ख़राब मौसम और दुर्गम परिस्थितियों के बावजूद भारतीय सेना के जवानों ने लोकतंत्र की प्रक्रिया में हिस्सा लेते हुए अपने मताधिकार का प्रयोग किया। सियाचिन ग्लेशियर और जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा (LoC) पर तैनात जवानों ने गुरुवार (अप्रैल 11, 2019) को सशस्त्र बल मतदाता के तौर पर मतदान किया।
J&K: Army troops deployed in Siachen & along the LoC cast their vote. Election Commission had provided the facility to the troops deployed in remote areas to download ballot papers online,vote&forward the ballot papers to their respective Electoral Returning Officers through post pic.twitter.com/oleJmkHshr
रक्षा विभाग के प्रवक्ता ने जानकारी दी कि भारतीय सेना के जवानों ने मतदान प्रक्रिया में हिस्सा लेकर एक ज़िम्मेदार नागरिक होने का कर्तव्य पूरा किया। इसके अलावा उन्होंने बताया कि नई पहल के तहत चुनाव आयोग ने दूरदराज़ इलाक़ो और दुर्गम स्थानों में तैनात भारतीय सैनिकों के लिए ऑनलाइन मतपत्र डाउनलोड करके, मतदान करने और उन्हें अपने संबंधित निर्वाचन अधिकारी को पोस्ट करने की सुविधा दी गई है। भारतीय सैनिकों ने वोट डालकर देश लोकतांत्रिक प्रक्रिया की मज़बूती को दर्शाया है।
11 अप्रैल को पहले चरण के मतदान की प्रक्रिया शुरू हुई जिसके तहत देश के 18 राज्यों और दो केंद्रशासित प्रदेशों की 91 सीटों पर वोटिंग हुई। पहले चरण में सबसे ज़्यादा उत्साह पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा के मतदाताओं में दिखा। वहीं ख़बर यह भी है कि बिहार में सबसे कम वोटिंग हुई और जम्मू-कश्मीर की दो सीटों पर 54.49% तक मतदान हुआ।
जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्विद्यालय के इतिहास में पहली बार कोई महिला कुलपति बनी है। प्रोफेसर नजमा अख्तर जामिया मिल्लिया इस्लामिया की पहली महिला कुलपति बनने वाली हैं। गौरतलब है कि साल 2018 में मणिपुर की राज्यपाल व पूर्व केंद्रीय अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री डॉ. नजमा हेपतुल्ला को कुलाधिपति (चांसलर) नियुक्त किया गया था। फिलहाल देश के किसी भी विश्वविद्यालय के दोनों सर्वोच्च पदों पर महिलाएँ नहीं हैं। शिक्षण संस्थानों के इतिहास में यह एक महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है, जो जामिया के लिए भी गौरव की बात है।
एक सरकारी आदेश में कहा गया है कि जामिया मिल्लिया इस्लामिया अधिनियम 1988 के तहत प्राप्त अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए भारत के राष्ट्रपति ने जामिया के विजिटर की हैसियत से नई दिल्ली स्थित NIEPA में कार्यरत प्रोफेसर नजमा अख्तर को 5 साल के लिए जामिया मिलिया इस्लामिया का कुलपति नियुक्त किया है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना चुकीं प्रो नजमा को चार दशक के लंबे शैक्षणिक नेतृत्व का अनुभव है। वह NIEPA में 130 देशों के वरिष्ठ अधिकारियों के अंतरराष्ट्रीय शैक्षिक प्रशासक पाठ्यक्रम के 15 वर्षों तक सफल नेतृत्व के लिए जानी जाती हैं। देश में शैक्षिक प्रशासक तैयार करने के लिए प्रयागराज में पहले प्रदेश स्तर के प्रबंधन संस्थान को स्थापित व सफलतापूर्वक विकसित करने का श्रेय भी नजमा अख्तर को जाता है। इन्होंने दो किताबें भी लिखी हैं।
Jamia Milia Islamia @jamia_millia has got its first Woman Vice Chancellor in Prof. Najma Akhtar. #RIWOMEN
इसके साथ ही प्रो नजमा ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में परीक्षा नियंत्रक व अकादमिक कार्यक्रमों की निदेशक सहित कई शीर्ष संस्थानों की अहम जिम्मेदारियाँ बखूबी निभाई हैं। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) में उन्होंने कई राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर के डिस्टेंस एजुकेटर कैपेसिटी बिल्डिंग पाठ्यक्रमों की अगुवाई की है।
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की स्वर्ण पदक विजेता प्रो नजमा अख्तर मेधावी विद्यार्थी भी रही हैं। उन्होंने राष्ट्रमंडल छात्रवृत्ति सहित कई अंतरराष्ट्रीय प्रशस्तियाँ अपने नाम की हैं। प्रो नजमा ने प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय संस्थानों जैसे वारविक विश्वविद्यालय व नाटिंघम विश्वविद्यालय के अलावा शैक्षिक योजना के अंतरराष्ट्रीय संस्थान (आईआईईपी) यूनेस्को, पेरिस से भी शिक्षा प्राप्त की है। वह विकसित व विकासशील देशों के कई साझा अनुसंधान कार्यों में भी शामिल रही हैं। सफल नेतृत्वकर्ता के रूप में उन्होंने युवा शिक्षकों को स्वतंत्र नेतृत्वकर्ता बनने के लिए प्रोत्साहित व सहयोग किया है।
