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‘कैसा लगा मेरा मजाक’: हरियाणा में कॉन्ग्रेस की ही नहीं, Exit Polls की भी लग गई लंका… जम्मू-कश्मीर में भी चुनावी वैज्ञानिक फेल, सोशल मीडिया में मीमबाजों की चाँदी

हरियाणा विधानसभा चुनाव 2024 और एग्जिट पोल्स को लेकर अब सोशल मीडिया पर जमकर चर्चा हो रही है। एग्जिट पोल्स की भविष्यवाणी और वास्तविक परिणामों में बड़े अंतर ने जनता को चौंका दिया है। एग्जिट पोल्स में जहाँ कॉन्ग्रेस को स्पष्ट बहुमत मिलता दिखाया गया था, वहीं चुनाव के वास्तविक नतीजों ने पोल्स को गलत साबित कर दिया। यही नहीं, एग्जिट पोल्स में बीजेपी को भी कमजोर दिखाया गया था, लेकिन नतीजे इससे एकदम विपरीत निकले।

इसी तरह जम्मू-कश्मीर के चुनावों में त्रिशंकु विधानसभा की भविष्यवाणी की गई थी, लेकिन यहाँ भी एग्जिट पोल्स गलत ही साबित हुए। आइए जानते हैं कि आखिर कैसे एग्जिट पोल्स ने गलत अनुमान लगाया और इसका राजनीतिक परिणाम क्या रहा।

हरियाणा में एग्जिट पोल्स की बुरी हालत

इस बार, हरियाणा विधानसभा चुनाव में एग्जिट पोल्स ने साफ-साफ यह संकेत दिया था कि कॉन्ग्रेस राज्य में बड़े बहुमत से सरकार बनाएगी। अधिकांश पोल्स के अनुसार कॉन्ग्रेस को 50 से 60 सीटों का अनुमान था, जबकि बीजेपी को मात्र 20-28 सीटें मिलने की संभावना जताई गई थी। कई एग्जिट पोल्स ने दावा किया कि हरियाणा में बीजेपी का प्रभाव कम हो चुका है और कॉन्ग्रेस एक दशक बाद सत्ता में वापसी करने जा रही है। यह अनुमान मतदान के बाद जनता की प्रतिक्रिया और जमीनी रिपोर्ट्स के आधार पर लगाए गए थे।

ऑपइंडिया टीम द्वारा तैयार

हालाँकि, जब चुनाव परिणाम सामने आए, तो यह साफ हो गया कि एग्जिट पोल्स बुरी तरह गलत थे। बीजेपी ने न सिर्फ चुनाव में जबरदस्त वापसी की, बल्कि कॉन्ग्रेस को कड़ी टक्कर दी। बीजेपी ने खुद को मजबूत स्थिति में रखा और कई सीटों पर कब्जा किया। यह देखकर चुनाव विशेषज्ञ और राजनीतिक पंडित भी हैरान रह गए, क्योंकि एग्जिट पोल्स के मुकाबले हकीकत कुछ और ही थी।

जम्मू-कश्मीर में भी फेल रहे एग्जिट पोल्स

जम्मू-कश्मीर को लेकर भी एग्जिट पोल्स पूरी तरह से गलत साबित हुए। अधिकांश पोल्स ने जम्मू-कश्मीर में त्रिशंकु विधानसभा की संभावना जताई थी, जहाँ किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिल रहा था। नेशनल कॉन्फ्रेंस और कॉन्ग्रेस के गठबंधन को थोड़ी बढ़त दिखाई गई, लेकिन यह बढ़त निर्णायक नहीं मानी गई थी। बीजेपी को भी कुछ सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया था, लेकिन किसी भी पार्टी के लिए पूर्ण बहुमत का दावा नहीं किया गया था।

असल में जब चुनाव के परिणाम आए, तो कॉन्ग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस गठबंधन ने जोरदार जीत हासिल की, जबकि बीजेपी को उम्मीद से कम सीटें मिलीं। यहाँ भी एग्जिट पोल्स का अनुमान गलत साबित हुआ और चुनाव परिणाम एकतरफा रहे।

अब सवाल उठता है कि आखिर एग्जिट पोल्स इतने गलत क्यों साबित होते हैं? इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं:

सैंपल साइज और गलत अनुमान: एग्जिट पोल्स में सीमित सैंपल लिया जाता है, यानी कुछ चुने हुए मतदाताओं की प्रतिक्रिया के आधार पर पूरे राज्य का अनुमान लगाया जाता है। ऐसे में यदि सैंपल साइज सही न हो या विश्लेषण में गलती हो जाए, तो परिणाम गलत आने की संभावना बढ़ जाती है।

सीक्रेट वोटिंग पैटर्न: कई बार मतदाता अपने असली इरादे सार्वजनिक रूप से नहीं बताते। हो सकता है कि वे पोल्स में एक बात कहें, लेकिन वोट कुछ और डालें। इसे ‘साइलेंट वोटर’ का प्रभाव कहा जाता है। खासकर बीजेपी के पक्ष में यह देखा गया है कि कई बार लोग खुलकर समर्थन नहीं करते, लेकिन वोटिंग में वे उसे ही चुनते हैं।

स्थानीय मुद्दों की उपेक्षा: एग्जिट पोल्स में कई बार राष्ट्रीय मुद्दों या बड़े दलों के आधार पर अनुमान लगाया जाता है, जबकि स्थानीय स्तर पर मुद्दे और समीकरण पूरी तरह अलग हो सकते हैं। हरियाणा और जम्मू-कश्मीर के मामलों में भी यह देखने को मिला, जहाँ स्थानीय जातिगत समीकरण, उम्मीदवार की छवि और अन्य कारक पोल्स में सही तरीके से शामिल नहीं किए गए थे।

