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कभी भगवान का किया अपमान, कभी PM के लिए उगला जहर: ‘थप्पड़ कांड’ के बाद फरार कॉन्ग्रेस नेत्री रोशनी जायसवाल की संपत्तियाँ होंगी कुर्क, कोर्ट के आदेश के बाद रोते हुए Video आया सामने

वाराणसी में कॉन्ग्रेस नेत्री रोशनी कुशल जायसवाल की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने वाली रोशनी जायसवाल पर गंभीर आरोप हैं। अब वाराणसी की अदालत ने उनके खिलाफ कुर्की का आदेश जारी कर दिया है। वहीं, उन्होंने एक वीडियो जारी कर माफी माँगी है।

रोशनी जायसवाल सोशल मीडिया पर चर्चित चेहरा हैं। वह अपनी राजनीतिक और निजी जिंदगी से जुड़े कंटेंट सोशल मीडिया पर साझा करती रही हैं। हाल ही में स्थानीय युवक के साथ हुए विवाद में उन्होंने युवक पर रेप और हत्या की धमकी देने का आरोप लगाया था। अदालत में यह मामला टिक नहीं सका, और उनके पति कुशल जायसवाल समेत पाँच लोग इस केस में 40 दिनों से जेल में बंद हैं। वहीं, रोशनी खुद फरार चल रही हैं। कोर्ट ने उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया था, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने न तो कोर्ट में पेश होने की कोशिश की और न ही किसी प्रकार का स्टे ऑर्डर प्राप्त किया। यानी खुद को कानून से ऊपर मानकर चलती रही है।

इस घटनाक्रम के बाद अदालत ने अब उनके खिलाफ कुर्की का आदेश जारी किया है। हालाँकि कुर्की आदेश जारी होते ही रोशनी कुशल जायसवाल एक बार फिर से विक्टिम कार्ड खेलने के मूड में आ गई। रोशनी ने सोशल मीडिया पर एक भावुक वीडियो साझा किया, जिसमें वह माफी माँगते और मदद की गुहार लगाते नजर आईं। वीडियो में रोशनी ने कहा, “एक थप्पड़ की वजह से मेरी पूरी जिंदगी तबाह हो चुकी है। मुझे माफ कर दीजिए, मेरी मदद करिए।”

ये वही रोशनी जायसवाल हैं, जो खुलेआप प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऊपर भी अभद्र टिप्पणियाँ करती रही हैं। अब लोग रोशनी के पुराने वीडियो भी शेयर कर रहे हैं। कॉन्ग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने स्थानीय युवक को थप्पड़ मारने का वीडियो 15 सितंबर को शेयर करते हुए रोशनी की जमकर हौसलाअफजाई की थी और लिखा था, “हम सभी किसी भी प्रकार की हिंसा के खिलाफ हैं। हमारी कॉन्ग्रेस की नेता को खुलेआम बलात्कार की धमकी देना, वो भी कई बार, ये सबसे बड़ी हिंसा है। वो हिंसा इस से भी बड़ी हिंसा है, जो रोशनी अपने परिवार के साथ इस लिखित बलात्कारी के साथ कर रही हैं।” हालाँकि रोशनी ने जो कुछ किया, वो मामला कोर्ट में है और फिलहाल वो फरारी काट रही हैं, लेकिन उनके पुराने पाप भी सामने आ रहे हैं।

शिव शर्मा नाम के एक्स यूजर ने उसके दूसरे ही दिन सुरेंद्र राजपूत से पूछा था कि जिस तरह से रोशनी कॉन्ग्रेस के पक्ष में बोलती हैं और अभद्र टिप्पणियाँ करती हैं, क्या वो इनके संस्कार हैं?

ये रोशनी जायसवाल कई बार भारत सरकार, सेना पर उंगली उठा चुकी हैं। उनका एक पुराना ट्वीट भी वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने भारत माता को बेहद गलत तरीके से दिखाया था। उन्होंने कथित तौर पर पीएम मोदी और गृहमंत्री अमित शाह को भी इस तस्वीर में दिखाया था और मणिपुर को लेकर ये पोस्ट किया था। हालाँकि ये पोस्ट कथित तौर पर अब डिलीट किया जा चुका है।

रोशनी जायसवाल के इंटाग्राम प्रोफाइल के मुताबिक, वो साल 2018 में मिसेज इंडिया इंटरनेशनल रह चुकी हैं। वो मिसेज इंडिया ग्लैमरस 2028 भी रह चुकी हैं और गरीब सहायक एनजीओ की प्रेसीडेंट भी हैं। उन्होंने अपनी प्रोफाइल में खुद को कॉन्ग्रेस का प्रवक्ता भी बताया है।

रोशनी का इंटाग्राम प्रोफाइल

बहरहाल, सोशल मीडिया पर कॉन्ग्रेसी इकोसिस्टम रोशनी के बचाव में उतर चुका है, लेकिन कानून अपना काम कर रहा है। अदालत का कुर्की आदेश स्पष्ट संकेत है कि कानून के नजर में सभी बराबर हैं। देखना ये है कि रोशनी कानून का सम्मान करते हुए आत्मसमर्पण करती हैं, या फिर सिस्टम को ठेंगा दिखाते हुए फरारी काटती रहेंगी। वैसे, कॉन्ग्रेस ने इस मामले में अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि कॉन्ग्रेस और रोशनी जायसवाल इस मामले को कैसे संभालते हैं और कानून इस पर क्या रुख अपनाता है।

कर्नाटक वक्फ बोर्ड ने किसानों की 1200 एकड़ भूमि पर ठोका दावा… कॉन्ग्रेस सरकार खाली कराने में जुटी, 41 किसानों को नोटिस भेजे: BJP ने कहा- ये तुष्टिकरण के अलावा कुछ नहीं

तमिलनाडु के बाद अब कर्नाटक के एक गाँव पर वक्फ बोर्ड ने अपना दावा ठोक दिया है। यहाँ की 1200 एकड़ (लगभग 2000 बीघा) जमीन पर शाह अमीनुद्दीन दरगाह ने अपना हक जताया है। राज्य की कॉन्ग्रेस सरकार ने किसानों को नोटिस भेजा है। विजयपुरा जिले के टिकोटा तालुक स्थित होनवाड़ा गाँव के किसानों ने गुरुवार (24 अक्टूबर) को इसकी शिकायत मंत्री एमबी पाटिल से की।

किसानों ने मंत्री को बताया कि उन्हें नोटिस मिला है, जिसमें कहा गया है कि उनकी ज़मीनें वक्फ बोर्ड की हैं। किसानों का दावा है कि अधिकारी इस क्षेत्र को शाह अमीनुद्दीन दरगाह से जुड़ी मुस्लिमों की मजहबी संस्था के रूप में नामित करने का प्रयास कर रहे हैं। यह नोटिस तहसीलदार द्वारा भेजी गई है। उसमें पुराने सरकारी रिकॉर्ड का हवाला देते हुए ज़मीनें वक्फ बोर्ड की बताई गई हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, आवास, वक्फ और अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के मंत्री जमीर अहमद खान ने इस महीने की शुरुआत में वक्फ अधिकारियों के साथ बैठक की थी। इस बैठक में वक्फ भूमि पर ‘अतिक्रमण’ को लेकर चर्चा की गई थी। इन चर्चाओं के बाद अधिकारियों ने ‘अवैध अतिक्रमण’ को हटाने का प्रयास किया और इसके तहत यह विवादास्पद नोटिस भेजा गया है।

होनवाड़ा ग्राम पंचायत के उपाध्यक्ष सुनील शंकरप्पा तुडीगल ने कहा, “नोटिस में कहा गया है कि यह ज़मीन शाह अमीनुद्दीन दरगाह की है, लेकिन यह दरगाह सदियों से अस्तित्व में नहीं है, जबकि पीढ़ियों से हमारे परिवार इन ज़मीनों के मालिक हैं। लगभग 41 किसानों को नोटिस मिले हैं। उनसे स्वामित्व का कागजात देने के लिए कहा गया है। अगर सरकार नोटिस वापस नहीं लेती है तो हम विरोध प्रदर्शन करेंगे।”

