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आतंकियों को पुनर्वास के लिए सरकार मौका दे सकती है: जम्मू-कश्मीर राज्यपाल

जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने आतंकियों को मुख्यधारा में लाने को लेकर बड़ा बयान दिया है। राज्यपाल ने कहा कि प्रदेश के वो नौजवान जो आतंकियों से मिल गए हैं, उनके पुनर्वास के लिए सरकार जल्द कोई बड़ी घोषणा कर सकती है।

अपने बयान में राज्यपाल ने कहा कि कश्मीर में एक भी जान जाती है चाहे वो आतंकी ही क्यों न हो उन्हें दर्द होता है। यही वजह है कि आतंकियों को मुख्यधारा से जुड़ने का मौका दिया जाएगा। राज्यपाल मलिक ने कहा कि पुलिस अपने स्तर पर किसी भी परिस्थिति को बेहतर तरह से हैंडल करने में सक्षम है।

यही नहीं उन्होंने यह भी कहा, “रात के तीन बजे जब हमलोग बिस्तर पर लेटे होते हैं, तब सेना के जवान आतंकियों से लड़ रहे होते हैं। यही वजह है कि उन्हें जितनी भी सुविधा दी जाए वो एक तरह से कम ही है।”  उन्होंने कहा कि पिछले कुछ महीने में सुरक्षा बल के जवानों ने शानदार काम किया है।

बारामुला पहला आतंकी मुक्त जिला   

जानकारी के लिए बता दें कि कभी हिज़्बुल मुज़ाहिद्दीन का गढ़ माने जाने वाला ज़िला बारामूला अब आतंक-मुक्त घोषित कर दिया गया है। सेना और पुलिस की इस क़ामयाबी पर पूरे देश को गर्व होना चाहिए। बुधवार (जनवरी 23, 2019) को सेना के साथ मुठभेड़ में तीन आतंकियों के मारे जाने के बाद जम्मू एवं कश्मीर के डीजीपी दिलबाग सिंह ने इस बात की पुष्टि की।

पुलिस के जम्मू एवं कश्मीर में जितने भी आतंक प्रभावित ज़िले हैं, उनमे से बारामूला आतंक-मुक्त घोषित होने वाला पहला ज़िला है।आतंकियों के छिपे होने की सूचना के बाद पुलिस ने सर्च ऑपरेशन चलाया। ये आतंकी चार घंटे से वहाँ छिपे हुए थे और सुरक्षा बलों को निशाना बना रहे थे।

उन्हें पहले सरेंडर करने को कहा गया लेकिन वो फायरिंग करते रहे। मारे गए आतंकियों में से एक लश्कर का कमांडर बताया जाता है। इन आतंकियों ने पहले कई बार बारामूला पुलिस पर ग्रेनेड से हमला किया था। इन्होने कुछ दिनों पहले घाटी के तीन युवकों को भी मौत के घाट उतार दिया था।

जनता की सेवा में हाज़िर किए राहुल गाँधी ने 3 सिपाही!

गुरूवार (जनवरी 24, 2019) को राहुल गाँधी ने पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि नरेन्द्र मोदी ने उत्तर प्रदेश के लिए कुछ नहीं किया है। लेकिन, एक बार अगर वो और उनकी पार्टी सरकार में आ गए तो वो जनता से किए सभी वादों को पूरा करेंगे।

अपने संसदीय क्षेत्र अमेठी में लोगों को संबोधित करते हुए कई बार राहुल गाँधी ने प्रधानमंत्री मोदी को कई मुद्दों पर घेरा। कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी का कहना रहा कि पीएम को सीबीआई प्रमुख आलोक वर्मा को पद से हटाने की इतनी भी क्या जल्दी थी। राहुल ने कहा कि जब सीबीआई ने रॉफ़ेल डील पर जाँच करनी चाही तो उन्हें रात के 1:30 बजे पद से हटा दिया गया।

राहुल गाँधी ने बीजेपी पर ताना कसते हुए नोटबंदी के दौरान भीड़ में लगे गरीब लोगों की भी बात छेड़ी। उन्होंने कहा कि क्या नोटबंदी के दौरान किसी ने भी उद्योगपति को लाइन में लगा देखा है? उस भीड़ में सिर्फ़ गरीब लोग खड़े हुए थे।

इसके अलावा उन्होंने कहा कि एक बार अगर कॉन्ग्रेस सरकार वापस से सत्ता में आ गई तो केंद्र और राज्य में रुके कार्यों को दोबारा से शुरू किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि  छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में चुनाव जीतने के बाद उन्होनें वहाँ पर विकास कार्य शुरू कर दिया है। चुनाव जीतने के बाद वो अमेठी को ‘फ़ूड पार्क’ वापस देंगे और वो सब अमेठी को मिलेगा जो पीएम मोदी और यूपी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यूपी को नहीं दिया है।

उन्होंने अमेठी की जनता से कहा कि जब भी बीजेपी कार्यकर्ता आपसे आपका वोट माँगने आएँ तो उन्हें बोलिए कि उन्होंने हमारे लिए कुछ नहीं किया है।

