोस्ट में लिखते हैं, “इसके साथ ही मैं कश्मीरियों के साथ हो रही हिंसा और उत्पीड़न की भी निंदा करता हूँ। अल्लाह कश्मीर और पूरी दुनिया के मासूमों की रक्षा करे।”

जिसपर सोचने वाली बात है कि उन्होंने अपनी खुशी को जाहिर करते हुए ट्वीट में कश्मीर में हो रही कौन सी हिंसा की बात की है? उन्होंने अपने ट्वीट में कैसे उत्पीड़न का जिक्र किया है? अगर उन्होंने अपनी ये दुआ 370 के पावर के खत्म होने के कारण की है तो उन्हें जानने की जरूरत है जिस हिंसा की तस्वीर वो अपनी कल्पनाओं में कर रहे है उससे निजात पाने के लिए भारत सरकार ने ये ऐतिहासिक फैसला लिया है। कश्मीर में हिंसा हो रही थी, लेकिन उसके लिए भी उनका मुल्क जिम्मेदार था। जहाँ सालों से आतंकवाद पलता आया है।

वीना मलिक

बिग बॉस में वीणा मलिक की झलक

भारतीय रिएलिटी शो बिग बॉस में अपनी ओवर एक्टिंग और अश्मित पटेल के साथ संबंधों को लेकर सुर्खियों में आई पाकिस्तान की वीणा मलिक सोशल मीडिया पर बिना किसी जानकारी के अफवाह फैलाने के लिए लिखतीं हैं, “भारत ने क्लस्टर बम का प्रयोग करके और कश्मीरियों के खिलाफ सैन्य बल का उपयोग करते हुए सभी अंतर्राष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन किया है। 70 साल से भारत कश्मीरियों को दबाने में नाकाम रहा है…” हालाँकि, उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर भारतीय यूजर्स ने उन्हें जमकर सुनाया और बताया कि वो आज भी ‘कश्मीर’ की रट्ट लगाए हुए है जबकि वास्तविकता में वह ‘जम्मू-कश्मीर’ है।

किसी ने उनके इस ज्ञान पर उन्हें यहाँ तक बोला कि पाकिस्तानी नागरिकता पाने के लिए सबसे महत्तवपूर्ण चीज है कि उनकी बातों में लॉजिक गायब रहे, जैसे वीणा के ट्वीट से गायब था। क्योंकि भारतीय सेना द्वारा कभी भी पाकिस्तान पर या कश्मीरी लोगों पर क्लस्टर बम का इस्तेमाल नहीं किया गया।

वीना के इस पोस्ट के कारण वह इस समय सोशल मीडिया पर खूब ट्रोल रही है। लोग उन्हें समझाने की कोशिश कर रहे है कि वे कॉपी-पेस्ट करने से पहले अपने लिखे का मतलब समझती तो ठीक रहता।

क्योंकि अगर भारत ने वाकई क्लस्टर बमों का प्रयोग किया होता तो पाकिस्तान के हिस्से जो इस समय कश्मीर है वो भी नहीं होता।

अपने इस ट्वीट से पहले वीना मलिक एक और ट्वीट को लेकर ट्रोल हुईं थी, जिसमें उन्होंने भारतीय सुरक्षाबलों को अपमानित करते हुए लिखा था, “भारतीय बलों द्वारा कश्मीरी लोगों की दुर्दशा और उन पर किए गए अत्याचार के लिए यह संदेश फैलाना जरूरी है। पाकिस्तान कश्मीरी लोगों को नैतिक, राजनैतिक और कूटनीतिक समर्थन देता है जो आज भी अपने अधिकारों के लिए लड़ रहे हैं।”

खैर, दुख इस बात का नहीं है कि ये लोग भारत से नाम कमाकर भी पाकिस्तान के कश्मीर को अपना मानने वाले अजेंडे में भागीदार बने हुए हैं, दुख इस चीज का है कि हमारे देश में बैठे महेश भट्ट जैसे कुछ तथाकथित उदारवादी लोग इतने सब के बावजूद भी इनके समर्थन में उतरेंगे और कलाकार का कोई धर्म नहीं होता, वे सीमा में बँधे नहीं होते जैसे तर्क देंगे। फिर चाहे ये पाकिस्तानी कलाकार खुलेआम ही अपने सोशल मीडिया अकॉउंट पर ‘INDIA SUCKS’ जैसे ट्वीट क्यों न करें और खुलेआम ये क्यों न कहें कि वो हमेशा सबसे पहले ‘मुस्लिम’ रहेंगे।