वक्फ बोर्ड का दावा किया कि ये नोटिस 1974 के गजट की घोषणा पर आधारित है। विजयपुरा वक्फ बोर्ड की अधिकारी तबस्सुम ने कहा, “भूमि को राज्य सरकार द्वारा वक्फ संपत्ति के रूप में चिह्नित किया गया था और इसे गजट में दर्ज किया गया था। हालाँकि, कुछ नोटिस गलती से किसानों को भेज दिए गए थे। अगर उनके पास वैध भूमि रिकॉर्ड हैं तो वक्फ बोर्ड उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करेगा।”

नोटिस मिलने के बाद किसानों की नींद हराम हो गई है। वे तनाव में आ गए हैं और अब उनके सामने जीवन-यापन की समस्या खड़ी हो गई है। इसको देखते हुए उन्होंने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दी है। होनवाड़ा के किसानों ने घोषणा की है कि वे अपने अधिकारों की रक्षा के लिए लड़ने के लिए तैयार हैं। उन्होंने न्याय मिलने तक अपना संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया है।

एक अन्य चिंतित किसान ने कहा, “हमें अभी तक कोई न्याय नहीं मिला है। जिला प्रशासन चुपचाप हमारी जमीन छीनने का काम कर रहा है। अगर ऐसा ही चलता रहा तो हमारे पास विरोध करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा। हमारी जमीन हमारी आजीविका है और हम इसे किसी भी हालत में किसी को छीनने नहीं देंगे।”

बढ़ते असंतोष को देखते कर्नाटक के जिला प्रभारी मंत्री एमबी पाटिल ने सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को संबोधित करते हुए किसानों को आश्वासन दिया कि वक्फ से संबंधित कोई भी निजी भूमि या संपत्ति प्रभावित नहीं होगी। उन्होंने कहा कि यदि किसी भूमि को गलत तरीके से वक्फ संपत्ति के रूप में चिह्नित किया गया है तो इसे ठीक करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएँगे।

पाटिल ने कहा, “मैंने पहले ही जिला प्रशासन के साथ इस पर चर्चा की है। किसानों की चिंताओं को दूर करने के लिए एक बैठक आयोजित की जाएगी।” पाटिल ने किसानों से शांत रहने का आग्रह किया और वादा किया कि उनके अधिकारों की रक्षा की जाएगी। इन आश्वासनों के बावजूद किसानों में इस मुद्दे को लेकर तनाव बना हुआ है।

कर्नाटक भाजपा ने राज्य सरकार पर वक्फ बोर्ड की कार्रवाई का समर्थन करने का आरोप लगाया है। भाजपा ने अपने पोस्ट में कहा, “कॉन्ग्रेस सरकार के प्रोत्साहन पर वक्फ बोर्ड अब किसानों की जमीन हड़पने की कोशिश कर रहा है। यह तुष्टिकरण की राजनीति के अलावा और कुछ नहीं है।” पार्टी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वक्फ अधिनियम में बदलाव करना चाहते हैं, जिसका कॉन्ग्रेस ने विरोध किया है।

भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या ने कॉन्ग्रेस पर तुष्टिकरण की राजनीति करने और मुस्लिम तुष्टिकरण का आरोप लगाते हुए अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, “वैध दस्तावेजों के साथ उनकी 1,500 एकड़ से अधिक पुश्तैनी कृषि भूमि पर वक्फ बोर्ड ने एकतरफा दावा किया है, जिससे इन किसानों की आजीविका और पीढ़ियों से चली आ रही संपत्ति के अधिकार खतरे में पड़ गए हैं।”

उन्होंने कहा, “कॉन्ग्रेस सरकार ने वक्फ बोर्ड को देश भर में भूमि पर दावा करने की बेलगाम शक्ति दी है। 1995 और 2013 में कॉन्ग्रेस सरकारों ने वक्फ बोर्ड को त्वरित जाँच के बाद किसी भी भूमि को वक्फ घोषित करने, अंतिम अधिकार के साथ अपने स्वयं के न्यायाधिकरण के माध्यम से फैसला करने और धारा 54 के तहत अतिक्रमण हटाने के लिए अनियंत्रित शक्तियाँ दी थीं।”

तेजस्वी सूर्या ने कहा, “मोदी 3.0 सरकार वक्फ (संशोधन) विधेयक 2024 पर जेपीसी के माध्यम से सुधार लाने के लिए प्रतिबद्ध है। हम न्याय और स्थायी समाधान के लिए ऐसे मामलों को समिति के ध्यान में ला रहे हैं। किसानों के हित की रक्षा करने और यह सुनिश्चित करने के लिए कि कोई भी अपनी जमीन से वंचित न हो, मामलों को उच्च न्यायालय में लड़ेंगे। अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”

इस बीच एमबी पाटिल ने कहा, “अगर किसानों के पास वैध स्वामित्व रिकॉर्ड हैं तो उनकी ज़मीन प्रभावित नहीं होगी।” बढ़ते विवाद ने वक्फ संपत्ति प्रबंधन में अधिक खुलेपन और भूमि मालिकों के अधिकारों की रक्षा को रेखांकित किया है। सरकार को किसानों के अधिकारों की रक्षा करने और वक्फ भूमि के प्रबंधन के लिए एक स्पष्ट और पारदर्शी रणनीति प्रदान करने के लिए जल्दी से कार्रवाई करनी चाहिए।

हिंदुओं के पूरे गाँव को ही वक्फ संपत्ति घोषित कर दिया था

यह पहली बार नहीं कि वक्फ बोर्ड ने इस तरह का दावा किया है। इससे पहले सितंबर 2022 में तमिलनाडु में वक्फ बोर्ड ने हिंदुओं के पूरे गाँव और 1100 साल पुराने मंदिर पर दावा ठोक दिया था। तमिलनाडु में वक्फ बोर्ड ने त्रिची के नजदीक स्थित तिरुचेंथुरई गाँव को वक्फ संपत्ति घोषित कर दिया था। जब राजगोपाल नाम के व्यक्ति ने अपनी जमीन बेचने का प्रयास किया तो यह मामला समाने आया था।

राजगोपाल जब अपनी जमीन बेचने के लिए रजिस्ट्रार ऑफिस पहुँचे तो उन्हें पता चला कि जिस जमीन को बेचने के बारे में वह सोच रहे हैं वह उनकी है ही नहीं बल्कि, जमीन वक्फ हो चुकी है और अब उसका मालिक वक्फ बोर्ड है। इतना ही नहीं, सारे गाँव वालों की जमीन ही वक्फ संपत्ति घोषित हो चुकी थी। इसके बाद यह मामला राष्ट्रीय सुर्खी बनी थी।

वक्फ बोर्ड ने 5 स्टार होटल पर ठोक दिया दावा

इसी तरह का मामला अप्रैल 2024 में हैदराबाद से आया था। तेलंगाना वक्फ बोर्ड ने राजधानी के एक नामी 5 स्टार होटल मैरियट को ही अपनी जागीर घोषित कर दिया था। हालाँकि, हाई कोर्ट ने उसके इस मंसूबे को धाराशायी कर दिया था। दरअसल, साल 1964 में अब्दुल गफूर नाम के एक व्यक्ति ने तब वायसराय नाम से चर्चित इस होटल पर अपना हक जताते हुए मुकदमा कर दिया था।

मुकदमे में वक्फ अधिनियम 1954 का हवाला दिया गया था, जिसकी वजह से होटल मैरियट की सम्पत्ति विवादित घोषित हो गई थी। लगभग 50 वर्षों तक वक्फ बोर्ड ने यह मामला कानूनी पेचीदगियों में उलझाए रखा। साल 2014 में एक बार फिर से तेलंगाना राज्य वक्फ बोर्ड होटल मैरियट के खिलाफ सक्रिय हुआ। मामला हाईकोर्ट में पहुँचा तो अंतिम फैसला होटल मैरियट के पक्ष में आया।