प्रियंका के राजनीति में कदम रखने पर राहुल ने कहा कि उन्होंने अपनी बहन प्रियंका गाँधी वाड्रा और कॉन्ग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया को मुख्य सचिव इसलिए बनाया है ताकि वो अपनी पार्टी कॉन्ग्रेस तो एक बार फिर गिनती में लेकर आ सकें।

राहुल ने कहा कि उन्होंने प्रियंका और ज्योतिरादित्य को यूपी में सरकार बनाने के लिए कुछ विशेष कार्य दिए हैं। उनके अनुसार अब जनता के पास देश में तीन सिपाही हैं जो जनता के लिए कार्य कर रहे हैं। साथ ही राहुल ने बताया कि उन्होंने प्रियंका गाँधी से कहा है कि वो मुख्य सचिव बनने के बाद जनता के बीच आकर उनसे मिलेंगी।

जज साहब डर गए क्या? आख़िर उंगली उठते ही भागकर किसका भला कर रहे हैं आप?

जस्टिस सीकरी ने ख़ुद को उस पीठ से अलग कर लिया है जो नागेश्वर राव को CBI डायरेक्टर बनाए जाने के ख़िलाफ़ दायर की गई याचिका पर सुनवाई करने वाली थी। अभी कुछ दिनों पहले ही सरकार ने Commonwealth Secretariat Arbitral Tribunal (CSAT) के लिए जस्टिस सीकरी का नाम तय किया था। इसके बाद कई नेताओं और पत्रकारों ने हंगामा मचा दिया। उनका तर्क था कि जस्टिस सीकरी ने तत्कालीन CBI डायरेक्टर आलोक वर्मा को हटाने के लिए अपना निर्णायक वोट दिया था, इसीलिए सरकार उन्हें सेवानिवृत्ति के बाद पद देकर अपना ‘एहसान’ उतार रही है। इस शोर-शराबे के बाद जस्टिस सीकरी को ये पद ठुकराना पड़ा

भारत के संवैधानिक संस्थाओं पर राजनैतिक हमले होते रहे हैं। उन पर तरह-तरह के आरोप भी लगाए जाते रहे हैं, हो सकता है कि उनमे से कुछ सच भी हो। लेकिन यह पहला ऐसा मौका है जब एक-एक कर के नौकरशाही और न्यायपालिका में कार्यरत बड़े अधिकारियों पर व्यक्तिगत लांछन लगा कर उनका जीना हराम किया जा रहा है। चाहे CBI डायरेक्टर हो या फिर चीफ़ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI)- इन महत्वपूर्ण पद पर बैठे लोगों तक को भी नहीं बख़्शा गया। नेताओं द्वारा एक-दूसरे पर व्यक्तिगत लांछन लगाने का पुराना इतिहास रहा है, लेकिन आज से पहले शायद ही ऐसा हुआ हो जब अधिकारियों, जजों, सेना प्रमुख तक को राजनीतिक बयानबाज़ी में घसीट दिया गया हो।

क्या कोर्ट के हर निर्णय पर जजों की विश्वसनीयता तय की जाएगी

पूर्व CJI दीपक मिश्रा को तब निशाना बनाया गया, जब वो अपने कार्यकाल के अंतिम चरण में थे। उन पर महाभियोग लाने की तैयारी की गई। बिना किसी सबूत के उन पर तरह-तरह के आरोप लगाए गए। भारत के इतिहास में यह पहला ऐसा मौक़ा था जब किसी CJI के महाभियोग को लेकर राजनीति चमकाने की कोशिश की गई। कई लोगों का मानना था कि राम मंदिर जैसे महत्वपूर्ण मामले को प्रभावित करने के लिए विपक्षी पार्टियों ने ये खेल खेला था। CJI पर कई व्यक्तिगत आरोप लगाए गए और महाभियोग जैसे संवेदनशील मुद्दे को राजनैतिक हथियार बना दिया गया।

जस्टिस मिश्रा ने जाते-जाते आधार, धरा 377 सहित कई लैंडमार्क फ़ैसले दिए, जिसके बाद लिबरल गैंग का उनके प्रति गुस्सा कम हुआ। यहाँ सवाल यह उठता है कि क्या अब न्यायपालिका विपक्षी नेताओं के हिसाब से नहीं चलेगी तो क्या जजों का व्यक्तिगत चरित्र हनन किया जाएगा? क्या हर एक चीज को पब्लिक मुद्दा बना कर जजों पर दबाव बनाया जाएगा? ऐसे माहौल में न्यायपालिका अगर अपना हर फ़ैसला इस आधार पर लेने लगे (जिसके लिए दबाव बनाया जा रहा है) कि इस पर विपक्ष के नेताओं और चुनिंदा पत्रकारों की क्या प्रतिक्रिया होगी- तो भगवान भला करें इस देश का।