इसके साथ ही चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ के प्रोफेसर संजीव कुमार शर्मा को मोतीहारी विश्वविद्यालय, बिहार का कुलपति बनाया गया है तो वहीं बीएचयू के प्रोफेसर रजनीश शुक्ला को महात्मा गाँधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा के कुलपति का भार सौंपा गया है।
गौरतलब है कि जामिया के पूर्व वीसी प्रफेसर तलत अहमद के पिछले साल जुलाई 2018 में जामिया से इस्तीफा देकर कश्मीर विश्वविद्यालय के प्रमुख के तौर पर ज्वॉइन करने के बाद से यह पद खाली पड़ा था।
कैला देवी में गुरुवार (अप्रैल 11, 2019) को अखिलेश यादव की चुनावी जनसभा के दौरान सपा से संभल के प्रत्याशी शफीकुर्रहमान बर्क ने प्रधानमंत्री मोदी के बारे में विवादित बयान दिया। सभा में अखिलेश की मौजूदगी में बर्क ने सपा-बसपा-रालोद के गठबंधन को नरेंद्र मोदी के लिए मौत का पैगाम बताया है जिसके बाद मामले ने तूल पकड़ा और प्रशासन ने प्रत्याशी के ख़िलाफ़ नोटिस जारी कर दिया।
— Suresh Chavhanke STV (@SureshChavhanke) April 11, 2019
अखिलेश यादव शफीकुर्रहमान बर्क के समर्थन में चुनाव प्रचार करने आए थे जहाँ अखिलेश की अनुमति से ही बर्क को बोलने का मौका मिला। अपनी पाँच मिनट की बातचीत में ही बर्क ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए जहर उगला और यूपी में गठबंधन को लेकर अटूट विश्वास दिखाया।
संभल के एसडीएम दीपेंद्र यादव ने इस मामले को गंभीर बताया। साथ ही बर्क के बयान वाली वीडियो का भी परीक्षण हुआ। प्रमाणिकता की पुष्टि होने के बाद उन्हें नोटिस जारी किया गया और साथ ही तीन दिन में जवाब माँगा गया। इस मामले में प्रत्याशी के पोते जियाउर्रहमान बर्क का कहना है कि मामले को तोड़-मरोड़ के पेश किया जा रहा है। उन्हें अभी तक कोई नोटिस नहीं मिला है।
#संभल : सपा प्रत्याशी डॉ शफीकुर्रहमान बर्क़ का विवादित ब्यान, महा गठबंधन बना मोदी के लिए मौत का पैगाम. मंच पर अखिलेश यादव की मौजूदगी में दिया विवादित ब्यान, @yadavakhileshpic.twitter.com/Kkz2UKUHmf
— UttarPradesh.ORG News (@WeUttarPradesh) April 11, 2019
प्रधानमंत्री पर इस तरह की विवादित टिप्पणी करके बर्क एक बार फिर सुर्खियों में आ गए। बता दें कि मुस्लिम बहुल इलाके के सपा प्रत्याशी शफीकुर्रहमान बर्क वंदे मातरम के विरोध में संसद से वॉक ऑउट भी कर चुके हैं। इस दौरान बर्क ने राष्ट्रगीत वंदे मातरम का खुलकर विरोध करते हुए इसे गैर-इस्लामिक करार दिया था जिसके कारण विभिन्न संगठनों ने उनका विरोध भी किया था।
#संभल : सपा प्रत्याशी डॉ शफीकुर्रहमान बर्क़ का विवादित ब्यान,ये महागठबंधन अखिलेश यादव,मायावती और चौधरी अजीत सिंह ने पूरी मेहनत और हमदर्दी से बनाया, महा गठबंधन बना मोदी के लिए मौत का पैगाम
— UttarPradesh.ORG News (@WeUttarPradesh) April 11, 2019
बर्क के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ़ कई आवाजें उठ रही हैं। लोग यहाँ तक सवाल कर रहे हैं कि क्या मायावती ने इसलिए मुसलमानों को एकजुट होकर गठबंधन को वोट देने की बात कही थी।
लोकसभा चुनावों का पहला चरण आज शुरू हो चुका है। इसी बीच खोकन मियाँ (कूचबिहार, ब्लॉक नंबर 1) नाम के एक TMC नेता का एक ऑडियो क्लिप वायरल हो गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस ऑडियो में वो अपने कार्यकर्ताओं को बूथ पर पार्टी के पक्ष में 100% वोट सुनिश्चित करने का निर्देश दे रहे हैं। इसमें मियाँ वोटर्स को किसी अन्य पार्टी को वोट न देने की चेतावनी देते हुए सुना जा सकता है। भाजपा द्वारा चुनाव आयोग को क्लिप सौंपकर उचित कार्रवाई की माँग की गई है।
इस मामले पर भाजपा नेता उत्पल कुमार देब ने कहा, “यह स्पष्ट है कि खोखोन मियाँ का अपनी पार्टी की बैठक में दिए गए निर्देशों में क्या लक्ष्य है। लेकिन ऐसे लोग सफल नहीं होंगे क्योंकि लोग उन्हें रोकेंगे।”
मियाँ इस लीक हुए ऑडियो में यह कहते हुए सुने जा रहे हैं कि पार्टी ने निर्देश दिया है कि किसी भी अन्य पार्टी को कोई वोट नहीं मिलना चाहिए और किसी अन्य पार्टी को वोट देने की कोशिश करने वालों की पहचान की जाएगी। मियाँ का कहना है, “TMC को 100% वोट मिलना चाहिए, अन्य पार्टियों को वोट नहीं मिलना चाहिए। उनका कहना है कि अगर कोई किसी अन्य पार्टी को वोट देने की कोशिश करता है, तो उनकी पहचान की जाएगी। यह पार्टी का निर्देश है।”
