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₹5600 करोड़ की कोकीन तस्करी का सरगना तुषार गोयल 2003 से कॉन्ग्रेस सदस्य, RTI सेल का रह चुका है चेयरमैन: रिपोर्ट में दावा- पहले करवाता था देह व्यापार

दिल्ली पुलिस ने बुधवार (2 अक्टूबर 2024) को राजधानी में 5600 करोड़ रुपए की कोकीन की एक बड़ी खेप को पकड़ा है। इस ड्रग सिंडिकेट का सरगना तुषार गोयल है। तुषार गोयल कॉन्ग्रेस का नेता है और वह साल 2022 में दिल्ली प्रदेश कॉन्ग्रेस की RTI सेल का चेयरमैन रह चुका है। उसने अपनी सोशल मीडिया प्रोफाइल पर इसका जिक्र किया है।

सरगना तुषार गोयल के कई कॉन्ग्रेस नेताओं के साथ फोटो भी सामने आए हैं। इस बात का खुलासा दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल की पूछताछ में हुआ है। खुद तुषार गोयल ने स्पेशल सेल की पूछताछ में इसका खुलासा किया है कि वह 2022 में कॉन्ग्रेस दिल्ली का RTI सेल प्रमुख था। उसने बताया कि वह साल 2002 में यूथ कॉन्ग्रेस का सदस्य बना था।

पुलिस तुषार गोयल के बैकग्राउंड को खंगाल रही है। कहा जा रहा है कि 40 वर्षीय तुषार गोयल ने दिल्ली के इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय से स्नातक किया है। वह दिल्ली के वसंत विहार में रहता है। उसके पिता दिल्ली में तुषार पब्लिकेशन और ट्यूलिप पब्लिकेशन के मालिक हैं। तुषार ने साल 2008 में शादी की और उसके बाद देह व्यापार का काम शुरू कर दिया और सेक्स रैकेट चलाने लगा।

इसी दौरान तुषार गोयल की मुलाकात दुबई के एक गिरोह से हुई। तभी से वह देह व्यापार के साथ-साथ ड्रग्स के धंधे में जुड़ गया और ड्रग्स की तस्करी करने लगा। दिल्ली पुलिस को अगस्त में इसकी भनक लगी थी। इसके बाद दिल्ली पुलिस पिछले दो महीने से उस पर और उसके गिरोह पर नजर रख रही है। आखिरकार उसे दबोच लिया गया। 

तुषार गोयल द्वारा डाला गया RTI (साभार: आजतक)

तुषार गोयल का साथी हिमांशु पहले बाउंसर था। वहीं, तुषार का ड्राइवर औरंगजेब सिद्दीकी उत्तर प्रदेश के देवरिया का रहने वाला है। चौथा आरोपित भरत जैन ही मुंबई से 15 किलोग्राम कोकीन दिल्ली लाया था। पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के पास से पहले 15 किलोग्राम कोकिन बरामद की थी। इसके बाद उनकी निशानदेही पर महिपालपुर के गोदाम में छापा मारकर बाकी की ड्रग्स जब्त की गई।

दरअसल, दिल्ली के महिपालपुर में 550 किलोग्राम कोकीन बरामद की गई थी। इस मामले में पुलिस ने 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें तुषार गोयल, भरत कुमार जैन, औरंगजेब सिद्दीकी और हिमांशु कुमार शामिल है। लगभग 5600 करोड़ रुपए की कोकीन के तार दुबई से जुड़े हैं। सप्लायर के तौर पर दुबई के एक बड़े कारोबारी का नाम सामने आया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह ड्रग्स मुंबई के बंदरगाह तक पहुँचा और वहाँ से इसे दिल्ली लाया गया था। इसे महिपालपुर के गोदाम में रखा गया था। कोकीन के साथ-साथ वहाँ से 40 किलोग्राम गाँजा भी बरामद किया गया है। कहा जा रहा है कि इन ड्रग्स से 50 लाख डोज बनाई जा सकती हैं। इस खेप को दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड पहुँचाया जाना था।

जनाना गेट से घुसे, बाथरूम में लोड किए हथियार, फिर बाहर निकल 7 लोगों की कर दी हत्या: कौन कहते हैं मस्जिद से नहीं आते आतंकी, क्या इजरायल करेगा ‘समतल’?

इजरायल के जाफा में बुधवार (2 अक्टूबर, 2024) को हुए आतंकी हमले में एक मस्जिद का इस्तेमाल इस्लामी आतंकियों ने किया। यह खुलासा हमले की जाँच के बाद हुआ है। हमले में 7 लोगों की मौत हुई थी, इनमें से 6 लोगों की पहचान भी सामने आई है। हमले में जिस मस्जिद का इस्तेमाल हुआ, उसे गिराने की बात इजरायल के सुरक्षा मंत्री ने की है। वहीं इजरायल की नेत्री ने कहा है कि ने मस्जिद गिराए जाने से इजरायल में रहने वाले अरबियों में खौफ भरेगा।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हमला करने वाले दोनों आतंकियों का नाम मुहम्मद मसक और अहमद हिमौनी था। यह दोनों फिलिस्तीनी थे और वेस्ट बैंक के रहने वाले थे। यह दोनों आतंकी हमास से जुड़े हुए थे। दोनों इजरायल में बिना किसी परमिट के घुसे थे और उन्होंने इसके बाद एक मेट्रो स्टेशन पर हमला किया।

इसी हमले की जाँच में सामने आया है कि यह दोनों आतंकी हमला करने से पहले जाफा की एक अल नुझा मस्जिद में घुसे थे। यह आतंकी महिलाओं वाले गेट से घुसे थे। यहाँ दोनों ने बाथरूम के भीतर अपने हथियार रखे थे। उन्होंने यहाँ मौजूद लोगों को धमकाया और कहा कि जो भी मस्जिद छोड़ के गया उसको भी मार दिया जाएगा। इसके बाद दोनों इस मस्जिद से बाहर निकले और अंधाधुंध फायरिंग करने लगे।

मस्जिद का आतंकी हमले में इस्तेमाल होने का खुलासा तब हुआ जब यहाँ इजरायल के सुरक्षा मंत्री बेन ग्वीर पहुँचे। उन्होंने कहा कि अगर यह बात सामने आई है कि आतंकियों ने मस्जिद का इस्तेमाल किया तो इसे तुरंत ध्वस्त कर दिया जाना चाहिए। उन्होंने यह बयान मस्जिद के बाहर ही दिया।

