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Pak में भारतीय राजनयिकों से दुर्व्यवहार, उन्हें गुरुद्वारे में किया बंद, भारत ने जताई आपत्ति

लाहौर के पास स्थित गुरुद्वारे में हिंदुस्तानी राजनयिकों को बंद किए जाने और दुर्व्यवहार को लेकर पाकिस्तानी अधिकारियों के समक्ष हिंदुस्तान ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। यह आपत्ति पाकिस्तान के विदेश कार्यालय में आपत्तिपत्र के जरिए दर्ज कराई गई है। एक कूटनीतिक नोट के माध्यम से 25 अप्रैल को पाकिस्तानी अधिकारियों को अलग से भी इस घटना से अवगत कराया गया है।

17 अप्रैल की घटना, सच्चा सौदा साहिब गए थे राजनयिक

आपत्तिपत्र में राजनयिकों के साथ हुई इस घटना का जिक्र करते हुए हिंदुस्तान ने पाकिस्तान के इस्लामाबाद में स्थित अपने उच्चायोग की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। दोनों राजनयिक पाकिस्तानी पंजाब के लाहौर के पास फर्रुखाबाद स्थित गुरुद्वारे सच्चा सौदा साहिब में गए हुए थे। वह वहाँ सिख श्रद्धालुओं की यात्रा की प्रणाली आसान करने से जुड़े कार्यवश वहाँ पहुँचे थे। रिपोर्ट के मुताबिक वहाँ मौजूद पाकिस्तानी इंटेलिजेंस के 15 लोगों ने राजनयिकों के साथ दुर्व्यवहार किया। उन्हें एक कमरे में बंद कर दिया गया और उनके बैगों की तलाशी ली गई। उनसे पूछताछ भी की गई

पहले भी सिख श्रद्धालुओं की यात्रा के प्रबंध की देखरेख कर रहे राजनयिकों के साथ पाकिस्तान में दुर्व्यवहार होता रहा है। खालिस्तानियों द्वारा भी भारतीय श्रद्धालुओं से बदतमीजी का भी इतिहास रहा है। मार्च में भी हिंदुस्तान ने बालाकोट की एयर स्ट्राइक के बाद अपने राजनयिकों के साथ दुर्व्यवहार की शिकायत की थी।

छत्तीसगढ़ में नक्सलियों का उत्पात बढ़ा, पुरुषों के गाँव छोड़ने पर लगाई बंदिश

छत्तीसगढ़ में क़ानून व्यवस्था का हाल काफ़ी बुरा होता जा रहा है। यहाँ नक्सलियों ने कई गाँवों में पुरुषों के गाँव से बाहर निकलने पर पाबंदी लगा दी है। दैनिक जागरण में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार, नक्सलियों के आधार इलाके में सुरक्षाबलों के बढ़ते दबाव और सरकार की आत्मसमर्पण नीति से बौखलाए माओवादी संगठन ने इस तरह की हरकत का सहारा लिया है। महिलाओं को तो आसपास बाज़ार या किराना दुकानों तक जाने की छूट दी गई है लेकिन पुरुषों को जिला मुख्यालय जाने से पहले नक्सलियों की अनुमति लेनी होगी। ये घटना राज्य के अबूझमाड़ इलाके की है। रिपोर्ट के अनुसार, गाँव के 31 परिवारों को नक्सलियों ने भगा दिया है और वे सभी जिला मुख्यालय में शरण लिए हुए हैं। नक्सली पूरी तरह मनमानी पर उतर आए हैं।

जिन लोगों को नक्सलियों ने भगा दिया है, उन्होंने फरमान की अनदेखी की थी। नक्सलियों ने ये क़दम इसीलिए उठाया है क्योंकि उन्हें शक है कि पुरुष मुखबिरी करते हैं और पुलिस को उनकी सूचनाएँ दे देते हैं। मेटानार पंचायत के उपसरपंच लालूराम मंडावी ने दैनिक जागरण से बात करते हुए बताया कि क्षेत्र का माहौल बहुत गर्म हो चुका है। गाँव में आपसी मतभेद के कारण ग्रामीण नक्सलियों तक अपने प्रतिद्वंदियों के बारे में ग़लत ख़बर भेज रहे हैं और लोग एक-एक कर मारे जा रहे हैं। जिनकी भी सूचना नक्सलियों तक पहुँच रही है, उन्हे सजा दी जा रही है।

