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‘राहुल गाँधी के स्टाफ पास पत्रकार का फोन छीनने का अधिकार नहीं’: इंडिया टुडे के रोहित शर्मा से बदसलूकी पर अमेरिकी प्रेस क्लब सख्त, कहा- यह कानूनों का उल्लंघन

अमेरिका में राहुल गाँधी के कार्यक्रम से पहले इंडिया टुडे के पत्रकार रोहित शर्मा के साथ हुई मारपीट का मामला गरमा गया है। अमेरिका के नेशनल प्रेस क्लब(NPC) ने इस मामले पर एक बयान जारी किया है। NPC ने कहा है कि पत्रकार के साथ मारपीट अमेरिकी कानूनों के उल्लंघन के दायरे में आती है। NPC ने कहा है कि राहुल गाँधी के स्टाफ का कोई अधिकार नहीं बनता था कि वह पत्रकार रोहित शर्मा के साथ बदसलूकी करें या उनका फोन छीनें।

NPC की अध्यक्ष एमिली विल्किंस ने इस संबंध में बयान जारी किया है। विल्किंस ने कहा, “इंडिया टुडे की हालिया खबर और रोहित शर्मा और एनपीसी बोर्ड के एक सदस्य के बीच बातचीत में यह साफ़ हुआ है है कि शर्मा डलास हवाई अड्डे के पास एक होटल में भारत के विपक्ष के नेता राहुल गाँधी के आने का इन्तजार कर रहे थे। इसी दौरान शर्मा ने इंडिया ओवरसीज कॉन्ग्रेस (IOC) के अध्यक्ष सैम पित्रोदा का इंटरव्यू लिया। दोनों पहले भी मिल चुके थे और यह इंटरव्यू रिकॉर्डिंग की सहमति के साथ किया गया था।”

एमिली विल्किंस ने आगे बताय, “आखिरी सवाल पर दर्शकों में से कुछ लोगों ने सवाल पर आपत्ति जताई और शर्मा पर चिल्लाते हुए और उन्हें धक्का देते हुए उनका फोन छीनकर इंटरव्यू रोक दिया। इन लोगों में गाँधी के स्टाफ के लोग शामिल थे, जिन्होंने शर्मा के फोन से फाइलें डिलीट कर दीं और उनसे फोन छीन कर रख लिया।”

NPC ने घटना का जिक्र करने के बाद याद दिलाया कि अमेरिका में पत्रकार एक कानून के तहत सुरक्षित होते हैं जिसका राहुल गाँधी की टीम ने उल्लंघन किया हो सकता है। NPC ने लिखा, “सुरक्षा कर्मचारियों को पता होना चाहिए कि अमेरिका में पत्रकारों को संविधान द्वारा सुरक्षा दी जाती है, चाहे पत्रकार या फिर इंटरव्यू देने वाले किसी भी देश के हों।”

NPC ने कहा, “यह शर्मा और पित्रोदा के बीच तय किए गए नियमों के आधार पर ऑन-द-रिकॉर्ड इंटरव्यू था। राहुल गाँधी की टीम की इंटरव्यू के सवालों या उसके टाइम से कोई लेना देना नहीं था। उनके पास शर्मा का फोन उनसे छीनने या इंटरव्यू डिलीट करने का अधिकार नहीं था।”

NPC के इस बयान के बाद कॉन्ग्रेस नेता सैम पित्रोदा और राहुल गाँधी और भी घिर गए हैं। गौरतलब है कि इंडिया टुडे के अमेरिकी मामले देखने वाले पत्रकार रोहित शर्मा ने एक लेख में बताया था कि किस तरह सैम पित्रोदा के साथ एक इंटरव्यू में हिन्दुओं पर सवाल पूछने के कारण उनके साथ मारपीट हुई।

क्या थी पूरी घटना

रोहित शर्मा के लेख के अनुसार, “अपनी तैयारी के हिस्से के रूप में मैंने इंडियन ओवरसीज कॉन्ग्रेस (IOC) के अध्यक्ष सैम पित्रोदा से संपर्क किया। मैंने पहले भी उनका साक्षात्कार लिया है। सैम इंटरव्यू देने के लिए तैयार हो गए। शाम करीब 7.30 बजे मैं टेक्सास के इरविंग में रिट्ज कार्लटन पहुँचा। वहाँ मुझे सैम के विला में ले जाया गया, जहाँ करीब 30 लोग बैठे थे, जिनमें भारत से आए कुछ लोग भी थे।”

इसके बाद पत्रकार शर्मा इंटरव्यू रिकॉर्ड करने के लिए अपना फोन सेट किया और राहुल गाँधी की यात्रा पर चर्चा करने लगे थे। इस दौरान सैम पित्रोदा ने उनके चार सवालों का सहजता से जवाब दिया। उन्होंने अंतिम सवाल पूछा कि ‘क्या राहुल गाँधी अमेरिकी सांसदों के साथ अपनी बैठकों के दौरान बांग्लादेश में मारे जा रहे हिंदुओं का मुद्दा उठाएँगे?’

इस सवाल का जवाब देने से पहले सैम पित्रोदा ने कहा, “यह राहुल और सांसदों पर निर्भर है कि वे तय करें कि क्या प्रासंगिक है। मैं उनकी ओर से नहीं बोल सकता लेकिन…।” इसी बीच वहाँ बैठे लोग हँगामा करने लगे।

रोहित शर्मा ने कहा, “राहुल की टीम के एक सदस्य ने मेरा फ़ोन छीन लिया और चिल्लाने लगा- ”बंद करो! बंद करो!, साक्षात्कार बंद करो” उन्होंने आगे कहा, ”सैम भी मेरी तरह घबराए हुए थे और लोगों से शांत रहने की अपील कर रहे थे। हालाँकि, राहुल गाँधी के टीम के लोगों एवं समर्थकों ने उनकी बात नहीं मानी और मेरी माइक छीनने लगे। मैंने विरोध किया और उन्होंने मोबाइल की रिकॉर्डिंग बंद कर दी।”