इजरायल की एक नेता मेराव बेन अरी ने कहा कि मंत्री के इस बयान के कारण यहाँ रहने वाले अरबियों में असुरक्षा की भावना उत्पन्न हुई है। हालाँकि, मंत्री ने मेराव बेन अरी पर नस्लभेदी राजनीति करने का आरोप लगाया और कहा कि उन्हें यह कहीं और करनी चाहिए।

मस्जिद के सहारे हमला करने वाले दोनों इस्लामी आतंकियों को सुरक्षाबलों ने बुधवार को ही मार गिराया था। इस हमले के पीड़ितों में 4 महिलाएँ। मारे गए लोगों में एक ग्रीक नागरिक भी था। यह हमला उस दौरान हुआ जब ईरान भी इजरायल के ऊपर मिसाइलों से हमला कर रहा था।

गौरतलब है कि 7 अक्टूबर, 2024 से ही चालू इजरायल-हमास का संघर्ष अब और गहरा हो गया है। हाल ही में इजरायल ने ईरान समर्थित इस्लामी आतंकी समूह हिजबुल्लाह के प्रमुख नसरुल्लाह को मार गिराया था। इसके बाद ईरान ने इजरायल पर मिसाइलें दागीं। हालाँकि, इन हमलों में कोई बड़ा नुकसान होने की सूचना नहीं है।

12 दिन के भीतर नासिर ने 2 बार बरेली को दहलाया, इस बार 2 बच्चों समेत 5 की गई जान: अवैध तरीके से बनाए जा रहे पटाखों में ब्लास्ट से कई घर जमींदोज

उत्तर प्रदेश के बरेली में अवैध पटाखा फैक्टरी में बुधवार (2 अक्टूबर 2024) को जोरदार धमाका होने से पाँच घर जमींदोज हो गए। मलबे में दबने और झुलसने से महिला और उसके दो बेटों समेत पाँच की मौत हो गई है। इनमें से एक महिला की पहचान नहीं हो सकी है। हादसे में पाँच लोग घायल भी हुए हैं। वहीं, एक व्यक्ति लापता है। माना जा रहा है कि वह मलबे में दबा हो सकता है।

यह घटना बरेली के सिरौली थाना क्षेत्र के कल्याणपुर गाँव की है। यहाँ आबादी के बीच एक अवैध पटाखा फैक्ट्री चल रही थी। सिरौली के मोहल्ला कौवा टोला निवासी दो भाई नाजिम और नासिर शाह कल्याणपुर के रहमान शाह के घर में बगैर लाइसेंस के पटाखा फैक्टरी चलवा रहे थे। घटना के बाद स्थानीय बचाव दलों के साथ राज्य आपदा बचाव दल (एसडीआरएफ) बचाव कार्य में जुटा रहा।

बरेली के एसएसपी अनुराग आर्य के मुताबिक, इस फैक्ट्री में पटाखे बनाने के साथ ही यहाँ उनका भंडारण किया जाता था। जिस रहमान शाह के घर में यह पटाखा फैक्ट्री चल रही थी, उसका नाजिम दामाद है। बुधवार की शाम चार बजे हुई इस घटना से रहमान समेत उसके पड़ोसी मोहम्मद अहमद उर्फ पप्पू शाह, इसरार, रुखसार व बाबू शाह के घर भरभरा कर गिर गए हैं।

मकान के मलबे में दबने से रहमान की 44 वर्षीय बहू तबस्सुम और पड़ोसी रुखसार की 28 वर्षीय बीवी रुखसाना की मौत हो गई। इस बीच तबस्सुम के दो बेटे हसन (4) व शहजान (5) कहीं नजर नहीं आए तो मलबे को हटाया गया। मलबे में दोनों बच्चों की लाशें मिलीं। मलबे से एक अज्ञात महिला का भी शव मिला है। पुलिस इस बात का पता लगा रही है कि यह अज्ञात महिला कौन है।

रहमान के दामाद नाजिम का अभी भी पता नहीं चल सका है। पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। वहीं, मलबों को हटाने का काम जारी है। धमाका इतना जोरदार था कि पाँच मकान जमींदोज होने के अलावा आसपास के कई घरों और धर्मस्थलों में दरारें आ गई हैं। कई घरों की खिड़कियों में लगे शीशे टूटकर बिखर गए। 

एसएसपी अनुराग आर्य के अनुसार, 27 सितंबर 2024 से जिले में विस्फोटक लाइसेंस धारकों का सत्यापन अभियान शुरू किया गया है। इस सूची में लाइसेंस धारक नासिर शाह का भी नाम था। आरोपितों ने विस्फोटक सामग्री ससुराल में छिपा दी थी। इस मामले में एसएसपी अनुराग आर्य ने दारोगा देशराज सिंह व नाहर सिंह, सिपाही अजय व सुरेंद्र को निलंबित कर दिया है। 

कहा जा रहा है कि बुधवार की शाम को रहमान शाह ने चाय बनाने को कहा तो फातिमा प्रथम तल पर रसोई में गई। वहाँ अचानक सिलेंडर फट गया। लपटें जैसे ही तीसरी मंजिल के कमरे में रखे पटाखों एवं बारूद तक पहुँचीं, तेज धमाके होने लगे। देखते ही देखते आसपास के मकान भरभराकर गिर गए। लोगों का कहना है कि धमाके के दौरान ईंटें 70 फीट तक उछल रही थीं।

सिरौली के नासिर के पास आतिशबाजी बनाने का लाइसेंस था, मगर वह आबादी के बीच मकान में ही यह काम करने लगा। 21 सितंबर को उसकी छत पर पटाखों के ढेर में आग लग गई थी। उस मामले में FIR दर्ज करके उसका लाइसेंस रद्द कर दिया गया था। उसके बाद वह भाई की ससुराल में आकर पटाखे बनाने लगा। पिछले 10 दिनों में दूसरी घटना की जाँच कराई जा रही। हादसे पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी शोक संवेदना व्यक्त की है।

बातें सूफीवाद की, काम भारत में घुसपैठियों को बसाना: पाकिस्तान के ‘सिद्दीकी परिवार’ को ‘शर्मा जी’ की पहचान देने के पीछे मेहदी फाउंडेशन, इसके बारे में जानिए सब कुछ

बीते दिनों बेंगलुरु से पाकिस्तान के राशिद अली सिद्दीकी का परिवार गिरफ्तार हुआ था। छानबीन में पता चला था कि राशिद का परिवार फर्जी हिंदू नाम के साथ भारत में रह रहा था और उन्हें 10 साल पहले यहाँ भारत में लाने के पीछे एक ‘सूफी’ मेहदी फाउंडेशन का हाथ था। इसी संस्था ने उनके लिए फर्जी डॉक्यूमेंट, फर्जी पहचान पत्र आदि की व्यवस्था की थी। इतना ही नहीं, यही संस्था राशिद अली सिद्दीकी के परिवार के रहने-खाने का खर्चा भी उठाती थी। बदले में राशिद आलरा टीवी पर आकर संस्था के विचार को प्रमोट करते थे।

