भारत ने राजस्थान के जैसलमेर स्थित पोखरण फायरिंग रेंज में स्वदेशी रूप से विकसित VSHORADS मिसाइलों का सफलतापूर्वक परीक्षण किया है। DRDO ने यहाँ बहुत कम दूरी की वायु रक्षा प्रणाली के तीन परीक्षण किए गए। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सफल विकास परीक्षणों में शामिल DRDO, भारतीय सेना और उद्योग को बधाई दी।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि आधुनिक तकनीकों से लैस यह नई मिसाइल हवाई खतरों के खिलाफ सशस्त्र बलों को और मजबूत करेगी। रक्षा मंत्रालय ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, “DRDO भारत ने पोखरण से चौथी पीढ़ी की तकनीकी रूप से उन्नत लघु हथियार प्रणाली VSHORADS के तीन उड़ान परीक्षण सफलतापूर्वक किए हैं।”
उम्मीद है कि VSHORADS कम दूरी पर दुश्मन के विमानों, ड्रोन और अन्य हवाई लक्ष्यों से निपटने के लिए बलों की महत्वपूर्ण आवश्यकताओं को पूरा करेंगी। सेना अपनी आवश्यकताओं के लिए रूसी इग्ला मिसाइलों पर निर्भर है, लेकिन पिछले एक दशक से वह आधुनिकीकरण की आवश्यकता महसूस कर रही है।
VSHORADS परियोजना में विकास और उत्पादन में दो निजी कंपनियाँ भागीदार हैं। पिछले कुछ वर्षों से भारत मिसाइल सहित स्वदेशी हथियारों का तेजी से विकास कर रहा है। इस दिशा में यह सफल परीक्षण बेहद सकारात्मक माना जा रहा है। इससे भारती सेनाओं को मजबूती मिलेगी।
इससे पहले शुक्रवार (4 अक्टूबर) को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने नई दिल्ली में इंडो-पैसिफिक रीजनल डायलॉग (IPRD) 2024 को संबोधित करते हुए विवादों के शांतिपूर्ण समाधान के लिए भारत का समर्थन व्यक्त किया। इसके साथ ही उन्होंने इंडो-पैसिफिक के देशों के बीच सहयोग को बढ़ावा देने की अपील की।
उन्होंने कहा, “भारत ने विवादों के शांतिपूर्ण समाधान की लगातार वकालत की है और क्षेत्रीय संवाद, स्थिरता और सामूहिक विकास को बढ़ावा देने में आसियान की केंद्रीयता पर जोर देते हुए हिंद-प्रशांत क्षेत्र के देशों के बीच सहयोग को बढ़ावा देने की माँग की है।” रक्षा मंत्री ने महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भारत की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।
उन्होंने आगे कहा कि संयुक्त अभ्यास और सूचना-साझाकरण पहल सहित क्षेत्रीय भागीदारों के साथ जुड़ाव का उद्देश्य सामूहिक समुद्री सुरक्षा ढाँचे को मजबूत करना है। उन्होंने कहा किया कि भारतीय सशस्त्र बल, विशेष रूप से नौसेना, क्षेत्र के देशों के साथ सहयोगात्मक प्रयासों में सबसे आगे रहे हैं और उनकी क्षमता और योग्यता के निर्माण की दिशा में लगातार काम कर रहे हैं।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आगे कहा, “जबकि भारत का समुद्री सहयोग के लिए प्रयास जारी है, इसके हित किसी अन्य देश के साथ संघर्ष में नहीं हैं। किसी अन्य देश के हितों का अन्य देशों के हितों के साथ टकराव नहीं होना चाहिए। यही वह भावना है जिसके साथ हमें मिलकर काम करना चाहिए।”
इंडो-पैसिफिक के लिए भारत के दृष्टिकोण पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा, “इंडो-पैसिफिक के लिए भारत का दृष्टिकोण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के SAGAR (क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास) के विचार पर आधारित है, क्योंकि हम ऐसी साझेदारी को बढ़ावा देने में विश्वास करते हैं जो सतत विकास, आर्थिक विकास और आपसी सुरक्षा को प्राथमिकता देती है।”
रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत का अपने भागीदारों के साथ जुड़ाव इस समझ से निर्देशित है कि सच्ची प्रगति केवल सामूहिक कार्रवाई और तालमेल के माध्यम से ही हासिल की जा सकती है। उन्होंने कहा कि इन प्रयासों के कारण भारत को इस क्षेत्र में एक ‘विश्वसनीय और पसंदीदा सुरक्षा भागीदार और पहला उत्तरदाता’ माना जाता है।
बांग्लादेश में धार्मिक अल्पसंख्यकों खास कर हिंदुओं पर हो रहे इस्लामी कट्टरपंथियों के अत्याचारों, हमलों के खिलाफ अब पश्चिम बंगाल के हिंदू एकजुट हो रहे हैं। पश्चिम बंगाल के हिंदू न सिर्फ स्थानीय स्तर पर बांग्लादेशी घुसपैठियों को सबक सिखा रहे हैं, बल्कि बांग्लादेश से आधिकारिक चैनलों से आने वाले सामान का भी बहिष्कार कर रहे हैं। इस पूरे अभियान का एक ही मकसद है- बांग्लादेश के इस्लामी कट्टरपंथियों की जेब पर हमला और आर्थिक बहिष्कार। इसीलिए पश्चिम बंगाल के हिंदुओं ने बाकायदा #बायकॉटबांग्लादेश नाम से कैंपेन भी शुरू कर दिया है।