इस हंगामे के बीच ही सैम पित्रोदा को राहुल गाँधी से मिलने के लिए एयरपोर्ट ले जाया गया। हालाँकि, कमरे में कम से कम 15 लोग रह गए। रोहित ने आगे कहा, “उन्होंने मुझसे साक्षात्कार से अंतिम प्रश्न हटाने के लिए कहा। मैं उन्हें समझाता रहा कि प्रश्न में कुछ भी विवा दास्पद नहीं है और उनकी हरकतें गलत हैं। इसके बावजूद वे अड़े रहे और मेरा फोन लेकर उसमें खोजबीन करने लगे।”

इसके बाद उन लोगों ने उस साक्षात्कार को पत्रकार की फ़ोटो लाइब्रेरी से डिलीट कर दिया, लेकिन वह डिलीट फ़ोल्डर में वह रह गया और उसे खोलने के लिए पत्रकार के फेस आईडी की जरूरत थी। रोहित ने बताया, “जब मैं वहाँ बैठा था तो दो आदमी मेरे बगल में खड़े थे। उनमें से एक ने चुपके से मेरा फ़ोन मेरे चेहरे के पास लाया और मेरी सहमति के बिना उसे अनलॉक कर दिया।”

इसके बाद उन्होंने डिलीट किए गए फ़ोल्डर से इंटरव्यू को डिलीट करना शुरू कर दिया। iCloud भी चेक किया। रिकॉर्डिंग के दौरान फ़ोन एयरप्लेन मोड में था। इसलिए वीडियो सिंक नहीं हो पा रहा था। इस तरह वे लगभग आधे घंटे तक हर तरह की हरकत करने के बाद शांत बैठ गए। हालाँकि, इसके बाद भी वे फोन नहीं लौटाए और उसे चार दिनों तक अपने पास रखा। पत्रकार के साथ हुई मारपीट में राहुल गाँधी के निजी सचिव अलंकार के शामिल होने की बात भी सामने आई थी।

बाद में इस मामले को लेकर सैम पित्रोदा ने इंडिया टुडे से बातचीत की। सैम पित्रोदा ने अपने ही इंटरव्यू में पत्रकार शर्मा के साथ हुई मारपीट की जानकारी होने से इनकार कर दिया। उन्होंने यह कह कर पीछा छुड़ाने की कोशिश की कि उन्हें इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है और शर्मा को इस जानकारी को सार्वजनिक करने से पहले उनसे बात करनी चाहिए थी।

इंडिया टुडे ने बाद में यह सूचना दी कि उनके पत्रकार से हुई मारपीट के संबंध में पित्रोदा ने फोन पर माफी माँगी है। पित्रोदा ने जाँच करवाने की बात भी शर्मा से कही थी। हालाँकि, राहुल गाँधी या कॉन्ग्रेस की तरफ से प्रेस पर हमले के संबंध में कोई बयान नहीं आया।

जहाँ करेंगे PM मोदी भारतीयों को संबोधित, वहाँ से 27km दूर हिंदू मंदिर पर हमला: कनाडा की तरह अमेरिका में भी खालिस्तानियों का हाथ?

अमेरिका के न्यूयॉर्क स्थित स्वामीनारायण मंदिर को कट्टरपंथियों ने निशाना बनाया है। 16 सितंबर 2024 को न्यूयॉर्क के मेलविले में स्थित BAPS श्री स्वामीनारायण मंदिर के बाहर लगे साइन बोर्ड पर स्प्रे पेंट से हिंदू-घृणा के शब्द लिखे गए। ‘हिंदू-स्तान मुर्दाबाद’ और ‘मोदी टेररिस्ट’ जैसे शब्द लिख कर पूरे देश को बदनाम करने की साजिश की गई।

जिस जगह पर हिंदू मंदिर को कट्टरपंथियों ने निशाना बनाया है, वह भारतीय दृष्टिकोण से फिलहाल बहुत अहम है। ठीक 5 दिन बाद यानी 22 सितंबर 2024 को PM मोदी इस मंदिर से महज 27 किलोमीटर दूर भारतीय समुदाय को संबोधित करने वाले हैं। अमेरिका स्थित भारत के महावाणिज्य दूतावास ने इस घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया जाहिर की है। 

अमेरिका में भारत के महावाणिज्य दूतावास ने लिखा है:

“न्यूयॉर्क के मेलविले में BAPS स्वामीनारायण मंदिर में की गई बर्बरता अस्वीकार्य है। इस मामले में वाणिज्य दूतावास यहाँ रह रहे भारतीय समुदाय के संपर्क में है। साथ ही इस जघन्य कृत्य को करने वाले अपराधियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई के लिए अमेरिकी पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों के समक्ष मामला भी उठाया गया है।”

जाँच की माँग: हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन के समर्थन में कई नेता 

हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन ने BAPS स्वामीनारायण मंदिर को निशाना बनाने वाले लोगों पर कार्रवाई की माँग की है। अमेरिकी न्याय विभाग और होमलैंड सुरक्षा विभाग को जाँच के लिए लिखा गया है। उन्होंने लिखा कि लोकतांत्रिक ढंग से चुने गए नेता को टार्गेट करना, हिंदू मंदिरों पर हमले करना आदि हिंदू-घृणा प्रकट करना ही है। 

खालिस्तानी कट्टरपंथियों ने हाल ही में हिंदू और भारतीय संस्थानों को लेकर धमकियाँ दी थीं। हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन ने इस ओर भी अमेरिकी पुलिस-प्रशासन का ध्यान दिलाया।

BAPS स्वामीनारायण मंदिर पर हमला, खालिस्तान का हाथ?

अमेरिका स्थित हिंदू मंदिरों को निशाना बनाया जा रहा है, ऐसा नहीं है। कुछ दिन पहले ही कनाडा में भी यही किया गया। वहाँ तो यह तक धमकी दी गई कि जो भारतीय मूल के लोग वहाँ रह रहे हैं, वो सब देश छोड़ कर चले जाएँ। 

कनाडा के सांसद चंद्र आर्य ने जब एडमॉन्टन शहर में स्थित BAPS स्वामीनारायण मंदिर पर हमले को लेकर आवाज उठाई तो खालिस्तानी आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू ने सभी भारतीय मूल के लोगों को धमकी दे डाली। सबको कनाडा छोड़ देने का फतवा जारी कर दिया।

विदेश में हिंदू मंदिरों पर बढ़ते हमले, किसकी साजिश?

