उत्तर प्रदेश के अमेठी से BJP उम्मीदवार केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने डिग्री विवाद पर कॉन्ग्रेस के आरोपों पर पलटवार किया है। केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा कि कॉन्ग्रेस हमेशा ही उन्हें अपमानित करने का प्रयास करती रही है और महिला होने के कारण ऐसी कोई प्रताड़ना नहीं है, जो कॉन्ग्रेस ने उनके खिलाफ इस्तेमाल ना की हो। उन्होंने कहा कि इस तरह से कॉन्ग्रेस उन्हें रोक नहीं सकती।
#WATCH Union Minister Smriti Irani: In the last 5 years, they have attacked me in every which way possible. I only have one message for them, the more you will insult me, the more you will attack me, the harder I will work against Congress in Amethi. pic.twitter.com/ag3R9JV4yL
केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा, “मुझ पर हमला करना उनका अधिकार है, कॉन्ग्रेस के चेले-चपाटे चाहे जो भी कर लें, लेकिन वे मुझे नहीं रोक सकते हैं। जितना भी अपमानित करेंगे, मुझे उतनी ही ताकत मिलेगी कि मैं उनसे लड़ूँ। क्योंकि मैं कॉन्ग्रेस पार्टी के नामदार के खिलाफ लड़ रही हूँ, इसलिए उनसे यह सब देखा नहीं जा रहा है।”
पाकिस्तान की मुसीबत बढ़ने वाली है, साथ ही चीन पर दबाव भी उतनी ही तेजी से बढ़ाया जा रहा है। यह सब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जैश-ए-मुहम्मद सरगना मसूद अज़हर पर प्रतिबंध लगाने के भारत के प्रयासों का हिस्सा है। इसे भारतीय कूटनीति की विजय के रूप में देखा जा रहा है।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में मसूद अज़हर पर प्रतिबन्ध लगाने के लिए प्रस्ताव लाने वाले US, UK और फ्रांस ने चीन पर दबाव डाला है कि वह रेसोलुशन UNSC-1267 से तकनीकी रोक एक-दो सप्ताह में हटाए। यदि चीन ऐसा नहीं करता है तो चीन को मसूद अजहर पर प्रतिबन्ध लगाने के लिए काउंसिल में दूसरे प्रस्ताव का सामना करने के लिए तैयार रहने को कहा गया है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इस पूरे मामले पर एक विदेशी डिप्लोमेट ने कहा कि चीन को 23 अप्रैल तक का समय दिया गया है कि वह इस पर से रोक हटा ले नहीं तो 1267 को दरकिनार करते हुए एक नया प्रस्ताव लाया जाएगा। यह भी बताया जा रहा है कि ऐसा एक प्रस्ताव अनौपचारिक रूप से सभी 15 सदस्य देशों के बीच सर्कुलेट किया जा रहा है, इस आशय के साथ कि चीन इससे दबाव में आकर आतंकी सरगना मसूद अज़हर पर अपने स्टैंड पर पुनर्विचार करे।
हालाँकि, अभी तक ऐसे संकेत नहीं मिले हैं चीन होल्ड हटाने जा रहा है। बता दें कि मौजूदा हालात में चीन पर कई तरह से दबाव बनाया जा रहा है ताकि मसूद पर प्रस्ताव पारित करा कर उसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिबंधित किया जा सके। ऐसा करना ज़रूरी है तभी मसूद पर यात्रा प्रतिबन्ध के साथ उसकी संपत्तियों को सीज़ किया जा सकता है।
बता दें कि पुलवामा अटैक के बाद से एक बार फिर मसूद अज़हर पर प्रतिबन्ध के लिए अमेरिका और फ्रांस द्वारा प्रस्ताव लाया गया था। लेकिन चीन की धूर्तता की वजह से पाकिस्तान एक बार फिर मसूद को बचाने में कामयाब रहा। यह चौथी बार है जब चीन ने 1267 प्रस्ताव पर तकनीकी होल्ड लगाकर मसूद अज़हर पर प्रतिबन्ध लगाने में अड़चने पैदा की हैं।
