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लोकमान्य तिलक ने गणेश पूजा से हिंदुओं को किया एकजुट, इस्लामी कट्टरपंथियों ने धूलिया को दंगों की आग में जला दिया: 1895 से चलकर हम 2024 में पहुँचे, पर खत्म नहीं हुआ मुस्लिमों का उपद्रव

इस साल, हिंदू त्योहार गणेश चतुर्थी को लेकर देशभर में गणेश पूजा पंडालों पर मुस्लिम समूहों द्वारा कई हमलों की घटनाएँ सामने आईं। ऑपइंडिया ने उन घटनाओं को प्रकाशित किया है, जिसमें मुस्लिम समूहों ने छोटे बच्चों को भी शामिल किया और गणेश पंडालों, गणेश मूर्तियों और हिंदू भक्तों पर पत्थर फेंके।

गुजरात के सूरत में 2 मुस्लिम महिलाओं रुबाइना पठान और लाइमा शेख को उनके बच्चों को गणेश मूर्तियों पर हमला करने के लिए उकसाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया। सूरत के लाल गेट क्षेत्र के वरियाली बाजार में कुछ मुस्लिम किशोरों ने गणेशोत्सव पंडाल पर पत्थर फेंके। कच्छ जिले में, मुस्लिमों ने भगवान गणेश की मूर्ति ले जा रहे हिंदू युवाओं पर हमला किया। 7 सितंबर को, मध्य प्रदेश के रतलाम जिले के मोचीपुरा में भगवान गणेश की मूर्ति पर पत्थर फेंके गए। कर्नाटक के नागामंगला में, एक मुस्लिम भीड़ ने गणपति विसर्जन जुलूस पर पत्थरबाजी की, क्योंकि हिंदू उत्सव मनाते हुए दरगाह के सामने कुछ मिनटों के लिए डांस करते रहे।

हिंदुओं के त्योहारों पर हमलों की यह कोई नई प्रवृत्ति नहीं है। हर साल, गणेशोत्सव, राम नवमी या हनुमान जयंती जैसे त्योहारों पर हिंदू जुलूसों पर इस्लामी कट्टरपंथी समूहों द्वारा हमले किए जाते हैं। हालाँकि इस्लामिक कट्टरपंथियों द्वारा हिंदुओं से नफरत एक प्रचलित तथ्य है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि गणेश पूजा पर मुस्लिम समूहों द्वारा पहला हमला 1895 में धुलिया, महाराष्ट्र में हुआ था? धुलिया दंगे की घटना से पहले, यह देखना महत्वपूर्ण है कि मुस्लिमों ने हिंदुओं पर हमले के लिए कितने तुच्छ बहानों का इस्तेमाल किया और गणेशोत्सव कैसे लोकप्रिय हुआ।

1895 धूलिया हमला: मुस्लिम भीड़ ने गणेश विसर्जन पर किया आक्रमण

साल 1893 में लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने हिंदुओं को एकजुट करने के लिए गणेशोत्सव को सार्वजनिक रूप से मनाने की परंपरा शुरू की। इसका उद्देश्य हिंदू समाज को एकत्रित करना और सामाजिक एकता को बढ़ावा देना था। लेकिन धूलिया में गणेश विसर्जन के दौरान मुस्लिम भीड़ द्वारा किए गए हमले ने लोकमान्य तिलक की हिंदुओं को संगठित करने की कोशिशों को झकझोर कर रख दिया। इस घटना में ब्रिटिश पुलिस की गोलीबारी और बढ़ते सांप्रदायिक तनाव ने इतिहास में धर्म के आधार पर संघर्ष को और भड़काया, जिससे हिंदू-मुस्लिम संघर्ष की लंबी कड़ी शुरू हुई। धूलिया में गणेश विसर्जन के दौरान मुस्लिम भीड़ द्वारा किए गए हमलों ने इस धार्मिक और सांप्रदायिक संघर्ष को भड़का दिया।

साल1895 में महाराष्ट्र के धूलिया में गणेश विसर्जन के समय इस्लामवादी भीड़ ने हिंदुओं पर हमला किया। यह हमला तब हुआ जब हिंदू गणेश प्रतिमा के विसर्जन के लिए निकले थे और उनकी यात्रा शाही जामा मस्जिद के पास से गुजर रही थी। जैसे ही जुलूस मस्जिद के पास पहुँचा, मुस्लिम समुदाय ने विरोध जताया और हिंसा शुरू कर दी। ब्रिटिश पुलिस ने इस घटना के दौरान भीड़ पर गोली चलाई, जिसमें कई लोग मारे गए।

इस हमले के बाद उस स्थान पर स्थित गणेश मंदिर को “खूनी गणपति मंदिर” के रूप में जाना जाने लगा और मस्जिद को “खूनी मस्जिद” कहा जाने लगा। यह घटना इस्लामवादी आक्रमणों के इतिहास में पहला ज्ञात हमला था, जो हिंदू धार्मिक प्रक्रिया पर हुआ। इस घटना ने हिंदू-मुस्लिम तनाव को और बढ़ा दिया और इसे सांप्रदायिक संघर्ष का प्रतीक बना दिया।