माहिरा खान

आतिफ और वीणा के अलावा इस सूची में एक नाम माहिरा खान का भी है, जो बॉलीवुड के किंग खान के साथ ‘रईस’ फिल्म में काम करके एक जाना-पहचाना चेहरा बनीं, लेकिन केंद्र सरकार के फैसले के बाद इन्होंने भी बता दिया कि उनके लिए कर्मभूमि से पहले जन्मभूमि द्वारा चलाया अजेंडा महत्तवपूर्ण है। जिसको आगे बढ़ाने के लिए वह बेहद मार्मिक लहजे में दुनिया के समक्ष कश्मीर को जलता हुआ बताती हैं। 370 के प्रभाव खत्म होने के बाद माहिरा लिखती हैं, “क्या हमने पूरी तरह उन चीज़ों को भुला दिया है जिनके बारे में हम बात नहीं करना चाहते हैं? लेकिन ये सिर्फ़ रेत पर खिंची लकीरें नहीं है, ये मासूम लोगों के मारे जाने का सवाल है। जन्नत (कश्मीर) जल रही है और हम ख़ामोशी से रो रहे हैं।”

हैरानी है आज 370 आर्टिकल की कैद से आजाद हुए जम्मू-कश्मीर को पाकिस्तान के ये जाति-धर्म से उठे लेकिन कट्टरपंथी मानसिकता में जकड़े हुए लोग जलता हुआ बता रहे है। सालों से भारत सरकार द्वारा किए जा रहे आभासी अत्याचारों की उलाहना दे रहे हैं। लेकिन एक भी बार पाकिस्तान के उस समुदाय पर सवाल नहीं उठा रहे, जो खुद अपने देश के मोहाजिर, बलूच, पश्‍तून और हजारा समुदाय के लोगों को उनके अधिकार नहीं दे देता। जिसके कारण आज अमेरिका में स्थित प्रवासी मोहाजिरों का प्रतिनिधित्व करने वाले एक समूह ‘वॉयस ऑफ कराची’ के नाम पर ग्रेटर कश्मीर की माँग करनी पड़ रही है। जिनका खुलेआम कहना है, “पाकिस्‍तान को तब तक कश्‍मीरियों के हक के लिए बोलने का कोई अधिकार नहीं है, जब तक कि वह खुद अपने यहाँ मुहाजिर, बलूच, पश्‍तून और हजारा समुदाय के लोगों को उनके अधिकार नहीं दे देता। “

J&K पहुँचे NSA अजीत डोभाल का दिखा अलग रूप, जनता और पुलिस से किया सीधा संवाद, देखें वीडियो

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल आज जम्मू कश्मीर दौरे पर पहुँचे, जहाँ उन्होंने न सिर्फ़ सुरक्षा बलों से मुलाकात कर हालात का जायजा लिया बल्कि आमजनों से संवाद कर उनकी बातें भी सुनीं। उन्होंने कश्मीर की जनता से मुलाकात के दौरान कहा कि आमजनों की सलामती और हिफाजत सरकार का ध्येय है।

अजीत डोभाल ने कहा, “हमलोग इस दिशा प्रयास कर रहे हैं कि किस तरह से आपके बच्चे और उनके बच्चे सुकून से रह सकें और आगे बढ़ सकें। वे क्षेत्र, मजहब और देश की तरक्की में योगदान दे सकें।