हालाँकि, चीन के बार-बार होल्ड लगाने से तंग आकर अमेरिका अनौपचारिक रूप से प्रतिबन्ध के एक नए प्रस्ताव को सर्कुलेट कर रहा है। जिसमे यह प्रावधान है कि 1267 के बिना भी मसूद पर प्रतिबन्ध लगाया जा सकता है। अब देखना यह है कि भारत की कूटनीति कितने सफल होती है। क्या चीन 23 अप्रैल तक अपने होल्ड पर पुनर्विचार करता है? या अमेरिका, UK और फ्रांस सहित बाकि सदस्य देश नए प्रस्ताव के ज़रिए 1267 को बायपास करते हुए चीन के प्रतिरोध को धता बताते हुए मसूद पर प्रतिबन्ध लगाकर पाकिस्तान के मुँह पर एक और करारा तमाचा देते हैं।
भाजपा सांसद मीनाक्षी लेखी ने राफ़ेल डील मामले में कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी के बयान के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका दायर की है। ख़बर के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद राहुल गाँधी ने कोर्ट का नाम लेकर पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए टिप्पणी की थी, “सुप्रीम कोर्ट ने भी माना है कि चौकीदार चोर है।” इसी बयान को लेकर मीनाक्षी लेखी ने कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी के ख़िलाफ़ आपराधिक अवमानना याचिका दाखिल की है। सुप्रीम कोर्ट इस याचिका पर सुनवाई के लिए तैयार है, जिसकी सुनवाई 15 अप्रैल को होगी। इस मामले पर कॉन्ग्रेस की कड़ी निंदा करते हुए रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी आपत्ति दर्ज की।
जानकारी के अनुसार, केंद्र की आपत्तियों को ख़ारिज करते हुए राफेल पर सुप्रीम कोर्ट ने 10 अप्रैल को फैसला सुनाया था। इस फ़ैसले में न्यायालय ने तीन दस्तावेज़ों को साक्ष्य मानते हुए पुनर्विचार याचिका पर आगे सुनवाई करने की बात कही थी। लेकिन कोर्ट ने कहीं भी यह नहीं कहा था कि मोदी सरकार ने राफेल में कोई घोटाला किया या नरेंद्र मोदी दोषी हैं जबकि राहुल ने झूठ फ़ैलाने के लिए बयान दिया कि सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चौकीदार चोर है।
इसी बात को लेकर अपनी याचिका में सांसद मिनाक्षी लेखी ने आपत्ति जताई कि राहुल गाँधी ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश को ग़लत तरह से पेश किया और ‘चौकीदार चोर है’ बयान को इस तरह से प्रचारित-प्रसारित किया कि जैसे वो सुप्रीम कोर्ट का बयान हो। मीनाक्षी लेखी ने सुप्रीम कोर्ट से कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी के पीएम पद पर की गई टिप्पणी पर आपराधिक अवमानना के मामले के तहत कार्रवाई करने की याचिका दायर की। सुप्रीम कोर्ट में मीनाक्षी लेखी का प्रतिनिधित्व पूर्व अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने किया। आगामी सोमवार को मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की बेंच इस पर सुनवाई करेगी।
राहुल गाँधी ने प्रतिशोधात्मक रवैया अपनाते हुए शीर्ष अदालत के इस फ़ैसले के तुरंत बाद संवाददाताओं से कहा, “सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि चौकीदार ने चोरी की अनुमति दी है। सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार किया कि राफ़ेल सौदे में किसी तरह का भ्रष्टाचार हुआ था।” राफ़ेल डील पर कॉन्ग्रेस हमेशा से ही पीएम मोदी के ख़िलाफ़ हमलावर रुख़ अपनाती आई है। इस डील के लिए कॉन्ग्रेस अपने बयानों के माध्यम से पीएम मोदी को आए दिन चौकीदार चोर है जैसी आपत्तिजनक टिप्पणी करती आई है।
