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हमास चीफ याह्या सिनवार को ढेर कर इजरायल ने गाजा में शांति का दिया खुला ऑफर, बोले नेतन्याहू- बंधकों को वापस करो, हथियार डालो, कल समाप्त हो जाएगा युद्ध

इजरायल में नरसंहार के मास्टरमाइंड याह्या सिनवार को ठिकाने लगाए जाने के बाद इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अपना बयान जारी किया है। नेतन्याहू ने कहा है कि सिनवार की मौत गाजा में चल रहे युद्ध का अंत नहीं बल्कि युद्ध के अंत की शुरुआत है।

बेंजामिन नेतन्याहू ने याह्या सिनवार के मारे जाने के बाद शुक्रवार (18 अक्टूबर, 2024) को एक वीडियो संदेश जारी किया। उन्होंने कहा, “एक साल पहले 7 अक्टूबर, 2023 को हमास के आतंकी सरगना याह्या सिनवार ने एक नरसंहार की शुरुआत की थी। यह इजरायल की आजादी और होलोकॉस्ट के बाद अब तक का सबसे खतरनाक हमला था।”

नेतन्याहू ने आगे बताया, “सिनवार के आतंकियों ने 1200 निर्दोष लोगों को मार दिया। इनमें बच्चे, बूढ़े, होलोकॉस्ट से बचने वाले लोग शामिल थे। उन्होंने महिलाओं का रेप किया, पुरुषों के सर काटे। उन्होंने बच्चों को जलाया और 251 लोगों को बंधक बना लिया। अब इस आतंकी हमले का सरगना मारा जा चुका है, याह्या सिनवार मर चुका है।”

बेंजामिन नेतन्याहू ने सिनवार की मौत के बारे में बताते हुए कहा, “उसे राफा के भीतर इजरायली सुरक्षा बलों के बहादुर जवानों ने मार गिराया। यह गाजा के भीतर युद्ध का अंत नहीं है बल्कि यह युद्ध के अंत की शुरुआत है। मेरा गाजा के लोगों के लिए एक सीधा संदेश है, यह युद्ध आज कल सकता है अगर हमास अपने हथियार डाल दे और हमारे बंधको को लौटा दे।”

प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने बताया कि हमास ने अभी 101 लोगों को बंधक बना रखा है, इनमें इजरायली नागरिकों के अलावा दूसरे देशों के नागरिक भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इजरायल सबको वापस छुडवा कर उनके घर पहुंचाएगा, यह उसकी गारंटी है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कोई हमास की मदद करेगा तो ढूंढ कर मारा जाएगा।

उन्होंने आरोप लगाया कि यहाँ ईरान ने एक आतंक की धुरी बनाई थी, जो अब खत्म हो रही है। उन्होंने कहा, “नसरल्लाह की मौत हो चुकी है, उसके डिप्टी मोहसिन की मौत हो चुकी है। हनियेह की मौत हो चुकी है और दाईफ की भी मौत हो चुकी है और अब सिनवार भी मारा जा चुका है। ईरान की आतंकी रिजीम जल्द ही खत्म होगी।”

इससे पहले बुधवार (17 अक्टूबर, 2024) को इजरायली सुरक्षा बलों (IDF) ने राफा के भीतर एक इमारत में हमास के मुखिया याह्या सिनवार को मार गिराया। याह्या सिनवार के मारे जाने का एक वीडियो भी सामने आया है। वीडियो में वह इजरायली सुरक्षाबलों से घिरा हुआ दिखाई पड़ता है।

सिनवार को जुलाई, 2024 में ही हमास का मुखिया बनाया गया था। सिनवार, इस्माइल हानियेह की मौत के बाद हमास का मुखिया बना था। खान युनिस के एक कैंप में पड़ा होने वाला सिनवार 7 अक्टूबर के हमले का मास्टरमाइंड था और हमास-ईरान को नजदीक लाने में उसकी प्रमुख भूमिका थी।

कहीं हिंदू लड़की का रेप, कहीं धर्म परिवर्तन का दबाव… कानपुर में ‘राज’ बन जफर ने तो पीलीभीत में ‘राहुल’ बन जावेद ने फँसाया: वीडियो से ब्लैकमेल कर रहे थे लव जिहादी

उत्तर प्रदेश में लव जिहाद के दो हालिया मामलों ने एक बार फिर समाज में चर्चा का विषय बना दिया है। दोनों ही घटनाओं में मुस्लिम युवकों ने अपनी पहचान छिपाकर हिंदू नाम से लड़कियों को प्रेमजाल में फंसाया और फिर उनका शोषण किया। पहली घटना पीलीभीत की है, जहाँ जावेद नाम के युवक ने ‘राहुल’ बनकर युवती से दोस्ती की। वहीं, कानपुर में जफर नाम के युवक ने खुद को ‘राज’ बताकर नाबालिग को अपनी शिकार बनाया। इन दोनों ही मामलों में युवकों ने दुष्कर्म के बाद पीड़िताओं को ब्लैकमेल किया और उनके अश्लील वीडियो बनाए।

पीलीभीत में राहुल बनकर जावेद ने किया लव जिहाद

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पीलीभीत में जावेद नाम के युवक ने अपना नाम ‘राहुल’ बताकर एक युवती से सोशल मीडिया पर दोस्ती की। होली के समय वह उससे मिलने आया और एक कैफे में ले जाकर उसका दुष्कर्म किया। उसने इस घिनौने कृत्य का वीडियो भी बनाया और युवती को धमकी दी कि अगर वह उसके साथ नहीं रहेगी, तो वह यह वीडियो वायरल कर देगा। इस धमकी के बाद जावेद ने कई बार युवती का शारीरिक शोषण किया।

रविवार (13 अक्टूबर 2024) को दशहरे के मेले में आरोपित जावेद युवती से मिलने आया और जबरन उसे अपने साथ ले जाने लगा। युवती के विरोध करने पर उसने उसे पीटा और गला दबाने की कोशिश की। इस दौरान जावेद ने अपना असली नाम और मजहब बताया और युवती पर इस्लाम मजहब अपनाने का दबाव बनाया। उसने धमकी दी कि अगर वह ऐसा नहीं करेगी, तो वह उसका वीडियो वायरल कर देगा। युवती के चिल्लाने पर आसपास के लोग इकट्ठे हो गए और जावेद मौके से भाग गया। बाद में युवती ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर पुलिस ने जावेद को गिरफ्तार कर लिया है।

कानपुर में राज बनकर जफर ने नाबालिग से किया रेप, मतांतरण की साजिश

दूसरी घटना कानपुर के बिधनू थाना क्षेत्र की है, जहाँ जफर नाम के युवक ने खुद को ‘राज’ बताकर एक 17 वर्षीय नाबालिग लड़की से दोस्ती की। एक दिन वह उसे स्कूल से घर छोड़ने के बहाने एक अनजान जगह ले गया और कोल्डड्रिंक में नशीला पदार्थ मिलाकर पिला दिया। इसके बाद उसने लड़की का अश्लील वीडियो बना लिया और उसे ब्लैकमेल करने लगा।

