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खालिस्तानियों ने किया हमला, पर कनाडा की पुलिस ने हिंदुओं को ही पीटा: छड़ी-मुक्का मारते वीडियो वायरल, बच्चों का भी गला दबोचा

कनाडा में हिंदू मंदिर पर खालिस्तानी हमला किए जाने के बाद कनाडाई पुलिस का चेहरा उजागर हुआ है। कुछ वीडियोज सामने आई हैं जिसमें घटनास्थल पर खड़े हिंदू आरोप लगा रहे हैं कि पुलिस ने उन खालिस्तानियों के साथ कुछ नहीं किया जिन्होंने हमला किया उलटा हिंदुओं पर ही छड़ी मारनी शुरू कर दी।

इस वीडियो को कनाडाई पत्रकार डेनियर बोर्डमैन ने साझा किया है। ट्वीट के मुताबिक, ये वीडियो 3 नवंबर वाली घटना का है जब सरे में हिंदू मंदिर को निशाना बनाया गया। डेनियर वीडियो शेयर करते हुए बताते हैं कि कनाडाई पुलिस भीड़ में जाकर हिंदुओं को धक्का दे रही है और उन खालिस्तानियों को बचा रही है जो दीवाली पर हिंदू श्रद्धालुओं को निशाना बनाने आए थे।

वीडियो में देख सकते हैं कि हिंदुओं के सिर पर मुक्के मारे जा रहे हैं और उन्हें लाठी से पीटा जा रहा है। कुछ पुलिस अधिकारी हिंदुओं को बचाने की बजाय उन्हीं पर आगे बढ़कर हमले कर रहे हैं वहीं कुछ पुलिस अधिकारी शांत खड़े हैं और विरोध करने वाले हिंदुओं को पीछे ढकेल रहे हैं।

इस पूरे वाकये को एक हिंदू महिला ने रिकॉर्ड किया है। वीडियो में वह उस पुलिस अधिकारी की ओर इशारा भी कर रही है और दिखा रही है कि इसी अधिकारी ने हिंदू को मारा है। महिला कहती है कि छड़ी से उन लोगों पर हमले किए गए और खालिस्तानियों को कुछ भी नहीं कहा गया।

वीडियो में लोगों के चिल्लाने और रोने की आवाजे भी आ रही है मगर फिर भी कना़डाई पुलिस को कोई फर्क नहीं पड़ रहा। एक वीडियो में तो तीन पुलिसकर्मी बच्चे का गला दबोचकर उसे जमीन पर लिटाए हुए हैं और फिर उसका हाथ मोड़ रहे हैं। पीछे से आवाज सुनाई पड़ रही है- उसे कुछ मत करो वो एक बच्चा है।

एक अन्य वीडियो में दावा है कि सरे में कनाडाई पुलिस हिंदुओं का रास्ता रोककर खड़ी हो गई थी। ऐसे में पूछा जा रहा है कि क्या खालिस्तानी और कनाडाई पुलिस मिलकर हिंदुओं पर अत्याचार कर रहे हैं।

कुछ वीडियो में मंदिर में आए लोगों को ही कनाडाई पुलिस उठाकर कार में डालती दिख रही है जिसे देख लोगों ने पूछा कि जब हमला हिंदू मंदिर पर हुआ तो ये खालिस्तानियों की जगह हिंदुओं को क्यों पकड़ा जा रहा है। ये भेदभाव नहीं तो क्या है। लोगों ने पूछा ‘क्या- ये खालिस्तानी पुलिस है?’ पीछे से आवाज सुनाई पड़ी है कि एक व्यक्ति पंजाबी में कनाडाई पुलिस की कार्रवाई के लिए उ्हें धन्यवाद दे रहा है।

इन सारी घटनाओं को रिपोर्ट करते हुए कहा, कनाडाई पत्रकार डैनियल बोर्डमैन कहते हैं, “हाल ही में हुआ हमला भयानक है…इसने नई सीमाएँ लांघ दी हैं…यह इस देश में हिंदू भक्तों पर पहला दिनदहाड़े हमला है। पुलिस की प्रतिक्रिया घृणित थी…इसे पूरी तरह से रोका जा सकता था…हम कनाडा में इसे हर समय देखते हैं, जहाँ पुलिस अपने मन से कार्रवाई करती है। कनाडाई सरकार बिलकुल नहीं सुनती।”

बता दें कि कनाडा में खालिस्तानी हमले लगातार बढ़ रहे हैं। कल पहले खबर आई कि सरे में हिंदू मंदिर को निशाना बनाया गया, फिर पता चला कि ब्रैम्पटन में भी अटैक हुआ है। दोनों घटनाओं की वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है।

ट्रक में भरकर गोवंश मेवात ले जा रहे थे तस्कर, राजस्थान पुलिस ने रोका तो बरसाई गोलियाँ: जवाबी कार्रवाई के बाद भागे, सर्च ऑपरेशन में मिले 100+ गोवंश

राजस्थान के भरतपुर जिले में गोतस्करों और पुलिस के बीच रविवार (3 नवंबर 2024) की रात मुठभेड़ हो गई। इसके बाद तस्कर ट्रक छोड़ भाग गए। इस दौरान मौके पर गोरक्षा दल के सदस्य भी मौजूद थे। इन सभी ने मिलकर 25 से 30 गोवंश बचाए। इन्हें काटने के लिए मेवात ले जाया जा रहा था।

फरार तस्करों की तलाशी के दौरान पुलिस ने रात भर सर्च ऑपरेशन चलाया। तस्कर पकड़ में नहीं आए। लेकिन 100 से अधिक गोवंश बरामद किए हैं। इन सभी को गोशाला में भिजवा दिया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना भरतपुर के चौकी झील इलाके की है। रविवार रात लगभग 12:30 पर गोरक्षा दल से जुड़े लोगों ने QRT (क्विक रेस्पॉन्स टीम) को गोतस्करी की सूचना दी। इस सूचना पर पुलिस की अलग-अलग टीमों का गठन हुआ। पुलिस को बताया गया कि गोतस्कर खोहरा बछेना गाँव के जंगलों से ट्रक ले कर गुजरेंगे। पुलिस टीम ने घेराबंदी की तो सूचना सही पाई गई।

