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कश्मीर में भाजपा नेता की हत्या, महबूबा करती रह गईं रमजान में शांति की अपील

दक्षिण कश्मीर के नौगाम में आतंकवादियों ने भाजपा के जिला उपाध्यक्ष गुल मोहम्मद मीर की गोली मारकर हत्या कर दी। शनिवार (4 मई) को हुए इस हत्याकांड को उन्हीं के घर में अंजाम दिया गया। सीने और पेट में गोलियाँ लगने के बाद मीर को आनन-फानन में अस्पताल ले जाया गया जहाँ उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। यह हत्याकांड ठीक उसी समय हुआ है जब कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने दहशतगर्दों से रमजान के महीने में दहशतगर्दी और हिंसा न करने की अपील की थी।

दो बार के चुनावी उम्मीदवार भी थे मीर

मीर ने भाजपा के टिकट पर 2008 और 2014 के विधानसभा चुनाव भी लड़े थे। गौरतलब है कि देश की अन्य विधानसभाओं के 5-वर्षीय कार्यकाल से अलग कश्मीर विधानसभा का कार्यकाल 6 वर्ष का होता है। राज्य भाजपा के प्रवक्ता अतलाफ ठाकुर ने कहा कि दहशतगर्दों से खतरा होने के बावजूद सरकार ने मीर की सुरक्षा हटा दी थी।

महबूबा के बयान की तीखी आलोचना  

इस बीच महबूबा मुफ़्ती के बयान की सोशल मीडिया पर तीखी आलोचना हो रही है। इसे केवल रमजान में शांति बनाए रखने और बाकी समय हिंसा जारी रखने को उनका अव्यक्त समर्थन माना जा रहा है। एक ट्विटर यूजर ने लिखा:

एक अन्य ने भी सवाल खड़े करते हुए प्रतिक्रिया दी:

महबूबा ने सरकार से भी रमजान के महीने में दहशतगर्दों के खिलाफ अभियान रोक देने और सर्च ऑपरेशन न करने की अपील की है। उनके मुताबिक इससे कश्मीर के लोग कम-से-कम के महीने सुकून से रह सकेंगे। महबूबा की अपील के परिप्रेक्ष्य में यह याद कर लेना जरूरी है कि 2017 में रमजान के कुछ ही दिन बाद दहशतगर्दों ने अमरनाथ यात्रा पर जा रहे हिन्दू श्रद्धालुओं के काफिले पर हमला कर 7 श्रद्धालुओं की हत्या कर दी थी

जानिए कैसे भारत की मुस्तैदी के कारण बची 11 लाख लोगों की जान: UN ने भी की तारीफ

ओडिशा ने शुक्रवार (मई 3, 2019) को आए भीषण चक्रवाती तूफान फोनी के प्रकोप का सामना किया। लेकिन जानमाल की बहुत ज्यादा हानि नहीं हुई। भारत ने आपदा प्रबंधन और बेहतर बचाव की तैयारी से जानमाल के संभावित नुकसान को न्यूनतम स्तर पर रख कर समूचे विश्व को चौंका दिया। चक्रवात फोनी दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों में भारी नुकसान करने वाले तूफानों जैसा ही था, मगर बेहतर प्लानिंग की वजह से भारत में बहुत कम नुकसान देखने को मिला।

केन्द्र सरकार और राज्य सरकार ने अपनी बेहतर प्लानिंग से जन हानि को कई गुना कम करके पूरी दुनिया को दिखा दिया है कि विनाशकारी चक्रवाती तूफानों से कैसे निपटा जा सकता है। संयुक्त राष्ट्र ने भी भारत के प्रयासों की जमकर तारीफ की है। फोनी जैसा भीषण तूफान सैकड़ों लोगों की जान ले सकता था। इससे पहले 1999 में ओडिशा में आए सुपर साइक्लोन से 10 हजार से ज्यादा लोगों की जान चली गई थी। लेकिन इस बार मौत का आँकड़ा 12 तक ही सिमट गया।

चक्रवात के खतरों से निपटने के लिए भारत सरकार की zero-casualty नीति की प्रशंसा करते हुए UNISDR के एक प्रवक्ता डेनिस मैकक्लेन ने कहा कि भारतीय मौसम विभाग की प्रारंभिक चेतावनियों की सटीक जानकारी की वजह से सुरक्षा अधिकारियों ने इस तूफान से निपटने में सक्षम हो पाए और जान-माल को होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम किया। इस मामले में आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिए संयुक्त राष्ट्र महासचिव के विशेष प्रतिनिधि मामी मिजुतोरी ने कहा कि अत्यंत प्रतिकूल हालात में भारत में हताहतों की तादाद बेहद कम है जिसके लिए सरकारी मौसम और आपदा प्रबंधन विभाग बधाई के पात्र हैं।

जानकारी के मुताबिक, इस चक्रवाती तूफान का पता मौसम वैज्ञानिकों ने तकरीबन एक हफ्ते पहले ही लगा लिया था, जब उन्होंने दक्षिणी हिंद महासागर में निम्न दवाब की स्थिति को देखा था। जिसके बाद 5 भारतीय सैटेलाइट ने उस क्षेत्र पर लगातार नजर बनाए रखी थी, जो फोनी चक्रवात का रूप ले रहा था। इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (ISRO) द्वारा भेजे गए सैटेलाइट हर 15 मिनट पर ग्राउंड स्टेशन पर इससे संबंधित डेटा भेज रहे थे, जिससे फोनी को ट्रैक करने और उसके मूवमेंट के बारे में सही-सही पूर्वानुमान लगाया जा सके। और इसी जानकारी की मदद से हजारों ज़िंदगियाँ बचाने में मदद मिली।

भारतीय मौसम विभाग के अनुसार फोनी की तीव्रता, लोकेशन और उसके आसपास के बादलों के अध्ययन के लिए Insat-3D, Insat-3DR, Scatsat-1, Oceansat-2 और मेघा ट्रॉपिक्स सैटलाइटों द्वारा भेजे गए डेटा का इस्तेमाल किया गया। फोनी के केंद्र के 1,000 किलोमीटर के दायरे में बादल छाए हुए थे, लेकिन बारिश वाले बादल सिर्फ 100 से 200 किलोमीटर के दायरे में थे। बाकी बादल करीब 10 हजार फीट की ऊँचाई पर थे। IMD के डायरेक्टर जनरल के. जे. रमेश ने बताया कि तूफान या चक्रवात के दौरान सैटलाइटों का पूर्वानुमान में महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि सैटेलाइटों द्वारा भेजे गए डेटा से उन्हें आने वाले चक्रवाते के लिए सटीक पूर्वानुमान जारी करने में मदद मिलती है।