इस घटना ने तिलक के अभियान को और भी मजबूत किया। तिलक ने गणेश उत्सव को न केवल धार्मिक उत्सव, बल्कि हिंदू समाज को संगठित करने और उन्हें आत्मरक्षा के लिए प्रेरित करने का साधन बनाया। उन्होंने इस घटना के बाद हिंदुओं को और भी बड़े पैमाने पर संगठित करना शुरू किया ताकि सांप्रदायिक हिंसा का सामना किया जा सके।

1893 बॉम्बे दंगे: गणेशोत्सव की प्रेरणा

1893 में मुंबई में भी इसी तरह के दंगे हुए थे, जब हिंदुओं द्वारा हनुमान मंदिर में संगीत बजाया जा रहा था। मुस्लिम भीड़ ने इसे नमाज के दौरान “विघ्न” का कारण बताया और हिंसा भड़क उठी। इन दंगों ने हिंदू समाज को गहरे सांप्रदायिक विभाजन का अनुभव कराया और तिलक को हिंदुओं को संगठित करने के लिए गणेशोत्सव की प्रेरणा दी।

गणेशोत्सव की परंपरा हिंदू समाज के लिए उत्सव का माध्यम बन गई, लेकिन इस्लामवादी गुट इसे अपनी धार्मिक पहचान के लिए खतरा मानते थे। उन्हें गणेश उत्सव से विशेष रूप से आपत्ति थी क्योंकि यह हिंदुओं को संगठित कर रहा था और उनकी संख्या और सांस्कृतिक शक्ति को बढ़ावा दे रहा था।

1992 में धूलिया दंगे

साल 1895 की घटना के बाद, 1992 में बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद भी धूलिया में सांप्रदायिक तनाव भड़का। हजारों मुस्लिमों ने हिंदू घरों पर हमला किया और उन्हें नुकसान पहुँचाया। यह घटना गणेश उत्सव के दौरान मुसलमानों द्वारा हिंदू धार्मिक आयोजनों पर हमले के पैटर्न का एक और उदाहरण थी।

2024 तक, गणेश विसर्जन के दौरान इस्लामवादी हमले एक सामान्य घटना बन चुके हैं। कई स्थानों पर, जैसे गुजरात, मध्य प्रदेश और कर्नाटक में, मुस्लिम गुटों द्वारा हिंदुओं पर हमला किया गया, जब वे अपने धार्मिक जुलूस निकाल रहे थे। खासकर मुस्लिम बहुल इलाकों में ऐसे जुलूसों पर हमला किया जाता है, जिससे सांप्रदायिक तनाव और बढ़ता है।

साल 1895 से लेकर आज तक, गणेश उत्सव, राम नवमी, हनुमान जयंती जैसे हिंदू धार्मिक जुलूस मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में हमेशा से तनाव का कारण बने रहे हैं। यह सांप्रदायिक संघर्ष की जड़ें इतिहास में गहरी हैं, जब इस्लामवादी गुट हिंदू धार्मिक आयोजनों पर अपनी असहमति और असंतोष प्रकट करते रहे हैं।

गणेशोत्सव और हिंदू पुनरुत्थान

लोकमान्य तिलक का उद्देश्य गणेशोत्सव के माध्यम से हिंदुओं को धार्मिक और सांस्कृतिक रूप से संगठित करना था। इस उद्देश्य को आज भी पूरा किया जा रहा है, जहाँ गणेश उत्सव केवल भगवान गणेश की पूजा का पर्व नहीं है, बल्कि यह हिंदू एकता और पुनरुत्थान का प्रतीक बन गया है। 1895 के धूलिया हमले से लेकर वर्तमान तक, गणेश उत्सव पर मुस्लिम आक्रामकता का इतिहास हिंदू-मुस्लिम संबंधों के तनाव का प्रतीक है। यह संघर्ष आज भी जारी है, जहाँ हिंदू धार्मिक आयोजनों पर हमले हो रहे हैं, लेकिन तिलक की तरह हिंदू समाज को संगठित करने का प्रयास भी जारी है।

इतिहास से लेकर वर्तमान तक, गणेश विसर्जन पर हुए हमले यह साबित करते हैं कि धार्मिक असहिष्णुता का संघर्ष लंबे समय से चला आ रहा है। ऐसे में हिंदू समाज को संगठित और मजबूत बनाने के लिए गणेश उत्सव जैसे आयोजनों का महत्व और भी बढ़ जाता है, जो तिलक के दृष्टिकोण को साकार करते हैं।

मूल रूप से यह लेख अंग्रेजी में प्रकाशित किया गया है। मूल लेख पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें

सरकारी कॉलेज के हॉस्टल में 7 छात्रों ने पकाया ‘बीफ, किए गए निष्कासित, बजरंग दल-VHP ने की FIR की माँग: ओडिशा के बहरामपुर की घटना

ओडिशा के बहरामपुर के एक सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज के हॉस्टल में कथित तौर पर ‘बीफ’ पकाने वाले 7 छात्र निष्कासित कर दिए गए। उनकी शिकायत छात्रों के एक दूसरे समूह ने कॉलेज प्रशासन को दी। मामले में विश्व हिन्दू परिष और बजरंग दल ने भी प्रदर्शन किया। इसके बाद कॉलेज ने यह एक्शन लिया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बहरामपुर के परला महाराज इंजीनियरिंग कॉलेज के 7 छात्रों को हॉस्टल से निकाले जाने का आदेश कॉलेज प्रशासन ने दिया है। आरोप है कि बुधवार (11 सितम्बर, 2024) की रात को इन लोगों ने एक कमरे में ‘बीफ’ पकाया और खाया। बीफ पकाने वालों की इस हरकत पर हॉस्टल में रहने वाले दूसरे छात्र गुस्सा गए और उन्होंने इसकी शिकायत की।