एग्जिट पोल्स को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं कि क्या इन पर भरोसा किया जा सकता है? पिछले कुछ वर्षों मे नतीजों से एग्जिट पोल्स की साख पर बट्टा लगने लगा, और सोशल मीडिया पर लोगों ने जमकर मजाक बनाया। कुछ लोग तो यह कह रहे हैं कि एग्जिट पोल्स एक ‘कॉमेडी शो’ बन गए हैं। इन ट्वीट्स और मेम्स की बाढ़ से यह साफ है कि लोग एग्जिट पोल्स पर अब गंभीरता से यकीन नहीं कर रहे हैं।

सागर नाम के यूजर ने लोकप्रिय वेब-सीरीज की एक तस्वीर शेयर की और कुछ अलग अंदाज में चुटकी ली।

एग्जिट पोल्स को लेकर ट्विटर और फेसबुक पर लोगों के व्यंग्यपूर्ण टिप्पणियों ने यह साबित किया है कि अब लोग इन भविष्यवाणियों को हल्के में लेने लगे हैं। एग्जिट पोल्स को सिर्फ एक मनोरंजन के रूप में देखा जा रहा है, और असली खेल चुनावी नतीजों के साथ ही शुरू होता है। चाचा मॉन्क नाम के यूजर ने कुछ ऐसी ही चुटकी ली।

एक यूजर ने लिखा, “एग्जिट पोल्स से ज्यादा भरोसेमंद तो मेरे दोस्त की भविष्यवाणी है, जिसने कभी सही जवाब नहीं दिया!” #ElectionLaughs

एक ट्वीट में कहा गया, “लगता है एग्जिट पोल्स के पंडितों ने कॉन्ग्रेस की जीत के लिए पहले ही मिठाई बांट दी थी।” एक और ट्वीट में लिखा गया, “कॉन्ग्रेस की 55 सीटों का जश्न मनाने से पहले बीजेपी की 30 सीटों पर सोचिए, खेल तो वहीं हो गया था।”

एक एक्स यूजर ने लिखा, “अब तो एग्जिट पोल्स का भी एग्जिट हो जाना चाहिए। 55 सीटें, 25 सीटें… कुछ भी हो सकता है।” इसी तरह एक और ट्वीट में कहा गया, “एग्जिट पोल्स भी अब मौसम की भविष्यवाणी जैसे हो गए हैं, कभी सही तो कभी गलत।”

जमीनी हकीकत से जुड़ना जरूरी

हरियाणा और जम्मू-कश्मीर चुनावों ने एक बार फिर साबित कर दिया कि एग्जिट पोल्स पर पूरी तरह से भरोसा करना सही नहीं है। यह केवल एक ट्रेंड बताने का माध्यम हैं, लेकिन अंतिम नतीजे मतदाताओं के वास्तविक वोटों पर निर्भर करते हैं। इस बार हरियाणा और जम्मू-कश्मीर में एग्जिट पोल्स की गलतियों ने यह साफ कर दिया है कि जमीन पर असली माहौल क्या है, इसे समझने के लिए गहन विश्लेषण और जमीनी हकीकत से जुड़े रहना जरूरी है।

जलने से पहले ही जम्मू-कश्मीर की जनता ने बुता दी वंशवाद की एक रोशनी, ‘गोदी मीडिया’ का टैग बाँट सेकुलर गैंग की बनी थी लाडली: जानिए कौन है इल्तिजा मुफ्ती

मंगलवार (8 अक्टूबर, 2024) को हरियाणा और जम्मू कश्मीर विधानसभा चुनावों के नतीजे आए हैं। जम्मू कश्मीर में नेशनल कॉन्फ्रेंस और कॉन्ग्रेस के गठबंधन ने भी बहुमत का आँकड़ा छू लिया। जम्मू कश्मीर की राजनीति में अब तक दो राजनीतिक परिवारों का बोलबाला रहा है।

इनमें से एक अब्दुल्लाह परिवार है, जिसकी तीन पीढ़ियाँ राज्य के मुख्यमंत्री पद तक पहुँची हैं। जबकि दूसरे तरफ मुफ़्ती परिवार है जहाँ बाप-बेटी ने राज्य के मुखिया का पद पाया है। लेकिन अब मुफ़्ती परिवार की राजनीति पर अस्तित्व का संकट आ गया है।

मुफ़्ती परिवार की तीसरी पीढ़ी और पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती की बेटी इल्तिजा मुफ़्ती जम्मू कश्मीर विधानसभा चुनाव हार गई हैं। जम्मू कश्मीर की बिजबिहारा-श्रीगुफवाडा सीट से PDP उम्मीदवार इल्तिजा मुफ़्ती को नेशनल कॉन्फ्रेंस के उम्मीदवार बशीर अहमद के हाथों हार झेलनी पड़ी है।

उन्हें बशीर अहमद 9770 वोटों के अंतर से मात दी है। यह इल्तिजा का पहला चुनाव था। 2024 जम्मू कश्मीर विधानसभा चुनाव में मुफ़्ती परिवार से वह अकेली उम्मीदवार थीं।

इल्तिजा मुफ़्ती

इल्तिजा मुफ़्ती ने अपनी हार स्वीकार करते हुए एक ट्वीट भी किया है। उन्होंने लिखा, “मैं लोगों के फैसले को स्वीकार करती हूँ। बिजबबिहांरा में सभी से मुझे जो प्यार और स्नेह मिला है, वह हमेशा मेरे साथ रहेगा। इस प्रचार अभियान के दौरान कड़ी मेहनत करने वाले पीडीपी कार्यकर्ताओं का आभार।”

जम्मू कश्मीर विधानसभा चुनाव नतीजों में जहाँ कॉन्ग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस के गठबंधन ने 40 से अधिक सीटों पर कब्जा जमाया है तो वहीं PDP मात्र 4 सीटों पर सिमट गई है। PDP के लिए यह चुनाव अस्तित्व बचाने की लड़ाई था, इसमें वह विफल होती दिखाई दे रही है। PDP जहाँ एक ओर चुनावों में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाई तो वहीं दूसरी तरफ इल्तिजा मुफ़्ती का हारना मुफ़्ती परिवार के लिए साख का संकट भी पैदा करेगा।

कौन हैं इल्तिजा मुफ़्ती?

