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राहुल गॉंधी वो बच्चा हैं जिसे स्कूल नहीं जाना पर क्लासरूम में सीट सबसे आगे चाहिए

इसे सत्ता से दूरी की छटपटाहट कहें, या फिर मोदी से घृणा, या यह कुछ और जिसके कारण कॉन्ग्रेस का शीर्ष परिवार अब लोकतांत्रिक परंपराओं के सम्मान से भी पीछे हटने लगा है। 2014 के चुनावी हार के बाद कॉन्ग्रेस ने हरेक लोकतांत्रिक संस्था को निशाना बनाया। चुनाव आयोग से लेकर न्यायपालिका तक की निष्पक्षता पर सवाल उठाए ताकि मोदी सरकार पर लोकतंत्र की हत्या करने का आरोप मढ़ सके।

2019 के आम चुनावों में यह रणनीति औंधे मुॅंह गिरी और अब लोकतांत्रिक परम्पराएँ कॉन्ग्रेस के निशाने पर हैं। बेटे की जिद की वजह से हाल ही में कॉन्ग्रेस की अंतरिम अध्यक्षा बनीं सोनिया गॉंधी और उनके सांसद बेटे राहुल गॉंधी इस बार लाल किले पर स्वतंत्रता दिवस के जश्न से गायब रहे। ज्यादा दिन नहीं बीते, माँ-बेटे की इस जोड़ी ने प्रणब मुखर्जी को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से नवाजे जाने के मौके पर पहुॅंचना जरूरी नहीं समझा था।

यह समझना मुश्किल है कि सोनिया और राहुल लाल किला क्यों नहीं पहुॅंच पाएँ? जबकि, लाल किला से करीब छह किलोमीटर दूर कॉन्ग्रेस मुख्यालय में इस मौके पर दोनों ही मौजूद थे। इसी तरह कॉन्ग्रेस के दिग्गज नेता रहे पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, जिन्होंने गॉंधी परिवार की तीन पीढ़ियों के साथ काम किया है, के लिए मॉं-बेटे के पास समय नहीं होना भी समझ में नहीं आता।

लेकिन, यही कॉन्ग्रेस लोकतांत्रिक परंपराओं की दुहाई देकर राहुल गॉंधी के लिए पहली कतार में सीट मॉंगने का कोई मौका जाया नहीं करती। पार्टी ने हाल ही में लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से अपने विशेषाधिकार का इस्तेमाल कर सदन की पहली कतार में राहुल के लिए सीट का जुगाड़ करने को कहा था। हालॉंकि स्पीकर ने नियमों का हवाला देकर उसकी मॉंग ठुकरा दी थी।

इन्हीं राहुल गॉंधी को वर्ष 2018 में जब राजपथ पर आयोजित गणतंत्र दिवस परेड में पहली कतार में बैठने की जगह नहीं मिली थी तो सोशल मीडिया में लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान नहीं किए जाने की दुहाई देते हुए लिबरलों की प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई थी। कॉन्ग्रेस पार्टी के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने ट्वीट किया था, “मोदी सरकार की ओछी राजनीति जग ज़ाहिर! कॉन्ग्रेस अध्यक्ष श्री राहुल गॉंधी को गणतंत्र दिवस के राष्ट्रीय पर्व पर अंहकारी शासकों ने सारी परंपराओं को दरकिनार करके पहले चौथी पंक्ति और फिर छठी पंक्ति में जानबूझकर बिठाया। हमारे लिए संविधान का उत्सव ही सर्व प्रथम है।”

लगता है कि आम चुनावों में करारी शिकस्त के बाद गॉंधी परिवार ने सुरजेवाला की ओछी राजनीति वाली टिप्पणी को सच साबित करने की ठान ली है। इसलिए, भारत से जुड़ी हर परंपराओं से वह दूरी बना रहे हैं। मानों इस देश की जनता को कहना चाहते हों, “मूर्खों वोट तुमने मोदी को दिया तो परंपराओं के सम्मान का ठेका हम क्यों ले। तुमने फिर से भाजपा को चुना। राफेल के नाम पर हमने इतना झूठ गढ़ा फिर भी मोदी को चुना। तो हम भी नहीं मानेंगे लोकतांत्रिक मूल्यों को। उड़ाएँगे इसकी धज्जियॉं। तुम निरीह जनता क्या कर लोगे। आखिर हम नेहरू-गॉंधी नाम वाले जो ठहरें।”

