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अब केवल गुलाम कश्मीर (PoK) वापस लेना है: संयुक्त राष्ट्र से जयशंकर ने दुनिया को बताया मोदी सरकार का इरादा, कहा- अपने कर्मों का फल भोग रहा है पाकिस्तान

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ द्वारा संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGC) में कश्मीर का मसला उठाने के बाद भारत ने करारा दिया है। पहले तो संयुक्त राष्ट्र में भारत की प्रतिनिधि भाविका मंगलनंदन ने पाकिस्तान को उसको हैसियत याद दिलाई और अब विदेश मंत्री एस जयशंकर ने चेतावनी भी दे दी है। उन्होंने कहा कि अब दोनों देशों के बीच सुलझाया जाने वाला मुद्दा केवल पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (POK) को वापस लेना है।

अमेरिका के न्यूयॉर्क में 79वें UNGC को संबोधित करते हुए जयशंकर ने कहा, “हमने कल इसी मंच से कुछ विचित्र बातें सुनीं। मैं भारत की स्थिति को स्पष्ट कर दूँ कि पाकिस्तान की सीमा पार आतंकवाद की नीति कभी सफल नहीं होगी और उसे दंड से बचने की कोई उम्मीद भी नहीं करनी चाहिए। इसके विपरीत, कार्रवाई के निश्चित रूप से परिणाम होंगे।”

पूर्व विदेश सचिव रह चुके सुब्रमण्यम जयशंकर (एस जयशंकर) ने कश्मीर नीति और आतंकवाद को लेकर भारत का रूख स्पष्ट करते हुए कहा, “हमारे बीच सुलझाया जाने वाला मुद्दा केवल पाकिस्तान द्वारा अवैध रूप से कब्जाए गए भारतीय क्षेत्र को खाली करना और आतंकवाद के साथ पाकिस्तान के लंबे समय से चले आ रहे लगाव को त्यागना है।”

पाकिस्तान की अपनी धरती पर ‘आतंकवादियों को पनाह देने’ की नीति के बारे में बोलते हुए उन्होंने कहा, “कई देश अपने नियंत्रण से परे की परिस्थितियों के कारण पीछे छूट जाते हैं, लेकिन कुछ देश जानबूझकर ऐसे फैसले लेते हैं जिनके परिणाम विनाशकारी होते हैं। इसका एक बेहतरीन उदाहरण हमारा पड़ोसी देश पाकिस्तान है। दुर्भाग्य से, उनके कुकृत्यों का असर दूसरों पर भी पड़ता है, खासकर पड़ोस पर।”

उन्होंने कहा, “जब राजनीति अपने लोगों में इस तरह की कट्टरता भरती है तो इसकी जीडीपी को सिर्फ कट्टरपंथ और आतंकवाद के निर्यात के रूप में मापा जा सकता है। आज हम देखते हैं कि दूसरों पर जो बुराइयाँ लाने की कोशिश की गई थी, वे उसके अपने समाज को निगल रही हैं। यह दुनिया को दोष नहीं दे सकते। यह केवल उनका कर्म है।”

पाकिस्तानी पीएम ने कश्मीर की तुलना फिलिस्तीन की थी

इससे पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने UNGC में बोलते हुए कश्मीर में भारत सरकार की कार्रवाई की आलोचना की थी। इतना ही नहीं, उन्होंने जम्मू-कश्मीर की तुलना फिलिस्तीन से की है। शहबाज शरीफ ने कहा था, “फिलिस्तीन के लोगों की तरह जम्मू और कश्मीर के लोगों ने भी अपनी स्वतंत्रता और आत्म-निर्णय के अधिकार के लिए एक सदी तक संघर्ष किया है।”

शहबाज शरीफ ने यह आशंका जताई कि अगर पाकिस्तान किसी तरह का दुस्साहस करने की सोचता है तो भारत उसे छोड़ेगा नहीं है। भारत की बढ़ती सैन्य क्षमताओं के बारे में बोलते हुए उन्होंने कहा कि भारत के नेतृत्व ने ‘नियंत्रण रेखा पार करने की धमकी’ दी है। हालाँकि उन्होंने अपनी कमजोर छिपाते हुए कहा कि पाकिस्तान जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है।

इस भारत की ओर से जवाब देते हुए भारतीय राजनयिक भाविका मंगलनंदन ने कहा, “पाकिस्तान ने लंबे समय से अपने पड़ोसियों के खिलाफ सीमा पार आतंकवाद को हथियार के रूप में इस्तेमाल किया है। इसने हमारी संसद, हमारी वित्तीय राजधानी मुंबई, बाजारों और तीर्थस्थलों पर हमला किया है। यह सूची लंबी है। ऐसे देश के लिए कहीं भी हिंसा के बारे में बात करना सबसे बड़ा पाखंड है।”

आतंकवाद पर पाकिस्तान को लताड़ लगाते हुए भाविका मंगलनंदन ने कहा, “पाकिस्तान को यह समझना चाहिए कि भारत के खिलाफ सीमा पार आतंकवाद के परिणाम उसे निश्चित रूप से भुगतने होंगे। यह हास्यास्पद है कि एक राष्ट्र जिसने 1971 में नरसंहार किया और जो आज भी अपने अल्पसंख्यकों पर लगातार अत्याचार करता है, वह असहिष्णुता और भय के बारे में बोलने की हिम्मत करता है।”

जातिगत आरक्षण: जरूरतमंदों को लाभ पहुँचाना उद्देश्य या फिर राजनीतिक हथियार? विभाजनकारी एजेंडे का शिकार बनने से बचना जरूरी