जब लड़की ने बात करना बंद कर दिया, तो जफर ने उसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। इसके बाद उसने लड़की पर मतांतरण का दबाव भी बनाया। वीडियो वायरल होने के बाद लड़की ने अपने परिजनों को घटना की जानकारी दी, जिन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने इस मामले में भी मामला दर्ज कर आरोपित जफर की तलाश शुरू कर दी है।

असली पहचान छिपाकर हिंदू लड़कियों को बनाया शिकार

पीलीभीत और कानपुर की घटनाओं में कई समानताएँ हैं। दोनों ही मामलों में आरोपियों ने पहले अपनी मजहबी पहचान छुपाई, लड़कियों को धोखे से प्रेमजाल में फंसाया और फिर दुष्कर्म किया। इसके बाद उन्होंने पीड़िताओं को अश्लील वीडियो के माध्यम से ब्लैकमेल किया और जबरन मतांतरण का दबाव बनाया। इन घटनाओं ने लव जिहाद जैसे गंभीर मुद्दे पर फिर से सवाल खड़े कर दिए हैं।

लव जिहाद के तहत अक्सर ऐसे मामले सामने आते हैं, जहाँ मुस्लिम युवक अपनी असली पहचान छिपाकर, लड़कियों को मानसिक और शारीरिक रूप से शोषण का शिकार बनाते हैं। इसके बाद उन पर मतांतरण का दबाव डालते हैं। उत्तर प्रदेश में लव जिहाद से जुड़े कई मामले समय-समय पर सामने आते रहे हैं, और सरकार ने इस तरह के मामलों पर सख्त कार्रवाई करने के लिए कई कदम उठाए हैं।

दोनों ही मामलों में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की है। पीलीभीत में पुलिस ने आरोपित जावेद को गिरफ्तार कर लिया है और कानपुर में जफर की तलाश की जा रही है। पुलिस ने पीड़िताओं के बयान और उनके परिवारों की शिकायतों के आधार पर गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है।

पत्नी सेक्स से करे इनकार, तो क्या पति के पास तलाक ही विकल्प: वैवाहिक बलात्कार पर सुप्रीम कोर्ट का सवाल, मैरिटल रेप को ‘अपराध’ बनाने के हक में नहीं केंद्र

सुप्रीम कोर्ट ने देश में मैरिटल रेप को अपराध घोषित करने की माँग करने वालों की दलीलें सुनना चालू कर दिया है। कोर्ट ने यह माँग करने वालों से पूछा है कि आखिर यह देश में विवाह को लेकर क्या स्थिति पैदा करेगा। इससे पहले केंद्र सरकार ने मैरिटल रेप को मान्यता देने का पक्ष लेने से इनकार किया है।

सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जे बी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच ने बुधवार (17 अक्टूबर, 2024) को मैरिटल रेप को अपराध घोषित करने की याचिकाएँ डालने वालों की दलीलें सुनना चालू किया और इस दौरान कई महत्वपूर्ण सवाल उठाए।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या पूछा?

सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि यदि वह उस कानून को खत्म कर दे, जिसके अंतर्गत पत्नियां अपने पति पर रेप का आरोप नहीं लगा सकतीं,तो क्या वह कोई नया अपराध परिभाषित कर रहा होगा। इसके अलावा कोर्ट ने इसे मैरिटल रेप घोषित करने के परिणामों पर भी चर्चा की।

जस्टिस जेबी पारदीवाला ने पूछा, “अगर पति सेक्स करने को कहता है और पत्नी मना कर देती है तथा वह मानती ​​है कि उसके पति को ऐसा नहीं करना चाहिए था। इसके बाद अगले दिन वह जाकर FIR भी दर्ज करा देती है कि ऐसा हुआ, तो आपका इस पर क्या नजरिया है। हम इस पर आपकी मदद चाहते हैं।”

मैरिटल रेप की माँग करने वालों की तरफ से पेश हुईं वकील करुणा नंदी ने इस पर कहा, “वर्तमान क़ानून सेक्स को लेकर मेरा ना कहने या फिर ख़ुशी से हाँ कहने का अधिकार छीन लेता है। कानून में दी गई छूट के कारण मैं (महिलाएँ) एक यौन वस्तु और कानूनी चीज बन कर रह गई हूँ।” करुणा नंदी ने दावा किया कि पितृसत्ता के खिलाफ एक लड़ाई है।

इस पर जस्टिस जेबी पारदीवाला ने बड़ा सवाल उठाया। उन्होंने कहा, “तो आपका तर्क है कि यदि बीवी सेक्स को लेकर ‘नहीं’ कह दे तो पति के पास केवल एक विकल्प तलाक दाखिल करना है।” इस पर करुणा नंदी ने कहा पति को पत्नी की हाँ का इंतजार करना चाहिए और अगर वह तलाक लेना चाहता है तो वह भी ले सकता है।

करुणा नंदी ने मैरिटल रेप को अपराध घोषित करने पर नया कानून बनाने के लिए सवाल पर कहा कि अभी के क़ानून के तहत ही यह किया जा सकता है। नंदी ने यह दलील भी दी कि किसी पति का अपनी पत्नी के साथ जबरदस्ती संबंध बनाना या फिर किसी दूसरे व्यक्ति का एक महिला के साथ संबंध बनाना एक समान हैं। नंदी ने नेपाल का उदाहरण भी दिया।

केंद्र ने क्या बताया था?

गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर ‘मैरिटल रेप’ को अपराध बनाने को अत्यधिक कठोर और असंगत बताया है। अपने हलफनामे में केंद्र सरकार ने कहा कि वैवाहिक बलात्कार कानूनी से अधिक सामाजिक मुद्दा है, जिसका सीधा असर आम समाज पर पड़ता है।

केंद्र ने तर्क दिया कि अगर ‘वैवाहिक बलात्कार’ को अपराध माना भी जाता है तो ऐसा करना सुप्रीम कोर्ट के बस की बात नहीं है। इस मुद्दे पर सभी हितधारकों से उचित परामर्श किए बिना या सभी राज्यों के विचारों को ध्यान में रखे बिना निर्णय नहीं लिया जा सकता।

केंद्र सरकार ने कहा कि विवाह में अपने जीवनसाथी से उचित यौन संबंध बनाने की निरंतर अपेक्षा की जाती है। ऐसी अपेक्षाएँ पति को अपनी पत्नी की इच्छा के विरुद्ध उससे यौन संबंध बनाने के लिए मजबूर करने का अधिकार नहीं देती हैं। केंद्र ने कहा कि इस तरह के कृत्य के लिए बलात्कार विरोधी कानूनों के तहत किसी व्यक्ति को दंडित करना अत्यधिक और असंगत हो सकता है।

अभी क्या है कानून?

अभी के कानून के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति अपनी पत्नी, जिसकी आयु 18 वर्ष से कम है, से उसकी सहमति के बगैर सेक्स करता है, तो इसे रेप नहीं माना जाता। भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 63 के तहत, जिसमें रेप को लेकर कानून बनाए गए हैं, उसमें इस समबन्ध में एक अपवाद जोड़ा गया है। यह अपवाद संख्या 2 के नाम से प्रचलित है। पत्नी की बगैर सहमति के सेक्स करने को मैरिटल रेप घोषित करने की माँग करने वाले इस अपवाद को समाप्त करने के लिए ही सुप्रीम कोर्ट पहुँचे हैं।

क्या होता है मैरिटल रेप?