जस्टिस सीकरी नेता नहीं हैं, उनके नाम से अपनी राजनीति मत चमकाइए

जब जस्टिस सीकरी को केंद्र सरकार द्वारा कामनवेल्थ ट्रिब्यूनल में नामित किया गया, तब कॉन्ग्रेस सहित अन्य दलों और पत्रकारों के एक ख़ास गिरोह ने सरकार पर और जस्टिस सीकरी पर कई तरह के आरोप लगाए। इस से पहले यह तनिक भी न सोचा गया कि एक पीठासीन जज पर बिना किसी सबूत के, बिना किसी तर्क के- सिर्फ़ कही-सुनी बातों के आधार पर आरोप लगा कर क्या हासिल होगा? मजबूरन जस्टिस सीकरी को यह पद ठुकराना पड़ा। सेना, ब्यूरोक्रेसी और न्यायपालिका- ये तीन ऐसी संस्थाएँ हैं, जिन्हे राजनीति से जितना दूर रखा जाए, उतना अच्छा।

लेकिन यहाँ संस्थान ही नहीं, बल्कि उस संस्थान में उच्च पदों पर बैठे अधिकारियों तक को नहीं बख़्शा गया। आज (जनवरी 24, 2019) को नए CBI डायरेक्टर का चयन किया जाना है, ऐसे में ऐसी क्या जल्दी थी कि नागेश्वर राव को अंतरिम डायरेक्टर बनाए जाने के ख़िलाफ़ याचिका दाख़िल कर दी गई? क्या अब सरकार के एक-एक निर्णय को जबरन न्यायिक छनने से छाना जाएगा? जस्टिस सीकरी ने ख़ुद को इस पीठ से अलग करने का कोई कारण नहीं बताया है, लेकिन क्या ऐसी संभावना नहीं हो सकती कि सुप्रीम कोर्ट ने इस पर अपना समय जाया करने से पहले आज हाई पॉवर्ड कमिटी के निर्णय का इंतज़ार करना उचित समझा?

राजनीतिक दल जजों पर आरोप लगाते हैं। उनके कार्यकर्तागण भी वही दुहराते हैं, जो आलाकमान कहता है। जजों के हर एक फ़ैसले से नाराज़ राजनीतिक दल उनके ख़िलाफ़ पब्लिक परसेप्शन तैयार करने लगे हैं। ऐसे में यह सवाल पूछा जा सकता है कि अगर किसी दिन अदालत से बाहर जजों को घेर कर राजनितिक कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन शुरू कर दिया, तब क्या होगा? कल को ऐसी स्थिति भी बन सकती है कि हर निर्णय से पहले राजनीतिक कार्यकर्ता जज के आवास को घेर कर प्रदर्शन शुरू कर दें- जैसा अक्सर नेताओं के साथ होता है।

सेना प्रमुख से क्या दुश्मनी?

जब देश का हर एक व्यक्ति सेना पर गर्व कर रहा है, सेना द्वारा आतंकियों के ख़िलाफ़ चलाए जा रहे अभियान की प्रशंसा कर रहा है, तब सेना की कमान संभाल रहे व्यक्ति पर व्यक्तिगत हमले का क्या उद्देश्य हो सकता है? सेना प्रमुख के हर एक बयान को राजनैतिक चश्मे से देखा जा रहा है, सेना की हर एक करवाई पर सवाल खड़े करने वाले पैदा हो जा रहे हैं- क्या यह देश की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ नहीं है? सेना प्रमुख के लिए नेताओं द्वारा ‘सड़क का गुंडा‘ जैसे आपत्तिजनक शब्द प्रयोग किए गए।

दिसंबर 2016 में जब जनरल रावत को सेना प्रमुख (COAS) बनाया गया, तब उनके प्रमोशन पर सवाल खड़े किए गए। बिना उनके प्रदर्शन को देखे ऐसी आलोचना की गई। क्या ये ऐसी संवेदनशील संस्थाओं को संभाल रहे अधिकारियों का आत्मविश्वास गिराने वाला कार्य नहीं हुआ? उस से पहले जब जनरल सुहाग को COAS बनाया गया, तब भी कॉन्ग्रेस पार्टी ने सवाल खड़े किए थे। किसी ऐसे व्यक्तियों को भी राजनीतिक बयानबाज़ी में घसीटने का चलन बन गया है, जिनका राजनीति से दूर-दूर तक कोई वास्ता न रहा हो।

संस्थाओं के हौसले को नुकसान न पहुँचाएँ

किस अधिकारी की मनःस्थिति पर व्यक्तिगत आरोपों का क्या असर पड़ता है, इसकी समझ नेताओं में होनी चाहिए। नेता आरोप-प्रत्यारोप, बयानबाज़ी, लांछन- इन सब के आदी होते हैं और उनकी पूरी ज़िंदगी ही आरोप लगाने और आरोपों का बचाव करने में बीतती है। लेकिन जो न्यायालय में बैठ कर महत्वपूर्ण फ़ैसले सुना रहे हैं, जो किसी जाँच एजेंसी की कमान संभाल कर अपराधियों के ख़िलाफ़ करवाई कर रहे हैं, जिन पर पूरे देश की सीमा की सुरक्षा की जिम्मेदारों है- ऐसे लोगों पर लगातार आरोप लगा कर क्या नेतागण अपनी सीमा का उल्लंघन नहीं कर रहे?

