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‘हर फिल्म में मेरे समुदाय का मजाक उड़ाते हैं…’: पारसी जज ने ‘इमरजेंसी’ पर दिखाया आईना, वकील बोले- BJP रोक रही कंगना रनौत की फिल्म

अभिनेत्री सह बीजेपी सांसद कंगना रनौत (Kangana Ranaut) की फिल्म इमरजेंसी (Emergency) 6 सितंबर 2024 को रिलीज होनी थी। लेकिन यह फिल्म अब तक सेंसर बोर्ड में अटकी पड़ी है। बॉम्बे हाई कोर्ट में 19 सितंबर 2024 को हुई सुनवाई के दौरान भी फिल्म के रिलीज पर फैसला नहीं हो पाया। हालाँकि अदालत ने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) यानी सेंसर बोर्ड को फटकार लगाते हुए 25 सितंबर से पहले फिल्म के रिलीज पर फैसला लेने के निर्देश दिए हैं।

जस्टिस बर्गेस कोलाबावाला और जस्टिस फिरदौस पूनीवाला की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की। सुनवाई के दौरान यह सवाल भी उठा कि क्या इस फिल्म के रिलीज में जानबूझकर देरी की जा रही है? क्या इसके पीछे केंद्र की बीजेपी सरकार है? इसके अलावा फिल्म का विरोध कर रहे लोगों को आईना दिखाते हुए जस्टिस कोलाबावाला ने कहा, “लगभग हर फिल्म में मेरे समुदाय का मजाक उड़ाया जाता है। हम हँसते हैं और यह नहीं मानते कि यह हमारे समुदाय के खिलाफ है।”

जस्टिस कोलाबावाला पारसी हैं। उन्होंने यह टिप्पणी फिल्म में दिखाए जाने वाले विषय-वस्तु का दर्शकों पर होने वाले प्रभाव को लेकर सवाल उठाते हुए की।

सुनवाई के दौरान जी स्टूडियोज की ओर से दलील पेश करते हुए वरिष्ठ वकील वेंकटेश धोंड ने दावा किया कि बीजेपी के इशारे पर सेंसर बोर्ड काम कर रहा है। वह चाहता है कि यह फिल्म अक्टूबर में हरियाणा चुनावों के बाद रिलीज हो। धोंड ने कहा, “फिल्म की सह-निर्माता (कंगना) BJP सांसद हैं और वे (BJP) ऐसी फिल्म नहीं चाहते, जिससे ऐसा लगे कि BJP सदस्य किसी समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुँचा रहे हैं।”

गौरतलब है कि इस फिल्म को ‘सिख विरोधी’ के तौर पर प्रचारित किया जा रहा है। लेकिन धोंड की इस दलील का पीठ पर असर नहीं पड़ा। जस्टिस कोलाबवाला ने पूछा कि कोई पार्टी अपने ही सदस्य की बनाई फिल्म को क्यों रोकना चाहेगा? उन्होंने कहा कि यदि राज्य में किसी और दल की सरकार होती तो इस पर गौर किया जा सकता था। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या इस फिल्म से BJP को वोट देने वाले लोगों के फैसले पर असर पड़ेगा?

इस फिल्म पर चल रहे विवादों को लेकर कंगना रनौत ने एक टीवी चैनल से बातचीत में कहा था कि जरनैल सिंह भिंडरावाले (Jarnail Singh Bhindranwale) कोई संत नहीं था। वह आतंकवादी था। उन्होंने कहा था, “कुछ लोग हैं जो कहते हैं कि भिंडरावाले जो हैं वो संत हैं। वे एक महान क्रांतिकारी हैं। वे एक लीडर हैं। वे एक धर्मात्मा हैं। ऐसे लोग डरा धमकाकर, देश को जलाने की धमकी देकर, याचिका डालकर विरोध कर रहे हैं। मुझे भी धमकियाँ दी। पिछली सरकारों ने खालिस्तानियों को आतंकवादी घोषित किया है। वह कोई संत नहीं था, जो एके-47 लेकर मंदिर में बैठा था। उनके पास ऐसे ऐसे हथियार थे जो हमारी सेना के पास भी नहीं थे।”

कंगना रनौत ने कहा था कि उनकी फिल्म को लेकर कुछ लोगों को ही आपत्ति है। यही लोग दूसरों को भी भड़का रहे हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब के 99 प्रतिशत लोग भी भिंडरावाले को संत नहीं मानते हैं। वह आतंकवादी है। य​दि वह आतंकवादी है तो मेरी फिल्म रिलीज होनी चाहिए। फिल्म की रिलीज टलने से हुए आर्थिक नुकसान को लेकर बात करते हुए उन्होंने कहा था, “मैंने कभी ऐसा नहीं सोचा था कि भिंडरावाले को आतंकवादी दिखाए जाने पर किसी को आपत्ति होगी। मुझे प्रताड़ित किया जाएगा। यह शर्मनाक है। इसका हमें नुकसान उठाना पड़ा है। फिल्म को रिलीज से 4 दिन पहले कैंसिल कर दिया गया था।”

गुजरात के जिस जिले की 40% आबादी बन गई ईसाई, वहाँ धर्मांतरण रोकने निकले बजरंग बली: ‘हनुमान यज्ञ’ अभियान से उद्योगपति ने बदली स्थिति, 311 गाँवों में बने 311 मंदिर

गुजरात के छोटे जिलों में से एक डांग जिला बुरी तरह धर्मांतरण की गिरफ्त में था। 40% आबादी वहाँ की ईसाई धर्म अपना चुकी थी। हिंदू धर्म में लोगों की आस्था खत्म होने लगी थी। फिर, वहाँ एक ऐसे अभियान की शुरुआत हुई जिसके बाद धीरे-धीरे सनातन में लोगों का विश्वास दोबारा बढ़ने लगा।

