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दानिश ने ‘देव’ बन दलित लड़की को फाँसा, मंगलसूत्र पहना कर डेढ़ साल बनाए संबंध फिर कराया गर्भपात: यूपी पुलिस ने दबोचा

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले से लव जिहाद का मामला सामने आया है। यहाँ दानिश ने खुद को देव बताते हुए दलित समुदाय की हिन्दू लड़की को प्यार के जाल में फँसाया। बाद में आरोपित ने पीड़िता से शादी का ढोंग कर के डेढ़ साल तक रेप किया। गर्भवती होने पर पीड़िता का गर्भपात भी करवाया गया। इस मामले में पुलिस ने आरोपित दानिश को गाजियाबाद से गिरफ्तार कर लिया है।

जानकारी के मुताबिक, अनुसूचित जाति की एक पीड़िता ने हापुड़ के धौलाना थाने में गुरुवार (12 सितंबर 2024) को तहरीर दी। पीड़िता ने अपनी शिकायत में बताया कि वह गाजियाबाद की एक मार्केटिंग कम्पनी में जॉब करती थी। लगभग डेढ़ साल पहले यहीं पर उसकी मुलाकात दानिश से हुई थी। तब दानिश ने खुद को देव बताया था। कुछ ही दिनों में दानिश ने पीड़िता को चिकनी-चुपड़ी बातों में फँसा लिया। इसके बाद दोनों का मिलना-मिलाना भी शुरू हो गया।

जाटव समुदाय की पीड़िता ने आगे बताया कि 7 अप्रैल 2023 को दानिश उसे ले कर मोहननगर इलाके के ही एक होटल में गया। यहाँ उसने शादी का ढोंग करते हुए पीड़िता को मंगलसूत्र पहनाया। इसके बाद दानिश ने पीड़िता से रेप किया। लगभग 6 महीने तक शारीरिक संबंध बनाने के बाद दानिश ने पीड़िता को झाँसे में रखने के लिए एक दिखावे की शादी गाजियाबाद में कर डाली। दानिश ने अपनी पहचान छिपाने की बहुत साजिशें रचीं। वह अक्सर मंदिर जाया करता था जहाँ वो पूजापाठ भी करता था।

कथित शादी के बाद देव बने दानिश ने पीड़िता को गाजियाबाद के डासना में कमरा दिला कर रखा। कुछ ही दिनों में पीड़िता गर्भवती हो गई। 22 जून 2024 को दानिश ने पीड़िता को दवा खिलाकर उसका गर्भपात करा दिया। उसी समय दानिश ने पीड़ित से अपनी असलियत भी बताई कि वो देव नहीं बल्कि मुस्लिम है और उसका नाम दानिश है। पीड़िता ने अपनी पड़ताल कर के दानिश का असली पता खोजा। वह 1 जुलाई 2024 को उसके घर पहुँच गई। यहाँ दानिश के परिजनों ने पीड़िता को बुरी तरह से पीट कर घर से बाहर कर दिया।

शिकायत में पीड़िता ने अपनी पीड़ा जाहिर करते हुए यह भी बताया कि डेढ़ साल तक दानिश के चंगुल में फँसने की वजह से उसका जीवन अंधकारमय हो चुका है। अब पीड़िता जैसे-तैसे अपना गुजर-बसर कर रही है। पीड़िता ने दानिश और उसके परिजनों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है। हापुड़ पुलिस ने यह FIR भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 115 (2), 123, 318 (4) और 64 के साथ SC/ST एक्ट में दर्ज किया।

इसके बाद इस जीरो FIR को घटनाक्षेत्र होने की वजह से गाजियाबाद के साहिबाबाद थाने में ट्रांसफर कर दिया गया। ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है। गुरुवार (12 सितंबर) को केस दर्ज कर के साहिबाबाद पुलिस ने फरार चल रहे दानिश की तलाश शुरू कर दी। 16 सितंबर (सोमवार) को पुलिस ने दानिश को गाजियाबाद से गिरफ्तार कर लिया। शुरुआती सबूतों ने पीड़िता के द्वारा लगाए गए आरोपों की पुष्टि हुई है। ACP रजनीश कुमार उपाध्याय के मुताबिक मामले में जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

चाकू, मोबाइल, कैश, स्टोव, सिगरेट-बीड़ी… छापेमारी के बाद दूसरी जेल में शिफ्ट हुआ कन्नड़ अभिनेता दर्शन: मिल रही थी VIP सुविधाएँ, फैन को तड़पा-तड़पा कर मार डाला था

रेणुकास्वामी हत्याकांड में जेल में बंद फिल्म अभिनेता दर्शन को कर्नाटक की जेल में VVIP ट्रीटमेंट दिए जाने का मामला सामने आया है। एक फोटो में दर्शन बेंगलुरु सेन्ट्रल जेल में कुर्सियाँ लगा कर साथियों सहित ऐशो-आराम की मुद्रा में नजर आया है। फोटो वायरल होने के बाद शनिवार (14 सितंबर, 2024) को पुलिस और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों ने जेल में छापा मारा। छापे में मोबाइल फोन, चाकू और आमलेट स्टोव जैसी वस्तुएँ बरामद हुईं हैं। दर्शन और उनके साथियों को अलग-अलग जेलों में शिफ्ट किया जा रहा है।

TOI के मुताबिक, शुक्रवार (13 सितंबर, 2024) को बेंगलुरु सेंट्रल जेल में बंद अभिनेता दर्शन की एक फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी। इस फोटो में दर्शन जेल कैम्पस में मजमा लगाए हुए हैं। वह प्लास्टिक की कुर्सियों पर सामने टेबल रख कर अपने कुछ साथियों सहित बैठा दिखा। इनके हाथों में चाय के कप है। साथ ही चारों लोग किसी बात पर ठहाके भी लगा रहे हैं। दर्शन के साथ मौजूद अन्य लोगों में 2 के नाम नागराज और श्रीनिवास हैं। ये दोनों भी रेणुकास्वामी हत्याकांड में नामजद हैं।

