उत्तर प्रदेश में हाल ही में रेलवे को निशाना बनाकर की जा रही घटनाओं ने सुरक्षा एजेंसियों को चौकस कर दिया है। रेलवे ट्रैक पर जानबूझकर सरिया, लकड़ी, सिलेंडर, साइकिल फेंकने जैसी घटनाएँ गहरी साजिश का संकेत दे रही हैं। ललितपुर से लेकर संत कबीर नगर और कानपुर से लेकर मध्य प्रदेश तक ऐसी कई वारदातें सामने आ चुकी हैं। ताजे मामले में ट्रेन के सामने साइकिल फेंककर नुकसान पहुँचाने की कोशिश की गई है, तो एक अन्य मामले में ट्रेन के सामने सरिया रख दिया गया।
संतकबीर नगर: साबरमती एक्सप्रेस को बनाया निशाना
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, संतकबीर नगर में एक साइकिल साबरमती एक्सप्रेस के सामने फेंकी गई, जिससे ट्रेन का इंजन क्षतिग्रस्त हो गया। लोको पायलट ने इमरजेंसी ब्रेक लगाकर ट्रेन को तुरंत रोका, लेकिन इंजन में साइकिल फँस गई। रेल पुलिस के अनुसार शनिवार की सुबह करीब 6:30 बजे सुबह गोरखपुर से लखनऊ की ओर जा रही साबरमती एक्सप्रेस खलीलाबाद के पुराना आरटीओ कार्यालय के पास से गुजर रही थी। इस दौरान अज्ञात व्यक्ति ट्रेन के आगे साइकिल फेंककर भाग निकला। ट्रेन में फंसी साइकिल देख चालक ने सात सौ मीटर आगे जाकर ट्रेन रोक कर क्षतिग्रस्त हुई साइकिल निकाली। इसके बाद ट्रेन आगे रवाना हुई।
एसपी सत्यजीत गुप्ता सहित कोतवाली के साथ कई थानों के एसएचओ मौके पर पहुँचे। साथ ही जीआरपी के एसओ, सीओ, आरपीएफ के अधिकारी घटना स्थल के आस पास साइकिल फेंकने वाले की तलाश कर रहे हैं। हालाँकि इस घटना में किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई, लेकिन यह घटना रेलवे की सुरक्षा पर सवाल खड़ा करती है। यह घटना स्पष्ट करती है कि रेलवे के सुरक्षा तंत्र को और मजबूत करने की आवश्यकता है। पुलिस ने इसे बच्चों की शरारत मानकर जाँच की, लेकिन इससे बड़ी साजिश की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।
ललितपुर: लोहे की छड़ से पातालकोट एक्सप्रेस को पलटाने की साजिश
ललितपुर में पातालकोट एक्सप्रेस के साथ भी एक गंभीर घटना घटी, जब ट्रैक पर रखी गई लोहे की छड़ ट्रेन के इंजन में फंस गई। ट्रेन संख्या 14624 पातालकोट एक्सप्रेस के इंजन में लोहे की सरिया फंस गई. जिससे चिंगारी निकलने लगी। गेटमैन की सूचना पर ट्रेन के लोको पायलट ने इमरजेंसी ब्रेक लगाकर बड़ी दुर्घटना होने से बचा लिया। पुलिस की जाँच में पता चला कि युवक सत्यम यादव ने रेलवे की कंस्ट्रक्शन साइट से छड़ चुराई थी और भागते समय ट्रेन के डर से इसे ट्रैक पर छोड़ दिया। इस घटना ने रेलवे की सुरक्षा में चूक को उजागर किया है और यह संकेत देती है कि ऐसी घटनाएँ सुरक्षा के बड़े खतरे का हिस्सा हो सकती हैं।
वारदातों के पीछे का मकसद क्या?
रेलवे को निशाना बनाकर की जा रही इन घटनाओं का मकसद केवल शरारत नहीं हो सकता। यह घटनाएँ आतंकी साजिशों का हिस्सा भी हो सकती हैं, जिनका मकसद भारत को बड़ा नुकसान पहुँचाना हो सकता है। ऐसे में सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह जरूरी है कि वे इन वारदातों के पीछे के असली मकसद को समझें और इसके अनुसार कार्रवाई करें।
डासना देवी मंदिर के महंत यति नरसिंहानन्द को गुस्ताख़ करार देते हुए मुस्लिम भीड़ ने शुक्रवार (4 अक्टूबर 2024) को देश के कई हिस्सों में हिंसा की। इसमें UP के बुलंदशहर और गाजियाबाद, महाराष्ट्र का अमरावती और उत्तराखंड का हरिद्वार शामिल हैं। अमरावती में भीड़ द्वारा थाने पर किए गए हमले में कई पुलिसकर्मी घायल हो गए हैं। कई सरकारी वाहनों को तोड़ डाला गया है।
अमरवती में कई पुलिसकर्मी घायल
जुमे की नमाज़ के बाद हुए हिंसक प्रदर्शनों में सबसे अधिक प्रभावित महाराष्ट्र का अमरावती रहा। यहाँ के नागपुरी गेट पुलिस स्टेशन पर शुक्रवार रात लगभग 8:30 पर मुस्लिम समुदाय के कुछ लोग पहुँचे। इन्होंने यति नरसिंहानंद के खिलाफ शिकायती पत्र देकर केस दर्ज करने की माँग शुरू कर दी। पुलिस ने इस शिकायत पर FIR दर्ज कर ली।
अभी पुलिस जरूरी कार्रवाई कर ही रही थी कि हजारों की तादाद में पहुँची मुस्लिम भीड़ ने थाने को घेर लिया और उन्मादी नारे लगाने लगी। पुलिसकर्मी भीड़ को समझाने की कोशिश ही कर रहे थे कि अचानक पत्थरबाजी शुरू हो गई। इस पथराव के चलते कुल 21 पुलिसकर्मी घायल हो गए। हालात काबू करने के लिए अतिरिक्त फ़ोर्स को बुलाया गया।
फोर्स के आने तक हमलावर भीड़ ने पुलिस के 10 वाहनों को तोड़ डाला। बाद में पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर किया। इस मामले में पुलिस ने 1200 उपद्रवियों पर केस दर्ज कर लिया है। कुछ हमलावरों को भी चिन्हित किया गया है। इन सभी पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 299, 302 और 197 के तहत कार्रवाई की गई है।
BIG NEWS ? Mob pelts stones on Police in Maharashtra's Amrawati demanding action against Yati Narsinghanand.