साहब, आप अपनी राजनीति चमकाएँ, बेशक चमकाएँ, लेकिन संवैधानिक संथाओं की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाल रहे अधिकारियों और सुरक्षाबलों के प्रमुखों पर आरोप लगा कर नहीं। गन्दी राजनीति एक-दूसरे पर व्यक्तिगत लांछनों की बारिश कर के चमकाएँ, जजों और सेना-प्रमुख को अपनी घटिया बयानबाज़ी में न घसीटें।

गुजरात सरकार ने सामान्य वर्ग के वंचितों को दिया तोहफ़ा, आरक्षण से हटाई घर व भूमि की शर्तें

गुजरात सरकार ने प्रदेश में रहने वाले आर्थिक रुप से कमजोर सवर्णों के लिए बड़ी घोषणा की है। सरकार ने कहा कि समान्य वर्ग के आर्थिक रुप से कमजोर लोगों को दिए जाने वाले 10% आरक्षण के लिए केवल ₹8 लाख सलाना आय ही सीमा होगी। सरकार ने कहा कि इसके अलावा घर व ज़मीन को आरक्षण के शर्तों के रूप में नहीं देखा जाएगा। सरकार के इस फ़ैसले के बाद समान्य वर्ग के आर्थिक रुप से कमजोर लोगों के लिए पहली बार किसी राज्य की सरकार ने इस तरह की बड़ी घोषणा की है।

अहमदाबाद में होने वाली कैबिनेट की मीटिंग के बाद राज्य सरकार ने बुधवार को यह फ़ैसला लिया। दरअसल केंद्र सरकार द्वारा सांसद में पारित बिल के अनुसार समान्य वर्ग के आर्थिक रुप से कमज़ोर उन लोगों को आरक्षण का लाभ मिलेगा जिनकी वार्षिक आय ₹8 लाख से कम है। इसके अलावा इस वर्ग के उन्हीं लोगों को आरक्षण का लाभ मिलेगा जिनके पास 5 एकड़ से कम जमीन व 1000 वर्ग फीट से कम में घर है। परंतु, गुजरात सरकार ने समान्य वर्ग के गरीब लोगों के लिए दिए जाने वाले आरक्षण में जमीन व घर की शर्तों को हटा दिया है।  

फरवरी से इस वर्ग के लोगों को मिलेगा आरक्षण का लाभ

जानकारी के लिए बता दें कि 1 फरवरी से सामान्य वर्ग के ग़रीबों को सरकारी नौकरियों में आरक्षण मिलने लगेगा। इसके लिए अधिसूचना जारी कर दी गई है। अब 1 फरवरी के बाद से सरकारी नौकरियों में भर्ती के लिए जो भी रिक्तियाँ निकाली जाएगी, उनमे सामान्य वर्ग के ग़रीबों को 10 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा। कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) ने इस सम्बन्ध में आदेश जारी करते हुए कहा कि सालाना ₹8 लाख से कम आय वाले लोगों को ये सुविधा दी जाएगी। इस आदेश के क्रियान्वयन के लिए अलग से रोस्टर जारी किया जाएगा।

DoPT के संयुक्त सचिव ज्ञानेंद्र देव त्रिपाठी ने शनिवार (जनवरी 19, 2019) देर रात अधिसूचना जारी करते हुए कहा, “संसद ने संविधान में संशोधन कर ग़रीबों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया है। इसे ध्यान में रखते हुए केंद्र के सभी पदों एवं सेवाओं के लिए 1 फरवरी 2019 से अधिसूचित होने वाली सभी प्रत्यक्ष भर्तियों पर इसे लागू किया जाता है।”

विधेयक पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने 13 जनवरी को हस्ताक्षर कर दिए थे। इस से पहले विधेयक को संसद के दोनों सदनों में पारित किया गया था।

राहुल ने हमारी ज़मीनें हड़प रखी हैं, वो यहाँ के लायक नहीं: अमेठी में किसानों का प्रदर्शन

उत्तर प्रदेश में अपने संसदीय निर्वाचन क्षेत्र अमेठी से राहुल गाँधी के लिए बुरी ख़बर आ रही है। यहाँ किसान बढ़-चढ़कर कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे हैं। साथ ही उनके ख़िलाफ़ नारेबाज़ी भी की जा रही है।

अमेठी जिले में बुधवार (जनवरी 23, 2019) को गौरीगंज इलाके में किसानों ने माँग करते हुए कहा कि या तो राजीव गाँधी महिला ट्रस्ट द्वारा किसानों की ज़मीनें वापस की जाए या फ़िर उन्हें रोज़गार प्रदान किए जाएँ।

बता दें कि राहुल गाँधी बुधवार को चुनाव प्रचार करने अमेठी पहुँचे थे। यहाँ पर संजय सिंह नाम के प्रदर्शन कर रहे एक व्यक्ति ने एएनआई को बताया, “हम लोग राहुल गाँधी से बहुत नाराज़ हैं। उन्हें इटली चले जाना चाहिए। वो यहाँ रहने के लायक नहीं हैं। राहुल ने हमारी ज़मीनें हड़प रखी हैं।”

किसानों द्वारा यह प्रदर्शन सम्राट साइकिल फैक्टरी के पास किया गया। इस फैक्टरी का उद्घाटन पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी द्वारा उस समय किया गया था, जब वो अमेठी से सांसद थे।

