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कश्मीर पर छलका गौहर खान का दर्द, लोगों ने घाटी के 30 साल का इतिहास बता कर दिया शांत

जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 का पावर खत्म के बाद विशेष गिरोह के लोगों द्वारा अलग-अलग तरीके से इस फैसले पर विरोध जताया जा रहा है। राजनेता से लेकर पत्रकार इस पर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। इस सूची में कई बॉलीवुड सितारों का नाम भी शामिल हैं। जिसमें हालिया नाम बिग-बॉस सेलेब्रिटी गौहर खान का है।

गौहर ने अपने हालिया ट्वीट में कश्मीर के लोगों के प्रति चिंता जताई है। उन्होंने कश्मीर में लगी पाबंदियों के बीच अनुच्छेद 370 हटाने का पर्याय पूछा है। जिसके बाद उनका ये ट्वीट सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है।

गौहर खान ने अपने ट्वीट में कहा, “हमारे देश की करीब 80 लाख से ज्यादा आबादी बाहर की दुनिया से किसी भी तरह का संपर्क नहीं कर पा रही है। क्या अनुच्छेद 370 हटाने और कश्मीर को हमारे साथ मिलाने का यही मूल कारण था? कश्मीर की पूरी जनता को संपर्क रहित बनाकर हम उन्हें एक साथ लाने का आत्मविश्वास कैसे ला सकते हैं?”


गौहर के इस ट्वीट के बाद यूजर्स ने उन्हें उनके ट्वीट पर जमकर घेरा। लोगों ने उनसे पूछा, “जब कश्मीरी पंडितों को अपने ही देश में शरणार्थी बना दिया गया था तब तुम कहा थीं और कहाँ था ये दुख-दर्द।”

एक यूजर ने उन्हें समझाने का भी प्रयास किया कि जिस परेशानी से भारत पिछले 70 सालों से गुजरा है उसे सही होने में कुछ समय लगेगा। प्रधानमंत्री मोदी अपने कर्तव्य पूर्ण रूप से निभा रहे हैं, हमें अपने देश की सरकार पर विश्वास करना चाहिए।

बौखलाए Pak को अमेरिका ने दिया एक और झटका, आर्थिक मदद में की 44 करोड़ डॉलर की कटौती

आर्थिक संकट से गुज़र रहे पाकिस्तान को अमेरिका ने एक और क़रारा झटका दिया है। अमेरिका ने पाकिस्तान को दी जाने वाली आर्थिक मदद में भारी कटौती की है। 2009 के ‘केरी लूगर बर्मन’ एक्ट के तहत पाकिस्तान को मिलने वाली आर्थिक मदद की आधिकारिक घोषणा पाक पीएम इमरान ख़ान के अमेरिकी दौरे के तीन सप्ताह पहले ही कर दी गई थी।

दरअसल, अमेरिका ने आज से 9 साल पहले केरी लूगर बर्मन एक्ट के तहत पाकिस्तान को दी जाने वाली प्रस्तावित आर्थिक मदद में पूरे 44 करोड़ डॉलर की कटौती कर दी है। अब पाकिस्तान को जो आर्थिक मदद मिलेगी वो 4.1 अरब डॉलर होगी। पाकिस्तान को दी जाने वाली यह धनराशि ‘पाकिस्तान एन्हांसमेंट पार्टनरशिप एग्रीमेंट (PEPA) 2010’ के तहत मिलती थी। ख़बर के अनुसार, 90 करोड़ डॉलर की बची हुई अमेरिकी मदद पाने के लिए पाकिस्तान ने पिछले सप्ताह ही PEPA की समय-सीमा बढ़ा दी थी।

अक्टूबर 2009, में अमेरिकी कॉन्ग्रेस ने ‘केरी लूगर बर्मन एक्ट’ पास किया था और इसे लागू करने के लिए सितंबर 2010 में PEPA में हस्ताक्षर किए थे। इस एक्ट के तहत, पाकिस्तान को पाँच साल की अवधि में 7.5 अरब डॉलर की मदद दिए जाने की व्यवस्था की गई थी। इस एग्रीमेंट को पाकिस्तान की आर्थिक संरचना में निवेश करने के मक़सद से लाया गया था और इसके दायरे में देश के ऊर्जा और जल संकट को दूर किया जाना था।