बताया गया कि शिकायत करने वाले छात्रों ने कहा था कि बीफ पकाने के कारण बाकी छात्रों को समस्या हुई है। शिकायत करने वाले छात्रों ने कहा कि बीफ पकाने वालों ने उनकी भावनाओं का ख्याल नहीं रखा। उन्होंने इस मामले में सख्त कार्रवाई की माँग की थी।

यह शिकायत कॉलेज के छात्र कल्याण मामलों के डीन से की गई। इसके बाद डीन ने 7 छात्रों को हॉस्टल से निष्कासन का आदेश दिया। डीन के आदेश में कहा गया कि यह छात्र प्रतिबंधित गतिविधियों में संलिप्त थे। डीन के आदेश में कहा गया कि इन छात्रों ने नियमों का उल्लंघन किया है।

डीन के आदेश से निष्कासित किए जाने वाले 7 छात्रों में से 6 अल्पसंख्यक समुदाय से हैं। एक छात्र पर ₹2000 का जुर्माना लगाए जाने की बात भी सामने आई है। कॉलेज प्रशासन ने यह स्पष्ट नहीं किया कि छात्रों को बीफ खाने के कारण ही निकाला गया है। कॉलेज प्रशासन ने इसका जिक्र निष्कासन के नोटिस में भी नहीं दिया।

इस मामले में स्थानीय विश्व हिन्दू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने भी इस मामले में शिकायत की है। VHP और बजरंग दल कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि हॉस्टल के अंदर बीफ पकाया गया था, वह इस मामले में कॉलेज प्रशासन से मिले हैं। उन्होंने छात्रों पर FIR की माँग भी की है।

मामले में पुलिस के पास भी शिकायत पहुँची है। पुलिस की एक टीम ने हॉस्टल में जाकर जायजा भी लिया है। कथित तौर पर बीफ खाने वालों छात्रों ने ने पुलिस को बताया कि वह एक शादी से बकरे का मीट लाए थे और खाया था। पुलिस ने कहा है कि यह स्पष्ट नहीं है कि छात्रों ने क्या खाया। हॉस्टल में तनाव को रोकने के लिए पुलिसबल तैनात है।

‘₹290 करोड़ की वंदे भारत पर ₹436 करोड़ खर्च कर रही मोदी सरकार’: TMC सांसद के झूठ का रेल मंत्रालय ने किया पर्दाफाश, ट्रेन का पूरा गणित समझाया

मोदी सरकार को घेरने के लिए विपक्ष के नेता अक्सर झूठ फैलाते हैं। इस बार उन्होंने ये झूठ वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को बनाने में लग रही लागत को लेकर फैलाया है। सोशल मीडिया पर बताया जा रहा है कि मोदी सरकार ने वंदे भारत स्लीपर ट्रेन बनाने के लिए ₹58,000 करोड़ के कॉन्ट्रैक्ट को संशोधित किया है और इस फैसले से जहाँ पहले एक ट्रेन की कीमत दुगनी बढ़ गई है। संदेश में ये भी पूछा जा रहा है कि आखिर कौन सा कॉन्ट्रैक्टर है जिसे मोदी सरकार फायदा पहुँचाने के लिए ये सब कर रही है।

इस स्क्रीनशॉट को साझा करते हुए राज्यसभा सांसद साकेत गोखले ने भी ट्वीट किया। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा, पहले जिस ट्रेन की लागत ₹290 करोड़ थी, अब उसकी लागत ₹436 करोड़ होगी। यह केवल AC कोच वाली ट्रेन है, जिसे गरीब लोग वहन नहीं कर सकते। उन्होंने आगे पूछा, वंदे भारत अनुबंध में 50% लागत वृद्धि से किसे लाभ हो रहा है।

इसी तरह अन्य यूजर अमीना ने भी एक स्क्रीनशॉट शेयर किया और अपने ट्वीट में लिखा कि राफेल घोटाला के बाद अब वंदे भारत का एक नया घोटाला सामने आया है घोटाले की कुल कीमत 19430 करोड़ हो सकती है।

अब इन्हीं दावों के वायरल होने के बाद रेल मंत्रालय ने इस मामले पर खुद संज्ञान लिया। उन्होंने साकेत गोखले के ट्वीट पर जवाब देते हुए कहा, “कृपया गलत सूचना और फर्जी खबरें फैलाना बंद करें। कोच की संख्या से गुणा की गई प्रति कोच लागत, ट्रेन की लागत के बराबर होती है।”

आगे साफ-साफ बताया गया कि स्लीपर परियोजना में, पूरे प्रोसेस में पारदर्शिता के कारण प्रति कोच लागत सभी बेंचमार्क से कम है। हमने लंबी ट्रेनें बनाने के लिए कोचों की संख्या 16 से बढ़ाकर 24 कर दी है, जबकि कॉन्ट्रैक्ट में कुल कोचों की संख्या स्थिर रखी गई है। ऐसा सिर्फ ट्रेन में सफर करने की बढ़ रही डिमांड के कारण किया गया है।

