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तिरंगे में पतंग बाँधकर ले जा रहे थे मुस्लिम नाबालिग, FIR दर्ज: AIMIM और कॉन्ग्रेस नेता के साथ भीड़ पहुँची थाने, अहमदाबाद पुलिस ने सँभाला हालात

गुजरात के अहमदाबाद के दानीलीमडा में शुक्रवार (4 अक्टूबर) को मुस्लिम समुदाय के दो नाबालिगों को राष्ट्रीय ध्वज का अपमान करने के आरोप में पुलिस के हवाले कर दिया गया। स्थानीय लोगों ने उन्हें राष्ट्रीय ध्वज के कपड़े से बनी पतंग ले जाते हुए पकड़ा। यह जानकारी मिली है कि पुलिस ने दोनों के खिलाफ FIR दर्ज की है।

ऑपइंडिया के साथ बातचीत में दानीलीमडा पुलिस के PI जीजे रावत ने इसकी पुष्टि की है। दोनों के खिलाफ ‘प्रिवेंशन ऑफ इंसल्ट्स टू नेशनल ऑनर एक्ट, 1971’ की धारा 2 (भारतीय राष्ट्रीय ध्वज का अपमान) और भारतीय दंड संहिता की धारा 54 (अपराध के समय उत्प्रेरक के रूप में उपस्थित होना) के तहत आरोप लगाए गए हैं। दोनों आरोपित नाबालिग हैं।

शिकायत में शिकायतकर्ता ने बताया कि वे रात में दानीलीमडा क्षेत्र से गुजर रहे थे, तभी उन्होंने एक सफेद एक्टिवा स्कूटर पर दो व्यक्तियों को देखा। उन्होंने देखा कि राष्ट्रीय ध्वज जैसा दुपट्टा बाँधकर उसमें पतंगें बाँधी हुई थीं। पूछताछ करने पर दोनों वहाँ से भाग गए, लेकिन पीछा करने पर मंगल विकास चौराहे के पास उनका पैकेट गिर गए।

इसके बाद वे रूक कर पैकेट लेने लगे। इसी दौरान शिकायतकर्ता ने दोनों को पकड़ लिया। पैकेट की जाँच करने पर पता चला कि इसमें लगभग आठ राष्ट्रीय ध्वज सिलकर एकत्रित किए गए थे। शिकायतकर्ता ने फिर उन ध्वजों को सम्मानपूर्वक निकाला। नाबालिगों ने बताया कि उन्हें इसके अलावा कोई दूसरा कपड़ा नहीं मिला था।

इस बीच स्थानीय लोगों की भीड़ इकट्ठा हो गई। उन्होंने भी राष्ट्रीय ध्वज के अपमान को देखकर दोनों नाबालिगों को पकड़ लिया। इसके बाद पुलिस को सूचित किया गया। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुँची और दोनों नाबालिगों को पकड़कर अपने साथ थाने चली गई।

घटना के कुछ फोटो और वीडियो भी ऑपइंडिया के पास उपलब्ध हैं। वीडियो में दोनों व्यक्ति एक बाइक पर जाते हुए दिखते हैं, जिसमें पीछे बैठा व्यक्ति एक पैकेट पकड़ रखा है, जिसमें पतंग है। इस पैकेट को बनाने के लिए इस्तेमाल किया गया कपड़ा स्पष्ट रूप से राष्ट्रीय ध्वज है, जिसमें केसरिया, सफेद और हरे रंग के साथ केंद्र में अशोक चक्र भी दिखाई देता है।

स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, राष्ट्रीय ध्वज के अपमान के आरोप में दोनों मुस्लिम नाबालिगों को पुलिस थाने ले जाने के बाद स्थानीय AIMIM और कॉन्ग्रेस के नेता भी पुलिस थाने पहुँच गए। वहाँ भीड़ भी इकट्ठा हो गई। हालाँकि, पुलिस ने समय पर कार्रवाई की, जिसके चलते कोई अप्रिय घटना नहीं हुई। फिलहाल पुलिस ने मामले की जाँच कर रही है।

आतंकी संगठन हिजबुल्लाह के चीफ नसरल्लाह की मौत पर बिहार में कैंडल मार्च, जुम्मे की नमाज के बाद मातमी सभा: बताया- सदी का सबसे बड़ा शहीद

मध्य-पूर्वी मुल्क लेबनान के आतंकी संगठन हिजबुल्लाह के चीफ नसरल्लाह के मारे जाने के बाद जुम्मे की नमाज (शुक्रवार की नमाज) के दौरान देश के कई हिस्सों में कट्टरपंथियों ने उसे श्रद्धांजलि दी। बिहार के छपरा और मुजफ्फरनगर सहित विभिन्न जगहों पर इस्लाम के शिया फिरके से ताल्लुक रखने वाले लोगों ने आंतकी नसरल्लाह की मौत पर मातम मनाया गया।

हिजबुल्लाह चीफ की याद में शुक्रवार (4 अक्टूबर 2024) को छपरा के दहियावाँ स्थित शिया इमामबाड़ा में मातमी सभा का आयोजन किया गया। रात की नमाज के बाद एक कार्यक्रम का आयोजन हुआ, जिसमें शिया समुदाय के लोगों ने हाथों में तख्ती और आतंकी नसरल्लाह की तस्वीर लेकर उसे श्रद्धांजलि श्रद्धांजलि दी।

