उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले में दुर्गापूजा पंडाल में घुसकर इस्लामिक कट्टरपंथियों की भीड़ द्वारा उपद्रव करने का मामला सामने आया है। आरोपितों में कलीम, अरबाज़, इमरान और मुख़्तार शामिल हैं, जिन्होंने महिला श्रद्धालुओं से अभद्रता की और पंडाल में लगे भगवा ध्वज को नोचकर नाली में फेंक दिया। साथ ही, उन्होंने पूजा के दौरान बज रहे भजन को बंद कर भोजपुरी गाने चलाने का दबाव बनाया। यह घटना शनिवार (5 अक्टूबर 2024) को हुई। पुलिस ने केस दर्ज कर चारों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह घटना बलरामपुर जिले के रेहरा बाजार थाना क्षेत्र के हुसैनाबाद के पाँचूडीह गाँव की है। ग्रामीणों ने शिकायत की है कि हर साल की तरह इस साल भी वे मंदिर में शारदीय नवरात्रि का आयोजन कर रहे थे, जिसे असफल करने के लिए कलीम, अरबाज़, इमरान और मुख़्तार ने साजिश रची।
शनिवार को ये चारों आरोपित दुर्गापूजा पंडाल में पहुँचे और भगवा ध्वज को नोचकर नाली में फेंक दिया। इसके बाद बिजली का खंभा तोड़ दिया और जनरेटर का तार खींचकर भजन बंद करवा दिया। इन लोगों ने भजन पर गंदी टिप्पणियाँ की और भोजपुरी गाने बजाने का दबाव बनाया। जब श्रद्धालुओं ने विरोध किया, तो उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई। शिकायतकर्ताओं में राम सजीवन, राम प्यारे, रामसूरत वर्मा और हंसराज यादव के नाम शामिल हैं।
इन सभी ने आरोपितों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की है। ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है। पुलिस ने शिकायत का संज्ञान लेते हुए अरबाज़, कलीम, इमरान और मुख़्तार के खिलाफ नामजद FIR दर्ज कर ली। इन सभी पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 298, 324, 352 और 351 (3) के तहत कार्रवाई की है। रविवार (6 अक्टूबर) को चारों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया है। मामले में जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई की जा रही है
पूर्वोत्तर भारत के त्रिपुरा में साम्प्रदायिक तनाव की खबर आई है। यहाँ इस्लामिक कट्टरपंथियों की भीड़ ने हिन्दुओं के घरों और दुकानों पर हमला किया। इस दौरान फायरिंग भी हुई, जिसमें कई लोग घायल हुए हैं। हमलावरों ने हिंसा रोकने पहुँची पुलिस को भी निशाना बनाया। हिंसा में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि दो अन्य लोग घायल हुए हैं। घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। यह घटना रविवार (9 अक्टूबर 2024) की है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह घटना उत्तरी त्रिपुरा जिले के कदमतला बाजार में हुई। यहाँ रविवार को दुर्गापूजा के लिए हिन्दू समुदाय के कुछ लोग सड़क पर चंदा माँग रहे थे। इसी दौरान एक मुस्लिम ड्राइवर से उनकी बहस हो गई, जो बाद में बड़े विवाद में बदल गई। थोड़ी देर में ड्राइवर के समर्थन में आसपास के इलाकों से इस्लामिक कट्टरपंथियों की भीड़ जमा हो गई। भीड़ के हाथों में लाठी-डंडे और अन्य हथियार थे। उन्होंने न केवल चंदा माँग रहे हिन्दुओं पर हमला किया, बल्कि आसपास के निवासियों पर भी हमला कर दिया।
Situation in kadamtala is completely under control.Police is taking appropriate action. Please don't spread rumour.#Kadamtala#NorthTripura@Tripura_Police
आरोप है कि इस दौरान महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार हुआ, घरों में तोड़फोड़ की गई और दुकानों में लूटपाट भी की गई। इस हिंसा में कई लोग घायल हुए। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस बल मौके पर पहुँचा, लेकिन जब पुलिस ने स्थिति को काबू करने की कोशिश की, तो हमलावर इस्लामिक कट्टरपंथियों की भीड़ ने पुलिसकर्मियों को भी निशाना बनाना शुरू कर दिया। कुछ पुलिसकर्मी इस हमले में घायल हो गए। हिंसा के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं, जिनमें फायरिंग की आवाजें सुनी जा सकती हैं। अब तक एक व्यक्ति की मौत हो चुकी है और दो अन्य लोग घायल हुए हैं।
To further maintain peace in the area, Section 163 of the BNSS has been promulgated. We urge everyone to comply with this order, avoid gatherings, and refrain from spreading rumors or unverified information.@Tripura_Policepic.twitter.com/sHgzMfwL61
पुलिस ने हालात काबू में करने के लिए लाठीचार्ज और आँसू गैस का इस्तेमाल किया। घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। प्रभावित क्षेत्रों में निषेधाज्ञा (BNSS की धारा-163) लागू कर दी गई है, जिससे पाँच या उससे अधिक लोगों के एकत्रित होने पर रोक लगा दी गई है। इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। उत्तरी त्रिपुरा के पुलिस अधीक्षक ने बताया कि स्थिति अब काबू में है। मामले में केस दर्ज कर लिया गया है और जाँच चल रही है। हमलावरों की पहचान कर के उन्हें गिरफ्तार करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
पाकिस्तान के कराची में बम धमाका हुआ है। ये धमाका जिन्ना एयरपोर्ट के पास 6 अक्टूबर 2024 को रात 11 बजे के करीब हुआ। धमाके में 2 चीनी नागरिकों के मौत की खबर है जबकि 1 चीनी नागरिक समेत 17 लोग घायल बताए जा रहे हैं। चीनी दूतावास ने इस हमले की पुष्टि की है।
#WATCH | At least three foreign nationals died while 17 others sustained injuries in a huge explosion near Jinnah International Airport, Karachi, reports Pakistan's Geo News.
