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अब्बास, अल्ताफ, शाहरुख… यही हैं वे दरिंदे जिन्होंने दोस्त के साथ बैठी नाबालिग हिंदू लड़की का किया गैंगरेप: वडोदरा पुलिस ने एनकाउंटर के बाद 5 को दबोचा, SIT करेगी जाँच

गुजरात के वडोदरा में 16 वर्षीया नाबालिग लड़की से गैंगरेप करने वाले 5 आरोपितों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। सभी 5 आरोपित मुस्लिम समुदाय से हैं, जो कि मूल रूप से उत्तर प्रदेश के निवासी बताए जा रहे हैं। इनके नाम मुन्ना अब्बास, अल्ताफ बंजारा और शाहरुख़ इस्माइल हैं। घटना के समय पीड़िता एक सड़क पर अपने दोस्त के साथ बैठी थी, तभी आरोपितों ने वहाँ पहुँच कर गैंगरेप की वारदात को अंजाम दिया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस घटना पर वडोदरा पुलिस कमिश्नर और आईजी रेंज ने मीडिया से बातचीत की और बताया कि घटना में शामिल तीन मुख्य आरोपितों सहित उनके 2 अन्य दोस्तों को गिरफ्तार कर लिया गया है। यह गिरफ्तारी मुठभेड़ के बाद हुई है। इस पूरे मामले की जाँच के लिए SIT का भी गठन किया जाएगा।

DSP रैंक के अधिकारी के नेतृत्व में गठित होने जा रही इस SIT की निगरानी पुलिस के उच्चाधिकारी करेंगे। पुलिस ने आगे बताया कि SIT को निर्देश दिए गए हैं कि वो जल्द से जल्द जाँच पूरी कर के चार्जशीट दाखिल करें। आरोपितों को अदालत से भी जल्द सजा दिलाने के प्रयास किए जाएँगे। बताते चलें कि मूलतः UP निवासी शाहरुख़ इस्माइल, मुन्ना अब्बास और अल्ताफ बंजारा फ़िलहाल वडोदरा के तंदलजा में रहते हैं। तंदलजा मुस्लिम बहुल इलाका कहा जाता है। यह जगह घटनास्थल से लगभग तीन किलोमीटर दूर है।

क्या थी पूरी घटना

यह घटना पिछले शुक्रवार (4 अक्टूबर 2024) की है। तब कक्षा 11 में पढ़ने वाली 16 वर्षीया हिन्दू लड़की अपने हमउम्र के दोस्त के साथ भायली-बील रोड पर बैठी थी। तभी उधर से शराब के नशे में धुत 5 लोग गुजरे। उन्होंने दोनों नाबालिगों को परेशान करना शुरू कर दिया। कुछ देर की छेड़खानी के बाद 2 आरोपित वहाँ से चले गए। 2 दोस्तों के जाने के बावजूद मुन्ना अब्बास, अल्ताफ बंजारा और शाहरुख इस्माइल वहीं रुके रहे और छेड़खानी जारी रखी।

कुछ ही देर बाद तीनों में से एक ने पीड़िता के नाबालिग दोस्त को पकड़ लिया और 2 ने नाबालिग से बलात्कार किया। इस वारदात के बाद दोनों पीड़ित बच्चे अपने घर पहुँचे और गैंगरेप की जानकारी परिजनों को दो। परिजनों ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई। पुलिस ने फ़ौरन घटनास्थल पर पहुँच कर जाँच की। केस दर्ज कर के आरोपितों को चिन्हित किया गया और उनकी गिरफ्तारी हुई। फिलहाल पुलिस मामले की जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई कर रही है।

‘मेहदी फाउंडेशन’ से जुड़ा है UP का परवेज अहमद, पाकिस्तानी मुस्लिमों को ‘हिंदू पहचान’ देकर भारत में बसाता है: खुद की बीवी भी सीमा पार की

बीते दिनों बेंगलुरु से एक पाकिस्तान परिवार गिरफ्तार हुआ था जो यहाँ हिंदू पहचान के साथ रह रहा था। अब पुलिस ने उसी परिवार की मदद करने वाले आरोपित को गिरफ्तार किया है। उसकी पहचान परवेज अहमद के तौर पर हुई है। जाँच अधिकारी परवेज की पड़ताल कर रहे हैं।

शुरुआती पूछताछ में सामने आया है कि परवेज ने भारत में कम से कम पाँच पाकिस्तानी परिवारों को बसाया है जो हिंदू नाम की आड़ लेकर भारत में रह रहे हैं। इनमें से 2 को तो पिछले हफ्ते ही बेंगलुरु से गिरफ्तार किया गया है। वहीं बाकी जिनकी मदद परवेज ने की वो मुंबई और दिल्ली में बसे हैं। एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार उसने 22 लोगो की भारत में अवैध रूप से घुसने में मदद की।

अब पुलिस ये छानबीन कर रही है कि क्या इन परिवारों का कोई आपराधिक बैकग्राउंड है या नहीं। अगर नहीं, तो फिर उन्हें वापस उनके मुल्क भेजने की प्रक्रिया की जाएगी।

उल्लेखनीय है कि 29 सितंबर को जिगानी पुलिस ने रफीक सिद्दीकी के पाकिस्तानी परिवार को गिरफ्तार किया था जो 2018 से बेंगलुरु में रह रहे थे। इन्होंने अपनी पहचान छिपाकर यहाँ ‘शर्मा’ नाम से पहचान दिखाई हुई थी। जाँच में सामने आया था कि इनमें से रफीक सिद्दीकी मेहदी फाउंडेशन का सदस्य था। उसी मेहदी फाउडेशन से परवेज भी जुड़ा था जिसने उसकी मदद की।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट बताती है कि परवेज का जुड़ाव इस संस्था से 2007 में हुआ था जब इसके 63 सदस्य भारत आए और नई दिल्ली में अपने पाकिस्तानी पासपोर्ट जलाकर विरोध प्रदर्शन किया। इन प्रदर्शनकारियों में एक महिला भी थी जिसने बाद में परवेज से शादी कर ली। शादी के बाद महिला भारत में ही रही जबकि बाकी लोगों को शर्णार्थी की पहचान मिली और वो यूरोपीय देशों में बसाए गए।

अब परवेज की बीवी दिल्ली में रहती है और दिल्ली विशेष शाखा को रिपोर्ट करती है। इस क्रम में परवेज का आना जाना दिल्ली होता है। उसके मुताबिक उसने भारत में उन्हीं लोगों को बसवाया जो मजबूर हो गए थे और उनके पास कोई विकल्प नहीं था।

अतीक हो या मुख्तार, इंजीनियर रशीद हो या शरजील इमाम… क्यों हर बार छलक जाता है पत्रकार राजदीप सरदेसाई का ‘उम्माह’?