सैटलाइटों के द्वारा दिए गए डेटा के आधार पर IMD ने इस बात का सटीक पूर्वानुमान लगाया कि फोनी किस जगह पर लैंडफॉल करेगा और इसी वजह से ओडिशा, आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल में समय रहते 11.5 लाख से अधिक लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुँचा दिया गया। बता दें कि, इस दौरान Scatsat-1 से भेजे गए डेटा से चक्रवाती तूफान के केंद्र पर नजर रखी गई, तो वहीं Oceansat-2 समुद्री सतह, हवा की गति और दिशा के बारे में डेटा भेज रहा था।

जब-जब केजरीवाल पर ‘थप्‍पड़’ पड़ा, आम आदमी पार्टी का चंदा बढ़ा, कहीं ये पब्लिसिटी स्टंट तो नहीं?

आज मोतीनगर में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को रोड शो के दौरान किसी आक्रोशित नवयुवक ने थप्पड़ जड़ दिया। गौरतलब है कि इससे कुछ महीने पहले उनके ऊपर दिल्ली सचिवालय में लाल मिर्च पावडर फेंके जाने की खबर भी सामने आई थी। जिसमे बाद में मीडिया में खबर आई की केजरीवाल ने खुद ही अपने ऊपर फेंकवाया था।

इस तरह की घटनाएँ निंदनीय है। फिर भी आए दिन जनता अपना आक्रोश इस रूप में क्यों निकाल रही है। लोगों को हैरत में डाल रही है। सोचने वाली बात ये भी है कि अक्सर आम आदमी पार्टी के सर्वेसर्वा और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल सुरक्षा व्यवस्था होने के बावजूद भी इस तरह की शारीरिक हिंसा के शिकार क्यों हो जाते हैं?


ऐसी घटनाओं के बीच, चौकाने वाली बात ये भी है कि अरविन्द केजरीवाल पर जब-जब हमला हुआ, आम आदमी पार्टी का फंड बढ़ा है। ऐसे में सवाल उठना लाज़मी है कि क्या हर हमले के बाद चंदे देने वाले और मेहरबान हो जाते हैं? हालाँकि, दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष मनोज तिवारी और आप के ही निष्काशित विधायक कपिल मिश्रा समेत कई नेताओं का कहना है कि केजरीवाल का थप्पड़ स्टंट उनके ही प्रचार तंत्र का हिस्सा है। इसके बावजूद मनोज तिवारी ने ऐसी घटनाओं की कड़ी निंदा की है।

अगर देखा जाए तो अब तक केजरीवाल पर करीब 8-10 थप्पड़ या इंक फेंकने की घटनाएँ हो चुकीं हैं। संख्‍या घट बढ़ सकती है पर इससे जुड़े आँकड़े चौकाने वाले हैं। इस तरह की घटनाएँ केजरीवाल को फिर से चर्चा में ला देतीं हैं, जिससे पार्टी को मिलने वाले चंदों में भी काफी बढ़ोतरी देखी गई है।

अगर आँकड़ों पर नज़र डालें तो आम आदमी पार्टी को दिसंबर 2012 से अप्रैल 2014 तक 111 देशों से 86,649 लोगों ने महज 24.53 करोड़ रुपए चंदे के रूप में दिए थे। जबकि लोकसभा चुनाव 2014 में आम आदमी पार्टी ने 100 करोड़ रुपए चंदा इकठ्ठा करने का टारगेट रखा था। कमाल की बात है कि 28 मार्च 2014 को केजरीवाल को हरियाणा के रोहतक में गर्दन पर हमला हुआ था। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस दिन पार्टी को 42 लाख रुपए चंदे में मिले।

साउथ दिल्ली के दक्षिणपुरी में 4 अप्रैल 2014 को केजरीवाल को घूसे और लप्पड़ पड़े। उस दिन आम आदमी पार्टी को ऑनलाइन 1.35 करोड़ रुपए का चंदा मिला।  

दक्षिणपुरी की घटना के ठीक चार दिन बाद, कहते हैं पार्टी ने प्रयोग दोहराया। दिल्ली के सुल्तानपुरी इलाके में अपने रोड शो के दौरान केजरीवाल पर एक बार फिर से हमला हुआ। इस बार एक ऑटो चालक लाली ने उसे माला पहनाकर दो थप्पड़ रसीद कर दिए। बता दें कि उस बार भी उस बार भी पार्टी को मिलने वाली चंदे की रकम में अच्छी-खासी बढ़ोतरी हुई।

कहते हैं, हमले के बाद चंदे में बढ़ोतरी का ट्रेंड एक दिन अपवाद रहा फिर जब कम हुआ तो केजरीवाल पर अहमदाबाद में फिर से हमला हुआ। यह सिलसिला यहीं नहीं रुका बल्कि तब से अनवरत जारी है। जब -जब केजरीवाल चर्चा से बाहर होने लगते हैं तब ऐसी घटनाएँ होती नज़र आती हैं।

2016 में भावना अरोरा नाम की एक महिला ने दिल्ली में सीएनजी घोटाले का आरोप लगाते हुए केजरीवाल पर हमला किया। जो कि दिल्ली के मुख्यमंत्री बनने के बाद से केजरीवाल पर यह पहला हमला था।

वैसे पिछले काफी समय से केजरीवाल लोकसभा-2019 चुनाव के लिए चंदे का रोना रो रहे थे ऐसे में ये कयास लगाना गलत नहीं होगा कि क्या मोतीनगर में फिर से अपना वही प्रयोग दोहराना केजरीवाल का चंदा बढ़ाने वाला पेट नुस्खा तो नहीं? यहाँ तक कि उनके अपने विधायक कपिल मिश्रा ने आरोप लगाया है कि पूरे दिल्ली को पता था कि केजरीवाल फिर से खुद को थप्पड़ मरवाने वाले हैं।

खैर, कारण जो भी हो पर, लोकतंत्र में जनता अपने नेता से कितनी भी नाराज क्यों न हो, फिर भी इस तरह से शारीरिक हिंसा पर उतर आना घोर निंदनीय है। अगर कोई पार्टी वास्तव में इसे पब्लिसिटी या चंदे का साधन बना कर प्रयोग कर रही है तो ये भी लोकतान्त्रिक व्यस्था का मजाक बनाना ही है। इस तरह की घटनाओं को किसी भी हाल में जायज नहीं ठहराया जा सकता है। आपइंडिया ऐसी हरकतों की कड़ी निंदा करता है।

आख़िरकार केजरीवाल को मिला हाथ का साथ, आपियों में खुशी की लहर

आत्ममुग्ध बौने के नाम से प्रसिद्द अरविन्द केजरीवाल आजादी के बाद देश में सबसे ज्यादा बार सड़क पर कूटे जाने वाले पहले मुख्यमंत्री बन गए हैं। नई वाली राजनीति करने के नाम पर आए दिन मार खा-खा कर जीवन यापन करना अरविन्द केजरीवाल का पार्ट टाइम जॉब कब बन गई पता ही नहीं चला।

कभी अपने विधायकों द्वारा तो कभी सड़क चलते राहगीरों द्वारा यहाँ-वहाँ मार मार कर उनका मोर बना दिया जा रहा है। देखा जाए तो इस प्रकार की घटनाएँ निंदनीय हैं लेकिन जब आम आदमी पार्टी नेता आतिशी मार्लेना कहती हैं कि नेताओं को कोई पीटता क्यों नहीं है तो यह बात प्रासंगिक नजर आने लगती है।

सूत्रों का तो ये भी कहना है कि जब भी केजरीवाल को कहीं पर थप्पड़ या घूँसा पड़ता है, तब-तब आम आदमी पार्टी के चंदों में व्यापक उछाल आता है। भारत को अंग्रेजों से आजाद करवाने के लिए महात्मा गाँधी ने अनशन का मार्ग चुना था और संत केजरीवाल ने मोदी के चंगुल से देश को छुड़ाने के लिए अगर अपनी कुटाई करवाने का मार्ग चुना है तो इसमें बुराई है क्या? लेकिन, जनता को केजरीवाल की कुटाई में त्याग नजर नहीं आता है।

गठबंधन के लिए महीनों तक गिड़गिड़ाने और भीख माँगने के बावजूद भी कॉन्ग्रेस ने केजरीवाल को घास नहीं डाली। लेकिन क्रांतियों के द्वारा खुद को देश की राजनीति में स्थापित करने वाले अरविन्द केजरीवाल ने हार ना मानने की जिद पकड़ ली है। उन्हें जब प्रतीक रूप से ‘हाथ’ का साथ नहीं मिला तो उन्होंने अपने को ही रैपट मरवाकर खुद को ‘हाथ’ का साथ दिलवा दिया। लप्पड़ पड़ने के बाद उनके प्रदर्शन में व्यापक उछाल आ सकता है। जिस आदमी का खाद पानी चाँटा और घूँसा बन चुका हो उसे तंदुरूस्ती के लिए समय-समय पर खुद को खुद ही कुटवाने भी पड़े तो क्या बड़ी बात है?

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निर्भया गैंगरेप को मीडिया ने बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया था: शीला दीक्षित

दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री और उत्तर-पूर्व सीट से कॉन्ग्रेस प्रत्याशी शीला दीक्षित ने कहा है कि निर्भया गैंगरेप केस को बहुत बड़ा करके दिखाया गया था जबकि, आज भी ऐसी तमाम घटनाएँ हो रही हैं, लेकिन अखबारों में उन्हें बहुत कम जगह दी जाती है।

एक टीवी इंटरव्यू में शीला दीक्षित ने कहा कि जब 2012 के निर्भया गैंगरेप केस के बारे में कहा कि मीडिया में उसे बहुत बढ़ाकर दिखाया गया। शीला दीक्षित ने इसके पीछे क्राइम रेट का तर्क भी दिया। इसके आगे, दिल्ली में महिला सुरक्षा की स्थिति पर उनकी राय के प्रश्न पर उन्होंने कहा कि जहाँ तक पुलिस के दखल की बात है, उसमें पूरा रोल केंद्र सरकार का रहता है क्योंकि दिल्ली सरकार एक पुलिसकर्मी की ड्यूटी तक नहीं लगा सकती है।

केंद्र और दिल्ली सरकार का हवाला देने पर शीला दीक्षित से जब यह पूछा गया कि दिल्ली में महिला सुरक्षा का सॉल्यूशन क्या है? तो उन्होंने बताया कि यह मामला केंद्र सरकार व संसद के हाथ में है। हालाँकि, उन्होंने यह भी कहा कि अगर उन्हें संसद पहुँचने का मौका मिला तो इस मुद्दे को वहाँ उठाएँगी।

गौरतलब है कि दिल्ली में 16 दिसंबर 2012 को एक 23 साल की छात्रा के साथ चलती बस में 6 लोगों ने गैंगरेप किया था। इस रेप की घटना के बाद पूरे देश में बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। उस वक्त दिल्ली और देश में कॉन्ग्रेस की सरकार थी और शीला दीक्षित दिल्ली की मुख्यमंत्री थी। महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गुस्साए लोगों ने जंतर-मंतर पर मौजूदा सरकार के खिलाफ आपना आक्रोश जाहिर किया था।

Fact Check: बेशर्म कॉन्ग्रेस का एक और झूठ, मोदी सरकार ने नहीं भेजा 200 टन सोना स्विट्जरलैंड

आम चुनाव में इंदिरा गाँधी की नाक बीच में ला कर भी बढ़त हासिल न कर पाने में विफल रहने वाली कॉन्ग्रेस अब वापस अपने झूठे और मनगढंत आरोपों के आधार पर बढ़त बनाने का प्रयास कर रही है। ऐसा करने के लिए कॉन्ग्रेस का साथ देने के लिए उनके व्यक्तिगत मुखपत्र, मीडिया गिरोह और दूर से ही बुद्दिजीवी नजर आने वाले ऐसे तमाम लोग मौजूद हैं, जो अपने अन्नदाताओं के बस एक इशारे पर उनके किसी भी षड्यंत्र को मनचाही दिशा देने के लिए हर समय तत्पर रहते हैं।

कॉन्ग्रेस हर दूसरे दिन बेशर्मी और पूरे आत्मविश्वास के साथ मीडिया के सामने और सोशल मीडिया पर मोदी सरकार पर ऐसी काल्पनिक आरोप लगाती देखी जा सकती है। फर्जी दावे को तथ्य में तब्दील कर देना और फिर उसे रोज मीडिया में आकर बेशर्मी से बार-बार रटकर लोगों के मनमस्तिष्क में उसे सही साबित करने में अब कॉन्ग्रेस और पार्टी अध्यक्ष राहुल गाँधी ने PhD कर ली है।

अफवाह: मोदी सरकार ने गुपचुप तरीके से देश का 200 टन सोना स्विट्जरलैंड भेजा

हाल ही में कॉन्ग्रेस ने ट्विटर पर पूरी बेशर्मी के साथ एक ऐसी रिपोर्ट ट्वीट की है, जिसमें 2014 में RBI का 200 टन सोना स्विट्जरलैंड भेजने की बात कही गई है। कॉन्ग्रेस ने अपने ही मुखपत्र नेशनल हेराल्ड की एक ‘खोजी रिपोर्ट’ को टैग करते हुए लिखा, “क्या मोदी सरकार ने गुपचुप तरीके से RBI का 200 टन सोना 2014 में स्विट्जरलैंड भेजा।” इसके साथ ही कॉन्ग्रेस ने आदतन मोदी सरकार पर आरोप लगाते हुए यह सवाल भी पूछा है कि सरकार को इसके बदले में क्या मिला है? सामान्य शब्दों में, कॉन्ग्रेस के आरोप वाली रिपोर्ट में खोजी पत्रकार नवनीत चतुर्वेदी ने दावा किया है कि देश का जो 200 टन सोना गायब है, उसे भारत सरकार ने 2009 में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से खरीदा था। नेशनल हेराल्ड ने यह रिपोर्ट एक ‘खोजी पत्रकार’ नवनीत चतुर्वेदी के ब्लॉग के आधार पर बनाई है।

‘व्हाट्सएप्प यूनिवर्सिटी’ पर जमकर की जा रही है शेयर

कॉन्ग्रेस का यह आरोप सोशल मीडिया पर खूब शेयर किया जा रहा है। हैरान करने वाली बात यह है कि मोदी सरकार और इसके मंत्रियों की शैक्षणिक योग्यता पर सवाल करने वाले लोग भी इस फर्जी खबर को तत्परता से सोशल मीडिया पर शेयर कर के कॉन्ग्रेस राजपरिवार के प्रति अपनी भक्ति साबित करने में जुटे हुए हैं। इसका सबसे बड़ा उदाहरण UPSC के सदस्य रह चुके पुरुषोत्तम अग्रवाल हैं। यह देखना दुर्भाग्यपूर्ण है कि JNU जैसे संस्थानों से पढ़े-लिखे लोग और UPSC जैसी संस्था से जुड़े लोग भी इस प्रकार की अफवाहों को सच समझकर ‘व्हाट्सएप्प यूनिवर्सिटी’ का हिस्सा बन जाते हैं और बिना पड़ताल के ही शेयर कर लेते हैं।

UPSC के पूर्व सदस्य पुरुषोत्तम अग्रवाल जी अब ‘व्हाट्सएप्प यूनिवर्सिटी’ के सदस्य हैं
कॉन्ग्रेस के झूठे आरोप पर मोदी जी से दुखी एक बुद्दिजीवी
कॉन्ग्रेस के प्रोपेगैंडा की मुख्य फैक्ट्री ‘नेशनल हेराल्ड’
‘व्हाट्सएप्प यूनिवर्सिटी ‘ के शिकार कुछ बुद्दिजीवी
मनमौजी पत्रकार और नेता नवनीत चतुर्वेदी, जिनके आरोप पर यह पूरी भ्रामक जानकारी फैलाई गई। अब संसद जाने की तैयारी कर रहे हैं
सरकार विरोधी कच्चे माल को तत्परता से आगे बढ़ाते हुए मीडिया चैनल्स

‘नेशनल यूथ पार्टी’ से दक्षिण दिल्ली सीट से प्रत्याशी हैं खोजी पत्रकार नवनीत चतुर्वेदी

‘नेशनल यूथ पार्टी’ से दक्षिण दिल्ली लोकसभा सीट से उम्मीदवार नवनीत चतुर्वेदी ने बुधवार (मई 01, 2019) को एक ब्लॉग लिखा था। नेशनल हेराल्ड ने इसी ब्लॉग के मनगढंत आरोपों को आधार बनाकर लिखा है, “क्या मोदी सरकार ने 2014 में सत्ता संभालते ही देश का 200 टन सोना चोरी छिपे स्विट्ज़रलैंड भेजा!” इसके साथ ही एक बड़े लेख में उन्होंने आदतन सरकार पर कई आरोप भी लगाए हैं, जिनकी प्रमाणिकता इसी आरोप की तरह ही शून्य है। कॉन्ग्रेस के बीच एक स्वतंत्र खोजी पत्रकार और लेखक के नाम से प्रसिद्द नवनीत का कहना है कि RTI के ज़रिए मिली सूचना के आधार पर ही उन्होंने ये सब लिखा है।

वास्तविकता: RBI ने किया खंडन

नवनीत ने अपने ब्लॉग में RTI की जो कॉपी शेयर की है, उसके अनुसार रिज़र्व बैंक ने यह सूचना दी थी कि भारत का 268.01 टन सोना ‘बैंक ऑफ़ इंग्लैंड’ और ‘बैंक ऑफ़ इंटरनेशनल सेटलमेंट्स’ की सेफ़ कस्टडी में है। नवनीत के अनुसार, “साल 2014 से पहले की बैलेंस शीट में ये साफ़ लिखा हुआ है कि विदेश में रखे हुए भारतीय गोल्ड रिज़र्व की वैल्यू शून्य है जबकि 2014-15 की बैलेंस शीट में ऐसा नहीं है।”

लेकिन, रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया के अनुसार ये दावा बिल्कुल गलत है। RBI के वरिष्ठ अधिकारी योगेश दयाल के अनुसार, दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों के लिए यह एक सामान्य बात है कि वे अपने गोल्ड रिज़र्व को सुरक्षित रखने के लिए उसे ‘बैंक ऑफ़ इंग्लैंड’ जैसे अन्य देशों के सेंट्रल बैंकों में रखे रहने दें।

वास्तविकता यह है कि जो सोना विदेशी बैंकों में रखा हुआ है, वो गिरवी ही रखा गया हो, ऐसा नहीं है। दुनिया भर में यह एक सामान्य प्रक्रिया है कि जब कोई देश दूसरे देशों से सोना खरीदता है, तो वो उन्हीं देशों के सेंट्रल बैंक की सुरक्षित कस्टडी में उसे रखवा देता है, चाहें वो UK हो या फिर USA। ऐसे मामलों में जो सोना विदेश में रखा हुआ होता है, वो असल में कहलाएगा उसी देश का, जिसने कि उसे ख़रीदा है।

RBI ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर आरोपों को ‘बकवास’ बताया है

कॉन्ग्रेस के आरोप के आधार पर कुछ अखबारों और सोशल मीडिया में केंद्रीय बैंक द्वारा 2014 में करीब 200 टन सोना विदेश भेजने की अफवाह के बाद RBI ने शुक्रवार (मई 04, 2019) को कहा कि 2014 या उसके बाद देश से बाहर कोई सोना नहीं भेजा गया है। बयान के अनुसार, दुनिया भर में केंद्रीय बैंक अपना सोना सुरक्षित रखने के लिए उसे बैंक आफ इंग्लैंड समेत अन्य देशों के केंद्रीय बैंकों में रखते रहे हैं और यह एक सामान्य गतिविधि है। इसमें कहा गया है कि केंद्रीय बैंक ने 2014 या उसके बाद देश से रत्ती भर भी सोना अन्य देशों में नहीं भेजा है। इस बारे में मीडिया में जो रिपोर्ट आयी है, वह तथ्यात्मक रूप से पूरी तरह गलत है।

रिकॉर्ड 609 टन के स्‍तर पर है वर्तमान में देश का स्‍वर्ण भंडार

ओवरसीज चाइना बैंकिंग कॉर्प के अर्थशास्‍त्री होवेई ली के मुताबिक RBI 2019 में 15 लाख औंस सोना खरीद सकता है। अंतरराष्‍ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के अनुसार 2018 में RBI ने कुल 42 टन सोने की खरीद की है। जनवरी और फरवरी में सोने की और खरीद करने के बाद देश का स्‍वर्ण भंडार वर्तमान में रिकॉर्ड उच्‍च स्‍तर पर पहुँच गया है। इस समय RBI के पास लगभग 609 टन सोने का भंडार है। रूस ने वर्ष 2018 में सबसे ज्‍यादा 274 टन सोने की खरीद की है।

क्या राहुल गाँधी माँगेंगे माफ़ी?

अपने मीडिया गिरोहों के माध्यम से समाज में अफवाह और उन्माद पैदा करने के लिए राहुल गाँधी क्या माफ़ी माँगेंगे यह बड़ा सवाल है। हाल ही में चौकीदार चोर है जैसे बयानों को चुनावी गर्मी में निकले शब्द बताने वाले कॉन्ग्रेस पार्टी अध्यक्ष ने झूठ को ही कॉन्ग्रेस का चेहरा बना लिया है। राहुल गाँधी कल ही अपने एक इंटरव्यू में यह भी कहते सुने गए कि उन्होंने नरेंद्र मोदी की इमेज की धज्जियाँ उड़ाने की सौगंध ले रखी है। शायद यही वजह है कि राफेल डील से लेकर देश की अर्थव्यवस्था के बारे में राहुल गाँधी झूठों का अम्बार लगाते नजर आते हैं।

मोदी के सम्मान में श्याम रंगीला फिर मैदान में, कहा- आएँगे तो मोदी ही

बीती 28 अप्रैल को, श्याम रंगीला (कॉमेडियन) ने YouTube पर एक वीडियो अपलोड किया था। इस वीडियो में, हाल ही में अक्षय कुमार द्वारा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लिए गए साक्षात्कार की नकल की गई थी। वीडियो में श्याम रंगीला पीएम मोदी की भूमिका में हैं और उसका एक अन्य साथी साक्षात्कर्ता की भूमिका में अक्षय कुमार बना हुआ था। दोनों ने पीएम मोदी और अक्षय कुमार के इंटरव्यू का अपने मसखरे अंदाज़ में स्पूफ बनाया है।

पीएम मोदी की नकल करते हुए बनाया गया श्याम रंगीला का यह वीडियो लोगों द्वारा खूब हाथों-हाथ लिया जा रहा है। भारत के साथ-साथ ही पाकिस्तान में भी यह वीडियो लोगों के बीच फेमस हो चुका है, इस बात की जानकारी खुद श्याम रंगीला ने दी है।

ट्विटर हैंडल से डॉ अजॉय कुमार जैसे कॉन्ग्रेसी नेताओं ने भी इसका फ़ायदा कुछ इस तरह उठाया।

वामपंथी वेबसाइट्स जैसे कि स्क्रॉल, जो तब मोदी-विरोधी थी, इसमें अन्ना वेटिकैड जैसे घटिया पत्रकार थे, उन्होंने भी इस वीडियो पर अपना ‘हा-हा’ रिएक्शन दिया।

बीबीसी ने श्याम रंगीला का साक्षात्कार लिया, जिसमें साक्षात्कार के लिए पीएम मोदी और अक्षय कुमार के साक्षात्कार के एक हिस्से का उल्लेख किया गया।

दिलचस्प बात यह है कि श्याम रंगीला वही कॉमेडियन हैं, जिन्होंने द वायर पर उनके शब्दों को घुमा-फिराकर पेश करने का आरोप लगाया था। 2017 में, द वायर ने एक ख़बर चलाई थी कि श्याम रंगीला को मोदी की नकल नहीं करने के लिए कहा गया, जबकि एक टेलीविजन शो में राहुल गाँधी की नकल करने की अनुमति दे दी गई थी। रंगीला ने ऑपइंडिया से इस बात की पुष्टि की थी कि मुख्यधारा मीडिया से द वायर ने ही सबसे पहले उनसे संपर्क किया था, लेकिन उन्होंने उनके शब्दों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया, इससे पूरी ख़बर भाजपा-विरोधी और मोदी-विरोधी हो गई थी। सच्चाई यह थी कि उन्हें शो में राजनीतिक मिमिक्री (नकल) से दूर रहने और मोदी या राहुल गाँधी पर कोई बात नहीं करने के लिए कहा गया था।

इस ख़बर में एक नया मोड़ ये आया है कि श्याम रंगीला ने एक और वीडियो जारी किया है जिसमें उन्होंने एक बार नहीं कई बार कहा कि ‘आएँगे तो मोदी ही’ जिसका साफ़तौर पर मतलब यह है कि आगामी लोकसभा चुनाव 2019 के बाद मोदी ही सत्ता में वापसी करेंगे।

https://youtu.be/cwLeyvjaLls

दरअसल, श्याम रंगीला का कहना है कि लोगों का मनोरंजन करना और मजाक उड़ाना उनका काम है और वह न केवल पीएम मोदी बल्कि अन्य राजनीतिक दलों जैसे कॉन्ग्रेस और AAP के अन्य नेताओं का भी मजाक उड़ाते हैं यानी उनकी नकल करते हैं। अपने वीडियो में रंगीला ने स्पष्ट किया कि उनका काम केवल मजाक उड़ाना भर है जिसका वास्तविकता से कोई लेना-देना नहीं होता।

श्याम रंगीला ने अपने वीडियो में कहा कि उन्हें कोई फ़र्क नहीं पड़ता कि उनके वीडियो को किस मंशा से देखा जाता है, क्योंकि इसका मक़सद केवल और केवल मनोरंजन भर होता है। लेकिन पाकिस्तानी मीडिया ने इस वीडियो को इस तरह दिखाया कि भारत, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पसंद नहीं करता है, या उनका सम्मान नहीं करता है और देश बीमार है, जो पीएम मोदी से थक गया है।

इस पर श्याम रंगीला ने अपनी कड़ी प्रतिक्रिया दर्ज की और मजाक में कही गई बातों का खंडन करते हुए कहा, “आएँगे तो मोदी जी ही।” हास्य कलाकार ने कहा, “फिर भले ही हम उनका मजाक उड़ा रहे हों, उनके नाम पर कॉमेडी कर रहे हों, या जो भी हो, लेकिन सुन लो ‘आएँगे तो मोदी जी ही’।” साथ ही, उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में जिस चैनल से वो वीडियो पेश किया गया उस चैनल का नाम है ‘अब तक’ है जो कि भारतीय चैनल ‘आज तक’ का कॉपी है।

श्याम रंगीला ने अपनी बात को दोहराते हुए कहा कि मजाक उड़ाना उनका काम है, वह पाकिस्तानी मीडिया से पूछते हैं कि उन्होंने कभी वह वीडियो क्यों नहीं दिखाया, जिसमें वो राहुल गाँधी और कॉन्ग्रेस नेताओं का मजाक उड़ा रहे होते हैं। इसके बाद वो कहते हैं कि पाकिस्तान, कॉन्ग्रेस का मजाक उड़ाने वाले वीडियो नहीं दिखाता है और केवल मोदी का मजाक उड़ाया जाता है क्योंकि उसे मोदी से ‘एलर्जी’ है, और क्योंकि पाकिस्तान को मोदी से एलर्जी है, इसलिए 2019 में मोदी जी ही सत्ता में वापसी करेंगे।

अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए वो कहते हैं कि पाकिस्तान, पीएम मोदी को नापसंद करता है क्योंकि वो उनसे डरता है।

इसके बाद उन्होंने पाकिस्तान मीडिया को एक चुनौती दी। उनका कहना है कि वह जल्द ही एक वीडियो बनाएँगे, जिसमें राहुल गाँधी को लेकर मजाक किया जाएगा। अगर इस वीडियो को भी ठीक उसी अंदाज़ में प्रचारित किया गया, जिस तरह मोदी जी वाला वीडियो किया था तो वो कॉन्ग्रेस को वोट दे देंगे।

साथ ही श्याम रंगीला ने उन लोगों से माफ़ी माँगी जो उनके ‘मोदी जी और अक्षय कुमार के साक्षात्कार’ वाले वीडियो से आहत हुए थे। वीडियो के अंत में श्याम रंगीला ने यह बात स्पष्ट कर दी कि उनका संबंध किसी राजनीतिक दल से नहीं है और वो उसे ही वोट देंगे जिसे पाकिस्तान नापसंद करता हो।

अरविन्द केजरीवाल को फिर पड़ा रोड शो में जोर का लप्पड़, AAP कार्यकर्ताओं ने की युवक की पिटाई

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को रोड शो के दौरान शनिवार (मई 4, 2019) को थप्पड़ मारने की घटना सामने आई है। यह घटना मोतीनगर की है। राहत की बात ये है कि थप्पड़ मारने वाले व्यक्ति को हिरासत में ले लिया गया है।

चुनाव प्रचार के लिए रोडशो के दौरान लाल शर्ट पहने एक शख्स ने उनकी गाड़ी के ऊपर चढ़कर थप्पड़ मार दिया। हालाँकि, अभी तक इस शख्स की पहचान नहीं हो पाई है। नई दिल्ली लोकसभा क्षेत्र के मोतीनगर एरिया में इस रोड शो के दौरान एक शख्स अचानक केजरीवाल की गाड़ी पर चढ़ता है और एक झन्नाटेदार थप्पड़ जड़ देता है। इसके तुरंत बाद आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने आरोपित को पकड़ लिया और उसकी पिटाई शुरू कर दी।

गौरतलब है कि इससे कुछ महीने पहले उनके ऊपर दिल्ली सचिवालय में लाल मिर्च पावडर फेंके जाने की खबर भी सामने आई थी। इस तरह की घटनाएँ निंदनीय है। फिर भी आए दिन जनता अपना आक्रोश इस रूप में क्यों निकाल रही है। सोचने वाली बात ये भी है कि अक्सर आम आदमी पार्टी के सर्वेसर्वा और दिल्ली के मुख्यमंत्री सुरक्षा व्यवस्था होने के बावजूद भी इस तरह की शारीरिक हिंसा के शिकार क्यों हो जाते हैं।

पार्टी कार्यकर्ताओं का कानून अपने हाथ में लेकर आक्रोशित युवक की पिटाई करना भी उतना ही निंदनीय है। ये घटना केजरीवाल और आम आदमी पार्टी के नेताओं के सामने हुई इसलिए और भी निंदनीय है।

Exclusive: डिम्पल बाबा का अप्रकाशित गैर राजनीतिक इंटरव्यू

पत्रकार दीप देसाई हाँफते-काँपते हमारे घर में प्रविष्ट हुए, और उन्होंने धप्प से दरवाजा बंद किया। हमने सम्मान से उनके समक्ष पानी का गिलास और ओल्ड मोंक का क्वार्टर प्रस्तुत किया। जिस कुशलता से राजनैतिक विश्लेषक गठबंधन कराते हैं, उसी निपुणता से उन्होंने पैग बनाया। साँस और शराब पर नियंत्रण पाते हुए बोलें- लाल सलाम!

भाई समाजवाद को समर्पित थे, और समाजवाद के हवन को उन्होंने अपने नाम का ‘राज’ और उपनाम का ‘सर’ समर्पित कर दिया था और पूर्णतया सर्वहारा पत्रकार हो गए थे। समाजवाद की सीढ़ी चढ़ कर मसाजवाद की दुनिया में प्रवेश करने को प्रयासरत थे।

दो घूँट मार कर उन्होंने अपने बैग को दो थपकी दी “काम की चीज़ है।” “क्या है?” एक घूँट और लेकर दीप भाई बोलें:
“इंटरव्यू, युवा नेता का।”
“पर हाँफ काहें रहे हैं?”
“हम दफ़्तर से चुरा के भागे हैं।”
“तुम तो वहीं काम करते हो, ऐसे घबराए हुए क्यों लग रहे हो?”

दीप भाई ने उठ कर खिड़की बंद की और कुर्सी पर उकड़ूँ बैठ गए। फुसफुसा कर बोले:
“इसको दबाने का निर्देश हुआ था, राष्ट्रहित में। हम ट्रांसक्रिप्ट चुरा लाए।”
“पर घबरा क्यों रहे हैं? आप तो पत्रकार हैं।”

“अरे हम सर्वहारा पत्रकार हैं। हमारे वर्ग पर कभी बिहार में गोली चल जाती है, कभी हम को उत्तर प्रदेश में जानकी बना कर अग्निपरीक्षा मे उतार दिया जाता है। हम वह नहीं हैं बाबू जिनके टूटे एप्पल फ़ोन को देख कर महिला पत्रकारों के मन मे मरोड़ नहीं उठती है।

“ख़ैर, ऊ सब आप नहीं बूझेंगे। आप ये मूल साक्षात्कार पढ़ें और बताएँ कि इसका ठीक दाम क्या लग पाएगा?” यह कह कर दीप भाई ने पढ़ना प्रारम्भ किया जो आम जनता के आनंद हेतु शब्दश: प्रस्तुत है:

प्रश्न: डिम्पल बाबा, आप को ऐसा क्यों भान होता है कि इस चुनाव मे आप विजयी होने वाले हैं।
उत्तर: यह आपने कैसा प्रश्न कर दिया?
पत्रकार: सर, क्रोधित ना हों। प्रकाशन के सेठ जी द्वारा तय किए प्रश्नों में पहला प्रश्न यही था। यह पत्रकारिता की मर्यादा और ग़ल्ले मे गए धन के अनुसार ही है।

नेता: देखिए, सर मत बोलिए। कॉल मी राउल। आप चाहें तो हमारी माता जी को सर कह सकते हैं। हमें सर बोल कर हमारी चिरयुवा वाली भूमिका को चोट पहुँचाएँगे तो हम आपके मालिक बेदमी पुड़ी जी से शिकायत कर के आपको बीट पत्रकार बनवा कर जहानाबाद भिजवा देंगे। फिर आपसे शहाबुद्दीन जी फरिया लेंगे।

पत्रकार: ओके, राउल आप चुनाव में क्यों जीतेंगे?
डि.बा. (डिम्पल बाबा): कल रात को जब हम सुबह उठ गए थे तो हमने इस पर विचार किया। इट ईज़ अ डम्ब क्वेश्चन। हमारे गाल पर डिम्पल है, मोदी जी के फ़ेस पर दाढ़ी; हमारा क्लीनशेव डिम्पल युक्त गाल राजनैतिक पारदर्शिता बताता है।

हमारे हिंदी के ट्यूटर थरूर जी के अनुसार चोर कि दाढ़ी में तिनका होता है। चूँकि, मोदी जी की दाढ़ी है, वहाँ तिनका होने की सम्भावना हमारे डिम्पलयुक्त मुख से अधिक है। तालियाँ।
(पत्रकार, सम्पादक एवम् कैमरामैन का डिम्पल बाबा के उत्तर को तालियों द्वारा अनुमोदन)

प्रश्न: क्या आपको सच मे लगता है कि राफ़ेल मे घोटाला हुआ है?
डि. बा. : देखिए, इतिहास की ओर देखिए। भारत के इतिहास मे हमारे परनाना जी से महान व्यक्तित्व नहीं हैं इस पर तमाम बुद्धिजीवी एक मत हैं। श्रीराम ने भी इस संदर्भ मे कहा है कि वे मर्यादा पुरूषोत्तम नेहरू जी की प्रेरणा से बने।

पत्रकार: सर, वो भगवान राम ने नहीं, रामचंद्र गुहा ने कहा है।
डिबा: श्री गुहा भी कम मर्यादापुरूषोत्तम नहीं हैं। मुद्दा यह है कि परनाना नेहरू ने जीप स्कैम के समय से सैनिक सौदों मे अहिंसक परिवारों को श्रद्धा सुमन अर्पित करने की परंपरा रखी।
अंकलों द्वारा “बेटा, आगे क्या सोचा है” आंटियों द्वारा शादी के मंडप पर “गुड न्यूज़ कब दे रही हो” की भाँति ही रक्षा सौदों में घोटाले की अमर परंपरा रही है। आज यदि कोई यह कहता है कि रक्षा सौदे में घोटाला नहीं हुआ है, अपने आप मे घोटाला है। आरोप हमनें लगा दिया है, आप साक्ष्य बनाएँ।

सीनियर पत्रकार ने डिबा जी के हमनाम राउल विफल को आग्नेय दृष्टि से देखा, और डिबा जी से कहा-
“सर, हम आपके जटायु बन कर साक्ष्य जुटाएँगे। कितने का घोटाला बनाना है?”
“दाम कितना लगाओगे? प्रतिलाख करोड़ के हिसाब से बेदमी जी को बोलो रेट कार्ड युवा कार्यकर्ता मोतीलाल वोरा जी को दें।”

पत्रकार : राउल जी, क्या आप विदेशी नागरिक हैं।
(डिबा आँखें बंद कर के विचारों मे खो गए। कल का माल बहुत पोटेंट था।)
डिबा: जात ना पूछो साधु की, पूछ लीजिए ज्ञान। देखिए भाईयों, क्या आपको वाक़ई लगता है महापुरूष आप जैसे टुच्चे मनुष्यों की भाँति पैदा होते हैं। महामानव अवतरित होते हैं। महामानव मनुष्य जाति को प्रकृति का वरदान हैं और इन्हें राष्ट्रीयता की सीमाओं मे नहीं बाँधा जा सकता है। ऐसे बेवक़ूफ़ाना प्रश्न उठाने वाले प्रतिद्वंद्वियों के लिए मेरा एक ही उत्तर है कि यदि डिबा भारतीय होकर भी ब्रिटिश हैं और इतालियन होकर भी भारतीय हैं तो इसका कारण है महिला सशक्तिकरण। जो लोग हमारी नागरिकता पर प्रश्न उठा रहे हैं वे महिला विरोधी हैं। हमारी सरकार आते ही हम ऐसे लोगों को देख लेंगे।

पत्रकार: परंतु इसका महिलाओं से क्या संबंध है?
(डिबा ने नेत्र बंद कर के विचार किया और बोले।)
डिबा: देखिए भाईयों, हमारी दाढ़ी नहीं है। रवि किशन जैसी कॉम्यूनिस्ट महिलाओं को छोड़ दें तो महिलाओं की भी दाढ़ी नहीं होती। हमारे जैसे व्यक्ति पर प्रश्न उठाना हर उस व्यक्ति पर प्रश्न उठाना है जिसका अस्तित्व दाढ़ी मूँछ से वंचित है। चुनाव को मोदी जी ने दाढ़ी और क्लीन शेव में बाँटा है।

पत्रकार: सर वो रविकिशन नहीं है।
डिबा: यार, वो जो भी हैं, किशन या कृष्णन, आप समझ गए ना। मुद्दा दाढ़ी प्रमुख है इस चुनाव में। राष्ट्रीयता, भ्रष्टाचार इत्यादि तो मोदी ने बना रखा है। प्रश्न यह है कि राजनेताओं को जनता को मूर्ख बनाने का और जनता का शेव बनाने का अधिकार है या नहीं?

वरिष्ठ पत्रकार ताड़ गए कि बाबा उखड़ रहे हैं। बोलें-
“बाबा ठीक कह रहे हैं। ऐसे डिम्पल युक्त गाल वाला व्यक्ति झूठ बोल ही नही सकता है। विफल जी का अनुभव कम है सो भटक जाते हैं। आगे पूछो विफल।”

पत्रकार: बाबा, आपने कहा था कि दलित कानून मोदी जी ने हटा दिया। क्या वह झूठ था?
डिबा: आपने बहुत अच्छा प्रश्न पूछा। इसका उत्तर यह है कि मैं आपको पूछता हूँ कि क्या यह झूठ है।

बाबा के बग़ल में बैठा तोता बोला – झूठ है, झूठ है।
उत्साहित हो कर विफल जी बोलें- बाबा, वो तो झूठ था।
बाबा के सुंदर मुख पर वेदना की रेखाएँ खिंच आईं, पर वे कुछ ना बोले।
वरिष्ठ पत्रकार ने कनिष्ठ को अगला प्रश्न पूछने को कहा।
पत्रकार : आपने कहा कि मोदी जी ने कानून बनाया कि आदिवासियों को गोली मारी जा सकती है। क्या वह झूठ था?
तोता फिर बोला- झूठ था, झूठ था।
(बाबा तोते को देख मुस्कुराए, बोलें,

“आपके प्रश्न का उत्तर है कि क्या वह झूठ था?”
तोते से उत्साहित होकर विफल जी फिर बोले- झूठ था।

डिम्पल बाबा तमतमा कर खड़े हो गए। एसपीजी से बोलें, इस धृष्ट पत्रकार को जहाज से बाहर फेंक दो।
विफल जी घबरा गए, बोले, ”क्षमा प्रभु, यही तो तोते ने कहा पर आपने उसे कुछ न कहा।”

वरिष्ठ पत्रकार ने समझाया, “देखो, कनिष्ठ आज मेरे पास पंचशील मे बँगला है, बैंक बैलेंस है, सोनिया जी जैसी माता हैं और मैं सफल हूँ क्योंकि मैं तोते को देख उत्साहित नही होता हूँ। जब पंख ना हों तो सत्य बोल कर हवा में नही उड़ना चाहिए, और जब फंडिंग ना हो तो पत्रकार को अर्नब गोस्वामी या बरखा दत्त नहीं बनना चाहिए।”

इसी ज्ञान के साथ साक्षात्कार समाप्त हो गया। कह कर दीप भाई थमे। अब तुम मेरी कहीं डील करा दो ताकी मैं राष्ट्रहित में इस साक्षात्कार को दबा कर किसी पॉश इलाक़े मे कोठी प्राप्त करूँ और महान पत्रकार के नाम से जाना जाऊँ। जब गर्मियों में उत्तर प्रदेश में चुनाव हों तो कश्मीर से रिपोर्ट करूँ।

येचुरी को ‘सीता-राम’ से इतनी आपत्ति है तो अपना नाम रावण, कंस या औरंगजेब रख लें: स्वामी रामदेव

योगगुरु बाबा रामदेव ने कुछ संतों के साथ मिलकर माकपा महासचिव सीताराम येचुरी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने यह शिकायत येचुरी के द्वारा हिंदुओं को हिंसक बताने और रामायण, महाभारत को लेकर की गई टिप्पणी के लिए की है। स्वामी रामदेव ने शनिवार (मई 4, 2019) को हरिद्वार में की गई एक बैठक के दौरान माकपा महासचिव सीताराम येचुरी को आड़े हाथों लिया।

स्वामी रामदेव ने कहा कि भारत की संस्कृति और उसकी सभ्यता हजारों हजार साल पुरानी है, लेकिन उस पर जो अभद्र और अपमानजनक टिप्पणी सीताराम येचुरी ने की है उससे पूरे देश में आक्रोश है। हरिद्वार में बाबा रामदेव के नेतृत्व में संत समाज ने येचुरी के बयान की निंदा करते हुए कहा कि अगर येचुरी को राम और सीता के नाम से इतनी आपत्ति है तो अपने नाम से सीता और राम हटाकर रावण, कंस या औरंगजेब रख लें।

इसके साथ ही स्वामी रामदेव ने कम्युनिस्टों, ईसाइयों व मुगलों पर अपने राज्य के विस्तार के लिए न्याय व कानून के नाम पर 50 करोड़ निर्दोष लोगों का कत्ल करने की बात कही। उन्होंने पूछा कि क्या येचुरी इस अत्याचार को हिंसा कहने का साहस कर पाएँगे?

गौरतलब है कि येचुरी ने शुक्रवार (मई 3, 2019) को कहा था रामायण और महाभारत भी लड़ाई और हिंसा से भरी हुई है, लेकिन एक प्रचारक के तौर आप सिर्फ महाकाव्य के तौर पर उसे बताते हैं, उसके बाद भी दावा करते हैं कि हिंदू हिंसक नहीं है। उन्होंने कहा था कि रामायण और महाभारत हिंसा के उदाहरणों से भरे पड़े हैं। ऐसे में ये दावा करना गलत है कि हिंदू हिंसक नहीं हो सकते।