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शराब घोटाले में जिसका ED के सामने लिया नाम, उसे ही बना दिया दिल्ली का CM: वामपंथन आतिशी के माता-पिता रहे हैं आतंकी अफजल गुरु के ‘फैन’

दिल्ली में बदलते राजनीतिक घटनाक्रम का अंत हो गया है। मंगलवार (17 सितम्बर, 2024) को AAP विधायक आतिशी को दिल्ली का नया मुख्यमंत्री चुना गया है। यह फैसला दिल्ली CM अरविन्द केजरीवाल के इस्तीफे के ऐलान के बाद सामने आया है। आतिशी के नाम का ऐलान AAP सरकार में मंत्री गोपाल राय ने किया है।

मंगलवार को गोपाल राय ने बताया, “विधायक दल की बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय हुआ है कि जब तक अगला चुनाव नहीं होता तब तक आतिशी जी को दिल्ली के मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी निभानी होगी।” गोपाल राय ने यह भी कहा कि वह दिल्ली में अक्टूबर-नवम्बर तक चुनाव की माँग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब तक अगले चुनाव में AAP को प्रचंड बहुमत नहीं मिलता और केजरीवाल CM नहीं बनते तब तक आतिशी मुख्यमंत्री बनी रहेंगी।

आतिशी के दिल्ली CM बनने के बाद उनकी ही पार्टी से काफी कड़ी प्रतिक्रिया आई है। AAP की राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल ने इसे दिल्ली के लिए दुखद बताया है। उन्होंने एक्स (पहले ट्विटर) पर लिखा, “दिल्ली के लिए आज बहुत दुखद दिन है। आज दिल्ली की मुख्यमंत्री एक ऐसी महिला को बनाया जा रहा है जिनके परिवार ने आतंकवादी अफ़ज़ल गुरु को फाँसी से बचाने की लंबी लड़ाई लड़ी। उनके माता पिता ने आतंकी अफ़ज़ल गुरु को बचाने के लिए माननीय राष्ट्रपति को दया याचिकाऐं लिखी।

स्वाति मालीवाल ने आगे लिखा, “उनके हिसाब से अफ़ज़ल गुरु निर्दोष था और उसको राजनीतिक साज़िश के तहत फँसाया गया था। वैसे तो आतिशी मार्लेना सिर्फ़ ‘Dummy CM’ है, फिर भी ये मुद्दा देश की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। भगवान दिल्ली की रक्षा करे!”

आतिशी अभी तक केजरीवाल सरकार में शिक्षा, महिला और बाल कल्याण, PWD, टूरिज्म समेत पाँच मंत्रालय संभालती थीं। वह 2020 में पहली बार विधायक बनी थीं। उनके माता-पिता दोनों कम्युनिस्ट हैं। आतिशी CM केजरीवाल के गिरफ्तार होने के बाद फ्रंट पर थीं। अब उन्हें दिल्ली का CM अरविन्द केजरीवाल ने बनाया है। हालाँकि, ऐसा नहीं है कि आतिशी का विवादों से कोई लेनादेना ना हो। उन पर शराब घोटाले में शामिल होने से लेकर दिल्ली की शिक्षा व्यवस्था बर्बाद करने और विदेशी धरती पर भारत को बदनाम करने के आरोप लगे हैं।

शराब घोटाले में केजरीवाल ने ही लिया नाम

दिल्ली शराब घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अप्रैल, 2024 में कोर्ट को बताया था कि CM केजरीवाल ने आतिशी का नाम लिया है। ED ने बताया था कि मामले में पहले आरोपित और बाद में सरकारी गवाह बना विजय नायर केजरीवाल नहीं बल्कि आतिशी और सौरभ भारद्वाज को रिपोर्ट करता था। नायर पर इस मामले में पैसे की लेनदेन मुख्य तौर पर शामिल होने के आरोप हैं। आतिशी ने खुद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि ED उन्हें और बाकी तीन लोगों को गिरफ्तार करना चाहती है।

घोटाले के दौरान गोवा की इंचार्ज थीं आतिशी: रिपोर्ट

टाइम्स नाउ की एक रिपोर्ट में यह भी बताया गया था आतिशी उस दौरान गोवा की आम आदमी पार्टी प्रभारी थीं जब यहाँ शराब घोटाले से उगाही किया गया पैसा उपयोग में लाया गया था। टाइम्स नाउ ने यह दावा ED की कार्रवाई के आधार पर किया था। टाइम्स नाउ को मिले पत्र के अनुसार, 13 फरवरी 2022 को आतिशी मार्लेना ने चुनाव आयोग को एक पत्र लिखा था, जिसमें उन्होंने खुद को गोवा चुनावों के लिए पार्टी का प्रभारी बताया था।

गोवा में चुनाव 14 फरवरी 2022 को समाप्त हो गए थे, इसका मतलब है कि तब भी वही प्रभारी थीं। टाइम्स नाउ के पत्रकार प्रियांक त्रिपाठी ने कहा था कि अगर अरविंद केजरीवाल को दक्षिण भारतीय शराब लॉबी से रिश्वत की रकम लेने और उसका दुरुपयोग करने के आरोप में गिरफ्तार किया जा सकता है, तो निश्चित रूप से आतिशी मार्लेना के लिए मुश्किलें बढ़ रही हैं।

विदेशों में भारत की छवि की धूमिल

आतिशी पर शराब घोटाले में शामिल होने के ही नहीं बल्कि यह भी तोहमत है कि उन्होंने विदेशी धरती पर भारत की छवि को धूमिल किया। आतिशी कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी द्वारा भारत विरोधी ‘100 पर भारत: टुवर्ड्स बीइंग ए ग्लोबल लीडर’ आयोजन में गुरुवार (15 जून 2023) को शामिल हुईं थी।

यहाँ उन्होंने कहा था, “हमें अक्सर बताया जाता है कि भारत की जीडीपी अब 3 ट्रिलियन डॉलर के आँकड़े को पार कर गई है। हमें बताया गया है कि भारत सबसे तेज़ G20 अर्थव्यवस्था है और ऐसी कई अन्य जानकारी दी गईं। हालाँकि, वास्तविकता उससे कहीं अधिक चिंताजनक और कमतर है।”

उन्होंने आगे कहा था, “मुझे लगता है कि एक बेहतर संकेतक, जो वास्तव में आपको देश की स्थिति के बारे में बताता है, वह मानव विकास सूचकांक है… कुछ संकेतक हैं जिनमें 190 देश भाग लेते हैं। भारत 191 में से 132वें स्थान पर है। यह 75वें साल का भारत है।” उन्होंने यहाँ प्रोपेगेंडा के आधार पर बनाई गई ग्लोबल हंगर इंडेक्स का जिक्र भी किया था।

दिल्ली की शिक्षा को बर्बाद करने के भी आरोप

आतिशी दिल्ली सरकार में शिक्षा मंत्री और विधायक बनने से पहले सलाहकार थीं। वह सलाहकार के तौर पर शिक्षा विभाग ही देखती थीं। उनको लेकर यह प्रोपेगेंडा चलाया गया कि उनके कार्यकाल में दिल्ली में शिक्षा में क्रांतिकारी बदलाव हुए हैं। सच्चाई इससे कोसों दूर है।

दक्षिण दिल्ली नगर निगम की शिक्षा समिति के की सदस्य नंदिनी शर्मा के अनुसार, “सरकारी स्कूलों के आधुनिकीकरण के बारे में तमाम शोर-शराबे के बावजूद मनीष सिसोदिया और उनकी सलाहकार आतिशी मार्लेना की AAP सरकार ने ना केवल दिल्ली में सरकारी शिक्षा व्यवस्था को बदलने का मौका गंवा दिया, बल्कि इन दोनों ने राष्ट्रीय राजधानी में पहले से ही बदहाल शिक्षा व्यवस्था को और भी बदतर बना दिया।”

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में बताया गया था कि AAP के ‘मॉडल स्कूल’ प्रोजेक्ट में गंभीर अनियमितताओं के कारण 250 करोड़ रुपये बरबाद हो गए। आप ने 54 सरकारी स्कूलों को मॉडल स्कूल में बदलने की शुरुआत की थी और इन स्कूलों के सौंदर्यीकरण का काम दिल्ली पर्यटन एवं परिवहन विकास निगम (DTDC) को सौंपा था। हालाँकि, महज 3 साल बाद ही हाल ही में बनकर तैयार हुए कुछ स्कूलों की दीवारों में दरारें आ गईं। आतिशी के कार्यकाल में दिल्ली किताबों और शिक्षकों की भी कमी हो गई थी।

माता-पिता ने किया था अफजल गुरु को बचाने का प्रयास

दिलचस्प बात यह है कि आतिशी के माता-पिता विजय कुमार सिंह और तृप्ता वाही कट्टर कम्युनिस्ट हैं। आतिशी के माता-पिता उन ‘प्रतिष्ठित’ हस्तियों के समूह से हैं, जिन्होंने जैश-ए-मोहम्मद के आतंकवादी अफजल गुरु की मौत की सजा के खिलाफ भारत के राष्ट्रपति को दया याचिका लिखी थी। तृप्ता वाही भारत विरोधी और आतंकवादियों के हमदर्द के कुख्यात चेहरों में से एक एसएआर गिलानी से भी जुड़ी हुई हैं। हालाँकि, आतिशी ने कहा था कि वह अपने माँ-बाप की राजनीति के लिए जिम्मेदार नहीं हैं।

कौन हैं MP चंद्र आर्य, कनाडा की संसद को बताया बांग्लादेश में हिंदुओं और मंदिरों का हाल: 23 सितंबर को करेंगे रैली, कहा- जब भी आती है अस्थिरता हिंदू बनते हैं निशाना

कनाडा के भारतीय मूल के सांसद चंद्र आर्य ने बांग्लादेश में धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ हो रही हिंसा पर गहरी चिंता व्यक्त की है। सोमवार (16 सितंबर 2024) को कनाडाई संसद में दिए गए बयान में आर्य ने हिंदू, बौद्ध और ईसाई जैसे धार्मिक अल्पसंख्यकों की कठिनाइयों पर प्रकाश डाला। नेपीयन से लिबरल पार्टी के सांसद चंद्र आर्य ने कहा कि बांग्लादेश में जब भी अस्थिरता की स्थिति होती है, इन अल्पसंख्यक समुदायों, खासकर हिंदुओं को इसका सबसे ज्यादा खामियाजा भुगतना पड़ता है।

बांग्लादेश में धार्मिक अल्पसंख्यकों की घटती संख्या

चंद्र आर्य ने कनाडा की संसद में कहा, “बांग्लादेश ने जब 1971 में अपनी स्वतंत्रता हासिल की थी, तब वहाँ की आबादी में धार्मिक अल्पसंख्यकों का हिस्सा काफी बड़ा था, लेकिन आज यह बहुत कम हो गया है। स्वतंत्रता के समय बांग्लादेश में धार्मिक अल्पसंख्यकों की संख्या 23.1% थी, जिसमें लगभग 20% हिंदू शामिल थे। आज यह घटकर केवल 9.6% रह गई है, जिसमें 8.5% हिंदू हैं।” यह आँकड़ा बांग्लादेश में धार्मिक अल्पसंख्यकों की स्थिति की गंभीरता को दर्शाता है, और यह स्पष्ट करता है कि दशकों से बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ हिंसा और उत्पीड़न कैसे बढ़ रहा है।

कनाडाई हिंदुओं की चिंता

चंद्र आर्य ने बताया कि कनाडा में रहने वाले हिंदू परिवार, जिनके रिश्तेदार बांग्लादेश में हैं, अपने परिवारजनों और उनकी संपत्तियों की सुरक्षा को लेकर बेहद चिंतित हैं। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में हिंसा के कारण मंदिरों और अन्य धार्मिक स्थलों को विशेष रूप से निशाना बनाया जा रहा है, जिससे कनाडाई हिंदुओं के परिवारों को खतरा है।

आर्य ने बताया कि इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाने के लिए 23 सितंबर को कनाडाई संसद के सामने एक रैली का आयोजन किया जा रहा है। इस रैली में कनाडा के बौद्ध और ईसाई समुदायों के लोग भी शामिल होंगे, जिनके परिवार बांग्लादेश में रहते हैं और जिन पर हिंसा का खतरा मंडरा रहा है।

कनाडा की संसद में चंद्र आर्य ने क्या कहा?

कनाडाई संसद में चंद्र आर्य ने कहा, “मैडम स्पीकर, मैं बांग्लादेश में हिंदू, बौद्ध और ईसाई जैसे धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ हो रही हिंसा से गहराई से चिंतित हूं। हर बार जब बांग्लादेश में अस्थिरता की स्थिति पैदा होती है, तो धार्मिक अल्पसंख्यक, विशेष रूप से हिंदू, सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। 1971 में स्वतंत्रता के समय बांग्लादेश की आबादी में धार्मिक अल्पसंख्यकों की हिस्सेदारी 23.1% थी, जिसमें लगभग 20% हिंदू थे। अब यह घटकर केवल 9.6% रह गई है, जिसमें लगभग 8.5% हिंदू शामिल हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “कनाडाई हिंदू, जिनके परिवार बांग्लादेश में रहते हैं, अपने परिवारों, उनके मंदिरों और संपत्तियों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। वे इस मुद्दे को उजागर करने के लिए अगले सोमवार (23 सितंबर 2024) को संसद हिल पर एक रैली करेंगे। इसमें कनाडाई बौद्ध और ईसाई परिवारों के लोग भी शामिल होंगे, जिनके परिवार बांग्लादेश में हैं।”

बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमले

हाल ही में बांग्लादेश में तख्तापलट के बाद से देशभर में हिंसा का माहौल है, जिसमें हिंदुओं को खास तौर पर निशाना बनाया जा रहा है। अब तक बांग्लादेश के 27 जिलों में हिंदुओं पर हमले हो चुके हैं। इस हिंसा के दौरान कई हिंदू मंदिरों को भी क्षति पहुँचाई गई है।

जमात-ए-इस्लामी ने भी इस बात को स्वीकार किया है कि प्रधानमंत्री शेख हसीना के इस्तीफे के बाद से धार्मिक अल्पसंख्यकों, विशेष रूप से हिंदुओं और उनके पूजा स्थलों को निशाना बनाया जा रहा है। साथ ही, हसीना की पार्टी अवामी लीग के नेताओं को भी मार दिया जा रहा है और उनके घरों को आग के हवाले कर दिया गया है, जिससे देश में स्थिति और खराब हो गई है।

इस बीच, संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार विभाग की एक जाँच टीम बांग्लादेश की राजधानी ढाका पहुंची है, जो वहाँ धार्मिक अल्पसंख्यकों और अन्य समूहों के खिलाफ हो रही हिंसा की जाँच करेगी।

कौन हैं चंद्र आर्य?

चंद्र आर्य भारतीय मूल के एक कनाडाई सांसद हैं, जो मूल रूप से भारत के कर्नाटक राज्य से ताल्लुक रखते हैं। दो साल पहले, जब उन्होंने कनाडाई संसद में अपनी मातृभाषा कन्नड़ में भाषण दिया, तो उनका वीडियो वायरल हो गया था। वह कनाडा की संसद में ओंटारियो के नेपीयन निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं।

आर्य का जन्म कर्नाटक के तुमकुरु जिले में हुआ था, और उन्होंने कनाडाई राजनीति में सक्रिय रहते हुए भी अपने भारतीय मूल और जड़ों से गहरा संबंध बनाए रखा है। उनकी इस प्रतिबद्धता को देखते हुए भारतीय समुदाय और उनके समर्थक उन्हें एक सशक्त नेता के रूप में देखते हैं, जो वैश्विक स्तर पर भारतीय मूल के लोगों के मुद्दों को उठाते हैं।

चंद्र आर्य का यह बयान न केवल बांग्लादेश में धार्मिक अल्पसंख्यकों की स्थिति की गंभीरता को दर्शाता है, बल्कि यह भी इंगित करता है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इस पर ध्यान देने की आवश्यकता है। कनाडा में हिंदू, बौद्ध और ईसाई परिवारों द्वारा आयोजित रैली इस मुद्दे को वैश्विक मंच पर उजागर करने का एक महत्वपूर्ण कदम है।

कोलकाता के पुलिस कमिश्नर-स्वास्थ्य निदेशक हटाए गए : डॉक्टरों के सामने ममता बनर्जी की हेकड़ी निकली, RG Kar केस में TMC विधायक के घर पर रेड

कोलकाता में RG कर मेडिकल कॉलेज में महिला डॉक्टर की रेप और हत्या के बाद जारी प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों के सामने ममता बनर्जी सरकार झुक गई है। ममता बनर्जी सरकार ने धरने पर बैठने वाले जूनियर डॉक्टरों की कई माँगे मानने का फैसला लिया है। CM ममता बनर्जी ने कोलकाता कमिश्नर समेत कई अधिकारियों को पद से हटाने का ऐलान किया है।

सोमवार (16 सितम्बर, 2024) को CM ममता बनर्जी और जूनियर डॉक्टरों के बीच लगभग 2 घंटे तक बातचीत चली। इस बैठक के बाद CM ममता बनर्जी ने ऐलान किया कि कोलकाता कमिश्नर विनीत गोयल को उनके पद से हटाया जाएगा। इसके अलावा कोलकाता उत्तरी DCP को भी हटाया जाएगा, उन पर परिवार को पैसे की पेशकश के आरोप हैं।

CM ममता बनर्जी ने ऐलान किया कि स्वास्थ्य विभाग के दी बड़े अधिकारियों कौस्तुव नाइक और देबाशीष हल्दर को भी हटा दिया जाएगा। कोलकाता कमिश्नर मंगलवार (16 सितम्बर, 2024) को अपना इस्तीफ़ा सौंप देंगे। उनकी जगह नए कमिश्नर को तैनात किया जाएगा।

कोलकाता के कमिश्नर को हटाए जाने को प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों ने अपनी जीत बताया है। हालाँकि, उन्होंने अभी काम पर लौटने से इनकार कर दिया है। उन्होंने कहा है कि वह तब काम पर नहीं लौटेंगे जब तक उनकी सारी माँगे पूरी नहीं हो जाती और साथ ही अभी किए गए वादे पूरे नहीं होते।

ममता बनर्जी ने डॉक्टरों की तीन माँगे मानने के बाद कहा कि वह काम पर लौट जाएँ। हालाँकि, डॉक्टरों ने इससे इनकार कर दिया। डॉक्टरों ने कहा है कि वह इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई का इन्तजार कर रहे हैं। वें ममता बनर्जी ने कहा है कि अगर डॉक्टर काम पर लौटते हैं तो उनके खिलाफ कोई एक्शन नहीं होगा।

इससे पहले ममता बनर्जी और डॉक्टरों के बीच लगातार गतिरोध चला आ रहा था। डॉक्टरों ने बात की थी कि उनकी और राज्य सरकार की बातचीत को बाहर लाइव चलाया जाए। इसको लेकर ममता सरकार राजी नहीं थी। इसके बाद डॉक्टरों ने अपना स्टेनो लाने की बात कही, इसे मान लिया गया।

गौरतलब है कि 9 अगस्त, 2024 को कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज में एक महिला डॉक्टर की रेप के बाद हत्या कर दी गई थी। इस मामले में पहले प्रशासन और अस्पताल के अधिकारियों ने लीपापोती करने का प्रयास किया था। हालाँकि विरोध के बाद सच्चाई सामने आई थी। अभी इस मामले में CBI जाँच चल रही है।

आर जी कर घोटाले में TMC विधायक पर छापा

आर जी कर मेडिकल कॉलेज में वित्तीय अनियमितताओं के संबंध में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) विधायक सुदीप्तो रॉय के घर पर छापा मारा है। उनके घर ED की एक टीम पहुँची। इस मामले में उनका क्या कनेक्शन है यह सामने नहीं आया। ED अधिकारियों ने उनके नर्सिंग होम पर भी छापा मारा। TMC विधायक सुदीप्तो रॉय एक चिकित्सक हैं। वहीं इससे पहले उनसे CBI पूछताछ कर चुकी है। इसके अलावा आर जी कर मामले में हिरासत में लिए गए पूर्व प्राचार्य संदीप घोष के फ़ार्म हाउस पर भी छापेमारी हुई है।

‘राहुल गाँधी के स्टाफ पास पत्रकार का फोन छीनने का अधिकार नहीं’: इंडिया टुडे के रोहित शर्मा से बदसलूकी पर अमेरिकी प्रेस क्लब सख्त, कहा- यह कानूनों का उल्लंघन