हमने इस खबर के सामने आने के बाद इस संस्था से जुड़ी जानकारी जुटाई। इस दौरान सामने आया कि पहले मेहदी फाउंडेशन आरजीएस इंटरनेशनल नाम से जाना जाता था। इसकी स्थापना 1983 में सूफी बाबा गौहर अली शाह की पाँचवी पीढ़ी के वंशज लेखक रा रियाज गौहर शाही ने यूनुस अलगोहर के साथ मिलकर की थी। बाद में एमएफआई की आधिकारिक तौर पर स्थापना हुई और यूनुस अलगोहर इसके अध्यक्ष बन गए।

सामान्य तौर पर यूनुस अलगोहर अपनी बातों में मजहबी सद्भाव और शांति का प्रचार करते हैं और मजहबी कट्टरता के खिलाफ वकालत करते हैं। वहीं वेबसाइट के होमपेज पर भी मेहदी फाउंडेशन की जो जानकारी लिखी है उसमें भी ‘ईश्वरीय प्रेम और सार्वभौमिक शांति’ के प्रचार की बात लिखी है। वेबसाइट में गौहर शाही की छवि के साथ कई धर्मों के प्रतीक भी हैं।

संगठन दावा करता है कि वह नफऱत के बीच प्रेम की लौ जलाने का काम करते हैं और अपने अनुयायियों को सिखाते हैं कि वो सभी धर्मों के लोगों के साथ मिलकर रहें। संगठन ये भी कहता है कि वो किसी एक मजहब से नहीं जुड़े, लेकिन ये संगठन मुसलमानों को कट्टरपंथ से दूर करने के लिए जिस सूफीवाद को बढ़ावा देता है उसका इतिहास भारत में काला रहा है।

जानकारी के मुताबिक मेहदी फाउंडेशन की स्थापना सबसे पहले लंदन में हुई थी जहाँ इसका मुख्यालय भी है और अब यह कनाडा, अमेरिका, दक्षिण कोरिया, श्रीलंका, जापान, ऑस्ट्रेलिया, भारत, ग्रीस, थाईलैंड, बांग्लादेश और नेपाल जैसे देशों में भी अपने केंद्र खोल चुका है। इसके अलावा, mehdifoundation.com नाम से एक और वेबसाइट है जो हिंदी और उर्दू सहित कई भाषाओं में उपलब्ध है। यह भी संगठन द्वारा बताए गए समान विचारों को बढ़ावा देती है।

एमएफआई यूट्यूब पर करीब 1.5 मिलियन सब्सक्राइबर और फेसबुक पर 96 हजार से ज्यादा फॉलोअर्स के साथ अलरा टीवी नाम से एक चैनल भी चलाता है। खास बात यह है कि इस चैनल ने राशिद अली सिद्दीकी को प्रचारक के तौर पर नियुक्त किया है। दिलचस्प बात यह है कि एक तरफ तो यह संगठन धर्मनिरपेक्ष होने और चरमपंथ के खिलाफ होने का दावा करता है, लेकिन दूसरी तरफ हिंदुओं का नरसंहार करने वाले टीपू सुल्तान का प्रसंशक है। 2019 में इनके अकॉउंट से डाली गई तस्वीर में टीपू का नाम देखा जा सकता है।

बता दें कि मेहदी संगठन को अपने विचारों के कारण मुस्लिम देशों (पाकिस्तान, बाग्लादेश) में भारी विरोध का सामना करना पड़ा था। इसे लेकर गौहर शाही और यूनुस अलगोहर पर कई बार हमले भी हुए। इनमें गौहर शाही तो अपने विवादित दावों के कारण जाने जाते हैं। जैसे 1997 में उन्होंने कहा था कि उनकी मुलाकात ईसा मसीह से हो चुकी है। इसके अलावा वह खुद को मसीहा, मेहदी और कल्कि का अवतार बताते हैं। वहीं मेहदी फाउंडेशन इंटरनेशनल के अध्यक्ष (अंतरराष्ट्रीय) अमजद गौहर, जो हैं तो एक पाकिस्तानी नागरिक हैं लेकिन उनके ऊपर 12 बार ईशनिंदा का आरोप लगा है। वह वर्तमान में ब्रिटेन में शरण माँग रहे हैं। वहीं यूनुस अलगोहर पर भी 2013 में बेईमानी के आरोप लग चुके हैं

राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है फाउंडेशन की हरकत

उल्लेखनीय है कि मेहदी फाउंडेशन इंटरनेशनल भले ही सूफीवाद और धार्मिक सहिष्णुता को बढ़ावा देने की बात करता है लेकिन ये सच्चाई नजरअंदाज नहीं की जा सकती कि इस संगठन ने पाकिस्तानी परिवार को अवैध रूप से भारत में घुसाया, उनके लिए फर्जी दस्तावेज बनवाए और घुसपैठ को छिपाया… ये सारी प्रक्रिया राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से हमारे भारत के लिए खतरा पैदा कर सकती है। इसके अलावा ये संगठन संगठन समन्वयकारी होने का दावा करता है, लेकिन ऐसा कोई स्पष्ट सबूत नहीं है कि उन्होंने पाकिस्तान से आए हिंदुओं का समर्थन किया है, जो वास्तविक असहिष्णुता का शिकार हैं और दशकों से जातीय सफाया किया जा रहा है।

नोट: ये रिपोर्ट मूल रूप से अंग्रेजी में लिखी गई है। इसे पढ़ने के लिए आप इस लिंक पर क्लिक कर सकते हैं।

नवरात्रि मेले में सभी दुकानदारों को बोर्ड पर लिखना होगा अपना नाम, नगर निगम के आदेश पर भड़के रतलाम के काजी: कहा- सुप्रीम कोर्ट जाएँगे