एक पत्रकार हैं राजदीप सरदेसाई। उनकी पहचान है कि वह इंडिया टुडे टीवी चैनल के सलाहकार संपादक और एंकर हैं। उनकी दूसरी पहचान है कि वह तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) की राज्यसभा सांसद सागरिका घोष के पति हैं। किताबें लिख चुके हैं, खुद को क्रिकेट का बड़ा फैन बताते हैं। इन सबके इतर भी राजदीप सरदेसाई की एक पहचान है। यह पहचान है कि कोई भी ऐसा व्यक्ति जो देश या समाज के लिए खतरनाक है, राजदीप सरदेसाई का परम मित्र होता है। उनके दोस्तों की फेहरिस्त में अतीक अहमद, इंजीनियर रशीद और उमर खालिद जैसे लोग शामिल हैं।

वह इस मित्रता का गाना लाइव टीवी पर गाते हैं। समाज या देश के लिए खतरा बनने वाले किसी भी ऐसे आदमी से मित्रता रखने का आधार उसका राजदीप से गर्मजोशी से मिलना या फिर खाना खिलाना होता है। खाना खिलने वाला कितना बड़ा अपराधी या देश विरोधी और उसके विषय में असल तथ्य क्या हैं, इस बात से राजदीप को कोई फर्क नहीं पड़ता। क्योंकि तथ्यों का फर्क यदि राजदीप सरदेसाई पर पड़ता तो हाल ही में वह उमर खालिद और शरजील इमाम को लेकर आधी-अधूरी जानकारी साझा करके देश की न्यायिक व्यवस्था पर प्रश्न नहीं खड़ा करते।

राजदीप ने सोमवार (7 अक्टूबर, 2024) को एक ट्वीट किया। यह ट्वीट लाइवलॉ वेबसाइट की एक खबर पर आधारित था जो बताती थी कि शरजील इमाम और उमर खालिद की जमानत याचिका की सुनवाई स्थगित हो गई है। लाइवलॉ की रिपोर्ट में भी संपादकीय लापरवाही थी। हालाँकि, यह जान बूझ कर की गई थी, ऐसा लगता है। दरअसल, इन दोनों इस्लामी कट्टरपंथियों की जमानत याचिका पर सुनवाई इसलिए टली क्योंकि जस्टिस नवीन चावला नहीं बैठे। यह जानकारी लाइवलॉ ने दी।

लेकिन राजदीप ने जस्टिस नवीन चावला के उन ‘व्यक्तिगत कारणों’ को नहीं बताया, जिसके कारण अदालत नहीं बैठी। यहाँ गौर करने वाली बात यह भी है कि जिनकी जमानत याचिका पर सुनवाई टलने से राजदीप सरदेसाई इतने आहत हुए हैं उन्हीं लोगों को दिल्ली की एक अन्य अदालत ने दिल्ली दंगों की सुनवाई में अनावश्यक/जानबूझकर देरी के लिए चेताया।

दिल्ली की एक अदालत ने 4 अक्टूबर को शरजील इमाम, उमर खालिद और बाकी आरोपितों के दिल्ली दंगा मामले में बार-बार स्थगन माँगने को लेकर खूब खरी खोटी सुनाई। कोर्ट ने उन्हें चेताया कि अगर ये कारनामे आगे फिर हुए तो इसके परिणाम इनको भुगतने होंगे। ऑपइंडिया ने पाया कि उमर खालिद के मामले में 14 बार कोर्ट की कार्रवाई स्थगित हुई। इसमें से 7 बार खुद ही उमर खालिद ने ऐसा करवाया।

राजदीप सरदेसाई के एजेंडे में यह बातें फिट नहीं बैठती थीं। उन्होंने यह किनारे लगा दी। राजदीप को किसी के मुस्लिम होने पर इतना प्रेम उमड़ता है कि वह यह तक नहीं देखते कि वह व्यक्ति भारत विरोधी बातें करता आया है। उन्होंने हाल ही में इंडिया टुडे पर लाइव शो के दौरान बताया कि सांसद इंजीनियर रशीद उनके दोस्त हैं। यह वही इंजीनियर रशीद हैं जिन पर आतंकी फंडिंग का मुकदमा चल रहा है और वह जमानत पर बाहर हैं।

राजदीप सरदेसाई से जब पूछा गया कि आखिर ऐसा आदमी उनका दोस्त कैसे हो सकता है तो उन्होंने जवाब दिया कि इंजीनियर रशीद उनसे गर्मजोशी से मिले थे इसलिए दोस्त हैं। इस पर उनके साथी एंकर राहुल कँवल ने कहा कि अगर कोई भी उनसे कहा कि जो भी उन्हें खिला-पिला देगा वह दोस्त हो जाएगा क्या। हालाँकि, यह कोई पहला मौक़ा नहीं है जब मुस्लिम नाम सुनते ही राजदीप सरदेसाई ने समाज और देश के लिए खतरा बनने वाले व्यक्ति की प्रशंसा करने लगे हों।

इससे पहले राजदीप सरदेसाई उतर प्रदेश के माफिया अतीक अहमद और मुख्तार अंसारी को लेकर भी कसीदे पढ़ चुके हैं। उन्होंने एक लाइव शो के दौरान बताया था कि अतीक अहमद ने एक बार उन्हें काफी बढ़िया खाना खिलाया था और स्वागत सत्कार किया था। यही बात उन्होंने मुख़्तार को लेकर कही थी।

इस बात को उन्होंने उस दौरान बताया था जब अतीक के बेटों ने बीच बाजार प्रयागराज में एक व्यक्ति की हत्या कर दी थी। यानी कुल मिलाकर बात यह है कि अगर कोई गर्मजोशी से राजदीप मिल ले तो वह उसके दोस्त होते हैं बशर्ते मिलने वाला मुस्लिम हो। भले ही उस गर्मजोशी वाले आदमी ने किसी की हत्या की हो या फिर उसने कोई देश विरोधी काम कर रखा हो।

मोहम्मद जुबैर पर UP में FIR: आरोप- मुस्लिमों को भड़का कर डासना मंदिर पर करवाया हमला, यति नरसिंहानंद की हत्या की रची साजिश