एनएसए डोभाल शोपियाँ में सड़क किनारे खाना खाते हुए भी दिखे। ऐसा लग रहा था जैसे वह दिल्ली में बैठने वाले उच्चाधिकारी न होकर कश्मीर में रहने वाले कोई आम आदमी हों। जम्मू कश्मीर पुलिस से बात करते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें पुलिस द्वारा झेली जाने वाली तकलीफों की पूरी जानकारी है क्योंकि 12 साल पहले वह भी खाकी वर्दी पहना करते थे। नीचे संलग्न किए गए वीडियो में आप अजीत डोभाल को जम्मू कश्मीर पुलिस के जवानों से संवाद करते हुए देख सकते हैं।

बता दें कि घाटी में माहौल अभी सामान्य और शांतिपूर्ण है। कश्मीरी नेताओं व अलगाववादियों की गीदड़-भभकियों का कोई असर नहीं हुआ है और राज्य में बिजली-पानी-मेडिकल सेवाएँ सुचारु रूप से चल रही है। बाजारों में रौनक है और लोग खरीददारी करने निकल रहे हैं। डोभाल का कश्मीर दौरा भी भारत सरकार द्वारा जनता से सीधा संवाद स्थापित करने व धरातल पर उतर कर स्थिति को समझने के प्रयासों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

अजीत डोभाल ने जम्मू कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था का भी जायजा लिया। राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने भी अधिकारियों के साथ बैठक कर निर्देश दिया कि जनता से सीधा संवाद स्थापित कर उनकी दिक्कतों का समाधान किया जाए।

J&K में माहौल शांतिपूर्ण, जनता ने अनुच्छेद 370 पर सरकार के फ़ैसले का किया स्वागत

जम्मू कश्मीर का पुनर्गठन और अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को हटाए जाने को लेकर अलगाववादी और कश्मीरी नेता जैसी अफवाहें फैला रहे थे या उससे पहले जिस तरह से खून-खराबे की धमकी दे रहे थे, वैसा कुछ भी नजर नहीं आ रहा है। राज्य में शांति है और लोग अपनी दिनचर्या में व्यस्त हैं। हाँ, आतंकियों के खतरनाक मंसूबों व माहौल बिगाड़ने वाले तत्वों को रोकने के लिए सुरक्षा ज़रूर बढ़ाई गई है लेकिन कश्मीर की जनता को भी यह पता चल गया है कि सरकार ने ये सारे निर्णय क्षेत्र के विकास को लेकर लिए हैं। इससे यह भी साफ़ हो गया है कि गीदड़-भभकी देने वाले नेता व अलगाववादी कश्मीर की जनता का प्रतिनिधित्व नहीं करते।

संसद द्वारा जम्मू कश्मीर से जुड़े बिल को बहुमत से पास किए जाने के बाद आज जम्मू कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने क़ानून व्यवस्था का जायजा लिया। उन्होंने बैठक कर यह जाना कि अब तक क्षेत्र में क़ानून व्यवस्था की क्या स्थिति है? राज्यपाल ने घाटी में सभी जिलों के डिप्टी कमिश्नरों को अपने कर्मचारियों को भेज कर आम जनता की जरूरतें समझने व उन पर काम करने का निर्देश दिया। उन्होंने अपनी इस बात को दुहराया कि कश्मीर की जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करना उनकी पहली प्राथमिकता है।

राज्यपाल को अधिकारियों ने सूचना दी कि राज्य में स्थिति अभी संतोषप्रद है। बिजली और पानी से जुड़ी सेवाएँ सही से कार्य कर रही हैं और लोग रोजमर्रा की जरूरतों के सामान ख़रीदने के लिए घरों से निकल रहे हैं। बाजारों में भी रौनक है। राज्यपाल को यह भी बताया गया कि मेडिकल सेवाएँ सही से कार्य कर रही हैं और सभी अस्पतालों में नियमित क्रियाकलाप चल रहे हैं।

न सिर्फ़ लद्दाख के सांसद जामयांग शेरिंग नामग्याल बल्कि क्षेत्र के शिक्षा सुधारवादी व अभियंता सोनम वांगचुक ने भी केंद्र सरकार के निर्णय का स्वागत किया। उधर कश्मीर की जनता ने भी सरकार के इस निर्णय पर ख़ुशी जताई। नीचे संलग्न किए गए इस वीडियो में आप एक कश्मीरी बुजुर्ग को सुन सकते हैं जिन्होंने कहा कि अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त किए जाने के बाद यहाँ रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

