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निकाह से पहले किया प्रेग्नेंट, एबॉर्शन करवा के दिया तीन तलाक: गाजियाबाद में सादिक मलिक पर केस दर्ज, हिन्दू युवती से चल रहा है अफेयर

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले से तीन तलाक का मामला सामने आया है। यहाँ एक पीड़िता ने अपने शौहर सहित अन्य ससुरालीजनों के खिलाफ मानसिक व शारीरिक प्रताड़ना की शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत में आरोपितों द्वारा गर्भपात कराए जाने और किसी हिन्दू महिला से अफेयर का भी जिक्र है। पीड़िता पर दहेज़ लाने का भी दबाव डाला गया। शुक्रवार (20 सितंबर 2024) को पुलिस ने केस दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी है।

यह घटना गाजियाबाद के थानाक्षेत्र टीला मोड़ की है। अमर उजाला यहाँ शुक्रवार को यहाँ पीड़िता ने पुलिस में तहरीर दी है। तहरीर में पीड़िता ने बताया कि वह अमनपसंद और कानून में यकीन रखने वाली महिला है। 1 मार्च 2024 पीड़िता का निकाह गाजियाबाद में ही मुरादनगर के निवासी सादिक मलिक से हुआ था। इस निकाह में सादिक को पर्याप्त दान-दहेज़ भी दिया गया। निकाह से पहले भी सादिक और पीड़िता के बीच शारीरिक संबंध थे। इस वजह से पीड़िता गर्भवती हो गई थी।

पीड़िता की प्रेग्नेंसी सादिक की जानकारी में थी। 9 मार्च को 2024 को पीड़िता का अल्ट्रासॉउन्ड करवाया गया। अल्ट्रासॉउन्ड के बाद सादिक के परिजन पीड़िता पर गर्भपात का दबाव बनाने लगे। उन्होने पीड़िता से इस बात को राज ही रखने की नसीहत भी दी। आरोप है की एक दिन पीड़िता के शौहर के मोबाइल पर किसी लड़की की कॉल आई। पूछने पर सादिक ने कॉलर को अपनी गर्लफ्रेंड बताया और उसी के साथ लिव-इन में रहने की बात कही। पीड़िता ने इसका विरोध किया।

आरोप है कि इसी विरोध से भड़क कर सादिक ने पीड़िता की पिटाई की और मायके भेज दिया। अप्रैल 2024 में सादिक के अब्बा शाहिद, उसकी अम्मी रुकसाना, भाई आदिल, बहन आइशा, बहनोई सुहैल और फुफेरी बहन सायरीन ने पीड़िता को मायके से बुला कर अस्पताल में एबॉर्शन करवा दिया। एबॉर्शन के बाद पीड़िता को उसके ससुरालीजन अपने घर ले आए। यहाँ जब पीड़िता ने अपने गर्भपात का विरोध किया तो सभी आरोपितों ने मिलकर पीड़िता की पिटाई की। इसी के साथ पीड़िता से और दहेज़ की भी माँग की गई।

महिला ने अपनी शिकायत में आगे बताया कि पिटाई के दौरान उनके शौहर का दूसरा निकाह करवाने की धमकी दी गई। जैसे-तैसे पीड़िता ने अपने मायके वालों को कॉल कर पूरी बात बताई। जब पीड़िता के परिजन अपनी बेटी के पास पहुँचे तो उनके साथ भी मारपीट हुई। इसी दौरान पीड़िता को उसके शौहर सादिक ने तीन तलाक दे कर घर से निकाल दिया। अपनी शिकायत में महिला ने अपने ससुरालीजनों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है।

पुलिस ने पीड़िता की इस शिकायत पर उसके शौहर सादिक सहित शाहिद, रुखसाना, आदिल, आएशा, सुहैल और सायरीन को नामजद करते हुए FIR दर्ज कर ली है। इन सभी पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 498- A, 323, 504, 506 व 313 के साथ दहेज़ एक्ट व तीन तलाक कानून के तहत कार्रवाई की गई है। ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है। ACP सलोनी अग्रवाल ने मीडिया से बातचीत में बताया कि मामले में जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

‘जानवर की चर्बी’ वाले सारे आरोप निराधार और भ्रामक: तिरुपति प्रसाद में मामले में घिरे पूर्व CM जगन मोहन रेड्डी ने PM मोदी को चिट्ठी लिखी, CM नायडू के दावे को फर्जी कहा

तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) को लेकर आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू और पूर्व मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी के बीच एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। यह विवाद तब और गहरा हो गया जब जगन मोहन रेड्डी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक कड़ी चिट्ठी लिखी, जिसमें उन्होंने चंद्रबाबू नायडू द्वारा टीटीडी और तिरुपति लड्डू के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले घी की गुणवत्ता पर उठाए गए सवालों को निराधार और भ्रामक बताया।

चंद्रबाबू नायडू पर गंभीर आरोप

जगन मोहन रेड्डी ने अपनी चिट्ठी में चंद्रबाबू नायडू को एक “आदतन झूठा” बताते हुए कहा कि नायडू ने राजनीतिक लाभ के लिए करोड़ों हिंदू भक्तों की आस्था को ठेस पहुंचाई है। रेड्डी के अनुसार, नायडू द्वारा तिरुमला तिरुपति देवस्थानम पर लगाए गए आरोप पूरी तरह से बेबुनियाद हैं और सिर्फ राजनीतिक उद्देश्यों की पूर्ति के लिए किए गए हैं।