जुलाई 2024 में कनाडा के एडमॉन्टन शहर में BAPS स्वामीनारायण मंदिर में तोड़फोड़ की गई और दीवार पर विवादित नारे लिखे गए। इसका आरोप भी खालिस्तानी आतंकियों पर लगा था। इसके पहले यहाँ 7 सितंबर 2023 को माता भामेश्वरी दुर्गा मंदिर, 12 अगस्त 2023 को लक्ष्मीनारायण मंदिर और 31 जनवरी 2023 को ब्रैम्पटन स्थित एक प्रमुख हिंदू मंदिर में तोड़फोड़ की गई थी।

दिसंबर 2023 में अमेरिका के कैलिफोर्निया स्थित नेवार्क में स्वामीनारायण मंदिर की दीवारों पर भारत विरोधी नारे लिखे गए। मंदिर की दीवार पर अंग्रेजी में ‘शहीद भिंडरावाला’ और ‘मोदी टेररिस्ट’ लिखा गया था। यही नहीं, मंदिर के बोर्ड पर भी काली स्याही से खालिस्तान लिखा गया था।

सितंबर 2022 में कैरेबियन देश त्रिनिदाद एंड टोबैगो में एक ही सप्ताह में 2 हिंदू मंदिरों को तोड़ कर उन्हें अपवित्र किया गया था। मंदिर में तोड़फोड़ कर देवी काली की मूर्ति को क्षतिग्रस्त कर दिया गया था।

हिंदू-घृणा के नाम पर विदेशों में स्थित हिंदू मंदिरों को आखिर कौन निशाना बना रहा है? क्यों बार-बार ऐसी हिंसक वारदातों के पीछे खालिस्तानियों का हाथ होने के आरोप लगते हैं? और अगर आरोप लगते हैं तो जाँच एजेंसियाँ अब तक क्यों नहीं किसी अंजाम तक पहुँच पाई हैं? हिंदू मंदिर पर हमले को लेकर क्या जाँच एजेंसियाँ भी शक के घेरे में हैं, क्या किसी बड़े नेक्सस के साथ इनका भी घालमेल है? इन सबकी निष्पक्ष जाँच बहुत जरूरी है।

संत नहीं भिंडरावाले, शोषण करते हैं हीरो: मिला मंच तो कंगना रनौत ने खालिस्तानियों से लेकर बॉलीवुड तक के खोल दिए धागे, कहा- इमरजेंसी में कुछ भी गलत नहीं

कंगना रनौत (Kangana Ranaut) ऐसी अदाकारा हैं जो किसी भी विषय पर स्पष्ट राय रखती हैं। समाचार चैनल ‘न्यूज 18 इंडिया’ के कार्यक्रम ‘चौपाल’ में भी सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने अपनी फिल्म ‘इमरजेंसी’ से लेकर बॉलीवुड में यौन शोषण तक पर खुलकर बात की।

कंगना की फिल्म इमरजेंसी (Emergency) बीते 6 सितंबर को रिलीज होनी थी। लेकिन सेंसर बोर्ड से पास नहीं होने के कारण इसकी रिलीज टल गई थी। इस फिल्म पर चल रहे विवादों को लेकर अभिनेत्री सह बीजेपी सांसद ने कहा है कि जरनैल सिंह भिंडरावाले (Jarnail Singh Bhindranwale) कोई संत नहीं था। वह आतंकवादी था।

अमीश देवगन के सवाल का जवाब देते हुए कंगना ने कहा, “मेरी फिल्म (इमरजेंसी) आने को रेडी है। सेंसर सर्टिफिकेट मिला है मेरी फिल्म को। 4 इतिहासकारों ने इसे देखा है। मेरे पास पूरे वैध दस्तावेज हैं। फिल्म में कुछ भी गलत नहीं दिखाया गया है।”

खालिस्तानी आतंकी भिंडरावाले को लेकर उन्होंने कहा, “कुछ लोग हैं जो कहते हैं कि भिंडरावाले जो हैं वो संत हैं। वे एक महान क्रांतिकारी हैं। वे एक लीडर हैं। वे एक धर्मात्मा हैं। ऐसे लोग डरा धमकाकर, देश को जलाने की धमकी देकर, याचिका डालकर विरोध कर रहे हैं। मुझे भी धमकियाँ दी। पिछली सरकारों ने खालिस्तानियों को आतंकवादी घोषित किया है। वह कोई संत नहीं था, जो एके-47 लेकर मंदिर में बैठा था। उनके पास ऐसे ऐसे हथियार थे जो हमारी सेना के पास भी नहीं थे।”

कंगना रनौत ने कहा है कि उनकी फिल्म को लेकर कुछ लोगों को ही आपत्ति है। यही लोग दूसरों को भी भड़का रहे हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब के 99 प्रतिशत लोग भी भिंडरावाले को संत नहीं मानते हैं। वह आतंकवादी है। य​दि वह आतंकवादी है तो मेरी फिल्म रिलीज होनी चाहिए।

नीचे लगे वीडियो में आप 3 मिनट के बाद यह पूरी बातचीत सुन सकते हैं

फिल्म का रिलीज टलने से हुए आर्थिक नुकसान को लेकर बात करते हुए उन्होंने कहा, “मैंने कभी ऐसा नहीं सोचा था कि भिंडरावाले को आतंकवादी दिखाए जाने पर किसी को आपत्ति होगी। मुझे प्रताड़ित किया जाएगा। यह शर्मनाक है। इसका हमें नुकसान उठाना पड़ा है। फिल्म को रिलीज से 4 दिन पहले कैंसिल कर दिया गया था।”

इसी कार्यक्रम के दौरान उन्होंने बॉलीवुड को लेकर भी खुलकर बात की। उन्होंने बॉलीवुड के डबल स्टैंडर्ड पर बात करते हुए फिल्मी सितारों के दाऊद इब्राहिम के साथ कनेक्शन की चर्चा की। बताया कि कैसे उनकी फिल्म की रिलीज टलने पर उन्हें समर्थन नहीं मिला। कैसे उनका घर टूटने पर जश्न मनाया गया।

मलयालम सिनेमा पर हेमा कमिटी की रिपोर्ट ने फिल्म इंडस्ट्री में महिलाओं की स्थिति को चर्चा में ला दिया है। बॉलीवुड को लेकर बात करते हुए कंगना ने कहा, “ये लोग महिलाओं का शोषण करते हैं। महिलाओं को मैसेज कर डिनर के लिए घर पर बुलाते हैं। हीरो लोग महिलाओं का शोषण करते हैं। सबसे ज्यादा शोषण हीरो करते हैं।”

अपने दावों की पुष्टि के लिए उन्होंने कोरियोग्राफर सरोज खान के एक पुराने बयान का भी जिक्र किया। इस बयान में सरोज खान ने कहा था, “रेप तो करते हैं पर रोटी भी देते हैं।”

500 लोगों की हत्या, महिलाओं की पिटाई-दी मौत… सारे मुस्लिम, फिर भी ‘भारत के मुस्लिमों’ पर चुदुर-बुदुर कर रहा ईरान का कठमुल्ला, विदेश मंत्रालय ने कर दिया शांत

ईरान के सुप्रीम लीडर और शियाओं के बड़े धर्मगुरु अयातोल्लाह अल खामनेई ने भारत में मुस्लिम पीड़ित वाले प्रोपेगेंडा को हवा देने की कोशिश की है। खामनेई ने एक ट्वीट में म्यांमार और गाजा की तरह भारत में मुस्लिमों के शोषित होने का दावा किया। खामनेई के इस बयान का भारत ने जवाब देते हुए कहा है कि उन्हें पहले अपने घर में झाँकना चाहिए।

सोमवार (16 सितम्बर, 2024) को ईरान के सुप्रीम लीडर अयातोल्लाह अल खामनेई ने एक ट्वीट किया। उन्होंने लिखा, “इस्लाम के दुश्मनों ने हमेशा हमारी इस्लामी उम्माह वाली इकट्ठा पहचान को निशाना बनाने का प्रयास किया है। अगर हम म्यांमार,गाजा,भारत या किसी और जगह पर मुस्लिम को होने वाले दर्द से अनजान हैं, तो हम खुद को मुसलमान नहीं कह सकते।”

ईरान के सुप्रीम लीडर के इस बयान पर भारत में कड़ी प्रतिक्रिया हुई है। भारत में सोशल मीडिया पर भी ईरान के सुप्रीम के इस बयान की आलोचना की गई। भारतीय विदेश मंत्रालय ने भी खामनेई के इस बयान पर अपना रुख साफ़ कर दिया और ईरान के अल्पसंख्यकों के प्रति खराब रिकॉर्ड पर भी प्रकाश डाला।

भारतीय विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा, “हम ईरान के सुप्रीम लीडर द्वारा भारत में अल्पसंख्यकों के बारे में की गई टिप्पणी की कड़ी निंदा करते हैं। ये फर्जी सूचना पर आधारित हैं और स्वीकार्य नहीं हैं। भारत के अल्पसंख्यकों पर टिप्पणी करने वाले देशों को सलाह है कि वे दूसरों के बारे में कोई भी बात करने से पहले अपना रिकॉर्ड देखें।”

यह कोई पहला मौक़ा नहीं है जब ईरान ने भारत में मुस्लिम पीड़ित होने वाला प्रोपेगेंडा चलाया हो। आयतोल्लाह अल खामनेई ने इससे पहले 2020 में CAA विरोधी दंगों के समय भी भारत में मुस्लिम पीड़ित वाला नैरेटिव चलाने की कोशिश की थी। उन्होंने इस दौरान भारत में हिन्दुओं के अतिवादी होने का आरोप लगाया था।

ईरान खामनेई भारत मुस्लिम

जहाँ एक ओर ईरान के सुप्रीम लीडर खामनेई भारत में मुस्लिमों की स्थिति पर चिंता कर रहे हैं जो किसी भी इस्लामी देश से अच्छी है, वहीं उनके ही देश का अल्पसंख्यकों और महिलाओं के प्रति रिकॉर्ड विश्व में सबसे निचले स्तर का रहा है। भारत में मुस्लिमों पर रोने पीटने वाले वाले ईरान ने वर्ष 2023 में कम से कम 22 औरतों को मौत की सजा दी थी।

इन औरतों को मौत की सजा इसलिए दी गई थी क्योंकि यह आयतोल्लाह के दकियानूसी इस्लामी विचारों को नहीं मानती थीं। जिन महिलाओं को मौत की सजा दी गई उनमें से अधिकांश का दोष यह था कि उन्होंने हिजाब पहनने से इनकार कर दिया था जिसे आयतोल्लाह के इस्लामी राज की नाफ़रमानी माना गया था।

ईरान की लड़की महसा अमीनी का मामला पूरी दुनिया में चर्चित रहा था। महसा अमीनी एक 22 वर्ष की युवती थी जिसे ईरान की पुलिस ने हिजाब का विरोध करने के लिए हिरासत में लिया था। सितम्बर, 2022 में पुलिस की ही हिरासत में महसा अमीनी की मौत हो गई थी। आरोप है कि पुलिस ने महसा अमीनी को यातनाएँ दी जिसके कारण उनकी मौत हुई।

अमीनी की मौत के बाद ईरान में बड़े स्तर पर प्रदर्शन चालू हो गए थे और खामनेई की इस्लामी सत्ता को चुनौती मिलने लगी थी। ईरान की सरकार ने इन विरोध प्रदर्शन को बेरहम तरीके से दबा दिया था। ईरान की सरकार ने इसके लिए सारे हथकंडे अपनाए थे। लगभग 500 लोगों को मार दिया गया था।

ईद मिलाद-उन-नबी के जुलूस में सरदार पटेल को किया अपमानित, महापुरुषों का अपमान: हिन्दू संगठनों ने की कार्रवाई की माँग

उत्तर प्रदेश के बरेली में ईद मिलाद-उन-नबी के जुलूस के दौरान सरदार वल्लभभाई पटेल की प्रतिमा का अपमान किया गया है। यहाँ इस्लामिक कट्टरपंथियों की भीड़ में शामिल कुछ लोगों ने सरदार पटेल की प्रतिमा को जूतों की माला पहना दी है। यह करतूत करने वालों की तादाद 8 से 9 लोगों की बताई जा रही है। पुलिस ने घटना की जाँच शुरू कर दी है।

यह घटना बरेली जिले के थानाक्षेत्र नवाबगंज की है। सोमवार (16 सितंबर 2024) को यहाँ हिन्दू जागरण मंच के हरिपाल सिंह ने थाने में तहरीर दी है। तहरीर में हरिपाल सिंह ने बताया कि सोमवार की सुबह 10:30 से 11:30 के बीच नवाबगंज बाजार से ईद मिलाद-उन-नबी का जुलूस निकला था। इस जुलूस में सैकड़ों की तादाद में लोग शामिल हुए थे। जुलूस के रूट में सरदार वल्लभभाई पटेल की प्रतिमा पड़ती है। आरोप है कि जुलूस की शक्ल में चल रही मुस्लिमों की भीड़ में से 8-9 अज्ञात लोग सरदार पटेल की प्रतिमा पर पहुँच गए।

इन सभी ने सरदार वल्लभभाई पटेल की प्रतिमा को जूतों की माला पहनाई। इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

शिकायतकर्ता ने यह हरकत जानबूझकर देश के महापुरुषों को बदनाम करने की साजिश करार दिया है। शिकायत में आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की गई है। इस हरकत की वजह से सर्व समाज में गुस्सा भी बताया गया है। ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है। पुलिस ने इस शिकायत का संज्ञान लिया है। मामले की जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई के लिए थाना प्रभारी नवाबगंज को जरूरी दिशा निर्देश भी दे दिए गए हैं।

राजस्थान में पहले से तय था जुलूस का रूट, फिर भी अलग मुड़ गई इस्लामी कट्टरपंथियों की भीड़; पुलिस के रोकने पर नोकझोंक-नारेबाजी, लेकिन नहीं चल पाई मनमानी

राजस्थान के बाराँ जिले में बारावफात के मौके पर इस्लामी कट्टरपंथियों की भीड़ ने बवाल किया है। यहाँ तय रुट से अलग जाने की जिद पर आमादा भीड़ पुलिस से ही भिड़ गई। मुस्लिम भीड़ अचानक ही तय रुट से अलग जाने लगी जिसका पुलिस ने विरोध किया। पुलिसकर्मियों से धक्कामुक्की की गई। भीड़ में कुछ लोगों ने नारेबाजी की। फ़िलहाल पुलिस ने काफी मशक्क्त कर हंगामे को शाँत किया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये मामला बाराँ जिले के प्रताप चौक का है। यहाँ सोमवार (16 सितंबर 2024) को मुस्लिम समुदाय के लोगों ने ईद मिलाद-उन-नबी का जुलूस निकाला था। जुलूस में इस्लामी झंडों के साथ सैकड़ों की तादाद में लोग शामिल थे। पुलिस और प्रशासन ने पिछले लम्बे समय से इन जुलूस की तैयारियाँ मुकम्मल की थीं। सभी वर्गों से बात कर के एक रुट तय किया गया था। साथ ही एक नियमावली भी बनाई गई थी, जिसका पालन सबके लिए अनिवार्य किया गया था।

बताया जा रहा है कि दोपहर में यह जुलूस तय रुट से होता हुआ प्रताप चौक पर पहुँचा। तभी इसमें मौजूद कुछ लोगों ने अपना रास्ता बदल कर तय मार्ग से अलग चलना शुरू कर दिया। रुट में बदलाव की कोशिश होती देख कर पुलिस ने उन लोगों को आगे जाने से रोक दिया। इस बात पर रास्ता बदलने पर आमादा लोग भड़क गए। उन्होंने बीच सड़क पर ही हंगामा करना शुरू कर दिया। नारेबाजी के साथ आसपास मौजूद बाकी लोगों को भी भड़काने की कोशिश की गई।

हालाँकि इस हंगामे के बावजूद पुलिस ने तय रुट में किसी भी प्रकार से बदलाव से साफ़ इंकार कर दिया। आखिरकार मौके पर पुलिस के सीनियर अधिकारी पहुँचे। उन्होंने लोगों को नियमों का हवाला देते हुए समझाया। काफी देर की आपाधापी के बाद ईद मिलाद-उन-नबी का जुलूस उसी राह से आगे बढ़ा, जो पहले से ही तय था। पुलिस के मुताबिक बल प्रयोग की जरूरत नहीं पड़ी। जिले के पुलिस अधीक्षक ने लोगों से किसी भी अफवाह पर ध्यान न देने की अपील की है।

जिबरान ने नाबालिग हिन्दू लड़की को दोस्तों के साथ मिल कर घर से उठाया, 4 दिन बाद भी सुराग नहीं: धमकी के बाद परिवार ने छोड़ा घर

उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहाँ अचलगंज थाना क्षेत्र के एक गाँव से एक 16 वर्षीय नाबालिग हिंदू किशोरी का अपहरण कर लिया गया। पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया है कि एक मुस्लिम युवक जिबरान ने अपने साथियों के साथ मिलकर उनकी बेटी को जबरन घर से उठा लिया। इतना ही नहीं, आरोपितों ने धमकी दी कि अगर गाँव में दिखाई दिए, तो पूरे परिवार को गोली मार देंगे।

न्यूज18 की रिपोर्ट के मुताबिक, 12 सितंबर की रात को आरोपित जिबरान अपने दर्जन भर साथियों के साथ पीड़िता के घर पहुँचा। उन्होंने परिवार पर दबाव बनाकर उनकी बेटी को जबरदस्ती उठा लिया। पीड़िता के पिता ने बताया कि आरोपित जिबरान ने धमकी दी कि अगर उन्होंने पुलिस से शिकायत की या गाँव में दिखे, तो उनके पूरे परिवार को जान से मार दिया जाएगा। इस घटना के बाद परिवार ने डर के कारण घर छोड़ दिया और कहीं और जाकर शरण ली।

पीड़िता के पिता ने आरोप लगाया कि आरोपितों ने जबरन उन्हें एक सादे कागज पर अँगूठा लगाने के लिए मजबूर किया। आरोपितों ने दावा किया कि उनकी बेटी 20 साल की है, जबकि वह महज 16 साल की है। इसके बाद, पीड़िता के माता-पिता ने अपने बेटे को दिल्ली में इसकी सूचना दी, जो तुरंत वापस उन्नाव लौट आया और पुलिस से शिकायत की।

पुलिस पर लापरवाही के आरोप

घटना के चार दिन बाद पीड़िता के भाई ने अचलगंज पुलिस थाने में जाकर लिखित शिकायत दी, जिसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया। पुलिस ने अपहरण और अन्य गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज किया और जाँच शुरू कर दी है। हालाँकि, पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि अब तक कोई ठोस सुराग नहीं मिला है और पीड़िता की बरामदगी नहीं हो पाई है।

इस मामले में पुलिस ने चार लोगों को हिरासत में लिया है, लेकिन अब तक किशोरी का कोई पता नहीं चल सका है। पीड़िता के परिवार का आरोप है कि पुलिस इस मामले को गंभीरता से नहीं ले रही और आरोपितों को संरक्षण देने का प्रयास कर रही है। पीड़िता के माता-पिता का कहना है कि उनकी बेटी को किसी मदरसे में छिपाकर रखा गया था, लेकिन अब वहाँ से भी उसकी कोई जानकारी नहीं है।

दबंगों की धमकी और लव जिहाद का आरोप

पीड़िता के भाई ने बताया कि उनकी बहन के अलावा भी गाँव में इसी तरह की घटनाएँ हो चुकी हैं, जहाँ मुस्लिम समुदाय के दबंगों ने अन्य लड़कियों को भी निशाना बनाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिबरान और उसके साथियों ने पहले भी कई बार गाँव में लव जिहाद के जरिए लड़कियों को बहकाने और जबरन शादी कराने की कोशिश की है। पीड़िता के भाई का कहना है कि इस बार भी उनकी बहन के साथ जबरन शादी कराई जा रही है।

परिवार ने लगाई न्याय की गुहार

पीड़िता के माता-पिता अब पूरी तरह से असहाय और डरे हुए हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अपील की है कि उनकी बेटी को जल्द से जल्द ढूंढकर उन्हें सौंपा जाए। पीड़िता के पिता ने कहा, “हमारी बेटी को जबरन उठाकर ले जाया गया है, हम मुख्यमंत्री से अपील करते हैं कि वे हमें न्याय दिलाएँ।” पीड़िता के परिवार ने आरोप लगाया कि गाँव में पहले भी ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं, जहाँ विशेष समुदाय के लोग हिंदू लड़कियों को जबरन उठा ले जाते हैं और उनका धर्म परिवर्तन कराते हैं। इस मामले को लेकर गाँव में भी भय और आक्रोश का माहौल है।

पुलिस की निष्क्रियता पर उठते सवाल

पुलिस की कार्रवाई पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों और पीड़ित परिवार ने पुलिस पर आरोप लगाया है कि वह इस मामले को गंभीरता से नहीं ले रही और लापरवाही बरत रही है। हालाँकि, पुलिस का कहना है कि वे हर संभव प्रयास कर रहे हैं और जल्द ही पीड़िता को बरामद किया जाएगा।

वहीं, सीओ बीघापुर ऋषिकांत शुक्ला ने बताया कि एक नाबालिग लड़की जबरन घर से उठा ले जाने का मामला सामने आया है। आरोपितों के खिलाफ 292/24 धारा 191, 333, 137 दो के अंतर्गत अभियोग पंजीकृत किया गया है। इस संबंध में संदिग्ध चार व्यक्तियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। उन्होंने कहा कि इस मामले में शामिल अन्य अभियुक्तों की गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं, साथ ही अपहृत लड़की की तलाश भी जारी है। आजतक की रिपोर्ट में मुख्य आरोपित का नाम रिजवान बताया जा रहा है।

उत्तर प्रदेश सरकार ने ‘लव जिहाद’ और जबरन धर्म परिवर्तन को रोकने के लिए कड़े कानून बनाए हैं। सरकार ने ऐसे मामलों में उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान किया है और जुर्माने की राशि को भी दोगुना कर दिया है। इसके बावजूद इस तरह की घटनाओं में कमी नहीं आ रही है, जिससे लोगों में डर और असुरक्षा का माहौल बन रहा है।

‘हिंदुस्तान में रहना है तो, ख्वाजा-ख्वाजा कहना है’: गणेश पंडाल के आगे इस्लामी कट्टरपंथियों ने लगाए फिलीस्तीन जिंदाबाद के भी नारे, संदिग्ध को पुलिस से छुड़ा ले गए

उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले में बारावफात के जुलूस में इस्लामी कट्टरपंथियों द्वारा आपत्तिजनक नारेबाजी का मामला सामने आया है। यहाँ गणेश पंडाल के आगे मुस्लिम भीड़ ने हरे झंडे लहराए और उत्तेजक नारेबाजी की गई। भीड़ ने ‘फिलीस्तीन जिंदाबाद’ के नारे भी लगाए गए। वायरल हो रहे वीडियो में पुलिस द्वारा पकड़े गए एक कथित संदिग्ध को कुछ लोगों ने छुड़ा भी लिया। फ़िलहाल प्रशासन पूरे मामले की जाँच करवा रहा है। घटना सोमवार (16 सितंबर 2024) की है।

यह मामला बलरामपुर जिले के मुस्लिम बहुल बाजार उतरौला का है। यहाँ सोमवार (16 सितंबर) को बारावफात का जुलूस निकला था। इस जुलूस में नाबालिग से लेकर बुजुर्ग तक शामिल थे। भीड़ के हाथों में हरे रंग के अलावा फिलीस्तीन के भी झड़े थे। यह भीड़ बाजार में कुछ हिन्दू व्यपारियों द्वारा स्थापित गणेश पंडाल के आगे पहुँच कर रुक गई। पंडाल के आगे कई लोग उत्तेजक नारेबाजी करने लगे।

इस दौरान इस्लामिक कट्टरपंथियों ने “रसूल के गुलाम को मौत भी कबूल है”, “फिलीस्तीन का मुसलमान जिंदाबाद” “मस्जिद ए अक्सा जिंदाबाद” जैसे नारे भी लगाए। कट्टरपंथियों की भीड़ ने नारेबाजी में यह भी कहा कि “हिंदुस्तान में रहना है, तो ख्वाजा-ख्वाजा कहना है”।

ये तमाम नारेबाजी पुलिस के आगे ही की गई है। इसी घटना में एक अन्य वीडियो भी वायरल हो रहा है। इस वीडियो में उतरौला के SHO इंस्पेक्टर संजय दुबे दिखाई दे रहे हैं। संजय दुबे भीड़ में मौजूद किसी संदिग्ध को पकड़ना चाह रहे हैं। उस संदिग्ध पर आपत्तिजनक नारेबाजी का आरोप है। इसी दौरान आसपास अन्य मुस्लिमों की भीड़ जुट जाती है। वो पुलिस पर उस संदिग्ध को छोड़ देने का दबाव बनाते हैं। आखिरकार थोड़ी देर की ना-नुकुर के बाद इंस्पेक्टर ने उस संदिग्ध को छोड़ दिया।

इस हरकत के खिलाफ सिद्धि विनायक सेवा समिति, उतरौला ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत में हिन्दू व्यापारियों ने मुस्लिम भीड़ पर गणेश पंडाल के आगे देश विरोधी नारेबाजी का आरोप लगाया है। शिकायतकर्ताओं के मुताबिक हिन्दुओं में आक्रोश है। आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की माँग भी की गई है। बलरामपुर पुलिस से हिन्दुओं ने अपेक्षा जताई है कि भविष्य में ऐसी हरकत दोबारा न हो। ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है। बलरामपुर पुलिस के मुताबिक मामले की जाँच व अन्य जरूरी कार्रवाई अमल में लाई जा रही है।

बाराबंकी में लव जिहाद: आजम जैदी ने अमन बनकर हिंदू महिला से रचाई शादी, फिर डालने लगा धर्मपरिवर्तन का दबाव, कोर्ट के आदेश के बाद गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में एक बार फिर ‘लव जिहाद’ का मामला सामने आया है। यहाँ एक व्यक्ति ने हिंदू बनकर महिला से शादी की और बाद में उस पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाना शुरू कर दिया। इस मामले में पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है। मामला तब उजागर हुआ जब पीड़ित महिला ने अदालत में शिकायत दर्ज करवाई, जिसके बाद न्यायालय ने पुलिस को कार्रवाई का निर्देश दिया।

धोखे से शादी और उत्पीड़न

पीड़िता के अनुसार, आरोपित मोहम्मद आजम जैदी ने अपना नाम अमन बताकर 2016 में उससे शादी की थी। महिला को शादी के बाद ही ससुराल पहुँचने पर पति की असली पहचान का पता चला। जब उसने इस धोखाधड़ी का विरोध किया तो उसे धमकाया गया और शारीरिक व मानसिक उत्पीड़न किया गया। महिला ने बताया कि शादी के बाद उसका जमकर यौन उत्पीड़न किया गया और धमकी दी गई कि अगर उसने किसी को यह बात बताई, तो उसके साथ और भी बुरा किया जाएगा।

बेटी के जन्म के बाद शुरू हुआ धर्म परिवर्तन का दबाव

2017 में पीड़िता ने एक बेटी को जन्म दिया। इसके बाद से आरोपित ने उस पर इस्लाम धर्म अपनाने का दबाव बनाना शुरू कर दिया। पीड़िता ने बताया कि उसे बार-बार धर्म बदलने के लिए मजबूर किया गया, जबकि उसने इसका विरोध किया। इसी दौरान उसके साथ और भी दुर्व्यवहार किया जाने लगा। पीड़िता ने इस धोखाधड़ी और उत्पीड़न की शिकायत करते हुए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जहाँ से उसे न्याय की उम्मीद मिली।

अदालत के निर्देश पर पुलिस कार्रवाई

मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सुधा सिंह की अदालत ने महिला की शिकायत पर गंभीरता से संज्ञान लेते हुए पुलिस को मामले में कार्रवाई करने का आदेश दिया। पुलिस ने आईपीसी की धारा 498ए (पत्नी के साथ क्रूरता), 323 (चोट पहुंचाना), 504 (अपमान), 506 (धमकी) और 376 (बलात्कार) के तहत केस दर्ज किया। इसके अलावा, मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण अधिनियम और उत्तर प्रदेश के गैरकानूनी धर्म परिवर्तन अधिनियम के तहत भी मामला दर्ज किया गया।

पुलिस ने आरोपित को किया गिरफ्तार

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (दक्षिण) अखिलेश नारायण सिंह ने बताया कि अदालत के निर्देश पर तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपित मोहम्मद आजम जैदी को रविवार को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने बताया कि आरोपित ने पीड़िता के साथ कई बार मारपीट भी की थी। कोतवाली प्रभारी निरीक्षक अजय कुमार त्रिपाठी ने कहा कि केस दर्ज होने के 24 घंटे के भीतर आरोपित को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस ने यह भी बताया कि जल्द ही मामले की जांच पूरी कर अदालत में चार्जशीट दाखिल की जाएगी।