इस फोटो के वायरल होते ही कर्नाटक में जेलों की अंदर कैदियों को VVIP ट्रीटमेंट देने के आरोप लगने लगे। वायरल तस्वीर पुलिस के भी पास पहुँची जिसका संज्ञान लिया गया। जेल पर छापेमारी के लिए बेंगलुरु दक्षिण डिवीजन पुलिस अधिकारियों की एक टीम बनाई गई। 40 सदस्यों की एक टीम को एक महिला IPS अधिकारी ने लीड किया। शाम लगभग 4:30 पर यह टीम सीधे नागराज की बैरक में पहुँची और तलाशी लेना शुरू किया। इसके बाद कई अन्य बैरकों को भी खँगाला गया।

कुल मिला कर जेल से 15 मोबाइल फोन, चाकू, आमलेट बनाने का स्टोव, मोबाइल चार्जिंग के लिए पॉवर बोर्ड, इलेक्ट्रिटक स्टोव, 36 हजार रुपए कैश, सिगरेट और बीड़ी के पैकेट के साथ माचिस भी बरामद हुआ। इसमें सैमसंग कम्पनी के एक मोबाइल फोन की कीमत 1 लाख 30 हजार के आसपास बताई जा रही है। बरामदगी के बाद जेल के 12 स्टाफ को सस्पेंड कर दिया गया है। इन सभी के खिलाफ जाँच शुरू कर दी गई है। दर्शन और उसके साथियों को अलग-अलग जेलों में शिफ्ट करने की तैयारी चल रही है।

दर्शन को बेल्लारी जेल में शिफ्ट कर दिया गया है। इस कार्रवाई के बाद एक अन्य FIR दर्ज की गई है। यह FIR भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 323 के साथ कर्नाटक जेल अधिनियम (संशोधित) के तहत दर्ज की गई है। पुलिस अधिकारी ने मीडिया को बताया कि न सिर्फ कैदियों बल्कि उनको सुविधाएँ पहुँचाने वाले जेलकर्मियों पर भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इस पूरे मामले की जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई की जा रही है। बताते चलें कि इसी केस में दर्शन की प्रेमिका पवित्रा गौड़ा भी जेल में बंद हैं। उन पर भी अपने प्रेमी सहित रेणुकास्वामी की हत्या में सक्रिय भूमिका निभाने का आरोप है।

शेख हसीना को हटाने की 2019 से ही चल रही थी USAID की साजिश, बांग्लादेश तख्तापलट में लगी थी कई अमेरिकी एजेंसियाँ: रिपोर्ट में दस्तावेजों का हवाला, डोनाल्ड लू भी था शामिल

बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना को सत्ता से हटाने की योजना 2019 में ही बन गई थी। अमेरिका की अलग-अलग एजेंसियाँ इस काम में लगाई गईं थी। बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन लाने के लिए लाखों डॉलर भी बहाए गए। हसीना की सत्ता पलटने के लिए अमेरिका ने अलग-अलग एजेंसियों का प्रयोग किया।

यह सारे खुलासे अखबार द सन्डे गार्जियन (The Sunday Guardian) को मिले अमेरिकी कागजों से हुआ है। सन्डे गार्जियन की रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि इस पूरी योजना का हिस्सा वह अमेरिकी राजनयिक डोनाल्ड लू भी था, जो सत्ता परिवर्तन का मास्टर माना जाता है।

अमेरिका की एजेंसियों का हुआ इस्तेमाल

बांग्लादेश में सत्ता बलदने के लिए अमेरिकी एजेंसियों का इस्तेमाल हुआ। यह एजेंसियाँ सरकार से पैसा लेती है। बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन का प्रमुख काम करने वाली एक ऐसी ही एजंसी इंटरनेशनल रिपब्लिकन इंस्टिट्यूट (IRI) है। IRI अमेरिका की USAID और NED नाम की एजेंसियों के लिए काम कर रही थी और उनका उद्देश्य पूरा कर रही थी। रिपोर्ट में बताया गया है कि इन दोनों एजेंसियों से पैसा लेकर ही IRI ने बांग्लादेश में अपना काम चालू किया।

IRI ने इसके लिए एक कार्यक्रम चलाया और यह जनवरी 2021 तक चला । IRI ने कहा इस कायर्क्रम का उद्देश्य बांग्लादेश के भीतर उन लोगों को आवाज देना है, जो हसीना की दमनकारी सत्ता के विरुद्ध खड़े हो सकें। IRI ने अपने इस कार्यक्रम में LGBT, बिहारी और बाकी समुदायों के लोगों के समूहों को समर्थन दिया। इसके तहत 77 ‘एक्टिविस्ट’ को ट्रेनिंग भी दी गई। इन लोगों को बड़ी धनराशि भी दी गई। इसका अर्थ यह लगाया जा सकता है कि अमेरिका उन लोगों को अपने पक्ष में बोलने के लिए तैयार कर रहा था जो हसीना का विरोध कर सकें।

IRI ने 2021 में एक और प्रोग्राम चलाया था। इसके लिए उसे अमेरिकी एजेंसी NED से 9 लाख डॉलर की मदद मिली थी। इस कार्यक्रम के तहत IRI ने उन नेताओं को तैयार करने का लक्ष्य रखा था जो आगे जाकर बड़ी आवाज बन सकें। इसके तहत IRI ने बांग्लादेश की कई पार्टियों के लोगों को सहायता करती जिससे वह बड़े पदों पर पहुँच सके। IRI ने अपना एजेंडा बढ़ाने के लिए कई ऐसे लोगों को उन कार्यक्रमों में शामिल करवाया जहाँ अमेरिकी राजनयिक और अधिकारी आते थे।

सत्ता बदलने को सभी को आजमाया

IRI ने बांग्लादेश में शेख हसीना की सत्ता गिराने के लिए अलग-अलग संस्थानों का विकल्प सोचा था। एक रिपोर्ट में IRI ने जिक्र किया कि बांग्लादेश की सेना और यहाँ के कारोबारी शेख हसीना की सत्ता पलट सकते हैं। हालाँकि, IRI ने पाया कि अधिकांश बड़े कारोबारी शेख हसीना की आवामी लीग का समर्थन करते हैं और सेना के बड़े अधिकारी भी सरकार के प्रति कोई ख़ास गुस्सा नहीं है। अपनी रिपोर्ट में IRI ने कहा कि सैन्य अधिकारियो को बड़े पद दिए गए हैं, जिससे वह प्रसन्न हैं। IRI ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि इसी तरह से आवामी लीग सत्ता पर जमी हुई है।