कश्मीर में लेखक, राजनीतिक विश्लेषक एवं कारोबारी जावेद इकबाल शाह और महबूबा मुफ्ती के घर साल 1987 में छोटी बेटी इल्तिजा पैदा हुई थीं। उनकी बड़ी बहन का नाम इरतिका मुफ्ती है। इल्तिजा की पैदायश होने के एक साल बाद ही उनके पैरेंट्स में अलगाव हो गया। इकबाल शाह कुछ वक्त तक जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस के सदस्य भी रहे थे।

इल्तिजा का निक नाम सना है। वो दो साल तक कश्मीर में पढ़ीं। उसके बाद आगे की पढ़ाई के लिए दिल्ली चली गईं। हालाँकि, बचपन से ही अंतरिक्ष यात्री बनने की चाह रखने वाली इल्तिजा ने युवा होने पर दिल्ली विश्वविद्यालय के वेंकेटश्वेर कॉलेज से राजनीति विज्ञान में ऑनर्स की डिग्री ली।

इसके बाद वो यूके चली गईं, वहाँ इंग्लैंड के वारविक विश्वविद्यालय से अंतरराष्ट्रीय संबंधों में मास्टर डिग्री की। अपने निजी जिंदगी के बारे में खुलकर बात न करने वाली इल्तिजा ने लंदन में सीनियर एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिसर के तौर पर काम किया। इसके बाद ऑस्ट्रेलिया-भारत के एक इंस्टीट्यूट में भी काम किया।

कभी राजनीति में शामिल होने से किया इनकार

इल्तिजा ने सितंबर, 2022 में कहा था कि वह जम्मू-कश्मीर में मौजूदा कथित ‘भयभीत माहौल’ के तहत राजनीति में शामिल नहीं होना चाहती हैं। हालाँकि, उन्होंने इसे पूरी तरह से खारिज नहीं किया था और कहा था कि भविष्य कोई नहीं जानता।

इल्तिजा मुफ़्ती ने जम्मू में एक सम्मेलन में कहा था, ”मौजूदा माहौल में जहाँ राजनेता, पत्रकार और बाद में स्टेनोग्राफर बन गए हैं, मैं ऐसे में राजनीति नहीं करना चाहती। राजनीति जनता के साथ अपना रिश्ता बनाने के बारे में है। आपके जीवन में कुछ परिस्थितियाँ आती हैं, जो आपका मार्गदर्शन करती हैं।”

उन्होंने ये भी कहा था कि दिवंगत पीडीपी संरक्षक मुफ्ती मोहम्मद सईद की नातिन होने के नाते उन्होंने अपने जन्म के बाद से राजनीति को करीब से देखा है। उन्होंने कहा था, ”अन्य लोगों के लिए यह आकर्षक हो सकता है। मुझे इसके लिए कोई आकर्षण नहीं है।”

बखेड़ा बनाने में भी हैं माहिर

इस साल की शुरुआत में इल्तिजा ने अपने पासपोर्ट के नवीनीकरण को लेकर अधिकारियों को निशाने पर लिया था। उनका पासपोर्ट 2 जनवरी 2023 को खत्म हो रहा था। इसके लिए उन्होंने 8 जून 2022 को नए पासपोर्ट के लिए पहले ही दरख्वास्त दी थी।

क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय (आरपीओ) श्रीनगर द्वारा पासपोर्ट जारी नहीं करने पर वो फरवरी में जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट पहुँच गई थीं। आरपीओ ने सीआईडी की बताई गई गुप्त प्रतिकूल सत्यापन रिपोर्ट के बावजूद अप्रैल में उन्हें पासपोर्ट जारी किया था।

इल्तिजा मुफ़्ती का चुनाव प्रचार के दौरान एक वीडियो भी वायरल हुआ था। इस वीडियो में उन्होंने न्यूज एजेंसी ANI के एक रिपोर्टर से बदसलूकी थी। उन्होंने ANI को गोदी मीडिया का टैग दिया था और उसका माइक पकड़ने से इनकार कर दिया था। इसके बाद पूरा लिबरल गैंग उनकी वाहवाही में जुट गया था। अब सामने आया है कि वह अपना चुनाव हार गई हैं।

शिव कुमार तिवारी का बेटा है सोनू, लेकिन आधार कार्ड में बना दिया ‘फिरोज अंसारी’: माँ-मामा ने किया ‘खेला’, अब दस्तावेज ठीक कराने को काट रहा चक्कर

छत्तीसगढ़ के दुर्ग से एक हिंदू युवक को आधार कार्ड में मुस्लिम बना देने का मामला सामने आया है। पीड़ित का नाम सोनू तिवारी है। उसके पिता शिव कुमार तिवारी है। लेकिन आधार कार्ड में उसका नाम फिरोज अंसारी और पिता का नाम राजू अंसारी कर दिया गया है।

शैक्षणिक प्रमाण-पत्रों में सोनू और उसके पिता का असली नाम दर्ज है। अब आधार कार्ड में हुए इस ‘खेल’ को दुरुस्त करवाने के लिए वह दफ्तरों के चक्कर काट रहा है। सोनू के अनुसार उसकी पहचान बदलने का ‘खेला’ उसकी माँ और मामा ने ही किया है। उसकी माँ परवीन बानो मुस्लिम है।

दैनिक भास्कर ने सोनू की पीड़ा को लेकर विस्तार से रिपोर्ट छापी है। रिपोर्ट के मुताबिक यह मामला दुर्ग जिले के कसारीडीह इलाके का है। सोनू के पिता शिव कुमार तिवारी अपने इलाके के हिस्ट्रीशीटर थे और मुस्लिम महिला परवीन बानो से लव मैरिज की थी। 8 सितंबर 1992 को परवीन ने एक बच्चे को जन्म दिया। इस बच्चे का नाम सोनू तिवारी रखा गया।