उन्होंने कहा कि चंद्रबाबू नायडू की ये टिप्पणी न केवल टीटीडी की पवित्रता को धूमिल करती है, बल्कि इससे भक्तों के मन में टीटीडी के प्रति संदेह भी उत्पन्न होता है। रेड्डी ने प्रधानमंत्री मोदी से आग्रह किया कि नायडू की इस हरकत पर सख्त कार्रवाई की जाए और सच्चाई को उजागर किया जाए ताकि भक्तों का विश्वास टीटीडी पर बना रहे।

तिरुपति लड्डू घी विवाद

यह विवाद तब शुरू हुआ जब चंद्रबाबू नायडू ने तिरुपति लड्डू में इस्तेमाल होने वाले घी की शुद्धता पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि तिरुमला मंदिर में तैयार होने वाले प्रसिद्ध लड्डुओं में इस्तेमाल होने वाला घी उच्च गुणवत्ता का नहीं है और इसमें मिलावट की जा रही है। जाँच में ये बात सही निकली, जिसमें पशुओं की चर्बी की पुष्टि हुई।

वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने इस आरोप को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि टीटीडी में प्रसादम बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाले सभी सामग्रियों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए सख्त प्रक्रियाएँ लागू की जाती हैं। रेड्डी ने बताया कि घी की खरीदारी ई-टेंडरिंग प्रक्रिया के माध्यम से की जाती है और इसे एनएबीएल-प्रमाणित लैब टेस्ट के तहत कड़े गुणवत्ता मानकों पर परखा जाता है।

रेड्डी ने यह भी कहा कि टीटीडी की गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली इतनी सख्त है कि कुछ महीने पहले घी के एक टैंकर को मानकों पर खरा न उतरने के कारण अस्वीकार कर दिया गया था। उन्होंने यह भी जोड़ा कि टीटीडी की ये सख्त प्रक्रियाएँ चंद्रबाबू नायडू के टीडीपी शासन के दौरान भी लागू थीं।

चंद्रबाबू नायडू पर राजनीतिक एजेंडे का आरोप

वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने इस पूरे विवाद को चंद्रबाबू नायडू की राजनीतिक चाल बताया। रेड्डी का कहना है कि नायडू ने ये आरोप अपनी सरकार की विफलताओं से ध्यान भटकाने और अपने राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए लगाए हैं। उन्होंने कहा कि नायडू के ये आरोप उनकी हताशा को दर्शाते हैं और यह उनका सिर्फ एक राजनीतिक प्रयास है।

रेड्डी ने आरोप लगाया कि नायडू जानबूझकर टीटीडी जैसे प्रतिष्ठित धार्मिक संस्थान को विवाद में घसीट रहे हैं ताकि जनता का ध्यान राज्य की मौजूदा समस्याओं से हट सके। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की राजनीति न केवल राज्य के विकास में बाधा डालती है, बल्कि धार्मिक संस्थानों की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े करती है।

प्रधानमंत्री से सख्त कार्रवाई की माँग

जगन मोहन रेड्डी ने अपनी चिट्ठी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आग्रह किया कि वे इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करें। उन्होंने कहा कि चंद्रबाबू नायडू के निराधार दावों से टीटीडी की प्रतिष्ठा को गंभीर नुकसान हो सकता है और करोड़ों हिंदू भक्तों की आस्था पर चोट पहुँच सकती है। रेड्डी ने कहा कि प्रधानमंत्री को नायडू के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए ताकि इस तरह के भ्रामक बयानों का अंत हो और सच्चाई सामने आ सके।

रेड्डी का मानना है कि नायडू की इस हरकत से सिर्फ टीटीडी ही नहीं, बल्कि पूरे राज्य की धार्मिक भावना को ठेस पहुंची है। उन्होंने कहा कि नायडू को उनके बयान के लिए जनता से माफी मांगनी चाहिए और भविष्य में इस तरह की हरकतों से बचना चाहिए।

टीटीडी की पवित्रता और भक्तों का विश्वास

टीटीडी, जो कि तिरुपति बालाजी मंदिर के प्रबंधन का कार्य देखता है, भारत के सबसे प्रतिष्ठित और समृद्ध धार्मिक संस्थानों में से एक है। यहाँ हर साल करोड़ों भक्त दर्शन करने आते हैं और तिरुपति लड्डू मंदिर का प्रसादम होता है, जिसे भक्त बड़े आदर और श्रद्धा के साथ ग्रहण करते हैं।

वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने अपनी चिट्ठी में इस बात पर जोर दिया कि टीटीडी की पवित्रता को बनाए रखना बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि टीटीडी के खिलाफ ऐसे निराधार आरोपों से भक्तों का विश्वास डगमगा सकता है, इसलिए इन आरोपों का खंडन करना और सच्चाई को सामने लाना आवश्यक है।

इस विवाद ने आंध्र प्रदेश की राजनीति और धार्मिक भावनाओं को एक नए मोड़ पर ला खड़ा किया है। जहाँ एक ओर वाईएस जगन मोहन रेड्डी चंद्रबाबू नायडू पर टीटीडी की पवित्रता पर सवाल उठाने का आरोप लगा रहे हैं, वहीं नायडू घी की गुणवत्ता पर अपने सवालों को लेकर डटे हुए हैं। अब यह देखना होगा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस विवाद पर क्या रुख अपनाते हैं और टीटीडी की प्रतिष्ठा को बनाए रखने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

अयोध्या के सपा सांसद अवधेश प्रसाद के बेटे पर FIR, अपहरण के बाद मारपीट और धमकी का आरोप: BJP बोली- जिस गाड़ी पर सपा का झंडा, उस गाड़ी में बैठा है गुंडा