दरअसल, पत्नी की अनुमति के बिना पति द्वारा जबरन शारीरिक संबंध बनाने को मैरिटल रेप या वैवाहिक बलात्कार कहा जाता है। इसे पत्नी के खिलाफ एक तरह की घरेलू हिंसा और यौन उत्पीड़न माना जाता है। कई देशों में इसके लिए कानून भी बनाए गए हैं। हालाँकि, भारत में वैवाहिक संस्था बचाने के नजरिए से इसे अपराध का दर्जा नहीं दिया गया है।

मैरिटल रेप को अपराध घोषित करने की माँग का लगातार विरोध भी होता आया है। राष्ट्रीय पुरुष आयोग की अध्यक्ष बरखा त्रेहान ने इससे विवाह पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंताएँ जताई हैं। उन्होंने इसको लेकर कहा, “आए दिन ऐसे मामले सामने आते रहते हैं, जिनमें पुरुषों को घरेलू मामलों में झूठा फँसाया जाता है। इस कारण से पुरुषों में आत्महत्या की दर भी बहुत अधिक बढ़ गई है। जब पुरुषों के खिलाफ इस सीमा तक पहले से ही दुराग्रह है तो ऐसे में वैवाहिक बलात्कार तो उसके खिलाफ एक बहुत बड़ा हथियार बन जाएगा।”

उन्होंने मैरिटल रेप की परिभाषा पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने इस संबंध में कहा, “आप ही बताएँ कि कैसे और कब कोई यह तय कर सकेगा कि बेडरूम में आखिर क्या हुआ था और इसकी सीमा में क्या-क्या आएगा? एक पति और पत्नी के बीच पचास तरह की लड़ाई होती है। ऐसे में कैसे तय हो पाएगा कि कब बलात्कार हुआ और कब आपसी सहमति से दोनों के बीच संबंध बने? यदि ऐसा ही रहेगा तो आज के युवा शादी करने से बचते फिरेंगे। वे शादी ही नहीं करेंगे, क्योंकि उन्हें इस बात का भय हमेशा रहेगा कि कब उन पर बलात्कारी होने का ठप्पा लग जाएगा?”

‘उन्हें पकड़ा जरूर, लेकिन मारा नहीं’: सरफराज-तालिब के ‘एनकाउंटर’ पर बोली रामगोपाल मिश्रा की विधवा, परिजन बोले- वे बिरयानी खाकर कुछ दिन में बाहर आ जाएँगे

उत्तर प्रदेश पुलिस ने गुरुवार (17 अक्टूबर 2024) को बहराइच में हुई एक मुठभेड़ के बाद तालिब और सरफराज को गिरफ्तार किया है। इस दौरान दोनों आरोपितों के पैर में गोली लगी है। पुलिस ने रविवार (13 अक्टूबर) को हुए रामगोपाल मिश्रा हत्याकांड में अब तक कुल 5 आरोपितों को गिरफ्तार करके उन पर NSA के तहत कार्रवाई का ऐलान किया है। हालाँकि रामगोपाल के परिजन व ग्रामीण इस कार्रवाई से संतुष्ट नहीं हैं। मुठभेड़ के बाद ऑपइंडिया ने रामगोपाल के गाँव रेहुआ से जमीनी हालातों का जायजा लिया।

एक और FIR, लगेगा NSA

रामगोपल हत्याकांड के बाद पुलिस नामजद व अज्ञात आरोपितों की तलाश में लगातार दबिश दे रही थी। इस बीच पुलिस ने तालिब और सरफराज सहित 5 आरोपतितों को गिरफ्तार किया। तालिब और सरफराज को जब हथियार बरामदगी के लिए ले जाया गया तो उन्होंने पुलिस पर फायर किया। जवाबी कार्रवाई में दोनों आरोपितों के पैर में गोली लगी। वायरल हो रहे एक वीडियो में दोनों आरोपितों को कराहते हुए और पुलिस से माफ़ी माँगते देखा जा सकता है। घटना के एक वीडियो में घायल तालिब और सरफराज को पुलिस के कंधों में देखा जा सकता है।

ये दोनों बार-बार पुलिस से कह रहे, “दोबारा ऐसी गलती नहीं करेंगे।” पुलिस ने दोनों को सरकारी वाहन में बिठाया और अस्पताल ले गई। पुलिस ने खुद पर हुए हमले की अलग से FIR तालिब और सरफराज पर दर्ज की है। इस FIR में हत्या के प्रयास सहित अन्य धाराएँ लगाई गईं हैं। इस मुठभेड़ के बहराइच की पुलिस अधीक्षक वृंदा शुक्ला ने बताया कि कुल 5 आरोपित गिरफ्तार किए गए हैं। इन सभी पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत कार्रवाई की जाएगी।

हाफ एनकाउंटर से संतुष्ट नहीं परिवार

तालिब और सरफराज से हुई मुठभेड़ व 5 आरोपितों की गिरफ्तारी के बाद रामगोपाल के परिवार ने पुलिस की कार्रवाई को असंतोषजनक बताया है। रामगोपाल की विधवा रोली मिश्रा ने गुरुवार (17 अक्टूबर 2024) को एक वीडियो जारी किया है। इस वीडियो में रोली मिश्रा ने पुलिस पर रिश्वत लेने और अपनी माँगों की अनदेखी का आरोप लगाया है। वीडियो में रोली ने कहा, “उन्हें पकड़े तो जरूर हैं लेकिन मारा नहीं गया है। हम लोगों को दिखा दिया गया है कि पैर पर गोली मारी गई है।”

ऐसा एनकाउंटर रामगोपाल के परिवार के लिए न्याय नहीं

एनकाउंटर के बाद ऑपइंडिया की टीम 17 अक्टूबर (गुरुवार) को रामगोपाल मिश्रा के गाँव रेहुआ पहुँची। गाँव में पुलिस की गाड़ियाँ लगातर हूटर बजा कर गश्त कर रहीं थीं। रामगोपाल मिश्रा के घर के चारों तरफ पुलिस और PAC के जवान तैनात कर दिए गए थे। किसी को भी घर के बाहर या अंदर आने-जाने की इजाजत नहीं थी। रामगोपाल के भाई हरिमिलन और परिजन राहुल मिश्रा ने हमें फोन पर बताया कि पुलिस के पहरे में वो भी कहीं निकल नहीं पा रहे हैं। मीडियाकर्मियों को भी पीड़ितों से बातचीत की अनुमति नहीं दी गई।