इमामबाड़ा में नसरल्लाह की तस्वीर के सामने कैंडल जलाकर फतिहा पढ़ा गया। शिया मस्जिद के मुख्य मौलवी सैयद मासूम रजा ने कहा, “नसरल्लाह ने अपने समुदाय के लोगों के लिए शहादत दी है। वो दहशतगर्द वाले जिहादी नहीं थे। वो गरीब लोगों की लड़ाई लड़ रहे थे। इंसाफ वाले जिहादी थे।” मातमी सभा में नसरल्लाह और उसकी बेटी को सदी का सबसे बड़ा शहीद कहा गया।

वहीं, मुजफ्फरपुर में हसन नसरल्लाह की मौत और उसे आतंकी कहने पर शिया समुदाय के लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया। शिया धर्मगुरु सैयद मोहम्मद काज़ीम शबीब के नेतृत्व में बड़ी संख्या में शिया समुदाय के मुस्लिमों ने कमरा मोहल्ला इमाम चौक से सरैयागंज टावर तक कैंडल मार्च निकाला।

इस दौरान आतंकी संगठन हिजबुल्लाह के प्रमुख नसरल्लाह की तस्वीरें हाथों में लेकर इजरायल के खिलाफ जमकर नारेबाजी। उन्होंने नसरल्लाह को शहीद बताया। मौलाना काज़ीम शबीब ने कहा कि नसरल्लाह इजराइल के खिलाफ लड़ रहे थे। उन्हें सब आतंकवादी कह रहे हैं, जो कि बेहद गलत है।

इससे पहले लखनऊ से लेकर कश्मीर तक नसरल्लाह की मौत पर मातम मनाया गया। लखनऊ में तो इसको लेकर तीन दिन का शोक तक रख दिया गया है। नसरल्लाह की मौत के बाद जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती और नेशनल कॉन्फ्रेंस पार्टी के श्रीनगर लोकसभा सीट से सांसद रुहुल्लाह मेहदी ने अपने चुनाव प्रचार को रोक दिया।

यह विरोध और मातमपुरसी सिर्फ उत्तर प्रदेश, बिहार, कश्मीर या अन्य मुस्लिम बहुल इलाकों तक ही सीमित नहीं रहा है, बल्कि तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई की एक मस्जिद में भी नसरल्लाह के पोस्टर लगा दिए गए और श्रद्धांजलि दी गई।

बता दें कि 27 सितंबर 2024 को इजरायल ने लेबनान में हिजबुल्लाह के मुख्यालय पर 80 टन बम से हमला किया था। इसमें हसन नसरल्लाह मारा गया था। जिस समय यह हवाई हमला हुआ, उस समय नसरल्लाह दक्षिणी बेरूत में हिजबुल्लाह के अंडरग्रांउड हेडक्वॉर्टर में शीर्ष नेताओं के साथ बैठक कर रहा था।

इजरायल ने पिछले 2 महीने में हिजबुल्लाह की पूरी लीडरशिप को खत्म कर दिया है। इससे पहले 30 जुलाई को उसने हिजबुल्लाह के दूसरे सबसे सीनियर लीडर फुआद शुकर को मार गिराया था। इसके अगले दिन यानी 31 जुलाई को ईरान में आतंकी संगठन हमास के चीफ इस्माइल हानियाह को मार दिया था। अब हिजबुल्लाह में कोई सीनियर नेता नहीं बचा है। वहीं हमास की लीडरशिप में सिर्फ याह्या सिनवार जीवित है।

देश भर में 22 जगहों पर NIA के छापे, जैश-ए-मुहम्मद का नेटवर्क तोड़ने को हुई कार्रवाई: यूपी में ATS ने महकार को उठाया, PAK में करता था बातें

उत्तर प्रदेश के मेरठ में ATS और दिल्ली पुलिस ने संयुक्त रूप से छापा मारा है। इस छापेमारी में एक मुस्लिम युवक को पकड़ा गया है। सुरक्षा एजेंसियों को युवक के पाकिस्तान के आतंकी संगठन से संबंध होने का शक है। ATS और दिल्ली पुलिस की जाँच अभी जारी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मेरठ के सरधना के खिवाई इलाके में शनिवार सुबह UP ATS और दिल्ली पुलिस की टीमें पहुँची। इन टीमों ने महकार नाम के एक युवक को पकड़ा। उसकी उम्र 22 साल है। ATS महकार को गिरफ्तार करके अपने साथ ले गई।

ATS और पुलिस को सूचना मिली थी कि खिवाई के युवक पाकिस्तान में बात करते हैं। इसी कारण से एजेंसियों को शक हुआ कि यह युवक आतंकी संगठनों से जुड़े हुए हैं। एजेंसियों ने कई घंटों तक इस कस्बे में जाँच की है। महकार के अलावा दो और युवकों से पूछताछ हुई है।

NIA ने भी 22 जगह मारे छापे

उत्तर प्रदेश के अलावा देश के बाकी हिस्सों में बड़े स्तर पर छापेमारी हुई है। NIA और ATS ने देश के अलग-अलग हिस्सों में 22 जगह छापा मारा है। NIA ने दिल्ली, महाराष्ट्र और असम समेत पाँच राज्यों में यह जाँच की है। यह छापेमारी जैश-ए-मुहम्मद से कनेक्शन के मामले में हुई है।