‘बांग्लादेश आउट’ कैंपेन की शुरुआत इस ज़रूरत से हुई कि एक ऐसे देश को आर्थिक मदद न दी जाए, जो इस साल 5 अगस्त से कट्टरपंथी इस्लामी लोगों के चंगुल में आ चुका है। जब बांग्लादेश में हिंदू समुदाय, उनके मंदिरों और व्यापारों पर हमले शुरू हुए, तो पश्चिम बंगाल के हिंदुओं ने खुद ही पड़ोसी देश में बने सामानों और सेवाओं के आर्थिक बहिष्कार को शुरू कर दिया।
OpIndia ने #BoycottBangladesh अभियान के आयोजक मयुख पाल से बात की। उन्होंने बताया कि शुरुआत में यह आंदोलन अनौपचारिक था। लोग अपने आप जुड़ने लगे, फंड इकट्ठा किया और ये सिर्फ एक महीने में 12 जिलों तक फैल गया। वो भी सिर्फ मौखिक प्रचार मात्र से।
मयुख पाल और उनके साथियों ने बांग्लादेशी सामानों के बहिष्कार से जुड़े पोस्टर छपवाए हैं और पूरे राज्य के सबसे व्यस्त इलाकों में लगवाए हैं।
पश्चिम बंगाल में हिंदुओं ने बांग्लादेशी हिंदुओं के लिए प्रदर्शन कर सुरक्षा की माँग की
पाल और उनके कार्यकर्ताओं ने पोस्टर छपवाए और पश्चिम बंगाल के सबसे व्यस्त इलाकों में लगाए, जैसे बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, और बाजार। स्वयंसेवकों ने लोगों से संपर्क किया, उन्हें बांग्लादेश की स्थिति के बारे में बताया और उस देश के उत्पादों का बहिष्कार करने की शपथ लेने के लिए प्रेरित किया। कई लोगों ने कैमरे के सामने यह शपथ ली कि वे बांग्लादेशी कपड़ों और सेवाओं का उपयोग नहीं करेंगे।
पश्चिम बंगाल के हिंदू बंगालियों की माँगें
मयुख पाल ने OpIndia को बताया कि उन्होंने 2500 से अधिक पोस्टर वितरित किए और 1 लाख से अधिक हिंदुओं को प्रभावित किया।
BoycottBangladesh अभियान से जुड़े हिंदू कार्यकर्ता आर बंगोपाध्याय ने बंगाली हिंदुओं की चार मुख्य माँगें बताईं हैं:
बांग्लादेशी नागरिकों के लिए वीजा जारी करना तुरंत बंद किया जाए।
जो बांग्लादेशी नागरिक भारत में रहकर भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल हैं, उन्हें देश से बाहर निकाला जाए।
कट्टरपंथी इस्लामी संगठनों को ब्लैकलिस्ट किया जाए, जो हिंदुओं के खिलाफ नफरत फैलाते हैं।
बांग्लादेश में बने उत्पादों का बहिष्कार किया जाए।
पश्चिम बंगाल में दीवारों, पेड़ों और रेलवे स्टेशनों पर ‘बांग्लादेश आउट’ के पोस्टर लगे
आर बंगोपाध्याय ने बताया कि पहले तीन माँगें भारतीय सरकार से हैं, जबकि चौथी माँग हिंदू समुदाय के लिए है।
#BoycottBangladesh आंदोलन किस तरह से आगे बढ़ा?
OpIndia ने ‘बांग्लादेश आउट’ अभियान के पोस्टरों को भी देखा। अंग्रेजी पोस्टरों में हिंदुओं के नरसंहार को रोकने, समुदाय को बचाने की जरूरत और चल रहे अत्याचारों के खिलाफ चुप्पी तोड़ने पर जोर दिया गया है, तो बांग्ला पोस्टरों में हिंदू समुदाय के मंदिरों और घरों के विनाश, हत्याओं, अपहरण और बलात्कार को उजागर किया गया था।
#BoycottBangladesh अभियान का अंग्रेजी पोस्टर
बंगाली पोस्टर में लिखा था, “हिंदुओं के खून से रंगे बांग्लादेशी कपड़ों का बहिष्कार करें।” इसमें ज़ारा, एचएंडएम, जीएपी जैसे ब्रांडों का नाम भी शामिल था।
बंगाली पोस्टर में उन कपड़ों की भी लिस्ट है, जो बांग्लादेश से मंगाए जाते हैं- जैसे साड़ी, चूड़ीदार, टी-शर्ट, शर्ट, जीन्स, स्वेटर, और लुंगी।
बांग्ला भाषा के पोस्टर
बांग्लादेशी सामानों के बहिष्कार का ये आंदोलन राज्य के व्यस्ततम इलाकों में पोस्टर लगाने से शुरु हुआ था और धीरे-धीरे आम लोग उससे जुड़ते चले गए। लोगों में जागरुकता लाने के लिए इस अभियान से जुड़े स्वयंसेवकों ने लोगों को जागरुक भी करना शुरू किया और लोगों को मौखिक रूप से भी इस अभियान की जरूरत को समझाया। उन्होंने बंगाली हिंदू समुदाय से सोशल मीडिया के माध्यम से हो रहे भ्रामक प्रचार से भी सावधान रहने की अपील की, जिसमें बांग्लादेश के हिंदु समुदाय पर हो रहे अत्याचारों को दबाने, छिपाने की कोशिशें की जाती हैं।
रेलवे स्टेशनों और अन्य व्यस्त जगहों पर पोस्टर लगाते युवा स्वयंसेवक
कई वीडियो में बंगाल के हिंदुओं को बांग्लादेशी वस्त्रों का बहिष्कार करते हुए देखा गया। जनता की प्रतिक्रिया जबरदस्त थी। बंगाली हिंदुओं ने यहाँ तक कसम खाई कि वे पद्मा नदी की हिलसा मछली नहीं खाएँगे।
Day 3 The hearts of Hindu Bengalis in West Bengal are crying after seeing the plight of persecuted minorities in Bangladesh. Eight to Eighty all souls are angry.