हमने रामगोपाल के घर के आसपास अन्य ग्रामीणों से बातचीत की। सड़क पर मौजूद कुछ ग्रामीणों ने हमें बताया कि वो आरोपितों को जीवित पकड़ने से खुश नहीं हैं। रामगोपाल के ही चचेरे भाई किशन मिश्रा ने कहा कि जिस हिसाब से उनके भाई को मारा गया उसके आगे ऐसे पैर में गोली वाली एनकाउंटर और गिरफ्तारियाँ न्याय नहीं माना जा सकता है। किशन मिश्रा ने आगे कहा, “ऐसा पहले होता था। बाबा की सरकार में ऐसा नहीं होता।” किशन मिश्रा का मानना है कि अब सरफराज और उसका परिवार आराम से जेल काटेगा और कुछ दिनों बाद बिरयानी खाकर छूट जाएगा।

घरों और बाजारों में टीवी से चिपके रहे लोग

दोपहर 3 बजे के आसपास अचानक ही महसी व आसपास यह खबर फैली थी कि रामगोपाल मिश्रा के कातिलों का पुलिस ने एनकाउंटर कर दिया है। इस खबर के बाद पूरे बहराइच में लोग टीवी पर ब्रेकिंग न्यूज़ देखने लगे। हमने महसी, हरदी और नथुरपुरवा आदि इलाकों सहित बहराइच शहर में भी देखा कि लोग घरों और दुकानों में टीवी पर एक-एक पल की खबर देख रहे थे। शुरू में लोगों को लगा कि सरफराज की मौत हो गई है, हालाँकि बाद में यह बात गलत निकली। फ़िलहाल एनकाउंटर को लेकर जिले में चर्चाओं का बाजार गर्म रहा।

हिंदू लड़की को मुस्लिम बनाने के लिए आशिक अंसारी ने किया अगवा, पीड़ित पिता ने बताया लव जिहाद: तनाव के बाद बरेली के गाँव में भारी पुलिस फोर्स तैनात

उत्तर प्रदेश में बरेली जिले के बिथरी चैनपुर क्षेत्र से एक और लव जिहाद का मामला सामने आया है, जहाँ मुस्लिम युवक आशिक अंसारी पर आरोप है कि उसने एक हिंदू युवती को बहला-फुसलाकर उसका अपहरण किया और जबरन धर्म परिवर्तन कराने की कोशिश की। इस घटना ने गाँव में तनाव का माहौल पैदा कर दिया है, जिसके चलते पुलिस ने सुरक्षा के लिए गाँव में फोर्स तैनात की है। फिलहाल आरोपित फरार है और युवती का भी कुछ पता नहीं चल पाया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बिथरी चैनपुर थाना इलाके की 18 वर्षीय युवती 14 अक्टूबर को अपने घर से किसी काम के लिए निकली और फिर वापस नहीं आई। परिजनों ने उसकी काफी खोजबीन की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। इसके बाद उसके पिता ने थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। हालाँकि, थोड़े समय बाद पता चला कि गाँव का ही युवक आशिक अंसारी उसे बहलाकर भगा ले गया है। युवती के पिता का आरोप है कि उनकी बेटी लव जिहाद का शिकार हुई है और आशिक ने उसे धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर करने का प्रयास किया है।

परिवार ने आरोप लगाया कि आशिक अंसारी के परिवार और उसके दोस्तों ने इस अपहरण में उसकी मदद की है। युवती के साथ घर से कुछ जेवरात और 10 हजार रुपये नकदी भी गायब थी। युवती के पिता ने पुलिस को बताया कि उनकी बेटी पूरी तरह से लव जिहाद के षड्यंत्र का शिकार हुई है और आशंका है कि उसका मतांतरण भी कराया जा सकता है।

इस घटना के बाद गाँव में हालात तनावपूर्ण हो गए हैं। हिंदू संगठनों ने इस घटना का कड़ा विरोध किया और युवती की तत्काल बरामदगी की माँग की। गाँव के लोग भी इस घटना से काफी आक्रोशित हैं, और हिंदू संगठनों ने मामले को गंभीरता से लेते हुए युवती की जल्द से जल्द बरामदगी की माँग की है।

पुलिस ने आशिक अंसारी, उसके परिवार और दोस्तों के खिलाफ अपहरण और जबरन धर्म परिवर्तन के आरोप में मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस का कहना है कि जाँच जारी है और आरोपितों की तलाश की जा रही है। पुलिस ने गाँव में किसी भी तरह की हिंसा को रोकने के लिए फोर्स तैनात कर दी है।

‘टुकड़े-टुकड़े कर रामगोपाल मिश्रा के शव को कर देते गायब’: फायरिंग के बीच हिंदू युवक को बचाने जो अब्दुल हमीद की छत पर पहुँचा, उसने बताया बहराइच के मुस्लिमों का प्लान

उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में रामगोपाल मिश्रा को रविवार (13 अक्टूबर 2024) को मुस्लिम भीड़ ने पुलिस की मौजूदगी में मार डाला था। यह हत्या तब हुई थी जब रामगोपाल मिश्रा माँ दुर्गा के विसर्जन यात्रा में शामिल हुए थे। आरोप है कि अब्दुल हमीद के घर में हुई उनकी हत्या के बाद मुस्लिम भीड़ शव को घर के अंदर खींच ले गई थी। वायरल हुए एक वीडियो में कुछ लोग बरसते पत्थर और गोलियों के बीच से छत से रामगोपाल की लाश को नीचे लाने की कोशिश कर रहे हैं। ऑपइंडिया ने रामगोपाल का शव लेकर बाहर लाने वाले व्यक्ति से बात की।

रामगोपाल का शव बाहर लाने वाले युवक का नाम किशन मिश्रा है। किशन रामगोपाल के चचेरे भाई हैं। दोनों एक साथ बचपन से ही खेलकूद कर बड़े हुए और एक ही साथ पढ़े-लिखे हैं। शव बाहर निकालने में किशन का सहयोग राजन मिश्रा ने किया था। किशन से हमारी मुलाकात गुरुवार (17 अक्टूबर 2024) को उनके गाँव रेहुआ में हुई। तब पूरे गाँव में पुलिस का कड़ा पहरा था। किशन खुद ही जैसे-तैसे बाहर निकल कर हमसे बात कर पाए। हमने किशन की इच्छा के मुताबिक अँधेरे में बात की।

एक तरफ से मुस्लिमों की पत्थरबाजी, दूसरी तरफ से पुलिस का लाठीचार्ज

किशन मिश्रा ने हमें बताया कि शुरुआत में हंगामा हुआ और उसी समय पुलिस ने विसर्जन जुलूस पर लाठीचार्ज कर दिया। इसी लाठीचार्ज के बाद एकजुट होकर चल रहा हिन्दू समाज तितर-बितर हो गया और मुस्लिम भीड़ ने रामगोपाल मिश्रा को घर के अंदर खींच लिया। जब किशन मिश्रा अपने चचेरे भाई को छुड़वाने के लिए वापस लौटे तो उनको 2 तरफा प्रतिरोध का सामना करना पड़ा। पहले गोलियों और पत्थर बरसा रही मुस्लिम भीड़ का तो दूसरा लाठीचार्ज कर रहे पुलिस बल का।

