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साढ़े तीन साल की छात्रा से कंप्यूटर टीचर कासिम रेहान ने किया रेप, प्राइवेट स्कूल पर मामला दबाने का आरोप: बच्ची के प्राइवेट पार्ट पर माँ ने देखा घाव, फिर हुआ खुलासा

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के एक प्राइवेट स्कूल में कासिम रेहान नाम के टीचर ने साढ़े 3 साल की अपनी छात्रा से रेप किया है। कासिम इस स्कूल के आईटी डिपार्टमेंट में पढ़ाता था। घटना सोमवार (16 सितंबर 2024) की है। पुलिस ने केस दर्ज कर के आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है। स्कूल प्रशासन पर घटना को दबाकर आरोपित को बचाने की कोशिश का आरोप लगा है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, भोपाल के कमलानगर थाना क्षेत्र के एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ने वाली साढ़े 3 साल की पीड़िता सोमवार को अपने घर पहुँची। पीड़िता की माँ को बेटी की तबीयत ठीक नहीं लगी। उसने जाँच की तो उसके प्राइवेट पार्ट पर घाव दिखा। जब माँ ने बेटी से इसकी वजह पूछी तो असलियत सामने आई। बच्ची ने टीचर कासिम रेहान की करतूत बताई।

कासिम रेहान स्कूल में आईटी का टीचर है। इसके बाद बच्ची के माता-पिता स्कूल पहुँचे। यहाँ उन्होंने प्रिंसिपल व मैनेजमेंट सहित अन्य स्टाफ से कासिम की करतूत बताई। पीड़िता के परिजनों का आरोप है कि उनकी शिकायत पर किसी ने ध्यान नहीं दिया और न ही कासिम के खिलाफ कोई कार्रवाई हुई। आखिरकार पीड़िता के परिजनों ने पुलिस में तहरीर दी।

पीड़िता के परिजनों की इस तहरीर का संज्ञान लेकर पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है। इस FIR में कासिम रेहान को नामजद आरोपित बनाया गया है। उस पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं सहित पॉक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया है। पुलिस ने कासिम को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया है। मामले की जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

स्कूल की प्रिंसिपल स्वाति ने मामले को दबाने या शिकायत पर ध्यान नहीं देने का खंडन किया है। उन्होंने बताया कि घटना की जानकारी उन्हें पुलिस से मिली। आरोपित पर कड़ी कार्रवाई का आश्वासन देते हुए मध्य प्रदेश के स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने कहा कि इस मामले को दबाने जैसी शिकायतों की भी जाँच की जाएगी। अगर आरोप सच निकला तो स्कूल प्रबंधन पर भी कार्रवाई होगी।

बांग्लादेश की सेना को मिली पुलिस-जज वाली ताकत, बिना वारंट किसी को भी तत्काल कर सकेगी गिरफ्तार: अंतरिम सरकार ने दिया पावर, सजा भी सुनाएगी

बांग्लादेश की फौज अब देश में पुलिस और जज का काम कर सकेगी। इसकी मंजूरी उसे मोहम्मद युनुस वाली अंतरिम सरकार ने दी है। बांग्लादेश की फौज को पुलिस के तौर पर काम करने का अधिकार मिलने का अर्थ है कि यह अब देश भर में लोगों को गिरफ्तार कर सकेगी और उन्हें हिरासत में ले सकेगी। इसके अलावा उसे लोगों को गिरफ्तारी में रखने का भी अधिकार होगा क्योंकि उसके पास जज वाली शक्तियाँ होंगी। बांग्लादेश के आंतरिक मामलों में फौज का दखल अब बढ़ने का अंदेशा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बांग्लादेश के 1898 के CRPC के तहत फ़ौज को यह शक्तियाँ दी गईं हैं। यह शक्तियाँ फौज को 60 दिन के लिए दी गई हैं। युनुस सरकार ने हाल ही में इस निर्णय का ऐलान किया है। युनुस सरकार के इस निर्णय के तहत अब फौज के अफसर जज का काम करेंगे। यह फौजी अफसर लोगों को जेल भेजने, सजा सुनाने और जेल में रखने के आदेश सुना सकेंगे। यह आदेश ढाका समेत शहरी इलाकों के बाहर के क्षेत्र में लागू होगा।

बांग्लादेशी फौज के जवान देश के भीतर पुलिस की तरह काम करेंगे और किसी को भी गिरफ्तार कर सकेंगे और साथ ही रिपोर्ट भी दर्ज कर सकेंगे। आलोचकों का कहना है कि बांग्लादेश की फौज को यह ताकत मिलने से वह आंतरिक मामलों में दखल देगी और इससे उसे असीमित शक्तियाँ मिल गई है। बांग्लादेश की फौज लगातार जुलाई महीने से ही देश के अलग-अलग इलाकों में तैनात है। तब यह आरक्षण विरोधी आन्दोलन में हुई हिंसा रोकने के लिए तैनात की गई थी।

बांग्लादेश में 5 अगस्त, 2024 को प्रधानमंत्री शेख हसीना का तख्तापलट हो गया था और उन्हें देश छोड़कर भारत आना पड़ा था। इसके बाद मोहम्मद युनुस की अंतरिम सरकार ने यहाँ कामकाज सम्भाला था। देश की सेना ने इस बात का ऐलान किया था कि यहाँ अब अंतरिम सरकार बनाई जाएगी। अंतरिम सरकार ने अब सेना को यह शक्तियाँ दे दी हैं। सेना को यह शक्तियाँ देने के पीछे एक कारण यह भी है देश भर में पुलिस व्यवस्था को हालिया प्रदर्शन में काफी नुकसान पहुँचा है।