लव जिहाद और यूपी का सख्त कानून

उत्तर प्रदेश में ‘लव जिहाद‘ जैसे मामलों को रोकने के लिए पहले से ही कानून लागू है, लेकिन राज्य सरकार ने इस कानून को और सख्त बना दिया है। यूपी सरकार ने ‘प्रोहिबिशन ऑफ अनलॉफुल कन्वर्जन ऑफ रिलीजन (अमेंडमेंट) बिल 2024’ पास किया है, जिसके तहत जबरन, लालच देकर, या धोखे से धर्म परिवर्तन करवाने पर उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान है। इस नए कानून के तहत अगर कोई व्यक्ति महिला, नाबालिग या किसी भी व्यक्ति का धर्म परिवर्तन करने के लिए जबरन या धोखाधड़ी का सहारा लेता है, तो इसे एक गंभीर अपराध माना जाएगा।

नए कानून के अंतर्गत सजा को भी सख्त कर दिया गया है, जिसमें न केवल उम्रकैद की सजा बल्कि जुर्माने की रकम भी दोगुनी कर दी गई है। इस कानून के तहत यदि कोई व्यक्ति शादी का झूठा वादा कर या शादी के बाद धर्म परिवर्तन का दबाव बनाता है, तो उसे भी कड़ी सजा दी जाएगी।

बाराबंकी का यह मामला दिखाता है कि किस तरह से धोखाधड़ी कर धर्म परिवर्तन का प्रयास किया जाता है। आरोपित ने पहले हिंदू बनकर महिला से शादी की और फिर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाना शुरू कर दिया। हालाँकि, महिला ने साहस दिखाते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया और आरोपित के खिलाफ मामला दर्ज करवाया। पुलिस ने भी त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपित को गिरफ्तार कर लिया। यह घटना यह भी साबित करती है कि उत्तर प्रदेश सरकार का लव जिहाद के खिलाफ सख्त कानून ऐसे मामलों पर कड़ी नजर रखता है और दोषियों को कानून के दायरे में लाता है।

सरकार द्वारा बनाए गए नए कानूनों से ऐसे मामलों में और सख्ती आ सकती है, जिससे महिलाएँ और कमजोर वर्ग के लोग सुरक्षित रह सकें। यह कानून उन लोगों के खिलाफ एक बड़ा हथियार है जो शादी और प्यार का दिखावा कर धार्मिक धोखाधड़ी का खेल खेलते हैं।

ईद के जुलूस से बजरंग बली के मंदिर पर पत्थरबाजी, श्रद्धालु के घायल होने के बाद मंदसौर की सड़कों पर हनुमान चालीसा: कड़ा एक्शन न होने पर आंदोलन का अल्टीमेटम

मध्य प्रदेश के मंदसौर में साम्प्रदायिक तनाव की खबर है। यहाँ ईद मिलादुन्नबी के जुलूस के दौरान हिंसा भड़क गई। हिंसा की वजह जुलूस से हनुमान मंदिर पर पत्थर फेंका जाना बताया जा रहा है। इस पत्थरबाजी से एक श्रद्धालु घायल हो गया है। इस घटना के विरोध में हिन्दू समुदाय के लोग भी सड़क पर उतर आए। पत्थरबाज की जल्द गिरफ्तारी की माँग को ले कर हंगामा हुआ। पुलिस के आगे हनुमान चालीसा का पाठ भी किया गया। फिलहाल पुलिस के केस दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी है। घटना सोमवार (16 सितंबर, 2024) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह घटना मंदसौर के नेहरू बस स्टैंड क्षेत्र की है। यहाँ बालाजी मंदिर है जिसमें बजरंग बली सहित अन्य कई देवी-देवताओं की प्रतिमा स्थापित है। मंदिर आसपास के हिन्दू श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। हर मंगलवार को यहाँ आम दिनों के मुकाबले अधिक भीड़ होती है। सोमवार को इसी मंदिर के सामने से मुस्लिम समुदाय के लोग ईद मिलादुन्नबी का जुलूस ले कर निकल रहे थे। आरोप है कि इसी दौरान सैकड़ों की संख्या में मौजूद भीड़ में से किसी एक ने मंदिर के अंदर पत्थरबाजी कर दी।

जुलूस से फेंका गया एक पत्थर मंदिर में मौजूद एक श्रद्धालु को लगा जिस से वो घायल हो गया। घायल का इलाज करवाया गया। इस बीच मामले की जानकारी मिलते ही हिन्दू संगठन से जुड़े लोग आक्रोशित हो गए। उन्होंने सड़क पर उतर कर प्रदर्शन शुरू कर दिया। इस प्रदर्शन को कुछ स्थानीय व्यापारियों का भी समर्थन मिला और बाजार बंद हो गए। हालात ऐसे बने कि दोनों पक्षों के आमने-सामने आ जाने की नौबत आ गई। मामले की सूचना पर पुलिस बल फ़ौरन ही घटनास्थल पर पहुँचा।

कार्रवाई की माँग पर अड़े हिन्दू संगठन के सदस्यों की पुलिस से नोकझोंक भी हुई। विरोधस्वरूप सड़क पर हनुमान चालीसा भी पढ़ी जाने लगी। उन्होंने पुलिस पर इस घटना को हल्के में लेने का आरोप लगाया। प्रदर्शनकारियों को समझाने के लिए तमाम सीनियर प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुँचे। बालाजी मंदिर के पुजारी शरद की तहरीर पर अज्ञात पत्थरबाज के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है। पुलिस टीमों ने जाँच शुरू कर दी है। प्रशासन का दावा है कि पत्थरबाज को जल्द गिरफ्तार भी कर लिया जाएगा।

विश्व हिन्दू परिषद ने इस घटना पर नाराजगी जताते हुए इसे सोची समझी साजिश करार दिया है। भारतीय जनता पार्टी के मंदसौर के पदाधिकरियों ने भी एलान किया है कि अगर जल्द ही हमलावर पर एक्शन न हुआ तो आंदोलन किया जाएगा। संवेदनशील इलाकों में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। CCTV फुटेज व अन्य साक्ष्यों से हमलावर की गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं।