लिबरलों के चहेते कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो को अपनी बनाई ‘लिबरल’ नीतियाँ भारी पड़ रही हैं। दरअसल, ट्रूडो ने अपना कार्यकाल संभालने के साथ ही कनाडा में अप्रावासियों के लिए दरवाजे खोल दिए थे और अपने कदम को वह कनाडा के विकास से जोड़कर बताते दिखते थे। हालाँकि अब उन्हें अपने ही फैसले के परिणाम दिखने लगे और अब उन्होंने अप्रवासियों को देश में स्थायी नागरिकता देने पर रोक लगाई है।
उन्होंने 24 अक्तूबर को एक ट्वीट किया और बताया, “हम अगले दो वर्षों के लिए कनाडा आने वाले अप्रवासियों की संख्या में उल्लेखनीय कमी करने जा रहे हैं। यह अस्थायी है – हमारी जनसंख्या वृद्धि को रोकने और हमारी अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए। हमें सभी कनाडाई लोगों के लिए सिस्टम को सही तरीके से काम करना होगा।”
We’re going to significantly reduce the number of immigrants coming to Canada for the next two years. This is temporary — to pause our population growth and let our economy catch up.
We have to get the system working right for all Canadians.
ट्रुडो का यह निर्णय 2025 से 2027 तक लागू होगा और इसका उद्देश्य जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित करना और अर्थव्यवस्था को स्थिर करना है। ट्रूडो ने घोषणा की कि 2025 में कनाडा केवल 395,000 नए स्थायी निवासियों को स्वीकार करेगा, जबकि पहले यह संख्या 500,000 निर्धारित की गई थी। इसके बाद, 2026 में यह संख्या घटकर 380,000 और 2027 में 365,000 हो जाएगी। इस प्रकार, कनाडा की सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह अगले कुछ वर्षों में अप्रवासियों की संख्या को कम करने जा रही है।
मालूम हो कि 2015 में सत्ता में आने के बाद ट्रुडो ने अप्रवासियों का दिल खोल स्वागत किया था। उन्होंने 2017 में कहा था कि ‘उत्पीड़न, आतंक और युद्ध से भाग रहे लोगों के लिए कनाडा के दरवाजे खुले हैं’। आप चाहे किसी भी धर्म के हों। आपका यहाँ स्वागत है।
अपने ट्वीट में उन्होंने विविधता को अपनी ताकत बताया था और इस तरह उन्होंने 2016 से 2021 के बीच में 13 लाख से ज्यादा लोगों को अपने देश में प्रवेश दिया था। अकेले 2022 में इनकी संख्या 405000 से ज्यादा ती। हालाँकि अब उनकी यही उदारता उन्हें महंगी पड़ रही है।
कनाडा इस समय आर्थिक मंदी के दौर से गुजर रहा है। वहाँ बढ़ती बेरोजगारी, बढ़ती आवास कीमतों औ जीवनयापन की बुनियादी जरूरतों की चीजें महंगी होने के कारण स्थिति और भी बद्तर हो गई है। नागरिक ट्रुडो की नीति का विरोध करते है यही वजह है कि उन्हें अपनी इस नीति से पीछे हटना पड़ा। आपको जानकारी हैरानी होगी कि 2021 की जनगणना के अनुसार, विदेश में जन्मे अप्रवासी कनाडा की आबादी का 23% (8.36 मिलियन) हिस्सा हैं ।
उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में स्थित एक प्रतिष्ठित सरकारी पुस्तकालय के एक मुस्लिम कर्मचारी आसिफ हसन पर आरोप लगे हैं कि वह इस्लामी साहित्य के माध्यम से हिंदू छात्राओं का ब्रेनवॉश करता है और उन्हें मुस्लिम लड़कों से दोस्ती करने के लिए उकसाता है। यह घटना शहर में चर्चा का विषय बन गई है, और इसे लेकर छात्र-छात्राओं एवं उनके परिजनों में गहरी नाराजगी है। इस मामले में जिलाधिकारी के आदेशानुसार जाँच शुरू कर दी गई है।
छात्राओं को इस्लामी लिटरेचर पढ़ने के लिए प्रेरित करने का आरोप
मिली जानकारी के अनुसार, पुस्तकालय में कार्यरत मुस्लिम कर्मचारी आसिफ हसन पर आरोप है कि वह विशेष रूप से हिंदू छात्राओं को इस्लामी साहित्य का अध्ययन करने के लिए प्रेरित करता है। शिकायतकर्ता छात्रों के मुताबिक, आसिफ हसन की विचारधारा इस्लामिक कट्टरपंथ से प्रभावित है। इस कारण से वह पुस्तकालय के भीतर विभिन्न तरीकों से हिंदू छात्राओं को मुस्लिम लड़कों के संपर्क में आने के लिए प्रेरित करता है।
पुस्तकालय के भीतर और बाहर ‘सुरक्षित’ स्थान देने का आरोप
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह कर्मचारी न केवल हिंदू छात्राओं को मुस्लिम छात्रों के साथ बैठने के लिए प्रेरित करता है, बल्कि उन्हें पुस्तकालय के अंदर और बाहर ‘सुरक्षित’ स्थान भी उपलब्ध कराता है, जहां वे बिना किसी झिझक के बैठ सकें। इससे पुस्तकालय में छात्राओं और अन्य छात्रों के बीच हंगामा भी हुआ, जिसके बाद कुछ छात्रों ने गोपनीय रूप से जिला प्रशासन से शिकायत दर्ज करवाई।
जिलाधिकारी ने दिए जाँच के आदेश
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुरादाबाद के जिलाधिकारी अनुज सिंह ने तत्काल प्रभाव से इस आरोप की जाँच के आदेश दिए हैं। उन्होंने मुरादाबाद के एसएसपी और जेडी एजुकेशन को निर्देश दिया कि पुस्तकालय में किसी भी प्रकार की असामान्य गतिविधियों की जाँच कर ठोस कार्रवाई की जाए। अधिकारियों का कहना है कि मामले को लेकर प्राथमिक जाँच चल रही है और दोष सिद्ध होने पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।
छह माह पहले भी उठा था मामला
छह माह पहले भी छात्रों ने इसी कर्मचारी के खिलाफ जिला प्रशासन से शिकायत की थी। इसके बाद उक्त कर्मचारी ने लंबी छुट्टी ले ली थी और पुस्तकालय में एक महिला कर्मचारी की तैनाती की गई थी। अधिकारियों का मानना है कि महिला कर्मचारी की मौजूदगी से ऐसी गतिविधियों पर कुछ हद तक रोक लगी थी, लेकिन हाल के आरोपों ने फिर से इस मामले को गर्म कर दिया है।
