सामान्य वर्ग के गरीबों को आरक्षण संबंधी विधेयक को राष्ट्रपति की मंजूरी, बना कानून

इस क़ानून के अंतर्गत सरकार को शैक्षणिक संस्थानों और सरकारी नौकरियों में सामान्य वर्ग के गरीबों को 10 प्रतिशत आरक्षण देने का अधिकार होगा

राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने सामान्य वर्ग के गरीबों को 10 प्रतिशत आरक्षण देने सम्बन्धी संविधान संशोधन विधेयक को मंजूरी दे दी है। अब सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्रालय द्वारा इसके नियम एवं शर्तों को अंतिम रूप देने के साथ ही ये क़ानून लागू हो जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया में करीब एक हफ़्ता लगने की उम्मीद है। इस सम्बन्ध में केंद्र सरकार ने अधिसूचना भी जारी कर दी है।

केंद्रीय न्याय एवं विधि मंत्रालय ने इस सम्बन्ध में अधिसूचना ज़ारी करते हुए कहा कि संविधान के 103वें संशोधन, 2019 को मंजूरी प्रदान कर दी गई है। इसे अनुच्छेद 15 तथा 16 के अंतर्गत पारित किया गया है। इस अधिसूचना के ज़ारी होने के साथ ही 8 लाख से कम सालाना आमदनी वाले सामान्य वर्ग के गरीबों को आरक्षण मिलने का रास्ता साफ़ हो गया है। इस क़ानून के अंतर्गत सरकार को शैक्षणिक संस्थानों और सरकारी नौकरियों में सामान्य वर्ग के गरीबों को 10 प्रतिशत आरक्षण देने का अधिकार होगा।

हालाँकि, ये प्रावधान अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों में लागू नहीं होगा। ये आरक्षण की मौजूदा 50 प्रतिशत की सीमा के अतिरिक्त होगा। इसे लोकसभा एवं राज्यसभा- दोनों सदनों में पारित किया जा चुका है। इसके दोनों सदनों में पारित होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे ऐतिहासिक बिल बताया था।

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वहीं गुजरात सरकार ने इस क़ानून को अपने राज्य में संक्रांति से लागू करने की घोषणा की है। गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपानी ने निर्णय लिया कि 14 जनवरी से इसे राज्य में लागू कर दिया जाएगा।

बता दें कि दोनों सदनों में भारी बहुमत से पारित इस विधेयक को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती भी दी गई है। एक NGO ने इसे ग़ैरकानूनी बता कर अदालत से इस बिल को रद्द करने की माँग की है।

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“अब वक्त आ गया है कि हम गैर मुस्लिमों से बोलें कि अगर हमारे हमदर्द हो तो हमारी शर्तों पर आकर खड़े हो। अगर वो हमारी शर्तों पर खड़े नहीं होते तो वो हमारे हमदर्द नहीं हैं। असम को काटना हमारी जिम्मेदारी है। असम और इंडिया कटकर अलग हो जाए, तभी ये हमारी बात सुनेंगे।"

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