जम्मू कश्मीर के ग्रामीण भी सरकार के इस निर्णय से खुश नजर आ रहे हैं। पूरे क्षेत्र में स्थिति सामान्य होने और जनता द्वारा सरकार के फैसले का स्वागत करने के बाद उन तमाम कश्मीरी नेताओं, अलगावादियों और कश्मीर के हक़ में बात करने का दावा करने वाले कथित सामाजिक कार्यकर्ताओं की पोल भी खुलती है, जो अपनेआप को जम्मू कश्मीर की जनता का प्रतिनिधि मानते हैं।

मोदी है तो मुमकिन है: संसद में कामकाज का बना रिकॉर्ड, कई ऐतिहासिक विधेयक पास

मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के पहले सत्र में संसद में रिकॉर्ड कामकाज हुआ है। जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे से संबंधित संविधान के अनुच्छेद 370 को हटाने, राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बॉंटने, तीन तलाक को गैर कानूनी करार देने जैसे ऐतिहासिक विधेयकों के साथ कई अन्य महत्वपूर्ण बिल इस सत्र में पारित हुए।

उल्लेखनीय है कि मोदी सरकार लगातार मिनिमम गवर्नमेंट और मैक्सिम गर्वनेंस पर जोर देती रही है। लोकसभा और राज्यसभा में रिकॉर्ड कामकाज ने उसकी इस प्रतिबद्धता की पुष्टि की है। सत्र 17 जून को शुरू हुआ था। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन की कार्यवाही को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करते हुए मंगलवार को कहा था कि यह 1952 के बाद सबसे स्वर्णिम सत्र रहा है। इसमें 134 फीसदी कामकाज हुआ। 17 जून से छह अगस्त तक चले इस सत्र में कुल 37 बैठकें हुई हैं और करीब 280 घंटे तक कार्यवाही चली।

राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू ने बुधवार को बताया कि उच्च सदन में इस बार 33 विधेयक पास हुए और सौ प्रतिशत से अधिक कामकाज हुआ। सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने से पहले समापन भाषण में उन्होंने यह बात कही।

नायडू ने बताया, “वर्ष 2009 से 2014 के बीच पॉंच साल तक जिस तरह यह सदन चला उसके बारे में मैंने इस वर्ष 13 फरवरी को एक रिपोर्ट दी थी और बताया कि किस तरह 49 प्रतिशत समय सदन का बर्बाद हुआ लेकिन इस बार रचनात्मक सदन रहा और काफी कामकाज हुआ।”

उन्होंने कहा कि इस बार कुल 35 बैठकें हुईं और 104.92 प्रतिशत कामकाज हुआ जो पिछले पॉंच साल का रिकाॅर्ड है। गत 17 सत्रों में ऐसा कामकाज नहीं हुआ था। उन्होंने कहा कि पाँच सत्रों में 7.44 प्रतिशत से 65.60 फीसदी ही कामकाज हो पाया था।

उन्होंने बताया कि लोकसभा ने 36 विधेयक पारित किए और दोनों सदनों से कुल 31 विधेयक पास हुए। यह 17 साल का रिकाॅर्ड है। वर्ष 2002 में 35 और वर्ष 1984 में 37 विधेयक पारित किए गए थे। इस तरह विधेयकों को पारित करने की दृष्टि से यह अब तक का छठा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है।

नायडू ने बताया कि 1952 में राज्यसभा के गठन से अब तक कुल 27 बार 30 दिन से अधिक बैठकें हुईं। इनमें नौ सत्र तो 35 से अधिक दिन चले, लेकिन 1955 में सर्वाधिक 50 बैठकें हुईं थीं। उन्होंने कहा कि पिछले 14 सालों में इतने लंबे समय तक सदन की बैठकें कभी नहीं चलीं।