जिलाधिकारी ने कहा है कि इस मामले की जाँच जिला विद्यालय निरीक्षक को सौंपी गई है, साथ ही वरीय अधिकारियों को भी सूचित कर दिया गया है। जेडी माध्यमिक शिक्षा के अधिकारी मनोज कुमार द्विवेदी ने बताया कि शिकायतकर्ताओं से संपर्क कर उनकी बात सुनी जा रही है, और सभी तथ्यों की जाँच की जा रही है। जल्द ही जाँच रिपोर्ट पेश की जाएगी, जिसके आधार पर सख्त कदम उठाए जाएँगे।
देश के विभिन्न हिस्सों में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी और रोहिंग्या मुस्लिमों की धर-पकड़ जारी है। अब गुजरात के अहमदाबाद में अवैध रूप से रह रहे 50 बांग्लादेशी नागरिकों की पहचान करके उन्हें हिरासत में लिया गया है। इसके अलावा, गुजरात की क्राइम ब्रांच घुसपैठियों की पहचान के लिए सैकड़ों लोगों से अभी पूछताछ कर रही है। इससे पहले पुणे और त्रिपुरा से भी अवैध बांग्लादेशी पकड़े गए थे।
अहमदाबाद से पकड़ाए अवैध बांग्लादेशियों को लेकर गुजरात पुलिस के क्राइम ब्रांच के डीसीपी अजीत राजियान ने जानकारी दी है। उन्होंने बताया, “हम अवैध रूप से रहने वाले लोगों के खिलाफ लगातार कार्रवाई कर रहे हैं। इसके साथ ही 200 से ज्यादा लोगों से पूछताछ की जा रही है।” रिपोर्ट के मुताबिक, ये सभी फर्जी आधार कार्ड बनाने, वेश्यावृत्ति और कई अन्य अवैध गतिविधियों में शामिल थे।
महाराष्ट्र की पुणे पुलिस ने भी खुफिया सूचना के आधार पर रजनगाँव में 21 अक्टूबर 2024 को सर्च ऑपरेशन चलाकर 21 बांग्लादेशियों को गिरफ्तार किया था। पुलिस अधीक्षक पंकज देशमुख ने कहा था, “उनमें से नौ के पास फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड थे और उनमें से एक के पास वोटर आईडी कार्ड भी था। बांग्लादेशी नागरिक के पास वोटर आईडी कार्ड था, उसने इसे गुजरात से हासिल किया था।”
एसपी ने कहा कि ये सभी या तो पैदल चलकर सीमा पार करते हुए पश्चिम बंगाल में यहाँ आए या फिर नावों से समुद्री मार्ग से अवैध रूप से यहाँ पहुँचे। उन्होंने कहा, “इनमें से कुछ के बच्चे भी हैं, जिनकी उम्र तीन साल से पाँच साल के बीच है। भारत में घुसने के बाद ये गुजरात और मुंबई चले गए। कुछ दिन पहले ये पुणे आए हैं।” उन्होंने कहा कि जाँच चल रही है और 2-3 दिन में यह बात स्पष्ट हो जाएगी।
जिन लोगों को पुलिस ने पकड़ा है, उनके नाम हैं- अजमुल शरत खान उर्फ हासिफ खान (50), मोहम्मद अकबर अजीज अकबर सरदार (32), शफीकुल अलीमिया शेख (20), हुसैन मुखिद शेख (30), तारिकुल अतियार शेख (38), मोहम्मद उमर फारूक बाबू उर्फ बाबू बुख्तियार शेख (32), शाहीन शहजान ( 44), मोहम्मद हुसैन शेख (32), रऊफ अकबर दफादार (35), इब्राहिम काजोल शेख (35)।
इनके अलावा फरीद अब्बास शेख (48), मोहम्मद सद्दाम अब्दुल सखावती (35), मोहम्मद अब्दुल हबीब रहमान सरदार (32), आलिमिया तोहकील शेख (60), मोहम्मद इसराइल फकीर (35), फ़िरोज़ा मुताक़ीन शेख़ (20), लिपिया हसमुख मुल्ला (32), सलमा मलिक रोशन मलिक (23), हिना मुल्ला जुल्फिकार मुल्ला (40), सोनदीप उर्फ काजोल बासुदीप विशेष (30) और येनूर शाहदता मुल्ला (25) भी पकड़ाए हैं।
एसपी पंकज देशमुख ने कहा था, “हम पता लगा रहे हैं कि वे कितने समय से भारत में हैं। प्रारंभिक जाँच से पता चलता है कि वे 6 महीने से लेकर 10 साल से ये देश में रहे हैं। हम पता लगा रहे हैं कि इस देश में रहने का उनका मकसद क्या है। उनमें से कई लोग श्रम गतिविधि में लिप्त हैं और उन्हें मजदूरी कर रहे हैं। इसलिए, उनकी वास्तविक स्थिति पर टिप्पणी करना अभी बहुत प्रारंभिक है।”
उन्होंने आगे कहा, “हमने उनके पास से मतदाता पहचान पत्र, पैन कार्ड और आधार कार्ड जैसे दस्तावेज जब्त किए हैं। इसके अलावा, कई लोगों के पास से अवैध रूप से रह रहे लोगों के बारे में भी जानकारी मिली है। हम इस पहलू की भी जाँच कर रहे हैं कि क्या कोई संगठित रैकेट या एजेंट है, जो बांग्लादेशी नागरिकों को हमारे देश में लाकर स्थापित कर रहा है।”
इसी तरह, त्रिपुरा की राजधानी अगरतला रेलवे स्टेशन पर सुरक्षा एजेंसियों ने 22 अक्टूबर 2024 की सुबह तीन रोहिंग्या मुस्लिम और दो बांग्लादेशी नागरिकों को हिरासत में लिया। राजकीय रेलवे पुलिस (GRP) के प्रभारी अधिकारी तपस दास ने कहा कि उन्हें सूचना मिली कि कुछ रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिक त्रिपुरा से बाहर जाने के लिए अगरतला रेलवे स्टेशन पर आएँगे।
तपस दास ने आगे बताया कि पूछताछ में पता चला कि रोहिंग्या नागरिक हैदराबाद जाने वाले थे, जबकि बांग्लादेशी नागरिक मुंबई जाने की योजना बना रहे थे। उन्होंने कहा, “हमने उनके पास से बांग्लादेशी मुद्रा, दस्तावेज और कुछ मोबाइल फोन जब्त किए हैं। हम उन्हें अदालत में पेश करके आगे की पूछताछ के लिए पुलिस रिमांड माँगेंगे।”
बता दें कि पश्चिम बंगाल में भारत-बांग्लादेश सीमा पर मानव तस्करों का एक बड़ा गिरोह काम कर रहा है, जो सिर्फ चार हजार रुपए में बांग्लादेश की सीमा से ऐसे लोगों को भारत में घुसपैठ कराता है। घुसपैठ करने वालों में बांग्लादेशी के साथ-साथ रोहिंग्या मुस्लिम भी शामिल हैं। इसके बाद घुसपैठियों को फर्जी पहचान देकर जम्मू-कश्मीर, महाराष्ट्र, गुजरात, दिल्ली सहित देश के विभिन्न हिस्सों में बसाया जाता है।