पाकिस्तान के वित्त मंत्रालय के अनुसार, PEPA उन चार माध्यमों में से एक है जिसके ज़रिए अमेरीका पाकिस्तान को नागरिक आर्थिक मदद पहुँचाता है। ख़बर है कि वर्ष 2001 के बाद से पाकिस्तान को सभी माध्यमों से अमेरिका ने क़रीब 8.2 अरब डॉलर की आर्थिक मदद का वादा किया है, जिसमें से 6.6 अरब डॉलर की मदद पाकिस्तान को दी जा चुकी है।

अब ये और बात है कि PEPA समझौते के लागू होने के बाद से ही पाकिस्तान और अमेरिका के मध्य संबंध बिगड़ने शुरू हो गए थे। इसका सीधा असर अमेरिका की प्रतिबद्धताओं और आर्थिक मदद पर भी पड़ा। इसके अलावा एक दूसरी वजह यह भी है कि हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद-370 को हटा लिए जाने के बाद अमेरिका ने पाकिस्तान के लगातार अनुरोधों के बावजूद अमेरिकी, कश्मीर को द्विपक्षीय स्तर पर मामले को सुलझाने के अपने पुराने रुख़ पर अभी क़ायम है।

अब तक कोई मौत नहीं, ना कोई गंभीर रूप से घायल – अगले सप्ताह खुल जाएँगे स्कूल भी: J&K मुख्य सचिव

जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव ने वहाँ के अब तक के हालातों और आर्टिकल 370 के पर कतरने के बाद की स्थिति पर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ताजा जानकारी दी। J&K मुख्य सचिव बीवीआर सुब्रह्मण्यम ने बताया कि पूरे राज्य के 22 में से 12 जिलों में स्थिति सामान्य है। पूरी प्रक्रिया में अब तक किसी भी नागरिक की मौत नहीं हुई है, ना ही कोई गंभीर रूप से घायल नहीं हुआ है।

मुख्य सचिव सुब्रह्मण्यम के अनुसार आम जनों की सुरक्षा को देखते ऐहतियातन लोगों के इकट्ठा होने और उनके मूवमेंट पर रोक लगाई गई थी। साथ ही कुछ लोगों को हिरासत में भी लिया गया था ताकि स्थिति को कंट्रोल में रखा जा सके। उन्होंने कहा कि धीरे-धीरे ये सभी प्रतिबंध हटाए लिए जाएँगे और इस सप्ताह के बाद स्कूल-कॉलेज भी खुल जाएँगे।

सरकार की प्राथमिकता से अवगत कराते हुए उन्होंने कहा कि किसी भी नागरिक की जान नहीं जाए, इसके लिए सरकारी तंत्र के द्वारा काफी मेहनत और प्लानिंग की गई। मीडिया की मदद के लिए मीडिया सेंटर भी खोला गया।

जैसे-जैसे घाटी में स्थिति नियंत्रण में हो रही है, उसी के अनुसार सरकार अगला कदम उठा रही है। इसी क्रम में मुख्य सचिव सुब्रह्मण्यम ने बताया कि कल यानी शनिवार (17 अगस्त 2019) से श्रीनगर में लैंडलाइन फोन शुरू कर दिए जाएँगे और इसी प्रक्रिया के तहत धीरे-धीरे बाकी जिलों के भी फोन शुरू किए जाएँगे।

कॉन्ग्रेस की लापरवाही की वजह से छूटे सभी आरोपित: पहलू खान मामले में गहलोत पर बरसीं मायावती

राजस्थान के अलवर में 2017 में हुए पहलू खान हत्याकांड मामले में आरोपितों को निचली अदालत द्वारा बरी किए जाने के बाद राज्य की कॉन्ग्रेस सरकार पर बसपा प्रमुख मायावती ने घोर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है। उन्होंने आरोपितों की रिहाई पर कॉन्ग्रेस पार्टी और राजस्थान सरकार पर निशाना साधा है। मायावती ने राज्य की कॉन्ग्रेस सरकार पर इस मामले में लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य सरकार की लापरवाही की वजह से ही मामले के आरोपित रिहा हो सके। मायावती ने अपने ट्वीट के जरिए राजस्थान की कॉन्ग्रेस सरकार पर सवाल उठाया है।