रूस ने पीएम मोदी को अपने सबसे बड़े सम्मान ऑर्डर ऑफ सेंट एंड्रयूज से नवाजा है। रूस और भारत के बीच संबंधों को बढ़ाने के लिए उन्हें यह सम्मान दिया गया है। यह रूस का सबसे बड़ा नागरिक सम्मान है।
#Breaking पीएम नरेंद्र मोदी को सर्वोच्च नागरिक सम्मान देगा रूस। दिल्ली स्थित रूसी दूतावास ने किया ऐलान।
मॉस्को ने शुक्रवार (अप्रैल 12, 2019) को प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी को दोनों देशों के बीच विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी को बढ़ावा देने के लिए और उनकी असाधारण सेवाओं के लिए। रूस के सर्वोच्च सम्मान ऑर्डर ऑफ सेंट एंड्रयू से सम्मानित किया।
रूसी सरकार के अनुसार, ऑर्डर ऑफ सेंट एंड्रयू द एपोस्टल की स्थापना 17 वीं शताब्दी में पीटर द ग्रेट ने 1699 के आस-पास की थी और यह रूस के राष्ट्रीय अलंकरण में सबसे पुराना है।
द ऑर्डर ऑफ सेंट एंड्रयू एपोस्टल रूस की सर्वोच्च और पुराना अलंकरण है। यह सम्मान 1918 में तत्कालीन सोवियत संघ में समाप्त कर दिया गया था और 1998 में इसे फिर से स्थापित किया गया था।
On April 12, @narendramodi was decorated with the Order of St Andrew the Apostle for exceptional services in promoting special & privileged strategic partnership between ?? and ?? and friendly relations between the Russian and Indian peoples.@mfa_russia@MEAIndia@IndEmbMoscowpic.twitter.com/jUFt5aawxw
मोदी सरकार पर तरह-तरह के आरोप लगाकर दिन की शुरुआत करने वाले मीडिया गिरोह और राजनीतिक दल लोकसभा चुनाव के पहले चरण के बाद भी अपने प्रोपेगेंडा में मशगूल हैं। आज सुबह से ही पूर्व सैनिकों द्वारा लिखित एक कथित चिट्ठी भी मीडिया एवं सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। एक एक ओर जहाँ चुनाव आयोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हर दूसरी गतिविधि को चुनावी स्टंट बताने वालों की शिकायत पर तुरंत प्रतिक्रिया दे देता है, वहीं दूसरी ओर इस प्रकार की ख़बरें अपना मकसद पूरा कर के चुपचाप दबा दी जाती हैं।
सरकार द्वारा सेना के राजनीतिकरण के विरोध में चिठ्ठी लिखने की है अफवाह
मीडिया में चल रही खबरों के अनुसार, तीनों सेनाओं के 8 पूर्व प्रमुखों सहित 150 से अधिक पूर्व सैन्य अधिकारियों ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को सेना के राजनीतिकरण के खिलाफ चिट्ठी लिखी है। इस चिट्ठी में यह शिकायत की गई है कि सत्ताधारी दल सर्जिकल स्ट्राइक जैसे सेना के ऑपरेशन का श्रेय ले रही है। साथ ही, सेना को मोदी जी की सेना के तौर पर बताया जा रहा है।
मोदी सरकार के विरोध में होने के कारण इस अफवाह को NDTV से लेकर जनसत्ता जैसे लगभग सभी प्रमुख मीडिया चैनल्स ने तत्परता से प्रकाशित किया है। इसमें दावा किया गया है कि चुनाव प्रचार के दौरान सेना और सैनिकों की वर्दी का इस्तेमाल करने पर कई सैन्य अधिकारियों ने नाराजगी जाहिर की है और पूर्व सेना प्रमुख एस एफ रोड्रिग्स और शंकर राय चौधरी समेत करीब 156 पूर्व सैनिकों ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को इसको लेकर चिट्ठी लिखी है। रिपोर्ट्स में बताया गया है कि इस चिट्ठी को लिखने वालों में आर्मी, नेवी और एयरफोर्स के पूर्व प्रमुख भी शामिल हैं। बताया जा रहा है कि पत्र राष्ट्रपति के साथ-साथ चुनाव आयोग को भी भेजा गया है।
क्या है सच्चाई?