पीड़ित ने बताया कि उसकी प्रारम्भिक शिक्षा-दीक्षा सोनू तिवारी के ही नाम से कसारीडीह के प्राइमरी स्कूल में हुई। इस स्कूल से मिली टीसी और मार्कशीट में भी उसका नाम सोनू तिवारी दर्ज है। उसकी पढ़ाई के ही दौरान शिवकुमार तिवारी को किसी मामले में जेल हो गई। पिता के जेल जाने के बाद परवीन अपने बच्चे के साथ मायके चली आई। यहाँ सोनू तिवारी का नया आधार कार्ड बनवाया गया। इस आधार कार्ड में सोनू का नाम फ़िरोज़ अंसारी कर दिया गया।

सोनू का कहना है कि आधार कार्ड में उसके पिता का भी नाम बदला दिया गया है। शिव प्रसाद तिवारी की जगह आधार कार्ड में राजू अंसारी लिखा हुआ है। इसी आधार कार्ड पर सोनू तिवारी का ड्राइविंग लाइसेंस भी फ़िरोज़ अंसारी के नाम से बनवा दिया गया। सोनू तिवारी ने इस साजिश में अपने मामा की मिलीभगत भी बताई है। फ़िलहाल सोनू अपनी असली पहचान वापस पाने की लड़ाई लड़ रहा है।

वह 2 साल से जिले के तमाम प्रशासनिक अधिकारियों को प्रार्थना पत्र दे कर इस गलती को दुरुस्त करने की गुहार लगा रहा है। सोनू का कहना है कि वह हिंदू है और इसी पहचान के साथ रहना चाहता है। उसने SDM को इस संबंध में आवेदन दिया है। बताया जाता है कि अब उसकी माँ ने भी सहमति दे दी है। SDM मुकेश रावटे के अनुसार मामले में जाँच कर नियमानुसार निर्णय लिया जाएगा।

अम्मी के दोस्त ही नाबालिग लड़की से कर रहे थे रेप, गर्भवती होने के बाद खुलासा: युसूफ, मोहम्मद अनस और मोमन अली गिरफ्तार

केरल के कोझिकोड में 15 साल की नाबालिग लड़की से गैंगरेप के मामले में पुलिस ने 3 लोगों को गिरफ्तार किया है। तीनों आरोपित 15 साल की लड़की के साथ काफी समय से बलात्कार कर रहे थे, जिसकी वजह से वो 6 माह की गर्भवती हो गई थी। पकड़े गए आरोपितों की पहचान मोहम्मद अनस, युसूफ और मोमन अली के रूप में हुई है। तीनों आरोपित पीड़िता की माँ से पहले से परिचित थे, इसी का फायदा उठाकर वो लड़की को अपनी हवस का शिकार बना रहे थे।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना कोझिकोड के मुक्कम थानाक्षेत्र की है। यहाँ 15 वर्षीया एक लड़की की माँ ने पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज करवाई थी। महिला ने बताया कि उनकी बेटी हाईस्कूल की छात्रा है। कुछ दिनों ने उसके पेट में दर्द हो रहा था। जब पीड़िता की माँ ने अपनी बेटी का इलाज करवाया तो वह 6 महीने की गर्भवती निकली। पूछताछ करने पर बेटी ने अपनी माँ को मोहम्मद अनस, युसूफ और मोमन अली की करतूत बताई, जो उसकी माँ के पुराने परिचित थे।

तीनों पिछले लम्बे समय से पीड़िता से बलात्कार कर रहे थे। आरोपितों में मोहम्मद अनस और युसूफ केरल के ही मलप्पुरम के अरीकोड उरंगगिरी के निवासी हैं। तीसरा आरोपित मोमन असम का रहने वाला है जो मजदूरी करने केरल आया हुआ था। पुलिस ने तीनों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। इन पर समुचित धाराओं के साथ पॉक्सो एक्ट के तहत भी कार्रवाई की गई है। पुलिस ने तीनों आरोपितों को थामरसेरी अदालत में पेश किया है।

अदालत ने तीनों को विस्तृत पूछताछ के लिए पुलिस रिमांड अपर भेज दिया है। पीड़िता की काउंसिलिंग करवाई गई है। उसको इलाज के लिए तिरुवनंतपुरम चाइल्ड केयर भेज दिया गया है। इस बात की भी आशंका जताई जा रही है कि गैंगरेप में और भी लोग शामिल हो सकते हैं। फ़िलहाल पुलिस मामले की जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई कर रही है।

हरियाणा में लगातार तीसरी बार BJP सरकार के आसार से बिफरी कॉन्ग्रेस, चुनाव आयोग को लगी घेरने: जब तक रूझानों में थी आगे तब तक भेज रही थी PM मोदी को जलेबी

मंगलवार (8 अक्टूबर, 2024) को हरियाणा विधानसभा चुनाव की वोटों की गिनती हो रही है। भाजपा ने अनुमानों के विपरीत बड़ा उलटफेर करते हुए रुझानों में बहुमत पा लिया है। हरियाणा चुनाव में वोटों की शुरूआती गिनती में बाजी मारने वाली कॉन्ग्रेस भाजपा के आगे निकलने के बाद चुनाव में गड़बड़ी का रोना रोने लगी है।

कॉन्ग्रेस के राज्यसभा सांसद और मीडिया प्रमुख जयराम रमेश ने हरियाणा विधानसभा के रुझानों में भाजपा के आगे निकलने के बाद आरोप लगाया कि चुनाव आयोग की वेबसाइट धीमे अपडेट हो रही है। उन्होंने कहा कि वह इस संबंध में आयोग से शिकायत की है।

जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि 10-11 राउंड की गिनती होने के बाद भी मात्र 4-5 राउंड की जानकारी वेबसाइट पर रखी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि हरियाणा के भीतर स्थानीय प्रशासन पर दबाव डाला जा रहा है। जयराम रमेश की इस शिकायत के बाद भाजपा के राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने जवाब दिया है।