बांग्लादेश की प्रमुख विपक्षी पार्टी BNP का पैंतरा भी IRI आजमाना चाहती थी लेकिन उसे यह लम्बी रेस का घोड़ा नहीं लगी। IRI ने पाया कि BNP पर हुई कार्रवाइयों ने उसकी छवि खराब कर दी है। बांग्लादेश के आम लोग उसे पसंद नहीं करते। इसके अलावा IRI ने यह भी कहा कि BNP में दो गुट चल रहे हैं जिनमे से एक ढाका जबकि दूसरा लंदन से चलता है। ऐसे में IRI ने सत्ता परिवर्तन के लिए BNP को फिट नहीं समझा। शेख हसीना के तख्तापलट के बाद मोहम्मद युनुस को इसीलिए लाया गया क्योंकि BNP मुखिया खालिदा जिया की अब भी स्वीकार्यता नहीं है।

लाशों पर सत्तापलट की थी चाहत

IRI चाहती थी कि बांग्लादेश में कोविड महामारी में बड़ा नुकसान हो जिसका फायदा उठा कर शेख हसीना का तख्तापलट किया जाए। IRI ने अपनी एक रिपोर्ट में लिखा, “कोरोनावायरस महामारी के स्वास्थ्य और आर्थिक परिणामों से बांग्लादेश की राजनीति अस्थिर होने की संभावना थी। हालाँकि, बांग्लादेश में मृत्यु दर कम रही और खतरनाक अनुमानों के बावजूद अर्थव्यवस्था में सुधार हुआ।” इस तरह IRI के हाथ से यह एक मौका भी चला गया।

भारत से भी IRI को समस्या

अमेरिकी एजेंसी IRI को मात्र बांग्लादेश की शेख हसीना सरकार या उनकी पार्टी आवामी लीग से ही नहीं बल्कि भारत से भी समस्या है। IRI ने अपनी एक रिपोर्ट में लिखा, “बांग्लादेश में राजनीति में दो दलों का वर्चस्व है: अवामी लीग (AL) और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP)। पिछले दस सालो से, भारत के समर्थन के कारण आवामी लीग लगातार आधिपत्यवादी: राजनीतिक मुकाबले पर हावी होने वाली और भ्रष्ट हो गई है।” IRI ने यह भी कहा कि बांग्लादेश में भारत का प्रभाव कम करने की जरूरत है।

एक अन्य रिपोर्ट में IRI ने कहा, ” इस बात की पूरी संभावना है कि आवामी लीग और शेख हसीना भारत के समर्थन के तहत किसी भी तरह से फिर से चुनाव जीतने की कोशिश करेंगे। बांग्लादेश के भीतर इस इलाके की शक्तियों (भारत और चीन) के हस्तक्षेप को संतुलित करना आवश्यक है।” IRI ने यह भी बताया कि उसने BNP हो या अवाम्मी लीग, दोनों में बड़े स्तर पर घुसपैठ कर ली थी। इसके लिए उनसे पाँच अमेरिकी राजनयिकों का सहारा लिया था। इनमे से एक USAID में तैनात था। इस पूरे ऑपरेशन को डोनाल्ड लू समेत बाकी अधिकारी देख रहे थे।

हसीना ने जताया था खतरा

IRI की गतिविधियाँ जहाँ एक तरफ चल रही थीं, वहीं दूसरी तरफ शेख हसीना लगातार इस खतरे को समझ रहीं थी। अप्रैल, 2023 में बांग्लादेश की संसद में हसीना ने इसी खतरे को लेकर देश को आगाह किया था। उन्होंने कहा था कि अमेरिका विश्व के किसी भी देश में सरकार पलट सकता है। इससे पहले अमेरिका ने लगातार शेख हसीना की सरकार पर दबाव बनाना चालू कर दिया था। हसीना सरकार के अधिकारियों पर अमेरिका ने प्रतिबन्ध भी लगाए थे।

गौरतलब है कि बांग्लादेश में 5 अगस्त, 2024 को शेख हसीना की सत्ता गिर गई थी। शेख हसीना को देश छोड़ कर भारत आना पड़ा था। शेख हसीना की सत्ता आरक्षण विरोधी प्रदर्शन के बाद गई थी। इस प्रदर्शन में जमात ए इस्लामी और इस्लामी कट्टरपंथी संगठन शामिल हो गए थे और भारी हिंसा की थी।

ईद मिलाद के जुलूस में कोटा से लेकर छपरा तक राष्ट्रीय ध्वज का अपमान, तिरंगे में अशोक चक्र की जगह लगा दिए चाँद-तारे: वीडियो वायरल

बिहार के सारण जिले के कोपा बाजार में एक जुलूस के दौरान राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे के अपमान का मामला सामने आया है। मोहम्मद साहब के जन्मदिन मिलाद-उल-नबी के जुलूस के दौरान तिरंगे में अशोक चक्र के स्थान पर चाँद-तारा लगाया गया, जिसके बाद इस घटना का वीडियो वायरल हो गया। वीडियो वायरल होते ही हंगामा मच गया, और मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की। ऐसी ही एक घटना राजस्थान के कोटा से भी सामने आई है, जिसमें पुलिस ने झंडे को बरामद कर कार्रवाई शुरू कर दी है।

बिहार की घटना को लेकर सारण पुलिस अधीक्षक (एसपी) कुमार आशीष ने बयान जारी करते हुए बताया कि भारतीय ध्वज संहिता 2002 सहित कई अधिनियमों के उल्लंघन को देखते हुए पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है। एसपी आशीष ने बताया कि पुलिस ने विवादित झंडे को जब्त कर लिया है और इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस दोनों व्यक्तियों से पूछताछ कर रही है कि उन्होंने किसके प्रभाव में आकर यह कदम उठाया।