21 cops injured in stone-pelting at Amravati. 10 Police vans damaged.
Case registered against 1200 people, 26 people identified.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, CCTV फुटेज और अन्य माध्यमों से हमलावरों की पहचान की जा रही है। अब तक 26 हमलावरों को चिन्हित कर लिया गया है। इलाके में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) लागू कर दी गई है। इसके तहत 5 या उससे अधिक लोगों के जुटने पर रोक लगा दी गई है।
हरिद्वार में अल्लाह हु अकबर के नारे
मज़हबी उन्माद की लम्बी श्रृंखला की चपेट में उत्तराखंड का हरिद्वार भी आया। यहाँ दिन में यति नरसिंहानंद पर एक्शन की माँग की आड़ में जुटी मुस्लिम भीड़ ने भगवा वस्त्र का पुतला बनाया और इस पुतले को आग के हवाले करद दिया। इस दौरान जमकर नारेबाजी भी की गई। इसी के साथ रात में एक अन्य मुस्लिम भीड़ ने चौराहे पर जुटकर नारेबाजी की।
"All@h Hu Akbar.. S@r Tαn Se Jυdα" slogans being raised by huge crowd of IsIвmists – Can you believe This is happening in Holiest of Holy Hindu Places Haridwar?? #Haridwar#Uttarakhandpic.twitter.com/4oBkTQ8E4b
इस नारेबाजी का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में दिख रहा है कि मुस्लिम भीड़ ‘अल्लाह हु अकबर’ जैसे भड़काऊ नारे के साथ-साथ ‘सिर तन से जुदा’ के नारे भी लगा रही है। यह नारेबाजी पुलिस के सामने ही की गई है। वीडियो में दिख रहा है कि पुलिसकर्मी भीड़ की ओर से लौटते दिख रहे हैं।
सहारनपुर में भी पुलिस चौकी पर हमले का प्रयास
गुस्ताखी की आड़ में हो रहे सिलसिलेवार उपद्रवों की लिस्ट में अब उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले का नाम भी जुड़ गया है। यहाँ के कोतवाली देहात क्षेत्र में शेखपुर कदीम पुलिस चौकी पर 6 अक्टूबर (रविवार) को एक मुस्लिम भीड़ यति नरसिंहानंद के खिलाफ ज्ञापन देने पहुँची थी। पुलिस इस ज्ञापन पर कार्रवाई कर ही रही थी कि अचानक भीड़ में शामिल कुछ लोगों ने हिंसा करनी शुरू कर दी। भीड़ द्वारा नारेबाजी की गई और पुलिस चौकी पर उपद्रव का प्रयास हुआ।
भीड़ की हिंसा का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। पुलिस ने फ़ौरन ही बल प्रयोग कर के हिंसक हो चुकी भीड़ को तितर-बितर किया। सहारनपुर जिले के पुलिस अधीक्षक नगर ने बताया कि केस दर्ज कर के जरूरी कानूनी कार्रवाई की जा रही है। कुछ हमलावरों को चिन्हित भी कर लिया गया है जिनकी तलाश में दबिश दी जा रही है। फ़िलहाल मौके पर हालात सामान्य बताए जा रहे हैं।
मंदिर पर हमला करने वालों का एनकाउंटर हो
उधर, गाजियाबाद में डासना मंदिर पर उन्मादी भीड़ के हमले के बाद आसपास के लोगों में आक्रोश पनप रहा है। शनिवार (5 अक्टूबर) को लोनी से भाजपा विधायक नन्द किशोर गुर्जर मंदिर पहुँचे। उन्होंने हमलावरों का एनकाउंटर करने की माँग की। भाजपा MLA ने कहा कि बेहतर होता कि हमले के दौरान पुलिस लाठीचार्ज के बजाय गोलियाँ बरसातीं।
डासना देवी मंदिर पर पहुंच कर लोनी विधायक नंद किशोर गुर्जर का सुनिए बयान
नंद किशोर के मुताबिक, नरसिंहानंद का बयान दुनिया भर में में हो रहे हिन्दुओं के साथ इस्लामी अत्याचारों की वजह से आया है। मंदिर घेरने को उन्होंने सनातन और हिन्दुओं की आस्था पर हमला बताया। विधायक का दावा है कि हमले में अधिकतर लोग बाहरी थे। नंदकिशोर ने कहा, “यहाँ का मुसलमान तो भगवान राम को मानने वाला है। ये बेचारे को बलत्कार से बचने के लिए मुस्लिम बन गए।”
उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले में 55 साल के निसार कुरैशी पर 9 साल की एक हिन्दू बच्ची से बलात्कार करने का आरोप लगा है। पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज करके निसार कुरैशी को गिरफ्तार कर लिया है। उस पर पॉक्सो एक्ट सहित अन्य धाराओं में कार्रवाई की गई है। आरोपित निसार मोहल्ले में ठेला लगाकर फल बेचा करता था। घटना गुरुवार (3 अक्टूबर 2024) की है।
जिले के ढेबरुआ थाना क्षेत्र के बढ़नी बाजार में 9 साल की बच्ची अपने परिवार के साथ रहती है। बच्ची बेहद गरीब परिवार की है, जिसका पिता रिक्शा चलाकर परिजनों का भरण-पोषण करता है। बच्ची के पिता ने 3 अक्टूबर को थाने में तहरीर देकर बताया कि उसकी बेटी रोते हुए आई तो उसने इसकी वजह पूछा। तब बच्ची ने बताया कि निसार कुरैशी ने उसके साथ रेप किया है।
निसार बच्ची को एक सरकारी स्कूल के पीछे ले जाकर उसके साथ रेप किया। पुलिस ने पीड़िता का बयान दर्ज कर लिया है। रेप के कारण तबीयत बिगड़ने के बाद पीड़ित बच्ची को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। वहीं, बच्ची की काउंसिलिंग करवाई गई। कहा जा रहा है कि निसार ने पीड़िता के साथ पहले भी छेड़खानी की थी।
पुलिस ने निसार कुरैशी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 65(2) और पॉक्सो एक्ट के सेक्शन 5 (ड)/6 के तहत FIR दर्ज की है। ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है। निसार कुरैशी को जैसे ही जानकारी मिली कि उसके खिलाफ थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई है तो वह फरार हो गया। इसके बाद पुलिस ने उसे दबोचने के लिए टीम गठित कर दिया।
