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कॉन्ग्रेस के हारते ही शुरू हो गई दिल्ली को ब्लॉक करने की साजिश, बरेली के जहरीले मौलाना ने खोला ‘टूलकिट’: तौकीर रजा ने कहा- देशभर से मुस्लिम पहुँचे रामलीला मैदान

इस्लामी संगठन इत्तेहादे मिल्लत काउंसिल के प्रमुख और बरेली के रहने वाले मौलाना तौकीर रजा ने एक बार फिर धमकी दी है। उसने कहा है कि मुस्लिमों के पैगंबर मुहम्मद के खिलाफ यति नरसिंहानंद द्वारा दिए गए कथित अपमानजनक बयान के विरोध में दिल्ली मार्च किया जाएगा और देश को जाम किया जाएगा। इसके पहले वो इस्लामी धर्मांतरण कराने और देश विरोधी भड़काऊ बयान दे चुका है।

हरियाणा चुनाव में कॉन्ग्रेस के हारते ही काउंसिल के 24वें स्थापना दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में तौकीर रजा ने अपना एजेंडा खोल दिया। उसने कहा कि यति नरसिंहानंद जैसे लोग पैगंबर-ए-इस्लाम मोहम्मद साहब की शान में गुस्ताखी कर रहे हैं। ऐसा करने वालों के विरुद्ध कोई धरना या फिर ज्ञापन नहीं होगा। अब दशहरा होने के बाद दिल्ली जाकर रामलीला मैदान में घेराव करके प्रदर्शन किया जाएगा।

मौलाना तौकीर रजा ने कहा कि दिल्ली में होने वाले प्रदर्शन बरेली के आसपास के ही नहीं, बल्कि पूरे देश के कोने-कोने से लोग आएँगे। मौलाना तौकीर ने कहा, “इस समय देश के लोगों में गुस्सा भरा हुआ है। नबी की शान में गुस्ताखी करने वाले आजाद घूम रहे हैं। हमारे नौजवानों के साथ मॉब लिंचिंग हो रही है। दाढ़ी वाले को ट्रेन के अंदर पीटने की घटना हो रही है।”

अपनी उत्तेजक एवं कट्टरपंथी बयानों के लिए कुख्यात मौलाना ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आरोप लगाया। उसने कहा कि देश के वजीरे आजम समुदाय विशेष (मुस्लिम) के साथ पक्षपात कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग देश का माहौल खराब करना चाहते हैं। ये सब पब्लिसिटी के लिए कर रहे हैं। यही वजह है कि महापुरुषों की शान में गुस्ताखी करते हैं।

इतना ही नहीं, बरेली दंगे के मास्टरमाइंड मौलाना तौकीर ने इस्लाम छोड़कर दूसरे धर्म में शादी करने वाली मुस्लिम लड़कियों को लेकर भी बयान दिया। उन्होंने कहा, “मजहब छोड़कर दूसरे धर्म के लोगों के साथ शादी करने वाली लड़कियों की इस्लाम में कोई जरूरत नहीं है। ऐसे कमजोर लोगों की इस्लाम में कोई जगह नहीं है। अच्छा रहा कि वे खुद ही इस्लाम को छोड़कर चली गईं।”

इससे पहले इस मौलाना ने कहा था, “हम 20 करोड़ हैं या 30 करोड़…मैं नहीं जानता, लेकिन हम में से सिर्फ 1 प्रतिशत ही घरों से बाहर निकल आएँ और दिल्ली कूच कर दें और ऐलान करें कि जब तक नरेंद्र मोदी इस्तीफा नहीं देते, तब तक धरना खत्म नहीं करेंगे। हमारे सब्र का इम्तिहान लिया जा रहा है। अगर जो पैमाना छलक गया तो नतीजे बहुत खराब हो सकते हैं।”

बता दें कि कुछ दिन पहले तौकीर रजा ने कुछ हिंदू लड़कियों का सार्वजनिक तौर पर इस्लाम में धर्मांतरण कराने का ऐलान किया था। इसके साथ ही उनका निकाह मुस्लिम युवकों से कराने की बात भी कही थी। इसको लेकर बड़े पैमाने पर बवाल हुआ था। तौकीर रजा ने कहा था कि दूसरे धर्म के 15 लड़के और 8 लड़कियाँ इस्लाम कबूलना चाहते हैं। ये सभी बालिग़ हैं और इन्होंने पहले से ही शादी कर रखी है।

मौलाना ने कहा था कि उन्होंने जिला प्रशासन से सामूहिक निकाह की अनुमति माँगी है। तौकीर ने कहा था इन सबने धर्मांतरण पहले ही कर लिया है। कार्यक्रम में सिर्फ इसकी औपचारिक प्रक्रिया पूरी कराई जाएगी। इसके बाद सार्वजनिक रूप से सामूहिक निकाह कराया जाएगा। मौलाना ने कहा कि जिन 5 जोड़ों का पहले निकाह कराया जाएगा उनमें 1 मध्य प्रदेश से है, बाकी बरेली के आसपास के जिलों के हैं।

उन्होंने कहा कि पढ़ाई और नौकरी के दौरान ये लड़के-लड़कियाँ प्रेम में पड़े। हालाँकि, हिंदुओं के विरोध के बाद प्रशासन ने इसकी इजाजत नहीं दी थी। इतना ही नहीं, प्रशासन ने भी कहा था कि माहौल बिगाड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने साफ कह दिया था कि बिना अनुमति के इस प्रकार के किसी कार्यक्रम का आयोजन नहीं करने दिया जाएगा। 

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मसूरी में सैलानियों को चाय में थूक कर पिला रहे थे नौशाद और हसन अली, युवक ने टोका तो दी मारने की धमकी: वीडियो बनाने के बाद दर्ज कराई शिकायत