मध्य प्रदेश के रतलाम में नगर निगम ने नवरात्रि मेले में दुकान लगाने वाले व्यापारियों को दुकान पर अपना असली नाम लिखने के निर्देश दिए हैं। जिले के व्यापारियों ने इस निर्णय का स्वागत किया है। उनका कहना है कि इससे बिजनेस में पारदर्शिता बढ़ेगी। वहीं, मुस्लिम पक्ष इसे तुगलकी फरमान बताते हुए इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में है। मुस्लिम पक्ष का नेतृत्व शहर काजी कर रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दुकानों पर अपने असली नाम लिखने का निर्णय रतलाम नगर निगम की राजस्व समिति ने लिया है। इस समिति के दिलीप गाँधी ने बुधवार (2 सितंबर 2024) को बताया कि दूसरे प्रदेशों से कई व्यापारी चूड़ी-बिंदी बेचने आते हैं। इन बाहरी दुकानदारों को मेले में कोई असुविधा न हो इसके लिए नवरात्रि मेले में दुकानदारों को उनके असली नाम लिखकर व्यापार करने की हिदायत दी गई है।

इसी के साथ 12 अक्टूबर तक चलने वाले मेले में लगने वाली दुकानों के आबंटन में भी आधार कार्ड देखे जाएँगे, जिससे कोई दुकान किसी बिचौलिए को न मिल पाए। नगर निगम के इस फैसले के खिलाफ मुस्लिम पक्ष लामबंद हो गया है। मुस्ल्मि पक्ष की तरफ से रतलाम के शहर क़ाज़ी सैयद आसिफ ने बयान जारी किया है। उन्होंने इसे उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा लिए गए फैसले जैसा ही बताया।

नगर निगम के इस निर्णय को सुप्रीम कोर्ट के फैसले का उल्लंघन बताते हुए आसिफ ने इसे अदालत में चुनौती देने की बात कही है। बकौल शहर क़ाज़ी, सूचना के अधिकार (RTI) के तहत आदेश की कॉपी मँगवाई गई है। आसिफ ने कहा कि कॉपी आने के बाद नगर निगम के निर्णय को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जाएगी। यह मुकदमा एसोसिएशन ऑफ प्रोटेक्शन फॉर सिविल राइट्स के बैनर तले की जाएगी।

मुस्लिम पक्ष ने अपने विरोध की जानकारी जिलाधिकारी को भी दे दी है। शहर काजी ने धमकी भरे अंदाज में कहा कि अगर बोर्ड लगाने के फरमान की वजह से ‘लॉ एन्ड ऑर्डर’ प्रभावित हुआ तो उसकी जिम्मेदारी नगर निगम की होगी। रतलाम के कई व्यापारियों ने नगर निगम द्वारा जारी बोर्ड पर प्रोप्राइटर का नाम लिखने के फैसले का समर्थन किया है।

कानपुर से जूता-चप्पल बेचने आए दुकानदार नसीम ने इसे एक अच्छा फैसला बताया है। नसीम का कहना है कि इस से धंधे में पारदर्शिता बढ़ेगी। बताते चलें कि हर नवरात्रि पर रतलाम के कालिका माता मंदिर में 9 दिनों का गरबा रास होता है। तब यहाँ 3 से 12 अक्टूबर तक लगने वाले मेले में देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग आते हैं। आने वाले इन लोगों में श्रद्धालु और दुकानदार दोनों शामिल हैं।

महाकाल मंदिर, सैन्य अड्डे, रेलवे स्टेशन सब उड़ाएँगे, जैश कमांडर के नाम से धमकी: कहा- मध्य प्रदेश और राजस्थान को खून से रंग देंगे, जिहादियों की मौत का बदला लेंगे

राजस्थान में हनुमानगढ़ रेलवे स्टेशन के सुपरिटेंडेंट को मंगलवार (1 अक्टूबर 2024) को चिट्ठी भेजकर कई जगह बम ब्लास्ट करने की धमकी दी गई। टारगेट के तौर पर महाकाल मंदिर सहित मध्य प्रदेश और राजस्थान के कई रेलवे स्टेशनों के नाम लिखे हैं। ब्लास्ट के लिए 30 अक्टूबर और 2 नवम्बर का समय दिया गया है। धमकाने वाले ने अपना नाम जम्मू-कश्मीर से मोहम्मद सलीम और खुद को आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का एरिया कमांडर बताया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मंगलवार की शाम हनुमानगढ़ रेलवे स्टेशन के सुपरिटेंडेंट नागेंद्र सिंह को पीले रंग का एक लिफाफा मिला। चिट्ठी डिप्टी सुपरिटेंडेंट जगत नारायण के नाम से भेजी गई थी। इस पत्र पर हनुमानगढ़ पोस्ट ऑफिस की मुहर और तारीख 30 सितंबर है। जिस डाकखाने से यह चिट्ठी आई है उसका कोड 1440 है। इसकी मुहर में पंजाबी भाषा में कुछ लिखा हुआ है। जब इसे खोला गया तो उसमें सीरियल ब्लास्ट की धमकी लिखी हुई थी।

पत्र में राजस्थान के साथ मध्य प्रदेश को भी खून से रंग देने की धमकी दी गई है। धमकी देने वाले ने खुद को जैश ए मोहम्मद का एरिया कमांडर सलीम बताया है। उसने लिखा, “हे खुदा मुझे माफ कर। जम्मू-कश्मीर में मारे जा रहे हमारे जिहादियों की मौत का बदला जरूर लेंगे। हम ठीक 30 अक्टूबर को जयपुर, जोधपुर, अलवर, बीकानेर, श्रीगंगानगर, बूंदी, उदयपुर, बीकानेर, जयपुर मंडल, मध्य प्रदेश के भी रेलवे स्टेशन, 2 नवम्बर को उज्जैन महाकाल मंदिर, जयपुर के कई धार्मिक स्थानों, रेलवे स्टेशन और सैन्य अड्डों को बम से उड़ा देंगे।”

लाइनिंग वाली कॉपी पर हाथ से लिखी गई इस चिट्ठी के अंत में खुदा हाफिज लिख गया है। रेलवे के एक कर्मचारी का दावा है कि पत्र में जैश-ए-मोहम्मद जिंदाबाद और पाकिस्तान जिंदाबाद जैसे नारे भी लिखे हुए थे। फिलहाल इस मामले में FIR दर्ज कर ली गई है। नागेंद्र सिंह ने इसकी सूचना राजकीय रेलवे पुलिस (GRP) को दी। पुलिस ने इस चिट्ठी लेकर जाँच शुरू कर दी है।

जन सुराज अब हो गई पार्टी, पटना के मैदान से प्रशांत किशोर ने किया ऐलान: ‘जय बिहार’ का दिया नारा, कहा- आवाज बंगाल तक पहुँचनी चाहिए, जहाँ बिहार के छात्रों को पीटा

अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले बिहार में एक नए राजनीतिक दल की एंट्री हो गई है। यह राजनीतिक दल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सलाहकार रहे प्रशांत किशोर ने गठित किया है। इस राजनीतिक दल का नाम ‘जन सुराज पार्टी’ होगा। इसके पहले PK के नाम से प्रसिद्ध प्रशांत किशोर जन सुराज के बैनर तले 2 मई 2022 से बिहार के गाँव-गाँव का दौरा कर रहे थे।

प्रशांत किशोर ने इसकी घोषणा करते हुए कहा, “जन सुराज अभियान 2-3 साल से चल रहा है। लोग पूछ रहे हैं कि हम पार्टी कब बनाएँगे। हम सभी को भगवान का शुक्रिया अदा करना चाहिए। आज चुनाव आयोग ने आधिकारिक तौर पर जन सुराज को जन सुराज पार्टी के रूप में स्वीकार कर लिया है।” उन्होंने जय बिहार का नारा दिया और कहा कि यह आवाज बंगाल तक पहुँचनी चाहिए, जहाँ बिहार के छात्रों को पीटा गया।

प्रशांत किशोर ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि वो दल के नेतृत्व करने वाले लोगों में शामिल नहीं होंगे। उन्होंने कहा है कि वे दल बनने के बाद भी पहले की तरह पदयात्रा करते रहेंगे। प्रशांत किशोर पहले ही घोषणा कर चुके हैं कि जन सुराज बिहार के अगले विधानसभा चुनाव में सभी 243 सीटों पर चुनाव लड़ेगा और आगामी चार विधानसभा उप-चुनाव में भी पार्टी सभी सीटों पर चुनाव लड़ेगी।

प्रशांत किशोर ने बुधवार (2 अक्टूबर 2024) को राजधानी पटना के वेटेनरी कॉलेज ग्राउंड में एक विशाल जनसभा का आयोजन किया और यही अपने पार्टी के नाम की घोषणा की। उन्होंने मंच पर पहुँचते ही ‘जय जय बिहार’ का नारा दिया। इसके बाद जन सुराज के इस कार्यक्रम में प्रार्थना गीत ‘इतनी शक्ति हमें देना दाता..’ गाया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।

प्रशांत किशोर ने मंच से कहा, “…आप सभी को इतनी जोर से ‘जय बिहार’ कहना चाहिए कि कोई आपको और आपके बच्चों को ‘बिहारी’ न कहे और यह गाली जैसा लगे। आपकी आवाज दिल्ली तक पहुंचनी चाहिए। यह बंगाल तक पहुंचनी चाहिए, जहां बिहार के छात्रों को पीटा गया। यह तमिलनाडु, दिल्ली और बॉम्बे तक पहुंचनी चाहिए, जहां भी बिहारी बच्चों के साथ दुर्व्यवहार और मारपीट की गई।”

इस दौरान वरिष्ठ वकील वाईवी गिरी ने लोगों को संबोधित किया। उनके बाद चौथे नंबर पर संबोधन के लिए पूर्व मंत्री मोनाजिर हसन मंच पर पहुँचे। उनके बाद पूर्व एमएलसी रामबली चंद्रवंशी आए। उन्होंने कहा कि बिहार में 35 सालों से बड़े भाई और छोटे भाई का राज रहा, लेकिन राज्य अपने हालात पर आँसू बहा रहा है। उन्होंने कहा कि एक साल या 10 साल लगे, बिहार के हालात को बदला जाएगा।

जन सुराज से जुड़े पूर्व केंद्रीय मंत्री देवेंद्र प्रसाद यादव ने कहा कि बिहार को दो भाइयों ने मिलकर लूटा है। ये लोग जन सुराज के आने से बौखला गए हैं। राजद वाले सबसे ज्यादा बौखलाए हुए हैं। चिट्ठी निकाल रहे हैं। उन्होंने कहा कि जन सुराज तीसरा विकल्प खड़ा कर रहा। जन सुराज पार्टी के स्थापना कार्यक्रम में प्रार्थना के बाद संविधान की प्रस्तावना पढ़ी गई।

चंपारण के एक रिटायर्ड टीचर गोरख महतो ने संविधान की प्रस्तावना पढ़ी। इस दौरान महतो ने कहा कि प्रशांत किशोर 21वीं सदी के महानायक हैं, जिन्होंने उनके जैसे एक अति पिछड़ी जाति के आदमी को इतना सम्मान दिया है। जन सुराज के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में लिखा गया है कि जन सुराज अभियान एक अहम पड़ाव पर पहुँच चुका है।

इसमें आगे लिखा है, “बिहार के लाखों लोगों के सामूहिक प्रयास का यह अभियान आज राजनीतिक दल का स्वरूप लेने जा रहा है। स्वतंत्र भारत के इतिहास में पहली बार ज्ञान की भूमि और लोकतंत्र की जननी माने जाने वाले बिहार में ऐसे दल की नींव रखी जा रही है जो किसी व्यक्ति, जाति, वर्ग या परिवार का न होकर बिहार में व्यवस्था परिवर्तन के सपने को साकार करने को संकल्पित लोगों का होगा।”

जन सुराज का संविधान

जन सुराज का जो नया संविधान तैयार किया गया है, उसमें चुनाव लड़ने के लिए न्यूनतम अर्हता का जिक्र नहीं किया गया है। संगठन से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, यह भारत के मूल संविधान के मद्देनजर ऐसा किया गया है। भारत के संविधान में सभी व्यक्ति को चुनाव लड़ने का हक और अधिकार है। पार्टियों को भारत का संविधान मानना होता है।

संगठन से जुड़े एक पदाधिकारी ने बताया कि संविधान के अनुरूप पार्टी का संविधान नहीं होने पर चुनाव आयोग के पास एक्शन लेने का अधिकार है। संविधान में न्यूनतम अर्हता का जिक्र नहीं किया गया है। इसलिए ऐसा किया गया है। लोक प्रतिनिधित्व 1951 के अनुच्छेद-2 में कहा गया है कि राजनीतिक दल का उद्देश्य संविधान के अनुरूप ही होना चाहिए।

जन सुराज के सिलेक्शन कमेटी के सदस्य गणेश राम ने न्यूनतम अर्हता को पार्टी के संविधान में शामिल नहीं किए जाने पर कहा कि इसे भारत के मूल संविधान को देखकर तैयार किया गया है। गणेश राम ने आगे कहा, “यह भी तो हो सकता है कि हम टिकट वितरण में इसे लागू करें? प्रशांत किशोर की कोशिश है कि बिहार में अंगूठा छाप नेता लोगों पर राज न कर पाए।”