आरोपित मोहम्मद निसार कुरैशी की गिरफ्तारी के लिए टीम ने छापेमारी शुरू कर दी। आखिरकार शुक्रवार (4 अक्टूबर 2024) को निसार कुरैशी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। उसकी गिरफ्तारी एक नहर के पास से हुई। वह कहीं भागने की फिराक में लगा हुआ था। पुलिस ने आरोपित को जेल भेज दिया है। मामले में पुलिस द्वारा जाँच व अन्य जरूरी कार्रवाई की जा रही है।
पश्चिम बंगाल के कोलकाता में जूनियर डॉक्टर्स की ओर से शुरू किए गए आमरण अनशन ने एक बार फिर से राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं और डॉक्टरों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरजी कर मेडिकल कॉलेज में 9 अगस्त को एक महिला ट्रेनी डॉक्टर के साथ हुए बलात्कार और उसकी हत्या के खिलाफ जूनियर डॉक्टर्स न्याय की माँग कर रहे हैं। यह मामला अब राज्य सरकार के लिए सिरदर्द बन चुका है, क्योंकि डॉक्टर्स का गुस्सा शाँत होने का नाम नहीं ले रहा है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जूनियर डॉक्टर्स का आरोप है कि राज्य सरकार उनकी माँगों को लगातार नजरअंदाज कर रही है। डॉक्टरों ने 21 सितंबर को 42 दिनों के लंबे विरोध प्रदर्शन को समाप्त किया था, जब सरकार ने उनकी माँगों पर बातचीत करने का वादा किया था। इसके बाद डॉक्टर्स ने अपनी ड्यूटी पर लौटने का निर्णय लिया, लेकिन शनिवार (05 अक्टूबर 2024) शाम को उन्होंने आमरण अनशन शुरू कर दिया।
Kolkata, West Bengal: Junior doctors of the West Bengal Junior Doctors Front sit on a hunger strike regarding RG Kar medical college incident pic.twitter.com/dJSdLmpDKi
उनकी माँगें हैं—आरजी कर मेडिकल कॉलेज में डॉक्टर की बलात्कार और हत्या की घटना पर त्वरित न्याय हो, स्वास्थ्य सचिव नारायण स्वरूप निगम को हटाया जाए, सभी अस्पतालों में सुरक्षा उपाय मजबूत किए जाएँ, और चिकित्सा संस्थानों में बुनियादी सुविधाओं में सुधार हो। उनकी सबसे महत्वपूर्ण माँग यह है कि अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में केंद्रीयकृत रेफरल प्रणाली लागू की जाए, ताकि अस्पतालों में बेड और इलाज की सुविधाओं की उपलब्धता पारदर्शी तरीके से सुनिश्चित हो सके।
डेडलाइन खत्म, अनशन शुरू
शुक्रवार (4 अक्टूबर 2024) को धर्मतला स्थित डोरीना क्रॉसिंग पर धरने पर बैठे डॉक्टर्स ने राज्य सरकार को अपनी माँगें पूरी करने के लिए 24 घंटे की डेडलाइन दी थी, लेकिन जब सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया तो उन्होंने शनिवार (05 अक्टूबर 2024) की शाम को अनशन शुरू कर दिया।
जूनियर डॉक्टर्स की ओर से जारी बयान में कहा गया, “हमने सरकार को 24 घंटे का समय दिया था, लेकिन हमारी माँगें पूरी नहीं की गईं। अब तक छह डॉक्टर्स ने आमरण अनशन शुरू किया है। हम ड्यूटी पर जाएँगे, लेकिन कुछ भी नहीं खाएँगे। अगर किसी डॉक्टर की तबियत बिगड़ती है, तो इसके लिए सरकार जिम्मेदार होगी।”
अनशन पर बैठीं डॉक्टर सायंतनी घोष हाजरा ने कहा, “जब तक हमारी मानवीय माँगों को पूरा नहीं किया जाता, हम यहाँ से नहीं हटेंगे। ‘अभया’ के साथ जो हुआ, वह किसी के साथ भी हो सकता था। यह हमारी ज़िम्मेदारी है कि अब और ‘अभया’ न हों। हम भूख हड़ताल पर हैं, लेकिन वहीं दूसरी ओर हम देख रहे हैं कि एक नाबालिग लड़की के साथ बलात्कार और हत्या हो गई… 9 अगस्त के बाद भी कई मामले सामने आए हैं, फिर भी सिर्फ हम छह लोग यहाँ अनशन पर बैठे हैं, जबकि बाकी डॉक्टर्स नवरात्रि के दौरान अपनी ड्यूटी पर लौट चुके हैं।”
#WATCH | Esplanade, Kolkata: Dr Sayantani, West Bengal Junior Doctors Front, says, "Till the time our demands of justice on humanitarian grounds is not fulfilled, we will sit here… Before her rape and murder, Abhaya went through multiple threats… Anyone could have been… https://t.co/w5BXdqwjE1pic.twitter.com/RXSi6AH7qK
जूनियर डॉक्टर्स का यह बयान राज्य सरकार के स्वास्थ्य तंत्र पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। वे अस्पतालों में मौजूदा बुनियादी सुविधाओं की कमी, जैसे सीसीटीवी कैमरों की अनुपस्थिति, ऑन-कॉल रूम की हालत और सुरक्षा की घोर लापरवाही पर भी रोष जता रहे हैं।
डॉक्टरों का यह भी आरोप है कि कोलकाता पुलिस ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया और उन्हें धरनास्थल पर मंच लगाने की अनुमति नहीं दी। पुलिस का दावा था कि यह इलाका ट्रैफिक के लिए अहम है, जिससे ट्रैफिक में दिक्कत हो सकती है। जिसके बाद डॉक्टरों ने पुलिस पर अपने अधिकारों का हनन करने का भी आरोप लगाया है।
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को लगाई थी फटकार