जम्मू कश्मीर के भी कुछ ठिकानों पर NIA की छापेमारी की बात सामने आई है। महाराष्ट्र के जलगाँव, जालना और छत्रपति संभाजी नगर समेत बाकी जगहों पर छापे मारे गए हैं और इनमें लगभग 5 लोग पकड़े गए हैं। इन लोगों पर शक है कि यह जम्मू कश्मीर के आतंकी संगठनों से भी जुड़े हैं।

NIA इस मामले में आतंक की फंडिंग का एंगल जाँच रही है। NIA ने मालेगाँव के एक होम्योपैथी क्लिनिक से लोग पकड़े हैं। दिल्ली से भी 2 लोगों को पकड़े जाने की बात सामने आई है। NIA को इन गिरफ्तारियों के साथ ही संदिग्ध साहित्य भी मिला है। NIA जैश ए मुहम्मद के जम्मू कश्मीर से बाहर विस्तार को लेकर लम्बे समय से धरपकड़ कर रही है।

इससे पहले NIA ने पश्चिम बंगाल में जगहों पर हाल ही में छापेमारी की थी। यह छापेमारी माओवादी संगठन CPI (M) का दायरा बढ़ाने की साजिश को लेकर की गई थी। पश्चिम बंगाल के भीतर NIA ने 11 जगहों पर छापेमारी की थी। इस छापेमारी में NIA ने कई ऐसे दस्तावेज इकट्ठा किए थे, जिससे माओवादी साजिश का खुलासा हुआ था।

पाकिस्तान के सिंध में हिंदू किसान और उसके तीन बच्चों के शव मिले: आम के बाग में पेड़ से लटके मिले चारों

पाकिस्तान के सिंध में शुक्रवार (4 अक्टूबर 2024) को एक हिंदू किसान और उसके तीन बच्चे मृत पाए गए। 32 वर्षीय किसान, जिसका नाम चमन कोल्ही बताया गया है, और उसके तीन बच्चों के शव उमारकोट जिले के पल्लि मोर के पास एक आम के बाग में पेड़ से लटके हुए मिले। बच्चों के नाम 8 साल के भागचंद, 6 साल के हीरो, और 4 साल की सोनी हैं।

पुलिस के अनुसार, इन शवों को बोदार फार्म पुलिस थाने के अंतर्गत एक आम के बाग से पेड़ से उतारा गया और एक स्थानीय अस्पताल में भेजा गया। चमन और उसके बच्चों के शव एक ही पेड़ से लटके हुए मिले।

पाकिस्तानी समाचार पत्र डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने बताया कि चमन कोल्ही आर्थिक परेशानियों का सामना कर रहा था और इस मौसम में फसल खराब होने के कारण उसकी पत्नी के साथ तनाव भी चल रहा था। शुरुआती जाँच से यह पता चला है कि चमन ने पहले बच्चों को फाँसी लगाई और फिर खुदकुशी की। हालाँकि स्थानीय पुलिस मामले की जाँच कर रही है।

यह दुखद घटना सिंध में हिंदू समुदाय की मुश्किलों को उजागर करती है। हिंदू कार्यकर्ता शिव कच्छी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस घटना की जानकारी साझा की और सरकार की निष्क्रियता पर अफसोस जताया।

शिव काच्छी ने लिखा, “भुखमरी और बेरोजगारी से परेशान होकर एक गरीब हिंदू किसान चमन कोल्ही ने अपने तीन निर्दोष बच्चों के साथ आत्महत्या कर ली। सिंध में हिंदू समुदाय में आत्महत्या की घटनाएँ बढ़ गई हैं। सरकार और संस्थान बस मूक दर्शक बने हुए हैं।”

इस रिपोर्ट के लिखे जाने तक शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा जा चुका है। फिलहाल आगे की जानकारी का इंतजार है।

मैरिटल रेप: ये कौन तय करेगा कि कब बलात्कार हुआ? ‘वैवाहिक संस्था’ की हत्या का कहीं कारण ना बन जाए यह कानून

भारत के न्यायालय में इन दिनों मैरिटल रेप अर्थात वैवाहिक बलात्कार को लेकर सुनवाई चल रही है। इसको लेकर अब सरकार ने भी सर्वोच्च न्यायालय में अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में कहा कि वैवाहिक बलात्कार को अपराध की श्रेणी में नहीं लाया जाना चाहिए, क्योंकि महिलाओं की रक्षा के लिए कई कानून पहले से हैं।

केंद्र सरकार ने न्यायालय से कहा कि वैवाहिक बलात्कार का मामला कानूनी विषय के स्थान पर सामाजिक मुद्दा है और इसका समाज पर सीधा असर पड़ेगा। केंद्र सरकार का यह भी कहना था कि जब तक सभी हितधारकों के साथ विचार नहीं किया जाएगा, तब तक इस पर कोई भी निर्णय नहीं लिया जा सकता है।

पुरुष आयोग की अध्यक्ष होने के नाते मैंने अर्थात बरखा त्रेहन ने भी सर्वोच्च न्यायालय में यह याचिका दायर की है कि वैवाहिक संबंधों में बलात्कार को लेकर कोई भी निर्णय न लिया जाए। अपनी संस्था के माध्यम से मैं लगातार देखती रहती हूँ कि कैसे पुरुषों को किसी न किसी झूठे मामले में फँसाने की साजिश चलती रहती है।

आए दिन ऐसे मामले सामने आते रहते हैं, जिनमें पुरुषों को घरेलू मामलों में झूठा फँसाया जाता है। इस कारण से पुरुषों में आत्महत्या की दर भी बहुत अधिक बढ़ गई है। जब पुरुषों के खिलाफ इस सीमा तक पहले से ही दुराग्रह है तो ऐसे में वैवाहिक बलात्कार तो उसके खिलाफ एक बहुत बड़ा हथियार बन जाएगा।

आप ही बताएँ कि कैसे और कब कोई यह तय कर सकेगा कि बेडरूम में आखिर क्या हुआ था और इसकी सीमा में क्या-क्या आएगा? एक पति और पत्नी के बीच पचास तरह की लड़ाई होती है। ऐसे में यह कैसे तय हो पाएगा कि कब बलात्कार हुआ और कब आपसी सहमति से दोनों के बीच संबंध बने?