इस अभियान का नाम- हनुमान यज्ञ है। इसे सूरत के जाने-माने बिजनेसमैन व भाजपा सांसद गोविंद ढोलकिया ने शुरू किया है। इस अभियान के तहत डांग जिले के 2 तालुकाओं के 311 ग्रामों में 311 हनुमान मंदिर बनाए गए हैं। 2022 में इनमें से 14 मंदिरों का उद्घाटन हुआ था। अभियान की शुरुआत 40 लाख रुपयों से की गई थी।

ये कदम उठाया ही इसलिए गया था कि डांग में जो पिछले 20 सालों से लगातार परिवर्तन हो रहा है उसे रोका जा सके। बताया जाता है डांग की 40 फीसदी आबादी अब तक ईसाई बन गई है इसीलिए धर्मांतरण रोकने के लिए बजरंगबली का सहारा लिया गया है।

इस अभियान को लेकर हीरा व्यापारी गोविंद ढोलकिया ने कहा (जिन्हें हर वर्ष दीवाली पर बोनस के नाम पर अपने कर्मचारियों को महंगी कार देने के लिए जाना जाता है), “हम पिछले 30 सालों से डांग अहवा में मेडिकल कैंप आयोजित कर रहे हैं। साल 2017 में भी जब कैंप से लौट रहे थे तो कार में मैं और पीपी स्वामी थे। हमने गाँव में एक हनुमान जी की मूर्ति को देखा जिनपर पेड़ के तने गिरे हुए थे। मैंने स्वामी जी से पूछा कि ये कितना उचित है कि हमारे भगवान बिन घर के बैठे रहें और हम घर में रहें।”

उन्होंने आगे कहा, “स्वामीजी ने मेरी बात सुन कहा ये गलत है और इसके लिए कार्य मुझे करना चाहिए। 300 गाँव हैं, 300 में हम ऐसा करेंगे। इस अभियान को लेकर निर्णय कुछ सेकेंड में ही ले लिए गए। इसमें मैंने कुछ नहीं बोला। ये निर्णय भी मेरा नहीं था। ये हनुमान जी महाराज का, प्रभु श्रीराम जी का निर्णय था।”

गौरतलब है कि इन ग्रामों में मंदिरों के निर्माण से कई सकारात्मक बदलाव देखने को मिली। पीपी स्वामी ने बताया कि मंदिर निर्माण से इलाकों में उल्लेखनीय बदलाव आया है। जनजातीय परिवारों में शराब की लत बहुत आम थी लेकिन मंदिर निर्माण से कई परिवारों की यह लत दूर हो गई है।

अब इन ग्रामों में गणेश चतुर्थी, नवरात्रि और होली जैसे सभी त्योहार मनाए जाते हैं। गाँव में जब भी कोई शुभ कार्य होता है तो सबसे पहले लोग बजरंगबली के मंदिर जाते हैं। इस अभियान से डांग में शांति और सहयोग का माहौल स्थापित हुआ है, लोग बिन किसी जाति-पाति के मंदिर में जाते हैं। सनातन धर्म का प्रचार करते है।

मालूम हो कि इससे पहले धर्मांतरण की मार झेल रहे जनजातीय समुदायों की रक्षा के लिए सोनगढ़ में भी बजरंगबली का सहारा लिया गया था। नतीजा ये हुआ कि सोनगढ़ तालुका के बुधवाड़ा गाँव में हनुमान जी के दर्शन के बाद 18 जून 2022 को 6 परिवारों के 35 से अधिक लोग ईसाई धर्म छोड़कर हिंदू धर्म में लौट आए थे।

यह संयोग या प्रयोग… लिबरल गैंग ने पहले पत्रकार अशोक श्रीवास्तव को किया टारगेट, फिर फिर घर जाते समय उनकी कार को SUV ने मारी टक्कर: क्या कॉन्ग्रेसी गुंडई के खिलाफ खड़ा होना ही उनका गुनाह?

डीडी न्यूज के पत्रकार अशोक श्रीवास्तव की गाड़ी पर हमला हुआ है। उन पर यह हमला प्रेस क्लब के बाहर पत्रकार की पिटाई मामले में कॉन्ग्रेस के खिलाफ प्रदर्शन करने के बाद हुआ। पत्रकार श्रीवास्तव की गाड़ी में एक बड़ी गाड़ी ने टक्कर मार दी। हमले के बाद कई पत्रकारों ने इस मामले को उठाया है।

जानकारी के अनुसार, अशोक श्रीवास्तव जब बुधवार रात (18 सितम्बर, 2024) को अपने दफ्तर से वापस घर जा रहे थे, तब उनकी गाड़ी में एक बड़ी गाड़ी ने टक्कर मारी। इस टक्कर में अशोक श्रीवास्तव की क्षतिग्रस्त हो गई। अशोक श्रीवास्तव भी अचानक हुए इस हमले से चौंक गए।

अशोक श्रीवास्तव हमले से पहले दिन में नई दिल्ली में संसद भवन के पास स्थित प्रेस क्लब के बाहर प्रदर्शन करने गए थे। यहाँ उन्होंने अमेरिका में इंडिया टुडे के पत्रकार रोहित शर्मा के साथ कॉन्ग्रेस के लोगों द्वारा की गई बदसलूकी के खिलाफ किए गए एक प्रदर्शन में शामिल हुए थे।

उन्होंने यहाँ माँग की थी कि राहुल गाँधी पत्रकार रोहित शर्मा से माफ़ी माँगे। उनके इस प्रदर्शन में कुछ और पत्रकार भी शामिल हुए थे। उन्होंने यहाँ कहा, “हमें एक संदेश देना है कि मोहब्बत की दुकान कहने वाले पत्रकारों का सम्मान सीखें। एक पत्रकार के साथ राहुल गाँधी की टीम के लोगों ने हमला किया, उसका फोन छीना, उसके साथ हाथापाई की, क्या यह मीडिया की आजादी का सम्मान है। क्या संविधान का पालन है। क्या बांग्लादेश के हिन्दुओं पर सवाल पूछना गुनाह है।”

इस प्रदर्शन को लेकर कॉन्ग्रेस के लोग चिढ़े हुए थे। कॉन्ग्रेस प्रवक्ता सुरेन्द्र राजपूत और सुप्रिया श्रीनेत ने इस प्रदर्शन का मजाक उड़ाने की कोशिश भी की।

प्रदर्शन के बाद वह वापस अपने दफ्तर गए और उसके पास जब यहाँ से निकले तो उनकी गाड़ी में आकर एक गाड़ी टकराई। उन पर हुए इस हमले के बाद कई पत्रकारों ने इसकी सूचना ट्विटर पर डाली। पत्रकारों ने इस बात की आलचना आलोचना की कि क्या मीडिया की आजादी पर बात करने के कारण अशोक श्रीवास्तव पर हमला हुआ।

ABP न्यूज के पत्रकार विकास भदौरिया ने बताया, “कल रात (18 सितम्बर, 2024) को वरिष्ठ पत्रकार अशोक श्रीवास्तव पर जानलेवा हमला हुआ। आधी रात को जब वह अपने दफ़्तर से निकल रहे थे तभी उनकी कार को एक SUV ने पीछे से ज़ोरदार टक्कर मारी। कल अशोक श्रीवास्तव जी ने इंडिया टुडे के पत्रकार रोहित शर्मा के साथ अमेरिका में हुई बदसलूकी और हमले के ख़िलाफ़ प्रदर्शन किया था, इस प्रदर्शन से पूरा ईकोसिस्टम तिलमिला उठा था, लेकिन क्या विरोध के स्वर किसी की जान माँगते हैं?”

वहीं पत्रकार अनुपम कुमार सिंह ने भी हमले की आलोचना की। उन्होंने लिखा, “राहुल गाँधी आज भी इस देश की हर व्यवस्था से परे हैं। अमेरिका में पत्रकार पर हमला हुआ, इसके विरोध में आवाज़ उठाने पर अशोक श्रीवास्तव पर हमला कर दिया गया। अचानक से एक गाड़ी आती है और इनकी गाड़ी को जोर से टक्कर मारती है। उससे पहले सुप्रिया श्रीनेत ट्वीट कर के निशाना बनाती हैं। फिर कॉन्ग्रेस के सारे हैंडल्स एक-एक कर के पीछे पड़ जाते हैं। आज भी गाँधी परिवार इस देश का सबसे शक्तिशाली परिवार है।”

अशोक श्रीवास्तव पर हुए इस हमले का विरोध भाजपा के आईटी सेल के मुखिया अमित मालवीय ने भी किया है। उन्होंने एक्स (ट्विटर) पर लिखा, “कल ही DD न्यूज के वरिष्ठ पत्रकार अशोक श्रीवास्तव ने इंडिया टुडे के पत्रकार रोहित शर्मा के साथ अमेरिका में हुई बदसलूकी और हमले के खिलाफ प्रदर्शन किया था। इस प्रदर्शन से ‘मोहब्बत की दुकान’ वाला पूरा ईको सिस्टम तिलमिला उठा था। कल रात ही अशोक श्रीवास्तव पर जानलेवा हमला हुआ।”

उन्होंने कॉन्ग्रेस पर हमला बोलते हुए लिखा, “आधी रात को जब वे अपने दफ्तर से निकल रहे थे तभी उनकी कार को एक SUV ने पीछे से जोरदार टक्कर मारी। अपराधी बख्शा नहीं जाएगा, लेकिन विरोध करने वालों की जान पर हमला? कांग्रेस को अपने इमरजेंसी की मानसिकता से बाहर आना चाहिए। ये देश उनकी जागीर नहीं है और पत्रकार उनके गुलाम नहीं।”

इस मामले में ऑपइंडिया ने पत्रकार अशोक श्रीवास्तव से सम्पर्क करने का भी प्रयास किया। हालाँकि, उनकी प्रतिक्रिया इस मामले में नहीं मिल पाई है। गाड़ी जिस व्यक्ति ने लड़ाई, उसकी भी जानकारी नहीं सामने आई है। यह जानकारियाँ मिलते ही इस रिपोर्ट को अपडेट कर दिया जाएगा।

कोलकाता में खत्म नहीं हुआ प्रदर्शन, डॉक्टरों को CM ममता बनर्जी पर भरोसा नहीं: TMC विधायक ने कहा- आंदोलन की आड़ में रात को शराब पीने जाती हैं महिलाएँ

पश्चिम बंगाल में महिला डॉक्टर की रेप-हत्या मामले में 40 दिन बीत जाने के बाद भी अभी तक पीड़िता को इंसाफ नहीं मिल पाया है। एक तरफ मृतिका के पिता ने इस मामले में ये कहकर और मामले को गहरा दिया है कि अपराध में और लोग भी शामिल हैं। तो वहीं दूसरी ओर अन्य जूनियर डॉक्टर भी सरकार से दो बार वार्ता करने के बावजूद प्रदर्शन खत्म करने का नाम नहीं ले रहे। उनका कहना है कि वो लोग बैठक में हुई बातचीत से नाखुश हैं।

मीडिया में आई जानकारी के अनुसार, जूनियर डॉक्टरों का कहना है कि उन्हें बैठक में जो भी आश्वासन दिए गए थे, वो उन्हें लिखित में नहीं मिले। जब उन्होंने ये मुद्दा उठाया तब बाद में उन्हें जो संक्षिप्त बिंदु भेजे गए उसमें हस्ताक्षर नहीं था।

जानकारी के मुताबिक, डॉक्टरों के साथ ये बैठक राज्य सचिवालय में हुई। बैठक के बाद जब डॉक्टरों ने अपनी नाराजगी जाहिर की तो बैठक के मिनट जिसमें हस्ताक्षर नहीं हुए थे उन्हें सरकार द्वारा जारी किया गया।

जूनियर डॉक्टर ने मीडिया को बताया कि जब हम बैठक के लिए गए तो चीफ सेक्रेट्री हमारी हर माँग को मान गए लेकिन जैसे ही मीटिंग पूरी हुई और हमने उस बैठक में हुई बातचीत के मिनट माँगे, तो उसमें कुछ भी नहीं लिखा था। उन्होंने हमें कहा कि वो उसे मेल करेंगे, लेकिन मेल भी नहीं आया है।

बताया जा रहा है कि डॉक्टरों और मुख्य सचिव के बीच हुई बैठक में जूनियर डॉक्टरों ने मुख्य स्वास्थ्य सचिव के विरुद्ध जाँच कमेटी गठित करने की माँग की है। इसके अलावा रात में महिला पुलिस अधिकारियों की ड्यूटी लगाने की माँग, विभागों में पैनिक बटन इंस्टाल करने की माँग और फौरन कार्रवाई के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी करने की माँग की गई है।

इससे पहले उन्होंने कोलकाता पुलिस कमीश्नर विनीत गोयल के ट्रांसफर की बात की थी। राज्य सरकार ने उस माँग को मानते हुए विनीत गोयल का ट्रांसफर किया और उनकी जगह मनोज कुमार वर्मा को नियुक्त किया गया। साथ ही स्वास्थ्य विभाग के दो वरिष्ठ अधिकारियों को भी हटा दिया।

गौरतलब है कि एक तरफ इस मामले में ढीला रवैया दिखाने को लेकर तृणमूल कॉन्ग्रेस लगातार बदनाम हो रही है वहीं अब पार्टी के एक विधायक का विवादित बयान सामने आया है। तृणमूल कॉन्ग्रेस के विधायक स्वप्न देबनाथ ने कहा कि महिलाओं के विरोध प्रदर्शन के नाम पर रात को शराब पीने जाती हैं।

देबनाथ ने प्रदर्शन पर बैठी लड़कियों के माता-पिता से भी सवाल किया कि उन्हें अपनी बेटियों से पूछना चाहिए कि वे रात में कहाँ जाती हैं। अगर रात में उनके साथ कुछ हो जाएगा तो इसके जिम्मेदार भी कौन होगा। देबनाथ ने इस दौरान प्रदर्शनकारियों पर भी तंज कसा। उन्होंने कहा कि वो टीवी पर देखते हैं कि जो लोग आरजी कर मामले में विरोध करते हैं वो अगले दिन छुट्टी पर चले जाते हैं। बाजार में दुर्गा पूजा के लिए व्यस्त हो जाते हैं। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने विरोध प्रदर्शन के सबसे प्रमुख चेहरे को इस बीच अपनी बीवी के लिए महंगी साड़ी खरीदने जाते देखा है।

‘मोसाद’ का नाम सुन जिनकी पैंट हो जाती है गीली, अब उनको फाड़ रहा ‘यूनिट 8200’: पेजर और वॉकी-टॉकी ब्लास्ट के बाद दुनियाभर में चर्चे, जानिए इसके बारे में सब कुछ

इस्लामी आतंकी संगठन के प्रभाव वाले देश लेबनान में बीते तीन दिनों से लगातार धमाके हो रहे हैं। सबसे पहले यह धमाके हिजबुल्लाह आतंकियों पेजर डिवाइस में हुए। इसके बाद इन धमाकों का सिलसिला वॉकी-टॉकी से होते हुए सोलर पैनल और दफ्तरों में लगने वाली बायोमीट्रिक मशीनों तक पहुँच गया। लेबनान में हो रहे इन धमाकों के पीछे क्या कारण है, यह अभी तक साफ़ नहीं हो पाया है।

हालाँकि, शक की सुई पूरी तरह से इजरायल की खुफिया एजेंसियों की तरफ जा रही है। बताया जा रहा है कि इजरायल की खुफिया एजेंसियों ने लेबनान के भीतर फटने वाली मशीनों में विस्फोटक भरे हुए थे। इस काम को इजरायल की किस किस एजेंसी ने किया यह साफ़ नहीं है लेकिन इस बीच इजरायली सेना की 8200 यूनिट की चर्चा हो रही है।

क्या है इजरायल की यूनिट 8200?

जिस यूनिट 8200 पर बात हो रही है, वह इजरायल की सेना का हिस्सा है। यह इजरायली सेना के इंटेलिजेंस डायरेक्टरेट के अंतर्गत आती है। इसके अलावा दो और यूनिट इसके अंतर्गत काम करती है। यूनिट 8200 का मुख्य फोकस तकनीक होती है। यह खुफिया जानकारी इकट्ठा करने और उस पर एक्शन लेने के तकनीकी एंगल पर काम करती है।

इजरायल की यह यूनिट उसकी मुख्य खुफिया एजेंसी मोसाद से इतर है। मोसाद जहाँ देश की प्रमुख खुफिया एजेंसी है और उसके ऑपरेशन विदेशों में भी चलते हैं, वहीं उसके मुकाबले यूनिट 8200 छोटी टीम है और इसका मुख्य फोकस तकनीक पर रहता है।

यूनिट 8200 मात्र खुफिया जानकारी इकट्ठा ही नहीं करती बल्कि वह टूल्स भी बनाती हैं जो इसमें काम आते हैं। इसके अलावा यह साइबर युद्ध और टेलीकम्यूनिकेशन जैसी तकनीकों में भी माहिर है। हमेशा पर्दे के पीछे रह काम करने वाली यह एजेंसी सामान्य फोन की बातचीत से लेकर जटिल कम्प्यूटर वाली तकनीकों को हैक करने में सक्षम मानी जाती है।

लेबनान हमले के मामले में यूनिट 8200 का नाम इसलिए आया है क्योंकि ऐसी तकनीकी क्षमता इसी के पास है। बताया जा रहा है कि लेबनान में हुए धमाकों की प्लानिंग में यह ख़ुफ़िया एजेंसी शुरूआती दिनों से जुड़ी हुई थी। कथित तौर पर इसका काम इन पेजरों और बाकी मशीनों में विस्फोटक को रखना था।

लेबनान में हुए धमाकों में हिजबुल्लाह को बड़ा नुकसान हुआ है, उसने इन धमाकों की पूरी जिम्मेदारी इजरायल पर ही डाली है। हालाँकि, इजरायल और उसकी सेना ने इन धमाकों के बारे में अभी चुप्पी साध रखी है, उसने इस संबंध में कोई टिप्पणी नहीं की है।

टेक एक्सपर्ट होते हैं भर्ती

चर्चाओं में बनी इजरायल की यह यूनिट 8200 बड़ी संख्या में टेक एक्सपर्ट भर्ती करती है। यह यूनिट मेधावी युवाओं को भर्ती करती है जो साइबर या कम्प्यूटर की फील्ड के विद्वान होते हैं। इसके अलावा गणित जैसे विषयों के विशेषज्ञ भी भर्ती किए जाते हैं। उन लोगों को टीम में जगह दी जाती है जो इजरायल की बड़ी आईटी कम्पनियों में ऊँचे पदों पर रहे होते हैं।

इनका काम नई तकनीकों की खोज करना और दुश्मनों की तकनीकों को काटने वाले टूल खोना तथा लीक से हटकर सोचना होता है। इसके कई पुराने सदस्य बताते हैं कि यह यूनिट एक स्टार्टअप की तरह काम करती है और। हालाँकि, इसके सैनिक जमीन पर लड़ने के लिए भी भेजे जा सकते हैं।

इस यूनिट में करने वाले लगातार दुश्मनों के फोन, कम्प्यूटर समेत बाकी डिवाइस से जानकारी इकट्ठा करने के लिए काम करते हैं। इसके अलावा दुश्मन देशों की साइबर तकनीक को मात देना भी इनके एजेंडे में शामिल होता है। इस यूनिट का हाथ कई बड़े साइबरअटैक में बताया जाता है।

जबरदस्त है यूनिट 8200 का ट्रैक रिकॉर्ड

इजरायल की इस यूनिट के नाम कई कारनामे हैं। ईरान के परमाणु कार्यक्रम को बर्बाद करने में इस यूनिट की बड़ी भूमिका मानी जाती है। बताया जाता है कि इसने Struxnet नाम का एक वायरस बनाया था। इस वायरस के जरिए इस यूनिट ने ईरान के परमाणु संयत्रों पर हमला किया।

यह वायरस परमाणु संयत्रों में लगे सेंट्रीफ्यूज को अंदर से ही जला देता था। इसकी जानकारी लम्बे समय तक ईरान को नहीं हो पाई। सेंट्रीफ्यूज किसी भी परमाणु प्रोग्राम का प्रमुख हिस्सा होते हैं क्योंकि जरिए ही परमाणु पदार्थों जैसे यूरेनियम को विस्फोटक स्तर पर लाया जाता है।

इसके अलावा इस 8200 यूनिट ने 2018 में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से ऑस्ट्रेलिया जा रहे एक विमान को ISIS से हाइजैक होने से बचाया था। बताया गया था कि इस विमान पर ISIS हमला करता उससे पहले ही ऑस्ट्रेलिया की पुलिस को यह सूचना 8200 यूनिट ने दे दी और यह घटना टल गई।

लेबनान में अफरातफरी का माहौल

जहाँ एक ओर इजरायल इस हमले को लेकर शांत है, वहीं लेबनान के भीतर अफरातफरी का माहौल बना हुआ है। लेबनान के भीतर अलग-अलग तरह के इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसों में हुए धमाकों ने हिजबुल्लाह की चूलें हिला दी हैं। हिजबुल्लाह के सारे संचार माध्यम तबाह हो गए हैं। हिजबुल्लाह इसे खुद ही बड़ी चूक मान रहा है।

लेबनान में पेजरों में हुए धमाकों के बाद जिन लोगों की मौत हुई थी, उनके जनाजों में भी धमाके हो गए। यह धमाके वायरलेस में हुए। धमाके कैसे किए गए, इसमें क्या तकनीक उपयोग में लाई गई, इसका कुछ साफ पता अभी भी नहीं लग सका है। हिजबुल्लाह ने इजरायल से बदला लेने की बात कही है।

‘गुस्ताख-ए-नबी की एक सजा… सिर तन से जुदा’: UP के सिद्धार्थ नगर में खुलेआम ईद के मौके पर लगे नारे, जुलूस में महिलाएँ और बच्चे भी शामिल

उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थ नगर से ईद-मिलाद-उन-नबी के मौके पर खुलेआम जुलूस में ‘सर तन से जुदा’ के नारे लगते सुनाई पड़े। सामने आई वीडियो में इस जुलूस में महिलाओं और बच्चों की अच्छी खासी संख्या देखी जा सकती है।

वीडियो को सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए सवाल किया जा रहा है कि आखिर कब तक ईशनिंदा के नाम पर की जा रही हत्याओं को जायज बताया जाता रहेगा। धीरे-धीरे अब तो ये नारे त्योहारों का हिस्सा बनाए जा रहे हैं।

जुलूस की वीडियो क्लिप स्वराज की पत्रकार स्वाति गोयल शर्मा ने अपने एक्स पर शेयर की है। उन्होंने वीडियो को शेयर कर सवाल पूछे। वहीं वीडियो के नीचे सिद्धार्थनगर पुलिस का जवाब भी आया। उन्होंने बताया कि इस घटना के संबंध में डुमरियागंज पर सुसंगत धाराओं में अभियोग पंजीकृत हो गया है।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले सिद्धार्थनगर में गणेश विसर्जन के दौरान पत्थरबाजी की घटना सामने आई थी। कुछ अराजक तत्वों ने विसर्जन के दौरान पत्थरबाजी की थी। मामला शोहरतगढ़ से सामने आया था।

अब ईद के मौके पर सिद्धार्थ नगर से ऐसी भड़काऊ नारेबाजी की वीडियो प्रकाश में आई है। इसके अलावा मुरादाबाद में बारावफात जुलूस में भी विवादित नारेबाजी सामने आई। घटना की सूचना होने पर बजरंग दल के लोगों ने पुलिस थाने के सामने प्रदर्शन किया। पुलिस ने इस मामले में भी केस दर्ज करके उचित कार्रवाई की बात कही है। हालाँकि अभी तक मामले में कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है।

जगन सरकार में हुई तिरुपति मंदिर के प्रसाद से छेड़छाड़, लड्डू में मिलाई जाती थी जानवर की चर्बी: CM चंद्रबाबू नायडू के दावे के बाद YSRCP पर उठे सवाल

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने विपक्षी पार्टी YSRCP पर निशाना साधते हुए ऐसा खुलासा किया है जिसे सुन सब हैरान हैं। सीएम नायडू ने दावा किया है कि पहले की जगन सरकार में तिरुपति मंदिर में प्रसाद बनाने के लिए जानवरों की चर्बी वाला घी इस्तेमाल होता था।

उन्होंने ये खुलासा एनडीए विधायक दल की बैठक को संबोधित करने के दौरान किया। उनके दावे को सुन सब हैरान रह गए। उन्होंने कहा कि तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (TTD) और भगवान वेंकटेश्वर को आंध्र प्रदेश के लोगों की सबसे बड़ी धरोहर है। एनडीए सरकार मंदिर की पवित्रता बनाए रखने के लिए कई कदम उठा रही हैं, लेकिन पिछली सरकार ने भोजन की गुणवत्ता खराब कर दी है। उन्होंने भगवान वेंकटेश्वर के लड्डू के लिए घटिया सामग्री इस्तेमाल की।

उन्होंने बताया कि YSRCP सरकार ने अपने कार्यकाल के दौरान, एक निजी ठेकेदार को घी की आपूर्ति का ठेका दिया था। बाद में लड्डू की गुणवत्ता को लेकर कई शिकायतें मिलीं। पता चला कि लड्डू बनाने में जो घी इस्तेमाल हो रहा था उसमें जानवर की चर्बी थी। लड्डू की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए अब एनडीए सरकार ने 29 अगस्त को कर्नाटक मिल्क फेडरेशन के नंदिनी ब्रांड को घी देने का कॉन्ट्रैक्ट दिया है। जिसके बाद अब मंदिर में शुद्ध घी प्रयोग होता है।

बता दें कि तिरुपति मंदिर में भगवान के प्रसाद के लिए हर दिन लगभग 10 हजार किलो घी उपयोग होता है जिससे करीबन 3 लाख लड्डू बनते हैं। हर श्रद्धालु के लिए इस प्रसाद के बहुत मायने हैं। ऐसे में उसकी गुणवत्ता से हुए खिलवाड़ में खुलासे के बाद अब इस मुद्दे पर जोर-शोर से चर्चा हो रही हैं। पूर्व की जगन सरकार लगातार सवालों के घेरे में हैं। वहीं सीएम नायडू के बयान को YSRC द्वारा खारिज कर दिया गया है। उन्होंने इस आरोप को दुर्भावनापूर्ण बताया है।

मालूम हो कि जगन मोहन रेड्डी को सरकार पर एक तरफ जहाँ हिंदुओं की भावना आहत करने का आरोप लगा है तो वहीं दूसरी ओर उनपर ईसाई धर्म के प्रचार के आरोप लगते रहे हैं।

पेंटर बाबूराम को पीटा, मुकेश का पलटा ठेला: प्रशासन ने रोका था बारावफात का जुलूस तो गरीब हिंदुओं पर फूटा मुस्लिमों का गुस्सा, मंदिर में भी तोड़फोड़

उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में फल और सब्ज़ी बेचकर गुजारा करने वाले गरीब हिन्दुओं के साथ मारपीट का मामला सामने आया है। यहाँ मुस्लिम समुदाय के कुछ लोगों पर कलावा पहने हिंदू ठेले वालों की पिटाई करने का आरोप लगा है। एक अन्य घटना में एक हिन्दू युवक की पिटाई भी की गई है। इसके साथ ही एक हिन्दू मंदिर में तोड़फोड़ भी की गई है।

बरेली पुलिस ने इस सभी मामलों में जाँच और अन्य जरूरी कार्रवाई शुरू कर दी है। इन दोनों घटनाओं के पीछे हमलावरों ने हिन्दू संगठनों द्वारा मुस्लिमों के बारावफात के जुलूस को रोकने से उठा गुस्सा बताया है। जुलूस उसी जगह रोका गया था, जहाँ इसी साल मुस्लिम समुदाय के लोगों द्वारा नई परम्परा बताते हुए काँवड़ यात्रा रोकी गई थी।

पेंटर को बेरहमी से पीटा

पहला मामला बरेली जिले के थाना क्षेत्र बारादरी का है। यहाँ विशाल ने मंगलवार (17 सितंबर) को पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत में उन्होंने बताया कि मंगलवार को रंगाई-पुताई का काम करने वाले उनके बहनोई बाबूराम कहीं जा रहे थे। इसी दौरान मुनीर और शाहनवाज ने 15-20 लोगों के साथ मिलकर बाबूराम को रोक लिया। प्याज-लहसुन का ठेला लगाने वाला एक अन्य व्यक्ति बाबूराम को देख कर भड़क उठा।

प्याज बेच रहे व्यक्ति ने बाकियों को उकसा कर कहा, “यही है जिसने हम लोगों के अंजुमनों को निकलने नहीं दिया था।” इतना सुनकर आसपास के लोग भड़क उठे। मुनीर, शाहनवाज ने अपने 15-20 साथियों के साथ मिलकर बाबूराम पर हमला बोल दिया और उन्हें लात-घूँसों से बेरहमी से पीटा। आसपास के लोग बीच-बचाव में जुटे तो आरोपित धमकी देते हुए वहाँ से भाग निकले।

जाते-जाते हमलावरों ने धमकी देते हुए कहा, “अगर दोबारा इधर दिखे तो जान से मार देंगे।” पीड़ित की शिकायत के बाद पुलिस ने हमलावरों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 191 (1), 115 (2), 352, 351 (2) और 351 (3) के तहत कार्रवाई की है। ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है। पुसंवेदनशील इलाकों में पुलिस गश्त बढ़ा दी गई है। फ़िलहाल हालत शांतिपूर्ण है।

पलट दिया गया गरीब हिन्दू का ठेला

वहीं, बरेली जिले का दूसरा मामला भी बारादरी थाना क्षेत्र से ही है। यहाँ विश्व हिन्दू परिषद के पदाधिकारी हिमांशु पटेल ने अपने X हैंडल पर आरोप लगाया है कि मुस्लिम युवकों ने ठेला लगाने वाले एक गरीब हिन्दू को पीटकर भगा दिया है। हिमांशु के मुताबिक, एजाजनगर क्षेत्र में हाथ में कलावा देखकर एक हिंदू युवक को पीटा गया है। बरेली पुलिस ने शिकायत का संज्ञान लेकर जाँच शुरू कर दी है।

ऑपइंडिया ने इस मामले की पड़ताल की तो पता चला कि मंगलवार (17 सितंबर) को मुकेश राठौड़ नाम के युवक ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत में मुकेश ने बताया है कि मंगलवार को उन्होंने साईं स्कूल के पास ठेला लगा रखा था। उसी दौरान गली के पास 40-50 की तादाद में आई भीड़ ने नारेबाजी करते हुए उस पर हमला कर दिया।

हमलावरों ने मुकेश के ठेले पर रखे तमाम सामान को उठाकर फेंक दिया। इसके साथ ही पीड़ित की पिटाई भी की। ऑपइंडिया के पास इससे संबंधित FIR की कॉपी मौजूद है। शिकायत में मुकेश ने बताया कि हमलावरों ने उनसे कहा, “अगर हमारा बारावफात का जुलूस निकलने दिया होता तो ये सब न होता।” जब लोगों की भीड़ जुटने लगी तो हमलावर वहाँ से भाग निकले।

मुकेश ने हमलावरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की है। इस तहरीर पर पुलिस ने अज्ञात हमलावरों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 191 (2), 131, 324 (4), 324 (5), 115 (2), 351 (2), 351 (3) और 196 के तहत FIR दर्ज की है। आरोपितों की पहचान व तलाश के प्रयास शुरू कर दिए गए हैं।

हिन्दू मंदिर में तोड़फोड़

इसी बरेली के बारादरी क्षेत्र में एक हिन्दू मंदिर में तोड़फोड़ भी की गई है। यहाँ के एरा रेडियोज इलाके में एक शिव मंदिर है। हिन्दू संगठन के लोगों का आरोप है कि मुस्लिम समुदाय के लोगों ने इस घटना को अंजाम दिया है। बताया जा रहा है कि मंगलवार की रात 20 से 25 की संख्या में उपद्रवी मंदिर के आसपास जमा हुए थे। वो यहाँ खुराफात कर रहे थे।

लोगों का कहना है कि उन्हीं उपद्रवियों ने मंदिर में तोड़फोड़ की घटना को अंजाम दिया है। गुंबद और अन्य धार्मिक प्रतीकों को तोड़कर उसे फिर से जोड़ने का प्रयास किया गया। अगली सुबह जब हिन्दुओं को इस हरकत की सूचना मिली तो आक्रोशित हो गए। उन्होंने एकजुट होकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। उन्होंने नारेबाजी करते हुए आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की।

इस मामले की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुँची। पुलिस ने लोगों को समझा-बुझा कर शांत कराया और कार्रवाई का आश्वासन दिया। पुलिस ने इस मामले में अज्ञात हमलावरों के खिलाफ केस दर्ज करके जाँच शुरू कर दी है। हिन्दू संगठनों ने ऐसी हरकतों को आए दिन की करतूत बताते हुए इस केस में पुलिस कार्रवाई को नजीर बनाने की माँग की है।

जहाँ रोकी गई थी काँवड़ यात्रा, वहीं रोका गया बारावफात का जुलूस

बताते चलें कि बरेली के बारादरी इलाके में रविवार (15 सितंबर) को मुस्लिम समुदाय के लोगों ने बारावफात का जुलूस निकाला था। यह जुलूस उस मार्ग से गुजर रहा था, जहाँ इसी साल हिन्दुओं की काँवड़ यात्रा को मुस्लिम समुदाय ने नई परम्परा बताते हुए रोक दिया था। आखिरकार लंबी नोक-झोंक के बाद प्रशासन ने उस मार्ग पर यात्रा की अनुमति नहीं दी और बारावफात जुलूस का रुट बदल दिया।

पेजर वालों को दफनाने गए, दूसरे ब्लास्ट में उड़ गए… लेबनान में अब वॉकी-टॉकी में धड़ाधड़ विस्फोट, इजरायल के हमले में फिर कई हिज़्बुल्लाह वालों की मौत

इजरायल ने मंगलवार (17 सितंबर, 2024) को लेबनान में रह रहे हिज़्बुल्लाह के सदस्यों के पेजर में विस्फोट किया, जिस कारण 4000 से अधिक लोग घायल हो गए और एक दर्जन की मौत हो गई। लेबनान की सरकार ने बताया है कि इस ब्लास्ट में 100 से अधिक लोग घायल हुए हैं। बताया जा रहा है कि हजारों वॉकी-टॉकी में ये ब्लास्ट हुआ है। हिज़्बुल्लाह के आतंकी फोन छोड़ कर पेजर और वॉकी-टॉकी का इस्तेमाल संचार के लिए करते थे, लेकिन अब इन्हीं में ब्लास्ट हो रहे थे।

हिज़्बुल्लाह के सूत्रों ने पुष्टि की है कि समूह द्वारा उपयोग किए जाने वाले वॉकी-टॉकीज को निशाना बनाया जा रहा है। विस्फोट बेरूत के दक्षिणी उपनगरों के साथ-साथ दक्षिण लेबनान के नबातिया, टायर और सैदा शहरों में भी हुए। ये घटनाएँ उस हमले के एक दिन बाद आई हैं, जब हिज़्बुल्लाह के सदस्यों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले पेजर्स में विस्फोट हुआ था, जिसमें 12 लोगों की मौत हो गई थी और 4000 से अधिक घायल हो गए थे।

इज़राइल ने इन ताज़ा विस्फोटों पर टिप्पणी करने से परहेज किया है। रिपोर्टों में कहा गया कि ये विस्फोट छोटे पैमाने पर थे, लेकिन पिछले दिन हुए हमलों से मेल खाते हैं। लेबनान की राज्य-नियंत्रित नेशनल न्यूज़ एजेंसी (NNA) ने दावा किया कि देश के पूर्वी हिस्से बेक़ा क्षेत्र में हुए ताज़ा विस्फोटों में तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि सुरक्षा सूत्रों ने कहा कि सैकड़ों लोग घायल हुए हैं। इन दावों की पुष्टि नहीं हो सकी है।एक विस्फोट उस समय हुआ जब हिज़्बुल्लाह द्वारा आयोजित एक अंतिम संस्कार में शामिल एक सदस्य के शरीर पर धमाका हुआ, जिससे वह ज़मीन पर गिर गया और आसपास की भीड़ भागने लगी।

माना जा रहा है कि मोसाद ने महीनों पहले हिज़्बुल्लाह द्वारा आयात किए गए हज़ारों पेजर्स में विस्फोटक लगाए थे, जो बाद में फट गए। पिछले अक्टूबर से उत्तरी इज़राइल पर 8,000 से अधिक रॉकेट दागे जा चुके हैं और इसके जवाब में इज़राइली सेना ने लेबनान में हिज़्बुल्लाह के ठिकानों पर हवाई हमले, टैंक और तोपखाने से जवाबी कार्रवाई की है। हिज़्बुल्लाह लगातार इजरायल पर रॉकेट हमले करता रहता है। हिज़्बुल्लाह इस्लामी आतंकी संगठन है, जो फिलिस्तीन स्थित हमास की तरह ही हमले करता रहता है।

पार्क में अपने बच्चों संग टहल रही महिला को साथ चलने के लिए कहने लगा जावेद, मना किया तो ब्लेड से कर दिया ताबड़तोड़ वार: लोगों ने पकड़ धुना, फिर पुलिस को सौंपा

उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में मंगलवार (17 सितंबर 2024) को छेड़खानी का विरोध करने पर जावेद नाम के व्यक्ति ने एक महिला को ब्लेड मार कर घायल कर दिया। एक पार्क में 2 बच्चों के साथ घूम रही थी। महिला की चीख सुनकर आसपास के लोगों ने आरोपित जावेद को पकड़ लिया और उसे पुलिस के हवाले कर दिया। पुलिस ने जावेद को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना बरेली के कोतवाली थाना क्षेत्र की है। यहाँ के पार्क में बारादरी इलाके की रहने वाली महिला घूमने-टहलने के लिए अक्सर आया-जाया करती थी। मंगलवार (17 सितंबर) की सुबह लगभग 11 बजे महिला पार्क में अपने 2 बच्चों के साथ घूमने आई थी। इसी दौरान जावेद वहाँ आया और पीड़िता से छेड़खानी शुरू कर दी और महिला पर साथ चलने का दबाव बनाने लगा।

पीड़िता ने जावेद की बात को अनसुना कर दिया और दूसरी तरफ चली गई। महिला के इनकार करने पर जावेद भड़क गया। उसने अपने पास छिपाकर रखी ब्लेड से पीड़िता पर वार करना शुरू कर दिया। हमलावर जावेद ने ब्लेड से पीड़िता का गला काटने की कोशिश की। हालाँकि, महिला खुद को बचाने में सफल रही। घायल पीड़िता चीखने लगी। चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग जमा हो गए।

उन्होंने जावेद को पकड़ कर धुन दिया। इसके बाद पुलिस को सूचना दी। इपुलिस मौके पर पहुँचकर जावेद को हिरासत में ले लिया। पीड़िता से तहरीर लेकर आरोपित के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं में FIR दर्ज कर ली। इंस्पेक्टर कोतवाली ने बताया कि जावेद और पीड़िता पहले से परिचित रहे हैं। दोनों एक ही समुदाय के हैं। मामले में जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई की जा रही है।