आरजी कर अस्पताल में हुई इस घटना के बाद देशभर में डॉक्टरों की सुरक्षा को लेकर एक बड़ी बहस शुरू हो गई है। सुप्रीम कोर्ट ने भी राज्य सरकार की सुस्त प्रगति पर कड़ी आपत्ति जताई है। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि अगर 15 अक्टूबर तक अस्पतालों में सुरक्षा उपायों में सुधार नहीं किया गया तो सरकार को सख्त कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।
चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता में सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा, “पश्चिम बंगाल के अस्पतालों में सुरक्षा के उपाय बहुत धीमी गति से आगे बढ़ रहे हैं। अब तक सिर्फ 22% सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। आखिर क्यों 50% से अधिक काम किसी भी क्षेत्र में पूरा नहीं हुआ है?” सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को अस्पतालों में बुनियादी सुरक्षा सुविधाओं, जैसे सीसीटीवी कैमरे, ड्यूटी रूम और शौचालय, को प्राथमिकता से लागू करने के निर्देश दिए हैं।
इससे पहले, कोलकाता हाईकोर्ट ने इस मामले की जाँच केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) को सौंप दी थी। अदालत ने पश्चिम बंगाल सरकार को डॉक्टरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सख्त निर्देश दिए थे। इसके अलावा, एक राष्ट्रीय टास्क फोर्स गठित करने और केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) की तैनाती का आदेश भी दिया गया था। कोर्ट ने राज्य सरकार से इस मामले में उठाए गए कदमों पर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया था। अब यह मामला CBI की जांच के दायरे में है, जो डॉक्टर के साथ हुई इस भयावह घटना की पूरी सच्चाई को उजागर करेगी।
डॉक्टरों की लंबी लड़ाई जारी
डॉक्टर्स के संघर्ष का यह सिलसिला तभी शुरू हुआ जब 31 वर्षीय महिला डॉक्टर की बलात्कार और हत्या की खबर ने पूरे देश को हिला दिया था। जूनियर डॉक्टरों ने इसे अपनी सुरक्षा के खिलाफ एक चेतावनी के रूप में लिया और पूरे राज्य में विरोध प्रदर्शन किया। सुप्रीम कोर्ट ने भी डॉक्टरों की सुरक्षा को लेकर राज्य सरकार की सुस्ती पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने यह स्पष्ट किया है कि डॉक्टरों की सुरक्षा सुनिश्चित करना राज्य सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए। जूनियर डॉक्टर्स का कहना है कि अगर समय पर सुरक्षा उपाय होते, तो यह घटना रोकी जा सकती थी।
डॉक्टरों की हड़ताल और आमरण अनशन के बाद से राज्य सरकार की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं। पश्चिम बंगाल के जूनियर डॉक्टर्स फ्रंट ने प्रेस रिलीज जारी कर कहा है कि डॉक्टरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में राज्य सरकार विफल रही है।
पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना के कुलतली में बच्ची से रेप और हत्या की घटना के मामले परिजनों ने हैरान करने वाला दावा किया है। बताया जा रहा है कि पुलिस उनकी बिटिया के गायब होने की शिकायत ही नहीं लिख रही थी। वो मामले को अनदेखा करने की कोशिश कर रहे थे। वहीं जब बेटी मिली तो उसके हाथ-पाँव टूटे हुए थे।
समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, पीड़िता की चाची ने बताया, “बच्ची ट्यूशन से आते समय लापता हो गई थीं। उसके पिता ने उसे हर जगह ढूँढने की कोशिश की, लेकिन वह कहीं नहीं मिली। वह पुलिस के पास गए। पुलिस ने उनकी बात सुनने से इनकार कर दिया। उसके बाद उन्हें जयनगर थाने जाने को कहा गया। जब बच्ची मिली तो उसके शरीर पर कई चोटें थीं, उसके हाथ-पैर टूटे हुए थे।”
#WATCH | West Bengal: A minor girl allegedly raped in South 24 Parganas Her aunt says, "The body (of the girl) has several injuries on the body, limbs have been broken…she went missing while coming back from the tuition…Her father tried to find her everywhere but when he was… pic.twitter.com/3wB4jfYWin
बता दें कि दक्षिण 24 परगना में इस घटना के बाद से काफी बवाल मचा हुआ है। स्थानीय लोगों में खासी नाराजगी है। पुलिस का कहना है कि उन्होंने आक्रोशित भीड़ को शांत करवाकर कानून व्यवस्था को नियंत्रित कर लिया है। मामले की जाँच की जा रही है। पुलिस ने एक व्यक्ति को हिरासत में लिया है। इस घटना पर बरुईपुर एसपी पलाश चंद्र का भी बयान आया है। उन्होंने पुलिस कार्रवाई से अवगत कराते हुए कहा है कि सरकार ऐसे मामलों को लेकर बहुत गंभीर है और मामले की जाँच की जा रही है।
South 24 Parganas, West Bengal | On the body of a girl found in a canal in South 24 Parganas, Baruipur SP Palash Chandra Dhali said, "The body of a girl was found after which there was anger among the local people. We have controlled the law and order situation. Yesterday evening… pic.twitter.com/3X1Gxf0Bri