इस खबर के वायरल होने के बाद राष्ट्रपति भवन ने खंडन करते हुए इस प्रकार के किसी भी पत्र के मिलने की खबरों से इंकार कर दिया है। राष्ट्रपति भवन ने स्पष्ट किया है कि तीनों सेनाओं के 8 पूर्व प्रमुखों सहित 150 से अधिक पूर्व सैन्य अधिकारियों द्वारा लिखी गई कोई चिट्ठी उन्हें नहीं मिली है, जो मीडिया में चल रहा है।
Rashtrapati Bhavan Source denies receiving any letter supposedly written by armed forces veterans to the President which is circulating in the media. pic.twitter.com/rOWedMumsk
राष्ट्रपति को भेजी गई चिठ्ठी पर जिन लोगों के हस्ताक्षर बताए गए हैं, उनमें पूर्व सेना प्रमुख जनरल (सेवानिवृत्त) एसएफ रोड्रिग्स, जनरल (सेवानिवृत्त) शंकर राय चौधरी और जनरल (सेवानिवृत्त) दीपक कपूर, भारतीय वायु सेना के पूर्व प्रमुख एयर चीफ मार्शल (सेवानिवृत्त) एन सी सूरी शामिल हैं। इसके अलावा पत्र लिखने वालों में 8 पूर्व चीफ आफ स्टॉफ के भी नाम हैं।
कॉन्ग्रेस और मीडिया गिरोहों द्वारा शेयर की जा रही फर्जी चिठ्ठी
जनरल एसएफ रोड्रिग्स ने बताया कि उनके नाम पर अफवाह फैलाई जा रही है
वहीं दूसरी ओर, पूर्व सैन्य अधिकारियों द्वारा राष्ट्रपति को लिखे गए पत्र में अपना नाम शामिल होने की खबर का जनरल एसएफ रोड्रिग्स ने खंडन किया है। उन्होंने कहा कि वो अराजनीतिक व्यक्ति, पता नहीं कौन यह झूठ फैला रहा है। उन्होंने बताया कि अपने जीवनभर वो राजनीति से दूर रहे हैं और सेवानिवृत्ति के 42 वर्ष बाद अपने निर्णय को बदलने के लिए बहुत देर हो चुकी है।
Gen SF Rodrigues: Don’t know what it(purported letter written by armed forces veterans to Pres)is all about.All my life,we’ve been apolitical.Aftr,42 yrs as officer,it’s a little late to change.Always put India first.Don’t know who these ppl are,classic manifestation of fake news pic.twitter.com/Cgpo57sVhq
इसके अलावा एयर चीफ मार्शल एनसी सूरी ने इस तरह के किसी भी खत को लिखने से इनकार किया है। न्यूज एजेंसी ANI से बातचीत में एयर चीफ मार्शल एनसी ने कहा है, “मैं उस पत्र में जो कुछ भी लिखा गया है, उससे सहमत नहीं हूँ।”
Air Chief Marshal NC Suri to ANI: This is not Admiral Ramdas’ letter (purported letter written by armed forces veterans to President) & it has been done by some Major Chaudhary. He has written this & it was coming on WhatsApp & emails. 1/2 pic.twitter.com/hWeg3apB4M
मोदी सरकार के दौरान पिछले 4-5 सालों में अक्सर देखा गया है कि कॉन्ग्रेस ने सरकारी संस्थाओं और पूर्व पदाधिकारियों को ढाल बनाकर जनता के सामने हर बार झूठे तथ्य पेश कर जनता को गुमराह करने के अथक प्रयास किए हैं। इस प्रोपेगैंडा के कारोबार में मीडिया गिरोहों ने भी इनका खूब साथ दिया है। हमने देखा है कि वास्तविक तथ्यों से परे, राफेल डील से लेकर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई तक पर मीडिया गिरोहों ने हर रोज सरकार और संस्थाओं को अपमानित करने का प्रयास कर उनका समय बर्बाद किया है।
पूर्व सैनिकों के नाम पर सरकार को के खिलाफ भड़काने जैसी झूठी अफवाहों पर क्या यही मीडिया गिरोह और कॉन्ग्रेस दल स्वीकार करेगा कि सेना का इस्तेमाल और सेना का राजनीतिकरण मोदी सरकार नहीं बल्कि वो स्वयं कर रहे हैं?
कॉन्ग्रेस से लेकर मीडिया गिरोहों ने इस कथित पत्र को सोशल मीडिया पर शेयर किया है।
INC COMMUNIQUE
Press statement by @priyankac19, Convenor- Communications and National Spokesperson, on the letter written to the President of India by veterans of Armed Forces. pic.twitter.com/bf8ecIltxK
ट्विटर यूजर्स ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि यह सत्ता और ताकत पाने के लिए की जाने वाली सबसे खतरनाक हरकतों में से एक है। कॉन्ग्रेस और राहुल गाँधी देश के लिए शर्मिंदगी से ज्यादा और कुछ नहीं हैं।
This is probably the most derogatory thing a party can do for power. Shame on you @INCIndia and @RahulGandhi. You people are disgrace to India.
Modi may try to use soldiers for votes, but it’s clear that soldiers stand with India and not the BJP. 156 Veterans of the Indian Armed Forces including 8 former Chiefs of Staff write to the President of India urging him to act against Modi for trying to use soldiers for votes. https://t.co/NHUVDH2BeY
हमारे देश में जब लोकसभा चुनाव का दौर आता है तो वो देश का हर नागरिक अपनी ज़िम्मेदारी निभाने की पूरी कोशिश करता है। हालात चाहे जो भी हों लेकिन लोकतंत्र के इस महापर्व में अपने कर्तव्य का पालन करना प्राथमिकता बन जाती है। दंतेवाड़ा के कुआकोंडा क्षेत्र में बीते मंगलवार (9 अप्रैल) की शाम को नक्सलियों द्वारा किए गए विस्फोट में भाजपा के विधायक भीमा मंडावी की मृत्यु हो गई थी और चार जवान वीरगति को प्राप्त हुए। इसके बाद बुधवार (10 अप्रैल) की शाम को उनके अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की गई।
विधायक की मृत्यु से पूरे परिवार में मातम पसरा हुआ था लेकिन उनकी अंत्येष्टि के अगले दिन ही यानि गुरुवार (11 अप्रैल) को दु:ख की इस घड़ी में भी परिजनों ने लोकतंत्र के प्रति अपने दायित्व से मुँह नहीं मोड़ा। मंडावी के परिवारवालों ने मतदान के लिए अपने क़दम आगे बढ़ाए। वोट डालकर परिजनों ने देश में यह संदेश पहुँचाने का काम किया कि हालात कुछ भी हों लेकिन देश सबसे पहले है। परिजनों ने अपने इस कर्तव्य को न सिर्फ़ निभाया बल्कि देश के सभी नागरिकों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बना।
भाजपा विधायक मांडवी के परिवार में की उनकी पत्नी ओजस्वी, उनकी माँ और परिवार के छह अन्य सदस्य 40 डिग्री की भीषण गर्मी में वोट डालने के लिए कतार में खड़े थे। मतदान के लिए अपनी बारी का इंतज़ार करने वाला यह पूरा परिवार देश की मज़बूती में अपना योगदान देने को तत्पर दिखा।
माओवादियों ने वहाँ की जनता को डराने के लिए विस्फोट किया और पूरा प्रयास किया कि क्षेत्र के लोग मतदान के लिए आगे न बढ़ें, ऐसे में विधायक के परिवार की हिम्मत की दाद देनी होगी। विधायक के पिता लिंगा मंडावी की आँखें डबडबाई हुई थी, उनकी पत्नी ओजस्वी का गला रुँधा हुआ था, फिर भी लोकतंत्र के इस पर्व में परिवार का शामिल होना देश के प्रति उनकी सच्ची आस्था को प्रकट करता है।
दंतेवाड़ा के दहशत भरे माहौल को बयाँ करते हुए एक महिला ने कहा कि लोकतंत्र का प्रचार करने वाले विधायक मांडवी को अपना जीवन खोना पड़ा, कम से कम हम मतदाताओं के रूप में अपने कर्तव्य को तो पूरा कर ही सकते हैं। जहाँ एक तरफ दंतेवाड़ा में मतदाताओं का यह हिम्मत भरा क़दम दिखा तो वहीं दूसरी तरफ छत्तीसगढ़ के बस्तर में माओवादियों का डर देखने के मिला। वहाँ लोगों ने मतदान तो किया, लेकिन मतदान के बाद ऊँगली पर लगे निशान को मिटाने का भी काम किया, जिससे यह पता न चल सके कि उन्होंने मतदान किया है।
बुलेट और बैलेट में से मतदान को चुनकर, बस्तर लोकसभा सीट के 57% से अधिक मतदाताओं ने माओवादियों की धमकियों से डरने की बजाए मतदान में अपना योगदान दिया। बस्तर के 11 लाख मतदाताओं में से छह लाख से अधिक महिलाएँ हैं। अपना वोट डालने के लिए अपनी बारी का इंतजार कर रही एक बुजुर्ग आदिवासी महिला ने कहा कि वह मांडवी की हत्या से आहत थी। पूरे क्षेत्र में माओवादी धमकियों के बावजूद, वह मतदान केंद्र पर गईं। उनका कहना था कि यदि हम वोट नहीं देंगे, तो हम अपनी सरकार को फिर से कैसे चुनेंगे? सरकार ने हमारे लिए और हमारे विकास के लिए बहुत कुछ किया है।