मियाँ ने आगे कहा कि केंद्रीय बल कुल 100 में से केवल 40 बूथों पर मौजूद होंगे और सभी सरकारी कर्मचारी उनके नियंत्रण में हैं। “पुलिस से लेकर बीडीओ तक, सभी हमारे नियंत्रण में हैं। वे सरकारी कर्मचारी हो सकते हैं, लेकिन वे मेरे अधीन हैं।”
कूचबिहार निर्वाचन क्षेत्र में चुनावों को एक कठिन लड़ाई बताते हुए उसने बूथ कार्यकर्ताओं से पीठासीन अधिकारियों के साथ, अगर आवश्यक हो तो, कुछ ‘सेटिंग’ करने का आग्रह किया, लेकिन पहले यह सुनिश्चित करें कि सभी बूथ कवर किए गए हैं। मियाँ ने कार्यकर्ताओं को वोटों में हेराफेरी करने की सलाह भी दी।
चुनाव के दौरान पश्चिम बंगाल में पहले ही दिन भारी हिंसा और हिंसा की खबरें आईं हैं। पिछले साल के विधानसभा चुनावों के दौरान TMC के गुंडों द्वारा की गई हिंसा को याद करके लोग मतदान करने से भी डरने लगे थे। भाजपा ने आरोप लगाया था कि TMC एजेंट नियमों का उल्लंघन करते हुए मतदान केंद्रों पर मौजूद थे और भाजपा एजेंटों को धमकी दी गई थी। यही नहीं, पिछली रात उनके घरों पर हमला किया गया था।
हैरान करने वाली बात यह है कि कुछ दिनों पहले TMC नेता अनुब्रत मोनल ने चुनाव आयोग के अधिकारियों से खुलेआम अपील की थी कि वे प्रति बूथ 500-600 वोटों का प्रबंधन करके लोगों को चुनावों में धांधली करने दें।
टीवी डिबेट पर आजकल नेताओं और प्रवक्ताओं का एक-दूसरे से बहस में उलझना आम बात होती जा रही है। कभी कोई किसी के सर पर पानी गिरा देता है, तो कभी कोई आपस में थप्पड़ रसीद देता है। लोकसभा चुनाव के लिए चुनाव प्रचार के दौरान नेताओं के बीच बहस होना काफी आम बात है। टीवी पर होने वाली डिबेट में भी नेता एक दूसरे के खिलाफ कटाक्ष करने का कोई मौका नहीं चूकते हैं। इस बार मामला बहुत करीबी हो गया जब बात एक न्यूज़ एंकर पर ही आ गई।
एक टीवी बहस के दौरान कॉन्ग्रेस प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी ने आज तक चैनल की एंकर अंजना ओम कश्यप को ‘बहनजी’ कह दिया। इस ‘बहन जी’ शब्द से अंजना इतनी आहत हुई कि उन्होंने तुरंत कॉन्ग्रेस प्रवक्ता को बदले में ‘आंटी जी’ कह दिया। हालाँकि, प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि उन्हें इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि उन्हें क्या कहकर संबोधित किया जाता है। इस ‘बहनजी’ और ‘आंटीजी’ वाले प्रकरण को आप इस यूट्यूब लिंक पर देख सकते हैं।
यह निंदनीय प्रकरण तब हुआ जब टीवी पर ‘राफेल डील की लीक दस्तावेज में क्या है?’ इस मुद्दे को लेकर बहस चल रही थी। बहस में शामिल होने के लिए कॉन्ग्रेस की तरफ से प्रियंका चतुर्वेदी मौजूद थीं। वहीं भाजपा की तरफ से इस मुद्दे पर पार्टी का पक्ष रखने के लिए गौरव भाटिया स्टूडियो में मौजूद थे।
भाजपा प्रवक्ता ने कॉन्ग्रेस की पूर्ववर्ती सरकार पर एयरफोर्स की जरूरत के अनुसार लड़ाकू विमानों के आने को लेकर देरी पर सवाल उठाते हुए कॉन्ग्रेस की पहले की सरकारों को निकम्मी, निठल्ली और भ्रष्टाचारी सरकार कह डाला। उन्होंने कॉन्ग्रेस सरकार पर सौदे में अपना कमीशन तय करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी सत्ता में आए और सिर्फ 16 महीने में ही डील हो गई और इस साल सितंबर में राफेल विमान भी आ जाएँगे।
गौरव भाटिया ने राहुल गाँधी के लिए कहा कि पाँचवी क्लास का बालक पीएचडी की थीसिस नहीं पढ़ सकता, इसी तरह राहुल गाँधी भी राफेल को लेकर सुप्रीम कोर्ट का जजमेंट नहीं पढ़ सकते। इसके बाद प्रियंका चतुर्वेदी ने भाजपा के प्रवक्ता का जवाब देते हुए जज्बातों में बहकर बातचीत के दौरान एंकर को ‘बहनजी’ कहकर संबोधित कर दिया। इस पर ही आजतक की महिला एंकर भड़क गईं। इस ‘आंटी जी-बहन जी’ संवाद के बाद प्रियंका चतुर्वेदी ने बेहद नाराज स्वर में कहा कि हम यहाँ अपना अपमान करवाने नहीं आते हैं।
लोकसभा चुनाव के लिए बृहस्पतिवार (अप्रैल 11, 2019) को बिहार के भागलपुर में एक चुनावी रैली में पीएम नरेंद्र मोदी ने कॉन्ग्रेस पर तीखा प्रहार करते हुए दावा किया कि 23 मई को देश में मोदी की सरकार दोबारा बननी तय है। भागलपुर में एक चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि यह NDA की नीति है कि आतंकवाद और नक्सलवाद से निपटने के लिए जवानों को खुली छूट दी जाएगी।