वहीं राज्य में विपक्षी दल ममता सरकार को पहले आरजी कर मामला और अब नाबालिग लड़की की हत्या मामले में घेर रहे हैं। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने दावा किया है कि इस मामले में लड़की के साथ बलात्कार हुआ था और सीएम बनर्जी को इस्तीफा देना चाहिए। वहीं बंगाल के राज्यपाल सी.वी. आनंद बोस ने भी राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि समय पर कार्रवाई न किए जाने के कारण बलात्कार के मामलों में वृद्धि हुई है।
बच्ची की हत्या और रेप
गौरतलब है कि दक्षिण 24 परगना के कृपाखाली गाँव में शुक्रवार (4 अक्टूबर, 2024) को 10 वर्षीय बच्ची गायब हो गई थी। बच्ची ट्यूशन पढ़ने गई थी जिसके बाद वह वापस नहीं आई। इस मामले में परिजनों ने FIR भी दर्ज करवाई थी। बच्ची की लाश शनिवार (5 अक्टूबर, 2024) को सुबह नहर के पास बरामद हुई थी। उसकी लाश पर चोट के कई निशान थे। नाबालिग का शव बरामद होने के बाद परिजनों और ग्रामीणों ने विरोध किया तो पुलिस ने उन पर लाठियाँ बरसाईं और इस तरह उन्हे शांत कराया गया। इस मामले में पुलिस ने मुस्तकीन सरदार नाम के एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है मुस्तकीन से अभी पूछताछ जारी है। बताया जा रहा है कि उसने कत्ल की बात को स्वीकार कर लिया है, लेकिन रेप की बात से इनकार कर रहा है। अब पुलिस आगे अपनी जाँच के आधार पर कार्रवाई करेगी।
इस्लामी आतंकियों के खिलाफ इजरायल की कार्रवाई में आक्रामकता बढ़ गई है। उसने गाजा पट्टी में आतंकी संगठन हमास और लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ कार्रवाई करते हुए भारी बमबारी की है। इस कार्रवाई में हमास के कम से कम 21 आतंकी मारे गए हैं। कहा जा रहा है कि ये आतंकी एक मस्जिद में छिपे हुए थे। हमले में मस्जिद सहित अन्य इमारतें भी नेस्तनाबूद हुई हैं।
इज़रायली सेना का कहना है कि युद्धक विमानों ने कुछ समय पहले ही आतंकियों पर सटीक निशाना साधा था। दरअसल, मध्य गाजा पट्टी के डेर अल-बलाह में इब्न रुश्द स्कूल के परिसर में हमास का कमांड सेंटर मौजूद था और इसमें ये आतंकी मौजूद थे। अल-बलाह में हमास के दूसरे नियंत्रण केंद्र को भी निशाना बनाया गया, जो शुहादा अल-अक्सा मस्जिद कहलाता है।
इजरायली सेना का कहना है कि हमास द्वारा कमांड सेंटर का इस्तेमाल IDF बलों और इज़रायल के खिलाफ आतंकी हमलों की योजना बनाने और उन्हें अंजाम देने के लिए किया जाता था। IDF का कहना है कि हमले में नागरिकों को होने वाले नुकसान को कम करने के लिए सटीक हथियारों का उपयोग और पुष्ट खुफिया जानकारी सहित कई उपाय किए गए थे।
वहीं, लेबनान की राजधानी बेरूत के उपनगरों में इजरायल की सेना ने भी बमबारी की है। इस्लामी मीडिया हाउस अल जजीरा की के अनुसार, कार्रवाई की वजह से बेरूत में बड़े पैमाने पर विस्फोट हुए हैं और आग की लपटें आसमान तक पहुँच रही हैं। लेबनान के समाचार चैनलों के मुताबिक, इजरायल ने बेरूत में रात भर 30 से अधिक हमले किए।
बेरूत का दक्षिणी इलाका आतंकी संगठन हिजबुल्लाह का गढ़ माना जाता है। यह इजरायली सेना के विशेष निशाने पर है। इजरायली सेना IDF ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि उसके लड़ाकू विमानों ने बेरूत में हिजबुल्लाह के कई हथियार गोदामों और अन्य बुनियादी ढाँचे पर हमले किए। उसने कहा कि इस हमले को लेकर उसने इलाके के नागरिकों को पहले ही चेतावनी दे दी थी।
उधर, हिजबुल्लाह के चीफ नसरल्लाह के उत्तराधिकारी कहे जाने वाले हाशेम सफीद्दीन के भी मारे जाने की बात कही जा रही है। अल जज़ीरा ने लेबनान एक सुरक्षा सूत्र के हवाले से बताया कि हिज़्बुल्लाह ने अपने कार्यकारी परिषद के अध्यक्ष हाशेम सफ़ीद्दीन से संपर्क खो दिया है।
कश्मीर घाटी के शोपियाँ जिले में नदीमर्ग गाँव के अर्धनारीश्वर मंदिर में 20 साल के लंबे अंतराल के बाद कश्मीरी पंडितों ने पूजा-अर्चना की। शनिवार (05 अक्टूबर 2024) को हुई इस पूजा के दौरान मंदिर में मूर्ति स्थापना भी की गई। यह एक महत्वपूर्ण धार्मिक और सांस्कृतिक घटना है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। इस मौके पर दूर-दराज के इलाकों से भी लोग आए और पुरानी परंपराओं को पुनर्जीवित किया।
शोपियाँ के उपायुक्त (डीसी) मोहम्मद शाहिद सलीम डार ने खुद अर्धनारीश्वर मंदिर का दौरा किया। उन्होंने इस मौके को एक नए युग की शुरुआत बताया, जो शांति और समृद्धि की दिशा में एक बड़ा कदम है। डीसी ने मंदिर परिसर में पूजा करने आए श्रद्धालुओं से बातचीत की और उनकी समस्याओं को सुना। इसमें सामुदायिक भवन या यात्रा भवन की स्थापना की माँग प्रमुख रही। इस पर डीसी ने शीघ्र कार्रवाई का आश्वासन दिया, ताकि भविष्य में भी श्रद्धालुओं को उचित सुविधाएँ मिल सकें।
पूजा के दौरान, जिला प्रशासन ने सुरक्षा के साथ-साथ अन्य आवश्यक सेवाओं का भी खास ध्यान रखा। स्थानीय अधिकारियों और अन्य विभागों ने मिलकर यह सुनिश्चित किया कि सभी श्रद्धालुओं को सभी सुविधाएँ मिलें और किसी प्रकार की कोई दिक्कत न हो।