पुलिसकर्मी हालिया प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों के निशाने पर रहे थे। बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की हत्या भी कर दी गई थी। कई जगह पुलिसकर्मियों को भीड़ ने मारा था। इस कारण कई पुलिस वालों ने काम पर लौटने से भी मना किया था। कई जगह थानों को जला दिया गया था। सरकार बदलने के बाद देश भर में पुलिस व्यवस्था चरमरा गई है, इसके बाद फ़ौज को सामान्य कानून व्यवस्था के लिए सड़कों पर उतार दिया गया था। अब उसे अधिकार भी मिल गए हैं।

रोटियाँ बनाने से पहले उनमें थूकता था कारीगर जाने आलम: वीडियो हुआ वायरल तो पुलिस ने दबोचा… वकील शाही चिकन कॉर्नर भी हुआ बंद

उत्तर प्रदेश के नोएडा में खाने-पीने की चीजों पर थूकने का एक और मामला सामने आया है। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में दिख रहा है कि एक ढाबे पर रोटियाँ बना रहा कारीगर उन पर थूक रहा है। कारीगर आलम को पुलिस ने मंगलवार (17 सितंबर 2024) को गिरफ्तार कर लिया और ढाबे को बंद करवा दिया है। आलम इस ढाबे पर पिछले 8 वर्षों से काम कर रहा था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह मामला नोएडा के थाना क्षेत्र दनकौर का है। सोमवार (16 सितंबर) को यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वायरल वीडियो सितारगंज रोड स्थित एक ढाबे की है, जिसका नाम वकील शाही चिकन कॉर्नर है। ढाबे के बाहर खड़े होकर किसी ने लगभग 37 सेकेंड तक इस वीडियो को बनाया है।

इस वीडियो में तंदूरी रोटी बनाने वाला कारीगर अजीब हरकतें करता नजर आ रहा है। लोगों का आरोप है कि वह रोटियों पर थूक रहा है। इस वीडियो के बाद कारीगर पर कार्रवाई की माँग शुरू हो गई। इस वीडियो को देखकर आसपास के लोगों में रोष फ़ैल गया। मंगलवार (17 सितंबर) को नोएडा पुलिस ने इस वीडियो का संज्ञान लिया और केस दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी।

जाँच में पता चला कि रोटियों पर थूक रहे कारीगर का नाम जाने आलम है। जाने आलम इस ढाबे पर पिछले 8 वर्षों से रोटियाँ बना रहा था। वह मूल रूप से नोएडा के ही जारचा थाना क्षेत्र का रहने वाला है। जाने आलम को गिरफ्तार करके अदालत में पेश किया गया है। पुलिस ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है।

विश्व हिन्दू परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने आलम पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है। उन्होंने ऐसी मानसिकता पर चिंता जताई है। पुलिस ने फिलहाल होटल को बंद करा दिया है। वकील शाही चिकन कॉर्नर नाम का यह ढाबा एक दशक से अधिक समय से दनकौर क्षेत्र में बिहारी लाल चौक पर चल रहा था। यहाँ नॉनवेज पसंद करने वाले तमाम लोग आया करते थे।

भिवंडी में मस्जिद के पास गुजर रही थी गणपति विसर्जन शोभायात्रा, अचानक होने लगा पथराव: हालात को सँभालने के लिए पुलिस ने किया लाठीचार्ज, कई लोग घायल

महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में गणपति विसर्जन के लिए मंगलवार (17 सितंबर 2024) को निकाली जा रही शोभायात्रा पर एक मस्जिद के पास हमला कर दिया गया। पत्थरबाजी की वजह से भगवान गणेश की मूर्ति भी खंडित हो गई। घटना के हिन्दू पक्ष में आक्रोश फैल गया और दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। हालात को सँभालने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करनी पड़ी, जिसमें कुछ लोग घायल हो गए।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, मुंबई के भिवंडी इलाके की घुघतनगर में मंगलवार की देर रात गणपति विसर्जन की शोभायात्रा निकाली गई। इसमें युवाओं के साथ-साथ महिलाएँ, बच्चे और बूढ़े सहित सैकड़ों लोग शामिल थे। शोभायात्रा प्रतिमा विसर्जित के लिए कामवारी नदी की तरफ जा रहा था। शोभायात्रा वंजारपट्टी नाका इलाके में हिंदुस्तानी मस्जिद के सामने जैसे ही पहुँची, वैसे ही पथराव शुरू कर दिया गया।

अचानक हुए इस हमले से लोगों में अफरा-तफरी मच गई। इतना ही नहीं, गणपति की प्रतिमा को भी नुकसान पहुँचा। आसपास के हिन्दुओं को इस हमले की जैसे ही जानकारी मिली, वे घटनास्थल पर पहुँच गए। हिंदुओं ने हमलावरों पर कठोर कार्रवाई की माँग करते हुए नारेबाजी करने लगे। इधर, हमलावरों की तरफ से भी जमावड़ा शुरू हो गया। दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए, जिससे हालत तनावपूर्ण हो गए।

घटनास्थल पर मौजूद पुलिस बल ने हालात को सँभालने की कोशिश की, लेकिन हालात बिगड़ गए तो भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। हमले और फिर लाठीचार्ज की वजह से कई लोग घायल हो गए। इस मामले में पुलिस ने कुछ लोगों को हिरासत में भी लिया है। पुलिस अधिकारी ज्ञानेश्वर चव्हाण ने बताया कि इस मामले में कार्रवाई की जा रही है।

ACP ज्ञानेश्वर चव्हाण का कहना है कि विसर्जन के कार्यक्रम को शांतिपूर्वक सम्पन्न करवा दिया गया है। हालात पूरी तरह से नियंत्रण में हैं। उन्होंने कहा कि हमलावरों की पहचान करवाई जा रही है। हिरासत में लिए गए लोगों से भी पूछताछ चल रही है। बकौल ज्ञानेश्वर चव्हाणके, चिन्हित किए गए सभी आरोपितों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