किशन का दावा है कि वो कई बार पुलिस वालों से ये कह कर मदद माँगते रहे कि रामगोपाल को अंदर खींच लिया गया और उसे बाहर निकालने में सहयोग किया जाए। इस गुहार का कोई फर्क नहीं पड़ा। जब पुलिस से कोई सहयोग नहीं मिला तब किशन मिश्रा ने खुद ही अपने 2 सहयोगियों के साथ मुस्लिम भीड़ से रामगोपाल को बचा कर लाने का संकल्प लिया। इन 2 सहयोगियों में एक किशन के ही घर के सदस्य राजन मिश्रा थे। किशन दावा करते हैं कि अगर पुलिस ने हिन्दुओं पर ही जोर दिखाने के बजाय मदद की होती तो शायद रामगोपाल आज जीवित होते।

पड़ोसी हिन्दू का घर खुलवा कर पहुँचे अब्दुल की छत पर

किशन मिश्रा ने हमें आगे बताया कि रामगोपाल की हत्या अब्दुल हमीद के छत पर हुई थी। उसकी छत पर पहुँचना आसान नहीं था। रास्ते में लाठीचार्ज से भाग रही भीड़ थी। सामने पुलिसकर्मी खड़े थे और पीछे से मुस्लिम भीड़ पत्थर और गोलियाँ चला रही थी। ऐसे में उन्होंने सड़क मार्ग के बजाय छतों से रामगोपाल तक पहुँचने का निर्णय लिया। अब्दुल हमीद के घर के पास ही एक हिन्दू का घर था। उसे बड़ी मिन्नत करके खुलवाया गया। फिर उनकी छत से दूसरी छत होते हुए अब्दुल की छत पर किशन और राजन पहुँच गए।

किशन ने बताया कि इतने छोटे से ही रास्ते में उनको व राजन को कई बार गोलियों और पत्थरों से खुद को बचाना पड़ा। पर किशन अब्दुल हमीद की छत पर पहुँचे तब वहाँ रामगोपाल अचेत हालत में पड़े थे। जैसे ही उन्होंने राजन मिश्रा के साथ मिल कर रामगोपाल को हाथ और पैर पकड़ कर उठाया वैसे ही मुस्लिम भीड़ ने उन पर हमला कर दिया। इस हमले को अब्दुल हमीद का बेटा सरफराज लीड कर रहा था। उसने दीवाल की आड़ में छिप कर राजन और किशन के साथ रामगोपाल के अचेत शरीर को भी निशाना साध कर गोलियाँ मारी।

ईंट फेंक कर गिराई सरफराज की बंदूक

किशन मिश्रा ने बताया कि सरफराज द्वारा दागी गई पहली गोली निशाने पर नहीं लगी वर्ना शायद उनका भी शव रामगोपाल की ही तरह अब्दुल हमीद के घर में मिलता। पहली गोली चलने के बाद किशन और राजन ने रामगोपाल की अचेत देह को नीचे रखा और छत से एक ईंट लेकर सरफराज की तरफ फेंकी। यह ईंट निशाने पर लगी और सरफराज के हाथों से बंदूक छूट कर नीचे गिर गई। जब तक सरफराज संभल कर फिर से गोलियाँ बरसाने की हालत में आता तब तक किशन और राजन मिल कर रामगोपाल को बाहर निकाल चुके थे।

किशन मिश्रा के अनुसार सरफराज के साथ उसके अब्बा अब्दुल हमीद और भाई तालिब और फहीम भी हिंसा में पूरी तरह से एक्टिव थे। जब सरफराज गोली चला रहा था तब ये सब अन्य मुस्लिम भीड़ के साथ मिल कर पत्थरबाजी कर रहे थे। बकौल किशन घर के बाहर हिन्दू श्रद्धालुओं द्वारा मच रहे शोर से भी मुस्लिम भीड़ का ध्यान भंग हो रहा था वर्ना वो और राजन भी रामगोपाल की ही तरह अब्दुल हमीद और उसके साथियों के हाथों मारे जाते।

लाश को गायब करने की थी साजिश

किशन मिश्रा दावा करते हैं कि अब्दुल हमीद और उसके गिरोह द्वारा रामगोपाल के शव को गायब करने की थी तैयारी। उन्होंने बताया कि अगर वो और राजन मिल कर अब्दुल हमीद के घर से रामगोपाल का अचेत शरीर बाहर न लाते तो शायद यह केस हत्या नहीं बल्कि गुमशुदगी का चल रहा होता। बकौल किशन तब पुलिस भी यही कुतर्क देती कि रामगोपाल की हत्या नहीं हुई बल्कि वो कहीं लापता हो गया है और सभी कातिल कानून के दायरे में आने से बच जाते।

किशन मिश्रा हमें आगे बताते हैं कि अब्दुल हमीद ही नहीं बल्कि महराजगंज में रहने वाले मुस्लिम समुदाय के तमाम घरों में न सिर्फ धारदार हथियारों बल्कि अवैध बंदूकों का जखीरा मौजूद है। उन्हें लगता है कि रामगोपाल की लाश को टुकड़ों-टुकड़ों में काट कर कहीं ठिकाने लगा दिया जाता। इसके बाद रामगोपाल दुनिया के लिए एक रहस्य हो जाते और घोषणा की जाती कि हिंसा में नाम आने की वजह से वो कहीं फरार हो गए जो वापस लौट कर नहीं आए।

पैदल ही अचेत देह को लेकर दौड़ते रहे लोग

किशन का दावा है कि जब वो रामगोपाल के अचेत शरीर को निकाल कर बाहर आए तब उन्हें लाख मिन्नत के बावजूद पुलिस वालों ने कोई गाड़ी अस्पताल ले जाने के लिए नहीं दी। लाठी खाया हिन्दू श्रद्धालु काफी दूर तक रामगोपाल को लेकर सड़क पर अस्पताल की तरफ दौड़ता रहा। ऑपइंडिया के पास इस मौके का वीडियो मौजूद है जिसमें एक पुलिसकर्मी भी दिख रहा। जैसे-तैसे वो रामगोपाल को अस्पताल पहुँचा पाए जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

किशन का मानना है कि अगर पुलिस ने तत्काल वाहन अपने वाहन को साथ भेजा होता तो शायद रामगोपाल की जान बच सकती थी। किशन ने हमें यह भी बताया कि पुलिसकर्मियों की इन करतूतों की शिकायत उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पहुँचा दी है। हमसे बात करते हुए किशन मिश्रा भावुक हो गए। उन्होंने अंत में कहा कि कातिलों ने न सिर्फ उनका चचेरा भाई बल्कि सबसे अच्छा दोस्त भी छीन लिया। किशन ने यह भी कहा कि रामगोपाल के साथ अगर उनके प्राण भी निकल जाते तो उसका कोई अफ़सोस न होता। रामगोपाल और किशन मिश्रा एक ही साथ कैटरिंग में खाना बनाने का काम करते थे।

‘शंकर भगवान ल*@’: हिंदू देवता को गाली देते कॉन्ग्रेस MLA का वीडियो वायरल, भाजपा नेता बोले- यह सनातन खत्म करने वाली मानसिकता