370 पर पड़ोसी और इस्लामिक मुल्क साथ, कहा- J&K भारत का आंतरिक मसला

जम्मू कश्मीर का पुनर्गठन व अनुच्छेद 370 के कई प्रावधानों को निरस्त किए जाने के बाद कॉन्ग्रेस पार्टी ने सदन में भारत सरकार से पूछा कि क्या कश्मीर भारत का आंतरिक मसला है? लोकसभा में विपक्ष के नेता अधीर रंजन चौधरी तो एक क़दम और आगे बढ़ गए और कश्मीर को द्विपक्षीय मुद्दा बता दिया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने साफ़ कर दिया कि जब सरकार जम्मू कश्मीर की बात करती है तब वह न सिर्फ़ जम्मू, कश्मीर और लद्दाख बल्कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर की भी बात करती है।

जम्मू कश्मीर राज्य भारत का अखंड हिस्सा है, भारत इस मसले पर किसी भी प्रकार की मध्यस्तथा का सख्त विरोधी रहा है क्योंकि यह भारतीय गणराज्य का आंतरिक मसला है। अब ख़बर आई है कि कई देशों ने पाकिस्तान को झटका देते हुए मोदी सरकार के इस क़दम को भारत का आंतरिक मुद्दा बताया है। श्री लंका, यूएई और मालदीव ने इसे भारत का आंतरिक मुद्दा बताया है और दखल देने से साफ़ इनकार कर दिया है। इससे पता चलता है कि न सिर्फ़ पड़ोसी देश बल्कि यूएई जैसे इस्लामिक देश भी भारत के साथ हैं।

मालदीव की सरकार ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि किसी भी संप्रभु राष्ट्र को अपने क़ानून व संविधान में ज़रूरी बदलाव करने का अधिकार है। बता दें कि अब जम्मू-कश्मीर विधायिका सहित केंद्र शासित प्रदेश होगा, वहीँ लद्दाख विधायिका रहित केंद्र शासित प्रदेश होगा। लद्दाख के सांसद ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए अब्दुल्ला परिवार और महबूबा परिवार को आड़े हाथों लिया।

कई देशों द्वारा इस मामले में पाकिस्तान को झटका देने से भारत को कूटनीतिक बढ़त भी मिली है। हालाँकि, चीन अभी भी अपने रवैये से बाज नहीं आया है और उसने अनुच्छेद-370 के पर कतरे जाने और लद्दाख को अलग केंद्र शासित प्रदेश बनाए जाने को लेकर चिंता जाहिर की। भारत ने भी चीन को करारा जवाब देते हुए कहा कि यह हमारा आंतरिक मसला है और उसे इसमें दखलंदाजी का कोई अधिकार नहीं है। इस निर्णय से पाकिस्तान में बौखलाहट का माहौल है और वहाँ की संसद में पाक पीएम इमरान खान भी झल्लाते हुए नजर आए।

जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को राष्ट्रपति ने किया निरस्त

जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने निरस्त कर दिया है। संसद के दोनों सदन से इस संबंध में पारित प्रस्ताव के बाद राष्ट्रपति ने यह घोषणा की है।

आधिकारिक अधिसूचना में कहा गया है, “संविधान के अनुच्छेद 370 के खंड 1 के साथ पठित अनुच्छेद 370 के खंड 3 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए राष्ट्रपति संसद की सिफारिश पर यह घोषणा करते हैं कि छह अगस्त 2019 से खंड 1 को छोड़कर उक्त अनुच्छेद के खंड लागू नहीं होंगे।’’

भाजपा नेतृत्व वाली केन्द्र सरकार ने सोमवार को जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले संविधान अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त करने और राज्य को दो केन्द्र शासित प्रदेशों जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में बाँटने का प्रस्ताव पेश किया था। उसी दिन यह राज्यसभा में पारित हो गया था। अगले दिन लोकसभा ने भी इस पर मुहर लगा दी थी।

यह अधिसूचना 6 अगस्त से लागू मानी जाएगी। 6 अगस्त को ही निचले सदन लोकसभा ने जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम को पास किया था।

क़ुरान जलाने वाला कांड: मस्जिद केयरटेकर शौकत अली ने ही जलाई थी पुस्तक, विक्की को चाहता था फँसाना