गाजियाबाद के डासना देवी मंदिर पर 4 अक्टूबर 2024, शुक्रवार के दिन बड़ी संख्या में मुस्लिम भीड़ जमा हो गई। आरोप है कि यह भीड़ मंदिर में घुसने की कोशिश कर रही थी और उन्मादी नारे लगा रही थी। पुलिस ने किसी तरह मंदिर में मौजूद श्रद्धालुओं को सुरक्षित निकाला। इस घटना से हिंदू समुदाय में गुस्सा फैल गया, और उन्होंने हिंसा भड़काने वालों पर सख्त कार्रवाई की माँग की। हिन्दू विरोधी एजेंडा चलाने वाले ऑल्ट न्यूज के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर को इस घटना का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है और उनके खिलाफ FIR भी दर्ज की जा चुकी है। हालाँकि, लोगों की माँग थी कि आरोपियों पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) भी लगाया जाए और अगर ऐसा नहीं हुआ तो 13 अक्टूबर को महापंचायत आयोजित करने की घोषणा की गई है।

भाजपा नेत्री डॉ. उदिता त्यागी, जो खुद को इस घटना की चश्मदीद और पीड़ित बता रही हैं, ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। 7 सितंबर 2024 को दी गई इस शिकायत में उन्होंने गाजियाबाद पुलिस कमिश्नर से कहा कि डासना मंदिर पर हमला एक सोची-समझी साजिश थी। उन्होंने आरोप लगाया कि मुस्लिम समुदाय को इस हमले के लिए मोहम्मद जुबैर, असदुद्दीन ओवैसी और अरशद मदनी ने भड़काया था। इस हमले में बाहर से आए मुस्लिमों की भी संलिप्तता बताई गई है। ऑपइंडिया के पास शिकायत की कॉपी मौजूद है।

डॉ. उदिता का दावा है कि इस हिंसा के पीछे यति नरसिंहानंद गिरी की हत्या की साजिश थी। उन्होंने पुलिस पर भी आरोप लगाया कि यति नरसिंहानंद को 5 अक्टूबर को अवैध तरीके से हिरासत में लिया गया। डॉ. उदिता ने माँग की है कि हमलावरों की पहचान कर उन पर सख्त कार्रवाई की जाए। उनकी इस शिकायत पर मंदिर के अंदर मौजूद हिंदू समाज के दर्जनों लोगों के हस्ताक्षर हैं। ये वो लोग बताए जा रहे हैं जो हमले के समय डासना मंदिर के अंदर मौजूद थे।

इस शिकायत के बाद मोहम्मद जुबैर के खिलाफ गाजियाबाद के कवि नगर थाने में केस दर्ज हुआ है। यह केस भारतीय न्याय संहिता की धारा 196, 228, 299, 356(3) और 351(2) के तहत दर्ज किया गया है। ऑपइंडिया के पास FIR की कॉपी भी मौजूद है।

डॉ. उदिता ने अपने वीडियो बयान में मोहम्मद जुबैर के खिलाफ तुरंत FIR दर्ज करने की माँग की थी। उन्होंने यह भी कहा कि मंदिर पर हमला करने वालों पर NSA (राष्ट्रीय सुरक्षा कानून) के तहत कार्रवाई होनी चाहिए। यति नरसिंहानंद सरस्वती को रिहा करने और मोहम्मद जुबैर पर केस दर्ज करने सहित हमलावरों पर NSA न लगने की स्थिति में 13 अक्टूबर को महापंचायत आयोजित की जाएगी। उदिता के मुताबिक, यह महापंचायत ऐतिहासिक होगी।

डॉ. उदिता ने पुलिस कमिश्नर को एक और शिकायत दी, जिसमें मोहम्मद जुबैर की कई कथित गतिविधियों का जिक्र किया गया है। उन्होंने दावा किया कि जुबैर ने 10 हिंदूवादी लोगों की एक सूची बनाई है, जो कट्टरपंथियों के निशाने पर हैं। इस सूची में उनका नाम भी शामिल है, और उन्हें जान से मारने की धमकियां भी मिली हैं। उन्होंने नूपुर शर्मा केस का हवाला देते हुए कहा कि जुबैर उस मामले में 6 निर्दोषों की मौत का जिम्मेदार था।

डॉ. उदिता का मानना है कि अगर मोहम्मद जुबैर को जेल नहीं भेजा गया, तो वह कई हिंदुओं के जीवन के लिए खतरा बना रहेगा। डॉ. उदिता के अलावा, हिंदू रक्षा दल ने भी यति नरसिंहानंद की रिहाई की माँग करते हुए ज्ञापन सौंपा है। उन्होंने पुलिस से मंदिर पर हमला करने वाली भीड़ पर सख्त कार्रवाई की माँग की। इस दौरान हिंदू संगठनों से जुड़े कई पदाधिकारी मौजूद रहे। ऑपइंडिया के पास इस ज्ञापन की प्रति मौजूद है।

अवैध मस्जिद के बाद अब शिमला में ‘गाय’ पर विवाद: हिंदू संगठनों का दावा- कश्मीर के रईस और रिजवान ने गोमांस पकाकर खाया, पुलिस बता रही ‘अचार’

हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में अवैध मस्जिदों का विवाद अभी खत्म नहीं हुआ था कि अब होटल में गोमांस परोसे जाने के आरोप से माहौल और गर्म हो गया है। हिंदू संगठनों ने कुछ मुस्लिम युवकों पर यह आरोप लगाया है। पुलिस ने मामले की जाँच शुरू कर दी है। शुरुआती जाँच में पुलिस का कहना है कि होटल में गोमांस नहीं मिला है। लेकिन हिंदू संगठन इसे आरोपितों को बचाने की साजिश बता रहे हैं।

यह विवाद 5 अक्टूबर 2024 को शुरू हुआ जब हिंदू संगठन के पदाधिकारी कमल गौतम ने अपने फेसबुक पर 2 वीडियो शेयर किए। उन्होंने दावा किया कि शिमला के ‘होम स्टे राज विला’ होटल में नवरात्रि के दौरान गोमांस पकाकर खाया गया है। आरोप मुस्लिम समुदाय के रईस खान और रिज़वान नाम के व्यक्तियों पर लगाया गया, जो कश्मीर के निवासी बताए जा रहे हैं।

कमल गौतम का दावा है कि जब होटल के हिंदू कर्मचारियों को इस घटना का पता चला, तो वहाँ विवाद खड़ा हो गया और आरोपितों से हाथापाई भी हुई। होटल संचालक ने मुस्लिम कर्मचारियों को गोशाला ले जाकर माफी माँगने का दिखावा किया और बाद में उन्हें होटल से भगा दिया। हालाँकि, हिंदू स्टाफ ने कार्रवाई की माँग जारी रखी।