सुप्रीम कोर्ट ने यौन संबंधों को लेकर बड़ा फैसला दिया है। एक अहम फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि शादी का वादा करके किसी महिला से यौन संबंध बनाना और फिर उससे शादी न करना रेप माना जाएगा। कोर्ट ने कहा कि ऐसी स्थिति में यौन संबंध के लिए महिला की सहमति के कोई मायने नहीं हैं, क्योंकि यह धोखा देकर किया गया है। सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस एल नागेश्वर राव और एम आर शाह ने यह बड़ा फैसला दिया है।
जानकारी के मुताबिक, पीड़िता ने 21 जून 2013 को छत्तीसगढ़ के बिलासपुर के मालखरौदा में सरकारी अस्पताल के जूनियर डाक्टर के खिलाफ दुष्कर्म का केस दर्ज करवाया था। जूनियर डॉक्टर के साथ पीड़िता का 2009 से प्रेम प्रसंग चल रहा था। आरोपी डॉक्टर ने शादी का वादा कर लड़की से संबंध बनाया। इसके बाद उसने किसी और लड़की से शादी कर ली। निचली अदालत और हाई कोर्ट ने आरोपी को दुष्कर्म का दोषी ठहराते हुए 10 साल की सजा सुनाई थी। अब सुप्रीम काेर्ट ने भी उसकी याचिका खारिज कर दी है और 10 साल की सजा को घटाकर 7 साल कर दिया गया है।
अपने फैसले में दोनों जजों की बेंच ने कहा कि शादी का वादा करके जब युवक महिला के साथ यौन संबंध बनाता है और उससे शादी नहीं करता है, तो महिला की सहमति को स्वीकार नहीं किया जा सकता है, क्योंकि महिला इस भ्रम में होती है कि युवक उससे शादी करेगा। शादी के वादे की वजह से ही युवती ने इसके लिए सहमति दी। लिहाजा इसे महिला की सहमति नहीं माना जा सकता है। जस्टिस एल नागेश्वर राव और एम आर शाह की बेंच ने 9 अप्रैल को दिए फैसले में कहा कि युवती ने संबंध बनाने की सहमति इसलिए दी थी क्योंकि दाेषी ने उससे शादी का वादा किया था। मगर बाद में वह मुकर गया। उसने युवती के साथ धोखा किया।
जस्टिस शाह ने अपने फैसले में कहा कि इस तरह की घटनाएँ आजकल काफी बढ़ रही है। बलात्कार नैतिक और शारीरिक रूप से समाज में घृणित अपराध है। ये पीड़िता के शरीर, दिमाग और व्यक्तिगत गोपनीयता का शोषण है। कोर्ट ने फैसले में साफ किया कि जब कोई हत्यारा किसी की हत्या करता है, तो उसके शरीर को खत्म करता है, लेकिन बलात्कारी महिला की आत्मा को खत्म कर देता है।
पाकिस्तान में आज (अप्रैल 12, 2019) सुबह 7:35 पर एक बम धमाका हुआ है। मीडिया खबरों के मुताबिक इस हमले में 16 लोगों की मौत के अलावा 30 लोगों के घायल होने की खबरें है। घायल लोगों में पाक सेना के 4 जवान भी शामिल हैं।
ये हमला पाकिस्तान के भीड़भाड़ वाले इलाके क्वेटा की हजारगांजी सब्जी मंडी में हुआ है। अनुमान लगाया जा रहा है मंडी में भीड़ होने के कारण मरने वालों और घायलों की संख्या बढ़ सकती है। बता दें कि इस हमले में IED का इस्तेमाल किया गया हैं।