इस पूरे प्रकरण को समझने के लिए 80 के दशक में जाना होगा। उत्तर प्रदेश स्टेट इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (यूपीएसआईडीसी) ने 1984 में सम्राट साइकिल फैक्टरी के लिए किसानों से 65.57 एकड़ जमीन ली थी। शर्त यह थी कि जिन किसानों की जमीन ली गई हैं, उन्हें रोज़गार दिया जाएगा। 1988-89 में जब कंपनी बंद हो गई तो किसानों का रोज़गार भी चला गया। कर्ज़ वसूलने के लिए 2014 में इसे नीलाम किया गया। नीलामी से ₹20.10 करोड़ की वसूली हुई।

इस नीलामी प्रक्रिया में खरीदी गई जमीन का भुगतान राजीव गाँधी महिला ट्रस्ट द्वारा किया गया। हालाँकि बाद में नीलामी की पूरी प्रक्रिया को यूपीएसआईडीसी द्वारा अवैध करार दिया गया। इसके बाद गौरीगंज एसडीएम कोर्ट ने सम्राट साइकिल फैक्टरी की जमीन को यूपीएसआईडीसी को लौटाने का आदेश दिया।

कोर्ट के आदेश के बावजूद और इस ज़मीन के सभी कागज़ात यूपीएसआईडीसी के पास होने पर भी इस पर राजीव गाँधी चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा कब्ज़ा हो रखा है।

जानकारी के लिए बता दें कि कुछ समय पहले केन्द्रीय मंत्री स्मृति इरानी ने भी राहुल गाँधी पर इल्ज़ाम लगाए थे कि वो फाउंडेशन के नाम पर किसानों की ज़मीनें हड़प रहे हैं।

हिन्दुओं का मजाक उड़ाने वाले कॉन्ग्रेसी ट्रोल की गिरफ़्तारी पर कमलनाथ सरकार का विलाप शुरू

अपने ब्लॉग और फ़ेसबुक पोस्ट्स के ज़रिए हिन्दुओं की भावनाओं का मज़ाक उड़ाने वाला अभिषेक मिश्रा दिल्ली पुलिस की साइबर सेल द्वारा हिरासत में ले लिया गया। इस ख़बर पर मध्य प्रदेश सरकार की प्रतिक्रिया आई है कि दिल्ली पुलिस को ‘मध्य प्रदेश के नागरिक’ को गिरफ़्तार करने से पहले वहाँ की पुलिस को जानकारी देनी चाहिए थी।

बात यह है कि अभिषेक मिश्रा कोई ‘मध्य प्रदेश का नागरिक’ भर ही नहीं है बल्कि उसके पसंदीदा कार्यों में मोदी के ख़िलाफ़ झूठी, घृणास्पद और अफ़वाहें फैलाना सर्वोपरि है। साथ ही अपनी सोशल मीडिया और फ़र्ज़ी ख़बरों की वेबसाइट से हिन्दुओं के बारे में, उनके धार्मिक चिह्नों और परम्पराओं का उपहास करने में वो बहुत आगे रहता है।

ये सारे कारण मध्य प्रदेश की कॉन्ग्रेस सरकार के लिए बिना पैसे के काम करने वाले इस कार्यकर्ता को बचाने के लिए काफ़ी हैं। यही कारण है कि वो अब ‘नागरिक’ और क़ानून कहते हुए हल्ला मचा रहे हैं। ध्यान रहे ये वही पार्टी है जो शिव भक्त, राम भक्त और जनेऊधारी बनकर अपने हिन्दू होने के लिए गोत्र तक बताते घूम रही थी।

रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली पुलिस के विशेष साइबर सेल ने अभिषेक मिश्रा को मध्य प्रदेश में उसके घर से मंगलवार की रात को गिरफ़्तार किया। अभिषेक मिश्रा एक स्वयंभू YouTuber है जो पहले आम आदमी पार्टी के समर्थक था और कॉन्ग्रेस के प्रति अपनी वफ़ादारी को बदलने से पहले अरविंद केजरीवाल के साथ अपनी तस्वीरें क्लिक करता था। फिर उसके बाद वो दिग्विजय सिंह, राहुल गाँधी और प्रियंका चतुर्वेदी जैसे कई कॉन्ग्रेसी नेताओं के साथ अपनी तस्वीरें क्लिक करता था।

मिश्रा एक वेबसाइट ‘viralinIndia.net’ चलाता है, जहाँ वो इस्लाम समर्थक प्रचार और फ़र्ज़ी ख़बरें फैलाने का काम करता है। इसके अलावा वेबसाइट पर ट्रैफ़िक प्राप्त करने के लिए clickbait-y सुर्खियों के साथ-साथ अन्य कई अश्लील लेख भी अपलोड किए गए हैं। इसके अलावा इस वेबसाइट पर अविश्वसनीय ख़बरों को भी अपलोड किया जाता था, जैसे बिहार में एक मुर्गी द्वारा दो पिल्लों को जन्म देने जैसी बकवास ख़बरों का भी उल्लेख होता था।

