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ये ‘रिसोल बैंक ऑफ इंडिया’ क्या है जो छापता है अनुपम खेर की तस्वीर वाले ₹500 के नोट, हैरान कर देगी ₹1.60 करोड़ की वह ठगी जिसमें चला गया 2100 ग्राम सोना

गुजरात के एक सोना व्यापारी से नकली नोटों के जरिए 1 करोड़ रुपए से अधिक की ठगी की गई है। 500 रुपए मूल्य के इन नोटों पर महात्मा गाँधी के बदले अनुपम खेर की फोटो छपी हुई है। रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया की स्पेलिंग भी गलत छपी हुई है। इस नोटों का एक वीडियो भी वायरल हो रहा है जिसे खुद अनुपम खेर ने शेयर किया है। पुलिस ने नकली नोटों को कब्ज़े में ले लिया है और रविवार (24 सितंबर 2024) को केस दर्ज करके ठगों की तलाश शुरू कर दी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ठगी का यह अनोखा मामला गुजरात की राजधानी अहमदाबाद का है। यहाँ के मानेक चौक इलाके में मेहुल ठक्कर की सर्राफे की दुकान है। 24 सितंबर को उनके पास प्रशांत पटेल नामक युवक की कॉल आती है। कॉलर ने 2100 ग्राम सोना खरीदने की इच्छा जताई। प्रशांत पटेल एक नामी ज्वैलरी शॉप का मैनेजर था जहाँ से मेहुल से पुराने व्यापारिक संबंध थे। प्रशांत पटेल की बातों में आकर मेहुल इस डील के लिए तैयार हो गए।

एडवांस माँगे जाने पर प्रशांत ने बताया कि खरीदार इतना पैसा ऑनलाइन ट्रांसफर नहीं कर सकता। उसने मेहुल को पैसे डिलीवरी वाले पते पर ही कैश में देने का भरोसा दिया। प्रशांत ने सोने की डिलीवरी के लिए नवरंगपुरा क्षेत्र की एक कूरियर कम्पनी का पता दिया। 1 करोड़ 60 लाख रुपयों में डील फाइनल हो जाने के बाद ठक्कर का कर्मचारी भरत जोशी सोना लेकर बताए गए पते पर पहुँच गया।

यहाँ पर उसे एक व्यक्ति मिला जिसने एक प्लास्टिक का कवर देते हुए उसमें 1 करोड़ 30 लाख रुपए होने का दावा किया। इस प्लास्टिक कवर में 500 रुपए की नकली नोटों के 26 बंडल मौजूद थे। ठग ने भरत जोशी से नोटों को कैश मशीन में गिनने के लिए कहा। इसी के साथ वह सोना उठाकर यह कहते हुए चला गया कि बचे 30 लाख रुपए वो बगल वाली दुकान से ला रहा है। इधर कर्मचारी ने जैसे ही प्लास्टिक कवर खोला तो उसके अंदर से नकली नोट निकले।

इन नोटों की बनावट भी अजीब थी। नोटों में महात्मा गाँधी की जगह अनुपम खेर का चित्र छपा हुआ था। इन नकली नोटों के ऊपर ‘रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया’ के बदले ‘रिसोल बैंक ऑफ इंडिया’ लिखा है। ये नोट जिस बंडल में पैक किए गए थे उनमें ‘स्टेट बैंक ऑफ इंडिया’ की जगह Start Bank of India प्रिंट था। अपने साथ हुई ठगी को भाँपते हुए भरत जोशी फ़ौरन ही ठग की तलाश में बाहर निकले। हालाँकि इतनी देर वो रफूचक्कर हो चुका था।

आखिरकार भरत जोशी ने अपने मालिक मेहुल को सूचना दी। मेहुल के जरिए यह सूचना पुलिस तक पहुँची। पुलिस ने मौके पर पहुँच कर नोटों को अपने कब्ज़े में लिया और पड़ताल शुरू कर दी। जाँच में पता चला कि दोनों ठगों ने अपनी करतूत को लम्बी प्लानिंग के बाद अंजाम दिया था। इन्होंने जो कूरियर कम्पनी खोली थी वह भी फर्जी थी। बाहर एक फर्जी बोर्ड लगवा रखा था। दुकान किराए पर थी जिस पर महज 2 दिनों पहले ही पूरा सेटअप किया गया था।

पुलिस को यह भी पता चला कि ठगों ने दुकान मालिक से 1-2 दिनों के बाद एग्रीमेंट बनवाने की बात कही थी। फ़िलहाल पुलिस CCTV फुटेज सहित अन्य सबूतों की पड़ताल कर के ठगों तक पहुँचने का प्रयास कर रही है। वहीं अपनी तस्वीर से छपे नोटों पर बॉलीवुड अभिनेता अनुपम खेर ने भी चुटकी ली है। कई चौंकने वाली इमोजी के साथ अनुपम खेर ने लिखा, “लो जी कर लो बात। पाँच सौ के नोट पर गाँधी जी की फ़ोटो की जगह मेरी फ़ोटो? कुछ भी हो सकता है।”

हिंदू लड़कियों को ‘प्रेम’ में फँसाओ, मुस्लिम आबादी बढ़ाओ, भारत को बनाओ पाकिस्तान-बांग्लादेश: जिस ‘लव जिहाद’ को ठुकराते हैं लिबरल, अदालत ने उसे माना ‘अंतरराष्ट्रीय साजिश’

लव जिहाद से जुड़े एक मामले में बरेली की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने मोहम्मद आलिम नाम के आरोपित को उम्रकैद की सजा सुनाई। इस दौरान कोर्ट ने कुछ महत्वपूर्ण टिप्पणिया कीं। उन्होंने ऐसे मामलों पर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि लव जिहाद का मुख्य उद्देश्य हिंदुस्तान के खिलाफ एक मजहब विशेष के कुछ अराजक तत्वों द्वारा जनसंख्यायिक युद्ध एवं अंतरराष्ट्रीय साजिश के तहत वर्चस्व स्थापित करना है। जज ने कहा लव जिहाद के तहत हिंदू लड़कियों को फँसाया जा रहा है और उनका धर्मांतरण होता है ताकि पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे हालात पैदा किए जा सके। इस साजिश में विदेशी फंडिंग न हो, इससे भी मना नहीं किया जा सकता। ये केवल और केवल मुस्लिम जनसंख्या को देश में बढ़ाने के लिए किया जा रहा है।

कोर्ट की यह टिप्पणी उन लिबरल-वामपंथियों को शायद न पचे जो ‘लव जिहाद’ शब्द के अस्तित्व को हमेशा से नकारते आए हैं… जबकि हकीकत तो ये है कि ये लव जिहाद इस्लामी कट्टरपंथियो की ही देन है। इसके लिए बाकायदा ब्रेनवॉश होता है। बताया जाता है कि अगर हिंदू लड़की को इस तरह फँसाकर वह उससे संबंध बनाएँगे, उससे निकाह कर ले जाएँगे तो उन्हें जन्नत मिलेगी।

लव जिहाद करने पर मिलेगी ‘जन्नत’