कमल गौतम ने आगे कहा कि हिंदू स्टाफ ने अपनी नौकरी की परवाह किए बिना धर्म का साथ दिया। पुलिस ने शिकायत मिलने पर हिंदुओं से सबूत माँगे। कमल गौतम ने कहा कि सबूत जुटाना पुलिस का काम है और हिमाचल प्रदेश में इस तरह की हरकतें बर्दाश्त नहीं की जाएंगी। वीडियो में एक व्यक्ति को डिब्बे में कुछ ले जाते हुए और दूसरे वीडियो में एक व्यक्ति को गाय का पैर पकड़कर माफी माँगने के लिए कहा जाता दिखाया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कमल गौतम ने जिस होटल ‘होम स्टे राज विला’ का जिक्र किया है वो शिमला के ओल्ड बस स्टेशन के पास है। यह सदर थानाक्षेत्र में पड़ता है जिसके एक हिन्दू कर्मचारी ने पुलिस में शिकायत भी दर्ज करवाई है। शिकायत में कहा गया है कि मुस्लिम समुदाय के कुछ लोग होटल में गोमांस लाकर खाते हैं।

इस पूरे घटनाक्रम पर सदर थाने के SHO इंस्पेक्टर धरम सिंह नेगी का बयान भी सामने आया है। थानेदार ने बताया कि शिकायत मिलने के बाद वो खुद जाँच के लिए होटल गए। शुरुआती जाँच में डिब्बे में अचार लाने की बात सामने आई है। थाना प्रभारी का दावा है कि उनकी जाँच में कहीं भी गोमांस नहीं मिला है। हालाँकि मौके से अचार भी नहीं पाया गया है। पुलिस का कहना है कि तनावपूर्ण माहौल में ऐसी बातें हालात को बिगाड़ने की साजिश भी हो सकती है।

हिन्दू संगठन के सदस्यों ने पुलिस की इस थ्योरी को नकार दिया है। कमल गौतम का कहना है कि जिस होटल की यह घटना है उसे रईस नाम का व्यक्ति पिछले 4 वर्षों से विजय के साथ पार्टनरशिप में चला रहा था। कमल गौतम ने सवाल किया कि अगर दोनों मुस्लिम कर्मचारी बेगुनाह थे तो उनको भगाया क्यों गया। साथ ही पुलिस डिब्बे में जिस अचार का दावा कर रही है वो कहीं क्यों नहीं मिला ? बकौल कमल गौतम उनसे बातचीत के दौरान होटल संचालक ने गलती होना कबूला था और सजा के तौर पर मुस्लिम स्टाफ को नौकरी से निकाल देने की बात कही थी।

अपने ही घर में फाँसी लगाकर झूल गई अनामिका, क्योंकि मोहम्मद कासिव कर रहा था परेशान: इस्लाम कबूलने-निकाह करने का डाल रहा था दबाव, UP के संभल की घटना

उत्तर प्रदेश के संभल जिले में एक मुस्लिम युवक द्वारा निकाह का दबाव बनाने से परेशान एक हिन्दू लड़की ने आत्महत्या कर ली। अनामिका नाम की मृतक लड़की पॉलिटेक्निक की छात्रा थी और उस पर इस्लाम कबूल करने का भी दबाव डाला जा रहा था। इस मामले में आरोपी का नाम मोहम्मद कासिव है, जिसके खिलाफ 6 अक्टूबर 2024 को शिकायत दर्ज करवाई गई थी। पुलिस ने मोहम्मद कासिव को गिरफ्तार कर लिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह घटना संभल के गुन्नौर थाना क्षेत्र की है। यहाँ के मासूम अली इलाके में रहने वाली एक महिला ने रविवार को पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई। शिकायत में महिला ने बताया कि वह अपनी बेटी और पति के साथ रहती थी। मोहल्ले में रहने वाला मोहम्मद कासिव उनकी बेटी को लगातार परेशान कर रहा था। वह उस पर इस्लाम कबूल करने और निकाह करने का दबाव डालता था।

कुछ समय पहले महिला ने अपनी बेटी का एडमिशन बदायूँ जिले के अलापुर स्थित राजकीय पॉलिटेक्निक में करवाया। लेकिन, कासिव वहाँ भी जाकर उसे परेशान करने लगा। परेशान होकर लड़की ने अपनी माँ से यह बात बताई। लेकिन, बस्ती में हिंदू कम होने के कारण माँ ने किसी और को इस बारे में नहीं बताया और घर में भी यह बात छिपा ली।

कासिव ने 30 सितंबर 2024 को एक बार फिर लड़की को कॉलेज से लौटते वक्त परेशान किया। लड़की ने यह घटना अपनी मौसी को बताई, जो बदायूँ में रहती हैं। मौसी ने लड़की को भरोसा दिलाया कि 6 अक्टूबर को वे पुलिस में शिकायत करेंगी। लेकिन शनिवार (5 अक्टूबर 2024) को ही लड़की ने धर्म परिवर्तन के दबाव से परेशान होकर आत्महत्या कर ली। उसने अपने कमरे में फाँसी लगाकर अपनी जान दे दी। पुलिस को उसका शव पंखे से लटका मिला।

मृतका की माँ ने कासिव के खिलाफ सख्त कार्रवाई और अपने परिवार की सुरक्षा की माँग की है। उन्होंने अपनी शिकायत में खुद को हिंदू बताते हुए मुस्लिमों से खतरे की आशंका जताई है। पुलिस ने कासिव के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और उसे गिरफ्तार कर लिया गया है। अब इस मामले की जाँच और जरूरी कानूनी कार्रवाई की जा रही है। ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है।

लड़की की मौसी ने मीडिया से बातचीत में बताया कि पहले उसकी दोस्ती कासिव से थी, लेकिन जब वह निकाह का दबाव डालने लगा, तब लड़की ने कहा, “मैं हिंदू हूँ और तुम मुस्लिम, हमारा कोई मेल नहीं है।” इसके बावजूद कासिव ने लड़की पर इस्लाम कबूल कर निकाह करने का दबाव बनाए रखा। साथ ही, उसे अश्लील वीडियो वायरल करने की भी धमकियाँ दी जा रही थीं।

भाई के इश्क में डूबी थी शाइस्ता, निकाह से रोका तो घर के 13 लोगों को जहर देकर मार डाला: कभी इसी तरह शबनम ने अपने ही घर के 7 लोगों को कुल्हाड़ी से काट डाला था