मध्य प्रदेश के एक कॉन्ग्रेस विधायक ने हिन्दुओं के आराध्य भगवान शिव को लेकर गालियाँ बकीं। उन्होंने भगवान शिव का नाम लेते हुए अश्लील संदर्भ दिए। कॉन्ग्रेस विधायक बाबू जंडेल का यह करते एक वीडियो वायरल हो रहा है। विश्व हिन्दू परिषद् ने उनके खिलाफ FIR दर्ज करवाई है। विधायक का दावा है कि वीडियो के साथ छेड़छाड़ हुई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मध्य प्रदेश के श्योपुर से कॉन्ग्रेस के विधायक बाबू मीणा जंडेल ने भगवान शिव को लेकर अभद्र टिप्पणियाँ की। उनका ऐसा करते हुए एक वीडियो भाजपा मध्य प्रदेश ने एक्स (पहले ट्विटर) पर साझा किया है। इस वीडियो में बाबू जंडेल किसी को कुछ समझा रहे हैं।

संभवतः वह नशे में हैं और कुछ बोल रहे हैं। वीडियो में वह तीन चार बार ‘भगवान शंकर’ शब्द बोलते हैं और उसके साथ गालियाँ बकते हैं। वह इस दौरान अपने हाथों से कुछ अश्लील इशारे भी करते हैं। उनका यह 11 सेकंड का वीडियो अब वायरल है। भाजपा ने कहा है कि कॉन्ग्रेस नेता हिन्दू विरोधी हैं।

बाबू जंडेल का यह वीडियो वायरल होने के बाद उनके खिलाफ विश्व हिन्दू परिषद ने श्योपुर में FIR दर्ज करवाई है। विश्व हिन्दू परिषद ने कहा है कि बाबू जंडेल के बयान से हिन्दुओं की भावनाएँ आहत हुई हैं। उन्होंने इस मामले में बाबू जंडेल के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की माँग की है।

बाबू जंडेल के खिलाफ श्योपुर में इसके बाद कई धारों में मामला दर्ज हुआ है। भाजपा इंदौर के कार्यकर्ताओं ने उनका पुतला भी फूँका है। बाबू जंडेल का मुंह काला करने की बात भी हिन्दू कार्यकर्ताओं ने कही है। उनके खिलाफ कार्रवाई की माँग उज्जैन के महाकाल मंदिर के पुजारी महेश शर्मा ने भी की है।

मध्य प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष और खजुराहो से सांसद वीडी शर्मा ने भी बाबू जंडेल के इस बयान की निंदा की है। उन्होंने कहा, “कॉन्ग्रेस विधायक बाबू जंडेल का भगवन शंकर को गाली देना सनातन को खत्म करने वाली मानसिकता दिखाता है। मैं राहुल गाँधी और मल्लिकार्जुन खरगे से पोछना चाहता हूँ कि यह कॉन्ग्रेस की मोहब्बत की दुकान है या गाली की दुकान है।”

वीडी शर्मा ने इस मामले में कॉन्ग्रेस से पूछा है कि वह क्या कार्रवाई कर रहे हैं। उन्होंने मध्य प्रदेश के डीजीपी से इस मामले में संज्ञान लेने को कहा है। भाजपा के अन्य कई नेताओं ने भी बाबू जंडेल के खिलाफ कार्रवाई की माँग की है।

वहीं विधायक बाबू जंडेल ने कह है कि यह वीडियो पुराना है और इसे उन्हें बदनाम करने के लिए छेड़छड के बाद वायरल किया गया है। बाबू जंडेल ने कहा है कि वह ऐसी बात कभी नहीं कह सकते। वहीं कॉन्ग्रेस ने दावा किया कि यह वीडियो पाँच साल पुराना है।

बांग्लादेश को दिए गौरव के कई क्षण, पर अब अपने ही मुल्क नहीं लौट पा रहे शाकिब अल हसन: अंतिम टेस्ट पर भी संशय, जानिए वजह

बांग्लादेश के दिग्गज क्रिकेटर शाकिब अल हसन ने अपने देश लौटने से इनकार कर दिया है। उन्हें ढाका में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ अपने टेस्ट करियर का आखिरी मैच खेलना था, लेकिन उनके खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शनों के कारण वे दुबई में रुक गए। दरअसल, ढाका में उनके खेलने के खिलाफ इस्लामी कट्टरपंथी प्रदर्शन कर रहे थे, क्योंकि वो शेख हसीना की सरकार के समय सांसद थे।

बांग्लादेश के युवा और खेल मामलों के सलाहकार ने भी उन्हें सलाह दी कि वे देश न लौटें, ताकि कोई अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो। इसके अलावा, ढाका में स्टेडियम के बाहर उनके खिलाफ प्रदर्शन हो रहा था, जिससे उनकी सुरक्षा को खतरा माना जा रहा था। शाकिब के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट करियर का अंत अब बिना आखिरी टेस्ट खेले ही हो सकता है। उनके देश वापसी को लेकर फिलहाल कोई स्पष्टता नहीं है, और वे दुबई से अमेरिका लौट सकते हैं।

बता दें कि बांग्लादेश के सबसे अनुभवी और प्रतिष्ठित क्रिकेटरों में से एक, शाकिब ने हाल ही में टी-20 अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लिया था और भारत के खिलाफ दो टेस्ट मैचों की सीरीज के बाद अपना आखिरी मैच बांग्लादेश में खेलने के लिए बोर्ड से गुहार लगाई थी।

साकिब ने ESPNcricinfo को एक संदेश में यह स्पष्ट किया कि वे फिलहाल अपने देश वापस नहीं आ रहे हैं। शाकिब ने कहा, “मुझे नहीं पता कि मैं अब आगे कहाँ जाऊँगा, लेकिन यह लगभग तय है कि मैं घर नहीं जाऊँगा।” उन्होंने बताया कि वे बांग्लादेश में जारी विरोध प्रदर्शनों के चलते अपने देश वापस जाने से कतरा रहे हैं, जहाँ उन्हें एक हत्या के मामले में आरोपित बनाया गया है। इस हत्या का आरोप उनपर आदाबोर पुलिस स्टेशन द्वारा दर्ज की गई एक एफआईआर के तहत लगाया गया है, जो हाल ही के राजनीतिक विरोध प्रदर्शनों से संबंधित है।

शाकिब बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी आवामी लीग की तरफ से सांसद थे। शेख हसीना को सत्ता से इस्लामी कट्टरपंथियों ने आंदोलनों की आड़ में सत्ता से हटा दिया, जिसके बाद से वो भारत में हैं। इसके बाद से अवामी लीग के नेताओं, कार्यकर्ताओं के खिलाफ बड़े पैमाने पर अभियान चलाया गया और हिंदुओं को भी निशाना बनाया गया। इन घटनाओं के पहले से ही साकिब बांग्लादेश में ही नहीं थे, फिर भी उनके खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया है।