जब हमारे नेता जातिगत आरक्षण की बात करते हैं तो यह जरूरी हो जाता है कि हम उन्हें हिंदुत्व की सच्चाई याद दिलाई जाए। क्या ये नहीं सही है कि हमारी राजनीतिक व्यवस्था, जो अपने आप को भारतीय संस्कृति का रक्षक बताती है, वास्तव में वो जातिवाद को बढ़ावा दे रही है? इतिहास से छेड़छाड़ और पूर्वजों की उपाधियों को ध्वस्त करना केवल एक राजनीतिक खेल है।

हमारी सांस्कृतिक धरोहर में ऐसे कई उदाहरण हैं, जहाँ हमारे पूर्वजों ने समानता एवं सामाजिक न्याय के लिए लड़ाई लड़ी। आज जब हम जातिगत आरक्षण पर बहस करते हैं तो हमें यह समझना होगा कि असली शोषण कौन कर रहा है। असली शोषित कौन कौन है? ये सब कुछ स्पष्ट होना बेहद जरूरी है, ताकि आम जनता इसके पीछे की सच्चाई समझ सके।

आज देश में जिस जातिगत आरक्षण की बात हो रही है, उसे भी समझना आवश्यक होगा कि क्या यह हमारे समाज के कमजोर वर्गों से जुड़ा मसला है, जो केवल जातिगत पहचान के आधार पर विभाजित हो गए हैं या फिर यह उन नेताओं के हित से जुड़ा मामला है, जो अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए समाज को बाँटने का काम कर रहे हैं?

यह सच है कि आरक्षण की आवश्यकता है, लेकिन क्या यह सही तरीके से लागू हो रहा है? क्या इसके जरिए हम वास्तव में उन लोगों की मदद कर रहे हैं, जिनके लिए इसे हम आवश्यक मानते हैं या फिर हम एक नई जातिगत विभाजन की नींव रख रहे हैं? हमें यह सोचना होगा कि क्या हम अपने पूर्वजों के मूल्यों को भूल रहे हैं?

हमें सोचना होगा कि कहीं हम अपनी पहचान को एक नए राजनीतिक एजेंडे का शिकार तो नहीं बन रहे हैं। इन बातों को ध्यान रखते हुए हमें चुप नहीं रहना चाहिए। अगर हम इतिहास को भूलेंगे और अपने पूर्वजों की छत्रियों को ध्वस्त होने देंगे तो हमारा समाज किस दिशा में बढ़ेगा? यह केवल एक राजनीतिक मुद्दा नहीं है। यह मुद्दा हमारी पहचान, हमारी संस्कृति और हमारे मूल्यों का मामला है।

इनके बिना हम कुछ भी नहीं है। इसलिए, साहस के साथ हमें यह प्रश्न उठाने चाहिए कि क्या यह समय नहीं है कि हम अपने नेताओं को उनकी ज़िम्मेदारियों का अहसास कराएँ? हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि जातिगत आरक्षण की बहस केवल राजनीतिक हथियार न बने। जातिगत आरक्षण सकारात्मक बदलाव की ओर ले जाने वाला एक माध्यम बनना चाहिए।

समाज की भलाई के लिए हमें जागरूक रहना होगा और अपनी आवाज उठानी होगी। हिंदुत्व का असली मतलब एकता, समानता और सामाजिक न्याय है। क्या हम इस दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं या फिर जातिगत आरक्षण के बहाने केवल विभाजन का खेल खेलते रहेंगे? यह हम पर निर्भर करता है कि हम किस रास्ते का चयन करते हैं।

राकेश बन सलमान ने हिंदू युवती को फँसाया, प्रेगनेंट होने पर 3 बार अबॉर्शन: मौलवी के साथ हलाला, दोस्त से संबंध बनवाने के भी आरोप, लखनऊ में केस दर्ज

लखनऊ में एक और लव जिहाद का मामला सामने आया है, जहाँ आरोपित सलमान ने राकेश बनकर एक हिंदू महिला को अपने प्रेम जाल में फंसाया। पीड़िता का आरोप है कि सलमान ने पहले अपना नाम राकेश बताया और खुद को हिंदू बताया ताकि वह महिला का विश्वास जीत सके। इस धोखे के बाद, पीड़िता को शादी के लिए मजबूर किया गया और उसे सलमान की सच्चाई का पता तब चला जब वह पहले ही उसके साथ निकाह कर चुकी थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह मामला लखनऊ के इंदिरा नगर इलाके का है। पीड़िता ने आरोप लगाया कि जब वह सलमान से मिली, तो उसने अपना नाम राकेश बताया और खुद को हिंदू समुदाय का होने का दावा किया। उन्होंने एक-दूसरे से दोस्ती की और यह दोस्ती जल्द ही प्रेम में बदल गई। सलमान ने पीड़िता के साथ शादी का वादा किया और उसे अपने परिवार से भी मिलवाया। लेकिन यह सब कुछ एक बड़े छल का हिस्सा था, जिसका खुलासा तब हुआ जब पीड़िता को पता चला कि सलमान का असली नाम राकेश नहीं, बल्कि सलमान है और वह मुस्लिम है।

पीड़िता के अनुसार, सलमान ने तीन बार उसका गर्भपात कराया और हर बार उसे यह यकीन दिलाया कि वे जल्द ही शादी करेंगे। एक बार जब वह सलमान के असली धर्म और पहचान के बारे में जान गई, तब भी वह खुद को इस रिश्ते से अलग नहीं कर पाई। सलमान ने पीड़िता को मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया। उसने निकाह के बाद तलाक भी दिया और मौलाना से हलाला भी कराया।

पीड़िता का दावा है कि सलमान ने न केवल उसकी भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया, बल्कि उसे अपने दोस्त आसिम खान के साथ भी जबरदस्ती संबंध बनाने पर मजबूर किया। आसिम खान विधानसभा में काम करता है और समीक्षा अधिकारी के पद पर तैनात है। आसिम खान ने भी महिला के साथ बलात्कार किया और सलमान ने इस स्थिति में भी उसका समर्थन किया।