कॉन्ग्रेस ने वक्फ को दिए असीमित अधिकार

यहाँ बताना जरूरी है कि साल 1954 में पंडित जवाहरलाल नेहरू की सरकार के समय वक्फ अधिनियम पारित किया गया। इसके बाद इसका केंद्रीकरण हुआ। वक्फ एक्ट 1954 वक्फ की संपत्तियों के रखरखाव का काम करता था। इसके बाद से इसमें कई बार संशोधन हुआ। साल 2013 में कॉन्ग्रेस के नेतृत्व वाली UPA सरकार ने बेसिक वक्फ़ एक्ट में संशोधन करके वक्फ बोर्डों को और अधिकार दिए थे।

दरअसल, वक्फ अरबी भाषा का शब्द है और इसका अर्थ संपत्ति को जन-कल्याण के लिए समर्पित करना है। इस्लाम में में वक्फ उस संपत्ति को कहते हैं, जो इस्लाम को मानने वाले लोगों द्वारा जकात के रूप में दान की जाती है। ये धन-संपत्ति सिर्फ मुस्लिमों के हित या इस्लाम के प्रसार-प्रसार के लिए काम में लाया जा सकता है। ये दौलत वक्फ बोर्ड के तहत आती है।

वक्फ के पास 9.4 लाख एकड़ संपत्ति

सूत्रों ने बताया कि मुस्लिम बुद्धिजीवियों, महिलाओं और शिया एवं बोहरा जैसे विभिन्न फिरकों की ओर से मौजूदा कानून में बदलाव की माँग की गई थी। संशोधन लाने की तैयारी 2024 के लोकसभा चुनावों से काफी पहले ही शुरू हो गई थी। सूत्र ने यह भी कहा कि ओमान, सऊदी अरब जैसे किसी भी इस्लामी देश में इस तरह की इकाई को इतने अधिकार नहीं दिए गए हैं।

मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि विभिन्न राज्यों के वक्फ़ बोर्डों के पास इस समय करीब 8.7 लाख संपत्तियाँ हैं। इन संपत्तियों का क्षेत्रफल करीब 9.4 लाख एकड़ है। उल्लेखनीय है कि इससे पहले केंद्र सरकार ने राज्य में वक्फ बोर्डों की इस शक्ति के दुरुपयोग का संज्ञान लिया था। वक्फ बोर्डों द्वारा किसी भी संपत्ति पर दावा करने पर अधिकांश राज्यों में इन संपत्ति के सर्वे में देरी होती थी।

इसके बाद केंद्र सरकार ने वक्फ संपत्तियों की निगरानी में जिला मजिस्ट्रेटों को शामिल करने की संभावना पर भी विचार किया था। वक्फ बोर्ड के किसी भी फैसले के खिलाफ अपील सिर्फ कोर्ट के पास हो सकती है। ऐसी अपीलों पर फैसले के लिए कोई समय-सीमा नहीं होती है। कोर्ट का निर्णय अंतिम होता है। वहीं हाईकोर्ट में PIL के अलावा अपील का कोई प्रावधान नहीं है।

लाठीचार्ज, पत्थरबाजी, गोली… सबका हिंदू बने निशाना, मुस्लिमों को खरोंच भी नहीं: बहराइच हिंसा के एक और चश्मदीद का दावा- ‘हमले के लिए मस्जिद से आया था फरमान

उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में रविवार (13 अक्टूबर 2024) को मुस्लिम भीड़ ने रामगोपाल मिश्रा की हत्या कर दी थी। इसी भीड़ ने विसर्जन के लिए जा रही माँ दुर्गा की प्रतिमाओं को भी तोड़ा था जिसका विरोध करते हुए कई श्रद्धालु घायल हो गए थे। इस हिन्दू विरोधी हिंसा के बाद हिंसक भीड़ ने विक्टिम कार्ड को आगे किया और वामपंथी वर्ग ने मुस्लिम समुदाय को ही पीड़ित साबित करना शुरू कर दिया। ऑपइंडिया की पड़ताल में सामने आया कि हिंसा का असल पीड़ित हिन्दू है। दावा यह भी किया गया कि श्रद्धालुओं पर हमले के लिए मस्जिद से उकसाया गया। हालाँकि बहराइच प्रशासन कई चश्मदीदों के इस दावे को नकारता रहा।

यह हिंसा बहराइच के हरदी थानाक्षेत्र में पड़ने वाले महराजगंज बाजार में हुई थी। इसी हिंसा के एक चश्मदीद मारुति नंदन त्रिपाठी ने ऑपइंडिया से बात की। मारुति ने बताया कि जब हिंसा की शुरुआत हुई तब वो घटनास्थल से लगभग 1 किलोमीटर दूर विसर्जन स्थल पर लगा मेला देख रहे थे। फोन पर हमले की सूचना मिलते ही वो महराजगंज बाजार पहुँचे। तब आक्रोशित हिन्दू पुलिस प्रशासन से मूर्ति पर पथराव करने और जबरन DJ बंद करवाने वालों पर कार्रवाई की माँग कर रहे थे।

मारुति नंदन बताते हैं कि श्रद्धालुओं की शिकायत पर प्रशासन कोई ध्यान नहीं दे रहा था जिससे तनाव बढ़ता जा रहा था। धरने के दौरान हिन्दुओं पर पुलिस की मौजूदगी में फिर पथराव हुआ जिससे कुछ लोगों ने अब्दुल हमीद के घर के टिन शेड को पीटना शुरू कर दिया। तभी रामगोपाल मिश्रा को गुस्सा आया और वो अब्दुल हमीद की छत पर चला गया। यहाँ हरा झंडा निकालने के दौरान उनकी गोली मार कर हत्या कर दी गई।

पहले मुस्लिमों ने उखाड़ा था हिन्दुओं का झंडा

मारुति नंदन त्रिपाठी दावा करते हैं कि पत्थरबाजी और दुर्गा प्रतिमाओं पर हमले के अलावा मुस्लिमों ने रास्ते में लगे हिन्दुओं के ध्वजों को उखाड़ा था। कुछ लोग रामगोपाल का अचेत शरीर लेकर नीचे आ रहे थे तब फिर गोलियाँ चलाई गईं जिसका वीडियो भी मौजूद है। घायल रामगोपाल को अस्पताल ले जाने के लिए भी कोई गाड़ी नहीं मिली। एक ई रिक्शा से उनको कुछ लोग लेकर जा रहे थे तभी आधे रास्ते में उसकी बैट्री खत्म हो गई। यहाँ से बचा रास्ता बाइक से तय किया गया। अस्पताल में रामगोपाल को मृत घोषित कर दिया गया।

ज्यादातर श्रद्धालु मूर्ति छोड़ कर रामगोपाल मिश्रा के साथ अस्पताल चले गए। बचे-खुचे हिन्दुओं पर प्रशासन ने लाठीचार्ज कर दिया। इस लाठीचार्ज से मची भगदड़ का फायदा मुस्लिम भीड़ ने उठाया। मारुति नंदन आगे बताते हैं कि कई मुस्लिमों ने अपने घरों से बाहर निकल कर मार्ग में खड़ी प्रतिमाओं को तोड़ डाला। वहीं कई लोगों ने झुंड बनाकर श्रद्धालुओं पर हमला किया। पुलिस के ही लाठीचार्ज का फायदा उठा कर एक मुस्लिम भीड़ ने श्रद्धालुओं कर काफी दूर तक दौड़ाया।

मस्जिद से मिला था हमले का फरमान

घटनास्थल पर मौजूद मस्जिद को लेकर मारुति नंदन त्रिपाठी का भी आरोप बहराइच पुलिस के दावों के ठीक विपरीत है। मारुति नंदन बताते हैं कि माँ दुर्गा के भक्तों पर हमले के लिए मस्जिद से उकसाया गया था। मारुति नंदन के मुताबिक जब रामगोपाल अब्दुल हमीद की छत पर चढ़े तब तब मस्जिद के माइक से बोला गया, “सब लोग इकट्ठा हो जाओ। जाने नहीं देना है। मारो।” इसके बाद निकली हिंसक भीड़ में बच्चों से ले कर बूढ़े तक शामिल थे।