आपको बता दें कि मिश्रा का प्रचार सिर्फ़ वेबसाइट तक ही सीमित नहीं था। इसके अलावा वो विभिन्न फेसबुक पेज तैयार करता है जिन्हें वो नियमित तौर पर फ़ेक न्यूज़ के रूप में शेयर भी करता है। शेयर करने के लिए वो ऐसे राजनेताओं का चयन करता है जिन्हें वो दोषी ठहरा सके और ऐसी शख़्सियतें चर्चा का विषय बन जाती हैं क्योंकि वो मोदी विरोधी होती हैं।

मध्य प्रदेश विधानसभा चुनावों के दौरान, मिश्रा ने ‘viralinIndia.net’ को अस्थायी रूप से बंद कर दिया था क्योंकि उस समय यह टीम ‘चुनावों को कवर करने’ में व्यस्त थी। चुनाव समाप्त होते ही, मिश्रा फिर से अपनी फ़ेक न्यूज़ की वेबसाइट चलाने लगे। इतना ही नहीं प्रियंका चोपड़ा-निक जोन्स की शादी के रिसेप्शन से चोरी हुई घड़ी के लिए प्रधानमंत्री मोदी को प्रमुख संदिग्ध होने का दावा किया था।

आपको बता दें कि ऐसा पहली बार नहीं हुआ है जब मिश्रा को क़ानूनी दायरे में लाना पड़ा हो। इससे पहले नवंबर 2016 में मिश्रा को मध्य प्रदेश पुलिस ने शिवराज सिंह चौहान और बीजेपी पर हमले के आरोप में गिरफ़्तार किया था।

दो से अधिक बच्चे होने पर मताधिकार व सरकारी नौकरी नहीं दी जानी चाहिए: योग गुरु रामदेव

देश की बढ़ती जनसंख्या पर योग गुरु रामदेव स्वामी ने एक बड़ा बयान दिया है। रामदेव स्वामी ने बढ़ती जनसंख्या पर चिंता ज़ाहिर करते हुए कहा कि जिनके दो या दो से अधिक बच्चे हों, उन सभी लोगों को मताधिकार और सरकारी नौकरी नहीं दी जानी चाहिए।

देश की बढ़ती जनसंख्या पर अपने विचार रखते हुए एक कार्यक्रम में योग गुरु रामदेव ने यह बयान दिया। योग गुरु रामदेव ने वर्तमान समय में जनसंख्या को देश की बड़ी चुनौती बताते हुए कहा, “हिंदू हों या मुस्लिम सभी लोगों के लिए ऐसे नियम बनाने की ज़रूरत है कि दो से अधिक बच्चे होने पर लोगों को सरकारी मेडिकल के साथ ही साथ मताधिकार व सरकारी नौकरी की सुविधाएँ नहीं दी जानी चाहिए।” योग गुरु रामदेव ने यह भी कहा कि ऐसे लोगों से चुनाव लड़ने के अधिकार भी छिन लिया जाना चाहिए।

इससे पहले भी इस मुद्दे पर बोल चुके हैं रामदेव

यह पहली बार नहीं है जब किसी कार्यक्रम में जनसंख्या के मुद्दे पर योग गुरु ने इस तरह का बयान दिया है। इससे पहले भी जनसंख्या के मामले में योग गुरु बयान देते रहे हैं। पिछले साल नवंबर में योग गुरु ने जनसंख्या पर बयान दिया था कि जिन्होंने शादी नहीं की है, ऐसे लोगों के सम्मानित किया जाना चाहिए। इसी कार्यक्रम के दौरान उन्होंने यह भी कहा था कि मेरे जैसे लोग जिन्होंने शादी नहीं की है, ऐसे लोगों को सरकार द्वारा सम्मानित किया जाना चाहिए। जबकि जिनके दो से अधिक बच्चे हैं, उनको मताधिकार से वंचित कर देना चाहिए।    

मरणोपरांत जिसे मिला ‘सर्वोच्च’ सैन्य वीरता पुरस्कार, वो पहले था एक आतंकवादी

गणतंत्र दिवस के मौके पर इस साल देश के लिए समर्पित सैनिकों को अशोक चक्र के अलावा 5 कीर्ति और 12 शौर्य चक्र दिए जाएँगे। इन सभी पुरस्कारों की घोषणा की जा चुकी है। इस सूची में एक नाम बहुत दिलचस्प है – शहीद लांस नायक नज़ीर वानी। शहीद वानी को अशोक चक्र के लिए चुना गया है। यह जान लें कि अशोक चक्र शांति काल में देश के सैनिकों को दिया जाने वाला सर्वोच्च सैन्य वीरता पुरस्कार है।

अब कहानी शहीद लांस नायक नज़ीर वानी की। शहीद लांस नायक वानी को अशोक चक्र वीरता पुरस्कार मरणोपरांत दिए जाने की घोषणा हुई है। देश के लिए शहीद होने वाले नायक वाणी की ज़िंदगी का किस्सा बेहद ही दिलचस्प है।

नज़ीर वानी कश्मीर के एक छोटे से गाँव अश्मुजी के रहने वाले थे। यह गाँव कश्मीर के कुलगाम शहर के करीब है। नज़ीर का बचपन अपने गाँव में गुजरा था। इसी दौरान नज़ीर पत्थरबाज़ों और आतंकियों के संपर्क में आ गए। लेकिन जल्द ही उन्हें यह अहसास हो गया कि उन्होंने गलत रास्ता चुन लिया है।