पाकिस्तान की पुलिस ने 13 लोगों की हत्या करने वाली एक युवती को गिरफ्तार किया है। युवती ने अपने अम्मी-अब्बू समेत 13 परिजनों को खाने में जहर खिला कर मार दिया। वह अपने चचेरे भाई से निकाह करना चाहती थी, जिसके लिए उसका परिवार राजी नहीं था। इसी बात से गुस्सा होकर उसने यह कदम उठाया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह मामला पाकिस्तान के सिंध प्रांत के खैरपुर जिले का है। खैरपुर की पुलिस ने कहा है कि उसने यहाँ अगस्त में 13 लोगों की हत्या का मामला सुलझा लिया है। उसने इस हत्याकांड को अंजाम देने वाले हत्यारों को भी गिरफ्तार करने की बात कही है।

पुलिस ने इस हत्या के मामले में एक युवती और उसके चचेरे भाई को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने बताया कि 18 साल की शाइस्ता बरोही ने ही अपने अम्मी-अब्बू और बाकी 11 परिजनों की हत्या की है। इस काम में उसके चचेरे भाई अमीरबक्श बरोही ने भी उसकी मदद की।

मीडिया को पुलिस ने बताया कि शाइस्ता का निकाह किसी और रिश्तेदार से तय कर दिया गया था और उसकी सगाई भी हो चुकी थी। शाइस्ता ने इस निकाह का विरोध किया था। वह अमीरबक्श से निकाह करना चाहती थी, इस बात के लिए घरवाले राजी नहीं थे।

जब उनके परिवार ने दोनों के रिश्ते का विरोध किया तो उन्होंने इस हत्याकांड की साजिश रची। युवती ने अपने अम्मी-अब्बू, अपनी पाँच बहनों और 3 भाइयों को मारने के लिए दावत के दौरान खाने में जहर मिला दिया। जहर वाला खाना खाने से इन 10 लोगों की मौत हो गई। इन 10 लोगों के साथ 3 और रिश्तेदार मारे गए, जिसमें एक भी बच्चा शामिल था।

यह जहरीला खाना खाने वालों की मौत एक-एक करके हुई। बीमार पड़ने के बाद लोग मरते गए। इस कारण से पहले लोगों को लगा कि यह मामला खाने से हुई बीमारी का है। हालाँकि, पुलिस ने जब दूसरे एंगल से जाँच चालू की तो यह सच निकल कर आया।

पुलिस ने उस खाने की भी जाँच करवाई थी, जिसके कारण लोगों की मौत हुई। पुलिस ने स्पष्ट किया था कि इस खाने में जहर पाया गया है। पुलिस का शक तब गहराया जब शाइस्ता के अलावा बाकी सभी सदस्यों की मौत हो गई लेकिन वह एकदम स्वस्थ रही। शाइस्ता अपने प्रेमी अमीरबखश के साथ भाग निकली थी।

उसकी तलाश करके पुलिस ने हिरासत में लिया। पूछताछ के दौरान शाइस्ता ने यह राज खोला कि उसने ही खाने में जहर मिलाया था। यह जहर अमीरबख्श ने लाकर दिया था और शाइस्ता ने रोटियों के आटे में इसे मिला दिया। इसे खाने के बाद 13 लोगों की मौत हो गई। पुलिस ने दोनों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।

इस तरह का एक मामला पहले भारत में भी सामने आ चुका है। अमरोहा की रहने वाले शबनम ने 2008 में इस वारदात को अंजाम दिया था। उसने अपने प्रेमी के साथ मिल कर अपने ही परिवार के 7 लोगों की कुल्हाड़ी से काट कर बेरहमी से हत्या कर दी थी। उसने अपने माता-पिता, दो भाई, एक भाभी, मौसी की लड़की और मासूम भतीजे को मार डाला था।

केरल के सोना तस्करों की ‘पहचान’ सत्ताधारी विधायक ने बताई, कहा- ज्यादातर मुस्लिम, जारी हो फतवा: बताया- हज से लौटते समय कुरान में गोल्ड छिपाकर लाया था मौलवी

केरल के गोल्ड स्मगलिंग मामले में हाल ही में एक बड़ा विवाद सामने आया है, जिसने राज्य की राजनीति में हंगामा खड़ा कर रहा है। मामला तब और गर्म हो गया जब सत्ताधारी पार्टी के नेता और लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) के विधायक के. टी. जलील ने मुस्लिम समुदाय पर गोल्ड स्मगलिंग में अधिक शामिल होने का आरोप लगाया। उनके इस बयान ने केरल की सियासत में हड़कंप मचा दिया है, खासकर मलप्पुरम जिले के संबंध में दिए गए उनके बयान को लेकर। क्या है ये पूरा विवाद, आइए आपको समझाते हैं।

दरअसल, केरल में सोना तस्करी का मामला तब और उछल गया जब LDF विधायक के. टी. जलील ने मुस्लिम समुदाय पर सोने की अधिक तस्करी में शामिल होने का आरोप लगाया और मजहबी नेताओं से सोना तस्करी के खिलाफ फतवा जारी करने की माँग की। जलील का बयान कोझिकोड हवाई अड्डे से पकड़े गए तस्करों के संदर्भ में आया, जिनमें अधिकांश मुस्लिम समुदाय से थे। जलील ने एक मौलवी पर सोना तस्करी का आरोप लगाते हुए कहा कि वह हज यात्रा से लौटते समय कुरान में छिपाकर सोना लाया था, हालाँकि उसके नाम का खुलासा नहीं किया गया है।

क्या है पूरा मामला?