उत्तर प्रदेश पुलिस ने गाज़ियाबाद के एक कैफे में चल रहे डेटिंग ऐप स्कैम का खुलासा किया है, जिसमें लोगों को डेटिंग ऐप के जरिए बुलाकर उन्हें ठगने का आरोप है। पुलिस ने गुरुवार (24 अक्टूबर 2024 ) को कौशाम्बी मेट्रो स्टेशन के पास स्थित ‘टाइगर कैफे’ में छापा मारकर आठ लोगों को गिरफ्तार किया, जिनमें पाँच महिलाएँ, एक मैनेजर और दो कैफे मालिक शामिल हैं। इस स्कैम का मुख्य सरगना साहिबाबाद का रहने वाला खालिद उर्फ इमरान बताया जा रहा है, जिसमें उसके साथी सुमित और नदीम (दिल्ली निवासी) भी शामिल हैं।
गाजियाबाद पुलिस ने एक्स पर इसकी सूचना देते हुए लिखा, “थाना कौशाम्बी पुलिस टीम द्वारा डेटिंग एप के माध्यम से लड़कियों से मिलने के नाम पर कैफे में बुलाकर खाने के सामान पर मूल्य से अधिक बिल लगाने व बिल न देने पर बन्धक बनाकर पैसे मांगने में वाँछित 03 अभियुक्त व 05 अभियुक्ता गिरफ्तार।”
थाना कौशाम्बी पुलिस टीम द्वारा डेटिंग एप के माध्यम से लड़कियों से मिलने के नाम पर कैफे में बुलाकर खाने के सामान पर मूल्य से अधिक बिल लगाने व बिल न देने पर बन्धक बनाकर पैसे मांगने में वाँछित 03 अभियुक्त व 05 अभियुक्ता गिरफ्तार ।@Uppolicepic.twitter.com/wD5I3zMAA3
— POLICE COMMISSIONERATE GHAZIABAD (@ghaziabadpolice) October 24, 2024
पुलिस ने बताया कि ये लोग डेटिंग ऐप के माध्यम से पीड़ितों को ‘लड़कियों से मिलने’ के बहाने कैफे बुलाते थे और फिर खाने-पीने के सामान का बढ़ा-चढ़ाकर बिल थमाते थे। पीड़ित द्वारा बिल का भुगतान न करने पर उसे बंधक बनाकर और ज्यादा पैसों की वसूली के लिए धमकाते थे।
दिल्ली के निवासी विकास गुप्ता ने 21 अक्टूबर को एक लड़की से मुलाकात की। डेट के दौरान कैफे में सिर्फ एक सॉफ्ट ड्रिंक ऑर्डर किया गया, लेकिन कैफे से निकलने के समय 16,000 रुपए का बिल थमा दिया गया। जब गुप्ता ने बिल देने से इंकार किया, तो उन्हें बंधक बनाकर 50,000 रुपए की माँग की गई।
गुप्ता के दोस्त की सूचना पर पुलिस ने मौके पर पहुँचकर उन्हें छुड़ाया। इस दौरान स्कैमर्स ने गुप्ता की जेब से 4500 रुपए निकाल लिए थे और ऑनलाइन 2000 रुपए का भुगतान भी करवाया। पुलिस ने 23 अक्टूबर को एफआईआर दर्ज कर तीन युवकों और पाँच महिलाओं को गिरफ्तार किया।
दिल्ली स्थित जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय ने वाल्मीकि जयंती मनाने वाले सफाई कर्मचारियों को परिसर में घुसने से रोक दिया। इससे विवाद गहरा गया है। इससे पहले विश्वविद्यालय प्रशासन ने हिंदू विद्यार्थियों को दीवाली मनाने से रोक दिया था। इसके बाद पुलिस ने बुधवार (23 अक्टूबर 2024) को करीब आधा दर्ज छात्रों को हिरासत में लिया था।
दरअसल, बुधवार (23 अक्टूबर 2024) की सुबह सफाई कर्मचारी वाल्मीकि जयंती मनाने जा रहे थे, लेकिन यूनिवर्सिटी के गार्ड ने उन्हें अंदर नहीं जाने दिया। उन्होंने बताया कि महर्षि वाल्मीकि जयंती पिछले 6 साल से विश्वविद्यालय परिसर में मनाई जा रही है, लेकिन इस बार इजाजत नहीं दी गई। उन्होंने पूछा कि इस बार विश्वविद्यालय प्रशासन ने ऐसा क्यों किया।
सफाई कर्मचारियों का कहना है कि कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति विश्वविद्यालय प्रशासन और दिल्ली पुलिस से ली गई थी। सफाई कर्मचारी जब महर्षि वाल्मीकि की प्रतिमा लेकर विश्वविद्यालय परिसर में जाने लगे तो गेट पर गार्ड ने उन्हें रोक दिया। सफाई कर्मियों का आरोप है कि उनसे कहा गया कि मूर्ति यूनिवर्सिटी के अंदर ले जाने की इजाजत नहीं है।
दूसरी तरफ, विश्वविद्यालय के गार्ड ने कहा कि मूर्ति काफी बड़ी थी। इस वजह से वह परिसर में नहीं जा सकती थी। इसके बाद सरिता विहार से भाजपा पार्षद के पति मनीष चौधरी ने जामिया यूनिवर्सिटी पहुँचकर उसके मुख्य गेट के सामने महर्षि वाल्मीकि की मूर्ति की पूजा की और जयंती मनाई। इस दौरान जामिया यूनिवर्सिटी के सफाई कर्मी भी मौजूद रहे।
This happens when a Central Govt funded institute falls in a "Muslim Area"
On October 23, the Bharatiya Valmiki Samaj organised the 'Valmiki Prakatotsav Diwas'. They had permission to hold the event on campus; however, when the organisers… pic.twitter.com/g5EQVa3bRI
एक सफाई कर्मचारी ने रिपब्लिक भारत को बताया, “गार्ड ने कहा कि विश्वविद्यालय परिसर में मूर्ति में ला सकते। फोटो लेकर आओ और जयंती मनाओ।” उस व्यक्ति ने कहा कि उसने हर जरूरी विभाग से इस आयोजन के लिए अनुमति ले रखी थी। इसके बावजूद उन्हें अंदर नहीं जाने दिया गया। वहीं, एक अन्य व्यक्ति ने कहा कि रजिस्ट्रार नसीम हैदर ने मना किया था कि मूर्ति नहीं जाएगी।
उस व्यक्ति ने गाली देने का भी आरोप लगाया। उस व्यक्ति ने कहा, “जब हम वाल्मीकि के रूप में उनके (विश्वविद्यालय के अधिकारियों) घर जाकर काम करें, तब तो कई दिक्कत नहीं है। जीते-जागते आदमी से उन्हें दिक्कत नहीं है, लेकिन एक मूर्ति से उन्हें दिक्कत है।” वाल्मीकि समाज के लोगों ने कहा कि यह पूजा सिर्फ एक घंटे के लिए होना था, फिर भी उन्हें रोक दिया गया।
विश्वविद्यालय में ऐडहॉक के तौर पर काम करने वाले राजेश वाल्मीकि ने न्यूज नेशन को बताया कि विश्वविद्यालय में उनके समाज के करीब 200-250 कर्मचारी हैं। उन्होंने बताया कि वे जामिया में लगभग 20 साल से काम कर रहे हैं। राजेश का कहना है कि परिसर में काम करने वाले वे तीसरी पीढ़ी के लोग हैं, फिर भी गेट पर एक व्यक्ति ने उनसे आई कार्ड दिखाने की माँग की।
वाल्मीकि समाज के लोगों ने कहा कि उनकी मूर्ति को बाहर रखवा करके उनकी आस्था पर चोट की गई है। उन्होंने कहा कि इस तरह का बर्ताव उनके साथ पहले कभी नहीं किया गया था। पिछले 6 साल में यह पहली बार है, जब उनकी आस्था को चोट पहुँचाई गई। विश्वविद्यालय प्रशासन के इस कट्टरपंथी रूख से वाल्मीकि समाज के लोग काफी आक्रोशित नजर आए।
