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Exit Poll का प्रकाशन कर IANS ने किया अचार संहिता का उल्लंघन, EC की कार्रवाई का इंतज़ार

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस (आईएएनएस) ने आचार संहिता का उल्लंघन करते हुए रविवार (मई 12, 2019) को एक एग्जिट पोल प्रकाशित किया। आईएएनएस का कहना है कि ये सर्वेक्षण विभिन्न संस्थानों और निष्पक्ष चुनाव विश्लेषकों द्वारा किया गया है। न्यूज सर्विस ने ये सर्वेक्षण ट्विटर पर शेयर किया है। दरअसल, चुनाव आयोग द्वारा 1998 से रिप्रजेंटेशन ऑफ पीपुल्स एक्ट 1951 के तहत मतदान शुरू होने के समय से लेकर मतदान के सभी चरणों के समाप्त होने के आधे घंटे बाद तक एक्जिट पोल प्रकाशित करने पर प्रतिबंध है।

लोकसभा चुनाव का परिणाम 23 मई को आने वाला है और आईएएनएस के मुताबिक, इस एग्जिट पोल में लोकसभा चुनाव के संभावित परिणामों पर चुनाव विश्लेषक एकमत दिखाई दे रहे हैं। इस बार के लोकसभा चुनाव में 7 चरणों में चुनाव होना है, जिसमें से 6 चरण संपन्न हो चुके हैं और अंतिम यानी सातवां चरण रविवार (मई 19, 2019) को होने वाला है।

आईएएनएस ने खुद ही ट्वीट करते हुए ये बताया कि जारी किए गए एग्जिट पोल में सीटों की संख्या “मतदाताओं के एक सर्वेक्षण” पर आधारित है, जो कि साफ तौर पर आचार संहिता का उल्लंघन है, क्योंकि किसी को भी मतदान के सभी चरणों के समाप्त  होने के 30 मिनट बाद तक एग्जिट पोल प्रकाशित करने की अनुमति नहीं है।

अब ये देखना बाकी है कि चुनाव आयोग आईएएनएस के खिलाफ कोई कार्रवाई करता है या नहीं। बता दें कि, इससे पहले भी, जब स्वराज एक्सप्रेस ने एग्जिट पोल प्रसारित किया था, तो कई चुनाव विश्लेषकों ने कहा था कि इंटरनेट के इस युग में चुनाव आयोग का ये नियम निरर्थक साबित हो सकता है, क्योंकि आज के युग में इंटरनेट पर क्या प्रकाशित किया जा रहा है, इस पर निगरानी रखना बेहद मुश्किल है।

गौरतलब है कि, इससे पहले एक ऑनलाइन मीडिया पोर्टल, स्वराज एक्सप्रेस ने चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन करते हुए एग्जिट पोल का प्रसारण किया था। फिलहाल वीडियो को यू ट्यूब से हटा दिया गया है। इस शो की ऐंकरिंग वायर के जर्नलिस्ट विनोद दुआ कर रहे थे, जिनके ऊपर यौन शोषण का आरोप लगा था।

सैलरी माँगने पर अनाथ युवती को वसीम ने 40 तमाशबीनों के सामने डंडे से पीटा, Rape का प्रयास

उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में कुछ युवकों द्वारा एक अनाथ युवती के साथ दरिंदगी करने की घटना सामने आई है। युवकों ने युवती से काम करा कर उसे वेतन भी नहीं दिया और वेतन माँगने पर जम कर पिटाई की। इतना ही नहीं, पीड़िता के साथ दुष्कर्म के प्रयास भी किए गए और उसके कपड़े उतारने की कोशिश की। मुख्य आरोपित सैलून का मालिक है और उसका नाम वसीम है। इस पूरे वारदात में वसीम का साला भी शामिल था। देश की राजधानी दिल्ली से 50 किलोमीटर के दायरे में घटी इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेज़ी से वायरल हो रहा है। वीडियो में बदमाश युवक पीड़िता की पिटाई करते देखे जा सकते हैं। ये सब सिर्फ़ इसीलिए किया गया क्योंकि पीड़िता ने काम के बदले अपने हक़ की सैलरी की माँग की थी। ग्रेटर नोएडा के नॉलेज पार्क कोतवाली क्षेत्र स्थित पटेल लोक सांस्कृतिक संस्थान परिसर की यह घटना है।

आरोपित वसीम इसी परिसर में अपना सैलून चलाता है। युवती से दुष्कर्म का प्रयास करने में सैलून मालिक वसीम के अल्वा उसके दो अन्य गुर्गे भी शामिल थे। पीड़िता की पिटाई का डेढ़ मिनट का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। पीड़िता द्वारा शिकायत दर्ज कराने के बाद पुलिस ने तीन आरोपितों के ख़िलाफ़ मारपीट और छेड़छाड़ का मामला दर्ज किया है। ताज़ा सूचना के अनुसार, नोएडा सेक्टर-12 निवासी मुख्य आरोपित सैलून संचालक वसीम को पुलिस ने गिरफ़्तार कर लिया है। पीड़िता ने उक्त सैलून में 2 महीने तक मेक-आप आर्टिस्ट की नौकरी की थी। उसका आरोप है कि इस दौरान उसका शोषण किया गया। परेशान होकर उसने नौकरी ही छोड़ दी।