मैंने अपनी याचिका में भी कहा है कि यदि ऐसा ही रहेगा तो आज के युवा शादी करने से बचते फिरेंगे। वे शादी ही नहीं करेंगे, क्योंकि उन्हें इस बात का भय हमेशा रहेगा कि कब उन पर बलात्कारी होने का ठप्पा लग जाएगा? वैसे ही भारत के युवक अब शादी करने से बच रहे हैं। ऐसे में यह कानून इस समस्या को और बढ़ा देगा।

याचिका से हटकर भी यदि मैं कहूँ तो यह बहुत ही बेसिक सवाल है कि इस बात का निर्धारण कैसे होगा कि कब आपसी सहमति से संबंध हैं और कब नहीं? बलात्कार कोई ऐसा छोटा शब्द नहीं है, जिसे असहमति के दायरे में लाकर निर्धारित कर दिया जाए। एक पुरुष जो एक क्षण पहले तक पति रहा हो और दूसरे ही क्षण बलात्कारी हो जाएगा।

इतना ही नहीं, इस आरोप के बाद उसके बच्चों पर भी इसका गंभीर परिणाम पड़ेगा, क्योंकि इस बात का निर्धारण करने का कोई भी तरीका नहीं है कि कब संबंध असहमति से बने और फिर एक पवित्र संबंध के बच्चे बलात्कारी और पीड़िता के बच्चों में तुरंत ही बदल जाएँगे।

इससे बच्चों के जीवन पर क्या प्रभाव पड़ेगा, यह भी नहीं सोचा गया है। क्या बच्चे जीवन भर स्वयं के अस्तित्व से घृणा नहीं करने लगेंगे? मैरिटल रेप कहना बहुत सरल है, मगर इसके दुष्परिणाम अत्यंत व्यापक हैं। यह पूरी की पूरी सभ्यता को बलात्कारी घोषित करने का माध्यम है। यह पति-पत्नी के परस्पर संबंधों की हत्या का माध्यम है।

अली हुसैन ने 5 साल की मासूम बच्ची का किया दुष्कर्म, चिप्स देने के बहाने ले गया था अपने घर: केरल पुलिस ने किया गिरफ्तार

केरल के मलप्पुरम जिले में अली हुसैन नाम के एक व्यक्ति पर 5 वर्ष की एक बच्ची के साथ दुष्कर्म करने का आरोप लगा है। बच्ची को चिप्स देने के बहाने वह अपने घर ले गया और उसके साथ दुष्कर्म किया। पुलिस ने अली हुसैन को गिरफ्तार करके जाँच चालू कर दी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मलप्पुरम के नीलाम्बुर में गुरुवार (3 अक्टूबर, 2024) रात को एक पाँच वर्षीय बच्ची के साथ दुष्कर्म हुआ। बच्ची अपने माता-पिता के साथ रहती है जो यहाँ प्रवासी मजदूर के तौर पर काम करते हैं। बच्ची गुरुवार रात को गायब हो गई।

मामले में सामने आया कि बच्ची के साथ पास में ही रहने वाले 53 वर्षीय अली हुसैन ने दुष्कर्म किया है। सामने आया कि अली हुसैन ने बच्ची को चिप्स देने का लालच दिया और उसके अपने घर के भीतर उठा कर ले गया दुष्कर्म किया।

बच्ची इसके कुछ देर बाद अपने घर रोते हुए पहुँची। बच्ची ने इसके बाद अपने माता-पिता को पूरी घटना की जानकारी दी। बच्ची को उसके परिजनों ने अस्पताल में भर्ती करवाया। इस विषय में पुलिस को सूचना दी गई। बच्ची के साथ दुष्कर्म करने के बाद अली हुसैन ने यहाँ से भागने की भी कोशिश की।

पुलिस ने अली हुसैन की तलाश चालू की और उसे एक एक स्थानीय गोदाम से गिरफ्तार कर लिया। बच्ची के दुष्कर्म के मामले में पुलिस POCSO और भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। मामले में जाँच जारी है।

प्रवासी कामगारों की बच्चियों के साथ बलात्कार की केरल में यह कोई पहली घटना नहीं है। केरल के भीतर यह काफी बड़ा मुद्दा है। इससे पहले अक्टूबर, 2023 में भी बिहार से केरल काम करने गए दंपती की एक 4 वर्षीय बच्ची का भी रेप किया गया था। इसके अलावा जुलाई, 2023 में भी एक ऐसा ही मामला सामने आया था जहाँ प्रवासी कामगारों की बच्ची का रेप हुआ।

गाँधीवाद की आड़ लेकर सजा से बचने की कोशिश कर रहा कश्मीरी आतंकी यासीन मलिक: अपहरण, हत्या, आतंकवाद और टेरर फंडिंग के मामलों में रहा है शामिल

जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) के आतंकी यासीन मलिक, जिसे भारत के खिलाफ साजिश रचने और जंग छेड़ने का दोषी पाया गया था, ने अब कोर्ट में नया दावा किया है कि उसने 1994 से ‘गाँधीवादी तरीका’ अपना लिया था। एक ऐसा इस्लामिक कट्टरपंथी, जिसने अपनी पूरी ज़िंदगी आतंकवाद और मासूमों की हत्याओं में बिताई हो, अब सजा से बचने के लिए इस तरह के दावे कर रहा है।

हाल ही में दाखिल किए गए एक एफिडेविट में यासीन मलिक ने अपने आतंकी ऑर्गनाइजेशन पर लगे बैन को हटाने की माँग की है। उसने खुद को गाँधीवादी बताया है। उसने कहा कि उसने 30 साल पहले ‘सशस्त्र संघर्ष’ (यानी आतंकवाद) छोड़ दिया था और अब ‘संयुक्त स्वतंत्र कश्मीर’ के लिए गाँधीवादी तरीके से लड़ाई लड़ने का फैसला किया। लेकिन ये दावा सिर्फ उसकी सजा से बचने की कोशिश है, क्योंकि उसका खौफनाक अतीत साफ दिखाता है कि उसकी असली मंशा क्या रही है।

हालाँकि, UAPA ट्रिब्यूनल ने JKLF-यासीन पर लगे बैन को 5 साल और बढ़ा दिया है। मलिक ने अपने एफिडेविट में ये भी कहा कि केंद्र सरकार के बड़े अफसर और नेता उससे कश्मीर मसले का शांतिपूर्ण समाधान ढूँढने के लिए बात करते रहे हैं। लेकिन उसका ये दावा भी शक के घेरे में आता है, क्योंकि उसकी हरकतें बार-बार कश्मीर में हिंसा और दहशत फैलाने वाली रही हैं।

मोदी सरकार ने यासीन मलिक के फर्जी और गुमराह करने वाले दावों की पोल खोल दी। सरकार ने कोर्ट को बताया कि कैसे यासीन मलिक ने 2008 से 2016 के बीच जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद को फंडिंग करके माहौल खराब किया। सरकार ने UAPA ट्रिब्यूनल को बताया कि मलिक ने अपने नए ‘शांतिप्रिय’ चेहरे का इस्तेमाल करके हिंसक अभियान के लिए पैसे जुटाए। JKLF-यासीन ने अपनी राष्ट्रविरोधी गतिविधियाँ जारी रखीं और 2008, 2010 और 2016 के दंगों में उसकी बड़ी भूमिका रही।

यासीन मलिक की आतंकी जिंदगी और गुनाहों की लंबी लिस्ट

मई 2022 में, स्पेशल NIA कोर्ट ने यासीन मलिक को जम्मू-कश्मीर में आतंकी फंडिंग गतिविधियों के लिए उम्रकैद की सजा दी थी। कोर्ट ने उसे UAPA के तहत दोषी माना। मलिक ने खुद केस में गुनाह कबूल किया था और माना था कि वो जम्मू-कश्मीर में टेरर फंडिंग एक्टिविटीज से जुड़ा हुआ था। NIA ने मलिक के लिए मौत की सजा की डिमांड की थी, लेकिन कोर्ट ने उसे दो उम्रकैद और पाँच 10-10 साल की सजा सुनाई। हालाँकि, ये सारी सजाएँ साथ-साथ चलेंगी।

मलिक पर 1989 में पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी रूबिया सईद के किडनैपिंग का और 1990 की शुरुआत में 5 IAF कर्मियों की हत्या का भी आरोप है। इसके अलावा, मलिक पर जस्टिस नीलकंठ गंजू की हत्या का आरोप है, जिन्होंने JKLF आतंकी मकबूल भट्ट को मौत की सजा सुनाई थी। इसके साथ ही, मलिक पर श्रीनगर में दूरदर्शन केंद्र के पूर्व डायरेक्टर लस्सा काउ की हत्या में भी शामिल होने का इल्जाम है।

यासीन मलिक का ‘गांधीवादी तरीका’ सिर्फ दिखावा है। उसकी आतंकी गतिविधियाँ और हिंसक हरकतें उसकी असली सच्चाई बताती हैं।

बुलंदशहर में कट्टरपंथी मुस्लिम भीड़ ने पुलिस पर किया पथराव, गाजियाबाद में मंदिर घेरा: यति नरसिंहानंद के बयान पर महाराष्ट्र में भी बवाल, ईशनिंदा का आरोप

उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में मुस्लिम भीड़ ने पुलिस पर हमला कर दिया। भड़काऊ नारे लगाने वाले मुस्लिमों को हिरासत में लिए जाने पर मुस्लिम भीड़ आक्रामक हो गई और जम कर पथराव किया। पुलिस ने पथराव और दंगा करने वाले 8 लोगों को गिरफ्तार किया है।

दूसरी तरफ गाजियाबाद के डासना में भी मुस्लिम भीड़ ने एक मंदिर को घेर लिया और भड़काऊ नारे लगाए। मुस्लिमों ने यह भड़काऊ नारे और पत्थरबाजी हिन्दू संत यति नरसिंहानंद सरस्वती के एक बयान विरोध में लगाए हैं। मुस्लिमों का आरोप है कि संत नरसिंहानंद ने इस्लाम के पैगम्बर मुहम्मद का अपमान किया है।