गोरक्षा दल के सदस्यों द्वारा बताई गई ट्रक आई तो पुलिस ने उसे रोकने की कोशिश की। इस पर ट्रक चालक ने पुलिस पर गोलियाँ बरसानी शुरू कर दी। पुलिस ने भी जवाबी कार्रवाई की। रात में अँधेरे में दोनों तरफ से लगभग 7 राउंड फायरिंग हुई। इसके बाद गोतस्कर ट्रक छोड़ भाग निकले। ट्रक में लगभग 20 से 25 गोवंश मिले। माना जा रहा है कि इन्हें मेवात ले जाया जा रहा था।

पुलिस टीम ने फरार गोतस्करों की तलाश में रात भर सघन अभियान चलाया। कई घंटों की तलाशी के बाद एक भी गोतस्कर हाथ नहीं लगा। हालाँकि इसी तलाशी में लगभग 100 जीवित गोवंश मिले। सभी गोवंशों को बरामद कर बयाना की रुदावल श्रीकृष्ण गोशाला और भरतपुर की इकरन गोशाला भेज दिया गया है। पुलिस के अनुसार गोवंश अधिनियम, पुलिस टीम पर फायरिंग करने और राजकार्य में बाधा डालने का केस दर्ज किया जाएगा।

12 हजार मौतों से वे 72 साल पहले सीख गए, हम कितनी पीढ़ियों की साँसों में धुआँ भरकर सीखेंगे? पटाखे-पराली से अधिक दिल्ली के बकैत सत्ताधीश घोंट रहे दम

दिल्ली की स्थिति बढ़ते प्रदूषण के कारण बदहाल हैं। ठंड से पहले आसमान में कोहरे की परत है जिसके संपर्क में आते ही आँखों में जलन और साँस लेने की तकलीफ होने लगती है।

हर रोज राजधानी का बढ़ता AQI नए रिकॉर्ड बना रहा है। आनंद विहार में तो आज AQI ने 600 का आँकड़ा पार कर लिया था। वहीं बवाना में ये आज सुबह 406 के आसपास था।

दिल्ली सरकार और उसके मंत्री हर साल कहते हैं कि वो प्रदूषण कंट्रोल करने के लिए प्रयास कर रहे हैं और जल्द स्थिति बेहतर होगी… लेकिन हकीकत यह है कि अगर प्रयास वाकई हो रहे होते तो पिछले 10 वर्षों में AQI का ग्राफ लगातार बढ़ नहीं रहा होता और न दिल्ली के हालात इतने गंभीर होते।

AQI.IN साइट के अनुसार दिल्ली में 4 नवंबर की सुबह दिल्ली का AQI 400 पार था और खबर लिखने तक प्रदूषण मामले में सबसे खराब स्थिति वाले शहरों में दिल्ली नंबर 1 पर आ गया है।

ऐसे गंभीर हालातों में दिल्ली सरकार एक्शन लेने के नाम पर दीवाली में पटाखों पर बैन लगाने जैसी कार्रवाई कर रही है या फिर दूसरे राज्य की सरकारों पर सारे प्रदूषण का ठीकरा फोड़ रही है। मगर इसका स्थायी निवारण क्या है इस पर कोई बात नहीं हो रही। अगर दीवाली पर फूटे पटाखों को दिल्ली के बढ़े प्रूषण का कारण मानते हैं तो फिर आपको 28 अक्तूबर (जब देश में दीवाली नहीं मनाई गई थी) का रिकॉर्ड देखना चाहिए। 28 अक्तूबर 2024 को दिल्ली का औसत एक्यूआई 356 रिकॉर्ड किया गया था जबकि दीवाली के अगले दिन औसत AQI 351 था।

इन दो आँकड़ों से ये बात तो स्पष्ट है कि पटाखे फोड़ने से वायु प्रदूषण होता जरूर है मगर इसका सीधा असर दिल्ली में बढ़ते AQI से बिलकुल नहीं है। क्योंकि अगर ऐसा होता तो दिल्ली में सामान्य दिन की आबो हवा से दीवाली की अगली सुबह में फर्क होता।

2018 से 2023 का हर महीने का AQI

खैर! हर वर्ष दीवाली से पहले शायद पटाखे बैन करके आम आदमी पार्टी को ऐसा लगता हो कि वो युद्ध स्तर पर AQI कंट्रोल करने में लगे हुए हैं। जबकि रिजल्ट देख लगता है कि सरकार दिल्ली की हालत को सुधारने की जगह उसमें ढिलाई दिखाने में लगी हैं।

कभी इसी सरकार ने स्वच्छता के मायनों में दिल्ली को लंदन जैसा बनाने की बात कही थी, मगर लापरवाही देख यह लगता है कि दिल्ली को लंदन-पेरिस बनाने के सपने देखने वाली सरकार ने लंदन को देख कुछ नहीं सीखा। अगर सीखा होता तो आज दिल्ली में दमघोंटू हवा नहीं चल रही होती।

1952 में लंदन में ऐसे ही प्रदूषण से इकट्ठा हुआ स्मॉग दिखाई दिया था। 4 दिन में इस कोहरे ने 2 लाख से ज्यादा लोगों को प्रभावित किया था और 12000 से ज्यादा लोगों की जान गई थी। उस घटना ने लंदन को उनके पर्यावरण को लेकर सतर्क कर दिया और उसके बाद कभी वैसा धुआँ या कोहरा लंदन पर नहीं देखा गया। वहाँ ‘राइट टू क्लीन एयर’ कानून बना और लंदन समेत सभी यूरोपीय देशों ने वाकये से सीख ली।

