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हमारे आदेश की अवमानना हुई तो अधिकारियों को भेजेंगे जेल: बुलडोजर कार्रवाई पर भड़का सुप्रीम कोर्ट, गिर सोमनाथ में गिराए गए हैं अवैध मस्जिद-दरगाह

गुजरात के गिर सोमनाथ में अवैध मस्जिदों और दरगाहों पर बुलडोजर की कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट भड़क गया है। कोर्ट ने कहा कि अगर उसके आदेश की अवमानना ​​हुई है तो दोषी अधिकारियों को जेल भेजा जाएगा। इसके साथ ही गिराए गए ढाँचों को दोबारा बनवाने का आदेश दिया जाएगा। इससे पहले गुजरात हाई कोर्ट ने यथास्थिति बनाए रखने का आदेश देने से इनकार कर दिया था।

सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने यह बात अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान कही। गुजरात में सोमनाथ मंदिर के पास बने 10 अवैध मस्जिदों, 5 दरगाहों, कुछ कब्रों और 45 मुस्लिमों के घरों पर प्रशासन ने 28 सितंबर 2024 को बुलडोजर चला दिया था। इसके खिलाफ मुस्लिम पक्ष सुप्रीम कोर्ट पहुँचा है।

प्रशासन की कार्रवाई के खिलाफ समस्त पाटनी मुस्लिम जमात ने याचिका दाखिल की है। उसने अपनी याचिका में सुप्रीम कोर्ट द्वारा 17 सितंबर 2024 के आदेश के उल्लंघन को लेकर ​​कार्रवाई करने की माँग की थी। इस दौरान मुस्लिम धार्मिक और आवासीय स्थलों को ज्यों का त्यों रखने की माँग खारिज कर दी गई। इस मामले में अब सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार से जवाब माँगा है।

दरअसल, हिंदुओं के सबसे पवित्र स्थानों में एक सोमनाथ मंदिर से सिर्फ 340 मीटर की दूरी पर 57 एकड़ के क्षेत्र में मुस्लिमों के मजहबी स्थल और घर बने हैं। इस मामले की अगली सुनवाई 16 अक्टूबर को होगी। वहीं, मुस्लिम जमात के वकील संजय हेगड़े ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि आदेश के बावजूद गुजरात में अधिकारियों ने बुलडोजर कार्रवाई को अंजाम दिया।

हेगड़े ने कहा कि 1903 में बनी दरगाहों, कब्रों और घरों को लेकर जो नोटिस दिया गया था, उसमें भी बुलडोजर एक्शन का जिक्र नहीं था। उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के आदेश के खिलाफ है। अदालत की परमिशन के बिना कोई एक्शन नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि संपत्तियाँ किसी अपवाद के तहत नहीं आती हैं।

वहीं, गुजरात के अधिकारियों की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कार्रवाई का बचाव किया। तुषार मेहता ने कहा कि ये संरचनाएँ समुद्र से सटी हुई थीं और सोमनाथ मंदिर से करीब 340 मीटर दूर थीं। उन्होंने कहा कि बुलडोजर ऐक्शन 17 सितंबर के आदेश के तहत अपवाद है। सरकारी जमीन पर कब्जा था, जो साल 2003 से चल रहा है और इस पर 2023 से कार्रवाई जारी है।

इससे पहले, उत्तर प्रदेश सहित देश राज्यों में अवैध निर्माणों पर चल रही बुलडोजर की कार्रवाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने अपना 1 अक्टूबर 2024 को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। सुनवाई के दौरान जस्टिस गवई और विश्वनाथन की बेंच ने कहा था कि फैसला आने तक देशभर में बुलडोजर एक्शन पर रोक जारी रहेगी।

हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट ने यह भी साफ कर दिया था कि अवैध अतिक्रमणों को हटाने पर कोई रोक नहीं होगी। सड़क हो, रेल लाइन हो, मंदिर हो या फिर दरगाह, अवैध अतिक्रमण हटाया ही जाएगा। बेंच ने कहा था कि अदालत के लिए जनता की सुरक्षा पहली प्राथमिकता है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले की तारीख अभी तय नहीं की है।

शौहर पाकिस्तानी, बीवी बांग्लादेशी… कर्नाटक में हिंदू नाम रख YouTube पर देता था इस्लामी ज्ञान, गाजियाबाद में रामलीला करने वाले 3 मुस्लिम गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश और कर्नाटक की दो अलग-अलग घटनाओं ने एक बार फिर अवैध प्रवासियों और मजहबी पहचान छिपाकर भारत में रहने वालों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में रामलीला के मंच पर हिंदू पहचान लेकर काम कर रहे मुस्लिम युवकों को गिरफ्तार किया गया, तो दूसरी ओर कर्नाटक में पाकिस्तानी और बांग्लादेशी मुस्लिमों के एक ग्रुप को भी गिरफ्तार किया गया जो हिंदू नाम और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर भारत में रह रहे थे।

गाजियाबाद में गलत पहचान बताकर रामलीला, हिंदू नामों से आधार कार्ड

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, गाजियाबाद में पुलिस ने तीन मुस्लिमों वजीर खान, राहुल (जिसका असली नाम सामने नहीं आया), और नानक को देवी मंदिर में प्रवेश करते समय गिरफ्तार किया। इन तीनों पर आरोप है कि ये अपनी असल पहचान छिपाकर रामलीला में हिंदू पात्रों का अभिनय कर रहे थे और मंदिर में घुसने की कोशिश कर रहे थे। यह गिरफ्तारी उस समय हुई, जब तीनों आरोपित गाजियाबाद के डासना देवी मंदिर में प्रवेश करने की कोशिश कर रहे थे, जहाँ महंत नरसिंहा नंद गिरी ने धर्म विशेष के लोगों के प्रवेश पर रोक लगा रखी है। पुलिस ने इनके पास से हिंदू नाम और पहचान के आधार कार्ड बरामद किए, जो इनके वास्तविक नाम से मेल नहीं खाते थे।

पुलिस जाँच के दौरान इन युवकों ने बताया कि उनका परिवार पुश्तैनी रूप से रामलीला मंचन से जुड़ा हुआ है। ये लोग रामलीला में कैकई, मंथरा जैसे किरदार निभाते हैं और ढोलक बजाने तथा नृत्य का भी कार्य करते हैं। गिरफ्तार युवकों का दावा है कि वे मथुरा के रहने वाले हैं और रामलीला मंचन करना उनकी आजीविका का हिस्सा है। हालाँकि, पुलिस ने यह साफ किया कि मामले की जाँच जारी है और तब तक कुछ ठोस कहा नहीं जा सकता।

डासना देवी मंदिर का यह क्षेत्र बेहद संवेदनशील माना जाता है। यहाँ हमेशा पुलिस बल तैनात रहता है, खासकर महंत नरसिंहानंद गिरी की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए। महंत का कहना है कि धर्म विशेष के लोगों के मंदिर में प्रवेश को रोकने के पीछे उनका धार्मिक और सुरक्षा से जुड़ा कारण है।

कर्नाटक में हिंदू पहचान के साथ पाकिस्तानी और बांग्लादेशी नागरिक

दूसरी घटना कर्नाटक के पीन्या इलाके की है, जहाँ तीन और पाकिस्तानी नागरिकों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें सैयद तारिक और उसकी पत्नी अनीला शामिल हैं, जबकि उनकी 17 वर्षीय बेटी को हिरासत में लिया गया है। पुलिस के अनुसार, यह परिवार पिछले आठ साल से भारत में गैरकानूनी तरीके से रह रहा था और हिंदू नामों का इस्तेमाल कर अपनी असली पहचान छिपा रहा था। तारिक अपने यूट्यूब चैनल पर इस्लामिक उपदेश देता था, जबकि उसकी पत्नी घरेलू महिला है। इन लोगों के पास से पुलिस ने आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर आईडी और पासपोर्ट बरामद किए हैं, जो सभी फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बनाए गए थे।