एक महीने पहले एक मस्जिद में क़ुरान जलाने की घटना पुलिस ने सफलतापूर्वक सुलझा ली है। मामला जालंधर का है, जब नकोदर के नजदीक खानपुर ढड्डा गाँव में स्थित एक मस्जिद में कुरानशरीफ सहित कई मज़हबी पुस्तकों को जला डाला गया था। फिजिक्स और अंग्रेजी की पुस्तकें भी जलाई गई थीं। पुलिस ने इस गुत्थी को सुलझा लिया है। मस्जिद का केयरटेकर ही ने ही इस कृत्य को अंजाम दिया था।

6 जुलाई को मुख़्तार अली ने शिकायत दर्ज कराई थी कि जब वह मस्जिद के दरवाजे पर पहुँचे, तब उन्होंने देखा कि मस्जिद का दरवाजा खुला हुआ था और प्रवेश द्वार का टाला टूटा हुआ था। जब वे मस्जिद के अंदर पहुँचे, तब उन्होंने देखा कि कुरान, अन्य मज़हबी पुस्तकें, चटाइयाँ और चादर जली हुई अवस्था में जमीन पर पड़े हुए थे। शिकायतकर्ता ने अंदेशा जताया कि शरीफ मोहम्मद उर्फ़ विक्की ने ये सब किया है।

पुलिस ने विक्की को गिरफ़्तार कर शुरुआती जाँच के बाद उसे रिहा कर दिया गया। वह निर्दोष साबित हुआ। पुलिस ने मामले की जाँच के लिए एक एसआईटी का गठन किया। इसके अलावा कुछ बुद्धिजीवी मुस्लिमों की एक कमिटी भी बनाई गई, जिसका उद्देश्य पुलिस की मदद करना था ताकि दोषी को जल्द से जल्द पकड़ा जा सके। शनिवार (अगस्त 3, 2019) को पुलिस ने मस्जिद की देखभाल करने वाली व्यक्ति शौकत अली को गिरफ्तार कर लिया।

शौकत अली के ख़िलाफ़ पुलिस के पास सबूत भी थे, जिसके बाद उसने अपना गुनाह स्वीकार कर लिया। शौकत अली की शरीफ मोहम्मद से दुश्मनी थी और बदले की भावना से उसे फँसाने के लिए उसने ऐसा किया। वह इस बात से नाराज था कि मोहम्मद उससे ज्यादा रुपए कमा रहा है।

कश्मीरियत के नाम पर 370 का रोना रोने वालों को आइना दिखाता Video, आम जनजीवन बेअसर

आम कश्मीरी नागरिकों का हवाला देकर संसद में जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन बिल का विरोध करने वाले नेताओं की दलीलें आपने सुनी होगी। राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती और उमर अब्दुल्ला की प्रतिक्रियाओं को भी सुना होगा जो उन्होंने 370 के प्रावधानों को निरस्त करने पर कश्मीरी जनता की आड़ लेकर कही थी। लेकिन, श्रीनगर के इस ताजा वीडियो को देखकर साफ है कि कश्मीर के आम लोगों की जिंदगी 370 के निष्प्रभावी होने से बेअसर है।

समाचार एजेंसी ANI ने करीब 38 सेकंड का यह वीडियो जारी किया है। इस वीडियो में श्रीनगर की सड़कों पर सामान्य आवाजाही दिख रही है। ठेले-खोमचे वाले भी अपनी आजीविका कमाने में लगे हैं।

गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर को लेकर ऐतिहासिक फैसला लेने से पहले केन्द्र ने घाटी में एहतियातन सुरक्षा कड़ी कर दी थी। अतिरिक्त जवानों की तैनाती की गई थी। धारा 144 लागू कर इंटरनेट कनेक्शन पर पाबंदी लगा दी गई थी।

आशंका जताई जा रही थी कि 370 के बहाने अलगाववादी और राज्य के नेता लोगों को भड़काने का काम कर सकते हैं। बिल पेश किए जाने से पहले पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती और उमर अब्दुल्ला को नजरबंद कर दिया गया था। फिलहाल घाटी पूरी तरह शांत है। हालॉंकि अभी सुरक्षा बलों की तैनाती में कटौती के कोई संकेत नहीं हैं।