चश्मदीद मारुति नंदन हमें आगे बताते हैं कि उन्होंने मुस्लिमों की ज्यादातर भीड़ छतों पर भी देखी। वो पत्थर और बोतलें चला रहे थे। जिस भी मुस्लिम के दरवाजे पर विसर्जन यात्रा में जा रही कोई भी गाड़ी खड़ी थी उसको उन्होंने घरों से निकल कर तोड़ डाला। ऐसे घरों कोई कार्रवाई के लिए नोटिस मिलना उचित मानते हुए मारुति नंदन ने इसे डेढ़ साल पहले की पेंडिंग कार्रवाई बताया है। मारुति नंदन मानते हैं कि क्षेत्र के विकास के लिए सड़क चौड़ी होना जरूरी है।

हमें नहीं पता कि हमारी प्रतिमाओं का क्या हुआ

हमसे बात करते हुए मारुति नंदन त्रिपाठी भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि उन्हें पता ही नहीं है कि अपनी आराध्या माँ दुर्गा की जिन प्रतिमाओं को वो भक्ति भाव से विसर्जित करने जा रहे थे, हमले के बाद उनका हुआ क्या। वह दावा करते हैं कि ऐसी आधे दर्जन से अधिक मूर्तियाँ थीं जो मुस्लिम भीड़ के हमले की वजह से बीच रास्ते में ही फँस गई थी। तब पुलिस के लाठीचार्ज की वजह से श्रद्धालु वहाँ से भाग निकले थे। बाद में उन प्रतिमाओं का क्या हुआ इसकी जानकारी मारुति नंदन को नहीं है।

अपने इसी बयान में मारुति नंदन आगे बताते हैं कि उनको सुनाई दिया था कि बाद में प्रशासन ने माँ दुर्गा की प्रतिमाओं को विसर्जित करवाया था। हालाँकि अपनी धार्मिक भावनाओं पर इस प्रकार के आघात से मारुति नंदन काफी आहत थे। उन्होंने 2 आरोपितों के एनकाउंटर में पैर पर गोली लगने की कार्रवाई पर भी असंतोष जताया और उसे घटना के हिसाब से नाकाफी बताया। मारुति नंदन ने सरकार से माँग की है कि वो रामगोपाल मिश्रा के परिवार पर ध्यान दे।

दुकान बस दिखावा, असल काम सीमा पार तस्करी

महराजगंज हिंसा का मुख्य आरोपित अब्दुल हमीद और उनका परिवार है। अब्दुल हमीद दिखावे के तौर पर सर्राफे का काम करता है लेकिन मारुति नंदन इसे महज हाथी का दिखाने वाला दाँत मानते हैं। मारुति नंदन का दावा है कि अब्दुल हमीद का परिवार नेपाल सीमा से तस्करी जैसे अपराधों में लम्बे समय से संलिप्त है। उसके बड़े बेटे पिंटू का जिक्र करते हुए मारुति नंदन बताते हैं कि उसे पकड़ने के लिए नेपाल से कई बार पुलिस आ चुकी है।

मारुति नंदन आगे बताते हैं कि रामगोपाल को गोली मारने वाला सरफराज भी महराजगंज व आसपास अक्सर गुंडागर्दी किया करता था। नेपाल सीमा से इस पूरे परिवार पर मूल रूप से हथियारों की तस्करी का आरोप है। मारुति नंदन का दावा है कि सर्राफे की दुकान से वो सिस्टम नहीं बन सकता जो अब्दुल हमीद ने बना रखा है।

हिन्दू ने ही खाई लाठी और गोली, उधर से किसी को खरोंच भी नहीं

रविवार (13 अक्टूबर) की घटना को मारुति नंदन त्रिपाठी पूरी तरह से एकतरफा बताते हैं। उनका दावा है कि हिंसा के दौरान मुस्लिम भीड़ और पुलिस बल दोनों ने मिल कर श्रद्धालुओं पर हमला किया। पुलिस जहाँ लाठियाँ बरसा रही थी तो मुस्लिम भीड़ पत्थर, बोतलें और गोलियाँ। हिंसा की वजह से आधे दर्जन से अधिक घायल व एक मृतक भी हिन्दू समुदाय से ही होने की बात हमें मारुति नंदन ने बताई। उनका दावा है कि किसी एक मुस्लिम को खरोंच भी नहीं आई क्योंकि पुलिस ने सारा जोर केवल श्रद्धालुओं पर दिखाया।

ऑपइंडिया ने मारुति नंदन के इन दावों की पड़ताल का फैसला किया। हम 13 अक्टूबर की ही हिंसा से प्रभावित एक अन्य गाँव नथुआपुर पहुँचे जो महराजगंज से लगभग 5 किलोमीटर की दूरी पर है। यहाँ पर हमें हिन्दू बहुल गाँव में मौजूद मुस्लिम परिवार अपने घरों के बाहर आराम से बैठ कर बातचीत करता दिखा। इसी दौरान हमें मोहम्मद कलीम मिले जिन्होंने अवधी भाषा में बताया, “हमका तो कोई परेशानी नाहीं है। मारिस-पीटिस कोई नाहीं।” (हमको कोई दिक्कत नहीं है। किसी ने मुझे नहीं मारा-पीटा)।

इजरायल ने अब ईरान के सैन्य ठिकानों पर किया हमला, ड्रोन और मिसाइल बनाने वाले सेंटर बर्बाद: चेतावनी में कहा- दोबारा हमें नुकसान पहुँचाया तो छोड़ेंगे नहीं

इजरायल और ईरान के बीच तनाव चरम पर है, और इस तनाव का जवाब देते हुए इजरायल ने शनिवार, 26 अक्टूबर 2024 को ईरान के विभिन्न शहरों में सटीक हमले किए। पिछले महीने 1 अक्टूबर को ईरान द्वारा इजरायल पर किए गए मिसाइल हमले के बाद से ही इस पलटवार की संभावना जताई जा रही थी। इस पलटवार में इजरायल ने ईरान के सैन्य ठिकानों को प्रमुखता से निशाना बनाया।

इजरायल ने इस मिशन को ‘Days of Repentance’ नाम दिया था। इस अभियान के दौरान इजरायल ने ईरान के अलावा इराक और सीरिया में भी हमले किए। हमलों के बाद इजरायल, ईरान और इराक ने अपनी हवाई सेवा अस्थायी रूप से बंद कर दी है। इजरायल के इस हमले में दर्जनों फाइटर जेट शामिल हुए, जिसमें एफ-15 और एफ-35 भी थे। इन फाइटर जेट्स का जवाब ईरान जैसे देशों के पास नहीं है।

तीन स्टेज में इजरायल ने बरसाई ईरान पर आफत

अमेरिकी और इजरायली अधिकारियों के मुताबिक, ईरान पर ये हमले तीन चरणों में किए गए। पहले चरण में इजरायल ने ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम को नष्ट किया, जिससे ईरान की रक्षा क्षमता कमजोर हो गई। इसके बाद, दूसरे और तीसरे चरण में इजरायली सेना ने ईरान के मिसाइल और ड्रोन प्रोडक्शन सेंटर पर निशाना साधा। इन हमलों का उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना था ताकि भविष्य में इजरायल पर होने वाले हमलों की संभावना को कम किया जा सके।

इजरायली सेना ने इस हमले के कई वीडियो भी जारी किए हैं। एक वीडियो में दिखाया गया कि इजरायल एयरफोर्स के कमांड सेंटर में कैसे अधिकारियों ने ईरान पर हमले का निर्देश दिया। इस वीडियो में इजरायली चीफ ऑफ जनरल स्टाफ हर्ज़ी हलेवी को कैंप राबिन स्थित अंडरग्राउंड सेंटर से इस अभियान की निगरानी करते हुए दिखाया गया है। इस कमांड सेंटर में बैठकर उन्होंने पूरे हमले की प्लानिंग और रणनीति तय की।

IDF का बयान, ईरान ने फिर से हिमाकत की, तो हम तैयार

हमले के बाद इजरायल डिफेंस फोर्स (IDF) के प्रवक्ता रियर एडमिरल डैनियल हैगरी ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा, “हमने ईरान के खिलाफ हमले पूरे कर लिए हैं। इजरायल की सुरक्षा के लिए तत्काल खतरों को खत्म कर दिया गया है। अगर ईरान आगे बढ़ने की गलती करता है, तो हम एक बार फिर जवाब देने के लिए तैयार हैं।”