ST-SC समाज के लोगों के साथ यहाँ होता है भेदभाव
ये पहली बार नहीं है कि दलित समाज के इन सफाई कर्मियों के साथ जामिया विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस तरह का दुर्व्यवहार किया है। इससे पहले जामिया के प्रोफेसर एवं तत्कालीन रजिस्ट्रार नाज़िम हुसैन अल जाफ़री, तत्कालीन डिप्टी रजिस्ट्रार (अब रजिस्ट्रार) मोहम्मद नसीम हैदर और प्रोफेसर शाहिद तसलीम के खिलाफ़ दलित कर्मचारी को जातिसूचक गाली देने पर एससी/एसटी एक्ट में दर्ज किया गया था।
जुलाई 2024 में एक मीटिंग के दौरान अल जाफरी ने सहायक रामनिवास सेकहा था, “तुम निचली जाति के हो, तुम भंगी हो और तुम्हें ऐसे ही रहना चाहिए। तुम्हारे जैसे लोगों को आरक्षण के आधार पर नौकरी मिलती है, लेकिन फिर भी उन्हें अपनी जगह का पता नहीं होता। यह मत भूलो कि जामिया एक मुस्लिम विश्वविद्यालय है और तुम्हारी नौकरी हमारी दया पर निर्भर है।”
रामनिवास ने तत्कालीन रजिस्ट्रार नाजिम हुसैन अल जाफरी पर इस्लाम में धर्मांतरण करने का दबाव डालने का भी आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था, डॉक्टर नाजिम हुसैन अल जाफरी ने मुझसे कहा था- ईमान ले आओ, सब ठीक कर दूँगा। तेरे बच्चों का भी करियर बना दूंगा। क्या पाखंड में घुसा है।” यहाँ ईमान लाने से मतलब मुस्लिम बनने से है। इस तरह उन्होंने हिंदू धर्म को पाखंडी बता दिया था।
इसी तरह दलित समाज से आने वाले हरेंद्र कुमार जामिया यूनिवर्सिटी के अधीन आने वाली जामिया मिडिल स्कूल में गेस्ट टीचर थे। उन्होंने आरोप लगाया था कि दलित होने की वजह से स्कूल के हेडमास्टर मोहम्मद मुर्सलीन उन्हें हमेशा अपमानित और प्रताड़ित करते रहते थे। इसके बाद साल 2018 में उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया।
जामिया के नए VC मजहर आसिफ पर भी दलित महिला को प्रताड़ित करने का आरोप
जामिया मिलिया इस्लामिया के नए कुलपति के रूप में प्रोफेसर मज़हर आसिफ को नियुक्त किया गया है। इससे पहले वे जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में प्रोफेसर के पद पर नियुक्त थे। आसिफ पर अनुसूचित जनजाति (ST) समुदाय की महिला कर्मचारी रीना के साथ क्रूर जातिगत भेदभाव और उत्पीड़न का आरोप है। इस मामले की दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई भी हुई।
मज़हर आसिफ़ को जामिया नया कुलपति बनाए जाने से आहत होकर महिला कर्मचारी रीना ने 14 अक्टूबर 2024 को विरोध में एक पत्र लिखा। उन्होंने कहा कि आसिफ पर जातिवादी रवैया अपनाकर एक महिला का करियर तबाह करने का आरोप है। ऐसे लोगों को कुलपति नहीं बनाया जाना चाहिए।
दरअसल, 2019-2020 के दौरान JNU में Associate Dean के रूप में मज़हर आसिफ़ ने ST समाज की रीना के करियर को तबाह करने की कोशिश की थी। आरोप है कि आसिफ़ ने रीना को जानबूझकर कम ग्रेड दिए, उनकी पदोन्नति को अवरुद्ध किया और उनकी जगह अयोग्य जूनियर उम्मीदवारों को तरजीह दी।
इसके बाद रीना ने दिल्ली हाई कोर्ट और राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग का दरवाजा खटखटाया। उनकी शिकायत के बाद उनके प्रदर्शन के मूल्यांकन की स्वतंत्र रूप से समीक्षा की गई। पहले उन्हें सिर्फ 5.5 ग्रेड दिए गए थे। स्वतंत्र समीक्षा के बाद यह ग्रेड बढ़कर 8.66 हो गया। इस तरह प्रोफेसर मज़हर आसिफ़ पर रीना के लगाए आरोप हद तक सही साबित हुए।
दीवाली मनाने पर भी किया गया था बवाल
इससे पहले 22 अक्टूबर 2024 की रात को जामिया में दीपोत्सव मना रहे छात्रों के साथ बुरा बर्ताव किया गया था। उनकी बनाई रंगोली को मिटा दिया गया था और दीपों को तोड़ दिया गया था। इस्लामी कट्टरपंथियों वाली सोच रखने वाले मुस्लिम छात्रों के एक गुट ने ‘अल्लाह-हू-अकबर’ और ‘नारा-ए-तकबीर’ के नारे लगाकर माहौल बिगाड़ दिया था।
पैरों से दीये तोड़ने और रंगोलियों को मिटाने के बाद दोनों गुटों में झड़प हो गई थी। बताया जा रहा था कि इस झड़प में कई लोग घायल भी हो गए थे और उन्हें अस्पताल ले जाया गया था। इसके बाद अगले दिन यानी 23 अक्टूबर को हिंदू छात्र दोबारा से दीवाली मनाने के लिए इकट्ठा हुए, लेकिन पुलिस ने उन्हें गेट पर ही रोक दिया था और कुछ छात्रों को हिरासत में ले लिया था।
दरअसल, यह पहली बार नहीं है कि विश्वविद्यालय का इस तरह का कट्टरपंथी रूख सामने आया है। वाल्मीकि जयंती मनाने से रोकने और दीपवाली पर दीये तोड़ने एवं रंगोली मिटाने से पहले भी जामिया का कट्टरपंथी सोच सामने आ चुका है। यहाँ CAA और NRC के विरोध में व्यापक विरोध प्रदर्शन किए गए थे। दिल्ली दंगों में यहाँ के कई कट्टरपंथी छात्रों का भी नाम आया था।
जम्मू-कश्मीर के गुलमर्ग क्षेत्र में सेना के काफिले पर आतंकवादी हमले की खबर है। घटना 24 अक्टूबर 2024 को घटी। इस दौरान आतंकवादियों ने बोटापथरी के नागिन पोस्ट के पास सेना के वाहनों पर अंधाधुंध फायरिंग की। हमले में दो सैनिक बलिदान हो गए और दो स्थानीय नागरिक भी मारे गए। इसके अलावा, हमले में तीन अन्य सैनिकों के घायल होने की भी जानकारी सामने आई है।
VIDEO | Jammu and Kashmir: Security arrangements have been beefed up at the main market in Tangmarg following the attack on an Indian army vehicle in Gulmarg on Thursday evening, which left two soldiers and two local porters dead.