सुधांशु त्रिवेदी ने कहा, “अगर जयराम रमेश ने यह कहना चालू कर दिया है और चुनाव आयोग पर प्रश्न उठा रहे हैं तो यह मान लिया जाना चाहिए कि उन्होंने अपनी हार मान ली है। मुझे लगता है कि हम एक निर्णायक जीत की तरफ बढ़ रहे हैं और कॉन्ग्रेस अपनी भावी पराजय की पेशबंदी करना चालू कर दिया है।”

चुनाव आयोग की वेबसाइट के अनुसार, हरियाणा विधानसभा चुनाव के रुझानों में 12:40 बजे तक भाजपा 49 जबकि कॉन्ग्रेस 35 सीटों पर आगे है। यदि यही रूझान बने रहे तो भाजपा की तीसरी बार हरियाणा में सरकार बन जाएगी और उसे स्पष्ट बहुमत होगा। यह उसकी हरियाणा में अब तक की सबसे बड़ी जीत होगी।

गौरतलब है कि जहाँ कॉन्ग्रेस चुनाव में पिछड़ने पर चुनाव आयोग से प्रश्न उठाने लगी तो वहीं वह सुबह तक जश्न मना रही थी। कॉन्ग्रेस प्रवक्ता का दावा था कि भाजपा राज्य में 20 सीट के ऊपर नहीं पाएगी। एक कॉन्ग्रेस प्रवक्ता पीएम मोदी को जलेबी भेज रहे थे। रुझान बदलते ही वह चुनाव प्रक्रिया पर प्रश्न उठाने लगे।

जहाँ हरियाणा में कॉन्ग्रेस जीत से दूर है तो वहीं जम्मू कश्मीर में वह नेशनल कॉन्फ्रेंस के साथ गठबंधन में जीत की ओर बढ़ रही है। दोनों पार्टियाँ मिल कर 90 में से 50 सीटें पर आगे हैं। उसको लेकर कॉन्ग्रेस ने कोई प्रश्न नहीं उठाए। इससे पहले लोकसभा चुनाव के दौरान जब भाजपा की सीटें कम हुई थी तब कॉन्ग्रेस ने ऐसा कोई जिक्र नहीं किया था।

पीस कमेटी की बैठक में गए मुस्लिम बुजुर्ग, पथराव के लिए आए जवान: रिपोर्ट में दावा- डासना मंदिर पर हमले की रची गई थी साजिश, बीजेपी MLA बोले- यह हिंदू आस्था पर प्रहार

4 अक्टूबर 2024 की रात इस्लामी कट्टरपंथियों की भीड़ ने गाजियाबाद के डासना मंदिर को घेर लिया था। लाइव हिंदुस्तान की रिपोर्ट में इसके पीछे बड़ी साजिश का दावा किया गया है। बताया गया है कि मुस्लिम बुजुर्गों को पीस कमेटी की बैठक में भेजा गया। दूसरी ओर मुस्लिम जवानों को डासना मंदिर की तरफ भेज दिया गया।

मंदिर पर हमले के पीछे साजिश की आशंका लोनी से बीजेपी विधायक नंद किशोर गुर्जर ने भी जताई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लिखे पत्र में उन्होंने इसे हिंदू आस्था पर प्रहार बताया है।

नन्द किशोर गुर्जर ने सोमवार (7 अक्टूबर 2024) को लिखे पत्र में कहा कि 4 अक्टूबर 2024 को जुमे के दिन मुस्लिम भीड़ ने मंदिर पर हमला करने की कोशिश की। इस घटना के बाद पूरे देश में हिन्दू समाज के भीतर आक्रोश फैल गया है। उन्होंने इसे हिन्दुओं के नरसंहार की तैयारी करार दिया और आरोप लगाया कि इस हमले के पीछे बाहरी तत्वों की मिलीभगत है। उनके अनुसार, विपक्षी दलों, खासकर कॉन्ग्रेस, सपा और AIMIM से जुड़े स्लीपर सेल ने इस हिंसा को उकसाया।

जुमे की दिन हुई इस घटना को हिन्दुओं के नरसंहार की तैयारी बताया है। इस मंदिर पर पहले भी हमले की कोशिश हो चुकी है। आगे उनका दावा है कि घटना के बाद पूरे देश का हिन्दू समाज आक्रोशित है। हिंसा में बाहरी लोगों की मिलीभगत बताते हुए भाजपा MLA ने इसके पीछे विपक्षी पार्टियों की साजिश बताया है। उनका दावा है कि कॉन्ग्रेस, समाजवादी पार्टी और ओवैसी की AIMIM पार्टी से जुड़े स्लीपर सेल ने इस हिंसा को हवा दी है।

अपने पत्र में उन्होंने सीएम योगी को डासना मंदिर का पौराणिक महत्व बताते हुए कहा कि यहाँ भगवान परशुराम और पांडवों ने तपस्या की थी। यहाँ 4 अक्टूबर को मुस्लिम भीड़ जमा हो कर आपत्तिजनक नारे लगाती यही और पथराव करते हुए हमले की कोशिश करती है। बीजेपी विधायक के मुताबिक पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए न सिर्फ मंदिर और उसमें मौजूद मूर्तियों को खंडित होने से बचाया बल्कि अंदर मौजूद कई श्रद्धालुओं के जीवन की भी रक्षा की।

भाजपा विधायक ने पत्र में आगे लिखा कि डासना मंदिर पर हमले के बाद जिन लाखों हिन्दुओं की आस्था पर चोट पहुँची है वो महापंचायत की बात कह रहे हैं। अंत में उन्होंने हमलावरों को चिन्हित करते हुए उनकी सम्पत्तियों को कुर्क करने और उन पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत कार्रवाई की माँग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि “सर तन से जुदा” के नारे लगाने वाले लोग प्रदेश में दंगे भड़काने की साजिश कर रहे हैं। साथ ही उन्होंने कॉन्ग्रेस जैसे विपक्षी दलों पर भारत में तालिबानी शासन लागू करने की कोशिश का भी आरोप लगाया।