इसके बाद उन्होंने 2004 में टेरिटोरियल आर्मी की 162वीं बटालियन को ज्वॉइन कर लिया। इसके बाद मानो देश के लिए नजीर ने अपनी ज़िन्दगी ही समर्पित कर दी। उनकी बहादुरी और वीरता के लिए उन्हें 2007 व 2018 में सेना द्वारा मेडल से भी नवाजा गया था।

अब एक घटना घटती है नवम्बर 2018 में। कुलगाम के शोपियाँ में आतंकियों व सुरक्षा बलों के बीच मुठभेड़ हुई। इस मुठभेड़ में नज़ीर ने अपने साथियों के साथ अंतिम साँस तक आतंकियों को मुँहतोड़ जवाब दिया।

नज़ीर व उनके साथियों ने 6 आतंकियों को मुठभेड़ में मार भी गिराया। लेकिन लांस नायक नज़ीर अहमद वानी शहीद हो गए। देश के लिए शहीद हुए वानी के परिवार में पत्नी के अलावा दो बच्चे हैं।

नज़ीर वानी के शहीद होने के बाद करीब 600 लोग उनके परिवार से मिलने पहुँचे थे। शहीद के पार्थिव शरीर को लेकर जब सेना के जवान नज़ीर के गाँव पहुँचे, तो गाँव वालों ने लांस नायक को अश्रुपूर्ण विदाई दी थी।

केंद्र सरकार ने शहीद नज़ीर के परिवार को अशोक चक्र से सम्मानित करने की घोषणा की है। जिस कश्मीर घाटी में नौजवान पत्थरबाज़ी करके अपनी ज़िन्दगी को बर्बाद कर रहे हैं, उसी कश्मीर घाटी के युवाओं के लिए देशभक्त अशोक चक्र विजेता शहीद नज़ीर एक उदाहरण बन सकते हैं।

कभी हिज़्बुल का था गढ़, अब आतंक मुक्त घोषित हुआ बारामूला

कभी हिज़्बुल मुज़ाहिद्दीन का गढ़ माने जाने वाला ज़िला बारामूला अब आतंक-मुक्त घोषित कर दिया गया है। सेना और पुलिस की इस क़ामयाबी पर पूरे देश को गर्व होना चाहिए। बुधवार (जनवरी 23, 2019) को सेना के साथ मुठभेड़ में तीन आतंकियों के मारे जाने के बाद जम्मू एवं कश्मीर के डीजीपी दिलबाग सिंह ने इस बात की पुष्टि की। पुलिस के जम्मू एवं कश्मीर में जितने भी आतंक प्रभावित ज़िले हैं, उनमे से बारामूला आतंक-मुक्त घोषित होने वाला पहला ज़िला है।

आतंकियों के छिपे होने की सूचना के बाद पुलिस ने सर्च ऑपरेशन चलाया। ये आतंकी चार घंटे से वहाँ छिपे हुए थे और सुरक्षा बलों को निशाना बना रहे थे। उन्हें पहले सरेंडर करने को कहा गया लेकिन वो फायरिंग करते रहे। मारे गए आतंकियों में से एक लश्कर का कमांडर बताया जाता है। इन आतंकियों ने पहले कई बार बारामूला पुलिस पर ग्रेनेड से हमला किया था। इन्होने कुछ दिनों पहले घाटी के तीन युवकों को भी मौत के घाट उतार दिया था।

J&K के डीजीपी ने इस बारे में विशेष जानकारी देते हुए पत्रकारों को बताया:

“बारामूला जिले में बुधवार के ऑपरेशन में 3आतंकी मार गिराए गए। इसी के साथ बारामूला कश्मीर का पहला आतंकी मुक्त जिला बन गया है,आज की तारीख में वहां एक भी जीवित आतंकी नहीं है।”

बता दें कि बारामूला के सफ़ियाबाद में J&K पुलिस, भारतीय सेना और CRPF ने एक संयुक्त ऑपरेशन में 3 आतंकवादियों को मार गिराया। इसके अलावे मारे गए आतंकियों के पास से सुरक्षा बालों ने कई हथियार भी बरामद किए। इस ऑपरेशन में सेना की 46 राष्ट्रीय राइफल्स, 4 पैरा फोर्सेज, एसओजी और सीआरपीएफ के जवान शामिल थे। इसके साथ ही सुरक्षा बलों ने ज़िले में सक्रिय सभी आतंकियों का सफ़ाया कर दिया।

बारामूला काफ़ी दिनों से आतंकवादियों की करतूतों के कारण चर्चा में रहा है। कभी बुरी तरह आतंक प्रभावित रहे इस ज़िले के सोपोर क्षेत्र में कई बार सुरक्षा बलों और आतंकवादियों की मुठभेड़ हो चुकी है। जिस उरी सैन्य कैंप पर आतंकी हमले के बाद सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम दिया गया था, वो बारामूला में ही स्थित है। घाटी में सेना ने ऑपरेशन ऑल आउट को जारी रखते हुए इस साल 23 दिनों में 14 आतंकियों को मार गिराया है।