बताया जा रहा है कि जिस समय सेना का वाहन बोटापथरी इलाके से नागिन चौकी की ओर जा रहा था उसी वक्त ये हमला किया गया। आतंकवादियों ने अचानक से सेना के वाहनों पर गोलीबारी शुरू कर दी, जिससे चालक ने संतुलन खो दिया और वाहन गहरी खाई में गिर गया। इस हमले की सूचना होने पर अन्य सुरक्षाबलों ने पूरे इलाके को घेर लिया और हमलावरों को पकड़ने के लिए सर्च ऑपरेशन शुरू किया।
बता दें कि जम्मू-कश्मीर में हुआ यह हमला पिछले आठ दिनों में जम्मू-कश्मीर में चौथा आतंकवादी हमला है। इससे पहले 20 अक्टूबर को जेड-मोड़ सुरंग के स्टाफ क्वार्टर पर एक बड़ा हमला हुआ था, जिसमें सात लोग मारे गए थे और पाँच घायल हुए थे। इस हमले की जिम्मेदारी लश्कर-ए-तैयबा के ऑफ़शूट टीआरएफ ने ली थी।
इसके अलावा यदि पिछले 10 दिनों की खबरें देखें तो पता चलेगा कि राज्य में उनर अब्दुल्लाह की सरकार बनने के बाद गैर-कश्मीरी मजदूरों पर हमले फिर शुरू हो गए हैं। पिछले हफ्ते तीन अलग-अलग घटनाओं में गैर-स्थानीयों को निशाना बनाकर मारा गया है। सबसे ताजा मामला 24 अक्टूबर का ही है। पुलवामा जिले के त्राल इलाके में भी एक प्रवासी मजदूर शुभम कुमार पर हमला हुआ, जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गए। इसके अलावा 18 अक्टूबर को भी शोपियाँ जिले में बिहार के रहने वाले अशोक कुमार चव्हाण की आतंकियों द्वारा गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
उल्लेखनीय है कि कश्मीर में गैर-कश्मीरी लोगों पर बढ़ते हमलों की घटनाओं से हर किसी में भय और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है। आलम ये है कि गैर-कश्मीरी अपना काम छोड़कर अपने घर लौटने का फैसला ले रहे हैं।
पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार जिले के जयगांव शहर में सात साल की एक मासूम बच्ची के साथ हैवानियत का ऐसा मामला सामने आया है जिसने इंसानियत को शर्मसार कर दिया है। यहाँ चाउमिन खिलाने के बहाने बच्ची का अपहरण किया गया, फिर उसके साथ दुष्कर्म किया गया और अंत में उसे जिंदा जलाकर मौत के घाट उतार दिया गया। इस मामले में बबलू मियाँ मुनीर को नेपाल सीमा के पास से पकड़ा गया है, वो फरार हो गया था।
पुलिस ने सीसीटीवी सर्विलांस और मुखबिरों का जाल बिछाकर बबलू मियाँ मुनीर को पकड़ा, क्योंकि वो मोबाइल इस्तेमाल नहीं करता था, इसलिए उसे ट्रैक नहीं किया जा सका। इस घटना ने पूरे जयगांव को आक्रोशित कर दिया है, जहाँ सड़कों पर जनसमूह न्याय की गुहार लगा रहा है और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा की माँग कर रहा है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बच्ची पिछले सप्ताह गायब हुई थी। बच्ची के घर वालों ने उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट पुलिस में दर्ज करवाई थी। बच्ची का कोई सुराग न मिलने पर उसके परिवार के साथ-साथ पूरे इलाके में निराशा फैल गई थी। मंगलवार (22 अक्टूबर 2024) को अचानक शहर में खबर फैली कि मासूम का जला हुआ शव एक सुनसान स्थान से बरामद हुआ।
तीन आरोपितों की गिरफ्तारी, बबलू मियाँ मुनीर मुख्य आरोपित
पुलिस ने इस मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें मुख्य आरोपित बबलू मियाँ मुनीर का नाम सामने आया है। पुलिस के मुताबिक, बच्ची के शरीर पर मिले खरोंच के निशान और आरोपित के शरीर पर चोट के निशान से दुष्कर्म की पुष्टि हुई है। एसडीपीओ प्रसांत देबनाथ और पुलिस अधीक्षक वाई रघुवंशी ने मीडिया को बताया कि इस मामले में फोरेंसिक टीम की भी मदद ली जा रही है और आरोपित का डीएनए टेस्ट भी कराया जा रहा है ताकि यह पुख्ता सबूत के रूप में काम आए।
पुलिस ने इस मामले में सबसे पहले बबलू मियाँ को गिरफ्तार किया, जो बच्ची के परिवार से परिचित था और आठ दिन पहले उसे अपने साथ लेकर गया था। इसके बाद पुलिस ने दो और संदिग्धों को गिरफ्तार किया। ये तीनों अब पुलिस रिमांड में हैं और उनसे कड़ी पूछताछ की जा रही है। पूछताछ में बबलू मियाँ ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं, जिससे पता चला कि बच्ची का पहले अपहरण किया गया था और उसे एक सुनसान जगह ले जाकर दुष्कर्म किया। बताया जा रहा है कि उसने बच्ची को जिंदा ही जला दिया।
जयगांव में स्थिति अभी भी तनावपूर्ण बनी हुई है। पुलिस लगातार शांति बनाए रखने की अपील कर रही है, लेकिन लोग दोषियों के खिलाफ तत्काल न्याय चाहते हैं। लोगों ने अपनी दुकानों को बंद कर दिया और सड़क पर उतरकर न्याय की गुहार लगाई। प्रदर्शनकारियों ने दोषियों को जल्द से जल्द सजा देने की माँग करते हुए पुलिस स्टेशन के बाहर नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान एक व्यक्ति ने कहा, “यह घटना हमारी बेटी के साथ ही नहीं, हमारी इंसानियत के साथ भी हुई है। जब तक दोषियों को सजा नहीं मिलती, हम चुप नहीं बैठेंगे।”
घटना के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। लोगों का मानना है कि बच्ची के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज कराने के बाद भी पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया। कई दिनों तक पुलिस कोई सुराग नहीं जुटा पाई थी, और जब शव मिला, तब ही हरकत में आई।
आरोपित बबलू मियाँ मुनीर को पकड़ने में पुलिस को खासी मशक्कत करनी पड़ी। पुलिस ने एक सीसीटीवी फुटेज में उसे बच्ची को अपने साथ ले जाते हुए देखा, और इस सुराग के आधार पर पुलिस ने जाल बिछाया। आखिरकार, आरोपित बबलू मियाँ को भारत-नेपाल सीमा से गिरफ्तार किया गया। पुलिस के अनुसार, बबलू नेपाल भागने की फिराक में था, लेकिन समय पर पकड़ा गया।