यकीन न हो तो सोनिया के शब्दों पर ही गौर कर लें, जो 15 अगस्त के मौके पर कॉन्ग्रेस मुख्यालय में उनके मुख से निकले, “हमें अन्याय, असहिष्णुता और भेदभाव के हर कृत्य के खिलाफ एक राष्ट्र के रूप में खड़ा होना होगा ताकि सही मायनों में हम आजादी को संजोए रख सकें।”

असल में, भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था के जश्न के मौकों से देश की मुख्य विपक्षी पार्टी और सबसे पुरानी पार्टी के नेताओं की बेरुखी उस हताशा से उपजी जान पड़ती है जो उनमें उस नेता को देख पैदा होती है जिसे कुछ महीने पहले तक लिबरल देश का अगला प्रधानमंत्री बता रहे थे। राहुल गॉंधी की हरकत उस लाडले जैसी लगती है जो स्कूल तो नहीं जाना चाहता पर चाहता है कि क्लासरूम की अगली सीट उसे ही मिले। उसकी जब मर्जी हो उस सीट पर जाकर बैठ जाए। भले ही परीक्षा में नंबर दूसरे बच्चों के ज्यादा आते हों पर गॉंधी सरनेम तो केवल राहुल का ही है!

भू माफिया आजम खान मुसिबत में: लग्जरी ‘हमसफर’ रिजॉर्ट पर बुलडोजर, मुलायम सिंह ने किया था लोकार्पण

भू माफिया आजम खान की मुश्किलें लगातार बढ़ती ही जा रही है। जौहर यूनिवर्सिटी के नाम जमीन हड़पने के आरोपों का सामना कर रहे आजम खान के साथ ही अब उनके बेटे और सपा विधायक अब्‍दुल्‍ला आजम खान पर भी जमीन पर कब्‍जा करने का आरोप लगा है। अवैध कब्जों पर चलाए जा रहे मुहिम में रामपुर पुलिस प्रशासन का बुलडोजर उनके लग्जरी रिजार्ट हमसफर पर चला। प्रशासन ने उनके रिजार्ट के अवैध हिस्से को गिरा दिया। इस रिजार्ट के मालिक आजम खान के बेटे अब्दुल्ला आजम हैं।

बता दें कि इस लग्जरी हमसफर रिजॉर्ट का निर्माण समाजवादी पार्टी के शासनकाल में करवाया गया था। करोड़ों की लागत से बने इस रिजॉर्ट का लोकार्पण पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने किया था। सिंचाई विभाग का आरोप है कि बरकुसिया नाले की करीब एक हजार वर्ग मीटर जमीन पर अवैध कब्जा करके रिजॉर्ट बनाया गया था। शुक्रवार (अगस्त 16, 2019) को प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए रिजॉर्ट के अवैध हिस्से को जमींदोज कर दिया। सुबह सिंचाई विभाग की टीम पुलिस फोर्स को लेकर मौके पर पहुँची और रिजॉर्ट के दीवार को तोड़ दिया।

प्रशासन ने विरोध की आशंका को देखते हुए भारी पुलिस फोर्स तैनात किया था। इस मामले में सिंचाई विभाग की तरफ से अब्‍दुल्‍ला को नोटिस जारी किया जा चुका है। फिलहाल, इस कार्रवाई के संबंध में आजम खान के परिवार की तरफ से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