पीड़िता लखनऊ के खुर्रम नगर की रहने वाली है और उसकी उम्र लगभग 25 वर्ष हो चुकी है। वो नाबालिग थी, तब से सलमान उसके साथ संबंध बना रहा है। अभी उसके तीन बच्चे हैं, लेकिन सलमान ने बच्चों को छीन लिया है और उसे घर से भगा दिया है। सलमान उसे बच्चों से मिलने नहीं देता और धमकी देता है कि अगर उसने मुस्लिम धर्म नहीं अपनाया, तो वह बच्चों को नेपाल में बेच देगा।

पीड़िता ने अब इस मामले की शिकायत पुलिस में दर्ज कराई है। उसने सलमान और उसके दोस्त आसिम खान के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की है। पुलिस ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए जाँच शुरू कर दी है और सलमान व आसिम के खिलाफ मामले दर्ज कर लिए गए हैं। पुलिस अधिकारी इस बात की भी जाँच कर रहे हैं कि क्या इस मामले में अन्य लोग भी शामिल हैं, या फिर इस तरह के और भी मामले सामने आ सकते हैं।

जॉइंट कमिश्नर अमित वर्मा ने कहा कि पुलिस इस मामले की जाँच कर रही है और सलमान और आसिम के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा रही है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह मामला बेहद संवेदनशील है और इस पर तेजी से कार्रवाई की जा रही है। लखनऊ पुलिस ने आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए कदम उठाए हैं और आगे की जाँच की जा रही है।

पहले कार में मारी मोटरसाइकल से टक्कर, फिर निहंगों ने तलवार से हमला किया: मोहाली थाने में शिकायत दर्ज, पीड़ित के हाथ में आई गंभीर चोट

पंजाब के मोहाली में बुधवार (25 सितंबर 2024) को निहंग के वेषभूषा पहने दो बाइक सवारों ने एक कार चालक पर तलवार से हमला कर दिया था। अब इस मामले में शिकायत दर्ज हुई है। पीड़ित ने मोहाली पुलिस को बताया कि बाइक सवारों ने इस हमले में न केवल उनकी कार को क्षतिग्रस्त किया बल्कि उन्हें भी गंभीर रूप से चोटिल कर किया

पीड़ित की पहचान 53 साल के हरप्रीत सिंह के तौर पर हुई है। इस घटना में उनके हाथ में गंभीर चोटे आई हैं। अस्पताल में इलाज के बाद उन्होंने अपनी शिकायत में पुलिस को बताया, बुधवार रात करीब 9.15 बजे चावला अस्पताल के पास ट्रैफिक लाइट पर बाइक सवार दो लोगों ने उनकी कार में टक्कर मार दी। इसके बाद उन लोगों में बहस हुई और बाइक सवारों ने तलवारों से उनकी कार पर हमला कर दिया, जिससे कार का पिछला शीशा टूट गया।

स्थिति देखते हुए हरप्रीत ने वहाँ से अपनी कार भगाकर अपने घर जाने की कोशिश की, लेकिन हमलावरों ने उनका पीछा किया। पीड़ित ने पुलिस को बताया कि हमलावरों ने बाइक से पीछा करते हुए उन्हें फिर से रोका और उनकी कार की विंडशील्ड और ड्राइवर की तरफ की खिड़की पर तलवारों से हमला किया। हमले में उनके हाथ में गंभीर चोटें आईं। पीड़ित के अनुसार, उनकी जान सड़क पर आते जाते लोगों के कारण बची। वहीं हमलावर मौके से भाग गए।

पुलिस ने इस मामले को मटौर थाने में भारतीय न्याय संहिता की धारा 109 (हत्या का प्रयास), 118 (1) (चोट पहुँचाना), 324 (4) (शरारत), 126 (2) (गलत तरीके से रोकना) और 3(5) (सामान्य इरादा) के तहत दर्ज किया है। पुलिस सीसीटीवी फुटेज के आधार पर जाँच कर रही है।

बता दें कि पंजाब में निहंग सिखों द्वारा तलवार से हमलों की कई खबरें सामने आ चुकी हैं। अगस्त 2024 में निगंहों ने शमी नारंग नाम एक व्यक्ति के दुकान में घुसकर उसका हाथ काट दिया था, जिसमें उसकी जान चली गई थी। शम्मी के बेटे करण पर भी निहंगों ने तलवार से वार कर दिया और उसकी कलाई भी काट दी। शम्मी के भाई पर भी निहंगों ने हमला किया। इसमें वह भी घायल हो गए। उससे पहले ऐसा ही एक मामला लुधियाना से सामने आया था, जहाँ शिवसेना नेता संदीप थापर पर हमला कर दिया गया था। वो हमले में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। संदीप थापर महान क्रांतिकारी सुखदेव के वंशज हैं।

इजरायल की ताबड़तोड़ कार्रवाई से डरा ईरान! सेफ हाउस भेजे गए सुप्रीम लीडर आयतुल्ला अली खामेनेई: हिज्बुल्लाह चीफ से पहले हमास प्रमुख का भी ऐसे ही किया था खात्मा

ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई को हिज्बुल्लाह प्रमुख हसन नसरल्लाह की मौत के बाद सुरक्षा कारणों से सुरक्षित स्थान पर भेजा गया है। इजरायल के हवाई हमले में नसरल्लाह के मारे जाने की खबर के बाद, क्षेत्र में तनाव चरम पर है। ईरान हिज्बुल्लाह और अन्य सहयोगियों के साथ निकट संपर्क में है और इजरायल के खिलाफ रणनीति तैयार कर रहा है।

ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई ने इजरायल की क्रूरता की निंदा करते हुए कहा कि वह(ईरान) लेबनान के साथ खड़ा है। ईरान ने मुस्लिम देशों को इजरायल के खिलाफ एकजुट होने की अपील की है। फिलहाल उन्हें सुरक्षित जगह पर भेजा जा चुका है। बता दें कि इजरायल ने ईरान की राजधानी में अपने सबसे बड़े दुश्मनों से एक हमास के चीफ इस्माइल हानिया को ढेर कर दिया था। ऐसे में ईरान को डर है कि कहीं इजरायल वैसा ही कदम न उठा ले। इस बीच, इजरायल में भी हाई अलर्ट जारी किया जा चुका है।

हिज्बुल्लाह प्रमुख की मौत के बाद लेबनान के प्रधानमंत्री नजीब मिकाती ने एक आपातकालीन बैठक बुलाई है। इस बैठक में क्षेत्रीय सुरक्षा, इजरायल के बढ़ते हमले और हिज्बुल्लाह के भविष्य को लेकर विचार-विमर्श हो रहा है। मिकाती ने कहा कि यह बैठक लेबनान की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए बेहद जरूरी है।

ईरान और हिज्बुल्लाह के बीच संपर्क और भी गहरा हो गया है। ईरान ने हिज्बुल्लाह को सैन्य और रणनीतिक समर्थन देने की पुष्टि की है और पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ाने वाली इजरायली गतिविधियों की आलोचना की है। नसरल्लाह की मौत के बाद, ईरान ने मुस्लिम देशों की बैठक (ओआईसी) बुलाने का प्रस्ताव रखा है, ताकि इस क्षेत्रीय संकट का हल निकाला जा सके।

इजरायल ने हिज्बुल्लाह के खिलाफ लगातार हवाई हमले किए हैं, जिससे लेबनान की राजधानी बेरूत में व्यापक विनाश हुआ है। इजरायली सेना का कहना है कि उन्होंने हिज्बुल्लाह के केंद्रीय ठिकाने पर हमला कर नसरल्लाह को खत्म कर दिया है, हालाँकि हिज्बुल्लाह ने अभी तक इस बारे में कोई बयान नहीं दिया है। इजरायल की इन कार्रवाइयों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई देशों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। लेबनान ने ईरानी विमानों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया है, जिसके बाद ईरान से आ रहे एक विमान को वापस लौटना पड़ा।

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस संघर्ष को ‘आवश्यक’ बताते हुए कहा कि हिज्बुल्लाह और उसके समर्थकों से निपटना जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इजरायल अपनी सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा और हिज्बुल्लाह के खिलाफ यह अभियान जारी रहेगा। वहीं, इजरायल ने नसरल्लाह को मारने के बाद हाई अलर्ट जारी किया है।

हिज्बुल्लाह और ईरान के ऐतिहासिक संबंध

ईरान और हिज्बुल्लाह के बीच लंबे समय से गहरे राजनीतिक और सैन्य संबंध हैं। नसरल्लाह की मौत के बाद, ईरान के नेता खामेनेई ने हिज्बुल्लाह को अपने समर्थन का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा कि इजरायल ने गाजा युद्ध से कोई सबक नहीं सीखा और यह मूर्खतापूर्ण रणनीति उसे ही नुकसान पहुँचाएगी। ईरान ने यह भी साफ कर दिया है कि वह लेबनान के साथ मजबूती से खड़ा है और इजरायल की क्रूरता को अंतरराष्ट्रीय मंच पर उजागर करेगा।

ईरान ने इस्लामी सहयोग संगठन (ओआईसी) की आपात बैठक की माँग की है, ताकि मुस्लिम देशों के बीच एकजुटता बढ़ाई जा सके और इजरायल के खिलाफ सामूहिक रुख अपनाया जा सके। ईरान का यह कदम पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच क्षेत्रीय स्थिरता के लिए अहम साबित हो सकता है।

नसरल्लाह की मौत के बाद, हिज्बुल्लाह के भविष्य को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। ईरान और हिज्बुल्लाह के सहयोगियों के बीच इस पर विचार किया जा रहा है कि अब अगला कदम क्या होगा। इजरायल के खिलाफ किसी बड़े जवाबी हमले की आशंका बनी हुई है, जिससे पूरे क्षेत्र में और ज्यादा हिंसा फैल सकती है।

किराएदारों पर रखें खास ध्यान, ड्रोन-हॉट बलून हवा में न उड़ाएँ… नवरात्रि से पहले मुंबई में हाई अलर्ट, चप्पे-चप्पे पर पुलिस तैनात

महाराष्ट्र के मुंबई में आतंकी हमले का खतरा देखते हुए शहर को हाई अलर्ट पर रखा गया है। सुरक्षा एजेंसियों को अपने खुफिया सूत्रों से मिले इनपुट के आधार पर सिक्योरिटी टाइट की है। पुलिस बल चप्पे-चप्पे पर तैनात है और भीड़भाड़ वाले इलाकों पर खासी नजर रखी जा रही है।

जानकारी के मुताबिक आने वाले त्योहारों को देखते हुए धार्मिक स्थलों की सुरक्षा बढ़ाई गई हैं। दूसरी ओर रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, मॉल और अन्य सार्वजनिक स्थलों पर भी अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है।

लोगों से अपील की गई है कि अगर उन्हें कोई भी संदिग्ध वस्तु कहीं भी दिखाई दे तो वो उसकी सूचना बिन देरी किए पुलिस को दें। जगह-जगह आतंकवाद निरोधक बल को भी सक्रिय कर दिया गया है। साथ ही पुलिस जवानों की मॉक ड्रिल भी करवाई जा रही है।