इस घटना को लेकर भाजपा के दार्जिलिंग सांसद राजू बिष्ट ने राज्य सरकार और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि पश्चिम बंगाल में कानून व्यवस्था बुरी तरह से बिगड़ चुकी है। वह घटना के पीड़ित परिवार से मिलने जा रहे थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोका, जिससे लोगों में और गुस्सा फैल गया। भाजपा नेता सुकांत मजूमदार ने मुख्यमंत्री पर आरोप लगाया कि सरकार ऐसी घटनाओं में शामिल अपराधियों को बचाने का प्रयास कर रही है।
I am deeply angered and anguished at the tragic case of a 7-year-old girl who was found raped and murdered in the Indo-Bhutan border region of Jaigaon, under Alipurduar District. This incident is another example of the complete failure of the West Bengal government, led by Chief… pic.twitter.com/kCQ1LZHr9r
पुलिस अधीक्षक वाई रघुवंशी के मुताबिक, बच्ची के शरीर पर खरोंच के निशान मिले हैं, जिससे ये संकेत मिलता है कि उसने रेप और हत्या के समय संघर्ष किया था। डीएनए टेस्ट से आरोपितों के खिलाफ मजबूत सबूत मिलेंगे।
हिमाचल प्रदेश के बाद अब उत्तराखंड के उत्तरकाशी में अवैध मस्जिद को हटाने को लेकर हिंदू संगठन सड़कों पर उतर आए हैं। स्थानीय हिंदू और धार्मिक संगठनों से जुड़े लोगों ने गुरुवार (24 अक्टूबर 2024) को जनाक्रोश रैली निकाली। इस दौरान पथराव के बाद तनाव फैल गया। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठी चार्ज कर दिया, जिसमें 27 लोग घायल हो गए हैं।
पुलिस के लाठी चार्ज के विरोध में हिंदू संगठनों ने आज शुक्रवार (25 अक्टूबर) को यमुना घाटी बंद का आह्वान किया है। यह बंद यमुना घाटी जिला उद्योग व्यापार मंडल के आह्वान पर बुलाया गया है। आज भी बाजार आदि बंद हैं। व्यापार मंडल के जिला महामंत्री सुरेंद्र रावत ने कहा कि भटवाड़ी लाठीचार्ज के विरोध में सभी हिंदू संगठन एकजुट हैं।
दरअसल, हिंदू संगठनों का आरोप है कि उत्तरकाशी के बाड़ाहाट क्षेत्र में सरकारी जमीन पर एक मस्जिद अवैध रूप से बना दी गई है। वे इसे हटाने की लगातार माँग कर रहे हैं। इसको लेकर प्रदर्शनकारी हनुमान चौक से एक रैली निकाली गई। इसमें स्वामी दर्शन भारती भी शामिल थे। प्रदर्शनकारियों ने इस दौरान ‘जय श्रीराम’ के नारे भी लगाए। उत्तरकाशी, डुंडा, भटवाड़ी और जोशियाड़ा में बाजार पूरी तरह बंद रहे।
प्रदर्शनकारी हनुमान चौक से मस्जिद की ओर बढ़ने लगे तो उन्हें रोकने के लिए जिला प्रशासन ने गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर भटवाड़ी की ओर बैरिकेड लगा दिए। प्रदर्शनकारी इस बैरिकेडिंग को हटाने लगे तो उनकी पुलिस के साथ नोक-झोंक हो गई। पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया तो प्रदर्शनकारी वहीं धरने पर बैठ गए और हनुमान चालीसा का पाठ करने लगे।
इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेडिंग हटाने की कोशिश की तो पुलिस के साथ उनकी झड़प हो गई। पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे लोगों पर लाठी चार्ज कर दिया। इस दौरान आँसू गैस के गोले भी छोड़े गए। झड़प में 7 पुलिसकर्मी सहित 27 लोग घायल हो गए हैं। घायलों में दो महिला प्रदर्शनकारी भी शामिल हैं। घायलों को इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
पुलिस अधिकारियों का आरोप कि उन पर पथराव किया गया था। वहीं, प्रदर्शनकारियों का कहना है कि स्थिति को बिगाड़ने की साजिश के तहत पुलिस पर पत्थर फेंके गए थे। उत्तरकाशी के पुलिस अधीक्षक (एसपी) अमित श्रीवास्तव ने कहा कि पथराव की घटना को गंभीरता से लिया गया है और इसकी जाँच की जा रही है। आरोपियों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
एसपी श्रीवास्तव ने बताया कि अब शहर में स्थिति सामान्य और शांतिपूर्ण है। उन्होंने कहा कि शहर में सुरक्षा के लिए पर्याप्त पुलिस बल तैनात किए गए हैं। अधिकारियों के अनुसार, प्रदर्शन के बाद मस्जिद के आसपास की सुरक्षा भी कड़ी कर दी गई है। जिला प्रशासन ने इलाके में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा-163 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी है।
हिंदू संगठनों का आरोप
दरअसल, हिंदुओं का कहना है कि मस्जिद सरकारी जमीन पर अवैध रूप से बनाई गई है। हालाँकि, जिला प्रशासन का कहना है कि मस्जिद पुरानी है और मुस्लिम समुदाय के लोगों की जमीन पर बनी है। इसको लेकर उत्तरकाशी के जिलाधिकारी कार्यालय ने 21 अक्टूबर को एक नोटिस भी जारी किया। इसमें भटवाड़ी के उपजिलाधिकारी मुकेश चंद रमोला की रिपोर्ट का हवाला दिया गया है।
उपजिलाधिकारी मुकेश रमोला ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि जिस भूमि पर मस्जिद बनी है, वह भूमि खाताधारकों के नाम पर दर्ज है। वहीं, उत्तर प्रदेश सरकार के मुस्लिम वक्फ विभाग द्वारा प्रकाशित सरकारी गजट में 20 मई 1987 में यह मस्जिद उल्लेखित है। इसमें सुन्नी वक्फ की ओर से मस्जिद का खसरा, रक्वा, नाली और धार्मिक उद्देश्य के रूप में अंकित है।
भूमि का दाखिल-खारिज साल 2004 में हुआ। साल 2005 में पारित तहसीलदार के एक आदेश में कहा गया है कि यह मस्जिद संबंधित भूमि पर बनी हुई है। इस विवाद की शुरुआत संयुक्त सनातन धर्म रक्षक संघ की ओर से मस्जिद को लेकर RTI के तहत जानकारी माँगी गई थी। इसमें जिला प्रशासन द्वारा अस्पष्ट जानकारी देते हुए कहा कि उसके पास जरूरी कागजात नहीं हैं।
RTI में गलत जानकारी से उपजा विवाद
स्वामी दर्शन भारती का कहना कि प्रशासन ने RTI में गलत जानकारी दी है। इसके बाद 6 सितंबर 2024 को हिंदूवादी संगठनों ने मस्जिद गिराने की माँग को लेकर डीएम कार्यालय के बाहर धरना दिया। उन्होंने प्रशासन को तीन दिन का अल्टीमेटम दिया था। उन्होंने कहा था कि अगर उनकी माँग नहीं मानी गई तो वे खुद इस मस्जिद को गिरा देंगे।