देश के अलग-अलग हिस्सों से खाने थूक और मूत कर ग्राहकों को देने की घटनाएँ लगातार सामने आ रही हैं। ऐसी ही एक घटना उत्तराखंड से फिर आई है। पर्यटकों के लिए सबसे पसंदीदा जगहों में से एक मसूरी से सामने आए वीडियो में दिख रहा है कि एक दुकानदार चाय में थूक कर लोगों को पिला रहा है। वीडियो वायरल होने के बाद मसूरी पुलिस ने दो लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।

इस मामले में एक व्यक्ति ने मसूरी पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने बताया कि देहरादून के रहने वाले हिमांशु बिश्नोई ने मसूरी कोतवाली में दी गई शिकायत में बताया है कि वह मसूरी लाइब्रेरी चौक (गाँधी चौक) पर सुबह गए थे। वहाँ के व्यू प्वॉइंट पर बहुत सारे पर्यटक खड़े थे। उसी चौक पर एक रेहड़ी पर दो लड़के लोगों को चाय, मैगी, बंद मक्खन आदि बेच रहे थे।

हिमांशु ने आगे बताया कि उन्होंने भी दुकानदार से चाय माँगी। इस दौरान वे सुहाने मौसम और आसपास का वीडियो बनाने लगे। इसी दौरान उन्होंने देखा कि चाय बनाने वाला लड़का बर्तन में थूक रहा था। बर्तन में उसका थूकते हुए वीडियो रिकॉर्ड हो गया। इसके बाद हिमांशु ने दोनों लड़कों को टोका तो वे उनके साथ गाली-गलौच और मारने की धमकी देने लगे। इसके बाद उन्होंने जाकर थाने में शिकायत दी।

मसूरी पुलिस ने बताया कि चाय बेचने वाले का नाम नौशाद और हसन अली है। नौशाद उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर के खतौली स्थित जमशेर कॉलोनी का निवासी है। वहीं, हसन अली मसूरी के गड्डी खाना किताबघर का रहने वाला है। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने दोनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। मुकदमा दर्ज होने की जानकारी मिलते ही दोनों आरोपित फरार हैं।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) अजेय सिंह ने बताया कि यह घटना 29 सितंबर 2024 को मसूरी के लाइब्रेरी चौक के पास हुई। हिमांशु बिश्नोई ने चाय के स्टॉल चलाने वाले नौशाद अली और हसन अली को चाय के बर्तन में थूकते हुए देखा था और इसका वीडियो भी बना लिया था। इस मामले में मुकदमा दर्ज कर ली गई है और आरोपितों को गिरफ्तार करने के लिए दबिश दी जा रही है।

अफगानिस्तान में आया तालिबान तो जान बचाने भागकर आया अमेरिका, फिर वहीं राष्ट्रपति चुनाव पर आतंकी हमले की करने लगा तैयारी: कौन है नासिर अहमद, FBI ने पकड़ा

अमेरिका की सुरक्षा एजेंसियों ने नासिर अहमद तौहीदी नाम के एक इस्लामी आतंकी को गिरफ्तार किया है। नासिर अमेरिका में चुनाव वाले दिन आतंकी हमला करना चाहता था। वह तालिबान के सत्ता हथियाने के बाद अफगानिस्तान से भाग कर अमेरिका में शरण के लिए पहुँचा था।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सोमवार (7 अक्टूबर, 2024) को पकड़े गए नासिर अहमद तौहीदी ने अमेरिका के चुनाव वाले दिन हमले की साजिश रची थी। वह इस्लामी आतंकी संगठन ISIS की विचारधारा से प्रभावित था। उसने इसके लिए हथियार जुटाना भी चालू कर दिया था।

तौहीदी के साथ एक और आतंकी इस काम में शामिल था जो नाबालिग है। वह लगातार इन्टरनेट पर ISIS से जुड़ा कंटेंट देखता था और उससे जुड़े संगठनों को पैसा भी देता था। तौहीदी लगातार न कैमरा और वेबकैमरा को ढूंढ रहा था जो वाइट हाउस समेत महत्वपूर्ण जगहों की फुटेज दिखाते हैं।

अमेरिका में चुनाव वाले दिन आतंकी हमले के लिए तौहीदी ने AK-47 राइफल खरीदने का फैसला लिया था। उसने इसके लिए उन राज्यों के बारे में भी खोजबीन चालू की थी, जहाँ बंदूकों को लेकर कानून सख्त नहीं है। वह इन बंदूकों के सप्लायर की तलाश में था।

तौहीदी ने साजिश रची थी कि चुनाव वाले दिन जहाँ भी बड़ी भीड़ इकट्ठा होगी वहीं पर वह हमला कर देगा। तौहीदी ने FBI को पूछताछ में बताया है कि वह और उसका साथी यह हमला करने के बाद गाजी बनना चाहते थे। तौहीदी बच्चों को भी ‘शहीद’ होने के फायदे गिनाता था और उनको आतंक की राह पर धकेल रहा था।

अमेरिका में हमले से पहले तौहीदी ने अपने घर समेत बाकी संपत्तियों को भी बेचने की साजिश बनाई थी ताकि उन्हें विदेश में निवेश किया जा सके। तौहीदी को FBI ने फर्जी बन्दूक विक्रेता बन कर पकड़ा। FBI के एजेंट बन्दूक विक्रेता बन कर तौहीदी और उसके साथ के लड़के से मिले। तौहीदी यह बन्दूक और 500 गोलियाँ खरीद लीं।

तौहीदी पर ISIS को सहायता देने करने का प्रयास करने और षड्यंत्र रचने का आरोप लगाया गया है, जिसके लिए अधिकतम 20 वर्ष की जेल की सजा हो सकती है। उस पर आतंकी हमला करने के लिए बन्दूक खरीदने का भी आरोप है, जिसके लिए दोषी पाए जाने पर अधिकतम 15 वर्ष की जेल की सजा हो सकती है।

FBI ने बताया है कि तौहीदी सितम्बर, 2021 में अफगानिस्तान में तालिबान के सत्ता में आने के बाद अमेरिका आया था। उसे अमेरिका में शरण के लिए विशेष वीजा दिया गया था। यहाँ वह अपने बीवी बच्चे के साथ आया था और उसे अमेरिका ने शरण दी थी लेकिन वह अमेरिकियों पर ही हमले की आजीश बनाने लगा।