उन्होंने कहा, “आज हमने ईरान और पूरी दुनिया को बता दिया कि इजरायल में कितनी ताकत है। हमारा संदेश साफ है कि जो भी हमारे देश को नुकसान पहुँचाने की कोशिश करेगा, उसे उसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।” हैगरी ने आगे कहा कि इजरायल ने यह दिखा दिया है कि वह अपने देश और अपने लोगों की सुरक्षा के लिए किसी भी हद तक जा सकता है, चाहे वह आक्रामक हो या रक्षात्मक रणनीति हो।

अमेरिका को पहले से पता थी हमले की योजना

हमले से पहले इजरायल ने अमेरिका को इसकी जानकारी दी थी। अमेरिकी नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के प्रवक्ता सीन सावेट ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इजरायल का यह कदम आत्म-रक्षा के अधिकार का प्रयोग है। हालांकि अमेरिका ने पहले इजरायल से यह अनुरोध किया था कि वह ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमला न करे। इजरायल ने इसका सम्मान करते हुए केवल सैन्य ठिकानों पर हमले किए और आम नागरिकों को नुकसान से बचाने का पूरा प्रयास किया।

हमलों के बाद ईरान और इराक दोनों देशों ने अपनी हवाई सेवाएँ अस्थायी रूप से रोक दी हैं। ईरान के नागरिक उड्डयन संगठन के प्रवक्ता ने बताया कि फिलहाल सभी उड़ानें रद्द कर दी गई हैं। वहीं, इराक ने भी सभी उड़ानों को निलंबित करने की घोषणा की है। इस कदम के पीछे पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने को मुख्य कारण बताया जा रहा है। इजरायल के इस कदम से क्षेत्र में खलबली मच गई है और कई देशों के बीच तनाव बढ़ गया है।

इजरायल ने अपने इस हमले से एक बार फिर दिखा दिया है कि वह अपनी सुरक्षा के लिए किसी भी खतरे को बर्दाश्त नहीं करेगा। ईरान पर तीन चरणों में हमले करके इजरायल ने न केवल अपनी सुरक्षा को मजबूत किया है बल्कि यह भी संकेत दिया है कि वह अपने दुश्मनों को करारा जवाब देने के लिए हमेशा तैयार है। अब देखना यह है कि इस हमले के बाद ईरान और अन्य संबंधित देश क्या रुख अपनाते हैं।

‘मोहल्ला खाली करके भागो’: अजरुद्दीन सहित 40-50 कट्टरपंथियों ने BJP पार्षद के पति को घोंपा चाकू, पथराव भी; पुलिस ने 4 को गिरफ्तार कर निकाला जुलूस

राजस्थान के भीलवाड़ा में पटाखा फोड़ने पर भाजपा नेता देवेंद्र सिंह हाड़ा को कट्टरपंथी मुस्लिमों के एक समूह ने चाकू मार दिया। इस हमले में देवेंद्र और उनका भतीजा योगेश हाड़ा उर्फ बबलू सहित तीन लोग घायल हो गए हैं। हमलावरों ने पथराव किया और तीन कारों को भी आग लगा दी। पुलिस ने FIR दर्ज करके चार आरोपितों को पकड़ लिया है और बाजार में उनका जुलूस निकाला।

पुलिस ने बताया कि हिंदू पक्ष के कुछ लोग पटाखे छोड़ रहे थे। इसको लेकर दूसरे समुदाय के लोगों ने आपत्ति जताई और उन पर पथराव और फिर हमला कर दिया। इस हमले में देवेंद्र सिंह हाड़ा को चोटें भी आई हैं। पुलिस ने बताया कि इस मामले में 25 लोगों को हिरासत में लिया है। इसके साथ ही इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।

घटना भीलवाड़ा शहर के भीमगंज थाना क्षेत्र की है। वहाँ भाजपा पार्षद मंजू देवी के पति देवेंद्र सिंह हाड़ा भीमगंज थाने के पास चाय की दुकान चलाते हैं। गुरुवार (24 अक्टूबर 2024) की देर शाम वे कुछ युवकों के साथ अपनी दुकान के बाहर पटाखे फोड़ रहे थे। इसी दौरान एक समुदाय विशेष के करीब 40-50 लोग मौके पर पहुँचे और पटाखे फोड़ने पर आपत्ति जताई।

देवेंद्र हाड़ा ने बताया कि दिवाली का माहौल है, इसलिए वे पटाखे जला रहे हैं। यह सुनकर अजहरुद्दीन नाम के एक मुस्लिम युवक ने चाकू निकाल लिया और उन पर हमला कर दिया। उसने चाकू देवेंद्र के पेट में घोंप दिया। जब हिंदू पक्ष के अन्य लोगों ने बीच-बचाव करने की कोशिश की तो उन पर भी हमला कर दिया गया। देवेंद्र और योगेश के अलावा आनंद शर्मा भी घायल हो गए।

कहा जा रहा है कि हमलावरों ने देवेंद्र सिंह हाड़ा को 3-4 बार चाकू घोंपा। वहीं, एंबुलेंस चालक अमित शर्मा और एक छात्र आदि शर्मा के साथ मारपीट की गई। घटना की जानकारी मिलते ही अन्य हिंदू और पुलिस वहाँ पहुँची तो हमलावर भाग गए। इसके बाद पुलिस ने घायलों को अस्पताल पहुँचाया। बड़ी संख्या में हिंदू अस्पताल पहुँचे और आरोपितों की गिरफ्तारी की माँग को लेकर जमकर हंगामा किया।

हमला और आगजनी के मामले में पुलिस ने चार रिपोर्ट दर्ज की है। देवेन्द्र सिंह हाड़ा ने अपनी शिकायत में कहा है कि वह अपनी चाय की दुकान पर दो लोगों के साथ पटाखे फोड़ रहे थे। उसी दौरान गुलजार नगर निवासी अजहरुद्दीन लोहार, उसका भाई शाहिद, फैजान, फरदीन, खालिक लोहार सहित 30-40 लोग आए और चाकू व अन्य हथियारों से हमला कर दिया।

इसी तरह पार्षद मंजू देवी हाड़ा ने भी रिपोर्ट दर्ज कराई। उन्होंने कहा कि मंगला चौक में जुनैद, जावेद, मोनू, युनूस, इमरान, जफर, ओमान, जुनैद, नोमान, फिरदौस, टीना, जरीना, मुमताज, बिलकिस आदि ने सरिये-डंडे और पत्थर लेकर उनके घरों पर हमला कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया है कि ये लोग मोहल्ला खाली करने की भी धमकियाँ दे रहे थे।

वहीं, मंगला चौक नागौरी मोहल्ला निवासी विनोद सोनी ने पुलिस को दी गई रिपोर्ट में कहा है कि रात करीब 11 बजे सलीम अंसारी, मोनू अंसारी, युनूस, इमरान, खालिद, बिलाल सहित कई मुस्लिम महिलाओं ने अपने घरों से पथराव किया। यह पथराव मंगला चौक के कई इलाकों में की गई है। वहीं, असलम शेख ने अपनी कार में आग लगाने की शिकायत दी है।

इस घटना को लेकर हिंदू संगठनों एवं भाजपा से जुड़े लोगों ने शुक्रवार (25 अक्टूबर) को शहर में विरोध प्रदर्शन किया। महापौर राकेश पाठक के नेतृत्व में भाजपा और निर्दलीय पार्षद एसपी धर्मेंद्र सिंह से मिले। उन्हें ज्ञापन देकर आरोपितों को जल्द गिरफ्तार करने की माँग की। नेताओं ने कहा कि पिछले कुछ समय से शहर में विशेषकर हिंदू त्योहारों पर सुनियोजित रुप से लगातार हमले हो रहे हैं।

हालात को देखते हुए पुलिस ने अब तक चार लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। इसमें चाकू मारने वाला अजरुद्दीन भी शामिल है। आरोपितों को लेकर पुलिस ने बाजार में जुलूस भी निकाला। इसके बाद किसी घटना को रोकने के लिए शहर में जगह-जगह पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। सीसीटीवी फुटेज और अन्य सबूतों के आधार पर उनकी गिरफ्तारी की गई है।