इसके बाद उत्तरकाशी के जिलाधिकारी ने मामले की जाँच के लिए कमिटी गठित की। इस कमिटी ने बताया कि मस्जिद वैध और यह सरकारी जमीन पर नहीं है। SP अमित श्रीवास्तव ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, “हमारे रिकॉर्ड के मुताबिक, ये मस्जिद पंजीकृत जमीन पर बनी है। ये जमीन चार लोगों के नाम पर पंजीकृत है। प्रशासन ने इसकी जानकारी इन संगठनों को दे दी है।”
उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में 13 अक्टूबर 2024 को माँ दुर्गा के विसर्जन जुलूस पर मुस्लिम भीड़ ने हमला कर के रामगोपाल मिश्रा नाम के युवक की हत्या कर दी थी। इसी हिंसा में कई श्रद्धालु घायल हो गए थे। हमले के लिए अब्दुल हमीद के घर को लॉन्च पैड के तौर पर प्रयोग किया गया था। ऑपइंडिया ने जब इस हिंसा की जमीनी जानकारी जुटाई तो पता चला कि जहाँ आज अब्दुल हमीद का घर है, वो लगभग 3 दशक पहले एक हिन्दू की जमीन हुआ करती थी। आज वही हिन्दू परिवार अब्दुल हमीद से प्रताड़ित है।
यह हिंसा महराजगंज बाजार में हुई। महराजगंज सीतापुर-बहराइच मार्ग को महसी बाजार से जोड़ता है। हिन्दुओं का विसर्जन जुलूस भी इसी मार्ग से हर साल परम्परागत तौर पर गुजरता है। हिंसा से पहले महराजगंज बाजार मूल रूप से जूलरी के कारोबार के लिए प्रसिद्ध रही है। अब्दुल हमीद भी सोने-चाँदी का काम करता था। पहले वह बाजार के अंदर एक मकान में रहता था। तब मुख्य मार्ग पर अधिकतर जमीनें राम प्रसाद जायसवाल की हुआ करती थीं।
जहाँ आज अब्दुल का घर, वो पहले थी हिन्दू की जमीन
हिंसा में घायल अब्दुल हमीद के पड़ोसी संतोष तिवारी ऑपइंडिया को बताते हैं कि लगभग 30 साल पहले अब्दुल हमीद ने रामप्रसाद जयसवाल से वो जमीन खरीदी थी, जहाँ आज उसका घर है। तब रामप्रसाद जयसवाल ने अपनी मुख्य मार्ग पर मौजूद जमीन कुछ पैसों के लिए बेचने का प्रस्ताव रखा था। इसी दौरान संतोष तिवारी सहित कुछ हिन्दुओं ने इसी जमीन के कुछ हिस्से खरीदे थे। जमीन बिकने की जानकारी मिलते ही अब्दुल हमीद ने भी उसे खरीदने की इच्छा जताई।
तब अब्दुल हमीद खुद को धर्मनिरपेक्ष बता कर मीठी-मीठी बातें और हर किसी हिन्दू को उनके परम्परा के हिसाब से अभिवादन करता था। अपना नाम न छापने की शर्त पर एक स्थानीय निवासी ने बताया कि तब कई हिन्दुओं ने रामप्रसाद से अपील की थी कि वो अपनी जमीन अब्दुल हमीद के बजाय उन्हें दे दें। हालाँकि अब्दुल हमीद ने अन्य खरीदारों से अधिक दाम का ऑफर किया और जमीन का एक बड़ा हिस्सा अपने नाम करवा लिया। आज अब्दुल हमीद का घर संतोष तिवारी और खुद रामप्रसाद जायसवाल के मकानों के बीच में हैं।
‘हमसे ही जमीन लेकर हमको ही कर रहा तंग’
रामप्रसाद जायसवाल का अब देहांत हो चुका है। उनके तीन बेटे थे, जिसमें एक की मौत हो चुकी है। अब घर पर पप्पू व मून जायसवाल अलग-अलग हिस्सों में रहते हैं। ये हिस्से अब्दुल हमीद की दीवार से सटे हुए हैं। पप्पू टायर पंचर का काम करते हैं जबकि मून जयसवाल रेडीमेड कपड़ों व जूते-चप्पल के कारोबार में हैं। मून जयसवाल अब यह स्वीकार करते हैं कि भले ही किसी भी मजबूरी में ही सही पर उनके पिता द्वारा अब्दुल हमीद को जमीन बेचना एक गलत फैसला था।
मून जायसवाल हमें बताते हैं कि वो और उनके भाई अपनी बची जमीन के अलग-अलग हिस्सों में रहते हैं लेकिन दोनों ही अब्दुल हमीद द्वारा कई बार परेशान किए जा चुके हैं। पप्पू जायसवाल की पंचर वाली दुकान के सामने हमें काफी पानी जमा दिखा। पूछने पर पता चला कि यह सब अब्दुल हमीद और उसके बेटों की दबंगई के कारण है। मून जायसवाल को भी अब्दुल हमीद व उसके बेटे कई बार हड़का चुके हैं। उन्होंने हमसे कहा, “जो पहले हो गया, उसे अब सुधार नहीं सकते।”
जयसवाल परिवार को भी ध्वस्तीकरण की नोटिस
पिछले कुछ दिनों से मेन स्ट्रीम मीडिया में महराजगंज बाजार के एक हिन्दू परिवार को दिखाया जा रहा, जिसके घर को अब्दुल हमीद व कुछ अन्य मुस्लिमों के घरों के साथ सरकार की तरफ से ध्वस्तीकरण की नोटिस मिली है। यह परिवार उसी मून जायसवाल का है, जिनके पिता ने 3 दशक पहले अब्दुल हमीद को अपनी जमीन बेच कर बसा दिया था। नोटिस मून के अलावा उनके भाई पप्पू को भी मिली है। इन दोनों भाइयों ने अपनी-अपनी दुकानों से सामान खाली कर लिए हैं। नोटिस संबंधी नीचे जो वीडियो है, उसे वामपंथी, समाजवादी, इस्लामी व कॉन्ग्रेसी हैंडलों से जोर-शोर से शेयर किया जा रहा है।
अब्दुल हमीद के एक अन्य हिन्दू पड़ोसी जो सरकारी नौकरी में हैं, उन्होंने कैमरे पर न आने की शर्त पर हमसे बात की। हमें बताया गया कि अब्दुल आए दिन बंदूक निकालने का ताव दिया करता था। कुछ वर्ष पहले का जिक्र करते हुए हमसे भुक्तभोगी ने बताया कि उनके बूढ़े पिता को भी गोली मारने की धमकी अब्दुल हमीद ने दी थी। तब उस हिन्दू बुजुर्ग ने भी अब्दुल से कहा भी था कि वो ऐसी धमकियों से डरने वाले नहीं हैं।
रामगोपाल मिश्रा को भी अब्दुल हमीद के घर से सम्भवतः उसी लाइसेंसी बंदूक से मारा गया था, जिससे वो आसपास के हिन्दुओं को धमकाता था। पीड़ित इस बात की भी जाँच चाहते हैं कि अब्दुल हमीद को उस बंदूक का लाइसेंस किस अधिकारी ने कब और क्यों जारी किया था। हालाँकि लोगों का यह भी दावा है कि लाइसेंसी हथियार अब्दुल हमीद के लिए महज हाथी के दिखाने वाले दाँत हैं क्योंकि ठीक से तलाशी होने पर उस बाजार में अवैध हथियारों का जखीरा मिल सकता है।
अब्दुल के घर पड़ चुकी है नेपाल पुलिस की दबिश