मायावती ने अपने ट्वीट में लिखा, “राजस्थान कॉन्ग्रेस सरकार की घोर लापरवाही व निष्क्रियता के कारण बहुचर्चित पहलू खान माब लिंचिंग मामले में सभी 6 आरोपित वहाँ की निचली अदालत से बरी हो गए, यह अतिदुर्भाग्यपूर्ण है। पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के मामले में वहाँ की सरकार अगर सतर्क रहती तो क्या यह संभव था, शायद कभी नहीं।”

गौरतलब है कि, पहलू खान हत्याकांड मामले में अलवर की जिला अदालत ने बुधवार (अगस्त 14, 2019) को फैसला सुनाते हुए सभी 6 आरोपितों को बरी कर दिया। अदालत ने इन आरोपितों को पुलिस जाँच में गंभीर कमियों के चलते संदेह का लाभ देकर बरी कर दिया। इस मामले में कुल 9 आरोपित पकड़े गए, जिनमें से 3 नाबालिग हैं। अदालत ने बुधवार को 6 बालिग आरोपितों- विपिन यादव, रविन्द्र कुमार, कालूराम, दयानंद, योगेश कुमार उर्फ धोलिया और भीम राठी को लेकर फैसला सुनाया। जबकि, नाबालिग आरोपितों पर जुवेनाइल अदालत में सुनवाई की जा रही है।

वहीं, राजस्थान मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा है कि इस मामले में निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी जाएगी। बता दें कि, पहलू खान 1 अप्रैल 2017 को अपने दोनों बेटों के साथ जयपुर के एक मेले से मवेशियों को खरीद कर हरियाणा के नूह स्थित अपने घर ला रहे थे। इसी दौरान कुछ लोगों ने उन पर हमला कर दिया। पुलिस ने उनको भीड़ से छुड़ाकर बहरोड़ के कैलाश अस्पताल में भर्ती कराया था। जहाँ इलाज के दौरान पहलू खान की अप्रैल 04, 2017 को मौत हो गई थी।

मोदी 2002 फिर से करना चाहता है: इमरान खान- देसी लिबरलों की जुगलबंदी जारी

कश्मीर मुद्दे पर ऐसा लग रहा है पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान की स्क्रिप्ट वहाँ के सेना नहीं, हिंदुस्तान वाला पत्रकारिता का समुदाय विशेष और लिबरल गैंग लिख रहा है। तभी मोदी को गरियाने में भी इमरान खान अपने देश की नहीं, हिंदुस्तानी मोदी-विरोधियों की भाषा बोले जा रहे हैं। पहले उन्होंने मोदी-RSS की तुलना हिटलर और उसकी नाज़ी पार्टी से की, और अब दुनिया को बताते फिर रहे हैं कि मोदी कश्मीर में 2002 जैसा दंगा कराने वाले हैं।

हिंदुस्तान के बहाने दुनिया को दी जिहाद की धमकी

हिंदुस्तान के स्वतंत्रता दिवस पर इमरान खान ने ट्विटर पर न केवल “कश्मीरियों पर अत्याचार हो रहा है” का पुराना राग अलापा, बल्कि आरोप यह भी लगाया कि कश्मीर में “आरएसएस के गुंडे” भेजे जा रहे हैं, और “गुजरात के मुस्लिमों का मोदी द्वारा जैसा जातीय हत्याकांड किया गया”, वही कश्मीर में होगा। यही भाषा मोदी के प्रधानमंत्री बनने के पहले देसी लिबरलों की होती थी, जब वे मुस्लिमों को आतंकित करना चाहते थे।

इमरान खान इतने पर ही नहीं रुके। उन्होंने 1995 में स्रेबेनिका में बोस्नियाई मुस्लिमों के ख़िलाफ़ हुए सामूहिक और जातीय हत्याकांड और उस पर तत्कालीन विश्व समुदाय की तथाकथित चुप्पी के बहाने अपने देश के दुनिया में अलग-थलग पड़ जाने पर खीझ उतारी। साथ ही इसका बदला जिहाद से लेने की धमकी भी “कश्मीर के जवाब में इस्लामी जगत में उग्रवाद और अंतहीन हिंसा” के नाम पर दी।