जिस BJP को पानी पी-पीकर कोसती थी संचिता राय, उसकी ही केंद्र सरकार में नौकरी लगाने के नाम पर ठगे ₹2 करोड़: केरल की स्कूल में टीचर है वामपंथी छात्र संगठन की नेताइन

केरल में एक वामपंथी युवा नेत्री ने नौकरी के नाम पर ₹2 करोड़ की ठगी कर ली। उसने लोगों को केंद्र सरकार में नौकरी दिलाने के नाम पर यह ठगी की। भाजपा-RSS के विरुद्ध बयान देकर ख्याति पाई वामपंथी नेता ने इसी कड़ी में एक महिला को भी ठगा। पीड़िता ने अब वामपंथी नेत्री के विरुद्ध FIR दर्ज करवाई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कासरगोड में DYFI (CPM का छात्र संगठन) की एक छात्र नेत्री संचिता राय ने यह ठगी की। शिक्षक के तौर पार काम करने वाली संचिता ने एक निशमिता शेट्टी नाम की महिला से ₹15 लाख लिए और केंद्र सरकार के CPCRI में नौकरी लगवाने का वादा किया।

निश्मिता ने अपना सोना गिरवीं रख और रिश्तेदारों से पैसा उधार लेकर संचिता को दिया था। निश्मिता ने गूगल पे और बैंक ट्रांसफर के माध्यम से उसे मई, 2024 से अगस्त, 2024 के बीच ₹15.05 लाख दिए। हालाँकि, निश्मिता को इसके बाद कोई नौकरी नहीं दी गई। जब निश्मिता ने अपना पैसा वापस माँगा तो इससे भी संचिता ने इनकार कर दिया।

पीड़िता निश्मिता ने बताया है कि वह एक अन्य महिला के माध्यम से संचिता के सम्पर्क में आई थी। इसके बाद संचिता ने उससे वादा किया वह उन्हें भी नौकरी दिला देगी। हालाँकि, यह वादा झूठा निकला। निश्मिता ने बताया कि संचिता काफी अमीर है।

निश्मिता ने इसके बाद कासरगोड पुलिस के पास इस संबंध में शिकायत दर्ज करवाई। कासरगोड पुलिस ने संचिता के विरुद्ध ठगी समेत अन्य कई धाराओं में मामला दर्ज किया है। पुलिस ने बताया है कि संचिता ने कुल ₹2 करोड़ की ठगी कई लोगों से नौकरी के नाम पर की है।

संचिता ने एक और व्यक्ति को शिक्षक बनाने के नाम पर ठगी की है। पुलिस ने खुलासा किया है कि संचिता ने इस ₹2 करोड़ की ठगी में से ₹72 लाख कर्नाटक में किसी को ट्रांसफर भी किए हैं। संचिता और उसके पिता को CPM के कार्यक्रमों में बोलने के लिए बुलाया जाता है।

संचिता वर्तमान में कासरगोड के ही एक स्कूल में शिक्षक है। DYFI ने कहा है कि संचिता को 10 दिन पहले जिले की कमिटी से निकाल दिया था क्योंकि वह कोझिकोड चली गई हैं। DYFI ने कहा है कि उसे इन शिकायतों के बारे में अभी कोई जानकारी नहीं है।

मुस्लिम लड़की ने मंत्री से मिलाया हाथ, मौलवी ने बताया- हराम, ज़िना, शरीयत का उल्लंघन: केरल हाई कोर्ट ने फटकारा, कहा- अपनी मजहबी मान्यता दूसरों पर न थोपे

केरल हाई कोर्ट ने मौलवी अब्दुल नौशाद को राहत नहीं दी। उसके खिलाफ केरल पुलिस की कार्यवाही पर से रोक लगाने से इनकार कर दिया। मौलवी अब्दुल नौशाद ने मुस्लिम लड़की के एक मंत्री से हाथ मिलाने पर उसे हराम, ज़िना (व्याभिचार) और शरियत का उल्लंघन बताया था। इस मामले में लड़की के परिजनों ने अब्दुल नौशाद पर केस किया था और अब केरल हाई कोर्ट ने नौशाद को राहत देने से इनकार कर दिया।

केरल हाई कोर्ट ने मौलवी नौशाद को फटकारते हुए कहा है कि वो अपनी मजहबी मान्यताएँ दूसरों पर नहीं थोप सकता है। गौरतलब है कि ये घटना 2016 में केरल के मार्कज़ लॉ कॉलेज में आयोजित एक इंटरएक्टिव सेशन के दौरान हुई थी। इस सत्र में कानून की छात्रा लड़की पुरस्कार लेते समय मंच पर जाकर उस समय केरल के वित्त मंत्री टी.एम. थॉमस इसाक से हाथ मिलाया। इसके बाद सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें अब्दुल नौशाद ने हाथ मिलाने की इस घटना को इस्लामी कानून का उल्लंघन बताया। नौशाद ने दावा किया कि इस्लाम में गैर-महरम (अजनबी) मर्द और औरत के बीच शारीरिक संपर्क हराम माना जाता है और यह शरियत कानून के खिलाफ है। नौशाद ने पोस्ट के जरिए लड़की पर ज़िना (व्याभिचार) के आरोप लगाए थे।

इस मामले में अब्दुल नौशाद के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 153 (दंगा भड़काने के इरादे से उकसाने) और केरल पुलिस अधिनियम की धारा 119 (किसी महिला की गरिमा को सार्वजनिक रूप से ठेस पहुँचाने) के तहत मामला दर्ज किया गया था। नौशाद ने कोर्ट से यह अनुरोध किया कि उसके खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही को रद्द किया जाए, लेकिन कोर्ट ने यह याचिका खारिज कर दी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, केरल हाई कोर्ट के जस्टिस पी.वी. कुन्हीकृष्णन की अध्यक्षता वाली बेंच ने अपने फैसले में कहा कि मजहबी विश्वास व्यक्तिगत होते हैं और उन्हें दूसरों पर थोपने का अधिकार किसी को नहीं है।

