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गाजियाबाद के हिंदू दंपती को परिजन ही ईसाई बनने के लिए कर रहे प्रताड़ित, भतीजा घर में लेकर आता है पादरी: इनकार करने पर सास-ससुर करते हैं पिटाई

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले में धर्मांतरण से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ एक हिन्दू दंपति को जबरन ईसाई धर्म अपनाने के लिए मजबूर किया जा रहा है। इस घटना में ससुराल के सदस्यों द्वारा ईसाई बनने के लिए दबाव बनाने और धमकाने का आरोप है। घटना में शामिल लोगों द्वारा हिन्दू दंपति की न सिर्फ पिटाई की जा रही है, बल्कि जान से मारने की धमकी भी दी जा रही है। मामले की शिकायत मिलने पर पुलिस ने रविवार (22 सितंबर 2024) को केस दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है।

यह मामला गाजियाबाद के मोदीनगर इलाके का है, जहाँ संगीता नाम की एक महिला ने अपने ससुरालवालों पर धर्मांतरण का दबाव बनाने का गंभीर आरोप लगाया है। संगीता का आरोप है कि उसके जेठ के परिवार ने पहले ही ईसाई धर्म अपना लिया है और अब उसी पर भी इस धर्म को अपनाने का दबाव डाला जा रहा है।

पीड़िता संगीता के अनुसार, उसके जेठ टीटू ने अपनी पत्नी और बच्चों के साथ कुछ साल पहले ईसाई धर्म अपना लिया था। वह परिवार को लेकर नोएडा के सालारपुर में रहने लगे थे। टीटू की ईसाई धर्म में दीक्षित होने के बाद, उसके माता-पिता यानी संगीता के सास और ससुर ने भी ईसाई धर्म अपना लिया। लेकिन संगीता और उसके पति अजीत ने इस धर्मांतरण का विरोध किया और हिन्दू धर्म में बने रहने का निर्णय लिया।

टीटू की मौत के बाद भी धर्मांतरण का यह सिलसिला जारी रहा। टीटू का बेटा आशु, जो नोएडा में रहता है, अक्सर गाजियाबाद में संगीता के घर आता है। पीड़िता का आरोप है कि आशु अपने साथ ईसाई पादरियों को भी लाता है, जो संगीता और अजीत पर ईसाई धर्म अपनाने का दबाव डालते हैं। जब दंपति धर्मांतरण से इनकार करते हैं, तो आशु, उसके दादा किशनपाल और दादी अशर्फी उनके साथ बेरहमी से मारपीट करते हैं।

संगीता ने आरोप लगाया कि बार-बार धर्मांतरण से इनकार करने पर उसके और उसके पति के साथ लगातार मारपीट की जाती है। इन हिंसक घटनाओं के कारण उनके 2 छोटे बच्चे भी भयभीत हैं और डर के साए में जी रहे हैं। इसके अलावा, पीड़िता का कहना है कि उसे और उसके पति को जान से मारने की धमकी भी दी जा रही है। इस डर और अत्याचार के कारण संगीता ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई और ससुरालवालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की है।

इस गंभीर मामले की शिकायत मिलने के बाद, स्थानीय पुलिस ने तुरंत संज्ञान लिया और एफआईआर दर्ज की। पुलिस ने पीड़िता के जेठ के बेटे आशु, सास अशर्फी, और ससुर किशनपाल के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 115 (2) और 351 (3) के साथ-साथ उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म सम्परिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम के सेक्शन 3/5 (1) के तहत मामला दर्ज किया है।

एफआईआर के मुताबिक, इन आरोपितों ने पीड़िता और उसके परिवार पर जबरन धर्मांतरण का दबाव बनाया और इनकार करने पर उनके साथ हिंसा की। ऑपइंडिया के पास इस एफआईआर की कॉपी उपलब्ध है, जिसमें साफ तौर पर इन आरोपियों के खिलाफ आरोप दर्ज किए गए हैं।

मामला दर्ज होने के बाद पुलिस ने घटना की जाँच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि वे इस मामले को गंभीरता से ले रहे हैं और पूरी तरह से कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई कर रहे हैं। इस बीच, पीड़िता ने भविष्य में किसी भी अनहोनी की आशंका जाहिर की है और अपनी सुरक्षा के लिए प्रशासन से मदद की गुहार लगाई है।

धर्मांतरण विरोधी अधिनियम के तहत यह मामला न सिर्फ धार्मिक आस्था पर हमला है, बल्कि एक परिवार की स्वायत्तता और आत्मसम्मान पर भी चोट है। उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म सम्परिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम के तहत आरोपितों को कठोर सजा का प्रावधान है। यह अधिनियम ऐसे मामलों में विशेष प्रावधानों के साथ कार्रवाई करने की अनुमति देता है, जहाँ जबरन या धोखाधड़ी से धर्म परिवर्तन कराने का प्रयास किया जाता है।

नेपाल की लड़की, बेंगलुरु में फ्रिज में टुकड़े-टुकड़े कर किया पैक: पूर्व पति का दावा- उत्तराखंड के नाई (अशरफ) से था संबंध, जानिए महालक्ष्मी मर्डर केस में अब तक क्या हुआ

बेंगलुरु के व्यालिकावल इलाके में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई, जहाँ 29 वर्षीय महालक्ष्मी की बेरहमी से हत्या कर दी गई। महालक्ष्मी का शव कई टुकड़ों में काटकर उनके घर के फ्रिज में रखा गया था। इस वीभत्स हत्या कांड ने पूरे शहर को स्तब्ध कर दिया है। पुलिस ने शव के 28 टुकड़े बरामद किए हैं, जो फ्रिज में रखे गए थे। हत्या की क्रूरता ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है और मामले की गहन जाँच जारी है। इस मामले में महालक्ष्मी के पूर्व पति ने अशरफ नाम के एक नाई पर शक जताया है, जिसके कथित तौर पर महालक्ष्मी के साथ अवैध संबंध थे।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना के बारे में तब पता चला जब महालक्ष्मी के घर से दुर्गंध आने लगी। पड़ोसियों ने इसकी शिकायत की और फिर महालक्ष्मी की माँ, मीना राणा, और बहन लक्ष्मी ने घर जाकर जाँच की। मीना राणा ने अपनी शिकायत में कहा, “जब हमने दरवाजा खोला और अंदर गए, तो घर की हालत बेहद खराब थी। पूरे घर में सामान बिखरा हुआ था। रसोई के पास कीड़े रेंग रहे थे, और खून के धब्बे दिखाई दे रहे थे। जब मैंने फ्रिज खोला, तो उसमें शव के टुकड़े देखकर मैं बाहर दौड़ आई। तुरंत अपने दामाद इमरान को बुलाया, जिसने पुलिस को सूचना दी।”

महालक्ष्मी की माँ के मुताबिक, आखिरी बार उनकी बेटी से फोन पर बात 2 सितंबर को हुई थी, जब महालक्ष्मी ने बताया था कि वह जल्द ही अपने पति से मिलने जाएगी। इसके बाद से उनका संपर्क नहीं हो पाया था।

महालक्ष्मी के पूर्व पति हेमंत दास ने इस हत्या के पीछे अशरफ नामक एक व्यक्ति का हाथ होने का संदेह जताया है, जो नेलमंगल में एक सैलून में काम करता था। हेमंत ने बताया कि महालक्ष्मी का अशरफ से अवैध संबंध था और उन्होंने अशरफ के खिलाफ ब्लैकमेलिंग का केस भी दर्ज कराया था। हेमंत का दावा है कि अशरफ ने महालक्ष्मी को ब्लैकमेल कर कई बार परेशान किया था। हेमंत ने बताया कि अशरफ उत्तराखंड का रहने वाला है।

हेमंत ने कहा, “मुझे अप्रैल-मई 2023 के दौरान महालक्ष्मी और अशरफ के संबंधों के बारे में पता चला। मैंने इसके बाद महालक्ष्मी से दूरी बना ली थी और 9-10 महीने से उससे कोई संपर्क नहीं किया।” हेमंत ने यह भी बताया कि महालक्ष्मी ने नेलमंगल पुलिस स्टेशन में अशरफ के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन इसके बाद उनकी कोई बातचीत नहीं हुई।

बेंगलुरु के सेंट्रल जोन के डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस, शेखर एच. टेक्कनवार ने बताया, “हम हर कोण से जाँच कर रहे हैं और जब कोई ठोस सुराग मिलेगा, तो उसे सार्वजनिक करेंगे। फिलहाल, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और फोरेंसिक जाँच का इंतजार किया जा रहा है ताकि हत्या के समय और कारण का सटीक पता लगाया जा सके।”

पुलिस ने बताया कि पुलिस ने घटनास्थल की बारीकी से जाँच की और 150 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज का विश्लेषण किया। पुलिस अब भी महालक्ष्मी के मोबाइल फोन और हत्या में इस्तेमाल किए गए हथियार की तलाश कर रही है, जो हत्या के बाद से गायब हैं। पुलिस ने हत्या के पीछे के कारणों की पड़ताल करने के लिए पाँच टीमें बनाई हैं।

हेमंत दास के दावे और महालक्ष्मी की ब्लैकमेलिंग की शिकायत ने पुलिस के सामने नए सवाल खड़े कर दिए हैं। हालाँकि, अभी तक पुलिस को इस मामले में कोई ठोस सुराग नहीं मिला है। हेमंत ने बताया कि महालक्ष्मी कभी-कभी अपनी चार साल की बेटी से मिलने उनके नेलमंगला स्थित दुकान पर आती थी। बेटी अब हेमंत के साथ रहती है।

महालक्ष्मी की हत्या ने दिल्ली के श्रद्धा वॉकर हत्या कांड की यादें ताजा कर दी हैं। 2022 में, श्रद्धा की हत्या उसके लिव-इन पार्टनर आफताब अमीन पूनावाला ने की थी, जिसने श्रद्धा के शरीर के 35 टुकड़े कर दिए थे और उन्हें कई दिनों तक घर के फ्रिज में रखा था। महालक्ष्मी के शव को भी ठीक उसी तरह टुकड़ों में काटकर फ्रिज में रखा गया, जिससे यह मामला श्रद्धा वॉकर केस जैसा प्रतीत होता है।

तिरुपति के ‘बीफ वाले लड्डू’ की हो SIT जाँच: सुप्रीम कोर्ट में PIL, शुद्धिकरण के लिए TTD ने मंदिर के स्वर्ण कूप के पास किया शांति हवन

आंध्र प्रदेश के तिरुपति मंदिर के लड्डू प्रसादम में जानवरों की चर्बी और मछली के तेल के उपयोग पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है। याचिका में माँग की गई है कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले की जाँच के लिए विशेष टीम का गठन करे। दूसरी तरफ तिरुपति तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (TTD) ने कहा है कि वह श्रद्धालुओं के मन में उठी शंका को शांत करने और मंदिर के शुद्धिकरण के लिए शान्ति हवन का आयोजन करने जा रही है। इसके अलावा TTD ने और भी कई ऐलान किए हैं, जिससे श्रद्धालुओं की आस्था बनी रहे।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट में हिन्दू सेना के मुखिया सुरजीत सिंह यादव ने एक याचिका डाली है। सुरजीत यादव ने याचिका में कह़ा कि तिरुपति लड्डू में चर्बी और मछली के तेल के बात सामने आने से करोड़ों हिन्दुओं की आस्था को झटका लगा है।