OpIndia ने बताया था कि बांग्लादेश सरकार ने दुर्गा पूजा के दौरान भारत को हिलसा मछली भेजने की परंपरा को रोक दिया था। लेकिन बाद में इस फैसले को पलट दिया गया। इसके बावजूद, बंगाली हिंदुओं ने यह साफ किया कि उनके लिए एक हिंदू का जीवन सबसे महत्वपूर्ण है।
यह भावना बंगाल के हिंदुओं के वीडियो इंटरव्यू में भी झलकती है, जिन्होंने ‘बॉयकॉट बांग्लादेश’ अभियान का समर्थन किया।
"We don't want Hilsa, we want the protection of the Hindus of Bangladesh" @Tithiroy1160992 of West Bengal erupted over the torture of minorities in Bangladesh. She also said "Bangladeshis get all kinds of benefits from jobs to medical treatment in india…"#SaveBangladeshiHinduspic.twitter.com/dcWBfpLaFJ
कुछ जूनियर डॉक्टर और छात्र भी इस अभियान में शामिल हो गए हैं। एक डॉक्टर ने बंगाली में कहा, “बांग्लादेश में हिंदुओं की स्थिति बेहद चिंताजनक है। महिलाएँ अत्याचार का शिकार हो रही हैं। हिंदू मंदिर नष्ट किए जा रहे हैं। इसलिए हम बांग्लादेश का बहिष्कार कर रहे हैं।”
Doctors are also calling for Bangladesh boycott. Indian doctors have protested the killing of Bangladeshi Hindu victims of torture and ®ape. "Boycott those who are demolishing Hindu temples" – said the doctor.#BoycottBangladesh#SaveBangladeshiHinduspic.twitter.com/NjRGBAShD3
ममता सरकार के खिलाफ कोलकाता पुलिस के वॉटर कैनन का सामना करने वाले हिंदू संत ने भी इस अभियान का समर्थन किया और बांग्लादेशी उत्पादों के बहिष्कार की माँग की।
In protest against the persecution of Hindus in Bangladesh, today Prabir Bose campaigned with us. He said, "Please embark against persecution of Hindus in Bangladesh, Don't fall for cheap hilsa, We have to boycott them completely…"#SaveBangladeshiHinduspic.twitter.com/FbovX3FTH8
‘बांग्लादेश आउट’ आंदोलन को सोशल मीडिया पर भी समर्थन मिला है, जिसमें प्रसिद्ध यूट्यूबर्स और कार्यकर्ता जैसे रुद्र प्रसाद बनर्जी और सौरिश मुखर्जी शामिल हैं।
बायकॉट बांग्लादेश अभियान की अगुवाई कर रहे मयुख पाल ने ऑपइंडिया से बताया कि उनका आंदोलन उत्तर 24 परगना से शुरू हुआ और पूरे राज्य में फैल गया। उन्होंने बताया कि उन्होंने भारत के अन्य हिस्सों में भी जागरूकता बढ़ाने के लिए अपने पोस्टरों की सॉफ्ट कॉपी भेजी है।
बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमलों के मामले बढ़े
बांग्लादेश में हिंदुओं से घृणा के मामले हमले से सामने आते रहे हैं। लेकिन पिछले कुछ समय में हिंदू मंदिरों, दुकानों और व्यवसायों पर कम से कम 205 हमले हो चुके हैं, विशेषकर शेख हसीना के प्रधानमंत्री पद से हटने के बाद।
चटगाँव में एक हिंदू युवक को ईशनिंदा के आरोप में उसकी मॉब लिंचिंग के लिए इस्लामी कट्टरपंथियों की भीड़ ने पूरे थाने को ही घेरा लिया और आर्मी की गाड़ियों तक में आग लगा दी थी।
ओपइंडिया ने पहले बताया था कि कैसे खुलना के सोनाडांगा इलाके में एक मुस्लिम भीड़ ने हिंदू लड़के उत्सव मंडल को ‘ईशनिंदा’ के आरोप में लगभग मार डाला था।
यह भी खुलासा हुआ था कि मुस्लिम छात्रों ने 60 से अधिक हिंदू शिक्षकों, प्रोफेसरों और सरकारी अधिकारियों को अपने पदों से इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया है।
हाल ही में, मानवाधिकार कार्यकर्ता और निर्वासित बांग्लादेशी ब्लॉगर असद नूर ने बताया कि अल्पसंख्यक समुदाय को ‘जमात-ए-इस्लामी’ में शामिल होने के लिए मजबूर किया जा रहा है।
6 सितंबर को चटगांव के कादम मुबारक इलाके में गणेश उत्सव के दौरान हिंदू भक्तों की एक शोभायात्रा पर भी हमला हुआ था।
बांग्लादेश में पिछले 6 दिनों में कुल 16 हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियों और तीन मंदिरों पर हमला किया जा चुका है। लेकिन हमेशा की तरह अब भी हिंदुओं के खिलाफ हिंसा को ‘फर्जी‘, या ‘ राजनीति से प्रेरित ‘ बताकर बांग्लादेशी सरकार इस्लामी कट्टरपंथियों की मदद करे हिंदुओं पर अत्याचार को समर्थन दे रही है।
मूल रूप से ये रिपोर्ट अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित है। मूल रिपोर्ट को यहाँ क्लिक कर पढ़ सकते हैं।