ट्वीट में बताया गया कि पहले 200 ट्रेन, 16 कोच के साथ थीं यानी 3200 कोच के साथ। वहीं संशोधन के बाद 133 ट्रेन बनेंगी 24 कोच के साथ यानी कुल कोच होंगे 3192। रेल मंत्रालय ने कोच की संख्या साझा करते हुए बताया कि असलियत में कॉन्ट्रैक्ट की कीमत बढ़ी नहीं बल्कि घटी है क्योंकि ट्रेन की लेंथ बढ़ा दी गई है।

टीएमसी सांसद द्वारा फैलाए गए झूठ का पर्दाफाश होने के बाद लोग कह रहे हैं कि इस तरह फर्जी खबर फैलाने के आरोप में रेल मंत्रालय को सांसद पर केस करना चाहिए ताकि सबक मिले और आगे कोई आधी-अधूरी देकर भ्रमित न करे।

कोलकाता के सरकारी अस्पताल में महिला के कपड़े उतारने का प्रयास, 4 साल के बच्चे का करवाने आई थी इलाज: RG कर रेप-मर्डर के बाद भी नहीं बदले हालात

कोलकाता के आर जी कर मेडिकल कॉलेज के बाद एक और सरकारी अस्पताल में एक महिला से छेड़छाड़ की घटना हुई। अस्पताल में काम करने वाले ही एक युवक ने महिला से छेड़छाड़ की और उसके कपड़े उतारने का प्रयास भी किया। छेड़छाड़ करने वाले युवक को गिरफ्तार कर लिया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह घटना कोलकाता के बाल स्वास्थ्य संस्थान (ICH) में रविवार को हुई। यहाँ एक महिला का चार वर्षीय बच्चा भर्ती था। महिला अपने बच्चे के पास ही सो रही थी। इसी दौरान अस्पताल में वार्ड बॉय के तौर पर कम करने वाला तनय पाल आया और महिला से छेड़खानी करने लगा।

तनय पाल ने महिला को गलत ढंग से छुआ और उसके कपड़े उतारने का प्रयास भी किया। तनय पाल इस दौरान महिला के साथ छेड़खानी की वीडियो भी बना रहा था। इसी दौरान महिला जाग गई और उसे छेड़खानी करते हुए पकड़ लिया। महिला ने इसके बाद इस मामले की शिकायत पुलिस से की।

पुलिस ने इस संबंध में तनय पाल के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। तनय पाल त्रिपुरा का रहने वाला है कोलकाता के इस अस्पताल में वह काफी छोटी उम्र से काम कर रहा है। वह कोलकाता में एक जगह कमरा लेकर रहता है। उसकी उम्र 26 वर्ष है।

पुलिस ने महिला की FIR के बाद तनय पाल को गिरफ्तार कर लिया है। उसके फोन को भी जब्त कर लिया गया है। पुलिस अब अस्पताल का CCTV फुटेज खंगाल रही है। पुलिस ने तनय पाल से पूछताछ भी की है। अस्पताल के अधिकारियों ने बताया है कि महिला के बच्चे को डायरिया हुआ था और उसकी सही देखभाल के लिए उसे भर्ती किया गया था।

अधिकारीयों ने बताया कि बच्चे की अगले दिन अस्पताल से छुट्टी होनी थी लेकिन इसी बीच यह घटना हो गई। उन्होंने कहा है कि अस्पताल में यह पहली ऐसी घटना है और उन्होंने आरोपित के खिलाफ एक्शन लेते हुए उसे नौकरी से निकाल दिया है और साथ ही जाँच में पुलिस का सहयोग भी कर रहे हैं।

कोलकाता के अस्पताल में हुई इस घटना के बाद फिर से महिला सुरक्षा पर सवाल उठ गए हैं। यह घटना तब हुई है जब कोलकाता के ही आर जी कर मेडिकल कॉलेज महिला डॉक्टर की रेप के बाद हत्या कर दी गई थी। इसको लेकर डॉक्टरों और राज्य सरकार का गतिरोध अब भी चल रहा है।

महिला डॉक्टर के रेप और हत्या के बाद पूरे देश में डॉक्टरों की हड़ताल हुई थी। पश्चिम बंगाल सरकार पर इस मामले में लापरवाही के आरोप भी लगे हैं। यह भी आरोप लगाया गया है कि डॉक्टर के परिजनों को पैसे से चुप करवाने की कोशिश की गई, अब इस मामले में CBI जाँच कर रही है।

बिल्डिंग से छिपकर फायरिंग कर रहा था आतंकवादी, भारतीय सेना ने कर दिया धुआँ-धुआँ: बारामुला एनकाउंटर का Video देखा आपने?