मोदी ने अपने भाषण में कहा, “महामिलावटी कह रहे हैं कि जवानों के पास जो विशेष अधिकार हैं, उसे भी हटा देंगे। उन्हें जवाब देना चाहिए कि वे देश के वीर जवानों के साथ हैं या आतंकवादियों के साथ।”
PM मोदी ने विरोधियों पर निशाना साधते हुए कहा कि इन्हें सिर्फ अपना अस्तित्व बचाना है। उन्हें डर है कि मोदी फिर से आएगा तो इनकी भ्रष्टाचार की सारी दुकानें बंद हो जाएँगी। इनकी जाति-धर्म की राजनीति बंद हो जाएगी। टुकड़े-टुकड़े गैंग टुकड़ों में बिखर जाएँगे।
गरीबों के नाम पर इनकी ठगी बंद हो जाएगी।
जाति-धर्म की इनकी राजनीति बंद हो जाएगी।
इन जमानती नेताओं की सीनाजोरी बंद हो जाएगी।
टुकड़े-टुकड़े गैंग ही टुकड़े-टुकड़े होकर बिखर जाएगा: PM @narendramodi
मोदी ने कहा कि एक समय था कि जब पाकिस्तान की धमकियों का जवाब नहीं दिया जाता था और आज घर में घुसकर आतंकियों को खत्म किया जा रहा है।
उन्होंने कहा, “विपक्ष कह रहा है कि आतंकवादी को खत्म करने के लिए पाकिस्तान से बात की जाएगी। ये लोग खुद डरे हैं, अविश्वास से घिरे हुए हैं, इसलिए देश में डर फैला रहे हैं। महामिलावटी ये डर भी फैला रहे हैं कि मोदी फिर से आ जाएगा तो चुनाव खत्म हो जाएगा, आरक्षण समाप्त हो जाएगा।” प्रधानमंत्री ने दावा करते हुए कहा कि ये आपका चौकीदार आरक्षण को मजबूत बना रहा है।
महामिलावटी नेता डर फैला रहे हैं कि अगर इस बार फिर से मोदी आ गया तो देश में चुनाव ही खत्म हो जाएगा।
महामिलावटी नेता ये डर भी फैला रहे हैं कि अगर मोदी फिर सत्ता में आ गया तो संवैधानिक संस्थाएं खत्म हो जाएंगी।
महामिलावटी डर फैला रहे हैं कि मोदी आरक्षण खत्म कर देगा: PM
आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई का मुद्दा उठाते हुए पीएम ने कहा, “2014 के पहले का भारत याद कीजिए। तब पाकिस्तान आतंकियों को भेजता था और बाद में धमकी भी देता था। कॉन्ग्रेस की सरकार सिर्फ कागजी कार्रवाई तक सीमित रह जाती थी। पर, हमने उनके घर में घुसकर मारा। आज स्थिति यह है कि पाकिस्तान दुनिया भर में घूमकर रोना रो रहा है लेकिन उसे कोई घास तक नहीं डाल रहा।”
याद करिए, 2014 से पहले पाकिस्तान का रवैया क्या था?
आतंकवादी भी पाकिस्तान भेजता था और फिर हमलों के बाद धमकियां भी वही देता था।
कांग्रेस की अगुवाई वाली सरकार सिर्फ कागजी कार्रवाई में उलझकर रह जाती थी: PM @narendramodi in Bhagalpur, Bihar
इस दौरान पीएम ने केंद्र की योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि पिछले 70 सालों में जो चीजें नामुमकिन थीं, हमने उन सबको मुमकिन कर दिखाया है। पीएम ने कहा, “आज मैं जो कुछ भी कर पाया हूँ, वह सिर्फ आपके आशीर्वाद और सहयोग से संभव हुआ है। देश को मजबूत करने और नई ऊँचाइयों तक ले जाने के लिए आगे भी आपके सहयोग और आशीर्वाद की जरूरत है।”
बिहार में बुनियादी सुविधाओं को लेकर अपनी सरकार और सहयोगियों की ओर इशारा करते हुए कहा, “नेताओं को अपने आँगन तक चकाचक सड़क पहुँचाते तो आपने बहुत देखा, बिहार के गाँव-गाँव तक सड़कें पहुँचाने का बीड़ा इस चौकीदार और उसके साथियों ने उठाया है।”
नेताओं को अपने आंगन तक चकाचक सड़क पहुंचाते तो आपने बहुत देखा, बिहार के गांव-गांव तक सड़कें पहुंचाने का बीड़ा इस चौकीदार और उसके साथियों ने उठाया है: PM @narendramodi in Bhagalpur, Bihar
प्रधानमंत्री ने लोगों से NDA के पक्ष में मतदान करने की अपील करते हुए कहा कि आपका एक-एक वोट इस चौकीदार की ताकत बढ़ाएगा। आपका वोट सीधे-सीधे मोदी के खाते में जाएगा। हम सब चौकीदार मिलकर देश को नई ऊंचाई पर ले जाएँगे।
भारतीय जनता पार्टी ने कुछ दिन पहले जारी किए अपने चुनावी ‘संकल्प पत्र’ में अनुच्छेद 370 के अतिरिक्त अनुच्छेद 35-A को भी हटाने की बात कही है। चुनाव आने पर लोक लुभावनी घोषणाएँ करना, जनता को वचन देना और बाद में मुकर जाना यह हर पार्टी करती है इसमें कोई दो राय नहीं, और भाजपा कोई अपवाद नहीं। उदाहरण के लिए राम मंदिर और अनुच्छेद 370 के मुद्दे को ही लिया जाए तो हर बार भाजपा अपना संकल्प दोहराती है कि सत्ता में आने पर 370 हटाएंगे और राम मंदिर बनाएंगे। लेकिन आज तक जम्मू कश्मीर राज्य के लिए संविधान में अनुच्छेद 370 यथावत है और भगवान राम अयोध्या में टेंट में विराजमान हैं।
बहरहाल, 2019 के लोकसभा निर्वाचन में कुछ अलग हुआ है। भारत के इतिहास में पहली बार किसी पार्टी के घोषणापत्र में अनुच्छेद 35-A को समाप्त करने की बात कही गई है। साथ में यह भी कहा गया कि यदि भाजपा सत्ता में आती है तो पश्चिमी पाकिस्तान, छम्ब और पाक-अधिक्रान्त जम्मू कश्मीर से आए शरणार्थियों को आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। अनुच्छेद 35-A और उपरोक्त शरणार्थियों के बीच सीधा संबंध है जिस पर आगे विस्तार से चर्चा की जाएगी।