वहीं दिल्ली में हालात साल दर साल बदतर हो रहे हैं। शोध के नजरिए से देखें तो इसके कई कारण हैं जैसे जनसंख्या वृद्धि के कारण दिल्ली में बढ़ते वाहन और उनसे निकलने वाला धुआँ, औद्योगिक गतिविधियाँ, निर्माण कार्य, जलवायु परिवर्तन, पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने की संख्या आदि। अब दिल्ली सरकार इस स्थिति से निपटने के लिए क्या कर रही है? इस पर कहीं कुछ स्पष्टता से नहीं बताया जा रहा है। लेकिन राजनैतिक आरोप-प्रत्यारोप लगातार जारी हैं। एक तरफ खबरों में आता है कि पराली जलाने का 93% प्रदूषण पंजाब से आता है तो सीएम आतिशी प्रेस के सामने दावा करती हैं कि उनकी सरकार आने के बाद पंजाब में पराली जलाने की संख्या कम हुई है।

ऐसा लगता है कि आम आदमी पार्टी के लिए दिल्ली की आबो-हवा सुधारने से ज्यादा बड़ा मुद्दा अपनी पार्टी की छवि सुधारने का है। हर बार एक्शन पर बात करने की जगह किसी अन्य राज्य पर सारा ठीकरा फोड़ना AAP की आदत हो गई है।

ये बात सभी जानते हैं कि अगर प्रदूषण इतना बढ़ा है और हवा इतनी खराब हुई है तो प्रशासन शांति से नहीं बैठेगा। मगर सवाल यहाँ ये है कि जो कार्य दिल्ली सरकार प्रदूषण रोकने के लिए कर रही है… क्या वे काफी हैं या इसमें सख्ती की जरूरत और है। अगर जवाब ‘हाँ’ है तो सवाल उठता है कि अगर अभी तक उठाए कदम पर्याप्त हैं तो फिर बीते सालों में ठंड आते ही बढ़ने वाले प्रदूषण में फर्क क्यों नहीं दिखा और अगर जवाब ‘नहीं’ है तो फिर सवाल ये है कि बावजूद ये जानने के कि इनसे दिल्ली की हवाल नहीं सुधर रही या आगे कदम क्यों नहीं उठाए जा रहे। क्या सिर्फ दूसरे राज्यों पर प्रदूषण का ठीकरा फोड़ने से दिल्ली की हालत सुधर जाएगी।

गौरतलब है कि मीडिया में अलग-अलग जगह से जानकारियाँ इकट्ठा करने पर पता चलता है प्रदूषण रोकने के लिए दिल्ली में GRAP-1 को लागू किया गया है। इसके अलावा प्रदूषण करने वाले वाहनों पर कार्रवाई हो रही है और साथ ही धूल को नियंत्रित करने के लिए मैकेनिकल रोड स्विपिंग मशीनें, पानी छिड़कने वाली मशीनें और एंटी स्मॉग गन का उपयोग किया जा रहा है।

9 मुस्लिम, ₹90 लाख का फ्रॉड, अग्रिम जमानत पर सवाल… UP पुलिस ने गाजियाबाद कोर्ट में क्यों भाँजी लाठियाँ, क्यों हड़ताल पर वकील: सारे सवालों का जवाब एक साथ

उत्तर प्रदेश के वकील 4 नवंबर 2024 को हड़ताल पर हैं। दिल्ली बार एसोसिएशन भी इसका समर्थन कर रहा है। यह पूरा विवाद 29 अक्टूबर को गाजियाबाद जिला कोर्ट में हुए लाठीचार्ज से पैदा हुआ है। कथित तौर पर जालसाजी के एक मामले में मुस्लिम आरोपितों की अग्रिम जमानत को लेकर जज अनिल कुमार और वकीलों के बीच बहस हुई। फिर पुलिस की एंट्री हुई। अब यह मामला लाठीचार्ज की SIT जाँच को लेकर हाई कोर्ट में याचिका से हड़ताल तक पहुँच चुकी है।

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) ने भी पुलिस लाठीचार्ज की निंदा करते हुए कहा है कि जिला जज अनिल कुमार के आदेश पर वकीलों पर लाठीचार्ज किया गया। SCBA ने एक प्रस्ताव पारित कर जिला जज अनिल कुमार के आचरण की जाँच इलाहाबाद हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस की अध्यक्षता में कराने की माँग की है। गाजियाबाद बार एसोसिएशन लाठीचार्ज की SIT जाँच की माँग कर रहा है। इसको लेकर एडवोकेट जवाहिर यादव ने इलाहाबाद हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की है। याचिका घटनास्थल के CCTV फुटेज सुरक्षित रखने और FIR में नामजद वकीलों के खिलाफ कार्रवाई पर रोक लगाने की अपील की गई है।

गाजियाबाद जिला कोर्ट में वकीलों पर लाठीचार्ज

29 अक्टूबर को दोपहर के समय जिला जज अनिल कुमार की अदालत में कई वकीलों का जमावड़ा हो गया था। कुछ ही देर में कोर्ट परिसर में शोर-शराबा मच गया। तभी अचानक कैम्पस में पुलिस की एंट्री हुई। घटना के वायरल वीडियो में से कुछ में पुलिसकर्मी वकीलों पर बल प्रयोग करते दिख रहे हैं। वकीलों को भी कुर्सियाँ उठा कर फेंकते देखा जा सकता है।

वकीलों के मुताबिक लाठीचार्ज के लिए जिला जज जिम्मेदार

इलाहाबाद हाई कोर्ट में याचिका दायर करने वाले एडवोकेट जवाहिर यादव का दावा है कि एक मामले में जमानत को लेकर घटना की कुछ वकील जिला जज अनिल कुमार की अदालत में बहस कर रहे थे। इसी दौरान किसी बात पर वकीलों और जज में गर्मागर्म बहस हो गई। आरोप है कि जज अनिल कुमार ने अपना आपा खो दिया और डायस पर खड़े हो कर वकीलों को गंदी-गंदी गालियाँ देने लगे।

एडवोकेट जवाहिर यादव के अनुसार थोड़ी देर बाद जज अनिल कुमार के आदेश पर पुलिस कोर्ट रूम में घुसी और वकीलों को पीटना शुरू कर दिया। जज पर आरोप है कि वे पुलिस को बार-बार वकीलों को गोली मारने के लिए उकसा रहे थे। घटना के बाद में कोर्ट कैम्पस में CRPF की टुकड़ी तैनात कर दी गई। इसके पीछे भी वकील जज अनिल कुमार को ही बता रहे हैं।

पुलिस की FIR में क्या?

