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वक्फ प्रॉपर्टी है नई संसद: AIUDF चीफ बदरुद्दीन अजमल ने मुस्लिमों को भड़काया, कहा- 9.7 लाख बीघा जमीन ह़ड़पना चाहती है सरकार, वसंत विहार पर भी दावा

बदरुद्दीन अजमल मुस्लिमों को भड़काते हुए कहा कि सरकार वक्फ की 9.7 लाख बीघा जमीन ह़ड़पना चाहती है। उन्होंने ये भी माँग की थी कि अब इस जमीन को सरकार को मुस्लिम समाज को सौंप देना चाहिए। उन्होंने कहा था कि सरकार को वक्फ की सारी जमीन मुसलमानों को वापस कर देनी चाहिए।

असम के धुबरी से पूर्व सांसद और ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) के अध्यक्ष बदरुद्दीन अजमल का दावा है कि नया संसद भवन वक्फ की जमीन पर बना हुआ है। उन्होंने हाल में वक्फ बोर्ड संशोधन बिल का विरोध करते हुए इस मुद्दे पर अपना बयान दिया।

उन्होंने मुस्लिमों को भड़काते हुए कहा कि सरकार वक्फ की 9.7 लाख बीघा जमीन ह़ड़पना चाहती है। उन्होंने ये भी माँग की कि अब इस जमीन को सरकार को मुस्लिम समाज को सौंप देना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार को वक्फ की सारी जमीन मुसलमानों को वापस कर देनी चाहिए। उनके मुताबिक, अगर सरकार उन्हें जमीन दे देगी तो मुस्लिम समाज के लिए शिक्षा, हेल्थ और अनाथालय का इंतजाम वो लोग खुद कर लेंगे उन्हें सरकार का एहसान नहीं चाहिए।

समाचार एजेंसी एएनआई द्वारा साझा की गई वीडियो में अजमल कहते दिखते हैं- “अगर आप लोग रिसर्च करेंगे तो पता चलेगा नया संसद भवन भी वक्फ की प्रॉपर्टी पर है। इसके अलावा वसंत विहार के आसपास का इलाका और शायद एयरपोर्ट भी वक्फ का है।” उन्होंने कहा कि जो लोग बिन अनुमति के वक्फ प्रॉपर्टी का इस्तेमाल करते हैं वो लोग इन सबके ऊपर मुसीबत आएगी। वो लोग खुद देखेंगे। सबकी सरकार जाएगी। छोटे-मोटे लोगों से मजाक करना अलग बात है। पीर-फकीर वो लोग हैं जिन्हें दुनिया रहने तक हिंदू-मुसलमान सब मानेंगे। वक्फ बोर्ड मामले पर इनकी पूरी मिनिस्ट्री चली जाएगी।”

उनके इसी बयान के बाद अब केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने इस पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सभी सांसदों से वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2024 का समर्थन करने की अपील करते हुए कहा कि भारत में सबसे बड़ी वक्फ संपत्तियाँ हैं और उनका उपयोग महिलाओं, बच्चों, पिछड़ा वर्ग और मुस्लिम समुदाय के कल्याण के लिए किया जाना चाहिए।

इसके अलावा भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कहा कि बदरुद्दीन अजमल तुष्टिकरण की राजनीति कर रहे हैं, क्योंकि उनके पूरे वोट बैंक ने लोकसभा चुनाव में कॉन्ग्रेस का समर्थन किया था, जिसके कारण उनकी हार हुई।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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