वास्तव में अनुच्छेद 35-A के कारण ही जम्मू कश्मीर राज्य में शरणार्थियों की समस्याएँ उत्पन्न हुईं जिन्हें हल करने का प्रयास करना तो दूर उनकी बात तक कोई नहीं करता। ऐसे में भाजपा द्वारा इस मुद्दे को अपने संकल्प पत्र में स्थान देना अन्य राजनैतिक पार्टियों के लिए एक नई चुनौती खड़ा करने जैसा है। ध्यान से देखें तो भाजपा ने अपने संकल्प पत्र में तीन प्रकार के शरणार्थियों का उल्लेख किया है।
इनमें एक वे हैं जो 1947 में विभाजन के समय पश्चिमी पाकिस्तान से आए थे, दूसरे जो उसी समय पाक-अधिक्रान्त जम्मू कश्मीर से आए थे और तीसरे वे हैं जो 1965 और 1971 युद्ध के पश्चात कारण छम्ब से विस्थापित हुए थे। इनमें सर्वाधिक संख्या पाक अधिक्रान्त जम्मू कश्मीर या ‘PoJK’ से आए शरणार्थियों की है। वाधवा कमीशन की रिपोर्ट के अनुसार 1947 में पश्चिमी पाकिस्तान से आए 5,764 परिवारों (कुल 47,215 लोग) ने जम्मू में शरण ली थी। उसी समय PoJK से विस्थापित हुए 31,619 परिवारों ने शरण ली थी। सन 1965 और 1971 के युद्ध के कारण छम्ब से लगभग 17000 परिवार विस्थापित हुए थे।
वैसे तो 35-A के कारण इन तीनों प्रकार के शरणार्थियों को जम्मू कश्मीर राज्य की सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पाता। लेकिन विडंबना यह भी है कि भारत द्वारा इन सभी शरणार्थियों को अपना नागरिक मानने के बावजूद जम्मू कश्मीर राज्य में बसने के बाद इन्हें समान रूप से राहत नहीं दी गई। छम्ब और PoJK से विस्थापित हुए लोगों को समय-समय पर मुआवजा और कई कनाल (जम्मू कश्मीर में भूमि क्षेत्रफल मापने की इकाई) कृषि और ग़ैर-कृषि भूमि दी गई। लेकिन पश्चिमी पाकिस्तान से आकर जम्मू कठुआ और राजौरी में बसे शरणार्थियों को कुछ नहीं मिला। उन्हें अस्थाई तौर पर रहने के लिए जो भूमि मिली थी उसी पर आज भी रह रहे हैं।
पश्चिमी पाकिस्तान से जम्मू कश्मीर में आए शरणार्थी (West Pakistani Refugees)
सन 1947 में जब देश को स्वतंत्रता की भारी कीमत चुकानी पड़ी थी। यह कीमत थी विभाजन से उपजी एक ऐसी त्रासदी जिसमें लगभग डेढ़ करोड़ लोगों को विस्थापित होना पड़ा था। वह भयानक दंगों, मारकाट और विप्लव का कालखंड था। पश्चिमी भारत में वस्तुतः पंजाब का विभाजन हुआ था। पंजाब के 16 ज़िले, जिनमें 55% जनसंख्या रहती थी और जो पूरे पंजाब का 62% क्षेत्रफल था, उसे पाकिस्तान को सौंप दिया गया था और भारत के हिस्से में पंजाब के 13 ज़िले आए थे जिनमें 45% जनसंख्या थी।
रैडक्लिफ रेखा का निर्णय होते ही अधिक से अधिक संख्या में हिन्दुओं और सिखों का पलायन नवनिर्मित पाकिस्तान से भारत की ओर होने लगा। जिसको जो साधन उपलब्ध हुआ उसी से चलकर वह भारत की तरफ भागा। लाल कृष्ण आडवाणी और भूतपूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह भी अपने परिजनों समेत पश्चिमी पाकिस्तान से भाग कर भारत आए थे।
पलायन और अराजकता के उस दौर में किसी को कुछ समझ में नहीं आता था कि कहाँ जाएँ क्या करें। हमारे नेताओं को भी इतने बड़े स्तर पर पलायन की आशा नहीं थी। उन भयावह परिस्थितियों में पश्चिमी पाकिस्तान स्थित सियालकोट से भारत में प्रवेश करने वाले लोगों के लिए अमृतसर या गुरदासपुर से ज्यादा निकट जम्मू था। इसलिए उन्होंने जम्मू में शरण लेना उचित समझा। कुछ लोगों को यह भी लगा कि जम्मू कश्मीर राज्य के राजा हिन्दू हैं इसलिए वहाँ शरण लेना ठीक होगा। कुछ लोगों के सगे संबंधी जम्मू में रहते थे इसलिए वे वहाँ चले गए।
जम्मू कश्मीर में शरण लेने वालों में से कुछ तो आगे बढ़ गए और दिल्ली पंजाब आदि में चले गए लेकिन विस्थापितों की अधिकांश जनसंख्या को शेख अब्दुल्ला ने रोक लिया और उन्हें यह भरोसा दिलाया कि उन्हें राज्य में सब कुछ दिया जाएगा। सब कुछ देने के नाम पर पश्चिमी पाकिस्तान से आए शरणार्थियों को 1954 में अनुच्छेद 35-A का संवैधानिक छल उपहार स्वरूप दिया गया।
अनुच्छेद 35-A जम्मू-कश्मीर राज्य को यह निर्णय लेने का अधिकार देता है कि राज्य के स्थाई निवासी कौन होंगे। अर्थात यह राज्य तय करेगा कि स्थाई निवास प्रमाण पत्र किसको देना है और किसे नहीं। जम्मू-कश्मीर राज्य को जब यह अधिकार दिया गया तब तक राज्य का संविधान भी नहीं बना था। बाद में राज्य का संविधान बनते ही उसमें यह लिख दिया गया कि जम्मू-कश्मीर के स्थाई निवासी का दर्ज़ा उन्हें ही दिया जाएगा जो 1944 या उसके पहले से राज्य में रह रहे हैं।