उन्होंने बताया विस्फोट सिंध प्रांत में बिजली परियोजना में काम कर रहे चीनी इंजीनियरों के काफिले को निशाना बनाकर किया गया था। वहीं प्रांतीय गृह मंत्री जिया उल हसन ने दावा किया कि यह एक IED ब्लास्ट था। पुलिस अधिकारी ने शुरुआती जाँच के आधार पर बताया कि ये धमाका तेल टैंकर में हुआ था जिसके कारण मौके पर मौजूद कई वाहन चपेट में आ गए।
पाकिस्तानी एयरपोर्ट अथॉरिटी ने इस घटना के बाद जारी बयान में बताया कि एयरपोर्ट की इमारतें और संपत्ति सुरक्षित हैं। एयरपोर्ट पर उड़ानों का शेड्यूल सामान्य रूप से चल रहा है। पीएए के महानिदेशक ने बचाव कार्यों में पूर्ण सहयोग देने को कहा है।
Chinese Embassy in Pakistan issues statement – At around 11 pm on Oct 6, a convoy carrying Chinese staff of Port Qasim Electric Power Company (Private) Limited was attacked near Jinnah International Airport, Karachi; two Chinese died, one Chinese injured & some local… https://t.co/85kEEvpirspic.twitter.com/KSwg9XTWMh
अधिकारियों ने घटना की जाँच जारी करते हुए इलाके की सुरक्षा बढ़ा दी है। सीसीटीवी फुटेज भी हासिल कर लिए गए हैं। घायलों को अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। रिपोर्ट बता रही हैं कि ये हमला इतना तेज था कि इसके विस्फोट की आवाज शहर के कई इलाकों तक सुनाई दी है।
#WATCH | At least three foreign nationals died while 17 others sustained injuries in a huge explosion near Jinnah International Airport, Karachi, reports Pakistan's Geo News.
सामने आए वीडियोज में खून से लथपथ लोग जमीनों पर पड़े रोते-चीखते दिख रहे हैं। वहीं दूसरे वीडियोज में कारों से आग की लपटें और घटनास्थल से धुएं का गुबार उठता दिखाई दे रहा है। घटनास्थल पर भारी संख्या में सैन्यकर्मी तैनात हैं और इस इलाके को चारों ओर से घेरा गया है। इस हमले के बाद लोगों ने सोशल मीडिया पर कहना शुरू कर दिया है कि पाकिस्तान में कोई विदेशी सुरक्षित नहीं है।
#BREAKING: Suicide Bomber likely blew up near Karachi International Airport in #Pakistan targeting a convoy of foreigners. Major terror attack ahead of the #SCO Heads of Government meeting which is being hosted by Pakistan. Several casualties are being reported. pic.twitter.com/ysiUULNekl
चीन ने अपने बयान में विस्फोट को “आतंकवादी हमला” बताया है और कहा है कि चीन इसके बाद की स्थिति से निपटने के लिए पाकिस्तान के साथ मिलकर काम कर रहा है। चीन ने इस हमले की गहन जाँच किए जाने की माँग की है ताकि अपराधियों को पकड़ा जा सके और पाकिस्तान में चीनी नागरिकों से सुरक्षा संबंधी सावधानी बरतने को कहा है।
बता दें कि मीडिया खबरों के अनुसार, इस हमले की जिम्मेदारी बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी की माजिद ब्रिगेड ने ली है।
मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू वर्तमान में भारत की अधिकारिक यात्रा पर हैं। राष्ट्रपति बनने के बाद यह उनकी पहली आधिकारिक भारत यात्रा है। मोहम्मद मुइज्जू का राष्ट्रपति आवास में सोमवार (7 अक्टूबर, 2024) को आधिकारिक स्वागत हुआ। यहाँ उनकी अगवानी राष्ट्रपति द्रौपदी मूर्मू और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने की।
Maldives President Muizzu, First lady, Indian President Murmu, PM Modi at Rashtrapati Bhawan this morning pic.twitter.com/tOQL8n1xOC
चीन सरपरस्त माने जाने वाले मुइज्जू ने इस दौरान भारत की चिंताओं को कम करने का प्रयास किया है। मुइज्जू ने कहा है कि मालदीव ऐसा कुछ नहीं करेगा जिससे भारत को खतरा पैदा होता हो। रविवार (6 अक्टूबर, 2024) को भारत पहुँचे मोहम्मद मुइज्जू ने भारतीय मीडिया के साथ बातचीत की।
चीन की घुसपैठ के चलते भारत की सुरक्षा चिंताओं को लेकर मोहम्मद मुइज्जू ने टाइम्स ऑफ़ इंडिया से एक इंटरव्यू में कहा, “मालदीव कभी भी ऐसा कुछ नहीं करेगा जिससे भारत की सुरक्षा को नुकसान पहुँचे। भारत, मालदीव का एक अहम साझेदार और मित्र देश है, और हमारे संबंध सम्मान और साझा हितों पर आधारित हैं।”
उन्होंने आगे कहा, “हम कई सेक्टर में दूसरे देशों के साथ सहयोग बढ़ा रहे हैं लेकिन यह ध्यान रखते हुए कि इससे क्षेत्र की सुरक्षा को खतरा ना हो। मालदीव भारत के साथ अपने पुराने और महत्वपूर्ण रिश्ते को आगे प्राथमिकता से बढ़ाता रहेगा और हमें यह भी विश्वास है कि मालदीव के दूसरे देशों के साथ भारत की सुरक्षा चिंताओं को ना बढ़ाएँ।”