फैजाबाद के सांसद अवधेश प्रसाद के बेटे अजीत प्रसाद के खिलाफ केस दर्ज हुआ है। अवधेश प्रसाद अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी के नेता हैं। रवि कुमार तिवारी की तहरीर पर अयोध्या की नगर कोतवाली थाने में अजीत पर अपहरण, मारपीट और धमकी देने का मामला दर्ज हुआ है। बता दें कि अजीत प्रसाद अयोध्या की मिल्कीपुर सीट पर होने वाले उपचुनाव की तैयारी कर रहे हैं।

रवि तिवारी की तहरीर पर पुलिस ने एफआईआर में अजीत प्रसाद के साथ ही राजू यादव, श्रीकांत राय और 10 15 अज्ञात लोगों को नामजद किया है। ये पूरा विवाद जमीन की रजिस्ट्री और पैसों के लेन-देन से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है। उन्होंने कहा कि शनिवार (21 सितंबर) को वे सिविल लाइंस में एसबीआई बैंक के पास खड़े थे।

इसी दौरान अजीत प्रसाद अपने समर्थक राजू यादव, एक सिपाही और 10 से 15 अज्ञात लोगों के साथ चार पहिया गाड़ी से वहाँ आए। इसके बाद उन लोगों ने उन्हें जबरन गाड़ी में बैठा लिया। रवि तिवारी का आरोप है कि अजीत प्रसाद ने उन्हें तमंचा लगा दिया और सभी ने मिलकर गाड़ी में उसके साथ मारपीट करनी शुरू कर दी। गाड़ी में पूरे रास्ते उसके साथ मारपीट की जाती रही।

तिवारी ने आगे बताया कि अजीत प्रसाद एवं उनके साथियों ने तहसील के पास गाड़ी खड़ी कर दी और उनसे 1 लाख रुपए वापस लेने का वीडियो भी बना लिया। इसके साथ ही अजीत प्रसाद ने उसे जान से मारने की धमकी भी दी है। फिलहाल अयोध्या पुलिस मामले की जाँच कर रही है। रवि तिवारी पूराकलंदर थाना इलाके के पलिया के रहने वाले हैं।

रवि का दावा है कि उन्होंने अकवारा की रहने वालीं अपनी परिचित शीतला प्रसाद की जमीन को अजीत प्रसाद और लाल बहादुर नाम के नाम पर बैनामा कराने में मध्यस्थता की थी। इस दौरान अजीत प्रसाद ने चेक के जरिए एक लाख रुपए दिया था। गाड़ी में अजीत प्रसाद ने चेक के माध्यम से दिए गए एक लाख रुपए वापस ले लिए और इसका वीडियो भी बनाया है।

भाजपा नेता अमित मालवीय ने सोशल मीडिया X पर लिखा, “फैजाबाद के सांसद अवधेश प्रसाद, जिन्हें आजकल अखिलेश यादव अपनी छाती से लगाकर घूम रहे हैं, उनके बेटे अजीत प्रसाद ने रवि तिवारी का अपहरण करके उसकी पिटाई की। सपा कुछ सीटें क्या जीत गई, बलात्कार और गुंडागर्दी का सिलसिला थम ही नहीं रहा। उत्तर प्रदेश में एक कहावत है- जिस गाड़ी पर सपा का झंडा, उस गाड़ी में बैठा है गुंडा। ये उसी का प्रमाण है।”

बता दें कि अजीत प्रसाद के पिता अवधेश प्रसाद ने साल 2024 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी की टिकट पर फैजाबाद सीट से जीत हासिल की है। अयोध्या में अवधेश प्रसाद के नजदीकी सपा नेता मोईद खान ने एक नाबालिग से गैंग रेप किया था। उस समय अवधेश प्रसाद की जमकर किरकिरी हुई थी।

सांसद बनने से पहले अवधेश प्रसाद अयोध्या की मिल्कीपुर विधानसभा सीट से विधायक चुने गए थे। उनके सांसद बनने के बाद यह सीट खाली हो गई है और अब इस पर उपचुनाव होना है। हालाँकि, उपचुनाव की तारीख अभी तय नहीं हुई है, लेकिन जल्दी ही चुनाव घोषित हो सकते हैं। माना जा रहा है कि सपा यहाँ से अजीत प्रसाद को टिकट देगी।

कानपुर में मालगाड़ी पलटने की साजिश, रेलवे ट्रैक पर रखा मिला गैस सिलेंडर और बीयर की कैन: ड्राइवर की सतर्कता से टला हादसा, CCTV फुटेज से जाँच शुरू

ट्रेन को पटरी से उतारने की साजिश रचने के मामले कम होने का नाम नहीं ले रहे। इस बार यह साजिश उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात जिले में रची गई है। यहाँ रेल की पटरी पर गैस सिलेंडर रखा पाया गया। लोको पायलट की सतर्कता और सूझबूझ से फिलहाल एक बड़ा हादसा टल गया है। घटना रविवार (22 सितंबर 2024) की है। पुलिस टीमों ने घटनास्थल पर पहुँच कर जाँच शुरू कर दी है।

घटना प्रेमपुर स्टेशन के पास की है। उत्तर रेलवे के CPRO शशिकांत त्रिपाठी ने इस घटना पर विस्तार से जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि रविवार (22 सितंबर) को प्रयागराज मंडल के प्रेमपुर स्टेशन के पास एक मालगाड़ी गुजर रही थी। तभी इस ट्रेन के पायलट ने भाँप लिया कि ट्रैक पर छोटा घेरलू सिलेंडर पड़ा हुआ है। सिलेंडर की साइज 5 लीटर की बताई जा रही है। पायलट ने फ़ौरन ही इमरजेंसी ब्रेक लगा कर सिलेंडर से पहले ही ट्रेन को रोक लिया।