जम्मू-कश्मीर के बारामुला के चार थापर क्रीरी में 13-14 सितंबर को सेना को कुछ आतंकियों के छिपे होने की सूचना मिली थी। इस जानकारी के बाद उन्होंने पुलिस के साथ मिल वहाँ तलाशी अभियान चलाया और मुठभेड़ के बाद तीन आतंकी मारे गए। सोशल मीडिया पर अब इन्हीं आतंकियों के मारे जाने की वीडियो सामने आई है।

इस वीडियो में दिखाई दे रहा है कि खुले मैदान में सेना के जवान गोली चला रहे हैं वहीं आतंकी रेंगते, लुढ़कते वहाँ से भागने का प्रयास कर रहा है। सोशल मीडिया पर ये वीडियो खूब वायरल है। लोग इसे शेयर करके भारतीय सेना की तारीफ कर रहे हैं।

फुटेज देखकर लग रहा है कि इसे ड्रोन से कैप्चर किया गया है जिसके कारण पूरा दृश्य साफ है। वीडियो में दिखता है कि सेना और आतंकियों के बीच चल रही मुठभेड़ के बीच एक आतंकी बंदूक सहित बिल्डिंग से निकलकर किसी सुरक्षित जगह पर जाने की कोशिश करता है। हालाँकि सेना के जवान उसके बचकर निकलने के प्रयास को विफल कर देते हैं।

गोलियाँ तड़ातड़ चलती हैं और चारों ओर धुआँ उठ जाता है। इस वीडियो को साझा करते हुए सोशल मीडिया पर कहा जा रहा है कि आतंकियों का इलाज इसी तरह होना चाहिए। कोई तंज कसते हुए कह रहा है कि ये हूरों के पास पहुँचाने के लिए भारतीय सेना की प्रक्रिया है।

एक यूजर एक अन्य एंगल से वीडियो साझा करते हुए लिखता है कि भारतीय सेना ने तो एनकाउंटर में धुआँ-धुआँ कर डाला। ये एक और वीडियो है एनकाउंटर की। चिनारकॉर्प्स ने बहुत अच्छा काम किया।

गौरतलब है कि बारामुला के चार थापर क्रीरी में आतंकियों को मार गिराने के लिए कोशिश पूरी रात चली। सुबह तीन आतंकियों को मारा गया। इनके पास से सुरक्षाकर्मियों असलहे और हथियार बरामद हुए हैं।

बता दें कि इससे पहले एक वीडियो आतंकी का और भी सामने आया था। उसमें उस आतंकी को गोली लगने के बाद तड़पते हुए देखा गया था। वो वीडियो भी सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई थी।

‘नई परंपरा’ बता काँवड़ यात्रा नहीं निकालने दी, अब उसी रास्ते से ईद-मिलाद की जुलूस निकालने पर अड़े: जानिए बरेली में क्यों हुआ बवाल

उत्तर प्रदेश के बरेली में मुस्लिम उस रास्ते पर अपना बारावफात का मुहम्मदी जुलूस निकालने के लिए अड़ गए जिस पर उन्होंने काँवड़ यात्रा नहीं निकलने दी थी। काँवड़ को नई परंपरा बताने वाला मुस्लिम पक्ष ने इसी रास्ते पर कई डीजे, लाउडस्पीकर के साथ जुलूस निकलने का प्रयास किया। हिन्दू संगठनों ने इस पर विरोध जताया है। मौके पर पुलिस ने पहुँच कर बीच बचाव किया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, रविवार (15 सितम्बर, 2024) शाम को यह विवाद तब उपजा जब चार मुस्लिम समितियाँ बरेली के जोगी नवादा इलाके की मौर्य गली से जुलूस निकालने की कोशिश करने लगीं। इस मुस्लिम जुलूस में बड़े बड़े डीजे और लाउडस्पीकर भी थे और बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे।

मुस्लिमों की इस कोशिश का हिन्दू संगठनों ने विरोध कर दिया। हिन्दू संगठनों कहा कि इसी वर्ष इस रास्ते पर काँवड़ यात्रा नहीं निकलने दी गई थी। मुस्लिमों ने सावन माह के दौरान यहाँ से निकलने वाली काँवड़ यात्रा का यह कह कर विरोध किया था कि यह नई परंपरा है।

हिन्दू पक्ष ने कहा कि यहाँ पर जुलाई, 2023 में काँवड़ यात्रा पर पथराव भी किया गया था। इस पत्थरबाजी में कई हिन्दू घायल हुए थे। काँवड़ में शामिल लोगों ने इस दौरान बताया था कि यहाँ मौजूद मस्जिद और आसपास के मुस्लिम घरों से पथराव हुआ था। इस दौरान पुलिसकर्मी भी घायल हुए थे।

हिन्दुओं को जहाँ इस इलाके में रोक दिया गया तो वहीं मुस्लिमों ने इस बार अपने जुलूस को और बड़ा कर लिया। आरोप है कि इस बार उन्होंने कई डीजे और लाउडस्पीकर लगा लिए जो पहले नहीं लगाए जाते थे। इसके अलावा इस मोहम्मदी जुलूस में भीड़ भी बढ़ा दी गई। इसके अलावा इस जुलूस में कई बैनर पोस्टर भी लहराए गए।

मुस्लिम पक्ष ने जिद की कि वह इसी इलाके से अपने जुलूस निकालेंगे। विवाद होने के बाद मौके पर पुलिस प्रशासन पहुँच गया। पुलिस अधिकारियों ने दोनों पक्षों को समझाने का प्रयास किया। हालाँकि, मुस्लिम पक्ष जुलूस निकालने की जिद पर अड़ा रहा। पुलिस ने उन्हें निकलवाने का प्रयास किया लेकिन हिन्दू संगठन इसके विरोध में रहे।