अगर इस बात पर यकीन नहीं, तो 2022 का एक पुराना मामला पढ़िए। मोहम्मद आलम ने एक अनुज प्रताप सिंह बनकर एक हिंदू लड़की को फँसाया, उसने लड़की को यकीन दिलाया कि वो हिंदू है, उसके बाद उससे शादी कर ली।

राज जब खुला तो मोहम्मद आलम युवती की अश्लील वीडियो वायरल करने की, उसको गोली मारने की धमकियाँ देने लगा। हिंदुओं को अपशब्द भी वो खुलकर कहने लगा। एक बार तो उसने युवती को गोली मारी भी, लेकिन लड़की बचकर निकल गई।

आलम ने ये सब करने के बाद अपने स्टेटस पर क्या अपडेट किया इसे ध्यान से पढ़िए। उसने अमर्यादित शब्दों का इस्तेमाल करते हुए लिखा है-“मैंने जो किया है, इससे जन्नत मिलती है।”

जाहिर है कि उसे किसी ने ये बताया होगा कि हिंदू लड़की को फँसाना, उसका रेप करना, उससे इस्लाम कबूल करवाना ये सब जन्नत जाने के रास्ते हैं तभी उसने ऐसा किया…?

बांग्लादेश में भी चल रहा लव जिहाद का खेल

आपको जानकर हैरानी होगी कि लव जिहादी सिर्फ भारत में नहीं बल्कि बांग्लादेश में भी अपना खेल खेल रहे हैं। ऐसी मीडिया रिपोर्ट सामने आ चुकी है जहाँ कट्टरपंथी संगठनों द्वारा समूह में शामिल मुस्लिम युवकों को इनाम देते दिखाया गया था ताकि वो उस राशि का इस्तेमाल हिंदुओं को इस्लाम कबूल करवाने के लिए करें।

ऐसे फतवे वायरल हुए थे जिसमें कहा गया था कि हिंदू युवतियों को लव जिहाद में फँसाओ और उनका धर्मांतरण कराओ। फतवे में 50 हजार से लेकर 50 लाख बांग्लादेशी करंसी इनाम देने की भी बात है। इस फतवे की कॉपी को संगठन के हर जिला अध्यक्ष और महासचिवों के पास भेजा गया है।

लव जिहाद शब्द गलत तो कहाँ से हर साल आ रहे मामले

इन प्रमाणों के बाद भी यदि संदेह उठता है तो उदाहरण देने के लिए सैकड़ों मामले हैं। अकेले 2023 में ऑपइंडिया ने 153 लड़कियों के लव जिहाद में शिकार होने की सूचना को रिपोर्ट किया था। जाहिर है ऑपइंडिया भी हर मामले को नहीं उठा पाया होगा, फिर भी सोचिए संख्या 153 तक पहुँच गई थी। इसी तरह साल 2022 में भी ऑपइंडिया ने 150 के करीबन मामले लव जिहाद पर रिपोर्ट किए थे…। हर रिपोर्ट में खबरों के लिंक और उनका सोर्स जोड़ा गया था जिसका मतलब साफ है कि वो घटनाएँ हकीकत थीं, उन्हें किसी ने खुद से शब्दों में गढ़कर नहीं पेश कर दिया था।

केरल के पूर्व मुख्यमंत्री भी कर चुके हैं इस्लामी कट्टरपंथियों की मंशा का खुलासा

केरल के मुख्यमंत्री रहे वीएस अच्युतानंदन भी लव जिहाद की हकीकत को कबूल चुके हैं। साल 2010 में उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए बताया था कि कैसे इस्लामी कट्टरपंथियों की योजना अगले 20 साल में केरल को मुस्लिम राज्य बनाने की है। इसके लिए वे युवाओं का माइंडवाश कर रहे हैं। उन्हें पैसे दे रहे हैं। मुस्लिम आबादी बढ़ाने के लिए युवाओं को हिंदू लड़कियों से शादी करने के लिए उकसाया जा रहा है। कम्युनिस्ट नेता ने बताया था कि इस्लामी कट्टरपंथियों की तरकीबें काम भी कर रही और राज्य में उनकी आबादी भी बढ़ रही है।

सर्वे में भी सामने आया था लव जिहाद को सच

लव जिहाद के काले सच को आम लोग भी धीरे-धीरे अच्छे से जान-समझ रहे हैं। कुछ समय पहले लव जिहाद (Love Jehad) की बढ़ती घटनाओं के बीच एक सर्वे रिपोर्ट सामने आई थी। इस सर्वे में देश भर के 1.40 लाख से अधिक लोगों से राय ली गई थी और नतीजे ये निकलकर आए थे कि देश के 53% लोगों का मानना था कि मुस्लिम पुरुष लव जिहाद में लिप्त रहते हैं।

अगर लव जिहाद झूठ तो क्या है इन सवालों के जवाब

इतने प्रमाणों के बावजूद जो ये मानते हैं कि लव जिहाद जैसा कुछ नहीं है और दक्षिणपंथी केवल प्रेम के बीच मजहब को लाकर नफरत फैलाते हैं… उनसे सवाल किया जाना चाहिए कि ऐसे मामलों में अगर दो लोगों के बीच रिश्ता प्रेम का ही होता है तो फिर उसकी शुरुआत झूठ से ही क्यों होती है? क्या जरूरत होती है नाम छिपाकर किसी दूसरे धर्म की लड़की को फँसाने की? क्या जरूरत होती है उससे शादी करने से पहले उसका धर्म बदलवाने की? उस पर नमाज पढ़ने का दबाव बनाने की, इस्लामी रीति-रिवाज मनवाने की? सिर्फ प्रेम की बात होती तो क्या ऐसे मामले सामने आते…? नहीं।

ये मामले लव जिहाद के ही होते हैं जिनमें केवल एक तरह का पैटर्न देखने को मिलते हैं। दिल्ली हो या केरल, बंगाल हो या कश्मीर…आप जहाँ से लव जिहाद के मामले सुनेंगे तब आपको पता चलेगा कि कैसे सिर्फ पीड़ित और आरोपित अलग हैं लेकिन बाकी सारी बातें एक जैसी। कई बार लव जिहाद की पीड़िताओं को भागकर अपनी आपबीती बताने का मौका मिलता है मगर कई ऐसी भी होती हैं जो एक बार जाल में फँसने के बाद इससे कभी निकल ही नहीं पातीं। फिर या तो उनकी लाश मिलती है या फिर लाश के टुकड़े…।

अवैध है जामा मस्जिद, इसे गिराओ: अब हिमाचल के कुल्लू में सड़क पर हिंदू, ‘धर्म जागरण यात्रा’ और हनुमान चालीसा पाठ से जताया विरोध; वैध बता रहा प्रशासन

हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के बाद अब हिन्दू संगठनों ने कुल्लू की एक अन्य मस्जिद को अवैध बताते हुए मोर्चा खोल दिया है। यहाँ बनी जामा मस्जिद को गिराने की माँग करते हुए हिन्दू संगठन के सदस्यों की पुलिस से धक्का-मुक्की हुई है। सोमवार (30 सितंबर 2024) को हिन्दू संगठनों ने बड़ा जुलूस निकाल कर अवैध इबादतगाहों के खिलाफ आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी। फ़िलहाल, मस्जिद के आसपास भारी संख्या में पुलिस बल को तैनात कर दिया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जिस मस्जिद को विवादित बताया जा रहा है वह कुल्लू के अखाड़ा बाजार में बनी है। मुस्लिम समुदाय के लोग इसे जामा मस्जिद के नाम से बुलाते हैं। प्रशासन ने इसे वैध करार दिया है लेकिन हिन्दू संगठन के सदस्यों का दावा इस से उलट हैं। उन्होंने इसके निर्माण को गैर कानूनी बताया और सोमवार को 3 किलोमीटर तक जुलूस निकाला। इस जुलूस को ‘धर्म जागरण यात्रा’ का नाम दिया गया जिसमें ढोल-नगाड़े बज रहे थे।

जुलूस की शुरुआत रामशिला से हुई, जहाँ लोगों ने पारम्परिक परिधान नाटी पहनकर भगवा ध्वज के साथ भाग लिया। जुलूस जब जामा मस्जिद के पास पहुँचा, तो कुछ प्रदर्शनकारी उत्तेजित हो गए और मस्जिद की तरफ बढ़ने लगे। इस पर पुलिस ने सुरक्षा की दृष्टि से उन्हें रोका, जिससे हल्की धक्का-मुक्की भी हुई। पुलिस ने स्थिति संभालते हुए जुलूस को शांतिपूर्ण ढंग से आगे बढ़ने दिया और मस्जिद के करीब प्रदर्शन नहीं होने दिया। प्रशासन ने एहतियातन भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 163 लागू कर दी थी।

पुलिस ने लोगों से शाँति बनाए रखने और कानूनी तौर पर अपनी बात कहने की अपील की। प्रशासन के प्रयासों से जुलूस में शामिल कोई भी व्यक्ति मस्जिद के पास नहीं जा पाया। थोड़ी देर में जुलूस आगे बढ़ गया और मस्जिद से लगभग 25 मीटर दूर हनुमान चालीसा का पाठ करने लगा।

प्रदर्शनकारियों ने हनुमान चालीसा का पाठ करने के बाद सनातन धर्म की रक्षा की शपथ ली और मस्जिद को गिराने की माँग को लेकर प्रशासन से बातचीत की। हालाँकि, उपायुक्त तोरुल एस रवीश और एसडीएम विकास शुक्ला की ओर से मस्जिद के वैध कागजात दिखाए जाने के बावजूद प्रदर्शनकारियों को संतुष्ट नहीं किया जा सका। एसडीएम विकास शुक्ला के मुताबिक अखाड़ा बाजार की जामा मस्जिद पर वक्फ बोर्ड का कब्जा है। हालाँकि प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे क्षितिज सूद ने अगली बार और उग्र प्रदर्शन का एलान किया है।

बताते चलें कि मस्जिद को अवैध बताते हुए विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने 21 जून 2017 को इसकी शिकायत नगर परिषद कुल्लू से की थी। इस शिकायत का संज्ञान ले कर 28 जून को नगर परिषद ने एक नोटिस जारी किया था जिसके बाद निर्माण कार्य बंद करा दिया गया था। जामा मस्जिद नाम से चर्चित इस ढाँचे का 14 जुलाई 2000 को पारित हुआ था जिसमें एक मंजिल पुरानी है और तीन मंजिलें साल 2000 के बाद बनाई गईं हैं।

हालाँकि आरोप है कि मस्जिद का निर्माण नक्शे के मुताबिक नहीं हुआ है जिस पर शहरी विकास विभाग जाँच भी कर रहा है। हिन्दू संगठनों ने अब प्रशासन पर सरकारी अभिलेखों में हेराफेरी का आरोप लगाया है। उन्होंने इस मामले को अदालत में भी ले जाने का ऐलान किया है।

RG Kar अस्पताल में डॉक्टर बिटिया संग बर्बरता से हिल गया पूरा देश, पर पश्चिम बंगाल सरकार की नहीं टूट रही नींद: सुप्रीम कोर्ट ने ‘सुस्ती’ पर लताड़ा, जारी रहेगी हड़ताल

सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को अस्पतालों में डॉक्टरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में हो रही देरी पर कड़ी फटकार लगाई। यह मामला 9 अगस्त 2024 को कोलकाता के RG कर मेडिकल कॉलेज में महिला डॉक्टर के साथ हुई बलात्कार और हत्या से जुड़ा है। कोर्ट ने सरकार से सुरक्षा उपायों की धीमी प्रगति पर सवाल उठाए, विशेषकर CCTV कैमरों और अन्य सुरक्षा इंतजामों की कमी को लेकर। कोर्ट ने चेतावनी दी कि अगर 15 अक्टूबर तक सुधार नहीं हुआ तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।

इसी बीच, पश्चिम बंगाल जूनियर डॉक्टर्स फ्रंट ने प्रेस रिलीज जारी कर सरकार और न्यायिक प्रक्रिया में देरी पर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि कई महीनों बाद भी अस्पतालों में सुरक्षा के पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए हैं, जिससे डॉक्टर असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। जूनियर डॉक्टरों ने सरकार से जल्द और ठोस सुरक्षा इंतजामों की माँग की है। डॉक्टरों का कहना है कि सुरक्षा उपायों की कमी के कारण कई घटनाएँ रोकी जा सकती थीं, यदि समय पर कार्रवाई की जाती।

सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को लगाई फटकार

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने पश्चिम बंगाल सरकार से पूछा कि राज्य के अस्पतालों में डॉक्टरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए CCTV कैमरे, ड्यूटी रूम, और शौचालय जैसे बुनियादी उपायों की अब तक कितनी प्रगति हुई है। सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने बताया कि बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं के कारण काम में देरी हुई है, और अब तक केवल 22% CCTV कैमरे स्थापित किए गए हैं।

कोर्ट ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई और पूछा, “50% से अधिक काम किसी भी क्षेत्र में पूरा क्यों नहीं हुआ है? डॉक्टरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में इतनी धीमी गति क्यों है?” कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को निर्देश दिया कि वह 15 अक्टूबर तक सुरक्षा उपायों को तेजी से लागू करे। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए इस मामले में कार्रवाई शुरू की थी।

इससे पहले, कोलकाता हाईकोर्ट ने इस मामले की जाँच केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) को सौंप दी थी। कोर्ट ने डॉक्टरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक राष्ट्रीय टास्क फोर्स बनाने का आदेश दिया था और साथ ही अस्पताल में केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) की तैनाती के आदेश भी दिए थे। कोर्ट ने राज्य सरकार से डॉक्टरों की सुरक्षा को लेकर उठाए गए कदमों पर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा और CBI से भी मामले में प्रगति की जानकारी माँगी। अदालत ने यह भी आदेश दिया कि सुरक्षा उपायों में तेजी लाई जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचा जा सके।

सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई के आखिर में कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार को डॉक्टरों की सुरक्षा में तेजी लाने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे। अदालत ने सॉलिसिटर जनरल को निर्देश दिया कि वह अगली सुनवाई में यह जानकारी दें कि क्या अस्पताल में कोई ऐसा व्यक्ति है, जिस पर अपराध या वित्तीय अनियमितता के आरोप हैं। यदि CBI द्वारा ऐसे लोगों के खिलाफ पर्याप्त सबूत पेश किए जाते हैं, तो उनके खिलाफ सेवा नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी। राज्य सरकार की ओर से अदालत को सूचित किया गया कि पहले ही पाँच डॉक्टरों को निलंबित किया जा चुका है, और यदि और लोगों के खिलाफ सबूत मिलते हैं, तो उन पर भी कार्रवाई की जाएगी। कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि सुरक्षा उपायों में और देरी होती है, तो राज्य सरकार को इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

पीड़िता की पहचान-तस्वीरों को लेकर भी सुप्रीम कोर्ट सख्त

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सोशल मीडिया पर पीड़िता की तस्वीरें और वीडियो साझा करने को लेकर भी नाराजगी जताई। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि विकिपीडिया पर पीड़िता की पहचान उजागर न करने का जो आदेश दिया गया था, वह सभी सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर लागू होगा। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को सूचित किया कि इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MEITY) एक नोडल अधिकारी नियुक्त करेगा, जो इस तरह की सामग्री पर निगरानी रखेगा और उसे हटाने के निर्देश देगा। कोर्ट ने इस मामले में MEITY को दिशानिर्देश तैयार करने के लिए भी कहा।

जारी रहेगी डॉक्टरों की हड़ताल

इस बीच, पश्चिम बंगाल जूनियर डॉक्टर्स फ्रंट ने सोमवार (1 अक्टूबर 2024) को एक प्रेस रिलीज जारी कर राज्य सरकार और न्यायिक प्रक्रिया में हो रही देरी पर गहरी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि 9 अगस्त की घटना के बाद भी अस्पतालों में सुरक्षा के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। प्रेस रिलीज में कहा गया कि राज्य के अस्पतालों में CCTV कैमरों की कमी और सुरक्षा अधिकारियों की तैनाती में देरी के कारण डॉक्टरों को असुरक्षित महसूस हो रहा है।

जूनियर डॉक्टरों ने स्पष्ट किया कि अस्पतालों में सुरक्षा सुनिश्चित किए बिना मरीजों का इलाज करना संभव नहीं है। उनका कहना था कि यदि सरकार ने पहले से सुरक्षा उपाय लागू किए होते, तो इस घटना को रोका जा सकता था। जूनियर डॉक्टरों ने सरकार पर यह भी आरोप लगाया कि पिछले कई महीनों से उनकी शिकायतों को अनसुना किया गया है और अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।

डॉक्टरों ने अपनी पाँच प्रमुख माँगें भी सरकार के सामने रखीं थी, जिसमें अस्पतालों में CCTV कैमरे लगाने, सुरक्षा गार्डों की संख्या बढ़ाने, और बायोमेट्रिक पहचान प्रणाली लागू करने जैसी माँगें शामिल थीं। डॉक्टरों का कहना था कि सरकार ने इन माँगों पर अब तक ध्यान नहीं दिया है और अस्पतालों में सुरक्षा की स्थिति बदतर होती जा रही है।

प्रेस रिलीज़ में जूनियर डॉक्टरों ने राज्य सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि कई सरकारी अस्पतालों में आज भी बुनियादी सुरक्षा उपायों की कमी है। उन्होंने बताया कि कई अस्पतालों में डॉक्टरों और उनके परिवारों के साथ हिंसा की घटनाएँ हो रही हैं, जिनमें शारीरिक हमले भी शामिल हैं। डॉक्टरों ने यह भी कहा कि अगर अस्पतालों में ICU और अन्य सुविधाओं को बेहतर किया जाता, तो कई घटनाएं रोकी जा सकती थीं।

डॉक्टरों का यह भी कहना था कि सागर दत्ता अस्पताल में हाल ही में एक मरीज की मौत हो गई थी, जिसे समय पर इलाज मिल जाता तो शायद उसकी जान बचाई जा सकती थी। डॉक्टरों ने राज्य सरकार से यह सवाल उठाया कि ऐसी घटनाओं की जिम्मेदारी कौन लेगा और कब तक मरीजों और डॉक्टरों की सुरक्षा को नजरअंदाज किया जाएगा।

गौरतलब है कि 9 अगस्त 2024 को कोलकाता के मशहूर RG कर मेडिकल कॉलेज में 31 वर्षीय महिला डॉक्टर के साथ बलात्कार और हत्या की घटना ने डॉक्टरों के बीच सुरक्षा को लेकर गहरा असंतोष पैदा कर दिया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में इस जघन्य अपराध की पुष्टि होने के बाद डॉक्टरों ने देशभर में विरोध प्रदर्शन किया। जूनियर डॉक्टरों ने विशेष रूप से अपनी सुरक्षा को लेकर सरकार पर सवाल उठाए और सख्त सुरक्षा उपायों की माँग की। उन्होंने यह भी कहा कि अगर समय पर उचित सुरक्षा उपाय होते, तो यह घटना टाली जा सकती थी।

इस खबर को रोकने के लिए ₹10 लाख का ऑफर, पर हम छाप रहे… क्योंकि 12वीं पास भी बन रहे हैं डॉक्टर: MBBS की पढ़ाई के बिना ही 98 को डिग्री, कोई सर्जन तो कोई गाइनी

आपने झोलाछाप डॉक्टरों के बारे में सुना होगा। संभव है कि कभी उनके फेरे में आप फँस भी चुके हों। पर राजस्थान में ऐसे लोगों को सरकारी ठप्पे के साथ डॉक्टर बना देने का मामला सामने आया है, जिन्होंने कभी एमीबीएस की पढ़ाई ही नहीं की। इनमें से कुछ तो 12वीं पास ही हैं।

इस फर्जीवाड़े का खुलासा दैनिक भास्कर के रिपोर्टर अवधेश आकोदिया ने किया है। उन्होंने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि कम से कम 98 ऐसे लोगों का राजस्थान मेडिकल काउंसिल (RMC) में रजिस्ट्रेशन किया गया है जो वास्तविकता में डॉक्टर नहीं हैं। उनका यह भी दावा है कि काउंसिल के रजिस्ट्रार डॉक्टर राजेश शर्मा ने इस खबर को रोकने के लिए उन्हें 10 लाख रुपए देने का ऑफर दिया था।

रिपोर्ट से पता चलता है कि आरएमसी के पास जब ऑनलाइन आवेदन आए तो उन्होंने कोई वेरिफिकेशन नहीं किया, बल्कि जाली ईमेल अटैच करके सत्यापन की सारी प्रक्रिया पूरी कर दी। इन कथित डॉक्टरों ने ऑनलाइन आवेदन करते समय बिहार, महाराष्ट्र, हरियाणा, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों के मेडिकल काउंसिल में रजिस्ट्रेशन और एनओसी के फर्जी दस्तावेज अटैच किए थे। आरएमसी ने बिना किसी की डिग्री की पड़ताल किए ही उन्हें सर्टिफिकेट जारी कर दिया। इन फर्जी डॉक्टरों में से कुछ सर्जन हैं तो कुछ गाइनी।