12 जनवरी को हुई मुठभेड़ में अल-बद्र के खूंखार आतंकी जीनत को मार गिराया गया था। उसे IED बम एक्सपर्ट कहा जाता था। अगर पिछले साल के आँकड़ों की बात करें तो वर्ष 2018 में 28 दिसंबर तक जम्मू और कश्मीर में मुठभेड़ों में 253 आतंकवादी मारे गए थे।

फ़ेक न्यूज़ वेबसाइट चलाने वाले अभिषेक मिश्रा की अपत्तिजनक पोस्ट के लिए हुई गिरफ़्तारी

फ़ेक न्यूज़ की वेबसाइट और ग़लत सूचनाएँ फैलाने वाले अभिषेक मिश्रा को दिल्ली पुलिस ने आपत्तिजनक पोस्ट करने के लिए गिरफ़्तार किया है। मिश्रा पर आपत्तिजनक पोस्ट से धार्मिक भावनाएँ आहत करने का आरोप है। रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली पुलिस के विशेष साइबर सेल ने अभिषेक मिश्रा को मध्य प्रदेश में उसके घर से मंगलवार की रात को गिरफ़्तार किया।

अभिषेक मिश्रा एक स्वयंभू YouTuber है जो पहले आम आदमी पार्टी के समर्थक था और कॉन्ग्रेस के प्रति अपनी वफ़ादारी को बदलने से पहले अरविंद केजरीवाल के साथ अपनी तस्वीरें क्लिक करता था। फिर उसके बाद वो दिग्विजय सिंह, राहुल गाँधी और प्रियंका चतुर्वेदी जैसे कई कॉन्ग्रेसी नेताओं के साथ अपनी तस्वीरें क्लिक करता था।

मिश्रा एक वेबसाइट ‘viralinIndia.net’ चलाता है, जहाँ वो इस्लाम समर्थक प्रचार और फ़र्ज़ी ख़बरें फैलाने का काम करता है। इसके अलावा वेबसाइट पर ट्रैफ़िक प्राप्त करने के लिए clickbait-y सुर्खियों के साथ-साथ अन्य कई अश्लील लेख भी अपलोड किए गए हैं। इसके अलावा इस वेबसाइट पर अविश्वसनीय ख़बरों को भी अपलोड किया जाता था, जैसे बिहार में एक मुर्गी द्वारा दो पिल्लों को जन्म देने जैसी बकवास ख़बरों का भी उल्लेख होता था।

आपको बता दें कि मिश्रा का प्रचार सिर्फ़ वेबसाइट तक ही सीमित नहीं था। इसके अलावा वो विभिन्न फेसबुक पेज तैयार करता है जिन्हें वो नियमित तौर पर फ़ेक न्यूज़ के रूप में शेयर भी करता है। शेयर करने के लिए वो ऐसे राजनेताओं का चयन करता है जिन्हें वो दोषी ठहरा सके और ऐसी शख़्सियतें चर्चा का विषय बन जाती हैं क्योंकि वो मोदी विरोधी होती हैं।

मध्य प्रदेश विधानसभा चुनावों के दौरान, मिश्रा ने ‘viralinIndia.net’ को अस्थायी रूप से बंद कर दिया था क्योंकि उस समय यह टीम ‘चुनावों को कवर करने’ में व्यस्त थी। चुनाव समाप्त होते ही, मिश्रा फिर से अपनी फ़ेक न्यूज़ की वेबसाइट चलाने लगे। इतना ही नहीं प्रियंका चोपड़ा-निक जोन्स की शादी के रिसेप्शन से चोरी हुई घड़ी के लिए प्रधानमंत्री मोदी को प्रमुख संदिग्ध होने का दावा किया था।

आपको बता दें कि ऐसा पहली बार नहीं हुआ है जब मिश्रा को क़ानूनी दायरे में लाना पड़ा हो। इससे पहले नवंबर 2016 में मिश्रा को मध्य प्रदेश पुलिस ने शिवराज सिंह चौहान और बीजेपी पर हमले के आरोप में गिरफ़्तार किया था।

इसके अलावा दैनिक भास्कर अपने लेख में सूत्रों के हवाले से लिखता है कि गुजरात और मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में अभिषेक ने सोशल मीडिया पर बीजेपी के ख़िलाफ़ प्रचार-प्रसार किया था, इससे बीजेपी को नुक़सान हुआ। इससे केंद्र सरकार नाराज़ है।

ऐसे में सवाल यह उठता है दैनिक भास्कर के वो कौन-से सूत्र हैं जो इस बात को पुख़्ता जामा पहनाने की कोशिश कर रहे हैं कि एक फ़ेक न्यूज़ संबंधी वेबसाइट चलाने वाले अभिषेक की वजह से बीजेपी को विधानसभा चुनाव में हानि हुई। बीजेपी जैसी बड़ी पार्टी को नुक़सान पहुँचाने के लिए क्या अभिषेक जैसे लोग काफ़ी हैं? गली-खोपचे या नुक्कड़ में किराये की दुकान में बैठे फ़र्ज़ी लोग क्या राजनीति का रुख़ पलटने में इतना सक्षम हो सकते हैं, यह एक बड़ा प्रश्न है।