अपना जुलूस जबरदस्ती निकालने को लेकर मुस्लिम पक्ष ने धक्का मुक्की और नारेबाजी की। माहौल बिगड़ता देख यहाँ कई थानों की फ़ोर्स बुला ली गई। लगातार देर रात तक मुस्लिम पक्ष अपना मोहम्मदी जुलूस निकालने की जिद करता रहा। बताया गया है कि बाद में पुलिस के जोर देने पर मुस्लिमों का रूट बदलवाया गया।

पुलिस ने बताया है कि वह सभी पक्षों से बातचीत कर शांति व्यवस्था बनाए हुए है। बरेली में सोमवार (16 सितम्बर, 2024) को भी जुलूस निकाले जाने हैं। इनको लेकर लगातार पुलिस सतर्कता बरत रही है। यहाँ पुलिस के साथ ही PAC की यूनिट भी तैनात की गई हैं। शहर में बवाल ना हो इसके लिए बाहर के थानों से फ़ोर्स बुलाई गई है।

डोनाल्ड ट्रंप पर फिर से हमला, गोल्फ कोर्स में AK-47 से हत्या कर रिकॉर्डिंग करने का था इरादा: जानिए कौन है हमलावर, पिछली बार कान को छूकर गुजरी थी गोली

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर राष्ट्रपति चुनावों से पहले दूसरी बार हमला हुआ है। दूसरा हमला किसी चुनावी रैली में नहीं बल्कि फ्लोरिडा गोल्फ कोर्स में गोल्फ खेलने के दौरान हुआ।

बताया जा रहा है कि ट्रंप दोपहर करीबन 1:30 के समय गोल्फ खेल रहे थे तभी अचानक से गोलियों की आवाजें आनें लगीं। आवाज सुनते ही सुरक्षाकर्मियों ने ट्रंप को सुरक्षित स्थान पर पहुँचाया और उसके बाद इलाका पूरा सील किया गया। पाम बीच काउंटी के शेरिफ रिक ब्रैडशॉ ने कहा कि संदिग्ध ट्रम्प से 300 से 500 गज की दूरी पर आ गया था। अगर किसी के पास राइफल और दूरबीन हो तो ये दूरी ज्यादा नहीं मानी जा सकती।

एफबीआई ने कहा कि गोलीबारी की एक और घटना को ट्रंप पर हमले का प्रयास माना जा रहा है, जिसकी हम जाँच कर रहे हैं। गोलीबारी के बाद स्थानीय पुलिस ने एक संदिग्ध को हिरासत में लिया है। उसकी पहचान 58 वर्षीय रियान वेल्से राउथ के तौर पर हुई।

उसके पूर्व में दिए गए इंटरव्यू में राउथ ने खुद को यूक्रेन का प्रबल समर्थक बताया है। उसने बताया कि वो रूस-यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध में लड़ने के लिए कीव भी गया था। जाँच एजेंसियों ने उसके पास से एके-47, एक स्कोप, दो बैकपैक और एक ग्रो पो डिवाइस बरामद किया है।

कहा जा रहा है कि राउथ ने हत्या के इरादे से इलाके में गो प्रो सेट कर लिया था और स्नाइपर भी लगा ली थी। उसने पूरा सेट अप गोल्फ कोर्स की झाड़ियों के बीच तैयार किया हुआ था। वहाँ वह ट्रंप के आने की प्रतीक्षा में लेटा था।

राउथ कैरोलिना का निवासी है। डेमोक्रेटिक पार्टी का समर्थन करता है। उसने अपने पोस्ट में डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवारों का समर्थन किया हुआ है। इसके अलावा उसने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में जो बाइडेन, कमला हैरिस को फुल सपोर्ट दिया हुआ है।

उसके लिंकड-इन के प्रोफाइल से पता चलता है कि उसने नॉर्थ कैरोलिना एग्रीकल्चर एंड टेक्निकल स्टेट यूनिवर्सिटी में पढ़ाई की थी। इसके अलावा उसको लेकर ये जानकारी भी सामने आई है कि राउथ के ही नाम और बर्थडेट वाले एक शख्स पर साल 2001, 2002 में एक दर्जन से अधिक आपराधिक आरोप लगे थे। इन आरोपों में हथियार छिपाकर ले जाना और टक्कर मारकर भाग जाना शामिल था।

चुनावी रैली के वक्त भी हुआ था ट्रंप पर हमला

बता दें कि इससे पहले डोनाल्ड ट्रंप पर जुलाई महीने में एक चुनावी रैली के वक्त जानलेवा हमला हुआ था। गोली चलाने वाले हमलावर ने उस समय गोली चलाई थी जब ट्रंप मंच से बोल रहे थे। खुशकिस्मती से गोली ट्रंप को नुकसान नहीं पहुँचा पाई और कान को छूकर निकल गई। इसके बाद सुरक्षाकर्मियों ने ट्रंप को अपने पीछे करके उन्हें सुरक्षित स्थान पर पहुँचाया। जाँच के बाद पता चला गोली थॉमस मैथ्यू क्रुक्स नाम के शख्स ने चलाई थी। क्रूक्स को लेकर जानकारी सामने आई थी कि उसने 2021 में बाइडेन की डेमोक्रेट पार्टी को 15 डॉलर का चंदा दिया था।

UP से ले जाकर नेपाल में भारतीयों को बना रहे थे ईसाई, हिंदू संगठनों ने पोत दी कालिख: पादरी की पिटाई, बसों में भरकर ले जाए जा रहे थे चर्च

उत्तर प्रदेश के महाराजगंज से लगने वाले नेपाल के सीमाई इलाके में ईसाई धर्मांतरण को लेकर जम कर बवाल हुआ। भारत से ईसाई बनाने के लिए नेपाल ले जाए गए लोगों का विश्व हिन्दू परिषद और बजरंग दल नेपाल के कार्यकर्ताओं ने जम कर विरोध किया। इस दौरान नेपाल के स्थानीय लोगों ने धर्मांतरण करवाने वालों के मुंह पर कालिख भी पोत दी और भारत वापस भेज दिया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, शनिवार (14 सितम्बर, 2024) को महाराजगंज के ठूठीबारी कस्बे से लगभग 100 लोगों का एक जत्था नेपाल की तरफ निकला। इसमें बड़ी संख्या में महिलाएँ और बच्चे शामिल थे। नेपाल जाने वाले लोगों में इस इलाके के दलित-पिछड़े वर्ग के लोग भी शामिल थे।

बताया गया कि इन्हें अमोस नाम के एक पादरी अमोस ने नेपाल के खैरहनी स्थित चर्च में बुलाया था। यहाँ उनका धर्मांतरण किया जाना था। इनके लिए नेपाल नंबर की दो विशेष बसें भी नेपाल में खड़ी की गईं थी। यह बसें नेपाल के महेशपुर बस स्टैंड पर खड़ी थीं। यहीं सभी लोग इकट्ठा हुए थे।

यह सभी बसों में बैठते इससे पहले इनके धर्मांतरण की सूचना नेपाल के विश्व हिन्दू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं के साथ ही स्थानीय लोगों को लग गई। वह तुरंत ही इस बस स्टैंड के पास पहुँच गए और धर्मांतरण के विरोध में प्रदर्शन करने लगे।

बताया गया है कि यहाँ मौजूद स्थानीय लोगों ने भारत से धर्मांतरण के लिए जाने वालों के साथ बदसलूकी की और उनके मुँह पर कालिख पोत दी। स्थानीय लोगों ने यहाँ के पादरी अमोस की भी पिटाई की। इसके बाद भारत से गए सभी लोगों को स्थानीय लोगों ने यहाँ से भगा दिया और भारत की सीमा पर छोड़ गए।

नेपाल के लोगों ने इस दौरान पुलिस भी बुला ली। पुलिस ने इन सभी लोगों के नाम-पते नोट किए और चेतावनी भी दी। नेपाल पुलिस के अलावा यहाँ स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी भी पहुँच गए। भारतीयों को वापस भेजने के बाद यह मामला शांत हुआ।

महाराजगंज पुलिस ने इस मामले को ट्विटर पर स्पष्टीकरण दिया है। महाराजगंज पुलिस ने बताया है कि घटना उसके अधिकार क्षेत्र में ना होकर नेपाल में हुई है और इसके संबंध में नेपाल पुलिस से बातचीत चल रही है। पुलिस ने अपील की है कि इस घटना को महाराजगंज का बता कर प्रसारित ना किया जाए।

इस इलाके में धर्मांतरण का यह कोई पहला मामला नहीं है, इससे पहले 31 अगस्त, 2024 को भी ऐसा ही एक मामला प्रकाश में आया था। तब नेपाल के सीमावर्ती इलाके में केरल के दो पादरी पकड़े गए थे। यह यहीं के एक स्थानीय चर्च में धर्मांतरण करवाने की फिराक में थे। इनको पकड़ कर यूपी पुलिस को सौंप दिया गया था।

प्रतिबंधित जमात-ए-इस्लामी संग इंजीनियर राशिद की आवामी इत्तेहाद पार्टी ने किया गठबंधन: J&K चुनाव से पहले बयान में कहा- कुलगाम और पुलवामा में करेंगे JEI का समर्थन​

आगामी जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनावों से पहले आवामी इत्तेहाद पार्टी (एआईपी) और भारत सरकार द्वारा प्रतिबंधित संगठन जमात-ए-इस्लामी (जेईआई) ने गठबंधन किया है। रविवार (15 सितंबर 2024) को दोनों पार्टियों के बीच संयुक्त बैठक के बाद निर्णय लिया गया। इस दौरान लोकसभा सांसद इंजीनियर राशिद, एआईपी के मुख्य प्रवक्ता इनाम उन नबी समेत पार्टी के अन्य सदस्य शामिल हुए। वहीं जमात-ए-इस्लामी की ओर से गुलाम कादिर वानी और पार्टी के प्रमुख नेता भी शामिल हुए।

बैठक के बाद जारी बयान में इस गठबंधन की जानकारी दी गई। बयान में बताया गया कि दोनों दलों ने क्षेत्र के लोगों के हित में मिलकर काम करने की आवश्यकता पर बल दिया और जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनावों के लिए सीट बँटवारे पर चर्चा की।

बयान में कहा गया है कि एआईपी कुलगाम और पुलवामा जिलों में जमात-ए-इस्लामी समर्थित उम्मीदवारों का समर्थन करेगी, जबकि जेईआई पूरे कश्मीर में एआईपी उम्मीदवारों का समर्थन करेगी। साथ ही कहा कि ये गठबंधन जम्मू-कश्मीर में लोगों के लिए शांति, न्याय और राजनीतिक सशक्तिकरण की दिशा में एकजुट मोर्चा बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

बता दें कि राज्य में इससे पहले कॉन्ग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस के बीच गठबंधन हुआ था। जिसके बाद फैसला लिया गया कि नेशनल कॉन्फ्रेंस 90 में से 51 सीटों पर चुनाव लड़ेगी, जबकि कॉन्ग्रेस 32 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। ये चुनाव प्रदेश में अनुच्छेद 370 निरस्त होने के बाद पहले विधानसभा चुाव हैं। इसमें 7 सीटें एससी और 9 सीटें एसटी के लिए होंगी। यहाँ तीन चरण में चुनाव होंगे 18 सितंबर, 25 सितंबर और 1 अक्टूबर। वहीं मतगणना 8 अक्तूबर को होगी।

नोट: जमात-ए-इस्लामी संगठन पर भारत सरकार ने बैन लगाया हुआ था। इस संगठन को सबसे पहले 2019 में गैर कानूनी घोषित किया गया था। बाद में ये प्रतिबंध 2024 में फिर बढ़ा दिया गया।

‘आतंकवादी हैं राहुल गाँधी, कर रहे बाँटने की कोशिश’: सिख नेता के बयान पर भड़की कॉन्ग्रेस, बताया ‘भौंकने वाला आस्तीन का साँप’

केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने अपने हालिया बयान में कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी को आतंकवादी बताया है। उन्होंने राहुल गाँधी पर आरोप लगाया कि राहुल सिखों को बाँटने की कोशिश कर रहे हैं। अपने बयान में उन्होंने राहुल गाँधी को पकड़ने के लिए इनाम रखने की भी बात कही। उनके इस बयान के बाद कॉन्ग्रेस भड़की हुई है। पार्टी प्रवक्ता ने उन्हें आस्तीन का साँप कहा है।

बिहार के मीडिया से बात करते हुए रवनीत सिंह बिट्टू राहुल गाँधी के लिए कहा– “पहले उन्होंने मुसलमानों का इस्तेमाल करने की कोशिश की, जब ऐसा नहीं हुआ तो अब वे सिखों को विभाजित करने का प्रयास कर रहे हैं। सिख किसी पार्टी से जुड़ा हुआ नहीं है मगर चिंगारी लगाने की कोशिश हो रही है। राहुल गाँधी देश के नंबर वन टेररिस्ट हैं।”

रवनीत सिंह ने कहा, “जो देश के सबसे बड़े वांटेड हैं, अलगाववादी, वो जो पहले बयान देते थे, आज वही बयान राहुल गाँधी ने दिया है। जो गोला, बंदूक बनाने में माहिर हैं उन्होंने राहुल गाँधी की बात को सराहा है। उनकी बात ही राहुल गाँधी ने कही है। आप देख लीजिए जो देश के दुश्मन हैं, जो हर टाइम मारने की कोशिश करते हैं, जहाजों, ट्रेनों, रोड को उड़ाने की कोशिश करते हैं, जब वो लोग राहुल गाँधी के समर्थन में आ गए तो आप अंदाजा लगा लीजिए। राहुल गाँधी देश का नंबर वन आतंकवादी है। अगर किसी पर इनाम रखना चाहिए तो वो राहुल गाँधी है।”

केंद्रीय मंत्री ने आगे राहुल गाँधी के भारतीय होने पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “देखिए मेरी राय में राहुल गाँधी भारतीय नहीं हैं। उन्होंने अपना अधिकांश समय दुनिया से बाहर बिताया है। उनके दोस्त और परिवार वहीं हैं, इसलिए मुझे लगता है कि कहीं न कहीं वह अपने देश से इतना प्यार नहीं करते हैं क्योंकि वह चले जाते हैं. वे विदेश में रहते हैं और भारत के बारे में ऐसी नकारात्मक बातें कहते हैं।”

उनके इस बयान के बाद कॉन्ग्रेस भड़की हुई है। पार्टी प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा, “जिसने राहुल गाँधी के आगे पीछे करके अपना पूरा राजनीतिक करियर बनाया। वो सत्ता के लालच में विरोधियों की गोदी में बैठ कर सस्ते बयान दे रहा है। रवनीत बिट्टू तुम और भौंको क्योंकि दुनिया को तुम्हारी ग़लीच असलियत पता चलनी चाहिए। शास्त्रों में तुम जैसों को ही आस्तीन का साँप कहा गया है।”

गौरतलब है कि रवनीत सिंह बिट्टू ने यह बयान राहुल गाँधी के उस बयान के विरुद्ध दिया है जो उन्होंने अमेरिका के वर्जीनिया में दिया था। राहुल गाँधी ने वहाँ कहा था, “भारत में लड़ाई इस बात को लेकर है कि क्या एक सिख को गुरुद्वारे में पगड़ी और कड़ा पहनने की अनुमति दी जाएगी।” उनके इसी बयान पर बिट्टू बोले कि आखिर ऐसा कब हुआ कि किसी सिख को पगड़ी या कड़ा पहनने से रोका गया हो।