हिरोइन को अगवा कर कार में 2 घंटे दरिंदगी, ब्लैकमेल करने को बनाई Video… यौन शोषण के जिस केस के बाद बनी हेमा कमिटी, जानिए उसमें शामिल हीरो को सुप्रीम कोर्ट ने क्यों दी जमानत

साल 2017 में अपहरण कर मलयालम फिल्मों की एक हिरोइन का यौन शोषण किया गया। इस घटना के बाद जस्टिस हेमा कमेटी का गठन हुआ, जिसकी रिपोर्ट (Justice Hema Committee Report) इस समय चर्चा में है। अब सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले के मुख्य आरोपित अभिनेता सुनील एनएस (Sunil N S) को जमानत दे दी है।

सुनील एनएस को पल्सर सुनी (Pulsar Suni) के नाम से भी जाना जाता है। उसे फरवरी 2017 में गिरफ्तार किया गया था और वह तब से ही जेल में बंद है। सुप्रीम कोर्ट ने 17 सितंबर 2024 को जमानत पर रिहा करने के लिए एक सप्ताह के भीतर निचली अदालत में पेश करने के निर्देश दिए हैं।

हिरोइन के यौन शोषण का मामला

पीड़ित हिरोइन तमिल, कन्नड़ और मलयालम फिल्मों में काम कर चुकी है। 17 फरवरी 2017 की रात उसे कुछ लोगों ने अगवा कर लिया। कथित तौर पर अपहरण के बाद कार में करीब 2 घंटे तक उसके साथ छेड़छाड़ की गई। ब्लैकमेल करने के लिए पूरी घटना का वीडियो भी बनाया।

इस मामले में 10 लोग आरोपित बनाए गए। इनमें अभिनेता दिलीप भी शामिल है। करीब 6 महीने जेल में बिताने के बाद उसे जमानत मिल गई थी। आरोप यह भी है कि दिलीप के इशारे पर ही यौन शोषण की यह घटना हुई। सुनी को इस मामले में पहला आरोपित बनाया गया था। घटना के तुरंत बाद ही उसकी गिरफ्तारी हुई और उसके बाद से वह जेल में ही बंद है।

पल्सर सुनी को क्यों मिली जमानत

सुनील एनएस की जमानत याचिका पर सुनवाई जस्टिस अभय एस ओका और पंकज मित्तल की पीठ ने की। पीठ ने कहा कि सुनी लंबे समय से जेल में बंद हैं। ट्रायल जल्द पूरी होने की संभावना नहीं है। इसी मामले में सह आरोपित दिलीप को जमानत मिल चुकी है। लिहाजा सुनील एनएस को भी जमानत पर रिहा किया जा सकता है।

जमानत की शर्तें तय करने के लिए सुनील एनएस को निचली अदालत में पेश करने के निर्देश दिए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने उस जुर्माने को माफ करने से इनकार कर दिया है जो सुनील एनएस पर हाई कोर्ट ने लगातार जमानत याचिका दाखिल करने के कारण लगाई थी। केरल सरकार के वकील ने अभिनेता को ‘समाज के लिए खतरा’ बताते हुए जमानत का विरोध किया था।

जब जमानत याचिका के कारण लगा जुर्माना

अभिनेता सुनील एनएस को एक दिन का टेंपरेरी बेल अप्रैल 2022 में अपने पिता के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए मिला था। उसने मार्च 2022 में पहली बार जमानत के लिए केरल हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। पर राहत नहीं मिली। इसके बाद वह जुलाई 2022 में सुप्रीम कोर्ट पहुँच गया, लेकिन जमानत नहीं मिली।

दूसरी बार उसने हाई कोर्ट में मार्च 2023 में जमानत याचिका दायर की। यह भी खारिज हो गई। इसे भी उसने अप्रैल 2023 में सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। इसी साल 3 जून को हाई कोर्ट ने बेल की उसकी दसवीं याचिका खारिज करते हुए 25 हजार का जुर्माना लगाया था।

हेमा कमेटी की रिपोर्ट के बाद जमानत

सुनील एनएस को जमानत जस्टिस हेमा कमेटी की रिपोर्ट सार्वजनिक होने के करीब एक महीने बाद मिली है। इस कमेटी का गठन 2017 के यौन शोषण की घटना के बाद ही केरल सरकार ने किया था। रिटायर्ड जस्टिस हेमा, अभिनेत्री शारदा और रिटायर्ड IAS केबी वलसला कुमारी की तीन सदस्यीय कमेटी का काम मलयालम फिल्म इंडस्ट्री में ​महिलाओं के यौन शोषण का पता लगाना था।

इस कमेटी ने दिसंबर 2019 में ही केरल सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंप दी थी। लेकिन इसे 18 अगस्त 2024 को सार्वजनिक किया गया। इस रिपोर्ट ने फिल्म इंडस्ट्री में यौन शोषण को फिर से चर्चा में ला दिया है। कई लोगों ने हैरान करने वाली आपबीती सुनाई है। मलयालम फिल्म इंडस्ट्री के कई बड़े नाम पर गंभीर आरोप लगे हैं।

पेजर ब्लास्ट से 500+ की गई आँख, फिर भी क्यों इस्तेमाल करता है हिजबुल्लाह, हमास के आतंकी ऐसे हमलों से कितने महफूज: जानिए सब कुछ

मध्य पूर्वी देश लेबनान के भीतर मंगलवार (17 सितम्बर, 2024) को एकाएक करके लगभग 3,000 धमाके हुए। यह धमाके इस्लामी आतंकी समूह हिजबुल्लाह से जुड़े लोगों के पास मौजूद पेजर में हुए। हजारों पेजर एक-एक करके फट गए और इस कारण 3000 लोग घायल हुए। 9 लोगों की मौत भी हो गई। इस हमले में ईरान के राजदूत तक घायल हो गए।

हमले की शंका की सुई इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद की तरफ गई है। हिजबुल्लाह ने इस हमले का बदला लेने की बात कही है। लेकिन इस बीच सवाल उठ रहे हैं कि आखिर हिजबुल्लाह स्मार्टफोन, सैटेलाईट फोन और कम्प्यूटर, AI जैसी नई तकनीक होने के बाद भी लगभग 50 साल पुरानी तकनीक का इस्तेमाल क्यों करता है।

इस बीच यह भी सवाल उठा कि इजरायल से सैकड़ों किलोमीटर दूर लेबनान में अगर मोसाद ने धमाके करवा दिए तो आखिर वह गाजा में आतंकियों को निशाना क्यों नहीं बना पा रहा। यह भी पता लगाने की कोशिश हो रही है कि आखिर यह हमला हुआ कैसे।

पेजर क्यों इस्तेमाल करता है हिजबुल्लाह?

हिजबुल्लाह से जुड़े आतंकी और बाकी लोग आपस में बातचीत करने के लिए पेजर का इस्तेमाल करते आए हैं। पेजर पर छोटे-छोटे संदेश आपस में साझा किए जाते हैं। हिजबुल्लाह के आतंकी इस पर कोडवर्ड में भी बात करते हैं। हिजबुल्लाह अपने आतंकियों के लिए खुद ही पेजर खरीदता है।

जिन पेजरों में धमाका हुआ, वह भी हाल ही में खरीदे गए थे। बताया गया कि हिजबुल्लाह ने कुल 5000 पेजर खरीदे थे और इन्हें कुछ दिनों पहले इससे जुड़े लोगों में वितरित किया गया था। पेजर का अविष्कार 1950 के आसपास हुआ था। यह 1990 और 2000 के दशक में काफी पॉपुलर थे। इनका मेडिकल क्षेत्र में अब भी उपयोग होता है।

हिजबुल्लाह द्वारा इसका इस्तेमाल किए जाने के पीछे कारण है कि इसमें भेजे जाने वाले संदेश और उसे पाने वाले को ट्रैक नहीं किया जा सकता। पेजर पर भेजे जाने वाले संदेश रेडियो फ्रीक्वेंसी के द्वारा भेजे जाते हैं। जब पेजर नम्बर पर संदेश भेजता है तो यह पहले एक ऑपरेटर दफ्तर में जाता है और फिर उस व्यक्ति को भेज दिया जाता है जिसे यह संदेश मिलना है।

हर पेजर यूजर का अपना नम्बर होता है। कई पेजर ऐसे होते हैं जिन पर केवल संदेश प्राप्त ही किया जा सकता है। इस तरह के पेजर उस व्यक्ति की कोई लोकेशन नहीं वापस भेजते जिसे यह संदेश मिला है। संभवतः हिजबुल्लाह आतंकियों के पास यही पेजर थे, जिन पर उन्हें निर्देश मिला करते थे। लोकेशन वापस ना भेजे जाने के कारण इसे ट्रैक नहीं किया जा सकता।

पेजर का इस्तेमाल इसलिए भी होता है क्योंकि इसके सिग्नल फोन की तुलना में कहीं अधिक मजबूत होते हैं। हिजबुल्लाह लम्बे समय से इजरायली सुरक्षा एजेंसियों से बचने के लिए पेजर का इस्तेमाल करता आया है। उसने अपने आतंकियों के फोन उपयोग करने पर प्रतिबंध लगाया हुआ है।

इसके अलावा हिजबुल्लाह टेलीफोन का इस्तेमाल करता है और उन पर कोड में बात करता है। यह कोड रोज बदल दिए जाते हैं। इजरायल की फोन और कम्प्यूटर ट्रैक करने के संबंध में काफी अच्छी क्षमता है और वह साइबर युद्ध के मामले में हिजबुल्लाह से कोसों आगे है।

ऐसे में हिजबुल्लाह सबसे पुरानी तकनीक का इस्तेमाल करता है ताकि उसके लोगों की जानकारी किसी को ना हो। हालाँकि, इस बीच जहाँ हिजबुल्लाह से जुड़े 3000 लोगों पर हमला हुआ, वहीं गाजा में मौजूद हमास के आतंकी ऐसे हमलों से बचे हुए हैं। इस संबंध में भी सवाल उठे हैं।

गाजा के आतंकी कैसे बच रहे?

जहाँ एक ओर इजरायल से सैकड़ों किलोमीटर दूर हजारों हिजबुल्लाह आतंकियों को इजरायल द्वारा निशाना बनाने का दावा हुआ वहीं गाजा में आतंकियों को ढूंढ ढूंढ कर ही मारना पड़ रहा है। दरअसल, इसके पीछे हमास के आतंकियों की अपनी तकनीक है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हमास के आतंकी गाजा के भीतर अपने इन्टरनेट और अपने टेलीफोन नेटवर्क का इस्तेमाल करते हैं। गाजा के आतंकियों को बाहरी किसी भी नेटवर्क पर निर्भर नहीं रहना पड़ता और ऐसे में उस पर हमला काफी मुश्किल है।

हिजबुल्लाह पर पेजर हमला कितना बड़ा?

पेजर के जरिए किए गए इस हमले पर पूरी दुनिया चकित है। लोगों का कहना है कि एक साथ इतनी बड़ी आबादी को निशाना बनाना अचरज में डालने वाला है। इसके अलावा इसके लिए पेजर को निशाना बनाना और आश्चर्यचकित करने वाली बात है। पेजरों के फटने के कारण ईरान के भीतर लगभग 3000 लोग घायल हैं और 9 लोगों की अब तक मौत भी हो चुकी है। घायल होने वालों में लेबनान में ईरान के राजदूत मुजतबा अमानी भी शामिल हैं। बताया जा रहा है कि उनकी एक आँख इस हमले में खराब हो गई है।

सिर्फ ईरानी राजदूत ही नहीं बल्कि हिजबुल्लाह से जुड़े 500 लोगों के इन हमलों में आँख गँवाने का दावा किया गया है। हिजबुल्लाह ने कह़ा है कि वह इस हमले के लिए पूरी तरह इजरायल को जिम्मेदार मान रहा है और उसने इसका बदला लेने की बात कही है। हिजबुल्लाह ने कहा कि इजरायल ने 5000 पेजर में विस्फोटक लगाए थे। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि इजरायल ने यह हमला इसलिए कर दिया क्योंकि उसे डर था कहीं यह पूरी कार्रवाई लीक ना हो जाए।

कौन से पेजर थे, कम्पनी ने क्या कहा?

बताया गया है कि जिन पेजरों में धमाका हुआ है, वैसे पेजर ताइवान की एक कंपनी गोल्ड अपोलो बनाती है। हालाँकि, गोल्ड अपोलो ने हिजबुल्लाह को पेजर बेचने से इनकार किया है। गोल्ड अपोलो ने बताया है कि उनके पेजर मॉडल का लाइसेंस एक हंगरी की कंपनी के पास भी है और हिजबुल्लाह वाले पेजर वहीं बनाए गए थे। आशंका जताई गई है कि इजरायल ने यह पेजर हिजबुल्लाह के पास पहुँचने से पहले ही पा लिए और इनमें किसी तरह का विस्फोटक लगा दिया और बाद में इन्हें उड़ा दिया।

दिल्ली के जिस कार्यक्रम में लगे ‘कश्मीर माँगे आजादी’ के नारे, उसके मंच पर गिलानी के साथ थे दिल्ली की नई CM के माता-पिता: स्वाति मालीवाल ने आतिशी पर फोड़ा एक और बम

आम आदमी पार्टी (AAP) ने आतिशी को 17 सितंबर 2024 को विधायक दल का नेता चुना। वे अरविंद केजरीवाल की जगह लेंगी। दिल्ली शराब घोटाले में जमानत पर बाहर आए केजरीवाल ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा (Arvind Kejriwal Resignation) दे दिया है। इसके बाद से ही दिल्ली की नई सीएम (Delhi CM) बनने जा रहीं आतिशी (Atishi Marlena) विवादों में हैं।

आप की ही राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल (Swati Maliwal) ने आतिशी के माता-पिता पर एसएआर गिलानी (Syed Abdul Rahman Geelani) से गहरे संबंध रखने के आरोप लगाए हैं। कहा है कि अफजल गुरु के समर्थन में दिल्ली के प्रेस क्लब में हुए कार्यक्रम के मंच पर आतिशी के माता-पिता भी मौजूद थे।

X पर किए गए पोस्ट में मालीवाल ने लिखा है, “आतिशी मर्लेना के माता-पिता के एसएआर गिलानी के साथ गहरे संबंध थे। गिलानी ने 2016 में अफजल गुरु की याद में दिल्ली के प्रेस क्लब में एक प्रोग्राम किया था। उस प्रोग्राम में आतिशी मर्लेना के माता-पिता स्टेज पर गिलानी के साथ थे। इस प्रोग्राम में नारे लगाए गए थे- एक अफजल मारोगे तो लाखों पैदा होंगे, कश्मीर माँगे आजादी। आतिशी मर्लेना के माता-पिता ने ‘अरेस्ट एंड टॉर्चर आफ सैयद गिलानी (Arrest and torture of Syed Geelani)’ नाम से लेख लिखे हैं। भगवान दिल्ली की रक्षा करें!”

गौरतलब है कि एसएआर गिलानी का 2019 में इंतकाल हो चुका है। वह दिल्ली यूनिवर्सिटी का प्रोफेसर था। 2001 में भारतीय संसद पर हुए आतंकी हमले में उसका नाम आया था। उसे निचली अदालत ने फाँसी की सजा भी सुनाई थी। लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट ने बरी कर दिया था। स्वाति मालीवाल ने दिल्ली प्रेस क्लब के जिस कार्यक्रम का जिक्र किया है, उसका आयोजन साल 2016 में हुआ था। इसके बाद भी गिलानी पर देशद्रोह का केस दर्ज किया गया था।

गिलानी ने आतंकी अफजल गुरु का शव उसके परिवार को सौंपने के लिए सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका भी दायर की थी। अफजल को संसद हमले में फाँसी हुई थी। आतिशी के माता-पिता विजय सिंह और तृप्ता वाही भी DU में प्रोफेसर हैं। इन दोनों ने भी अफजल गुरु को फाँसी से बचाने की लड़ाई लड़ी थी।

दिल्ली की अगली सीएम के तौर पर आतिशी का चुनाव होने के बाद भी स्वाति मालीवाल ने X पर एक पोस्ट में कहा था, “दिल्ली की मुख्यमंत्री एक ऐसी महिला को बनाया जा रहा है, जिनके परिवार ने आतंकवादी अफजल गुरु को फाँसी से बचाने की लंबी लड़ाई लड़ी। उनके माता-पिता ने आतंकी अफजल गुरु को बचाने के लिए माननीय राष्ट्रपति को दया याचिकाएँ लिखी। उनके हिसाब से अफजल गुरु निर्दोष था और उसको राजनीतिक साजिश के तहत फँसाया गया था। वैसे तो आतिशी मार्लेना सिर्फ ‘Dummy CM’ है, फिर भी ये मुद्दा देश की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। भगवान दिल्ली की रक्षा करें!”