मीडियो रिपोर्टों के मुताबिक पाकिस्तान पुलिस के अधिकारी अब्दुल रज्जाक चीमा ने स्थानीय मीडिया को बताया कि यह बम धमाका आवासीय परिसर के करीब हुआ है। जहाँ हजारा समुदाय के लोग ज्यादा रहते थे। उनकी मानें तो इस हमले का मकसद हजारा समुदाय के अल्पसंख्यक शिया समुदाय को निशाना बनाना हो सकता है।
धमाके की सूचना मिलते ही पाक पुलिस, सेना, खुफिया एजेंसी के अधिकारी सभी जाँच में जुट गए हैं। अभी तक धमाके का कारण नहीं पता चल पाया है, लेकिन राहत और बचाव का कार्य शुरू हो चुका है। घायलों को करीबी अस्पताल में भर्ती किया गया है। साथ ही पूरे इलाके को सुरक्षा जाँच के मद्देनजर घेर लिया गया है।
जियो न्यूज के मुताबिक इस हमले में जान गँवाने वालों में से 7 मृतक हजारा समुदाय के अल्पसंख्यक शिया समुदाय है। बम धमाके के कारण वहाँ की बिल्डिंगों को भी नुकसान पहुँचा है।
हालाँकि, अभी तक किसी भी समूह ने हमले की जिम्मेदारी नहीं ली लेकिन सुन्नी चरमपंथियों के शामिल होने की आशंका है। चूँकि, कुछ दिनों पहले इ्न्होंने इस प्रकार के हमले की चेतावनी जारी किया था।
Pakistan’s bloodbath update: At least eight people have lost their lives in a bomb blast targeting Quetta’s Shia Hazaras. The blast hit the vegetable market in Hazarganji area. https://t.co/v5jP2gFYrD #Pakistan#Balochistan
बॉलीवुड अभिनेत्री ट्विंकल खन्ना ने भले ही फिल्मों में काम करना छोड़ दिया है, लेकिन वो सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं। ट्विंकल खन्ना अपने ह्यूमरस अंदाज के लिए बी-टाउन से लेकर फैंस के बीच काफी पॉपुलर हैं। वह अक्सर अपने परिवार की तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर करती रहती हैं। वे अपने ट्वीट्स को लेकर अक्सर सुर्खियों में बनी रहती हैं। वे कई सामाजिक मुद्दों पर खुलकर अपने विचार प्रकट करती हैं। अब ट्विंकल खन्ना ने अपने इंस्टाग्राम पर एक तस्वीर पोस्ट कर एक अजीबोगरीब ख्वाहिश जाहिर की है। उन्होंने अपनी एक ब्लैक एंड व्हाइट फोटो शेयर कर अपनी दिल की बात फैंस के साथ शेयर की है।
अभिनेत्री ने कैप्शन में लिखा, “उम्मीद करती हूँ कि मेरी यह नई तस्वीर आप सबको पसंद आएगी। यह बहुत दुर्लभ क्षण है,जब फोटोग्राफर ने उस पल को कैद किया है, जो मेरी आत्मा कहना चाहती है। मैं उम्मीद करती हूँ कि जब मैं मरूँगी तो इस तस्वीर को बड़े फैंसी फ्रेम में सजाया जाएगा और उसके चारो तरफ लोग फूलों की मालाएँ चढ़ाएँगे और मेरी प्रार्थना सभा में शामिल होंगे।” इस तस्वीर के पीछे लिखा हुआ नजर आ रहा है- डेंजर, कीप आउट।
इंस्टाग्राम पर ट्विंकल खन्ना द्वारा शेयर की गई फोटो
ट्विकंल खन्ना अक्सर ऐसी तस्वीरें साझा कर पति अक्षय कुमार का मजाक उड़ाया करती हैं। हाल ही में उन्होंने एक तस्वीर साझा की थी, जिसमें वे बोट चलाती नजर आ रही हैं और बगल में अक्षय कुमार बैठे हैं। फोटो के कैप्शन में उन्होंने लिखा था, ”एक ही पेज पर नहीं बल्कि अक्सर एक ही नाव में, भले ही मैं स्टीयरिंग व्हील पर हूं।”
गौरतलब है कि ट्विंकल खन्ना ने अक्षय कुमार से शादी के बाद एक्टिंग करियर को अलविदा कह दिया था। वे आखिरी बार फिल्म ‘लव के लिए साला कुछ भी करेगा’ में नजर आई थी। इन दिनों वे पूरी तरह से राइटर और प्रोड्यूसर के तौर पर काम कर रही हैं। ट्विंकल खन्ना अब तक तीन किताबें लिख चुकी हैं और नियमित तौर पर कॉलम लिखी रहती हैं। इस कॉलम का नाम ‘मिसेज फनीबोन्स’ है।