हाईकोर्ट ने कहा, “मजहबी मान्यताएँ व्यक्तिगत होती हैं। किसी व्यक्ति पर मजहबी विश्वासों को थोपने की कोई जरूरत नहीं, खासकर इस्लाम में। हर नागरिक को यह स्वतंत्रता है कि वह अपने मजहबी विश्वासों का पालन करे या न करे। भारत के संविधान का अनुच्छेद 25 कहता है कि सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता और स्वास्थ्य के अधीन रहते हुए सभी व्यक्तियों को अपने धर्म की स्वतंत्रता है और वे अपनी मजहबी मान्यताओं को मानने और उनका प्रचार करने के लिए स्वतंत्र हैं।”

कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि कोई भी व्यक्ति अपनी मजहबी मान्यता को किसी अन्य व्यक्ति पर थोपने की कोशिश नहीं कर सकता। कोर्ट ने कहा, “धर्म का प्रचार करना यह नहीं है कि मजहबी प्रथाओं को दूसरों पर थोपा जाए। भारत के संविधान के अनुच्छेद 25 से 28 किसी व्यक्ति को यह अधिकार नहीं देते कि वह अपनी मजहबी मान्यता को दूसरे पर थोपे।”

कोर्ट ने कुरान के कुछ आयतों का हवाला देते हुए कहा कि इस्लाम में भी व्यक्तिगत स्वतंत्रता का बहुत महत्व है। कोर्ट ने कहा, “इस्लाम में गैर-महरम पुरुष और महिला के बीच शारीरिक संपर्क जैसे हाथ मिलाना हराम माना जा सकता है, लेकिन यह व्यक्तिगत आस्था और चुनाव पर निर्भर है। कुरान की सूरह अल-बक़रह (2:256) में कहा गया है, ‘धर्म में कोई ज़बरदस्ती नहीं है’। इसके अलावा, सूरह अल-काफिरून (109:6) में भी कहा गया है, ‘तुम्हारे लिए तुम्हारा धर्म और मेरे लिए मेरा धर्म’।”

कोर्ट ने यह भी कहा कि समाज और संविधान, दोनों का यह कर्तव्य है कि वे इस प्रकार के मामलों में संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करें। कोर्ट ने कहा, “एक बहादुर मुस्लिम लड़की ने अपने मजहबी विश्वास की स्वतंत्रता का दावा किया है। ऐसी स्थिति में हमारा संविधान उसकी रक्षा करेगा। इसके अलावा, यह समाज का भी दायित्व है कि वह उसका समर्थन करे।”

नौशाद ने वीडियो और सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए लड़की पर शरियत कानून का उल्लंघन करने का आरोप लगाया था, जिससे लड़की और उसके परिवार की प्रतिष्ठा को ठेस पहुँची। लड़की ने इस बारे में पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद नौशाद पर आपराधिक मामला दर्ज किया गया। कोर्ट ने कहा कि अब्दुल नौशाद ने न तो अपने बयानों का खंडन किया और न ही इस मामले में कोई ठोस तर्क पेश किया। इसके चलते कोर्ट ने नौशाद की याचिका खारिज कर दी और निचली अदालत को इस मामले की जल्द से जल्द सुनवाई करने का निर्देश दिया।

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा, “कोई भी मजहबी विश्वास संविधान से ऊपर नहीं है। संविधान सर्वोच्च है।” इस टिप्पणी ने यह स्पष्ट किया कि भारतीय संविधान में दिए गए मौलिक अधिकार किसी भी मजहबी कानून या मान्यता से ऊपर हैं। कोर्ट ने कहा कि लड़की को अपनी मजहबी स्वतंत्रता का अधिकार है और कोई भी उस पर मजहबी दबाव नहीं डाल सकता। ऐसे में, केरल हाई कोर्ट ने यह फैसला सुनाया कि नौशाद के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही जारी रहेगी, और मामले की सुनवाई जल्द से जल्द पूरी की जाएगी।

9 नवंबर को उत्तराखंड का स्थापना दिवस, इसी दिन UCC लागू करने का ऐलान कर सकती है BJP सरकार: नियम-कानूनों का 500 पन्नों का मसौदा तैयार

उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (UCC) जल्द ही लागू हो सकती है। राज्य के स्थापना दिवस (9 नवम्बर) को ही UCC लागू करने पर काम चल रहा है। UCC लागू करने के लिए बनाई गई कमिटी की भी सभी बैठकें पूरी हो चुकी हैं और इस पर अंतिम मुहर भी लग गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, UCC लागू करने और इसके नियम बनाने के लिए बनाए गए पैनल ने सोमवार (7 अक्टूबर, 2024) को इसके अंतिम प्रारूप पर मुहर लगा दी। कमिटी द्वारा दिया गया यह अंतिम प्रारूप अब प्रिंट रूप में लाया जाएगा। कमिटी के मुखिया का कहना है कि इसके बाद यह रिपोर्ट मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को सौंपी जाएगी।

UCC लागू करने की तैयारियों को पूरा करने के बाद इसे जल्द लागू किया जा सकता है। CM पुष्कर सिंह धामी पहले भी कह चुके हैं कि इसे 9 नवम्बर, 2024 को लागू करने का विचार है क्योंकि इस दिन राज्य का 25वाँ स्थापना दिवस होगा। उत्तराखंड की स्थापना 9 नवम्बर, 2000 को हुई थी। इसे उत्तर प्रदेश के पर्वतीय जिलों को अलग करके बनाया गया था।

कमिटी के मुखिया शत्रुघन सिंह ने बताया कि कई दौर की बैठकों के बाद उन्होंने UCC के नियम-कानून को अंतिम रूप दे दिया है। इन नियम-कानून को बनाने के लिए लगभग 130 बैठकें हुई हैं। CM धामी को इन नियम-क़ानून वाली लगभग 500 पन्नों की रिपोर्ट सौंपी जाएगी।