ऑपइंडिया से बातचीत में कई स्थानीय लोगों का दावा है कि अब्दुल हमीद का बड़ा बेटा अंतरराष्ट्रीय अपराधी है, जिसका देश विरोधी ताकतों से संबंध हैं। लोगों ने यह भी बताया कि पिछले 10 वर्षों से उन्होंने कई बार अब्दुल हमीद के घर पर पुलिस की दबिश होते देखा है। इसमें नेपाल का पुलिस बल भी शामिल है। हमें यह भी बताया गया कि खुद को कानूनी दाँवपेंचों से बचाने के लिए अब्दुल हमीद ने दिखावे के तौर पर अपने बड़े बेटे को लिखापढ़ी करके बेदखल कर रखा है।
लोगों ने बताया कि कथित बेदखली के बावजूद अब्दुल के बेटे का आना-जाना अभी भी अपने घर पर है। उसका निकाह भी नेपाल में ही कहीं हुआ है। बाजार में अन्य स्वर्णकारों के बजाय अब्दुल हमीद की सम्पत्ति जिस तेजी से बढ़ी है, उससे लोगों को यह भी आशंका है कि अपने बेटे की काली कमाई में कहीं न कहीं उसका भी हिस्सा है। स्थानीय निवासियों का यह भी मानना है कि बिना जुगाड़ के एक इंटरनेशनल अपराधी के पिता को बंदूक का लाइसेंस नहीं मिल सकता।
चक्रवाती तूफान ‘दाना (Dana)’ ने 24 अक्टूबर की रात लगभग 12:30 बजे ओडिशा के तट पर दस्तक दी। इस दौरान इसकी अधिकतम रफ्तार 110 से 125 किलोमीटर प्रति घंटे (किमी/घंटा) थी। चक्रवाती तूफान के लैंडफॉल के कारण जोरदार आँधी और बारिश हुई। कई जगह रास्ते में पेड़ भी गिरे मिले और अन्य संरचनाओं को भी नुकसान पहुँचा।
इस तूफान का लैंडफॉल गुरुवार रात 12:45 बजे 100 किमी प्रति घंटा की रफ्तार के साथ हुआ। इसके बाद, यह धीरे-धीरे अपनी गति बढ़ाते हुए ओडिशा के धामरा और भितरकनिका के पास 120 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से गुजरा। लैंडफॉल की प्रक्रिया सुबह 8 बजे तक जारी रही, जिसके दौरान तेज हवाओं और मूसलधार बारिश ने ओडिशा और पश्चिम बंगाल के कई इलाकों में तबाही मचाई।
दाना तूफान का सबसे अधिक प्रभाव ओडिशा के मयूरभंज, भद्रक, बालेश्वर, केंद्रपाड़ा, जाजपुर, जगतसिंहपुर और कटक जिलों में देखने को मिला। इसके अलावा, पश्चिम बंगाल के पूर्व मेदिनीपुर, दक्षिण 24 परगना और उत्तर 24 परगना जैसे क्षेत्रों में भी भारी बारिश हुई।
ओडिशा में राहत बचाव कार्य जारी
बता दें कि चक्रवाती तूफान की स्थिति से निपटने के लिए ओडिशा और बंगाल का राज्य प्रशासन लाखों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाने में जुटा है। अभी तक ओडिशा में इस चक्रवात के कारण 10 लाख से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया गया है। यह प्रक्रिया ओडिशा के विभिन्न जिलों में चल रही है। इसके अलावा राहत बचाव कार्य के लिए 385 बचाव दलों को तैनात किया गया है, जिसमें एनडीआरएफ, अग्निशामक दल और वन विकास निगम शामिल हैं। इसी तरह 4756 चक्रवात राहत केंद्र स्थापित किए गए हैं ताकि प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थान पर ले जाया जा सके।
Odisha Cyclone: पहले की सरकारों की एप्रोच आपदा के बाद राहत की होती थी आज एप्रोच आपदा से पहले की तैयारियों से जीरो Casualty की है
मोदी सरकार चक्रवात, भूकंप और बाढ़ जैसी आपदाओं से लोगों के जीवन को सुरक्षित कर रही है pic.twitter.com/WR0MTfPw2K
इस बीच मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने भी सारी स्थिति का जायजा लिया और पुष्टि की कि तूफान के कारण राज्य में लगभग 10 लाख लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया है। उन्होंने कहा कि चक्रवात से प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्य तेजी से चल रहे हैं और सभी आवश्यक उपाय किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि ओडिशा सरकार ने 7200 चक्रवात आश्रय स्थलों की व्यवस्था की है, जहाँ विस्थापित लोगों को भोजन, दवा, पानी और अन्य आवश्यक वस्तुएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं।
#WATCH | Odisha CM Mohan Charan Majhi taking stock of the landfall situation of #CycloneDana in the presence of minister of revenue and disaster management, Suresh Pujari and Odisha's chief secretary, Manoj Ahuja at Rajiv Bhavan, in Bhubaneswar pic.twitter.com/gRImu5ha56
मुख्यमंत्री ने चक्रवात दाना से ओडिशा में आई गंभीर तबाही पर जहाँ जानकारी दी तो वहीं ये भी बताया कि राज्य सरकार इस आपदा से निपटने के लिए कैसे एहतियाती कदम उठा रही है। इस चक्रवात के प्रभाव से बचने के लिए 4,431 गर्भवती महिलाओं को स्वास्थ्य केंद्रों में स्थानांतरित किया गया। इनमें से 1,600 महिलाओं ने सुरक्षित स्थानों पर बच्चों को जन्म दिया। यह जानकारी ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी द्वारा दी गई थी।
चक्रवात दाना के दौरान, गर्भवती महिलाओं को स्वास्थ्य केंद्रों में ले जाने का निर्णय लिया गया ताकि उन्हें सुरक्षित प्रसव की सुविधा मिल सके। इन महिलाओं को 6,008 चक्रवात आश्रयों में रखा गया था, जहाँ उन्हें आवश्यक चिकित्सा देखभाल, भोजन, पानी और अन्य जरूरत की चीजें प्रदान की गईं।
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राज्य सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग ने पुष्टि की है कि जिन गर्भवती महिलाओं को चक्रवात आश्रयों में ले जाया गया था, उनमें से माँ और नवजात दोनों स्वस्थ हैं। नियाली अस्पताल में एक महिला ने बच्चे को जन्म दिया और दोनों की स्थिति स्थिर है।
बंगाल में 16 मछुआरे गायब
चक्रवात दाना के कारण हुई मौतों की आधिकारिक संख्या अभी स्पष्ट नहीं है। मगर, इसी बीच पश्चिम बंगाल से खबर आ रही है कि दाना चक्रवात के आगमन से पहले ही, शमशेरगंज और फरक्का क्षेत्रों में आंधी-तूफान के कारण तीन नावें पलट गईं। इस घटना में 16 मछुआरे लापता हो गए हैं, जो गंगा नदी में हिलसा मछली पकड़ने गए थे। यह घटना तब हुई जब मछुआरे प्रशासन द्वारा जारी चेतावनियों के बावजूद समुद्र में गए थे। नाव में कुल 20 लोग थे। इनमें से 4 की जान बचा ली गई जबकि 16 लापता हो गए