इस परिवार के बारे में जानकारी तब मिली जब पहले गिरफ्तार किए गए अन्य पाकिस्तानी नागरिकों ने इनके बारे में पुलिस को बताया। पुलिस ने शंकर शर्मा के नाम से रह रहे राशिद अली सिद्दिकी को भी हाल ही में गिरफ्तार किया था, जो अपनी बांग्लादेशी पत्नी और ससुरालवालों के साथ फर्जी दस्तावेजों के सहारे भारत में रह रहा था। राशिद का मामला भी तारिक से जुड़ा हुआ पाया गया है। अकेले कर्नाटक में ही कुल 11 पाकिस्तानी-बांग्लादेशियों को फर्जी हिंदू पहचान के साथ गिरफ्तार किया जा चुका है।

पुलिस की शुरुआती जाँच से पता चला है कि यह परिवार पहले कोच्चि में रह रहा था और चार साल पहले बेंगलुरु आया था। तारिक को हर महीने 25 हजार रुपये की आर्थिक मदद मेहदी फाउंडेशन इंटरनेशनल के माध्यम से मिलती थी, जिसका मुख्य उद्देश्य इस्लामी तकरीरें करनी थी। पुलिस अब यह जानने की कोशिश कर रही है कि इन अवैध पाकिस्तानी नागरिकों को पैसा कैसे और कहाँ से मिल रहा था, और क्या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है।

कर्नाटक पुलिस अब इस बात की भी जाँच कर रही है कि राज्य में और कितने पाकिस्तानी फर्जी दस्तावेजों के सहारे रह रहे हैं। हाल ही में बेंगलुरु के बाहरी इलाके जिगानी में भी चार लोगों को गिरफ्तार किया गया था, जो इसी प्रकार फर्जी पहचान पत्र का इस्तेमाल कर रहे थे। पुलिस ने बताया कि कर्नाटक और देश के अन्य हिस्सों में भी ऐसे कई लोग हो सकते हैं जो अवैध रूप से रह रहे हों और अपनी मजहबी और राष्ट्रीय पहचान छिपाकर काम कर रहे हों।

सावधान करने वाली हैं दोनों घटनाएँ

इन दोनों घटनाओं में एक चीज समान है: आरोपितों द्वारा अपनी मजहबी पहचान को छिपाना। गाजियाबाद में गिरफ्तार आरोपित मुस्लिम युवक हिंदू नामों के साथ रामलीला में काम कर रहे थे और मंदिर में घुसने की कोशिश कर रहे थे, जबकि कर्नाटक में पकड़े गए पाकिस्तानी नागरिक हिंदू नाम और फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर भारत में अवैध रूप से रह रहे थे। दोनों ही मामलों में मजहबी पहचान को छिपाकर अवैध कार्यों को अंजाम देने का प्रयास किया गया।

कब कोई मार दे… इसलिए अपनी ही सेना की जाँच करेगा ईरान, लेकिन ‘इजरायल एकमात्र दुश्मन’ के नाम पर भड़का रहा मुस्लिम मुल्कों को

ईरान के सुप्रीम लीडर आयतोल्लाह खामनेई ने कहा है कि सभी मुस्लिम मुल्कों का इजरायल दुश्मन है। आयोत्ल्लाह खामनेई ने ईरान के इजरायल पर मिसाइल हमले को सही ठहराया है। खामनेई ने यह सभी बातें जुमे की नमाज अदा करने के बाद कही हैं।

तेहरान में जुमे की नमाज अदा करने के बाद शुक्रवार (4 अक्टूबर, 2024) को खामनेई ने अपना संबोधन दिया। खामनेई ने ऐसा संबोधन पाँच साल के बाद दिया है। खामनेई ने इस दौरान हिजबुल्लाह के आतंकियों के मारे जाने और इजरायल पर हमले को लेकर बातें कहीं।

खामनेई ने कहा कि इजरायल के ऊपर बैलिस्टिक मिसाइल दागने का ईरान का कदम वैध और एकदम सही था क्योंकि हर देश को अपने ऊपर हुए हमले का जवाब देने का अधिकार है। खामनेई ने इसी दौरान कहा कि इजरायल सभी मुस्लिम मुल्कों का दुश्मन है।

खामनेई ने कहा कि मुस्लिम मुल्कों को अफगानिस्तान से लेकर यमन और ईरान से लेकर गाजा तथा लेबनान तक अपनी सुरक्षा के लिए कमर कसनी पड़ेगी। उन्होंने कहा है कि इजरायल लोगों की हत्या करके अपने जीतने का केवल झूठा दावा कर रहा है।

खामनेई ने अपने संबोधन अमेरिका पर भी हमला बोला है। उन्होंने कहा कि अमेरिका इजरायल को बचा रहा है ताकि वह इस इलाके के संसाधनों पर अपना कब्जा जमा सके। खामनेई ने कहा कि इस इलाके में अमेरिका और इजरायल के खिलाफ चल रही मुहिम शांत नहीं होगी।

अपने संबोधन में खामनेई ने कहा कि ईरान ने इजरायल को माकूल जवाब दे दिया है और आगे ना ही वह युद्ध को बढ़ावा देंगे और ना ही पीछे हटेंगे। खामनेई ने अपने लड़ाकों को खूनखराबे से ना डरने की सलाह दी है। खामनेई के इस बयान से संकेत मिले हैं कि ईरान अब युद्ध को बढ़ाना नहीं चाहेगा।

ईरान के मुखिया का यह बयान उसके इशारे पर चलने वाले आतंकी समूह हिजबुल्लाह के सरगना नसरल्लाह को इजरायल द्वारा मार गिराए जाने के बाद सामने आया है। इजरायल ने इसके बाद भी लेबनान के भीतर हिजबुल्लाह पर बड़ी कार्रवाईयाँ की हैं।

इस बीच ईरान को अपनी ही सेना की जाँच करनी पड़ गई है। ईरान को शक है कि उसकी सेना के कुछ अधिकारीयों ने मोसाद को ख़ुफ़िया जानकारी दी है। ईरान की यह जाँच नसरल्लाह की मौत के बाद और तेज हुई है। ईरान के शक की सुई सबसे पहले विदेश आने-जाने वाले अधिकारीयों पर पड़ी है।

बताया गया है कि ईरान ने कुछ अधिकारियों पर कार्रवाई करते हुए उन्हें गिरफ्तार किया है और उसने पूछताछ कर रहा है। मोसाद का नेटवर्क तोड़ने की कोशिश की जा रही है। दूसरी तरफ हिजबुल्लाह भी सही समय पर हमले की सूचना ना मिलने पर बौखलाया हुआ है।

गौरतलब है कि 7 अक्टूबर, 2023 से ही इजरायल इस्लामी आतंकी समूह हमास से जंग में लगा हुआ है। हमास को हिजबुल्लाह और ईरान जैसे देश खाद-पानी दे रहे हैं। इजरायल ने हाल ही में हिजबुल्लाह के लोगों के पास रखे जाने वाले पेजरों में भी धमाका किया था।

हर महीने पैसा, इश्योरेंस और बोनस भी: युवाओं के लिए केंद्र ने शुरू किया PM Internship Scheme, जानिए कौन कर सकते हैं अप्लाई