वैश्विक हिन्दू समुदाय ने लताड़ा

ट्विटर पर वैश्विक हिन्दू समुदाय के कई जाने-माने चेहरों और हैंडल्स ने इमरान खान को आईना दिखाया। लेखक संक्रांत सानु ने गुजरात मामले के प्रोपेगंडा को आड़े हाथों लेते हुए इमरान को याद दिलाया कि गुजरात दंगों में मारे जाने वालों में से एक तिहाई हिन्दू थे, जिनमें से कई दंगा रोकने की कोशिश कर रही “मोदी की पुलिस” (गुजरात पुलिस) की गोलियों का शिकार हुए थे। उन्होंने साथ ही कश्मीर में हिन्दुओं के हुए असली हत्याकांड की भी याद दिलाई।

अमेरिकी हिन्दुओं के संगठन ‘हिन्दू अमेरिकन्स’ ने भी खुद अपने देश में हिन्दुओं की हत्याएँ और उनपर अत्याचार करने के बाद दूसरे देशों को अल्पसंख्यकों के बारे में उपदेश देने के दोगलेपन पर इमरान को लताड़ा। संगठन ने आरोप लगाया कि बलूचिस्तान-बांग्लादेश (तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान) से लेकर कश्मीर तक पाकिस्तान ने गैर-मुस्लिमों की हत्याएँ की हैं, और दुनिया आज हिंदुस्तान के साथ खड़ी है, जिहादी पाक के साथ नहीं।

हिन्दू अमेरिकन्स ने पाकिस्तान को यह भी याद दिलाया कि मुस्लिम-बहुल देशों में से भी किसी ने उसका इस मामले में साथ नहीं दिया है। इमरान खान के दुनिया को दहशतगर्दी की धमकी देने की तुलना भी अलकायदा और आईएस (दाएश) जैसे जिहादी संगठनों की धमकी से की।

मणिपुर: मदरसे में प्रशिक्षण पाने वाले 6 रोहिंग्याओं को पुलिस ने किया गिरफ़्तार

इम्फाल के तुलीहाल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से शनिवार (10 अगस्त) को रोहिंग्या समुदाय के छ: लोगों की गिरफ़्तारी पर मुख्यमंत्री बिरेन सिंह ने जानकारी दी कि यह लोग फ़र्ज़ी दस्तावेज़ों के ज़रिए नई दिल्ली से यहाँ पहुँचे थे। मुख्यमंत्री ने चिंता जताते हुए कहा कि उन लोगों की पहचान की जानी चाहिए जो रोहिंग्याओं को राज्य में प्रवेश करने में उनकी मदद कर रहे हैं और उन्हें आश्रय दे रहे हैं।

यह जानकारी उन्होंने ‘देशभक्ति दिवस’ पर लोगों को संबोधित करते हुए दी। उन्होंने कहा, ‘‘यह संकेत है कि उनमें से बहुत से लोग राज्य में पनाह ले रहे हैं और हमें उन लोगों की पहचान करनी होगी जो विभिन्न जगहों से रोहिंग्याओं के अवैध प्रवेश में मदद कर रहे हैं।’’

मुख्यमंत्री ने लोगों से रोहिंग्याओं का पता लगाने और उन्हें मणिपुर लाने वाले एजेंटों की पहचान करने की अपील करते हुए कहा कि अगर उन्होंने पहल नहीं की तो पहले से ही कम मणिपुर की आबादी आने वाले समय में गायब हो जाएगी।

ग़ौरतलब है कि डीआईजी टी नगासंगवा ने रविवार (11 अगस्त) को संवाददाताओं से बातचीत में बताया था कि पुलिस जाँच से पता चला है कि छ: रोहिंग्याओं को दिल्ली में एक मदरसे में प्रशिक्षण दिया गया और उन्हें दिल्ली तथा मणिपुर के कुछ एजेंटों की मदद से यहाँ लाया गया था।

उन्होंने बताया कि रोहिंग्याओं ने इस बात को स्वीकार कर लिया है कि वे म्यांमार के यांगून और मांडले के रहने वाले हैं। उन्होंने यह भी बताया है कि भारतीय एजेंटों ने उनके लिए फ़र्ज़ी आधार कार्ड और अन्य दस्तावेज़ों की व्यवस्था की थी।