गौरतलब है कि आजम खान पर किसानों की जमीन पर अवैध कब्जा करके विश्वविद्यालय बनाने का भी आरोप है। उत्तर प्रदेश पुलिस ने पिछले तीन महीनों में उनके खिलाफ दर्जनों मामले दायर किए हैं। वहीं प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी आजम खान पर कार्रवाई की है। ईडी ने आजम खान पर मनी लॉन्ड्रिंग के तहत केस दर्ज किया है। जमीनों पर अवैध कब्जा करने के मामलों के बाद राज्य प्रशासन ने उन्हें भू माफिया घोषित कर दिया है।

दलित युवक के नेत्रहीन पिता ने की आत्महत्या, बेटे की हत्या की जाँच में लापरवाही का लगाया आरोप

राजस्थान पुलिस द्वारा बेटे की हत्या मामले में संवेदनहीनता दिखाने से परेशान दलित युवक के नेत्रहीन पिता ने गुरुवार (15 अगस्त) को ज़हर खाकर आत्महत्या कर ली। दरअसल, पिछले महीने फसला गाँव में एक मुस्लिम महिला को बाइक से चोट लगने के बाद भीड़ द्वारा बाइक सवार युवक की लोगों ने बेरहमी से पीट-पीट कर हत्या कर दी थी।

रिश्तेदारों के अनुसार, रतिराम जाटव (मृतक) पुलिस से परेशान था क्योंकि वो उसके बेटे हरीश जाटव की मौत की जाँच को दबाने की कोशिश कर रही थी। उन्होंने आगे कहा कि अपने अंतिम क्षणों में भी पुलिस पर आरोप लगाया कि वो उसके बेटे की हत्या के आरोपितों को बचाने की कोशिश कर रही है। चौंकाने वाली बात यह है कि अलवर पुलिस ने दावा किया है कि रतिराम को मृत अवस्था में अस्पताल लाया और उन्होंने मामले में जाँच शुरू कर दी है।

पिछले महीने, रतिराम का बेटा हरीश जाटव राजस्थान के अलवर में चोपांकी पुलिस स्टेशन के अंतर्गत आने वाले फसला गाँव के बाज़ार से गुजर रहा था, तभी एक मुस्लिम हकीम (पारंपरिक मुस्लिम महिला चिकित्सक) उसकी बाइक से टकरा गई। हादसे के बाद गुस्साए स्थानीय लोगों ने हरीश की जमकर पिटाई कर दी। इसके दो दिन बाद ही उसने दम तोड़ दिया। 

हरीश के परिवार ने आरोप लगाया कि उसकी बाइक से महिला को टक्कर लगने के बाद, हरीश को उमर शेर और उसके साथियों द्वारा बेरहमी से पीटा गया था। परिवार ने आईपीसी की धारा-323, 343 और एससी/ एसटी (अत्याचारों की रोकथाम) अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत FIR दर्ज करवाई है।

सब्जी वाले का वेश बनाकर NIA ने पकड़ा आतंकी, मजदूर बनकर रच रहा था हमले की साजिश

मध्यप्रदेश के इंदौर जिले से राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने स्वतंत्रता दिवस से दो दिन पहले एक आतंकी को गिरफ्तार किया। आतंकी का नाम जाहिरुल शेख है। वह साल 2014 में पश्चिम बंगाल के वर्धमान में हुए बम विस्फोट का आरोपित है।

साल 2014 में वर्धमान में हुए धमाकों के बाद एनआईए जाहिरुल की तलाश कर रही थी, लेकिन बहुत कोशिशों के बाद भी वह पकड़ नहीं आ रहा था। ऐसे में कुछ दिन पहले जाँच एजेंसी को शेख के इंदौर के आजाद नगर थाना क्षेत्र के कोहिनूर कालोनी में होने की खबर मिली। जब जाँच की गई तो पता चला आतंकी वहाँ रहकर पेंटर का काम करता है और साथ में मजदूरी करता है।

प्राप्त जानकारी के आधार पर एनआईए के अधिकारियों का दस्ता इंदौर पहुँचा और वहाँ की पुलिस को भी अपने प्लॉन के बारे में कुछ नहीं बताया। इंदौर में एनआईए ने अपने स्तर पर आतंकी के लिए जाल बिछाया और जिस इलाके में शेख रहता था वहाँ उन्होंने सब्जी बेचनी शुरू कर दी। सब्जी बेचने के बहाने एनआईए के अधिकारियों ने शेख के सही ठिकाने का पता लगाया। जब सारी जानकारियाँ एकत्रित हो गई तो उन्होंने पुलिस की मदद ली और जाहिरुल को धर पकड़ा।