टाइट योनि से नहीं, ममता से भरी होती हैं जन्म देने वाली माँ: निया शर्मा के नाम एक मर्द का खुला खत

पहले एक फोटो देखते हैं। अश्लील शब्द को जो लोग ज्यादा ही दिल से लगाते हैं, उनका भी ख्याल रखते हुए इंसान की जगह जानवर की तस्वीर जानबूझ कर चुनी गई है। तस्वीर में एक कहानी है – जीवन श्रृंखला को आगे बढ़ाने की कहानी।

फोटो साभार: NADIS, Synergy Farm Health, Vecteezy

तस्वीर की सबसे बाईं ओर मादा जानवर का जननांग है। बीच में एक महिला पशु चिकित्सक उस जननांग में हाथ डाले हुई हैं। ध्यान से देखेंगे तो महिला पशु चिकित्सक के बाएँ हाथ में एक लंबी सूई जैसी कोई चीज भी नजर आएगी। यह सूई कुछ और नहीं बल्कि कृत्रिम गर्भाधान करने का एक टूल है। सबसे दाहिने देखेंगे तो जानवर के उसी जननांग से एक बच्चा निकल रहा है।

प्रिय निया शर्मा जी, नमस्कार

ऊपर जो ज्ञान की बात मैंने की, उम्मीद है आपको अश्लील नहीं लगी हो। बाकी अपना सब ठीक है, आपकी कुशलता की कामना भी करता रहता हूँ। आप मॉडल हैं, अदाकारा हैं। ग्लैमर की दुनिया में नौकरी करती हैं। अपने पेशे की वजह से लाखों-करोड़ों लोगों तक पहुँच है। इन्हीं लाखों लोगों में मैं भी हूँ। अच्छी लगती हैं आप मुझे। भगवान ने फुरसत में तराशा है आपको। विशेषण वाले शब्द ज्यादा लिखने पर सेक्सिस्ट का ठप्पा लगा दिया जाएगा, इसलिए छोड़ रहा हूँ… लेकिन हैं आप बहुत सुंदर।

मैं थोड़ा उम्रदराज हूँ। लेकिन आपसे न जाने क्यों, एक कनेक्शन सी फील होती है। पहले वाले हीरो-हिरोइन से वैसी फीलिंग कभी आई नहीं। इसमें मेरा नहीं, दोष सोशल मीडिया का है। आपकी किसी पोस्ट पर जब कॉमेंट करता हूँ तो लगता है आप उसे पढ़ रही हैं। बिजी हैं तो जवाब नहीं देती हैं लेकिन पढ़ तो रही होती हैं… तसल्ली होती है दिल में।

बस एक शिकायत है आपसे। आप कुछ बेचा मत कीजिए। बहुत चीप फील करता हूँ मैं। कहाँ आप, कहाँ बेचा-बेची का धंधा करने वाले लोग। 

मतलब ऐसा नहीं है कि उत्पाद बेचने में कोई बुराई है। जिस उत्पाद से समाज का लाभ हो, मनोरंजन हो, हँसी-ठिठोली हो, टाइमपास हो… ऐसे उत्पाद से भला किसको एतराज होगा। कॉन्डम का विज्ञापन तो आता ही है, बड़े से बड़ा स्टार इसमें अपना चेहरा दिखा चुके हैं। लेकिन आपको मेरी कसम! Please!

अब देखिए न, आप जैसी भोली-भाली औरत को फँसा लिया न योनि को टाइट करने वाले विज्ञापन में। जिस भगवान ने तराशा है आपको, कम से कम उन पर तो तरस खाइए आप। उन पर न सही, मेरे लिए ही सही!

एक और ज्ञान की बात सुनिए अपने हिंदुस्तान की। चाहता तो यह अमिताभ से लेके अनन्या पांडे तक को शेयर कर सकता था लेकिन सिर्फ आपको बता रहा हूँ। कनेक्शन है आपसे इसलिए। योनि का कसाव, टाइट योनि, वर्जिनिटी, 72 वर्जिन हूर आदि-इत्यादि का कॉन्सेप्ट अब्राहमिक सभ्यताओं से उपजे समाज और दिमाग की सोच है। हिंदुस्तान में ऐसी दकियानुसी सोच किसी की नहीं। जिसकी है भी, समझिए वो पथ-भ्रष्ट है।

आप सुंदर हैं, यह मैं आँख बंद करके भी कह सकता हूँ। आप समझदार भी हैं, ऐसा मेरा दिल बार-बार कहता है। न चाहते हुए भी 1% चांस लेकर ऊपर ट्वीट इसलिए लगा दिया हूँ कि कहीं आप भी तो पथभ्रष्ट नहीं हो गई हैं ग्लैमर की दुनियावी चकाचौंध में। इसलिए उपरोक्त ज्ञान के संबंध में साक्ष्य भी उपलब्ध करा दिए। कसी हुई योनियों के मकड़जाल में मत फँसिए। पत्थर में जान फूँकने वाले कलाकार पर माँ सरस्वती की कृपा आपसे भी अधिक रही है, इस सत्य से कैसे इनकार कर दूँ। जब उन महान कलाकारों ने योनि को लेकर संकुचित विचार नहीं रखे तो हमारी-आपकी क्या औकात।

आप पैसों की भी लालची नहीं हैं, ऐसा मेरा दिल कहता है। फिर भी पैसों के लिए दिल भटक जाए तो उसका भी उपाय है। योनि का कसाव इसके लिए एकमात्र रास्ता नहीं।

गुलाब कैसे खिलाएँ? गाजर की खेती कैसे करें? गौ माता की सेवा करने के क्या-क्या फायदे? हॉकी खेलें, तन-मन जगाएँ टाइप के विज्ञापन कीजिए प्लीज। पैसे भी मिलेंगे, समाज का भी फायदा होगा। दुनिया देखेगी, विश्वास कीजिए। और मैं तो रहूँगा ही आपको देखने के लिए!

आपको दिल से चाहने वाला

जानवर जैसा आतंकी नंगा बैठता था बगल में, बार-बार पूछता था- पीरियड कब खत्म होंगे: हमास के चंगुल से छूटी पीड़िता ने UN में सुनाई आपबीती, बताया- चेन से बाँधकर अकेले में रखा था

7 अक्तूबर 2023 को हमास आतंकियों ने इजरायल में हमला करके सैंकड़ों लोगों को मारा था और कई लोगों को बंधक बनाकर साथ ले गए थे। इन बंधकों में से एक एमित सौसाना (Amit Soussana) भी थीं। छुट्टी वाले दिन घर में बैठी सौसाना जानती भी नहीं थी कि कुछ देर में उनका घर खाक हो जाएगा और वो आतंकियों की गिरफ्त में होंगी।

अचानक गाजा से मिसाइलें आईं। कमरे में बम फटा और फिर आतंकी घर में घुस उन्हें घसीटकर अपने साथ ले गए। गाजा ले जाते वक्त उन्हें मारा गया, उनके प्राइवेट पार्ट छुए गए, उन्हें तड़पाया गया और गाजा पहुँचने के बाद फिर उनका यौन शोषण हुआ। तमाम प्रताड़नाएँ देने के बाद उन्हें संघर्ष विराम के बाद रिहा किया गया।

सौसाना अब उस जहन्नुम से आजाद हैं और अपने लोगों के बीच हैं। हाल में वह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा समिति के मंच पर दिखाई दीं। यहाँ उन्होंने सबको बताया कि आखिर हमास ने उनके साथ क्या-क्या किया था।

सौसाना के अनुसार, जब उन्हें बंधक बनाया गया था तब उन्हें एक ऐसे आतंकी के साथ अकेले रखा गया था जो राक्षसी जानवर जैसा दिखता था। उस आतंकी ने उनके साथ वीभत्सता की हद पार करते हुए उनका यौन शोषण किया था। उसने बंदूक की नोक दिखाकर उनके साथ हर हैवानियत की थी। वह याद करते हुए कहती हैं कि वो आतंकी उनके मुँह पर गंदी सांस लेता था, उनकी शर्ट उठाकर उन्हें बार-बार छूता था।