अफजल गुरु को बचाने के लिए अपने माता-पिता की सक्रियता को आतिशी पूर्व में स्वीकार कर चुकी हैं। 2019 में अमर उजाला को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था, “माँ-बाप के किसी राजनैतिक कदम के बारे में मैं जिम्मेदार नहीं हूँ। उसकी जिम्मेदारी और जवाबदेही उनकी है और वे अपनी बात कहने के लिए पूरी तरह सक्षम भी हैं। मैं अपनी बात कह सकती हूँ कि मैं उस कदम के समर्थन में नहीं थी।”

आपको बता दें कि आतिशी पुरानी वामपंथन हैं। विदेशों में भी वे भारत की छवि धूमिल करने के प्रयासों में शामिल रहीं हैं। दिल्ली की शिक्षा व्यवस्था को चौपट करने में भी उनका योगदान माना जाता है। इतना ही नहीं प्रवर्तन निदेशालय ने कोर्ट को बताया था कि दिल्ली शराब घोटाले की पूछताछ में केजरीवाल ने आतिशी का भी नाम लिया था।

मंडी में मंदिर के ऊपर खड़ी कर दी अवैध मस्जिद: हिंदुओं का दावा, निर्माण के लिए मुस्लिमों ने पाँच गुना जमीन कब्जाई; शिमला की एक और मस्जिद को भी सील करने की माँग

हिमाचल प्रदेश में मस्जिदों के अवैध कब्जे का मामला थम नहीं रहा है। प्रशासन की जाँच में सामने आया है कि मंडी की पुरानी मस्जिद की जगह बनाई गई नई मस्जिद के लिए 4 गुना जमीन कब्जा कर ली गई। वहीं हिन्दू संगठनों ने इस मस्जिद के नीचे मंदिर के अवशेष होने का दावा किया है। दूसरी तरफ शिमला की कसुम्पटी मस्जिद को लेकर भी विवाद गहरा गया है, हिन्दू संगठनों ने कहा है कि इस मस्जिद को सील कर दिया जाए क्योंकि यह पहले यहाँ थी ही नहीं।

जमीन पर कब्जा, मस्जिद के नीचे मंदिर

मंडी शहर की जेल रोड पर बनी मस्जिद को लेकर हाल ही में काफी विवाद हुआ था। हिन्दू संगठनों ने आरोप लगाया था कि यह मस्जिद जमीन पर कब्जा करके बनाई गई है। नगर निगम मंडी ने आदेश दिया था कि इस मस्जिद का अवैध हिस्सा तोड़ दिया जाए। अब प्रशासन के सर्वे में यह सामने आया है कि मस्जिद के लिए काफी जमीन कब्जाई गई थी।

प्रशासन ने जब इस अवैध मस्जिद का सर्वे किया तो सामने आया है कि यहाँ 231 वर्ग मीटर पर अवैध निर्माण हुआ है। सर्वे में सामने आया है कि इसी जगह पर बनी पुरानी मस्जिद का इलाका मात्र 45 वर्ग मीटर था। जब नई मस्जिद बनी तो लगभग 180 वर्ग मीटर और जमीन पर कब्जा कर लिया गया।

इसके अलावा भी PWD की जमीन पर कब्जा हुआ। मुस्लिम समुदाय ने इस पूरी जमीन पर कब्जा करके बिना नक्शा पास करवाए और बिना कोई अनुमति लिए ही दोमंजिला मस्जिद बना दी। नगर निगम को इस निर्माण के बारे में कोई सूचना नहीं दी गई। कई नोटिस के बाद भी यह निर्माण जारी रखा गया।

जब इस अवैध निर्माण पर हिन्दू संगठनों और स्थानीय लोगों ने विरोध किया तो प्रशासन इसको लेकर जागा और मंडी नगर निगम ने इसकी जाँच की। इसके बाद नगर निगम आयुक्त ने फैसला सुनाया कि मस्जिद का निर्माण अवैध ढंग से हुआ है और इसे 30 दिनों के भीतर तोड़ दिया जाए।

मस्जिद के टूटने के अलावा इसके मूल निर्माण पर भी अब विवाद पैदा हुआ है। मंडी के स्थानीय निवासी अब मंडी के उपायुक्त से मिले हैं और दावा किया है कि इस मस्जिद के नीचे एक हिन्दू मंदिर के अवशेष हैं। उन्होंने माँग की है कि इस मस्जिद के नीचे पुरातत्व विभाग खुदाई करे तो मंदिर के अवशेष निकलेंगे।

गौरतलब है कि मंडी को छोटी काशी कहा जाता है और यहाँ बड़ी संख्या में मंदिर बने हुए हैं। ऐसे में मस्जिद के नीचे भी मंदिर का दावा किया गया है। स्थानीयों ने दावा किया है कि पुराने रिकॉर्ड खँगाले जाएँ तो यहाँ का सच सामने आएगा। इसको लेकर आवेदन भी दिया गया है।

स्थानीय लोगों ने बताया कि जहाँ पर पुरानी मस्जिद का दावा है, वहाँ पर असल में देवता शिव को समर्पित एक मंदिर था। उन्होंने कहा कि इस जगह पर कश्मीर से मुस्लिम ठहरते थे और इस पर बाद में सहारनपुर के लोगों ने कब्जा किया और अपनी मस्जिद बना दी।

कसुम्पटी मस्जिद पर भी विवाद

शिमला के संजौली में मस्जिद पर हुए विवाद के बाद कसुम्पटी इलाके में बनी मस्जिद को भी सील करने की माँग की गई है। स्थानीय पार्षद अर्चना शर्मा ने माँग की कि मस्जिद को सील किया जाए क्योंकि यहाँ कभी पहले मस्जिद नहीं थी। उन्होंने इस संबंध में वक्फ बोर्ड के दावे को गलत बताया। अर्चना शर्मा ने आरोप लगाया कि यहाँ मस्जिद का निर्माण अवैध है।

पार्षद अर्चना शर्मा ने कहा कि मस्जिद जिस जमीन पर बनी है, वह असल में केंद्र सरकार की है। उन्होंने कहा कि इस मस्जिद को कोर्ट से गिराने का आदेश हो चुका है लेकिन अब भी इसमें निर्माण जारी है। उन्होंने इस बात पर भी चिंता जताई कि इस मस्जिद में आने वाले लोगों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है।

कसुम्पटी मस्जिद को लेकर यह भी आरोप लगाया गया है कि इसके आसपास के इलाके में भी बड़ी संख्या में मुस्लिम बस रहे हैं। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि यहाँ पहले मुस्लिम रिहायशी इलाकों में घर बना रहे हैं और उन्हें बाद में मस्जिद में तब्दील किया जा रहा है।

हिजबुल्लाह के हर पेजर में 3gm विस्फोटक, मोसाद ने सिग्नल हैक कर बैट्री किए गर्म, इजरायल ने सप्लाई चेन में किया घुसपैठ… धमाकों पर कई थ्योरी, क्या है सच?

मध्य पूर्व के देश लेबनान के भीतर मंगलवार (17 सितम्बर, 2024) को हजारों धमाके एक साथ हुए। यह धमाके संदेश भेजने-पाने के लिए उपयोग में लाए जाने वाले इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस पेजर में हुए। लेबनान और पड़ोसी देश सीरिया के भीतर हजारों पेजर एक साथ फट गए। इस कारण लगभग 3000 लोग घायल हुए हैं, 9 लोगों की मौत की भी सूचना है। घायल होने वाले अधिकांश लोग इस्लामी आतंकी संगठन हिजबुल्लाह से जुड़े हुए थे। पेजर में धमाके करने का आरोप हिजबुल्लाह ने इजरायल पर लगाया है।

यह अभी साफ़ नहीं हो सका है कि एक साथ इतने पेजरों में धमाके कैसे हुए। इसको लेकर अलग-अलग थ्योरी चलाई जा रही हैं। कहीं यह कहा जा रहा है कि पेजरों को एक सिग्नल भेज कर धमाका कर दिया गया तो कहीं कोई और तरीका इस संबंध में बताया गया। लेबनान के लोगों ने भी इस संबंध में इजरायल पर आरोप लगाए हैं।

बैटरी गरम करके किया धमाका?

लेबनान के भीतर हुए धमाकों में देखा गया कि पेजर इकट्ठे गरम हो कर फट गए। इनमें तेज धमाके हुए और इनको रखने वाले के साथ ही आसपास के लोग इसकी चपेट में आ गए। इस कारण बड़ी संख्या में लोग घायल हुए। सबसे पहले कहा गया कि इन हजारों पेजरों के बीच के सिग्नल को इजरायल ने हैक कर लिया और इसमें ऐसी फ्रीक्वेंसी के संदेश भेजे जिससे उनकी बैटरी गरम हो गई और उसमें विस्फोट हो गया। हालाँकि, इसके विरोध में तर्क दिया गया कि बैटरियों में गरम हो कर आग नहीं लगी और वह सीधे फट ही गए, ऐसा इस तरीके से नहीं हो सकता।

पेजरों में कर दी गड़बड़?

पेजरों में हुई गड़बड़ के पीछे एक और थ्योरी यह दी जा रही है कि इजरायल ने इन पेजरों की आपूर्ति के बीच में ही गड़बड़ कर दी। बताया गया कि 5000 पेजर ताइवान से मँगाए गए थे और इसी साल की शुरुआत में हिजबुल्लाह के पास पहुँचे थे। लेबनान से जुड़े लोगों ने मीडिया को बताया कि इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद ने इन पेजरों के भीतर एक ऐसा बोर्ड लगाया जिससे धमाका हुआ। इस बोर्ड को आसानी से पहचाना नहीं जा सकता और इसी कारण हिजबुल्लाह इस बारे में अनभिज्ञ रहा।

यह भी कहा जा रहा है कि इजरायल ने यह पेजर हिजबुल्लाह के पास पहुँचने से पहले ही इनमें यह गड़बड़ कर दी और जब यह हिजबुल्लाह के लोगों के पास पहुँचे तो उनमें धमाका कर दिया। लेबनान के लोगों ने बताया कि इन पेजर में पड़े बोर्ड को जब मोसाद ने एक कोड वाला मैसेज भेजा तो यह फट गए। हालाँकि, इन पेजरों में इनको बनाने वाली फैक्ट्री में छेड़छाड़ हुई या फिर रास्ते में कहीं पर इनमें बोर्ड डाले गए, इसको लेकर अभी कोई जानकारी नहीं है।

हिजबुल्लाह के लोगों के पास फटने वाले पेजरों के भीतर 3 ग्राम विस्फोटक रखने की बात भी सामने आई है। कहा गया है कि इतनी छोटी मात्रा में पेजरों के भीतर रखा गया विस्फोटक हिजबुल्लाह पहचान नहीं पाया और उसने इन्हें अपने लोगों के बीच बाँट दिया। इसके बाद जब इजरायल ने सही मौक़ा देखा तो इनके भीतर धमाका कर दिया। हालाँकि, अभी इस थ्योरी को लेकर कोई पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन इस धमाके का निशाना हिजबुल्लाह के लोग बने हैं, इसलिए पूरा शक इजरायल की तरफ है।

पेजर का इस्तेमाल क्यों करते हैं हिजबुल्लाह के लोग?