भारतीय सैनिकों के मालदीव से वापस भेजे जाने को लेकर मोहम्मद मुइज्जू ने कहा कि उनका यह फैसला मालदीव की जनता की माँग थी और उन्होंने उसका पालन किया है। उन्होंने कहा कि उनके इस कदम को लोकतंत्र होने के नाते भारत और इसकी जनता समझेगी।
मोहम्मद मुइज्जू का यह भारत दौरा कई मायनों में अहम है। मालदीव वर्तमान में गहरे आर्थिक संकट में है और उसे नए कर्जे की जरूरत है। इसके अलावा उसे अपने पुराने कर्जे चुकाने के लिए अधिक समय भी चाहिए होगा। मोहम्मद मुइज्जू की पीएम मोदी से मुलाक़ात में इन मुद्दों के सबसे प्राथमिकता पर रहने के कयास हैं।
मुइज्जू राष्ट्रपति चुने जाने से पहले ही भारत विरोधी रवैया अपनाते रहे हैं। उन्होंने मालदीव में ‘इंडिया आउट’ अभियान चलाया था और इसे राष्ट्रपति चुनाव का केंद्र बिंदु बना लिया था। राष्ट्रपति बनने के बाद उन्होंने मालदीव में राहत बचाव के काम में लगे भारतीय सैनिकों के भी वापस जाने को कहा था।
मोहम्मद मुइज्जू की कैबिनेट के मंत्रियों ने भारत प्रधानमंत्री मोदी को लेकर अशोभनीय टिप्पणियाँ भी की थी। मालदीव सरकार से जुड़े लोगों ने भारत को लेकर सोशल मीडिया पर अपमानजनक कैम्पेन चलाया था। इसके बाद भारतीयों ने मालदीव ना जाने को लेकर अभियान चलाया था।
मोहम्मद मुइज्जू ने स्वयं भी अपनी पहली यात्रा भारत ना करके चीन जाना पसंद किया था। उनके भी कुछ ऐसे बयान सामने आए थे जिनसे भारत से रिश्तों में कटुता झलक रही थी। मोहम्मद मुइज्जू के इस रवैये के चलते भारत और मालदीव के रिश्ते काफी निचले स्तर पर चले गए थे।
मालदीव अब जब आर्थिक संकट में फंस गया है तो मुइज्जू वापस भारत से मदद माँगने आए हैं। वह भारत से आर्थिक पैकेज चाहते हैं और साथ ही भारत द्वारा दिए गए पुराने कर्जों को चुकाने के लिए भी अधिक समय की माँग करेंगे। मालदीव को पता लग गया है कि यदि भारत उसकी मदद नहीं करता है तो वह बड़ी समस्या में फंस जाएगा।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रयागराज में आयोजित होने वाले महाकुंभ 2025 की तैयारियों की समीक्षा करते हुए कहा कि यह महाकुंभ स्वच्छ, सुरक्षित और सुव्यवस्थित होगा। महाकुंभ का आयोजन 14 जनवरी 2025 से 26 फरवरी 2025 तक होगा, जिसमें लाखों श्रद्धालुओं के साथ साधु-संतों का भी आगमन होगा।
सीएम योगी ने इस मेले को दिव्य और भव्य बनाने के लिए जोर देते हुए कहा कि 2019 में आयोजित कुंभ की सफलता ने एक मानक स्थापित किया था, और इस बार इससे भी बेहतर महाकुंभ आयोजित करने का प्रयास किया जा रहा है। इस दौरान सीएम योगी आदित्यनाथ ने महाकुंध के ‘लोगो’, वेबसाइट और मोबाइल ऐप का भी लोकार्पण किया।
महाकुम्भ-2025 के प्रतीक चिह्न (Logo) का अनावरण, वेबसाइट एवं ऐप की लॉन्चिंग के अवसर पर… https://t.co/lqLY76151b
सीएम योगी ने रविवार (6 अक्टूबर 2024) को हुई बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिया है कि सभी तैयारियाँ 10 दिसंबर 2024 तक पूरी कर ली जाएँ। उन्होंने कहा कि महाकुंभ 2025 का आयोजन 4000 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में होगा, जबकि 2019 में यह 3200 हेक्टेयर में हुआ था। मेला क्षेत्र में 7000 से अधिक बसों की व्यवस्था की जाएगी और डेढ़ लाख से अधिक शौचालय बनाए जाएँगे। स्वच्छता के लिए 10,000 सफाईकर्मियों की तैनाती होगी, ताकि मेले में स्वच्छता बनी रहे। सीएम ने कहा कि कोई भी श्रद्धालु 1 किलोमीटर से अधिक पैदल नहीं चलेगा, सिवाय 6 विशेष स्नान पर्वों के।
महाकुंभ में कुल 6 प्रमुख स्नान पर्व होंगे, जिनमें लाखों श्रद्धालु पवित्र संगम में डुबकी लगाएँगे। ये प्रमुख स्नान पर्व इस प्रकार हैं:
मकर संक्रांति : 14 जनवरी 2025
पौष पूर्णिमा : 25 जनवरी 2025
मौनी अमावस्या : 29 जनवरी 2025
बसंत पंचमी : 3 फरवरी 2025
माघी पूर्णिमा : 12 फरवरी 2025
महाशिवरात्रि : 26 फरवरी 2025
भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा को लेकर मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि मेला क्षेत्र में वीवीआईपी कॉरिडोर बनाएँ, लेकिन विशेष स्नान पर्वों पर कोई वीआईपी मूवमेंट न हो। उन्होंने फायर सर्विस, हेल्प डेस्क, पार्किंग, और सीसीटीवी की व्यवस्था को सुनिश्चित करने पर जोर दिया। एंटी ड्रोन सिस्टम और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टूल्स का इस्तेमाल भी सुरक्षा के लिए किया जाएगा।