याचिका में कहा गया है कि इस मामले की जाँच के लिए सुप्रीम कोर्ट विशेष जाँच टीम (SIT) बनाने का आदेश दे और यह टीम सारे तथ्यों को परखे। याचिका में माँग की गई है हिन्दू भावनाओं को जिन लोगों ने ठेस पहुँचाई है, उन पर जाँच के बाद कड़ी कार्रवाई हो।

शांति हवन का आयोजन

TTD ने रविवार (22 सितम्बर, 2024) को TTD के अधिकारियों ने ऐलान किया कि वह लड्डू विवाद के श्रद्धालुओं के मन में पैदा हुई शंकाओं के समाधान और शुद्धिकरण के लिए शांति हवन करेंगे। इस हवन का आयोजन सोमवार (23 सितम्बर, 2024) को सुबह 6 बजे से 10 बजे के बीच किया गया। इस हवन का आयोजन मंदिर प्रांगण के स्वर्ण कूप के पास हुआ।

TTD ने इसी प्रेस कॉन्फ्रेंस में घी को लेकर उठाए गए प्रश्नों पर भी जवाब दिए। TTD ने कहा है कि वर्तमान में वह कर्नाटक कि नंदिनी और अल्फा फ़ूड नाम संस्थाओं से घी खरीद रही है। यह घी लैब में जाँच के लिए भेजा गया है और इसके परिणाम सही रहे हैं। TTD ने यह भी कहा है कि वह अब लगातार घी के नमूने NABL की लैब्स में भेजती रहेगी।

तिरुपति में बनने वाले प्रसाद में सही घी इस्तेमाल हो, इसके लिए TTD खुद भी अपनी लैब स्थापित करेगा। अभी उसके पास घी की जाँच के लिए क्षमताएँ नहीं है। TTD ने बताया है कि राष्ट्रीय देरी विकास संस्थान (NDDB) ने उन्हें ₹75 लाख का घी की जाँच करने वाला सामान दान करने का फैसला किया है, यह दिसम्बर तक आएगा।

तिरुपति में अभी एक एक्सपर्ट टीम भी बुलाई गई है, वह भी घी के नमूनों की जाँच कर रही है। TTD हर साल एक आयोजन भी करेगी, इसमें TTD के अधिकारियों और मंदिर से जुड़े लोगों की गलतियों के लिए भगवान विष्णु से क्षमा माँगी जाएगी।

गौरतलब है कि हाल ही में तिरुपति मंदिर के प्रसाद के रूप में बाँटे जाने वाले लड्डू बनाने में जानवरों की चर्बी और मछली के तेल के उपयोग की बात कही गई थी। एक लैब से जाँच में इसकी पुष्टि भी हुई थी। आंध्र प्रदेश की चंद्रबाबू नायडू सरकार ने बताया कि यह कारनामा पूर्ववर्ती जगन मोहन रेड्डी सरकार में हुआ।

‘दुर्गा पूजा करनी है तो अल्लाह के नाम पर दो 5 लाख टका, वरना काटे जाओगे’ : बांग्लादेश के खुलना में हिंदू मंदिरों को मिली धमकी, 1 हफ्ते में पैसे देने को कहा

बांग्लादेश में दुर्गा पूजा से पहले हिंदू समूहों का अपने समुदाय की सुरक्षा को लेकर डर सही साबित हुआ। खुलना में इस्लामी कट्टरपंथियों ने हिंदुओं को धमकाते हुए कहा है कि अगर उन लोगों को दुर्गा पूजा करनी है तो उन्हें 5 लाख टका देने ही होंगे। बताया जा रहा है कि कई हिंदू मंदिरों को खुलना जिले में गुमनाम नाम से धमकी भरे पत्र आए हैं जिसमें लिखा है कि अगर भुगतान नहीं किया गया तो दुर्गा पूजा नहीं होने दी जाएगी और उन्हें गंभीर परिणाम भी भुगतने होंगे।

पत्र डाक के जरिए हिंदू मंदिरों को भेजे गए हैं। इसमें साफ कहा गया है कि अगर प्रशासन और मीडिया को इस बारे में सूचना दी गई तो सिर कलम करवा दिए जाएँगे। ये भी कहा गया है कि अगर पैसे नहीं दिए गए तो उनके घर लूट लिए जाएँगे ठीक वैसे जैसे आवामी लीग के ज्वाइंट सेक्रेट्री महबूब उल आलम हानिफ का घर लूटा गया था।

पत्र में लिखा है, “सुनो, अगर तुम 2024 में दुर्गा पूजा करना चाहते हो तो तुम्हें हर मंदिर से पाँच लाख टका का चंदा देना होगा। नहीं तो तुम किसी भी तरह से पूजा नहीं कर पाओगे। जैसा हनीफ के प्रोजेक्ट में हुआ, वैसा ही तुम्हारा हश्र होगा। एक सप्ताह के अंदर सारा पैसा तैयार रखना। कालीनगर बाजार में जो जगह बताई जाएगी, वहाँ पैसे दे देना। बाद में जगह बता देंगे।”

पत्र में आगे कहा गया, “अगर तुमने ये बातें प्रशासन, पत्रकारों या किसी और को बताई तो याद रखना कि तुम्हें काट दिया जाएगा। तुम्हारे परिवार को भी नहीं बख्शा जाएगा। ये बात अपने आस-पास के सभी मंदिरों को बता देना क्योंकि हम सभी मंदिरों के नाम नहीं जानते। प्रशासन और सेना के हमें बरगलाने से कोई फायदा नहीं होगा, पैसे तो देने ही पड़ेंगे। अल्लाह के नाम पर अगर हमें पैसे नहीं मिले तो हम तुम्हारे टुकड़े-टुकड़े कर देंगे। हम तुम पर नजर बनाए हुए हैं।”

बता दें कि ये पत्र 9 सितंबर 2024 को लिखा गया है। अब इन्हें हिंदू मंदिरों और पूजा समितियों के अध्यक्षों और महासचिवों को भेजा जा रहा है। इनके प्राप्त होने के बाद खुलना के चार अलग-अलग मंदिरों ने डाकोप पुलिस स्टेशन से संपर्क किया और पत्र दिखाते हुए शिकायतें दीं।

शिकायत मिलने के बाद थाना प्रभारी अधिकारी सिराजुल इस्लाम ने इस मामले में कहा है कि वो लोग इस बाबत जाँच कर रहे हैं कि आखिर पत्र कहाँ से आया। हम लोग मंदिरों की सुरक्षा के प्रयास करेंगे। हम सेना की टीम के साथ पुलिस स्टेशन से नियमित रूप से गश्त कर रहे हैं। गाँव की पुलिस और यूनियन पुलिस के अधिकारी चौबीसों घंटे गश्त पर हैं।

एक मंदिर के महासचिव ने बताया कि पत्र मिलने के बाद वे इस मामले को लेकर काफी चिंता में हैं। उन्होंने अपने इलाके में लोगों के साथ बैठक की है। लोगों ने यही माना कि इस वर्ष पूजा का आयोजन न करना ही बेहतर होगा, लेकिन अंत में कुछ मान गए कि सामूहिक रूप से पूजा-अर्चना होनी ही चाहिए।

रिपोर्ट बताती हैं कि कुछ मंदिर समितियों ने खतरे के कारण दुर्गा पूजा का आयोजन न करने का निर्णय लिया है जबकि कुछ अन्य ने कहा है कि वो इस पूजा का आयोजन शांति से करेंगे। इस मामले पर डाकोप के कमरखोला सर्वजनिन दुर्गा पूजा उत्सव समिति के अध्यक्ष शेखर चंद्र गोलदार ने भी बयान दिया। उन्होने कहा कि इस वर्ष बहुत छोटे पैमाने पर पूजा आयोजित करने की बात चल रही है।

गौरतलब है कि कुछ दिन पहले ही नेशनल हिंदू अलायंस ने दुर्गा पूजा की बाबत बांग्लादेश की अंतरिम सरकार से अपनी सुरक्षा की माँग की थी। उन्होंने डिमांड की थी कि पंडालों पर सीसीटीवी फुटेज रिकॉर्ड की जाए। सुरक्षा हेतु वहाँ पुलिसकर्मी और सेना के लोग तैनात हों ताकि अराजक तत्व पूजा के दौरान कोई उपद्रव न कर सकें।

‘भारत के साथ संबंध मजबूत करने के लिए हूँ प्रतिबद्ध’ : श्रीलंका के नए राष्ट्रपति ने PM मोदी को दिया धन्यवाद, प्रधानमंत्री बोले- हम साथ काम करने को उत्सुक

श्रीलंका को कल (22 सितंबर 2024) अनुरा कुमारा दिसानायके के रूप में 10 वें राष्ट्रपति मिल गए हैं। 56 वर्षीय दिसानायके ने सामगी जन बालवेगया (एसजेबी) के अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी साजिथ प्रेमदासा को हराया। उन्होंने कहा कि सदियों से जो उन्होंने सपना संजोया था वो अब जाकर सच हो रहा है।

उन्होंने कहा कि लाखों आशा और उम्मीद भरी आँखों ने हमें आगे बढ़ाया है और हम फिर से इतिहास लिखने को तैयार हैं। उन्होंने जीत का श्रेय सिंहली, तमिल, मुस्लिम और तमाम श्रीलंकाई लोगों को दिया।

उनकी जीत की घोषणा होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उन्हें बधाई दी। उन्होंने कहा, “श्रीलंका के राष्ट्रपति चुनावों में जीत पर दिसानायके को बधाई। श्रीलंका भारत की पड़ोसी प्रथम नीति और विजन सागर में एक विशेष स्थान रखता है। मैं हमारे लोगों और पूरे क्षेत्र के लाभ के लिए हमारे बहुमुखी सहयोग को और मजबूत करने के लिए आपके साथ मिलकर काम करने के लिए उत्सुक हूँ।”

वहीं दिसानायके ने उनकी बधाई के जवाब में धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि वो दोनों देशों के संबंधो को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि अपने लोगों और पूरे क्षेत्र के लाभ के लिए भारत के साथ सहयोग करते हुए काम करने को तैयार हैं।

बता दें कि अनुरा कुमार दिसानायके नेशनल पीपुल्स पावर और जनता विमुक्ति पेरमुना पार्टी के नेता हैं और साथ ही कोलंबो से सांसद भी थे। उन्हें राष्ट्रपति पद पर उम्मीदवार के तौर पर नेशनल पीपुल्स पावर (एनपीपी) ने उतारा था। उन्हें उनकी मार्क्सवादी विचारधारा और चीन का समर्थक होने के नाते जाना जाता है। इसके अलावा वो कभी भारत के हस्तक्षेप के समर्थक नहीं रहे हैं। उन्होंने हाल में श्रीलंका में अडानी ग्रुप के 484 मेगावाट वाले 44 करोड़ के समझौते को रद्द करने की भी बात उन्होंने कही थी। उन्होंने प्रचार के दौरान कहा भी था कि राष्ट्रपति बनने के बाद वह प्रोजेक्ट को रद्द कर देंगे।

झूठे मामलों की वजह से कोर्ट पर दबाव, पति और ससुराल पक्ष को प्रताड़ना: जानिए घरेलू हिंसा से जुड़े कानून की समीक्षा क्यों है जरूरी?

भारत में भारतीय न्याय संहिता (BNS) लागू होते ही जो सबसे महत्वपूर्ण बात उठ खड़ी हुई है, वह है घरेलू हिंसा के खिलाफ बने कानूनों की समीक्षा। घरेलू हिंसा कानून इस आधार पर बना था कि चूँकि महिलाएँ कमजोर होती हैं, इसलिए वही हिंसा का शिकार होती हैं। हालाँकि, काफी समय से यह भी देखा जा रहा है कि घरेलू कलह के कारण जीवनलीला समाप्त करने वालों में पुरुष भी शामिल हैं।

घरेलू क्लेश कैसे भी हो सकते हैं? वे माता-पिता से लेकर पत्नी तक से संबंधित हो सकते हैं। ऐसे में जो पुरुष घरेलू हिंसा का शिकार होते हैं, उनकी रक्षा या संरक्षण के लिए कोई कानून क्यों नहीं है? कानून का कोई भी पक्ष इस पर बात क्यों नहीं करता है? बार-बार जब यह प्रश्न उठता है। समाज में यह भी मानसिकता है कि पत्नी से प्रताड़ित पुरुष को सहानुभूति नहीं, बल्कि हिकारत की दृष्टि से देखा जाता है।

ऐसे पुरुष को अपमानित किया जाता है। सामाजिक अस्वीकृति तथा कानून की असंवेदनशीलता के चलते ऐसे कई पुरुष या तो अपराध की तरफ चले जाते हैं या फिर अपना जीवन समाप्त कर लेते हैं। कई ऐसे भी होते हैं, जो घुट-घुटकर अपना जीवन बिताते हैं। अब प्रश्न यह उठता है कि आखिर ऐसे पुरुषों के साथ न्याय क्यों नहीं होना चाहिए?

एक बात समझना आवश्यक है कि जैसे महिला कानूनों की माँग करना पुरुष विरोध नहीं होता, वैसे ही पुरुषों के लिए न्याय की बात करना महिलाओं का विरोध नहीं होता है। न्याय लिंग निरपेक्ष होना चाहिए। घरेलू हिंसा का कानून लिंग निरपेक्ष होना चाहिए। शादी कभी भी दो लोगों के बीच न होकर दो परिवार का मामला होता है।

कई मामलों में देखा गया है कि पुरुष को उसकी पत्नी और ससुराल वाले प्रताड़ित करते हैं। आखिरकार पुरुष भी घरेलू हिंसा का शिकार बन जाते हैं। कुछ दुष्ट और आपराधिक प्रवृत्ति की महिलाएँ महिलाओं की रक्षा के लिए बने कानूनों का दुरुपयोग करती हैं। ऐसे में झूठे मामले सिर्फ पुरुषों को फँसाने के लिए ही नहीं, बल्कि वास्तविक पीड़ित महिलाओं के लिए भी खतरा ही हैं।

भारतीय न्याय संहिता में घरेलू हिंसा को लेकर भारत के सर्वोच्च न्यायालय भी चिंता जता चुका है। 12 सितंबर 2024 को शीर्ष न्यायालय ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 85 और 86 पर चिंता जताते हुए कहा कि ये कानून आईपीसी की धारा 498A से जस से तस लिए गए हैं। न्यायालय ने कहा था कि विवाहित महिलाओं की हिंसा से रक्षा के लिए बने कानूनों का दुरुपयोग कुछ महिलाएँ करती हैं।

ऐसे कई मामले आए हैं। लगभग हर न्यायालय का कहना है कि महिलाओं के लिए बने कानूनों का दुरुपयोग रोका जाए। पुरुष आयोग संस्था की अध्यक्ष होने के नाते मैं भी यही मानती हूँ कि इन कानूनों का दुरुपयोग रोका जाए, क्योंकि कानूनों के दुरुपयोग से पीड़ित महिलाओं के प्रति भी गुस्सा बढ़ता है। लोगों में यह धारणा बन जाती है कि हर पीड़ित महिला झूठ बोल रही है।

परिवार बचाने के लिए आवश्यक है कि इसमें परिवर्तन हो। केन्द्रीय कानून मंत्री अर्जुनराम मेघवाल ने घोषणा भी की है कि भारतीय न्याय संहिता की धारा 85 और 86 की समीक्षा की चर्चाएँ चल रही हैं। यही कारण है कि हमें अपने वोट पर गर्व होना चाहिए और मोदी जी और भाजपा को हमें धन्यवाद देना चाहिए कि कम-से-कम उन्होंने मामले को संज्ञान लिया। दूसरी सरकारें तो इस पर सोचा तक नहीं था। पुरुष आयोग संस्था के अध्यक्ष के रूप में मैं इस संबंध में कानून मंत्री से भी भेंट करने वाली हूँ।

दीपक बनकर फहाद हुसैन ने महिला को फाँसा, धर्मांतरण के बाद निकाह कर देह व्यापार में धकेला: आगरा पुलिस ने आरोपित और भाई आमिर पर दर्ज किया केस

आगरा में लव जिहाद का एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ फहाद हुसैन नामक एक व्यक्ति ने अपनी पहचान छुपाकर एक महिला को फंसाया और बाद में उसकी जिंदगी को नर्क बना दिया। महिला ने अपने बयान में कहा कि उसने जिसे दीपक समझकर दोस्ती की थी, वह असल में फहाद था। उसने प्यार की खातिर न सिर्फ अपना मजहब बदला, बल्कि उसके साथ निकाह भी कर लिया। परंतु, उसकी मुसीबतों का अंत यहाँ नहीं हुआ। निकाह के बाद फहाद ने उससे देह व्यापार कराना शुरू कर दिया।

लाइव हिंदुस्तान की रिपोर्ट के मुताबिक, पीड़िता ने सदर थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाई है, जिसमें फहाद और उसके भाई आमिर को नामजद किया गया है। यह मुकदमा कोर्ट के आदेश पर दर्ज हुआ। पुलिस ने बताया कि इस मामले में उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम की धाराएँ भी लगाई गई हैं। पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी है और सख्त कदम उठाने का आश्वासन दिया है।

धोखे से दोस्ती और निकाह

पीड़िता, जो मूल रूप से डौकी क्षेत्र की रहने वाली है और फिलहाल आगरा के सदर के शहीद नगर इलाके में निवास कर रही है, ने बताया कि उसकी मुलाकात एक युवक से हुई थी, जिसने खुद को दीपक बताया था। दोनों के बीच संबंध बने और उसने इस युवक से गहरा लगाव बना लिया। लेकिन कुछ समय बाद उसे पता चला कि दीपक का असली नाम फहाद हुसैन है। हालात से मजबूर होकर पीड़िता ने उसके साथ निकाह कर लिया और अपना नाम भी बदल लिया।

देह व्यापार में धकेला

निकाह के बाद महिला की जिंदगी और भी बर्बाद हो गई। पीड़िता ने आरोप लगाया कि फहाद ने उसे जबरन देह व्यापार में धकेल दिया। उसकी आपत्तियों को नजरअंदाज करते हुए उसे इस गंदे काम में शामिल किया गया। महिला का कहना है कि फहाद ने उसे माँ बनने से भी रोक दिया, ताकि वह इस घिनौने धंधे में बनी रहे। यह आरोप बेहद संगीन हैं और पुलिस ने इनकी जाँच शुरू कर दी है।

इस बीच, फहाद ने दूसरी महिला से भी निकाह कर लिया, जिसके बारे में जब पीड़िता को जानकारी मिली तो उसने इसका विरोध किया। इस पर फहाद ने न सिर्फ उसके साथ मारपीट की बल्कि उसकी जान लेने की कोशिश भी की। पीड़िता ने बताया कि फहाद और उसके भाई आमिर ने उसे फर्जी मुकदमों में फंसाने की साजिश भी रची, ताकि वह अपनी आवाज न उठा सके।

कोर्ट में न्याय की गुहार

पीड़िता ने अपनी आवाज दबने नहीं दी और कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने फहाद और आमिर के खिलाफ मामला दर्ज किया है। पुलिस का कहना है कि आरोपों की गहन जाँच की जा रही है और दोषियों को सख्त सजा दी जाएगी। इस मामले में उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम की धाराएँ भी लागू की गई हैं, जो इसे और गंभीर बनाती हैं।

पुलिस की कार्रवाई

आगरा की पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। पुलिस ने बताया कि फहाद और आमिर के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। थाना सदर पुलिस पूरे मामले की छानबीन कर रही है और जल्द ही दोषियों को गिरफ्तार किया जा सकता है।

यह मामला न सिर्फ लव जिहाद की एक और निंदनीय घटना को उजागर करता है, बल्कि समाज में महिलाओं के खिलाफ हो रहे शोषण की भी एक गंभीर तस्वीर पेश करता है। पीड़िता की हिम्मत और उसकी कानूनी लड़ाई ने समाज को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि ऐसे मामलों पर सख्त कार्रवाई की जरूरत है।

कोयले की खदान में विस्फोट से 51 की मौत, कई किलोमीटर तक सुनी गई आवाज: ईरानी राष्ट्रपति का ऐलान- जो भी होगा जिम्मेदार, उसे मिलेगी सज़ा

ईरान में विस्फोट रविवार (22 सितंबर 2024) को एक कोयले की खदान में विस्फोट होने से अब तक 51 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई, जबकि दर्जनों लोग घायल हो गए। कई घायलों की हालात बेहद गंभीर है, जिसकी वजह से मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका है। वहीं, खदान में काम करने वाले कई लोग अभी भी अंदर फँसे हुए हैं। धमाके की वजह की जाँच कराई जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना पूर्वी ईरान की है। राजधानी तेहरान से लगभग 540 किलोमीटर दूर तबास नाम की जगह है। यहाँ पर कोयले की बड़ी खदान है। रविवार को अन्य दिनों की तरह इस खदान में काम चल रहा था। खदान के B और C ब्लॉक में लगभग 70 लोग मौजूद थे। काम सामान्य रूप से चल ही रहा था कि अचानक खदान के अंदर जोरदार विस्फोट हो गया।

विस्फोट इतना तेज था कि इसकी आवाज कई किलोमीटर दूर तक सुनाई दी। कोई कुछ समझ पाता तब तक लगभग 51 लोगों की मौत हो चुकी थी। कुछ लोग घायल हो गए। घायलों में कइयों की हालात गंभीर है। कई लोगों के अभी भी खदान में फँसे होने की आशंका जताई जा रही है। घटना की सूचना मिलते ही ईरानी प्रशासन ने बड़े पैमाने पर राहत एवं बचाव कार्य शुरू कर दिया है।

राजधानी तेहरान से भी बचाव दल को घटनास्थल की तरफ रवाना किया गया है। घायलों को बेहतर अस्पताल में शिफ्ट किया जा रहा है। ईरान की सरकार ने मृतकों को श्रद्धांजलि देने के लिए 3 दिनों के लिए राजकीय शोक की घोषणा की है। अभी तक विस्फोट की असली वजह सामने नहीं आई है। कुछ रिपोर्ट्स में इसे मीथेन गैस द्वारा आग पकड़ना बताया गया है।

हालाँकि, ईरान की सरकार धमाके के असल कारणों की पड़ताल में जुटी है। अमेरिका की यात्रा पर जाने की तैयारी कर रहे ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने एलान किया है कि विस्फोट की जाँच करवा करके दोषियों को कड़ी सजा दी जाएगी। उन्होंने धमाके में जान गँवाने वाले परिवारों को हर सम्भव मदद करने का आदेश दिया है।

मनीष सिसोदिया ने की खुद और अरविंद केजरीवाल की राम-लक्ष्मण से तुलना, छिड़ी राजनीतिक बहस: जंतर-मंतर पर आप ने लगाई ‘जनता की अदालत’

आम आदमी पार्टी के नेता और पूर्व डिप्टी मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने एक बयान दिया, जिसमें उन्होंने खुद की और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की तुलना भगवान राम और लक्ष्मण से की। इस बयान के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में एक बड़ी बहस छिड़ गई है।

मनीष सिसोदिया का बयान तब आया जब वह दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित एक सभा में जनता को संबोधित कर रहे थे। इस सभा में उन्होंने बताया कि जेल में रहते समय उनसे सीबीआई ने क्या बातचीत की थी। उन्होंने कहा कि उन्हें जेल में अधिकारियों द्वारा यह कहने का प्रयास किया गया कि अरविंद केजरीवाल ने उनका नाम दे दिया है, और यदि सिसोदिया भी केजरीवाल का नाम ले लें तो वह बच सकते हैं। इस पर सिसोदिया ने जवाब दिया, “आप लक्ष्मण को राम से अलग करने की कोशिश कर रहे हो। दुनिया में कोई ताकत नहीं जो लक्ष्मण को राम से अलग कर सके।”

इस बयान में सिसोदिया ने खुद को लक्ष्मण और केजरीवाल को राम की तरह प्रस्तुत किया। उन्होंने अपनी और केजरीवाल की 26 साल पुरानी दोस्ती का हवाला देते हुए कहा कि उनका रिश्ता अटूट है, और कोई भी ताकत इसे तोड़ नहीं सकती।

मनीष सिसोदिया ने कहा, “इनकी कोशिश थी कि ये टूट जाए जब बाहर से नहीं टूटा तो अंदर से तोड़ने की कोशिश की। बेशर्मी देखिए इनकी सीबीआई ने कहा कि मनीष सिसोदिया ने केजरीवाल का नाम दिया। मुझे जेल में कहा गया कि देखो केजरीवाल ने आपका नाम ले दिया आप उनका नाम ले दो और आप बच जाओगे। मैं उनसे कहता था आप लक्ष्मण को राम से अलग करने की कोशिश कर रहे हो। दुनिया में किसी में ताकत नहीं जो लक्ष्मण को राम से अलग कर सके। अरविंद केजरीवाल से मेरी 26 साल पुरानी दोस्ती है। वह मेरे राजनैतिक गुरु हैं।”

राम और लक्ष्मण की तुलना न केवल एक व्यक्तिगत रिश्ते को आदर्श बनाने का प्रयास है, बल्कि इससे यह संदेश जाता है कि राजनीति में कुछ नेता खुद को ईश्वर के समान समझते हैं। उन्होंने अपने बयान में यह संकेत दिया कि विपक्ष और जाँच एजेंसियाँ उनकी दोस्ती और राजनीतिक साझेदारी को तोड़ने की कोशिश कर रही हैं। लेकिन इस तुलना को धार्मिक नजरिए से देखना अलग मुद्दा है।

MP में आर्मी ट्रेन को उड़ाने की साजिश नाकाम… ट्रैक पर बिछे थे 10 डेटोनेटर, रेल गुजरने से पहले फूटे: पंजाब में भी सरिया मिला, कानपुर में गैस सिलेंडर

मध्य प्रदेश के बुरहानपुर में सेना के जवानों को लेकर जा रही एक स्पेशल ट्रेन को धमाका करके पलटने की कोशिश की गई। इसके लिए नेपानगर में रेलवे ट्रैक पर डेटोनेटर बिछाए गए थे। हालांकि, ट्रेन के पहुँचने से पहले ही कुछ डेटोनेटर फूट गए और रेलवे अधिकारी सतर्क हो गए। इसके बाद सागफाटा स्टेशन पर ट्रेन रुकवा दी गई। यह ट्रेन जम्मू-कश्मीर से कर्नाटक जा रही थी।

यह घटना बुधवार (18 सितंबर 2024) की है, लेकिन जानकरी अब सामने आई है। रेलवे सूत्रों के हवाले से मीडिया रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि दिल्ली-मुंबई ट्रैक पर सागफाटा से डोंगरगाँव के बीच 10 डेटोनेटर रखे गए हैं। इन्हें एक से डेढ़ फीट की दूरी पर रखा गया था, ताकि लगातार धमाके हों। यह ट्रेन खंडवा से होते हुए तिरुवनंतपुरम जा रही थी। इसमें सेना के अधिकारी, जवान और हथियार थे।

आर्मी की यह स्पेशल ट्रेन जब डिटोनेटर के पास से गुजरी तो लोको पायलट ने विस्फोट की आवाज सुनी। उसने तुरंत ट्रेन रोक दी और नेपानगर के स्पेशन मास्टर को इसकी सूचना दी। इसके बाद नेपानगर कंट्रोल रूम से सागफाटा स्टेशन के कंट्रोल रूम को ट्रैक पर डेटोनेटर होने की सूचना दी गई। ट्रेन वहाँ कुछ देर रुकने के बाद ट्रेन भुसावल की ओर रवाना हो गई। 

भुसावल पहुँचकर भी घटना की शिकायत स्टेशन मास्टर से की गई। इसके बाद आनन-फानन में रेलवे के अधिकारी से लेकर प्रशासन तक घटनास्थल पर पहुँच गया। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, डेटोनेटर साल 2014 के बताए जा रहे हैं। यह पाँच साल के लिए ही वैध रहते हैं। छठे साल में इनका टेस्ट होता है। इन्हें रेलवे ही बनाता है। इन्हें ट्रैक पर किसने रखा, इसकी जाँच की जा रही है।

कहा जा रहा है कि ट्रैक पर जो डेटोनेटर मिला था वो RDX वाला नहीं, फ़ॉग डेटोनेटर था। जाड़े में कुहासा के कारण ट्रेन के लोको पायलट को अलर्ट करने के लिए इसका इस्तेमाल पटरी के पास आवाज करने के लिए किया जाता है। एक स्थान पर एक डेटोनेटर रखा जाता है। हालाँकि, यहाँ डेटोनेटर रेलवे की ओर से नहीं रखा गया था।

अज्ञात लोगों ने रेलवे का यह एक्सपायर्ड डेटोनेटर हासिल करके उसे एक साथ पटरी पर रख दिया था। ये डेटोनेटर सिर्फ आवाज करते हैं। यह कहा जा रहा है कि ट्रैक पर काम करने वाले रेलवे के गैंगमैन एवं ट्रैकमैन को इस तरह के पटाखे दिए जाते हैं, ताकि विशेष परिस्थितियों में इसे छोड़कर आने वाली ट्रेन को लोको पायलट को संकेत दे सके।

इस मामले को रेल मंत्रालय ने काफी गंभीरता से लिया है। आर्मी भी जाँच में जुट गई है। इसके अलावा, राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) और आतंक निरोधी दस्ता (ATS) के साथ-साथ देश की कई सुरक्षा एवं खुफिया एजेंसियाँ भी जाँच में जुटी हुई हैं। RPF (रेलवे सुरक्षा बल) भी इसकी जाँच कर रहा है। आर्मी के अधिकारियों ने पूछताछ के लिए रेलवे के चाबीदार और ट्रैकमैन की हिरासत की माँग की है।

कहा जा रहा है कि इस मामले से जुड़े 4 से 5 संदिग्धों से पूछताछ के बाद पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया है। हालाँकि, मामला गंभीर होने के साथ-साथ सेना से जुड़े होने के चलते अधिकारी इस मामले को लेकर गोपनीयता बरत रहे हैं और कोई भी अधिकारी कुछ बोलने या जानकारी देने से बच रहा है। हालाँकि, किसी गिरफ्तारी की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

बता दें कि आज रविवार (22 सितंबर) को उत्तर प्रदेश स्थित कानपुर के प्रेमपुर रेलवे स्टेशन के पास ट्रैक पर खाली गैस सिलेंडर मिला। यह घटना सुबह लगभग 8 बजे की है। वहाँ से एक मालगाड़ी प्रयागराज के लिए जा रही है। ट्रेन के लोको पायलट ने सिलिंडर देखकर आपातकालीन ब्रेक लगाकर ट्रेन रोक दी। यह सिलेंडर पाँच किलो का था और खाली था। इस मामले की भी जाँच की जा रही है।

इससे पहले 8 सितंबर को प्रयागराज से भिवानी जा रही कालिंदी एक्सप्रेस को ट्रैक पर LPG सिलेंडर रखकर पटरी से उतारने की कोशिश की गई थी। ट्रेन जब सिलेंडर से टकराई तो तेज धमाका हुआ। इसके बाद लोको पायलट ने तुरंत आपातकालीन ब्रेक लगा दिया। इससे पहले 17 अगस्त 2024 को कानपुर में ही साबरमती एक्सप्रेस के 17 डिब्बे पटरी से उतर गए थे। लोको पायलट ने बताया था कि किसी चीज से ट्रेन के टकराने के बाद हादसा हुआ था।

बीते दो महीनों में देश भर में ट्रेन पलटने की 23 साजिशों का पता चला है। बताते चलें कि रेलवे अधिनियम 1989 की धारा 151 के अंतर्गत रेल दुर्घटना के साजिश साबित होने पर आरोपित को अधिकतम 10 साल की सजा और जुर्माने के का प्रावधान है। अब सरकार इस अधिनियम में एक उपधारा जोड़कर इसे देशद्रोह की श्रेणी में लाने और इसके लिए मृत्युदंड देने की योजना बना रही है।