इस पूजा आयोजन के दौरान डीसी मोहम्मद शाहिद सलीम डार ने नदीमर्ग गाँव में उन घरों का भी दौरा किया जो कश्मीरी पंडितों के हैं और लंबे समय से खाली पड़े हुए हैं। यह कदम प्रतीकात्मक रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह इस बात की ओर संकेत करता है कि प्रशासन इस समुदाय के पुनर्वास और उनके कल्याण के लिए गंभीर है। इन घरों के दौरे से प्रशासनिक अधिकारियों ने कश्मीरी पंडितों की वापसी और पुनर्वास को लेकर अपनी प्रतिबद्धता जताई है।
20 साल बाद लौटी परंपरा
यह पूजा आयोजन इसलिए खास है क्योंकि नदीमर्ग के अर्धनारीश्वर मंदिर में पिछले 20 सालों से कोई धार्मिक क्रियाकलाप नहीं हुआ था। घाटी में आतंकवाद और तनाव के कारण कश्मीरी पंडितों का इस क्षेत्र से पलायन हुआ, और उनके मंदिर वीरान हो गए थे। लेकिन अब, इस आयोजन ने यह साबित किया है कि धीरे-धीरे स्थिति सामान्य हो रही है और पंडित समुदाय अपने सांस्कृतिक और धार्मिक अधिकारों को पुनः प्राप्त कर रहा है।
कश्मीरी पंडितों का इस तरह से अपने मंदिरों में लौटना और पूजा करना घाटी में नए उम्मीदों और संभावनाओं को जन्म देता है। यह केवल धार्मिक क्रियाकलाप नहीं है, बल्कि यह उस सांस्कृतिक विरासत की पुनर्प्राप्ति है, जो दशकों से खोई हुई थी।
हरियाणा विधानसभा चुनाव के मतदान के बीच, 3 सितंबर को नारनौंद में हुई एक घटना से सोशल मीडिया पर आक्रोश फ़ैल गया है। यह घटना कॉन्ग्रेस की एक रैली से जुड़ी है। कॉन्ग्रेस की इस रैली में एक महिला नेता के साथ कथित तौर पर छेड़छाड़ हुई। छेड़छाड़ की बात की पुष्टि कॉन्ग्रेस नेता कुमारी शैलजा ने भी की है। उन्होंने इस मामले में कड़ी कार्रवाई की माँग की है।
घटना के वायरल वीडियो में रोहतक से कॉन्ग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा को मंच पर देखा जा सकता है, उनके साथ एक महिला नेता सोनिया दुहान खड़ी थीं। सोनिया दुहान उन्हें गुलदस्ता देती हैं। इसी बीच उनके पीछे खड़ा एक व्यक्ति सोनिया को गलत तरीके से हाथ से छूते दिखता है। इसके बाद सोनिया दुहान असहज हो जाती हैं।
लड़कीं हूँ, लड़ सकती हूं…. लेकिन कांग्रेसी गुंडों से कैसे लडूं??? नारनौंद में हुड्डा की रैली में मंच पर सरेआम महिला से छेड़खानी कर रहे हैं कांग्रेसी…@priyankagandhi लड़कीं है लड़ सकती है??@Jassipetwar_incpic.twitter.com/YyXz3OdVeI
घटना के वायरल वीडियो के बाद सोनिया दुहान से कॉन्ग्रेस सांसद कुमार शैलजा ने बात की है। शैलजा ने मीडिया को बताया, “मैंने सोनिया से बात की है, वो मुझे बता रही हैं कि उनके साथ वहाँ छेड़छाड़ की गई… मैंने उनसे इस बात की पुष्टि की है, अगर आज किसी महिला के साथ ऐसा होता है, तो इससे बुरा और निंदनीय क्या हो सकता है। इस पर कार्रवाई होनी चाहिए।”
कुमारी शैलजा ने इस मामले में कड़ी कार्रवाई की माँग भी की है। कुमारी शैलजा पहले अपनी ही पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ़ आवाज़ उठा चुकी हैं। हरियाणा चुनाव के प्रचार के दौरान कॉन्ग्रेस नेता जस्सी पेटवाड़ के समर्थकों ने कथित तौर पर उनके खिलाफ़ अनुचित टिप्पणी की थी।
#WATCH | Hisar, Haryana: On an alleged molestation attempt with a Congress worker on stage at a Congress rally, Congress MP Kumari Selja says "I spoke to her, she told me that some people were touching her and trying to remove her from the stage. We saw the same in the video as… pic.twitter.com/fahDEoDVQ1
इस घटना के कारण राज्य में राजनीतिक हलचल मचा दी थी। घटना से दुखी होने के कारण कुमारी शैलजा ने करीब दो सप्ताह तक चुनाव प्रचार में हिस्सा नहीं लिया। उन्होंने मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गाँधी समेत वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेताओं से शिकायत की थी। भूपेन्द्र हुड्डा ने इसके बाद सफाई दी थी।
भाजपा ने भी इस मुद्दे को लेकर कॉन्ग्रेस को घेरा है। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने इसे ‘चौंकाने वाला मामला बताया। उन्होंने एक्स पर लिखा, “कॉन्ग्रेस की एक महिला नेता के साथ दीपेंद्र हुड्डा की मौजूदगी में मंच पर नेताओं द्वारा छेड़छाड़ की गई।”
Most shocking ? A woman congress leader was molested in stage in presence of Deependra Hooda by congress leaders
Confirmed by news reports and even Kumari Selja
If women are not safe in Congress meetings in full public view during the daytime – can they be safe if Congress… pic.twitter.com/yIw46gl91t
— Shehzad Jai Hind (Modi Ka Parivar) (@Shehzad_Ind) October 5, 2024
आगे उन्होंने लिखा, “न्यूज और यहाँ तक कि कुमारी शैलजा द्वारा भी इसकी पुष्टि की गई है। यदि दिनदहाड़े कॉन्ग्रेस की बैठकों में महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं – तो क्या कॉन्ग्रेस की सरकार आने पर वे सुरक्षित हो सकती हैं?” पूनावाला ने प्रश्न उठाए कि आखिर प्रियंका गाँधी का लड़की हूँ-लड़ सकती हूँ का नारा अब कहाँ चला गया है।
हरियाणा विधानसभा चुनाव 2024 के लिए मतदान संपन्न हो चुका है। चुनाव आयोग द्वारा जारी किए गए ताजा आँकड़ों के मुताबिक, शाम 7 बजे तक कुल 61.19% मतदान हुआ है। इस बार हरियाणा में कुल 90 विधानसभा सीटों पर 1031 उम्मीदवारों के बीच मुकाबला है, जिसमें 101 महिला उम्मीदवार भी शामिल हैं। मतदान का क्रम समाप्त होते ही सभी उम्मीदवारों की किस्मत ईवीएम में कैद हो गई। चुनावी नतीजे 8 अक्टूबर 2024 को जारी किए जाएँगे।
इस चुनाव में प्रमुख राजनीतिक दलों ने पूरे जोश के साथ भाग लिया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 89 सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े किए हैं, जबकि कॉन्ग्रेस ने भी 89 सीटों पर प्रत्याशी उतारे हैं। जननायक जनता पार्टी (JJP) और आजाद समाज पार्टी (ASP) गठबंधन ने 78 सीटों पर चुनाव लड़ा, जिसमें JJP ने 66 और ASP ने 12 सीटों पर उम्मीदवार खड़े किए। इसके अलावा, आम आदमी पार्टी (AAP) ने 88 सीटों पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है।
हरियाणा के सभी जिलों में यमुनानगर अव्वल
हरियाणा के विभिन्न जिलों में मतदान प्रतिशत अलग-अलग रहा। मेवात जिले में सबसे ज्यादा 68.28 प्रतिशत मतदान हुआ, जबकि गुरुग्राम में सबसे कम 49.97 प्रतिशत वोटिंग दर्ज की गई। अन्य जिलों में भी मतदान प्रतिशत इस प्रकार है: अंबाला में 63.35%, भिवानी में 63.06 प्रतिशत, चरखी दादरी में 58.10 प्रतिशत, फरीदाबाद में 51.90 प्रतिशत, फतेहाबाद में 67.05 प्रतिशत मतदान हुआ।
इसके अलावा हिसार में 64.79 प्रतिशत, झज्जर में 60.52 प्रतिशत, जींद में 66.02 प्रतिशत, कैथल में 62.53 प्रतिशत, करनाल में 60.42 प्रतिशत, कुरुक्षेत्र में 65.55 प्रतिशत, महेंद्र गढ़ में 65.76 प्रतिशत, पलवल में 67.69 प्रतिशत, पंचकुला में 54.71 प्रतिशत, पानीपत में 60.52 प्रतिशत, रेवाड़ी में 60.91 प्रतिशत, रोहतक में 61.59 प्रतिशत, सिरसा में 65.37 प्रतिशत, सोनीपत में 56.69 प्रतिशत और यमुनानगर में 67.93 प्रतिशत मतदान हुआ है।
चुनाव आयोग द्वारा मतदान के आँकड़े (फोटो साभार: ECI)
मतदान केंद्रों पर सुबह से ही लोगों की लंबी कतारें देखी गईं। ग्रामीण इलाकों में मतदान का रुझान शहरी क्षेत्रों की अपेक्षा अधिक रहा, जो कि राजनीतिक दलों के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत हो सकता है।
मतदान के दौरान हिंसा की कई घटनाएँ
चुनाव के दौरान कई जिलों से हिंसक घटनाओं और झड़पों की खबरें भी आईं, जिसने चुनाव की प्रक्रिया को प्रभावित किया।
रोहतक में पूर्व विधायक पर हमला: रोहतक के महम विधानसभा क्षेत्र में हजपा प्रत्याशी बलराज कुंडू और कॉन्ग्रेस नेता आनंद सिंह दांगी के बीच तीखी झड़प हुई। बलराज कुंडू का आरोप है कि दांगी और उनके समर्थकों ने उनके ऊपर हमला किया और उनके कपड़े फाड़ दिए। मामले को शांत कराने के लिए पुलिस को अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात करना पड़ा।
नूहँ में पथराव: नूहँ जिले की पुनहाना विधानसभा में कॉन्ग्रेस उम्मीदवार मोहम्मद इलियास और निर्दलीय उम्मीदवार रहीस खान के समर्थकों के बीच जमकर हाथापाई और पथराव हुआ। पुलिस के मौके पर पहुँचने के बाद ही स्थिति पर नियंत्रण पाया गया।
हिसार में झड़प: हिसार जिले के नारनौंद इलाके में कॉन्ग्रेस और भाजपा समर्थकों के बीच झड़प की खबर आई। दोनों दलों के कार्यकर्ताओं के बीच तीखी बहस के बाद मारपीट हो गई, जिसमें कई लोग घायल हुए। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया और मतदान को पुनः शुरू कराया।
पानीपत में चाकूबाजी: पानीपत जिले के नोहरा गांव में बोगस वोटिंग को लेकर कॉन्ग्रेस और भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच चाकूबाजी हुई। इस घटना में तीन युवक गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के बाद पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने मोर्चा संभाला और घायलों को अस्पताल पहुँचाया गया।
डाटा गाँव में फर्जी मतदान पर झड़प: नारनौंद विधानसभा क्षेत्र के डाटा गाँव में बूथ नंबर 69 पर फर्जी मतदान को लेकर झड़प हुई। कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं पर फर्जी वोटिंग के आरोप लगे, जिसके बाद दो पक्षों में तनाव बढ़ गया। स्थिति तब और बिगड़ी जब कुछ लोग फर्जी मतदान का वीडियो बनाने लगे, जिससे कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता भड़क उठे। पुलिस ने स्थिति को काबू में किया और घायल व्यक्तियों को प्राथमिक उपचार दिया गया।
फर्जी मतदान की कई घटनाएँ
चुनाव के दौरान कई जगहों पर फर्जी मतदान की घटनाएँ भी सामने आईं। पानीपत के नोहरा गाँव में कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं पर बोगस वोटिंग का आरोप लगा। भाजपा के एजेंट ने इसे रोकने की कोशिश की, जिसके बाद दोनों पक्षों में चाकूबाजी हुई। इस हिंसक घटना ने मतदान प्रक्रिया को कुछ समय के लिए बाधित किया। इसी तरह, नारनौंद विधानसभा के डाटा गांव में भी फर्जी मतदान की घटना पर दो पक्षों में झड़प हुई। कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं पर फर्जी वोट डलवाने के आरोप लगे, जिसके बाद पुलिस को स्थिति नियंत्रण में लानी पड़ी।