पुलिस द्वारा दर्ज करवाई गई FIR में वकीलों को हिंसा का जिम्मेदार बताया गया है।सब इंस्पेक्टर संजय कुमार ने कवि नगर थाने में केस दर्ज करवाया है। अपनी तहरीर में उन्होंने बताया है कि 29 अक्टूबर को वे साथी सिपाहियों के साथ कचहरी में ड्यूटी पर थे। तभी एक अदालत में करीब 50 वकीलों के इकट्ठा हो कर हंगामा करने की सूचना मिली।

संजय कुमार की शिकायत के अनुसार हंगामे के दौरान वकील कुर्सियाँ फेंकते हुए गंदी-गंदी गालियाँ दे रहे थे। उन्होंने अन्य पुलिसकर्मियों के साथ हंगामा कर रहे वकीलों को अदालत से बाहर निकाला। इसके बाद नीचे आकर वकीलों ने पुलिस बल पर पत्थरबाजी शुरू कर दी। कचहरी में बनी पुलिस चौकी में आग लगा दी। वकीलों की भीड़ ने चौकी के आसपास लगे CCTV कैमरे भी तोड़ दिए।

सब इंस्पेक्टर संजय कुमार ने बताया है कि वकीलों की पत्थरबाजी में कोर्ट परिसर के लगे कई शीशे टूट गए। दारोगा राजेश कुमार के सिर पर चोटें आईं हैं। इस हंगामे से कचहरी में भगदड़ मच गई। हालत संभालने के लिए कोर्ट कैम्पस में CRPF के साथ PAC की टुकड़ी तैनात करनी पड़ी।

संजय कुमार की तहरीर पर लगभग 50 अज्ञात वकीलों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। उन पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 191 (2), 191 (3), 121 (1) और 121 (2), 131, 352, 324 (4), 326 (G), 61 (2), 3 (5) और 118 (1) के साथ आपराधिक कानून 1932 की धारा 7 व सार्वजनिक सम्पत्ति नुकसान निवारण अधिनियम के सेक्शन 3/4 के तहत केस दर्ज हुआ है। ऑपइंडिया के पास FIR की कॉपी मौजूद है।

गाजियाबाद पुलिस के एडिशनल कमिश्नर दिनेश कुमार ने बताया है कि जिला जज के चैंबर की तरफ बढ़ रही हमलावर वकीलों की भीड़ को पुलिस ने जैसे-तैसे काबू किया था। उन्होंने बताया कि जब पुलिस जिला जज को सुरक्षित करने में जुटी थी तभी वकीलों ने नीचे उतर कर आगजनी की है। बकौल एडिशनल सीपी सबूत और तथ्य जुटाए जा रहे हैं जिनके आधार पर कार्रवाई की जाएगी।

न्यायिक कर्मचारी की FIR में भी वकील ही हिंसा के जिम्मेदार

पुलिस के अलावा एक दूसरी FIR न्याय विभाग के कर्मचारी संजीव गुप्ता ने दर्ज करवाई है। गाजियाबाद कचहरी में नाजिर के पद पर तैनात संजीव गुप्ता की तहरीर में बताया गया है कि 29 अक्टूबर को एडवोकेट नाहर सिंह यादव, उनके बेटे अभिषेक यादव तथा उनके रिश्तेदार दिनेश यादव ने कोर्ट परिसर में साजिशन हंगामा किया। हंगामे में 40 से 50 अन्य अराजक लोग भी शामिल थे।

संजीव की शिकायत के अनुसार अराजक भीड़ ने कोर्ट रूम में घुस कर न्यायिक कार्य में बाधा डाली। खिड़कियों और शीशों को तोड़ दिया। फर्नीचरों को उठा कर फेंक दिया। सर्वर मशीन को तहस-नहस कर दिया।

जिस मामले में जमानत से शुरू हुआ विवाद, उसमें मुस्लिम आरोपित, हिंदू वकील पीड़ित

जिस मामले में जमानत को लेकर वकीलों और जज के बीच बहस की बात कही जा रही है वह एक जालसाजी से जुड़ा केस है। इस जालसाजी के शिकार वकील जितेंद्र सिंह हैं। उनकी शिकायत पर इस मामले में गुलरेज आलम, रिजवान अली, हसमुद्दीन, मोहम्मद फहीम, नसरुद्दीन, फातिमा परवीन, जफरुद्दीन, ख़ुर्शीदन और हाजी आरिफ अली नामजद हैं।

इन सभी पर जमीन के सौदे के नाम पर जितेंद्र सिंह से 90 लाख रुपए की धोखाधड़ी का आरोप है। अदालत के आदेश पर यह FIR 2 अक्टूबर 2024 को दर्ज हुई थी। आरोपितों पर IPC की धारा 420, 406, 467, 468, 471 और 120 बी लगाई गई है। ऑपइंडिया के पास इस FIR की कॉपी भी मौजूद है।