रिपोर्ट में ऐसे कुछ डॉक्टरों के नाम भी उजागर किए हैं। जैसे डॉ. सरिमुल एच मजूमदार, डॉ. रामकिशोर महावर, डॉ. गीता कुमारी, डॉ. देवेंद्र नेहरा, डॉ. शांतनु कुमार, डॉ. पंकज यादव, डॉ. महेश कुमार गुर्जर आदि। इन फर्जी डॉक्टरों ने न तो कभी मेडिकल की पढ़ाई की और न ही इंटर्नशिप का। बावजूद इनको सरकारी मुहर लगाकर डॉक्टर होने का प्रमाण पत्र बाँट दिया गया।

भास्कर ने इस मामले में सच्चाई खोजने के लिए राजस्थान मेडिकल काउंसिल के रजिस्ट्रार डॉ राजेश का स्टिंग भी किया। स्टिंग में राजेश शर्मा ने स्वीकार किया कि ये इस तरह के फर्जी डॉक्टरों को आरएमसी ने सर्टिफिकेट दिया। बाद में उन्होंने कथित तौर पर रिपोर्टर से कहा कि वह इस खबर को कहीं छापे नहीं, इसके लिए वे 10 लाख रुपए देंगे। रजिस्ट्रार ने ये भी कहा कि वो ये पैसे उन्हीं लोगों से लेंगे जिनको जिनकी फर्जी सर्टिफिकेट पर नौकरियाँ लगी हैं। रजिस्ट्रार ने कैसे भी इस मामले को निपटाने की बात कही।

बाद में जब भास्कर के रिपोर्टर ने इस संबंध में चिकित्सा मंत्री खींवसर को सारे सबूत दिखाए तो वह चौंक गए। उन्होंने कहा यह मामला बेहद गंभीर है। इस मामले में एक्शन लेना जरूरी है। उन्होंने रिपोर्टर से पूरी डिटेल माँगी और आरएमसी के ऑफिस को सीज करने की बात कही।

प्रताड़ित करता था फिरोज आलम, दूसरी बीवी ने थाने पहुँचकर खोल दी पोल: बताया- घर में 4 बीवी… 10 से 12 औरतों को मुस्लिम बनाकर कर चुका है निकाह

झारखंड की राजधानी रांची में एक महिला ने अपने मुस्लिम शौहर पर धर्मान्तरण का आरोप लगाते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। महिला का दावा है कि उसका शौहर फ़िरोज़ आलम अब तक 10 से 12 महिलाओं को इस्लाम कबूल करवा चुका है। पीड़िता की शिकायत पर फ़िरोज़ आलम और उसकी बहनों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। शुक्रवार (28 सितंबर 2024) को दी गई शिकायत में पीड़िता ने फिरोज आलम पर जातिसूचक शब्दों से गालियाँ देने और चाकू मारने की कोशिश का भी आरोप लगाया है। पुलिस इस मामले की जाँच कर रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना रांची के बरियातू स्थित सत्तार कॉलोनी की है। महिला पौलिना हेमरोन ने पुलिस स्टेशन में अपने पति फ़िरोज़ आलम के खिलाफ शिकायत दी है। पौलिना ने बताया कि उनका निकाह 1992 में फ़िरोज़ से हुआ था, तब वह फ़िरोज़ की दूसरी बीवी बनी थी। निकाह के समय फ़िरोज़ ने पौलिना को प्रेम और सम्मान देने का वादा किया था, लेकिन बाद में वह अपने वादे से मुकर गया और उसने पौलिना के साथ मारपीट शुरू कर दी।

पौलिना ने यह भी बताया कि फ़िरोज़ लगातार उस पर इस्लाम कबूल करने का दबाव डालता रहा। जब उसने इनकार किया, तो उसे जातिसूचक गालियाँ दी गईं। इसी बीच, पौलिना एक बेटे की माँ बनी। बेटे के निकाह के बाद पौलिना का परिवार बढ़ा, लेकिन दुख की बात है कि कुछ समय बाद उनके बेटे का निधन हो गया। इसके बाद पौलिना ने फ़िरोज़ से जायदाद में अपनी बहू और पोतों को हिस्सा देने की माँग की, जिस पर फ़िरोज़ नाराज हो गया।

आरोप है कि 28 सितंबर को फ़िरोज़ ने अपनी बहनों शहनाज़ खातून, रहनुमा खातून और निखत परवीन के साथ मिल कर पीड़िता की पिटाई की और जान से मार डालने की धमकी दी। उसे जातिसूचक गालियाँ दी गईं और विरोध करने पर फ़िरोज़ ने चाकू से हमला करने की कोशिश की। इसके बाद पौलिना को घर से निकाल दिया गया। अपनी शिकायत में पौलिना ने फ़िरोज़ पर धर्मान्तरण का रैकेट चलाने का आरोप लगाया है, जिसमें अब तक 10 से 12 महिलाओं को इस्लाम कबूल कराया जा चुका है।

पुलिस ने फ़िरोज़ और उसकी बहनों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं और SC/ST एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस मामले की जाँच और कानूनी कार्रवाई कर रही है।

31 मई को लापता हुई प्रियंका, 21 सितंबर को मिली लावारिस लाश… UP पुलिस ने एनकाउंटर के बाद सलमान, सरवर, जावेद और शहंशाह को पकड़ा: शादी को कहा तो गला घोंटकर मार डाला

उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले में 21 सितंबर 2024 को पुलिस ने एक अज्ञात महिला का शव लावारिस हालत में बरामद किया था। पीड़िता की पहचान प्रियंका के तौर पर हुई थी। मृतका अपने घर से 31 मई 2024 से लापता हो गई थी। जाँच में पीड़िता की हत्या के आरोपितों के तौर पर सलमान, शहंशाह, जावेद और सरवर का नाम सामने आया। मंगलवार (1 अक्टूबर) को पुलिस ने मुठभेड़ के बाद सलमान, सरवर और जावेद को मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया है। शहंशाह को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है।

यह मामला सुल्तानपुर जिले के कादीपुर थानाक्षेत्र का है। यहाँ 1 जून 2024 को पीड़िता के दादा ने पुलिस में तहरीर दी थी। शिकायत में उन्होंने बताया था कि 31 मई को रात लगभग 10 बजे उनकी नातिन शौच के लिए घर से निकली थी पर वापस लौट कर नहीं आई। परिजनों ने प्रियंका की काफी खोजबीन की पर कुछ भी पता नहीं चल पाया। उन्होंने आशंका जताई थी कि प्रियंका कोई बहला-फुसला कर अपने साथ ले गया होगा। ऑपइंडिया के पास शिकायत की कॉपी मौजूद है।

तब पुलिस ने इस शिकायत पर FIR दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी थी। अभी पुलिस जाँच कर ही रही थी कि 21 सितंबर 2024 को सुल्तानपुर के ही थाना गोसाईगंज क्षेत्र में एक अज्ञात महिला की लाश मिली। पोस्टमार्टम से पता चला कि मृतका की हत्या गला दबा कर की गई थी। पीड़िता की पहचान प्रियंका के तौर पर हुई थी। तब पुलिस ने प्रियंका की गुमशुदगी में हत्या की धाराएँ बढ़ा कर पड़ताल शुरू की। इसी खोजबीन में पता चला कि लड़की की हत्या में सलमान, शहंशाह, सरवर और जावेद शामिल हैं।