अविरल और निर्मल गंगा-यमुना
सीएम योगी ने गंगा-यमुना को अविरल और निर्मल बनाने पर जोर दिया। बिजनौर से बलिया तक जीरो डिस्चार्ज सुनिश्चित किया जाएगा, ताकि कोई भी ठोस या तरल कचरा गंगा या यमुना में न गिरे। उन्होंने कहा कि नालों को टेप किया जाएगा और शोधित जल ही गंगा में छोड़ा जाएगा। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि महाकुंभ में प्लास्टिक का इस्तेमाल न हो। पर्यावरण को सुरक्षित रखते हुए महाकुंभ 2025 का आयोजन किया जाएगा। सीएम योगी ने कहा कि महाकुंभ मेले के दौरान प्रयागराज में सनातन भावनाओं का सम्मान को देखते हुए मांस-मदिरा की बिक्री पर रोक रहेगी।
मुख्यमंत्री ने बैठक में कहा कि प्रयागराज में कई स्थायी निर्माण कार्य चल रहे हैं, जिनमें स्टील ब्रिज, वीवीआईपी कॉरिडोर, और पुलिस स्टेशन प्रमुख हैं। कानपुर, लखनऊ, बाराबंकी, और अयोध्या से प्रयागराज आने के लिए स्टील ब्रिज को दिसंबर के पहले सप्ताह तक तैयार करने का निर्देश दिया गया है। इसके अलावा नए जीआरपी थानों की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया है ताकि रेलवे और यूपी पुलिस के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो सके।
सीएम योगी ने की संतों के साथ बैठक
मुख्यमंत्री योगी ने साधु-संतों और अखाड़ों के साथ भी बैठक की और उनकी अपेक्षाओं को ध्यान में रखने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि महाकुंभ सनातनियों का सबसे बड़ा मेला है और इसके आयोजन में संत समाज का विशेष योगदान होगा। उन्होंने संतों से अनुरोध किया कि वे महाकुंभ के दौरान नकारात्मक बातों से बचें और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ें। सीएम ने 2019 के कुंभ का जिक्र करते हुए कहा कि इस आयोजन ने वैश्विक मंच पर उत्तर प्रदेश को नई पहचान दिलाई थी। इस बार फिर से प्रयागराज के इस भव्य आयोजन को वैश्विक स्तर तक पहुँचाने में सभी का सकारात्मक योगदान होगा।
धर्म, संस्कृति और अध्यात्म की पावन धरा 'तीर्थराज' प्रयागराज में महाकुम्भ-2025 के दृष्टिगत आज पूज्य साधु-संत गण के साथ संवाद का अवसर प्राप्त हुआ।
मुख्यमंत्री ने कहा कि महाकुंभ 2025 के दौरान आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा का पूरा ध्यान रखा जाएगा। नए होमस्टे कार्यक्रम से स्थानीय लोगों को भी लाभ मिलेगा और इसके तहत धाबों, होटलों और रेस्तरांओं को बेहतर सुविधाएँ देने के लिए सब्सिडी दी जाएगी। महाकुंभ के मुख्य स्नान पर्वों के लिए शाही स्नान के नाम बदलने का सुझाव भी दिया गया, जो गुलामी के प्रतीक माने जाते हैं। इसके अलावा, सीएम ने कहा कि सरकार यूपी के 700 से अधिक मंदिरों का पुनरुद्धार कर रही है और लेटे हुए हनुमान जी के कॉरिडोर का भी निर्माण किया जा रहा है।
गौरतलब है कि महाकुंभ 2025 के आयोजन को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तैयारियाँ युद्धस्तर पर चल रही हैं। सरकार का लक्ष्य है कि यह आयोजन 2019 के कुंभ से भी अधिक भव्य, दिव्य, स्वच्छ और सुव्यवस्थित हो। सभी आवश्यक तैयारियों को समय से पहले पूरा करने और श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधाएँ सुनिश्चित करने के लिए सरकार कड़ी मेहनत कर रही है। सीएम योगी ने कहा कि यह महाकुंभ भारत की सनातन संस्कृति को वैश्विक मंच पर स्थापित करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है।
उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले में धार्मिक स्टेट्स लगाने पर एक हिन्दू छात्र की पिटाई की गई है। इसके साथ ही उसे जान से मारने की भी धमकी दी गई है। पिटाई का आरोप शाहिद कुरैशी, अयान अहमद, हसनैन और एक अन्य व्यक्ति पर लगा है। छात्र की माँ की तहरीर पर पुलिस ने बुधवार (2 अक्टूबर 2024) को FIR दर्ज कर ली है। मामले की जाँच की जा रही है।
यह मामला सुल्तानपुर जिले के कोतवाली नगर क्षेत्र का है। यहाँ बुधवार को अंकित तिवारी की माँ ने पुलिस में तहरीर दी। तहरीर में उन्होंने बताया है कि उनका बेटा MGSI कॉलेज का छात्र है। एक दिन अंकित ने अपनी इंस्टाग्राम प्रोफ़ाइल पर हिन्दू धर्म का स्टेट्स लगा दिया। इस बात से उसके कॉलेज में पढ़ने वाले कुछ छात्र भड़क उठे। इनमें से अधिकांश मुस्लिम छात्र हैं।