नवरात्रि का त्योहार देश भर में धूम-धाम से मनाया जा रहा है। इस बीच मध्य प्रदेश के रतलाम में गरबा पंडालों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है। शहर के सभी गरबा पंडालों में इसको लेकर बैनर लगाए गए हैं। उधर, शहर काजी अहमद अली ने मुस्लिम समुदाय के लोगों से घर में रहने की अपील की और कहा कि मेला-बाजार घुमना इस्लाम के खिलाफ है।
इसको लेकर अहमद अली ने एक पत्र भी जारी किया है। अपने पत्र में उन्होंने लिखा है, “मुस्लिम अवाम से गुजारिश है कि नौजवान, माँ, बहन और उम्मत की बेटियाँ नवरात्रि पर न ही मेले में जाएँ और न ही गरबा देखने जाएँ। हालात को मद्देनजर रखते हुए अपने घरों में रहें। बाजार, मेलों में घूमना दीन-ए-इस्लाम में जायज नहीं है। लिहाजा, ऐसे गैर-दीनी मामलात में सख्ती से बचा जाए।”
बता दें कि जिले के 735 स्थानों पर गरबा का आयोजन हो रहा है। हिंदू संगठनों और गरबा आयोजन समिति ने इस बार फैसला लिया है कि गरबा पंडालों में गैर-हिंदुओं को नहीं घुसने दिया जाएगा। इसके साथ ही अश्लील वस्त्रों में भी प्रवेश पर रोक लगाई गई है। गरबा के दौरान बॉलीवुड गाने भी नहीं बजेंगे। शराब पीकर आने वालों के खिलाफ सख्ती की जाएगी।
चिट्ठी के वायरल होने के बाद आसिफ अली ने कहा कि मुस्लिम महिलाएँ वैसे भी बाहर नहीं जाती, क्योंकि इस्लाम में पर्दे का हुक्म है। आजकल के माहौल को देखते हुए मुस्लिम युवक-युवती न जाएँ। माहौल अभी गर्म है और लोगों के बयान भी आ रहे हैं। इसलिए मुस्लिमों से घर में रहकर नमाज़ पढ़ने और इबादत करने की सलाह दी गई है।
नवरात्रि को लेकर रतलाम पुलिस अलर्ट मोड पर है। पंडालों की सुरक्षा के लिए 60 से अधिक सीसीटीवी कैमरे और 40 से अधिक सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है। अवैध प्रवेश को रोकने के लिए तीन अलग-अलग बैरियर बनाए गए हैं। जिले में 62 और शहर में 28 स्थान संवेदनशील हैं। इसके लिए विशेष व्यवस्था की गई है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शनिवार (5 अक्टूबर, 2024) को महाराष्ट्र पहुँचे हैं। पीएम मोदी सबसे पहले महाराष्ट्र के वाशिम में पोहरादेवी मंदिर पहुँचे। उन्होंने वाशिम में कृषि क्षेत्र को ₹23,000 करोड़ की योजनाएँ दी। पीएम मोदी ने यहाँ एक जनसभा को भी संबोधित किया। पीएम मोदी के इस महाराष्ट्र दौरे से देश को लगभग ₹56000 करोड़ के प्रोजेक्ट मिले हैं।
पीएम मोदी वाशिम में पोहरादेवी मंदिर पहुँचे। यह मंदिर यहाँ के बंजारा समुदाय के लिए श्रद्धेय है। यह मंदिर माता माता जगदम्बा का है। यहाँ पीएम मोदी ने सुबह पूजा अर्चना की और इसके बाद यहाँ स्थापित नगाड़ा बजाया। पीएम मोदी ने वाशिम में कृषि और पशुपालन से सम्बन्धित योजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण किया।
पीएम श्री @narendramodi ने महाराष्ट्र के वाशिम में पोहरादेवी स्थित जगदम्बा माता मंदिर में दर्शन-पूजन कर देशवासियों के सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना की। pic.twitter.com/jPAGHeE5xW
पीएम मोदी ने वाशिम में किसान सम्मान निधि की 18वीं किश्त जारी की है। यह किश्त ₹20000 करोड़ की है। अब तक इस योजना के तहत ₹3.45 करोड़ किसानों को दिए जा चुके हैं। पीएम मोदी ने यहाँकृषि अवसंरचना कोष (एआईएफ) के तहत ₹1,920 करोड़ से अधिक की 7,500 से अधिक परियोजनाएँ राष्ट्र को समर्पित की।
प्रधानमंत्री ने यहाँ 9,200 किसान उत्पादक संगठनों (FPO) को भी राष्ट्र को समर्पित किया। इनका संयुक्त कारोबार लगभग 1,300 करोड़ रुपये है। उन्होंने यहाँ बंजारा म्यूजियम का उद्घाटन भी किया। पीएम मोदी ने वाशिम में एक जनसभा को भी संबोधित किया। इस जनसभा में उन्होंने बंजारा समुदाय पर रवैये को लेकर कॉन्ग्रेस को निशाने पर लिया।
पीएम मोदी ने कहा, “कॉन्ग्रेस की सोच शुरू से ही विदेशी रही है। अंग्रेजी हुकूमत की तरह ही ये कॉन्ग्रेसी परिवार भी दलित, पिछड़ा और आदिवासियों को अपने बराबर नहीं मानते। इन्हें लगता है कि भारत पर सिर्फ एक परिवार की ही हुकूमत रहनी चाहिए। इसलिए उनलोगों ने बंजारा समाज के प्रति हमेशा अपमानजनक रवैया बनाए रखा।”
#WATCH | Addressing a public rally in Maharashtra's Washim, PM Narendra Modi says, "… Drugs worth thousands of crores have been recovered in Delhi. The main accused in this drug racket is a Congress leader. Congress wants to push the youth towards drugs and use that money to… pic.twitter.com/HATfm2QGNh
पीएम मोदी ने इस दौरान हाल ही में कॉन्ग्रेस नेता के पास से ड्रग पकडे जाने का मामला भी उठाया। उन्होंने कहा, “हाल ही में दिल्ली में हजारों करोड़ का ड्रग्स का जखीरा पकड़ा गया। इस ड्रग्स रैकेट का मुख्य सरगना कॉन्ग्रेस का एक नेता निकला। कॉन्ग्रेस युवाओं को नशे की लत में धकेल कर चुनाव जीतना चाहती है।”
पीएम मोदी ने बंजारा समुदाय की भलाई के लिए किए गए NDA सरकारों के काम भी यहाँ गिनाए। उन्होंने यहाँ कहा कि एनडीए की केन्द्र सरकार ने ही घुमंतू और अर्ध घुमंतू समुदाय के लिए कल्याण बोर्ड का गठन भी किया है। पीएम मोदी इसके बाद ठाणे भी जा रहे हैं जहाँ वह कई इन्फ्रा योजनाओं का शिलान्यास करेंगे।
पीएम मोदी ठाणे में मुंबई मेट्रो लाइन-3 के बीकेसी से आरे जेवीएलआर खंड का उद्घाटन करेंगे, जिसकी लागत करीब ₹14,120 करोड़ है। इस खंड में 10 स्टेशन होंगे, जिनमें से 9 भूमिगत होंगे। इसके अलावा वह लगभग ₹12,200 करोड़ की लागत से बनने वाली ठाणे इंटीग्रल रिंग मेट्रो रेल परियोजना की आधारशिला रखेंगे। वह और भी कई योजनाओं को हरी झंडी दिखाएँगे।
गुजरात के अहमदाबाद के दानीलीमडा में शुक्रवार (4 अक्टूबर) को मुस्लिम समुदाय के दो नाबालिगों को राष्ट्रीय ध्वज का अपमान करने के आरोप में पुलिस के हवाले कर दिया गया। स्थानीय लोगों ने उन्हें राष्ट्रीय ध्वज के कपड़े से बनी पतंग ले जाते हुए पकड़ा। यह जानकारी मिली है कि पुलिस ने दोनों के खिलाफ FIR दर्ज की है।
ऑपइंडिया के साथ बातचीत में दानीलीमडा पुलिस के PI जीजे रावत ने इसकी पुष्टि की है। दोनों के खिलाफ ‘प्रिवेंशन ऑफ इंसल्ट्स टू नेशनल ऑनर एक्ट, 1971’ की धारा 2 (भारतीय राष्ट्रीय ध्वज का अपमान) और भारतीय दंड संहिता की धारा 54 (अपराध के समय उत्प्रेरक के रूप में उपस्थित होना) के तहत आरोप लगाए गए हैं। दोनों आरोपित नाबालिग हैं।
शिकायत में शिकायतकर्ता ने बताया कि वे रात में दानीलीमडा क्षेत्र से गुजर रहे थे, तभी उन्होंने एक सफेद एक्टिवा स्कूटर पर दो व्यक्तियों को देखा। उन्होंने देखा कि राष्ट्रीय ध्वज जैसा दुपट्टा बाँधकर उसमें पतंगें बाँधी हुई थीं। पूछताछ करने पर दोनों वहाँ से भाग गए, लेकिन पीछा करने पर मंगल विकास चौराहे के पास उनका पैकेट गिर गए।
इसके बाद वे रूक कर पैकेट लेने लगे। इसी दौरान शिकायतकर्ता ने दोनों को पकड़ लिया। पैकेट की जाँच करने पर पता चला कि इसमें लगभग आठ राष्ट्रीय ध्वज सिलकर एकत्रित किए गए थे। शिकायतकर्ता ने फिर उन ध्वजों को सम्मानपूर्वक निकाला। नाबालिगों ने बताया कि उन्हें इसके अलावा कोई दूसरा कपड़ा नहीं मिला था।
इस बीच स्थानीय लोगों की भीड़ इकट्ठा हो गई। उन्होंने भी राष्ट्रीय ध्वज के अपमान को देखकर दोनों नाबालिगों को पकड़ लिया। इसके बाद पुलिस को सूचित किया गया। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुँची और दोनों नाबालिगों को पकड़कर अपने साथ थाने चली गई।
घटना के कुछ फोटो और वीडियो भी ऑपइंडिया के पास उपलब्ध हैं। वीडियो में दोनों व्यक्ति एक बाइक पर जाते हुए दिखते हैं, जिसमें पीछे बैठा व्यक्ति एक पैकेट पकड़ रखा है, जिसमें पतंग है। इस पैकेट को बनाने के लिए इस्तेमाल किया गया कपड़ा स्पष्ट रूप से राष्ट्रीय ध्वज है, जिसमें केसरिया, सफेद और हरे रंग के साथ केंद्र में अशोक चक्र भी दिखाई देता है।
स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, राष्ट्रीय ध्वज के अपमान के आरोप में दोनों मुस्लिम नाबालिगों को पुलिस थाने ले जाने के बाद स्थानीय AIMIM और कॉन्ग्रेस के नेता भी पुलिस थाने पहुँच गए। वहाँ भीड़ भी इकट्ठा हो गई। हालाँकि, पुलिस ने समय पर कार्रवाई की, जिसके चलते कोई अप्रिय घटना नहीं हुई। फिलहाल पुलिस ने मामले की जाँच कर रही है।
मध्य-पूर्वी मुल्क लेबनान के आतंकी संगठन हिजबुल्लाह के चीफ नसरल्लाह के मारे जाने के बाद जुम्मे की नमाज (शुक्रवार की नमाज) के दौरान देश के कई हिस्सों में कट्टरपंथियों ने उसे श्रद्धांजलि दी। बिहार के छपरा और मुजफ्फरनगर सहित विभिन्न जगहों पर इस्लाम के शिया फिरके से ताल्लुक रखने वाले लोगों ने आंतकी नसरल्लाह की मौत पर मातम मनाया गया।
हिजबुल्लाह चीफ की याद में शुक्रवार (4 अक्टूबर 2024) को छपरा के दहियावाँ स्थित शिया इमामबाड़ा में मातमी सभा का आयोजन किया गया। रात की नमाज के बाद एक कार्यक्रम का आयोजन हुआ, जिसमें शिया समुदाय के लोगों ने हाथों में तख्ती और आतंकी नसरल्लाह की तस्वीर लेकर उसे श्रद्धांजलि श्रद्धांजलि दी।
इमामबाड़ा में नसरल्लाह की तस्वीर के सामने कैंडल जलाकर फतिहा पढ़ा गया। शिया मस्जिद के मुख्य मौलवी सैयद मासूम रजा ने कहा, “नसरल्लाह ने अपने समुदाय के लोगों के लिए शहादत दी है। वो दहशतगर्द वाले जिहादी नहीं थे। वो गरीब लोगों की लड़ाई लड़ रहे थे। इंसाफ वाले जिहादी थे।” मातमी सभा में नसरल्लाह और उसकी बेटी को सदी का सबसे बड़ा शहीद कहा गया।
वहीं, मुजफ्फरपुर में हसन नसरल्लाह की मौत और उसे आतंकी कहने पर शिया समुदाय के लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया। शिया धर्मगुरु सैयद मोहम्मद काज़ीम शबीब के नेतृत्व में बड़ी संख्या में शिया समुदाय के मुस्लिमों ने कमरा मोहल्ला इमाम चौक से सरैयागंज टावर तक कैंडल मार्च निकाला।
इस दौरान आतंकी संगठन हिजबुल्लाह के प्रमुख नसरल्लाह की तस्वीरें हाथों में लेकर इजरायल के खिलाफ जमकर नारेबाजी। उन्होंने नसरल्लाह को शहीद बताया। मौलाना काज़ीम शबीब ने कहा कि नसरल्लाह इजराइल के खिलाफ लड़ रहे थे। उन्हें सब आतंकवादी कह रहे हैं, जो कि बेहद गलत है।
इससे पहले लखनऊ से लेकर कश्मीर तक नसरल्लाह की मौत पर मातम मनाया गया। लखनऊ में तो इसको लेकर तीन दिन का शोक तक रख दिया गया है। नसरल्लाह की मौत के बाद जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती और नेशनल कॉन्फ्रेंस पार्टी के श्रीनगर लोकसभा सीट से सांसद रुहुल्लाह मेहदी ने अपने चुनाव प्रचार को रोक दिया।
यह विरोध और मातमपुरसी सिर्फ उत्तर प्रदेश, बिहार, कश्मीर या अन्य मुस्लिम बहुल इलाकों तक ही सीमित नहीं रहा है, बल्कि तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई की एक मस्जिद में भी नसरल्लाह के पोस्टर लगा दिए गए और श्रद्धांजलि दी गई।
बता दें कि 27 सितंबर 2024 को इजरायल ने लेबनान में हिजबुल्लाह के मुख्यालय पर 80 टन बम से हमला किया था। इसमें हसन नसरल्लाह मारा गया था। जिस समय यह हवाई हमला हुआ, उस समय नसरल्लाह दक्षिणी बेरूत में हिजबुल्लाह के अंडरग्रांउड हेडक्वॉर्टर में शीर्ष नेताओं के साथ बैठक कर रहा था।
इजरायल ने पिछले 2 महीने में हिजबुल्लाह की पूरी लीडरशिप को खत्म कर दिया है। इससे पहले 30 जुलाई को उसने हिजबुल्लाह के दूसरे सबसे सीनियर लीडर फुआद शुकर को मार गिराया था। इसके अगले दिन यानी 31 जुलाई को ईरान में आतंकी संगठन हमास के चीफ इस्माइल हानियाह को मार दिया था। अब हिजबुल्लाह में कोई सीनियर नेता नहीं बचा है। वहीं हमास की लीडरशिप में सिर्फ याह्या सिनवार जीवित है।
उत्तर प्रदेश के मेरठ में ATS और दिल्ली पुलिस ने संयुक्त रूप से छापा मारा है। इस छापेमारी में एक मुस्लिम युवक को पकड़ा गया है। सुरक्षा एजेंसियों को युवक के पाकिस्तान के आतंकी संगठन से संबंध होने का शक है। ATS और दिल्ली पुलिस की जाँच अभी जारी है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मेरठ के सरधना के खिवाई इलाके में शनिवार सुबह UP ATS और दिल्ली पुलिस की टीमें पहुँची। इन टीमों ने महकार नाम के एक युवक को पकड़ा। उसकी उम्र 22 साल है। ATS महकार को गिरफ्तार करके अपने साथ ले गई।
ATS और पुलिस को सूचना मिली थी कि खिवाई के युवक पाकिस्तान में बात करते हैं। इसी कारण से एजेंसियों को शक हुआ कि यह युवक आतंकी संगठनों से जुड़े हुए हैं। एजेंसियों ने कई घंटों तक इस कस्बे में जाँच की है। महकार के अलावा दो और युवकों से पूछताछ हुई है।
NIA ने भी 22 जगह मारे छापे
उत्तर प्रदेश के अलावा देश के बाकी हिस्सों में बड़े स्तर पर छापेमारी हुई है। NIA और ATS ने देश के अलग-अलग हिस्सों में 22 जगह छापा मारा है। NIA ने दिल्ली, महाराष्ट्र और असम समेत पाँच राज्यों में यह जाँच की है। यह छापेमारी जैश-ए-मुहम्मद से कनेक्शन के मामले में हुई है।
जम्मू कश्मीर के भी कुछ ठिकानों पर NIA की छापेमारी की बात सामने आई है। महाराष्ट्र के जलगाँव, जालना और छत्रपति संभाजी नगर समेत बाकी जगहों पर छापे मारे गए हैं और इनमें लगभग 5 लोग पकड़े गए हैं। इन लोगों पर शक है कि यह जम्मू कश्मीर के आतंकी संगठनों से भी जुड़े हैं।
NIA इस मामले में आतंक की फंडिंग का एंगल जाँच रही है। NIA ने मालेगाँव के एक होम्योपैथी क्लिनिक से लोग पकड़े हैं। दिल्ली से भी 2 लोगों को पकड़े जाने की बात सामने आई है। NIA को इन गिरफ्तारियों के साथ ही संदिग्ध साहित्य भी मिला है। NIA जैश ए मुहम्मद के जम्मू कश्मीर से बाहर विस्तार को लेकर लम्बे समय से धरपकड़ कर रही है।
इससे पहले NIA ने पश्चिम बंगाल में जगहों पर हाल ही में छापेमारी की थी। यह छापेमारी माओवादी संगठन CPI (M) का दायरा बढ़ाने की साजिश को लेकर की गई थी। पश्चिम बंगाल के भीतर NIA ने 11 जगहों पर छापेमारी की थी। इस छापेमारी में NIA ने कई ऐसे दस्तावेज इकट्ठा किए थे, जिससे माओवादी साजिश का खुलासा हुआ था।
पाकिस्तान के सिंध में शुक्रवार (4 अक्टूबर 2024) को एक हिंदू किसान और उसके तीन बच्चे मृत पाए गए। 32 वर्षीय किसान, जिसका नाम चमन कोल्ही बताया गया है, और उसके तीन बच्चों के शव उमारकोट जिले के पल्लि मोर के पास एक आम के बाग में पेड़ से लटके हुए मिले। बच्चों के नाम 8 साल के भागचंद, 6 साल के हीरो, और 4 साल की सोनी हैं।
पुलिस के अनुसार, इन शवों को बोदार फार्म पुलिस थाने के अंतर्गत एक आम के बाग से पेड़ से उतारा गया और एक स्थानीय अस्पताल में भेजा गया। चमन और उसके बच्चों के शव एक ही पेड़ से लटके हुए मिले।
पाकिस्तानी समाचार पत्र डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने बताया कि चमन कोल्ही आर्थिक परेशानियों का सामना कर रहा था और इस मौसम में फसल खराब होने के कारण उसकी पत्नी के साथ तनाव भी चल रहा था। शुरुआती जाँच से यह पता चला है कि चमन ने पहले बच्चों को फाँसी लगाई और फिर खुदकुशी की। हालाँकि स्थानीय पुलिस मामले की जाँच कर रही है।
यह दुखद घटना सिंध में हिंदू समुदाय की मुश्किलों को उजागर करती है। हिंदू कार्यकर्ता शिव कच्छी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस घटना की जानकारी साझा की और सरकार की निष्क्रियता पर अफसोस जताया।
शिव काच्छी ने लिखा, “भुखमरी और बेरोजगारी से परेशान होकर एक गरीब हिंदू किसान चमन कोल्ही ने अपने तीन निर्दोष बच्चों के साथ आत्महत्या कर ली। सिंध में हिंदू समुदाय में आत्महत्या की घटनाएँ बढ़ गई हैं। सरकार और संस्थान बस मूक दर्शक बने हुए हैं।”
بہت ہی افسوس ناک واقعہ? بھوک اور بیروزگاری سے تنگ آ کر ھندو غریب کسان چمن کولھی نے اپنے تین معصوم بیٹون سمیت خودکشی کرلی سندہ کے اندر ھندو برادری مین خودکشی کے واقعات بہت زیادہ بڑھ گئے ہین حکومت اور ادارے خاموش تماشائی بنے ہوئے ہین غریب لوگ بھوگ اور بیروزگاری کی وجہ سے خودکشیان… pic.twitter.com/DtubxMgSkz
भारत के न्यायालय में इन दिनों मैरिटल रेप अर्थात वैवाहिक बलात्कार को लेकर सुनवाई चल रही है। इसको लेकर अब सरकार ने भी सर्वोच्च न्यायालय में अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में कहा कि वैवाहिक बलात्कार को अपराध की श्रेणी में नहीं लाया जाना चाहिए, क्योंकि महिलाओं की रक्षा के लिए कई कानून पहले से हैं।
केंद्र सरकार ने न्यायालय से कहा कि वैवाहिक बलात्कार का मामला कानूनी विषय के स्थान पर सामाजिक मुद्दा है और इसका समाज पर सीधा असर पड़ेगा। केंद्र सरकार का यह भी कहना था कि जब तक सभी हितधारकों के साथ विचार नहीं किया जाएगा, तब तक इस पर कोई भी निर्णय नहीं लिया जा सकता है।
पुरुष आयोग की अध्यक्ष होने के नाते मैंने अर्थात बरखा त्रेहन ने भी सर्वोच्च न्यायालय में यह याचिका दायर की है कि वैवाहिक संबंधों में बलात्कार को लेकर कोई भी निर्णय न लिया जाए। अपनी संस्था के माध्यम से मैं लगातार देखती रहती हूँ कि कैसे पुरुषों को किसी न किसी झूठे मामले में फँसाने की साजिश चलती रहती है।
आए दिन ऐसे मामले सामने आते रहते हैं, जिनमें पुरुषों को घरेलू मामलों में झूठा फँसाया जाता है। इस कारण से पुरुषों में आत्महत्या की दर भी बहुत अधिक बढ़ गई है। जब पुरुषों के खिलाफ इस सीमा तक पहले से ही दुराग्रह है तो ऐसे में वैवाहिक बलात्कार तो उसके खिलाफ एक बहुत बड़ा हथियार बन जाएगा।
आप ही बताएँ कि कैसे और कब कोई यह तय कर सकेगा कि बेडरूम में आखिर क्या हुआ था और इसकी सीमा में क्या-क्या आएगा? एक पति और पत्नी के बीच पचास तरह की लड़ाई होती है। ऐसे में यह कैसे तय हो पाएगा कि कब बलात्कार हुआ और कब आपसी सहमति से दोनों के बीच संबंध बने?