टाइम्स ऑफ इजरायल के अनुसार, उन्होंने कहा, “मेरे पैर चेन से बाँधे गए थे। आतंकी नंगा होकर उनके बगल में बैठता था, फिर मेरी शर्ट उठाता था, मुझे लगातार छूता था और पूछता रहता था तुम्हारे पीरियड कब खत्म होंगे।”

वह कहती हैं कि वो अच्छे से जानती थीं कि उसे उनके साथ क्या करना है, लेकिन बावजूद इसके वो कुछ नहीं कर सकती थीं। शोषण करने के बाद उन्हें रोने या उदास होने का हक भी नहीं था। उन्हें उस हैवान के साथ अच्छे से बर्ताव करना पड़ता था जो उनका उत्पीड़न करता था।

एमिट ने यूएन को बताया, “आज भी एक ऐसा दिन नहीं जाता कि मुझे वो घटिया आतंकी याद न आए कि उसने मेरे साथ क्या किया। मैं रोज याद करती हूँ कि अब मैं आजाद हूँ और वो मेरा कुछ नहीं कर सकता।”

सौसाना बताती हैं कि उस आतंकी के साथ कुछ दिन बिताने के बाद उन्हें दूसरे हमास आतंकियों के पास भेज दिया गया था। हालाँकि उन आतंकियों ने उन्हें प्रताड़ित किया, रस्सी पर लटकाकर मारा-पीटा, ऐसी सुरंग में ले गए जहाँ उन्हें लगा कि उन्हें जिंदा गाड़ा जाएगा… मगर फिर भी यहाँ वो ये शुक्र मनाती थीं कि कम से कम उनके साथ वो आतंकी नहीं है जिसने उनका यौन उत्पीड़न किया।

वह कहती हैं कि उन्हें ये सारी बातें बताते हुए बहुत पीड़ा है लेकिन वो बताएँगी क्योंकि उनका वादा था दूसरी बंधकों से। हमास आतंकियों की बर्बरता को याद वह कहती हैं कि वो शांत नहीं रह सकतीं क्योंकि अब भी कई बंधक गाजा में हैं।

बता दें कि सौसाना पहली महिला सर्वाइवर हैं जिन्होंने सार्वजनिक रूप से गाजा में हुए यौन उत्पीड़न को यूएन के सामने रखा।

अमन अंसारी ने हिंदू लड़की को घर में घुसकर पीटा, धर्म परिवर्तन कर निकाह का दबाव: डर के मारे 10वीं की परीक्षा छोड़ चुकी है पीड़िता, UP पुलिस ने दबोचा

मैनपुरी के कोतवाली क्षेत्र में मुस्लिम युवक अमन अंसारी हिंदू परिवार की नाबालिग बच्ची को धमका कर उस पर धर्म परिवर्तन कर निकाह करने का दबाव डाल रहा था। इस मामले में पुलिस ने आरोपित अमन अंसारी को उसके घर से गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।

बताया जा रहा है कि अमन अंसारी ने मंगलवार (22 अक्टूबर 2024) को किशोरी के घर में घुसकर उसे डंडों से भी पीटा था, साथ ही बात न मानने पर खुद की जान देने की भी धमकी दी थी। वो पीड़ित किशोरी को शारीरिक और मानसिक रूप से परेशान करता था, जिसकी वजह से पीड़िता और उसके परिवार को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। वो 5 अक्टूबर को भी किशोरी को अपने साथ लेकर जाने की कोशिश कर चुका था।

जानकारी के अनुसार, पीड़िता की माँ ने कोतवाली थाने में शिकायत दर्ज कराई, जिसमें बताया गया कि उनकी बेटी को अमन अंसारी की धमकियों के चलते स्कूल की परीक्षाएँ भी छोड़नी पड़ीं। वो बेटी पर निकाह के लिए दबाव डाल रहा था।

पीड़िता की माँ की तहरीर पर पुलिस ने मामले की प्राथमिकता से जाँच शुरू की। इसके बाद कोतवाली इंस्पेक्टर फतेह बहादुर सिंह के नेतृत्व में पुलिस की टीम ने आरोपित अमन अंसारी को उसके घर पर ही दबिश देकर गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद अमन अंसारी से पूछताछ की गई, जिसके बाद उसे न्यायालय में पेश किया गया। न्यायालय ने उसे जेल भेजने का आदेश दिया।

इंस्पेक्टर कोतवाली बहादुर सिंह ने बताया कि युवती और उसके परिवार को धमकाने के आरोप में अमन अंसारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई है। पीड़िता और उसका परिवार अब सुरक्षित है, और आरोपित को न्यायिक हिरासत में रखा गया है।

इस मामले में एसपी विनोद कुमार ने कहा कि पड़ोसी युवक द्वारा किशोरी के साथ छेड़छाड़ करने की शिकायत मिली है। आरोपित युवक को गिरफ्तार कर लिया गया है। उन्होंने कहा कि किशोरी का मेडिकल परीक्षण के साथ मजिस्ट्रेट के सामने बयान दर्ज करवाया जाएगा और आगे की कार्रवाई की जाएगी।

सलीम ने सोनिया को गर्भवती किया, करवा चौथ का व्रत रखवाया, उसी दिन मार कर जमीन में दफना दिया: 12वीं की हिंदू लड़की का ऐसे हुआ अंत

एक मुस्लिम लड़के के प्यार के फाँस में उलझकर एक हिंदू लड़की ने फिर अपनी जान गँवा दी। सोनिया। यही नाम है उस अभागिन लड़की का। घर वाले प्यार से उसे सोना कहकर बुलाते थे। सोनिया जिससे प्यार करती थी, उसे संजू बताती थी। हालाँकि, उसका असली नाम सलीम है। सलीम ने करवा चौथ के दिन सोनिया को मिलने के लिए बुलाया और हत्या करके लाश को दफना दिया।

सोनिया की उम्र 20 साल थी और 12वीं कक्षा में पढ़ती थी। दिल्ली के नांगलोई की रहने वाली सोनिया और संजू उर्फ सलीम के बीच दोस्ती हुई और फिर प्यार। वह घंटों-घंटों तक फोन पर बात करती। परिवार वाले जब उससे पूछते कि किससे बात कर रही हो तो वह कहती कि अपने ‘भूत’ से बात कर रही है। उसने अपने इंस्टाग्राम पर ‘I Love Bhoot’ लिख रहा था।

सोना ने अपने मोबाइल में भी सलीम का नंबर Bhoot नाम से सेव कर रखा था। हालाँकि, घरवाले जानते थे कि वह किसी से प्यार करती है, लेकिन वो ये नहीं जानते थे कि लड़का कौन है। कुछ समय बाद पता कि उस लड़के का नाम संजू है। इस बीच सोनिया की छोटी बहन उसके साथ संजू के घर चली गई। उसकी बहन कहती है, “जब हम घर गए, तब पता चला कि वह मुस्लिम है।”

परिवार के सामने संजू का भेद खुल गया था, लेकिन सोना अपनी दुनिया में मस्त थी। सोना के परिजनों ने उसे कई बार समझाया कि वह रिश्ता खत्म कर ले, लेकिन सोनिया तो किसी दूर की जादुई दुनिया में जी रही थी। परिजनों की बातें उसे अच्छी नहीं लगती। उसका भाई भी समझाता कि जिससे वह मिलती है वह ठीक लड़का नहीं है। उससे दूर रहे, लेकिन वह कहाँ मानने वाली थी।

उसे इस बात से मतलब नहीं था कि संजू है या सलीम, हिंदू है या मुस्लिम। वह साथ जीने-मरने का ख्वाब देखा करती थी। दोनों के बीच प्यार की कहानी आगे बढ़ती रही। प्यार के नाम पर दोनों के बीच जिस्मानी रिश्ते बनने लगे। सलीम उसका इस्तेमाल अपनी हवस की आग बुझाने के लिए करने लगा। इसका परिणाम ये हुआ कि सोनिया बिना शादी किए ही 7 महीने की गर्भवती हो गई।