हालाँकि बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) ने अभी तक उन्हें राष्ट्रीय टीम के लिए खेलने की अनुमति दी है, जब तक कि उनके खिलाफ आरोप सिद्ध नहीं होते। लेकिन बांग्लादेश के युवा और खेल मामलों के सलाहकार असिफ महमूद ने साकिब को सलाह दी थी कि वे देश न लौटें। महमूद ने AFP को बताया, “मैंने शाकिब को सुझाव दिया है कि वे बांग्लादेश न आएँ, ताकि कोई अप्रिय स्थिति न पैदा हो। यह फैसला खिलाड़ियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और देश की छवि को बचाने के लिए लिया गया है।”

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में साकिब की उपलब्धियाँ रही हैं शानदार

शाकिब अल हसन का क्रिकेट करियर बेहद शानदार रहा है। वे दुनिया के बेहतरीन ऑलराउंडरों में से एक माने जाते हैं। उन्होंने बांग्लादेश के लिए टेस्ट, वनडे और टी-20 तीनों प्रारूपों में जबरदस्त प्रदर्शन किया है।

  • टेस्ट क्रिकेट में शाकिब ने 71 मैच खेले हैं, जिसमें उन्होंने 4609 रन बनाए हैं और 246 विकेट लिए हैं। उनके नाम पर टेस्ट में 5 शतक और 31 अर्धशतक दर्ज हैं। गेंदबाजी में उन्होंने 19 बार 5 विकेट लिए हैं, तो मैच में 10 विकेट लेने का कारनामा भी 2 बार कर चुके हैं।
  • वनडे क्रिकेट में शाकिब ने 247 मैचों में 7,570 रन बनाए हैं और 317 विकेट लिए हैं। उन्होंने वनडे में 9 शतक और 56 अर्धशतक बनाए हैं। गेंदबाजी में उन्होंने वनडे में 10 बार पारी में 4 विकेट और 4 बार पारी में 5 विकेट लेने का कारनामा भी किया है।
  • टी-20 अंतरराष्ट्रीय में साकिब ने 129 मैचों में 2,551 रन बनाए और 149 विकेट लिए हैं, जो उन्हें इस प्रारूप का भी एक बेहतरीन खिलाड़ी साबित करते हैं। उनका 17 साल से ज्यादा का करियर दुनिया के किसी भी खिलाड़ी की तुलना में अधिक है। वो अभी मौजूदा समय में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले खिलाड़ी भी हैं।

शाकिब का बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों में जबरदस्त प्रदर्शन उन्हें शानदार खिलाड़ी बनाता है। वे कई बार आईसीसी की रैंकिंग में नंबर 1 ऑलराउंडर रह चुके हैं और बांग्लादेश को कई मैच जिताने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

करियर का आखिरी मैच खेलने की मिली थी अनुमति

शाकिब को बांग्लादेश की टेस्ट टीम में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ होने वाले आगामी टेस्ट के लिए शामिल किया गया है, जो उनके करियर का आखिरी टेस्ट हो सकता है। हालाँकि, उनके देश लौटने की संभावना काफी कम है। चयन समिति के प्रमुख गाजी अशरफ हुसैन ने कहा कि BCB ने शाकिब को चुनने के लिए “ग्रीन सिग्नल” दिया था, लेकिन अब तक उन्हें बोर्ड से कोई नई जानकारी नहीं मिली है।

शाकिब को बांग्लादेश में सुरक्षित वापसी का भरोसा दिया गया था, लेकिन छात्रों के एक समूह ने उनके खिलाफ विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दी है। ‘मीरपुर छात्र जनता’ नाम के ग्रुप ने ऐलान किया है कि वो साकिब की देश वापसी का विरोध करेगा। इसके चलते शाकिब को दुबई में रुकने के लिए कहा गया है, जहाँ वे न्यूयॉर्क से लौटते हुए ट्रांजिट में थे। भले ही शाकिब की फ्लाइट गुरुवार (17 अक्टूबर 2024) शाम को ढाका के लिए थी, लेकिन वो नहीं पहुँचे। यहाँ से उनके वापस अमेरिका जाने की उम्मीद है।

शाकिब अल हसन के खिलाफ बांग्लादेश में प्रदर्शन, फोटो साभार: ESPNCricinfo

इन घटनाक्रमों को देखते हुए शाकिब अल हसन के लिए अब आगे की राह मुश्किल नजर आ रही है। उनके खिलाफ हत्या का मामला और देश में चल रही राजनीतिक अस्थिरता ने उनकी वापसी पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। बांग्लादेश के युवाओं और खेल मामलों के सलाहकार असिफ महमूद ने शाकिब को पहले ही यह सलाह दे दी है कि वे बांग्लादेश न लौटें। शाकिब का बांग्लादेश के क्रिकेट में योगदान अमूल्य है, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए यह कहना मुश्किल है कि वे कब और कैसे अपने देश लौटेंगे।

हैदराबाद के मंदिर में तोड़फोड़ करने के लिए मुनव्वर जमा ने मुस्लिमों को उकसाया, खुद को कहता है मोटिवेशनल स्पीकर: 2 अन्य पर भी FIR

हैदराबाद पुलिस ने मुत्यालम्मा मंदिर में हुई तोड़फोड़ की घटना मुंबई के मोटिवेशनल स्पीकर मुनव्वर ज़मा और दो अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। इन पर नफरत फैलाने और धार्मिक भावनाएँ भड़काने का आरोप है। इस मामले में अब्दुल रशीद बशीर अहमद और रेजिमेंटल बाज़ार में मेट्रोपोलिस होटल के प्रबंधक एवं मालिक रहमान को गिरफ्तार किया गया है।

अधिकारियों ने बताया कि पर्सनालिटी डेवलपमेंट पर एक महीने तक चलने वाले सत्र के बहाने मुनव्वर जमा प्रतिभागियों के बीच हिंदुओं के खिलाफ नफरत को बढ़ावा दे रहा था। उसने दंगे भड़काने के लिए भी वह लोगों को उकसाया था। गोपालपुरम थाने के सब-इंस्पेक्टर एल सुरेश ने कहा, “उसने सलमान को मुत्यालम्मा मंदिर में मूर्ति को नुकसान पहुँचाने के लिए भी उकसाया।”

मुनव्वर जमा ने अपनी कार्यशाला आयोजित करने के लिए जरूरी अनुमति नहीं ली थी। इसे आयोजित करने में बशीर और रहमान ने मदद की थी। मुनव्वर जमा इंग्लिश हाउस एकेडमी का संस्थापक है और वह खुद को एक मोटिवेशनल स्पीकर और पर्सनालिटी डेवलपमेंट ट्रेनर बताता है। होटल में आयोजित कार्यशाला में कुल 151 लोग शामिल थे।

इनमें से मुत्यलम्मा मंदिर में देवी की प्रतिमा को लात मारकर खंडित करने का एक आरोपित सलीम सलमान भी था। पुलिस के अनुसार, इस कार्यशाला में शामिल लोग भारत के अलग-अलग हिस्सों से आए थे। आरोपित सलीम सलमान भी मुंबई से आया था। पेशे से कंप्यूटर इंजीनियर सलीम सलमान ने 14 अक्टूबर को मंदिर में घुसकर देवी दुर्गा की मूर्ति को क्षतिग्रस्त कर दिया था।

पुलिस फिलहाल ज़मा और प्रतिभागियों की पृष्ठभूमि की जाँच कर रही है। जाँच की निगरानी कर रहे शहर के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया, “हम कॉन्फ्रेंस की रिकॉर्डिंग, प्रतिभागियों को वितरित की गई सामग्री और कई अन्य विवरणों की भी जाँच कर रहे हैं।” उन्होंने कहा कि होटल के सभी 49 कमरे उपस्थित लोगों के लिए आरक्षित थे।

सलीम सलमान वह भगोड़े जाकिर नाइक सहित अनय इस्लामी कट्टरपंथियों का वीडियो देखता रहता था। इसके बाद वह कट्टरपंथी बन गया था। पुलिस ने मंदिर में मूर्ति को खंडित करने के आरोप में उसे 16 अक्टूबर को गिरफ्तार कर लिया था। इससे पहले वह साल 2022 में मुंबई के गणेश पूजा में तोड़फोड़ और श्रद्धालुओं से मारपीट कर चुका था।

दरअसल, सलीम सलमान मस्जिद जाते समय मंदिर को निशाना बनाया था। आरोपित ने पूछताछ में पुलिस को बताया कि वह सिकंदराबाद के ‘सिने पुलिस होटल’ में ठहरा हुआ था। आरोपित की जानकारी के आधार पर पुलिस ने 50 कमरों वाले होटल पर छापा मारा, जहाँ पता चला कि यह होटल ज्यादातर चोरों द्वारा किराए पर लिया जाता था।

पुलिस ने आगे बताया कि सलीम सलमान के साथ और भी असामाजिक तत्व मंदिर पर हमला कर रहे थे, लेकिन बाकी सभी भाग गए। बता दें कि सोमवार (14 सितंबर 2024) को तेलंगाना के कुर्मागुड़ा क्षेत्र में मुत्यालम्मा मंदिर की मूर्ति तोड़े जाने के बाद सिकंदराबाद में तनाव पैदा हो गया, जिससे स्थानीय हिंदू निवासियों में गुस्सा और विरोध भड़क गया।

यह घटना पास के पासपोर्ट कार्यालय के पास की है। घटना के दौरान लोगों ने इस कट्टरपंथी को स्थानीय लोगों ने तुरंत पकड़ लिया। बाद में उसे मार्केट पुलिस स्टेशन की हद में पुलिस को सौंप दिया गया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहा है। घटना के बाद अधिकारियों ने सुरक्षा कड़ी कर दी और शांति बहाल करने के प्रयास कर रहे हैं।

इस बीच, स्थानीय लोगों ने मंदिर के पास प्रदर्शन किया और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की माँग की। प्रदर्शन में बीजेपी नेता भी शामिल हुए। इस प्रदर्शन के दौरान हैदराबाद लोकसभा सीट से बीजेपी की उम्मीदवार माधवी लता समेत कई बीजेपी कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार भी कर लिया गया। वहीं, केंद्रीय मंत्री जी किशन रेड्डी भी मंदिर पहुँचे थे।।

उन्होंने इस घटना को ‘शर्मनाक‘ करार दिया और कुछ लोगों पर जानबूझकर सांप्रदायिक तनाव भड़काने का आरोप लगाया। इस बीच, घटना का सीसीटीवी फुटेज सामने आया, जिसमें एक युवक सफेद कुर्ता और काली इस्लामिक टोपी पहने देवी की मूर्ति पर लात मारते हुए दिख रहा है। उसने मूर्ति को बेरहमी से तोड़ा और उसके टुकड़े ज़मीन पर फेंक दिए।

गुजरात के गिर-सोमनाथ में तोड़े जो इस्लामिक ढाँचे (दरगाह+मस्जिद) वे अवैध: सुप्रीम कोर्ट को प्रशासन ने बताया क्यों चला बुलडोजर, मुस्लिम बता रहे थे अवमानना

गुजरात के गिर सोमनाथ जिले के कलेक्टर दिग्विजयसिंह जडेजा ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि उन्होंने दरगाह-मस्जिद को जमीन कब्जा खाली करने को गिराई है। कलेक्टर ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि यह सभी निर्माण अवैध थे। कलेक्टर के खिलाफ मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट ने अवमानना का मुकदमा किया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बुधवार (16 अक्टूबर, 2024) को सुप्रीम कोर्ट में अवमानना मामले में गिर-सोमनाथ जिले के कलेक्टर जडेजा ने अपना जवाब दाखिल किया। कलेक्टर जडेजा ने बताया कि उनके जिले इस्लामी ढांचों को तोड़ने में सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन नहीं किया गया है। उन्होंने इस आरोप को नकार दिया है।

कलेक्टर जडेजा ने कहा कि उन्होंने जो भी इस्लामी ढाँचे तोड़े वह सार्वजनिक जमीन पर कब्जा करके बनाए गए थे। उन्होंने यह अतिक्रमण खाली करने के विरुद्ध ही यह कार्रवाई की थी। ऐसे में उनको तोड़ने में किसी भी अनुमति की जरूरत नहीं थी। ऐसे में इसे सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवमानना करार नहीं दिया जा सकता।

कलेक्टर जडेजा ने यह भी कहा जडेजा ने कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट का सम्मान करते हैं और किसी भी तरह से उसकी गरिमा को ठेस नहीं पहुँचाना चाहते। कलेक्टर जडेजा ने कहा कि वह इसके बाद भी अगर अवमानना लगती है तो वह सुप्रीम कोर्ट से माफ़ी माँगते है। उनकी तरफ से यह भी बताया गया कि जिस जमीन से अतिक्रमण हटाया गया वह अरब सागर तट पर है।

गिर सोमनाथ जिले के कलेक्टर ने यह जवाब मुस्लिम पक्ष द्वारा दायर एक अवमानना याचिका पर दाखिल किया है। मुस्लिम पक्ष ने सितम्बर माह में प्रशासन की अतिक्रमण के खिलाफ की गई कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका डाली थी। मुस्लिम पक्ष ने कहा था कि यह कार्रवाई करके प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट के बुलडोजर एक्शन पर लगाई गई रोक का उल्लंघन किया है।

सुप्रीम कोर्ट ने 17 सितम्बर, 2024 को देश भर में सार्वजनिक जगहों पर अतिक्रमण को छोड़ कर बाकी जगह निर्माण गिराने पर प्रतिबन्ध लगा दिया था। दूसरी तरफ गिर सोमनाथ में 27 सितम्बर, 2024 को हाजी मंगरोलीशा पीर दरगाह, हजरत माईपुरी, सीपे सालार और मस्तानशा बापू जैसी प्रमुख दरगाह समेत तमाम अवैध ढांचों को गिरा दिया था।

यह कार्रवाई काफी बड़े स्तर पर की गई थी। इस दौरान मुस्लिमों ने हंगामा भी किया था। हालाँकि, पुलिस ने इस दौरान कार्रवाई को शांतिपूर्ण तरीके से सम्पन्न करवा दिया था और लगभग 70 लोगों को हिरासत में ले लिया गया था।