नक्सली लोगों की बेरहमी से हत्या कर रहे हैं। माड़ के एक दर्जन से भी अधिक गाँवों से नक्सलियों द्वारा इस तरह की बंदिशें लगाने की सूचनाएँ आ रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पुलिस गाँव में आकर लोगों से बातें या पूछताछ करती है और जब नक्सली किसी ग्रामीण को पुलिस के साथ बातचीत करते हुए देख लेते हैं तो उनके साथ बुरा बर्ताव किया जाता है। नक्सली अपने ख़िलाफ़ चलाए जा रहे ऑपरेशन से बौखलाए हुए हैं। उनकी संख्या दिन प्रतिदिन कम होती जा रही है। उनका कुनबा छोटा होता जा रहा है। इसीलिए उन्होंने यह तरीका अपनाया है। उन्होंने गाँवों से जिला मुख्यालय तक जाने वाली सड़कों को रोक कर अपनी ताक़त दिखाई है।

छत्तीसगढ़ में कॉन्ग्रेस का शासन है और भूपेश बघेल को दिसंबर 2018 में प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया गया था। छत्तीसगढ़ में पिछले 15 वर्षों से रमन सिंह के नेतृत्व में भाजपा की सरकार थी। पिछले वर्ष हुए चुनाव में कॉन्ग्रेस ने यहाँ बड़ी जीत दर्ज की। फिलहाल नक्सलियों द्वारा इस तरह की हरकत के बाद राज्य का सियासी पारा फिर से चढ़ने की उम्मीद है।

श्री लंका ने 200 मौलवियों को देश से किया निष्कासित, ज़्यादातर पाकिस्तान, बांग्लादेश, मालदीव के

श्री लंका में ईस्टर संडे के मौके पर 21 अप्रैल को हुए सिलसिलेवार बम धमाकों के बाद सरकार ने बुर्के पर बैन लगाने के बाद अब एक और बड़ा कदम उठाया है। श्री लंका सरकार ने कुल 600 विदेशी नागरिकों को देश से निष्कासित कर दिया है। बता दें कि, देश से बाहर निकाले गए इन लोगों में 200 मौलवी भी शामिल हैं। श्री लंका के गृहमंत्री वाजिरा अबेवारदेना ने बताया कि हालाँकि इन मौलवियों ने कानूनी रूप से देश में प्रवेश किया था, लेकिन हमलों के बाद पाया गया कि ये लोग वीजा अवधि के खत्म होने के बाद भी ठहरे हुए थे। इसके लिए इन पर जुर्माना भी लगाया गया था, लेकिन हमले के बाद सुरक्षा कारणों की वजह से इन्हें देश से निष्कासित कर दिया गया।

गृह मंत्री ने बताया कि देश में मौजूदा स्थिति को देखते हुए वीजा प्रणाली की समीक्षा की गई, जिसमें धार्मिक उपदेशकों यानी मौलवियों आदि के लिए वीजा प्रतिबंधों को और अधिक कड़ा करने का फैसला किया है। अबेवारदेना ने आगे कहा कि पिछले एक दशक से देखा जा रहा है कि देश में धार्मिक संस्थान विदेशी उपदेशकों को तवज्जो दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात से कोई समस्या नहीं है, लेकिन हाल के दिनों में कुछ धार्मिक संस्थान इस मामले में काफी अधिक संख्या में फैल गए हैं। जिस पर ध्यान देने की अधिक आवश्यकता है। गृहमंत्री ने कहा कि सरकार इस आशंका में देश की वीजा नीति को खत्म कर रही है कि विदेशी मौलवी आत्मघाती बम विस्फोटों के लिए स्थानीय लोगों को कट्टरपंथी बना सकते हैं।

हालाँकि, गृहमंत्री ने देश से निष्कासित किए गए लोगों की राष्ट्रीयता के बारे में कोई जानकारी नहीं दी है, लेकिन श्री लंका की पुलिस का कहना है कि देश में हुए आत्मघाती हमलों के बाद पाया गया कि बांग्लादेश, भारत, मालदीव और पाकिस्तान से आए कई विदेशी वीजा की अवधि खत्म हो जाने के बाद भी यहाँ ठहरे हुए थे।

गौरतलब है कि, श्रीलंका में बीते 21 अप्रैल को ईस्टर के मौके पर भीषण आतंकी हमले में 257 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 500 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे। हमले की जिम्मेदारी आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (आइएस) ने ली थी, लेकिन श्री लंका की सरकार ने इसमें स्थानीय संगठन का हाथ बताया था। श्रीलंका की पुलिस के मुताबिक, इन हमलों को एक स्थानीय मौलवी के नेतृत्व में अंजाम दिया गया था।