पुलिस का कहना है कि उन्हें भीड़भाड़ वाले स्थानों और धार्मिक स्थलों पर मॉकड्रिल करने के निर्देश मिले हैं इसलिए शहर के सभी डीसीपी अपने जोन में विशेष ध्यान दे रहे हैं।

बता दें कि आने वाले कुछ दिनों में जगह-जगह नवरात्रि का उत्सव मनाया जाएगा। इस क्रम में पंडाल भी लगेंगे और भीड़ भी उमड़ेगी। ऐसे में माना जा रहा है कि कुछ अराजक तत्व लोगों में छिपकर अपने मंसूबों को अंजाम दे सकते हैं।

यह भी आशंका है कि आतंकी आम लोगों के भेष में किराएदार बनकर रह रहे हो इसलिए मकान मालिकों, होटल मालिकों, टूरिस्ट गेस्ट हाउस को आगाह किया गया है। अगर उन्हें किराएदारों की कोई भी संदिग्ध गतिविधि दिखे तो वो उसकी सूचना फौरन पुलिस को दें।

इसके साथ किसी को भी अपने यहाँ जगह देने से पहले उनका नाम, देश , पासपोर्ट डिटेल, वीजा डिटेल की अच्छी से जाँच कर लें। इसके अलावा मुंबई पुलिस ने इस बीच कुछ उपकरणों के प्रयोग पर भी रोक लगा दी है। जैसे ड्रोन, कैमरा, रिमोट कंट्रोल, माइक्रो लाइट एयरक्राफ्ट, पैरा ग्लाइडर्स, मोटर्स, हैंड ग्लाइडर्स,ह़ॉट एयर बलून जैसी तमाम चीजें शामिल हैं।

मोदी पाताल से खोज लाएगा…भारत घर में घुसकर मारेगा: जम्मू में गरजे प्रधानमंत्री, आतंकियों को याद दिलाया- आज की ही रात हुई थी सर्जिकल स्ट्राइक की

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव के अंतिम चरण के मतदान की प्रचार के लिए शनिवार (28 सितंबर) को जम्मू में रैली की। प्रधानमंत्री ने कहा कि एमए स्टेडियम में विजय संकल्प महारैली को संबोधित करते हुए कहा कि साल 2016 में आज ही की रात सर्जिकल स्ट्राइक हुई थी। उस दिन दुनिया को बता दिया गया था कि ये नया भारत है, जो घर में घुसकर मारता है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “वो दौर याद कीजिए, जब सीमा पार से आए दिन गोले बरसते रहते थे। उधर से गोलियाँ चलती थीं और इधर से कॉन्ग्रेस वाले सफेद झंडा दिखाते थे। जब भाजपा सरकार ने गोली का जवाब गोले से दिया तो उधर वालों (पाकिस्तान) के होश ठिकाने आ गए। अब आतंक के आकाओं को पता है अगर कुछ भी हिमाकत की तो मोदी पाताल से भी उन्हें खोज निकालेगा।”

इस दौरान प्रधानमंत्री ने कॉन्ग्रेस सहित विभिन्न राजनीतिक दलों पर सवाल उठाया। जम्मू में आयोजित इस महारैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि कॉन्ग्रेस वही पार्टी है, जिसने सर्जिकल स्ट्राइक के सबूत माँगे थे। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सर्जिकल स्ट्राइक को लेकर कॉन्ग्रेस आज भी पाकिस्तान की भाषा बोलती है।

पीएम मोदी ने कॉन्ग्रेस के साथ-साथ फारूक अब्दुल्ला की नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) और महबूबा मुफ्ती की PDP पर भी सवाल उठाते हुए इन्हें संविधान का सबसे बड़ा दुश्मन बताया। पीएम मोदी ने कहा, “आज कॉन्ग्रेस पूरी तरह से अर्बन नक्सलियों के कब्जे में है। जब विदेशों से घुसपैठिए यहाँ आते हैं तो कॉन्ग्रेस को अच्छा लगता है। वो उन्हें अपना वोट बैंक मानती है।”

PM ने कहा, “कॉन्ग्रेस उन घुसपैठियों का स्वागत करती दिखती है, जबकि अपने ही लोगों के दर्द का मजाक उड़ाती है। कॉन्ग्रेस, नेशनल कॉन्फ्रेंस और PDP ने बाबा साहब अंबेडकर के संविधान की आत्मा का गला घोंटा है। कई-कई पीढ़ियों से रह रहे अनेक परिवारों को वोट देने तक का हक नहीं था। भाजपा ने लोगों को वोट का अधिकार दिया।”

उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में आ रहे बदलावों से कॉन्ग्रेस, NC और PDP वाले भड़के हुए हैं। इन्हें आपका विकास पसंद नहीं है। ये लोग कह रहे हैं कि उनकी सरकार बनी तो फिर वो पुराना सिस्टम लाएँगे। पीएम ने कहा कि ये लोग फिर से भेदभाव वाला निजाम लाएँगे, जिसका सबसे बड़ा शिकार जम्मू रहा है। उन्होंने कहा कि इन पार्टियों ने जम्मू के साथ हमेशा अन्याय किया है।

प्रधानमंत्री ने कहा, “जम्मू-कश्मीर के लोग कॉन्ग्रेस, NC और PDP के तीन खानदानों से त्रस्त हैं। लोग फिर वही निजाम नहीं चाहते, जिसमें भ्रष्टाचार हो… नौकरियों में भेदभाव हो। जम्मू-कश्मीर के लोग अब आतंक, अलगाव और खून-खराबा नहीं चाहते हैं। यहाँ के लोग अमन-शांति और अपने बच्चों का बेहतर भविष्य चाहते हैं। इसलिए जम्मू-कश्मीर के लोग भाजपा सरकार चाहते हैं।”