अमेरिका में राहुल गाँधी के कार्यक्रम से पहले इंडिया टुडे के पत्रकार रोहित शर्मा के साथ हुई मारपीट का मामला गरमा गया है। अमेरिका के नेशनल प्रेस क्लब(NPC) ने इस मामले पर एक बयान जारी किया है। NPC ने कहा है कि पत्रकार के साथ मारपीट अमेरिकी कानूनों के उल्लंघन के दायरे में आती है। NPC ने कहा है कि राहुल गाँधी के स्टाफ का कोई अधिकार नहीं बनता था कि वह पत्रकार रोहित शर्मा के साथ बदसलूकी करें या उनका फोन छीनें।

NPC की अध्यक्ष एमिली विल्किंस ने इस संबंध में बयान जारी किया है। विल्किंस ने कहा, “इंडिया टुडे की हालिया खबर और रोहित शर्मा और एनपीसी बोर्ड के एक सदस्य के बीच बातचीत में यह साफ़ हुआ है है कि शर्मा डलास हवाई अड्डे के पास एक होटल में भारत के विपक्ष के नेता राहुल गाँधी के आने का इन्तजार कर रहे थे। इसी दौरान शर्मा ने इंडिया ओवरसीज कॉन्ग्रेस (IOC) के अध्यक्ष सैम पित्रोदा का इंटरव्यू लिया। दोनों पहले भी मिल चुके थे और यह इंटरव्यू रिकॉर्डिंग की सहमति के साथ किया गया था।”

एमिली विल्किंस ने आगे बताय, “आखिरी सवाल पर दर्शकों में से कुछ लोगों ने सवाल पर आपत्ति जताई और शर्मा पर चिल्लाते हुए और उन्हें धक्का देते हुए उनका फोन छीनकर इंटरव्यू रोक दिया। इन लोगों में गाँधी के स्टाफ के लोग शामिल थे, जिन्होंने शर्मा के फोन से फाइलें डिलीट कर दीं और उनसे फोन छीन कर रख लिया।”

NPC ने घटना का जिक्र करने के बाद याद दिलाया कि अमेरिका में पत्रकार एक कानून के तहत सुरक्षित होते हैं जिसका राहुल गाँधी की टीम ने उल्लंघन किया हो सकता है। NPC ने लिखा, “सुरक्षा कर्मचारियों को पता होना चाहिए कि अमेरिका में पत्रकारों को संविधान द्वारा सुरक्षा दी जाती है, चाहे पत्रकार या फिर इंटरव्यू देने वाले किसी भी देश के हों।”

NPC ने कहा, “यह शर्मा और पित्रोदा के बीच तय किए गए नियमों के आधार पर ऑन-द-रिकॉर्ड इंटरव्यू था। राहुल गाँधी की टीम की इंटरव्यू के सवालों या उसके टाइम से कोई लेना देना नहीं था। उनके पास शर्मा का फोन उनसे छीनने या इंटरव्यू डिलीट करने का अधिकार नहीं था।”

NPC के इस बयान के बाद कॉन्ग्रेस नेता सैम पित्रोदा और राहुल गाँधी और भी घिर गए हैं। गौरतलब है कि इंडिया टुडे के अमेरिकी मामले देखने वाले पत्रकार रोहित शर्मा ने एक लेख में बताया था कि किस तरह सैम पित्रोदा के साथ एक इंटरव्यू में हिन्दुओं पर सवाल पूछने के कारण उनके साथ मारपीट हुई।

क्या थी पूरी घटना

रोहित शर्मा के लेख के अनुसार, “अपनी तैयारी के हिस्से के रूप में मैंने इंडियन ओवरसीज कॉन्ग्रेस (IOC) के अध्यक्ष सैम पित्रोदा से संपर्क किया। मैंने पहले भी उनका साक्षात्कार लिया है। सैम इंटरव्यू देने के लिए तैयार हो गए। शाम करीब 7.30 बजे मैं टेक्सास के इरविंग में रिट्ज कार्लटन पहुँचा। वहाँ मुझे सैम के विला में ले जाया गया, जहाँ करीब 30 लोग बैठे थे, जिनमें भारत से आए कुछ लोग भी थे।”

इसके बाद पत्रकार शर्मा इंटरव्यू रिकॉर्ड करने के लिए अपना फोन सेट किया और राहुल गाँधी की यात्रा पर चर्चा करने लगे थे। इस दौरान सैम पित्रोदा ने उनके चार सवालों का सहजता से जवाब दिया। उन्होंने अंतिम सवाल पूछा कि ‘क्या राहुल गाँधी अमेरिकी सांसदों के साथ अपनी बैठकों के दौरान बांग्लादेश में मारे जा रहे हिंदुओं का मुद्दा उठाएँगे?’

इस सवाल का जवाब देने से पहले सैम पित्रोदा ने कहा, “यह राहुल और सांसदों पर निर्भर है कि वे तय करें कि क्या प्रासंगिक है। मैं उनकी ओर से नहीं बोल सकता लेकिन…।” इसी बीच वहाँ बैठे लोग हँगामा करने लगे।

रोहित शर्मा ने कहा, “राहुल की टीम के एक सदस्य ने मेरा फ़ोन छीन लिया और चिल्लाने लगा- ”बंद करो! बंद करो!, साक्षात्कार बंद करो” उन्होंने आगे कहा, ”सैम भी मेरी तरह घबराए हुए थे और लोगों से शांत रहने की अपील कर रहे थे। हालाँकि, राहुल गाँधी के टीम के लोगों एवं समर्थकों ने उनकी बात नहीं मानी और मेरी माइक छीनने लगे। मैंने विरोध किया और उन्होंने मोबाइल की रिकॉर्डिंग बंद कर दी।”

इस हंगामे के बीच ही सैम पित्रोदा को राहुल गाँधी से मिलने के लिए एयरपोर्ट ले जाया गया। हालाँकि, कमरे में कम से कम 15 लोग रह गए। रोहित ने आगे कहा, “उन्होंने मुझसे साक्षात्कार से अंतिम प्रश्न हटाने के लिए कहा। मैं उन्हें समझाता रहा कि प्रश्न में कुछ भी विवा दास्पद नहीं है और उनकी हरकतें गलत हैं। इसके बावजूद वे अड़े रहे और मेरा फोन लेकर उसमें खोजबीन करने लगे।”

इसके बाद उन लोगों ने उस साक्षात्कार को पत्रकार की फ़ोटो लाइब्रेरी से डिलीट कर दिया, लेकिन वह डिलीट फ़ोल्डर में वह रह गया और उसे खोलने के लिए पत्रकार के फेस आईडी की जरूरत थी। रोहित ने बताया, “जब मैं वहाँ बैठा था तो दो आदमी मेरे बगल में खड़े थे। उनमें से एक ने चुपके से मेरा फ़ोन मेरे चेहरे के पास लाया और मेरी सहमति के बिना उसे अनलॉक कर दिया।”

इसके बाद उन्होंने डिलीट किए गए फ़ोल्डर से इंटरव्यू को डिलीट करना शुरू कर दिया। iCloud भी चेक किया। रिकॉर्डिंग के दौरान फ़ोन एयरप्लेन मोड में था। इसलिए वीडियो सिंक नहीं हो पा रहा था। इस तरह वे लगभग आधे घंटे तक हर तरह की हरकत करने के बाद शांत बैठ गए। हालाँकि, इसके बाद भी वे फोन नहीं लौटाए और उसे चार दिनों तक अपने पास रखा। पत्रकार के साथ हुई मारपीट में राहुल गाँधी के निजी सचिव अलंकार के शामिल होने की बात भी सामने आई थी।

बाद में इस मामले को लेकर सैम पित्रोदा ने इंडिया टुडे से बातचीत की। सैम पित्रोदा ने अपने ही इंटरव्यू में पत्रकार शर्मा के साथ हुई मारपीट की जानकारी होने से इनकार कर दिया। उन्होंने यह कह कर पीछा छुड़ाने की कोशिश की कि उन्हें इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है और शर्मा को इस जानकारी को सार्वजनिक करने से पहले उनसे बात करनी चाहिए थी।

इंडिया टुडे ने बाद में यह सूचना दी कि उनके पत्रकार से हुई मारपीट के संबंध में पित्रोदा ने फोन पर माफी माँगी है। पित्रोदा ने जाँच करवाने की बात भी शर्मा से कही थी। हालाँकि, राहुल गाँधी या कॉन्ग्रेस की तरफ से प्रेस पर हमले के संबंध में कोई बयान नहीं आया।

जहाँ करेंगे PM मोदी भारतीयों को संबोधित, वहाँ से 27km दूर हिंदू मंदिर पर हमला: कनाडा की तरह अमेरिका में भी खालिस्तानियों का हाथ?

अमेरिका के न्यूयॉर्क स्थित स्वामीनारायण मंदिर को कट्टरपंथियों ने निशाना बनाया है। 16 सितंबर 2024 को न्यूयॉर्क के मेलविले में स्थित BAPS श्री स्वामीनारायण मंदिर के बाहर लगे साइन बोर्ड पर स्प्रे पेंट से हिंदू-घृणा के शब्द लिखे गए। ‘हिंदू-स्तान मुर्दाबाद’ और ‘मोदी टेररिस्ट’ जैसे शब्द लिख कर पूरे देश को बदनाम करने की साजिश की गई।

जिस जगह पर हिंदू मंदिर को कट्टरपंथियों ने निशाना बनाया है, वह भारतीय दृष्टिकोण से फिलहाल बहुत अहम है। ठीक 5 दिन बाद यानी 22 सितंबर 2024 को PM मोदी इस मंदिर से महज 27 किलोमीटर दूर भारतीय समुदाय को संबोधित करने वाले हैं। अमेरिका स्थित भारत के महावाणिज्य दूतावास ने इस घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया जाहिर की है। 

अमेरिका में भारत के महावाणिज्य दूतावास ने लिखा है:

“न्यूयॉर्क के मेलविले में BAPS स्वामीनारायण मंदिर में की गई बर्बरता अस्वीकार्य है। इस मामले में वाणिज्य दूतावास यहाँ रह रहे भारतीय समुदाय के संपर्क में है। साथ ही इस जघन्य कृत्य को करने वाले अपराधियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई के लिए अमेरिकी पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों के समक्ष मामला भी उठाया गया है।”

जाँच की माँग: हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन के समर्थन में कई नेता 

हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन ने BAPS स्वामीनारायण मंदिर को निशाना बनाने वाले लोगों पर कार्रवाई की माँग की है। अमेरिकी न्याय विभाग और होमलैंड सुरक्षा विभाग को जाँच के लिए लिखा गया है। उन्होंने लिखा कि लोकतांत्रिक ढंग से चुने गए नेता को टार्गेट करना, हिंदू मंदिरों पर हमले करना आदि हिंदू-घृणा प्रकट करना ही है। 

खालिस्तानी कट्टरपंथियों ने हाल ही में हिंदू और भारतीय संस्थानों को लेकर धमकियाँ दी थीं। हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन ने इस ओर भी अमेरिकी पुलिस-प्रशासन का ध्यान दिलाया।

BAPS स्वामीनारायण मंदिर पर हमला, खालिस्तान का हाथ?

अमेरिका स्थित हिंदू मंदिरों को निशाना बनाया जा रहा है, ऐसा नहीं है। कुछ दिन पहले ही कनाडा में भी यही किया गया। वहाँ तो यह तक धमकी दी गई कि जो भारतीय मूल के लोग वहाँ रह रहे हैं, वो सब देश छोड़ कर चले जाएँ। 

कनाडा के सांसद चंद्र आर्य ने जब एडमॉन्टन शहर में स्थित BAPS स्वामीनारायण मंदिर पर हमले को लेकर आवाज उठाई तो खालिस्तानी आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू ने सभी भारतीय मूल के लोगों को धमकी दे डाली। सबको कनाडा छोड़ देने का फतवा जारी कर दिया।

विदेश में हिंदू मंदिरों पर बढ़ते हमले, किसकी साजिश?

जुलाई 2024 में कनाडा के एडमॉन्टन शहर में BAPS स्वामीनारायण मंदिर में तोड़फोड़ की गई और दीवार पर विवादित नारे लिखे गए। इसका आरोप भी खालिस्तानी आतंकियों पर लगा था। इसके पहले यहाँ 7 सितंबर 2023 को माता भामेश्वरी दुर्गा मंदिर, 12 अगस्त 2023 को लक्ष्मीनारायण मंदिर और 31 जनवरी 2023 को ब्रैम्पटन स्थित एक प्रमुख हिंदू मंदिर में तोड़फोड़ की गई थी।

दिसंबर 2023 में अमेरिका के कैलिफोर्निया स्थित नेवार्क में स्वामीनारायण मंदिर की दीवारों पर भारत विरोधी नारे लिखे गए। मंदिर की दीवार पर अंग्रेजी में ‘शहीद भिंडरावाला’ और ‘मोदी टेररिस्ट’ लिखा गया था। यही नहीं, मंदिर के बोर्ड पर भी काली स्याही से खालिस्तान लिखा गया था।

सितंबर 2022 में कैरेबियन देश त्रिनिदाद एंड टोबैगो में एक ही सप्ताह में 2 हिंदू मंदिरों को तोड़ कर उन्हें अपवित्र किया गया था। मंदिर में तोड़फोड़ कर देवी काली की मूर्ति को क्षतिग्रस्त कर दिया गया था।

हिंदू-घृणा के नाम पर विदेशों में स्थित हिंदू मंदिरों को आखिर कौन निशाना बना रहा है? क्यों बार-बार ऐसी हिंसक वारदातों के पीछे खालिस्तानियों का हाथ होने के आरोप लगते हैं? और अगर आरोप लगते हैं तो जाँच एजेंसियाँ अब तक क्यों नहीं किसी अंजाम तक पहुँच पाई हैं? हिंदू मंदिर पर हमले को लेकर क्या जाँच एजेंसियाँ भी शक के घेरे में हैं, क्या किसी बड़े नेक्सस के साथ इनका भी घालमेल है? इन सबकी निष्पक्ष जाँच बहुत जरूरी है।

संत नहीं भिंडरावाले, शोषण करते हैं हीरो: मिला मंच तो कंगना रनौत ने खालिस्तानियों से लेकर बॉलीवुड तक के खोल दिए धागे, कहा- इमरजेंसी में कुछ भी गलत नहीं

कंगना रनौत (Kangana Ranaut) ऐसी अदाकारा हैं जो किसी भी विषय पर स्पष्ट राय रखती हैं। समाचार चैनल ‘न्यूज 18 इंडिया’ के कार्यक्रम ‘चौपाल’ में भी सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने अपनी फिल्म ‘इमरजेंसी’ से लेकर बॉलीवुड में यौन शोषण तक पर खुलकर बात की।

कंगना की फिल्म इमरजेंसी (Emergency) बीते 6 सितंबर को रिलीज होनी थी। लेकिन सेंसर बोर्ड से पास नहीं होने के कारण इसकी रिलीज टल गई थी। इस फिल्म पर चल रहे विवादों को लेकर अभिनेत्री सह बीजेपी सांसद ने कहा है कि जरनैल सिंह भिंडरावाले (Jarnail Singh Bhindranwale) कोई संत नहीं था। वह आतंकवादी था।

अमीश देवगन के सवाल का जवाब देते हुए कंगना ने कहा, “मेरी फिल्म (इमरजेंसी) आने को रेडी है। सेंसर सर्टिफिकेट मिला है मेरी फिल्म को। 4 इतिहासकारों ने इसे देखा है। मेरे पास पूरे वैध दस्तावेज हैं। फिल्म में कुछ भी गलत नहीं दिखाया गया है।”

खालिस्तानी आतंकी भिंडरावाले को लेकर उन्होंने कहा, “कुछ लोग हैं जो कहते हैं कि भिंडरावाले जो हैं वो संत हैं। वे एक महान क्रांतिकारी हैं। वे एक लीडर हैं। वे एक धर्मात्मा हैं। ऐसे लोग डरा धमकाकर, देश को जलाने की धमकी देकर, याचिका डालकर विरोध कर रहे हैं। मुझे भी धमकियाँ दी। पिछली सरकारों ने खालिस्तानियों को आतंकवादी घोषित किया है। वह कोई संत नहीं था, जो एके-47 लेकर मंदिर में बैठा था। उनके पास ऐसे ऐसे हथियार थे जो हमारी सेना के पास भी नहीं थे।”

कंगना रनौत ने कहा है कि उनकी फिल्म को लेकर कुछ लोगों को ही आपत्ति है। यही लोग दूसरों को भी भड़का रहे हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब के 99 प्रतिशत लोग भी भिंडरावाले को संत नहीं मानते हैं। वह आतंकवादी है। य​दि वह आतंकवादी है तो मेरी फिल्म रिलीज होनी चाहिए।

नीचे लगे वीडियो में आप 3 मिनट के बाद यह पूरी बातचीत सुन सकते हैं

फिल्म का रिलीज टलने से हुए आर्थिक नुकसान को लेकर बात करते हुए उन्होंने कहा, “मैंने कभी ऐसा नहीं सोचा था कि भिंडरावाले को आतंकवादी दिखाए जाने पर किसी को आपत्ति होगी। मुझे प्रताड़ित किया जाएगा। यह शर्मनाक है। इसका हमें नुकसान उठाना पड़ा है। फिल्म को रिलीज से 4 दिन पहले कैंसिल कर दिया गया था।”

इसी कार्यक्रम के दौरान उन्होंने बॉलीवुड को लेकर भी खुलकर बात की। उन्होंने बॉलीवुड के डबल स्टैंडर्ड पर बात करते हुए फिल्मी सितारों के दाऊद इब्राहिम के साथ कनेक्शन की चर्चा की। बताया कि कैसे उनकी फिल्म की रिलीज टलने पर उन्हें समर्थन नहीं मिला। कैसे उनका घर टूटने पर जश्न मनाया गया।

मलयालम सिनेमा पर हेमा कमिटी की रिपोर्ट ने फिल्म इंडस्ट्री में महिलाओं की स्थिति को चर्चा में ला दिया है। बॉलीवुड को लेकर बात करते हुए कंगना ने कहा, “ये लोग महिलाओं का शोषण करते हैं। महिलाओं को मैसेज कर डिनर के लिए घर पर बुलाते हैं। हीरो लोग महिलाओं का शोषण करते हैं। सबसे ज्यादा शोषण हीरो करते हैं।”

अपने दावों की पुष्टि के लिए उन्होंने कोरियोग्राफर सरोज खान के एक पुराने बयान का भी जिक्र किया। इस बयान में सरोज खान ने कहा था, “रेप तो करते हैं पर रोटी भी देते हैं।”

500 लोगों की हत्या, महिलाओं की पिटाई-दी मौत… सारे मुस्लिम, फिर भी ‘भारत के मुस्लिमों’ पर चुदुर-बुदुर कर रहा ईरान का कठमुल्ला, विदेश मंत्रालय ने कर दिया शांत

ईरान के सुप्रीम लीडर और शियाओं के बड़े धर्मगुरु अयातोल्लाह अल खामनेई ने भारत में मुस्लिम पीड़ित वाले प्रोपेगेंडा को हवा देने की कोशिश की है। खामनेई ने एक ट्वीट में म्यांमार और गाजा की तरह भारत में मुस्लिमों के शोषित होने का दावा किया। खामनेई के इस बयान का भारत ने जवाब देते हुए कहा है कि उन्हें पहले अपने घर में झाँकना चाहिए।

सोमवार (16 सितम्बर, 2024) को ईरान के सुप्रीम लीडर अयातोल्लाह अल खामनेई ने एक ट्वीट किया। उन्होंने लिखा, “इस्लाम के दुश्मनों ने हमेशा हमारी इस्लामी उम्माह वाली इकट्ठा पहचान को निशाना बनाने का प्रयास किया है। अगर हम म्यांमार,गाजा,भारत या किसी और जगह पर मुस्लिम को होने वाले दर्द से अनजान हैं, तो हम खुद को मुसलमान नहीं कह सकते।”

ईरान के सुप्रीम लीडर के इस बयान पर भारत में कड़ी प्रतिक्रिया हुई है। भारत में सोशल मीडिया पर भी ईरान के सुप्रीम के इस बयान की आलोचना की गई। भारतीय विदेश मंत्रालय ने भी खामनेई के इस बयान पर अपना रुख साफ़ कर दिया और ईरान के अल्पसंख्यकों के प्रति खराब रिकॉर्ड पर भी प्रकाश डाला।

भारतीय विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा, “हम ईरान के सुप्रीम लीडर द्वारा भारत में अल्पसंख्यकों के बारे में की गई टिप्पणी की कड़ी निंदा करते हैं। ये फर्जी सूचना पर आधारित हैं और स्वीकार्य नहीं हैं। भारत के अल्पसंख्यकों पर टिप्पणी करने वाले देशों को सलाह है कि वे दूसरों के बारे में कोई भी बात करने से पहले अपना रिकॉर्ड देखें।”

यह कोई पहला मौक़ा नहीं है जब ईरान ने भारत में मुस्लिम पीड़ित होने वाला प्रोपेगेंडा चलाया हो। आयतोल्लाह अल खामनेई ने इससे पहले 2020 में CAA विरोधी दंगों के समय भी भारत में मुस्लिम पीड़ित वाला नैरेटिव चलाने की कोशिश की थी। उन्होंने इस दौरान भारत में हिन्दुओं के अतिवादी होने का आरोप लगाया था।

ईरान खामनेई भारत मुस्लिम

जहाँ एक ओर ईरान के सुप्रीम लीडर खामनेई भारत में मुस्लिमों की स्थिति पर चिंता कर रहे हैं जो किसी भी इस्लामी देश से अच्छी है, वहीं उनके ही देश का अल्पसंख्यकों और महिलाओं के प्रति रिकॉर्ड विश्व में सबसे निचले स्तर का रहा है। भारत में मुस्लिमों पर रोने पीटने वाले वाले ईरान ने वर्ष 2023 में कम से कम 22 औरतों को मौत की सजा दी थी।

इन औरतों को मौत की सजा इसलिए दी गई थी क्योंकि यह आयतोल्लाह के दकियानूसी इस्लामी विचारों को नहीं मानती थीं। जिन महिलाओं को मौत की सजा दी गई उनमें से अधिकांश का दोष यह था कि उन्होंने हिजाब पहनने से इनकार कर दिया था जिसे आयतोल्लाह के इस्लामी राज की नाफ़रमानी माना गया था।

ईरान की लड़की महसा अमीनी का मामला पूरी दुनिया में चर्चित रहा था। महसा अमीनी एक 22 वर्ष की युवती थी जिसे ईरान की पुलिस ने हिजाब का विरोध करने के लिए हिरासत में लिया था। सितम्बर, 2022 में पुलिस की ही हिरासत में महसा अमीनी की मौत हो गई थी। आरोप है कि पुलिस ने महसा अमीनी को यातनाएँ दी जिसके कारण उनकी मौत हुई।

अमीनी की मौत के बाद ईरान में बड़े स्तर पर प्रदर्शन चालू हो गए थे और खामनेई की इस्लामी सत्ता को चुनौती मिलने लगी थी। ईरान की सरकार ने इन विरोध प्रदर्शन को बेरहम तरीके से दबा दिया था। ईरान की सरकार ने इसके लिए सारे हथकंडे अपनाए थे। लगभग 500 लोगों को मार दिया गया था।

ईद मिलाद-उन-नबी के जुलूस में सरदार पटेल को किया अपमानित, महापुरुषों का अपमान: हिन्दू संगठनों ने की कार्रवाई की माँग

उत्तर प्रदेश के बरेली में ईद मिलाद-उन-नबी के जुलूस के दौरान सरदार वल्लभभाई पटेल की प्रतिमा का अपमान किया गया है। यहाँ इस्लामिक कट्टरपंथियों की भीड़ में शामिल कुछ लोगों ने सरदार पटेल की प्रतिमा को जूतों की माला पहना दी है। यह करतूत करने वालों की तादाद 8 से 9 लोगों की बताई जा रही है। पुलिस ने घटना की जाँच शुरू कर दी है।

यह घटना बरेली जिले के थानाक्षेत्र नवाबगंज की है। सोमवार (16 सितंबर 2024) को यहाँ हिन्दू जागरण मंच के हरिपाल सिंह ने थाने में तहरीर दी है। तहरीर में हरिपाल सिंह ने बताया कि सोमवार की सुबह 10:30 से 11:30 के बीच नवाबगंज बाजार से ईद मिलाद-उन-नबी का जुलूस निकला था। इस जुलूस में सैकड़ों की तादाद में लोग शामिल हुए थे। जुलूस के रूट में सरदार वल्लभभाई पटेल की प्रतिमा पड़ती है। आरोप है कि जुलूस की शक्ल में चल रही मुस्लिमों की भीड़ में से 8-9 अज्ञात लोग सरदार पटेल की प्रतिमा पर पहुँच गए।

इन सभी ने सरदार वल्लभभाई पटेल की प्रतिमा को जूतों की माला पहनाई। इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

शिकायतकर्ता ने यह हरकत जानबूझकर देश के महापुरुषों को बदनाम करने की साजिश करार दिया है। शिकायत में आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की गई है। इस हरकत की वजह से सर्व समाज में गुस्सा भी बताया गया है। ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है। पुलिस ने इस शिकायत का संज्ञान लिया है। मामले की जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई के लिए थाना प्रभारी नवाबगंज को जरूरी दिशा निर्देश भी दे दिए गए हैं।

राजस्थान में पहले से तय था जुलूस का रूट, फिर भी अलग मुड़ गई इस्लामी कट्टरपंथियों की भीड़; पुलिस के रोकने पर नोकझोंक-नारेबाजी, लेकिन नहीं चल पाई मनमानी

राजस्थान के बाराँ जिले में बारावफात के मौके पर इस्लामी कट्टरपंथियों की भीड़ ने बवाल किया है। यहाँ तय रुट से अलग जाने की जिद पर आमादा भीड़ पुलिस से ही भिड़ गई। मुस्लिम भीड़ अचानक ही तय रुट से अलग जाने लगी जिसका पुलिस ने विरोध किया। पुलिसकर्मियों से धक्कामुक्की की गई। भीड़ में कुछ लोगों ने नारेबाजी की। फ़िलहाल पुलिस ने काफी मशक्क्त कर हंगामे को शाँत किया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये मामला बाराँ जिले के प्रताप चौक का है। यहाँ सोमवार (16 सितंबर 2024) को मुस्लिम समुदाय के लोगों ने ईद मिलाद-उन-नबी का जुलूस निकाला था। जुलूस में इस्लामी झंडों के साथ सैकड़ों की तादाद में लोग शामिल थे। पुलिस और प्रशासन ने पिछले लम्बे समय से इन जुलूस की तैयारियाँ मुकम्मल की थीं। सभी वर्गों से बात कर के एक रुट तय किया गया था। साथ ही एक नियमावली भी बनाई गई थी, जिसका पालन सबके लिए अनिवार्य किया गया था।

बताया जा रहा है कि दोपहर में यह जुलूस तय रुट से होता हुआ प्रताप चौक पर पहुँचा। तभी इसमें मौजूद कुछ लोगों ने अपना रास्ता बदल कर तय मार्ग से अलग चलना शुरू कर दिया। रुट में बदलाव की कोशिश होती देख कर पुलिस ने उन लोगों को आगे जाने से रोक दिया। इस बात पर रास्ता बदलने पर आमादा लोग भड़क गए। उन्होंने बीच सड़क पर ही हंगामा करना शुरू कर दिया। नारेबाजी के साथ आसपास मौजूद बाकी लोगों को भी भड़काने की कोशिश की गई।

हालाँकि इस हंगामे के बावजूद पुलिस ने तय रुट में किसी भी प्रकार से बदलाव से साफ़ इंकार कर दिया। आखिरकार मौके पर पुलिस के सीनियर अधिकारी पहुँचे। उन्होंने लोगों को नियमों का हवाला देते हुए समझाया। काफी देर की आपाधापी के बाद ईद मिलाद-उन-नबी का जुलूस उसी राह से आगे बढ़ा, जो पहले से ही तय था। पुलिस के मुताबिक बल प्रयोग की जरूरत नहीं पड़ी। जिले के पुलिस अधीक्षक ने लोगों से किसी भी अफवाह पर ध्यान न देने की अपील की है।

जिबरान ने नाबालिग हिन्दू लड़की को दोस्तों के साथ मिल कर घर से उठाया, 4 दिन बाद भी सुराग नहीं: धमकी के बाद परिवार ने छोड़ा घर

उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहाँ अचलगंज थाना क्षेत्र के एक गाँव से एक 16 वर्षीय नाबालिग हिंदू किशोरी का अपहरण कर लिया गया। पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया है कि एक मुस्लिम युवक जिबरान ने अपने साथियों के साथ मिलकर उनकी बेटी को जबरन घर से उठा लिया। इतना ही नहीं, आरोपितों ने धमकी दी कि अगर गाँव में दिखाई दिए, तो पूरे परिवार को गोली मार देंगे।

न्यूज18 की रिपोर्ट के मुताबिक, 12 सितंबर की रात को आरोपित जिबरान अपने दर्जन भर साथियों के साथ पीड़िता के घर पहुँचा। उन्होंने परिवार पर दबाव बनाकर उनकी बेटी को जबरदस्ती उठा लिया। पीड़िता के पिता ने बताया कि आरोपित जिबरान ने धमकी दी कि अगर उन्होंने पुलिस से शिकायत की या गाँव में दिखे, तो उनके पूरे परिवार को जान से मार दिया जाएगा। इस घटना के बाद परिवार ने डर के कारण घर छोड़ दिया और कहीं और जाकर शरण ली।

पीड़िता के पिता ने आरोप लगाया कि आरोपितों ने जबरन उन्हें एक सादे कागज पर अँगूठा लगाने के लिए मजबूर किया। आरोपितों ने दावा किया कि उनकी बेटी 20 साल की है, जबकि वह महज 16 साल की है। इसके बाद, पीड़िता के माता-पिता ने अपने बेटे को दिल्ली में इसकी सूचना दी, जो तुरंत वापस उन्नाव लौट आया और पुलिस से शिकायत की।

पुलिस पर लापरवाही के आरोप

घटना के चार दिन बाद पीड़िता के भाई ने अचलगंज पुलिस थाने में जाकर लिखित शिकायत दी, जिसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया। पुलिस ने अपहरण और अन्य गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज किया और जाँच शुरू कर दी है। हालाँकि, पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि अब तक कोई ठोस सुराग नहीं मिला है और पीड़िता की बरामदगी नहीं हो पाई है।

इस मामले में पुलिस ने चार लोगों को हिरासत में लिया है, लेकिन अब तक किशोरी का कोई पता नहीं चल सका है। पीड़िता के परिवार का आरोप है कि पुलिस इस मामले को गंभीरता से नहीं ले रही और आरोपितों को संरक्षण देने का प्रयास कर रही है। पीड़िता के माता-पिता का कहना है कि उनकी बेटी को किसी मदरसे में छिपाकर रखा गया था, लेकिन अब वहाँ से भी उसकी कोई जानकारी नहीं है।

दबंगों की धमकी और लव जिहाद का आरोप

पीड़िता के भाई ने बताया कि उनकी बहन के अलावा भी गाँव में इसी तरह की घटनाएँ हो चुकी हैं, जहाँ मुस्लिम समुदाय के दबंगों ने अन्य लड़कियों को भी निशाना बनाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिबरान और उसके साथियों ने पहले भी कई बार गाँव में लव जिहाद के जरिए लड़कियों को बहकाने और जबरन शादी कराने की कोशिश की है। पीड़िता के भाई का कहना है कि इस बार भी उनकी बहन के साथ जबरन शादी कराई जा रही है।

परिवार ने लगाई न्याय की गुहार

पीड़िता के माता-पिता अब पूरी तरह से असहाय और डरे हुए हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अपील की है कि उनकी बेटी को जल्द से जल्द ढूंढकर उन्हें सौंपा जाए। पीड़िता के पिता ने कहा, “हमारी बेटी को जबरन उठाकर ले जाया गया है, हम मुख्यमंत्री से अपील करते हैं कि वे हमें न्याय दिलाएँ।” पीड़िता के परिवार ने आरोप लगाया कि गाँव में पहले भी ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं, जहाँ विशेष समुदाय के लोग हिंदू लड़कियों को जबरन उठा ले जाते हैं और उनका धर्म परिवर्तन कराते हैं। इस मामले को लेकर गाँव में भी भय और आक्रोश का माहौल है।

पुलिस की निष्क्रियता पर उठते सवाल

पुलिस की कार्रवाई पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों और पीड़ित परिवार ने पुलिस पर आरोप लगाया है कि वह इस मामले को गंभीरता से नहीं ले रही और लापरवाही बरत रही है। हालाँकि, पुलिस का कहना है कि वे हर संभव प्रयास कर रहे हैं और जल्द ही पीड़िता को बरामद किया जाएगा।

वहीं, सीओ बीघापुर ऋषिकांत शुक्ला ने बताया कि एक नाबालिग लड़की जबरन घर से उठा ले जाने का मामला सामने आया है। आरोपितों के खिलाफ 292/24 धारा 191, 333, 137 दो के अंतर्गत अभियोग पंजीकृत किया गया है। इस संबंध में संदिग्ध चार व्यक्तियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। उन्होंने कहा कि इस मामले में शामिल अन्य अभियुक्तों की गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं, साथ ही अपहृत लड़की की तलाश भी जारी है। आजतक की रिपोर्ट में मुख्य आरोपित का नाम रिजवान बताया जा रहा है।

उत्तर प्रदेश सरकार ने ‘लव जिहाद’ और जबरन धर्म परिवर्तन को रोकने के लिए कड़े कानून बनाए हैं। सरकार ने ऐसे मामलों में उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान किया है और जुर्माने की राशि को भी दोगुना कर दिया है। इसके बावजूद इस तरह की घटनाओं में कमी नहीं आ रही है, जिससे लोगों में डर और असुरक्षा का माहौल बन रहा है।