पार्टी सूत्रों के हवाले से टीवी 9 भारतवर्ष ने कहा है कि संविधान में दलित, पिछड़े और आदिवासी समुदाय में शिक्षा की कमी को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। संविधान में अगर न्यूनतम अर्हता को शामिल किया जाता तो बाकी पार्टियाँ इसे दलित और पिछड़ा विरोधी घोषित करती। प

झारखंड में रेलवे ट्रैक को बम से उड़ाया, कानपुर में पटरी पर रख दिया आग बुझाने वाला सिलेंडर: लोको पायलट की सतर्कता से बड़ा हादसा टला

हाल में ट्रेनों को बेपटरी करने की साजिश रचे जाने की कई घटनाएँ सामने आई हैं। अब इसी तरह की कोशिश एक बार फिर कानपुर में देखने को मिली है। यहाँ रेलवे ट्रैक पर आग बुझाने वाला सिलेंडर रखा हुआ मिला है। वहीं झारखंड के साहिबगंज में रेलवे ट्रैक को बम धमाके से उड़ा दिया गया है। दोनों घटना की जाँच चल रही है।

पहला मामला उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात जिले से है। यहाँ बुधवार (2 अक्टूबर 2024) को एक मालगाड़ी सुबह 7 बजे के आसपास अम्बियापुर के पास से गुजर रही थी। तभी लोको पायलट को हावड़ा-दिल्ली डाउनलाइन पर एक अग्निशमन यंत्र पड़ा दिखा। मालगाड़ी के पायलट ने ट्रेन रोक दी और कंट्रोल रूम को सूचित किया। जीआरपी और RPF की टीमें फ़ौरन ही घटनास्थल पर पहुँच कर जाँच में जुट गईं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अग्निशमन यंत्र काफी पुराना है। इस पर लिखे स्टीकर आदि नोच दिए गए हैं। प्रथम दृष्टया पुलिस ने इसे किसी की शरारत माना है। बताते चलें कि रविवार (22 सितंबर 2024) को भी कानपुर देहात में रेलवे ट्रैक पर सिलेंडर पाया गया था। तब भी ट्रेन ड्राइवर ने सतर्कता से गाड़ी रोक कर उसे हटा दिया था। अभी तक उस मामले में भी किसी की गिरफ्तारी नहीं हो पाई है।

रेल ट्रैक को बम से उड़ाया

दूसरा मामला झारखंड के साहिबगंज से है। यहाँ मंगलवार-बुधवार की रात बदमाशों ने एनटीपीसी एमजीआर रेलवे ट्रैक को बम से उड़ा दिया है। यह जगह बरहेट थानाक्षेत्र के गाँव रांगा के पास स्थित घुट्टू टोला की है। रिपोर्ट्स के अनुसार जोरदार ब्लास्ट से रेल की पटरी का 470 सेंटीमीटर का टुकड़ा 39 मीटर दूर जा कर गिरा मिला। जहाँ ब्लास्ट किया गया, वहाँ 3 फ़ीट गहरा गड्ढा हो गया। मरम्मत होने तक ट्रैक पर ट्रेनों का परिचालन फ़िलहाल बंद कर दिया गया है।

रेलवे के नाइट गार्ड जितेंद्र कुमार के मुताबिक घटना आधी रात के समय लगभग 12 बजे की है। जिस लाइन को विस्फोट से उड़ाया गया है, वह सिर्फ NTPC के लिए कोयला ले जाने के काम में आती है। इसे ललमनिया फरक्का MGR लाइन भी कहते हैं। कुछ लोगों को ये कोयला चोरों की करतूत लग रही है लिस बल मौके पर पहुँच कर छानबीन में जुटी हुई है।

गो हत्या के विरोधी थे MK गाँधी… लेकिन गोवध रोकने के लिए कानून बनाने का करते थे विरोध: खुद ही कंफ्यूज थे बापू या कर रहे थे मुस्लिम तुष्टिकरण?

भारत में गो-हत्या एक बेहद संवेदनशील मुद्दा है। यह मुद्दा आज से नहीं, बल्कि सदियों से है। मुगलकाल में भी इसको लेकर तमाम विरोध एवं युद्ध होते रहे हैं। ब्रिटिश भारत में भी गो-हत्या को लेकर विरोध प्रदर्शन होते रहे हैं। महात्मा गाँधी भी गो-हत्या पर प्रतिबंध एवं गो-संरक्षण के प्रबल समर्थक थे। हालाँकि, मुस्लिम इससे नाराज ना हो जाएँ, इसके कारण वे इस पर प्रतिबंध के खिलाफ थे।

देश में गो-हत्या पर प्रतिबंध लगाने की माँग को लेकर देश भर से लोगों के पत्र एवं टेलीग्राम महात्मा गाँधी को मिलते रहते थे। हिंदुओं ने ऐसे लगभग एक लाख पत्र भेजकर गो-हत्या पर प्रतिबंध लगाने की माँग की थी। तब महात्मा गाँधी ने 25 जुलाई 1947 ने डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद को इसको लेकर एक जवाब दिया था।

महात्मा गाँधी ने माना था कि गाय हिंदुओं के लिए पवित्र है, लेकिन बावजूद उन्होंने कहा था कि वे किसी को भी गायों का वध नहीं करने के लिए मजबूर नहीं कर सकते और ना ही वे करेंगे। उन्होंने कहा था कि जब तक कि जब तक गो-हत्या करने वाले (विशेष रूप से मुस्लिमों के संदर्भ में) में खुद नहीं ऐसा करने के लिए खुद तैयार ना हों।

अपने जवाब में महात्मा गाँधी ने कहा था, “मैं किसी को भी गायों का वध नहीं करने के लिए कैसे मजबूर कर सकता हूँ, जब तक कि वह खुद ऐसा करने के लिए तैयार ना हों? ऐसा नहीं है कि भारतीय संघ में केवल हिंदू ही हैं। यहाँ मुस्लिम, पारसी, ईसाई और अन्य धार्मिक समूह के लोग भी रहते हैं।”

एक तरफ महात्मा गाँधी कहते थे कि वे गो-हत्या के विरोधी हैं, दूसरी तरफ वे कहते थे कि गो-हत्या नहीं करने के लिए वे किसी को मजबूर नहीं कर सकते हैं। हालाँकि, उन्होंने अपने जीवन में बार-बार गाय की रक्षा की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने भारत के हिंदुओं को न केवल गो-रक्षा या गो-सेवा में शामिल होने के लिए प्रेरित किया।