खबरों के मुताबिक एडीजी वरुण कपूर ने बताया कि जिस मकान में शेख किराए पर रहता था उसके मकान मालिक शाकिर खान ने अपने किराएदार का वेरिफिकेशन नहीं करवाया था। शेख लगभग 2 सालों से उसी ठिकाने पर रह रहा था। वह अलग-अलग शहरों में मजदूर बनके काम करता था।

बता दें कि जाहिरुल उर्फ जाकिर पश्चिम बंगाल के नादिया का रहने वाला है और वह आतंकी संगठन जमात-उल-मुजाहिद का सक्रिय सदस्य है। उसने आतंकी विस्फोट और हथियार चलाने की ट्रेनिंग भी हासिल की हुई हैं। बताया जा रहा है कि इस बार भी वह किसी खूँखार आतंकी वारदात को अंजाम देने की फिराक में इंदौर में रुका हुआ था। लेकिन एनआईए की सूझ-बूझ ने उसे धर दबोचा। अब वह एजेंसी के शिकंजे में और उससे पूछताछ चल रही है।

‘जानवरों की तरह कैद करके रखा है’: हमेशा ऐशो-आराम भोगने वाली CM-पुत्री ने रोया दुखड़ा

पीडीपी प्रमुख और जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की बेटी इल्तिजा जावेद ने एक वॉयस नोट जारी करते हुए लिखा कि उनकी माँ महबूबा मुफ्ती की गिरफ्तारी के बाद अब उन्हें भी अपने ही घर में नजरबंद कर दिया गया है। उन्होंने इस बारे में गृहमंत्री अमित शाह को कहा, “आज जब बाकी देश भारत के स्वतंत्रता दिवस का जश्न मना रहा है, कश्मीरियों को जानवरों की तरह कैद करके रखा गया है और उन्हें बुनियादी मानवाधिकारों से वंचित किया गया है।” उन्होंने अमित शाह को लिखे पत्र में कहा है कि उन्हें घर में नजरबंद करके धमकी दी गई है कि अगर उन्होंने दोबारा मीडिया से बात की, तो इसके परिणाम भुगतने पड़ेंगे।

इल्तिजा का कहना है कि जब कोई उनसे मिलने के लिए आता है, तो उन्हें इसकी सूचना नहीं दी जाती है और उन्हें अपने घर से बाहर निकलने की भी अनुमति नहीं है। उनका कहना है कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश में एक नागरिक को बोलने का अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि उन पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और अपराधी की तरह बर्ताव किया जा रहा है। इल्तिजा ने कहा कि जिन कश्मीरियों ने आवाज उठाई है, उनके साथ वो भी जान का खतरा महसूस कर रही हैं।

इससे पहले भी इल्तिजा ने वॉयस नोट जारी करते हुए अपनी माँ की गिरफ्तारी और प्रदेश में संचार सुविधा पर विराम लगाने को लेकर सवाल किया था। गौरतलब है कि जम्मू कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के पर कतरने के बाद सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनज़र पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती और नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रमुख उमर अब्दुल्ला सहित जम्मू-कश्मीर के कई राजनेताओं को हिरासत में रखा गया है।

लेकिन जरा सोचिए! आज जबकि राज्य में महबूबा मुफ्ती की सरकार नहीं है और केंद्र सरकार प्रदेश में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासनिक तौर पर अपना काम कर रही है, तो उनकी बेटी इल्तिजा जावेद को काफी परेशानी हो रही है। मगर जब महबूबा मुफ्ती 3 बार मुख्यमंत्री रहीं, तब तो इनको कोई दिक्कत नहीं हो रही थी, क्योंकि उस समय परेशानियों का सामना इन्हें नहीं, बल्कि जनता को करना पड़ता था। मुख्यमंत्री तक अपनी आवाज पहुँचाने के लिए पत्र, ईमेल, हेल्पलाइअन नंबर का सहारा लेना पड़ता था। तब कश्मीरी जनता सीधे तौर पर तो मुख्यमंत्री से बात नहीं कर सकते थे, क्योंकि तब उनकी सुरक्षा का सवाल था!

आम कश्मीरी जनता का भाँति आज महबूबा मुफ्ती की बेटी भी पत्र और वॉयस मैसेज के जरिए अपनी आवाज सरकार (केंद्र सरकार क्योंकि अब जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश है) तक पहुँचा रही हैं, क्योंकि आज देश की सुरक्षा का सवाल है। इसलिए इल्तिजा जावेद या किसी को भी इससे कोई दिक्कत या परेशानी नहीं होनी चाहिए। और वैसे भी ये हमेशा के लिए तो नहीं किया गया है। जब सरकार को लगेगा कि स्थिति सामान्य हो गई है, और देश की सुरक्षा पर कोई खतरा नहीं है, तो फिर सब कुछ सुचारू रूप से चालू कर दिया जाएगा।

इल्तिजा जावेद को सिर्फ मुख्यमंत्री की बेटी के तौर पर नहीं सोचना चाहिए बल्कि एक आम कश्मीरी नागरिक के तौर पर सोचना चाहिए। हर नागरिक को समान अधिकार मिले हैं, जिस दिन नेता-पुत्रों-पुत्रियों को यह बात समझ में आ जाएगी, हर बात पर अधिकारों का रोना रोने वाली इनकी हेकड़ी खत्म हो जाएगी।

आर माधवन को माओवंशी लिबरपंथी क्यों दे रहे हैं गालियाँ…

बॉलीवुड और तमिल फिल्मों में बड़े पैमाने पर काम करने वाले लोकप्रिय अभिनेता रंगनाथन माधवन (आर माधवन) ने सभी को रक्षाबंधन की शुभकामनाएँ दी और सोशल मीडिया पर अपने बेटे के साथ खुद की एक फ़ोटो शेयर की। इस फ़ोटो में दोनों ने जनेऊ पहन रखा है। फ़ोटो में दिख रहा है कि आर माधवन का बेटा उनकी बहन की अनुपस्थिति में अपने पिता के हाथ पर राखी बाँध रहा है।

इस फ़ोटों के लिए आर माधवन को लिबरल गैंग द्वारा ट्रोल किया जा रहा है। उनके अनुसार, जनेऊ, यज्ञोपवीतम या जिसे तमिल में पूनल कहा जाता है, जातिवाद का प्रतीक है और माधवन को अपने पूर्वजों की परंपराओं को बनाए रखने के लिए ख़ुद पर शर्म आनी चाहिए।

लिबरल्स के अनुसार, माधवन को अपनी पहचान को लेकर शर्मिंदा होना चाहिए।

रक्षाबंधन मनाने के लिए भी माधवन पर हमला किया गया।

आज का दिन अवनी अवित्तम का भी शुभ दिन है, जिस दिन ब्राह्मण अपने जनेऊ बदलते हैं। अभिनेता आर माधवन ने इंस्टाग्राम पर ख़ुद की एक फ़ोटो पोस्ट की जिसमें उन्होंने सभी को इस दिन की शुभकामनाएँ दी।

लिबरल्स गलियारे में, विशेष रूप से द्रविड़वादी राजनीति में, पूनल को नरसंहार और उत्पीड़न के प्रतीक से जोड़ा गया। इसे जातिवाद का प्रतीक माना जाता है, न कि हिन्दुओं के एक विशेष वर्ग की परंपराओं का। नाजी जर्मनी में यहूदियों के ख़िलाफ़ घृणा की तर्ज पर नरसंहार का प्रचार मुख्यधारा की द्रविड़वादी राजनीति में काफी प्रचलित है। इस प्रकार, यह वास्तव में आश्चर्य की बात नहीं है कि माधवन को उनकी हाल की फ़ोटो के लिए ट्रोल किया जा रहा है।

