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अनुच्छेद 370: महाराजा हरि सिंह के पुत्र, कॉन्ग्रेस नेता कर्ण सिंह ने किया सरकार के निर्णय का स्वागत

पूर्व केंद्रीय मंत्री कर्ण सिंह ने जम्मू कश्मीर का पुनर्गठन और अनुच्छेद 370 पर भारत सरकार के निर्णय का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि इस निर्णय की निंदा किए जाने का वह समर्थन नहीं करते। उन्होंने अपने बयान में कहा है कि लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश घोषित करने वाला निर्णय स्वागत योग्य है। उन्होंने लिखा कि अनुच्छेद 370 के कारण महिलाओं से जो भेदभाव किया जा रहा था, उसे ठीक करना ज़रूरी था। साथ ही डॉक्टर सिंह ने लिखा कि 1965 में जब वे जम्मू कश्मीर के सदर-ए-रियासत थे, उन्होंने तभी राज्य के पुनर्गठन का प्रस्ताव दिया था।

उन्होंने पश्चिमी पाकिस्तान से आए लाखों शरणार्थियों को मताधिकार मिलने और अनुसूचित जाति व जनजाति के लोगों को आरक्षण का अधिकार मिलने का भी स्वागत किया। उन्होंने इन सभी को ताज़ा निर्णय के पॉजिटिव पक्ष के रूप में गिनाया। जम्मू कश्मीर के दिवंगत महाराजा हरि सिंह और महारानी तारा देवी के बेटे कर्ण सिंह भारत सरकार में विभिन्न मंत्रालय संभाल चुके हैं और उधमपुर से सांसद भी रहे हैं। वह जम्मू कश्मीर के प्रथम राज्यपाल रहे हैं।

जम्मू कश्मीर के प्रथम राज्यपाल कर्ण सिंह का ताज़ा बयान

हालाँकि, डॉक्टर सिंह ने जम्मू कश्मीर के दोनों प्रमुख पार्टियों के नेताओं को रिहा करने की भी माँग की। बता दें कि सरकार ने माहौल बिगड़ने से बचाने के लिए 100 से अधिक नेताओं व अलगाववादियों को नजरबन्द कर लिया है। कर्ण सिंह संयुक्त राष्ट्र अमेरिका में भारत के एम्बेसडर भी रह चुके हैं। ऐसे समय में जब कॉन्ग्रेस का नेतृत्व सरकार के निर्णय का विरोध कर रहा है, कर्ण सिंह का बयान काफ़ी मायने रखता है।

कश्मीर पर भूलों का करना था पिंडदान, कॉन्ग्रेस ने खुद का कर लिया

पांडे जी अरसे से फेसबुकिया मित्र हैं। आए दिन सहज, सरल शब्दों में भाजपा को घेरते रहते हैं। 6 अगस्त को पांडे जी फेसबुक पर पोस्ट करते हैं, “दरअसल कॉन्ग्रेसी विरोध नहीं कर रहे हैं, बल्कि कॉन्ग्रेस का पिंडदान कर रहे हैं।” 5 और 6 अगस्त को आर्टिकल 370 के प्रावधानों को निष्प्रभावी करने के लिए राज्यसभा और लोकसभा में चर्चा के दौरान सोशल मीडिया में की गई प्रतिक्रियाओं की यह बानगी भर है।

आप चाहें तो ऐसी प्रतिक्रियाओं को पांडे जी या उन जैसों की कुंठा, इतिहास या राजनीति की कम समझ या फिर रवीश कुमार की शैली में ह्वाट्सएप यूनिवर्सिटी से प्रशिक्षित कह कर खारिज कर सकते हैं। यह भी कह सकते हैं कि उन्होंने हवा देख ‘दिल्ली वाले सरजी’ की तरह पाला बदल लिया। चाहें तो संसद में बहस के दौरान #ShameOnCongress और #congressselfgoal के ट्रेंड करने को ट्विटर का आरएसएस एजेंट होना कह कर नकार सकते हैं। वैसे भी जब पाकिस्तानी चैनल पर पैनलिस्ट अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जेरेड कुश्नर को इस फैसले के पीछे बता सकते हैं तो ट्विटर के को-फाउंडर और सीईओ जैक डर्सी को सेट करना कौन सी बड़ी बात है। अरे याद आया बीते नवंबर में ही तो मोदी ने डर्सी से मुलाकात कर गुफ्तगू भी की थी।

लेकिन, उन सवालों का क्या जो कॉन्ग्रेस के भीतर से उठ रहे हैं। जब राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद कश्मीरियत, जम्हूरियत का हवाला देकर आर्टिकल 370 को निष्प्रभावी करने और जम्मू-कश्मीर को दो केन्द्र शासित प्रदेशों (यूटी) में बॉंटने के सरकार के कदम का विरोध करते हुए कह रहे थे, “मोदी सरकार ने भारत के मस्तक के टुकड़े कर दिए। सरकार देश के टुकड़े-टुकड़े करना चाहती है। जम्मू-कश्मीर के लोग केन्द्र सरकार के साथ नहीं हैं।”, उससे पहले ही कॉन्ग्रेस के कई नेताओं को आभास हो चुका था कि पार्टी लाइन जनभावना के खिलाफ है। पार्टी सांसद और राज्यसभा के ह्विप भुवनेश्वर कालिता ने यह कहते हुए, ‘कॉन्ग्रेस आत्महत्या कर रही है और मैं इसमें उसका भागीदार नहीं बनना चाहता’, सदन की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। जर्नादन द्विवेदी, दीपेंद्र हुड्डा, मिलिंद देवड़ा जैसे गॉंधी परिवार के करीबी रहे नेताओं ने भी इस मसले पर पार्टी से इतर राय रखने में वक्त जाया नहीं किया। जर्नादन द्विवेदी ने कहा, “मैंने राम मनोहर लोहिया जी के नेतृत्व में राजनीति की शुरूआत की थी। वह हमेशा इस अनुच्छेद के खिलाफ थे। आज इतिहास की एक गलती को सुधार लिया गया है।”

उन्होंने अपने बयान को निजी विचार बताया था। लेकिन, सालों तक सोनिया के बेहद करीब होने के कारण उन्हें यह इल्म जरूर रहा होगा कि पार्टी शायद अपनी लाइन थोड़ी दुरुस्त कर पाए। जाहिर है ऐसा नहीं हुआ और अगले दिन लोकसभा में चर्चा के दौरान कॉन्ग्रेस संसदीय दल के नेता अधीर रंजन चौधरी ने कुछ ऐसा कह दिया जिससे उनके बगल में बैठीं सोनिया भी असहज नजर आईं। चौधरी ने कहा, “जिस कश्मीर को लेकर शिमला समझौते और लाहौर डिक्लेरेशन हुआ है वह हमारा अंदरूनी मामला कैसे हो गया।”

इस बीच पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी ने ट्वीट कर कहा, “जम्मू-कश्मीर को दो हिस्सों में बॉंटकर, चुने हुए प्रतिनिधियों को जेल में डालकर और संविधान का उल्लंघन करके देश का एकीकरण नहीं किया जा सकता। देश उसकी जनता से बनता है न कि जमीन के टुकड़ों से। सरकार द्वारा शक्तियों का दुरुपयोग राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए घातक साबित होगा।” लेकिन, अधीर ने जो आग लगाई ​थी उसकी तपिश इससे कम नहीं हुई। मजबूरन, ज्योतिरादित्य सिंधिया, अनिल शास्त्री, रंजीत रंजन, अदिति सिंह जैसे कई नेताओं को पार्टी लाइन से हटकर रुख अख्तियार करना पड़ा।

राजनीति बौद्धिक बहसों से ज्यादा जमीनी सूझबूझ की कला है। जनभावना का मिजाज भॉंपने का चातुर्य है। लेकिन, ऐसा लगता है कि कॉन्ग्रेस का शीर्ष नेतृत्व लगातार चुनावी पराजयों की वजह से जमीन से ऐसे कटा है कि उसे कालिता और जर्नादन द्विवेदी जैसे अपने वरिष्ठ नेताओं के बयानों में छिपा संदेश भी समझ नहीं आ रहा।

असल में जम्मू-कश्मीर शेष भारत के लिए दो समुदायों का मसला नहीं है। जैसा कि कॉन्ग्रेस और इस बिल का विरोध कर रहे अन्य पार्टियों के नेता इसे पेश करने की कोशिश कर रहे थे। न ही यह जमीन का टुकड़ा खरीदने की आजादी से जुड़ा है और न ही कश्मीरी से ब्याह रचाने से, जैसा कुछ नीच सोशल मीडिया में इस बहस का स्तर गिराते हुए मीम शेयर कर रहे हैं। असल में कश्मीर वो भावनात्मक मसला है जो पूरे भारत को पाकिस्तान के खिलाफ, आतंकवाद के खिलाफ एक सूत्र में पिरोता है। इसका एहसास ‘जहॉं बलिदान हुए मुखर्जी, वो कश्मीर हमारा है’ से लेकर ‘कश्मीर हो या कन्याकुमारी-अपना देश अपनी माटी’ का नारा लगाने वाले छोटे से बच्चे को भी होता है। पर अफसोस कॉन्ग्रेस यह समझ नहीं पाई या समझना ही नहीं चाहती। शायद यही उसकी समस्या के मूल में है।

आम धारणा में इस बात की भी मजबूत पैठ है कि जम्मू-कश्मीर पूरी तरह भारत में घुलमिल नहीं पाया तो इसकी वजह नेहरू की नीतियॉं थी। अब आप इतिहास की पंक्तियों को अपने सिरे से व्याख्यायित करने की कितनी भी कोशिशें कर ले, आरएसएस और भाजपा के दुष्प्रचार का जितना रोना रोए, यह धारणा इतनी गहरी है कि उसे रातोंरात मिटाना मुमकिन नहीं। एक तरह से मोदी सरकार ने इस बिल के माध्यम से कॉन्ग्रेस को यह मौका दिया ​था कि वह जनभावना के सम्मान के नाम पर साथ आकर कश्मीर पर नेहरू की कथित भूलों से छुटकारा पाकर खुद को नए पायदान पर खड़ा कर ले।

लेकिन, तब सरकार की हर बात का विरोध करने की विपक्ष की अघोषित भूमिका का क्या होता? इसका रास्ता कॉन्ग्रेस के ही महासचिव ज्योतिरादित्य सिंधिया के ट्वीट में छिपा है। उन्होंने ट्ववीट किया था, “जम्मू कश्मीर और लद्दाख को लेकर उठाए गए कदम और भारत देश में उनके पूर्ण रूप से एकीकरण का मैं समर्थन करता हूॅं। संवैधानिक प्रक्रिया का पूर्ण रूप से पालन किया जाता तो बेहतर होता, साथ ही कोई प्रश्न भी खड़े नहीं होते। लेकिन ये फैसला राष्ट्रहित में लिया गया है और मैं इसका समर्थन करता हूॅं।’

इसी तरह के रुख से कॉन्ग्रेस अपना विपक्ष का कथित धर्म भी निभा लेती और राष्ट्रधर्म के लिहाज से पूरे नंबर भी पाती। सदन में नेहरू की गलतियों का बार-बार जिक्र होने से होने वाली असहजता से भी छुटकारा पा लेती।

लेकिन, कॉन्ग्रेस ने खुद ही अपने हाथ जलाने का फैसला किया। हालॉंकि अब उसे नुकसान का एहसास हो रहा है। बताया जाता है कि 7 अगस्त को पार्टी कार्यसमिति की बैठक में युवा बिग्रेड और वरिष्ठ नेताओं के बीच जमकर बहस हुई। युवा बिग्रेड ने आर्टिकल 370 को हटाने के पक्ष में व्यापक जनभावना को देखते हुए इसका विरोध करने पर सवाल उठाए। बताया जाता है कि झारखंड के प्रभारी और पूर्व केन्द्रीय राज्य मंत्री आरपीएन सिंह ने इस बैठक में कहा, “नीतिगत आधार पर पार्टी का नजरिया भले सही हो, लेकिन जनता को इस बारे में समझाना मुश्किल है। इसलिए जनता के बीच जाने के लिए इस मसले पर सहज और व्यवहारिक नजरिया क्या होना चाहिए, यह पार्टी को स्पष्ट करना होगा।” अब इस मसले पर 9 अगस्त को पार्टी ने सभी राज्यों के नेताओं की विशेष बैठक बुलाई है।

लेकिन, इन कवायदों से पार्टी का तब तक भला होता नहीं दिख रहा जब तक गुलाम नबी आजाद जैसे नेता सेल्फ गोल करने वाला बयान देते रहेंगे। आजाद का ताजा बयान घाटी में कश्मीरियों के साथ बतियाते, खाना खाते राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल के वीडियो पर है। बकौल आजाद, “वीडियो के लिए आप पैसा देकर किसी को भी अपने साथ ला सकते हैं।”

वजूद बचाने के इस सवाल का जवाब बिन अध्यक्ष चल रही कॉन्ग्रेस को खुद ही तलाशना होगा। जैसा आउटलुक के एक लेख में हरिमोहन मिश्र कहते हैं, “देखना है कॉन्ग्रेस अपने संकट से निजात पाने का कोई तरीका ढूँढ़ पाती है या देश की सबसे पुरानी पार्टी इतिहास के पन्नों में समा जाती है।” जाहिर है, इस भँवर से निकलने का रास्ता ढूँढ़ने में पार्टी जितनी देरी करेगी 370 के प्रावधानों की तरह इतिहास में उसके दफन होने के मौके भी उतने ही मजबूत होते जाएँगे।

370 पर त्वरित सुनवाई से SC का इनकार, क्या UN भारत के संविधान संशोधनों पर रोक लगा सकता है?

सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 370 को लेकर त्वरित सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। बता दें कि अधिवक्ता एमएल शर्मा ने अनुच्छेद 370 पर जारी किए गए राष्ट्रपति के नोटिफिकेशन को अदालत में चुनौती दी है। शर्मा ने अपनी दलील में कहा कि इस मसले को संयुक्त राष्ट्र तक ले जाया जा सकता है, जिसके बाद हम कश्मीर को खो सकते हैं। इस पर अदालत ने पूछा कि क्या संयुक्त राष्ट्र (UN) भारत के संविधान संशोधनों पर रोक लगा सकता है?

जस्टिस रमना ने अधिवक्ता शर्मा को इन त्रुटियों को दूर करने को कहा और बताया कि इस मसले को उचित समयावधि के भीतर लिस्ट किया जाएगा। कॉन्ग्रेस नेता तहसीन पूनावाला ने भी कश्मीर में कर्फ्यू हटाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। जस्टिस रमना ने कहा कि इसमें कब सुनवाई होगी, यह सीजेआई गोगोई तय करेंगे।

बता दें कि भारत सरकार ने अनुच्छेद 370 के अहम प्रावधानों को निरस्त कर दिया, जिसके बाद जम्मू कश्मीर को मिला विशेष राज्य का दर्जा भी नहीं रहा। इससे राज्य को दो अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेशों के रूप में पुनर्गठित करने की राह आसान हो गई। फलस्वरूप, जम्मू कश्मीर और लद्दाख के रूप में देश को दो नए केंद्र शासित प्रदेश मिले।

राजस्थान पुलिस की प्रताड़ना और धमकियों से तंग आकर दलित महिला ने की आत्महत्या

राजस्थान में एक दलित महिला द्वारा आत्महत्या करने का मामला सामने आया है। परिजनों ने आरोप लगाया है कि पुलिस द्वारा पिटाई और प्रताड़ना के बाद महिला ने यह क़दम उठाया। मामला भरतपुर स्थित सेवर थाना का है, जहाँ पुलिस द्वारा उक्त महिला की पिटाई किए जाने बात सामने आई है। आक्रोशित परिजनों ने शव का पोस्टमॉर्टम कराने से इनकार कर दिया, जिसके बाद उच्चाधिकारियों ने उन्हें समझाया। अधिकारियों द्वारा स्थिति संभालने के बाद महिला का पोस्टमॉर्टम हो सका।

परिजनों ने आरोप लगाया कि सेवर थाना की पुलिस महिला को उठा कर ले गई थी, जहाँ उसे प्रताड़ित किया गया और गालियाँ दी गईं। महिला को पुलिस द्वारा आए दिन धमकियाँ दी जा रही थीं। इन सबसे तंग आकर दलित महिला ने यह क़दम उठाया। उक्त महिला का पति जुलाई 2019 में पड़ोस की एक लड़की के साथ भाग गया था, जिसके बाद लड़की के परिजनों ने शिकायत दर्ज कराई।

इसी मामले की छानबीन के दौरान पुलिस ने उक्त महिला को प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। पुलिस ने महिला व उसके परिवार के एक अन्य व्यक्ति को हिरासत में लेकर प्रताड़ित किया, ऐसा परिजनों ने आरोप लगाया है। महिला को पीट-पीट कर उसके पति के बारे में पूछा गया। इसके बाद घर लौट कर महिला ने दरवाजा बंद किया और फाँसी लगा ली।

हालाँकि, पुलिस ने इन सभी आरोपों से इनकार किया है और कहा है कि मामले की अभी जाँच चल रही है। आत्महत्या के पहले महिला ने अपनी छोटी बहन को अपने साथ हुई प्रताड़ना की जानकारी दी।

जम्मू-कश्मीर का मामला सुलझाने के बाद अमित शाह का अगला टारगेट अवैध बांग्लादेशी घुसपैठ

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कश्मीर में 370 का प्रभाव समाप्त करने वाली घोषणा करने के बाद अपनी पहली अंतरराष्ट्रीय बैठक के दौरान बांग्लादेश को पूर्वोत्तर में हो रही अवैध घुसपैठ से अवगत कराया। उन्होंने गृह मंत्री स्तर की वार्ता की 7 वीं बैठक में बांग्लादेश के उनके समकक्ष बैठे असद-उज-जमां (बांग्लादेश ) खान से विभिन्न द्विपक्षीय मुद्दों पर विस्तार से बातचीत की। अमित शाह के गृह मंत्री का पदभार संभालने के बाद किसी विदेशी नेता के साथ पहली भेंटवार्ता थी।

इस बैठक के बाद केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने फेसबुक पर पोस्ट लिखकर जानकारी दी कि उन्होंने भारत और बांग्लादेश के द्विपक्षीय संबंधों पर व्यापक चर्चा की। वहीं मीडिया रिपोर्टों की मानें तो आधिकारिक बयान में बताया गया कि गृहमंत्री शाह ने विशेष रूप से पूर्वोत्तर भारत में घुसपैठ की समस्या का समाधान खोजने के मद्देनजर सीमा पार के लोगों से इस विषय पर भारत की चिंता को साझा किया।

यह बैठक 31 अगस्त को असम राष्ट्रीय नागरिक पंजी की अंतिम सूची के प्रकाशन से पहले हुई है। जिसमें दोनों देशों के गृह मंत्रियों ने सीमा पार अपराधों के खतरे को रोकने की आवश्यकता पर जोर दिया। साथ ही गृह मंत्रालय की ओर से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया कि ‘एक सुरक्षित सीमा का हमारा उद्देश्य’ हासिल करने के लिए अधिक से अधिक सहयोग की आवश्यकता पर सहमति व्यक्त की गई।

अंतराष्ट्रीय स्तर पर हुई गृहमंत्री की 7वीं बैठक में दोनों पक्षों ने सीमाओं पर सुरक्षा और बुनियादी ढाँचे से संबंधित लंबित पड़े मुद्दों की भी समीक्षा की और मामलों को तेजी से हल करने पर भी सहमति जताई। इस बैठक के दौरान मंत्रियों ने दोनों देशों द्वारा सुरक्षा और सीमा प्रबंधन सहित हर क्षेत्र में पहले से कहीं अधिक करीब से काम करने पर संतोष व्यक्त किया।

ऋषि को गोली मार कर इमरान, ख़ालिद, अनवर ने कहा- ये कश्मीर नहीं है, 370 का जश्न नहीं चलेगा

राजस्थान में एक युवक की सिर्फ़ इसीलिए हत्या कर दी गई क्योंकि वह अपने दोस्तों के साथ जन्मदिन की पार्टी मना रहा था। मृतक ऋषिराज जिंदल बजरंग दल का कार्यकर्ता भी था। मामला झालावाड़ के पिड़ावा का है, जहाँ ऋषिराज जिंदल और उनके अन्य दोस्त एक बर्थडे पार्टी सेलिब्रेट कर रहे थे। तभी इमरान, खालिद और अनवर ने इसे कश्मीर में अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त किए जाने का जश्न समझ लिया। बता दें कि देश भर में भारत सरकार के इस निर्णय को लेकर मिठाइयाँ बाँटी गईं और लोगों ने सरकार का धन्यवाद किया।

लेकिन, इमरान ने बर्थडे पार्टी को अनुच्छेद 370 से जुड़ा जश्न समझ कर धमकी दी। उसने कहा कि यहाँ कोई जश्न नहीं होगा। इमरान ने धमकी दी कि यह कश्मीर नहीं पिड़ावा है और यहाँ जश्न नहीं चलेगा। जब पार्टी कर रहे लोग निकलने लगे, तभी इमरान अपने दोस्तों के संग अचानक से वापस आया और उसने विजय शर्मा नामक व्यक्ति को लात मार कर नीचे गिरा दिया। जब तक कोई कुछ समझ पाता, इमरान ने ऋषिराज जिंदल के सीने में गोली मार दी

इमरान ने ऋषि को गोली मारने के बाद भी फायरिंग की और अंधेरे का फायदा उठा कर दोस्तों संग भाग निकला। बजरंग दल के कार्यकर्ताओं में इस घटना को लेकर काफ़ी रोष है। उन्होंने इमरान, अनवर और खालिद को तुरंत गिरफ़्तार किए जाने की माँग की। पुलिस ने भी अपने बयान में इन तीनों नामों की पुष्टि की है। बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने बताया कि अन्य लोगों पर भी गोली चलाई गई थी लेकिन वो सब किसी तरह बच निकले।

राजस्थान पत्रिका के झालावाड़ संस्करण में छपी ख़बर

बजरंग दल के कार्यकर्ता धरने पर बैठे हुए हैं और उन्होंने कहा है कि जब तक पुलिस कोई ठोस कार्रवाई नहीं करती तब तक उनका विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा। अग्रवाल समाज ने भी पुलिस से मिल कर ऋषिराज हत्याकांड में दोषियों पर सख्त कार्रवाई करने की माँग की है।

अनुच्छेद 370: पाकिस्तानी सांसद मुशाहिदुल्लाह ने मंत्री फवाद चौधरी को कहा- कुत्ता, दब्बू और….

भारत सरकार द्वारा जम्मू कश्मीर में विकास व रोजगार को पटरी पर लाने के लिए अनुच्छेद-370 के अहम प्रावधानों को निरस्त कर दिया और राज्य को दो अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेशों के रूप में पुनर्गठित किया।इसका असर न सिर्फ़ भारत में बल्कि सीमा पार पाकिस्तान में भी देखने को मिल रहा है। पाकिस्तान इस निर्णय से बौखलाया हुआ है और भारत का आंतरिक मसला होने के बावजूद इसमें टाँग अड़ाने को आतुर है। आर्थिक महासंकट से जूझ रहे पाकिस्तान के संसद में ही सिर फुटव्वल देखने को मिला।

मामल उस समय अजीब हो गया जब एक पाकिस्तानी सीनेटर ने मंत्री को ही कुत्ता बता दिया। बुधवार (जुलाई 7, 2019) को ज्वाइंट सेशन के दौरान पाकिस्तान मुस्लिम लीग (PML-N) के सांसद मुशाहिदुल्लाह खान ने मंत्री फवाद चौधरी को कुत्ता कह कर सम्बोधित किया। पाकिस्तान ने जम्मू कश्मीर के मुद्दे पर पार्लियामेंट का जॉइंट सेशन बुलाया था। इस दौरान सभी सांसद अपनी-अपनी बात रख रहे थे।

इसी क्रम में सीनेटर मुशाहिदुल्लाह ख़ान ने पाक पीएम इमरान खान की आलोचना शुरू कर दी, जिसके बाद मंत्री फवाद चौधरी ने उन्हें टोका। फवाद चौधरी भारत से राजनयिक संबंधों को तोड़ने की वकालत करते रहे हैं और अनुच्छेद-370 पर भारत सरकार के निर्णय के बाद उन्होंने भारत सरकार को फासिस्ट कहा था। फवाद चौधरी को मुशाहिल्लाह खान ने दब्बू भी कहा। खान ने कहा, “तुम बेशर्म हो। मैंने तुझे घर पर बाँध कर रखा था लेकिन कुत्ते तुम यहाँ आ गए।

बौखलाए पाकिस्तान ने भारत के साथ व्यापारिक रिश्तों को ख़त्म करने की बात कही और राजनयिक संबंधों को भी कम कर दिया है। साथ ही पाकिस्तान ने इस मसले को संयुक्त राष्ट्र और उसके अंतर्गत आने वाले सुरक्षा परिषद तक ले जाने का निर्णय लिया है। संसद में पाक पीएम इमरान भी झल्लाए हुए नज़र आए।

CBI ने कहा कुलदीप सेंगर पर बलात्कार के आरोप सही, तीस हजारी कोर्ट में पेश किए पुख्ता सबूत

उन्नाव रेप मामले को लेकर कोर्ट में चल रही सुनावाई के दौरान आरोपित कुलदीप सेंगर के खिलाफ़ CBI ने कोर्ट में न्यायाधीश के सामने कहा है कि उनकी जाँच में मालूम चल चुका है कि सेंगर पर 4 जून 2017 को पीड़िता के साथ बलात्कार और शशि सिंह के साथ साजिश में शामिल होने के आरोप सही है। जाँच एजेंसी ने पीड़िता के बयान को आधार बनाते हुए दावा किया कि सेंगर के खिलाफ इन आरोपों में केस चलाया जा सकता है।

CBI ने कहा शशि सिंह पीड़िता को नौकरी दिलाने के बहाने कुलदीप सिंह सेंगर के घर ले गया था। उस वक्त वहाँ पर कोई भी नहीं था। शशि पीड़िता को घर के अंदर पीछे के दरवाजे से ले गया। पीड़िता के अंदर घुसते ही उसे वहाँ कुलदीप दिखा, जिसने पीड़िता का हाथ खींचा और कमरे के अंदर ले गया। वहाँ उसके साथ बलात्कार हुआ। घटना के समय पीड़िता 18 वर्ष की नहीं थी। इसलिए पॉक्सो एक्ट में भी सेंगर और शशि सिंह आरोपित हैं।

बता दें कि बचाव पक्ष ने इस दौरान दलील दी कि पीड़िता के बयान अविश्वस्नीय हैं। साथ ही उन्होंने पीड़िता के बालिग होने का भी दावा किया। इस मामले के मद्देनजर अगली सुनवाई आज यानी शुक्रवार को होगी।

हालाँकि, सेंगर अभी भी खुद को बेकसूर ही बता रहे हैं। लेकिन फिलहाल उन्हें दिल्ली की तिहाड़ जेल में शिफ्ट कर दिया गया है। जाँच एजेंसी लगातार उनपर अपनी पकड़ कस रही है। वहीं, पीड़िता की हालत गंभीर बनी हुई है। उसे हायर सेंटर के लिए रेफर नहीं करने की लापरवाही करने वाले डॉक्टर को निदेशक प्रशासन ने अपनी जाँच में दोषी पाते हुए स्वास्थ्य विभाग को रिपोर्ट सौंपी दी है। पीड़िता को एम्स लाया गया है। जहाँ पीड़िता का ईलाज़ किया जा रहा है।

असमिया गायक भूपेन हजारिका के अलावा इन 2 हस्तियों को मिलेगा आज भारत का सर्वोच्च सम्मान

कवि, गीतकार, गायक, अभिनेता, लेखक, पत्रकार, फिल्मकार के रूप में खुद की छवि स्थापित करने वाले भूपेन हजारिका को आज देश का सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न दिया जाना है। इसके अलावा भारत के पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी और सामाजिक कार्यकर्ता नानाजी देशमुख को भी आज राष्ट्रपति द्वारा भारत रत्न सम्मान दिया जाना है।

एक ओर जहाँ असमिया गायक भूपेन हजारिका को यह भारत रत्न मरणोपरांत उनकी असाधारण प्रतिभा के कारण दिया जा रहा है तो वहीं राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को ये रत्न राजनीति में लंबी पारी के लिए दिया जा रहा है। उधर, नानाजी देशमुख को ये सम्मान देश की बड़े स्तर पर समाज सेवा करने के लिए दिया जाएगा।

इन तीनों नामों ने भारत को अपने-अपने क्षेत्र में एक नए आयाम दिए। भूपेन दा ने जैसे असम की समृद्ध लोक धरोहर को अपने गानों के माध्यम से सुंदरतापूर्वक व्याख्यायित करके दुनिया के सामने पेश किया वह अविस्मरणीय है। जबकि कोलकाता के डिप्टी अकाउंटेंट जनरल कार्यालय में बतौर क्लर्क अपना करियर शुरू करने वाले प्रणव मुखर्जी अपनी मेहनत और बुद्धिमत्ता के बल पर राजनीति से जुड़े और जिस तरह से उन्होंने इस क्षेत्र में काम किया, उसने न केवल उन्हें सराहना के लायक बनाया बल्कि देश के सर्वोच्च पद पर आसीन भी करवाया।

नानाजी देशमुख के बारे में बताया जाता है कि 1977 में जनता पार्टी की सरकार में जब मोरारजी देसाई प्रधानमंत्री बने तो उन्होंने नानाजी देशमुख को उद्योग मंत्री का पद स्वीकारने का न्यौता दिया लेकिन नानाजी ने इस प्रस्ताव को विनम्रता से नकार दिया। इसके साल भर बाद ही उन्होंने सक्रिय राजनीति से संन्यास ले लिया और रचनात्मक कार्यों में जुट गए।

अपनी ही भांजी से थे अवैध संबंध, पति नौशाद ने मामा अहमद के सिर पर हथौड़ा मार कर दी हत्या

दिल्ली में एक व्यक्ति ने अवैध संबंधों के चलते अपनी पत्नी के मामा की हत्या कर दी। मामला पंजाबी बाग़ क्षेत्र का है, आरोपित की पहचान नौशाद आलम के तौर पर हुई है। नौशाद ने पूछताछ में बताया कि उसे शक था कि शकील अहमद और उसकी पत्नी के बीच अवैध संबंध हैं। अहमद उसकी पत्नी का रिश्ते में मामा लगता था। मृतक का नाम शकील अहमद है। हालाँकि, शुरुआत में यह लगा था कि शकील की मौत करंट लगने से हुई है। उसे एक रिपेयर सेंटर में करंट लगने की बात कही गई। अस्पताल में डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

पोस्टमॉर्टम में सारा सच सामने आया। पोस्टमॉर्टम के बाद पता चला कि शकील अहमद की मौत करंट लगने से नहीं बल्कि सिर पर चोट लगने से हुई है। उसकी मौत की सूचना सबसे पहले आरोपित नौशाद आलम ने ही दी थी। नौशाद ने इस प्रकरण में एक अलग ही कहानी गढ़ रखी थी। उसने बताया था कि करंट लगने के बाद शकील का सिर दीवार में भिड़ गया, जिससे उसकी मौत हो गई

नौशाद और शकील एक ही रिपेयरिंग कम्पनी में पिछले 9 महीनों से काम कर रहे थे। नौशाद ने पुलिस को बताया कि उसने अपनी पत्नी के फोन में एक रिकॉर्डिंग ऐप इनस्टॉल कर रखा था, जिससे उसे पता चलता रहे कि वह किस्से क्या बातें करती है? इसी ऐप के माध्यम से उसे पता चला कि उसकी पत्नी शकील से मिलती-जुलती है। रात को जब रिपेरिंग सेंटर में नौशाद और शकील अकेले थे, तब नौशाद ने उसके सिर पर हथौड़े से वार किया।

इसके बाद आरोपित नौशाद ने हथौड़े को धो कर उसमें टेप लपेट दिया ताकि किसी को भी शक न हो। इसके बाद उसने कम्पनी के मालिक से संपर्क कर करंट लगने की झूठी कहानी बताई। इसके बाद कम्पनी के मालिक सुमित ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।