हाल ही में हिन्दू संत यति नरसिंहानंद ने एक कार्यक्रम के दौरान पुतले जलाने की बात कही थी। इसी दौरान उन्होंने पैगम्बर मुहम्मद को लेकर एक टिप्पणी की। इसका वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो गया। मुस्लिमों ने आरोप लगाया कि यति नरसिंहानंद ने पैगम्बर मुहम्मद की शान में गुस्ताखी की है। मुस्लिमों ने यति नरसिंहानंद के विरुद्ध उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में बवाल किए।

इसी कड़ी में बुलंदशहर के सिकन्द्राबाद थाना क्षेत्र में भी मुस्लिमों ने जुमे की नमाज के बाद हंगामा किया। इसी भीड़ में शामिल कुछ लोगों ने ‘सर तन से जुदा’ वाले नारे लगाए। सिकन्द्राबाद पुलिस नारे लगाने वाले कुछ अराजक तत्वों को पकड़ कर थाने ले गई।

इसके बाद शुक्रवार शाम को ही गद्दीवाडा इलाके में मुस्लिमों ने पुलिस पर हमला कर दिया गया और पथराव हुआ। मुस्लिम सड़कों पर हंगामा करते रहे। भीड़ को सड़क पर हंगामा काटते हुए वायरल वीडियो में देखा जा सकता है। बुलंदशहर पुलिस ने इसके बाद मोर्चा संभाल लिया और दंगाइयों को खदेड़ दिया।

जिले के SSP ने बताया है कि पुलिस ने दंगाइयों के खिलाफ दो मामले दर्ज कर लिए हैं और 8 लोगों को भी गिरफ्तार किया है। SSP ने बताया है कि मामले किसी के इस पथराव में घायल होने की सूचना नहीं है और पुलिस कार्रवाई के बाद स्थिति नियंत्रण में है।

गाजियाबाद में भी हंगामा

यति नरसिंहानंद सरस्वती के बयान के बाद गाजियाबाद स्थित डासना देवी मंदिर के बाहर भी मुस्लिम भीड़ ने बवाल किया है। शुक्रवार रात को मुस्लिमों का एक बड़ा हुजूम गाजियाबाद के डासना इलाके में स्थित इस मंदिर के बाहर इकट्ठा होकर बवाल काटने लगा। मंदिर के लोगों ने इसकी सूचना पुलिस को दी।

पुलिस ने मौके पर पहुँच कर लाठी चार्ज किया और हंगामा करने वाले मुस्लिमों को खदेड़ दिया। गाजियाबाद कमिश्नरेट के ग्रामीण इलाके के DCP ने बताया है कि अभी स्थित शांतिपूर्ण बनी हुई है। उन्होंने बताया है कि दंगाइयों को रोकने के लिए मंदिर के आसपास और भी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। उन्होंने लोगों से अफवाह ना फैलाने की अपील की है।

यति नरसिंहानंद के बयान को लेकर महाराष्ट्र के अमरावती में भी दंगा हुआ है। यहाँ प्रतिबंधित इस्लामी संगठन PFI की राजनीतिक यूनिट SDPI के कार्यकर्ताओं ने पुलिस पर पथराव किया। पुलिस ने यहाँ भी मुस्लिम दंगाइयों को खदेड़ने के लिए लाठीचार्ज किया।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इजराइल-जुल्फिकार और दिलशाद की माफ की फाँसी, 25 साल की होगी जेल: बुलंदशहर में हिंदू नाबालिग की गैंगरेप के बाद कर दी थी हत्या

बुलंदशहर चलती कार गैंगरेप और हत्या मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शुक्रवार (04 अक्टूबर) को तीनों दोषियों की फाँसी की सजा को घटाकर 25 साल की सजा कर दी। कोर्ट ने इसे ‘रेयरेस्ट ऑफ द रेयर’ केस नहीं माना और दोषियों की पुनर्वास और सुधार की संभावना पर जोर दिया। यह घटना जनवरी 2018 की है, जब बुलंदशहर जिले में 17 साल की आरुषि (बदला हुआ नाम) का अपहरण कर चलती कार में गैंगरेप कर उसकी हत्या कर दी गई थी।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बदली फाँसी की सजा

लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस अरविंद सिंह सांगवान और जस्टिस मोहम्मद अजहर हुसैन इदरीसी की बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा कि यह मामला ‘रेयरेस्ट ऑफ द रेयर’ की श्रेणी में नहीं आता, इसलिए दोषियों को फाँसी नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने तीनों दोषियों – जुल्फिकार अब्बासी, दिलशाद अब्बासी और इजराइल उर्फ मेलानी – को 25 साल की कैद की सजा सुनाई, जिसमें कोई माफी नहीं होगी।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, 2 जनवरी 2018 की शाम को दोषियों ने पीड़िता को उसके साइकिल से लौटते वक्त देखा और उसे मौज-मस्ती के इरादे से अगवा कर लिया। वे उसे अपनी कार में खींचकर ले गए और चलती कार में उसके साथ एक-एक करके बलात्कार किया। जब पीड़िता चिल्लाने लगी, तो उन्होंने उसका गला दुपट्टे से घोंटकर हत्या कर दी और उसका शव एक नहर में फेंक दिया।