नसरल्लाह का आतंक दुनिया से खत्म: इजरायली सेना ने भीषण हमले में हिज़्बुल्लाह चीफ को उड़ाया, बेरूत अटैक में बेटी-भाई की भी मौत

लेबनान के आतंकवादी शिया संगठन हिज़्बुल्लाह के प्रमुख हसन नसरल्लाह को इजरायल ने मार गिराया है। इजरायली रक्षा बल (आईडीएफ) ने यह दावा किया कि उन्होंने एक हवाई हमले में हसन नसरल्लाह को मार गिराया है। यह हमला को बेरूत के दक्षिणी उपनगर में स्थित हिज़्बुल्लाह के मुख्यालय पर किया गया, जहाँ नसरल्लाह की उपस्थिति की जानकारी मिली थी।

इजरायल ने हिज़्बुल्लाह के नेता हसन नसरल्लाह को मारने के लिए स्पेशल ऑपरेशन ‘न्यू ऑर्डर‘ शुरू किया था। इस ऑपरेशन में इजरायल ने अपनी अत्याधुनिक तकनीक और रणनीतियों का उपयोग किया और आखिरकार अपने सबसे बड़े दुश्मनों में से एक नसरल्लाह को मार गिराया। बताया जा रहा है कि इजरायली फाइटर जेट्स ने 6 ब्लॉक की बिल्डिंगों को पूरी तरह से ध्वस्त करने के लिए 80 बमों का इस्तेमाल किया और हिज़्बुल्लाह के हेडक्वॉर्टर को पूरी तरह से समतल कर दिया।

आईडीएफ के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ‘न्यू ऑर्डर’ ऑपरेशन की पुष्टि की गई, जिसमें कहा गया कि अब हसन नसरल्लाह दुनिया को आतंकित नहीं कर पाएगा।

आईडीएफ के प्रवक्ता डेनियल हगारी ने इस ऑपरेशन की जानकारी देते हुए बताया कि इजरायली खुफिया एजेंसियों से प्राप्त सटीक जानकारी के आधार पर यह हमला किया गया था। इस हमले में हिज़्बुल्लाह की सीनियर लीडरशिप के कई प्रमुख नेता मारे गए, जिनमें नसरल्लाह के साथ-साथ दक्षिणी मोर्चे के कमांडर अली कर्की भी शामिल थे। इसके अलावा, हिज़्बुल्लाह के मिसाइल यूनिट के प्रमुख मुहम्मद अली इस्माइल को भी इस हमले में मारा गया।

लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि इस हमले में कुल 6 लोग मारे गए और 91 लोग घायल हुए। इस हमले से छह अपार्टमेंट बिल्डिंग पूरी तरह नष्ट हो गईं, जिनके मलबे के नीचे से अभी और शव मिलने की आशंका है। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इजरायली विमानों ने बेरूत के दक्षिणी उपनगर और पूर्वी लेबनान के बेक़ा घाटी में कई ठिकानों को निशाना बनाया।

कौन था हसन नसरल्लाह की पृष्ठभूमि

हसन नसरल्लाह का जन्म 31 अगस्त 1960 को बेरूत के एक गरीब इलाके में हुआ था। वह एक किराना व्यापारी के बेटे थे और उनके आठ भाई-बहन थे। उनकी पढ़ाई शुरुआती दिनों में धार्मिक शिक्षा से शुरू हुई और बाद में वह शिया आलिम (धार्मिक विद्वान) बने। उन्होंने 1992 में अब्बास अल-मुसावी की हत्या के बाद हिज़्बुल्लाह की कमान संभाली और तब से लेकर अब तक वह इस संगठन के महासचिव रहे।

नसरल्लाह के नेतृत्व में हिज़्बुल्लाह ने लेबनान में काफी प्रभावी भूमिका निभाई। हिज़्बुल्लाह एक शिया मिलिशिया समूह है, जो अपने सशस्त्र विंग और राजनीतिक ताकत दोनों के कारण लेबनान के सबसे महत्वपूर्ण दलों में से एक माना जाता है। यह समूह इजरायल के खिलाफ सक्रिय है और उसका उद्देश्य इजरायल को खत्म करना है। हिज़्बुल्लाह के पास हजारों प्रशिक्षित लड़ाके और बड़े पैमाने पर हथियारों का भंडार है, जिसमें मिसाइलें भी शामिल हैं जो इजरायल के अंदर गहराई तक हमला करने में सक्षम हैं।

नसरल्लाह की हत्या से हिज़्बुल्लाह के नेतृत्व को बड़ा झटका लगा है। हिज़्बुल्लाह और इजरायल के बीच तनाव पहले से ही चरम पर था, और अब नसरल्लाह की मौत की खबरों ने इस तनाव को और भी बढ़ा दिया है। इजरायल की सेना ने अपनी तरफ से कहा है कि वह उन सभी को निशाना बनाना जारी रखेगी, जो उसके नागरिकों के खिलाफ आतंकवादी गतिविधियों में लिप्त हैं। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी कहा था कि अगर हिज़्बुल्लाह इस विवाद में दूसरा मोर्चा खोलता है, तो उसे अकल्पनीय जवाब मिलेगा।

लेबनान में पहले से ही राजनीतिक अस्थिरता और आर्थिक संकट जारी है, और अब हिज़्बुल्लाह और इजरायल के बीच बढ़ते इस तनाव ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। लेबनान की जनता में अब यह डर पैदा हो रहा है कि इस संघर्ष के चलते उनका देश एक और युद्ध में फंस सकता है।

हिज़्बुल्लाह की रणनीति और नसरल्लाह का नेतृत्व

हिज़्बुल्लाह ने 2006 में इजरायल के खिलाफ एक महीने तक चले विनाशकारी युद्ध में हिस्सा लिया था। उस युद्ध ने लेबनान को बड़े पैमाने पर क्षति पहुंचाई थी। नसरल्लाह के नेतृत्व में हिज़्बुल्लाह ने खुद को लेबनान के सबसे ताकतवर सैन्य और राजनीतिक संगठन के रूप में स्थापित किया। नसरल्लाह की रणनीति हमेशा से ही इजरायल के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष को बढ़ावा देने की रही है।

नसरल्लाह ने कई बार सार्वजनिक तौर पर यह स्वीकार किया कि वह लगातार अपने सोने की जगह बदलते रहते थे ताकि इजरायल के हमलों से बच सकें। वह लंबे समय से सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए थे और ज्यादातर वीडियो संदेशों के माध्यम से ही अपने समर्थकों से बात करते थे। उनका यह गुप्त जीवन और सशस्त्र संघर्ष के प्रति उनकी प्रतिबद्धता उन्हें उनके समर्थकों के बीच एक हीरो की तरह स्थापित करती थी, वहीं उनके दुश्मन उन्हें एक कुख्यात आतंकवादी के रूप में देखते थे।

हिज़्बुल्लाह और ईरान का संबंध

हिज़्बुल्लाह का ईरान के साथ घनिष्ठ संबंध है। ईरान ने हमेशा हिज़्बुल्लाह का समर्थन किया है और उसे सैन्य और वित्तीय सहायता प्रदान की है। नसरल्लाह और ईरान के सर्वोच्च नेता अली ख़ामेनेई के बीच निकट संबंध रहे हैं। हिज़्बुल्लाह को अमेरिका ने आतंकवादी संगठन घोषित कर रखा है, लेकिन इसके बावजूद ईरान और नसरल्लाह के बीच संबंध कभी छिपे नहीं रहे।

ईरान के राष्ट्रपति इब्राहीम रईसी ने हाल ही में कहा था कि इजरायल के अपराध हद से बाहर हो चुके हैं और वॉशिंगटन से उन्हें इस पर संयम बरतने के लिए कहा जा रहा है, लेकिन अमेरिका इजरायल का खुला समर्थन कर रहा है।

इजरायल और हिज़्बुल्लाह के बीच यह संघर्ष केवल इन दोनों देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव पूरे मध्य पूर्व पर पड़ सकता है। लेबनान की जनता, जो पहले से ही आर्थिक संकट और राजनीतिक अस्थिरता से जूझ रही है, इस संघर्ष का सबसे बड़ा शिकार हो सकती है। अब देखना यह होगा कि इस क्षेत्र में शांति बहाल करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय समुदाय क्या कदम उठाता है और इजरायल-हिज़्बुल्लाह संघर्ष किस दिशा में जाता है।

कनाडा में महाराजा रणजीत सिंह की प्रतिमा का अपमान, हमास समर्थकों ने लगाया फिलिस्तीन का झंडा: सामने आया VIDEO, मुँह पर कपड़ा बाँधे दिखे उपद्रवी

कनाडा के ब्रैम्पटन प्रांत में मुँह बाँधे कुछ फिलिस्तीनी उपद्रवियों ने महाराजा रणजीत सिंह की मूर्ति पर तोड़फोड़ करने की कोशिश की। उन्होंने महाराजा की प्रतिमा पर फिलिस्तीन का झंडा तक लगा दिया। सोशल मीडिया पर इसका वीडियो वायरल हुआ है। वीडियो को कनाडा के एक पत्रकार ने शेयर किया है। पत्रकार ने उपद्रवियों को जिहादी कहकर संबोधित किया है।

वायरल हो रहा यह वीडियो करीब 37 सेकेंड का है। इसमें महाराजा रणजीत सिंह की प्रतिमा के प्लेटफॉर्म पर चढ़कर 2 आरोपित उनके घोड़े पर फिलिस्तीन का झंडा लगाते दिख रहे हैं। दोनों उपद्रवियों ने चेहरे पर नकाब बाँध रखा है। वहीं, नीचे कई व्यक्ति खड़े हैं। वीडियो में एक व्यक्ति महाराजा रणजीत सिंह के घोड़े पर कपड़ा बाँधता हुआ नजर आ रहा है।

इस घटना का कई लोगों ने वीडियो बनाया है। इस मामले में पुलिस से शिकायत की जा चुकी है। मामले की कनाडा पुलिस जाँच कर रही है। फिलिस्तीन के समर्थन के लिए निकाले गए विरोध प्रदर्शन के दौरान फिलिस्तीन समर्थकों ने इस घटना को अंजाम दिया। बताया जा रहा है कि प्रतिमा को खंडित करने वाले उपद्रवी का नाम होशाम हमदान है।

कनाडा का ब्रैम्पटन वही शहर है, जहाँ खालिस्तान समर्थक पर भी बड़ी संख्या में रहते हैं और भारत विरोधी गतिविधियों को अंजाम देते रहते हैं। कई मौकों पर उन्होंने इसका प्रदर्शन किया है। हालाँकि, फिलिस्तीनी द्वारा महाराजा रणजीत सिंह की प्रतिमा को अपवित्र करने के बावजूद अभी तक उनकी तरफ से कोई बयान नहीं आया है।

कौन थे महाराजा रणजीत सिंह?