जहाँ होनी थी माता की चौकी, वहाँ मुस्लिमों ने रख दिया कबाड़: पालघर में नवरात्रि मनाना दूभर, पीड़ित हिंदू बोले- सोसायटी में मदरसा बनाने वाले हमें रोक रहे

महाराष्ट्र के पालघर जिले के नालासोपारा में हिंदुओं को नवरात्रि मनाने से रोका जा रहा है। सामने आई खबरों के मुताबिक, यह मामला एक सोसायटी का है। सोसायटी में हिंदू के साथ-साथ मुस्लिम समुदाय के लोग भी रहते हैं। उनका आरोप है कि मुस्लिम समुदाय के लोग सोसायटी में नवरात्रि पूजा करने से रोक रहे हैं, जबकि खुद के लिए अवैध रूप से मदरसा बना रखा है और वहाँ हर समय नमाज होती है।

इस घटना की जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में स्थानीय हिंदू सोसायटी के गेट पर पहुँचे और वहाँ पूजा का आयोजन करने की कोशिश की। हालाँकि, घटना की जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में पुलिस भी मौके पर पहुँची और हिंदू समुदाय के लोगों को पूजा करने से रोक दिया। इस बात को लेकर आसपास के इलाके के हिंदुओं में भारी आक्रोश है।

दरअसल, कुछ साल पहले दो हिंदू साधुओं की सरेआम पीट-पीटकर मौत के घाट उतारने के बाद चर्चा में आए पालघर जिले में नालासोपारा शहर स्थित है। नालासोपारा पश्चिम के यशवंत गौरव इलाके में ऑरेंज हाइट्स नाम की एक सोसायटी है। इस सोसायटी में हिंदू और मुस्लिम निवासियों की लगभग बराबर आबादी है। हिंदू समुदाय के लोगों का आरोप है कि मुस्लिम समुदाय के लोग उन्हें हर तरह से परेशान करते रहते हैं।

इस सोसायटी में हिंदू निवासी नवरात्रि के अवसर पर माता की चौकी रखने और गरबा का आयोजन करने की योजना बना रहे थे। इसके बाद मुस्लिम समुदाय के लोगों ने आयोजन स्थल पर लोहे के पत्तर आदि अनेक कबाड़ डाल कर हिंदुओं को परेशान करना शुरू कर दिया। उनका कहना है कि सोसायटी में इस तरह का धार्मिक आयोजन नहीं होगा। इसके बाद हिंदू समुदाय के लोग थाने पहुँचे, लेकिन वहाँ से भी इन्हें राहत नहीं मिली।

इस घटना के विरोध में बाहर से आए हिंदू संगठन से जुड़े लोगों का कहना है कि सोसायटी के लोगों ने मुस्लिम समुदाय के लोगों से तीन तक निवेदन किया कि उन्हें नवरात्रि मनाने दिया जाए, लेकिन वे नहीं माने। भीड़ में शामिल एक व्यक्ति ने कहा, “ये सोचने की बात है कि आज हमें अपने ही देश में अपने देवी-देवता की पूजा करने और त्योहार मनाने के लिए लोगों से पूछना पड़ रहा है।”

एक अन्य व्यक्ति ने कहा, “ये लोग (मुस्लिम) हमें यहाँ नवरात्रि मनाने से रोक रहे हैं, लेकिन इन्होंने यहाँ मदरसा बना रखा है। ये मदरसा किससे पूछकर बनवाया है। सोसायटी में रहने की अनुमति है, मदरसा बनाने की नहीं।” उस शख्स ने सवाल किया कि हिंदुओं को पूजा करने और उनका त्योहार मानने से रोकने की इजाजत मुस्लिम समुदाय के लोगों को किसने दी? हिंदुओं ने कहा कि वे यहाँ पूजा करने आए हैं, वे पूजा करके जाएँगे।

सोसायटी में हिंदुओं के परेशान करने वाले कई वीडियो सामने आए

ऑरेंज हाइट्स में हिंदू समुदाय के लोगों को किस तरह परेशान किया जा रहा है, इसके कई वीडियो सोशल मीडिया पर आए हैं। इनमें सोसायटी के हिंदुओं के द्वारा बताया जा रहा है कि उन्हें परेशान करने के लिए कॉमन एरिया पर कब्जा कर लिया गया है। उनके रास्ते को ब्लॉक करने की कोशिश की जा रही है। उनके ड्रेनेज सिस्टम को ढप करने की कोशिश की जा रही है।

ऐसे ही एक वीडियो को काजल हिंदुस्तानी नाम की महिला ने सोशल मीडिया साइट X पर साझा किया है। इस वीडियो में एक महिला कह रही है, “ऐसे हमे रोका जा रहा है। जब मन करे पतरा लगा दिया जाता है। जब मन करे रास्ता रोक दे। जब मन करे गाड़ी रोक दे। जब मन करे गेट बंद कर दे। जब मन हमारा झंडा फेंक दे। जब मन करे, हमारा मुँह बंद कर दे।”

वीडियो में दिख रहा है कि रास्ते में लोहे जैसा दिखने वाला पतरा गिराया और रास्ता बंद किया हुआ है। वहाँ से चार पहिया गाड़ी निकालना बेहद मुश्किल है। वहीं सामने की तरह कुछ मुस्लिम महिलाएँ दिख रही है। वे चुपचाप हिंदू महिलाओं को वीडियो बनाते हुए देख रही है। हिंदू महिलाओं का कहना है कि यहाँ दो साल से उन्होंने रास्ता बंद कर रखा है। उन्होंने इमरजेंसी सर्वेिसेज को भी बंद कर रखा है।