आरोप है कि शाहिद, हसनैन और अयान अहमद ने कॉलेज में अंकित को पकड़ा और जान से मार डालने की धमकी देने लगे। हमलावरों से घिरा अंकित जैसे-तैसे जान बच कर वहाँ से भागा। 30 सितंबर 2024 को उसे कॉलेज में अनस ने अपने साथी सूजल भारती के साथ मिलकर पकड़ लिया। इन्होंने सबसे पहले अंकित को पीटा और माफ़ी माँगते हुए उसकी एक वीडियो बनाई।
प्रकरण में तहरीर के आधार पर थाना को0 नगर में सुसंगत धाराओं में मुकदमा पंजीकृत कर आवश्यक विधिक कार्यवाही की जा रही है ।
आरोपितों ने इस वीडियो को इंस्टाग्राम पर अपलोड कर दिया गया। कुछ ही देर में यह वीडियो वायरल हो गया। इस बीच आरोपितों द्वारा शिकायत करने पर अंकित की माँ को भी जान से मार डालने की धमकी दी गई। पीड़ित की माँ ने आरोपितों को ‘धार्मिक उन्मादी ग्रुप’ कहकर सम्बोधित किया है। शिकायत में इस गिरोह पर कड़ी कार्रवाई की माँग की गई है।
पुलिस ने शिकायत का संज्ञान लेते हुए FIR दर्ज कर ली है। यह FIR भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 115 (2), 352, 351 (2), 351 (3) और 3 (5) के तहत दर्ज की गई है। ऑपइंडिया के पास FIR की कॉपी मौजूद है। पुलिस ने रविवार (6 अक्टूबर) को बताया कि वह मामले में जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई कर रही है।
गोवा में ईसाई धर्म के प्रचार प्रसार के लिए ‘सेंट’ फ्रांसिस जेवियर का नाम सबसे अधिक कुख्यात है। ईसाई समुदाय के लोग उन्हें ‘गोवा का संरक्षक’ मानते हैं। हालाँकि ऐसा कहते समय उन्हें ये याद नहीं रहता है कि जिस गोवा की वो बात करते हैं वहाँ की 60% आबादी अब भी हिंदुओं की है। वो हिंदू जिन्हें मिटाने के लिए ‘सेंट’ फ्रांसिस जेवियर ने क्या किया ये कोई सोच भी नहीं सकता।
आगे बढ़ने से पहले गोवा के बारे में आधिकारिक साइट पर क्या लिखा है ये जान लेते हैं। गोवा सरकार की साइट के अनुसार, ये बात एकदम साफ है कि गोवा की संस्कृति में धर्मांतरण ने आघात किया था। गोवा में पुर्तगाली शासन के दौरान यहाँ बड़े स्तर पर लोगों का धर्म परिवर्तन करवाया गया था। इसी सबको देख ईसाई समुदाय के लोग ‘सेंट’ फ्रांसिस जेवियर में अपनी अटूट श्रद्धा दिखाने लगे।
बताया जाता है कि पुर्तगाली शासन से पहले छोटे से गोवा में सैंकड़ों मंदिर थे। हालाँकि 1542 में पुर्तगाली काफिले के साथ जब ‘सेंट’ फ्रांसिस जेवियर भारत आए तो उन्होंने केवल ईसाई धर्म को फैलाना शुरू नहीं किया बल्कि कुछ ही सालों में 350+ से ज्यादा हिंदू मंदिर बंद करवा दिए। इस बीच कई मंदिर को तो जमींदोज भी किया गया।
‘सेंट’ जेवियर के काल में हिंदुओं पर हर हथकंडे आजमाते हुए उन्हें क्रिश्चियन बनाने की कोशिश हुई। लेकिन जब प्रयास विफल हुए और ‘सेंट’ जेवियर ने देखा कि सनातन को मिटाना इतना आसान काम नहीं है, अगर वो सड़कों पर हिंदू मंदिर बंद कराएँगे तो हिंदू घर में ही मंदिर बना लेंगे… ऐसी स्थिति में उन्होंने हिंसा और लोगों को भ्रमित करने का रास्ता अपनाया।
फ़िलिपो सैसेटी, एक इतालवी यात्री और व्यापारी जो 1578 से 1588 तक भारत में थे, उन्होंने गोवा में स्थिति देख कहा था कि तब हिंदुओं पर उनके पवित्र ग्रंथों और उनके धर्म का पालन करने के लिए आरोप लगाए जाते थे। हिंदू मंदिरों को नष्ट किया जाता था, और लोगों को इतना परेशान किया जाता था कि वे बड़ी संख्या में शहर छोड़कर चले जाएँ। अगर किसी ने बात सुनने से इनकार किया या अपने पूर्वजों के देवों की पूजा की तो उन्हें कारावास, यातना और मौत की सज़ा दी जा सकती थी।
‘सेंट’ जेवियर पर मौजूदा लेख बताते हैं कि उन्हें हिंदू से इतनी घृणा थी कि वह उन्हें विधर्मी, काफिर तक कहकर संबोधित करते थे। वहीं ब्राह्मणों से उन्हें इतनी दिक्कत थी कि उन्हें वो ‘धोखेबाज और झूठा’ बताकर पेश करते थे ताकि समाज का विश्वास उनपर से उठ जाए। इसके अलावा वो ईसाई धर्म में लोगों को लाने के लिए ईसाई धर्म की खूबियों के अलावा ये बताते थे कि कैसे हिंदू और उनके देवी-देवता बुरे होते हैं।
फ्रांसिस के बारे में कहा जाता है कि उनके होते हुए गोवा में इतनी तेजी से धर्मांतरण की रफ्तार बढ़ी थी कि वो कई बार पूरे के पूरे गाँव को ईसाई बनवा देते थे। फिर हिंदू बच्चों को मंदिर में ले जाते थे और उनसे देवी-देवताओं को गाली देने को कहते थे, मूर्तियाँ तोड़ने, उनपर थूकने और उन्हें रौंदने के लिए कहते थे। साथ ही उन कलाकारों को भी धमकी दी जाती थी जो मूर्तियाँ बनाने का काम करते थे।