पुलिस को जानकारी मिली कि पीड़िता और सलमान में पुराने समय से संबंध थे। एक बार सलमान प्रियंका को मुंबई भी ले जा चुका था। वापस लौटने के बाद वह फिर से सलमान के पास पहुँच गई। गोसाईंगंज में ही सलमान और प्रियंका के रुकने और खाने-पीने का इंतज़ाम सरवर, शहंशाह और जावेद ने किया। गोसाईंगंज में ही प्रियंका ने सलमान पर शादी का दबाव बनाना शुरू कर दिया। आनाकानी करने पर उसने सलमान सहित उसके तीनों साथियों को जेल भिजवाने की धमकी दी।

प्रियंका की धमकी के बाद सलमान और उसके तीनों साथियों ने उसकी हत्या की साजिश रच डाली। उन्होंने 20 सितंबर को प्रियंका की गला घोंट कर हत्या कर दी। हत्या के बाद उन्होंने लाश को गोसाईंगज थानाक्षेत्र में एक सुनसान जगह पर फेंक दिया। पुलिस आरोपितों की लताश में जुट गई। सबसे पहले शहंशाह को गिरफ्तार किया गया और बाकियों की तलाश जारी रही। 1 अक्टूबर (मंगलवार) को पुलिस को तीनों आरोपितों के अखंडनगर थानाक्षेत्र में होने की सूचना मिली।

चित्र- X/सुल्तानपुर पुलिस

सूचना पर पुलिस ने दबिश दी। तीनों आरोपितों ने पुलिस को देखते ही गोलियाँ बरसानी शुरू कर दी। पुलिस की जवाबी फायरिंग में सलमान, सरवर और जावेद घायल हो गए। इन सभी को गिरफ्तार कर के अस्पताल में इलाज करवाया गया। पकड़े गए आरोपितों के पास से अवैध हथियार और कारतूस बरामद हुए हैं। पुलिस इन सभी को जल्द ही अदालत में पेश करेगी। मामले में प्रशासन की जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई जारी है।

अल्तमस चला रहा ‘तोमर डेयरी’, मोहम्मद अयान के दुकान का नाम ‘रावल डेयरी’… राजधानी दिल्ली का हाल देख बिफरे BJP नेता, पूछा- हिंदुओं को क्यों दे रहे हो धोखा?

दिल्ली के पटपड़गंज इलाके में भारतीय जनता पार्टी के नेता रवींद्र सिंह नेगी उर्फ रवि नेगी का गुस्सा उन दुकानदारों पर फूटा जो मुस्लिम होकर हिंदू नाम से कारोबार कर रहे थे। उन्होंने इलाके में जाकर मुस्लिम दुकानदारों को चेतावनी दी कि अगर वो अपनी असली पहचान के साथ काम नहीं करेंगे तो काम बंद करवा दिया जाएगा।

सामने आई वीडियो में देख सकते हैं कि वो पहले पटपड़गंज के मंडावली इलाके में स्थित तोमर डेरी पर गए। वहाँ अल्तमस तोमर नाम का युवक अपनी दुकान ‘तोमर डेयरी’ नाम से दुकान खोला हुआ था। रवि नेगी ने उससे पहले उसकी पहचान पूछी। बाद में बोले,

“अगर तुम मुस्लिम हो तो तुमने दुकान पर नाम तोमर क्यों लिखा हुआ है। तुम्हारा नाम अल्तमस है, तो इसे बोर्ड पर लिखवाओ तुम हिंदू बस्ती में काम कर रहे हो। तुम्हें अपना नाम बताकर रखना चाहिए। अगर तुम ऐसा नहीं करते तो तुम्हारी दुकान बंद हो जाएगी।”

रवि ने ये भी कहा, “देखो हमारी आपसे कोई लड़ाई नहीं है और न ही आपके मजहब से है। हमारी लड़ाई इस बात से है कि आप लोग होते मुसलमान हो, लिखते तोमर हो। “

इसी तरह वह एक अन्य दुकान वाले के पास गए। दुकानदार का असली नाम मोहम्मद अयान था लेकिन वो रावल डेयरी के नाम पर दुकान चला रहा था। अयान से उन्होंने पूछा- “आप लोग हिंदुओ को क्यों धोखा दे रहे हो। क्या हमसे कोई लड़ाई है। लिखा रावल है, नाम आपका मोहम्मद अयान है।”

रवींद्र नेगी ने अपने अकॉउंट पर दुकानदारों से बातचीत की वीडियो साझा की। साथ ही लिखा- “…हिंदुओं के साथ क्यों खिलवाड़ कर रहे हैं.. पटपड़गंज विधानसभा में बिल्कुल भी इस तरह की दुकान हम नहीं चलने देंगे जो हिंदू नाम रख रहे हैं पर है मुस्लिम।”

उनकी वीडियो देखने के बाद कई लोग इसे एक अच्छा प्रयास बता रहे हैं। साथ ही उनकी तारीफ भी कर रहे हैं।

बता दें कि ये वीडियो ऐसे समय में सामने आई है जब पिछले दिनों यूपी में योगी सरकार ने आदेश दिय़ा था कि हर दुकान पर मालिक का असली नाम और पता दिखना जरूरी है। बाद में हिमाचल प्रदेश की कॉन्ग्रेस सरकार ने भी देखा-देखी में ऐसा ऑर्डर निकाला था कि दुकानों पर मालिक का असली नाम लिखना जरूरी है।

मोसाद का एजेंट चला रहा था ईरान की खुफिया यूनिट: पूर्व राष्ट्रपति का खुलासा, बताया- 20 अन्य जासूस भी थे इजरायल के मोहरे, इन्होंने ही चुराए न्यूक्लियर दस्तावेज

ईरान के पूर्व राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद ने सीएनएन-तुर्क को दिए गए एक इंटरव्यू में बड़ा खुलासा किया है। अहमदीनेजाद ने कहा है कि इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद ने ईरानी सीक्रेट सर्विस में ही घुसपैठ कर ली थी। मोसाद ने उस ईरानी एजेंसी के चीफ को ही अपनी तरफ मोड़ लिया था, जिसका काम इजरायल पर निगरानी का था। उन्होंने कहा, “हमने इजरायल का मुकाबला करने के लिए एक स्पेशल टीम बनाई, लेकिन उसका हेड ही मोसाद का एजेंट निकल गया।”

ईरान के पूर्व राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद का दावा है कि मोसाद ने ईरान के कई खुफिया अधिकारियों, खासकर सीनियर अधिकारियों को अपनी तरफ कर लिया था। अहमदीनेजाद ने कहा कि करीब 20 ईरानी अधिकारी डबल एजेंट्स की भूमिका में थे, जो एक तरफ ईरान के लिए काम कर रहे थे और दूसरी तरफ इजरायल को सीक्रेट इन्फॉर्मेशन भी दे रहे थे। मोसाद के इस ऑपरेशन का टारगेट ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी हासिल करना था। उन्होंने बताया कि 2021 में काउंटर यूनिट के प्रमुख की पहचान एक इजरायली जासूस के रूप में हुई थी।

मोसाद ने ईरान में बड़े सीक्रेट ऑपरेशन को दिया था अंजाम

यह पहली बार नहीं है जब इजरायल पर ईरान की जासूसी का आरोप लगा हो। 2018 में इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने खुलासा किया था कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े कई दस्तावेज इजरायली एजेंटों द्वारा चुरा लिए गए थे। नेतन्याहू ने एक हाई-प्रोफाइल भाषण में दस्तावेज़ों को दिखाया और दावा किया कि इससे साबित होता है कि ईरान सीक्रेट तरीके से परमाणु हथियारों का कार्यक्रम चला रहा है। अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने बाद में पुष्टि की थी कि ये दस्तावेज़ तेहरान में एक सीक्रेट ऑपरेशन के दौरान कब्जे में लिए गए थे।

रिपोर्ट्स के अनुसार, उस ऑपरेशन के दौरान मोसाद एजेंटों ने तेहरान में एक गोदाम में घुसकर कई लॉकरों को तोड़ दिया और 100,000 से अधिक गोपनीय दस्तावेज़ अपने कब्जे में ले लिए। इस ऑपरेशन में दो दर्जन से अधिक एजेंट शामिल थे और यह छह घंटे तक चला था। इन दस्तावेज़ों में ईरान के परमाणु हथियारों के विकास से जुड़ी व्यापक जानकारी थी, जिसने दुनिया भर में ईरान के परमाणु कार्यक्रम की दिशा को लेकर नई बहस छेड़ दी थी।

चोरी गए इन दस्तावेज़ों ने अमेरिका की ईरान पर नीति को काफी हद तक प्रभावित किया था। 2015 में हुए ईरान परमाणु समझौते से अमेरिका ने 2018 में उस वक्त हाथ खींच लिया था जब तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को नेतन्याहू ने एक सीक्रेट ब्रीफिंग दी थी। इन दस्तावेजों के खुलासे से यह दावा मजबूत हुआ कि ईरान समझौते की शर्तों का पालन नहीं कर रहा था, जिसका उद्देश्य ईरान की परमाणु आकांक्षाओं को कम करना और उसके बदले प्रतिबंधों को हटाना था।

हिज़बुल्लाह नेता की हत्या के बाद बड़े खुलासे

इजरायल द्वारा लेबनान में हिज़बुल्लाह के मुख्य नेता हसन नसरल्लाह की हत्या के बाद अहमदीनेजाद ने यह चौंकाने वाला खुलासा किया है। उन्होंने ये भी कहा है कि ईरान के भीतर एक महत्वपूर्ण काउंटर इजरायल यूनिट में मोसाद का एजेंट शामिल है, जिससे लगातार इजरायल को जानकारी मिल रही है। उन्होंने कहा कि 2018 में ईरानी परमाणु दस्तावेजों की चोरी और ईरानी परमाणु वैज्ञानिकों की टारगेट किलिंग के लिए जिम्मेदार यही एजेंट थे।

अहमदीनेजाद ने आगे यह भी कहा कि ईरान की मोसाद विरोधी इकाई का प्रमुख 2021 में एक इजरायली जासूस के रूप में सामने आया। उन्होंने आरोप लगाया कि “इजरायल ने ईरान के भीतर जटिल ऑपरेशन किए। उन्हें जानकारी हासिल करना बहुत आसान हो गया था। ईरान में अभी भी इस पर चुप्पी साधी हुई है।” बता दें कि महमूद अहमदीनेजाद साल 2005 से 2013 तक, 2 बार ईरान के राष्ट्रपति रह चुके हैं। उन्होंने इस साल भी राष्ट्रपति चुनाव के लिए मैदान में उतरने की कोशिश की थी, लेकिन उनका पर्चा ही खारिज हो गया था और वो शुरुआती राउंड में ही बाहर हो गए थे।

बता दें कि 23 सितंबर 2024 से इजरायल ने लेबनान में कई हवाई हमले किए, जिसमें हिज़बुल्लाह के ठिकानों को निशाना बनाया गया। इस बीच, 27 सितंबर 2024 को इजरायली सेना ने बेरूत में एक हवाई हमले के जरिए हिज़बुल्लाह प्रमुख हसन नसरल्लाह को मार गिराया। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इन हमलों में 960 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और 2,770 से अधिक लोग घायल हो चुके हैं। हमलों में कई हिज़बुल्लाह नेताओं की भी जान गई है।

हिज़बुल्लाह और इजरायल के बीच यह संघर्ष तब से जारी है, जब इजरायल ने गाजा पर हमला शुरू किया था। ये हमला अक्टूबर 2023 में हमास द्वारा सीमा पार करके इजरायल पर किए गए हमले के बाद शुरू हुआ था, जिसमें 1200 से अधिक इजरायलियों की मौत हो गई थी। इसी हमले के बाद इजरायली पलटवार में अकेले गजा पट्टी में ही 41,600 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं, जिनमें ज्यादातर महिलाएँ और बच्चे शामिल हैं।

अंतर्राष्ट्रीय समुदाय ने चिंता जताई है कि लेबनान में इजरायली हमलों से गाजा का संघर्ष एक व्यापक क्षेत्रीय युद्ध में तब्दील हो सकता है। इस प्रकार, महमूद अहमदीनेजाद के बयान ईरान की खुफिया सेवाओं में विदेशी घुसपैठ और उसकी गंभीरता पर ध्यान आकर्षित करते हैं, जो ईरान की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा साबित हो सकते हैं।

हाई कोर्ट से नहीं मिली राहत तो कर्नाटक के CM सिद्दारमैया ने चली नई चाल, पत्नी के नाम से आवंटित सभी प्लॉट वापस करने को तैयार: क्या MUDA स्कैम में कम होगी मुसीबत?

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया की पत्नी बी. एम. पार्वती ने उन 14 प्लॉट्स को वापस करने का प्रस्ताव रखा है, जिन्हें लेने के मामले में सिद्दारमैया मुश्किल में फँसे हैं। यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में आया है, जब कर्नाटक हाई कोर्ट ने सिद्दारमैया को इस मामले में राहत देने से इनकार कर दिया था। उनके खिलाफ जाँच के लिए राज्यपाल ने मंजूरी दी थी।

सिद्दारमैया के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मामला

बता दें कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों के तहत एक मामला दर्ज किया है, जो मैसूरु अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी (MUDA) के तहत भूमि आवंटन घोटाले से जुड़ा है। आरोप है कि 2010 में सिद्दारमैया के साले मल्लिकार्जुन स्वामी ने 3.16 एकड़ जमीन को मैसूरु के बाहरी इलाके में पार्वती को उपहार में दिया था।

इसके बाद इस जमीन को 50:50 एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत 14 हाउसिंग साइट्स में बदल दिया गया था। यह एक्सचेंज प्रोग्राम भारतीय जनता पार्टी (BJP) के शासनकाल में शुरू किया गया था। इन प्लॉट्स का आवंटन 2021 में किया गया था, जिससे राज्य को 56 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब पार्वती ने इन प्लॉट्स को वापस करने का प्रस्ताव रखते हुए कहा कि वह परिवार की प्रतिष्ठा को धन या संपत्ति से अधिक महत्वपूर्ण मानती हैं। उन्होंने MUDA से इन प्लॉट्स के दस्तावेज़ रद्द करने और प्लॉट्स को वापस लेने की प्रक्रिया जल्द से जल्द शुरू करने का आग्रह किया। पार्वती ने यह भी कहा कि उन्होंने इस फैसले को बिना किसी से परामर्श किए लिया है, यहाँ तक कि अपने पति सिद्दारमैया से भी नहीं। उनका कहना था कि उनके पति का राजनीतिक करियर हमेशा नैतिकता और ईमानदारी पर आधारित रहा है और इस मामले से उनकी इमेज नहीं बिगड़नी चाहिए।

पार्वती ने पत्र लिखकर की जमीन वापसी की अपील

पार्वती ने अपने पत्र में लिखा कि उनका यह फैसला उनके पति की प्रतिष्ठा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। उन्होंने कहा कि उनके पति सिद्दारमैया पिछले 40 सालों से राजनीति में हैं और उन्होंने कभी किसी प्रकार का भ्रष्टाचार नहीं किया। उन्होंने अपने जीवन में हमेशा पारदर्शिता और ईमानदारी का पालन किया है, और इस मामले से उनके परिवार की छवि को जो नुकसान हो रहा है, उससे पार्वती मानसिक रूप से काफी परेशान हैं।

उन्होंने आगे लिखा कि उनके जीवन का सबसे बड़ा सुख यह है कि उनके पति को जनता से जो सम्मान मिला है, वह उनके लिए किसी भी संपत्ति से अधिक मूल्यवान है। उनके लिए यह स्वीकार करना असहनीय है कि उनकी परिवार की प्रतिष्ठा को गलत आरोपों से धूमिल किया जा रहा है। इसीलिए, उन्होंने यह कदम उठाने का फैसला किया है।

सिद्दारमैया की प्रतिक्रिया और सोशल मीडिया पर बयान

मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने भी इस पूरे विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा कि उनकी पत्नी ने बिना औपचारिक प्रक्रिया के ही प्लॉटों को लौटाने का फैसला किया है। उन्होंने विपक्षी दलों पर आरोप लगाया कि ये सारे आरोप “झूठे” और “राजनीतिक दुर्भावना” से प्रेरित हैं। उन्होंने कहा कि वह हमेशा अन्याय के खिलाफ खड़े रहे हैं, लेकिन इस मामले से उनकी पत्नी पार्वती को जो मानसिक कष्ट हो रहा है, वह उन्हें बहुत दुखी कर रहा है।

सिद्दारमैया ने यह भी कहा कि उनकी पत्नी ने कभी भी सार्वजनिक जीवन में किसी भी प्रकार का व्यक्तिगत लाभ नहीं लिया और वह हमेशा राजनीति से दूर रही हैं। इस विवाद ने उनकी पत्नी को मानसिक रूप से परेशान किया है, और इसी कारण उन्होंने यह निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री ने अपनी पत्नी के फैसले का सम्मान करते हुए कहा कि वह इस निर्णय में उनके साथ हैं और उनकी स्थिति को पूरी तरह समझते हैं।

लोकायुक्त पुलिस की शिकायत और ED की जाँच

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने यह मामला कर्नाटक लोकायुक्त पुलिस की शिकायत के आधार पर दर्ज किया है। लोकायुक्त पुलिस ने सिद्दारमैया, उनकी पत्नी बी. एम. पार्वती, उनके साले मल्लिकार्जुन स्वामी और पूर्व भूमि मालिक देवराज के खिलाफ भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी और जालसाजी के आरोपों के तहत प्राथमिकी (FIR) दर्ज की थी। यह मामला मैसूरु अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी (MUDA) के तहत 14 भूखंडों के आवंटन में अनियमितताओं से जुड़ा है। इन भूखंडों की कुल कीमत लगभग 56 करोड़ रुपये आँकी गई है।

ED ने इन आरोपों की जाँच के तहत मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) के तहत एक प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट (ECIR) दर्ज की है, जो एक प्रकार की प्राथमिकी होती है। इस जाँच में सिद्दारमैया और उनके परिवार की संपत्तियों की जब्ती भी हो सकती है, यदि अनियमितताएँ पाई जाती हैं।

भूमि आवंटन घोटाला और अन्य विधायकों के नाम

इस बीच, एक अन्य विवाद में चिक्कमगलूर जिले के कडूर और मुदिगेरे तालुकों में 10,000 एकड़ से अधिक भूमि के अवैध आवंटन का मामला सामने आया है। इस मामले की जाँच रिपोर्ट में 6 पूर्व विधायकों और 326 अधिकारियों के नाम शामिल हैं, जो इस अवैध आवंटन के लिए जिम्मेदार ठहराए गए हैं। यह भूमि आवंटन प्रक्रिया राज्य की भूमि नियमितीकरण समिति के तहत हुई थी, जिसमें भारी अनियमितताएँ पाई गईं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि कडूर विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक वाई. एस. वी. दत्ता, बेल्ली प्रकाश, मुदिगेरे के पूर्व विधायक मोतम्मा, एम. पी. कुमारस्वामी, और बी. बी. निंगैया सहित कई विधायकों के नाम इस घोटाले में शामिल हैं। इसके अलावा, समिति के अध्यक्ष बी. एल. प्रकाश और अन्य 23 सदस्यों पर भी आरोप लगाए गए हैं कि उन्होंने अयोग्य व्यक्तियों को भूमि आवंटित की।

रिपोर्ट में बताया गया है कि कुल 10,598 एकड़ भूमि में से 6,248 एकड़ भूमि अयोग्य व्यक्तियों को दी गई, और इस प्रक्रिया में कई प्रकार की अनियमितताएँ देखी गईं, जैसे बिना आवेदन के भूमि आवंटन, पात्रता की तारीख के बाद आवेदन प्राप्त करना, और फर्जी दस्तावेज़ों का उपयोग करना।

विधायकों और अधिकारियों ने खुद को बताया बेगुनाह

वाई. एस. वी. दत्ता ने इस मामले पर सफाई देते हुए कहा कि उनके कार्यकाल के दौरान सभी समिति की बैठकें सार्वजनिक रूप से आयोजित की गई थीं। उन्होंने कहा कि अगर कोई अनियमितता हुई है, तो वह सरकार के निर्णय का पालन करेंगे। इसी तरह, पूर्व विधायक सी. टी. रवि ने कहा कि उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान कोई भी गलत काम नहीं किया है और हमेशा कानून का पालन किया है।

इस मामले में 326 अधिकारियों के नाम भी शामिल हैं, जिनमें तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक और गाँव प्रशासनिक अधिकारी शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इन अधिकारियों ने प्रक्रियात्मक गड़बड़ियों और नियमों का उल्लंघन करके भूमि आवंटित की, और इनमें से कई मामले बिना किसी समिति की मंजूरी के हुए हैं।