लेकिन पश्चिमी पाकिस्तान से आए शरणार्थी तो 1947 में अपनी जान बचाकर आए थे इसलिए आजतक उन्हें जम्मू-कश्मीर का स्थाई निवासी नहीं माना गया और उन्हें स्थाई निवास प्रमाण पत्र- जिसे PRC कहा जाता है- नहीं दिया गया। स्थाई निवास प्रमाण पत्र न होने से वे शरणार्थी जम्मू कश्मीर राज्य में भूमि नहीं खरीद सकते, उनके बच्चे कक्षा 9 से आगे पढ़ाई नहीं कर सकते, वे लोकसभा के लिए तो वोट कर सकते हैं लेकिन विधानसभा के लिए मतदान नहीं कर सकते।
दूसरे शब्दों में वे भारत के नागरिक तो हैं लेकिन उन्हें जम्मू कश्मीर राज्य द्वारा प्रदान किए जाने वाली किसी भी सुविधा का लाभ नहीं मिलता। एक अनुमान के मुताबिक पश्चिमी पाकिस्तानी शरणार्थियों की संख्या आज बढ़कर सवा से डेढ़ लाख के करीब हो गई है लेकिन उनकी सुनने वाला कोई नहीं है। पश्चिमी पाकिस्तान से आए शरणार्थियों में 80% अनुसूचित जाति, 10% अन्य पिछड़ा वर्ग और मात्र 10% सामान्य वर्ग के लोग हैं। यह राज्य सभा में प्रस्तुत की गई जॉइंट पार्लियामेंट्री कमिटी की रिपोर्ट में दर्ज़ है। डॉ मनमोहन सिंह जो स्वयं पश्चिमी पाकिस्तान से विस्थापित होकर भारत आये थे और दस वर्षों तक देश के प्रधानमंत्री रहे उन्होंने पश्चिमी पाकिस्तानी शरणार्थियों की समस्याओं पर कभी कुछ नहीं बोला न उन्हें सुलझाने का कभी प्रयास किया।
पाकिस्तान के सिंध में घोटकी से दो हिंदू लड़कियों, रीना और रवीना, जिनका कथित तौर पर अपहरण कर लिया गया, फिर उन्हें जबरन इस्लाम में परिवर्तित कर दिया गया। इतना ही नहीं जबरन उनकी शादी उनकी उम्र से बड़े मुस्लिमों से करा दी गई। इस मामले में इस्लामाबाद हाईकोर्ट में दोनों बहनों को अपने मुस्लिम पतियों सफ़दर अली और बरक़त अली के साथ रहने का आदेश दिया है।
ख़बर के अनुसार, अपनी एक अर्जी में दोनों बहनों ने यह दावा किया था कि वे घोटकी (सिंध) के एक हिंदू परिवार से ज़रूर हैं लेकिन उन्होंने इस्लामिक उपदेशों से प्रभावित होकर अपना धर्म बदला था।
इस्लामाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश अथर मिनल्लाह की अगुवाई वाली एक उच्च न्यायालय की पीठ ने पाँच सदस्यीय आयोग की रिपोर्ट पेश करने के बाद यह निर्णय लिया, जिसमें यह जाँच करने का काम सौंपा गया था कि क्या हिंदू बहनों का इस्लाम में धर्मांतरण मजबूर किया गया था। उच्च न्यायालय ने पहले भी आदेश दिया था कि सुनवाई पूरी होने तक दोनों बहनों को इस्लामाबाद के एक आश्रय गृह में स्थानांतरित कर दिया जाए।
आयोग ने अदालत को सूचित किया कि कथित चिकित्सा परीक्षणों से यह साबित हो गया था कि दोनों लड़कियाँ नाबालिग नहीं थी क्योंकि उनमें से एक 18 और दूसरी 19 वर्ष की थीं, इसलिए उन्हें नाबालिग नहीं कहा जा सकता।
दरअसल, 20 मार्च को, होली की पूर्व संध्या पर दो नाबालिग हिंदू लड़कियों, 13 वर्षीय रवीना और 15 वर्षीय रीना का अपहरण करके उन्हें पाकिस्तान के सिंध प्रांत में अपने उम्र से बहुत बड़े मुस्लिम पुरुषों से जबरन शादी करने के लिए मजबूर किया गया। हिन्दू किशोरियों पर हुए इस अत्याचार ने पूरे विश्व में लोगों को पाकिस्तान में हिन्दुओं के हालात पर सोचने के लिए मजबूर कर दिया।
इस घटना के कुछ दिनों के भीतर ही मेघवार समुदाय की एक अन्य हिंदू नाबालिग लड़की को भी पाकिस्तान के सिंध प्रांत में बाडिन ज़िले के टांडो बाघो से कथित तौर पर अगवा कर लिया गया था।
इस घटना को गंभीरता से लेते हुए केंद्रीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने पाकिस्तान स्थित भारतीय उच्चायोग से रिपोर्ट माँगी। पाकिस्तान के सिंध में होली की शाम हुई इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना को लेकर गंभीर सुषमा स्वराज ने ट्वीट करते हुए भारतीय उच्चायोग को टैग किया और इस सम्बन्ध में एक रिपोर्ट देने का निर्देश दिया। इसके बाद इस मामले में 7 लोगों की गिरफ़्तारी भी हुई।
इस मामले में पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी के हिन्दू सांसद रमेश कुमार वंकवानी ने कहा था कि जबरन धर्मांतरण के ख़िलाफ़ तैयार किए गए विधेयक को प्राथमिकता के आधार पर असेंबली में पेश एवं पारित कराया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “धर्म के नाम पर नफ़रत की शिक्षा देने वाले सभी लोगों से प्रतिबंधित धार्मिक संगठनों की तरह निपटा जाना चाहिए।