रेलवे अधिकारी शशिकांत ने लोको पायलट की सराहना की है। इसी स्थान से पायलट ने कंट्रोल रूम व संबंधित अधिकारियों को सूचित किया। सूचना मिलते ही RPF और GRP के जवान व अन्य अधिकारी मौके पर पहुँचे। सिलेंडर को कब्ज़े में लेकर जाँच शुरू कर दी गई है। रेलवे ट्रैक पर ट्रेनों का संचालन सामान्य रूप से चल रहा है। बकौल शशिकांत त्रिपाठी अब यह पड़ताल चल रही है कि रेलवे ट्रैक पर सिलेंडर कैसे और किस मकसद से रखा गया था।

शशिकांत त्रिपाठी ने आगे बताया कि हाल-फिलहाल में इस तरह की कई घटनाएँ प्रकाश में आईं हैं। इसकी रोकथाम के लिए रेलवे के सभी स्टाफ को निर्देश दिए गए हैं कि रेलवे ट्रैक या आसपास कोई भी संदिग्ध चीज देखे जाने पर फ़ौरन ही इसकी सूचना कंट्रोल रूम में दें। रेलवे ने कुछ संवेदनशील स्थान भी चिन्हित किए हैं जहाँ विशेष सतकर्ता बरती जा रही है। बकौल शशिकांत रेलवे अब ऐसे तत्वों की पहचान के लिए AI व CCTV फुटेज आदि तकनीकियों का भी प्रयोग शुरू करने जा रहा है।

‘अब बंकर की जरूरत नहीं, भारत गोली का जवाब गोले से देता है’ : जम्मू-कश्मीर में गरजे गृह मंत्री अमित शाह, कहा- मोदी सरकार ने आतंकवाद किया दफन…फारूक अब्दुल्ला छुट्टी मनाते थे

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार (22 सितंबर 2024) को जम्मू-कश्मीर के नौशेरा में एक चुनावी रैली को संबोधित किया। इस रैली के दौरान उन्होंने कई मुद्दों पर जोर दिया, जिनमें पाकिस्तान की सीज़फायर उल्लंघन की नापाक हरकतें, अनुच्छेद 370 का मुद्दा और आतंकवाद के खिलाफ सरकार की कड़ी कार्रवाई शामिल थी। अमित शाह ने कहा कि अब जम्मू-कश्मीर में किसी को बंकरों की जरूरत नहीं है, क्योंकि अगर सीमा पार से गोली आती है, तो उसका जवाब गोले से दिया जाएगा। यह बयान पाकिस्तान के संदर्भ में दिया गया, जो अक्सर सीज़फायर का उल्लंघन करता रहा है।

अमित शाह ने कहा, “अब बंकरों की जरूरत नहीं है क्योंकि कोई भी गोली चलाने की हिम्मत नहीं कर सकता। अगर वहाँ से गोली आई तो उसका जवाब गोले से दिया जाएगा।” यह बयान पाकिस्तान की ओर से होने वाली गोलीबारी पर कड़ा संदेश था।

अनुच्छेद 370 और फारूक अब्दुल्ला पर हमला

अमित शाह ने अनुच्छेद 370 को बहाल करने की माँग कर रहे नेताओं पर भी निशाना साधा। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता फारूक अब्दुल्ला पर हमला बोलते हुए कहा कि अनुच्छेद 370 कभी वापस नहीं आएगी। अमित शाह ने कहा, “फारूक साहब, अनुच्छेद 370 अब कभी नहीं लौटेगी। ये लोग शेख अब्दुल्ला (फारूक अब्दुल्ला के पिता) का झंडा वापस लाना चाहते हैं, लेकिन अब सिर्फ तिरंगा ही जम्मू-कश्मीर में लहराएगा। वे पाकिस्तान से बातचीत करना चाहते हैं, लेकिन हम तब तक पाकिस्तान से बातचीत नहीं करेंगे जब तक आतंकवाद खत्म नहीं होता।”

गृह मंत्री ने यह भी कहा कि विपक्षी नेता जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों को जेल से रिहा करना चाहते हैं, लेकिन नरेंद्र मोदी सरकार ने आतंकवाद को जड़ से उखाड़ने का काम किया है। उन्होंने कहा, “वे (अब्दुल्ला परिवार) आतंकवादियों को जेल से रिहा करना चाहते हैं, लेकिन मोदी सरकार ने आतंकवाद को गहराई से दफन कर दिया है। कोई भी आतंकवादी या पत्थरबाज जेल से बाहर नहीं आएगा।”

फारूक अब्दुल्ला और 30 साल का आतंकवाद

अमित शाह ने फारूक अब्दुल्ला पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि जब जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद चरम पर था और कर्फ्यू लगा हुआ था, तब फारूक अब्दुल्ला लंदन में छुट्टियाँ मना रहे थे। उन्होंने कहा, “30 साल तक जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद का दौर चला। 30 साल में 3,000 दिन कर्फ्यू लगा रहा और 40,000 लोग मारे गए। फारूक साहब, उन दिनों आप कहां थे? जब कश्मीर जल रहा था, तब फारूक साहब आराम से लंदन में छुट्टियाँ मना रहे थे।”

कॉन्ग्रेस और राहुल गाँधी पर हमला

गृह मंत्री ने रैली में कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस का एजेंडा है आरक्षण छीनने का। राहुल गाँधी अमेरिका में जाकर कहते हैं कि पहाड़ी लोगों ने अब विकास कर लिया है और उन्हें आरक्षण की जरूरत नहीं है। अमित शाह ने कहा, “उनका एजेंडा आरक्षण छीनने का है। राहुल गाँधी अमेरिका जाते हैं और कहते हैं कि पहाड़ी लोग अब विकसित हो गए हैं, उन्हें आरक्षण की जरूरत नहीं है। मैं उन्हें बताना चाहता हूं कि आरक्षण बना रहेगा। हमने धारा 370 को समाप्त किया और अब कोई इसे वापस नहीं ला सकता।”