दरअसल, मणिपुर पुलिस को एक इनपुट मिला था कि इंडिगो की फ्लाइट से कुछ अवैध अप्रवासी इम्फाल आ रहे हैं। इसके तुरंत बाद, फॉरेन चेक पोस्ट (FCP) और इम्फाल पश्चिम ज़िले की पुलिस टीम को सतर्क कर दिया गया, जिसने हवाई अड्डे पर छ: संदिग्ध यात्रियों को हिरासत में लिया। गिरफ़्तार किए गए छ: आरोपितों में से तीन के आधार कार्ड पर मणिपुर का पता था, जबकि बाक़ी तीन में हैदरबाद का पता था। इनमें से कोई भी मणिपुरी नहीं बोल सकता, केवल एक हिंदी बोलने में सक्षम है। पुलिस ने उनके पास से म्यांमार बैंक का ATM कार्ड भी बरामद किया है।

बाली के हिन्दू मंदिर पहुँचकर विदेशी जोड़े ने पवित्र जल से की शर्मनाक हरकत,Video वायरल

इंडोनेशिया के बाली में ऊबुद स्थित बेजी मंदिर में पवित्र जल के साथ अभद्र हरकत करने पर चेक रिपब्लिक के एक जोड़े की वीडियो गुरुवार (अगस्त 15, 2019) से इंस्टाग्राम पर खूब वायरल हो रही है। जिस कारण इस जोड़े को सोशल मीडिया पर काफ़ी ट्रोल किया जा रहा है। साथ ही लोग इस कपल पर अपना गुस्सा निकाल रहे हैं और तरह-तरह की बातें बोल रहे हैं।

इस वीडियो में हम देख सकते हैं कि किस तरह ये जोड़ा मंदिर परिसर में मस्ती कर रहा है और इनके सामने फाउंटेन से पवित्र जल निकल रहा है। लेकिन थोड़ी देर बाद वीडियो में लड़की यानी सबीना पीछे की ओर से अपनी स्कर्ट उठाती दिखती है और उसका ब्वॉयफ्रेंड उसके बट पर पानी मारता है। इसके बाद ऐसा करके दोनों बहुत खुश होते हैं।

बता दें कि इस जोड़े ने 9 अगस्त को इस वीडियो को अपने 85 हजार फॉलोवर्स के साथ शेयर किया था। लेकिन अचानक बाली के सीनेटर (Bali senetar) डॉक्टर आर्य वेदकर्ण उनकी इस वीडियो को देखकर उनपर भड़क उठे। वेदकर्ण ने इंस्टाग्राम के इस जोड़े की हरकत के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाते हुए उनकी इस हरकत को बाली के ‘बेजी मंदिर का शोषण’ करने वाल बताया। जिसके बाद कई लोगों ने इस जोड़े की हरकत को शर्मनाक करार देते हुए इन्हें खरी-खोटी सुनाई।

सोशल मीडिया पर 85000 फॉलोवर्स के बीच ट्रोल होते इस जोड़े ने बाद में एक वीडियो जारी करके माफ़ी माँगी। उन्होंने कहा, “हम कल की वीडियो के लिए माफी माँगते हैं। हमने ऊबुद के पवित्र मंदिर और पवित्र जल का अनादर किया, जिसके बारे में हमें पता नहीं था। इसलिए हम शर्मिंदा हैं और आपसे माफ़ी माँगते हैं।”

जबकि सबीना ने कहा, “हमें इस बारे में बिलकुल नहीं पता था कि वो पवित्र जल है या वो जगह पवित्र स्थल है, अगर मालूम होता तो हम ऐसा कुछ भी गलत नहीं करते। हम माफी माँगते हैं और उम्मीद करते हैं कि आप हमें माफ़ कर देंगे।”

सोशल मीडिया पर लोग इसे बेहूदी हरकत कह रहे हैं और चाहते हैं कि इन दोनों को बाली से ब्लैकलिस्ट कर दिया जाए। जबकि वेदकर्ण को तो यूजर्स इन्हें दंड देने के लिए भी उकसा रहे हैं।

इंस्टाग्राम पर एक महिला ने इसे इंडोनेशिया की बेइज्जती बताया है। साथ ही कहा है कि वह भले ही बाली की रहने वाली नहीं है और न ही वह हिंदू हैं लेकिन इनकी इस बेवकूफ़ी से वे बहुत शर्मिंदा हैं। जबकि दूसरे यूजर का कहना है कि बतौर पर्यटक तुम्हें किसी देश में जाने से पहले उस जगह की स्थानीय परंपरा, धर्म के साथ इस बात का पता होना चाहिए कि वहाँ तुम क्या कर सकते हो और क्या नहीं।