अब ‘सेंट’ जेवियर का काल बीते कई सदी हो चुकी हैं। आज ईसाई समुदाय जो हमें उनके बारे में बताता है हम उसी को जानते हैं लेकिन अगर लोगों की सुनी सुनाई बातों से हटकर खुद समझना चाहते हैं कि ‘सेंट’ जेवियर हिंदुओं के लिए सोच क्या रखते थे तो एक पत्र में लिखी बात पढ़िए जो उन्होंने 1545 में कोचीन से लिखी थी, इसमें उन्होंने लिखा था,
“जब सभी लोग बपतिस्मा ले लेते हैं, तो मैं उनके झूठे देवताओं के सभी मंदिरों को नष्ट करने और सभी मूर्तियों को टुकड़े-टुकड़े करने का आदेश देता हूँ। मैं आपको यह नहीं बता सकता कि यह सब होते हुए देखकर मुझे कितनी खुशी हो रही है, उन लोगों द्वारा मूर्तियों को नष्ट होते हुए देखना जो हाल ही में उनकी पूजा करते थे। मैं सभी शहरों और गाँवों में ईसाई धर्म के सिद्धांतों को स्थानीय भाषा में लिखकर छोड़ता हूँ और साथ ही यह भी बताता हूँ कि सुबह और शाम के स्कूलों में इसे किस तरह पढ़ाया जाना चाहिए।”
‘सेंट’ फ्रांसिस जेवियर ने गोवा पर जब पूरा कब्जा किया तो गैर इसाइयों के लिए स्थिति और बद्तर हो गई क्योंकि तब सत्ता ईसाई पादरियों के हाथ आ गई और हिंदू विरोधी कानून बनने शरू हुए। धर्मांतरण के लिए नृशंस यातनाएँ दी जाने लगी। हिंदू माता पिता के सामने बच्चों के अंग काटे जाने लगे। वहीं जो धर्मांतरण के लिए नहीं मानता था उसे सूली पर लटकाकर जलाना शुरू कर दिया गया।
इस तरह जेवियर के काल में धर्मांतरण को अंजाम दिया गया और आगे चल कर जब इतिहासकारों ने इस सच्चाई को लिखना चाहा तो उन्हें भी असहनीय यातनाएँ दी गईं। गोवा में एक ‘हाथकाटरो’ खंभ भी है। बताया जाता है कि ये हिंदुओं पर पुर्तगाली शासकों के बर्बरता का जीवंत साक्ष्य है। ईसाइयों द्वारा हिंदुओं को इससे बाँधकर उनके अंगों को तोड़ा जाता था।
कई हिंदू मानते हैं कि ये खंबा जिसपर पर खड़ा कर हिंदुओं को इतनी यातनाएँ दी जाती थीं वो स्तंभ श्री सप्तकोटेश्वर मंदिर का अवशेष है जो कदंब वंश के शासनकाल के दौरान अस्तित्व में था और बाद में इसे पुर्तगालियों ने ध्वस्त कर दिया था और बाद में इसका प्रयोग हिंदुओं को यातना देने के लिए होने लगा।
आज ‘सेंट’ फ्रांसिस जेवियर के नाम पर भारत में न जाने कितने शैक्षणिक संस्थान, धार्मिक स्थल और स्वास्थ्य केंद्र हैं। ईसाई ‘सेंट’ जेवियर को अपना प्रतिष्ठित पादरी मानते हैं। उनके अपमान को अपना अपमान समझते हैं, लेकिन वास्तविकता ये है कि मौजूदा लेख और जानकारियाँ उनके बारे में यही बताती हैं कि उन्होंने ईसाई धर्म के प्रसार के लिए हिंदुओं को या गैर इसाइयों को प्रताड़ित किया। अगर आज भी लोग ‘सेंट’ जेवियर के दिखाए रास्ते को सबसे अच्छा बताते हैं तो क्या ये माना जाना चाहिए वो भी हिंदू विरोधी हैं जिन्हें कोई आपत्ति नहीं है जेवियर काल में हिंदुओं क साथ क्या हुआ।
जानकारी के लिए बता दें कि ‘सेंट’ फ्रांसिस जेवियर ‘सोसायटी ऑफ जीसस’ से जुड़े थे। इन्हीं सोसायटी ऑफ़ जीसस वालों को ‘जेसुइट्स’ कहा जाता है। कहते हैं कि जेसुइट्स ने एक समय में 20000 से ज्यादा लोगों को अपना गुलाम बनाया हुआ थाऔर उनसे खेत समेत अन्य मेहनत के काम कराए जाते थे।
पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में स्थित आरजी कर अस्पताल फिर से विवादों में घिरा हुआ है। पहले इस अस्पताल में एक जूनियर डॉक्टर के बलात्कार और हत्या के मामले ने पूरे देश, खासकर बंगाल में विरोध-प्रदर्शन की आग भड़काई थी। अब इस अस्पताल से एक और गंभीर खबर आई है, जिसमें 10 डॉक्टरों समेत कुल 59 स्टाफ को निष्कासित किया गया है। इनमें डॉक्टर, इंटर्न और हाउस स्टाफ शामिल हैं।
आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में जाँच कर रही कमेटी ने 10 डॉक्टरों समेत 59 स्टाफ को या तो पूरी तौर पर या अस्थायी तौर पर सस्पेंड कर दिया है। निष्कासित किए गए लोगों पर यौन दुर्व्यवहार, धमकी देने और जबरन पैसा वसूलने जैसे गंभीर आरोप लगे हैं। बताया जा रहा है कि ये लोग पूर्व आरजी कर प्रिंसिपल संदीप घोष के करीबी थे, जिनके कार्यकाल में जूनियर डॉक्टर के साथ बर्बर बलात्कार और हत्या का मामला हुआ था।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन व्यक्तियों पर आरोप है कि वे दूसरे छात्रों को धमकाते थे कि अगर उनकी बात नहीं मानी गई तो परीक्षा में फेल करवा देंगे या हॉस्टल से निकालने की धमकी देंगे। इसके अलावा, जूनियर स्टाफ को जबरन एक खास राजनीतिक पार्टी से जुड़ने के लिए मजबूर करना, यौन दुर्व्यवहार में शामिल होना, जबरन पैसा वसूलना, झूठी एफआईआर दर्ज करवाना और शारीरिक हिंसा में शामिल होने के भी आरोप हैं।