वीडियो का सत्यापन और पुलिस की कार्रवाई

एसपी कुमार आशीष ने जानकारी दी कि वीडियो का सत्यापन करने के बाद पता चला कि यह घटना कोपा थाना क्षेत्र के कोपा बाजार की है, जहाँ मिलाद-उल-नबी के जुलूस के दौरान यह विवादित झंडा इस्तेमाल किया गया था। पुलिस ने मौके पर पहुँचकर तुरंत कार्रवाई की और विवादित झंडे को जब्त कर लिया। फिलहाल पुलिस पूरे जिले में कड़ी निगरानी बनाए हुए है और अन्य संवेदनशील स्थानों पर पुलिस बल तैनात किया गया है ताकि शांति व्यवस्था बनी रहे।

कोटा में भी तिरंगे का अपमान, पुलिस ने बताया नाबालिग, पूछताछ जारी

बिहार के छपरा की तरह ही राजस्थान के कोटा में भी मामला सामने आया, जहाँ तिरंगे के साथ छेड़छाड़ कर उस पर चाँद-तारा बना दिया गया। इस झंडे को भी जुलूस में लहराया गया। इस मामले का खुलासा होने के तुरंत बाद पुलिस सक्रिय हो गई।

हालाँकि कोटा पुलिस ने कहा है, “आज ईद मिलादुनबी के जुलुस के दौरान अनन्तपरा क्षेत्र में राष्टीय ध्वज के साथ आपत्तिजनक चिन्ह बनाकर लहराने का वीडिओ सोशल मीडिया पर वायरल होने पर पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की और राष्ट्रीय ध्वज को बरामद किया। साथ ही तिरंगा फहराने वाले बच्चों की पहचान कर कानूनी कार्रवाई की जा रही है।”

छपरा और कोटा की इन घटनाओं के बीच देश में साम्प्रदायिक तनाव की स्थिति भी बनी हुई है। हाल ही में बांग्लादेश में हिंदुओं के साथ हो रही प्रताड़ना, वक्फ संशोधन बिल के खिलाफ मुस्लिम समुदाय की गोलबंदी, और देश के विभिन्न हिस्सों में गणेश पूजा जुलूसों पर हो रहे हमलों के कारण माहौल तनावपूर्ण है। ऐसे में तिरंगे के अपमान की यह घटना और भी तनाव पैदा कर सकती है। भागलपुर में भी हाल ही में एक मुस्लिम युवक ने अयोध्या के राम मंदिर को उड़ाने की धमकी दी थी, जिसे यूपी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।

कोटा और छपरा की घटनाएँ न सिर्फ राष्ट्रीय झंडे तिरंगा का अपमान है बल्कि देश के मौजूदा साम्प्रदायिक माहौल को और भड़काने का प्रयास भी माना जा रहा है।

RG Kar अस्पताल में महिला डॉक्टर की रेप-हत्या मामले में FIR नहीं चाहते थे संदीप घोष, सबूत मिटाने में जुटा था SHO: CBI जाँच से हुए खुलासे

कोलकाता रेप और हत्या मामले में आरजी कर मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष और ताला थाना के पूर्व प्रभारी अभिजीत मंडल की गिरफ्तारी के बाद नए खुलासे हो रहे हैं। रिमांड पत्र से जानकारी सामने आई है कि डॉक्टर के साथ हुए घिनौने कृत्य के खिलाफ संदीप घोष अस्पताल के प्रिंसिपल होते हुए मामले में प्राथमिकी नहीं दर्ज करवाना चाहते थे। वहीं अभिजीत मंडल ने थाना प्रभारी होते हुए इस मामले में सबूतों को दबाने का खूब प्रयास किया था और आरोपित को बचाने की कोशिश की थी।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अस्पताल के प्रिंसिपल संदीप घोष को महिला डॉक्टर की रेप-हत्या की जानकारी सुबह 9:58 मिनट पर हो गई थी लेकिन उन्होंने सारी सूचना होने के बावजूद मामले में शिकायत नहीं दी। उन्होंने वकील से बात करके इस मामले को दबाने का प्रयास किया। हालाँकि बाद में वाइस प्रिंसिंपल ने केस दर्ज कराया। छानबीन में ये भी सामने कि संदीप घोष और मंडल घटना के बाद सुबह 10:03 से संपर्क में थे, मगर दोनों ने कोई एक्शन नहीं लिया।

बताया जा रहा है कि ताला पुलिस थाने और आरजी कर अस्पताल के बीच 10 मिनट की दूरी है, फिर भी मंडल ने अस्पताल पहुँचने में देर की। ये भी पता चला है कि मंडल इस केस के मुख्य आरोपित संजय रॉय को बचाने की पूरी कोशिश की थी। उसने जानबूझकर एफआईआर दर्ज कराने में देर की थी। इसके अलावा उसने प्रमाणों को सील करते समय कोई वीडियोग्राफी भी नहीं कराई। उसने जल्दी-जल्दी में डॉक्टर के शव का अंतिम संस्कार कराया। इसके अलावा संजय रॉय के कपड़े बरामद करने में भी दो दिन का समय लिया। जाँच एजेंसियों का मानना है कि ये सब सिर्फ और सिर्फ इसलिए किया गया ताकि मामले से रेप-मर्डर के एंगल को हटाया जा सके।

गौरतलब है कि अब तक इस मामले में तीन लोग गिरफ्तार हो चुके हैं- संजय रॉय, संदीप घोष और अभिजीत मंडल। वहीं डॉक्टर प्रदर्शनकारी अब भी अपनी साथी को न्याय दिलाने के लिए सड़कों पर हैं। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी उनसे बात करना चाहती हैं ताकि मामले को सुलझा सकें लेकिन डॉक्टर मिलने को तैयार नहीं हो रहे। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने उन्हें अपने आवास पर बुलाकर बातचीत करने को कहा है। इससे पहले वो खुद प्रदर्शनकारियों के बीच गई थीं। उन्होंने डॉक्टरों से कहा था कि अगर सब अपने काम पर लौट जाएँगे तो वो किसी पर कोई कार्रवाई नहीं करेंगी।

‘अडानी समूह ने कबूली सरकार में शामिल लोगों को घूस देने की बात’: सुप्रीम कोर्ट के वकील संजय हेगड़े ने शेयर किया फर्जी पत्र, बोले – सिर्फ ज़ुबैर की बात मानूँगा

