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सबूतों से की छेड़छाड़, मामले को दबाया: कोलकाता RG कर अस्पताल में डॉक्टर की रेप-हत्या केस में पूर्व प्रिंसिपल और SHO 3 दिन रहेंगे CBI हिरासत में, कोर्ट ने दिया फैसला

कोलकाता में डॉक्टर की रेप/हत्या के मामले में एक स्थानीय अदालत ने सुनवाई करते हुए 9 अगस्त को आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष और एक पुलिस अधिकारी को 17 सितंबर तक सीबीआई की हिरासत में भेज दिया।

संदीप घोष को जहाँ सीबीआई ने वित्तीय अनियमितताओं के आरोप में गिरफ्तार किया था तो वहीं ताला पुलिस स्टेशन के प्रभारी अभिजीत मंडल को केंद्रीय एजेंसी ने शनिवार को एफआईआर दर्ज करने में कथित देरी और मामले में सबूत गायब करने के आरोप में गिरफ्तार किया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सीबीआई अधिकारी ने पीटीआई न्यूज एजेंसी को बताया कि उन्हें दोनों आरोपितों की हिरासत तीन दिन के लिए मिली है। अब दोनों से एक साथ पूछताछ की जाएगी।

बताया जा रहा है कि सीबीआई ने घोष के खिलाफ साक्ष्यों से छेड़छाड़ के आरोप भी लगाए हैं। वहीं अभिजीत मंडल पर सबूतों से छेड़छाड़, एफआईआर दर्ज करने में देरी का आरोप लगाकर बात जोड़ी गई है।

सीबीआई ने अदालत में बताया कि मंडल को 9 अगस्त की सुबह 10 बजे के आसपास डॉक्टर की मौत के बारे में पता चल गया था लेकिन एफआईआर 11 बजे के करीब दर्ज हुई। उनसे जब सवाल किए गए तो उन्होंने कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया इसलिए उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया

वहीं संदीप घोष की बात करें तो । उन्हें 2 सितंबर को गिरफ्तार किया गया था। इस मामले में सीबीआई उन्हें रिमांड पर लेने की कोशिश करेगी। इसके अलावा, प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी उनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों की जाँच कर रही है।

इस मामले का स्वत: संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 9 सितंबर को सुनवाई की थी। सुप्रीम कोर्ट ने सामान्य डायरी (जीडी) प्रविष्टि और एफआईआर के पंजीकरण के समय के बीच विसंगति की ओर इशारा किया था।

ब्रिटेन में 16 साल में पाकिस्तानियों ने किया सैकड़ों लड़कियों का रेप, 14 साल की लड़की को शिकार बनाने वाले वाजिद को 20 साल बाद सज़ा: 1400+ पीड़िताएँ आईं सामने

ब्रिटेन के रोथरहैम शहर में दो दशक पहले 14 वर्षीय किशोरी के साथ किए गए जघन्य अपराध के मामले में 42 वर्षीय वलीद अली को सजा सुनाई है। यह मामला ब्रिटेन के सबसे बड़े बाल यौन शोषण की जाँच ‘ऑपरेशन स्टोववुड’ के तहत सामने आया, जो 1997 से 2013 के बीच रोथरहैम में हुए ऐतिहासिक यौन शोषण मामलों की पड़ताल कर रहा है, जिसमें पाकिस्तानी मूल के यौन अपराधियों ने सैकड़ों लड़कियों का रेप किया और उन्हें धमकाकर उनका मुँह बंद रखा।

यूके की नेशनल क्राइम एजेंसी के मुताबिक, यह दर्दनाक घटना 2003 और 2004 के बीच की है, जब वलीद अली, जो उस समय अपने शुरुआती 20 के दशक में था, ने 14 साल की लड़की को रोथरहैम के टाउन सेंटर में एक पानी के फव्वारे के पास अकेले बैठे देखा। अली ने अपने कुछ साथियों के साथ मिलकर उस लड़की से संपर्क किया और उसे एक नजदीकी गली में चलने के लिए कहा। जब लड़की ने मना किया, तो अली ने उसका हाथ पकड़कर उसे जबरन उठाने की कोशिश की।

अली और उसके साथियों की मौजूदगी से डरकर लड़की को गली में जाना पड़ा, जहाँ अली ने उससे बलात्कार किया। यह गली लोगों की नजर से दूर थी, जिसकी वजह से उसे कोई देख नहीं पाया। वलीद ऐसे मामलों का पुराना अपराधी रहा है। उसने उसी दौरान एक और लड़की का रेप किया था, जिसमें वो जेल की सजा काट चुका है।

इस भयावह घटना के बाद, पीड़िता ने लगभग 20 साल तक अपनी पीड़ा को छिपाए रखा और चुप रही। हालाँकि, 2021 में उसने ‘ऑपरेशन स्टोववुड‘ टीम के सामने आकर अपनी आपबीती सुनाई। पीड़िता के साहस और उसके बयान के आधार पर वलीद अली को गिरफ्तार किया गया और उस पर मुकदमा चलाया गया।

शेफ़ील्ड क्राउन कोर्ट ने शुक्रवार (13 सितंबर 2024) को वलीद अली को 14 साल की लड़की के साथ बलात्कार के मामले में दोषी करार दिया। वलीद को 5 साल की सजा सुनाई गई है। अदालत ने उसे 13 साल की सजा सुनाई। इसके पहले, अली को 2003 में 13 साल की एक अन्य लड़की के साथ बलात्कार और यौन उत्पीड़न के मामले में भी दोषी ठहराया जा चुका है। उस मामले में भी अपराध उसी गली में हुआ था।

साउथ यॉर्कशायर पुलिस और नेशनल क्राइम एजेंसी (NCA) की ‘ऑपरेशन स्टोववुड’ जांच टीम ने इस मामले को सुलझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस मामले के वरिष्ठ जाँच अधिकारी, स्टुअर्ट कॉब ने कहा, “पीड़िता ने 21 साल तक अपनी पीड़ा को दबाए रखा, लेकिन उनके साहस और हमारे जाँच कार्य ने सुनिश्चित किया कि अपराधी को सजा मिले। हम सभी पीड़ितों को यह संदेश देना चाहते हैं कि वे अपनी आपबीती साझा करें और पुलिस से संपर्क करें।”

ऑपरेशन स्टोववुड: बाल यौन शोषण की सबसे बड़ी जाँच

‘ऑपरेशन स्टोववुड’ ब्रिटेन में बाल यौन शोषण के मामलों की सबसे बड़ी जाँच है, जो रोथरहैम में 1997 से 2013 के बीच हुए सैकड़ों यौन शोषण मामलों की पड़ताल कर रहा है। इस जाँच में अब तक कई आरोपित दोषी पाए गए हैं, जिनमें से दर्जनों को सजा हो चुकी है।

रिपोर्टों के अनुसार, 1997 से 2013 के बीच रोथरहैम में 1,400 से अधिक लड़कियों का यौन शोषण हुआ था। इस अपराध के पीछे मुख्य रूप से पाकिस्तान मूल के गिरोहों का हाथ बताया गया है। अब तक की जाँच में 1,100 से अधिक पीड़ितों की पहचान की जा चुकी है और जाँच प्रक्रिया 2027 तक जारी रहने की उम्मीद है। पुलिस और न्यायिक एजेंसियाँ इस काम में लगी हैं ताकि पीड़ितों को न्याय मिल सके और अपराधियों को सजा दी जा सके।

हिंदुओं की आवाज उठाने वाली नाजिया इलाही खान पर ‘झूठा’ ईशनिंदा का केस, गिरफ्तारी के बाद बात लिंचिंग तक पहुँची: जानें क्या है मामला

सोशल मीडिया पर इस्लामी कट्टरपंथ के खिलाफ आवाज उठाने वाली नाजिया इलाही खान को 10 सितंबर को ईशनिंदा मामले में गिरफ्तार किया गया था। उनपर आरोप था कि उन्होंने पैगंबर मोहम्मद का अपमान किया। उनके विरुद्ध शिकायत वकील नूर महविश ने दर्ज कराई थी।

शिकायत में कहा था कि नाजिया देश में सांप्रदायिक हिंसा और मजहबी तनाव पैदा करना चाहती हैं। महविश ने शिकायत में भारतीय न्याय संहिता की धारा 299, 353 और 362 के तहत केस को दर्ज कराया था। इस मामले में अलीपुर कोर्ट में पेश होने के बाद नाजिया को भले जमानत मिल गई लेकिन कट्टरपंथियों की नफरत उनके लिए कम नहीं हुई।

नाजिया पर ये केस 3 अगस्त 2024 को दिए एक इंटरव्यू के बाद दर्ज हुआ था। अपने इंटरव्यू में उन्होंने इस बात पर आपत्ति जताई थी कि आखिर हिंदू नाम से मुस्लिम दुकान क्यों खोल रहे हैं। उन्होंने पूछा था कि आखिर वो सलीम जो हिंदुओं को काफिर समझता है, उसने महादेव के नाम पर ढाबा क्यों खोला है।

जब पत्रकार ने उनसे कहा कि ये तो लोगों की इच्छा है कि वो क्या नाम रखेंगें, क्या नहीं… इस पर नाजिया ने कहा था कि फिर तो हिंदू भी अपनी मनमर्जी का नाम लिख सकते हैं।

नाजिया ने इस दौरान कुछ उदाहरण ऐसे दिए जिन्हें लेकर विवाद उपजा। उन्होंने कहा था कि अगर हिंदू कोई मुस्लिम नाम के साथ दुकान का नाम रख लेंगे तो हल्ला मच जाएगा और गुस्ताख-ए-रसूल की एक सजा सिर तन से जुदा के नारे लगने लगेंगे।

वीडियो में हालाँकि सुना जा सकता है कि नाजिया सिर्फ मुस्लिम नाम लगाकर उदाहरण दे रही हैं उन्होंने कहीं पैंगबर मोहम्मद के बारे में कुछ नहीं कहा है। उन्होंने मुस्लिम नाम के साथ दुकान का नाम जोड़ सिर्फ पूछा कि क्या अच्छा लगेगा अगर हिंदू ऐसे नाम से दुकान खोल लें। मगर, इस्लामी कट्टरपंथी इसी बात से नाराज हो गए और मामला थाने तक पहुँच गया।

नाजिया ने अपनी वीडियो में थूक जिहाद का खतरा बताते हुए कहा था कि नाम बदलकर कारोबार करने की क्या जरूरत है जिसके मन में चोर होता है वो ही ऐसा करता है। इस दौरान उन्होंने योगी आदित्यनाथ के फैसले का समर्थन किया था जहाँ दुकानों पर मालिक का असली नाम लिखने को कहा गया था।

इस इंटरव्यू के बाद इस्लामी कट्टरपंथी उन्हें सोशल मीडिया पर गाली देने लगे। क्रिकेटर शिवम दुबे की बीवी अंजुम खान तक ने उनके खिलाफ जहर उगला। अपनी स्टोरी में अंजुम ने कहा- “अगर नबी के शान में गुस्ताखी होने पर आपको गुस्सा नहीं आता तो अपना ईमान मर चुका है और अगर आपका ईमान जिंदा है तो नाजिया की गिरफ्तारी की माँग करिए।”

इसी तरह अन्य मुस्लिम समूहों ने भी नाजिया के खिलाफ जहर उगला। नतीजा ये हुआ कि नाजिया को धमकियाँ आने लगीं। एजाज असलम नाम के मुस्लिम यूट्यूबर ने भी धमकी दी।

4 सितंबर को सोशल मीडिया पर नाजिया ने बताया जहाँ पूरा देश आरजी कर अस्पताल की डॉक्टर के लिए इंसाफ माँग रहा है, वहीं बंगाल के मुस्लिम उनके खिलाफ ‘सर तन से जुदा’ की साजिश रच रहे हैं। उन्होंने अपने ट्वीट में कोलकाता पुलिस और टीएमसी नेताओं को भी जिम्मेदार ठहराया था।

उन्होंने ये भी बताया कि जब उन्हें अलीपुर कोर्ट ले जाया जा रहा था तब लोगों ने उनकी लिंचिंग की कोशिश की। उन्होंने कहा, “पहले मुझे पोर्ट एरिया गार्डन रीच पुलिस स्टेशन से झूठे ईशनिंदा मामले में गिरफ्तार किया गया, फिर कोलकाता पुलिस के गार्डन रीच पुलिस स्टेशन के अधिकारी की मिलीभगत से अलीपुर कोर्ट में लाखों मुसलमानों को इकट्ठा करके मेरी मॉब लिंचिंग की साजिश रची गई। मेरा गला काटने की साजिश में कई टीएमसी विधायक, मुस्लिम महिला टीएमसी नेता का सीधा हाथ है!”

जानिए कौन हैं पंडित टीका लाल टपलू, जिनके नाम पर कश्मीरी पंडितों के लिए पुनर्वास योजना शुरू करेगी BJP: यासीन मलिक के JKLF के आतंकियों ने कर दी थी हत्या

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार (14 सितंबर) को जम्मू में एक जनसभा को संबोधित करते हुए टीका लाल टपलू को याद किया। टपलू कश्मीर के निवासी थे और आतंकियों ने उनकी क्रूरता से हत्या कर दी थी। जम्मू-कश्मीर के लिए भाजपा द्वारा जारी संकल्प पत्र में टपलू के नाम से एक योजना शुरू करने की बात कही गई है। यह योजना कश्मीरी विस्थापितों के पुनर्वास के लिए होगा।

भाजपा ने अपने संकल्प पत्र में कहा है कि वह विधानसभा में जीतकर सत्ता में आती है तो वह टीका लाल टपलू विस्थापित समाज पुनर्वास योजना (TLTVSPY) शुरू करेगी और कश्मीरी पंडितों का पुनर्वास करेगी। इस योजना के माध्यम से कश्मीरी पंडितों, पश्चिमी कश्मीर के शरणार्थियों, वाल्मीकि, गोरखाओं सहित अन्य विस्थापित लोगों के पुनर्वास में तेजी लाने की बात कही गई है।

जम्मू के डोडा में टपलू को याद करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “हमने पंडित टीका लाल टपलू के सम्मान में एक योजना शुरू करने का फैसला किया है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कश्मीर पंडितों को उनके अधिकार तेजी से मिलें।” बता दें कि टपलू की साल 1989 में आतंकियों ने हत्या कर दी थी।

कौन थे टपलू?

टीका लाल टपलू घाटी में रहने वाले वकील और भाजपा के शुरुआती नेताओं में से एक थे। उनका जन्म श्रीनगर में हुआ था। प्रारंभिक शिक्षा के बाद वे उच्च शिक्षा के लिए पंजाब और उत्तर प्रदेश चले गए। हालाँकि, शिक्षा प्राप्त करने के बाद वे अपने लोगों की सेवा करने के लिए वापस जम्मू-कश्मीर लौट गए। लोग उन्हें प्यार से लालाजी या बड़े भाई कहते थे।

आतंकी उन्हें मारने के लिए लंबे समय से साजिशें रच रहे थे जिसका टपलू को इस बात का अहसास था। इसीलिए कट्टरपंथियों से बचाने के लिए उन्होंने अपने परिवार को दिल्ली में बसा दिया था, लेकिन वो खुद कश्मीर लौट गए थे। आखिरकार, 14 सितंबर 1989 को यासीन मलिक के आतंकी संगठन जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट के आतंकियों ने उन्हें मौत के घाट उतार दिया।

घटना के दिन उनकेे घर के बाहर एक बच्ची जोर-जोर से रो रही थी। टपलू बाहर निकलकर उसके पास गए और उसकी माँ से पूछा कि वह क्यों रो रही है। उसकी माँ ने बताया कि बच्ची के स्कूल में कोई फंक्शन है और उसके पास पैसा नहीं है, इसलिए वह रो रही है। इसके बाद टपलू ने जेब से 5 रुपए निकालकर बच्ची को पकड़ा दिया। ठीक उसी समय सामने से आए आतंकियों ने उन्हें गोलियों से भून दिया।

‘हिंदू लड़के से करती हूँ प्यार, मेरे घरवाले मुझे मार देंगे’ : अलीगढ़ से मुस्लिम युवती की वीडियो वायरल, माँगी CM योगी से मदद, भाई पर लगाया गंदे ढंग से छूने का आरोप

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ से एक युवती की वीडियो वायरल हो रही है। वीडियो में युवती उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मदद की गुहार लगा रही है। उसका कहना है कि उसे एक हिंदू लड़के से प्यार हो गया है लेकिन उसके घरवाले मान नहीं रहे। उसे घर में बंद कर दिया गया है और उसे शक है कि उसकी हत्या भी की जा सकती है।

मामला खैर थाना क्षेत्र का है। वायरल वीडियो में लड़की ने बताया कि उसके प्रेमी का नाम शौर्य वर्मा है। वह एक हिंदू है। लड़की कहती है कि वो भी हिंदू धर्म में विश्वास करती है और शौर्य से शादी करना चाहती है। लेकिन उसके घरवाले इसके खिलाफ है। उन्होंने दोनों के रिश्ते की जानकारी होने पर लड़की को घर में कैद कर लिया है। लड़की को डर है कि उसे मारा जा सकता है।

उसने कहा कि वो अपने परिवार से रिश्ता तोड़ दिया है और कभी अपने फैसले से पीछे नहीं हटेगी। वायरल वीडियो में युवती ने अपने भाई पर भी आरोप लगाया कि उसका भाई उसे गंदे ढंग से छुआ और उसकी छाती पर हाथ भी मारा। यही सब घटनाएँ देख उसने अपने घर में सुरक्षित महसूस नहीं हो रहा है।

दैनिक भास्कर की खबर के अनुसार, वीडियो वायरल होने के बाद खैर सीओ वरुण सिंह ने बताया कि लड़की और लड़का दोनों बालिग हैं और एक दूसरे से शादी करना चाहते हैं। पुलिस उनकी पूरी मदद करेगी।

सीओ ने जानकारी दी कि पीड़िता की अपने परिजनों से बातचीत भी हो गई है। एक नई वीडियो बनाकर उसने कहा कि उसे परिवार से कोई दिक्कत नहीं है, फिर भी पुलिस मामले पर नजर बनाए हुए हैं और उन्हें सुरक्षा दी जा रही है।

मुस्लिम भीड़ ने हिंदू युवकों पर किया हमला, पुलिस की मौजूदगी में पत्थर फेंके: गुजरात में इंस्टाग्राम पोस्ट को लेकर हिंसा

गुजरात के खेडा में फिर से शांति भंग करने की कोशिश की गई है। इस बार महुधा में एक धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाली इंस्टाग्राम पोस्ट के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने पर मुस्लिम भीड़ ने हिंदुओं पर हमला कर दिया। इस घटना में लगभग 2,500 से 3,000 लोगों की भीड़ ने “मार डालने” की धमकी देते हुए हिंदू युवकों पर पत्थर बरसाए। इस मामले में एफआईआर दर्ज कर पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी है।

घटना तब शुरू हुई जब मुस्लिम युवकों ने इंस्टाग्राम पर एक भड़काऊ पोस्ट डाली। इस पोस्ट से हिंदू समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुँची, जिसके बाद तीन हिंदू युवक पुलिस स्टेशन शिकायत दर्ज कराने पहुँचे। लेकिन जब वे पुलिस स्टेशन पहुँचे, तो वहाँ मुस्लिम भीड़ ने उन्हें घेर लिया और धमकाया। पुलिस की मौजूदगी में भी हिंदू युवकों पर पत्थरबाजी की गई।

महुधा पुलिस स्टेशन, खेड़ा में एक एफआईआर दर्ज की गई है, जिसकी एक प्रति ऑपइंडिया के पास उपलब्ध है। हिंदू युवक ने शिकायत में कहा है कि शनिवार (14 सितंबर 2024) को जब वह अपने शो रूम में था, तो उसका दोस्त आया और उसे अपने मोबाइल फोन पर एक व्हाट्सएप ग्रुप में एक स्क्रीनशॉट दिखाया, जिसमें हिंदुओं की भावनाओं को चोट पहुँचाने और उकसाने वाली बात लिखी हुई थी। इसलिए उन्होंने अपने एक दोस्त के साथ मिलकर इस पोस्ट के खिलाफ पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराने का फैसला किया। उसने अपने एक अन्य दोस्त को इसकी जानकारी दी और तीनों महुधा थाने पहुँचे।

इंस्टाग्राम पोस्ट में क्या था?

यह पोस्ट इंस्टाग्राम यूजर आईडी ताहिर और कोनेन काज़ी से की गई थी। जिसमें लिखा था कि- ‘स्पेशल कठलाल वालों के लिए। जो कुफ्र के डर से सरकार के मिलाद का जुलूस ना निकल सके वो कोम कुत्ते सुवर उर्फ ​​के खिलाफ बोलते हैं उनके खिलाफ क्या बोलेंगे कायर लोग। ‘सरकार के मिलाद का जुलूस देखना हो तो आना महुधा में, ऐसा जुलूस निकलता है कि आके दुश्मन अपार से नीचे तक जल खड़े हैं।’

आगे लिखा था, ‘अगर किसी विधायक या कट्टरपंथी संगठन के डर से ये फैसला लिया है तो हम महुधा वालों को कहते हैं कि आधार कार्ड और जमीन लेकर आएंगे और इजाजत दिलाएंगे और इत्मिनान से जुलूस फिराकर दिखा देंगे।’

इससे पहले कि तीनों हिंदू युवक शिकायत दर्ज कराने थाने पहुँचते, पुलिस ने पोस्टर पकड़ लिए और उन्हें बचाने के लिए मुस्लिम नेता भी वहाँ पहुँच गए। हालाँकि, जब हिंदू युवक ने शिकायत दर्ज करने की तैयारी दिखाई, तो मुस्लिम समुदाय के कुछ लोग उनके पास आए और सुलह की बात की और कहा कि उन्हें शिकायत दर्ज नहीं करनी चाहिए और उस व्यक्ति को माफी पत्र लिखा जाएगा। लेकिन हिंदू युवक ने समझौते की बात न करते हुए कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी थी।

जब तक हिंदू युवक शिकायत दर्ज करा कर लौटा, तब तक थाने के बाहर सैकड़ों मुसलमानों की भीड़ जमा हो चुकी थी और नारेबाजी करने लगी। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करते हुए हिंदू युवकों को वहां से भेज दिया और सुरक्षा के लिए एक पुलिस वाहन भी भेजा। साथ ही पीआई और पीएसआई हिंदू युवकों को अपनी गाड़ी में लेकर रवाना हो गए।

पीआई की मौजूदगी में पथराव हुआ

जब हिंदू युवा, पुलिस अधिकारियों के साथ, महुधा शहर छोड़कर नडियाद-कथलाल रोड पर पहुंचे, तो भीड़ ने उन्हें फिर से घेर लिया और फिर से नारे लगाने शुरू कर दिए। शिकायत के मुताबिक ये वही लोग थे जो पुलिस स्टेशन के बाहर जमा हुए थे। वे चिल्ला रहे थे, ‘यह हमारे समुदाय के लोगों के खिलाफ शिकायत है…जिओ मत जाने दो…’ और भीड़ के लोगों के पास तलवार-लाठी, पाइप आदि हथियार भी थे।

इसी बीच जब हिंदू युवक गाड़ी रोककर बाहर निकले तो हुसैन अब्बास नाम का एक इस्लामिक व्यक्ति तलवार लेकर दौड़ा और बोला “तुमने हमारे खिलाफ शिकायत क्यों दर्ज कराई? ‘आज मैं तुम्हें मार डालूँगा” कहते हुए उसने मुझ पर तलवार से हमला किया, लेकिन हिंदू युवक झुक गया और घायल नहीं हुआ। इस दौरान भीड़ में शामिल मुस्लिम लोग यह भी चिल्ला रहे थे कि “आज इसे मत जाने दो…इसे मार डालो”। लेकिन जैसे ही पुलिस अधिकारी और पीछे वाली गाड़ी पहुंची, भीड़ तितर-बितर हो गई और भाग गई। फिर पुलिस ने हिंदू युवकों को अपनी गाड़ी में बिठाकर भेज दिया।

ढाई से तीन हजार मुसलमानों की भीड़

एफआईआर में सौ-सौ की भीड़ का जिक्र है, लेकिन शिकायतकर्ता हिंदू युवक ने ऑपइंडिया को बताया कि हमले के वक्त करीब ढाई से तीन हजार मुसलमानों की भीड़ जमा थी और लगातार सांप्रदायिक नारे लगा रही थी। उन्होंने कहा कि थाने के बाहर भी भीड़ द्वारा उन पर पथराव किया गया। साथ ही, जब हमला हुआ तब वापसी में पुलिस अधिकारी भी उनके साथ थे, फिर भी चरमपंथियों ने हमला करने में संकोच नहीं किया।

इस मामले में एक हिंदू युवक की शिकायत के आधार पर नामजोग में 37 लोगों के खिलाफ और बाकी भीड़ के खिलाफ धारा 189(2), 189(4), 191(2), 191(3), 190, 109, 125, 324(5), 324 भारतीय न्याय संहिता (6), 352, 351(3) और 61(2) और गुजरात पुलिस अधिनियम की धारा 135 के तहत मामला दर्ज किया गया है और जाँच की जा रही है। जिनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गयी है उनमें मोईन, शहजाद, तौकीर, नासिर, समीर, वाजिद, हुसैन, नाजिर, फारूक, वाहिद, जावेद, मोइद हुसैन आदि शामिल हैं। कुल 37 मुस्लिम व्यक्तियों पर मामला दर्ज किया गया है जबकि गिरोह के बाकी लोगों पर मामला दर्ज किया गया है।

पुलिस जाँच जारी, आरोपित को राउंडअप किया जा रहा है- पीआई

महुधा टाउन पीआई केके झाला ने ऑपइंडिया से बातचीत में कहा कि इस मामले में एफआईआर दर्ज कर आरोपियों को घेरने की प्रक्रिया फिलहाल चल रही है। जिनके खिलाफ अपराध दर्ज किया गया है उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल आगे की जाँच चल रही है।

मूल खबर गुजराती भाषा में लिखी गई है। मूल रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें

तेजस MK1: भारतीय वायुसेना का स्वदेशी फाइटर जेट, पाकिस्तान और चीन के लड़ाकू विमानों से होगा मुकाबला

अगले महीने के आखिर तक भारत की वायुसेना को तेजस MK1 सौंप दिए जाएँगे। भारतीय वायुसेना ने कुल 83 तेजस MK2 का ऑर्डर दिया है। इसी के साथ मिग-21 पूरी तरह से सेना से बाहर हो जाएँगे। भारतीय वायुसेना के लिए एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक कदम है, क्योंकि यह भारत का स्वदेशी निर्मित हल्का लड़ाकू विमान है।

अक्टूबर 2024 के अंत तक तेजस MK2 के भारतीय वायुसेना को सौंपे जाने की घोषणा के साथ, भारत की रक्षा क्षमताओं में एक नया अध्याय जुड़ने वाला है। तेजस MK1 कई विशेषताओं और क्षमताओं से लैस है, जो इसे पाकिस्तान और चीन के फाइटर जेट्स के मुकाबले भारतीय वायुसेना के लिए एक मजबूत बढ़त प्रदान करता है। इस लेख में हम तेजस MK1 की खासियतों, उसकी रफ्तार, वजन, उसके बनने में लगे समय और उसकी मुकाबला क्षमताओं पर विस्तृत चर्चा करेंगे।

तेजस MK1 की खासियतें

हल्का वजन: तेजस MK1 का वजन लगभग 6.5 टन है, जो इसे दुनिया के सबसे हल्के लड़ाकू विमानों में से एक बनाता है। इसकी हल्की संरचना इसे हवा में तेज़ और अधिक गतिशील बनाती है। इसका हल्का वजन इसे अधिक फुर्तीला और आसानी से नियंत्रित करने योग्य बनाता है, जिससे पायलट को उच्च गति पर भी बेहतर नियंत्रण मिलता है।

स्पीड (गति): तेजस MK1 की अधिकतम गति 1.8 मैक (2222 किलोमीटर प्रति घंटा) तक हो सकती है। यह तेज गति इसे हवा में अन्य लड़ाकू विमानों के मुकाबले एक बढ़त दिलाती है, खासकर दुश्मन के विमानों के खिलाफ।

सुपर सॉनिक क्षमता: तेजस MK1 को सुपरसोनिक गति से उड़ान भरने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह तेज गति दुश्मन के विमानों से जल्दी बचने और हमला करने की क्षमता प्रदान करती है। इसकी सुपर सॉनिक क्षमता इसे दुश्मन के रडार से बचने में भी मदद करती है, जिससे यह तेजी से हमला कर सकता है और वापस सुरक्षित लौट सकता है।

स्वदेशी निर्मित: तेजस MK1 को पूरी तरह से भारत में विकसित और निर्मित किया गया है। यह भारत के आत्मनिर्भर रक्षा उद्देश्यों का एक प्रमुख हिस्सा है। इससे भारत की विदेशी विमानों पर निर्भरता कम होगी और देश के तकनीकी विकास में भी सुधार होगा।

मल्टीरोल लड़ाकू विमान: तेजस MK1 एक मल्टीरोल लड़ाकू विमान है, जिसका मतलब है कि यह हवा से हवा और हवा से जमीन दोनों प्रकार के अभियानों में सक्षम है। यह इसे एक बेहद बहुमुखी लड़ाकू विमान बनाता है, जो किसी भी परिस्थिति में प्रभावी साबित हो सकता है।

हथियार ले जाने की क्षमता: तेजस MK1 की हथियार ले जाने की क्षमता लगभग 3.5 टन है। इसमें हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलें, हवा से जमीन पर हमला करने वाली मिसाइलें, बम और रॉकेट शामिल हैं। यह इसे एक शक्तिशाली हथियार बनाता है, जो किसी भी युद्ध में दुश्मन को कड़ी टक्कर दे सकता है।

अत्याधुनिक एवियोनिक्स: तेजस MK1 में अत्याधुनिक एवियोनिक्स सिस्टम लगाया गया है, जिसमें रडार, ईसीएम (Electronic Counter Measures), फ्लाई-बाय-वायर सिस्टम और अन्य अत्याधुनिक तकनीकें शामिल हैं। यह इसे अधिक सक्षम और सटीक बनाता है, जिससे यह किसी भी स्थिति में तेजी से प्रतिक्रिया कर सकता है।

लड़ाई की दूरी (रेंज): मार्क-1ए पिछले वैरिएंट से थोड़ा हल्का है, लेकिन यह आकार में उतना ही बड़ा है। यानी 43.4 फीट की लंबाई, 14.5 फीट की ऊंचाई। अधिकतम 2222 km/hr की स्पीड से उड़ान भर सकता है। कॉम्बैट रेंज 739 किलोमीटर है। वैसे इसका फेरी रेंज 3000 किलोमीटर है।

जटिल एयरोडायनामिक्स डिज़ाइन: इसका डिज़ाइन इस प्रकार किया गया है कि यह उच्च गति और गतिशीलता के बावजूद स्थिर रहता है। यह डिज़ाइन इसे दुश्मन के हमलों से बचने और हवा में लंबी दूरी तक उड़ान भरने में मदद करता है।

हर मौसम में उड़ान: तेजस MK1 किसी भी मौसम में उड़ान भरने में सक्षम है, चाहे दिन हो या रात। यह इसे हर परिस्थिति में इस्तेमाल किए जाने वाला एक विश्वसनीय लड़ाकू विमान बनाता है।

पाकिस्तान और चीन के फाइटर जेट्स से तुलना

चीन के J-10 और JF-17 से मुकाबला: तेजस MK1 की तुलना में चीन का J-10 और पाकिस्तान के साथ मिलकर बनाए गए JF-17 जैसे फाइटर जेट्स अधिक भारी हैं। JF-17 की गति लगभग 1.6 मैक है, जो तेजस के बराबर है, लेकिन तेजस MK1 की एवियोनिक्स और हथियार प्रणाली अधिक उन्नत मानी जाती है। तेजस का हल्का वजन इसे अधिक फुर्तीला बनाता है, जबकि JF-17 और J-10 थोड़े भारी होते हैं।

हथियार प्रणाली: तेजस MK1 की हथियार ले जाने की क्षमता और उसकी मारक शक्ति चीन और पाकिस्तान के विमानों के मुकाबले अधिक है। इसका रडार और ईसीएम सिस्टम इसे दुश्मन के रडार से बचने में सक्षम बनाता है, जो J-10 और JF-17 में उतनी क्षमता नहीं होती।

तकनीकी उन्नति: तेजस MK1 की तकनीकी उन्नति और स्वदेशी निर्मित होने के कारण इसकी रखरखाव की लागत भी कम होती है। इसके अलावा, इसकी स्पेयर पार्ट्स और मरम्मत की सुविधाएं भारत में ही उपलब्ध हैं, जबकि पाकिस्तान को JF-17 के लिए चीन पर निर्भर रहना पड़ता है।

मल्टीरोल क्षमता: तेजस MK1 की मल्टीरोल क्षमता इसे हवा से जमीन और हवा से हवा दोनों अभियानों में प्रभावी बनाती है। J-10 और JF-17 भी मल्टीरोल विमान हैं, लेकिन तेजस की उन्नत तकनीकी इसे युद्ध के मैदान में अधिक लाभकारी बनाती है।

तेजस के बनने में इतना समय क्यों लगा?

तेजस परियोजना की शुरुआत 1980 के दशक में की गई थी, लेकिन इसे पूरा करने में कई दशकों का समय लग गया। इसके पीछे कई कारण हैं:

तकनीकी चुनौतियाँ: भारत के लिए यह पहली बार था कि उसने पूरी तरह से स्वदेशी लड़ाकू विमान विकसित करने का प्रयास किया। इसमें कई तकनीकी चुनौतियां सामने आईं, जैसे कि एवियोनिक्स, इंजन और एयरोडायनामिक्स को संतुलित करना। इससे परियोजना में देरी हुई।

संसाधनों की कमी: तेजस परियोजना के दौरान भारत में रक्षा अनुसंधान और विकास के लिए पर्याप्त संसाधनों की कमी थी। इससे विकास की गति धीमी रही।

बजट और वित्तीय समस्याएँ: इस परियोजना के दौरान कई बार बजट में कटौती हुई, जिससे विमान के विकास में बाधा आई।

वैश्विक सहयोग की कमी: तेजस के निर्माण में शुरुआत में भारत को अन्य देशों से बहुत कम तकनीकी सहयोग मिला। भारत को अपने खुद के अनुसंधान और विकास पर अधिक निर्भर रहना पड़ा, जिससे परियोजना में देरी हुई।

इंजन की समस्या: तेजस का Kaveri इंजन विकास में विफल रहा, जिसके कारण इसे GE के इंजन से बदलना पड़ा। यह प्रक्रिया भी लंबी चली और विकास में देरी का कारण बनी।

टेस्टिंग और सर्टिफिकेशन: किसी भी फाइटर जेट को विकसित करने के बाद उसकी टेस्टिंग और सर्टिफिकेशन की लंबी प्रक्रिया होती है। तेजस की टेस्टिंग में कई साल लगे और इसमें कई सुधार भी किए गए, जो इसकी देरी का कारण बने।

भारत को कितनी बढ़त दिलाएगा?

स्वदेशी रक्षा क्षमता: तेजस MK1 भारत की आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देगा। इससे भारत को विदेशी विमानों पर निर्भरता कम करनी पड़ेगी, जिससे रक्षा बजट में भी बचत होगी।

पाकिस्तान और चीन के खिलाफ बढ़त: तेजस की उन्नत तकनीकी क्षमता और हथियार प्रणाली इसे पाकिस्तान और चीन के विमानों के मुकाबले एक मजबूत विकल्प बनाती है। इसकी हल्की संरचना और तेज गति इसे हवाई युद्ध में अधिक फुर्तीला बनाती है।

भविष्य की परियोजनाएँ: तेजस MK1 के सफल विकास के बाद, भारत अब तेजस MK2 और AMCA (Advanced Medium Combat Aircraft) जैसे और भी उन्नत विमान बनाने की दिशा में बढ़ रहा है। इससे भारत की रक्षा क्षमताएँ और भी मजबूत होंगी। भारत तेजस का नया वर्जन तेजस-एमके2 भी बना रहा है, जो जल्द ही तैयार हो जाएगा। तेजस एमके2 पाँचवीं पीढ़ी का शानदार लड़ाकू विमान होगा।

रणनीतिक लाभ: तेजस का स्वदेशी निर्माण भारत को एक रणनीतिक लाभ देता है, क्योंकि इसे किसी भी समय उन्नत किया जा सकता है और भारतीय वायुसेना की आवश्यकताओं के अनुसार अनुकूलित किया जा सकता है।

तेजस MK1 भारतीय वायुसेना के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। इसका हल्का वजन, तेज गति, उन्नत एवियोनिक्स और हथियार प्रणाली इसे पाकिस्तान और चीन के विमानों के मुकाबले अधिक प्रभावी बनाते हैं। हालांकि इसके विकास में समय लगा, लेकिन इसके परिणामस्वरूप भारत ने एक अत्याधुनिक लड़ाकू विमान हासिल किया है, जो आने वाले दशकों तक देश की रक्षा आवश्यकताओं को पूरा करेगा। तेजस MK1 भारत के लिए गर्व का प्रतीक है, जो आत्मनिर्भरता और उन्नति का संदेश देता है।

कनाडा में भारतीय उच्चायोग पर ग्रेनेड फेंकने वाला निकला सांसद अमृतपाल सिंह का जीजा, NIA ने परिजनों के यहाँ की थी छापेमारी: घर से फोन, लैपटॉप सब कब्जे में लिया

कनाडा के ओटावा में पिछले साल 23 मार्च 2023 को भारतीय उच्चायोग में ग्रेनेड फेंकने का मामला सामने आया था। अब इस केस में छानबीन के बाद मीडिया रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि वो ग्रेनेड फेंकने वाला कोई और नहीं बल्कि सांसद अमृतपाल सिंह का जीजा अमरजोत था।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार अमरजोत पर आरोप है कि उसने न केवल खालिस्तान के समर्थन में प्रदर्शन किया था बल्कि उच्चायोग के परिसर में खालिस्तान का झंडा भी लगाया था। अमरजोत, अमृतसर के गाँव बुताला का रहने वाला है।

ग्रेनेड फेंकने के मामले में उससे जुड़ी जानकारी उस समय प्रकाशित हुई है जब एनआईए ने शुक्रवार को पंजाब के चार जिलों में एक साथ छापेमारी की। ये छापेमारी शुक्रवार सुबह करीब पाँच बजे गुरदासपुर जिले में तीन स्थानों पर, अमृतसर जिले में दो, पटियाला और मोदा जिले में एक-एक घर में दबिश देकर जाँच की।

मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया कि ये सारे स्थान वो हैं जहाँ अमृतपाल के रिश्तेदार रहते हैं। बुतला में अमृतपाल सके जीजा अमरजोत, गुरदासपुर जिले के हाँव में उसके साले गुरमुख सिंह व अमृतसर के जल्लूखेड़ा में अमृतपाल सिंह के चाचा परगट सिंह आदि लोग रहते हैं। छापेमारी के दौरान घर में मौजूद लोगों से पूछताछ की गई और परिवार के मोबाइल फोन, लैपटॉप, डीवीआर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को कब्जे में ले लिया गया।

गौरतलब है कि पिछले साल खालिस्तान समर्थक भीड़ ने ओटावा में भारतीय उच्चायोग पर दो ग्रेनेड फेंकते हुए हमला किया था। इसके बाद जाँच एजेंसियों ने इस मामले में कुछ लोगों की शिनाख्त की। बाद में इस मामले में पाकिस्तान की संलिप्ता पर भी शंका हु और मामले की जाँच एनआईए ने अपने हाथ में ले ली।

24 जून 2023 को एक रिपोर्ट हिंदुस्तान टाइम्स में प्रकाशित हुई जिसमें एनआईए के हवाले से बताया गया कि अमरजोत सिंह ने खालिस्तान समर्थक भीड़ का नेतृत्व किया था। उसने ये तब किया था जब पंजाब पुलिस अमरजोत की खोज में जुटे थे।

इस रिपोर्ट के प्रकाशित होने के बाद ‘वारिस पंजाब दे’ से जुड़े इमान सिंह खारा ने इस मामले में सख्त कानूनी एक्शन लेने की बात कही थी। उन्होंने कहा था कि जो चीज हुई ही नहीं उसमें अमरजोत सिंह (अमृतपाल सिंह के जीजा) का नाम लगाया जा रहा है। इतना ही नहीं ओटावा में घटी घटना को तो लोगों ने काल्पनिक तक कहा था। हालाँकि अब एक बार फिर से नाम अमरजोत सिंह का नाम आया है।

‘आर्य समाज का विवाह सर्टिफिकेट मान्य नहीं’: हाईकोर्ट ने दिया संस्था के मंदिरों की जाँच का आदेश, प्रशासन से कहा – इनकी गतिविधियाँ खँगालें

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने गौतमबुद्धनगर और गाजियाबाद के साथ-साथ उत्तर प्रदेश के अन्य हिस्सों में विवाह प्रमाण पत्र प्रदान देने वाले आर्य समाज के मंदिरों, सोसायटियों, ट्रस्टों और संस्थाओं की जाँच का निर्देश दिया है। हाई कोर्ट ने इनके कामकाज और उसके तरीकों की गहन एवं विवेकपूर्ण जाँच करने के लिए कहा है।

दरअसल, न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर ने यह आदेश पारित किया है। कोर्ट को कई मामलों में पुलिस सत्यापन से पता चला कि बाल विवाह निरोधक अधिनियम और हिंदू विवाह अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए आर्य समाज के मंदिरों द्वारा विवाह किए जा रहे हैं और साथ में प्रमाण पत्र भी जारी किए जा रहे हैं।

ऐसे जोड़ों द्वारा दायर याचिकाओं के साथ दिए गए आधार कार्ड सहित अन्य दस्तावेज जाली पाए गए हैं। यहाँ तक ​​कि नोटरीकृत शपथ पत्र भी फर्जी पाए गए हैं। हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि विवाह पंजीकरण अधिकारी ने बिना सत्यापन के फर्जी और अमान्य विवाह प्रमाणपत्र के आधार पर विवाह पंजीकृत कर दिया।

कोर्ट ने कहा, “इस तरह की शादियाँ मानव तस्करी, यौन शोषण और जबरन श्रम को बढ़ावा देती हैं। बच्चे सामाजिक अस्थिरता, शोषण, जबरदस्ती और शिक्षा में व्यवधान के कारण भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक आघात सहते हैं। इसके अलावा ये मुद्दे अदालतों पर बोझ डालते हैं। इसलिए, दस्तावेज़ सत्यापन और ट्रस्टों/सोसायटी की जवाबदेही के लिए एक मजबूत प्रणाली विकसित करने की आवश्यकता है।”

विवाह प्रमाण-पत्र जारी करने वाली 15 ऐसी समितियों/ट्रस्टों/मंदिरों के नामों पर गौर करते हुए न्यायालय ने पाया कि पुलिस सत्यापन के बाद अधिकांश मामलों में यह पाया गया कि या तो समितियाँ धोखाधड़ी कर रही थीं या मुख्यालय से संबद्ध नहीं थीं या विवाह बाल विवाह निषेध अधिनियम और हिंदू विवाह अधिनियम 1955 की धारा 5 का उल्लंघन करके संपन्न किए गए थे।

यहाँ तक ​​कि पार्टियों द्वारा दिए गए विवरण और दस्तावेज भी जाली थे। इसको देखते हुए कोर्ट ने गौतमबुद्धनगर और गाजियाबाद के पुलिस आयुक्तों को हिंदू विवाह अधिनियम 1955 की धारा 5 और बाल विवाह निषेध अधिनियम 1929 के प्रावधानों का उल्लंघन करके विवाह संपन्न कराने में शामिल ट्रस्टों की गहन और विवेकपूर्ण जाँच करने का निर्देश दिया।

याचिकाकर्ताओं ने अपने जीवन की सुरक्षा के लिए इलाहाबाद उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने अपनी याचिका में दलील दी थी कि वे बालिग हैं और उन्होंने आर्य समाज मंदिर में विवाह किया था। मंदिर द्वारा दिए गए प्रमाण पत्र के आधार पर उन्होंने रजिस्ट्रार के समक्ष विवाह पंजीकरण के लिए आवेदन किया था।

अतिरिक्त मुख्य स्थायी अधिवक्ता ने न्यायालय में कहा कि यह विवाह प्रमाण-पत्र आर्य समाज मंदिर ग्रेटर नोएडा द्वारा जारी किया गया प्रतीत होता है। इसमें पुजारी का नाम-पता, मंदिर का पता, गवाहों का विवरण और यह घोषणा नहीं है। इसमें यह भी नहीं बताया गया है कि विवाह हिंदू विवाह अधिनियम के अनुसार किया गया है या नहीं। इसलिए प्रमाण-पत्र जाली हो सकता है।

जाली आर्य समाज प्रमाण पत्रों के साथ न्यायालय के समक्ष सुरक्षा की माँग को लेकर लगातार मामले दायर किए जा रहे हैं। इसको देखते हुए कोर्ट ने गाजियाबाद और गौतमबुद्धनगर के सहायक महानिरीक्षक पंजीकरण (स्टाम्प और पंजीकरण) को न्यायालय के समक्ष उपस्थित होने के लिए कहा है। इसके साथ ही 1 अगस्त 2023 से 1 अगस्त 2024 के बीच उनके अधिकार क्षेत्र में विवाह के सभी विवरणों को रिकॉर्ड में रखने के लिए भी कहा है।

इसके अलावा महानिरीक्षक स्टाम्प, उत्तर प्रदेश को उसी अवधि के लिए यूपी राज्य में पंजीकृत विवाहों की संख्या को जिलेवार दर्ज करने का निर्देश जारी किया है। हालांँकि, न्यायालय के समक्ष सुझाव रखे गए थे, लेकिन राजधानी लखनऊ के 5 मीराबाई मार्ग पर स्थित आर्य समाज प्रतिनिधि सभा की ओर से कोई भी व्यक्ति कोर्ट में उपस्थित नहीं हुआ।

इसको देखते हुए कोर्ट ने लखनऊ के पुलिस आयुक्त को निम्नलिखित पहलुओं की जाँच करने का निर्देश दिया है-

(i) आर्य समाज प्रतिनिधि सभा के कार्य और गतिविधियों की प्रकृति के बारे में;

(ii) विवाह संपन्न कराने के लिए समितियों को अधिकृत करने की योग्यता;

(iii) ऐसी समितियों की सूची, जो उत्तर प्रदेश राज्य में उनके प्राधिकरण और पर्यवेक्षण के तहत विवाह संपन्न करा रही हैं;

(iv) पूर्ण पता और टेलीफोन नंबर के साथ समिति के पदाधिकारियों की सूची

न्यायालय ने पाया कि आर्य समाज विवाह मान्यता अधिनियम 1937 और हिंदू विवाह अधिनियम 1955 का उल्लंघन करते हुए फर्जी प्रमाण पत्र जारी करने पर नियंत्रण जरूरी है।

मानसी मामले में कोर्ट का यह निर्देश

इलाहाबाद हाई कोर्ट का यह निर्देश में मानसी व अन्य सहित 42 याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए आया है। अगली सुनवाई में इन संस्थाओं द्वारा शादी करवाने के लिए ली जाने वाली फीस, विवाह कराने वाले पंजित/पुजारी का नाम-पता आदि की जानकारी कोर्ट के सामने प्रस्तुत करने के लिए कहा है। इन याचिकाओं में याचियों का कहना था कि परिवार वालों की मर्जी के खिलाफ जाकर शादी की गई है।

मानसी मामले में कहा गया है कि उसकी और उसके पति की जान को खतरा है। याचिकाकर्ता मानसी ने सिविल लाइन्स के नवाब यूसुफ रोड पर स्थित रजिस्टर्ड आर्य समाज संस्थान से शादी कर कोर्ट में विवाह का प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया था। इसी मामले को लेकर जज ने यह निर्देश दिया है। यह संस्थान आर्य प्रतिनिधि लखनऊ से संबद्ध होने का दावा करती है।

पहले भी इलाहाबाद हाई कोर्ट उठा चुका है सवाल

इससे पहले जून 2023 में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने प्रयागराज के कृष्णानगर स्थित आर्य समाज को निर्देश दिया था कि वह दो महीने की अवधि यानी 20 जून 2023 तक ऐसे विवाह न कराए, जहाँ प्रस्तावित दूल्हा और दुल्हन के परिवारों की सहमति न हो। आर्य समाज ने एक ऐसे व्यक्ति को विवाह प्रमाणपत्र जारी किया था, जिसके खिलाफ लड़की के परिवार ने मामला दर्ज कराया था।

उसमें आरोप लगाया गया था कि लड़के ने लड़की को बहला-फुसलाकर भगाया है और उससे जबरन शादी कर ली है। वहीं, आर्य समाज द्वारा जोड़े को जारी किए गए विवाह प्रमाणपत्र में यह नहीं बताया गया था कि लड़की की उम्र का सत्यापन कैसे किया गया। लड़की के परिवार का दावा था कि वह नाबालिग थी। हालाँकि, आरोपित ने दावा किया था कि लड़की वयस्क है।

इसके पहले जून 2022 में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने ऐसी जाँच का आदेश दिया था। उस समय जस्टिस अश्विनी मिश्रा और जस्टिस रजनीश कुमार की खंडपीठ ने प्रयागराज के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) को निर्देश दिया था कि वे प्रयागराज के कीडगंज स्थित आर्य समाज के प्रधान संतोष कुमार शास्त्री के माध्यम से विवाह प्रमाण पत्र जारी करने के तरीके और कार्यप्रणाली की जाँच करें।

पीठ ने यह भी कहा था कि इस बात की जाँच की जानी चाहिए क्या शादी संपन्न कराए जा रहे हैं या सिर्फ विवाह प्रमाण पत्र जारी किए जा रहे हैं। संतोष कुमार शास्त्री को पिछले पाँच वर्षों में उनके द्वारा किए गए सभी विवाहों के रजिस्टर पेश करने का भी निर्देश दिया गया था, खासकर अगस्त 2016 में उनके खिलाफ विशिष्ट प्रतिबंध आदेश पारित होने के बाद से।

तब पीठ ने कहा था, “बाहरी कारणों से काम कर रहे एक संगठित रैकेट की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है, जिसमें दूसरों की भागीदारी/सहायता संभव है।” दरअसल, इस मामले में याचिकाकर्ता ने अदालत के समक्ष दावा किया था कि उसने निजी प्रतिवादी के साथ विवाह किया है और इसलिए उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज करना अनुचित है।

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने भी उठाया था मामला

इसी तरह का एक मामला साल 2022 में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में आया था। केस एक मध्य प्रदेश की मुस्लिम लड़की के अपहरण का था, जिसका आरोप एक हिन्दू लड़के पर था। लड़की को पुलिस ने बरामद कर लिया था, जिसने अपने अम्मी-अब्बू के साथ जाने से मना कर दिया था। लड़की लगातार उस लड़के के साथ जाने की जिद पर अड़ी थी, जिस पर उसके अपहरण का आरोप था।

लड़की ने बाद में गाजियाबाद के आर्य समाज मंदिर में धर्म परिवर्तन कर लिया। लड़की के परिजनों ने अवैध धर्मांतरण बताकर लड़की को लड़के के घर जाने से रोकने की माँग की थी। इस बहस में जस्टिस रोहित आर्य को एक बार कहते सुना गया कि ‘बिलकुल सही बात है।’ दो जजों में एक जज कह रहा था, “ये तमाशा हम स्वीकार नहीं करेंगे। ये अभी जेल जाएगा। तुम काजी के पास जाओ और मुस्लिम बन जाओ। वही ज्यादा अच्छा है। फ्रॉड कर के उसका धर्मांतरण कर दिया, ये कोई तरीका है? किसी मुस्लिम को हिन्दू बना रहे हो, मज़ाक बात है?”

इसी बहस के बीच में 5:30वें मिनट पर जस्टिस रोहित आर्य ने SSP को कुल पुलिस फ़ोर्स उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मामले में कुछ फ्रॉड की आशंका दिखाई दे रही है। इसी क्रम में उन्होंने लड़की को हिन्दू बनाने वाले गाजियाबाद के आर्य समाज मंदिर को मात्र एक ट्रस्ट डीड बना कर रखने वाला बताया। जज ने आर्य समाज मंदिर के वकील से पहले मंदिर की प्रमाणिकता साबित करने को कहा।

आर्य समाज मंदिर में शादी के प्रावधान

दयानंद सरस्वती द्वारा स्थापित आर्य समाज में शादियँ हिंदू रीति-रिवाज से ही होती हैं और अग्नि के सात फेरे दिलवाए जाते हैं। इसके बाद एक मैरिज सर्टिफिकेट जारी किया जाता है। आर्य समाज से होने वाली शादियों को आर्य समाज मैरिज वैलिडेशन 1937 और हिंदू मैरिज एक्ट 1955 के तहत मान्यता देने की बात होती है।

इसमें दूल्हे की उम्र 21 साल से अधिक और दुल्हन की उम्र 18 साल से अधिक होनी चाहिए। इसमें दो अलग-अलग धर्मों को मानने वाले लोग भी शादी कर सकते हैं। यहाँ शादी करने वाले जोड़े को पहले रजिस्ट्रेशन कराना होता है। दोनों पक्षों को हलफनामा देना होता है। इसके बाद दोनों के दस्तावेजों को देखने के बाद उनकी शादी आर्य समाज मंदिर में कराई जाती है।

अगर लड़का-लड़की एक ही धर्म का है तो शादी हिंदू एक्ट के तहत मानी जाती है। अगर जोड़ा अलग-अलग धर्म का होता है तो आर्य समाज मैरिज वैलिडेशन एक्ट के तहत उसे मान्यता दी जाती है। हालाँकि, कानूनी तौर पर शादी को तभी वैध माना जाता है जब शादी को एसडीएम कोर्ट में रजिस्ट्रेशन कराया जाता है।  

‘2 दिन बाद दूँगा इस्तीफा, मुख्यमंत्री की कुर्सी पर नहीं बैठूँगा’: केजरीवाल की घोषणा, सोशल मीडिया पर लोग सुनीता केजरीवाल को बना रहे CM

बेल मिलने के बाद जेल से बाहर आए दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के मुखिया ने इस्तीफा देने की घोषणा की है। भारतीय जनता पार्टी पर हमला करते हुए उन्होंने राजनीतिक चाल चली। मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा पर बोलते हुए केजरीवाल ने कहा – 

“अगर देश की जनता को लगता है कि मैं बेईमान हूँ, तो मैं कुर्सी छोड़ दूँगा। अगर जनता को लगता है कि मैं ईमानदार हूँ, तो मुझे वोट देना। आप जब जिता दोगे तभी मैं मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठूँगा।”

सीएम अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली स्थित पार्टी कार्यालय में कार्यकर्ताओं के साथ संवाद करते हुए अपने इस्तीफे की बात रखी। उन्होंने कहा कि वो 2 दिन बाद सीएम की कुर्सी से इस्तीफा देंगे।

केजरीवाल की घोषणा के बाद सोशल मीडिया पर लोग तरह-तरह के कयास लगा रहे हैं। इन कयासों में सबसे ज्यादा सुनीता केजरीवाल को दिल्ली का मुख्यमंत्री बनाए जाने की संभावना बताई जा रही है।