केरल में गोल्ड स्मगलिंग की घटनाएँ पिछले कुछ वर्षों में बढ़ी हैं, खासकर मलप्पुरम जिले के कोझिकोड हवाई अड्डे से। राज्य के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन पहले ही इस मुद्दे पर बात कर चुके हैं। उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि “आँकड़े बताते हैं कि मलप्पुरम जिले से भारी मात्रा में सोना और हवाला पैसे आ रहे हैं।” मुख्यमंत्री के इस बयान ने पहले ही विपक्ष को हमलावर बना दिया था। अब जलील के बयान ने इस आग में और घी डाल दिया है।

जलील ने अपने बयान में कहा कि “कोझिकोड एयरपोर्ट पर पकड़े जाने वाले अधिकतर लोग मुस्लिम होते हैं।” जलील ने यहाँ तक कहा कि मुस्लिम मजहबी नेताओं को लोगों को सोना तस्करी और हवाला लेन-देन से दूर रहने की सलाह देनी चाहिए। उन्होंने मुस्लिम लीग के नेताओं से अपील की कि वे सोना तस्करी के खिलाफ फतवा जारी करें, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि यह काम मजहब के खिलाफ है।

इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग ने दी तीखी प्रतिक्रिया

जलील के इस बयान ने खासकर इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) और कॉन्ग्रेस को नाराज कर दिया। IUML के महासचिव पी. एम. ए. सलाम ने कहा कि जलील पूरे समुदाय को अपराधी बता रहे हैं, जो निंदनीय और खतरनाक है। उन्होंने माँग की कि जलील तुरंत अपने बयान के लिए माफी माँगें। IUML के अन्य नेताओं ने भी जलील पर हमला बोला, और कहा कि जलील ने केवल अपने राजनीतिक हितों की पूर्ति के लिए इस तरह के बयान दिए हैं।

IUML के नेता सलाम ने कहा, “यह बयान समुदाय को बदनाम करने की साजिश है। यहाँ तक कि बीजेपी नेताओं ने भी ऐसा आरोप नहीं लगाया है।” वहीं कॉन्ग्रेस नेता वी. टी. बलराम ने जलील के बयान को “बेतुका” बताया और कहा कि अपराधों का मुकाबला फतवे के जरिए नहीं, बल्कि कानूनन किया जाना चाहिए।

जलील की सफाई से संतुष्ट नहीं हुए लोग

बयान को लेकर हुए विवाद के बाद जलील ने सफाई पेश की। केटी जलील ने कहा कि उन्होंने ऐसा कुछ भी नहीं कहा जो इस्लाम के खिलाफ हो। उनका मकसद केवल यह था कि मजहबी नेता लोगों को जागरूक करें कि सोना तस्करी और हवाला लेन-देन मजहब के खिलाफ हैं। “मैंने सिर्फ इतना कहा है कि अधिकतर लोग जो पकड़े जा रहे हैं, वे मुस्लिम हैं।”

जलील ने कहा कि उन्होंने पूरे समुदाय पर आरोप नहीं लगाया है, बल्कि उन्होंने सिर्फ यह बताया कि सोना तस्करी में शामिल अधिकतर लोग मुस्लिम समुदाय से हैं। उनका कहना था कि “समुदाय को यह समझना होगा कि यह गतिविधियाँ मजहब के खिलाफ हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने सिर्फ जागरूकता फैलाने के लिए मजहबी नेताओं से फतवे की माँग की है, और यह माँग इस्लामोफोबिया नहीं है।

इस पूरे विवाद में बीजेपी नेता वी. मुरलीधरन ने भी जलील पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि “जलील का बयान संविधान का अपमान है।” मुरलीधरन ने कहा कि देश में अपराधों के खिलाफ कानून बने हुए हैं, और इन कानूनों का आधार संविधान है, न कि कोई मजहबी कानून। उन्होंने यह भी कहा कि जलील का बयान संविधान की मूल भावना के खिलाफ है और उन्हें इस मामले में सोच-समझकर बोलना चाहिए।

वहीं, बीजेपी के अलावा कॉन्ग्रेस नेताओं ने भी इस विवाद पर टिप्पणी की। कॉन्ग्रेस नेता शफी परम्बिल ने कहा, “भारत एक लोकतांत्रिक देश है, और यहां किसी भी गैरकानूनी गतिविधि को फतवे के जरिए नहीं बल्कि कानूनी तरीके से सुलझाया जाना चाहिए।” उन्होंने कहा कि जलील का बयान समाज में एक गलत संदेश दे रहा है और यह देश के लोकतांत्रिक ढाँचे के खिलाफ है।

गोल्ड स्मगलिंग में आ चुका है जलील का नाम, NIA ने की थी पूछताछ

यह पहली बार नहीं है कि जलील विवादों में घिरे हैं। 2020 में जब वह उच्च शिक्षा मंत्री थे, तब भी उन पर कस्टम विभाग ने एक मामले में पूछताछ की थी, जिसमें यूएई के वाणिज्य दूतावास के माध्यम से तस्करी का आरोप लगा था। उन पर कस्टम्स द्वारा सोने की तस्करी का मामला भी दर्ज किया गया था। उस समय भी जलील को ‘व्यक्ति विशेष’ के रूप में संदिग्ध माना गया था, और उन्हें राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) द्वारा भी पूछताछ के लिए बुलाया गया था।

केरल में सोना तस्करी का मामला एक बड़ा मुद्दा बन चुका है, खासकर मलप्पुरम जिले के संदर्भ में। जलील के बयान ने इस पूरे मामले ने केरल की राजनीति में एक नई बहस को जन्म दिया है, और यह देखना होगा कि आने वाले दिनों में यह विवाद किस दिशा में जाता है।

क्या बिहार में ईसाई धर्मांतरण पर सवाल उठाना है गुनाह, क्या दुर्दांत अपराधी है मिथुन मिश्रा जो हथकड़ी में जकड़ा: सुशासन पर बाढ़ ही नहीं, पत्रकार की गिरफ्तारी भी धब्बा

बिहार के मुजफ्फरपुर में बाढ़ प्रभावित लोगों को भड़काने के आरोप में 8 लोगों को गिरफ्तार किया गया। इन 8 लोगों में एक नाम यूट्यूबर मिथुन मिश्रा का भी है। आरोप है कि उन्होंने भीड़ को इस प्रकार उकसाया कि भीड़ पुलिस फोर्स पर हमला कर बैठी। अब सोशल मीडिया पर कुछ लोग मिथुन की गिरफ्तारी की तस्वीरें देख कई तरह के सवाल उठा रहे हैं।

ये सवाल क्या है इससे पहले जान लेते हैं मिथुन मिश्रा आखिर हैं कौन और करते क्या हैं।

कौन हैं ‘बिहार वाला न्यूज’ के मिथुन मिश्रा

सोशल मीडिया पर सर्च करने पर आपको मिथुन मिश्रा की कई वीडियोज मिल जाएँगी। उनके अकॉउंट खंगालने पर पता चलता है कि वो बिहार वाला न्यूज पर रिपोर्टिंग करते हैं। उनके फॉलोवर्स भले एक्स पर ज्यादा नहीं है लेकिन उनकी रिपोर्टों पर रीच अच्छी-खासी आती है।

मिथुन की वीडियोज देखने के बाद पता चलता है कि वो बिहार के हालातों पर ग्राउंड रिपोर्टिंग करते हैं और जस की तस स्थिति अपने दर्शकों को बताते हैं। यूट्यूबर पर उनके 66 हजार के करीब सब्सक्राइबर्स हैं। वहीं फेसबुक पर 76 हजार फॉलोवर्स हैं