मामले की सुनवाई के दौरान, बुलंदशहर की पॉक्सो (POCSO) कोर्ट ने मार्च 2021 में तीनों दोषियों को फाँसी की सजा सुनाई थी। अदालत ने कहा था कि इस घटना से समाज में भय का माहौल पैदा हुआ है और लोगों, विशेष रूप से अभिभावकों, में अपनी बेटियों को स्कूल भेजने को लेकर चिंता पैदा हो गई है। दोषियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 364 (अपहरण), 376D (गैंगरेप), 302/34 (हत्या), 201 (सबूत मिटाने) और 404 (संपत्ति छीनने) तथा पॉक्सो अधिनियम के तहत दोषी ठहराया गया था।

हाईकोर्ट की पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई

पॉक्सो कोर्ट में फाँसी की सजा पाए तीनों दोषियों ने फैसले के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। हाईकोर्ट ने इस मामले में निचली अदालत के फैसले की फिर से समीक्षा की और पाया कि यह ‘रेयरेस्ट ऑफ द रेयर’ केस की श्रेणी में नहीं आता। कोर्ट ने कहा कि निचली अदालत ने कोई ऐसे विशेष कारण नहीं बताए थे, जिनके आधार पर केवल फाँसी की सजा दी जानी चाहिए।

हाई कोर्ट ने कहा कि दोषियों का कोई पुराना आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था और उनके परिवारों की जिम्मेदारी भी थी। इसके अलावा, दोषियों की उम्र लगभग 24 साल थी, और उनमें से एक को स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ थीं। इन परिस्थितियों के मद्देनज़र, कोर्ट ने कहा कि दोषियों का सुधार और पुनर्वास संभव है, इसलिए फाँसी की जगह 25 साल की कैद की सजा उचित होगी।

सुप्रीम कोर्ट के नवास उर्फ मुलानवास केस का संदर्भ

हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के नवास उर्फ मुलानवास मामले का हवाला देते हुए कहा कि ‘रेयरेस्ट ऑफ द रेयर’ केसों में ही फाँसी की सजा दी जा सकती है, और ऐसे मामलों में भी यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि कोई असाधारण परिस्थिति हो, जिससे सजा को उलटा न जा सके। अदालत ने इस मामले में कहा कि निचली अदालत ने इस तरह की कोई असाधारण स्थिति का उल्लेख नहीं किया था, जो केवल फाँसी की सजा को उचित ठहरा सके।

क्या था पूरा मामला?

यह मामला जनवरी 2018 की घटना से जुड़ा है, जब बुलंदशहर जिले में 17 साल की पीड़िता आरुषि (बदला हुआ नाम) का अपहरण कर उसके साथ चलती कार में गैंगरेप किया गया और बाद में उसकी हत्या कर दी गई। इस वीभत्स घटना के बाद पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई थी। 4 जनवरी 2018 को पीड़िता का शव एक नहर में पाया गया था। परिजनों ने इजराइल, जुल्फिकार और दिलशाद को नामजद करते हुए उनके खिलाफ मामला दर्ज कराया था।

इस मामले में पुलिस की लापरवाही भी सामने आई थी। आरोप था कि तत्कालीन चौकी इंचार्ज ने घटना के बाद बरामद किए गए सबूतों को कोर्ट में पेश नहीं किया, जबकि वे सबूत केस के लिए महत्वपूर्ण थे। कोर्ट की नाराजगी के बाद पुलिस ने जाँच में तेजी लाई और तीनों आरोपितों के खिलाफ पुख्ता सबूत जुटाए।

पॉक्सो कोर्ट ने सुनाई थी फाँसी की सजा

मार्च 2021 में बुलंदशहर की पॉक्सो कोर्ट ने इस मामले में दोषियों को फाँसी की सजा सुनाई। अदालत ने कहा कि यह अपराध इतना गंभीर और वीभत्स था कि इससे समाज में भय का वातावरण बना और लोग अपनी बेटियों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हो गए। अदालत ने दोषियों को भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं और पॉक्सो एक्ट के तहत दोषी ठहराया था। फाँसी की सजा सुनाए जाने के बाद, पीड़िता की माँ ने कहा था कि वे तीनों दोषियों को फाँसी पर लटकते हुए देखना चाहती हैं। उन्होंने इस घटना को अपनी बेटी और पूरे परिवार के लिए अत्यंत दुखद और अपमानजनक बताया था।

हालाँकि, अब हाईकोर्ट ने फाँसी की सजा को बदलकर 25 साल की कैद की सजा दी है, यह निर्णय दोषियों के पुनर्वास की संभावना और अपराध की प्रकृति को ध्यान में रखते हुए लिया गया। कोर्ट ने कहा कि दोषियों की उम्र, उनका आपराधिक रिकॉर्ड न होना और उनके परिवार की जिम्मेदारी जैसे बिंदु इस मामले में सजा को कम करने के लिए पर्याप्त थे। इस फैसले के बाद, एक बार फिर यह चर्चा का विषय बन गया है कि किस प्रकार के मामलों में फाँसी की सजा दी जानी चाहिए और किस आधार पर इसे कम किया जा सकता है।

‘युवाओं को ड्रग्स की अँधेरी दुनिया में धकेल रही कॉन्ग्रेस’: गृहमंत्री अमित शाह ने बोला हमला, एयरपोर्ट से एक और आरोपित अरेस्ट, दुबई का कोराबारी है ₹5,600 करोड़ के ड्रग्स रैकेट के पीछे