कमिटी ने बताया है कि UCC लागू होने के बाद 6 महीने का समय राज्य में लोगों को अपनी शादी पंजीकृत करवाने के लिए दिया जाएगा। यह सुविधा CSC पर भी मौजूद होगी। इसके अलावा राज्य में वसीयत जैसी सुविधाएँ एप के जरिए दी जाएँगी। UCC के भीतर बहुविवाह पर भी रोक लगाई गई है और लिव इन रिलेशनशिप के लिए भी रजिस्ट्रेशन अनिवार्य कर दिया गया है।

कमिटी के एक सदस्य ने बताया है कि जब राज्य में शादियों और लिव इन जैसे रजिस्ट्रेशन हो जाएँगे तो जनसंख्या को लेकर एक आँकड़ा भी सामने आ जाएगा। उन्होंने कहा कि इससे नीतियाँ बनाने में मदद मिलेगी और पता भी चलेगा कि किसे इन नीतियों का लाभ दिया जाए।

UCC को फरवरी,2024 में विधानसभा में पेश किया गया था और यह बहुमत से पास हो गया था। इसके बाद मार्च, 2024 में इसको राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी इसे मंजूरी दे दी थी। तब से इसे लागू करने के नियमों और कानूनों पर काम चल रहा था। अब यह अंतिम रूप पाने के बाद CM धामी के पास जाएगा और सरकार के फैसले के बाद राज्य में लागू होगा।

यदि 9 नवम्बर, 2024 को उत्तराखंड में UCC लागू हो जाता है तो यह ऐसा करने वाला देश का पहला राज्य होगा। भाजपा शासित अन्य राज्य भी UCC लाने पर विचार कर रहे हैं।

इस्लाम में नहीं होता बच्चों का यौन शोषण, सवाल करना ही गलत: पाकिस्तान में पश्तून महिला पर भड़का जाकिर नाइक; पहले अनाथ लड़कियों को ‘बेटी’ बोलने पर हुआ था नाराज

इस्लामी कट्टरपंथी जाकिर नाइक का पिछले दिनों पाकिस्तान में एक कार्यक्रम हुआ था। अब उसकी वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है। वीडियो में जाकिर से एक खैबर पख्तूनख्वा की लड़की पीडोफिलिया को लेकर सवाल कर रही है। हालाँकि, नाइक उस लड़की का जवाब देने की बजाय उस पर भड़कते हुए दिखाई दे रहे हैं। वीडियो अब सोशल मीडिया पर हर जगह वायरल है।

वीडियो में पश्तून लड़की को अपना परिचय देने के बाद कहते सुना जा सकता है कि वो जहाँ पर रहती है वो बहुत इस्लामी सोसायटी है। औरतें भी इस्लामी नियम के हिसाब से रहती हैं और पुरुष भी। हर कोई जुमे पर मजहबी उपदेश सुनता है। बावजूद इसके वहाँ नशीली दवाओं की लत, बच्चों का यौन शोषण और व्यभिचार बढ़ गया है। लड़की पूछती है कि सब जानते हुए आखिर कोई उलेमा इस मामले पर कुछ क्यों नहीं बोलता। हमारा समाज फिर भी क्यों नीचे जा रहा है।

जाकिर नाइक इस सवाल को सुनने के बाद पहले लड़की पर तंज कसता है कि उसका सवाल ही सही नहीं। उसमें तकरार है क्योंकि उसके मुताबिक जो समाज इस्लामिक है वहा बच्चों का यौन शोषण हो ही नहीं सका। जाकिर कहता है,

“आपने कहा कि आपका समाज इस्लामिक है और आपके समाज में यौन शोषण हैं तो फिर ये विरोधाभास है। इस्लामिक माहौल में कोई बाल यौन शोषण नहीं हो सकता। इस्लाम में पीडोफिलिया (बच्चों से यौन संबंध) को गलत माना गया है। इसलिए यदि कोई मुसलमान है तो फिर वह पीडोफिलिया नहीं कर सकता है और यदि ऐसा करता है तो वह मुसलमान नहीं हो सकता। आपके सवाल का या तो पहला भाग गलत है या दूसरा हिस्सा…।”

नाइक ने आगे कहा, “बताइए कि कौन सी इस्लामिक किताब बाल यौन शोषण समर्थन करती है। मैं तो यह कहूँगा कि आपको ये कहना चाहिए कि आपका समाज इसे इस्लामिक मानता है, तब मैं आपकी बात समझूँगा। अभी जो आप कह रही हैं, उसे मैं ठीक नहीं मानता हूँ। आप गलत हैं और माँग करता हूँ कि अपनी टिप्पणी के लिए माफी माँगे।” आगे जाकिर ने कहा कि कितनी अजीब बात हैं लोग इस्लाम पर तोहमत लगा देते हैं लेकिन माफी नहीं माँगते हैं।

अनाथ लड़कियों को बेटी कहने पर भड़का नाइक

गौरतलब है कि इससे पहले जाकिर नाइक को पाकिस्तान स्वीट होम नाम के एनजीओ की ओर से एक कार्यक्रम में बुलाया गया था। इस कार्यक्रम में उसे अनाथ लड़कियों को उनके बेहतरीन प्रदर्शन के लिए पुरस्कृत करना था, लेकिन जैसे ही लड़कियों को मंच पर सम्मान के लिए बुलाया गया, वह वहाँ से नाराज होकर चला गया।

बाद में सामने आया कि लड़कियों को बेटी बुलाए जाने पर आपत्ति थी। ब्रिटेन में रहने वाले एक सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर इम्तियाज महमूद ने घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा, “पाकिस्तान में जाकिर नाइक एक अनाथालय में था। जब छोटी अनाथ लड़कियों को शील्ड लेने के लिए मंच पर बुलाया गया तो वह शील्ड दिए बिना ही मंच से चला गया।”