बता दें कि महाराजा रणजीत सिंह भारतीय इतिहास के प्रभावशाली राजाओं में से एक थे। वे सिख धर्म के एक महान राजा थे। उनका जन्म 13 नवंबर 1780 को पंजाब के गुजरांवाला में (अब पाकिस्तान में) हुआ था। सिर्फ 10 साल की उम्र में उन्होंने अपने जीवन का पहला युद्ध लड़ा था। मात्र 12 साल की उम्र में उन्होंने राजगद्दी सँभाली और 18 साल की उम्र में लाहौर को जीत लिया था।

महाराजा रणजीत सिंह ने 40 वर्षों के अपने शासनकाल में कई मुस्लिम शासन को खत्म किया। वहीं, अंग्रेजों को वे अपने साम्राज्य के आसपास भी फटकने भी नहीं दिया। महाराजा रणजीत सिंह जब 12 साल के थे, तभी उनके पिता की मृत्यु हो गई थी। 12 साल की उम्र में उन्होंने गद्दी संभाली, लेकिन पंजाब के महाराजा के रूप में उनकी तापोशी 20 साल होने के बाद 12 अप्रैल 1801 को की गई।

ताजपोशी के बाद 1802 में उन्होंने अमृतसर को अपने साम्राज्य में मिला लिया और 1807 में अफगानी शासक कुतुबुद्दीन को हराकर कसूर पर कब्जा कर लिया। उन्होंने सन 1818 में मुल्तान और 1819 में कश्मीर पर अधिकार कर लिया। उन्होंने शक्तिशाली अफगानों को भी हरा दिया था। उन्हें प्रशासन में हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई और यूरोपीय भी शामिल थे।

बचपन में चेचक के कारण वे एक आँख से देख नहीं पाते थे। वे एक महान शासक, योद्धा और रणनीतिकार थे। उनकी उदारता की कई कहानियाँ भी प्रचलित हैं। उन्होंने सिख साम्राज्य की स्थापना की थी। इस कारण उन्हें ‘पंजाब का शेर’ कहा जाता था। महाराजा रणजीत सिंह की 27 जून 1839 को निधन हो गया था।

36 बुलडोजर, 70 ट्रैक्टर-ट्रॉली के साथ सोमनाथ में चला बड़ा अभियान… मस्जिद-ईदगाह समेत कई अवैध ढाँचे ध्वस्त: बवाल करने पर पुलिस ने 70 को पकड़ा, 1500 सुरक्षाकर्मी तैनात

गुजरात के सोमनाथ शहर में हाल ही में अब तक की सबसे बड़ी अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई की गई, जिसमें प्रशासन ने अवैध रूप से बने कई मजहबी निर्माणों को भी ध्वस्त कर दिया। इस कार्रवाई में 36 बुलडोजर, 70 ट्रैक्टर-ट्रॉली, और 1500 से अधिक पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी। गिर सोमनाथ में विशेष रूप से समुद्री इलाकों और पूजा स्थलों के आसपास के अवैध निर्माणों को हटाने के उद्देश्य से यह मेगा अभियान चलाया गया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह विध्वंस अभियान सुबह 5 बजे शुरू किया गया, जिसमें प्रशासन ने भारी सुरक्षा इंतजाम किए थे। पूरे क्षेत्र को पुलिस छावनी में बदल दिया गया, ताकि कोई अप्रिय घटना न हो। मीडिया की एंट्री पर भी बैन लगा दिया गया था। तोड़फोड़ के लिए 36 बुलडोजर और 5 हिताची मशीनों का इस्तेमाल किया गया, जबकि मलबा हटाने के लिए 50 ट्रैक्टर और 10 बड़े डंपरों को लगाया गया।

इस मेगा ड्राइव के दौरान प्रशासन ने ईदगाह और मस्जिद सहित कई अवैध मजहबी स्थलों को हटाया, जिससे कुछ स्थानीय मुस्लिम समुदाय के लोग विरोध में एकत्रित हो गए। विरोध के बावजूद, प्रशासन ने सख्ती से स्थिति को नियंत्रण में लिया और कार्रवाई को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। सोशल मीडिया पर इस विध्वंस के कई वीडियो भी सामने आए हैं, जिनमें धार्मिक स्थलों को हटाते हुए देखा जा सकता है।

इस अभियान की संवेदनशीलता को देखते हुए जिले के कई वरिष्ठ अधिकारी मौके पर मौजूद थे। गिर सोमनाथ, जूनागढ़ और पोरबंदर जिलों से लगभग 1500 पुलिसकर्मियों को इस कार्रवाई के लिए तैनात किया गया। इनमें 3 एसपी, 6 डिप्टी एसपी, 50 इंस्पेक्टर और 2 एसआरपी कंपनियाँ भी शामिल थीं। जिला कलेक्टर दिग्विजयसिंह जाडेजा, रेंज आईजी नीलेश झांजड़िया, एसपी मनोहरसिंह जाडेजा जैसे अधिकारी भी इस महत्वपूर्ण ऑपरेशन का हिस्सा थे।

विरोध प्रदर्शन के दौरान भीड़ ने हंगामा किया, लेकिन प्रशासन की तैयारी के आगे वे ज्यादा कुछ नहीं कर सके। 70 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया, जो कि कार्रवाई में बाधा डालने की कोशिश कर रहे थे।

यह विध्वंस अभियान पिछले एक महीने से तैयार किया जा रहा था। प्रशासन ने करीब एक महीने तक सर्वेक्षण किया और सभी अवैध निर्माणों की पहचान की। हाजी मंगरोलीशा पीर दरगाह, हजरत माईपुरी, सीपे सालार और मस्तानशा बापू जैसी प्रमुख दरगाहों को भी इस कार्रवाई के दौरान हटाया गया। प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया कि इस प्रक्रिया के दौरान शांति व्यवस्था बनी रहे और विध्वंस कार्य सफलतापूर्वक पूरा हो सके।

मूल रूप से ये रिपोर्ट गुजराती में प्रकाशित की गई है। मूल रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें