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मनी लॉन्ड्रिंग-टेरर फंडिंग से मोदी सरकार की लड़ाई का मुरीद हुआ FATF, कहा- ED-NIA के काम शानदार: बताया इस्लामी हो या वामपंथी आतंकवाद, सबसे भारत को खतरा

FATF की हालिया रिपोर्ट में भारत सरकार के आतंकवाद विरोधी प्रयासों की सराहना की गई है, खासकर एनआईए और एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ईडी) के कामों को शानदार बताया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत ने आतंकवादी वित्तपोषण को रोकने और जटिल वित्तीय जाँचों में महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। इस्लामिक आतंकवाद, जैसे कि ISIL और अल-कायदा, के साथ ही वामपंथी उग्रवाद को भी भारत के लिए गंभीर खतरा बताया गया है। FATF ने मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में तेजी लाने और गैर-लाभकारी संगठनों के दुरुपयोग को रोकने के लिए और कदम उठाने की जरूरत पर जोर दिया है।

इस्लामी आतंकवाद बड़ा खतरा

FATF (Financial Action Task Force) की हालिया रिपोर्ट में इस्लामी आतंकवाद को भारत के लिए एक गंभीर खतरे के रूप में चिन्हित किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत आतंकवाद और आतंकवादी वित्तपोषण से गंभीर रूप से प्रभावित है, खासकर जम्मू-कश्मीर और इसके आसपास सक्रिय ISIL (इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक और लेवांत) और अल-कायदा से जुड़े आतंकी संगठनों से। ये संगठन लगातार भारत की सुरक्षा को कमजोर करने की कोशिशों में लगे हुए हैं।

रिपोर्ट में भारत के आतंकवाद से निपटने के प्रयासों की प्रशंसा की गई है, खासकर आतंकवादी नेटवर्क को बाधित करने और रोकने के लिए। भारत ने जटिल वित्तीय जाँचों को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है, जिससे आतंकवादी गतिविधियों के वित्तपोषण पर रोक लगाने में मदद मिली है। हालाँकि, FATF ने यह भी सुझाव दिया है कि भारत को आतंकवादियों के वित्तीय मामलों की सुनवाई और अभियोजन में तेजी लानी चाहिए। आतंकवादी वित्तपोषण के मामलों में दोषसिद्धि और सख्त दंड सुनिश्चित करना भी आवश्यक है।

रिपोर्ट में गैर-लाभकारी संगठनों (NGOs) के दुरुपयोग को रोकने के लिए भी ध्यान आकर्षित किया गया है। इस्लामी आतंकवादी समूह अक्सर इन संगठनों के जरिए वित्तपोषण प्राप्त करते हैं। FATF ने सुझाव दिया है कि भारत को जोखिम-आधारित दृष्टिकोण अपनाकर इस सेक्टर में जागरूकता बढ़ानी चाहिए ताकि इनका दुरुपयोग रोका जा सके।

लेफ्ट विंग टेररिज्म: भारत की चुनौती

इस रिपोर्ट में FATF ने कहा है कि भारत के सामने उभरते हुए आतंकवाद के विभिन्न आयामों में से एक प्रमुख खतरा लेफ्ट विंग आतंकवाद (वामपंथी उग्रवाद) है, जो देश की आंतरिक सुरक्षा को कमजोर करने की दिशा में काम कर रहा है। रिपोर्ट में खासतौर पर लेफ्ट विंग समूहों का जिक्र किया गया है।

भारत के विभिन्न हिस्सों में फैले माओवादी या नक्सलवादी समूह, मुख्य रूप से झारखंड, छत्तीसगढ़, बिहार और ओडिशा जैसे राज्यों में सक्रिय हैं। इन समूहों का मुख्य उद्देश्य भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था को गिराकर एक वैकल्पिक कम्युनिस्ट सरकार की स्थापना करना है। लेफ्ट विंग आतंकवाद का सबसे प्रमुख और चिंताजनक पहलू यह है कि यह न केवल सुरक्षा बलों के लिए खतरा बन रहा है, बल्कि आम नागरिकों और विकासात्मक परियोजनाओं को भी निशाना बना रहा है। इन उग्रवादी समूहों का मुख्य वित्तपोषण अवैध गतिविधियों जैसे कि मनी लॉन्ड्रिंग, ड्रग्स, और हथियारों के अवैध व्यापार से होता है।

FATF (Financial Action Task Force) की हालिया रिपोर्ट में भी इस बात पर जोर दिया गया है कि लेफ्ट विंग समूह भारत सरकार के खिलाफ साजिश रच रहे हैं और उन्हें उखाड़ फेंकने की कोशिश कर रहे हैं। यह समूह न केवल हिंसा का सहारा ले रहे हैं, बल्कि आर्थिक रूप से भी मजबूत हो रहे हैं, जिसके चलते इनके खिलाफ लड़ाई और भी कठिन हो जाती है।

FATF की रिपोर्ट में लेफ्ट विंग समूहों का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है, जो भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा हैं। रिपोर्ट में यह बताया गया है कि माओवादी और नक्सलवादी समूह न केवल आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं, बल्कि वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी समर्थन प्राप्त कर रहे हैं। इन समूहों की मनी लॉन्ड्रिंग की गतिविधियों पर भी निगरानी की गई है और FATF ने इस पर चिंता जताई है कि ये समूह किस तरह से अपने वित्तपोषण को छिपाने के लिए जटिल मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क का इस्तेमाल कर रहे हैं।

भारत सरकार ने लेफ्ट विंग आतंकवाद से निपटने के लिए कई कदम उठाए हैं। सरकार ने ‘समाधान’ योजना शुरू की है, जिसका उद्देश्य नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास को बढ़ावा देना और उग्रवादियों का आत्मसमर्पण कराना है। इसके तहत प्रभावित राज्यों में सुरक्षा बलों की तैनाती भी बढ़ाई गई है और इंटेलिजेंस नेटवर्क को मजबूत किया गया है। इसके अलावा, केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया गया है ताकि माओवादी हिंसा से निपटा जा सके।

विशेष रूप से प्रभावित क्षेत्रों में सड़कों, स्कूलों और अस्पतालों का निर्माण करके वहाँ के नागरिकों को मुख्यधारा में लाने का प्रयास किया जा रहा है। सरकार ने न केवल सुरक्षा बलों की संख्या बढ़ाई है, बल्कि उन्हें आधुनिक हथियारों और तकनीकों से लैस किया है ताकि वे उग्रवादियों का सामना कर सकें। साथ ही, भारत ने अंतरराष्ट्रीय सहयोग भी बढ़ाया है ताकि आतंकवादी वित्तपोषण पर पूरी तरह से रोक लगाई जा सके।

लेफ्ट विंग आतंकवाद भारत के सामने एक गंभीर समस्या है, जो देश की आंतरिक सुरक्षा और विकास दोनों को बाधित कर रहा है। FATF की रिपोर्ट में इस खतरे को स्पष्ट रूप से रेखांकित किया गया है, जिसमें माओवादी और नक्सलवादी समूहों की गतिविधियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी खतरनाक बताया गया है। भारत सरकार ने लेफ्ट विंग आतंकवाद से निपटने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं, लेकिन यह लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद के वित्तपोषण पर कड़ी निगरानी रखना और न्यायिक प्रक्रिया को तेज करना अत्यंत महत्वपूर्ण है।

FATF की सिफारिशों का पालन करते हुए भारत को यह सुनिश्चित करना होगा कि आतंकवादी संगठनों को मिलने वाला वित्तपोषण पूरी तरह से बंद हो सके। साथ ही, नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्यों को तेज करना भी जरूरी है, ताकि वहां के लोग उग्रवाद का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा से जुड़ सकें। भारत के लिए लेफ्ट विंग टेररिज्म को खत्म करना न केवल आंतरिक सुरक्षा का सवाल है, बल्कि यह देश के विकास और समृद्धि के लिए भी जरूरी है।

FATF क्या है?

FATF (Financial Action Task Force) एक अंतरराष्ट्रीय संगठन है, जिसकी स्थापना 1989 में की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद के वित्तपोषण को रोकने के लिए प्रभावी नीतियों का निर्माण करना है। FATF की रिपोर्टें और सिफारिशें दुनियाभर के देशों को इस दिशा में कदम उठाने के लिए प्रेरित करती हैं। FATF की रिपोर्टें समय-समय पर जारी की जाती हैं, जिनमें विभिन्न देशों द्वारा आतंकवाद के खिलाफ उठाए गए कदमों का मूल्यांकन किया जाता है। यह संगठन विशेष रूप से यह देखता है कि कौन-कौन से देश मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद के वित्तपोषण को रोकने में सक्षम हैं और किस हद तक वे इन गतिविधियों को काबू करने में सफल हुए हैं।

FATF की हालिया रिपोर्ट में भारत के आतंकवाद विरोधी कदमों की तारीफ की गई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत ने आतंकवाद के खिलाफ मजबूत कानून बनाए हैं और इसके खिलाफ सख्त कार्रवाई भी की है। विशेष रूप से मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद के वित्तपोषण को रोकने के लिए भारत ने विभिन्न योजनाएँ शुरू की हैं। भारत के एनआईए (National Investigation Agency) और ईडी (Enforcement Directorate) जैसे एजेंसियों ने आतंकवादी गतिविधियों के वित्तपोषण पर कड़ी निगरानी रखी है। लेकिन रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत में मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामलों की सुनवाई और फैसलों में देरी हो रही है। FATF ने भारत से इस प्रक्रिया को तेज करने का आग्रह किया है ताकि आतंकवादी संगठनों के वित्तपोषण को पूरी तरह से बंद किया जा सके।

‘100 करोड़ लोगों ने खाया बीफ वाला लड्डू, मजा आ गया’: तिरुपति के प्रसाद पर कॉन्ग्रेस समर्थक ने हिंदुओं का उड़ाया मजाक, कहा- अब दूसरे की प्लेट में मत झाँकना

तिरुपति मंदिर के पवित्र प्रसाद लड्डू में जानवरों की चर्बी मिली होने की बात सामने आने के बाद कथिततौर पर कॉन्ग्रेस समर्थक व सोशल मीडिया के पोस्टों से जाहिर होते हिंदू विरोधी, पीयूष मानुष ने हिंदुओं का मजाक उड़ाया है। पीयूष ने अपनी वीडियो में कहा कि 100 करोड़ लोग तिरुपति गए होंगे, क्या उन्हें बीफ पसंद आया।

पीयूष ने अपने एक्स हैंडल पर वीडियो शेयर करते हुए हिंदुओं का मजाक उड़ाया। उन्होंने कहा, “क्या तुमको अच्छे लड्डू मिले?… इतने दिनों तक तुम दूसरों की प्लेट देखते रहे कि कहीं वो बीफ तो नहीं खा रहे, तुमने उनके टिफिन चेक किए, उनके रेफ्रिजरेटर भी चेक किए, उन्हें मार भी डाला। अब कम से कम 100 करोड़ लोग तिरुपति गए होंगे। उन्हें लड्डू मिले होंगे। क्या हुआ? अब तुमको बीफ अच्छा लगा? मजा आया? तुम्हारा काम हो गया। कम से कम अब दूसरे की प्लेट तो मत देखिए। जाओ अपना काम करो। पेरुमल ने खुद आपको अच्छे लड्डू दिए हैं।”

पीयूष की ये वीडियो ऐसे समय में सामने आई है जब हाल में प्रदेश सीएम चंद्रबाबू नायडू ने तिरुपति के लड्डू में इस्तेमाल होने वाले घी की गुणवत्ता को लेकर खुलासा किया और जाँच रिपोर्ट से पता चला कि उसमें मछली का तेल, सूअर की चर्बी और बीफ आदि है। इस जानकारी के सामने आते ही बवाल शुरू हो गया।

हिंदुओं ने सोशल मीडिया पर विरोध करते हुए कहना शुरू किया कि जो कोई भी इस घृणित पाप का भागीदार था उन्हें भगवान वेंकटेश्वर कभी माफ नहीं करेंगे। सरकार से अपराधियों के विरुद्ध कार्रवाई की माँग की गई। कहा गया कि ये मामला साफ तौर पर हिंदू घृणा से जुड़ा है। हिंदुओं की आस्था को जानबूझकर ठेस पहुँचाया गया है।

केंद्रीय मंत्री और भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव बंदी संजय ने कहा, “तिरुमाला के लड्डू को बहुत ही ‘पवित्र प्रसाद’ माना जाता है, इसे दूषित करना अक्षम्य पाप है… पिछली सरकार के कार्यकाल में, अन्य धर्मों के कुछ लोगों को टीटीडी (तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम) बोर्ड में शामिल किया गया था… इसलिए ऐसी घटना हुई। मैं आंध्र प्रदेश सरकार से तुरंत जाँच करने और सख्त कार्रवाई करने का अनुरोध करता हूँ।”

गौरतलब है कि गुजरात स्थित राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड की “पशुधन एवं खाद्य विश्लेषण एवं अध्ययन केंद्र” (सीएएलएफ) प्रयोगशाला की रिपोर्ट के अनुसार, प्रसाद तैयार करने के लिए इस्तेमाल होने वाले घी में जानवर की चर्बी थी। रिपोर्ट में लिखा था- घी में सोयाबीन, सूरजमुखी, जैतून, रेपसीड, अलसी, गेहू के बीज, मक्का के बीज, कपास के बीज, नारियल, पाम कर्नेल फैट और पाम ऑयल के अलावा बीफ टैलो, लार्ड और मछली का तेल आदि है।

पोर्न दिखाकर बच्चियों का यौन शोषण करता था मौलवी शब्बीर, शिकायत वापस लेने के लिए उसके समर्थकों ने किया हमला: रुद्रपुर की अवैध मस्जिद में नाबालिग से रेप के बाद हुआ था गिरफ्तार

उत्तराखंड के उधम सिंह नगर में पिछले माह मौलवी से जुड़ा घिनौना मामला सामने आया था, जिसमें रुद्रपुर कोतवाली के मलसी गाँव में मौलवी शब्बीर रजा हुसैन छोटी-छोटी बच्चियों को पॉर्न दिखाता था और उनका यौन शोषण करता था। करीब आधा दर्जन बच्चियों के साथ वो ऐसी हरकतें करता था, जिसकी शिकायत के बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया था। मौलवी शब्बीर रजा हुसैन यूपी के पीलीभीत का रहने वाला है। अब पता चला रहा है कि मलसी गाँव में मौलवी की शिकायत करने वालों के खिलाफ मौलवी के समर्थकों ने हमला बोल दिया। दोनों पक्षों में जमकर मारपीट हुई है, जिसमें आधा दर्जन से अधिक लोग घायल हो गए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रुद्रपुर कोतवाली के मलसी गाँव की मस्जिद में अवैध रूप से मदरसा चलाने वाले मौलवी शब्बीर रजा हुसैन की शिकायत करने वाले नबी हसन व अन्य लोग थे। मौलवी शब्बीर रजा हुसैन पर 6 बच्चियों के साथ यौन उत्पीड़न की पुष्टि हो चुकी है, जिसके बाद से वो जेल में है।

एबीपी न्यूज के मुताबिक, मंगलवार (17 सितंबर 2024) की रात मौलवी के समर्थन में मोहम्मद खुर्शीद और अन्य लोगों ने काफी विवाद किया और मौलवी की शिकायत करने वालों पर हमला कर दिया। इस मामले में देर रात तक दोनों पक्षों में जमकर मारपीट हुई, जिसमें 7 लोग घायल हो गए। घायलों में मोहम्मद यूनुस, शाहिद अहमद और कबीर अहमद का नाम है, जिन्हें रुद्रपुर के अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।

मोहम्मद खुर्शीद और उसके साथी चाहते थे कि मौलवी शब्बीर रजा हुसैन के खिलाफ की गई पुलिस शिकायत वापस ली जाए, लेकिन पीड़ित परिवारों ने ऐसा करने से इनकार कर दिया, जिसके बाद खुर्शीद और उसके साथियों ने हमला कर दिया। इस दौरान 4-5 राउंड फायरिंग की भी बात सामने आई है।

एसपी सिटी मनोज कत्याल, सीओ निहारिका तोमर समेत पुलिस के कई अधिकारियों ने अस्पताल पहुँचकर घायलों से मुलाकात कर घटना की जानकारी ली और गाँव में पुलिस और पीएसी की टीम को तैनात कर दिया। पुलिस ने ही घायलों को रुद्रपुर जिला अस्पताल में भर्ती कराया। बताया जा रहा है कि इस घटना में खुर्शीद पक्ष के लोग भी घायल हुए, लेकिन वो ईलाज के लिए अस्पताल नहीं पहुँचे।

एसपी सिटी मनोज कत्याल ने बताया कि रुद्रपुर कोतवाली क्षेत्र के ग्राम मलसी में विवाद हुआ था। इस दौरान फायरिंग भी हुई है, घटना में दोनों ही पक्ष के सात लोग घायल हुए हैं। दावा ये भी किया जा रहा है कि हमले की तैयारी पहले से थी, इसलिए खुर्शीद की तरफ से बाहर से भी लोग आए थे, जो हमले में शामिल हुए थे।

गौरतलब है कि 16 अगस्त 2024 को रुद्रपुर में हड़कंप मच गया था, जब मौलवी की करतूतें सामने आई थी। शुरुआत में पता चला था कि मौलवी शब्बीर रजा हुसैन ने 8 साल की बच्ची को पॉर्न दिखाकर गलत हरकत की है, लेकिन जाँच में पता चला कि उसने आधा दर्जन बच्चियों को अल्लाह का डर दिखाकर ऐसा काम किया था। मौलवी को पुलिस गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है, लेकिन उसके समर्थक चाहते हैं कि उसके खिलाफ की गई शिकायतें वापस ली जाए, इसीलिए घटना के एक माह बाद मौलवी के समर्थकों ने पीड़ितों पर हमला कर दिया।

बदला लेने की धमकी दे रहा था हिजबुल्लाह, इजरायल ने लेबनान के आसमान से बरसा दी आफत: 1000 रॉकेट लॉन्चर किए नष्ट, पेजर- वाकी टॉकी ब्लास्ट के बाद नई तबाही

इजरायल ने लेबनान के भीतर हिजबुल्लाह से जुड़े आतंकियों के पेजर और बाकी डिवाइस उड़ाने के बाद अब सीधा हमला बोला है। इजरायल ने लेबनान के भीतर हवाई हमले किए हैं और हिजबुल्लाह के हजारों रॉकेट तबाह कर दिए हैं। तिलमिलाए हिजबुल्लाह ने बदला लेने की बात कही है।

इजरायल ने गुरुवार (19 सितम्बर, 2024) को दक्षिणी लेबनान में यह हमले किए। इजरायल ने इस इलाके में हमले के लिए तैयार रखे गए हिजबुल्लाह के रॉकेट लॉन्चर को निशाना बनाया। इजरायल के इस हमले में हिजबुल्लाह के कम से कम 1000 रॉकेट तबाह हो गए।

हिजबुल्लाह पर हुए इस हमले ने उसकी इजरायल को निशाना बनाने की ताकत पर काफी असर डाला है। इजरायल ने जिन रॉकेट को निशाना बनाया है, उनको हिजबुल्लाह ने इजरायल पर हमले के लिए एकदम तैयार रखा था। हिजबुल्लाह किसी भी समय उनको इजरायल के भीतर लॉन्च करने वाला था।

इजरायल ने यह कारनामा मात्र 20 मिनट में कर दिया। स्थानीय मीडिया ने बताया है कि 7 अक्टूबर, 2023 को हमास और इजरायल के बीच चालू हुए युद्ध के बाद यह हिजबुल्लाह पर सबसे बड़ा हमला है। हिजबुल्लाह, हमास के समर्थन में लेबनान की तरफ से इजरायल पर रॉकेट छोड़ता रहा है।

हिजबुल्लाह पर हमले के बारे में इजरायली सेना ने बताया, “IDF वर्तमान में लेबनान में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर हमला कर रही है ताकि उसकि आतंकी क्षमताओं और इन्फ्रास्ट्रक्चर को कम किया जा सके। दशकों से, हिज़्बुल्लाह ने घरों में हथियार छुपाए हैं, उनके नीचे सुरंगें खोदी हैं और आम जनता को ढाल के रूप में इस्तेमाल किया है, इससे दक्षिणी लेबनान युद्ध के मैदान में बदल गया है। IDF इजरायल में सुरक्षा लाने के लिए काम कर रही है ताकि लोगों को उनके घरों में वापस लौटने में सक्षम बनाया जा सके।”

इजरायली सेना ने हिजबुल्लाह के रॉकेट तबाह करने के अलावा कई इमारतों पर भी हमला कर उन्हें तबाह कर दिया। यह हिजबुल्लाह के ठिकाने थे। हिजबुल्लाह को इससे बड़ा नुकसान पहुँचा है। इजरायल के यह हमले ऐसे समय में सामने आए हैं लेबनान के भीतर जगह-जगह हजारों धमाके हो रहे हैं।

बपतिस्मा करा चुकी हैं गोविंदा की पत्नी, कहा- वाइन पीने के लिए मैं बनी ईसाई: माना उनके पति का करियर उनकी माँ के पूजा-पाठ का पुण्य

बॉलीवुड स्टार गोविंदा की पत्नी सुनीता आहूजा हाल में एक पॉडकॉस्ट में नजर आईं। इस पॉडकॉस्ट में उन्होंने जीवन से जुड़े कई पहलुओं पर बात की। इस दौरान उन्होंने यहाँ तक बताया कि वो पंजाबी परिवार से आती हैं, ससुराल में उनके बहुत पूजा पाठ होती थी लेकिन उन्होंने बचपन में वाइन पीने की लालच में ईसाई धर्म अपना लिया था और इस बारे में किसी को जानकारी भी नहीं होने दी थी।

‘टाइम आउट विद अंकित’ शो में सुनीता आहूजा बताती दिखीं कि उन्होंने अपनी पढ़ाई एक ईसाई स्कूल में की थी, उनके ईसाई दोस्त थे, उन्हें पता था कि जीसस का ब्लड जिसे कहा जाता है वो और कुछ नहीं बल्कि वाइन है। इसी लालच में उन्होंने एक दिन अपने माता-पिता को बताए बिना चुपके से ईसाई धर्म अपना लिया।

सुनीता आहूजा ने पॉडकॉस्ट में 4 बजकर 23 मिनट के बाद बताया, “मेरा जन्म बांद्रा में हुआ था। मेरा बपतिस्मा हो चुका है। मैं एक ईसाई स्कूल में थी और मेरे सभी दोस्त ईसाई थे। एक बच्चे के तौर पर, मैंने सुना था कि यीशु के खून में वाइन है। और मैंने मन में सोचा, ‘वाइन का मतलब है शराब’। मैं हमेशा बहुत चालाक थी। शराब पीने में कोई बुराई नहीं है, बस थोड़ी सी शराब पीने के लिए मैंने खुद को ईसाई बना दिया।”

उन्होने बताया कि वो आजतक ईसाई धर्म का पालन करती हैं। शनिवार को चर्चों में जाती हैं। इसके अलावा उन्होंने दरगाह, गुरुद्वारे और मंदिर जाने की बात भी बताई। आगे सुनीता से जब पूछा गया कि क्या वो अपने पति के लिए लेडी लक थीं तो इसपर सुनीता ने जवाब दिया कि गोविंदा जो हीरो बने वो अपने माँ की पूजा-पाठ से बने हैं। माँ इतना गायत्री मंत्र का जाप करती थीं। गोविंदा घर के छोटे थे और उनकी माँ उनके लिए बहुत कुछ करती थीं।

(मालूम हो कि गोविंदा की माँ निर्मला देवी, गोविंदा के जन्म के बाद साध्वी बन गई थीं। उन्होंने अपना जीवन यापन साध्वी की तरह जिया। )

आगे सुनीता आहूजा ने इस शो में ये भी बताया कि उन्हें दारू पीने का शौक है। वो कहती हैं कि गोविंदा इतना शौकीन नहीं है, लेकिन उन्हें बहुत है। जब तक गोविंदा एक बीयर पीते हैं तब तक वो 4 पी जाती हैं। उन्होंने कहा कि वो और उनका बेटा पार्टी करने के लिए घर पर शराब पी लेते हैं।

उनका कहना है कि वो लोग शराब पीने बाहर इसलिए भी नहीं जाते क्योंकि आजकल लोग हर मूमेंट रिकॉर्ड करने लगते हैं। फिर तरह-तरह की बातें होती हैं। इससे बढ़िया तो यही है कि घर में बैठकर दारू पियो। घर में एक दूसरे को गाली दे दो। बाहर बवाल ही न हो।

बता दें कि सुनीता और गोविंदा की शादी 1987 में हुई थी। 1 साल से ज्यादा टाइम तक दोनों ने अपने रिश्ते को छिपाए रखा। हालाँकि बाद में बेटी टीना के होने के बाद रिश्ता खुल गया। गोविंदा को जहाँ इंडस्ट्री में शर्मीला स्वभाव का जाना जाता है वहीं उनकी पत्नी सुनीता आहूजा अक्सर मुखर होकर बात करते दिखती हैं। इस पॉडकॉस्ट में भी उन्होंने इसी तरह बात की है। चाहे फिर वो अपनी शादी को लेकर हो या फिर गोविंदा की फैन फॉलोइंग से उनपर क्या असर पड़ता था उसपर।

जिस घी से बनता था तिरुपति का मशहूर लड्डू, उसमें मिला था बीफ-सूअर की चर्बी और मछली का तेल: लैब रिपोर्ट ने किया कन्फर्म, बोले हिंदू- इस पाप का प्रायश्चित नहीं

तिरुपति के लड्डू में इस्तेमाल होने वाले घी की गुणवत्ता पर उठाए गए सवाल सच थे। जाँच नतीजों में पता चला है कि जगन सरकार ने तिरुपति मंदिर में जिस घी से लड्डू बनाने की अनमुति दी थी उसमें हकीकत में जानवरों की चर्बी थी। उसमें बीफ फैट, मछली का तेल और लार्ड (सूअर की चर्बी), ताड़ का तेल और अन्य चीजें शामिल थीं।

गुजरात स्थित राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड की “पशुधन एवं खाद्य विश्लेषण एवं अध्ययन केंद्र” (सीएएलएफ) प्रयोगशाला की रिपोर्ट के अनुसार, प्रसाद तैयार करने के लिए इस्तेमाल होने वाले घी में जानवर की चर्बी थी। रिपोर्ट में देख सकते हैं साफ-साफ इन सारी चीजों का जिक्र है। रिपोर्ट में लिखा है- घी में सोयाबीन, सूरजमुखी, जैतून, रेपसीड, अलसी, गेहूं के बीज, मक्का के बीज, कपास के बीज, नारियल, पाम कर्नेल फैट और पाम ऑयल के अलावा बीफ टैलो, लार्ड और मछली का तेल आदि है। इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद इस हरकत से हिंदू आहत हैं।

इस मामले को जहाँ स्वयं प्रदेश मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू द्वारा उठाया गया तो वहीं केंद्रीय मंत्री और भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव बंदी संजय ने कहा, “तिरुमाला के लड्डू को बहुत ही ‘पवित्र प्रसाद’ माना जाता है, इसे दूषित करना अक्षम्य पाप है… पिछली सरकार के कार्यकाल में, अन्य धर्मों के कुछ लोगों को टीटीडी (तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम) बोर्ड में शामिल किया गया था… इसलिए ऐसी घटना हुई। मैं आंध्र प्रदेश सरकार से तुरंत जाँच करने और सख्त कार्रवाई करने का अनुरोध करता हूँ।”

तिरुपति मंदिर और लड्डू का महत्व

गौरतलब है कि आंध्र प्रदेश के तिरुमाला में स्थित तिरुमाला वेंकटेश्वर मंदिर दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित हिंदू मंदिरों में से एक है। यह मंदिर तिरुमाला पहाड़ियों के ऊपर स्थित है। दुनिया भर से भक्त प्रार्थना करने और आशीर्वाद लेने के लिए मंदिर आते हैं, जिससे यह भारत के सबसे समृद्ध और व्यस्ततम तीर्थ स्थलों में से एक बन गया है। इस मंदिर को तिरुमला तिरुपति देवस्थानम(एक स्वतंत्र ट्रस्ट) द्वारा मैनेज किया जाता है। मंदिर जितना अपनी रीतियों के लिए प्रसिद्ध है उतना ही लड्डू के लिए है। यहाँ रोजाना 3.5 लाख लड्डू बनते हैं जिनके लिए 400-500 किलो घी लगता है, 750 किलो काजू, 500 किलो किशमिश और 200 किलो इलायची लगती है।

हालिया विवाद के बाद टीटीडी ने एक कमेटी बनाई है जो लड्डुओं के लिए गुणवत्तापूर्ण घी खरीदने के लिए नियम व शर्तों पर सलाह देगी। वहीं आम हिंदू इस खबर को सुन हैरान हैं। उनका कहना है कि भगवान और भगवान के भक्तों के साथ किया गया ये ऐसा पाप है जिसकी कोई क्षमा नहीं है। भगवान इसका फल YSRCP को जरूर देंगे।

खालिस्तानी आतंकी पन्नू की फरियाद पर अमेरिकी अदालत ने NSA अजीत डोभाल-पूर्व रॉ चीफ को भेज दिया समन, कहा- 21 दिन में जवाब दो: भारत ने बताया अनुचित

अमेरिका की कोर्ट ने भारत सरकार को समन जारी किया है। समन में भारत सरकार से 21 दिनों के भीतर जवाब माँगा गया है। वांछित खालिस्तानी अलगाववादी गुरपतवंत सिंह पन्नू ने अमेरिका के न्यूयॉर्क स्थित दक्षिणी जिला न्यायालय में एक दीवानी मुकदमा दायर किया था। इसमें पन्नू ने भारत सरकार पर अपनी हत्या की साजिश रचने का आरोप लगाया गया था। इसे भारत ने ‘अनुचित और निराधार आरोप’ बताया है।

मुकदमे में भारत सरकार के अलावा भारत सरकार के कई महत्वपूर्ण अधिकारियों एवं लोगों के नाम भी शामिल हैं। इनमें राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल, रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (R&AW) के पूर्व प्रमुख सामंत गोयल, R&AW एजेंट विक्रम यादव और भारतीय व्यवसायी निखिल गुप्ता का नाम शामिल है।

विदेश मंत्रालय ने गुरुवार (19 सितंबर 2024) को खालिस्तान समर्थक आतंकवादी गुरपतवंत सिंह पन्नू द्वारा भारत सरकार के खिलाफ ‘हत्या’ के प्रयास को लेकर दायर मुकदमे को ‘अनुचित और निराधार आरोप’ बताते हुए खारिज कर दिया। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा कि अब जबकि मामला दर्ज हो चुका है, ऐसी स्थिति में भी भारत के विचार नहीं बदलेंगे।

विदेश सचिव ने पीएम नरेंद्र मोदी की अमेरिका यात्रा से पहले गुरुवार (19 सितंबर 2024) को कहा, “जैसा कि हमने पहले कहा है, ये पूरी तरह से अनुचित और निराधार आरोप हैं। अब चूँकि यह विशेष मामला दर्ज हो गया है, इससे अंतर्निहित स्थिति के बारे में हमारे विचार नहीं बदलेंगे। मैं केवल आपका ध्यान इस विशेष मामले के पीछे के व्यक्ति की ओर आकर्षित करना चाहूँगा, जिसका इतिहास सर्वविदित है।”

उन्होंने आगे कहा, “मैं इस तथ्य को भी रेखांकित करना चाहूँगा कि वह (पन्नू) जिस संगठन का प्रतिनिधित्व करता है, वह एक गैरकानूनी संगठन है, जिसे 1967 के गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत ऐसा घोषित किया गया है। ऐसा भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को बाधित करने के उद्देश्य से राष्ट्र-विरोधी और विध्वंसक गतिविधियों में शामिल होने के कारण किया गया है।”

बता दें कि गुरपतवंत सिंह पन्नू ‘सिख फॉर जस्टिस’ नाम का एक अलगाववादी संगठन चलाता है, जो हमेशा भारत के खिलाफ प्रोपगेंडा फैलाता है। पन्नू भारत द्वारा घोषित एक आतंकवादी भी है। उसके पास अमेरिका और कनाडा की नागरिकता है। उस पर भारत और उसके हितों के खिलाफ साजिश रचने के कई आरोप पर हैं।

इससे पहले नवंबर में अमेरिकी न्याय विभाग ने पन्नू की हत्या की साजिश में कथित संलिप्तता के लिए एक भारतीय नागरिक के खिलाफ अभियोग पत्र जारी किया था। न्याय विभाग ने दावा किया था कि मैनहट्टन में संघीय अदालत में दायर अभियोग पत्र में बिना पहचान वाले एक भारतीय सरकारी कर्मचारी ने हत्या के लिए एक हत्यारे को नियुक्त करने के लिए निखिल गुप्ता नामक एक भारतीय नागरिक की भर्ती की थी।

न्याय विभाग ने कहा कि अभियोग में शामिल आरोप केवल आरोप हैं और जब तक दोषी साबित नहीं हो जाता, तब तक प्रतिवादी को निर्दोष माना जाता है। इस पर भारत ने अमेरिकी सरकार की सुरक्षा चिंताओं को दूर करने के लिए एक उच्चस्तरीय जाँच समिति का गठन किया था। विदेश मंत्रालय ने कहा था कि भारत ऐसे इनपुट को गंभीरता से लेता है, क्योंकि ये राष्ट्रीय सुरक्षा हितों पर भी असर डालते हैं।

शिमला के एक बाजार में 88 कारोबारी, इनमें से 42 मुस्लिम कारोबारी 1 जनवरी को ही हुए पैदा: व्यापार मंडल ने पुलिस से की शिकायत, अवैध मस्जिद के बाद सामने आया नया झोल

हिमाचल प्रदेश में अवैध मस्जिदों के निर्माण के बाद अब बाहर से आने वाले व्यापारियों के पास फर्जी कागज होने का मामला सामने आया है। शिमला के एक व्यस्त बाजार में कारोबार करने वाले बाहरी 46 व्यापारियों के पास से एक ही जन्मतिथि के आधार कार्ड मिले हैं। लगभग यह सभी व्यापारी मुस्लिम हैं। इसको लेकर स्थानीय व्यापारियों ने शिकायत दर्ज की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, शिमला के गुम्मा बाजार इलाके में ऐसे व्यापारियों के होने की जानकारी मिली है। यहाँ के व्यापार मंडल ने एक शिकायत पुलिस को दी है। व्यापार मंडल ने कहा है कि बाहर से आकर उनके बाजार के भीतर 86 लोग व्यापार कर रहे हैं। इनमें से 46 के आधार कार्ड पर एक ही तारीख की जन्मतिथि लिखी हुई है।

बाहर से आने वाले 46 व्यापरियों के आधार कार्ड पर 1 जनवरी की ही जन्मतिथि लिखी हुई है, इनमें बस साल अलग-अलग है। जिन 46 व्यापारियों की जन्मतिथि समान पाई गई है, उनमें से 42 मुस्लिम हैं और देश के अलग-अलग हिस्सों से हिमाचल में व्यापार करने पहुँचे हैं। इनमें से अधिकांश व्यापारी पश्चिमी उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखते हैं।

इनके आधार कार्ड पर 1 जनवरी की तारीख जन्मतिथि के रूप में पड़ी हुई है। गौरतलब है कि देश में कई मामलों में जन्म की तारिख याद ना रहने पर 1 जनवरी डाल दी जाती है। लेकिन हिमाचल प्रदेश का मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि यहाँ 15-23 साल के युवाओं के भी आधार कार्ड में यही समस्या पाई गई है।

शिमला व्यापार मंडल ने कहा है कि बड़ी उम्र के लोगों को भले ही अपनी सही जन्मतिथि ना याद हो लेकिन छोटी उम्र के युवा और किशोरों में भी यह तारीख नदारद है तो फिर समस्या वाली बात है। उन्होंने इस संबंध पुलिस से कार्रवाई की माँग की है। पुलिस ने कहा है कि वह अभी इन आधार कार्ड का सत्यापन कर रहे हैं।

वर्तमान में हिमाचल प्रदेश में अवैध मस्जिदों के निर्माण और बाहर से आने वाले लोगों की अवैध घुसपैठ को लेकर माहौल गरमाया हुआ है। स्थानीय निवासियों ने शिमला के संजौली और मंडी की जेल रोड पर बनाई मस्जिद मामले में विरोध प्रदर्शन किया है। जहाँ संजौली की मस्जिद गिराने का प्रस्ताव खुद मुस्लिमों ने दिया है तो वहीं मंडी की मस्जिद तोड़ने का आदेश भी हो गया है।

मंडी की मस्जिद का बड़ा हिस्सा अवैध पाया गया है। मंडी के अलवा शिमला के कसुम्पटी और बिलासपुर समेत अलग-अलग इलाकों में भी अवैध निर्माण की शिकायत की गई है। हिन्दू संगठन लगातार इस बात की माँग भी कर रहे हैं कि बाहर से आकर हिमाचल प्रदेश में रहने वाले लोग का पंजीयन हो।

भले फाइनल हार गई टीम इंडिया, पर भारत की अर्थव्यवस्था में ₹11637 करोड़ जोड़ गया क्रिकेट वर्ल्ड कप: 48 हजार नई नौकरियाँ भी पैदा की

19 नवम्बर, 2023, भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच विश्व कप 2023 का आखिरी मुकाबला। इस दिन तय होना था कि भारत की 13 वर्षों की ट्रॉफी की प्रतीक्षा खत्म होगी या फिर एक बार अंतिम मौके पर भारत चूकेगा। अंत जिसका डर था, वही हुआ। भारत यह मैच हार गया। लगातार 10 मैच में जीत दर्ज करने वाली रोहित एंड कम्पनी की पारी यहाँ खत्म हुई। लेकिन भले ही नीली जर्सी पहनने वाले खिलाड़ियों को यह हार झेलनी पड़ी हो, भारत की अर्थव्यवस्था के लिए यह विश्व कप एक वरदान बन गया।

लगभग 45 दिन चलने वाले 2023 विश्व कप को लेकर हाल ही में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट काउंसिल (ICC) ने एक रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट में बताया गया है कि किस तरह इस विश्व कप के आयोजन से भारती अर्थव्यवस्था को फायदा हुआ है। रिपोर्ट बताती है कि भारत में आयोजित किए गए विश्व कप के कारण होटल, पर्यटन, खेल और यातायात क्षेत्र को हजारों करोड़ का फायदा हुआ। इससे ना केवल भारतीय अर्थव्यवस्था को बल मिला बल्कि नई नौकरियाँ भी पैदा हुईं।

ICC द्वारा जारी की रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 45 दिन चले इस विश्व कप के कारण भारत की अर्थव्यवस्था को ₹11,637 करोड़ का फायदा मिला है। यह अब तक का सबसे महँगा और सबसे बड़ा विश्व कप था, ऐसा ICC ने बताया है। ICC ने बताया है कि विश्व कप के कारण वह शहर सबसे अधिक फायदे में रहे जहाँ इसके क्रिकेट मैच आयोजित किए गए। इन शहरों में बने स्टेडियमों की क्षमता बढ़ाने और उनके नवीनीकरण के कारण कई क्षेत्रों को फायदा हुआ।

विश्व कप से सबसे अधिक लाभ लेने वाला क्षेत्र होटल, यातायात और खाने-पीने का रहा। इस क्षेत्र ने विश्व कप के दौरान ₹4000 करोड़ से अधिक का कारोबार किया, जो पूरे विश्व के अप के कारण पैदा हुए फायदे का लगभग 37% है। विश्व कप में बाहर के देशों से भारत आए दर्शकों के कारण लगभग ₹2000 करोड़ का फायदा हुआ। विश्व कप में भारत आने वाले पर्यटकों ने भारत के अन्य पर्यटन स्थल भी घूमे, उनमें से बड़ी संख्या ने कहा है कि भारत को पर्यटन के लिए एक अच्छा विकल्प मानते हैं।

भारत आने वाले आधे से अधिक विदेशी पर्यटकों ने दोबारा भारत आने की बात भी कही है। रिपोर्ट में बताया गया है कि विश्व कप आयोजन के कारण भारत में लगभग 48,000 नई नौकरियाँ पैदा हुई हैं। इसके अलावा मीडिया क्षेत्र को बड़ा फायदा हुआ है। इस विश्व कप को देखने वालों की संख्या भी काफी बड़ी रही है। इस विश्व कप को 12,50,000 लोगों ने देखा जो अपने आप में रिकॉर्ड है। इससे पहले इतनी बड़ी संख्या में दर्शक विश्व कप में कभी नहीं पहुँचे।

इस मामले पर ICC के CEO जियोफ अलार्दिस ने कहा, “ICC क्रिकेट विश्व कप 2023 ने क्रिकेट की महत्वपूर्ण आर्थिक शक्ति को प्रदर्शित किया है, इससे भारत को 1.39 बिलियन डॉलर का लाभ हुआ है। इस आयोजन ने हजारों नौकरियाँ पैदा कीं और भारत को एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में प्रदर्शित किया। इससे यह साबित हुआ कि ICC के आयोजन ना केवल प्रशंसकों को जुनूनी रूप से आपस जोड़ते हैं बल्कि हमारे मेजबान देशों की अर्थव्यवस्थाओं में भी महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।”

गौरतलब है कि रोहित शर्मा की कप्तानी वाली भारतीय टीम ने इस विश्व कप में शानदार प्रदर्शन दिखाते हुए बिना एक मैच हारे फाइनल में जगह बनाई थी। फाइनल मुकाबले में भारत का मुकाबला ऑस्ट्रेलिया से था। इस मैच में बड़ा स्कोर ना खड़ा कर पाने के कारण भारतीय टीम को हार सहनी पड़ी थी। हालाँकि, हार के इस जख्म को रोहित एंड कम्पनी ने कुछ ही महीनों के भीतर टी20 विश्व कप जीत कर भर दिया है। इस प्रकार भारत विश्व कप ना जीत कर भी फायदे में ही रहा है।

बरेली में राज और राहुल बनकर हिंदू लड़कियों को झाँसा दे रहे थे मुस्लिम युवक, लोगों ने पहले पीटा फिर पुलिस को सौंपा: मोबाइल में मिले कई लड़कियों से चैट-अश्लील फोटो

उत्तर प्रदेश के बरेली में नाम बदल कर दो हिंदू युवतियों को फाँसने की कोशिश कर रहे दो मुस्लिम युवकों और दो उनके साथियों को पकड़ा गया है। हिंदू संगठन से जुड़े लोगों ने उन युवकों से उनके नाम पूछे तो उन्होंने अपना हिंदू नाम बताया। इसके बाद उनके मोबाइल की जाँच की गई तो वे दूसरे समुदाय के निकले। दोनों की पिटाई करने के बाद उन्हें पुलिस के हवाले कर दिया गया है।

यह मामला बरेली के इज्जतनगर क्षेत्र की है। यहाँ के कर्मचारी नगर में बुधवार (18 सितंबर 2024) की शाम की दो युवतियाँ दो युवकों को बातें कर रही थीं। इसी दौरान वहाँ से हिंदू संगठन के जुड़े विशाल श्रीवास्तव समेत अन्य लोगों गुजर रहे थे। इन दोनों युवकों के हाव-भाव देखकर इन्हें शक हुआ। इसके बाद वे दोनों युवकों के पास गए और उनसे उनका नाम पूछा।

इस पर दोनों ने अपना वास्तविक नाम छुपा लिया और हिंदू नाम बताया। हालाँकि, हिंदू संगठन के लोगों को इस विश्वास नहीं हुआ और वे दोनों का पहचान पत्र दिखाने को कहने लगे। हालाँकि, इसमें वो आनाकानी करने लगे और लोगों के साथ विवाद करने लगे। इससे लोगों का शक और गहरा गया।

हिंदू संगठन से जुड़े लोगों ने उनके मोबाइल को लेकर उसकी जाँच की तो उनकी असली पहचान सामने आई। वे दोनों मुस्लिम समुदाय के थे। उनके मोबाइल और इंस्टाग्राम आईडी की जाँच करने पर पता चला कि वे कई लड़कियों से जुड़े थे। कहा जा रहा है कि उनके मोबाइल में कई लड़कियों से चैट के अलावा कई अश्लील तस्वीरें भी थीं।

इसको देखकर हिंदू संगठन और आसपास के जुटे लोग भड़क गए और दोनों की पिटाई कर दी। इसके बाद लोगों ने इसकी जानकारी पुलिस को दे दी। पुलिस ने मौैके पर पहुँचकर दोनों आरोपित युवकों को हिरासत में ले लिया। एक ने अपना नाम राहुल और दूसरे ने राज बताया था। इसी बीच कार पर सवार इन दोनों युवकों के साथी आए तो पुलिस ने उन दोनों को भी दबोच लिया।

इज्जतनगर थाना प्रभारी धनंजय पांडे का कहना है कि दोनों युवतियाँ सीबीगंज इलाके की रहने वाली हैं। पुलिस ने चारों संदिग्धों से पूछताछ शुरू कर दी है। उनके मोबाइल की भी जाँच की जा रही है। उन्होंने कहा कि तहरीर और जाँच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।