मोदी सरकार की उपलब्धियाँ गिनाई

अमित शाह ने मोदी सरकार की उपलब्धियों पर भी जोर दिया, खासतौर पर जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद पर कड़ी कार्रवाई का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने आतंकवादियों को एक-एक कर खत्म कर दिया है। उन्होंने कहा, “मोदीजी आए और हमने एक-एक कर आतंकवादियों का सफाया कर दिया। अब जम्मू-कश्मीर में शांति है और विकास का दौर चल रहा है।”

शाह ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में आतंकवाद और पत्थरबाजी की घटनाओं में भारी गिरावट आई है। उन्होंने दावा किया कि मोदी सरकार के कार्यकाल में आतंकवाद को जड़ से उखाड़ने का काम किया गया है। “अब कोई पत्थरबाज नहीं है, कोई आतंकवादी नहीं बचा है। हमने आतंकवाद को दफन कर दिया है।”

आरक्षण पर स्पष्टता

अमित शाह ने पहाड़ी समुदाय के आरक्षण को लेकर कॉन्ग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस पर हमला बोलते हुए कहा कि भाजपा सरकार ने पहाड़ी समुदाय को आरक्षण दिया है और इसे वापस लेने की कोई गुंजाइश नहीं है। उन्होंने कहा, “हमने पहाड़ी लोगों को आरक्षण दिया है और कोई इसे छीन नहीं सकता। कॉन्ग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस का एजेंडा है कि वे इसे छीनना चाहते हैं, लेकिन हम ऐसा नहीं होने देंगे।”

धारा 370 की बहाली असंभव

अमित शाह ने धारा 370 की बहाली के सवाल पर स्पष्ट कर दिया कि इसे दोबारा लागू करना असंभव है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जम्मू-कश्मीर में अब केवल तिरंगा ही लहराएगा और कोई भी इसे बदल नहीं सकता। उन्होंने कहा, “फारूक अब्दुल्ला का सपना है कि वे धारा 370 को वापस लाएं, लेकिन मैं सबको बताना चाहता हूं कि कोई भी इसे वापस नहीं ला सकता।”

अमित शाह की रैली में दिए गए भाषण ने जम्मू-कश्मीर में आगामी चुनावों के लिए भाजपा की स्थिति को मजबूत करने की कोशिश की। शाह ने पाकिस्तान, अनुच्छेद 370 पर स्पष्ट संदेश दिया। उन्होंने विपक्षी दलों पर हमला करते हुए कहा कि विपक्षियों का एजेंडा जम्मू-कश्मीर के लोगों के हितों के खिलाफ है। इस रैली से भाजपा ने अपनी कड़ी नीतियों और धारा 370 को लेकर अपनी दृढ़ता को एक बार फिर से दोहराया।

6 निकाह कर चुके जियारुल ने शंकर यादव बनकर हिंदू युवती से की 7वीं शादी, धर्मांतरण का दबाव बनाया: गाँव पहुँचने पर खुली सच्चाई, शिकायत के बाद गिरफ्तार

बिहार के पूर्णिया जिले से लव जिहाद का एक नया मामला सामने आया है। यहाँ पर 32 वर्षीय मोहम्मद जियारुल ने नाम बदल कर एक हिन्दू लड़की को पहले अपने जाल में फँसाया और बाद में उस से निकाह कर लिया। पीड़िता को जियारूल ने अपना परिचय शंकर यादव नाम से दिया था। पीड़िता से पहले जियारूल 6 निकाह कर चुका था। हिन्दू महिला को इस्लाम कबूल करवाने की भी कोशिश हुई थी। बुधवार (18 सितंबर 2024) को मिली शिकायत के बाद पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना पूर्णिया जिले के थानाक्षेत्र सदर का है। यहाँ बुधवार को एक हिन्दू पीड़िता ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत में महिला ने बताया कि दिसंबर 2023 में उसकी मुलाकात जियारूल से हुई थी। तब जियारूल मजदूरी करता था। वह शंकर यादव नाम से पीड़िता के घर में काम करने आया था। यहीं पर दोनों की मुलाकात हुई जो आगे चल कर बातचीत में बदल गई। कुछ ही दिनों में जियारूल ने लड़की को अपने झाँसे में ले लिया।

मुलाकातों के दौरान मोहम्मद जियारूल ने खुद को कुँवारा बताया। 7 फरवरी 2024 को उसने पीड़िता से शादी कर ली। इसके बाद उसने पीड़िता से कई बार शारीरिक संबंध बनाए। अगस्त महीने से जियारूल की हरकतों पर पीड़िता को शक होने लगा। वह पीड़िता पर बुर्का पहनने का दबाव बनाने लगा। इसी के साथ उसने महिला को रोज़ा रखने और नमाज़ आदि पढ़ने की भी नसीहत देनी शुरू कर दी।

जब भी अजान होती थी तो जियारूल अपने हाथ इबादत के लिए उठाने लगता था। उसने अधिकतर बातें उर्दू अल्फाज में करना शुरू कर दिया। जियारूल बात-बात पर पीड़िता को पीटने लगा। कभी-कभार वह लड़की को इस्लाम कबूल करने जैसी नसीहत भी देता था। पीड़िता ने अपने शक को यकीन में बदलने के लिए शंकर यादव बने जियारूल की खोजबीन की। इसी पड़ताल में उसके मूल गाँव का पता चला जो कि पूर्णिया के ही बरसौनी थानाक्षेत्र में है।

वह जियारूल के गाँव पहुँची तो उन्हें पहली बार अपने पति के मुस्लिम होने का पता चला। यहीं पर इस बात का भी खुलासा हुआ कि जियारूल पहले से शादीशुदा है। उसकी पहले से कुल 6 बीवियाँ थीं जिनमें वो 2 को तलाक दे चुका है। पीड़िता से जियारूल ने 7वाँ निकाह किया था। अपनी पोल खुलने के बाद जियारूल ने पीड़िता को जान से मार डालने की भी धमकी दी। इस बीच पीड़िता के परिजनों को भी जियारूल की करतूतों का पता चला।

उन सभी ने आरोपित की मिल कर पिटाई कर डाली। मामला संज्ञान में आते ही हिन्दू संगठनों ने भी कार्रवाई की माँग उठाना शुरू कर दिया। 18 सितंबर को पीड़िता ने जियारूल के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई। 19 सितंबर (गुरुवार) को पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया है। जियारूल के पास से शंकर यादव नाम का फर्जी आधार कार्ड भी बरामद हुआ है। गिरफ्तारी के दौरान उसके हाथ में कलावा जैसा धागा बँधा मिला। मामले की जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

अमेरिका के अलबामा में क्लब के बाहर फायरिंग, 4 की मौत और दर्जनों घायल: हमलावरों की पहचान करने में जुटी पुलिस, FBI एवं अन्य एजेंसियों से माँगी मदद

अमेरिका के बर्मिंघम स्थित अलबामा से शनिवार की रात को एक एंटरटेनमेंट एरिया में गोलीबारी की गई। इस गोलीबारी में कम-से-कम 4 लोगों की मौत हो गई है, जबकि दर्जनों लोग घायल हो गए हैं। सूचना पाकर मौके पर पहुँची पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज करके जाँच शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि यह फायरिंग कई हमलावरों ने मिलकर की है।

बर्मिंघम के पुलिस अधिकारी ट्रूमैन फिट्ज़गेराल्ड ने बताया कि रात 11 बजे के बाद फाइव पॉइंट्स साउथ क्षेत्र में कई हमलावरों ने लोगों के एक समूह पर कई गोलियाँ चलाईं। फिट्ज़गेराल्ड ने बताया कि जब अधिकारी घटनास्थल पर पहुँचे तो गोली लगने के कारण बेहोश हुए दो पुरुष और एक महिला बेहोश मिले। बाद में तीनों की मौत हो गई। वहीं, चौथी मौत अस्पताल में हुई।

फिट्जगेराल्ड ने कहा कि अभी तक किसी भी संदिग्ध को हिरासत में नहीं लिया गया था। उन्होंने बताया कि दर्जनों घायल हुए लोगों का विभिन्न अस्पतालों में इलाज चल रहा है। पुलिस एवं अन्य एजेंसियाँ ये पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि हमलावर घटनास्थल तक पैदल आए थे या किसी वाहन में सवार होकर। इसके अलावा, दूसरी जानकारियाँ भी निकाली जा रही हैं।

पुलिस अधिकारी के अनुसार, हिंसा के पीछे के कारणों का अभी नहीं चल पाया है और ना ही ये पता चल पाया है कि हमला करने वाले कितने लोग थे। बर्मिंघम पुलिस ने उस इलाके के व्यवसायिक प्रतिष्ठानों से कहा है कि वे अपने पास मौजूद कोई भी संदिग्ध निगरानी फुटेज दिखे तो उसे पुलिस को उपलब्ध कराएँ। इसके साथ ही लोगों से भी किसी भी तरह की जानकारी साझा करने का अनुरोध किया है।

क्लब मैगनोलिया एवेन्यू पर हुक्का और सिगार लाउंज के बाहर लोग लाइन में खड़े थे, तभी गोलीबारी हुई। अधिकारियों का मानना है कि हमलावर कई होंगे। फिट्ज़गेराल्ड ने संदेह जारी है कि सामूहिक गोलीबारी की यह घटना आपराधिक से ज़्यादा सांस्कृतिक हो सकता है। उन्होंने आगे कहा, “आजकल हम बहुत ज़्यादा विवादों को गोलियों से सुलझाते हुए देख रहे हैं।” रिपोर्ट के मुताबिक, अलबामा में शूटिंग की यह 403 घटना है।

‘कैमरा उठाकर निकलो, 45 दिन तक घुसना मत’ : इजरायल ने वेस्ट बैंक में Al Jazeera के ब्यूरो पर लगाया ताला, राष्ट्रीय सुरक्षा के तहत उठाया कदम

इजरायल और अल जज़ीरा समाचार नेटवर्क के बीच चल रहा विवाद एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। इज़रायली सैनिकों ने रामल्लाह स्थित अल जज़ीरा के कार्यालय पर छापा मारा और 45 दिनों के लिए इसे बंद करने का आदेश दिया। यह छापेमारी इज़रायल की अदालत के आदेश के तहत की गई, जिसमें कहा गया था कि अल जज़ीरा की रिपोर्टिंग इज़रायल की सुरक्षा के लिए खतरा उत्पन्न कर रही है। यह कार्रवाई मई 2024 में इज़रायल द्वारा अल जज़ीरा के खिलाफ उठाए गए कड़े कदमों की कड़ी में एक और बड़ा कदम है, जब चैनल के प्रसारण पर प्रतिबंध लगाया गया था।