ऑपइंडिया से बात करते हुए वकील जितेंद्र सिंह ने बताया कि नियमों के विरुद्ध जाते हुए जिला जज अनिल कुमार ने आरोपितों को अग्रिम जमानत दी थी। वकील इस केस पर सुनवाई की माँग कर रहे थे। लेकिन अनिल कुमार इसके लिए तैयार नहीं थे। उनके यह भी दावा है कि यही जज पूर्व में 18 लाख की एक अन्य धोखाधड़ी केस में अग्रिम जमानत याचिका ख़ारिज कर चुके हैं।

भगवान विष्णु को तुलसी भी अर्पित नहीं कर सकते श्रद्धालु, क्योंकि गुरुवायुर मंदिर के उस बोर्ड ने लगाई रोक जिसका चेयरमैन है एक वामपंथी: कीटनाशक का दिया हवाला

केरल के त्रिशूर जिले में स्थित गुरुवायुर मंदिर के प्रबंधन बोर्ड ने श्रद्धालुओं से तुलसी ना अर्पित करने को कहा है। बोर्ड ने कहा है कि श्रद्धालुओं द्वारा लाई तुलसी पूजा में काम नहीं आती और इसमें केमिकल की मात्रा भी ज्यादा होती है, ऐसे में इन्हें ना चढ़ाया जाए। बोर्ड के इस फैसले पर विवाद हो गया है। इस बोर्ड के मुखिया CPM के नेता वीके विजयन हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मंदिर बोर्ड ने हाल ही में श्रद्धालुओं को बाहर से खरीद कर तुलसी मंदिर में ला लाने की सलाह दी। श्रद्धालु यह तुलसी गुरुवायुर भगवान (भगवान विष्णु के रूप) पर चढ़ाते थे। बोर्ड ने कहा कि बाहर से लाई गई तुलसी को माला बनाने या भगवान की पूजा के लिए उपयोग नहीं किया जाता है।

बोर्ड ने बताया कि इस तुलसी को एक निजी संस्था को दिया जाता है जो बाद में इससे कई अन्य उत्पाद तैयार करती है। बोर्ड ने कहा कि बाहर से लाई गई तुलसी में कीटनाशक की मात्रा अधिक होती है इसलिए श्रद्धालु उसे लाने से बचें। बताया गया है कि गुरुवायुर मंदिर में पूजा के फूल या माला लाने का काम कुछ परिवार पीढ़ियों से करते आ रहे हैं।

मंदिर के कुछ स्टाफ ने मीडिया को बताया कि बाहर से लाई गई तुलसी से उनके हाथों से खुजली मचती है और इससे एलर्जी भी होती है। मंदिर बोर्ड ने श्रद्धालुओं को सलाह दी है कि वह तुलसी की जगह कमल के फूल लेकर मंदिर के भीतर आएँ।

मंदिर बोर्ड के इस फैसले को लेकर विवाद हो गया है। श्रद्धालुओं ने इस बात पर नाराजगी जताई है कि उनके अधिकार पर बोर्ड कब्जा कर रहा है। गौरतलब है कि गुरुवायुर देवासम बोर्ड के चेयरमैन वी के विजयन हैं जो कि केरल में CPM के बड़े नेता हैं।

वी के विजयन इस बोर्ड के चेयरमैन मार्च, 2024 में बने थे। यह उनका दूसरा कार्यकाल है। स्थानीय हिन्दू संगठनों ने बोर्ड के तर्कों पर हमला करते हुए तुलसी चढ़ाने से मना करने का विरोध किया है। उन्होंने पूछा है कि बोर्ड आखिर फिर बाकी ऐसे चीजें क्यों लेता है जो पूजा में नहीं उपयोग की जाती।

क्षेत्र रक्षा समिति के सचिव एम बिजेश ने कहा, “अगर बोर्ड कार और सोने के आभूषण जैसी वस्तुओं को स्वीकार कर सकता है जिनका उपयोग पूजा के लिए नहीं किया जा सकता, तो उसे भक्तों को भगवान को कुछ प्रिय वस्तुएँ चढ़ाने से नहीं रोकना चाहिए। तुलसी चढ़ाने से मना करने के बजाय उनका कुछ अच्छा उपयोग क्यों नहीं तलाशा जाता?”

इससे पहले केरल के मंदिरों में मई 2024 में अराली का फूल भी बैन कर दिया गया था। इस फूल की वजह से एक 24 साल की नर्स की मौत हो गई थी। इसके बाद दो बड़े मंदिर बोर्ड ने मंदिरों में यह फूल लाने पर प्रतिबन्ध लगा दिया था।

गुरुवायुर मंदिर हिन्दुओं के लिए काफी महत्व रखता है और यह सदियों पुराना है। बताया जाता है कि यह मंदिर 14वीं शताब्दी में पूरा हुआ था। मंदिर में भगवान विष्णु की 4 भुजाओं वाला एक विग्रह स्थापित है, इसी रूप को गुरुवायुर कहा जाता है।

कनाडा में खालिस्तानी हमले के बाद ‘बटेंगे तो कटेंगे’ की गूँज, एकजुट हुए हिंदू: मंदिरों ने नेताओं की एंट्री पर लगाया बैन, सुविधा का नहीं कर सकेंगे इस्तेमाल

कनाडा के ब्रैम्पटन में हिंदू मंदिर पर खालिस्तानी हमले के बाद हिंदुओं ने एकजुट होने का आह्वान किया है। एक वीडियो सामने आई है जिसमें हिंदू सभा मंदिर के सामने भीड़ जुटी है और धोती-कुर्ता पहने हिंदू पुजारी लोगों को ‘बँटोगे तो कटोगे’ का संदेश दे रहे हैं।

हिंदू पुजारी लोगों से नारे लगवाते हुए कहते हैं, “बटोगे तो कहोगे।” इसके बाद उन्होंने कहा, “ये हमला कोई अकेला हमला नहीं है। ये हमला हिंदू सभा पर हमला नहीं है। ये हमला पूरे विश्व में जितने हिंदू हैं उनके ऊपर है।”

आगे उन्होंने कहा, “सुनिए, आज समय आ गया है जब हमें अपने लिए नहीं बल्कि अपनी संतति के बारे में सोचना पड़ेगा। सबको एक होना पड़ेगा। हम किसी का विरोध नहीं करते हैं लेकिन कोई हमारा विरोध करता है तो हम छोड़ेंगे नहीं उसे तोड़ेंगे।”

इसके अलावा ये भी खबर सामने आई है कि कनाडा की राष्ट्रीय हिंदू परिषद और हिंदू फेडरेशन ने मंदिर के नेताओं और हिंदू समूहों के साथ मिलकर हिंदू मंदिर पर हमले के बाद एक आधिकारिक बयान जारी किया है। इसमें कहा गया है कि अब किसी राजनीतिक दलों के किसी राजनेता को राजनीतिक उद्देश्यों के लिए मंदिर की सुविधाओं का उपयोग करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

बता दें कि कुछ दिन पहले सीएम योगी आदित्यनाथ ने मंच से बटोगे तो कटोगे का बयान दिया था। इसके बाद इस पर चर्चा तेज हो गई। आज इसकी आवाज कनाडा से भी उठी वो भी तब जब खालिस्तानियों ने हिंदू मंदिर के परिसर के भीतर घुसकर हमला कर दिया। इस अटैक के दौरान खालिस्तानियों ने न हिंदू महिलाओं को छोड़ा और न बच्चों को। सबपर लाठी-डंडे से हमले किए गए।

इस घटना के बाद कनाडाई नेताओं ने इस हमले की निंदा की, लेकिन कुछ नेता निंदा करते समय खुलकर खालिस्तानियों का नाम लेने से बचे। वहीं ओटावा स्थित भारतीय उच्चायोग ने भी इस घटना के बाद भारतीयों की सुरक्षा पर चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि इस तरह की घटना कनाडा में निराश करने वाली हैं।

जिस आतंकी की 20 साल से थी तलाश, उसे ढेर करने के लिए बिछाया बिस्कुट का जाल: जानिए कैसे मार गिराया गया लश्कर कमांडर अबू उस्मान

छोटा वलीद उर्फ अबू उस्मान आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का डिविजनल कमांडर था। मूल रूप से पाकिस्तान के रहने वाले इस आतंकवादी की करीब 20 साल से सुरक्षा बलों की तलाश थी। आखिरकार 2 नवंबर 2024 को जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर में उसे एक मुठभेड़ में मार गिराया गया। उसके 2 साथी फरार हो गए थे जिनकी तलाश जारी है।

इस एनकाउंटर से पहले सुरक्षा बलों को श्रीनगर के खानयार इलाके में आतंकियों के मूवमेंट की सूचना मिली थी। इस सूचना पर CRPF की VQAT (वैली क्विक एक्शन टीम) और जम्मू कश्मीर पुलिस की SOG (स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप) ने एक साथ तलाशी अभियान शुरू किया। इसी दौरान एक घर की तरफ बढ़ते जवानों पर अचानक ही फायरिंग शुरू हो गई।

खुद से बचाते हुए जवानों ने पोजीशन ली और जवाबी कार्रवाई शुरू की। घर में छिपे आतंकियों को पहले सरेंडर का मौका दिया गया। जब उन्होंने प्रस्ताव ठुकराते हुए गोलीबारी जारी रखी तो सुरक्षा बलों ने भी जवाबी कार्रवाई की। इसी दौरान एक ग्रेनेड विस्फोट में उस घर में आग लग गई जिसमें आतंकी छिपे हुए थे। इसके बाद सुरक्षा बलों जवाबी कार्रवाई जारी रखते हुए यह सुनिश्चित किया कि आग से पड़ोस के घरों को कोई नुकसान न हो।

करीब 9 घंटों तक चली मुठभेड़ में एक आतंकी ढेर हो गया, जबकि 2 अन्य भाग गए। मारे गए आतंकी की पहचान अबू उस्मान उर्फ छोटा वलीद के तौर पर की गई।

20 वर्षों से थी अबू उस्मान उर्फ छोटा वलीद की तलाश

आतंकी अबू उस्मान उर्फ छोटा वलीद मूल रूप से पाकिस्तान का रहने वाला था। वह पाकिस्तानी आतंकी संगठन TRF (द रेसिस्टेंस फ्रंट) के कमांडर सज्जाद गुल का बेहद करीबी था। सुरक्षा बलों को उसकी पिछले 20 वर्षों से तलाश थी। वह 2000 के दशक से ही कश्मीर में हुए कई बड़े आतंकी हमलों में शामिल था। साल 2016-17 में कश्मीर पुलिस के इंस्पेक्टर मशरूर वानी की गोली मार कर हुई हत्या में भी वह शामिल था।

छोटा वलीद को मार गिराना सुरक्षा बलों की बड़ी कामयाबी माना जा रहा है। द रेसिस्टेंस फ्रंट कश्मीर में पिछले कुछ समय से हिन्दुओं और गैर कश्मीरियों को निशाना बना रहा है। इनमें वे मजदूर भी शामिल हैं जो अन्य प्रांतों से रोटी-रोटी कमाने जम्मू-कश्मीर आए हुए हैं।

कुत्तों को खामोश रखने के लिए खिलाए बिस्कुट

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक छोटा वलीद को मार गिराने के लिए चले लगभग 9 घंटे के अभियान में न सिर्फ आम नागरिकों की सुरक्षा बल्कि कुत्तों के भौंकने का भी ध्यान रखा गया। कुत्तों के भौंकने से अक्सर छिपे आतंकी सतर्क हो जाते हैं और उनको भाग निकलने का मौका मिल जाता है। इसलिए जवानों ने घर के आसपास मौजूद कुत्तों को बिस्कुट खिलाए जिस से वो भौंकने के बजाय खाने में व्यस्त हो गए। ये बिस्किट जवान ऑपरेशन पर निकलने के दौरान अन्य साजो-सामान की तरह अपने साथ ले गए थे।

