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शादीशुदा हिन्दू महिला को ‘आयुष गुर्जर’ बन फँसाया, फिर किया बलात्कार और जबरन धर्म परिवर्तन करा बनाया ‘समा’, अबॉर्शन भी कराया: मुजफ्फरनगर में आदिल के खिलाफ FIR दर्ज

उत्तर प्रदेश के मुज़फ्फरनगर जिले से लव जिहाद का मामला सामने आया है। यहाँ आदिल नाम के युवक ने खुद को आयुष गुर्जर बता कर शादीशुदा हिन्दू लड़की को अपने प्यार के जाल में फँसाया। आदिल ने पारिवारिक और आर्थिक मुसीबत झेल रही महिला से सहारा देने के नाम पर 3 साल तक रेप किया। इसी दौरान उसने अश्लील फोटो और वीडियो बना डाले जिसे दिखा कर ब्लैकमेलिंग भी की गई। पीड़िता को इस्लाम कबूल करवा कर फना नाम दे दिया गया। पुलिस ने सोमवार (16 सितंबर 2024) को FIR दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी है। फरार चल रहे आदिल की तलाश की जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला मुज़फ्फरनगर के थानाक्षेत्र बुढ़ाना का है। यहाँ 16 सितंबर को एक हिन्दू महिला ने को समाजिक संगठन के सदस्यों के साथ मिल कर थाने में तहरीर दी है। तहरीर में महिला ने बताया कि वो शादीशुदा है। पीड़िता की शादी हरियाणा के पानीपत में हुई थी। किसी बात को ले कर पति-पत्नी में नहीं बन पाई। पति की पिटाई से तंग आ कर पीड़िता दिल्ली चली आई थी। यहाँ पर साल 2021 में उनकी मुलाकात आदिल से हुई थी।

आदिल ने खुद को आयुष गुर्जर और पेशे से वकील बताया था। आयुष मूल रूप से मुज़फ्फरनगर के बुढ़ाना थानाक्षेत्र का रहने वाला है। पीड़िता और आदिल के बीच फोन नंबर बंट गए और इनकी आपस में बातचीत होने लगी। आयुष बने आदिल ने पीड़िता को कानूनी मदद देने की बात कहते हुए अपने झाँसे में ले लिया। उसने मेरठ के एक वकील से पीड़िता की मुलाकात करवाई। पीड़िता के पति पर इसी वकील के जरिए मुकदमा भी दर्ज करवा दिया गया।

धीरे-धीरे पीड़िता और आयुष में करीबी बढ़ने लगी। आरोप है कि इसी दौरान आदिल ने पीड़िता को एक ताबीज भी पहनाई थी। थोड़े दिनों बाद आदिल और पीड़िता एक साथ दिल्ली में रहने लगे। इस बीच बने शारीरिक संबंधों की फोटो और वीडियो भी आदिल ने बना डाली। वह पीड़िता के साथ कई हिन्दू धर्मस्थल पर घूमने भी गया। इनमें वैष्णो देवी और खाटू श्याम आदि स्थान भी शामिल हैं। वह वह माथ पर तिलक लगाता था, हाथ में कलावा बाँधे रहता था और पूजापाठ का भी दिखावा करता था।

इसी बीच पीड़िता गर्भवती हो गई तो आदिल ने धोखे से उनका एबॉर्शन भी करवा दिया। एक दिन पीड़िता को पता चला गया कि आयुष असल में मुस्लिम समुदाय का आदिल है। वह आदिल से झगड़ने लगी। आरोप है कि तब आदिल ने पीड़िता को उसके द्वारा बनाए गए अश्लील फोटो और वीडियो दिखाए और उन्हें वायरल करने की धमकी देने लगा। आदिल ने पीड़िता को मुँह बंद रखने के लिए कहा।

आरोप है कि तब आदिल ने पीड़िता को उसके द्वारा बनाए गए अश्लील फोटो और वीडियो दिखाए और उन्हें वायरल करने की धमकी देने लगा। आदिल ने पीड़िता को मुँह बंद रखने के लिए कहा। उसने पीड़िता को धमकी दे कर कहा कि अगर वो बदनामी से बचना चाहती है तो इस्लाम कबूल कर ले। मजबूरी में पीड़िता आदिल की हाँ में हाँ मिलाती चली गई। धर्मान्तरण के बाद पीड़िता को नया नाम फना दिया गया। आदिल पीड़िता को दिल्ली से अपने गाँव ले आया।

आरोप है कि यहाँ पीड़िता को पता चला कि आदिल पहले से ही शादीशुदा है। आदिल की बीवी फरीम भी पीड़िता को प्रताड़ित किया करती थी। यहाँ आदिल के परिवार के तमाम सदस्यों ने पीड़िता को रोज़े रखवाए और कलमा पढ़वाया। अपनी बातें न मानने पर पीड़िता को न सिर्फ मारा-पीटा जाता था बल्कि धमकियाँ भी मिलती थीं। आखिरकार आए दिन की प्रताड़ना से तंग हो कर पीड़िता जैसे-तैसे हिन्दू संगठनों से मिल पाई।

हिन्दू संगठन के सदस्यों ने पीड़िता के साथ 16 सितंबर 2024 को बुढ़ाना थाने पहुँच कर तहरीर दी। तहरीर में आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की गई है। पुलिस ने इस तहरीर पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के अलावा धर्मांतरण निरोधक कानून के तहत केस दर्ज कर लिया है। इस FIR में आयुष बने आदिल के साथ उसकी पहली बीवी और एक अन्य अज्ञात को भी नामजद किया गया है। केस दर्ज होने के बाद से आदिल फरार चल रहा है। उसकी तलाश में पुलिस दबिश दे रही है।

कोचिंग जा रही 15 साल की हिंदू किशोरी के साथ मोहम्मद आफताब ने किया रेप, लड़की के चीखने पर लोगों ने बचाया: पीट-पाट कर किया पुलिस के हवाले, दोस्त सगीर फरार

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के फतेहपुर कोतवाली क्षेत्र में एक दर्दनाक घटना सामने आई है, जहाँ एक 15 वर्षीय हिंदू किशोरी के साथ दुष्कर्म का मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने आरोपित मोहम्मद आफताब को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि उसका साथी सगीर फरार है। पुलिस मामले की जाँच कर रही है और फरार आरोपी की तलाश जारी है।

कोचिंग के रास्ते में घटी घटना

यह घटना सोमवार, 16 सितंबर 2024 को हुई जब पीड़िता, जो कक्षा 11 की छात्रा है, रोजाना की तरह कोचिंग के लिए घर से निकली थी। रास्ते में आरोपित आफताब उसे बहला-फुसलाकर अपने दोस्त सगीर के घर ले गया। यह घर सुनसान इलाके में था, जहाँ आफताब ने घर के बाहर ताला लगाकर किशोरी को अंदर बंद कर दिया। इसके बाद उसने पीड़िता के साथ दुष्कर्म किया।

चीख सुनकर लोगों ने बचाया

घटना के कुछ समय बाद, आस-पास के लोग उस घर के पास से गुजर रहे थे, तभी उन्हें अंदर से चीखने की आवाज सुनाई दी। लोगों ने तुरंत इस पर प्रतिक्रिया देते हुए ताला तोड़ा और घर के अंदर घुसकर किशोरी को मुक्त कराया। मौके पर ही उन्होंने आरोपित आफताब को पकड़ लिया और पुलिस को सूचित किया। पुलिस ने तुरंत मौके पर पहुँचकर आफताब को हिरासत में लिया।

सगीर फरार, पुलिस की जाँच जारी

पुलिस के पहुँचने से पहले ही आफताब का साथी सगीर फरार हो गया। पुलिस ने घटनास्थल की जाँच की और पीड़िता के बयान के आधार पर कार्रवाई शुरू की। कोतवाली इंस्पेक्टर डीके सिंह ने बताया कि पीड़िता के पिता की शिकायत पर आरोपी आफताब के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है।

परिवार के बयान और पुलिस कार्रवाई

पीड़िता के पिता ने बताया कि उनकी बेटी रोजाना की तरह कोचिंग जा रही थी, जब आरोपित आफताब ने उसे बहकाकर अपने दोस्त के घर ले जाकर बंद कर दिया। पुलिस ने बताया कि पीड़िता को मेडिकल जाँच के लिए भेज दिया गया है और उसकी हालत स्थिर है। इसके साथ ही फरार आरोपी सगीर की तलाश में पुलिस की टीम लगातार छापेमारी कर रही है।

इस घटना के बाद इलाके में काफी आक्रोश फैल गया है। स्थानीय लोग इस तरह की घटनाओं को लेकर चिंता जता रहे हैं और जल्द से जल्द न्याय की माँग कर रहे हैं। पुलिस ने आश्वासन दिया है कि फरार आरोपित को जल्द गिरफ्तार किया जाएगा और मामले की त्वरित जाँच की जाएगी।

कोचिंग सेंटर की आड़ में ईसाई धर्मान्तरण की साजिश, पिकनिक के बहाने बुलाते थे: बैतूल में महिला टीचर और पादरी समेत 3 को पुलिस ने पकड़ा

मध्य प्रदेश के बैतूल जिले में कोचिंग के बहाने हिन्दू छात्र-छात्राओं को ईसाई बनाने की साजिश का भंडाफोड़ हुआ है। पुलिस ने यहाँ एक कोचिंग सेंटर से कई नाबालिग बच्चों को मुक्त करवाया है। इन बच्चों की संख्या 11 और उम्र 2 से 17 वर्ष के बीच बताई जा रही है। पीड़ितों में दलित समुदाय के छात्र भी शामिल हैं। हिन्दू संगठन की शिकायत पर सोमवार (16 सितंबर 2024) को 2 महिलाओं सहित कुल 3 आरोपितों के खिलाफ FIR दर्ज कर ली गई है। इन सभी को हिरासत में ले कर पूछताछ चल रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना बैतूल के हमलावरपुर क्षेत्र की है। यहाँ एक महिला कोचिंग सेंटर चलाती है जिसमें आसपास के कई नाबालिग छात्र-छात्राएँ पढ़ने आती हैं। सोमवार को यहाँ हिन्दू सेना के सदस्य पहुँच कर हंगामा करने लगे। इस संगठन के प्रदेश अध्यक्ष दीपक मालवीय ने बताया कि उन्हें कोचिंग की आड़ में नाबालिग बच्चों के ईसाई धर्म परिवर्तन की साजिश की सूचना मिली थी। बकौल दीपक कोचिंग सेंटर में नाबालिग बच्चे-बच्चियों का ब्रेनवॉश ईसाई मत अपनाने के लिए किया जाता है।

दावा किया जा रहा है कि कोचिंग सेंटर में कुछ ईसाई साहित्य व मज़हबी पुस्तकें भी मिली हैं। आरोप है कि छात्रों को ये किताबें पढ़ाई जाती हैं और उन्हें मज़हबी कार्यक्रमों में भी शामिल किया जाता है। इन बच्चों को ईसाई विधान से प्रार्थना भी कराए जाने की बात कही जा रही है। हंगामे की सूचना मिलते ही पुलिस तत्काल मौके पर पहुँची। कथित कोचिंग सेंटर में मौजूद कुल 11 छात्र-छात्राओं को पुलिस अपने साथ ले गई। ये सभी नाबालिग बताए जा रहे हैं।

हिन्दू सेना के सदस्यों ने इसे गंभीर अपराध माना है और धर्मान्तरण की साजिश बताते हुए पुलिस में शिकायती पत्र दिया है। शिकायत में कुल 3 लोगों को नामजद किया गया है जिसमें 2 महिलाएँ भी शामिल हैं। पुलिस ने इन सभी आरोपितों को हिरासत में ले लिया है जिनसे पूछताछ की जा रही है। पुलिस ने सभी आरोपितों के खिलाफ मध्य प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम व SC/ST एक्ट की धाराओं में केस दर्ज किया है।

आरोपितों में एक पादरी भी बताया जा रहा है। हिरासत में ली गई महिला टीचर के पिता ने आरोपों को बेबुनियाद बताया है। उनका दावा है कि घटना के दिन छुट्टी होने की वजह से उनकी बेटी बच्चों को पिकनिक ले जाने के लिए बुलवाया था।

मम्मी-पापा अफजल गुरु के लिए मरते हैं, जीजा वाले चैनल ने AAP के लिए पहुँचाए ₹17 करोड़: शराब घोटाले का खुलासा होते ही हो गया बंद, ‘मुख्यमंत्री’ आतिशी से कनेक्शन

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इस्तीफा दे दिया है, उनकी जगह अब आतिशी मार्लेना को नया CM चुना गया है। आतिशी 2020 में कालकाजी से पहली बार विधायक चुनी गई थीं। हालाँकि, वो AAP में इसके गठन के समय से ही सक्रिय रही हैं। पंजाबी तोमर राजपूत परिवार से आने वाली आतिशी के नाम में मार्क्स और लेनिन से प्रभावित होकर ‘मार्लेना’ जोड़ा गया था। उन्होंने दिल्ली स्थित सेंट स्टीफेंस कॉलेज और लंदन स्थित ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की है।

दिल्ली की राजनीति में अचानक हुए इस बदलाव के पीछे शराब घोटाला है। इसी शराब घोटाले के कारण मनीष सिसोदिया जेल गए और उनका उप-मुख्यमंत्री का पद भी गया। उनकी जगह ही आतिशी को मंत्री बनाया गया था। अब अरविंद केजरीवाल ने भी विधानसभा चुनाव से 5 महीने पहले इस्तीफा देकर सहानुभूति वोट की चाहत में अपनी राजनीति चाल चली है। आतिशी को इससे पहले शिक्षा, महिला एवं बाल विकास, संस्कृति, पर्यटन और PWD जैसे बड़े विभाग दिए गए थे।

आतिशी के जीजा चलाते थे ‘India Ahead News’ चैनल

जब आतिशी को दिल्ली में मंत्री बनाया गया था, तब दिल्ली भाजपा के उपाध्यक्ष कपिल मिश्रा ने ‘X’ पर एक पोस्ट के जरिए बताया था कि आतिशी की बहन रोजा बसंती की शादी पत्रकार भूपेंद्र चौबे से हुई है, जो ‘इंडिया अहेड न्यूज़’ में बड़े पद पर थे, चैनल का सारा काम वही देख रहे थे। बकौल कपिल मिश्रा, आतिशी के जीजा वाले इस चैनल को हवाला के माध्यम से शराब घोटाले का 17 करोड़ रुपया पहुँचाया गया। उन्होंने AAP के नेताओं द्वारा खुद को ‘कट्टर ईमानदार’ बताए जाने पर निशाना साधा था।

‘India Ahead News’ चैनल में कमर्शियल हेड के रूप में तैनात रहे अरविंद कुमार सिंह को CBI ने शराब घोटाले में गिरफ्तार भी किया था। जून 2021 से लेकर जनवरी 2022 तक हवाला के जरिए हुए पैसों के लेनदेन में उन्हें जाँच एजेंसी ने शामिल बताया था। अरविंद कुमार सिंह चैनल में प्रोडक्शन कंट्रोलर भी थे। गोवा में AAP का चुनाव प्रचार देख रही कंपनी ‘Chariot Media’ के खाते में 17 करोड़ रुपए ट्रांसफर किए जाने के आरोप में उन्हें गिरफ्तार किया गया था।

CBI ने आरोप लगाया था कि हवाला नेटवर्क के जरिए ये पैसे भेजे गए थे। 14 फरवरी, 2022 को गोवा में विधानसभा चुनाव हुए थे। दिल्ली के शराब घोटाले में हुआ ये था कि एक नई शराब नीति बना कर ‘साउथ लॉबी’ यानी, दक्षिण भारत की कुछ शराब कंपनियों को फायदा पहुँचाया गया और बदले में करोड़ों रुपए की घूस ली गई। इस मामले में AAP के करीबी दलाल विजय नायर और हैदराबाद के कारोबारी अभिषेक बोनीपल्ली के अलावा तेलंगाना के CM रहे KCR की बेटी कविता को भी गिरफ्तार किया गया था।

AAP के राज्यसभा सांसद संजय सिंह भी इस मामले में जेल जा चुके हैं, जिनमें कारोबारी दिनेश अरोड़ा से 2 करोड़ रुपए घूस लेने का आरोप है। दिनेश अरोड़ा आरोपित से अब अप्रूवर बन चुका है। AAP को मिली घूस की रकम 100 करोड़ रुपए बताई गई थी। कविता के करीबी अरुण पिल्लई ने ‘साउथ लॉबी’ की तरफ से बैठकों में हिस्सा लिया था। वहीं Indospirit के मालिक समीर महेन्द्रू ने भी घूस में करोड़ों रुपए दिए थे। इस पूरे खेल में कोरोना के दौरान नुकसान दिल्ली की जनता का हुआ, अरविंद केजरीवाल अपने आवास ‘शीशमहल’ को सुख-सुविधाओं से लैस करने में व्यस्त रहे।

कर्मचारियों को वेतन नहीं, शराब घोटाला सामने आते चैनल बंद

ऐसे में ‘India Ahead News’ चैनल से AAP नेता आतिशी का कनेक्शन और फिर इसका हवाला के जरिए AAP के लिए काम कर रही कंपनी को करोड़ों रुपए देना केवल संयोग तो हो नहीं सकता है। बड़ी बात कि ये चैनल 2023 की शुरुआत तक ठप्प भी हो गया। ऊपर से कई कर्मचारियों को कई महीनों का वेतन नहीं दिया गया सो अलग। रिद्धिमा केडिया और आकांक्षा वर्मा सहित अन्य पत्रकारों ने इसका खुलासा किया गया। कई रिपोर्टरों और एंकरों को सैलरी नहीं दी गई।

तब इस कंपनी के एडिटर-इन-चीफ रहे भूपेंद्र चौबे ने कहा था कि चैनल के मालिक अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रहे हैं कि सबको वेतन मिल जाए। वो ये भूल गए कि कर्मचारियों को ‘कोशिश’ नहीं, तय समय पर खाते में उनकी मेहनत के बदले पैसा चाहिए होता है। वैसे ये बात सुप्रीम कोर्ट में भी कई बार बताई जा चुकी है कि AAP ने शराब घोटाले से मिले पैसे गोवा चुनाव में खर्च किए। इसके सबूत के रूप में WhatsApp चैट्स भी पेश किए गए थे। पार्टी को इस चुनाव में महज 2 सीटें ही मिली थीं।

आतिशी मार्लेना अपने जीजा के चैनल के हवाला कारोबार में संलिप्त रहने से इनकार करती रही हैं। हालाँकि, वो इस बात का जवाब नहीं दे पाईं कि शराब घोटाले का खुलासा होते ही अचानक से ये चैनल बंद क्यों हो गया और कर्मचारियों का वेतन क्यों रुक गया? सिर्फ अरविंद कुमार सिंह ही नहीं, बल्कि IAN चैनल और इसकी पैरेंट कंपनी ‘आंध्र प्रभा’ से जुड़े 3 लोग जाँच एजेंसियों के निशाने पर थे। अक्टूबर 2022 में ‘इंडिया अहेड न्यूज़’ के मैनेजिंग डायरेक्टर मूठा गौतम से भी ED द्वारा पूछताछ हुई थी।

इसी चैनल के एक अन्य अधिकारी अर्जुन पांडेय का नाम भी शराब घोटाले की FIR में शामिल है। अर्जुन पांडेय न्यूज़ चैनल के सेल्स एवं मार्केटिंग विभाग का प्रमुख था। आरोप है कि उसने 4 करोड़ रुपए विजय नायर की तरफ से समीर महेन्द्रू से लिए। तब भूपेंद्र चौबे ने कहा था कि अर्जुन पांडेय सिर्फ कंसल्टेंट था और इस्तीफा दे चुका है। ‘आंध्र प्रभा’ के बारे में बता दें कि इसकी स्थापना ‘इंडियन एक्सप्रेस’ के संस्थापक रामनाथ गोयनका ने ही की थी। काकीनाडा के 4 बार विधायक रहे मूठा गोपालकृष्ण अब इसके मालिक हैं।

2019 में भूपेंद्र चौबे खुल कर AAP के संबंध में सोशल मीडिया पर पोस्ट्स करते थे। उस समय उनकी साली आतिशी को ईस्ट दिल्ली लोकसभा क्षेत्र से उम्मीदवार बनाया गया था। हालाँकि, वो तीसरे नंबर पर रही थीं। भूपेंद्र चौबे की पत्नी रोजा बसंती, आतिशी मार्लेना की बड़ी बहन हैं। उसी चुनाव में उम्मीदवार बनने के बाद आतिशी ने अपने नाम से ‘मार्लेना’ सरनेम हटा लिया था। उनके पिता का नाम विजय सिंह और माँ का नाम तृप्ता वाही है। दोनों DU में प्रोफेसर हैं।

इन दोनों ने दिल्ली स्थित संसद भवन पर हमला करने वाले आतंकी अफजल गुरु का भी बचाव किया था और उसकी फाँसी का विरोध भी किया था। आतिशी AAP की पॉलिटिकल एक्शन कमिटी की सदस्य हैं, साथ ही मनीष सिसोदिया के उप-मुख्यमंत्रित्व काल में उनकी सलाहकार रहीं। AAP दिल्ली में शिक्षा व्यवस्था में अमूल-चूल परिवर्तन का दावा करती है और इसका श्रेय भी आतिशी को देती है। आतिशी के समर्थन में भूपेंद्र चौबे ने रिट्वीटस भी किए थे और उन्हें चुनने की सलाह दी थी।

AAP के सामने गायब हो जाती है भूपेंद्र चौबे की पत्रकारिता

आतिशी के खिलाफ जब पर्चे बाँटे गए थे (आरोप लगा कि ये AAP ने ही विरोधियों को फँसाने के लिए कराया है), तब भूपेंद्र चौबे ने अपनी एक साइड चुन ली थी और अपनी साली का बचाव किया था। तब गौतम गंभीर, जो ईस्ट दिल्ली से जीत कर सांसद बने, उन्होंने कहा था कि अगर ये साबित हो गया कि ये पर्चे उन्होंने बँटवाए हैं तो वो अपनी उम्मीदवारी वापस ले लेंगे। भूपेंद्र चौबे पहले एक संतुलित पत्रकार माने जाते थे, लेकिन इस काण्ड के बाद से लोगों का उन पर से भरोसा जाता रहा।

आतिशी का बचाव करते रहे हैं जीजा भूपेंद्र चौबे

वैसे भूपेंद्र चौबे पहले भी पीएम मोदी के विरोध में लिखते रहे हैं। फरवरी 2015 में उन्होंने लिखा था कि दिल्ली कोई गुजरात नहीं है, इसीलिए नरेंद्र मोदी को निरंकुश राजनीति छोड़नी होगी, अगर वो मीडिया को ‘बाजारू’ बताएँगे तो ज़्यादा आगे नहीं जाएँगे। अभी मोदी कहाँ हैं, ये किसी को बताने की ज़रूरत नहीं है। वहीं जब मार्च 2014 में अरविंद केजरीवाल ने मीडिया पर हमला बोला था तब उन्होंने इतना कड़ा रुख नहीं अपनाया था। कारण – साली आतिशी AAP का हिस्सा हैं।

‘हिंदू विवाह को अनुबंध की तरह समाप्त नहीं किया जा सकता’: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पारिवारिक अदालत के फैसले को किया खारिज

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में यह महत्वपूर्ण टिप्पणी की कि हिंदू विवाह को एक अनुबंध की तरह भंग या समाप्त नहीं किया जा सकता। यह टिप्पणी जस्टिस सौमित्र दयाल सिंह और जस्टिस डोनाडी रमेश की खंडपीठ ने की, जिन्होंने एक महिला द्वारा दायर अपील को स्वीकार करते हुए पारिवारिक अदालत के उस फैसले को खारिज कर दिया जिसमें महिला के पति की याचिका पर उनका विवाह भंग कर दिया गया था।

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, हाई कोर्ट ने कहा, “हिंदू विवाह को एक अनुबंध की तरह समाप्त या भंग नहीं किया जा सकता। हिंदू विवाह एक धार्मिक संस्कार पर आधारित होता है और इसे केवल कुछ विशेष परिस्थितियों में ही कानूनी रूप से समाप्त किया जा सकता है। अगर किसी पति या पत्नी पर निःसंतान होने का आरोप लगता है, तो उस आरोप को केवल सबूतों के आधार पर ही साबित किया जा सकता है।”

यह मामला एक दंपति से जुड़ा है जिनका विवाह 2006 में हुआ था। पति, जो भारतीय सेना में कर्मचारी हैं, ने 2007 में पत्नी पर उन्हें छोड़ने का आरोप लगाते हुए 2008 में तलाक के लिए याचिका दायर की। पति ने यह भी दावा किया कि उनकी पत्नी निःसंतान (बाँझ) हैं, जिसके आधार पर उन्होंने तलाक की माँग की।

इस मामले में शुरुआत में, 2008 में पत्नी ने अपने पहले लिखित बयान में तलाक के लिए सहमति दी थी। हालाँकि, बाद में 2010 में पत्नी ने दूसरा लिखित बयान दायर कर तलाक का विरोध किया और पति के बांझपन के आरोप को गलत साबित करने के लिए दस्तावेज पेश किए। उन्होंने यह भी बताया कि 2008 में, जब तलाक की याचिका दायर की गई थी, तब वह पहले ही एक बच्चे को जन्म दे चुकी थीं और 2010 में दूसरा बच्चा भी हुआ था।

2011 में, पति ने पत्नी द्वारा दूसरा लिखित बयान दायर करने पर आपत्ति जताई। पारिवारिक अदालत ने पति की आपत्ति को स्वीकार किया और पत्नी के दूसरे लिखित बयान को नजरअंदाज कर दिया। उसी दिन, अदालत ने मामले की सुनवाई की और पति की तलाक की याचिका को मंजूरी दे दी। पत्नी ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पारिवारिक अदालत के फैसले को खारिज कर दिया, यह पाया कि पारिवारिक अदालत ने मामले की समग्रता से समीक्षा नहीं की थी। हाईकोर्ट ने कहा कि हालाँकि एक दूसरा लिखित बयान दायर करने पर कुछ सीमाएँ हैं, लेकिन निचली अदालत को बदले हुए हालातों को देखते हुए अतिरिक्त बयान मांगने से कोई नहीं रोकता।

हाईकोर्ट ने यह भी पाया कि जब पारिवारिक अदालत ने तलाक की याचिका को मंजूरी दी, तब तक पति-पत्नी के बीच आपसी सहमति से तलाक का आधार समाप्त हो चुका था। हालाँकि पत्नी ने 2008 में तलाक के लिए सहमति दी थी, लेकिन बाद में 2010 में उसने अपना बयान बदल लिया था और तलाक का विरोध किया था। यह बात पत्नी की 2011 में दी गई मौखिक गवाही से भी स्पष्ट थी। हाईकोर्ट के अनुसार, निचली अदालत को यह जाँच करनी चाहिए थी कि क्या पत्नी ने अपनी राय बदली थी।

हाई कोर्ट की टिप्पणी

हाईकोर्ट ने अपने 6 सितंबर 2024 के फैसले में स्पष्ट किया कि हिंदू विवाह को एक अनुबंध की तरह समाप्त नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा, “यह विस्तार की आवश्यकता नहीं है कि हिंदू विवाह को अनुबंध की तरह समाप्त या भंग नहीं किया जा सकता। कानूनन, हिंदू विवाह केवल सीमित परिस्थितियों में भंग हो सकता है, और वह भी साक्ष्यों के आधार पर।”

अदालत ने यह भी कहा कि अगर कोई पति या पत्नी निःसंतान होने का आरोप लगाता है तो यह आरोप केवल साक्ष्य के आधार पर ही साबित किया जा सकता है। अदालत ने पारिवारिक अदालत के निर्णय को इस आधार पर खारिज कर दिया कि निचली अदालत ने मामले की पूर्ण समीक्षा नहीं की थी और केवल पहले लिखित बयान और 2008 की सहमति पर भरोसा किया था।

हाई कोर्ट में मौजूद नहीं था पति

हाईकोर्ट ने कहा कि वह पति-पत्नी के बीच समझौते के लिए इच्छुक था, लेकिन यह संभव नहीं हो सका क्योंकि पति अदालत में उपस्थित नहीं था। इसके बावजूद, अदालत ने पत्नी की अपील को मंजूरी दी और तलाक के फैसले को खारिज कर दिया। अदालत ने मामला पुनः विचार के लिए निचली अदालत को भेज दिया और निर्देश दिया कि अगर कोई समझौता नहीं हो पाता, तो पत्नी को दूसरा लिखित बयान दायर करने की अनुमति दी जाए, और पति को उस बयान का जवाब देने का अधिकार भी दिया जाए।

इस मामले में, पत्नी की ओर से वकील उमा नाथ पांडेय और विनोद सिन्हा ने पैरवी की, जबकि पति की ओर से एएन पांडेय, डीआर कुशवाहा, मनीष सी तिवारी और राजेश कुमार दुबे ने अदालत में पक्ष रखा।

इस फैसले ने हिंदू विवाह की पवित्रता और उसे अनुबंध की तरह समाप्त न किए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया। हाईकोर्ट ने यह सुनिश्चित किया कि तलाक का कोई भी निर्णय उचित साक्ष्यों और समग्र दृष्टिकोण के आधार पर ही लिया जाना चाहिए। साथ ही, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल एक बार दी गई सहमति के आधार पर तलाक नहीं दिया जा सकता, खासकर जब वह सहमति बाद में वापस ले ली गई हो।

अदालत का यह फैसला न केवल इस मामले के लिए बल्कि ऐसे कई मामलों के लिए महत्वपूर्ण मिसाल के रूप में काम करेगा, जहाँ विवाह को अनुबंध की तरह समाप्त करने का प्रयास किया जाता है।

‘आसमान नहीं गिर जाएगा’: सुप्रीम कोर्ट ने देश भर में बुलडोजर कार्रवाइयों पर लगाई रोक, कहा – एक भी जगह हुआ अवैध ध्वस्तीकरण तो ये आदेश का उल्लंघन

उत्तर प्रदेश में माफियाओं और अपराधियों को नेस्तनाबूत करने के लिए उनकी अवैध संपत्तियों को बुलडोजर से ध्वस्त करने की कार्रवाई शुरू हुई। बाद में अन्य अपराधियों के खिलाफ भी इसका इस्तेमाल किया जाने लगा, जिनकी संपत्ति अवैध अतिक्रमण कर के बनाई पाई जाती थी। अब सुप्रीम कोर्ट ने बुलडोजर कार्रवाई पर रोक लगा दी है। सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि देश भर में बिना उसके आदेश के ध्वस्तीकरण की कोई भी कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। अगली सुनवाई तक ये आदेश जारी रहेगा।

हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस दौरान ये भी स्पष्ट किया कि सार्वजनिक सड़कों, फूटपाथ, रेलवे लाइनों और तालाब जैसे अन्य सार्वजनिक स्थलों के अतिक्रमण को लेकर बुलडोजर चलाया जा सकता है, ये आदेश की जद से बाहर होगा। जस्टिस BR गवई और जस्टिस KV विश्वनाथन ने ये आदेश दिया। दायर याचिकाओं में दावा किया गया था कि राज्य सरकारें अपराधियों को दंड देने के लिए उनकी संपत्तियों पर बुलडोजर चला रही हैं। अब इस मामले की सुनवाई 1 अक्टूबर को होगी।

हालाँकि, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सर्वोच्च न्यायालय के इस फ़ैसले पर आपत्ति जताते हुए कहा कि नियामक संस्थाओं के हाथ इस तरह से नहीं बाँधे जा सकते हैं। इस पर सुप्रीम कोर्ट के जजों ने कहा, “अगर ध्वस्तीकरण की कार्रवाइयों को 2 सप्ताह के लिए रोक दिया जाए तो आसमान नहीं गिर जाएगा। अपने हाथों को रोकिए। 15 दिन में क्या हो जाएगा?” जब SG ने कहा कि वो पूरे भारत में सभी वैधानिक संस्थाओं के हाथ नहीं रोक सकते, तो सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अनुच्छेद-142 में निहित अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल कर के उसने ये फैसला दिया है।

जस्टिस विश्वनाथन ने कहा कि अगर अवैध ध्वस्तीकरण की एक भी घटना होती है तो वो भी सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन होगा। अधिवक्ता चंदर उदय सिंह ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा पिछली बार आदेश दिए जाने के बावजूद बुलडोजर वाली कार्रवाइयाँ जारी हैं। सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि वो ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के लिए दिशानिर्देश जारी करेगा। SG ने कहा कि ये फर्जी नैरेटिव बनाया जा रहा है कि केवल एक खास समुदाय को निशाना बनाया जा रहा है।

भारतीय हॉकी टीम ने चीन को 1-0 से हराकर रिकॉर्ड 5वीं बार जीता एशियन चैम्पियंस ट्रॉफी खिताब, पूरे टूर्नामेंट में नहीं हारा एक भी मैच

भारतीय हॉकी टीम ने एशियन चैम्पियंस ट्रॉफी 2024 के फाइनल में जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए चीन को 1-0 से हराया और रिकॉर्ड 5वीं बार इस प्रतिष्ठित खिताब को अपने नाम किया। यह ऐतिहासिक मुकाबला मंगलवार, 17 सितंबर 2024 को चीन के हुलुनबुइर में खेला गया। भारतीय टीम की इस धमाकेदार जीत ने उन्हें एशियन हॉकी में एक बार फिर शीर्ष स्थान पर पहुँचा दिया है।

इस फाइनल मैच की शुरुआत दोनों टीमों के बीच जबरदस्त टक्कर के साथ हुई। पहले तीन क्वार्टर में कोई भी टीम गोल नहीं कर सकी, जिससे मुकाबला 0-0 की बराबरी पर रहा। भारतीय टीम ने मैच के चौथे क्वार्टर में बढ़त हासिल की, जब डिफेंडर जुगराज सिंह ने मैच के 10वें मिनट में पेनल्टी कॉर्नर से गोल किया। यह गोल निर्णायक साबित हुआ और भारतीय टीम ने 1-0 से जीत दर्ज की।

हरमनप्रीत सिंह की कप्तानी में एक और जीत

कप्तान हरमनप्रीत सिंह की अगुवाई में भारतीय हॉकी टीम ने टूर्नामेंट के सभी मैचों में बेहतरीन प्रदर्शन किया। खासकर फाइनल में चीन के खिलाफ यह जीत टीम के मजबूत डिफेंस और संगठित खेल का परिणाम थी। भारतीय टीम ने पूरे मैच के दौरान शानदार रणनीति अपनाई और चीन को गोल करने के किसी भी मौके से वंचित रखा।

भारत की ऐतिहासिक उपलब्धि

इस जीत के साथ भारतीय टीम ने एशियन चैम्पियंस ट्रॉफी का खिताब 5वीं बार अपने नाम किया। भारतीय टीम ने इससे पहले 2011, 2013, 2018 और 2023 में यह खिताब जीता था। 2018 में भारत और पाकिस्तान संयुक्त विजेता बने थे। इस प्रकार, भारतीय टीम ने इस टूर्नामेंट के आठ सीजन में पाँच बार विजेता बनकर अपनी श्रेष्ठता साबित की है।

टूर्नामेंट में भारतीय टीम की अजेय रेकॉर्ड

भारत ने इस टूर्नामेंट में एक भी मैच नहीं हारा। टीम ने अपने पूल स्टेज के सभी मैच जीते और सीधे सेमीफाइनल में जगह बनाई। सेमीफाइनल में भारत ने साउथ कोरिया को 4-1 से हराकर फाइनल में प्रवेश किया था। इससे पहले भारतीय टीम ने पाकिस्तान को 2-1, मलेशिया को 8-1, चीन को 3-0 और जापान को 5-0 से हराया था।

चीन की हॉकी टीम ने इस साल पहली बार एशियन चैम्पियंस ट्रॉफी के फाइनल में जगह बनाई थी, लेकिन खिताब जीतने से चूक गई। चीन की टीम ने पूरे टूर्नामेंट में अच्छा प्रदर्शन किया, लेकिन फाइनल में भारत की मजबूत डिफेंस और आक्रामक खेल ने उन्हें पीछे छोड़ दिया।

भारतीय टीम की इस जीत ने एशियन हॉकी में उनके प्रभुत्व को फिर से स्थापित किया है। हरमनप्रीत सिंह की कप्तानी और जुगराज सिंह के निर्णायक गोल ने भारत को 5वीं बार इस प्रतिष्ठित खिताब का विजेता बना दिया।

मंदिर पर पत्थरबाजी, हिन्दुओं के घरों में फेंके जलते पटाखे: ईद पर ‘सर तन से जुदा’ की धमकी, MP के कई शहरों में इस्लामी कट्टरपंथियों का उपद्रव

ईद मिलाद-उन-नबी के मौके पर सोमवार (16 सितंबर) को मुस्लिम समुदाय के लोगों ने पूरे देश सहित मध्य प्रदेश के भी कई हिस्सों में जुलूस निकाले। इन जुलूसों में कई स्थानों पर हिंसक वारदातें हुईं। कुछ जगहों पर उत्तेजक नारेबाजी की गई और इस्लामी मुल्कों के झंडे लहराए गए। इस दौरान कई स्थानों पर मुस्लिम भीड़ की हिन्दू संगठन के सदस्यों से भिड़ंत भी होते-होते बची। रतलाम, मंदसौर, श्योपुर, मंडला-बालाघाट आदि जिलों में इस्लामी कट्टरपंथियों के उपद्रवों का खासा असर देखने को मिला। इन सभी मामलों में पुलिस ने केस दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी है। कुछ लोगों को हिरासत में भी लिया गया है।

रतलाम में लहराए फिलिस्तीनी झंडे

पहला मामला रतलाम जिले से है। यहाँ ईद मिलाद-उन-नबी के जुलूस में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने फिलीस्तीन के झड़े लहराए। यह जुलूस सीरत कमेटी द्वारा निकाला गया था। जुलूस में फिलीस्तीन के झंडे लहराए गए। इस हरकत का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इसी जुलूस में DJ पर आपत्तिजनक बयानों को बजाया गया। इसमें से अधिकतर बयान AIMIM पार्टी के विधायक अकबरुद्दीन ओवैसी के हैं। इन बयानों में ओवैसी मुस्लिमों की आबादी का हवाला दे कर उनको सड़कों पर उतरने के लिए उकसाता सुनाई दे रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जुलूस खत्म होने के बाद सीरत कमेटी के सचिव अहमद नूर कुरैशी ने इन हरकतों से अपना और अपने संगठन का पल्ला झाड़ लिया। DJ पर बजाए गए आपत्तिजनक बयानों को भी सीरत कमेटी ने गलत बताया। कमेटी ने पुलिस से माँग की है कि जुलूस के दौरान किसी भी तरफ का गैरकानूनी काम करने वालों पर एक्शन लिया जाए। रतलाम के पुलिस अधीक्षक IPS अमित कुमार ने इन घटनाओं का संज्ञान लिया है। उन्होंने इस पूरे मामले की जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई के निर्देश दे दिए हैं।

मंडला में भी फिलीस्तीनी झंडे

मध्य प्रदेश के मंडला-बालाघाट में भी ईद मिलाद-उन-नबी के जुलूस के दौरान फिलीस्तीन का झंडा लहराया गया। इस घटना की जानकारी मिलते ही हिन्दू संगठन के सदस्यों ने हंगामा शुरू कर दिया। थाने का घेराव हुआ। प्रदर्शन कर के आरोपित पर कड़ी कार्रवाई की माँग उठाई गई। पुलिस बल ने फ़ौरन ही झंडा लहरा रहे युवक को हिरासत में ले लिया। आरोपित का नाम फरदीन है जिसके खिलाफ FIR दर्ज कर ली गई है।

बालाघाट में भी फिलिस्तीनी झंडे

मंडला एक अलावा बालाघाट के कई हिस्सों में ईद मिलाद-उन-नबी के जुलूस में फिलीस्तीन के झंडे लहराने के वीडियो वायरल हुए हैं। इन वीडियो में भीड़ को नारेबाजी करते भी देखा जा सकता है। हिन्दू संगठन के सदस्यों ने इस नारेबाजी के खिलाफ कार्रवाई की माँग उठाई है। अब तक मिली जानकारी के मुताबिक पुलिस ने केस दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी है। 1 आरोपित को हिरासत में भी ले लिया गया है, जिससे पूछताछ चल रही है।

श्योपुर में सिर तन से जुदा के नारे

मध्य प्रदेश के एक अन्य जिले श्योपुर में ईद मिलाद-उन-नबी के जुलूस में मुस्लिम भीड़ ने सिर तन से जुदा के नारे लगाए हैं। इस हरकत का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में सफेद रंग का एक बड़ा सा झंडा उठाए व्यक्ति के पीछे जा रहे कुछ लोग ‘गुस्ताख़ ए नबी की एक सजा, सिर तन से जुदा, सिर तन से जुदा’ की नारेबाजी कर रहे हैं। सफेद रंग के इस झंडे में काले रंग से एक बड़ी सी तलवार छपी हुई है। आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की माँग के साथ हिन्दू संगठन के सदस्यों ने थाने पर प्रदर्शन किया है।

आरोप है कि जुलूस में शामिल कुछ उपद्रवियों ने हिन्दुओं के घरों को भी निशाना बनाया है। रास्ते में पड़ने वाले हिन्दुओं के घरों के आगे नारेबाजी की गई और उनमें पटाखे फोड़ कर फेंके गए। इस हरकत से एक महिला झुलस भी गई। भीड़ के उपद्रव को रोकने में नाकाम रहने पर अब तक कुल 5 पुलिसकर्मी सस्पेंड किए जा चुके हैं। निलंबित होने वाले पुलिस स्टाफ में एक सब इंस्पेक्टर और 4 कांस्टेबल शामिल हैं। इस घटना पर FIR दर्ज कर के कुल 5 आरोपितों को हिरासत में ले लिया गया है। पकड़े गए आरोपितों से पूछताछ की जा रही है।

पथराव के बाद मंदसौर में महाआरती

मध्य प्रदेश के रतलाम जिले में ईद मिलाद-उन-नबी के जुलूस में मुस्लिम समुदाय के कुछ लोगों ने उपद्रव का प्रयास किया। 16 सितंबर को निकले इस जुलूस के दौरान रास्ते में पड़े बालाजी मंदिर में पत्थर फेंका गया था। इस पत्थरबाजी में एक श्रद्धालु घायल हो गया था जिसके बाद हिन्दू संगठन से जुड़े लोगों ने प्रदर्शन किया था। पुलिस ने तब केस दर्ज कर के जाँच व आरोपित की गिरफ्तारी के प्रयास शुरू कर दिए थे। 10 से 15 अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है।

अब तक 11 संदिग्धों को हिरासत में ले कर पूछताछ की जा रही है। 5 DJ जब्त कर लिए गए हैं। पुलिस CCTV फुटेज व अन्य सबूतों को जुटा कर आरोपितों की तलाश कर रही है। इस घटना के विरोध में बालाजी मंदिर में महाआरती का आयोजन किया गया। इस आयोजन में हिन्दू समाज से जुड़े सभी वर्गों ने हिस्सा लिया। श्रद्धालुओं की संख्या हजारों में थी, जिसमें महिलाएँ भी शामिल हुईं। आरती के दौरान सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस काफी मुस्तैद रहा।

‘तुम मुस्लिमों को फर्जी पकड़ कर लाए हो’: अलीगढ़ में ट्रेन से कटने चला गया सब इंस्पेक्टर, कहा- बाइक चोरों का रिमांड लेने कोर्ट गया, मजिस्ट्रेट ने धमकाया-अभद्र व्यवहार किया

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले में एक सब इंस्पेक्टर द्वारा रिमांड मजिस्ट्रेट पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। सब इंस्पेक्टर सचिन कुमार का कहना है कि मजिस्ट्रेट ने न केवल उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया, बल्कि उन पर मुस्लिमों को फर्जी मामलों में फंसाने का आरोप भी लगाया। इस घटना से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है, जिसमें सचिन कुमार रेलवे लाइन पर बैठे नजर आ रहे हैं और आत्महत्या की बात कर रहे हैं।

सब इंस्पेक्टर सचिन कुमार ने मंगलवार (17 सितंबर 2024) को अपने ही थाने में एक शिकायती पत्र दिया है। इस पत्र में सचिन का आरोप है कि मजिस्ट्रेट अभिषेक त्रिपाठी ने बार-बार उन्हें अपने केबिन में बुला कर अभद्रता की और मुस्लिमों को फर्जी तौर पर गिरफ्तार करने की बात कही।

यह मामला अलीगढ़ के थानाक्षेत्र बन्नादेवी का है, जहाँ 16 सितंबर 2024 को सब इंस्पेक्टर सचिन कुमार पाँच बाइक चोरों – अदीब, फैज़, अरबाज़, आमिर और शाकिर – की रिमांड मंजूर करवाने के लिए अदालत पहुँचे। इस केस में अलीगढ़ के बन्नादेवी थाने में FIR दर्ज की गई थी, जिसमें सचिन कुमार मामले के विवेचक थे। गिरफ्तार किए गए सभी आरोपितों पर पहले से कई आपराधिक मुकदमे दर्ज थे, और उनके पास से चोरी की गई सात बाइकें बरामद हुई थीं। इसके अलावा, स्कूटी और मोटर पार्ट्स भी इन आरोपितों से मिले थे।

शाम 4 बजे, सब इंस्पेक्टर सचिन कुमार इन आरोपितों की रिमांड के लिए मजिस्ट्रेट अभिषेक त्रिपाठी की अदालत में पहुँचे। लेकिन उनके अनुसार, मजिस्ट्रेट ने उन्हें रात 10 बजे तक अदालत में बैठाए रखा और बार-बार अपने विश्राम कक्ष में बुलाकर अभद्र व्यवहार किया। सचिन कुमार का आरोप है कि मजिस्ट्रेट ने उन्हें बार-बार धमकाते हुए कहा, “तुम मुस्लिमों को फर्जी फंसाकर लाए हो।”

एक्स यूजर अधिवक्ता व पत्रकार अजय द्विवेदी ने 17 सितंबर को एक वीडियो व तहरीर शेयर की है। यह तहरीर सब इंस्पेक्टर सचिन कुमार की होने का दावा किया गया है। इस तहरीर में सचिन कुमार के हवाले से लिखा गया है कि 16 सितंबर को वो वाहन चोरी के एक केस में नामजद अदीब, फैज़, अरबाज़, आमिर और शाकिर का रिमांड मंजूर करवाने शाम 4 बजे रिमांड मजिस्ट्रेट की कोर्ट में गए थे। यह कोर्ट मजिस्ट्रेट अभिषेक त्रिपाठी की थी।

अजय द्विवेदी द्वारा शेयर की तहरीर में आगे बताया गया है कि जज साहब शाम 5 बजे कोर्ट में आए। तब दारोगा ने मजिस्ट्रेट से आरोपितों की रिमांड मंजूर करने का निवेदन किया। आरोप है कि सब इंस्पेक्टर को रात 10 बजे तक कोर्ट में बिठाए रखा गया। इस दौरान हर 10 मिनट पर दारोगा को अपने विश्राम कक्ष में बुलाया गया और अभद्रता की गई और साथ ही धमकी भी दी गई। बकौल दारोगा मजिस्ट्रेट ने उनसे कहा, “तुम मुस्लिमों को फर्जी पकड़ कर लाए हो।”

शिकायत में बताया गया है कि अदीब, फैज़, शाकिर, आमिर और अरबाज़ के खिलाफ पहले से कई आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। इन सभी के पास से चोरी की 7 बाइकें भी बरामद हुईं हैं। स्कूटी और मोटर पार्ट्स भी बरामद किए जाने का दावा इसी शिकायत कॉपी में किया गया है। दारोगा सचिन कुमार का यह भी दावा है कि न सिर्फ उनके द्वारा प्रस्तुत रिमांड को अस्वीकार कर दिया गया बल्कि उन्हें इतना प्रताड़ित किया गया कि उनके मन में आत्महत्या का भी विचार आने लगा।

एक वायरल वीडियो में सब इंस्पेक्टर को रेलवे पटरी पर बैठे देखा जा सकता है। इसी वीडियो में कुछ पुलिसकर्मी दारोगा सचिन कुमार को आत्महत्या न करने के लिए मना रहे हैं। वीडियो में भी दरोगा ने वही बातें कहीं हैं जो कि शिकायत कॉपी में लिखी गई हैं। पुलिसकर्मी ने इस पत्र में कार्रवाई की माँग की है।

SSP के निर्देश पर हुआ था एक्शन

जिस मामले में सब इंस्पेक्टर सचिन कुमार ने अदीब, फैज़, शाकिर, आमिर और अरबाज़ के खिलाफ अदालत में रिमांड का प्रयास किया था उसकी FIR कॉपी ऑपइंडिया के पास मौजूद है। यह FIR 16 सितंबर (सोमवार) को बन्नादेवी थाने में सब इंस्पेक्टर प्रवीण कुमार की शिकायत पर दर्ज हुई थी। सब इंस्पेक्टर सचिन कुमार इस केस में विवेचक हैं। तब पुलिस ने बाइक चोरी के गिरोह से जुड़े पाँचों आरोपितों को गिरफ्तार किया था। पूछताछ में इस गिरोह ने बताया था कि वो 60-70 बाइकें चोरी कर के काट चुके हैं।

अलीगढ़ पुलिस ने इस कार्रवाई को SSP के निर्देश पर किया गया एक गुडवर्क माना था। तब पुलिस ने इन सभी के पास से 4 बाइकें और 3 स्कूटी बरामद की थी। इसके अलावा इनके पास से बाइक के पार्ट्स भी मिले थे जिसमें टंकी, साइलेंसर आदि शामिल है। गिरफ्तारी से पहले ये आरोपित सरकारी अस्पताल के आसपास घूम रहे थे। सभी आरोपितों की उम्र 19 से 25 साल के बीच है। इन सभी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 317 (2), 317 (4) और 317 (5) के तहत करवाई की गई थी।

इस घटना के बाद, कई कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह न्यायिक प्रणाली पर सवाल खड़े करता है। एक पुलिसकर्मी के साथ इस प्रकार का व्यवहार न केवल उनके मनोबल को कमजोर करता है, बल्कि इससे न्यायिक प्रणाली की निष्पक्षता पर भी असर पड़ता है। यह मामला केवल एक पुलिसकर्मी और मजिस्ट्रेट के बीच का विवाद नहीं है, बल्कि यह न्यायिक प्रणाली और कानून-व्यवस्था से जुड़े गंभीर सवाल उठाता है। अब देखना यह होगा कि इस मामले में क्या कार्रवाई की जाती है और सचिन कुमार की आत्महत्या की धमकी के पीछे की सच्चाई क्या है।

सो नहीं रही CBI, उसके खुलासे परेशान करने वाले: डॉक्टर रेप-मर्डर केस में सुप्रीम कोर्ट, कहा- किसी भी महिला को रात में काम करने से नहीं रोक सकती बंगाल सरकार

सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार को लताड़ लगाई है। कोर्ट ने कहा है कि पश्चिम बंगाल सरकार महिला डॉक्टरों को रात में काम करने से नहीं रोक सकती। कोर्ट ने इस दौरान आरजी कर मेडिकल कॉलेज रेप और हत्या मामले में CBI जाँच की रिपोर्ट को परेशान करने वाला बताया।

मंगलवार (17 सितम्बर, 2024) को हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणियाँ की। चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच सुनवाई के दौरान पश्चिम बंगाल के महिला सुरक्षा संबधी एक कदम पर बिगड़ गई।

पश्चिम बंगाल सरकार ने बताया कि उसने महिला डॉक्टरों सुरक्षा के लिए उनके रात में काम करने या 12 घंटे से अधिक ड्यूटी ना करने सम्बन्धी नियम बनाए हैं। इस पर कोर्ट ने कहा कि महिलाएँ राज्य सरकार से कोई छूट नहीं चाहतीं बल्कि वह सुरक्षित माहौल चाहती है।

कोर्ट ने कहा, “ऐसा कैसे हो सकता है? महिलाएँ रियायतें नहीं, बल्कि समान मौके चाहती हैं…महिला डॉक्टर हर परिस्थिति में काम करने को तैयार हैं। उन्हें हर परिस्थिति में काम करना चाहिए…पश्चिम बंगाल को इसे सही करना होगा। आप यह नहीं कह सकते कि महिला डॉक्टर 12 घंटे से ज़्यादा शिफ्ट में काम नहीं कर सकतीं और रात में नहीं।”

कोर्ट ने कहा कि सुरक्षाबल भी रात में काम करते हैं और उनमें महिलाएँ शामिल हैं। कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार किसी भी महिला को यह नहीं कह सकती कि वह रात को काम ना करें। कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि सभी को सुरक्षा दिलाना राज्य का काम है। इसके जवाब पश्चिम बंगाल सरकार ने कोर्ट से कहा है कि वह इस नियम को बदल देंगे।

वहीं इस दौरान हत्या और रेप मामले में CBI ने अपनी रिपोर्ट कोर्ट को सौंपी। कोर्ट का कहना है कि यह रिपोर्ट परेशान करने वाली है। कोर्ट ने यह भी कहा कि वह CBI जाँच पर कोई डेडलाइन नहीं लगाएगा। कोर्ट ने यह कहा कि CBI जाँच को लेकर शांत नहीं बैठी है। कोर्ट ने CBI रिपोर्ट की कोई भी जानकारी सार्वजनिक देने से मन मना कर दिया है।

CBI ने अपनी रिपोर्ट में जो खुलासा किया है, वह और भी बुरा है, असल में परेशान करने वाला है। आप जो बता रहे हैं, वह चिंता का विषय है, हम खुद चिंतित हैं, CBI ने इसे हमें बताया है… हमने जो पढ़ा है, उससे हम खुद परेशान हैं… CBI अपनी स्वतंत्र जाँच करने के अलावा हमारे द्वारा उठाए गए मुद्दों पर भी काम कर रही है। जाँच पूरी करने के लिए अभी भी समय है। हमें CBI को पर्याप्त समय देना होगा, वह सो नहीं रहे हैं। कोई समय सीमा तय करना जाँच को भटकाना होग, सच को सामने लाने के लिए उन्हें समय दिया जाना चाहिए।”

सुप्रीम कोर्ट ने यह सुनवाई स्वतः संज्ञान में लिए गए मामले पर की है। कोर्ट ने इस मामले का संज्ञान अगस्त, 2024 में लिया था। डॉक्टरों के एक बड़े समूह ने सुप्रीम कोर्ट से इस मामले में न्याय की माँग भी की थी। कोर्ट ने इसके बाद कई दिशानिर्देश दिए थे।

गौरतलब है कि 9 अगस्त, 2024 को कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज में एक महिला डॉक्टर की रेप के बाद हत्या कर दी गई थी। इस मामले में पहले प्रशासन और अस्पताल के अधिकारियों ने लीपापोती करने का प्रयास किया था। हालाँकि विरोध के बाद सच्चाई सामने आई थी। अभी इस मामले में CBI जाँच चल रही है।