सरकारी आदेश और विवाद का इतिहास

मई 2024 में इज़रायल ने अल जज़ीरा पर यह आरोप लगाते हुए उसके प्रसारण पर प्रतिबंध लगाया कि चैनल की रिपोर्टिंग इज़राइल के राष्ट्रीय सुरक्षा हितों को नुकसान पहुँचा रही है। इस आदेश के तहत, पूर्वी यरुशलम और नाज़रथ में स्थित अल जज़ीरा के कार्यालयों पर छापेमारी की गई और प्रसारण उपकरण जब्त कर लिए गए। इसके साथ ही, इज़रायल में चैनल के प्रसारण और वेबसाइट को भी ब्लॉक कर दिया गया। इज़रायल ने यह आरोप लगाया कि अल जज़ीरा की रिपोर्टिंग, खासतौर पर उसके अरबी भाषा के चैनल पर, हमास और अन्य कट्टरपंथी समूहों के विचारों को मंच प्रदान कर रही है, जो इज़रायल के खिलाफ हिंसा भड़काने का काम कर रही है।

इज़रायली सरकार के एक प्रवक्ता ने कहा, “अल जज़ीरा की रिपोर्टिंग से इज़रायली सैनिकों और नागरिकों की सुरक्षा को खतरा है। चैनल बार-बार उन संगठनों के संदेश प्रसारित कर रहा है, जो हिंसा फैलाने और इज़रायल के खिलाफ जिहाद का आह्वान कर रहे हैं। हमारे लिए यह अस्वीकार्य है, और इसलिए हमने कड़े कदम उठाए हैं।”

अलजजीरा के रामल्लाह कार्यालय पर छापा

22 सितंबर 2024 को इज़रायली सैनिकों ने अल जज़ीरा के रामल्लाह कार्यालय पर छापा मारा और तत्काल प्रभाव से इसे बंद करने का आदेश दिया। यह आदेश 45 दिनों के लिए है। चैनल के स्थानीय ब्यूरो प्रमुख वलीद अल-ओमारी ने इस छापेमारी की लाइव रिपोर्टिंग की, जिसमें सैनिकों ने कर्मचारियों को कार्यालय खाली करने का आदेश दिया। छापे के दौरान कई दस्तावेज़ और प्रसारण उपकरण जब्त किए गए। कार्यालय की बालकनी पर लगे बैनर को भी हटाया गया, जिसमें शिरीन अबू अकलेह की तस्वीर थी। शिरीन, एक फिलिस्तीनी-अमेरिकी पत्रकार थीं, जिन्हें मई 2022 में इज़रायली सैनिकों ने मार दिया था।

एक इज़रायली सैनिक ने लाइव प्रसारण के दौरान कहा, “अल जज़ीरा कार्यालय को 45 दिनों के लिए बंद करने का आदेश है। मैं आपसे अनुरोध करता हूँ कि आप सभी उपकरणों को हटाएँ और कार्यालय को तुरंत खाली कर दें,”

अल जज़ीरा की प्रतिक्रिया

अल जज़ीरा ने इज़रायल की इस कार्रवाई की कड़ी निंदा की है। चैनल ने बयान जारी करते हुए कहा कि वह निष्पक्ष और स्वतंत्र रिपोर्टिंग कर रहा है और इस तरह की कार्रवाई प्रेस स्वतंत्रता पर गंभीर हमला है। अल जज़ीरा ने अपने बयान में कहा, “इज़रायल का यह कदम स्वतंत्र पत्रकारिता के अधिकारों का उल्लंघन है। हम अपने कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं, और हम इसे अंतरराष्ट्रीय समुदाय के समक्ष उठाएँगे।”

अल जज़ीरा के एक प्रवक्ता ने बयान जारी कर कहा, “हमारी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और सत्यापित जानकारी पर आधारित है। इज़रायल की यह कार्रवाई स्वतंत्र पत्रकारिता के खिलाफ सीधी चुनौती है, और हम इस पर चुप नहीं बैठेंगे।” इज़रायल और अल जज़ीरा के बीच यह विवाद कई वर्षों से चल रहा है। इज़राइल का आरोप है कि चैनल की रिपोर्टिंग से उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा है।

इज़रायल द्वारा अल जज़ीरा के खिलाफ उठाए गए कदमों पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय और मीडिया संगठन इस पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं और क्या इज़रायल अपने फैसले पर पुनर्विचार करेगा, ये देखना अभी बाकी है। फिलहाल, अल जज़ीरा ने स्पष्ट किया है कि वह इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाएगा और अपने रिपोर्टरों की सुरक्षा के लिए कानूनी कदम उठाएगा।

OpIndia Impact- गणपति पंडाल के आगे भड़काऊ नारेबाजी करने वाला मोहम्मद जैद 15 साथियों संग गिरफ्तार: पुलिस ने CCTV जाँच के बाद पकड़ा

उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले में सोमवार (16 सितंबर 2024) को एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। इस वीडियो में एक मुस्लिम भीड़ ने मुस्लिम बहुल उतरौला बाजार में भगवान गणेश के पंडाल पर फिलिस्तीनी समर्थक व उन्मादी नारेबाजी की थी। पुलिस द्वारा पकड़े गए एक व्यक्ति को भी तब भीड़ में शामिल कुछ लोगों ने छुड़ा लिया था। घटना के कुछ ही घंटों के बाद ऑपइंडिया ने इस करतूत को प्रमुखता से दिखाया था। अब बलरामपुर पुलिस ने FIR दर्ज कर के इस घटना में शामिल मुस्लिम समुदाय के 16 असामाजिक तत्वों को गिरफ्तार किया है। मामले की जाँच अभी भी जारी है।

वीडियो वायरल होने के बाद बलरामपुर पुलिस ने थाना उतरौला में अज्ञात आरोपितों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 170, 126 और 135 के तहत केस दर्ज किया था। CCTV व अन्य वीडियो फुटेज सहित कई सबूतों को जमा करके आरोपितों को चिन्हित किया गया। पहले चरण में कुल 16 आरोपितों की पहचान हुई। शुक्रवार (20 सितंबर) को पुलिस ने दबिश देकर इन सभी को गिरफ्तार कर लिया। सभी आरोपितों को शांतिभंग की धाराओं में चालान कर के अदालत भेज दिया गया।