इससे पहले, माधवन को कुछ लिबरल्स द्वारा पीएम मोदी के अभियान का समर्थन करने के लिए भी ट्रोल किया गया था। पीएम मोदी और चीन के प्रधानमंत्री शी जिनपिंग के बीच बातचीत का मज़ाक उड़ाने वाली कॉन्ग्रेस पार्टी ने उन्हें ‘सेक्यूलर लिबरल’ का समर्थन करने के लिए आमंत्रित भी किया था।

अरुण जेटली की हालत गंभीर, फिलहाल वेंटिलेटर पर AIIMS में: मिलने पहुँचे राष्ट्रपति कोविंद

लंबे समय से बीमार चल रहे पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली से मिलने आज देश के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद एम्स गए। खबरों की मानें तो अरुण जेटली की तबीयत इस समय गंभीर है। वह एंडोक्रिनोलॉजिस्ट्स, कार्डियोलॉजिस्ट्स और नेफ्रोलॉजिस्ट्स की देखरेख में पिछले एक हफ्ते से एम्स के आईसीयू में हैं। फिलहाल उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया है।

9 अगस्त को साँस की शिकायत होने कारण उन्हें रात में एम्स में भर्ती कराया गया था और तभी अस्पताल ने उनकी मेडिकल रिपोर्ट भी जारी की थी। हालाँकि, उसके बाद से अब तक आधिकारिक तौर पर अस्पताल की ओर से कुछ भी नहीं बताया गया है।

पूर्व वित्त मंत्री की जाँच के बाद अस्पताल के वरिष्ठ डॉक्टरों ने उस दौरान बताया था कि उनकी जाँच चल रही है और उनकी हालत स्थिर है। AIIMS में भर्ती होने के तुरंत बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और भाजपा के अन्य शीर्ष नेताओं ने अस्पताल जाकर जेटली का हाल-चाल लिया था। अब उनके स्वास्थ्य की नाजुक स्थिति का पता चलने पर आज 16 अगस्त को राष्ट्रपति कोविंद भी उनका हाल जानने AIIMS पहुँचे।

बता दें कि पेशे से वकील रहे अरुण जेटली मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में उनकी कैबिनेट के सबसे महत्तवपूर्ण नेता रहे। गत वर्ष 14 मई को जेटली का किडनी ट्रांसप्लांट हुआ था। जिसके बाद अप्रैल 2018 से उन्होंने कार्यकाल आना बंद कर दिया था, लेकिन 23 अगस्त 2018 को वह अपने मंत्रालय लौटे। बाद में अपने बिगड़ते स्वास्थ्य को देखते हुए उन्होंने खुद को लोकसभा चुनाव से दूर रखा था।

हिंदुओं के ख़िलाफ़ बयानबाजी करने पर मलेशिया सरकार ने जाकिर नाइक को भेजा नोटिस, होगी पूछताछ

अपने भाषणों से युवाओं को आतंकी गतिविधियों के लिए उकसाने और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे मामलों के आरोपित जाकिर नाइक पर मलेशिया सरकार ने अपना शिकंजा कसा दिया है। दरअसल, मलेशिया के हिंदु नागरिकों के बारे में विवादस्पद टिप्पणी करने पर वहाँ की सरकार ने समन जारी कर जाकिर नाइक को पूछताछ के लिए बुलाया है। जाकिर पर हुई ये कार्रवाई वहाँ के कई नेताओं द्वारा उसके भड़काऊ बयान पर आपत्ति जताने के बाद आई है।

खबरों की मानें तो वहाँ के गृहमंत्री मुहिद्दिन यासीन ने बताया है कि पुलिस जाकिर नाइक और अन्य कुछ लोगों से उस संबंध में पूछताछ करेगी, जिसमें नाइक ने मलेशिया के हिंदुओं को लेकर बयान दिया। बता दें कि भारत से भागे नाइक पर इस समय नस्लीय टिप्पणी करने और लोगों की भावनाओं को भड़काने का आरोप है।

आजतक की खबर के मुताबिक मलेशिया के गृह मंत्री मुहिद्दिन यासीन ने इस मामले पर बात करते हुए बताया कि पुलिस ने इस मामले के संबंध में कई अन्य व्यक्तियों को पूछताछ के लिए बुलाया था, जिनमें से कुछ पर नजर रखी जा रही है। पर्याप्त सबूत होने पर दंड संहिता की धारा 504 के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी। बता दें कि मलेशियाई दंड संहिता की धारा 504 में किसी समुदाय को नीचा दिखाने पर कार्रवाई करने का प्रावधान है।

इसके अलावा मलेशिया के गृहमंत्री मुहिद्दिन ने अपने बयान में कहा, “मैं सभी राजनैतिक पार्टियों और गैर-नागरिक लोगों को याद दिलाना चाहता हूँ कि जो भी जनता की शांति और सद्भाव को खतरे में डालने की कोशिश करेगा, मेरे मंत्रालय में आने वाली प्रवर्तन एजेंसियाँ उन पर कानूनी कार्रवाई करने से पहले दो बार नहीं सोचेगी।” उन्होंने बताया कि मलेशिया में नस्ल और धर्म बहुत संवेदनशील मुद्दे हैं। वहाँ 32 मिलियन की आबादी के साथ 60 प्रतिशत मुस्लिम हैं जबकि बाकी सब या तो चीन के हैं या फिर भारत के। इनमें अधिकतर भारतीय हैं।

गौरतलब है कि पिछले 3 साल से मलेशिया की शरण में रहकर जाकिर नाइक ने वहाँ के हिंदुओं के बारे में कहा था कि वह मलेशिया के प्रधानमंत्री महातिर मोहम्मद से ज्यादा नरेंद्र मोदी के प्रति वफादार हैं। जिसके बाद वहाँ के एचआरडी मंत्री के कुलसेरगन ने नाईक के ख़िलाफ़ आवाज उठाई थी और उस पर तुरंत एक्शन लेने की माँग की थी।

इस दौरान वहाँ के एचआरडी मंत्री ने कहा था, “जाकिर नाइक एक बाहरी व्यक्ति है, जो एक भगोड़ा है और उसे मलेशियाई इतिहास की बहुत कम जानकारी है, इसलिए, उसे मलेशियाई लोगों को नीचा दिखाने जैसा विशेषाधिकार नहीं दिया जाना चाहिए। इससे ज्यादा उसकी देश के प्रति वफादारी भी संदिग्ध है।”

‘आधे घंटे से पढ़ने की कोशिश कर रहा हूँ, आप कहना क्या चाहते हैं?’ – आर्टिकल 370 पर CJI ने वकील को फटकारा

सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार (अगस्त 16, 2019) को अनुच्छेद 370 को रद्द करने की चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने याचिकाकर्ता को फटकार लगाई। सीजेआई ने इस दौरान याचिका में गलती होने पर याचिकाकर्ता एमएल शर्मा को दोबारा याचिका दायर करने को कहा और साथ ही बताया कि अब इस पर अगले हफ्ते सुनवाई होगी।

मीडिया खबरों की मानें तो उन्होंने एमएल शर्मा से सुनवाई के दौरान पूछा कि ये किस तरह की याचिका है? और इसमें क्या फाइल किया गया है? याचिका लें और दूसरी याचिका दाखिल करें।

उन्होंने एमएल शर्मा से कहा, “मैं आपकी याचिका आधे घंटे से पढ़ने की कोशिश कर रहा हूँ, लेकिन कुछ समझ नहीं पा रहा। आप क्या चाहते हैं? आपने क्या फाइल किया है, कुछ नहीं पता। हम आपकी याचिका तकनीकी आधार पर ही खारिज कर सकते हैं, लेकिन ऐसे मामलों में हम ये नहीं करना चाहते। क्योंकि इस तरह की 6 और भी याचिकाएँ हैं, उन पर भी इसका असर पड़ सकता है।”

इस सुनवाई के दौरान एक वकील ने एमएल शर्मा पर जुर्माने की भी बात कही लेकिन सीजेआई ने कह दिया कि इन्हें पहले से ही चोट लगी है, इन पर क्या जुर्माना लगाएँ।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने कश्मीर मामले पर आज दो याचिकाओं पर सुनवाई की। पहली याचिका में अनुच्छेद 370 हटाए जाने का विरोध किया गया। वहीं दूसरी याचिका में कश्मीर में पत्रकारों पर से सरकार का नियंत्रण हटाने की माँग की गई।

WB के कुछ गाँव 18 अगस्त को मनाते हैं स्वतंत्रता दिवस, वो भी श्यामा प्रसाद मुखर्जी के कारण वरना…

भारत में प्रत्येक वर्ष 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस मनाया जाता है। लेकिन, पश्चिम बंगाल के कुछ ऐसे गाँव हैं जो 18 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस मनाते हैं क्योंकि वो आधिकारिक तौर पर इसी दिन भारत का हिस्सा बने थे।

12 अगस्त 1947 को वायसराय लुइस माउंटबेटन ने घोषणा की कि देश को 15 अगस्त, 1947 को स्वतंत्रता दे दी जाएगी। हालाँकि तब तक बंगाल की स्थिति विवादास्पद विषय बनी रही थी। दरअसल, पश्चिम बंगाल के नादिया और मालदा जैसे ज़िलों को लेकर प्रशासनिक ग़लती हो गई थी। यह ग़लती भारत-पाकिस्तान के बंटवारे की लकीर खींचने वाले रेडक्लिफ़ ने की थी। उन्होंने ग़लत नक्शा बना दिया था, जिसके मुताबिक़ मालदा और नादिया जैसे बहुसंख्यक हिंदू आबादी वाले कई ज़िले पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) में दर्शा दिए गए थे।

भारत-बांग्लादेश सीमा के पास के गाँव के कुछ निवासियों से हुई बातचीत के अनुसार, माउंटबेटन की घोषणा के बाद क्षेत्र में व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए और इस कारण से 15 अगस्त उनके लिए स्वतंत्रता का जश्न मनाने का कारण नहीं बन सका था। ग्रामीणों का कहना था कि उनके बड़े-बुज़ुर्गों ने उन्हें बताया था कि श्यामा प्रसाद मुखर्जी जैसे नेताओं और नादिया शाही परिवार के सदस्यों ने कोलकाता में ब्रिटिश प्रशासन के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन किया था और इस मामले को माउंटबेटन के संज्ञान में लाया गया।

इसके बाद, माउंटबेटन ने तुरंत बंगाल के विभाजन के नक्शे को फिर से बनाने का आदेश दिया, ताकि विरोध करने वाले हिंदू-बहुल ज़िलों को भारतीय क्षेत्र में शामिल किया जा सके और मुस्लिम बहुल ज़िलों को पूर्वी पाकिस्तान में दिया जा सके। रेडक्लिफ द्वारा नक्शे में जो बदलाव किए गए उसके अनुसार, नादिया ज़िले के राणाघाट, कृष्णानगर और करीमपुर के शिकारपुर को भारत में शामिल किया गया। यह प्रक्रिया 17 अगस्त की रात संपन्न हुई।

नया फ़ैसला आने के बाद 18 अगस्त को कृष्णानगर लाइब्रेरी से पाकिस्तान का झंडा उतारा गया और भारतीय तिरंगा फहराया गया। 18 अगस्त को आज़ादी प्राप्त करने के नादिया ज़िले के संघर्ष को यादगार बनाने के लिए स्वतंत्रता सेनानी प्रमथनाथ शुकुल के पोते अंजन शुकुल ने 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस मनाने को चुनौती दी और लंबे समय के बाद 1991 में केंद्र सरकार ने उन्हें 18 अगस्त को नादिया में झंडा फहराने की अनुमति दे दी। तभी से नादिया ज़िले और उसके अंतगर्त आने वाले गाँवों-कस्बों में 18 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस मनाया जाने लगा।