निष्कासित किए गए लोगों में से एक अशोक पांडे नाम का हाउस स्टाफ भी शामिल है, जो पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष का करीबी बताया जा रहा है। संदीप घोष को पहले ही वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के मामले में केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) ने गिरफ्तार किया था।
निष्कासित डॉक्टरों में – सौरभ पाल, आशीष पांडे (जिन्हें सीबीआई ने गिरफ्तार किया), अभिषेक सेन, आयुष्री थापा, निरंजन बागची, शरीफ हसन, नीलाग्नि देबनाथ, अमरेंद्र सिंह, सतपाल सिंह और तनवीर अहमद काजी शामिल हैं। निष्काषित लोगों को अगले 72 घंटों में हॉस्टल खाली करने का आदेश दिया गया है। इन आरोपितों के नामों को राज्य मेडिकल काउंसिल को भी भेजा जाएगा, जिससे उनके रजिस्ट्रेशन की जाँच और रद्द किए जाने की प्रक्रिया शुरू की जा सके।
रिपोर्ट्स में यह भी बताया गया है कि इन व्यक्तियों पर जूनियर स्टाफ को देर रात नशा और शराब खरीदने के लिए मजबूर करने और लड़कों के कॉमन रूम में अश्लील हरकतें करने के लिए बाध्य करने का भी आरोप है। इसके अलावा, हॉस्टल में रहने वाले छात्रों पर शारीरिक हिंसा के आरोप भी लगाए गए हैं।
संस्थान की आंतरिक जांच समिति द्वारा की गई जाँच के बाद, इन्हें निष्कासित करने का निर्णय लिया गया। साथ ही, जिन लोगों पर महिलाओं के खिलाफ यौन उत्पीड़न के “ठोस सबूत” पाए गए हैं, उन्हें आगे की जाँच और कार्रवाई के लिए आंतरिक शिकायत समिति (ICC) के पास भेजा गया है।
इसी बीच, एक अन्य घटनाक्रम में रेप-मर्डर केस के बाद सुरक्षा जैसी माँगों को लेकर अनशन कर रहे जूनियर डॉक्टरों का प्रदर्शन जारी है। उनका कहना है कि पश्चिम बंगाल सरकार उनकी जायज़ माँगों को भी नहीं मान रही है, इसीलिए उन्होंने अनिश्चितकालीन आमरण अनशन शुरू किया है।
उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में अवैध करार दिए गए तीन तलाक का एक मामला सामने आया है। यहाँ एक मुस्लिम महिला ने अपने ससुराल वालों पर दहेज माँगने, तीन तलाक देने और फिर हलाला का दबाव बनाने का आरोप लगाया है। पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने शुक्रवार (4 अक्टूबर 2024) को शौहर इरफ़ान, जेठ सद्दाम, सास जन्न्तुन, देवर इरशाद और ननद शमा के खिलाफ केस दर्ज कर लिया।
फतेहपुर जिले के जहानाबाद थाने में शुक्रवार को पीड़िता ने शिकायत दर्ज करवाई। शिकायत में पीड़िता ने बताया कि उसका निकाह 27 जून 2023 को इरशाद से हुआ था। निकाह में पीड़िता के ससुराल वालों को अच्छा दहेज़ मिला था। इसके बावजूद पीड़िता को बार-बार दहेज़ लाने के लिए परेशान किया जाने लगा। पीड़िता की जेठ सद्दाम, सास जन्न्तुन, देवर इरशाद और ननद शमा मिलकर उसे प्रताड़ित करते।
ये लोग पीड़िता से 2 लाख रुपए और बाइक की डिमांड कर रहे थे। जब पीड़िता इनकार करती थी तो उसे शारीरिक और मानसिक तौर पर टॉर्चर किया जाता था। 22 जुलाई 2024 को पीड़िता के ससुराल वालों ने उसे बेरहमी से पीटा। पीड़िता द्वारा रहम की भीख का भी कोई असर नहीं पड़ा। पिटाई के बाद पीड़िता के शौहर ने उसे तीन तलाक देकर घर से बाहर निकाल दिया।
प्रकरण में स्थानीय थाना जहानाबाद पर प्राप्त तहरीरी सूचना के आधार पर मु0अ0स0 109/2024 अभियोग पंजीकृत कर आवश्यक वैधानिक कार्यवाही की जा रही है।
आखिरकार पीड़िता अपने मायके पहुँची और परिजनों को सारी बात बताई। जब लड़की के घरवालों ने उसके ससुराल वालों से मिन्नत की तो उनके सामने दहेज़ देने और फिर हलाला करवाने की शर्त रखी गई। पीड़िता ने इससे इनकार कर दिया और पुलिस में जाकर शिकायत दर्ज करवाई। शिकायत में आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की गई है।
पुलिस ने शिकायत के आधार पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 498-A, 323 और 504 के साथ तीन तलाक अधिनियम व दहेज़ प्रतिषेध अधिनियम के तहत केस दर्ज कर लिया है। FIR में इरफ़ान, सद्दाम, जन्न्तुन, इरशाद और शमा को नामजद किया गया है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है। पुलिस मामले की जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई कर रही है।