दैनिक जागरण के स्थानीय संस्करण में छपी ख़बर

सैलून मालिक वसीम उसे पिछले 10 दिनों से वेतन के लिए चक्कर कटवा रहा था। 17 हज़ार रुपए प्रति महीने के हिसाब से उसे 34000 रुपए वेतन दिए जाने थे। जैसे ही युवती ने अपनी सैलरी की माँग की, वसीम ने अपने साले व एक साथी के साथ मिलकर उसे जबरन एक कमरे में बंद कर दिया। इसके बाद उसके साथ दुष्कर्म का प्रयास किया गया। जब आरोपित पीड़िता के कपडे उतारने लगे, तब उसने ज़ोर-ज़ोर से शोर मचाया। गुस्से में बौखलाए आरोपितों ने बेसबॉल बैट और लाठी-डंडों से उसे पीटना शुरू कर दिया। पीटते-पीटते निरंकुश आरोपित उसे सड़क पर ले आए और तमाशा बना दिया। पीड़िता को ज़मीन पर गिरा कर कई डंडे मारे गए।

वहाँ उपस्थित लोगों में से किसी ने भी बीच-बचाव की कोशिश नहीं की और सभी वीडियो बनाते रहे। अंत में जब आरोपितों का पीटने से जी भर गया तो पीड़िता ख़ुद उठ कर चली गई। आरोपितों ने युवती के साथ गाली-गलौज भी की। युवती ने ईंट उठा कर अपनी रक्षा करने का प्रयास किया। वहाँ मौजूद 30-40 लोग यूँ ही तमाशबीन बने रहे। पीड़िता ने कहा कि जब वह मामला दर्ज कराने कोतवाली गई तो वहाँ उसकी एक न सुनी गई। बाद में वीडियो वायरल होने पर पुलिस ने मामला दर्ज किया और युवती को बुलाया।

पीड़िता अनाथ है, उसके माता-पिता नहीं हैं। वह नोएडा में एक किराए के कमरे में रहती है और नौकरी कर अपना जीवन-यापन करती है। सबसे अजीब बात यह है कि लड़की लगातार चिल्लाती रही लेकिन 40 तमाशबीनों में से एक ने भी उसे बचाने की ज़हमत नहीं उठाई। कौशल्या रेसीडेंसी की छात्राओं ने वीडियो बना कर पुलिस के सामने साक्ष्य के रूप में पेश किया, जिसके बाद गिरफ़्तारी की कार्रवाई की गई। युवती को पैर से मारा गया, उसके बाल पकड़ कर भी घसीटे गए।

‘याद है 2017 में मैंने मोदी को क्या कहा था’ – ‘नीच’ से नीचता पर उतरे मणिशंकर अय्यर

साल 2017 में कॉन्ग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘नीच किस्म का आदमी’ बोला था, विवादों का हिस्सा बने थे। इस दौरान उन्हें अपने इस बयान के कारण काफ़ी आलोचनाओं का सामना भी करना पड़ा था। नतीजतन कॉन्ग्रेस नेता को अपने इन बिगड़े बोलों के लिए माफ़ी तक माँगनी पड़ी थी। लेकिन हाल ही में मणिशंकर अय्यर ने एक लेख में मोदी की रैलियों और उनके बयानों का हवाला देते हुए कहा, “याद है 2017 में मैंने मोदी को क्या कहा था?” अपने लेख में अय्यर ने पूछा कि क्या उनकी भविष्यवाणी सही नहीं थी?

इस लेख में उन्होंने मोदी के रैलियों और साक्षात्कार में दिए बयानों का जिक्र किया है। प्रधानमंत्री की शैक्षिक पृष्ठभूमि पर बात करते हुए कॉन्ग्रेस नेता ने गणेश जी की ‘प्लास्टिक सर्जरी’ और उड़नखटोलों को प्राचीन विमान बताने वाले बयानों को ‘अज्ञानता भरे दावे’ बताया है। साथ ही इस लेख में अय्यर ने बालाकोट हमले के समय बादलों की आड़ का फायदा लेने वाले बयान की भी बात की है।

मणिशंकर अय्यर ने On Cloud Nine of Nationalism के नाम से अपना यह लेख पहले ‘राइज़िंग कश्मीर’ वेबसाइट के लिए लिखा। फिर इसे ‘द प्रिंट’ वालों ने ‘Modi’s ouster on 23 May will be India’s fitting reply to the most foul-mouthed PM’ के शीर्षक से पब्लिश किया। कॉन्ग्रेस नेता के लेख में नरेंद्र मोदी के उस बयान पर भी सवाल उठाए गए हैं, जिसमें उन्होंने कहा था कि राजीव गाँधी आईएनएस विराट को पर्सनल टैक्सी की तरह लक्षद्वीप ले गए थे। इन्हीं बयानों को याद दिलाते हुए अय्यर ने अपनी बात दोहराई – ‘याद है 2017 में मैंने मोदी के बारे में क्‍या कहा था? क्‍या मैंने सही भविष्‍यवाणी नहीं की थी?’