वीडियो में हिंदू महिला उसी रास्ते के बगल का विजुअल दिखाती है, जिसमें कई बड़े-बड़े ताजिया रखे हुए हैं। उसके पीछे मुस्लिमों का धार्मिक झंडा लगाया हुआ है। महिला कह रही है, “इनका झंडा सालों और यह सामान यहाँ सालों भर रखा रहता है और हमारा झंडा लात मारकर हटाया जाता है।” वीडियो में दिख रहा है कि हिंदू महिला द्वारा वीडियो बनाने के दौरान एक मुस्लिम युवा अपने झंडे को हटा रहा है, ताकि वीडियो में ना दिखे।

वहीं, एक अन्य वीडियो में वही महिला मुस्लिमों द्वारा सोसायटी में ही बनवाए गए मदरसे को दिखा रही है। महिला कह रही है, “इन्होंने (मुस्लिमों ने) गाड़ी पार्किंग में घेर कर मदरसा बना दिया। ऊपर शेड लगा दिया। यहाँ पिछले दो सालों से मदरसा चल रहा है। यहाँ स्पीकर लगाकर पाँच नमाज पढ़ते हैं, फिर भी हमने कुछ नहीं बोला। लेकिन, सिर्फ नौ दिनों के लिए माता रानी की चौकी लगा रहे हैं तो ये लोग मना कर रहे हैं।”

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सोसायटी का विजुअल दिखाते हुए महिला आगे कह रही है, “यहाँ से अगर हमारी इमरजेंसी सर्विसेज की जरूरत होगी तो कैसे आएगी? ये लोग कह रहे हैं कि यहाँ भी दिवार लगाएँगे और E विंग को आने-जाने का रास्ता नहीं देंगे। पानी का रास्ता नहीं देंगे और गटर में पानी जाने का जो रास्ता है, उसे भी इन लोगों ने ब्लॉक करने की कोशिश की। वहाँ पर ईंट-पत्थर आदि लगा रहे हैं।”

महिला आगे कह रही है, “ये कचरा रखने वाले जगह को भी ब्लॉक करने के लिए कह रहे हैं और कह रहे हैं यहाँ हमारा नहीं है। हम 15-20 बार पुलिस स्टेशन जा चुके हैं और हमारा कोई सॉल्यूशन निकलता नहीं है।” वीडियो में महिला दिखाती है कि सामने ‘फैजान-ए-कुरान जाए नमाज मदरसा’ बना हुआ है। महिला कहती है कि यह भी पूरी तरह अवैध रूप से बनाया गया है।

लोगों का कहना है कि यहाँ हर साल नवरात्रि में हिंदू समुदाय माता की चौकी रखते हैं और पूजा करने के बाद प्रतिमा का विसर्जन कर देते हैं। हालाँकि, इस बार मुस्लिम समुदाय के लोगों के द्वारा उन्हें परेशान किया जा रहा है। उन्हें सोसायटी में नवरात्रि मनाने से रोकने की कोशिश की जा रही है।

बच्चों ने सेक्स करते देख लिया… एक की छाती पर बैठ सोनिया बानो ने घोंट दिया गला, दूसरे का एहसान ने फाड़ दिया सर: पानी टंकी से मिली थी लाश

राजस्थान के जैसलमेर में 5 अक्टूबर 2024 को दो बच्चों का शव पानी टंकी से बरामद किया गया था। पुलिस ने इस हत्या की गुत्थी सुलझाते हुए एहसान अली और सोनिया बानो को गिरफ्तार किया है। दोनों मृतक बच्चों के रिश्ते में चाचा और मौसी लगते हैं।

मृत बच्चों की पहचान 7 साल के मोहम्मद हसनेन और 8 साल के मोहम्मद आदिल के तौर पर हुई है। रिपोर्टों के अनुसार इन्होंने एहसान और सोनिया को आपत्तिजनक हालत में देख लिया था। इसके बाद बदनामी के डर से दोनों ने मिलकर बच्चों की हत्या कर दी। मृत बच्चे रिश्ते में चचेरे भाई थे।

रिपोर्ट में बताया गया है कि हसनेन की छाती पर सोनिया बैठ गई और गला दबाकर मार डाला। एहसान ने इसी तरीके से आदिल को मारने की कोशिश की। लेकिन उसकी मौत नहीं हुई तो घर में रखे लोहे के एक रॉड से उसके सिर पर वार कर दिया। सिर फटने से उसकी भी मौत हो गई।

हत्या के बाद बच्चों का शव इन्होंने बोरे में भरा और उसके पास के एक खाली मकान के पानी टैंक में डाल दिया। इसके बाद एहसान और सोनिया ने मिलकर मौके पर खून साफ किए व अन्य सबूत मिटाने का प्रयास किया।

जिस दिन दोनों बच्चों की हत्या हुई वे खेलते हुए एहसान के घर चले गए थे। उन्होंने इसी दौरान उसे सोनिया के साथ आपत्तिजनक हालत में देख लिया। एहसान और सोनिया का घर आसपास में ही है और कई साल से दोनों के बीच अफेयर चल रहा है।

5 अक्टूबर की शाम को जब दोनों बच्चे घर नहीं लौटे तो उनकी तलाश शुरू हुई। इसमें एहसान भी शामिल था। वह पुलिस के एक्शन पर भी नजर बनाए हुआ था। कई घंटे बाद पुलिस ने पानी टंकी से दोनों शव बरामद किए। शव की स्थिति से अनहोनी की आशंका गहराई। बच्चों के परिजन भी हत्या का शक जाहिर करते हुए उस अस्पताल में धरने पर बैठ गए थे, जहाँ पोस्टमार्टम हुआ था।

इसके बाद पुलिस ने हत्या के एंगल से जाँच शुरू की तो उसे एहसान पर शक हुआ। उसके घर की तलाशी लेने पर खून के कुछ छींटे मिले। इसके बाद हिरासत में लेकर उससे पूछताछ की गई। पुलिस के सामने वह टूट गया और बच्चों की हत्या कबूल कर ली।

जिस सरकारी अस्पताल में काम करते हैं जब्बार खान-मुशीर अहमद, वहाँ ‘जैविक जिहाद’ की कर रहे थे तैयारी: डॉक्टर यशवीर के खाने में TB मरीज का बलगम मिलाने का था प्लान

उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में एक सरकारी डॉक्टर और उसके परिवार को मारने की साजिश का मामला सामने आया है। इस साजिश में डॉक्टर यशवीर सिंह के खाने में टीबी (ट्यूबरक्लोसिस) से पीड़ित मरीज का बलगम और कुछ घातक रसायन मिलाने की योजना बनाई गई थी। यह घटना तब उजागर हुई जब डॉक्टर यशवीर सिंह ने सोमवार (7 अक्टूबर 2024) को पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई।

डॉक्टर यशवीर के मुताबिक, उनके अस्पताल में कार्यरत संविदाकर्मी जब्बार खान और लैब टेक्नीशियन मुशीर अहमद ने मिलकर इस घातक साजिश की योजना बनाई। इनका मकसद डॉक्टर और उनके परिवार को धीरे-धीरे जहरीले रसायन और टीबी मरीज का बलगम खिलाकर नुकसान पहुँचाना था। यह योजना लंबे समय से चल रही थी, लेकिन इसका खुलासा तब हुआ जब सफाईकर्मी टिंकू ने इसमें शामिल होने से मना कर दिया।

डॉक्टर की शिकायत पर पुलिस ने जब्बार खान और मुशीर अहमद के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। एफआईआर भारतीय न्याय संहिता की धारा 61 (2), 62 और 105 के तहत दर्ज की गई है। पुलिस ने बताया कि आरोपितों पर गंभीर धाराओं के तहत कार्रवाई की जा रही है और मामले की पूरी जाँच की जा रही है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है। हिन्दू युवा वाहिनी ने दोनों मुस्लिम आरोपितों की इस करतूत को जैविक जिहाद बताते हुए कड़ी कार्रवाई की माँग की है। पुलिस ने बताया कि मामले में जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

डॉक्टर को पता ही नहीं कि दोनों को दिक्कत क्या थी ?

ऑपइंडिया ने इस मामले में डॉ यशवीर सिंह से बात की। डॉक्टर यशवीर सिंह ने हमें बताया कि उनको पता ही नहीं है कि मुशीर और जब्बार उनको मारना क्यों चाहते थे। दोनों से मुशीर से डॉक्टर कभी मिले ही नहीं थे जबकि जब्बार से महीने में महज एक या दो बार ही मुलाकात होती थी। जब डॉक्टर ने दोनों आरोपितों को बुला कर इसकी वजह पूछी तो उन्होंने कुछ भी बताने से इंकार करते हुए महज इतना कहा, “साहब गलती हो गई”। बकौल यशवीर यह पुलिस पता करे कि उन दोनों को दिक्कत क्या थी।

डॉक्टर ने कहा कि न सिर्फ उन्हें बल्कि उनके परिवार को मारने की साजिश रची गई थी। पहली साजिश डॉक्टर को ऑफिस में मिलने वाली चाय या नाश्ते में टी बी के मरीज का बलगम व घातक केमिकल मिलाने की थी। साजिश का दूसरा हिस्सा डॉक्टर के बच्चों को आवास में भेजे जाने वाले पिज्जा आदि में यही सब मिलाना था। डॉ यशवीर इस बात से भी हैरान हैं कि जब्बार और मुशीर को उनके उन बच्चों से क्या दिक्कत थी, जिसमें से एक की उम्र महज 7 और दूसरे की 10 साल है।

हिन्दू संगठनों ने इस घटना को “जैविक जिहाद” का नाम दिया है। उनका कहना है कि यह एक सुनियोजित हमला है, जिसमें मुस्लिम आरोपितों ने एक हिन्दू डॉक्टर और उसके परिवार को निशाना बनाने की कोशिश की। इस घटना को लेकर हिन्दू युवा वाहिनी ने सख्त कार्रवाई की माँग की है और प्रशासन से आग्रह किया है कि दोषियों को कड़ी सजा दी जाए। इस घटना ने इलाके में तनाव पैदा कर दिया है, और अब सभी की नजरें पुलिस की जाँच और आरोपितों पर कानूनी कार्रवाई पर टिकी हैं।

RG Kar अस्पताल के 50 सीनियर डॉक्टर ने एक साथ दिया इस्तीफा, आमरण अनशन पर जूनियर डॉक्टर्स: जानिए वजह, यहीं हुआ था रेप-मर्डर

कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में 50 वरिष्ठ डॉक्टरों ने जूनियर डॉक्टरों के समर्थन में सामूहिक इस्तीफा दे दिया है। यह कदम एक डॉक्टर के बलात्कार और हत्या के मामले में न्याय की माँग को लेकर उठाया गया है।

जूनियर डॉक्टर शनिवार (5 अक्टूबर 2024) से आमरण अरशन पर हैं, जिनकी प्रमुख माँगें अस्पतालों में भ्रष्टाचार का खात्मा, मरीजों के लिए बेहतर सुविधा और सुरक्षा बढ़ाने की हैं। उन्होंने सीसीटीवी, वॉशरूम जैसी सुविधाओं की स्थापना और पुलिस सुरक्षा बढ़ाने की भी माँग की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में 50 वरिष्ठ डॉक्टरों ने जूनियर डॉक्टरों के समर्थन में सामूहिक इस्तीफा दे दिया है। यह कदम डॉक्टर के बलात्कार और हत्या के मामले में आमरण अनशन कर रहे जूनियर डॉक्टरों के समर्थन में उठाया गया है, जिसने पूरे स्वास्थ्य क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया है। सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो में दिख रहा है कि 50 वरिष्ठ डॉक्टरों ने अपने इस्तीफे अस्पताल के प्रशासन को सौंपे, और छात्रों ने इस पर तालियाँ बजाई।

जूनियर डॉक्टर शनिवार से भूख हड़ताल पर हैं। उनकी मांगें हैं: अपने साथी के लिए न्याय, अस्पतालों में भ्रष्टाचार का खात्मा, और एक मरीजों के सेंट्रलाइज सिस्टम बनाना। इसके अलावा, वे चाहते हैं कि सभी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों के लिए एक केंद्रीकृत रेफरल सिस्टम लागू किया जाए। इसके साथ ही, बेड की उपलब्धता की निगरानी, सीसीटीवी, ऑन-काल रूम और वॉशरूम की सुविधाओं का सुनिश्चित होना भी उनकी माँगों में शामिल है।

इस विरोध प्रदर्शन के बीच, पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव मनोज पंत ने सोमवार (07 अक्टूबर 2024) को आश्वासन दिया कि राज्य के सभी मेडिकल कॉलेजों में 90 प्रतिशत चल रहे काम अगले महीने तक पूरी हो जाएँगे। उन्होंने प्रदर्शनकारी डॉक्टरोंसे काम पर लौटने की अपील की। बता दें कि शनिवार को आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के 59 स्टाफ को सस्पेंड कर दिया गया था, जिसमें 10 डॉक्टर भी शामिल थे।

जूनियर डॉक्टरों ने हाल ही में मरीज के परिवार द्वारा डॉक्टरों पर हमले के बाद एक बार फिर “पूर्ण काम बंद” का प्रदर्शन शुरू किया था, लेकिन उन्होंने 4 अक्टूबर को इसे समाप्त कर दिया और “आमरण अनशन” शुरू कर दिया। इस प्रदर्शन ने दुर्गा पूजा के उत्सव के माहौल को भी प्रभावित किया है। डॉक्टरों के सामूहिक इस्तीफे से स्वास्थ्य सेवा प्रणाली पर बड़ा दबाव पड़ा है, और यह सभी की नजरों में है कि सरकार उनकी माँगों पर कितनी जल्दी कार्रवाई करती है।

जहाँ 80% मुस्लिम, वहाँ वह जीता जिसका हिंदू विरोधी दंगों में नाम, BJP के मुस्लिम नहीं कबूल: जिनको मामन खान चाहिए, ‘सबका विकास’ नहीं जीत सकता उनका भरोसा

भारत में हर तीन-चार महीने पर एक-दो चुनाव आते रहते हैं। हर चुनाव के साथ देश की वोटबैंक राजनीति और उससे जुड़े मुद्दे भी उठते हैं। प्रत्येक चुनाव में जब भाजपा अपने उम्मीदवार घोषित करती है तो लिस्ट में मुस्लिम नाम ढूँढने वाले हमेशा शोर मचाते हैं। उनका आरोप रहता है कि भाजपा की राजनीति में मुस्लिमों के लिए कोई जगह नहीं है और वह मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट नहीं देती। यह आरोप गुजरात चुनाव से लेकर उत्तर प्रदेश और हालिया लोकसभा चुनावों तक लगता आया है।

भाजपा पर यह आरोप लगाने 2024 के हरियाणा और जम्मू कश्मीर विधानसभा चुनाव में निरुत्तर हो गए। भाजपा ने इन चुनावों में कुल 28 मुस्लिमों को टिकट दिया। 2 मुस्लिमों को हरियाणा में जबकि 26 मुस्लिम उम्मीदवारों को भाजपा ने जम्मू कश्मीर में उतारा। भाजपा ने हरियाणा के नूंह जिले की 3 में से 2 सीटों में पर मुस्लिम उम्मीदवार दिए। उसने फिरोजपुर झिरका से नसीम अहमद जबकि पुन्हाना से एजाज खान को उतारा था।

चुनाव नतीजों में इनमें से एक भी मुस्लिम उम्मीदवार जीतने में सफल नहीं रहा है। जम्मू कश्मीर में भी भाजपा के मुस्लिम उम्मीदवारों को सफलता नहीं हासिल हुई। हरियाणा में भी उसके दोनों उम्मीदवार हार गए। हरियाणा में उन सीटों पर भी भाजपा के मुस्लिम उम्मीदवार हारे जहाँ लगभग 80% जनसंख्या मुस्लिम है। फिरोजपुर झिरका में मुस्लिम आबादी ने भाजपा के मुस्लिम उम्मीदवार नसीम अहमद को ना चुन कर कॉन्ग्रेस के मामन खान को चुना।

मामन खान की जीत

कॉन्ग्रेस के मामन खान ने हरियाणा के अंदर सबसे बड़ी जीत दर्ज की है। वह 98000 वोटों के अंतर से जीते हैं। गौरतलब है कि यह वही मामन खान हैं जो नूंह दंगों में आरोपित हैं और इस मामले में जेल तक जा चुका है। मामन खान को इन नूंह दंगों, जिनमें एक युवक की मौत हुई थी, उनका सरगना बताया गया था। मामन खान पर मात्र दंगा भड़काने ही नहीं बल्कि धमकी देने का भी आरोप है। हाल ही में उन्होंने कहा था कि कॉन्ग्रेस सरकार बनेगी तो अन्याय करने वालों मेवात छोड़ना पड़ेगा।

मामन खान को जिताना और वह भी हरियाणा में सबसे बड़े अंतर से जिताना दिखाता है कि मुस्लिम जनसंख्या को भाजपा के मुस्लिम उम्मीदवार पसंद नहीं है। इसका अर्थ है कि यदि उनके सामने भाजपा मुस्लिम उम्मीदवार देती भी है तो उसे मुस्लिम वोट नहीं देंगे। उनका वोट ऐसे व्यक्ति को जाने की संभावना अधिक दिखाई पड़ती है जो दंगे में आरोपित है और विकास-इन्फ्रा जैसी बातों से कोसों दूर है। मामन खान की जीत यह भी दर्शाती है कि मुस्लिम वोट उसे पसंद करता है जो भाजपा को हराता हो, भले ही वह दंगा आरोपित क्यों ना हो।

मामन खान और आफताब खान जैसे उम्मीदवारों की जीत में बड़े अंतर यह भी दिखाते हैं कि मुस्लिम आबादी का ध्यान विकास की तरफ कम और खुद को वोटबैंक बना कर राजनीति की तरफ अधिक है। मेवात देश के सबसे अधिक पिछड़े, गरीब और अपराध ग्रसित इलाकों में से एक है।

राजधानी दिल्ली से मात्र 100 किलोमीटर के दायरे में होने के बावजूद हाल तक यहाँ मूलभूत सुविधाएँ नहीं पहुँची थी। यहाँ महिलाओं की स्थिति भी चिंताजनक है। यही पर बीत वर्ष नल्हड़ महादेव में जल चढ़ाने गए हिन्दुओं पर कट्टरपंथी भीड़ ने हमला किया था। लेकिन इन सब मुद्दों को सुलझाने का वादा करने के बजाय मामन जैसे लोगों को चुना जाता है।

ऐसे में मुस्लिमों को खुद इस यह सोचना होगा कि कब तक केवल भाजपा को हराने के नाम पर ही वोट करते रहेंगे भले ही उनके पास अपने ही समुदाय का उम्मीदवार हो। उन्हें यह भी सोचना होगा कि मात्र भाजपा का हौव्वा दिखा कर उनसे वोट लेने वाली पार्टियाँ उनका विकास कब करेंगी। भाजपा पर यह आरोप लगाने वाले मुस्लिम समाज को यह समझना होगा कि सबका साथ और सबका विश्वास का नारा तभी आगे बढेगा जब मुस्लिम उसमें शामिल हो जाएँ।

कॉन्ग्रेस नेता अब्दुल मोईद था बहराइच की कट्टरपंथी भीड़ का अगुआ, 14 साल के हिंदू छात्र का ‘सर तन से जुदा’ करने के लगे नारे: पीड़ित परिजन बोले- मुस्लिम छात्र के गंदे कमेंट से हुआ फसाद

उत्तर प्रदेश के बहराइच में सोमवार (7 अक्टूबर 2024) को इस्लामी कट्टरपंथियों की भीड़ ने 14 साल के हिंदू छात्र को ‘गुस्ताख’ बताकर बवाल किया। भीड़ ने पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी का आरोप लगाते हुए उत्तेजक नारेबाजी की। नाबालिग के खिलाफ FIR दर्ज की गई, लेकिन उसकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर दी गईं। इस भीड़ की अगुवाई कॉन्ग्रेस का नेता अब्दुल मोईद कर रहा था। हालाँकि पुलिस ने समय रहते कार्रवाई कर किसी बड़ी घटना को होने से रोक लिया।

यह घटना बहराइच के नानपारा थाना क्षेत्र की है। यहाँ रहमत अली ने 14 वर्षीय हिंदू छात्र के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसमें आरोप लगाया गया कि छात्र ने इंस्टाग्राम पर पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ अभद्र टिप्पणी की है। इस मामले में पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 298, 299, 302, 352 और 353 के तहत केस दर्ज किया है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है।

एक तरफ जब FIR दर्ज हो रही थी, तब इस्लामी कट्टरपंथियों की भीड़ नानपारा के सर्राफा बाजार में जमा हो गई थी। इसमें छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक शामिल थे, जो उत्तेजक नारे लगा रहे थे। प्रशासन ने समझाने की कोशिश की, लेकिन भीड़ नहीं मानी। पुलिस ने आखिरकार बल प्रयोग कर भीड़ को तितर-बितर किया। ऑपइंडिया के पास हंगामे से जुड़े कई वीडियो मौजूद है, जिसमें इस्लामी कट्टरपंथियों की भीड़ को उन्मादी नारेबाजी करते देखा जा सकता है।

वायरल की गईं नाबालिग आरोपित की तस्वीरें और वीडियो

इस घटना के बाद नाबालिग की पहचान, फोटो और वीडियो सार्वजनिक कर दी गईं, जबकि मामला दो नाबालिगों के बीच की बहस का था। हिन्दू छात्र के परिजनों का कहना है कि गाली-गलौज मुस्लिम छात्र की तरफ से भी हुई, पर उसने अपने कमेंट्स डिलीट कर दिए। इसके बाद भीड़ ने हिन्दू छात्र के कमेंट को वीडियो बनाकर फैलाया।

X प्लेटफॉर्म के यूजर विजय पटेल ने इसकी शिकायत राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग (NCPCR) के चेयरमैन प्रियांक कानूनगो से की है। विजय ने यह हरकत करने वालों पर एक्शन की माँग उठाई है। आरोपों के समर्थन में विजय ने कुछ स्क्रीनशॉट भी शेयर किए हैं।

दोनों तरफ से दी गई गालियाँ, पर कार्रवाई एकतरफा

ऑपइंडिया ने इस घटना के बाद हिन्दू छात्र के चाचा से बात की। हमें बताया गया कि मामला लगभग 10 दिन पुराना है जब बहराइच के कालीकुंडा माता मंदिर में 2 मुस्लिम महिलाओं ने बुर्का पहन कर पूजापाठ की थी। इसी बात को ले कर सोशल मीडिया पर कई लोग आपस में चर्चा कर रहे थे। घटना से पहले दोनों छात्रों के बीच में भी इसी बात को ले कर चर्चा की शुरुआत हुई थी। हिन्दू छात्र के परिजन का आरोप है कि गाली-गलौज मुस्लिम छात्र की तरफ से भी हुई लेकिन उसने बड़े दिमाग से अपने कमेंट डिलीट कर लिए।

आरोपित बनाए गए हिन्दू छात्र के चाचा ने हमें आगे बताया कि उनके भतीजे को मुस्लिम छात्र द्वारा जेल में बंद और भड़काऊ बयानबाज सलमान अज़हरी का वीडियो भी भेजा गया था। इसी के साथ भगवान राम को गाली दे कर कमेंट डिलीट कर लिया गया। बाद में हिन्दू छात्र के कमेंट का बाकायदा वीडियो बना कर स्टेट्स लगाया गया और बाकी मुस्लिमों से भी ऐसा ही करने को कहा गया। कुछ ही देर में ये वीडियो नानपारा व आसपास के इलाकों में वायरल हो गया।

हिन्दू परिवार को लगा कि मामला खत्म हो गया पर आखिरकार ये उनकी गलतफहमी साबित हुई। शुरुआत में दोपहर 11 बजे के आसपास मुस्लिम समुदाय के कुछ लोग हिन्दू छात्र के घर आए। उन्होंने छात्र से माफ़ी मंगवाई और इसका वीडियो भी बनवाया। इतने के बावजूद आखिरकार रात में मुस्लिम भीड़ ने एकजुट हो कर बवाल कर दिया। इस बवाल में हिन्दू परिवार की सर्राफे की दुकान को घेर लिया गया था।

पीड़ित के मुताबिक भीड़ सिर तन से जुदा की नारेबाजी कर रही थी। उन्होंने यह भी बताया कि अगर पुलिस एक्टिव न होती तो शायद पूरी सर्राफा बाजार फूँक दी गई होती। हिन्दू छात्र के परिवार को इस बात की भी तकलीफ है उन पर तत्काल FIR कर देने वाले प्रशासन ने अभी तक उनके द्वारा दी गई तहरीर पर मुस्लिम पक्ष पर केस क्यों नहीं दर्ज किया है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि प्रशासन न सिर्फ उनकी तहरीर पर बल्कि हिंसक भीड़ पर भी केस दर्ज कर के कानूनी कार्रवाई करेगी।

सैलून वाला मोहसिन, नावेद सर्राफा और कॉन्ग्रेस नेता ने जुटाई भीड़

नाबालिग हिन्दू छात्र के परिजनों ने ऑपइंडिया को आगे बताया कि हिंसक हो चली भीड़ को जुटाने में सबसे ज्यादा हाथ उनके ही मोहल्ले में सैलून चलाने वाले मोहसिन और सर्राफा के कारोबारी नावेद का रहा। भीड़ का नेतृत्व कॉन्ग्रेस पार्टी का नेता व पूर्व चेयरमैन अब्दुल मोईद कर रहा था। इन तीनों के साथ एक मुस्लिम वकील व इन्ही के मजहब का एक सभासद भी उन्माद फ़ैलाने की कोशिश करता हुआ दिखा था। यह भीड़ जिन सर्राफे की दुकान की तरफ बढ़ना चाहती थी वो अधिकतर सोनी और रस्तोगी समाज के लोगों की है।

जिसके पिता-चाचा को इस्लामी आतंकियों ने गोलियों से भूना, उसने किश्तवाड़ में खिलाया ‘कमल’: जीत के बाद बोलीं शगुन परिहार- हर बच्चे के सर पर पिता का साया हो

जम्मू कश्मीर विधानसभा चुनावों में भाजपा उम्मीदवार शगुन परिहार ने जोरदार जीत दर्ज की है। शगुन परिहार जम्मू कश्मीर की किश्तवाड़ सीट से उम्मीदवार से चुनाव लड़ रहीं थी। शगुन परिहार के पिता और चाचा की इस्लामी आतंकियों ने हत्या कर दी थी।

मंगलवार (8 अक्टूबर, 2024) को आए नतीजों में शगुन परिहार को 29053 वोट मिले जबकि उनके प्रतिद्वंदी नेशनल कॉन्फ्रेंस उम्मीदवार सज्जाद अहमद किचलू को 28532 वोट ही मिले। शगुन परिहार ने इस तरह 500 वोटों के अंतर से चुनाव जीत लिया।

चुनाव जीतने के बाद शगुन परिहार ने मडिया से बात भी की है। उन्होंने कहा, “सबसे पहले मैं यहाँ सुरक्षा का मुद्दा सुलझाऊँगी, क्योंकि हमने बहुत से जवानों को और अपने लोगों को खोया है। मैंने अपने पिता को खोया है। किसी ने यहाँ अपने बेटे, किसी ने अपने भाई को खोया है। मेरी कोशिश रहेगी कि यहाँ के हर बच्चे के सर पर पिता का साया हो।”

शगुन परिहार मात्र 29 वर्ष की हैं और उन्हें पार्टी ने पहली बार किश्तवाड़ से मौक़ा दिया था। शगुन परिहार ने टिकट मिलने के बाद कहा था, “वह काला दिन आज भी मेरी आँखों में बसा है, जिस दिन मेरा घर वीरान कर दिया गया। मेरे परिवार ने अपने खून का कतरा-कतरा किश्तवाड़ के लिए दे दिया, यह चुनाव उनके लिए है।”

शगुन परिहार के चाचा अनिल परिहार जम्मू कश्मीर में भाजपा के बड़े नेता था। उनके पास राज्य में भाजपा के सचिव पद की जिम्मेदारी थी। वो अपने राजनीतिक करियर में आगे बढ़ ही रहे थे कि इस्लामी कट्टरपंथियों की नजर में वो खटकने लगे और साल 2018 में अनिल परिहार के साथ उनके भाई व शगुन परिहार के पिता को मौत के घाट उतार दिया गया।

कैसे हुई थी अनिल परिहार और अजीत परिहार की हत्या

नवंबर 2018 की बात है। बीजेपी की राज्य इकाई के सचिव अनिल परिहार और उनके भाई अजीत परिहार किश्तवाड़ में अपनी दुकान से लौट रहे थे कि इसी दौरान उन पर करीब से गोलीबारी हुई। बाद में पता चला कि हमलावर हिज्बुल मुजाहिद्दीन के आतंकी थे जो उस रात रास्ते में खड़े होकर सिर्फ दोनों भाइयों के लौटने का इंतजार कर रहे थे।

इस घटना के बाद किश्तवाड़ा में हालात ऐसे हो गए थे कि कर्फ्यू लगाना पड़ा था और इंटरनेट बंद करने पड़े थे। पड़ताल के बाद इस मामले में तीन आतंकी गिरफ्तार हुए थे। अनिल परिहार अनुच्छेद 370 हटाए जाने के प्रबल समर्थन थे और इस्लामी आतंकवाद का जम कर विरोध करते थे, इसीलिए उनकी हत्या आतंकियों ने कर दी थी।