“और तुम सब के सब (मिलकर) ख़ुदा की रस्सी मज़बूती से थामे रहो और आपस में (एक दूसरे) के फूट न डालो और अपने हाल (ज़ार) पर ख़ुदा के एहसान को तो याद करो जब तुम आपस में (एक दूसरे के) दुश्मन थे तो ख़ुदा ने तुम्हारे दिलों में (एक दूसरे की) उलफ़त पैदा कर दी तो तुम उसके फ़ज़ल से आपस में भाई भाई हो गए और तुम गोया सुलगती हुई आग की भट्टी (दोज़ख) के लब पर (खडे) थे गिरना ही चाहते थे कि ख़ुदा ने तुमको उससे बचा लिया तो ख़ुदा अपने एहकाम यूं वाजेए करके बयान करता है ताकि तुम राहे रास्त पर आ जाओ [कुरान३:१०३]
कुरान से ली गई ये पंक्तियाँ और लोकतंत्र का उपहास उड़ाती एक वेबसाइट अचानक लोकसभा चुनाव से पहले चर्चा का विषय बन गई है। खुदा की अपील पढ़ने को मिल रही है इंडियन मुस्लिम वोटर (indianmuslimvoter) नाम की वेबसाइट पर। इस वेबसाइट पर जाने पर दिखता है कि बेहद ‘वैज्ञानिक’ तरीकों से ग्राफ और आँकड़े उठाकर मुस्लिम मतदाताओं के लिए वोटिंग गाइडलाइंस जारी की गई हैं। साथ ही, ‘बेहद आवश्यक’ दिशा निर्देश भी जारी किए गए हैं, इनमें से कुछ निर्देशों में किसी-किसी राज्य में किसी को भी वोट ना देने की अपील भी शामिल है।
ये हर दूसरे आम व्यक्ति, जिसे इंटरनेट इस्तेमाल करना आता है, की विशेषता होती है कि इंटरनेट पर आँकड़ों को देखकर वो इन पर विश्वास करने के लिए पहली ही नजर में तैयार हो जाता है। फिर इस वेबसाइट ने तो आँकड़ों को ‘रंगीन ग्राफ’ के माध्यम से प्रदर्शित करते हुए मुस्लिम और भाजपा के वोटर्स की संख्या को समझाया है, इसलिए इस वेबसाइट पर जाकर, दिए गए ग्राफ्स को ही ‘तथ्य’ न मान पाना किसी के लिए भी चुनौती पूर्ण हो सकता है।
अगर गौर से देखा जाए तो ये आँकड़े पेश करने वाली वेबसाइट भी उसी रोजाना TV पर आकर लोगों से TV ना देखने की अपील करने वाले जर्नलिस्ट की तरह ही लोगों के मनोविज्ञान से खेलने की कोशिश करती देखी जा सकती है, जो मोदी सरकार पर आरोप लगाने और अपने व्यक्तिगत प्रोपेगेंडा को दिशा देने के लिए अलग-अलग वेबसाइट के माध्यम से झूठे आँकड़ों को पेश कर उनके ब्रह्मसत्य होने का दावा करता है।
वेबसाइट का ‘मकसद’
इंडियन मुस्लिम वोटर वेबसाइट ने अपना मकसद स्पष्ट करते हुए लिखा है कि असली मक़सद आपको भारत में मुस्लिम मतदाताओं (वोटर) के बारे में सटीक आँकड़ो के बारे में बताना है। इस वेबसाइट के अनुसार भारत में मुस्लिम मतदाताओं के महत्व को कम करने के लिए भारत सरकार सटीक संख्या छिपाती है। वेबसाइट पर समुदाय विशेष को ‘BJP बनाम इस्लाम’ दिखाने की कोशिश की गई है और राज्यवार किस पार्टी को वोट देना है, ऐसा बताया गया है। इस वेबसाइट का एक और मक़सद है कि मुस्लिम मतदाताओं को एक साथ जोड़ सके।
तिरंगा और संसद की तस्वीरों से सजी है इस्लाम बनाम भाजपा वोटर्स वाली ये वेबसाइट
संसद और तिरंगे झंडे से सजी हुई इस वेबसाइट के होमपेज पर पहला सन्देश पढ़ने को मिलता है, “क्या आप जानते हैं कि मुस्लिम मतदाता 2019 के लोकसभा चुनावों के लिए भाजपा के मतदाताओं से अधिक हैं?” ये वेबसाइट किस तरह से लोगों को भ्रमित करने के लिए समर्पित है, इस बात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस पर विशेष टैब बनी है जिसका शीर्षक है, “मुस्लिम किसे वोट डालें।” इस वेबसाइट को मार्च 23, 2019 को ही रजिस्टर किया गया है, यानी आम चुनाव से ठीक पहले। इस बात से ही स्पष्ट होता है कि यह किसी प्रोपेगैंडा का ही हिस्सा हो सकता है।
सेंसस और मतदान के बारे में वेबसाइट के सभी आँकड़े गलत हैं
इसके बाद रंगीन ग्राफ के माध्यम से बताया गया है कि इस देश में ‘मुस्लिमों’ के कितने वोट हैं और ‘भाजपा’ के कितने वोट हैं। इस वर्गीकरण का आधार 2014 में हुए आम चुनाव के मतदान पैटर्न्स को बताया गया है, जिनकी प्रमाणिकता इसी बात से जानी जा सकती है कि इसके रंगीन ग्राफ में भाजपा वोट की सीधे-सीधे समुदाय विशेष के वोट के साथ तुलना करके क्रमशः 11% और 12% बताया गया है। साथ ही, 39% वोट वो बताए गए हैं, जो वेबसाइट के अनुसार 2019 चुनाव में वोट नहीं दे सकते।
ये पता नहीं चल पा रहा है कि कौन सी आसमानी गणित के द्वारा निकाले गए 39% लोग वोट नहीं दे सकते। इन सभी निष्कर्षों पर पहुँचने के लिए कौन सी रिसर्च मेथोडोलोजी अपनाई गई है, इस बात का कहीं भी कोई ज़िक्र नहीं है। क्या सभी आँकड़ों के अंत में [कुरान ३:१०३] लिख देना मात्र ही इन सभी आँकड़ों को ‘तथ्यों’ में बदल देने के लिए काफी माना जाना चाहिए ?