सोनिया को सोशल मीडिया, खासकर इंस्टाग्राम पर ऐक्टिव रहने का बहुत शौक था। वह रील बनाती और उसे इंस्टाग्राम पर अपलोड करती रहती। उसके 6700 फॉलोअर थे। जिंदादिल सोनिया अब परेशान रहने लगी। बिना शादी के 7 महीना का गर्भवती होना इस समाज में कोई साधारण बात नहीं थी। परिवार के साथ-साथ समाज के ताने सबसे बर्दाश्त नहीं होते।

सोनिया ने अब सलीम पर शादी का दबाव बनाना शुरू कर दिया। सलीम टाल-मटोल करने लगा। लेकिन, प्यार में अंधी और अपनी स्थिति से मजबूर सोनिया को अब भी आस थी कि सलीम उसे अपना लेगा। उसने सलीम के नाम पर करवा चौथ का व्रत भी रखा और व्रत तोड़ने के लिए वह सलीम से मिलने भी गई, लेकिन लौटकर फिर कभी नहीं आ पाई। आई तो बस लाश।

सोनिया के घरवालों ने करवाचौथ के अगले दिन 21 अक्टूबर को उसके लापता होने की रिपोर्ट नांगलोई थाने में दर्ज कराई। भाई ने आरोपित संजू पर संदेह जताया। दिल्ली पुलिस ने जाँच शुरू की तो पता चला कि सोनिया को अंतिम कॉल संजू ने ही की थी। इस बीच सलीम बिना नंबर प्लेट की बाइक से पश्चिम विहार में घूम रहा था। इसी दौरा दिल्ली पुलिस ने उसे दबोच लिया।

सलीम के पास से पास पुलिस को सोनिया के पिता का आईडी कार्ड मिला। संदेह के आधार पर पुलिस ने संजू को हिरासत में लेकर पूछताछ की तो उसने वारदात कबूल कर ली। उसने बताया कि सोनिया की हत्या की साजिश उसने पहले रच ली थी। इसके लिए करवा चौथ का दिन तय किया था। उसी ने सोनिया को करवा चौथ व्रत रखने के लिए मनाया था।

सलीम ने बताया कि करवा चौथ का व्रत खुलवाने के नाम पर उसने सोनिया को बुलाया था। इसके बाद अपने दो दोस्तों- पंकज और ऋतिक के साथ किराए की एक कार में घुमाने के बहाने ले गया। सलीम ने पुलिस को बताया कि रोहतक और बहादुरगढ़ के बीच हाईवे पर सोनिया को अंदेशा हो गया था कि उसके साथ कुछ अनहोनी होने वाली है। इसके बाद उसने विरोध करना शुरू कर दिया।

सोनिया के विरोध को देखते हुए सलीम ने उसकी गला दबाकर हत्या कर दी। इसके बाद शव को ठिकाने लगाने के लिए रोहतक पहुँचे। वहाँ थाना बहु अकबरपुर क्षेत्र के मदीना गाँव के जंगलों में करीब 4-5 फुट गड्ढा खोदकर शव को दफना दिया। इसके बाद वे सभी दिल्ली लौट आए। इनमें से एक आरोपित मदीना गाँव का भाँजा है और वह कथुरा गाँव का रहने वाला है।

पुलिस ने सलीम की निशानदेही पर उसके दोस्त पंकज को गिरफ्तार कर लिया। रोहतक से शव को बरामद करके आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। दिल्ली पुलिस का कहना है कि संजू का असली नाम सलीम है, यह बात सोनिया जानती थी या नहीं, इस बात की जाँच की जा रही है। इस मामले का तीसरा आरोपित ऋतिक अभी फरार है। पुलिस उसकी तलाशी में लगातार दबिश दे रही है।

‘कनाडा में भारतीय छात्रों को बहका कर अपने साथ जोड़ते हैं खालिस्तानी आतंकी, माता-पिता भी रखें ध्यान’: हाई कमिश्नर रहे संजय कुमार वर्मा ने किया आगाह

कनाडा में भारत के पूर्व हाई कमिश्नर संजय कुमार वर्मा ने खुलासा किया है कि खालिस्तानी आतंकवादी भारतीय छात्रों और वहाँ के भारतीय समुदाय को गुमराह कर अपने टारगेट को पूरा करने के लिए उपयोग करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने भारतीय छात्रों के अभिभावकों को सतर्क रहने की सलाह दी है और छात्रों को अपने आस-पास के माहौल के प्रति जागरूक रहने का आग्रह किया है।

संजय कुमार वर्मा ने बताया कि, “कनाडा में इस समय खालिस्तानी आतंकवादियों और चरमपंथियों का भारतीय समुदाय, विशेष रूप से छात्रों पर खतरा मंडरा रहा है।” उन्होंने बताया साल 2023 के आँकड़ों के अनुसार, कनाडा में लगभग 3,19,000 भारतीय छात्र हैं, जो शिक्षा प्राप्त करने और बेहतर भविष्य की तलाश में वहाँ गए हैं। वर्मा ने इस बात पर जोर दिया कि छात्रों को आर्थिक तंगी और बेरोजगारी का लाभ उठाकर खालिस्तानी उन्हें गलत दिशा में धकेलने की कोशिश कर रहे हैं।

एनडीटीवी से बातचीत में संजय वर्मा ने कहा, “कनाडा की आर्थिक स्थिति और सीमित नौकरी के अवसरों का फायदा उठाते हुए इन छात्रों को पैसे और भोजन का लालच दिया जाता है, और धीरे-धीरे उन्हें भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल किया जाता है।”

संजय वर्मा ने एक चौंकाने वाला खुलासा करते हुए कहा कि छात्रों को भारतीय राजनयिक भवनों के बाहर जाकर भारत विरोधी नारे लगाने और भारतीय झंडे का अपमान करने के लिए उकसाया जाता है। इसका उद्देश्य होता है कि बाद में ये छात्र राजनीतिक शरण की माँग करें और यह कहें कि अगर वे भारत लौटते हैं, तो उन्हें सजा का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने बताया कि ऐसे कई मामलों में कुछ छात्रों को शरण भी मिल चुकी है।

वर्मा ने अभिभावकों से अपने बच्चों के संपर्क में रहने का आग्रह करते हुए कहा कि उन्हें नियमित रूप से बात करके उनकी स्थिति को समझने की कोशिश करनी चाहिए। उन्होंने कहा, “कनाडा में छात्रों पर जो निगेटिव बातें असर डालती हैं, उनसे वो गलत रास्तों पर जा सकते हैं। इसलिए अभिभावकों को चाहिए कि वे अपने बच्चों को सही मार्गदर्शन दें और उन्हें समझाएँ कि उनके द्वारा लिए गए फैसलों का उनके जीवन पर क्या प्रभाव पड़ सकता है।”

संजय कुमार वर्मा ने यह भी बताया कि भारत ने कनाडा को वहाँ सक्रिय आतंकी गुटों के बारे में सबूत दिए थे, लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा, “मेरे पास कनाडा में नियुक्ति के बाद से एक भी ठोस सबूत नहीं दिया गया है जो भारत सरकार के खिलाफ इन आरोपों को साबित कर सके। बल्कि, हमने खुद कनाडा को खालिस्तानी आतंकवादियों के खिलाफ सबूत दिए, जिन पर कोई कदम नहीं उठाया गया।”

इससे पहले, एएनआई से बातचीत में अपने एक डरावने अनुभव का जिक्र करते हुए वर्मा ने बताया कि जब वे अल्बर्टा में थे, तो उन पर एक खालिस्तानी द्वारा तलवार से हमला करने की कोशिश की गई। उन्होंने कहा, “दो-तीन बार ऐसे मौके आए जब मेरे शरीर के करीब तलवार आई। एक बार तो यह 2 से 2.5 इंच तक करीब आ गई थी। यह कोई कृपाण नहीं, बल्कि तलवार थी।”

भारत और कनाडा के बीच राजनयिक संबंधों में खटास तब और बढ़ गई, जब पिछले साल सितंबर में कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने यह आरोप लगाया कि भारतीय एजेंसियों ने खालिस्तानी आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भूमिका निभाई। भारतीय सरकार ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए खारिज कर दिया और कनाडा सरकार से पुख्ता सबूत माँगे। हालाँकि बाद में कनाडा ने कहा कि उसके पास कोई पुख्त सबूत नहीं है।