भोपाल से ड्रग्स की एक बड़ी खेप बरामद की गई है, जिसकी कीमत लगभग 1800 करोड़ रुपये बताई जा रही है। यह छापा नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) और गुजरात एंटी-टेररिज्म स्क्वॉड (ATS) की संयुक्त कार्रवाई का नतीजा है। इस ऑपरेशन में भोपाल के पास स्थित बगरोदा इंडस्ट्रियल एरिया में एक फैक्ट्री पर छापेमारी की गई, जहाँ बड़ी मात्रा में एमडी ड्रग्स बनाई जा रही थी। इस फैक्ट्री से ड्रग्स बनाने के उपकरण और कच्चे माल भी जब्त किए गए हैं।
फैक्ट्री से 1800 करोड़ की ड्रग्स जब्त
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, NCB और ATS ने इस ऑपरेशन में 1800 करोड़ रुपये की मेफेड्रोन (एमडी) ड्रग्स बरामद की। यह छापा भोपाल के कटारा हिल्स थाना क्षेत्र में एक फैक्ट्री पर मारा गया। इस दौरान दो आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है। आरोपितों की पहचान सान्याल प्रकाश बाने और अमित चतुर्वेदी के रूप में हुई है। शुरुआती जाँच में पता चला है कि ये लोग पिछले 6-7 महीनों से इस फैक्ट्री में ड्रग्स बना रहे थे।
गिरफ्तार आरोपित सान्याल प्रकाश बाने पहले भी 2017 में मुंबई पुलिस द्वारा ड्रग्स मामले में पकड़ा जा चुका है। पाँच साल जेल में रहने के बाद रिहा होने पर उसने अपने साथी अमित चतुर्वेदी के साथ मिलकर फिर से ड्रग्स का अवैध धंधा शुरू कर दिया। दोनों ने भोपाल के बागरोदा औद्योगिक क्षेत्र में एक शेड किराए पर लेकर मेफेड्रोन (एमडी) ड्रग्स बनाने की फैक्ट्री लगाई थी। यह फैक्ट्री हर दिन लगभग 25 किलोग्राम मेफेड्रोन (एमडी) ड्रग्स बनाने की क्षमता रखती थी।
पंजाब में भी ड्रग्स की बड़ी खेप बरामद
इस ऑपरेशन से कुछ दिन पहले ही पंजाब के अमृतसर में 10 करोड़ रुपये की कोकीन भी बरामद की गई थी। यह कार्रवाई दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने की थी। पुलिस ने अमृतसर के नेपाल गाँव से एक फॉर्च्यूनर गाड़ी में छिपाकर रखी गई कोकीन की खेप को जब्त किया। पुलिस की शुरुआती जांच में यह सामने आया कि यह खेप दुबई और यूके से भेजी जा रही थी। अमृतसर की इस कार्रवाई में आरोपित जितेंद्र उर्फ जस्सी की गिरफ्तारी हुई थी, जिसकी निशानदेही पर पुलिस ने यह बड़ी बरामदगी की थी।
भोपाल पुलिस को रखा गया दूर
गुजरात ATS और NCB द्वारा की गई इस रेड में भोपाल पुलिस को दूर रखा गया था। यह छापा अचानक मारा गया और स्थानीय पुलिस को इस बारे में कोई पूर्व जानकारी नहीं दी गई थी। गुजरात से आए अधिकारी बिना नंबर प्लेट की गाड़ियों में पहुँचे और उन्होंने फैक्ट्री में छापा मारा। फैक्ट्री के अंदर से ड्रग्स बनाने के उपकरण और कच्चे माल के साथ ही तैयार ड्रग्स की बड़ी खेप बरामद की गई।
इस बड़ी कामयाबी पर गुजरात के गृह राज्य मंत्री हर्ष सांघवी ने ट्वीट कर ATS और NCB की तारीफ की। उन्होंने कहा, “ड्रग्स के खिलाफ हमारी जंग में यह एक बड़ी जीत है। भोपाल में की गई इस कार्रवाई से ड्रग्स के खिलाफ हमारी लड़ाई को मजबूती मिली है। एनसीबी और एटीएस की कड़ी मेहनत और प्रतिबद्धता की जितनी तारीफ की जाए, वह कम है।”
उन्होंने इस ऑपरेशन को सुरक्षा और समाज के स्वास्थ्य के लिए एक महत्वपूर्ण कदम बताया। मंत्री ने यह भी कहा कि कानून प्रवर्तन एजेंसियाँ इसी तरह प्रतिबद्ध रहेंगी ताकि ड्रग्स का कारोबार खत्म हो सके और देश को सुरक्षित बनाया जा सके।
Kudos to Gujarat ATS and NCB (Ops), Delhi, for a massive win in the fight against drugs!
Recently, they raided a factory in Bhopal and seized MD and materials used to manufacture MD, with a staggering total value of ₹1814 crores!
इस घटना से यह साफ हो गया है कि ड्रग्स का कारोबार केवल देश के कुछ हिस्सों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका नेटवर्क अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैला हुआ है। दुबई और यूके से लेकर भारत के विभिन्न शहरों तक ड्रग्स की सप्लाई हो रही है। इसके लिए अपराधी नए-नए तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिसमें फैक्ट्रियों का इस्तेमाल करना, गाड़ियों में छिपाकर तस्करी करना और फर्जी दस्तावेजों का सहारा लेना शामिल है।
NCB और ATS इस मामले की आगे जाँच कर रही है। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इस ड्रग्स की सप्लाई कहाँ-कहाँ की जा रही थी और इस गिरोह में और कौन-कौन शामिल है। गिरफ्तार आरोपितों से पूछताछ की जा रही है, और जल्द ही और भी गिरफ्तारियाँ होने की संभावना है।