ऑपइंडिया के पास इस घटना से जुड़े कई फोटो और वीडियो मौजूद हैं। इन वीडियो में आतंकियों की टोह लेने के लिए जवानों को ड्रोन का इस्तेमाल करते देखा जा सकता है। एक अन्य विजुअल में घर में लगी आग, जबकि दूसरे में आतंकी की लाश चादर में समेट कर निकलते जवान देखे जा सकते हैं। जिस घर में यह ऑपरेशन चला वह घनी आबादी के बीच था, इसलिए आतंकी को ढेर करने में सुरक्षा बलों को अधिक समय लगा।

जिस ‘पीनट’ के 537000 फॉलोअर्स, उसे अमेरिकी अधिकारियों ने मार डाला: राष्ट्रपति चुनाव का बना मुद्दा, मस्क ने दिया नारा – ट्रंप आएँगे गिलहरियों को बचाएँगे

एक गिलहरी की मौत अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों में बड़ा मुद्दा बन गई है। गिलहरी को एक पशुप्रेमी ने रेस्क्यू किया था और अपने घर में रखता था। गिलहरी का नाम पीनट था और वह सोशल मीडिया पर भी काफी पॉपुलर थी। गिलहरी को घर से पकड़ कर न्यूयॉर्क शहर के अधिकारियों ने मौत की नींद सुला दी।

जानकारी के अनुसार, मार्क लोंगो नाम के एक आदमी द्वारा बचाई गई इस जंगली गिलहरी को न्यूयॉर्क शहर के पर्यावरण संरक्षण विभाग के अधिकारियों ने लोंगो के घर से पकड़ लिया। उन्होंने इसी के साथ एक रकून को भी पकड़ लिया और अपने साथ लेकर चले गए। यह कार्रवाई 30 अक्टूबर, 2024 को हुई।

न्यूयॉर्क सिटी के अधिकारियों ने इसके बाद इन दोनों जानवरों को मेडिकल तरीके से जहर दे दिया और उनकी मौत हो गई। अधिकारियों ने बताया कि गिलहरी ने उनमें से एक के काट लिया था और मारने की कार्रवाई इसके बाद रेबीज चेक करने के लिए की गई।

बताया गया कि यह कार्रवाई एक महिला की शिकायत के बाद की गई। मार्क लोंगो के खिलाफ शिकायत के बाद एक जज ने सर्च वारंट जारी किया और फिर न्यू यॉर्क के अधिकारियों ने उनके घर पाँच घंटे तक तलाशी ली और गिलहरी तथा रकून को पकड़ कर अपने साथ ले गए।

इसके बाद उन्हें मौत की नींद सुला दी गई। गौरतलब है कि न्यू यॉर्क शहर में जंगली जानवर घर में नहीं रखे जा सकते, भले ही वह कितने भी छोटे क्यों ना हों। मार्क लोंगो ने यह भी आरोप लगाया कि उनके साथ आतंकियों ऐसा बर्ताव किया गया।

जबरदस्ती मार दी गई इस गिलहरी को मार्क लोंगो ने 7 साल पहले बचाया था और इसके वीडियो सोशल मीडिया पर लगातार साझा करते थे। इन वीडियो को हजारों लोग पसंद करते थे। पीनट के सोशल मीडिया पर 5 लाख से अधिक फॉलोवर थे। गिलहरी की मौत के बाद उसके फैन्स में काफी गुस्सा है। लोग अब इस कानून में बदलाव की माँग कर रहे हैं।

इस गिलहरी को मार दिया जाना अब अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव में भी मुद्दा बन गया है। राष्ट्रपति चुनाव के उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रम्प के बेटे डोनाल्ड ट्रम्प जूनियर ने इस मुद्दे को लेकर एक्स (पहले ट्विटर) पर पोस्ट किया है। उनके साथ ही एलन मस्क ने भी इस मामले में पोस्ट किया है।

ट्रम्प जूनियर ने पोस्ट किया, “अब समय आ गया है कि हम ऐसी सरकार को वोट देकर बाहर करें जो एक पालतू गिलहरी को मार देती है लेकिन 600,000 अपराधियों, 13,000 हत्यारों और 16,000 बलात्कारियों को जानबूझकर अपने देश में आने की अनुमति देती है। शायद पीनट्स की हत्या बदलाव के प्रति हमारी जागरूकता को बढ़ाएगी।”

वहीं एलन मस्क ने लिखा, “सरकार को आपके घर में घुसकर आपके पालतू जानवर को मारने की अनुमति नहीं होनी चाहिए। यह गलत है। भले ही पालतू गिलहरी रखना गैरकानूनी हो (जो कि नहीं होना चाहिए), फिर भी PNut को जंगल में छोड़ने के बजाय उसे क्यों मारा गया!?”

अमेरिकी चुनावों के लिए मंगलवार (5 नवम्बर, 2024) को वोटिंग होनी है। चुनाव में पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और वर्तमान उपराष्ट्रपति कमला हैरिस आमने सामने हैं। इस लड़ाई में ट्रम्प को आगे माना जा रहा है। अमेरिका को जनवरी, 2025 में नया राष्ट्रपति मिल जाएगा। गिलहरी पीनट की मौत इस पर कितना असर डालती है, देखने वाला होगा।

मध्य प्रदेश से ओडिशा तक हाथियों की ‘मौत’ पर जागी सरकारें, बांधवगढ़ में ‘बदला मिशन’ पर निकला हाथी पकड़ा गया: CM मोहन यादव ने दिया टास्क फ़ोर्स बनाने का आदेश

मध्य प्रदेश के उमरिया में बाँधवगढ़ टाइगर रिजर्व में हाथियों के हमले में हुई मौतों को लेकर CM मोहन यादव सख्त हो गए हैं। उन्होंने मामले में लापरवाही बरतने वाले 2 अफसरों पर कार्रवाई के आदेश दिए हैं। दूसरी तरफ वन विभाग ने उस हाथी को पकड़ लिया है, जिसने हमला करके 2 लोगों को मार दिया था। CM मोहन यादव ने राज्य में हाथियों को लेकर स्पेशल टास्क फ़ोर्स (STF) बनाने का आदेश दिया है। वहीं ओडिशा में भी हाथियों की असामान्य मौत के मामले में जाँच के आदेश दिए गए हैं।

दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट के अनुसार, वन विभाग की एक टीम ने खितौली के जंगल से उस हाथी को रविवार (3 नवम्बर, 2024) शाम को पकड़ लिया जिसने शनिवार (2 नवम्बर) को 2 लोगों को मार दिया था। उसे अब पेड़ से बाँध दिया गया है। हाथी पकड़ने के लिए 100 लोगों की टीम को घंटो मशक्कत करनी पड़ी।

CM मोहन यादव ने भी रविवार को इस मामले में बैठक की। उन्होंने हमले से पहले 10 हाथियों की मौत को लेकर अधिकारियों से प्रश्न पूछे और आदेश दिए। CM मोहन यादव ने इस दौरान बाँधवगढ़ में लापरवाही करने वाले दो अफसरों को सस्पेंड कर दिया।

मध्य प्रदेश में हाथियों की बसाहट और सुरक्षा को देखते हुए CM मोहन यादव ने एक स्पेशल टास्क फ़ोर्स बनाने का आदेश दिया है। CM मोहन यादव ने कहा है कि यह टास्क फ़ोर्स दूसरे राज्यों के अनुभव को अपने काम में शामिल करेगी। इसके अलावा फसलें बचाने का काम करने के आदेश दिए गए हैं। उन्होंने पीड़ित परिवारों के लिए ₹25 लाख के मुआवजे का ऐलान भी किया है।

गौरतलब है कि 29 अक्टूबर, 2024 के बाद से बाँधवगढ़ के इस इलाके में 10 हाथियों की मौत हो गई थी। हाथियों की मौत का कारण कोदों की फसल खाना बताया गया था। इसके बाद ही हाथियों के हमले सामने आए थे। स्थानीय लोगों ने कहा था कि झुंड के बाकी हाथी उन पर ‘बदला’ लेने के लिए हमला कर रहे हैं। इन हमलों में दो की मौत हुई थी जबकि एक घायल था।

ओडिशा में भी एक्शन

हाथियों की मौत के मामले में ओडिशा में भी एक्शन चालू हो गया है। ओडिशा में इस साल 50 हाथियों की मौत असामान्य तरीके से हो चुकी है। अब राज्य के वन मंत्री गणेश राम सिंहखुटिया ने इस मामले में जाँच के आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा कि एक माह के भीतर इन मौतों के बारे एक रिपोर्ट पेश की जाए।

उन्होंने राज्य वन विभाग के अफसरों को चेताया भी है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार लगातार हाथियों की सुरक्षा के लिए प्रयास कर रही है उसने इस संबंध में कई कदम उठाए हैं लेकिन वन विभाग को भी अब काम करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि जो कर्मचारी-अधिकारी ऐसा नहीं करेंगे, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।

मंदिर में घुसे खालिस्तानी, हिंदुओं को दौड़-दौड़ा कर लाठी-डंडे से पीटा: कनाडा में हमले के बाद घिरे जस्टिन ट्रूडो, भारतवंशी MP बोले- कट्टरपंथियों ने पार की लक्ष्मण रेखा

कनाडा के ब्रैम्पटन शहर में हिंदू मंदिर में श्रद्धालुओं पर खालिस्तानी समर्थकों की भीड़ द्वारा हमला किया गया। इस दौरान, मंदिर में मौजूद श्रद्धालुओं पर लाठी-डंडे बरसाए गए और महिलाओं व बच्चों को भी नहीं बख्शा गया। हमला तब हुआ जब सारे श्रद्धालु मंदिर में पूजा-अर्चना कर रहे थे।

घटना की वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। वीडियो में खालिस्तानी समर्थक लाठी-डंडे लेकर हिंदू श्रद्धालुओं को मारते और उन्हें दौड़ाते हुए दिखाई दे रहे हैं। वहीं दूसरी वीडियो में पुलिस इलाके को घेरकर स्थिति नियंत्रित करने का प्रयास कर रही है।

हमले के बाद पील रीजनल पुलिस चीफ निशान दुरईप्पा ने लोगों से संयम बरतने को कहा है और कहा है कि हिंसा और अपराध को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पुलिस ने आश्वासन दिया है कि वे इस मामले की जाँच करेंगे और दोषियों को जवाबदेह ठहराने के लिए आवश्यक कदम उठाएँगे।

इसके अलावा कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने इस हमले की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि हर कनाडाई नागरिक को अपने धर्म का पालन करने का अधिकार है और ऐसी हिंसा को स्वीकार नहीं किया जा सकता। कनाडा के एमपी चंद्र आर्या ने भी कहा कि खालिस्तानियों द्वारा आज सीमा पार कर दी गई। उनके द्वारा हिंदू-कनाडाई लोगों पर हिंदू सभा में हमला दिखाता है कि ये लोग कितने कट्टरपंथी होते जा रहे हैं।

वहीं ब्रैम्पटन के हिंदू सभा मंदिर में खालिस्तानियों के हमले की कड़ी निंदा कनाडा संसद में विपक्ष के नेता पियरे पोलीएवर ने भी की। उन्होंने इस घटना को ‘पूरी तरह अस्वीकार्य’ बताया। उन्होंने कहा कि सभी कनाडाई नागरिकों के लिए शांति से अपने धर्म का पालन करने का अधिकार जरूरी है।