देश की 91 लोकसभा सीटों पर गुरुवार (अप्रैल 11, 2019) को मतदान का पहला चरण सम्पन्न हुआ। इस बीच एक तरफ जहाँ आंध्र प्रदेश के टीडीपी नेता की मौत के कारण सुर्खियाँ बनी, वहीं यूपी की 8 सीटों पर बुर्का पहनकर मतदान करने आई औरतों को लेकर विवाद हुआ।
मुज़फ्फरनगर : संजीव बालियान ने कहा, चेहरा ढंककर वोट देने आ रही महिलाओं का चेहरा चेक करने के लिए महिला अधिकारी यहाँ क्यों नहीं है? ऐसे कैसे वोट पड़ेंगे? #ElectionWithNews18pic.twitter.com/wL8gzLdHje
मुजफ्फरनगर में भाजपा सांसद संजीव बलियान जिनका मुकाबला इस बार आरएलडी प्रमुख अजीत सिंह से है, उन्होंने बुर्का पहनकर मतदान करने आई औरतों के चेहरे की जाँच नहीं किए जाने का मुद्दा उठाया है। यहाँ संजीव ने फर्जी मतदान का आरोप लगाते हुए कहा कि मतदान केंद्र में मतदाताओं के चेहरे की ठीक से जाँच नहीं की जा रही है। उन्होंने सवाल किया कि अगर ऐसा ही रहा तो एक मतदाता को बार-बार मतदान करने से कैसे रोका जाएगा।
Union Minister and Muzaffarnagar BJP candidate Dr. Sanjiv Balyan: Faces of women in burkhas are not being checked and I allege that fake voting is being done. If not looked into, I will demand a repoll pic.twitter.com/Gphlm2NoRx
संजीव का आरोप है कि 25-26 मतदान केंद्रों पर एक भी महिला कांस्टेबल को तैनात नहीं किया गया जो बुर्के वाली औरतों के चेहरे की जाँच कर सकें। उनका कहना है कि गाँव में एक भी महिला कॉन्स्टेबल की ड्यूटी नहीं लगी थी।
मुजफ्फरनगर के भाजपा प्रत्याशी संजीव बलियान ने बुर्के की आड़ में फर्जी वोटिंग का आरोप लगाया.#LokSabhaElections2019
संजीव ने अपना मत रखते हुए कहा कि अगर किसी प्रत्याशी को अपने मजहब के कारण चेहरा दिखाने में आपत्ति है तो बेहतर है वो मतदान करने न आए। इतना ही नहीं उनका कहना है कि मतदान केंद्र में कुछ महिलाओं को मतदाता सूची पर बिना हस्ताक्षर किए ही मतदान देने की अनुमति दी गई है। वहीं कैराना से सांसद और गठबंधन की उम्मीदवार तबस्सुम हसन ने बलियान पर पलटवार करते हुए कहा है कि बलियान बुर्के पर सवाल नहीं उठा सकते क्योंकि जब भी जरूरत पड़ती है बुर्का हटाकर चेहरे की जाँच की जाती है।
@abpnewshindi संजीव बलियान का बिल्कुल सही है बुर्का पहनने से कोई दिक्कत नही पर वोट डालते वक्त ID से चेहरे का मिलान बहुत जरूरी है नही तो ऐसे ही फर्जी वोट पड़ेगे
वैसे भी दिक्कत उन्हें है जो फर्जी होगा, जो फर्जी नही उन्हे क्या दिक्कत है
आपको बता दें संजीव बलियान के इस आरोप पर विपक्ष ने जमकर निशाना साधा है और साथ ही उन्हें अपने दिमाग का इलाज करवाने की सलाह तक दी है। ऐसे में सोशल मीडिया पर कुछ यूजर्स संजीव के समर्थन में ऐसी तस्वीरों को साझा कर रहे हैं, जिनमें एक लड़का बुर्के में नज़र आ रहा है। जिसके मद्देनज़र सवाल बना हुआ है कि आखिर सच्चाई क्या है?
@abpnewshindi संजीव बलियान का बिल्कुल सही है बुर्का पहनने से कोई दिक्कत नही पर वोट डालते वक्त ID से चेहरे का मिलान बहुत जरूरी है नही तो ऐसे ही फर्जी वोट पड़ेगे
वैसे भी दिक्कत उन्हें है जो फर्जी होगा, जो फर्जी नही उन्हे क्या दिक्कत है