हालिया दिनों में उन्होंने बिहार में आई बाढ़ को लेकर रिपोर्टिंग की थी। इस रिपोर्टिंग के दौरान उन्होंने बताया था कि किस तरह बागमती नदी का पानी बढ़ते हुए इतना हो गया कि लोगों के घर टूट रहे हैं। लोग बेघर हो रहे हैं। अपनी वीडियोज में मनीष ने जाकर पीड़ितों से बात की थी जिसमें प्रभावित लोग अपना दर्द बाँटते दिखे थे।

पुलिस ने मिथुन मिश्रा को किया गिरफ्तार

इसके बाद शुक्रवार को गोपालपुर चौक पर बाढ़ राहत के लिए करीबन चार घंटे तक लोग प्रदर्शन करते रहे। इस दौरान बाढ़ पीड़ितों की पुलिस से भिड़ंत हुई। दोनों ओर से दर्जनों लोग चोटिल हुए। चूँकि इस खबर को उस समय यूट्यूबर मिथुन मिश्रा अपने अंदाज में रिकॉर्ड कर रहे थे। अब पुलिस का दावा है कि मिथुन ने वहाँ उस भीड़ को उकसाया था जिसने पुलिस पर हमला किया।

पुलिस ने इस मामले में 21 लोगों को नामजद कर लिया है। वहीं 180 अज्ञात आरोपितो की पहचान हो रही है। मिथुन की गिरफ्तारी पर थाना प्रभारी औराई, मुज़फ्फरनगर के मुताबिक,

“मिथुन मिश्रा के खिलाफ हमारे पास पर्याप्त सबूत हैं। उसी ने भीड़ को भड़काया जिसमें हमारी पुलिस फ़ोर्स के कई स्टाफ घायल हुए हैं। घायलों में महिला पुलिसकर्मी भी शामिल हैं। कुछ के सिर तक फट गए हैं। हमने काफी समझाने की कोशिश की लेकिन भीड़ नहीं मानी। मिथुन मिश्रा पर हमने समुचित धाराओं में कार्रवाई की है। कुल 8 लोग गिरफ्तार हुए हैं जिसमें एक मिथुन मिश्रा भी शामिल है। इन सभी को जरूरी कानूनी कार्रवाई के बाद जेल भेजा जा रहा है।”

ईसाई धर्मांतरण की खोली थी पोल

बता दें कि भले ही मिथुन मिश्रा की गिरफ्तारी के पीछे बाढ़ का मामला प्रमुख बताया जा रहा हो, लेकिन सोशल मीडिया पर सवाल ये भी उठ रहे हैं कि कहीं मिथुन को इसलिए तो नहीं फँसा दिया गया क्योंकि उन्होंने पिछले दिनों ईसाई धर्मांतरण के खिलाफ रिपोर्टिंग करके पोल खोली थी।

सोशल मीडिया पर उनकी वीडियोज की क्लिप वायरल है जहाँ वो धर्मांतरण गिरोह को हड़काते दिख रहे हैं। उनकी इस रिपोर्टिंग को कुछ ही दिन बीते हैं कि अब ये गिरफ्तारी की बात सामने आ गई। ऐसे में कहा जा रहा है कि मिथुन की गिरफ्तारी का मुख्य कारण ईसाई मिशनरियों द्वारा हिंदुओं के धर्मांतरण की रिपोर्टिंग हैं।

मिथुन के हाथ में हथकड़ी देख लोग आगबबूला… क्या कानून के मुताबिक ये सही है?

मिथुन की गिरफ्तारी के बाद कुछ तस्वीरें सामने आई हैं जिसमें उन्हें हथकड़ी पहनाकर बिठाए दिखाया गया है। ऐसे में लोग बिहार पुलिस को टैग करते हुए ये भी कह रहे हैं कि मिथुन मिश्रा कोई दुर्दांत अपराधी नहीं बल्कि पत्रकार हैं लेकिन बिहार पुलिस के द्वारा लोकतंत्र की जन्मभूमि पर एक सम्मानित पत्रकार के सम्मान एवं प्रतिष्ठा को हथकड़ी लगा कर कुचल दिया गया है। मानवाधिकार आयोग को टैग करके कहा जा रहा है कि मिथुन मिश्रा के अधिकारों की रक्षा होनी चाहिए।

मिथुन के हाथ में लगी हथकड़ी पर सवाल इसलिए ही उठ रहा है कि क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने एक दफा (सुनील बत्रा बनाम दिल्ली प्रशासन (1978) 4 SSC 409) के केस में साफ कहा था कि पुलिस किसी व्यक्ति को हथकड़ी नहीं लगा सकती और अगर वह ऐसा करती है तो यह पूरी तरह से अवैधानिक होगा और यह भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 और अनुच्छेद 22 का उल्लंघन होगा। अनुच्छेद 21 किसी भी व्यक्ति को दैहिक स्वतंत्रता का अधिकार देता है।

इसके अलावा अंजनी कुमार सिन्हा बनाम स्टेट ऑफ बिहार 1992 केस में बताया गया था हथकड़ी लगाना पकड़े गए आरोपित के चरित्र पर निर्भर करता है। तब सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अगर आरोपित द्वारा कस्टडी से भागने या लोक शांति को भंग करने की आशंका तो तो वैसे हालात में उसे पुलिस द्वारा हथकड़ी लगाई जा सकती है। कुछ अन्य मामलों में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अगर पुलिस किसी को हथकड़ी लगाना चाहती है तो उसे तर्कसंगत वजह बताते हुए संबंधित अदालत न्यायालय से पहले अनुमति लेनी होगी।

क्यों यूट्यूबर्स हो रहे गिरफ्तार

यही वजह है कि मिथुन के हाथ में लगी हथकड़ी को देख लोग गुस्सा हो रहे हैं। उनकी तुलना बिहार के मनीष कश्यप से की जा रही है। कहा जा रहा है कि जैसी लड़ाई मनीष कश्यप ने अकेले लड़ी थी वैसी ही लड़ाई मिथुन को भी लड़नी पड़ रही है। मनीष के साथ भी कोई नहीं आया था और मिथुन के साथ भी कोई नहीं दिख रहा है।

गौरतलब है कि पिछले कुछ समय से बिहार में यूट्यूब चैनल बनाकर रिपोर्टिंग करने वाले यूट्यूबर्स की गिरफ्तारी की घटना काफी चर्चा में रही है। पिछले साल मनीष कश्यप के साथ ऐसा हुआ था और अब मिथुन मिश्रा के साथ हुआ है। बिहार की स्थिति जानने-समझने वाले मानते हैं कि इस तरह इन यूट्यूबर्स को टारगेट इसलिए किया जाता है क्योंकि ये बिन किसी दबाव में आए निष्पक्ष रिपोर्टिंग करते हैं और जनता की आवाज उठाते हैं। ऐसे में ये प्रशासन को अपने लिए खतरा लगते हैं और हमेशा निशाने पर रहते हैं। पहले भी कई आवाज इस प्रकार शांत कराई जा चुकी हैं। इनमें रवि भट्ट, निभा सिंह, अभिषेक तिवारी, अभिषेक मिश्रा, सूरज, रवि रंजन जैसे यूट्यूबर्स के नाम थे। ऑपइंडिया पत्रकार अजीत झा ने इस पर विस्तृत रिपोर्ट की थी। आप इसे इस लिंक पर क्लिक करके पढ़ सकते हैं।

न्यूड वीडियो, पैसों का गबन या आधिपत्य की लड़ाई… पटना के इस्कॉन मंदिर में विवाद क्यों?

बिहार की राजधानी पटना में स्थित इस्कॉन मंदिर के भीतर मारपीट हुई। पीड़ित गुट ने आरोप लगाया कि उन्हें मीटिंग के बहाने बुलाया गया और बाद में लाठी डंडों से उनकी पिटाई की गई। इस घटना के कुछ वीडियो भी वायरल हुए हैं जिनमें मारपीट होती दिख रही है। यह मारपीट सड़क पर तक आ गई। पुलिस ने कहा है कि यह मंदिर का आपसी प्रशासनिक और बाकी मामलों को लेकर विवाद हुआ है जिसमें कुछ लोग घायल हुए हैं।

क्या है मामला

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, रविवार (6 अक्टूबर, 2024) रात को पटना का इस्कॉन मंदिर अखाड़े में तब्दील हो गया। यहाँ इस्कॉन के कुछ ब्रह्मचारियों पर हमला करते हुए कुछ लोगों को देखा गया। यह मारपीट सड़क पर तक आ गई। इस मारपीट में कई लोगों को चोटें भी आईं।

इस दौरान पुजारियों के अलावा कुछ बाउंसर भी दिखे जो मारपीट में शामिल थे। इस मारपीट के बाद पुलिस भी मौके पर पहुँची स्थिति को नियंत्रण में करके और घायलों को अस्पताल पहुँचाया। पुलिस ने यहाँ लोगों के बयान भी लिए और आगे अपनी जाँच चालू कर दी।

इस मारपीट में इस्कॉन पटना के अध्यक्ष कृष्ण कृपा दास और उनके बाउंसरों के शामिल होने की बात कही गई। आरोप लगाया गया कि मीटिंग के बहाने बुलाकर इस्कॉन मंदिर के दूसरे पदाधिकारियों को पीटा गया। हमला करने के पीछे गबन और दुराचार का खुलासा होने की बात कही गई है।

पीड़ित पक्ष का दावा- गड़बड़ी खोलने पर पीटा

भागलपुर इस्कॉन मंदिर के अध्यक्ष गिरधारी दास ने आरोप लगाया है कि पटना इस्कॉन के अध्यक्ष कृष्ण कृपा दास गबन और गड़बड़ियों में शामिल हैं। उन्होंने एक वीडियो भी जारी किया जिसमें एक व्यक्ति एक महिला के साथ दिखता है। गिरधारी दास ने आरोप लगाया कि यह कृष्ण कृपा दास है जो एक महिला के साथ दुराचार में शामिल हैं।

गिरधारी दास ने कहा कि यह वीडियो किसी होटल का है। गिरधारी दास ने आरोप लगाया कि पटना मंदिर में महिला के साथ छेड़खानी के अलावा यहाँ रहने वाले ब्रह्मचारियों को भी परेशान किया जा रहा है। उनको प्रसाद नहीं दिया जाता है, इसके अलावा उनके साथ भी मारपीट होती है। गिरधारी दास ने आरोप लगाया है कि कृष्ण कृपा दास पैसों के गबन में भी शामिल हैं।

उन्होंने इस बात की शिकायत इस्कॉन के उच्चाधिकारियों से की थी। गिरधारी दास ने कहा कि उन्होंने कोलकाता में जब यह शिकायत भेजी तो सुलह समझौते के लिए उन्हें पटना बुलाया गया। इसी के बाद कृष्ण कृपा दास के बाउंसरों ने उनके साथ उनके ब्रह्मचारियों पर हमला कर दिया। इस हमले में कई लोग घायल हुए हैं।

कृष्ण कृपा दास- वीडियो पुराना, मामला हिस्सेदारी का

मारपीट के वीडियो सामने के बाद कृष्ण कृपा दास ने इस घटना पर कहा कि गिरधारी दास पटना मंदिर में अपनी हिस्सेदारी चाहते हैं इसलिए विवाद कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि गिरधारी दास को विवाद के बाद भागलपुर में स्थानांतरित कर दिया गया था लेकिन वह अब भी पटना में हिस्सेदारी चाहते हैं।

कृष्ण कृपा दास के वीडियो को लेकर इस्कॉन पटना के PRO ने कहा कि यह सात साल पुराना है। उन्होंने मारपीट की बात भी नकारी है। उनका कहना है कि मंदिर के भीतर मारपीट की बात झूठी है। मामले में कृष्ण कृपा दास की तरफ से पुलिस में भी शिकायत दी गई है। गिरधारी दास ने भी पुलिस में शिकायत दी है।

पुलिस ने क्या बताया

इस्कॉन मंदिर में मारपीट की सूचना के बाद यहाँ पटना पुलिस की टीम भी पहुँच गई। पुलिस ने घायलों को अस्पताल पहुँचा कर मामले की जाँच चालू की है। पटना SDPO कृष्ण मुरारी ने बताया कि इस्कॉन मंदिर में प्रबन्धन के नियंत्रण समेत बाकी कारणों से मारपीट हुई, जिसमें कई लोग घायल हुए।

पुलिस ने बताया कि अब वह साक्ष्य इकट्ठा करके जाँच करेंगे। उन्होंने बताया कि जो लोग घायल हुए हैं, उनका मेडिकल करवाया गया है और स्थिति को नियंत्रण में कर लिया गया है। उन्होंने ठोस कार्रवाई का भरोसा दिया है।