गणेश पंडाल पर उन्मादी नारेबाजी के आरोप में गिरफ्तार हुए अधिकतर आरोपित बलरामपुर जिले के ही निवासी हैं। इनके नाम मोहम्मद जैद, मोहम्मद इरफ़ान, शाहबाज आलम, जैद खान, मोहम्मद हुसैन, आकिब अली, मोहम्मद सलमान, मोहम्मद अशरफ, साबिर अली, गुलाम बख्तियार, मोहम्मद अफ़ज़ल, मोहम्मद माज़िद, कासिम अली, महफूज़ रज़ा, जैद अंसारी और कुतुबुद्दीन हैं।

संदिग्ध को छुड़ाने वाले की पहचान अब तक नहीं

इस घटना में 2 वीडियो एक साथ वायरल हुए थे। पहले वीडियो में मज़हबी जुलूस निकाली भीड़ भगवान गणेश के पंडाल के आगे फिलिस्तीन समर्थन सहित हिंदुस्तान में रहना होगा तो ख्वाजा ख्वाजा कहना होगा जैसे नारे लगा रही थी। इस दौरान इस्लामिक कट्टरपंथियों ने “रसूल के गुलाम को मौत भी कबूल है”, “फिलीस्तीन का मुसलमान जिंदाबाद” “मस्जिद ए अक्सा जिंदाबाद” जैसे नारे भी लगाए थे।

वहीं दूसरे वीडियो में उतरौला थाने के इंस्पेक्टर द्वारा पकड़े गए एक संदिग्ध को कुछ लोगों ने छुड़ा दिया था। वायरल वीडियो में इंस्पेक्टर को कहते सुना गया, “क्यों छोड़ दें ?” फिर भी अंत में भीड़ में शामिल लोग अपने मंसूबों में सफल रहे थे। फिलहाल अभी तक पुलिस की तरफ से उस व्यक्ति की पहचान उजागर नहीं की गई है जिसने संदिग्ध को इंस्पेक्टर के हाथ से छुड़ाया था। बलरामपुर के एडिशनल एसपी ने अपने बयान में बताया है कि मामले में जाँच व अन्य कानूनी कार्रवाई जारी है।

बेंगलुरु में 29 साल की महालक्ष्मी की निर्मम हत्या… शव के 30 टुकड़े फ्रिज में सड़ते मिले, बदबू से हुआ खुलासा: लोगों को याद आया श्रद्धा वॉकर केस

कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु के व्यालिकावल इलाके में शनिवार (21 सितंबर) को एक महिला की बेरहमी से हत्या की गई। उसकी लाश को 20 से 40 टुकड़ों में काटकर घर के फ्रीज में रखा गया था। मृतका की पहचान 29 वर्षीय महालक्ष्मी के रूप में हुई है। माना जाता है कि महालक्ष्मी की हत्या करीब 15 दिन पहले की गई थी।

इस साल 2 सितंबर से उसका फोन बंद था। यह मामला तब सामने आया, जब पीड़िता के पड़ोसियों ने दुर्गंध आने की शिकायत की। पुलिस को बुलाया गया और आसपास के इलाके की घेराबंदी की गई। पुलिस ने मानव अंगों को बरामद किया है। इनमें कीड़े लगे हुए थे। पुलिस ने मामले की जाँच में फोरेंसिक विशेषज्ञों और डॉग स्क्वायड की भी मदद ली है।

इस साल की शुरुआत में महालक्ष्मी अपने पति हेमंत दास से अलग हो गई थी और बेंगलुरु में अकेली रह रही थी। वह नेपाल की मूल निवासी थी। पीड़िता की एक 4 साल की बेटी है, जो उसके पूर्व पति के साथ रहती है। मामले की जानकारी मिलने पर हेमंत भी घटनास्थल पर पहुँचा। बताया जाता है कि वह हर पखवाड़े अपने बच्चे के साथ महालक्ष्मी के घर आता था।

परेशान करने वाली इस घटना के बारे में बात करते हुए पुलिस ने बताया, “महालक्ष्मी का फोन 2 सितंबर से बंद था। जब उनसे संपर्क नहीं हो पाया तो उनकी माँ और बहन चिंतित हो गईं और घर आ गईं।” उन्होंने बताया, “जब हमने दरवाज़ा खोला तो हमने देखा कि फर्श पर कीड़े रेंग रहे थे और पूरा फर्श पीड़ित के खून से चिपचिपा था। यह खून रेफ्रिजरेटर के दरवाज़े से टपक रहा था।”

पुलिस ने आगे बताया कि महिला के पैरों को काटकर घर में रखे रेफ्रिजरेटर के ऊपर रख दिया गया था। वहीं, शरीर के बाकी हिस्सों को बीच के सेल्फ में रख दिया गया था। सिर को रेफ्रिजरेटर के नीचे रखा गया था। इस घटना को जिसने भी देखा या सुना, वह दंग रह गया। इस हत्याकांड को किसने अंजाम दिया है, इस बात का अभी खुलासा नहीं हो पाया है।

मौजूदा मामला 27 वर्षीय श्रद्धा वॉकर नामक महिला की हत्या की याद दिलाता है। आफताब अमीन पूनावाला ने 18 मई 2022 को लिव-इन-पार्टनर श्रद्धा की गला घोंटकर हत्या कर दी थी और फिर उसके शरीर को 35 टुकड़ों में काट दिया था। आफताब ने राष्ट्रीय राजधानी में 18 अलग-अलग स्थानों पर उसके शरीर के अंगों को ठिकाने लगाया।