जानकारी के मुताबिक, श्रीलंका में हुए हमलों के बाद से आपातकाल लागू कर दिया गया है और सैनिकों और पुलिस को लंबे समय तक संदिग्धों को गिरफ्तार करने और हिरासत में रखने के लिए व्यापक अधिकार दिए गए हैं और साथ ही तलाशी भी ली जा रही है।

इससे पहले श्री लंका के राष्ट्रपति मैत्रिपाल सिरिसेन ने अपनी आपातकालीन शक्तियों का प्रयोग करते हुए बुर्का या नकाब पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया था। यह फैसला भी आत्मघाती हमलों के बाद सुरक्षात्मक कदम के तौर पर उठाया गया था। राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया था कि राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबंध लगाया गया है। किसी को भी चेहरा इस तरह से नहीं ढकना चाहिए कि उसकी पहचान मुश्किल हो।

मनोज तिवारी पर हमले का मज़ाक उड़ाने वाले अभिसार शर्मा केजरी को थप्पड़ पड़ने से नाराज़

धान को गेंहूँ कहने वाले पत्रकार अभिसार शर्मा ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल को थप्पड़ मारे जाने को लेकर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया है। कोई भी अच्छा नागरिक इस घटना की निंदा करेगा। जब विधायकों द्वारा अरविन्द केजरीवाल को पीटे जाने की ख़बर आई थी, तब सबने उसकी निंदा की थी। लेकिन, इस बार केजरीवाल को फिर से कैमरे के सामने एक शख़्स ने लप्पड़ मारा। संवैधानिक पद पर बैठे किसी व्यक्ति को इस तरह मारे जाने की अभिसार शर्मा ने निंदा की लेकिन इस दौरान वो कुछ भूल गए, जो हम आपको आज याद दिलाने वाले हैं। सबसे पहले नीचे वह ट्वीट देखिए कि कैसे अभिसार केजरीवाल की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं।

अब आते हैं अभिसार शर्मा के असली चेहरे की ओर। आपको याद होगा जब आम आदमी पार्टी के विधायक अमानतुल्लाह ख़ान ने मंच पर दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष मनोज तिवारी को धक्का दिया था। अरविन्द केजरीवाल को झापड़ पड़ने की निंदा करने वाले अभिसार शर्मा ने मनोज तिवारी को धक्का दिए जाने की भी निंदा की होगी, है या नहीं? अगर आप ऐसा सोच रहे हैं तो आप ग़लत हैं। दरअसल, अपने दोहरे रवैये के लिए जाने जाने वाले अभिसार ने उस समय मनोज तिवारी का मज़ाक उड़ाया था। इसके लिए उन्होंने मनोज तिवारी के ही गाने ‘रिंकिया के पापा’ का प्रयोग किया था। नीचे वाले ट्वीट में आप उनके दोहरे रवैये के साथ ही उनके घटियापन को भी देख सकते हैं।

ट्रेंड की बॉडी में हेडलाइट खोजने वाले अभिसार शर्मा जैसे पत्रकार उस समय तो नाराज़ होते हैं जब इनके ‘अपने’ को थप्पड़ पड़ता है लेकिन जब भाजपा के नेताओं के साथ दुर्व्यवहार होता है तो इनकी बाँछें खिल जाती हैं और ये मज़ाक के मूड में आ जाते हैं। अभिसार शर्मा ने भी अन्य गिरोह विशेष के पत्रकारों की तरह उसी रवैये का परिचय दिया।

होना तो यह चाहिए कि किसी भी तरह के हिंसा को जायज ठहराना, या इसकी आड़ में किसी का मजाक बनाना दोनों गलत है। यह आपकी ओछी मानसिकता को भी दर्शाता है।

सैफई में गोबर के कंडे उठाने वाले अब ₹5 करोड़ की गाड़ियों से घूम रहे हैं: वरुण गाँधी

भाजपा नेता वरुण गाँधी ने उत्तर प्रदेश के मुलायम परिवार पर करारा निशाना साधा है। उन्होंने शनिवार (मई 4, 2019) को अपने संसदीय क्षेत्र में अपनी माँ और केंद्रीय मंत्री मेनका गाँधी के लिए चुनाव प्रचार करने के दौरान कहा कि जो लोग आज से 20 साल पहले सैफई में गोबर के कंडे उठाया करते थे, वो आज पाँच करोड़ रुपयों की गाड़ी से चल रहे हैं। वरुण ने इस दौरान इमोशनल अपील करते हुए कहा कि वो माँ के लिए वोट माँगने आए हैं। वरुण ने कहा कि वो भारत माँ के लिए वोट माँग रहे हैं। वरुण ने कहा कि आज भारत माँ आपकी तरफ देखकर आपसे पूछ रही है कि क्या आप उनके साथ हैं जिन्होंने मेरे सीने को चीरने-फाड़ने का काम किया है, यहाँ आप नरेंद्र मोदी का साथ देंगे जिसने पाकिस्तान को अपने जूते के नीचे मसलने का काम किया है।

बता दें कि वरुण गाँधी सुल्तानपुर से सांसद हैं जबकि उनकी माँ मेनका गाँधी पीलीभीत से सांसद हैं। ये दोनों ही सीटें उत्तर प्रदेश में आती हैं। इस चुनाव में भाजपा ने दोनों की सीटों को एक दूसरे से बदल दिया है। वरुण गाँधी इस बार पीलीभीत से ताल ठोक रहे हैं, वहीं मेनका गाँधी सुल्तानपुर से चुनावी मैदान में हैं। वरुण पीलीभीत से 2009 में लोकसभा चुनाव जीत चुके हैं। मेनका गाँधी अभी केंद्र में महिला एवं बाल विकास मंत्री हैं। इससे पहले उत्तर प्रदेश के प्रमुख नेता की तरफ इशारा करते हुए वरुण ने चुनाव प्रचार के दौरान कहा था:

“अगर आपने गठबंधन को जिता दिया तो यह लोग तो पाकिस्तान के आदमी हैं। किसने रामभक्तों पर गोलियाँ चलवाईं और 500 लोगों को मारा? इसलिए उनको श्राप लगा और उनके बेटे ने उन्हें जूते मारकर घर से निकाल दिया और अब पब्लिक उन्हें जूते मारकर बाहर निकालेगी।”

यादव परिवार द्वारा महँगी गाड़ियाँ प्रयोग किए जाने को लेकर वरुण ने पूछा कि क्या ये पब्लिक का पैसा नहीं है? उन्होंने पूछा कि क्या ये इनके दादा का पैसा है? वरुण ने कहा कि ये लोग देश पर कब्ज़ा कर के अपनी जेबें भरने वाली सोच रखते हैं। उन्होंने जनता से पूरे समाज को एक करने और समाज में राष्ट्रभक्ति की गूँज सुनाने को कहा, ताकि देश का झंडा नीचे नहीं हो। मेनका गाँधी के बारे में बात करते हुए वरुण ने कहा कि उनके 35 वर्ष के राजनीतिक करियर के दौरान उनपर आज तक एक भी दाग नहीं लगा।

गौतम गंभीर को दिल्ली इलेक्शन में नीचा दिखाने के लिए स्पाइन वाली मीडिया पाकिस्तान पहुँच गई

आज कल एक नए किस्म का जर्नलिज्म चला है, स्पाइन वाला जर्नलिज्म। इस तरह के जर्नलिज्म के
दो साधारण से नियम है- पहला, यदि आप मोदी से प्रश्न पूछ रहे हैं तो बिल्कुल कड़ा सवाल पूछिए। क्या खाते हैं, क्या पहनते हैं या क्या पसंद है? इस तरह के सवालों का इसमें कोई गुंजाइश नहीं है। दूसरा, यदि आप राहुल गाँधी, केजरीवाल, ममता बनर्जी से सवाल पूछ रहे हैं तो कोई भी जवाब, समाज शास्त्र, भूगोल, इतिहास और गणित सबमें चलेगा। यानी कि 12000 x 60 = 3,60,000 भी सही है, बंगाल में बूथ लूटना भी गलत नहीं है और दिल्ली-पंजाब के दलितों में भेदभाव भी चलता है।

अक्षय कुमार ने मोदी से आम पर चार सवाल पूछ लिया तो पूरा लुटियंस लंका की तरह सात दिन तक जलता रहा। रवीश कुमार दिल्ली के किसी भी गली मोहल्ले में घुसकर ठेले से आम उठा रहे थे और “ये आम है खीं खीं खीं, वो लहसून है, हें हें हें” बोल कर मोदी के इंटरव्यू का मजाक उड़ा रहे थे| मीडिया में बैठे प्यादों से लेकर वज़ीर तक हर इंसान ये समझा रहा है कि इलेक्शन के समय अक्षय कुमार आम पर सवाल पूछ कर लोकतंत्र को कैसे मूर्छित कर गए।

कुछ ज्यादा स्पाइन वाले दिग्गज जर्नलिस्ट्स तो अक्षय कुमार की नागरिकता पर अटक गए। जिन्होंने आज तक ग्लोबल जर्नलिज्म और फ़्रीडम ऑफ़ स्पीच पर ज्ञान चक्षु खोला है, उन्हें अक्षय कुमार के नागरिकता के कारण वह होस्ट के रूप में ही ओड चॉइस दिखने लगे।

वरिष्ठ पत्रकार शेखर गुप्ता, जो कि एडिटर्स गिल्ड के अध्यक्ष और ‘द प्रिंट’ के प्रधान संपादक भी हैं उन्हें भी आम से अक्षय कुमार की नागरिकता एवं निष्ठा याद आ गई। ग़ौरतलब है कि अक्षय कुमार ने साफ़-साफ़ कहा था कि ये इंटरव्यू राजनीतिक नहीं है।

तमाम भारत को तानाशाही से बचाने वाले और इलेक्शन के समय देश में ज्ञान की रौशनी फ़ैलाने वाले इसी ‘द प्रिंट’ को दिल्ली इलेक्शन के समय शाहिद अफरीदी का गौतम गंभीर पर दिया गया बयान याद आ जाता है। शाहिद अफरीदी ने एक किताब प्रकाशित की है, जिसमें उन्होंने भारतीय खिलाडियों के बारे में लिखा है। द प्रिंट को इन सब में गंभीर के बारे में लिखी गयी बातें इतनी पसंद आ गयी कि इन्होंने उसे हेडलाइन ही बना दिया।


गौतम गंभीर के रिकॉर्ड पर लिखने और बोलने वाले ये लोग 2011 के वर्ल्ड कप के समय शायद फ़ीफ़ा देख रहे थे या वो मेमोरी लॉस के शिकार हैं। जहाँ तक शेखर जी की बात है, वो तो बहुत वरिष्ठ पत्रकार हैं। उन्हें ये भी मालूम है कि इलेक्शन के समय क्या-क्या नहीं लिखना चाहिए। वैसे, ये तो सारे स्पाइन वाले पत्रकारों को मालूम है।

ख़ैर, गौतम गंभीर का रिकॉर्ड अफरीदी, आतिशी मर्लेना, अरविन्द केजरीवाल और प्रिंट सब को पता है। उन्हें ये भी पता है कि गंभीर बोलते कम और प्रहार ज्यादा करते हैं।

राहुल गाँधी को ‘पप्पू’ न मानने वाले सैम पित्रोदा को गुजरात में क्यों नहीं दिखता विकास!

गाँधी परिवार के क़रीबी सैम पित्रोदा आए दिन अपनी टीका-टिप्पणियों के लिए विवादों में रहते हैं। एक बार फिर उन्होंने गाँधी परिवार के प्रति अपनी भक्ति दिखाते हुए राहुल गाँधी के पक्ष में बयान दिया है। अपने इस बयान के लिए उन्होंने बाक़ायदा प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई और संंवाददाताओं के सामने यह ‘ख़ुलासा’ किया कि राहुल गाँधी ‘पप्पू’ नहीं हैं, वो ‘बहुत शिक्षित और इंटेलीजेंट’ हैं।

कॉन्फ्रेन्स में पित्रोदा ने ये भी कहा कि उन्होंने राहुल के साथ एक लंबा समय व्यतीत किया है, जिसके दम पर वो ये बात कह सकते हैं कि वो पप्पू नहीं हैं। केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए पित्रोदा ने पीएम मोदी को भी ख़ूब कोसा। उन्होंने पीएम मोदी द्वारा राजीव गाँधी को ‘भ्रष्टाचारी नम्बर-1’ कहने पर भी कड़ी आपत्ति दर्ज की। इस पर सवालिया होते हुए उन्होंने पूछा कि राहुल गाँधी के पिता राजीव गाँधी को भष्टाचार नम्बर-1 कहने के पीछे आख़िर क्या वजह थी?

ख़ुद को गुजराती बताते हुए पित्रोदा ने पीएम मोदी को घेरते हुए कहा कि उन्होंने (मोदी) राज्य के विकास के लिए कुछ नहीं किया और केवल झूठ ही फैलाया। बीजेपी पर अपना हमलावर रुख़ क़ायम रखते हुए पित्रोदा ने नौकरी, किसानों की डबल इनकम और काले धन को भी मुद्दा बनाया।

ये बड़े दुर्भाग्य की बात है कि पित्रोदा गुजरात से हैं और उन्हें वहाँ विकास के नाम पर कुछ नहीं दिखाई देता। सम्पूर्ण विश्व में गुजरात के विकास मॉडल की चर्चा है। गुजरात में विकास को आम जनता की सहभागिता से एक विस्तृत रूप दिया गया है। गुजरात की विकास यात्रा जनता को सहभागी होने के साथ ही समावेशी भी बनाती है। हाल के वर्षों में गुजरात की उल्लेखनीय सफलता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कृत किया गया है। साथ ही बड़े वैचारिक समूहों एवं संयुक्त राष्ट्र संघ ने भी गुजरात के विकास की सरहाना की है। इससे अधिक गुजरात के विकास पर जानने के लिए यहाँ क्लिक करें

आपको बता दें कि पित्रोदा इससे पहले भी कॉन्ग्रेस के प्रति अपनी भक्ति प्रमाणित कर चुके हैं, जब पुलवामा हमले के शिकार हुए भारतीय जवानों की बजाए उनका प्रेम पाकिस्तान पर ही उमड़ा था। जहाँ एक तरफ पुलवामा हमले की चौतरफा निंदा हो रही थी, वहीं पित्रोदा ने यहाँ तक कह दिया था कि इस हमले के लिए पूरे पाकिस्तान को दोषी ठहराना ग़लत है।

इसके अलावा मुंबई हमले (26/11) पर भी उन्होंने कहा था कि मात्र 8 लोगों ने इस हमले को अंजाम दिया था जिसके लिए पूरे देश (पाकिस्तान) पर आरोप नहीं लगाना चाहिए।

पाकिस्तान के प्रति उनका यह लगाव, उनकी सच्ची देश-भक्ति को दर्शाता है जो जगज़ाहिर है। अब वो बात अलग है कि ऐसे कितने लोग हैं जो उनकी इस देश-भक्ति को देखने में पूरी तरह से सक्षम हैं, जो यह देख सकें कि पित्रोदा का दिल किस देश के लिए सही मायनों में धड़कता है। कम से कम सोशल मीडिया पर तो इसे बड़ी ही सरलता से देखा जा सकता है।

राहुल गाँधी की ‘न्याय योजना’ को सफल बनाने के लिए भी सैम पित्रोदा ही आगे आए थे और कहा था कि मध्यम वर्ग को ज़्यादा टैक्स देने के लिए तैयार रहने की ज़रूरत है। क्योंकि उस टैक्स का इस्तेमाल न्याय योजना के लिए आर्थिक बंदोबस्त करने में लगेगा। बाद में ‘न्याय योजना’ ख़ुद ही तमाम सवालों में घिरी दिखी

इसके अलावा एक और बात सामने आई थी कि इंडियन ओवरसीज कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष सैम पित्रोदा को मोबाइल चलाते भारतीय भी नहीं भाते, क्योंकि उनका कहना है कि मोबाइल चलाने वाला हर भारतीय बन्दर है

यह कहना ग़लत नहीं होगा कि कॉन्ग्रेस और उनके चहेतों को मोदी राज में केवल ख़ामियाँ ही नज़र आती हैं। जबकि गाँधी-वाड्रा परिवार के अनेकों घोटाले अब सामने आ चुके हैं। भष्ट्राचार में लिप्त कॉन्ग्रेस का नाता देश में हुए लगभग हर घोटाले से है। बावजूद इसके पित्रोदा जैसे लोग जब कॉन्ग्रेस के बचाव में उतरतें हैं तो बड़ा अफ़सोस होता है। ऐसा करने से उनकी जिस इंटेलीजेंसी का पता चलता है, वो किसी से छिपी नहीं है।

अपनी धुर विरोधी पार्टी बीजेपी के ख़िलाफ़ कोई मुद्दा ना मिलता देख केवल इसी ताक में रहना कि कब मोदी क्या कह दें और उसे एक मौक़ा समझकर ये सारे लपक लें, और फिर शुरू हो जाए अनरगल बातों का दौर। मेरी नज़र में ये स्थिति बेहद हास्यास्पद है कि कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी को पप्पू न समझने के लिए पित्रोदा जैसे समझदार व्यक्ति को प्रेस कॉन्फ़्रेंस तक करनी पड़ गई, इसी से पता चलता है कि वाकई देश में ‘पप्पू’ की कमी नहीं है।

मेरा कार्यकाल जाँच के लिए खुला था, मोदी ने युवाओं, व्यापारियों, किसानों को किया तबाह: मनमोहन

पूर्व प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल को युवाओं, व्यापारियों व किसानों के लिए तबाही वाला बताया है। नरेंद्र मोदी सरकार के पाँच वर्षों का विश्लेषण करते हुए मनमोहन ने कहा कि भाजपा सरकार चलाने और जवाबदेही में विफल साबित हुई है। उन्होंने कहा कि भाजपा हर रोज एक नया नैरेटिव गढ़ रही है, यह दिखाता है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर उनके पास कोई विजन ही नहीं है। उन्होंने अपने कार्यकाल की बात करते हुए कहा कि उनकी सरकार छानबीन व जाँच के लिए एकदम खुली थी लेकिन नरेंद्र मोदी की सरकार अपने ऊपर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर ख़ुद को अनुत्तरदायी मानती है।

मनमोहन सिंह ने कहा कि मोदी सरकार ने देश की अर्थव्यवस्था को बुरी स्थिति में ला दिया है, इसीलिए देश आर्थिक मंदी की ओर अग्रसर है। हिंदुस्तान टाइम्स को दिए इंटरव्यू में पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसी सरकार को बाहर का रास्ता दिखा देना चाहिए। मोदी की पाकिस्तान नीति पर सवाल खड़े करते हुए उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को लेकर उनकी पॉलिसी फ्लिप-फ्लॉप पर आधारित थी। उन्होंने कहा कि मोदी पाकिस्तान तो गए ही, साथ ही उन्होंने आईएसआई को पठानकोट में निमंत्रण दिया।

डॉक्टर सिंह ने आर्थिक भगोड़ों विजय माल्या और नीरव मोदी की तरफ इशारा करते हुए कहा कि सत्ता में बैठे लोग और देश छोड़ कर भागने वालों के बीच मिलीभगत थी। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार के प्रति लोगों में भारी गुस्सा है। इससे पहले पीएम मोदी ने मनमोहन सिंह पर हमला बोलते हुए उन्हें वाचमैन और एक्टिंग पीएम बताया था। मोदी ने मनमोहन सिंह पर निशाना साधते हुए कहा था:

क्रिकेट में दिन का खेल पूरा होने का समय आख़िरी ओवर बाकी हो और एक-दो और कोई आउट होता है तो जो आखिरी नंबर का होता है उसे लाया जाता है, वह नाइट वॉचमैन का काम करता है। नाइट वॉचमैन को भेजते हैं, जो अच्छे खिलाड़ी हैं, उन्हें नहीं भेजते। कॉन्ग्रेस को 2004 में उन्होंने सोचा नहीं था, अचानक मौका मिल गया तो राजकुमार की संभालने की स्थिति नहीं थी, ख़ुद परिवार को राजकुमार पर भरोसा नहीं था। कॉन्ग्रेस को भरोसा नहीं था तो राजकुमार के तैयार होने तक परिवार का वफादार वॉचमैन बैठाने की योजना बनी। उन्होंने सोचा कि राजकुमार आज सीखेगा, कल सीखेगा, सब इंतजार करते रहे, भरपूर ट्रेनिंग देने की कोशिश भी की गई लेकिन सबकुछ बेकार हो गया।

भारत ने 20 बांग्लादेशी घुसपैठियों को असम सरकार के सहयोग से वापस भेजा

असम सरकार ने बांग्लादेश के अवैध रूप से भारत में प्रवेश करने वाले और बस जाने वाले 20 बांग्लादेशी नागरिकों को देश से निकाल दिया है। उन्हें भारत-बांग्लादेश सीमा पर बांग्लादेश के हवाले कर दिया गया है। निर्वासित होने वालों में एक महिला भी शामिल है।

सुतरकाण्डी-शेओला सीमा पर आदान-प्रदान

बॉर्डर विंग के पुलिस इन्स्पेक्टर उत्पल शर्मा ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि सुतरकाण्डी, करीमगंज (भारत)-शेओला (बांग्लादेश) की चेक पोस्ट पर इन बीस लोगों को बांग्लादेश के हवाले कर दिया गया। इन सभी पर पासपोर्ट एक्ट या फॉरेनर्स एक्ट या फिर इन दोनों के उल्लंघन का आरोप साबित हुआ था। आरोपी सिलचर जेल में बंदी था। एनडीटीवी से हुई शर्मा की बातचीत के अनुसार इनमें से अधिकाँश लोग अपने रिश्तेदारों से भेंट करने या नौकरी ढूँढ़ने आए थे।

बांग्लादेश के सिलहट और नोआखली जिलों से ताल्लुक रखने वाले इन अवैध प्रवासियों ने निर्वासन प्रक्रिया का कोई विरोध नहीं किया है। करीमगंज के एसपी मानबेन्द्र देव रॉय ने न्यू इंडियन एक्सप्रेस से फोन पर बात करते हुए यह जानकारी दी। उन्होंने यह भी बताया कि जहाँ कुछ 2014 से ही भारत में हैं, वहीं अधिकाँश लोग 2015-18 के बीच आए हैं।

श्रीलंका आतंकी की हिंदू पत्नी का धर्मांतरण कर आतंक के लिए उकसाया, बनाया आतंकी

श्रीलंकाई आत्मघाती हमलावर मोहम्मद हस्थून की बेगम, पुलस्थिनी महेंद्रन (कुछ रिपोर्टों में पुलस्थिनी राजेंद्रन के रूप में भी इसका उल्लेख किया गया है) उर्फ सारा, जिसे हाल ही में श्रीलंकाई बम विस्फोटों में एक सक्रिय भागीदार माना जाता है। जो एक हिंदू निम्न मध्यम वर्ग परिवार में पैदा हुई थी और उसे धर्मांतरित कर इस्लाम कबूल कराया गया और कट्टरपंथी तालीम दी गई। ऐसा लोकप्रिय तमिल चैनल IBC तमीज़ की एक रिपोर्ट से पता चला है।

रिपोर्ट के अनुसार, पुलस्थिनी का जन्म श्रीलंका के पूर्वी प्रांत में बट्टिकलोआ जिले में स्थित थेटातिवु में एक मध्यमवर्गीय हिंदू परिवार में हुआ था और कथित तौर पर उसका अपहरण कर लिया गया था, जिसके बाद उसे धर्मान्तरित कर इस्लाम कबूल कराया गया और इस्लामी समूहों ने उसे इस कदर कट्टरपंथी बना दिया।

IBC तमीज़ का उसकी माँ कविता महेन्द्रन के साथ साक्षात्कार बताता है कि पुलस्थिनी एक होनहार छात्रा थी जो मेडिकल की पढ़ाई कर रही थी। वह स्कूल में पारंपरिक तमिल और हिंदू धार्मिक अध्ययन भी करती थी। इसी दौरान, अब्दुल रज़िक ने पुलस्थिनी का अपहरण कर लिया जब वह एक छात्रा ही थी।

कविता का दावा है कि उसने अपनी बेटी को वापस लाने की बहुत कोशिश की, लेकिन रज़िक  ने जोर देकर कहा कि पुलस्तिनी खुश है और उसने अपना निर्णय स्वयं लिया है। कुछ महीने बाद, रज़िक ने कविता को फोन करके बताया कि उसकी बेटी ने इस्लाम कबूल कर लिया है और उसकी शादी एक आदमी से कर दी गई। उसका पति मोहम्मद हस्थून को माना जाता है, जो ईस्टर संडे को सेंट सेबेस्टियन चर्च में बम विस्फोट करते हुए कैमरे में कैद हुआ था।

यहीं से कविता ने अपनी बेटी के साथ खुद को सभी संबंधों से अलग कर लिया। इसके एक महीने बाद, कविता का दावा है कि उसे अपनी परेशान बेटी का फोन आया जिसने कहा कि वह जीवन में बहुत दुखी है और वह पूरी तरह टूट चुकी थी। हालाँकि, इस फोन कॉल के बाद, पुलस्थिनी से कोई संपर्क नहीं हुआ।

ईस्टर संडे के हमलों के लगभग दो हफ्ते पहले, कविता ने एक अज्ञात व्यक्ति का दावा किया, जिसने खुद की पहचान श्रीलंकाई खुफिया अधिकारी के रूप में देते हुए बताया कि वह पुलस्थिनी की तलाश में आया था, इसके आलावा उसने कोई जानकारी नहीं दी।

IBC की रिपोर्ट बताती है कि अबुल रज़िक वास्तव में एक कट्टरपंथी इस्लामिक संगठन, श्रीलंकाई तोहिद जमाथ (SLTJ) का नेता है, जिसका तमिलनाडु के तोहिद जमाथ के साथ वैचारिक संबंध है।

बता दें कि आईएसआईएस ने पिछले महीने श्रीलंका में हुए सिलसिलेवार विस्फोटों की जिम्मेदारी ली थी, जिसमें 300 से अधिक लोगों की जान जाने का दावा किया गया था। इस आत्मघाती हमले में सबसे अमीर और राजनीतिक रूप से अच्छी-खासी दखल रखने वाले व्यक्ति के 2 बेटे आत्मघाती हमलावर पाए गए। बम विस्फोट करने वालों में से एक की पत्नी द्वारा कोलम्बो में रहने वाले पुलिसकर्मियों को मारने के लिए आत्मघाती विस्फोट के बाद उसके परिवार से पूछताछ चल रही है।