मैंने अपनी याचिका में भी कहा है कि यदि ऐसा ही रहेगा तो आज के युवा शादी करने से बचते फिरेंगे। वे शादी ही नहीं करेंगे, क्योंकि उन्हें इस बात का भय हमेशा रहेगा कि कब उन पर बलात्कारी होने का ठप्पा लग जाएगा? वैसे ही भारत के युवक अब शादी करने से बच रहे हैं। ऐसे में यह कानून इस समस्या को और बढ़ा देगा।
याचिका से हटकर भी यदि मैं कहूँ तो यह बहुत ही बेसिक सवाल है कि इस बात का निर्धारण कैसे होगा कि कब आपसी सहमति से संबंध हैं और कब नहीं? बलात्कार कोई ऐसा छोटा शब्द नहीं है, जिसे असहमति के दायरे में लाकर निर्धारित कर दिया जाए। एक पुरुष जो एक क्षण पहले तक पति रहा हो और दूसरे ही क्षण बलात्कारी हो जाएगा।
इतना ही नहीं, इस आरोप के बाद उसके बच्चों पर भी इसका गंभीर परिणाम पड़ेगा, क्योंकि इस बात का निर्धारण करने का कोई भी तरीका नहीं है कि कब संबंध असहमति से बने और फिर एक पवित्र संबंध के बच्चे बलात्कारी और पीड़िता के बच्चों में तुरंत ही बदल जाएँगे।
इससे बच्चों के जीवन पर क्या प्रभाव पड़ेगा, यह भी नहीं सोचा गया है। क्या बच्चे जीवन भर स्वयं के अस्तित्व से घृणा नहीं करने लगेंगे? मैरिटल रेप कहना बहुत सरल है, मगर इसके दुष्परिणाम अत्यंत व्यापक हैं। यह पूरी की पूरी सभ्यता को बलात्कारी घोषित करने का माध्यम है। यह पति-पत्नी के परस्पर संबंधों की हत्या का माध्यम है।
केरल के मलप्पुरम जिले में अली हुसैन नाम के एक व्यक्ति पर 5 वर्ष की एक बच्ची के साथ दुष्कर्म करने का आरोप लगा है। बच्ची को चिप्स देने के बहाने वह अपने घर ले गया और उसके साथ दुष्कर्म किया। पुलिस ने अली हुसैन को गिरफ्तार करके जाँच चालू कर दी है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मलप्पुरम के नीलाम्बुर में गुरुवार (3 अक्टूबर, 2024) रात को एक पाँच वर्षीय बच्ची के साथ दुष्कर्म हुआ। बच्ची अपने माता-पिता के साथ रहती है जो यहाँ प्रवासी मजदूर के तौर पर काम करते हैं। बच्ची गुरुवार रात को गायब हो गई।
मामले में सामने आया कि बच्ची के साथ पास में ही रहने वाले 53 वर्षीय अली हुसैन ने दुष्कर्म किया है। सामने आया कि अली हुसैन ने बच्ची को चिप्स देने का लालच दिया और उसके अपने घर के भीतर उठा कर ले गया दुष्कर्म किया।
बच्ची इसके कुछ देर बाद अपने घर रोते हुए पहुँची। बच्ची ने इसके बाद अपने माता-पिता को पूरी घटना की जानकारी दी। बच्ची को उसके परिजनों ने अस्पताल में भर्ती करवाया। इस विषय में पुलिस को सूचना दी गई। बच्ची के साथ दुष्कर्म करने के बाद अली हुसैन ने यहाँ से भागने की भी कोशिश की।
पुलिस ने अली हुसैन की तलाश चालू की और उसे एक एक स्थानीय गोदाम से गिरफ्तार कर लिया। बच्ची के दुष्कर्म के मामले में पुलिस POCSO और भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। मामले में जाँच जारी है।
प्रवासी कामगारों की बच्चियों के साथ बलात्कार की केरल में यह कोई पहली घटना नहीं है। केरल के भीतर यह काफी बड़ा मुद्दा है। इससे पहले अक्टूबर, 2023 में भी बिहार से केरल काम करने गए दंपती की एक 4 वर्षीय बच्ची का भी रेप किया गया था। इसके अलावा जुलाई, 2023 में भी एक ऐसा ही मामला सामने आया था जहाँ प्रवासी कामगारों की बच्ची का रेप हुआ।