देश के युवाओं के भविष्य को सँवारने के लिए केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने नई स्कीम लॉन्च कर दी है। इस योजना का नाम पीएम इंटर्नशिप योजना है। इसके लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया जल्द ही शुरू होने वाली है। इंटर्नशिप करने वाले युवाओं को प्रतिमाह 5000 रुपए और साल में एक बार एकमुश्त 6000 रुपए मिलेंगे। यह योजना करियर शुरू करने वाले युवाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

बता दें कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 23 जुलाई 2024 को अपने बजट भाषण में इस योजना की घोषणा की थी। सरकार ने 3 अक्टूबर को 800 करोड़ रुपए के बजट के साथ पायलट आधार पर इस योजना की शुरुआत की। इसके लिए मंत्रालय ने एक पोर्टल भी लॉन्च किया है। इस योजना के जरिए अगले 5 साल में एक करोड़ युवाओं को कौशल प्रशिक्षण देने का लक्ष्य रखा गया है।

इसके लिए सरकार ने देश की प्रमुख 500 कंपनियों में ट्रेनिंग का लक्ष्य निर्धारित किया है। कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय (MCA) के सूत्रों के मुताबिक, महिंद्रा एंड महिंद्रा समूह, मैक्स लाइफ इंश्योरेंस और एलेम्बिक फार्मा सहित 111 कॉरपोरेट्स ने पोर्टल के लॉन्च होने के कुछ ही घंटों के भीतर साइन अप कर लिया है। इन कंपनियों के द्वारा 1077 विद्यार्थियों को इंटर्नशिप की पेशकश की गई है।

योजना के तहत वित्त वर्ष 2024-25 में 21 से 24 साल की उम्र के 1,25,000 युवाओं को इंटर्नशिप देने का लक्ष्य रखा गया है। पीएम इंटर्नशिप योजना के लिए कई क्षेत्रीय भाषाओं में विज्ञापन जारी कर दिए गए हैं। कहा जा रहा है कि जहाँ तक संभव हो सकेगा, उम्मीदवार को उसके जिले या फिर उसके सबसे नजदीकी क्षेत्र में इंटर्नशिप दी जाएगी।

कब और कहाँ करें आवेदन

आवेदन की प्रक्रिया pminternship.mca.gov.in पर शुरू होगी। उम्मीदवार 12 अक्टूबर से 25 अक्टूबर तक पोर्टल के माध्यम से इंटर्नशिप के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसके बाद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल करके जरूरी अभ्यर्थियों को शॉर्टलिस्ट किया जाएगा। इसके बाद उनके नाम को पोर्टल पर रजिस्टर्ड कंपनियों के साथ शेयर किया जाएगा।

इसके बाद कंपनियाँ 27 अक्टूबर से 7 नवंबर 2024 के बीच अभ्यर्थियों का अपना चयन करेंगी। उम्मीदवारों के पास कंपनियों द्वारा ऑफर किए गए इंटर्नशिप को स्वीकार या अस्वीकार करने का विकल्प होगा। वे 8 से 15 नवंबर तक इस प्रस्ताव को स्वीकार या अस्वीकार कर सकेंगे। अगर कोई उम्मीदवार प्रस्ताव अस्वीकार करता है तो उसे दो और प्रस्ताव मिल सकते हैं। इसके बाद इंटर्नशिप 2 दिसंबर से शुरू होगी।

इंटर्नशिप के लिए योग्यता

इंटर्नशिप के लिए 21 से 24 साल के ऐसे युवा आवेदन कर सकेंगे, जिनकी पारिवारिक आय 8 लाख रुपए से कम है। उम्मीदवार के माता-पिता या वह खुद सरकारी कर्मचारी नहीं होना चाहिए। निजी क्षेत्र में काम करने वालों के बच्चे इसके पात्र हैं। आवेदन के लिए कुछ अन्य मानदंडों में आवेदक को भारतीय नागरिक होने चाहिए, बेरोजगार होने चाहिए और पूर्णकालिक शिक्षा में नहीं होने चाहिए।

हालाँकि, ऑनलाइन या दूरस्थ शिक्षा कार्यक्रम में शामिल छात्र-छात्राएँ इसके लिए आवेदन कर सकते हैं। उम्मीदवारों को हाईस्कूल, हायर सेकेंडरी स्कूल, पॉलिटेक्निक डिप्लोमा या स्नातक की डिग्री होनी चाहिए। मंत्रालय के शीर्ष सूत्रों के अनुसार, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और विकलांग लोगों के लिए केंद्र की आरक्षण नीति इस योजना पर भी लागू होगी। 

कौन इस योजना के पात्र नहीं होंगे

  • ऐसे उम्मीदवार जिन्होंने IIT, IIM, नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (NLU), IISER, NID, IIIT आदि से डिग्री ली है, वे इसमें आवेदन नहीं कर सकेंगे। जिनके पास CA, CMA, CS, MBBS, BDS, MBA या अन्य कोई मास्टर्स डिग्री या इससे ऊपर की डिग्री होगी, वे भी इस योजना के लिए आवेदन नहीं कर सकेंगे। सरकारी कर्मचारियों के बच्चे या पति/पत्नी इस योजना के पात्र नहीं होंगे।

जो उम्मीदवार केंद्र या राज्य सरकारों या अन्य सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों से संबंधित किसी भी योजना में कोई भी स्किल, अप्रेंटिसशिप, इंटर्नशिप या स्टूडेंट ट्रेनिंग प्रोग्राम का हिस्सा रह चुके हैं, वे भी इस योजना के पात्र नहीं होंगे। जिन लोगों ने नेशनल अप्रेंटिसशिप ट्रेनिंग प्रोग्राम या नेशनल अप्रेंटिसशिप प्रमोशन स्कीम के तहत अप्रेंटिसशिप की है या ट्रेनिंग ले रहे हों, वे भी आवेदन नहीं कर सकेंगे।

कैसे करें आवेदन

योग्यताओं को पूरा करने वाले उम्मीदवार आवेदन करने के लिए सबसे पहले pminternship.mca.gov.in पोर्टल पर जाएँ। इस पोर्टल पर मिनिस्ट्री ऑफ कॉरपोरेट अफेयर्स का एक सेक्शन होगा। उन्हें इस सेक्शन को क्लिक करना होगा। इसके बाद इसमें उम्मीदवार को ‘PM Internship‘ का विकल्प चुनना होगा।

विकल्प चुनने के बाद उसमें उन्हें अपना नाम, पिता का नाम, जन्मतिथि, पता, शिक्षा आदि जरूरी विवरण को भरना होगा। सारे विवरण को भरने के बाद उसे सब्मिट पर दबाना होगा। इससे उनका रजिस्ट्रेशन हो जाएगा। रजिस्ट्रेेशन कराने के बाद एक कन्फर्मेशन ईमेल या मैसेज आएगा। इसके बाद सेलेक्शन का स्टेटस चल जाएगा।

हर महीने मिलेंगे 5000 रुपए और बीमा

इंटर्नशिप के लिए चयनित युवाओं को देश की शीर्ष 500 कंपनियों अपने यहाँ मौका देगी। इस योजना के तहत इंटर्नशिप के लिए चयनित युवाओं को 5,000 रुपए तक का मासिक सहायता राशि दी जाएगी। इसके अलावा, इंटर्नशिप करने वालों को साल में एक बार 6000 रुपए की एकमुश्त वित्तीय सहायता सरकार द्वारा दी जाएगी।