महात्मा गाँधी ने कहा, “मुस्लिमों पर गाय का वध करने का कोई धार्मिक दायित्व नहीं है। जहाँ तक ​​मैं कुरान को समझ पाया हूँ, उसमें किसी भी जीवित प्राणी का बिना कारण के जीवन लेना पाप बताया गया है। गाय को मारना साथी देशवासियों और मित्रों, हिंदुओं को मारना है। कुरान कहता है कि जो व्यक्ति अपने निर्दोष पड़ोसी का खून बहाता है, उसके लिए कोई स्वर्ग नहीं हो सकता।”

इसी तरह यंग इंडिया में लिखते हुए मोहनदास करमचंद गाँधी ने गौ रक्षा की आवश्यकता और महत्व के बारे में कहा है, “हिंदू धर्म का मुख्य तथ्य गौ रक्षा है। मेरे लिए गौ रक्षा मानव विकास में सबसे अद्भुत घटनाओं में से एक है। यह मनुष्य को इस प्रजाति से परे ले जाती है। मेरे लिए गाय का मतलब संपूर्ण उप-मानव दुनिया है।”

कृषि क्षेत्र को लेकर उन्होंने कहा, “गाय के माध्यम से मनुष्य को सभी जीवित प्राणियों के साथ अपनी पहचान का एहसास करने का आदेश दिया गया है। गाय को देवत्व के लिए क्यों चुना गया, यह मेरे लिए स्पष्ट है। भारत में गाय सबसे अच्छी साथी थी। वह बहुत कुछ देने वाली थी। उसने न केवल दूध दिया, बल्कि उसने कृषि को भी संभव बनाया।”

महात्मा गाँधी ने 6 अक्टूबर 1921 को यंग इंडिया में लिखे लेख में आगे लिखा, “गौ रक्षा दुनिया को हिंदू धर्म की देन है। और हिंदू धर्म तब तक जीवित रहेगा जब तक गाय की रक्षा करने वाले हिंदू हैं… हिंदुओं का मूल्यांकन उनके तिलक से नहीं, मंत्रों के सही उच्चारण से नहीं, उनके तीर्थयात्राओं से नहीं, जाति के नियमों के उनके सबसे सख्त पालन से नहीं, बल्कि गाय की रक्षा करने की उनकी क्षमता से किया जाएगा।”

इसी तरह दिसंबर 1927 में मद्रास में आयोजित कॉन्ग्रेस के वार्षिक अधिवेशन में महात्मा गाँधी ने एक मसौदा प्रस्ताव पर अपनी सहमति दी थी। इसमें एक पंक्ति थी, जिसमें कहा गया था, “मुसलमानों को गाय काटने की सामान्य अनुमति दी गई है और गो-रक्षा के सवाल को सुविधाजनक रूप से नजरअंदाज कर दिया गया है!”

गाँधीजी उस रात बोले, “मैंने एक बड़ी गलती की है। मैंने मसौदा ठीक से नहीं पढ़ा। उस मसौदे में मुसलमानों को गाय काटने की सामान्य अनुमति दी गई है और गो रक्षा के सवाल को सुविधाजनक रूप से नजरअंदाज कर दिया गया है! मैं इसे कैसे बर्दाश्त कर सकता हूँ? अगर वे गाय काटते हैं तो हम उन्हें बलपूर्वक नहीं रोक सकते। यह सच है, लेकिन हम कम से कम प्रेमपूर्वक सेवा करके उनका विश्वास जीत सकते हैं और उन्हें अपना दृष्टिकोण समझा सकते हैं, है न?”

महात्मा गाँधी गो-सेवा को हिंदू धर्म का सबसे महत्वपूर्ण अंग मानते हुए भी उन्होंने गो-हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध के खिलाफ रहे। उन्होंने कहा है, “मैं गो-रक्षा को हिंदू धर्म का मुख्य तत्व मानता हूँ, लेकिन मैं इस बात को कभी नहीं समझ पाया कि इस मामले में मुसलमानों के प्रति इतनी नफरत क्यों है। हम रोज़ाना अंग्रेजों की तरफ़ से होने वाले कत्लेआम के बारे में कुछ नहीं कहते।”

गो-हत्या को लेकर हिंदुओं के भड़कने को लेकर महात्मा गाँधी ने कहा है, “जब कोई मुसलमान गाय काटता है तो हमारा गुस्सा भड़क उठता है। गाय के नाम पर जितने भी दंगे हुए हैं, वे सब बेकार की कोशिशें हैं। उन्होंने एक भी गाय नहीं बचाई, बल्कि इसके विपरीत मुसलमानों की कमर कस दी है और इसके परिणामस्वरूप और ज़्यादा कत्लेआम हुआ है।”

महात्मा गाँधी ने कहा कि मुसलमानों के खिलाफ हिंदुओं की हमेशा से यही शिकायत रही है कि मुसलमान गोमांस खाते हैं और बकरीद के दिन जानबूझकर गाय की हत्या करते हैं। उन्होंने कहा कि हिंदू मुसलमानों को मांस या गोमांस खाने से परहेज करने के लिए बाध्य नहीं कर सकते। शाकाहारी हिंदू अन्य हिंदुओं को मछली, मांस या मुर्गी खाने से परहेज करने के लिए बाध्य नहीं कर सकते।

महात्मा गाँधी कहते हैं, “गोरक्षा की समस्या केवल गैर-हिंदुओं, विशेषकर मुसलमानों को गोमांस खाने और गोहत्या से रोकने में है। यह बेतुका लगता है। गाय को मारे जाने पर शायद ही किसी की आत्मा को पीड़ा नहीं होती है। लेकिन मुझे क्या करना चाहिए? क्या मुझे अपना धर्म स्वयं निभाना है या किसी और से निभाना है? दूसरों को ब्रह्मचर्य का उपदेश देने से क्या लाभ होगा, यदि मैं स्वयं ही दुराचार में डूबा हुआ हूँ?”