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता संजय हेगड़े ने अडानी समूह पर निशाना साधने के लिए फर्जी खबरों का सहारा लिया है। उन्होंने दावा किया है कि गौतम अडानी ने सरकार के कई अधिकारियों और हितधारकों को घूस दिया है, ताकि उनकी कंपनी को सरकारी परियोजनाओं का ठेका मिल सके। उनके अनुसार, अडानी समूह ने खुद भी इसे स्वीकार किया है। इतना ही नहीं, संजय हेगड़े ने सोमवार (16 सितंबर, 2024) एक एक फेक लेटर भी शेयर कर के अपनी बात को सही साबित करनी चाही।

वकील संजय हेगड़े ने अडानी को बदनाम करने के लिए फैलाई फेक न्यूज़

इस फर्जी पत्र में 10 सितंबर, 2024 की तारीख़ अंकित है। इस पत्र में लिखा हुआ है कि कंपनी उन सभी सरकारी अधिकारियों और हितधारकों के नाम सार्वजनिक करेगी, जिन्हें फायदा पहुँचाया गया है। उन्होंने इसे शेयर करते हुए लिखा, “अडानी कंपनी के किस मूर्ख कर्मचारी ने इस प्रेस रिलीज को ड्राफ्ट किया है? क्या तुम्हें पता है कि तुमने घूस देने की बात स्वीकार की है? आगे ये आपराधिक मुकदमों में आपका पीछा करेगा।” उन्होंने एक ब्रिटिश सीरियल के डायलॉग का जिक्र करते हुए कहा कि कभी खुद को दोषी नहीं बताना चाहिए।

इस फर्जी पत्र का शीर्षक था – “अडानी ने आधारहीन आरोपों और धमकियों को नकार दिया है”। जब हमने पता लगाया तो पाया कि अडानी समूह की तरफ से ऐसा कोई भी पत्र जारी नहीं किया गया है। यूजर्स ने भी तुलना करने पर पाया कि हस्ताक्षर, पता और लोगो तक में कई असमानताएँ थीं। हालाँकि, सोशल मीडिया पर बेइज़्ज़ती होने के बाद संजय हेगड़े ने इस पोस्ट को डिलीट कर लिया है। 1 दिन पहले ही अडानी पॉवर और एक अफ्रीकन डेवलपमेंट बैंक यूनिट को ‘पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप’ (PPP) की तर्ज़ पर केन्या में पॉवर ट्रांसमिशन को लेकर 1.30 बिलियन डॉलर की रियायत दी गई है।

संजय हेगड़े ने फर्जी पत्र शेयर कर के डिलीट कर लिया

बड़ी बात तो ये कि जब संजय हेगड़े के पोस्ट का फैक्ट-चेक हो गया, तब वो कहने लगे कि जब तक ALTNews और मोहम्मद ज़ुबैर नहीं कहेंगे, तब तक वो नहीं मानेंगे कि क्या झूठ है और क्या सच। बता दें कि हिंडेनबर्ग रिसर्च ने दावा किया है कि अडानी समूह की करोड़ों डॉलर की रकम सिंगापुर में सरकार ने जब्त की है। अडानी पर दोबारा फर्जी रिपोर्ट का असर न होने के बाद अमेरिकी संस्था ने ये झूठ फैलाया। हालाँकि, अब उसकी बातों का कोई असर नहीं हो रहा है।

अडानी समूह ने भी फर्जी पत्र को लेकर जारी किया बयान

अडानी समूह ने भी इस फर्जी पत्र को लेकर बयान जारी किया है। कंपनी ने कहा है कि कुछ निहित स्वार्थी तत्व दुर्भावनापूर्ण इरादों के साथ कई फर्जी प्रेस विज्ञप्तियाँ फैला रहे हैं, जिनमें से एक का शीर्षक ‘अडानी समूह ने निराधार आरोपों और धमकियों की निंदा की’ है, जो कि केन्या में कंपनी की उपस्थिति से संबंधित है। कंपनी का कहना है कि न तो अडानी समूह और न ही उसकी कोई भी कंपनियों या सहायक कंपनियों ने केन्या से संबंधित कोई प्रेस विज्ञप्ति जारी की हैं।

अडानी समूह ने कहा, “हम इस धोखाधड़ी वाली करतूत की कड़ी निंदा करते हैं और सभी से इन फर्जी और भ्रामक विज्ञप्तियों को पूरी तरह से नजरअंदाज करने का आग्रह करते हैं। हम झूठा बयान फैलाने में शामिल लोगों खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेंगे। हमारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्तियाँ हमारी वेबसाइटों पर उपलब्ध हैं। हम मीडिया और प्रभावशाली व्यक्तियों से आग्रह करते हैं कि वे अडानी समूह से संबंधित किसी भी समाचार या लेख को प्रकाशित या प्रसारित करने से पहले तथ्यों और स्रोतों की जाँच करें।”

शरिया की पढ़ाई, आपत्तिजनक सिलेबस, कट्टरपंथियों से वास्ता, NCPCR ने सुप्रीम कोर्ट को बताया मदरसा तालीम का हाल: कहा- संविधान का उठा रहे हैं गलत फायदा

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने सुप्रीम कोर्ट के सामने मदरसा तालीम पर चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। आयोग ने सुप्रीम कोर्ट मदरसा तालीम को लेकर चिंताजनक तथ्य बताए हैं। आयोग ने कहा कि मदरसे भारत के संविधान द्वारा निर्धारित बच्चों के शिक्षा के अधिकार का उल्लंघन कर रहे हैं। NCPCR के अनुसार, “मदरसा तालीम भारत में बच्चों के शिक्षा के अधिकार में अड़ंगा डाल रही है। शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम या संविधान के अनुच्छेद 21A के तहत इसका कोई संवैधानिक आधार नहीं है।”

दारुल उलूम देवबंद का प्रभाव: चरमपंथ का रास्ता?

NCPCR ने अपनी रिपोर्ट में मदरसों पर दारुल उलूम देवबंद के गहरे प्रभाव की बात कही है। NCPCR ने बताया है कि दारूल उलूम देवबंद को ‘शरिया की सख्त और रूढ़िवादी व्याख्या करने वाली विचारधारा’ बताया है। NCPCR ने आगे कहा कि तालिबान जैसे इस्लामी कट्टरपंथी समूह दारूल उलूम देवबंद की धार्मिक और राजनीतिक विचारधारा से प्रेरित रहे हैं। तालिबान पर इनका प्रभाव उनके मदरसों से जुड़ाव के चलते है क्योंकि मदरसों में दारूल उलूम देवबंद का काफी असर है। NCPCR ने छात्रों पर इस कारण इस्लामी कट्टरपंथ की तरफ जाने का खतरा जताया है।

बच्चों को नहीं मिल रही औपचारिक शिक्षा, अधिकारों से भी हो रहे वंचित

NCPCR ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि मदरसा में पढ़ने वाले बच्चे शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE), 2009 के तहत मिलने वाले अधिकारों से भी वंचित हैं। मदरसे में पढ़ने वाले बच्चों को उच्च मानक वाली शिक्षा, मिड डे मील और अच्छे शिक्षकों तक पहुँच नहीं मिल रही।

NCPCR ने कहा कि RTE मानदंड पूरे ना होने के कारण मदरसे में पढ़ने वाले बच्चे बाक़ी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के बराबर अधिकार नहीं पा रहे। NCPCR ने इस बात पर भी चिंता जताई कि मदरसों के भीतर बच्चों को शारीरिक तौर पर दंड दिया जाता है। बच्चों को इन मदरसों के भीतर बताया जाता है कि इस्लाम ही सर्वोच्च है।

बच्चों का शारीरिक शोषण भी इन मदरसा में एक समस्या है, इसके कई मामले सामने आए हैं, आयोग ने इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष चिंता जताई है। NCPCR ने कहा कि मदरसे अल्पसंख्यक संस्थान की श्रेणी में आते हैं और उन्हें संविधान के अनुच्छेद 14 और अनुच्छेद 15(1) से छूट प्राप्त है। यह दोनों कानून बच्चों में समानता और और उनके स्वस्थ तरीके से और स्वतंत्रता और सम्मान की स्थिति में विकसित होने के अवसर और सुविधाएँ देना सुनिश्चित करते हैं।

मदरसों में गैर-मुस्लिम छात्र

NCPCR ने यह भी खुलासा किया है कि इन मदरसा में बड़ी संख्या में गैर-मुस्लिम छात्र भी पढ़ते हैं। यह देश के संविधान के अनुच्छेद 28(3) का उल्लंघन है। इस्लामी शिक्षा देने वाले यह मदरसे किशोर न्याय अधिनियम 2015 की धारा 75 का उल्लंघन भी करते हैं। NCPCR ने तर्क दिया है कि यहाँ बच्चों को इस्लाम के अलावा भी और धर्म को मानने से रोका जाता है, इसीलिए यह किशोर न्याय अधिनियम की धरा 75 का उल्लंघन है।

मदरसों का सिलेबस भी चिंताजनक

NCPCR ने उन पुस्तकों का भी संज्ञान लिया है जिन्हें दारुल-उलूम-देवबंद द्वारा जारी किए गए फतवों के आधार पर बनाया गया है और मदरसों के पाठ्यक्रम में शामिल कर दिया गया है। ऐसे ही एक फतवे में तक़्वियत-उल-ईमान नाम की एक किताब को प्रामाणिक स्रोत बताया गया है। चिंता की बात यह है कि इस किताब में इस्लाम पर काफी कट्टर विचार लिखे हुए हैं।

आयोग ने यह भी पाया है कि मदरसों में पढ़ाई जाने वाली कई किताबों में बताया जाता है कि इस्लाम ही सर्वोच्च है। इससे यह चिंताएँ बढ़ गई हैं कि मदरसों में बच्चों को एक विचार की तरफ झुकाया जा सकता है। इसके अलावा, NCPCR ने पाया कि मदरसों की कुछ किताबों में नाबालिगों के साथ अवैध संबंधों के बारे में भी बात की गई है। इससे चिंताएँ और गहरी हो गई हैं।

NCPCR ने कहा, “आयोग को दारुल उलूम देवबंद द्वारा जारी किए गए फतवों के बारे में शिकायतें मिली हैं, जिसमें ‘बहिश्ती ज़ेवर’ नामक पुस्तक के संदर्भ शामिल हैं। यहाँ यह बताना जरूरी है कि उक्त पुस्तक में बच्चों के संबंध में आपत्तिजनक और अवैध बाते लिखी गई हैं, इसमें नाबालिग बच्चों के साथ यौन संबंध बनाने सम्बन्धित बाते तक हैं। यह पुस्तक मदरसों में बच्चों को पढ़ाई जाती है और इस तरह की आपत्तिजनक जानकारी वाले अन्य फतवे भी उपलब्ध हैं।”

इस किताब को 2023 में NCPCR के नोटिस के बाद दारुल उलूम देवबंद की वेबसाइट से हटा दिया गया था। NCPCR को दारुल उलूम की वेबसाइट पर ‘गजवा-ए-हिन्द’ से सम्बन्धित भी फतवा मिला था। NCPCR ने कहा, “आयोग ने दारुल उलूम देवबंद की वेबसाइट पर मौजूद एक फतवे का संज्ञान लिया है जिसमें भारत पर आक्रमण (गजवा-ए-हिंद) के बारे में बात की गई है और कहा गया है कि जो कोई भी इसमें मारा जाएगा वह एक महान शहीद कहा जाएगा।”

संविधान का हो रहा दुरुपयोग

NCPCR ने बताया कि मदरसों द्वारा अपने कारनामों को सही ठहराने के लिए संविधान के अनुच्छेद 29(2) का दुरुपयोग किया जा रहा है। आयोग ने कहा, “इस्लामिक शिक्षा देने के लिए पढ़ाने के लिए मदरसे प्राथमिक संस्थान हैं, इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता।” NCPCR ने कहा कि संविधान में मदरसों को मिली छूट बच्चों को संतुलित और औपचारिक शिक्षा प्रदान करने के व्यापक संवैधानिक दायित्व के अनुरूप नहीं है। NCPCR ने कहा कि मदरसे संविधान में दी गई छूट का नाजायज फायदा उठा रहे हैं।