ज़रूरत पड़ी तो परमाणु हथियारों के प्रयोग की नीति बदल भी सकती है: रक्षामंत्री राजनाथ सिंह

पाकिस्तान लगातार युद्ध से जुड़े या परमाणु हथियारों के उपयोग की धमकी भारत को देता रहा। ऐसे में जम्मू-कश्मीर में 370 हटने के बाद बदले माहौल में पाकिस्तान के साथ बढ़ते तनाव के बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार(अगस्त 16, 2019) को संकेत दिए कि भारत परमाणु हथियारों का पहले इस्तेमाल न करने से जुड़ी अपनी नीति को बदल भी सकता है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को पोखरण में अपने एक बयान में कहा, “यह बात सच है जहाँ तक हमारी परमाणु हथियारों को लेकर नीति का सवाल है उसमें आज तक ‘नो फर्स्ट यूज़’ की रही है। लेकिन अब भविष्य में क्या होता है, यह उस वक्त के हालात पर निर्भर करता है।”

राजनाथ सिंह के इस बयान को मौजूदा हालात में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। साथ ही पाकिस्तान को परोक्ष रूप से संकेत भी कि परमाणु हथियारों की रट वह छोड़ दे। वर्ना आज का भारत पहले वाला भारत नहीं है अब देश एक ऐसे मजबूत नेतृत्व के हाथों में है जो ज़रूरत पड़ने पर किसी भी तरह के निर्णय से हिचकेगा नहीं।

इससे पहले, पाकिस्‍तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने संसद के संयुक्‍त सत्र में अनुच्छेद-370 के विषय पर धमकी देते हुए कहा था कि जम्‍मू-कश्‍मीर से अनुच्‍छेद-370 (Article-370) हटाने के कारण भारत में पुलवामा जैसी घटनाएँ होंगी। उन्‍होंने कहा कि वो इस मामले को संयुक्त राष्‍ट्र लेकर जाएँगे। इमरान खान का कहना है कि पाकिस्तान अंतरराष्‍ट्रीय समुदाय को बताएगा कि बीजेपी की नस्‍लवादी विचारधारा के कारण भारत में अल्‍पसंख्‍यकों के साथ कैसा बर्ताव किया जा रहा है।

शारदा घोटाला: CBI ने ममता सरकार के मंत्री पार्थ चटर्जी को किया तलब

शारदा चिटफंड घोटाले की जाँच कर रही केंद्रीय जाँच अन्वेषण (CBI) ने पश्चिम बंगाल के शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी को नोटिस भेजा है। उन्हें सत्तारुढ़ पार्टी तृणमूल कॉन्ग्रेस के मुखपत्र ‘जागो बांग्ला’ के संदर्भ में तलब किया गया है। पार्थ चटर्जी ‘जागो बांग्ला’ के संपादक हैं और सीबीआई उनसे ‘जागो बांग्ला’ के बैंक खातों के कुछ वित्तीय लेन-देन के बारे में पूछताछ करने वाली है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी देते हुए बताया कि चटर्जी को शहर में स्थित सीबीआई के कार्यालय में शुक्रवार (अगस्त 16, 2019) दोपहर को जाँच अधिकारियों के समक्ष पेश होने के लिए कहा गया है।

पिछले महीने सीबीआई ने शारदा पोंजी घोटाला मामले में जाँच में शामिल होने के लिए तृणमूल कॉन्ग्रेस के सांसद डेरेक ओब्रायन को तलब किया था। अधिकारियों ने बताया कि उनसे भी जागो बांग्ला के बैंक खातों से संबंधित वित्तीय लेन- देन के बारे में पूछताछ हो सकती है। डेरेक ओब्रायन पार्टी के जागो बांग्ला के प्रकाशक हैं।