दिल्ली पुलिस ने बड़े ड्रग सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है, जिसके बाद सियासी बवाल भी मच गया है। दिल्ली पुलिस के इस ऑपरेशन में लगभग 5,600 करोड़ रुपये मूल्य की कोकीन और हाइड्रोपोनिक मारिजुआना बरामद हुआ था। पुलिस ने इस मामले में तुषार गोयल को गिरफ्तार किया, जो कॉन्ग्रेस का पूर्व नेता हैं। इस खुलासे के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कॉन्ग्रेस पर कड़ा हमला बोला और युवाओं के भविष्य को अँधकार की ओर ढकेलने का आरोप लगाया।

गृहमंत्री अमित शाह ने कॉन्ग्रेस पर बोला तीखा हमला

गृह मंत्री अमित शाह ने इस मामले में कॉन्ग्रेस पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने ‘एक्स’ पर लिखा, “जब मोदी सरकार ‘नशामुक्त भारत’ के लिए जीरो टॉलरेंस की नीति अपना रही है, तब कॉन्ग्रेस के एक प्रमुख नेता का इस 5,600 करोड़ की ड्रग्स खेप में शामिल होना बेहद खतरनाक और शर्मनाक है।” शाह ने आरोप लगाया कि कॉन्ग्रेस युवाओं को ड्रग्स की अंधेरी दुनिया में धकेल रही है, जबकि मोदी सरकार उन्हें खेल, शिक्षा और इनोवेशन की ओर ले जा रही है।

शाह ने कॉन्ग्रेस के नेताओं पर अपने राजनीतिक रसूख का उपयोग कर युवाओं को ड्रग्स के दलदल में झोंकने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “हमारी सरकार, ड्रग्स के कारोबारियों का राजनीतिक पद या कद देखे बिना, ड्रग्स के पूरे तंत्र का विनाश कर ‘नशामुक्त भारत’ बनाने के लिए संकल्पित है।”

कॉन्ग्रेस की तरफ से आई सफाई

इस पूरे मामले में कॉन्ग्रेस ने किसी भी प्रकार की संलिप्तता से इनकार किया है। पार्टी के अनुसार, तुषार गोयल से उनका कोई संबंध नहीं है। भारतीय युवा कॉन्ग्रेस (IYC) के अनुसार, तुषार को अक्टूबर 2022 में पार्टी विरोधी गतिविधियों के चलते संगठन से निष्कासित कर दिया गया था। हालांकि, दिल्ली पुलिस की जांच में यह सामने आया है कि तुषार गोयल ने अपने सोशल मीडिया प्रोफाइल पर खुद को दिल्ली प्रदेश युवा कॉन्ग्रेस के RTI सेल का चेयरमैन बताया था।

दुबई में बैठा वीरेंद्र बसोया और ड्रग्स का इंटरनेशनल कनेक्शन

इस ड्रग्स रैकेट के मास्टरमाइंड के तौर पर वीरेंद्र बसोया का नाम सामने आया है, जो वर्तमान में दुबई में रह रहा है। वीरेंद्र बसोया पहले भी भारत में ड्रग्स के कई मामलों में संलिप्त रहा है। पिछले साल पुणे पुलिस द्वारा पकड़ी गई 3,000 करोड़ रुपये की म्याऊँ म्याऊँ ड्रग्स खेप में भी बसोया का नाम सामने आया था। इस केस में भी बसोया की संलिप्तता की पुष्टि की गई है।

बसोया ने तुषार गोयल को अपने ड्रग्स नेटवर्क से जोड़ा था, और उसने कोकीन की खेप की डिलीवरी के बदले तुषार को हर कन्साइनमेंट के लिए 3 करोड़ रुपये देने की डील की थी। दुबई से बसोया ने UK में रहने वाले जितेन्द्र गिल को भारत भेजा था, जो तुषार से मिलने दिल्ली आया था। दिल्ली पुलिस ने जितेन्द्र गिल को भी इस मामले में अमृतसर एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया। जितेन्द्र गिल पिछले 17 सालों से UK में रह रहा है और उसके पास UK का ग्रीन कार्ड है।

वीरेंद्र बसोया का कनेक्शन केवल भारत तक सीमित नहीं है। वह दुबई में रहकर इंटरनेशनल ड्रग्स सिंडिकेट चलाता है, जिसके तार UK, मुंबई और अन्य देशों से जुड़े हुए हैं। दिल्ली पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ मिलकर बसोया के खिलाफ कार्रवाई शुरू की है, ताकि उसे दुबई में गिरफ्तार किया जा सके। इसके अलावा, बसोया के डी-कंपनी से संबंधों की भी जाँच हो रही है।

इस ड्रग्स रैकेट में अब तक पाँच लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इसमें तुषार गोयल के अलावा हिमांशु कुमार, औरंगजेब सिद्दीकी, भरत कुमार जैन, और जितेन्द्र गिल शामिल हैं। यह ड्रग्स सिंडिकेट पैन-इंडिया स्तर पर फैला हुआ था, और इसका मुख्य उद्देश्य विभिन्न मेट्रो शहरों में कोकीन की आपूर्ति करना था।

इस ड्रग्स मामले में कॉन्ग्रेस और बीजेपी के बीच सियासी घमासान तेज हो गया है। बीजेपी ने इस मामले को लेकर कॉन्ग्रेस पर सीधा हमला बोला है। इस बड़े ड्रग्स रैकेट से जुड़े तमाम पहलू अभी भी खुल रहे हैं। कॉन्ग्रेस का इससे जुड़े होने का आरोप जहाँ सियासी बवाल मचा रहा है, वहीं पुलिस की जांच में इंटरनेशनल लिंक और डी-कंपनी से संभावित संबंध सामने आ रहे हैं।