‘राइज़िंग कश्मीर’ में मणिशंकर अय्यर का लेख और लाल घेरे में विवादित हिस्सा

इस लेख के सुर्खियों में आने के बाद एक ओर जहाँ कुछ सोशल मीडिया यूजर्स अय्यर पर अपना गुस्सा जमकर उतार रहे हैं तो वहीं कुछ यूजर्स उनके बयानों को भाजपा के लिए ‘लकी चार्म’ भी बोल रहे हैं और कुछ उनके इस बयान को उनकी ‘ग्रैंड एंट्री’ बता रहे हैं। बता दें कि 2014 में मणिशंकर अय्यर के ‘चायवाला’ बयान ने नरेंद्र मोदी को चुनावों में काफ़ी फायदा पहुँचाया था, इसलिए लोग उनके इस बयान को भी सीरियस न लेकर ‘वेलकम’ कर रहे हैं।

गौरतलब है कि 2017 में नरेंद्र मोदी के लिए ‘नीच’ शब्द का प्रयोग करने पर अय्यर को पार्टी से सस्पेंड कर दिया गया था लेकिन 2018 की अगस्त में वह दोबारा पार्टी से जुड़ गए थे।

श्री लंका में भड़का मुस्लिम-विरोधी दंगा: पूरे देश में लगाना पड़ा कर्फ्यू, अब तक एक व्यक्ति की हत्या

श्री लंका में दो समुदायों के बीच भड़के दंगों में एक मुस्लिम व्यक्ति की सोमवार (मई 13, 2019) को मौत हो गई। खबरों के मुताबिक दंगाई पहले व्यक्ति की लकड़ी की दुकान में घुसे फिर वहाँ उस पर किसी तेज धार हथियार से वार किया। घायल व्यक्ति को पुतल्लम (Puttalam) जिले के अस्पताल में भर्ती कराया गया लेकिन कुछ देर बाद ही उसने दम तोड़ दिया। मृत व्यक्ति की उम्र 45 वर्ष थी।

रविवार (अप्रैल 12, 2019) को फेसबुक पोस्ट के बाद भड़के इन दंगों में ये मौत की पहली खबर है। इस घटना के बाद पूरे देश में रात के समय कर्फ्यू लगाने के आदेश दे दिए गए हैं। साथ ही पुलिस को निर्देश है कि दंगा करने वालों से निबटने के लिए अधिक से अधिक सुरक्षाबल का इस्तेमाल हो।

स्थानीय पुलिस ने दंगाइयों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है। साथ ही पुलिस प्रमुख चंदना विक्रमरत्ने ने मुस्लिमों की दुकानों और वाहनों में आग लगाने वाले लोगों को टेलीविजन पर संदेश के जरिए चेतावनी दी है।

बता दें कि इन दंगों में अब तक कई घरों और मस्जिदों पर हमला किया जा चुका है। दंगाई हाथ में लाठी और हथियार लिए आते हैं और सीधा हमला कर देते हैं। इस समय श्री लंका में अल्पसंख्यक मुस्लिमों में और सिंहलियों में काफ़ी तनातनी का माहौल है। हालाँकि देश की राजधानी के तीन जिलों में सुरक्षा के कड़े प्रबंध हैं लेकिन हिंसा को रोकने के लिए पूरे देश में रात के समय कर्फ्यू लगाए जाने के निर्देश हैं।

इससे पहले रविवार (मई 12, 2019) को देश के पश्चिमी तटीय शहर चिलॉव में मुस्लिमों और ईसाइयों के बीच हुई झड़प के कारण वहाँ मध्य रात्रि से फेसबुक और व्हाट्सअप पर अस्थाई रूप से प्रतिबंध लगा दिया गया था।

झारखंड के पूर्व CM हेमंत सोरेन और उनकी पत्‍नी पर FIR दर्ज, भाजपा ने की थी शिकायत

आचार संहिता के उल्लंघन के मामले में झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन और उनकी पत्नी पर एफआईआर दर्ज की गई है। दरअसल, राँची संसदीय सीट के लिए 6 मई को हटिया विधानसभा क्षेत्र के मतदान केंद्र संख्या-288 (सेंट फ्रांसिस स्कूल) में हेमंत सोरेन और उनकी पत्नी मतदान करने गए थे। इस दौरान वे झामुमो का पट्टा अपने गले में डालकर कतार में खड़े थे और दोनों ने पट्टा पहनकर ही वोट डाला था।

भारतीय जनता पार्टी ने इस मामले में चुनाव आयोग से शिकायत की थी। आयोग को दर्ज शिकायत में भाजपा ने कहा था कि हेमंत ने मतदाताओं को अपने पक्ष में मतदान करने के लिए प्रत्यक्ष ढंग से प्रभावित किया। शिकायत मिलने पर चुनाव आयोग ने जाँच के आदेश दिए। जिसके बाद राँची के कार्यपालक दंडाधिकारी राकेश रंजन उरांव ने मामले की जाँच की और आरोप को सही पाया। जाँच में आरोप के सही पाए जाने के बाद हेमंत सोरेन और उनकी पत्नी के खिलाफ सोमवार (मई 13, 2019) को रिप्रेजेंटेशन ऑफ पीपुल्स एक्ट 1951 एवं 188 आईपीसी के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई और इसकी जानकारी और जाँच रिपोर्ट जिला प्रशासन द्वारा निर्वाचन आयोग को भेज दी गई है।

गौरतलब है कि, जब भाजपा ने हेमंत सोरेन और उनकी पत्नी के खिलाफ मतदान केंद्र पर पार्टी के सिंबल वाला पट्टा गले में डालकर जाने को आचार संहिता का उल्लंघन बताकर चुनाव आयोग से इसकी शिकायत की थी, तब हेमंत सोरेन ने कहा था कि यदि ऐसा करना चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन होता तो कोई उनको रोकता। उनको किसी ने बताया भी नहीं कि इस प्रकार मतदान केंद्र में मतदान के लिए नहीं जा सकते।

हेमंत सोरेन के इस बयान को भाजपा प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने हास्यास्पद बताया था और कहा था कि हेमंत सोरेन मुख्यमंत्री रह चुके हैं और वो ये कह कर नहीं बच सकते हैं। उन्होंने चुनाव के दिन बूथ के भीतर और बाहर पार्टी का सिंबल वाला पट्टा लगाकर अपनी पार्टी का प्रचार करने का प्रयास किया है। प्रतुल ने चुनाव आयोग से इस पर संज्ञान लेकर कार्रवाई करने का अनुरोध किया था।

3 साल की बच्ची से बलात्कार: कश्मीर में नेता और मुस्लिम संगठन सेंक रहे अपनी-अपनी रोटी

कश्मीर के बांदीपोरा में तीन साल की बच्ची के साथ हुए बलात्कार ने अब एक राजनीतिक और सांप्रदायिक मोड़ ले लिया है। इस पर जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने शरिया लागू करने का सुझाव दिया है। उन्होंने ट्विटर पर लिखा, “मैं सुंबल में 3 साल की बच्ची के साथ हुई बलात्कार की घटना की ख़बर सुनकर स्तब्ध हूँ। किस तरह की बीमार मानसिकता के लोग ऐसी वारदातों को अंजाम देते हैं। समाज अक्सर ऐसी वारदातों के लिए महिलाओं के अवांछित निमंत्रण को दोषी ठहराता है, लेकिन क्या सच में उस मासूम की ग़लती थी। आज ऐसे वक़्त में शरिया क़ानून के अनुसार, ऐसे काम करने वालों को पत्थर से मारकर मौत की सज़ा देनी चाहिए।” अफसोस की यह बयान एक पूर्व मुख्यमंत्री का है, जिससे समाज को उम्मीद होती है। जिससे वोटर को यह उम्मीद होती है कि कानून-व्यवस्था चाक-चौबंद रहेगी। अफसोस इस बात का भी मुफ्ती ने न तो ऐसे समाज का निर्माण किया, न ही राज्य में ऐसी कानून-व्यवस्था बना पाईं। और तो और, सदियों पुराने आतंकी मानसिकता वाले शरिया कानून को थोपने की बात कह गईं। चुनावी मौसम में और आने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए मुस्लिम वोट बैंक को खुश करने का इससे बेहतर अवसर (या घिनौना?) शायद उन्हें दुबारा नहीं मिलता।

पूर्व मुख्यमंत्री के बाद अब धर्म के ठेकेदारों की सुनिए। मुत्ताहिदा मजलिस उलेमा (एमएमयू) सहित विभिन्न धार्मिक निकायों ने इस बलात्कार की निंदा करते हुए कहा, “ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि कश्मीर में कई लोग, महान सूफी संतों द्वारा दिखाए गए मार्ग और शिक्षाओं को भूल गए हैं।” गजब खेल गए गुरु! 3 साल की बच्ची का बलात्कार हो जाता है और आप धार्मिक मार्ग-शिक्षा के बीच झूल रहे हैं? आतंकियों की मौत पर तो आप लोग पूरी घाटी को ही बंद करने का आह्वान कर डालते हैं। पत्थरबाजों को उकसाते हैं। अब खून नहीं खौल रहा आपका? या इस घटना में वो बात नहीं, जो आपको फायदा पहुँचा सके?

लगे हाथ पाक परस्त अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी को भी सुन ही लीजिए। इन जनाब ने इस घटना पर ‘गहरा दुख’ व्यक्त किया है। लेकिन बोलते-बोलते बुढ़ापे के कारण या भारत-विरोधी मानसिकता की वजह से, इन्होंने इस घटना को राज्य की विवादित स्थितियों से जोड़ दिया। उन्होंने इस तरह की घटनाओं को राज्य के ताने-बाने और समृद्ध संस्कृति पर एक काला दाग करार दिया। उन्होंने राज्य में न्यायपालिका और पुलिस प्रशासन पर भी सवाल खड़े किए। राजनीतिक हस्तक्षेप से पूरी व्यवस्था को संक्रमित और बर्बाद करने जैसी बातें भी गिलानी ने अपने बयान में कही। मतलब बुढ़ापा हावी नहीं है। जहर है मन के भीतर, भारत के खिलाफ जहर। 3 साल की बच्ची के बलात्कार पर – (i) राज्य की विवादित स्थिति (ii) राजनीतिक हस्तक्षेप जैसे कारण भला और कौन गिना सकता है। और तीसरा पॉइंट – समृद्ध संस्कृति पर काला दाग! आपके मुँह से यह शोभा नहीं देता गिलानी साब! आप तो आतंकियों की पैरवी कीजिए, पत्थरबाजों को उकसाइए, पाकिस्तान से पैसे मँगवाइए, कश्मीरी पंडित अपने घर न लौट सकें, इसके लिए हर तरह के माहौल बनाइए – लेकिन कृपया करते कश्मीर के समृद्ध संस्कृति पर अपना मुँह मत खोलिए।

अब जरा खबर देखिए और समझिए कि घाटी में यह सेलेक्टिव आउटरेज़ क्यों? द एशियन एज की ख़बर के अनुसार, पीड़िता और आरोपित ताहिर, दोनों इस्लाम के अलग-अलग समुदायों से संबंध रखते हैं। ऐसी सूरत में पीड़िता के समुदाय से संबंध रखने वाले लोगों ने सोमवार को सड़क पर उतर कर न्याय के लिए विरोध-प्रदर्शन किया। हैरान कर देने वाली बात यह है कि तीन साल की बच्ची के साथ बलात्कार की वारदात रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना है और इस पर अलग-अलग सम्प्रदाय की बात बेशर्मी से अधिक और कुछ नहीं।

मीडिया में आई ख़बरों के अनुसार, हो सकता है कि आरोपित ताहिर ने कई अन्य स्थानीय लड़कियों के साथ दुर्व्यवहार किया हो। उस पर दंड संहिता की धारा 363, 342 और 376 के तहत मामला दर्ज किया गया है। फ़िलहाल इस घटना के लिए एक विशेष जाँच समिति का गठन कर दिया गया है।

1984 दंगा नहीं, राजीव गाँधी के आदेश पर कॉन्ग्रेसियों द्वारा किया गया नरसंहार था: पूर्व DGP

उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी सुलखान सिंह ने 1984 में सिखों के ख़िलाफ़ हुई मारकाट को दंगा मानने से इनकार कर दिया है। 1980 बैच के आईपीएस अधिकारी सुलखान सिंह ने 1984 के सिख दंगे को तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गाँधी के इशारे पर सिखों के ख़िलाफ़ किया गया नरसंहार बताया है। उत्तर प्रदेश पुलिस के पूर्व प्रमुख ने अपने फेसबुक पोस्ट में इस बारे में अपने विचार रखते हुए जो लिखा, पढ़िए उन्हीं के शब्दों में:

“1984 में सिखों के ख़िलाफ़ हुई मारकाट कोई दंगा नहीं था। दंगा दोनों तरफ से हुई मारकाट को कहते हैं। यह राजीव गाँधी के आदेश पर उनके चुने हुए विश्वास पात्र कॉन्ग्रेसी नेताओं द्वारा ख़ुद किया गया नरसंहार था। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी की हत्या के दिन (अक्टूबर 31, 1984) मैं 6 डाउन पंजाब मेल से लखनऊ से वाराणसी जा रहा था। जब ट्रेन अमेठी स्टेशन पर खड़ी थी, उसी वक़्त अभी-अभी ट्रेन में चढ़े एक व्यक्ति ने बताया कि इंदिरा जी को गोली मार दी गई है। वाराणसी तक कोई बात नहीं हुई। वाराणसी में अगले दिन सुबह भी कुछ नहीं हुआ।”

“उसके बाद योजनाबद्ध तरीके से घटनाओं को अंजाम दिया गया। अगर जनता के गुस्से को फूट कर बाहर निकलना होता और आवेश में यह सब कुछ हो जाता ,तो ये सब तुरंत होना था। बकायदा योजना बना कर नरसंहार शुरू किया गया। इसके मुख्य ऑपरेटर थे- जगदीश टाइटलर, अजय माकन और सज्जन कुमार। राजीव गाँधी के मुख्य विश्वासपात्र कमलनाथ इस पूरे नरसंहार की मॉनीटरिंग कर रहे थे। इस नरसंहार को लेकर राजीव गाँधी के बयान और इन सभी आतताइयों को संरक्षण के साथ-साथ अच्छे पदों पर तैनात करना उनकी संलिप्तता के जनस्वीकार्य सबूत हैं। राजीव गाँधी की मृत्यु के बाद भी कॉन्ग्रेस नेतृत्व व सरकारों द्वारा इन व्यक्तियों को संरक्षित करना और उन्हें पुरस्कृत करना, इस सबकी सहमति को दर्शाता है।”

उधर कानपुर में सिख दंगों की जाँच के लिए गठित की गई एसआईटी का नेतृत्व करने वाले पूर्व डीजीपी अतुल ने सुलखान सिंह के इस फेसबुक पोस्ट के बारे में बात करते हुए कहा कि अगर उनके पास कोई सबूत है, तो सरकार या एसआईटी के समक्ष पेश होकर उन्हें अपना पक्ष रखना चाहिए। अभी हाल ही में कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी के गुरु माने जाने वाले कॉन्ग्रेस के ओवरसीज विंग के अध्यक्ष सैम पित्रोदा ने 1984 सिख दंगों के बारे में ‘हुआ तो हुआ’ कह कर चौंका दिया था। फ़ज़ीहत होने के बाद ख़ुद राहुल गाँधी ने पित्रोदा के बयान की निंदा की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी पंजाब में हुई रैलियों के दौरान सिख दंगों का मसला उठाया।

पूर्व डीजीपी का फेसबुक पोस्ट

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि जो सिख दंगे के प्रमुख आरोपितों में से एक हैं, उन्हें एक राज्य का मुख्यमंत्री बना कर पुरस्कृत किया गया है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ पर सिख दंगों में संलिप्तता का आरोप है। उन्हें मुख्यमंत्री बनाए जाने के बाद कॉन्ग्रेस की आलोचना हुई थी। राजीव गाँधी ने सिख नरसंहार के बाद असंवेदनशील बयान देते हुए कहा था कि जब कोई बड़ा पेड़ गिरता है तो धरती थोड़ी हिलती है। सिख दंगे के कई पीड़ितों ने कैमरे के सामने आकर भी आरोपितों में कॉन्ग्रेस नेताओं के नाम लिए हैं।

‘जैसे हिंदू धर्म में RSS है, वैसे ही इस्लाम में ISIS, कमल हासन के बयान से 100 नहीं 1000% सहमत’

तमिलनाडु सरकार में मंत्री केटी राजन ने कमल हासन द्वारा नाथूराम गोडसे को ‘स्वतंत्र भारत का पहला आतंकवादी’ बताए जाने के बाद उन पर गंभीर टिप्पणी की है। केटी राजन ने कहा है कि ‘हिंदू आतंकवाद’ पर दिए गए बयान के लिए कमल हासन की जीभ काट लेनी चाहिए।

केटी राजन के मुताबिक, कमल ने ऐसा बयान अल्पसंख्यकों का वोट पाने के लिए दिया है। उनका कहना है कि किसी एक शख्स की हरकत के लिए पूरे समुदाय को दोष नहीं दिया जा सकता है। केटी राजन ने चुनाव आयोग से गुहार लगाई है कि वो इस मामले पर संज्ञान लें। इसके साथ ही उन्होंने कमल हासन की पार्टी पर बैन लगाने की भी माँग की है।

केटी राजन के अलावा बॉलीवुड अभिनेता और भाजपा स्टार प्रचारक विवेक ओबरॉय ने भी कमल की टिप्पणी को शर्मनाक बताया है। उन्होंने कहा है कि इस तरह के बयानों की अपेक्षा कम से कम वह कमल हासन से तो नहीं ही करते हैं।

विवेक ने ट्वीट करके लिखा है, “प्रिय कमल सर, आप बहुत बड़े कलाकार हैं। जैसे कला का कोई धर्म नहीं होता, ठीक वैसे ही आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता। आप कह सकते हैं कि गोडसे आतंकवादी था, लेकिन आपने हिंदू शब्द का इस्तेमाल क्यों किया? इसलिए क्योंकि आप मुस्लिम बहुल इलाके में वोट हासिल करने की कोशिश कर रहे थे?” विवेक ने आगे कमल हासन से निवेदन भी किया कि वो इस तरह से देश को बाँटने का काम न करें क्योंकि हम सब एक हैं।

इसके अलावा एक तरफ जहाँ कमल हासन द्वारा हिंदुओं के लिए आतंकवाद शब्द का प्रयोग करने पर उन्हें चारों ओर से आलोचना का सामना करना पड़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ इस बयान पर कॉन्ग्रेस के कुछ नेता उनका समर्थन करते दिखाई दे रहे हैं। तमिलनाडु के कॉन्ग्रेस प्रमुख केएस अलागिरी ने सोमवार (मई 13, 2019) को आरएसएस की तुलना आईएस से की। इंडिया टुडे से हुई बातचीत में उन्होंने कहा, “मैं कमल हासन के बयान का समर्थन करता हूँ। मैं उनके बयान से 100 नहीं 1000 फीसदी सहमत हूँ।’ उन्होंने कहा “जैसे हिंदू धर्म में आरएसएस है, वैसे इस्लाम में इस्लामिक स्टेट है।”

Facebook पर ISIS और अलकायदा का करता था समर्थन, जैश-ए-मुहम्मद की तारीफ: गिरफ़्तार हुआ असकर

केरल में हाल के दिनों में कई ऐसे लोगों को गिरफ़्तार किया गया है, जिनके खूँखार इस्लामिक आतंकी संगठनों से जुड़े होने की बातें सामने आई हैं। श्री लंका हमलों के बाद भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने अपनी कार्रवाई तेज़ करते हुए ऐसे कई लोगों को गिरफ़्तार किया। इसमें ज़ाकिर नाइक का वीडियो देख कर आत्मघाती हमले की योजना बनाने वाला एक युवक भी शामिल है। अब मँजेरी पुलिस ने 47 वर्षीय एक व्यक्ति को गिरफ़्तार किया है, जिसका नाम असकर है। उसे इंटेलिजेंस सेल से मिली ख़ुफ़िया इनपुट्स के बाद गिरफ़्तार किया गया। गिरफ़्तार व्यक्ति असकर कुछ ही दिनों पहले अरब से लौटा है। वह स्थानीय लोगों से भी ज्यादा वास्ता नहीं रखता था। पड़ोसियों से बातचीत भी नहीं करता था।

आपको याद दिला दें कि जुलाई 2016 में ही एक केस दर्ज किया गया था, जिसमें केरल के कई युवकों के गायब होने की बात कही गई थी। इन सभी के आईएसआईएस जॉइन करने की ख़बरें आई थीं। ये सभी अफ़ग़ानिस्तान और सीरिया चले गए थे। ताज़ा गिरफ़्तारी वाले मामले की बात करें तो असकर ने अपनी इस्लामिक धार्मिक शिक्षा तमिलनाडु के मदुरै और डिंडिगुल में ली थी। जाँच अधिकारियों ने उससे प्रारंभिक पूछताछ की प्रक्रिया शुरू कर दी है। लेकिन, अभी तक उसके किसी आतंकी संगठन से जुड़े होने के पुख़्ता प्रमाण नहीं मिले हैं। इस बारे में अधिक जानकारी देते हुए एक पुलिस अधिकारी ने बताया:

“असकर पर पुलिस की साइबर सेल की लंबे समय से नज़र थी। वह 2016 से ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर सक्रिय है और उसकी ज्यादातर पोस्ट सांप्रदायिक होती थीं। वह नियमित तौर पर आईएसआईएस की विचारधारा का समर्थन करता था और जैश-ए-मुहम्मद और अल कायदा जैसे आतंकी संगठनों के कामों को सही ठहराता था। उसकी किसी आतंकी संगठन से संलिप्तता के बारे में पूरी पूछताछ के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।”

असकर का कहना है कि वह रियल एस्टेट का कारोबार करता है। हालाँकि, इस सम्बन्ध में पुलिस ने कुछ दावा नहीं किया है और जाँच के बाद ही इस बारे में कुछ पता चल पाएगा। असकर सोशल मीडिया पर ही सक्रिय था और स्थानीय लोगों को नज़रअंदाज़ किया करता था। मँजेरी स्थित अनाक्कायम के रहने वाले असकर को सांप्रदायिक घृणा फैलाने का आरोपित बनाया गया है। इससे पहले मई के पहले सप्ताह में केरल में एनआईए ने आईएसआईएस मॉड्यूल से जुड़े चौथे आतंकी को गिरफ़्तार किया था। वह भी अरब से ही लौटा था। फैज़ल को कोचीन एयरपोर्ट से हिरासत में लेकर एनआईए की अदालत में पेश किया गया था।

इससे पहले 28 अप्रैल को अबू बकर सिद्दीक़ी और अहमद अराफात नामक आतंकियों को कासरगोड से गिरफ़्तार किया गया था। अबूबकर ने आतंकी हमले की योजना बनाने की बात स्वीकार की है और इसके लिए वह अन्य आतंकियों को भी हायर कर रहा था। वह श्री लंका ईस्टर ब्लास्ट के मास्टरमाइंड आतंकी ज़हरान हाशिम के वीडियो देख-देख कर ख़ुद को एक आत्मघाती हमलावर बनाने के लिए मानसिक रूप से तैयार कर रहा था। एनआईए द्वारा गिरफ़्तार किए गए चारों आतंकी आईएसआईएस से लगातार संपर्क में थे। श्री लंका में हुए धमाकों के बाद इस्लामिक कट्टरपंथी आतंक के प्रति भारतीय एजेंसियाँ सतर्क हैं।

बेटी से छेड़खानी का किया विरोध तो आलम और जहाँगीर ने मार डाला, वीडियो बनाते रहे पड़ोसी

दिल्ली स्थित मोती नगर क्षेत्र के बसई दारापुर में एक व्यक्ति की चाकू घोंप कर हत्या कर देने का मामला सामने आया है। मृतक की पहचान 51 वर्षीय धुव राज त्यागी के रूप में हुई है। यह वारदात मृतक त्यागी की बेटी से छेड़छाड़ किए जाने के बाद हुई। इस दौरान पीड़िता का भाई भी घायल हो गया। मामले में पुलिस ने 2 नाबालिग समेत 4 लोगों को गिरफ़्तार किया है। गिरफ़्तार आरोपितों का नाम मोहम्मद आलम और जहाँगीर ख़ान है। पुलिस ने बताया कि ध्रुव राज त्यागी अपने परिवार समेत बसई दारापुर में रहा करते थे। रविवार की रात वह बेटी और बेटे के साथ अस्पताल से लौट रहे थे। घर पहुँचने से कुछ दूर पहले ही पाँच-छह लोगों से उनका रास्ता रोक लिया। इसके बाद विवाद शुरू हो गया। जहाँगीर और आलम समेत उसके कुछ अन्य गुर्गे साथियों ने रास्ता देने से मना कर दिया। ऐसे में मृतक त्यागी ने पहले अपनी बेटी को घर पहुँचाया और फिर लौट कर छेड़खानी कर रहे लड़कों के पिता से शिकायत करने पहुँचे। इसी बीच में उन पर धारदार हथियारों से हमला किया गया। बाप को बचाने आए पीड़िता का भाई भी बुरी तरह जख्मी हुआ है, उस पर भी चाकुओं से वार किया गया है।

पड़ोसियों ने भी दिखाई असंवेदशीलता (साभार: दैनिक जागरण)

घटना में मुस्लिमों के आरोपित होने के कारण इलाक़े में तनाव का माहौल है। क्षेत्र में अच्छी-ख़ासी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। घटना की रात को ध्रुव त्यागी की बेटी से छेड़खानी की गई, जिसका पीड़िता के पिता व भाई ने विरोध किया। छेड़खानी का विरोध करने का परिणाम त्यागी को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी क्योंकि उन पर हमला कर दिया गया और उनके बेटे को भी बेरहमी से पीटा गया। सभी आरोपित त्यागी के पड़ोसी हैं और उसी गली में रहते हैं। पीड़िता का भाई भी ज़िंदगी और मौत से जूझ रहा है। उसका अस्पताल में इलाज चल रहा है। स्थानीय अख़बारों के मुताबिक़, वारदात के वक़्त लोग बीच-बचाव करने की जगह वीडियो बना रहे थे।

मृतक त्यागी के बेटे का नाम अनमोल है। ख़बरों के अनुसार, छेड़खानी के बाद त्यागी आरोपितों को समझाने उसके घर में गए, जिसके बाद उन सबने मिलकर त्यागी पर लाठी-डंडे और चाकुओं से हमला कर दिया। उन्होंने पत्थरों से भी हमला किया। बाद में पीड़िता व उसका भाई अनमोल अपने पिता को बचाने के लिए गए तो अनमोल को भी चाकू घोंप दिया गया। इसके बाद मामले की जानकारी पुलिस को दी गई। त्यागी की अस्पताल में इलाज के दौरान सोमवार (मई 13, 2019) को मौत हो गई। इस घटना के बाद परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल है।

दैनिक जागरण के स्थानीय संस्करण में छपी ख़बर

किसी को भी अंदेशा नहीं था कि छेड़खानी का विरोध करने और मनचलों को समझाने के बाद वो लोग इतना बड़ा विवाद खड़ा कर देंगे। परिजनों के अनुसार, इस घटना के समय कई पड़ोसी मौजूद थे लेकिन किसी ने भी बीच-बचाव नहीं किया। इस वारदात के बाद आसपास के लोग भी आक्रोशित हैं। पुलिस ने आईपीसी 302 (हत्या), 506 (आपराधिक धमकी) और 509 (महिला का अपमान) के तहत केस दर्ज कर पड़ोसी मोहम्मद आलम (20 साल) और जहाँगीर खान (45 साल) को गिरफ़्तार कर लिया है। वहीं दो नाबालिगों को भी पुलिस ने पकड़ा है। ये घटना मोती नगर पुलिस स्टेशन की है।

सारे आरोपित इस घटना के बाद भाग खड़े हुए थे लेकिन सोमवार को उन्हें विभिन्न जगहों से पकड़ा गया। दोनों आरोपित नाबालिगों को ‘Observation Home’ में भेज दिया गया है। जब छेड़खानी की घटना हुई, तब त्यागी अपनी बेटी को अस्पताल से दिखा कर लौट रहे थे। पीड़िता की तबियत पहले से ही ख़राब थी। ये वारदात रात के 2 बजे हुई। मामला दो समुदायों से जुड़ा होने के कारण पूरे क्षेत्र में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।