हिजबुल्लाह पर हुए इस पेजर हमले के बीच यह प्रश्न भी उठा कि आखिर यह हजारों करोड़ का मालिक यह आतंकी समूह दशकों पुरानी तकनीक पर क्यों निर्भर है। बताया गया कि हिजबुल्लाह ने कई सालों से अपने आतंकियों और बाकी लोगों के फोन उपयोग करने पर प्रतिबंध लगा रखा है। ऐसा इसलिए क्योंकि इजरायल इन्हें हैक कर सकता है और बातचीत सुन कर बड़ा नुकसान पहुँचा सकता है। पेजर का इस्तेमाल इसकी तकनीक साधारण और आसानी से हैक ना हो पाने के कारण किया जाता है। इजरायल ने इसमें भी सेंध लगा दी।

कंपनी ने नकारे दावे, हिजबुल्लाह ने बोला- बदला लेंगे

ताइवान की जिस कंपनी से यह पेजर मँगाए जाने की बात कही जा रही है, उसने यह सभी दावे नकार दिए हैं। ताइवान की गोल्ड अपोलो कंपनी ने कहा है कि उसने हिजबुल्लाह के पास पहुँचने वाले पेजर नहीं बनाए थे। गोल्ड अपोलो ने बताया है कि यूरोप की एक कंपनी पेजर बनाती है और उसने गोल्ड अपोलो से ही लाइसेंस ले रखा है।

इसीलिए फटने वाले पेजरों पर गोल्ड अपोलो का स्टीकर लगा हुआ था और डिजाइन भी वही थी जो गोल्ड अपोलो के पेजरों पर थी। हिजबुल्लाह ने इस घटना के बाद कहा है कि वह बदला लेंगे और उसने इजरायल को ही इसका जिम्मेदार माना है।

2800+ घायल, कई मरे…. लेबनान में हिज्बुल्ला सदस्यों के पेजर में एक-एक कर हुए धमाके, ईरानी राजदूत भी लपेटे में आए

लेबनान में सीरियल ब्लास्ट की खबर है। इन सिलसिलेवार धमाकों में अब तक 8 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है जबकि लगभग 2800 लोग घायल हुए हैं। मृतकों और घायलों की तादाद में इजाफा हो सकता है। घायलों में आतंकी संगठन हिजबुल्लाह के लड़ाके और कई स्वास्थ्यकर्मी शामिल हैं। धमाकों की चपेट में ईरान का राजदूत भी आ गया है। शुरुआती जानकारी में ये धमाके पेजर्स में होने की बात कही जा रही है। घटना मंगलवार (17 सितंबर 2024) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस घटना से लेबनान की राजधानी बेरूत सहित खासतौर से दक्षिणी क्षेत्र प्रभावित हुए हैं। धमाके स्थानीय समय के अनुसार 3:45 पर शुरू हुए थे जो लगभग 1 घंटे तक जारी रहे। एक ही साथ देश के कई हिस्सों में हुए इन धमाकों से अफरातरफी मच गई। जब तक कोई कुछ समझ पाता तक तक लगभग 8 लोगों की मौत हो गई थी और 2800 लोग घायल हो चुके थे। घायलों में सबसे ज्यादा तादाद आतंकी संगठन हिजबुल्लाह के लड़ाकों की है। इसके बाद दूसरे नंबर पर प्रभावितों में लेबनान के स्वास्थ्यकर्मी हैं।

घायलों में ईरान का राजदूत मोजीतबा अमानी भी शामिल है। अब तक मिली जानकारी के मुताबिक ये धमाके पेजर्स के जरिए करवाए गए हैं। ये सभी पेजर्स एक के बाद एक फटने लगे। ईरानी राजदूत का पेजर घटना के समय उनके सुरक्षा गार्ड के पास था। इन धमाकों को हिजबुल्लाह के सुरक्षा तंत्र में अब तक की सबसे बड़ी चूक माना जा रहा है। हिजबुल्लाह ने बयान जारी करते हुए इस सीरियल ब्लास्ट के पीछे इजरायल का हाथ होने की आशंका जताई है।

इन धमाकों के वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। इन वीडियो में कई घायलों को सड़क पर इधर-उधर पड़ा देखा जा सकता है। कुछ वीडियो में अस्पतालों में लोगों का जमावड़ा देखा जा सकता है। कई घायल कराहते दिख रहे हैं जिनके हाथों और पैरों सहित शरीर के कई हिस्सों में घाव दिख रहे हैं। सड़कों पर खून बिखरा हुआ है। मृतकों में पुरुषों के साथ महिलाएँ भी शामिल हैं। कई घायलों की हालत गंभीर है। बताया जा रहा है कि मृतकों और घायलों की तादाद में अभी इजाफा हो सकता है।

लेबनान के स्वास्थ्य मंत्री ने नागरिकों को सलाह दी है कि वे अपने पेजर को त्याग दें और अस्पतालों को भी सतर्क रहने की चेतावनी दी है। विस्फोट मुख्य रूप से बेतरित उपनगर दहियेह और लेबनान के मध्य और दक्षिणी क्षेत्रों में हुए। ईरानी मीडिया के अनुसार, लेबनान में ईरान के राजदूत भी इस हमले में घायल हो गए हैं। इस घटना पर इजरायली सेना ने कोई टिप्पणी नहीं की है। इजरायल और हिज़्बुल्लाह के बीच पिछले कुछ महीनों से आंतरिक संघर्ष चल रहा है, लेकिन इस बार के हमले पर आईडीएफ की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। यह हमला लेबनान में बढ़ती सुरक्षा चिंताओं और संघर्ष की स्थिति को दर्शाता है।