इंटर्शनशिप करने वाले युवा को 5000 रुपए के मासिक भत्ते में 10 प्रतिशत यानी 500 रुपए कंपनियाँ अपने CSR फंड से देंगी। वहीं, बाकी के 4500 रुपए सरकार की तरफ से दी जाएगी। इंटर्नशिप की अवधि 12 महीने यानी एक साल की होगी।

इतना ही नहीं, इंटर्नशिप के लिए चयनित युवाओं को ‘प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना‘ और ‘प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना’ के तहत बीमा कवर भी दिया जाएगा। इसके लिए प्रीमियम का भुगतान सरकार करेगी। इसके अलावा, कंपनियाँ चयनित उम्मीदवार को अतिरिक्त दुर्घटना बीमा उपलब्ध करा सकती हैं।

बांग्लादेश में दुर्गा पूजा से पहले 16 हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियाँ तोड़ीं, 3 मंदिरों में हमला-तोड़फोड़: हिंदुओं पर हमले अब भी जारी

बांग्लादेश में 5 अगस्त 2024 को शेख हसीना सरकार का पतन हुआ और प्रधानमंत्री शेख हसीना को इस्तीफा देकर भारत में शरण लेनी पड़ी। इस घटनाक्रम से बाद से बांग्लादेश में हिंदुओं के दमन और अत्याचार की घटनाएँ सामने आ रही हैं, लेकिन मोहम्मद यूनुस की अगुवाई में बांग्लादेश को चला रही कट्टरपंथियों की कार्यवाहक सरकार आँखें मूंदे बैठी है और हिंदुओं के उत्पीड़न के मामलों को दबाने में लगी हुई है।

बांग्लादेश में हिंदुओं से घृणा की ताजी घटनाओं में, 28 सितंबर और 1 अक्टूबर को बांग्लादेश के राजशाही डिवीजन के पबना जिले के सुजानगर उपजिला में स्थित ऋषिपारा बरवारी पूजा मंडप और मानिकदी पालपारा बरवारी पूजा मंडप में दुर्गा और अन्य हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियों को क्षतिग्रस्त कर दिया गया। ऋषिपारा मंडप में 4 मूर्तियाँ और मानिकदी मंडप में 5 मूर्तियाँ तोड़ी गईं।

पबना में मानिरगी पालपारा बारवारी पूजामंडप में विखंडित मूर्तियाँ

इन हमलों की वजह से स्थानीय हिंदुओं में भय का माहौल है। उन्होंने बांग्लादेशी सुरक्षा एजेंसियों और स्थानीय प्रशासन से तुरंत हस्तक्षेप की माँग की है। हैरानी की बात है कि घटनाओं के घटने के समय लाख बुलावे के बावजूद कोई सुरक्षाबल नहीं पहुँचा, बल्कि बाद में पुलिस ही नहीं रैपिड एक्शन बटालियन (RAB) और सेना के अधिकारियों ने भी घटनास्थलों का दौरा किया और इतिश्री कर ली।

बता दें कि इस साल दुर्गापूजा का त्योहार 9 अक्टूबर से शुरू होने वाला है, जिसमें अकेले सुजानगर उपजिला में ही 51 मंदिरों में मनाया जाना है, लेकिन हिंदुओं पर हमलों की घटनाओं से उनमें डर का माहौल है।

मानिकदी पालपारा पूजा मंडप के अध्यक्ष बिजन पाल ने बताया कि 1 अक्टूबर की रात जब वह मंदिर से गए थे, तब मूर्तियाँ सही सलामत थीं, लेकिन अगले दिन जब लौटे तो उन्होंने पाया कि मूर्तियों के सिर काट दिए गए थे।

पबना में मूर्तियों की तोड़फोड़ के मामलों को दबाने की कोशिश

बिजन पाल ने यह भी बताया कि क्षतिग्रस्त मूर्तियों की मरम्मत की कोशिश की जा रही है। सुजानगर उपजिला के कार्यकारी अधिकारी (UNO) मोहम्मद रशेदुज्जमान ने इस घटना को ‘अलग-थलग घटना’ बताने की कोशिश की। उन्होंने कहा, “यह एक अलग घटना है। हम दोषियों की तलाश कर रहे हैं ताकि उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सके। साथ ही हर मंदिर की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्थानीय लोगों की एक समिति भी बनाई गई है।”

सुजानगर उपजिला पूजा उत्सव परिषद के अध्यक्ष सुभोध कुमार नोटो ने हिंदू मंदिरों पर हुए इन लगातार दो हमलों पर चिंता जताई है।

किशोरगंज में भी तोड़ी गईं मूर्तियाँ

इस बीत, गुरुवार (3 अक्टूबर 2024) को ढाका डिवीजन के किशोरगंज में गोपीनाथ जीउर अखाड़ा दुर्गा पूजा मंडप में 7 हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियाँ तोड़ डाली गईं। यह घटना तब हुई जब मंदिर की सुरक्षा में तैनात गार्ड सो रहे थे।

इस्लामी कट्टरपंथियों ने दीवार फाँदकर मूर्तियों के सिर तोड़ दिए। इस घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने स्थल का दौरा किया और नुकसान का जायजा लिया। इस तोड़फोड़ के विरोध में हिंदू समुदाय के लोगों ने उसी दिन एक विरोध मार्च निकाला, जो कई सड़कों से होते हुए जिला आयुक्त कार्यालय के सामने आकर खत्म हुआ।

जिला आयुक्त फौजिया खान और पुलिस अधीक्षक मोहम्मद हसन चौधरी ने हिंदुओं को आश्वासन दिया कि दोषियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाएगा। गोपीनाथ जीउर अखाड़ा दुर्गा पूजा उत्सव समिति के अध्यक्ष लिटन सरकार ने इस घटना पर गहरी नाराजगी जताई और कहा, “यहाँ पहले भी दुर्गा पूजा का आयोजन होता रहा है, लेकिन पहले कभी इस तरह की तोड़फोड़ नहीं हुई। जो लोग इस घटना के पीछे हैं, उनका मकसद सांप्रदायिक सौहार्द को बिगाड़ना है। उन्हें तुरंत गिरफ्तार किया जाना चाहिए।”

जिला पूजा उत्सव समिति के अध्यक्ष नारायण दत्ता प्रदीप ने भी कहा, “इस तोड़फोड़ से हिंदू समुदाय बहुत दुखी है। अब हर कोई डर के माहौल में है। अगर इस तरह की घटनाएँ जारी रहती हैं, तो हम अपने धार्मिक त्योहार कैसे मना पाएँगे?”

पुलिस अधीक्षक ने जनता को भरोसा दिलाते हुए कहा है कि सुरक्षा एजेंसियाँ अपराधियों को पकड़ने के लिए पूरी सक्रियता से काम कर रही हैं। उन्होंने कहा, “हम इस मामले में सख्त कदम उठा रहे हैं। दोषियों को जल्द ही गिरफ्तार किया जाएगा और हम उम्मीद करते हैं कि दुर्गा पूजा सुरक्षित और धूमधाम से मनाई जा सकेगी।”

गोपीनाथ जिउर अखाड़ा दुर्गा पूजा मंडप में हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियों को तोड़ दिया गया

जिला आयुक्त फौजिया खान की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट कार्यालय में एक इमरजेंसी मीटिंग बुलाई गई, जिसमें पुलिस, सेना और RAB के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। इस बैठक में हिंदू नेताओं ने दोषियों की गिरफ्तारी की माँग दोहराई।

बता दें कि साल 2024 में किशोरगंज के 13 उपजिलों में कुल 363 दुर्गा पूजा मंडप बनाए जाने की योजना है। हाल की घटनाओं को देखते हुए जिला प्रशासन ने सभी पूजा मंडपों की सुरक्षा को और बढ़ा दिया है ताकि उत्सव शांतिपूर्ण और सुरक्षित रूप से मनाया जा सके।

बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमलों के मामले बढ़े

बांग्लादेश में हिंदुओं से घृणा के मामले हमले से सामने आते रहे हैं। लेकिन पिछले कुछ समय में हिंदू मंदिरों, दुकानों और व्यवसायों पर कम से कम 205 हमले हो चुके हैं, विशेषकर शेख हसीना के प्रधानमंत्री पद से हटने के बाद।

चटगाँव में एक हिंदू युवक को ईशनिंदा के आरोप में उसकी मॉब लिंचिंग के लिए इस्लामी कट्टरपंथियों की भीड़ ने पूरे थाने को ही घेरा लिया और आर्मी की गाड़ियों तक में आग लगा दी थी।

ओपइंडिया ने पहले बताया था कि कैसे खुलना के सोनाडांगा इलाके में एक मुस्लिम भीड़ ने हिंदू लड़के उत्सव मंडल को ‘ईशनिंदा’ के आरोप में लगभग मार डाला था।

यह भी खुलासा हुआ था कि मुस्लिम छात्रों ने 60 से अधिक हिंदू शिक्षकों, प्रोफेसरों और सरकारी अधिकारियों को अपने पदों से इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया है।

हाल ही में, मानवाधिकार कार्यकर्ता और निर्वासित बांग्लादेशी ब्लॉगर असद नूर ने बताया कि अल्पसंख्यक समुदाय को ‘जमात-ए-इस्लामी’ में शामिल होने के लिए मजबूर किया जा रहा है।

6 सितंबर को चटगांव के कादम मुबारक इलाके में गणेश उत्सव के दौरान हिंदू भक्तों की एक शोभायात्रा पर भी हमला हुआ था।

मुल्ला-मुल्ला, भाई-भाई… बांग्लादेश में पाकिस्तानी सामान जाएँगे बेरोकटोक, हटाया जाँच का नियम: भारत से वापस बुलाया था राजदूत

लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गईं प्रधानमंत्री शेख हसीना के तख्तापलट के बाद सत्ता में आई बांग्लादेश की मोहम्मद युनुस की सरकार पाकिस्तान के साथ गलबहियाँ कर रही है। बांग्लादेश ने अब पाकिस्तान से आयात होकर आने वाले सामानों की जाँच का नियम खत्म कर दिया है।

अब बांग्लादेश में जाने वाले सभी सामानों को सामने से नहीं जाँचा जाएगा। पाकिस्तान से आने वाले सामानों की जाँच का निर्णय शेख हसीना की सरकार ने लिया था ताकि अवैध ड्रग्स या हथियार चुपके से बांग्लादेश ना पहुँच पाएँ।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बांग्लादेश के नेशनल बोर्ड ऑफ़ रेवेन्यू (NBR) ने 29 सितम्बर, 2024 को यह निर्णय लिया है। अब पाकिस्तान से आयात होकर बांग्लादेश जाने वाले हर सामान की अलग-अलग जाँच नहीं होगी।

बांग्लादेश पहुँचने वाले सामानों पाकिस्तानी सामानों की जाँच अब खतरे के अनुमान के आधार पर की जाएगी। NBR का कहना है कि पाकिस्तान से आने वाले सभी सामानों की विशेष जाँच के चलते उसे अतिरिक्त स्टाफ इस काम के लिए लगाना पड़ता था।

बांग्लादेश का यह फैसला अंतरिम सरकार के मुखिया मोहम्मद युनुस और पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की अमेरिका में हुई मुलाक़ात के बाद सामने आया है। पाकिस्तानी सामानों की जाँच का यह नियम शेख हसीना सरकार लाई थी।

जहाँ बांग्लादेश ने इस फैसले के पीछे दोनों देशों के व्यापार में आसानी बढ़ाने को कारण बताया है, वहीं अब यह खतरा बढ़ गया है कि कहीं अवैध सामान बांग्लादेश पहुँचने लगें। कई मौकों पर सामने आया है कि वैध सामानों के बीच हथियार और ड्रग्स छुपा कर तस्करी की जाती है।

बांग्लादेश की नई सरकार का पाकिस्तान के साथ गलबहियाँ करने का यह कोई पहला मामला नहीं है। वह पाकिस्तान से जहाँ नजदीकियाँ बढ़ा रही है, वहीं उसके कुछ कदम भारत विरोधी भी दिखे हैं। हाल ही में बांग्लादेश ने भारत से अपना राजदूत भी वापस बुला लिया था।

इससे पहले बांग्लादेश भारत को दुर्गा पूजा के दौरान इस्तेमाल में लाई जाने वाली हिल्सा मछली निर्यात करने से मना दिया था। इसके अलावा बांग्लादेश ने हाल ही में शेख हसीना सरकार के दौरान भारत के साथ किए गए बिजली समझौतों पर भी जाँच चालू की थी। बांग्लादेश का भारत के प्रति यह रवैया युनुस सरकार के बाद ही बदला है।

इससे पहले पाकिस्तान की अंतरिम सरकार में शामिल सलाहकार नाहिद इस्लाम ने कहा था कि वह पाकिस्तान के साथ 1971 के बाद के रिश्तों को लेकर समझौता चाहते हैं। गौरतलब है कि बांग्लादेश पहले पाकिस्तान का ही हिस्सा था और 1970 के दशक में पाकिस्तान ने यहाँ रहने वाली बंगाली जनता पर अत्याचार किया था। इसके बाद भारत ने बांग्लादेश को पाकिस्तान से मुक्त करवा कर नया देश बनाने में सहयोग दिया था।

पति-पत्नी के बीच सेक्स और इच्छा: मैरिटल रेप को अपराध बनाना कठोर कदम, ‘शादी एक संस्था’ पर आधारित केंद्र का सुप्रीम कोर्ट को जवाब

केंद्र सरकार ने गुरुवार (3 अक्टूबर 2024) को सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर ‘वैवाहिक बलात्कार’ को अपराध बनाने को अत्यधिक कठोर और असंगत बताया है। केंद्र सरकार ने उन याचिकाओं का विरोध किया, जिनमें वैवाहिक बलात्कार को अपराध घोषित करने की माँग की गई है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मौजूदा भारतीय बलात्कार कानून का समर्थन किया, जिसमें पति-पत्नी के यौन संबंधों के लिए अपवाद है।

अपने हलफनामे में केंद्र सरकार ने कहा कि वैवाहिक बलात्कार कानूनी से अधिक सामाजिक मुद्दा है, जिसका सीधा असर आम समाज पर पड़ता है। केंद्र ने तर्क दिया कि अगर ‘वैवाहिक बलात्कार’ को अपराध माना भी जाता है तो ऐसा करना सुप्रीम कोर्ट के बस की बात नहीं है। इस मुद्दे पर सभी हितधारकों से उचित परामर्श किए बिना या सभी राज्यों के विचारों को ध्यान में रखे बिना निर्णय नहीं लिया जा सकता।

केंद्र ने कहा कि भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 375 के अपवाद 2 और धारा 376B तथा सीआरपीसी की धारा 198B की संवैधानिक वैधता तय करने के लिए सभी राज्यों के साथ उचित परामर्श की आवश्यकता है। केंद्र सरकार राष्ट्रीय महिला आयोग की 2022 की रिपोर्ट पर निर्भर है, जिसमें कई सुझाव दिए गए हैं।

राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) की उस रिपोर्ट में कहा गया है कि एमआरई को बरकरार रखा जाना चाहिए क्योंकि (i) एक विवाहित महिला को अविवाहित महिला के समान नहीं माना जा सकता है (ii) वैकल्पिक उपचार मौजूद हैं (iii) दंडात्मक उपायों से पत्नी और आश्रित बच्चों के लिए बेसहारापन और आवारागर्दी हो सकती है।

केंद्र ने कहा कि विवाह से महिला की सहमति समाप्त नहीं होती है और इसके उल्लंघन के लिए दंडात्मक परिणाम होने चाहिए। हालाँकि, विवाह के भीतर इस तरह के उल्लंघन के परिणाम विवाह के बाहर के उल्लंघनों से भिन्न होते हैं। इसमें कहा गया है कि सहमति के उल्लंघन के लिए अलग-अलग तरीके से सजा दी जानी चाहिए। यह इस बात पर निर्भर करता है कि ऐसा कृत्य विवाह के भीतर हुआ है या बाहर।

केंद्र सरकार ने कहा कि विवाह में अपने जीवनसाथी से उचित यौन संबंध बनाने की निरंतर अपेक्षा की जाती है। ऐसी अपेक्षाएँ पति को अपनी पत्नी की इच्छा के विरुद्ध उससे यौन संबंध बनाने के लिए मजबूर करने का अधिकार नहीं देती हैं। हालाँकि, केंद्र ने कहा कि इस तरह के कृत्य के लिए बलात्कार विरोधी कानूनों के तहत किसी व्यक्ति को दंडित करना अत्यधिक और असंगत हो सकता है।

केंद्र सरकार ने आगे कहा कि संसद ने विवाह के भीतर विवाहित महिला की सहमति की रक्षा के लिए पहले से ही विभिन्न उपाय प्रदान किए हैं। इनमें विवाहित महिलाओं के प्रति क्रूरता के लिए दंडित करने वाले कानून (IPC के तहत धारा 498A), महिलाओं की शील के विरुद्ध कृत्यों के लिए दंडित करने वाले कानून तथा घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम 2005 के तहत उपाय शामिल हैं।

हलफनामे में कहा गया है, “यौन पहलू पति-पत्नी के संबंधों के कई पहलुओं में से एक है, जिस पर उनके विवाह की आधारशिला टिकी होती है। हमारे सामाजिक-कानूनी परिवेश में वैवाहिक संस्था की प्रकृति को देखते हुए, यदि विधायिका का यह विचार है कि वैवाहिक संस्था के संरक्षण के लिए आपत्तिजनक अपवाद को बरकरार रखा जाना चाहिए तो यह न्यायालय द्वारा अपवाद को रद्द करना उचित नहीं होगा।”

केंद्र ने विवाह संस्था को निजी संस्था मानने के याचिकाकर्ताओं के दृष्टिकोण की आलोचना की और इसे एकतरफा बताया। उसने कहा कि एक पति-पत्नी के मामले को अन्य मामलों की तरह नहीं माना जा सकता। उसने कहा कि अलग-अलग स्थितियों में यौन शोषण के दंडात्मक परिणामों को अलग-अलग तरीके से वर्गीकृत करना विधायिका पर निर्भर है।

केंद्र सरकार ने तर्क दिया कि मौजूदा कानून पति-पत्नी के बीच यौन संबंधों के लिए सहमति की अवहेलना नहीं करता है, बल्कि केवल तभी अलग व्यवहार करता है जब यह विवाह के भीतर हो। केंद्र ने कहा कि यह दृष्टिकोण संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) के अनुरूप भी है, क्योंकि यह दो अतुलनीय स्थितियों (विवाह के भीतर और बाहर यौन संबंध) को समान मानने से इनकार करता है।

केंद्र सरकार ने कहा कि वह महिलाओं की स्वतंत्रता और सम्मान के लिए प्रतिबद्ध है और वैवाहिक बलात्कार को प्रतिबंधित करने की आवश्यकता नहीं है। बता दें कि भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जेबी पारदीवाला और न्यायाधीश मनोज मिश्रा की पीठ इस मामले पर विचार कर रही है।

पहले भी केंद्र कर चुका है विरोध

भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 375 के अपवाद 2 के माध्यम से वैवाहिक बलात्कार को ‘बलात्कार’ के दायरे से बाहर रखा गया है। इसी तरह का प्रावधान हाल ही में अधिनियमित भारतीय न्याय संहिता (BNS) में भी मौजूद है। साल 2022 में दिल्ली हाई कोर्ट ने वैवाहिक बलात्कार को अपराध माना जाना चाहिए या नहीं, इसको लेकर विभाजित फैसला सुनाया था।

इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुँचा। केंद्र ने पिछले साल दिल्ली हाई कोर्ट में मैरिटल रेप पर चल रही सुनवाई के दौरान कहा था कि केवल इसलिए कि अन्य देशों ने मैरिटल रेप को अपराध घोषित कर दिया है, भारत को भी ऐसा करने की जरूरत नहीं है। केंद्र ने तर्क दिया था कि भारत की सामाजिक व्यवस्था अलग है।

इससे पहले साल 2016 में मोदी सरकार ने मैरिटल रेप के विचार को खारिज कर दिया था। सरकार ने कहा था कि देश में अशिक्षा, गरीबी, ढेरों सामाजिक रीति-रिवाजों, मूल्यों, धार्मिक विश्वासों और विवाह को एक संस्कार के रूप में मानने की समाज की मानसिकता जैसे विभिन्न कारणों से इसे भारतीय संदर्भ में लागू नहीं किया जा सकता है।

वहीं, साल 2017 में केंद्र सरकार ने मैरिटल रेप को अपराध न मानने के कानूनी अपवाद को हटाने का विरोध किया था। सरकार ने तर्क दिया था कि मैरिटल रेप को अपराध घोषित करने से विवाह की संस्था अस्थिर हो जाएगी और इसका इस्तेमाल पत्नियों द्वारा अपने पतियों को सजा देने के लिए किया जाएगा।

वैवाहिक बलात्कार या मैरिटल रेप

दरअसल, पत्नी की अनुमति के बिना पति द्वारा जबरन शारीरिक संबंध बनाने को मैरिटल रेप या वैवाहिक बलात्कार कहा जाता है। इसे पत्नी के खिलाफ एक तरह की घरेलू हिंसा और यौन उत्पीड़न माना जाता है। वर्तमान कानून के तहत देश में वैवाहिक बलात्कार को अपराध नहीं माना जाता है। रेप से संबंधित कानूनों में इसके लिए अपवाद जोड़े गए हैं।

भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 63 (बलात्कार) के अपवाद 2 के मुताबिक मैरिटल रेप को अपराध नहीं माना गया है। मैरिटल रेप को लेकर नए कानून बनाने की माँग काफी समय से हो रही थी। भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 375 के अपवाद 2 और धारा 376B तथा सीआरपीसी की धारा 198B में इसके लिए पर्याप्त उपाय हैं। वहीं, भारत सरकार इसे रेप मानने से इनकार करती रही है।

मासूम खान ने बनाया इस्लाम नगर, 100 एकड़ में फैला… कब्जा कर ली थी सरकारी वन भूमि: ओडिशा में पटनायक सरकार में रोड-बिजली-तालाब भी बना दिए

एक समय था, जब वामपंथी-कॉन्ग्रेसी जैसे छद्म सेक्युलर लव जिहाद और लैंड जिहाद को दक्षिणपंथियों का दुष्प्रचार बताकर खारिज करते थे, लेकिन आज यह हकीकत साबित हो गया है। लव जिहाद के स्थापित सत्य के बाद अब लैंड जिहाद भी मिथ नहीं, बल्कि सच्चाई है। झारखंड, उत्तराखंड, बंगाल, हिमाचल जैसे राज्यों के बाद ओडिशा में भी लैंड जिहाद का एक बड़ा मामला सामने आया है।

ओडिशा के मलकानगिरी जिले के मोटू क्षेत्र में वन क्षेत्र के एक बड़े भूभाग पर कब्जा करके ‘इस्लाम नगर’ स्थापित दिया गया है। पिछली बीजद सरकार के कार्यकाल में स्थापित इस्लाम नगर राष्ट्रीय राजमार्ग 326 से मात्र 2-3 किलोमीटर की दूरी पर वन भूमि पर बसाया गया है। यह सबरी नदी के किनारे घने जंगलों से घिरा हुआ है। यहाँ सड़कें, बिजली आदि लगाने के साथ तार की बाड़ भी लगा दी गई है।

वन भूमि पर अतिक्रमण के मामले पर चिंता व्यक्त करते हुए भाजपा के स्थानीय विधायक नरसिंह मदकामी ने बीजू जनता दल (बीजद) के नेताओं पर इसमें शामिल होने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि जिले के जनजातीय बहुल मोटू क्षेत्र में वन अधिनियम का उल्लंघन कर 100 एकड़ से अधिक वन भूमि पर अतिक्रमण में स्थानीय बीजद नेता मासूम खान शामिल है।

उनका कहना है कि मासूम खान नवरंगपुर के पूर्व सांसद एवं बीजद नेता प्रदीप माझी का करीबी सहयोगी है। माझी के साथ उसकी कई तस्वीरें भी ऑनलाइन वायरल हो रही हैं। मासूम खान बीजद के राजनीतिक कार्यक्रमों में सक्रिय रूप से शामिल रहा है। इसकी तस्वीरें सामने आई हैं। हालाँकि, प्रदीप माझी ने अभी तक इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं की है।

मदकामी ने कहा कि मासूम खान सहित बीजद के नेता मोटू क्षेत्र में इस्लाम नगर स्थापित करने के लिए अवैध गतिविधियों में लिप्त हैं। उन्होंने कहा कि यह चौंकाने वाली बात है कि पारंपरिक बारिबाँचा गाँव का नाम बदलकर इस्लाम नगर कर दिया गया है और महात्मा गाँधी नरेगा (MANREGA) फंड का उपयोग करके अतिक्रमित क्षेत्र में कई अवैध इमारतें, गोदाम, सड़कें और तालाब बना दिए गए हैं।

भाजपा विधायक का कहना है कि यहाँ बिजली विभाग ने भी बड़े-बड़े ट्रांसफॉर्मर लगाए हैं। ये सभी अवैध गतिविधियाँ मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के नेतृत्व वाली पिछली बीजद सरकार के कार्यकाल में हुई हैं। भाजपा नेताओं का कहना है कि 100 एकड़ वन भूमि पर कब्जा करना, पेड़ों को साफ करना और ऊँची इमारतों का निर्माण राजनीतिक समर्थन के बिना नहीं हो सकता।

इन खुलासों के बाद वन विभाग के मलकानगिरी डिवीजन ने जाँच शुरू कर दी है। लकानगिरी जिले की सहायक वन संरक्षक प्रियंका महुका ने बताया कि शिकायत मिलने पर स्थानीय रेंजर को सूचित कर जाँच कर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है। स्थानीय रेंजर की जाँच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

उधर, ओडिशा भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता अनिल बिस्वाल ने कहा कि मुद्दा लैंड जिहाद के इर्द-गिर्द घूमता है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड और असम में भाजपा सरकारों ने लैंड जिहाद के खिलाफ स्पष्ट रूप से कड़ा रुख अपनाया है और सख्त कदम उठा रही हैं। बिस्वाल ने कहा कि ओडिशा सरकार भी उत्तराखंड और असम की भाजपा सरकारों जैसी ही नीति अपनाएगी।

पैगम्बर मोहम्मद के वंशज को भी मार गिराया इजरायल ने: हफ्ते भर पहले ही बना था हिजबुल्लाह का सरगना, इस्लामी बता रहे थे इसे ‘खूंखार योद्धा’

इजरायल ने इस्लामी आतंकी संगठन हिजबुल्लाह के नए सरगना हाशिम सैफिद्दीन को भी मार गिराया है। उसे लेबनान के भीतर एक हवाई हमले में मार दिया गया। हिजबुल्लाह ने इस संबंध में अभी आधिकरिक जानकारी नहीं दी है। नए हिजबुल्लाह सरगना की मौत उसके पिछले मुखिया हसन नसरुल्लाह के मारे जाने के एक सप्ताह के भीतर हो गई है।

इजरायली मीडिया ने जानकारी दी है कि शुक्रवार रात (4 अक्टूबर, 2024) को इजरायल की वायु सेना के तीन विमानों ने बेरूत के भीतर एक जगह पर भारी हवाई बमबारी की। इस बमबारी में हिजबुल्लाह का नया सरगना हाशिम सैफिद्दीन मारा गया। हमले के दौरान वह के बंकर में मौजूद था और अपने कमांडरों के साथ बैठक कर रहा था।

हिजबुल्लाह के नए सरगना के मारे जाने को लेकर इजरायली सुरक्षा बलों (IDF) और हिजबुल्लाह ने अभी कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी है। इजरायल के इस हवाई हमले के कई वीडियो भी सोशल मीडिया पर आए हैं। इनमें एक रिहायशी इलाके में आग की लपटें उठती दिखाई देती हैं।

कौन था हाशिम सैफिद्दीन?

हिजबुल्लाह के मुखिया हसन नसरल्लाह को शुक्रवार (27 सितम्बर, 2024) को इजरायल ने एक हवाई हमले में मार गिराया था। इसी के साथ हिजबुल्लाह के कई और कमांडर भी मारे गए थे। इसके बाद प्रश्न उठा था कि इस आतंकी संगठन का सरगना अब कौन बनेगा। इस बीच हाशिम सैफिद्दीन का नाम उठा था।

सैफिद्दीन को हिजबुल्लाह का नया मुखिया माना जा रहा था। सैफिद्दीन भी नसरल्लाह की तरह एक शिया इमाम है। वह हिजबुल्लाह के सबसे वरिष्ठ लोगों में से एक है। लेबनान में जन्मा सैफिद्दीन हिजबुल्लाह की शूरा कमिटी का सदस्य था।

यह कमिटी हिजबुल्लाह को नियंत्रित करती है। इसके अलावा यह एग्जीक्यूटिव कमिटी और जिहाद काउंसिल का मुखिया था जो कि हिजबुल्लाह के आतंक समेत बाकी मामलों को देखती है। सैफिद्दीन 60 वर्ष का था और वह हिज्बुलाह के मृत सरगना नसरल्लाह का ममेरा भाई था।

उसके बेटे की शादी ईरान की क़ुद्स फ़ोर्स के कमांडर कासिम सुलेमानी के बेटी के साथ हुई थी। सैफिद्दीन काली पगड़ी पहनता था, यह शियाओं के बड़े इमाम पहना करते हैं। वह खुद को इस्लाम के पैगम्बर मोहम्मद के वंशज के तौर पर दर्शाता था। उसे इस्लामी सोशल मीडिया मीडिया हैंडल्स ने ‘खूंखार योद्धा’ बताया था।

सैफिद्दीन को अमेरिका ने 2017 में आतंकी घोषित कर दिया था। माना जाता है कि उसे लम्बे समय से हिजबुल्लाह का अगला मुखिया बनने के लिए तैयार किया जा रहा था। ईरान भी उसे नया मुखिया बनाने जाने के पक्ष में था। सालों से उसे इस बात की ट्रेनिंग दी जा रही थी। हालाँकि, अब उसके मारे जाने की बात सामने आई है।

हिजबुल्लाह पर इजरायल का कहर जारी

इजरायल लगातार आतंक के खात्मे के लिए लेबनान में हिजबुल्लाह और गाजा के भीतर हमास पर हमले कर रहा है। उसने लेबनान में सैफिद्दीन के अलावा एक अन्य हमले में राकेट और मिसाइल के विशेषज्ञ मुहम्मद युसूफ अनीसी को मार गिराया है। मैकेनिकल इंजीनियर की शिक्षा लेने वाला अनीसी इजरायल पर हमले के लिए रॉकेट बनाता था।

इजरायल ने इसी के साथ वेस्ट बैंक में भी बमबारी की और यहाँ के हमास कमांडर यासिर अब्दुलरज्जाक को मार गिराया। इस आतंकी ने इजरायल में बीते माह एक हमले को अंजाम दिया था। इससे पहले इजरायल ने लगभग 2 दशक पहले 2 इजरायली सैनिकों को मारने वाले एक हमास आतंकी को भी मार गिराया।

गिर सोमनाथ में बुलडोजर कार्रवाई रोकने से हाई कोर्ट का इनकार, प्रशासन ने अवैध मस्जिदों, दरगाह और कब्रों को कर दिया था समतल: औलिया-ए-दीन कमेटी ने दी थी चुनौती

गुजरात हाई कोर्ट ने गुरुवार (3 अक्टूबर 2024) को मुस्लिमों की मस्जिद, दरगाह और कब्रों के हटाने के संबंध में यथास्थिति बरकरार रखने का आदेश देने से इनकार कर दिया। दरअसल, इन कार्रवाई करने के लिए 28 सितंबर को गिर सोमनाथ में अधिकारियों द्वारा आदेश दिया गया था। प्रशासन ने अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई में अवैध रूप से बने मजहबी निर्माणों को भी ध्वस्त कर दिया था। 

औलिया-ए-दीन कमेटी नाम के वक्फ द्वारा दायर याचिका पर राज्य सरकार को नोटिस जारी करते हुए न्यायमूर्ति संगीता के. विशेन की एकल पीठ ने अपने मौखिक आदेश में कहा, “जहाँ तक ​​यथास्थिति का सवाल है, इसमें कोई विवाद नहीं है कि 1983 में राज्य सरकार द्वारा इस अदालत के समक्ष बॉम्बे लैंड रेवेन्यू कोड की धारा 37 के तहत जाँच कराने के बारे में एक बयान दिया गया था।”

न्यायमूर्ति संगीता विशेन ने आगे कहा, “डिप्टी कलेक्टर ने अपनी जाँच के बाद एक आदेश पारित किया, जिसके तहत भूमि को राज्य सरकार की भूमि घोषित किया गया था। इसके खिलाफ कलेक्टर के समक्ष अपील दायर की गई थी और यह याचिकाकर्ता के लिए किसी भी रोक या सुरक्षा के बिना लंबित है।” कोर्ट ने राज्य की इस दलील पर भी गौर किया कि ये कदम अतिक्रमण हटाने के लिए उठाए गए हैं।

अदालत ने आगे कहा कि साल 2015 में याचिकाकर्ता द्वारा एक सिविल मुकदमा दायर किया गया था और वरिष्ठ सिविल जज ने शुरू में रोक लगा दी थी। इसके बाद 2020 में याचिकाकर्ता द्वारा वादपत्र वापस करने के लिए एक आवेदन दायर किया गया, जिसे 18 जनवरी 2020 को अनुमति दे दी गई। वादपत्र वापस कर दिया गया और मामला अब वक्फ ट्रिब्यूनल के समक्ष लंबित है।

न्यायमूर्ति विशेन ने आगे कहा कि वक्फ ट्रिब्यूनल में भी रोक नहीं लगाई गई। हाई कोर्ट ने भी इस साल अलग-अलग अवमानना ​​कार्यवाही में इस पारित आदेश पर ध्यान दिया है। इसलिए यह स्पष्ट रूप से दर्ज किया गया है कि कोई रोक नहीं दी गई थी। 18 जनवरी 2020 के आदेश के खिलाफ इस अदालत के समक्ष एक रिट याचिका दायर की गई है और वह लंबित है।

कोर्ट ने कहा कि इस अदालत की प्रथम दृष्टया राय में याचिकाकर्ता किसी भी यथास्थिति का हकदार नहीं है और इसलिए इसे खारिज कर दिया गया है। कोर्ट ने कहा, “इस अदालत की प्रथम दृष्टया राय में याचिकाकर्ता संपत्ति का प्रबंधक होने का दावा करता है, लेकिन याचिका के रिकॉर्ड पर रखा गया पीटीआर किसी भी संपत्ति का संकेत नहीं देता है। याचिकाकर्ता के वकील ने इसे स्वीकार किया है।”

लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 24 अक्टूबर की तारीख तय की है। इसके साथ ही अदालत ने प्रतिवादी राज्य के अधिकारियों से हटाए गए अतिक्रमण का विवरण प्रदान करने के लिए कहा है। इसमें इमारत की प्रकृति, जिस वर्ष यह बना, भौगोलिक संकेत (यानी स्थान) और वर्ष संरचनाओं का अंकन आदि सहित संपत्तियों का ब्योरा भी शामिल है।

दरअसल, अवैध अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई में 36 बुलडोजर, 70 ट्रैक्टर-ट्रॉली और 1500 से अधिक पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी। मलबा हटाने के लिए 50 ट्रैक्टर और 10 बड़े डंपरों को लगाया गया। गिर सोमनाथ में विशेष रूप से समुद्री इलाकों और पूजा स्थलों के आसपास के अवैध निर्माणों को हटाने के उद्देश्य से यह मेगा अभियान चलाया गया।

इस मेगा ड्राइव के दौरान प्रशासन ने ईदगाह और मस्जिद सहित कई अवैध मजहबी स्थलों को हटाया, जिससे कुछ स्थानीय मुस्लिम समुदाय के लोग विरोध में एकत्रित हो गए। विरोध के बावजूद, प्रशासन ने सख्ती से स्थिति को नियंत्रण में लिया और कार्रवाई को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। यह विध्वंस अभियान पिछले एक महीने से तैयार किया जा रहा था।

प्रशासन ने करीब एक महीने तक सर्वेक्षण किया और सभी अवैध निर्माणों की पहचान की। हाजी मंगरोलीशा पीर दरगाह, हजरत माईपुरी, सीपे सालार और मस्तानशा बापू जैसी प्रमुख दरगाहों को भी इस कार्रवाई के दौरान हटाया गया। प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया कि इस प्रक्रिया के दौरान शांति व्यवस्था बनी रहे और विध्वंस कार्य सफलतापूर्वक पूरा हो सके।

वक्फ के मुतवल्ली (प्रबंधक/ट्रस्टी) ने एक याचिका दायर करके प्रशासन की कार्रवाई को अवैध और असंवैधानिक बताया। साथ ही कहा कि प्रशासन ने सदियों पुराने मस्जिदों, ईदगाहों, दरगाहों और कब्रों को गिरा दिया। याचिका में यह भी कहा गया कि तोड़फोड़ से पहले कोई नोटिस नहीं दी गई थी। याचिका में यह भी कहा गया कि मामला वक्फ ट्रिब्यूनल में होने के बावजूद कार्रवाई की गई।