शारदा घोटाले में टीएमसी के कई दिग्गज नेताओं के नाम शामिल हैं और कई नेता इस मामले में फँस भी चुके हैं। पहले इस मामले में कोलकाता के पूर्व कमिश्नर राजीव कुमार से पूछताछ की जानी थी, लेकिन राजीव कुमार ने अपनी चिट्ठी के साथ एक सीआईडी अधिकारी को सीबीआई के दफ्तर भेजकर राजीव कुमार ने पूछताछ के लिए समय माँगा है। फिलहाल, राजीव कुमार बंगाल के एडीजी सीआईडी पद पर तैनात हैं।

गौरतलब है कि, शारदा घोटाले में गिरफ्तार होने वाले टीएमसी के राज्यसभा सांसद कुणाल घोष पहले टीएमसी नेता थे, जिन्हें नवंबर 2013 में गिरफ्तार किया गया। कुणाल घोष चिटफंड घोटाले वाली कंपनी शारदा ग्रुप की मीडिया यूनिट के ग्रुप सीईओ थे। इस केस में गिरफ्तार होने वाले दूसरे नेता श्रींजॉय बोस थे। टीएमसी के राज्यसभा सांसद श्रींजॉय बोस को 21 नवंबर 2014 को सीबीआई ने गिरफ्तार किया था। उन पर घोटाले के मास्टरमाइंड और शारदा ग्रुप के सीएमडी सुदीप्तो सेन से घोटाले की रकम में हिस्सा लेने का आरोप है।

राम मंदिर मामला: ‘जहाँ-जहाँ नमाज़ पढ़ी गई, वे सब इलाके मुस्लिमों को नहीं दिए जा सकते’

अयोध्या विवाद में श्री राम लला विराजमान के वकील सीएस वैद्यनाथन ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि खाली नमाज़ पढ़ लेने से किसी जगह का मालिकाना हक़ मुस्लिमों का नहीं हो जाता, खासकर कि तब जब उस जगह का ढाँचा, स्तम्भ, शिलालेख आदि हिन्दू हों। “खाली सड़क पर नमाज पढ़े जाने से उस पर मालिकाना हक़ का दावा नहीं ठोंका जा सकता।” पाँच जजों की संवैधानिक पीठ के सामने वैद्यनाथन ने तर्क दिया।

ढाँचा तो कभी मस्जिद था ही नहीं

सीएस वैद्यनाथन ने मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ को बताया कि वह ढाँचा सही मायनों में कभी मस्जिद कहलाने की अर्हता पूरी नहीं करता था। उस स्थान की सजावट में चित्र प्रयुक्त थे, और इस्लामी आस्था के अनुसार इंसानों या जानवरों के चित्र उपासना स्थल पर नहीं हो सकते। वरिष्ठ वकील ने 1990 में ली गई तसवीरें भी अदालत के आगे रखीं।

वैद्यनाथन ने हिन्दू पक्ष की मुख्य दलील फिर से दोहराई कि बाबरी ढाँचा मंदिर के भग्नावशेषों पर बनाया गया था, अतः यह कहना गलत होगा कि वह ज़मीन उस ढाँचे के बनने के पहले किसी की थी ही नहीं। “अगर वह मंदिर के भग्नावशेषों पर बना ढाँचा है, तो शरीयत के ही मुताबिक वह मस्जिद हो ही नहीं सकता।” उन्होंने 1950 की फैज़ाबाद कमिश्नर की रिपोर्ट को भी उद्धृत किया, जिसमें विवादित स्थल के 14 स्तम्भों पर हिन्दू देवी-देवताओं और प्रतीक चिह्नों के चित्र उकेरे हुए थे। “और किसी मस्जिद में तो हिन्दू देवताओं के चित्र वाले स्तम्भ हो नहीं सकते।”

किसने तोड़ा, यह सवाल नहीं है

सीएस वैद्यनाथन ने यह भी दलील दी कि हालाँकि यह सत्य है कि मंदिर तोड़कर वह ढाँचा किसने बनवाया, इस पर विवाद है (एक विवरण इसकी ज़िम्मेदारी मुगलों के पहले शहंशाह बाबर पर डालता है, दूसरा औरंगज़ेब पर) लेकिन वह इस मुद्दे के हल में अनौचित्यपूर्ण है। ऐसा इसलिए क्योंकि चाहे मंदिर बाबर ने तोड़ा हो या औरंगज़ेब ने, तथ्य यही है कि हिन्दुओं का मंदिर तोड़कर ही कथित ‘मस्जिद’ बनाई गई।