यदि सरकारी आँकड़ों को देखें तो 2014 में कुल मतदाताओं की संख्या से लेकर प्रत्येक राज्य की वोटर संख्या भी गलत दी गई है। भाजपा को 2014 में पड़ने वाले कुल मत इस वेबसाइट के अनुसार 16.69 करोड़ बताए गए हैं, जबकि वास्तव में 2014 में भाजपा को कुल 17 करोड़ 16 लाख वोट मिले थे। इसी तरह से मुस्लिम आबादी से लेकर भाजपा को मत देने वाले लोगों तक की संख्या के लिए इस वेबसाइट ने किस सेंसस को आधार माना है यह यक्ष-प्रश्न है।
इस वेबसाइट ने दावा किया है कि सेंसस डेटा हाल ही में जारी हुआ है, जबकि वर्ष 1872 में सेंसस (जनगणना) शुरू हुआ था और तब से आज तक यह हर 10 साल में ही होता है। इस प्रकार वर्तमान में 2011 के सेंसस डेटा के आधार पर ही मतदान हो रहे हैं और इसके बाद 2021 का ही डेटा इस्तेमाल किया जाएगा।
साथ ही यह भी चिंता का विषय है कि यह वेबसाइट बड़े स्तर पर यूट्यूब से लेकर हर छोटे-बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपने नफरत, झूठ और सांप्रदायिक विचारों के कर्क रोग को फैला रही है। यूट्यूब पर इस भ्रामक वीडियो को देखने वालों की संख्या बहुत ही कम समय में 2 लाख से ऊपर पहुँच चुकी है।
इस वेबसाइट ने अपने बारे में कोई भी जानकारी देने से मना किया है और लिखा है कि उद्देश्य सिर्फ सत्य को उजागर करना है और वो इसके लिए समर्पित हैं।
आम चुनाव के ठीक पहले कुरान के नाम पर भाजपा बनाम मुस्लिम वोट का दावा करने वाली इस तरह की वेबसाइट का तिरंगे और संसद की तस्वीरों में लिपटकर आना लोकतंत्र का भद्दा मजाक है। इन्हें चलाने वालों को यह जानना चाहिए कि वो ऐसा कर किसी का भी भला नहीं कर रहे हैं, बल्कि सांप्रदायिकता को बढ़ावा देकर उन्हीं लोगों के अंदर भय पैदा कर हैं, जिनका हितैषी होने का ये लोग दावा करते हैं।
यूपीए अध्यक्ष सोनिया गाँधी की इटली में लाखों की संपत्ति है। ऐसा किसी मीडिया रिपोर्ट या विपक्ष के आरोपों में नहीं कहा गया है, खुद सोनिया गाँधी ने ऐसा बताया है। जी हाँ, नामांकन के दौरान चुनावी हलफनामे में सोनिया गाँधी ने इटली की अपनी संपत्ति का जिक्र किया है। इसमें सोनिया ने बताया है की इटली में उनकी 23,20,110 रूपए की संपत्ति है। साथ ही, सोनिया गाँधी की उच्चतम शैक्षणिक योग्यता फॉरेन लैंग्वेज (अंग्रेजी एवं फ्रेंच) में तीन वर्षीय कोर्स है।
सोनिया गाँधी ने हलफनामे में इटली की संपत्ति के बारे में बताया
सोनिया गाँधी द्वारा नामांकन के दौरान प्रस्तुत किए गए हलफनामे में जानकारी दी गई है कि उनके पास 60,000 रुपए कैश में है और 2.4 करोड़ रुपए शेयर्स में हैं। सोनिया गाँधी ने इस हलफनामे में यह भी बताया है कि उनके रिलायंस हाइब्रिड बॉन्ड्स में भी शेयर्स हैं। उन्होंने पोस्टल सेविंग्स में 72 लाख इन्वेस्ट कर रखा है।
सोनिया गाँधी की उच्चतम शिक्षा
नई दिल्ली स्थित डेरामंडी गाँव में सोनिया गाँधी की ज़मीन भी है। इस ज़मीन की क़ीमत 7,29,61,793 है। सोनिया गाँधी ने अपने बेटे राहुल गाँधी को 5 लाख रुपए का लोन भी दे रखा है। 2014 में उन्होंने राहुल गाँधी को 9 लाख रुपए का लोन दे रखा था। इकनोमिक टाइम्स ने ग़लत जानकारी दी है कि सोनिया गाँधी की इटली में साढ़े सात करोड़ की इनहेरिटेड प्रॉपर्टी है। इकनोमिक टाइम्स ने यह भी ग़लत लिखा है कि सोनिया गाँधी ने राहुल से 5 लाख का लोन ले रखा है लेकिन असल में इसका ठीक उल्टा है।
सोनिया गाँधी के पास 4.29 करोड़ की मूवेबल प्रॉपर्टी है। 2014 में ये आँकड़ा 2.81 करोड़ था। उनके ख़िलाफ़ राज्यसभा सांसद सुब्रह्मण्यम स्वामी द्वारा फाइल किया गया एक केस भी है। सोनिया गाँधी के पास कोई कार नहीं है। बता दें कि राहुल गाँधी ने भी अपने चुनावी हलफनामे में बताया था कि उनके पास कोई कार नहीं है। सोनिया गाँधी के पास 1.2 किलो सोना है और 88 किलो चाँदी है। उनके पास कुल 59 लाख की सोना-चाँदी की चीजें हैं।
बता दें कि सोनिया गाँधी ने नामांकन से पहले कलेक्ट्रेट तक रोड शो भी किया। इस दौरान उनके साथ राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी भी उपस्थित रहे। बुधवार (अप्रैल 10, 2019) को अमेठी में राहुल गाँधी के नामांकन में हिस्सा लेने के बाद भुएमऊ स्थित गेस्ट हाउस पहुँची। सोनिया आज गुरुवार को सुबह साढ़े नौ बजे पार्टी के केंद्रीय कार्यालय पहुँची। वहाँ हवन के बाद रोड शो शुरू किया गया। सोनिया का क़ाफ़िला रोड शो के दौरान रास्ता ही भटक गया था, इससे जाम लग गया। ऐन वक्त पर अधिकारियों ने स्थिति को संभाला।