कोर्ट करे मदरसों की निगरानी

NCPCR ने अंजुम कादरी की याचिका को चुनौती दी है। कादरी ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसमे उसने जिसमें उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा बोर्ड अधिनियम 2004 को रद्द कर दिया था। आयोग ने कहा कि यह अधिनियम धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांतों और अनुच्छेद 14, 21 और 21ए के संवैधानिक जनादेश के खिलाफ है। गौरतलब है कि हाई कोर्ट के इस निर्णय पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि बच्चों को अच्छी शिक्षा मिलनी चाहिए लेकिन लेकिन उपाय अधिनियम को रद्द करना नहीं है।

सिलाई-कढ़ाई सेंटर के नाम पर धर्मांतरण करवाती थी हिना, इस्लाम कबूल करने के लिए शौहर मुस्तफा बनाता था दबाव: अश्लील वीडियो वायरल करने की देते थे धमकी

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले में सिलाई कढ़ाई सेंटर चलाने के नाम पर हिन्दू महिलाओं के धर्मान्तरण के रैकेट का पर्दाफाश हुआ है। यहाँ बुधवार (11 सितंबर 2024) को एक हिन्दू लड़की की शिकायत में सिलाई-कढ़ाई सेंटर चलानी वाली मुस्लिम महिला और उसके शौहर पर FIR दर्ज हुई है। आरोपित मियाँ-बीवी का नाम हिना और मुस्तफा हैं। शनिवार (14 सितंबर) को पुलिस ने बताया कि हिना और मुस्तफा को गिरफ्तार कर लिया गया है।

यह घटना मुरादाबाद के थानाक्षेत्र मूंढापाण्डे की है। यहाँ 11 सितंबर 2024 को एक हिन्दू लड़की ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। पीड़िता ने बताया कि वह अपनी कुछ हिन्दू सहेलियों के साथ गाँव में ही हिना नाम की मुस्लिम महिला के घर सिलाई-कढ़ाई सीखने जाती थी। इन लड़कियों को सिखाते हुए हिना अक्सर अपने शौहर मुस्तफा को बुला लेती थी। आरोप है कि मुस्तफा इन लड़कियों को उल्टी-सीधी बातें कर के इस्लाम कबूल करने के लिए उकसाया करता था।

हिना का शौहर सेंटर में आई लड़कियों को अपने साथ खाना खाने का भी दबाव बनाया करता था। जब लड़कियाँ इंकार करती थीं तो मुस्तफा उनसे जिद किया करता था। इस दौरान वह पीड़िताओं से छींटाकशी भी करने लगा। 14 जून 2024 की सुबह लगभग 10 बजे पीड़िता को हिना अपने सेंटर में बंद कर के कहीं चली गई। इस दौरान मुस्तफा वहाँ आया और पीड़िता से अश्लील हरकतें करने लगा। अपनी करतूत की वीडियो भी मुस्तफा ने चोरी-छिपे बना डाली।

शिकायत में आगे बताया गया है कि 2 दिन बाद 16 जून को हिना ने भी पीड़िता का एक अश्लील वीडियो बनाया। इसी दिन हिना ने पीड़िता और उसकी सहेलियों पर बाहर से मँगाए पकौड़े खाने का दबाव बनाया। पीड़िता को कुछ साजिश का शक हुआ तो उसने मना कर दिया। तब हिना पीड़िता की अश्लील वीडियो वायरल करने की धमकी देने लगी। इसी के साथ पीड़िता पर इस्लाम कबूल करने का दबाव फिर से बनाया जाने लगा। इस से पीड़िता के साथ उसकी सहेलियाँ भी डर गईं।

हिन्दू लड़की ने अपनी शिकायत में अपने साथ किसी अनहोनी की आशंका जताई है। आरोपितों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की माँग की गई है। पुलिस ने शिकायत का संज्ञान लेते हुए हिना और मुस्तफा को नामजद करते हुए FIR दर्ज कर ली है। यह FIR भारतीय दंड संहिता (IPC) 342, 354 और 294 के साथ उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म सम्परिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम के तहत दर्ज हुई है।

ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है। 14 सितंबर को मुरादाबाद पुलिस ने बताया कि हिना और मुस्तफा को गिरफ्तार कर लिया गया है। मामले में जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

मुंबई से हिरोइन को उठाकर विजयवाड़ा ले गई आंध्र पुलिस, माँ-बाप को भी किया जलील, अब 3 IPS हुए सस्पेंड: कौन हैं कादंबरी जेठवानी, जानिए क्या है पूरा मामला?

मुंबई की मॉडल और अभिनेत्री डॉक्टर कादंबरी जेठवानी को फर्जी केस में परेशान करने के आरोप में आंध्र प्रदेश सरकार ने तीन आईपीएस अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया है। राज्य सरकार ने यह कार्रवाई अभिनेत्री द्वारा मिली शिकायत के बाद की।

मॉडल की शिकायत पर जिन अधिकारियों को निलंबित किया गया उनमें पूर्व खुफिया प्रमुख पी. सीताराम अंजनेयुलु (डीजी रैंक), पूर्व विजयवाड़ा पुलिस आयुक्त क्रांति राणा टाटा (महानिरीक्षक रैंक) और पूर्व पुलिस उपायुक्त विशाल गुन्नी (अधीक्षक रैंक) शामिल हैं।

अब कादंबरी को ये तीनों अधिकारी क्यों परेशान कर रहे थे इसे जानते हैं। दरअसल ये मामला इसी साल की शुरुआत से चर्चा में था, लेकिन इसे तूल कादंबरी की शिकायत के बाद मिला।

क्या था मामला

आंध्र प्रदेश में नायडू सरकार बनने के बाद कादंबरी ने अपनी शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने कहा था कि उन्होंने मुंबई में एक निगम के शीर्ष अधिकारी के खिलाफ केस दर्ज कराया था उस समय उन्हें धमकी देते हुए कहा गया था कि वो केस वापस लें वरना उन्हें गंभीर परिणाम भुगतना होगा।

बाद में वाईएसआर कॉन्ग्रेस पार्टी के नेता और फिल्म निर्माता विद्यासागर ने फरवरी में उनके खिलाफ जालसाजी और जबरन वसूली का मामला दर्ज कराया । कादंबरी जेठवानी ने आरोप लगाया था कि शीर्ष पुलिस अधिकारियों ने विद्यासागर के साथ मिलकर उन्हें और उनके माता-पिता को परेशान किया, उन्हें गिरफ्तार किया और बिना किसी पूर्व सूचना के मुंबई से विजयवाड़ा ले गए। उन्होंने अपनी शिकायत में कहा कि उन्हें इतना समय भी नहीं मिला कि वो अपने लिए बेल ले पाएँ।

अभिनेत्री के अनुसार, केवल उन्हें ही नहीं बल्कि उनके माता-पिता को भी इस केस में फँसाया गया। उन्हें जलील किया गया और 40 दिन से ज्यादा समय तक न्यायिक हिरासत में रखा गया। रिहा होने के बाद जेठवानी ने इस संबंध में अपनी शिकायत दायर कराई और अब आंध्र प्रदेश की सरकार ने इस मामले में अपनी कार्रवाई की।

क्यों हुई तीनों आईपीएस कार्रवाई

कादंबरी जेठवानी की शिकायत पर राज्य सरकार ने जाँच की और पाया कि कादंबरी जेठवानी के खिलाफ एफआईआर 2 फरवरी को दर्ज की गई थी जबकि उन्हें गिरफ्तार करने के आदे 31 जनवरी को दे दिए गए थे। राज्य सरकार ने तीनों अधिकारियों को सस्पेंड करने का फैसला जारी करते हुए कहा कि मामले में अधिकारियों के खिलाफ प्रथम दृष्टया साक्ष्य मौजूद हैं और उनके गंभीर कदाचार और कर्तव्य के प्रति लापरवाही के लिए अनुशासनात्मक कार्यवाही की आवश्यकता है।

कौन हैं कादंबरी जेठवानी

बता दें कि कादंबरी जेठवानी एक 28 साल की मॉडल और एक्ट्रेस हैं। उनका जन्म अहमदाबाद में हुआ था। उनके पिता नरेंद्र कुमार नेवी ऑफिसर थे वहीं माँ इकोनॉमिक्स में गोल्ड मेडलिस्ट रह चुकी हैं और रिजर्व बैंक में बतौर मैनेजर अपनी सेवा दे चुकी हैं।

कादंबरी की शिक्षा अहमदाबाद के नामी स्कूल जैसे प्रकाश हाईहर स्कूल, माउंट कैरामल हाई स्कूल और उद्गम स्कूल। पढ़ाई में अच्छा होने के कारण उन्होंने अहमदाबाद के मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की पढ़ाई की। बाद में माँ के ट्रांसफर की वजह से उन्हें मुंबई आना पड़ा। यहाँ उनकी मुलाकात एक डायरेक्टर से हुई। उसने उन्हें बॉलीवुड में काम करने का मौका दिया। इसके बाद कादंबरी ने कन्नड़ की ओइजा, आटा (तेलुगु), आई लव मी (मलयालम) में रोल किया।

‘क्या राम मंदिर पर बुलडोजर चलेगा?’: कॉन्ग्रेस नेता ने रेप को अयोध्या के मंदिर से जोड़ा, सपा सांसद अवधेश प्रसाद के गुर्गों की कारस्तानी पर पार्टी को मार गया था लकवा

कॉन्ग्रेस नेता उदित राज राम मंदिर को ध्वस्त करना चाहते हैं। उन्होंने ‘X’ पर एक पोस्ट के जरिए अपनी हिन्दू विरोधी घृणा का प्रदर्शन किया है। अयोध्या में हुए एक बलात्कार के मुद्दे को लेकर उन्होंने ये प्रपंच चलाया है, जिसके बाद हिन्दू उन्हें तगड़ा जवाब दे रहे हैं। ‘Unorganized Workers and Employees Congress’ (KKC) के अध्यक्ष उदित राज ने लिखा, “अयोध्या में राम मंदिर में सफाईकर्मी के रूप में काम करने वाली युवती के साथ सामूहिक दुष्कर्म हुआ। क्या राम मंदिर पर भी बुलडोज़र चलेगा?”

बता दें कि उक्त घटना राम मंदिर में नहीं हुई है, इसके बावजूद बार-बार हिन्दू विरोधी इस घटना में राम मंदिर को घसीट रहे हैं। इस घटना पर त्वरित कार्रवाई करते हुए 8 आरोपितों को दबोचने में यूपी पुलिस ने सफलता पाई है। सहादतगंज निवासी वंश चौधरी मुख्य आरोपित है। पीड़िता पिछले 4 वर्षों से वंश को जानती थी। उसका कहना है कि वो घुमाने के बहाने कार से ले गया और उसने रेप किया। कार के एक डिवाइडर से टकराने पर पीड़िता को भागने का मौका मिल गया।

इसी घटना का इस्तेमाल उदित राज ने अपनी गंदी राजनीति के लिए किया है। उदित राज 2014 में भाजपा के टिकट पर सांसद बने थे लेकिन 2019 में उन्हें टिकट नहीं मिला तो वो कॉन्ग्रेस में आ गए। इसके बाद 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्हें कॉन्ग्रेस ने टिकट दिया लेकिन AAP के समर्थन के बावजूद 2.90 लाख वोटों से हार गए। यूपी में अक्सर माफिया, बलात्कारियों और हत्यारों की अवैध संपत्ति पर बुलडोजर चलता है, ऐसे में उदित राज ने इसका विरोध करने के लिए ये तरीका अपनाया है।

हाल ही में अयोध्या में सपा नेता मोईद खान और उसके नौकर राजू खान द्वारा OBC निषाद समाज की एक लड़की के साथ गैंगरेप का मामला सामने आया था। वहीं सपा के एक अन्य नेता राशिद खान ने पीड़िता और उसके परिवार को जान से मार डालने की धमकी दी थी। इस पर उदित राज जैसे नेता चुप थे। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने तो DNA जाँच की माँग तक कर दी थी। उदित राज इससे पहले भी उलटे-सीधे बयानों के कारण चर्चा में रहे हैं।