पिछले चुनाव में पार्टियों की ये थी स्थिति
साल 2019 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 40 सीटें जीती थीं और उसका वोट शेयर 36.49% था। कॉन्ग्रेस ने 31 सीटें जीती थीं और उसका वोट शेयर 28.08% रहा। जननायक जनता पार्टी (JJP) ने 10 सीटों पर जीत हासिल की थी, जबकि निर्दलीय उम्मीदवारों ने 7 सीटों पर विजय पाई थी। इस बार के चुनाव में भाजपा और कॉन्ग्रेस के बीच सीधी टक्कर देखने को मिल रही है, जबकि JJP-ASP गठबंधन और आम आदमी पार्टी भी अपनी चुनौती पेश कर रही हैं।
2 करोड़ से अधिक मतदाताओं की भागीदारी
इस बार के चुनाव में 2 करोड़ से अधिक मतदाता हिस्सा ले रहे हैं, जिनमें 10,775,957 पुरुष मतदाता और 9,577,926 महिला मतदाता शामिल हैं। राज्यभर में 20,632 पोलिंग बूथ बनाए गए हैं। चुनाव आयोग ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे, इसके बावजूद कुछ स्थानों पर झड़पों और हिंसक घटनाओं ने माहौल को बिगाड़ा। पुलिस ने इन घटनाओं को गंभीरता से लिया है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
हरियाणा विधानसभा चुनाव 2024 में मतदाताओं की सक्रिय भागीदारी और हिंसक घटनाओं का मिला-जुला असर देखा गया। मतदान का प्रतिशत अभी तक 54.3% तक पहुँचा है, और 8 अक्टूबर को मतगणना के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि किस पार्टी का प्रदर्शन बेहतर रहा।
पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना में कक्षा 4 में पढ़ने वाली 10 वर्षीय बालिका की अपहरण करके हत्या कर दी गई। बच्ची के साथ रेप की आशंका परिजनों ने जताई है। बच्ची के परिजनों ने मामले में पुलिस पर लापरवाही और उसे समय से ना ढूँढने का आरोप लगाया है। नाबालिग का शव बरामद होने के बाद परिजनों और ग्रामीणों ने विरोध किया तो पुलिस ने उन पर लाठियाँ बरसाईं। इस मामले के बाद भाजपा ने राज्य की ममता सरकार पर आरोप लगाया है कि वह महिलाओं की सुरक्षा करने में पूरी तरह विफल है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दक्षिण 24 परगना के कृपाखाली गाँव में शुक्रवार (4 अक्टूबर, 2024) को 10 वर्षीय बच्ची गायब हो गई थी। बच्ची ट्यूशन पढ़ने गई थी जिसके बाद वह वापस नहीं आई। इस मामले में परिजनों ने FIR भी दर्ज करवाई थी। बच्ची की लाश शनिवार (5 अक्टूबर, 2024) को सुबह बरामद हुई। उसकी लाश पर चोट के कई निशान थे।
बच्ची के परिजनों ने आरोप लगाया है कि उसकी रेप के बाद हत्या की गई है। परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस ने समय रहते कार्रवाई की होती तो बच्ची की मौत नहीं होती। बच्ची की लाश मिलने के बाद शनिवार को परिजन और ग्रामीण नाराज होकर प्रदर्शन करने लगे। उनकी पुलिस से झड़प भी हुई।
इसके बाद पुलिस ने कथित रेप और हत्या को लेकर प्रदर्शन कर रहे लोगों पर लाठियाँ बरसाईं और आंसू गैस के गोले तक छोड़े। यहाँ पर मामले को शांत करने के लिए पहुँचे TMC विधायक को भी भगा दिया गया। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि इस मामले में भी पुलिस ने कोलकाता डॉक्टर रेप और हत्या मामले की तरह लापरवाही बरती है। इस मामले में पुलिस ने मुस्तकीन सरदार नाम के एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। मुस्तकीन से अभी पूछताछ जारी है। कृपाखाली में स्थिति लगातार तनावपूर्ण बनी हुई है। मौके पर भाजपा विधायक अग्निमित्रा पॉल भी पहुँची हैं।
पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष सुकांता मजूमदार ने मामले में ममता सरकार पर प्रश्न उठाए हैं। उन्होंने एक्स (ट्विट्टर) पर लिखा, “स्तब्ध हूँ कुलतली थाने के कृपाखाली इलाके में ट्यूशन से लौटते समय चौथी कक्षा की नाबालिग छात्रा के साथ बेरहमी से बलात्कार किया गया और उसकी हत्या कर दी गई। बाद में ग्रामीणों ने नदी के किनारे से बच्ची का बर्फ में दबा शव बरामद किया। महिलाओं की सुरक्षा करने में विफल रहीं बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मेरा सवाल है कि नवरात्र में भी भी बंगाल की लडकियाँ सुरक्षित क्यों नहीं हैं।”
স্তম্ভিত! শিহরিত! কুলতলী থানা এলাকার কৃপাখালী এলাকায় টিউশন পড়ে ফেরার পথে বলপূর্বক তুলে নিয়ে গিয়ে ধর্ষণ করে নৃশংসভাবে খুন করা হলো চতুর্থ শ্রেণীর একজন নাবালিকা ছাত্রীকে। পরে নদীর চর থেকে গ্রামবাসীরা উদ্ধার করলেন ছোট্ট মেয়েটির নিথর দেহ। মহিলাদের সুরক্ষা দিতে ব্যর্থ বাংলার… pic.twitter.com/AlSsWh48lY
सुकांता मजूमदार ने कहा है कि आखिर कब तक बंगाल की महिलाओं को ममता राज में सहना पड़ेगा। मामले में पुलिस ने अपना बचाव किया है। पुलिस ने कहा है कि उसे शुक्रवार देर शाम सूचना मिली थी और उसने तुरंत एक्शन लेते बच्ची को खोजना चालू कर दिया। जिले के एसपी ने बताया है कि उन्होंने जिस आरोपित को गिरफ्तार किया है, उसने जुर्म भी कबूल कर लिया है।