इस तर्क को आगे बढ़ाते हुए महात्मा गाँधी कहते हैं, “मान लीजिए कि मैं स्वयं गाय को नहीं मारता, तो क्या यह मेरा कर्तव्य है कि मैं मुसलमानों को उनकी इच्छा के विरुद्ध ऐसा करने के लिए बाध्य करूँ? हम भूल जाते हैं कि ऐसे हिंदू भी हैं, जो खुशी-खुशी गोमांस खाते हैं। मैंने रूढ़िवादी वैष्णवों को जाना है, जो डॉक्टरों द्वारा बताए जाने पर अर्क खाते हैं।”

महात्मा गाँधी खाने की स्वतंत्रता के हिमायती थे। वे कहते थे, “मैं यह मानता हूँ कि मुसलमानों को गायों को मारने की पूरी आज़ादी होनी चाहिए, अगर वे चाहें तो। हालाँकि, यह ध्यान रखना होगा कि इससे उनके हिंदू पड़ोसियों की संवेदनशीलता को ठेस न पहुँचे। मुसलमानों को गायों को मारने की पूरी आज़ादी देना सांप्रदायिक सद्भाव के लिए अपरिहार्य है, और गाय को बचाने का यही एकमात्र तरीका है।”

महात्मा गाँधी कहते थे, “गाय को बचाने के लिए मुसलमान से दुश्मनी पालना गाय को मारने का पक्का तरीका है और यह दुगुना पाप है। किसी हिंदू द्वारा गाय को मारने से हिंदू धर्म नष्ट नहीं होगा। हिंदू का धर्म गाय को बचाना है, लेकिन गैर-हिंदू पर बल प्रयोग करके गाय को बचाना उसका धर्म नहीं हो सकता। अगर कोई मुसलमान सोचता है कि उसे गाय को मारना चाहिए तो हिंदू बलपूर्वक उसके हाथ क्यों रोकेगा?ठ

गाँधी कहते थे, “क्यों न वह (हिंदू) उसके (मुस्लिमों के) सामने घुटनों के बल गिरकर उससे विनती करे? लेकिन हम ऐसा कुछ नहीं करेंगे। तो फिर, भगवान एक दिन मुसलमानों और हिंदुओं से वह करवाएगा जो हम आज नहीं कर सकते। अगर आप ईमानवाले हैं, तो मैं आपसे विनती करता हूँ कि आप अपने आप में सिमट जाएँ और अपने अंदर रहनेवाले से प्रार्थना करें कि वह आपके हाथों को गलत कामों से दूर रखे और उन्हें सही काम करने के लिए प्रेरित करे।”

महात्मा गाँधी किसी मुस्लिम को गोहत्या से दूर रखने को उसे जबरदस्ती हिंदू धर्म में परिवर्तित करने की तरह मानते थे। वे कहते थे कि अगर भारत में हिंदुओं की सरकार बनी तो भी कानून बनाकर मुसलमान अल्पसंख्यकों को गोहत्या से रोकना गलत होगा। किसी व्यक्ति के धार्मिक आचरण को उस व्यक्ति पर लागू करना स्पष्ट रूप से गलत है, जो उस धर्म को नहीं मानता।

महात्मा गाँधी अलग तरह से सोचते थे। वे सोचते थे कि जैसे वे हैं, वैसी सारी दुनिया है। वे कहते थे, “हिंदुओं को गाय के बारे में मुसलमानों की चिंता करना बंद कर देना चाहिए, क्योंकि उन्हें मुसलमानों से किसी तरह की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। उन्हें मुसलमानों की माँग को मान लेना चाहिए। यदि गोहत्या पर रोक बलपूर्वक नहीं, बल्कि मुसलमानों और अन्य लोगों द्वारा जानबूझ कर स्वेच्छा से की गई आत्म-त्याग की कार्रवाई के रूप में लगाई जाए, तो यह हिंदू धर्म के लिए सम्मान की बात होगी।”

ईरान ने करीब 200 मिसाइलें दागी, पर केवल 1 व्यक्ति की हुई मौत, वह भी निकला फिलस्तीनी: आयरन डोम और बंकर बन गए इजरायल के सुरक्षा कवच

इजरायल पर मंगलवार (1 अक्टूबर, 2024) को हुए ईरान के हमले में एक फिलिस्तीन के व्यक्ति की मौत हो गई। इजरायल के जेरिको के पास वेस्ट बैंक के नुइमा शहर में उस पर इंटरसेप्टेड मिसाइल का हिस्सा गिर गया। मृतक की पहचान हो गई है और स्पष्ट हो गया है कि उसकी मौत ईरानी हमले में हुई।

मृतक फिलिस्तीनी गाजा के जबालिया इलाके का रहने वाला था। मृतक का नाम समेह असाली है और वह 37 वर्ष का था। फिलिस्तीनी प्रशासन ने बताया है कि उनके इलाके में रॉकेट और मिसाइल के हिस्से गिरने के कारण नुकसान हुआ है और एक जान भी गई है। बताया गया है कि समेह असाली एक कामगार था।

इसके अलावा, उसी रॉकेट के टुकड़े लगने के कारण 4 फिलिस्तीनी घायल भी हुए हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, तीन बच्चों के पिता समेह अल-असाली उन सैकड़ों गाजा मजदूरों में से एक है, जिनके पास इजरायली वर्क परमिट है। बताया गया कि समेह 7 अक्टूबर, 2023 को इजरायल के खिलाफ हमास के हमले के दौरान इजरायल में फंस गया था और उसने वेस्ट बैंक में शरण ली थी।

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में दिखता है कि अल-असाली के शव के पास 1 मीटर लंबा मिसाइल का टुकड़ा जमीन पर पड़ा हुआ है और उसे चादर से ढका हुआ है। इस घटना का एक वीडियो भी CCTV पर रिकॉर्ड हो गया जो कि अब लोग साझा कर रहे हैं।

वीडियो में दिखता है कि समेह असाली नुइमा गाँव की सड़क पर टहल रहा है, इसी दौरान आसमान से ईरानी मिसाइल का एक बड़ा टुकड़ा गिरता हुआ दिखाई देता है। मिसाइल का टुकड़ा सीधे समेह अल-असाली के ऊपर गिरा, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

इजरायली एजेसियों ने बताया है कि ईरानी हमले के कारण तेल अवीव के भीतर केवल 2 लोग ही घायल हुए हैं जबकि बाकी कुछ लोगों को हलकी फुलकी चोटें आई हैं। इजरायल और ईरान के बीच गहराते संकट के बीच 1 अक्टूबर को युद्ध के बादल छा गए। ईरान ने इस दौरान इजरायल पर लगभग 200 मिसाइल दागीं।

ईरानी हमले से बचने के लिए इजरायल के लोगों ने बंकरों में शरण ली थी। बताया गया कि ईरान द्वारा दागी गईं 181 मिसाइलों में से ज्यादातर को इजरायल के आयरन डोम ने हवा में ही मार गिराया। यह भी सामने आया कि मिसाइलों को मार गिराने में अमेरिकी सेनाओं ने भी सहायता की।

इससे पहले सोमवार को इजरायल ने दक्षिणी लेबनान के भीतर कई गाँवों में हमले किए। लेबनान के इन इलाकों के भीतर इजरायल की थल सेना घुसी थी। यह हमला हिज़्बुल्लाह प्रमुख हसन नसरल्लाह के बंकर पर हमले में मारे जाने के कुछ ही दिनों बाद हुआ।