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जगन सरकार में हुई तिरुपति मंदिर के प्रसाद से छेड़छाड़, लड्डू में मिलाई जाती थी जानवर की चर्बी: CM चंद्रबाबू नायडू के दावे के बाद YSRCP पर उठे सवाल

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने विपक्षी पार्टी YSRCP पर निशाना साधते हुए ऐसा खुलासा किया है जिसे सुन सब हैरान हैं। सीएम नायडू ने दावा किया है कि पहले की जगन सरकार में तिरुपति मंदिर में प्रसाद बनाने के लिए जानवरों की चर्बी वाला घी इस्तेमाल होता था।

उन्होंने ये खुलासा एनडीए विधायक दल की बैठक को संबोधित करने के दौरान किया। उनके दावे को सुन सब हैरान रह गए। उन्होंने कहा कि तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (TTD) और भगवान वेंकटेश्वर को आंध्र प्रदेश के लोगों की सबसे बड़ी धरोहर है। एनडीए सरकार मंदिर की पवित्रता बनाए रखने के लिए कई कदम उठा रही हैं, लेकिन पिछली सरकार ने भोजन की गुणवत्ता खराब कर दी है। उन्होंने भगवान वेंकटेश्वर के लड्डू के लिए घटिया सामग्री इस्तेमाल की।

उन्होंने बताया कि YSRCP सरकार ने अपने कार्यकाल के दौरान, एक निजी ठेकेदार को घी की आपूर्ति का ठेका दिया था। बाद में लड्डू की गुणवत्ता को लेकर कई शिकायतें मिलीं। पता चला कि लड्डू बनाने में जो घी इस्तेमाल हो रहा था उसमें जानवर की चर्बी थी। लड्डू की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए अब एनडीए सरकार ने 29 अगस्त को कर्नाटक मिल्क फेडरेशन के नंदिनी ब्रांड को घी देने का कॉन्ट्रैक्ट दिया है। जिसके बाद अब मंदिर में शुद्ध घी प्रयोग होता है।

बता दें कि तिरुपति मंदिर में भगवान के प्रसाद के लिए हर दिन लगभग 10 हजार किलो घी उपयोग होता है जिससे करीबन 3 लाख लड्डू बनते हैं। हर श्रद्धालु के लिए इस प्रसाद के बहुत मायने हैं। ऐसे में उसकी गुणवत्ता से हुए खिलवाड़ में खुलासे के बाद अब इस मुद्दे पर जोर-शोर से चर्चा हो रही हैं। पूर्व की जगन सरकार लगातार सवालों के घेरे में हैं। वहीं सीएम नायडू के बयान को YSRC द्वारा खारिज कर दिया गया है। उन्होंने इस आरोप को दुर्भावनापूर्ण बताया है।

मालूम हो कि जगन मोहन रेड्डी को सरकार पर एक तरफ जहाँ हिंदुओं की भावना आहत करने का आरोप लगा है तो वहीं दूसरी ओर उनपर ईसाई धर्म के प्रचार के आरोप लगते रहे हैं।

पेंटर बाबूराम को पीटा, मुकेश का पलटा ठेला: प्रशासन ने रोका था बारावफात का जुलूस तो गरीब हिंदुओं पर फूटा मुस्लिमों का गुस्सा, मंदिर में भी तोड़फोड़

उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में फल और सब्ज़ी बेचकर गुजारा करने वाले गरीब हिन्दुओं के साथ मारपीट का मामला सामने आया है। यहाँ मुस्लिम समुदाय के कुछ लोगों पर कलावा पहने हिंदू ठेले वालों की पिटाई करने का आरोप लगा है। एक अन्य घटना में एक हिन्दू युवक की पिटाई भी की गई है। इसके साथ ही एक हिन्दू मंदिर में तोड़फोड़ भी की गई है।

बरेली पुलिस ने इस सभी मामलों में जाँच और अन्य जरूरी कार्रवाई शुरू कर दी है। इन दोनों घटनाओं के पीछे हमलावरों ने हिन्दू संगठनों द्वारा मुस्लिमों के बारावफात के जुलूस को रोकने से उठा गुस्सा बताया है। जुलूस उसी जगह रोका गया था, जहाँ इसी साल मुस्लिम समुदाय के लोगों द्वारा नई परम्परा बताते हुए काँवड़ यात्रा रोकी गई थी।

पेंटर को बेरहमी से पीटा

पहला मामला बरेली जिले के थाना क्षेत्र बारादरी का है। यहाँ विशाल ने मंगलवार (17 सितंबर) को पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत में उन्होंने बताया कि मंगलवार को रंगाई-पुताई का काम करने वाले उनके बहनोई बाबूराम कहीं जा रहे थे। इसी दौरान मुनीर और शाहनवाज ने 15-20 लोगों के साथ मिलकर बाबूराम को रोक लिया। प्याज-लहसुन का ठेला लगाने वाला एक अन्य व्यक्ति बाबूराम को देख कर भड़क उठा।

प्याज बेच रहे व्यक्ति ने बाकियों को उकसा कर कहा, “यही है जिसने हम लोगों के अंजुमनों को निकलने नहीं दिया था।” इतना सुनकर आसपास के लोग भड़क उठे। मुनीर, शाहनवाज ने अपने 15-20 साथियों के साथ मिलकर बाबूराम पर हमला बोल दिया और उन्हें लात-घूँसों से बेरहमी से पीटा। आसपास के लोग बीच-बचाव में जुटे तो आरोपित धमकी देते हुए वहाँ से भाग निकले।

जाते-जाते हमलावरों ने धमकी देते हुए कहा, “अगर दोबारा इधर दिखे तो जान से मार देंगे।” पीड़ित की शिकायत के बाद पुलिस ने हमलावरों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 191 (1), 115 (2), 352, 351 (2) और 351 (3) के तहत कार्रवाई की है। ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है। पुसंवेदनशील इलाकों में पुलिस गश्त बढ़ा दी गई है। फ़िलहाल हालत शांतिपूर्ण है।

पलट दिया गया गरीब हिन्दू का ठेला

वहीं, बरेली जिले का दूसरा मामला भी बारादरी थाना क्षेत्र से ही है। यहाँ विश्व हिन्दू परिषद के पदाधिकारी हिमांशु पटेल ने अपने X हैंडल पर आरोप लगाया है कि मुस्लिम युवकों ने ठेला लगाने वाले एक गरीब हिन्दू को पीटकर भगा दिया है। हिमांशु के मुताबिक, एजाजनगर क्षेत्र में हाथ में कलावा देखकर एक हिंदू युवक को पीटा गया है। बरेली पुलिस ने शिकायत का संज्ञान लेकर जाँच शुरू कर दी है।

ऑपइंडिया ने इस मामले की पड़ताल की तो पता चला कि मंगलवार (17 सितंबर) को मुकेश राठौड़ नाम के युवक ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत में मुकेश ने बताया है कि मंगलवार को उन्होंने साईं स्कूल के पास ठेला लगा रखा था। उसी दौरान गली के पास 40-50 की तादाद में आई भीड़ ने नारेबाजी करते हुए उस पर हमला कर दिया।

हमलावरों ने मुकेश के ठेले पर रखे तमाम सामान को उठाकर फेंक दिया। इसके साथ ही पीड़ित की पिटाई भी की। ऑपइंडिया के पास इससे संबंधित FIR की कॉपी मौजूद है। शिकायत में मुकेश ने बताया कि हमलावरों ने उनसे कहा, “अगर हमारा बारावफात का जुलूस निकलने दिया होता तो ये सब न होता।” जब लोगों की भीड़ जुटने लगी तो हमलावर वहाँ से भाग निकले।

मुकेश ने हमलावरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की है। इस तहरीर पर पुलिस ने अज्ञात हमलावरों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 191 (2), 131, 324 (4), 324 (5), 115 (2), 351 (2), 351 (3) और 196 के तहत FIR दर्ज की है। आरोपितों की पहचान व तलाश के प्रयास शुरू कर दिए गए हैं।

हिन्दू मंदिर में तोड़फोड़

इसी बरेली के बारादरी क्षेत्र में एक हिन्दू मंदिर में तोड़फोड़ भी की गई है। यहाँ के एरा रेडियोज इलाके में एक शिव मंदिर है। हिन्दू संगठन के लोगों का आरोप है कि मुस्लिम समुदाय के लोगों ने इस घटना को अंजाम दिया है। बताया जा रहा है कि मंगलवार की रात 20 से 25 की संख्या में उपद्रवी मंदिर के आसपास जमा हुए थे। वो यहाँ खुराफात कर रहे थे।

लोगों का कहना है कि उन्हीं उपद्रवियों ने मंदिर में तोड़फोड़ की घटना को अंजाम दिया है। गुंबद और अन्य धार्मिक प्रतीकों को तोड़कर उसे फिर से जोड़ने का प्रयास किया गया। अगली सुबह जब हिन्दुओं को इस हरकत की सूचना मिली तो आक्रोशित हो गए। उन्होंने एकजुट होकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। उन्होंने नारेबाजी करते हुए आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की।

इस मामले की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुँची। पुलिस ने लोगों को समझा-बुझा कर शांत कराया और कार्रवाई का आश्वासन दिया। पुलिस ने इस मामले में अज्ञात हमलावरों के खिलाफ केस दर्ज करके जाँच शुरू कर दी है। हिन्दू संगठनों ने ऐसी हरकतों को आए दिन की करतूत बताते हुए इस केस में पुलिस कार्रवाई को नजीर बनाने की माँग की है।

जहाँ रोकी गई थी काँवड़ यात्रा, वहीं रोका गया बारावफात का जुलूस

बताते चलें कि बरेली के बारादरी इलाके में रविवार (15 सितंबर) को मुस्लिम समुदाय के लोगों ने बारावफात का जुलूस निकाला था। यह जुलूस उस मार्ग से गुजर रहा था, जहाँ इसी साल हिन्दुओं की काँवड़ यात्रा को मुस्लिम समुदाय ने नई परम्परा बताते हुए रोक दिया था। आखिरकार लंबी नोक-झोंक के बाद प्रशासन ने उस मार्ग पर यात्रा की अनुमति नहीं दी और बारावफात जुलूस का रुट बदल दिया।

पेजर वालों को दफनाने गए, दूसरे ब्लास्ट में उड़ गए… लेबनान में अब वॉकी-टॉकी में धड़ाधड़ विस्फोट, इजरायल के हमले में फिर कई हिज़्बुल्लाह वालों की मौत

इजरायल ने मंगलवार (17 सितंबर, 2024) को लेबनान में रह रहे हिज़्बुल्लाह के सदस्यों के पेजर में विस्फोट किया, जिस कारण 4000 से अधिक लोग घायल हो गए और एक दर्जन की मौत हो गई। लेबनान की सरकार ने बताया है कि इस ब्लास्ट में 100 से अधिक लोग घायल हुए हैं। बताया जा रहा है कि हजारों वॉकी-टॉकी में ये ब्लास्ट हुआ है। हिज़्बुल्लाह के आतंकी फोन छोड़ कर पेजर और वॉकी-टॉकी का इस्तेमाल संचार के लिए करते थे, लेकिन अब इन्हीं में ब्लास्ट हो रहे थे।

हिज़्बुल्लाह के सूत्रों ने पुष्टि की है कि समूह द्वारा उपयोग किए जाने वाले वॉकी-टॉकीज को निशाना बनाया जा रहा है। विस्फोट बेरूत के दक्षिणी उपनगरों के साथ-साथ दक्षिण लेबनान के नबातिया, टायर और सैदा शहरों में भी हुए। ये घटनाएँ उस हमले के एक दिन बाद आई हैं, जब हिज़्बुल्लाह के सदस्यों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले पेजर्स में विस्फोट हुआ था, जिसमें 12 लोगों की मौत हो गई थी और 4000 से अधिक घायल हो गए थे।

इज़राइल ने इन ताज़ा विस्फोटों पर टिप्पणी करने से परहेज किया है। रिपोर्टों में कहा गया कि ये विस्फोट छोटे पैमाने पर थे, लेकिन पिछले दिन हुए हमलों से मेल खाते हैं। लेबनान की राज्य-नियंत्रित नेशनल न्यूज़ एजेंसी (NNA) ने दावा किया कि देश के पूर्वी हिस्से बेक़ा क्षेत्र में हुए ताज़ा विस्फोटों में तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि सुरक्षा सूत्रों ने कहा कि सैकड़ों लोग घायल हुए हैं। इन दावों की पुष्टि नहीं हो सकी है।एक विस्फोट उस समय हुआ जब हिज़्बुल्लाह द्वारा आयोजित एक अंतिम संस्कार में शामिल एक सदस्य के शरीर पर धमाका हुआ, जिससे वह ज़मीन पर गिर गया और आसपास की भीड़ भागने लगी।

माना जा रहा है कि मोसाद ने महीनों पहले हिज़्बुल्लाह द्वारा आयात किए गए हज़ारों पेजर्स में विस्फोटक लगाए थे, जो बाद में फट गए। पिछले अक्टूबर से उत्तरी इज़राइल पर 8,000 से अधिक रॉकेट दागे जा चुके हैं और इसके जवाब में इज़राइली सेना ने लेबनान में हिज़्बुल्लाह के ठिकानों पर हवाई हमले, टैंक और तोपखाने से जवाबी कार्रवाई की है। हिज़्बुल्लाह लगातार इजरायल पर रॉकेट हमले करता रहता है। हिज़्बुल्लाह इस्लामी आतंकी संगठन है, जो फिलिस्तीन स्थित हमास की तरह ही हमले करता रहता है।

पार्क में अपने बच्चों संग टहल रही महिला को साथ चलने के लिए कहने लगा जावेद, मना किया तो ब्लेड से कर दिया ताबड़तोड़ वार: लोगों ने पकड़ धुना, फिर पुलिस को सौंपा

उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में मंगलवार (17 सितंबर 2024) को छेड़खानी का विरोध करने पर जावेद नाम के व्यक्ति ने एक महिला को ब्लेड मार कर घायल कर दिया। एक पार्क में 2 बच्चों के साथ घूम रही थी। महिला की चीख सुनकर आसपास के लोगों ने आरोपित जावेद को पकड़ लिया और उसे पुलिस के हवाले कर दिया। पुलिस ने जावेद को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना बरेली के कोतवाली थाना क्षेत्र की है। यहाँ के पार्क में बारादरी इलाके की रहने वाली महिला घूमने-टहलने के लिए अक्सर आया-जाया करती थी। मंगलवार (17 सितंबर) की सुबह लगभग 11 बजे महिला पार्क में अपने 2 बच्चों के साथ घूमने आई थी। इसी दौरान जावेद वहाँ आया और पीड़िता से छेड़खानी शुरू कर दी और महिला पर साथ चलने का दबाव बनाने लगा।

पीड़िता ने जावेद की बात को अनसुना कर दिया और दूसरी तरफ चली गई। महिला के इनकार करने पर जावेद भड़क गया। उसने अपने पास छिपाकर रखी ब्लेड से पीड़िता पर वार करना शुरू कर दिया। हमलावर जावेद ने ब्लेड से पीड़िता का गला काटने की कोशिश की। हालाँकि, महिला खुद को बचाने में सफल रही। घायल पीड़िता चीखने लगी। चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग जमा हो गए।

उन्होंने जावेद को पकड़ कर धुन दिया। इसके बाद पुलिस को सूचना दी। इपुलिस मौके पर पहुँचकर जावेद को हिरासत में ले लिया। पीड़िता से तहरीर लेकर आरोपित के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं में FIR दर्ज कर ली। इंस्पेक्टर कोतवाली ने बताया कि जावेद और पीड़िता पहले से परिचित रहे हैं। दोनों एक ही समुदाय के हैं। मामले में जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई की जा रही है।


जब आई मुश्किल परिस्थिति तो हनुमान चालीसा और ‘ॐ नमः शिवाय’ ने दिया साथ: साथ बैठे गौतम गंभीर और विराट कोहली, याद किए मैदान में हुए आध्यात्मिक अनुभव

BCCI ने भारतीय क्रिकेट टीम के कोच गौतम गंभीर और पूर्व कप्तान विराट कोहली के बीच चर्चा का एक वीडियो BCCI ने अपनी वेबसाइट पर जारी किया है। इस दौरान इन दोनों ने अपने आध्यात्मिक अनुभव को लेकर भी बात की। IPL के दौरान इन दोनों के बीच हुई बहस के बाद फैंस को इन दोनों को साथ देख कर ख़ुशी हुई है। गौतम गंभीर उस समय ‘लखनऊ सुपर जायंट्स’ के कोच थे, वहीं विराट कोहली RCB के कप्तान रहे हैं और अभी भी टीम के साथ हैं।

बांग्लादेश की टीम टेस्ट सीरीज खेलने के लिए भारत आई हुई है। ताज़ा चर्चा के दौरान दोनों ने बताया कि कैसे उन्हें आध्यात्मिक मदद मिली। गौतम गंभीर ने बताया कि कैसे विराट कोहली 2014 में भारतीय टीम के ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान हर गेंद का सामना करने से पहले ‘ॐ नमः शिवाय’ जप रहे थे। इसी टेस्ट सीरीज में तब कप्तान रहे MS धोनी ने संन्यास का ऐलान किया था। विराट कोहली ने उस सीरीज में 86.50 की औसत से 692 रन मारे थे, जिनमें 4 शतक थे।

गौतम गंभीर ने याद किया कि विराट कोहली ने बताया था कि वो हर गेंद से पहले ‘ॐ नमः शिवाय’ जपते थे और इसके बाद उन्हें खेलने में सुविधा होती थी। गौतम गंभीर ने याद किया कि जब वो न्यूजीलैंड के नेपियर में खेल रहे थे तब भी ऐसा ही था। न्यूजीलैंड की जीत को टालने के लिए तब गौतम गंभीर ने 436 गेंदों में 137 रनों की पारी खेली थी। गौतम गंभीर ने कहा कि क्या वो ढाई दिन बल्लेबाजी कर सकते थे, उन्हें लगता है कि वो दोबारा ऐसा नहीं कर सकते थे।

गौतम गंभीर ने बताया कि इन ढाई दिनों में जो एक चीज उन्होंने की वो है लगातार हनुमान चालीसा सुनना। उन्होंने बताया कि VVS लक्ष्मण ने बताया था कि वो सिर्फ बल्लेबाजी के समय सिर हिलाते थे, कुछ भी बोलते नहीं थे। बकौल गौतम गंभीर, वापस लौट कर वो सिर्फ हनुमान चालीसा सुनते थे और फिर मैदान में आकर अपने ज़ोन में चले जाते थे। गौतम गंभीर की वो पारी 10 घंटे और 43 मिनट चली थी। उन्होंने भारत को हार से बचा कर मैच ड्रॉ करवाया था।

यदि गणेश पूजा में हानिकारक तो ईद में भी लाउडस्पीकर खतरनाक: बॉम्बे हाई कोर्ट की दो टूक, कहा- ध्वनि प्रदूषण से जुड़ा आदेश मजहबी आयोजनों पर भी लागू

बॉम्बे हाईकोर्ट ने बुधवार (18 सितंबर 2024) को कहा कि यदि गणेश उत्सव के दौरान स्वीकार्य ध्वनि सीमा से अधिक लाउडस्पीकर बजाना हानिकारक है तो यह ईद-ए-मिलाद-उन-नबी के जुलूस के दौरान भी इस स्तर पर लाउडस्पीकर बजाना हानिकारक है। मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय और न्यायमूर्ति अमित बोरकर की दो न्यायाधीशों वाली खंडपीठ ने कई जनहित याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की।

इन जनहित याचिकाओं में याचिकाकर्ताओं ने ईद-ए-मिलाद-उन-नबी के जुलूसों के दौरान ‘डीजे’, ‘डांस’ और ‘लेजर लाइट्स’ के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने की माँग की थी। उन्होंने बॉम्ब हाई कोर्ट के पीठ से आग्रह किया था कि वह नगर निकायों और पुलिस को निर्देश जारी बेहद ऊँची आवाज के लिए इस्तेमाल होने वाले उपकरणों के उपयोग की अनुमति ना दे।

याचिकाकर्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि ना तो मुस्लिमों की दीनी किताब कुरान में ही और न ही हदीस में ही इस उत्सव के लिए डीजे सिस्टम और लेजर लाइट के उपयोग के लिए का गया है। याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हुए वकील ओवैस पेचकर ने अदालत से अनुरोध किया कि वह अपने पहले के आदेश में ईद को भी शामिल करें।

कार्यवाही के दौरान पीठ ने पिछले महीने गणेश उत्सव से पहले पारित अपने पहले के आदेश का हवाला दिया। अपने पहले के आदेश में पीठ ने त्योहारों के दौरान मान्य सीमा से अधिक शोर करने वाले ध्वनि प्रणालियों और लाउडस्पीकरों के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने पर जोर दिया था। बता दें कि स्वीकार्य सीमा ध्वनि प्रदूषण (विनियमन और नियंत्रण) नियम 2000 के तहत दी गई है।

ओवैस पेचकर की बात पर पीठ ने कहा कि आदेश में ‘सार्वजनिक उत्सवों’ का उल्लेख किया गया था। याचिकाओं का निपटारा करते हुए अदालत ने कहा, “यदि यह गणेश चतुर्थी के लिए हानिकारक है तो यह ईद के लिए भी हानिकारक है।” इस बीच लेजर लाइट के इस्तेमाल और इसके कथित नुकसान के बारे में दो जजों की बेंच ने याचिकाकर्ताओं से अपने दावे के समर्थन में वैज्ञानिक सबूत पेश करने को कहा।

पीठ ने यह साबित करने के लिए शोध कार्य की माँग की कि ऐसी लाइटों का इंसानों पर हानिकारक प्रभाव पड़ता है। बॉम्बे हाई कोर्ट की पीठ ने कहा, “आपने अपना शोध क्यों नहीं किया? जब तक यह वैज्ञानिक रूप से साबित नहीं हो जाता कि इससे मनुष्यों को नुकसान होता है, हम ऐसे मुद्दे पर कैसे निर्णय ले सकते हैं?”

पीठ ने इस बात पर जोर दिया कि याचिकाओं से अदालतों को उनकी दलीलों पर प्रभावी निर्देश देने में मदद मिलनी चाहिए, क्योंकि उनके पास सभी मुद्दों पर विषय वस्तु विशेषज्ञता नहीं है। पीठ ने कहा, “यही समस्या है। जनहित याचिका दायर करने से पहले आपको बुनियादी शोध करना चाहिए। आपको प्रभावी निर्देश देने में अदालत की सहायता करनी चाहिए। हम विशेषज्ञ नहीं हैं। हम लेजर का ‘एल’ नहीं जानते।”

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

संयोग से इसी प्रकार की एक याचिका पर 17 सितंबर 2024 को सुप्रीम कोर्ट में भी सुनवाई हुई। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने सार्वजनिक स्थानों, समारोहों और त्योहारों के दौरान होने वाले कार्यक्रमों में लाइट लेजर बीम और लाउडस्पीकर के इस्तेमाल को नियमित करने की माँग वाली याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया। पीठ में CJI डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और मनोज मिश्रा शामिल थे।

याचिकाकर्ताओं ने बॉम्बे हाई कोर्ट के 20 अप्रैल के आदेश को चुनौती देने के लिए शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था। बॉम्बे हाई कोर्ट ने धार्मिक जुलूसों और अन्य समारोहों के दौरान स्वीकार्य सीमा से ज़्यादा लेज़र बीम और साउंड सिस्टम के इस्तेमाल के खिलाफ़ जनहित याचिका का निपटारा कर दिया था।

कोर्ट ने फैसला सुनाया कि इस मामले में कोई ठोस निर्देश पारित करने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि इसमें पीड़ित व्यक्तियों द्वारा अधिकारियों के समक्ष शिकायत दर्ज कराने की आवश्यकता को रेखांकित किया है। ध्वनि प्रणालियों और लाउडस्पीकरों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने के बजाय कोर्ट ने कहा कि संबंधित अधिकारियों के समक्ष शिकायत दर्ज कराई जानी चाहिए, जो तब स्वीकार्य ध्वनि सीमाओं पर स्थापित नियमों के अनुसार कार्रवाई करेंगे।

मस्जिद के आगे जुटी मुस्लिम भीड़ ने रोका गणेश विसर्जन का जुलूस, श्रद्धालुओं पर लाठी-डंडे और पाइपों से हमला: कहा – बंद करो DJ

गुजरात के खेड़ा जिले में साम्प्रदायिक तनाव की खबर है। यहाँ गणेश विसर्जन के जुलूस पर मुस्लिम भीड़ ने हमला किया है। यह हमला तब हुआ जब जुलूस एक मस्जिद के पास से गुजर रहा था। हमलावरों की तादाद 150 से 200 के बीच बताई जा रही है जिनके हाथों में लाठी-डंडे और पाइप थीं। इस हमले के लिए DJ का बहाना बनाया गया। घटना मंगलवार (17 सितंबर, 2024) की है। पुलिस ने जैसे तैसे हालत को संभाला। अब तक 11 आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना खेड़ा जिले के गाँवों इलाके की है। मंगलवार (17 सितंबर, 2024) को यहाँ हिन्दू समुदाय के लोगों ने गणेश विसर्जन का जुलूस निकाला था। इस जुलूस में सैकड़ों की तादाद में श्रद्धालु मौजूद थे। श्रद्धालुओं में युवाओं के साथ वृद्ध और बच्चे भी शामिल थे। जुलूस में एक DJ भी था जिसमें धार्मिक गाने बज रहे थे। बताया जा रहा है कि जब श्रद्धालु बाजार में मौजूद जामा मस्जिद के पास पहुँचे तो कुछ मुस्लिमों ने उनका रास्ता रोक लिया।

मुस्लिमों की एक भीड़ ने श्रद्धालुओं से DJ बंद करने को कहा। जब हिन्दुओं ने ऐसा करने से मना किया तो दोनों पक्षों में तनातनी होने लगी। कुछ ही देर में मुस्लिम पक्ष की तरफ से भीड़ जमा हो गई। इस भीड़ में 150 से 200 लोग बताए जा रहे हैं। आरोप है कि इन सभी के पास लाठी-डंडे, लोहे की पाइप और अन्य हथियार भी थे। इस भीड़ ने श्रद्धालुओं पर अचानक हमला बोल दिया। इस हमले में कुछ श्रद्धालुओं को चोटें भी आईं हैं जिनका इलाज करवाया गया है।

इस बीच विवाद की सूचना पर भारी पुलिस बल मौके पर पहुँचा। पुलिस ने बल प्रयोग करते हुए हालात को नियंत्रण में लिया। स्थानीय विधायक कल्पेश परमार भी घटनास्थल पर गए। उन्होंने लोगों से शाँति बनाए रखने की अपील की। हिन्दू संगठनों ने इस हमले के आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की माँग उठानी शुरू कर दी। पुलिस ने हमलावरों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। अब तक 11 आरोपितों को गिरफ्तार किया जा चुका है। सभी हमलावर मुस्लिम समुदाय से बताए जा रहे है।

पुलिस अधीक्षक खेड़ा राजेश गढ़िया के मुताबिक स्थिति नियंत्रण में है। उन्होंने बताया कि केस दर्ज कर के जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जा रही है। अब तक 11 आरोपितों को गिरफ्तार करने के साथ अन्य हमलावरों को भी चिह्नित किया जा रहा है।

‘पुलिस ने बड़े-बड़े जज ठीक कर दिए हैं, एक रिपोर्ट लिखा देंगे तो…’: सब-इंस्पेक्टर के आत्महत्या के प्रयास के बाद अब जज का आरोप, कहा – कोर्ट परिसर में की अभद्रता

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले में सोमवार (16 सितंबर, 2024) को सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है। इस वीडियो में जज द्वारा अभद्रता का आरोप लगा कर सचिन कुमार नाम के सब इंस्पेक्टर आत्महत्या के लिए रेलवे ट्रैक पर बैठे दिखे थे। तब अन्य पुलिसकर्मी अपने साथी को समझा-बुझा कर साथ ले गए थे। बाद में दारोगा ने अपने थाने में तहरीर देते हुए बताया था कि मुस्लिम समुदाय के 5 बाइक चोरों को पेश करने के दौरान रिमांड मजिस्ट्रेट अभिषेक त्रिपाठी ने उनको धमकी देते हुए अभद्रता की। अब इस मामले में मजिस्ट्रेट का भी बयान सामने आया है। उन्होंने पुलिसकर्मी पर ही खुद से अभद्रता करने का आरोप लगाया है।

रिमांड मजिस्ट्रेट अभिषेक त्रिपाठी का बयान एक आधिकारिक पत्र के जरिए बताया गया है। इसमें कहा गया है कि मेडिकल जाँच में यह साबित हुआ था कि सब इंस्पेक्टर सचिन कुमार जिन आरोपितों को कोर्ट में लाए थे उनके शरीर पर चोटों के निशान पाए गए थे। इसी के साथ आरोपितों की गिरफ्तारी की सूचना भी उनके घर न देने का आरोप पुलिस पर लगाया गया है। मजिस्ट्रेट ने सुप्रीम कोर्ट का हवाला देते हुए इसे गिरफ्तारी के नियमों के विरुद्ध बताया है।

जज अभिषेक त्रिपाठी ने आगे बताया है कि जब इस गलती की तरफ कोर्ट में सब इंस्पेक्टर सचिन का ध्यान दिलाया गया तो उन्होंने कहा, “पुलिस के पास इतना समय नहीं है कि ऐसे फालतू की सूचनाएँ अभियुक्तगण के परिवारीजनों को देते फिरें।” मजिस्ट्रेट का यह भी आरोप है कि जब उन्होंने दारोगा से सारी औपचारिकताएँ पूरी कर के लाने को कहा तो उनके खिलाफ अभद्र भाषाओं का प्रयोग किया गया। बकौल मजिस्ट्रेट तब सब इंस्पेक्टर ने कहा, “रिमांड मजिस्ट्रेट का कार्य रिमांड करना है।”

जज अभिषेक त्रिपाठी ने आगे बताया कि सब इंस्पेक्टर सचिन कुमार ने उन्हें नसीहत भी दी कि पुलिस जिस भी आरोपित को लाएगी उसके कागजों को बारीकी से देखे बिना ही रिमांड देना कोर्ट की मजबूरी है। इस दौरान सब इंस्पेक्टर पर लगातार जज से अभद्रता का भी आरोप है। बकौल जज अभिषेक त्रिपाठी जब उन्होंने दारोगा को अभद्रता करने से रोका तो उन्हें जवाब मिला, “पुलिस ने बड़े-बड़े जज ठीक कर दिए हैं। अभी एक रिपोर्ट लिखा देंगे तो दिभाग ठिकाने आ जाएँगे।”

आरोप है कि इसके बाद दारोगा सचिन कुमार ने कोर्ट में ही रिमांड प्रपत्र और केस डायरी जज अभिषेक त्रिपाठी के सामने फेंक दी। बकौल जज इसी दौरान दारोगा ने कहा, “यह कागज आप ही रख लें, हम मुल्जिमानों को ले जा रहे हैं और आपके विरुद्ध यह मुकदमा लिखाएँगे कि अपने हमें अपमानित करके आत्महत्या करने के लिए मजबूर किया है।” इसके बाद सब इंस्पेक्टर कोर्ट से चले गए। सचिन कुमार की यह हरकत अभिषेक त्रिपाठी ने खुद पर दबाव बनाने की कोशिश करार दिया है।

दारोगा सचिन कुमार पर खुद को धमकाने का आरोप लगाने वाले जज अभिषेक त्रिपाठी ने इस हरकत को न्यायिक कार्य में बाधा डालना बताया है। पत्र में इसे अपने हक में फैसला पाने के लिए की गई न्यायालय की अवमानना लिखा गया है। आरोपितों को सब इंस्पेक्टर द्वारा वापस अपने साथ ले जाने की वजह से जज ने उन्हें न्यायिक कस्टडी में ले पाने में अक्षम बताया है। केस डायरी को कोर्ट मोहर्रिर द्वारा अपने पास रखने के भी निर्देश दिए गए हैं।

पुलिसिया कार्रवाई ने वादी मुकदमा की गलती निकालते हुए जज अभिषेक त्रिपाठी ने इसे अनियमितता माना है और जिले के एसएसपी को रिपोर्ट प्रेषित करने के निर्देश दिए हैं। सब इंस्पेक्टर की हरकत को मजिस्ट्रेट ने दुराचार भी करार दिया है और इसकी एक प्रति अलीगढ़ के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट को भी भेजी है। ऑपइंडिया के पास इस पत्र की कॉपी उपलब्ध है। फ़िलहाल इस विवाद पर अब तक अलीगढ़ पुलिस की तरफ से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। पुलिस का पक्ष आने पर उसे खबर में अपडेट किया जाएगा।

गौरतलब है कि यह घटना अलीगढ़ के थानाक्षेत्र बन्नादेवी की है। यहाँ पुलिस ने बाइक चोरों के एक गिरोह का पर्दाफाश किया था जिन पर पहले से कई केस दर्ज पाए गए। गिरफ्तार किए गए आरोपितों मेंअदीब, शारिक, आगिर अरबाज एवं फैज शामिल थे। इनके विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 317(2), 317(4) और 317(5) के तहत कार्रवाई की गई थी। सब इंस्पेक्टर सचिन कुमार का आरोप है कि इन आरोपितों की रिमांड बनवाने के दौरान मजिस्ट्रेट ने उन्हें बेइज्जत करते हुए मुस्लिमों को झूठा फँसाने का आरोप लगाया था।

कभी EdTech यूनिकॉर्न था लेकिन अब हो गया कंगाल: कहानी BYJU’S के दिग्गज बनने से लेकर नीचे गिरने तक की, जानिए कैसे होता रहा अभिभावकों का शोषण

भारत का सर्वोच्च न्यायालय मंगलवार (17 सितंबर, 2024) को अमेरिका स्थित ऋणदाता ग्लास ट्रस्ट कंपनी LLC द्वारा दायर उस अपील पर सुनवाई करेगा, जो राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (NCLAT) के उस फैसले के खिलाफ है। इसमें एड-टेक कंपनी Byju’s के खिलाफ दिवालिया कार्यवाही को रोक दिया गया था। NCLAT ने Byju’s और ‘भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड’ (BCCI) के बीच 158.9 करोड़ रुपए के समझौते को भी मंज़ूरी दी थी। एक समय 22 अरब अमेरिकी डॉलर के मूल्यांकन वाली यह एड-टेक कंपनी अब अपने वित्तीय संकट से जूझ रही है।

पिछली सुनवाई में मुख्य न्यायाधीश DY चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली तीन-न्यायाधीशों की पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति JB पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा भी शामिल थे, ने Byju’s के वकील वरिष्ठ अधिवक्ता एनके कौल और BCCI के वकील सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के अनुरोध पर मामले की सुनवाई के लिए सहमति दी थी। चूँकि इस मामले से संबंधित एक और याचिका 17 सितंबर को सूचीबद्ध थी, कौल ने सुझाव दिया कि दोनों मामलों की सुनवाई उसी दिन की जाए।

मुख्य न्यायाधीश चंद्रचूड़ ने इस सुझाव को स्वीकार किया। विशेष रूप से, ग्लास ट्रस्ट कंपनी LLC द्वारा दायर की गई अपील एक पूर्व निर्णय से उत्पन्न होती है, जिसमें NCLAT ने Byju’s और BCCI के बीच समझौते को मंज़ूरी दी थी और बेंगलुरु स्थित राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT) द्वारा शुरू की गई दिवालिया कार्यवाही को निरस्त कर दिया था। यह मामला क्रिकेट बोर्ड और एड-टेक कंपनी के बीच प्रायोजन समझौते से जुड़े 158.9 करोड़ रुपए के भुगतान चूक से संबंधित था।

अमेरिकी कंपनियों ने Byju’s के खिलाफ की शिकायत

सर्वोच्च न्यायालय ने NCLAT के निर्णय को ‘असंगत’ बताते हुए उस पर रोक लगा दी और BCCI को निर्देश दिया कि वह समझौता राशि को एक अलग एस्क्रो खाते में रखे जब तक कि आगे कोई आदेश न आ जाए।

मंगलवार को होने वाली इस सुनवाई के बीच, अमेरिका में हालिया घटनाक्रम ने Byju’s की वित्तीय समस्याओं को और जटिल बना दिया है। 10 सितंबर को डेलावेयर अदालत ने Byju’s की कई इकाइयों, जिनमें Neuron Fuel Inc., Epic! Creations Inc., और Tangible Play Inc. शामिल हैं, को अध्याय 11 दिवालियापन के तहत रखने का निर्णय लिया, क्योंकि इन इकाइयों ने अपने ऋणदाताओं को माँगी गई वित्तीय जानकारी प्रदान नहीं की थी। Byju’s के अंतरिम समाधान पेशेवर पंकज श्रीवास्तव के अनुसार, यह निर्णय ‘आश्चर्यजनक’ और भारत में Byju’s के खिलाफ चल रही दिवालिया कार्यवाही के साथ ‘विरोधाभासी’ है। उन्होंने अमेरिकी दिवालियापन फैसले के प्रभाव को स्थगित करने की माँग की है।

विशेष रूप से इस साल जून में, HPS इन्वेस्टमेंट पार्टनर्स के नेतृत्व में अमेरिकी ऋणदाताओं ने दावा किया कि Byju’s के संस्थापक, बायजू रविंद्रन ने इकाइयों से संबंधित वित्तीय जानकारी छिपाकर ऋण अनुबंधों का उल्लंघन किया है। इन आरोपों के जवाब में, जज ब्रेंडन शैनन ने ऋणदाताओं के उस अनुरोध को स्वीकार कर लिया जिसमें एक 11 ट्रस्टियों को इन इकाइयों का प्रबंधन करने के लिए नियुक्त करने की माँग की गई थी। अमेरिका और भारत में समानांतर दिवालिया कार्यवाही ने Byju’s के लिए कानूनी परिदृश्य को जटिल बना दिया है, क्योंकि उसे विभिन्न कानूनों के तहत हजारों किलोमीटर दूर चल रहे मामलों का सामना करना पड़ रहा है, जो किसी बिंदु पर संघर्ष का कारण बन सकते हैं।

Byju’s से जुड़ी इकाइयों ने इस जबरन दिवालिया कार्यवाही का विरोध किया, यह तर्क देते हुए कि ऋणदाताओं के पास ऐसी कार्यवाही शुरू करने का कानूनी अधिकार नहीं है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ऋणदाता संबंधित मुकदमेबाजी में बढ़त पाने के लिए इस प्रक्रिया का रणनीतिक रूप से उपयोग कर रहे हैं। इकाइयों द्वारा उठाए गए आपत्तियों के बावजूद, अमेरिकी अदालत ने उनके खिलाफ फैसला सुनाया, जिससे Byju’s के लिए अपनी वैश्विक संचालन और वित्तीय दायित्वों का प्रबंधन करना और भी चुनौतीपूर्ण हो गया।

कभी सबसे अमीर थे बायजू रविंद्रन

2023 में, बायजू रविंद्रन की कुल संपत्ति 17,454 करोड़ रुपए (2.10 अरब अमेरिकी डॉलर) थी, जो उन्हें दुनिया के सबसे धनी व्यक्तियों में से एक बनाती थी। हालाँकि, 2024 में, फोर्ब्स अरबपति इंडेक्स ने बताया कि उनकी कुल संपत्ति शून्य हो गई है। यह समझने के लिए कि Byju’s के साथ क्या हुआ, यह जानना महत्वपूर्ण है कि कंपनी कैसे इतनी तेजी से प्रसिद्धि की ऊंचाइयों पर पहुंची।

Byju’s की स्थापना 2011 में हुई थी और यह भारत का सबसे मूल्यवान स्टार्टअप बन गया, जिसने 2022 में 22 अरब डॉलर के उच्चतम मूल्यांकन को हासिल किया। रविंद्रन की सोच ने शिक्षा क्षेत्र में क्रांति ला दी, उनके अभिनव शिक्षण ऐप ने प्राथमिक स्कूल से लेकर एमबीए स्तर तक के छात्रों को शिक्षा प्रदान की। हालाँकि, हालिया वित्तीय खुलासे और बढ़ते विवादों ने कंपनी की समृद्धि पर गंभीर प्रभाव डाला है।

धीरे-धीरे और लगातार, Byju’s ने एक ऐसी ‘समस्या’ को हल करके एड-टेक बाजार पर कब्जा कर लिया जो वास्तव में शिक्षा क्षेत्र में कभी मौजूद ही नहीं थी। हालांकि, जब COVID-19 ने दुनिया को प्रभावित किया और भारतीयों सहित पूरी दुनिया को घर में रहने के लिए मजबूर कर दिया गया, तो Byju’s ने इसे एक बड़ा अवसर के रूप में देखा।

लगातार विज्ञापन, प्रतिनिधियों के लिए अवास्तविक बिक्री लक्ष्य, और माता-पिता की यह हताशा कि उनके बच्चों का शैक्षणिक वर्ष खराब न हो, ने Byju’s के शैक्षिक कार्यक्रमों के लिए एक स्पष्ट लेकिन संदिग्ध रास्ता खोल दिया।

सितंबर 2021 में, यह खुलासा हुआ कि कैसे Byju’s के बिक्री प्रतिनिधि माता-पिता को अपने लक्ष्यों को पूरा करने के लिए जाल में फँसा रहे थे। माता-पिता पर निजी फर्मों से ऋण लेने का दबाव डाला गया, बिना इस बात की जाँच किए कि वे इसे चुकाने में सक्षम होंगे या नहीं, विशेष रूप से उस समय जब अधिकांश कार्यबल के पास काम नहीं था।

रिपोर्टों के अनुसार, बिक्री प्रतिनिधि या व्यापार विकास कार्यकारी (BDE) अपराधबोध में फँसा कर गरीब और अशिक्षित माता-पिता को पैकेज खरीदने के लिए मजबूर करते हैं। The Morning Context में प्रकाशित एक लेख ‘How Byju’s catches parents’ के अनुसार, लेखक ने पूरे उस प्रक्रिया का वर्णन किया है जिससे बिक्री प्रतिनिधि कथित रूप से माता-पिता को जाल में फँसाते हैं।

बताया गया है कि बिक्री प्रतिनिधि अक्सर सख्त बिक्री रणनीति का इस्तेमाल करते हैं। वे किसी से भी संपर्क करते हैं और ऐप के लिए पंजीकरण करवाते हैं, यह सुनिश्चित करते हुए कि वे 15-दिनों की मुफ्त परीक्षण अवधि के बाद भी इसे उपयोग करते रहें। अतिशय कार्यभार से दबे और अवास्तविक लक्ष्यों को पूरा करने के लिए संघर्ष कर रहे बिक्री दल को लंबे कार्य घंटे बिताने पड़ते हैं। अक्सर, निचले मध्य वर्ग और अशिक्षित माता-पिता, एक बिक्री प्रतिनिधि द्वारा यह सुनकर ऋण लेने पर मजबूर हो जाते हैं कि अगर वे सीखने वाले ऐप के लिए साइन-अप नहीं करते, तो उनके बच्चे का भविष्य अंधकारमय होगा।

अभिभावकों का शोषण करने के लिए कुख्यात है Byju’s

Byju’s के साथ एक और समस्या यह थी कि यह अपने दो साझेदारों के माध्यम से ऋण विकल्प प्रदान करता है। कुछ मामलों में, उन्होंने कथित तौर पर माता-पिता को यह नहीं बताया कि वे जिस EMI विकल्प को ले रहे हैं, वह वास्तव में माता-पिता के नाम पर लिए गए ऋण के माध्यम से होगा। यदि कोई माता-पिता ईएमआई का भुगतान करने में असफल होते हैं, तो ऋण कंपनी उन्हें ऋण चुकाने की धमकी देना शुरू कर देती है। यह माता-पिता के CIBIL स्कोर को भी नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है। यदि कोई व्यक्ति पाठ्यक्रम की सदस्यता रद्द करना चाहता है, तो यह केवल पहले 15 दिनों में ही किया जा सकता है। यदि कोई छात्र कुछ महीनों बाद ऐप का उपयोग करना बंद कर देता है, तो माता-पिता को शेष ईएमआई का भुगतान करना पड़ता है, क्योंकि Byju’s पहले ही अपना पैसा प्राप्त कर चुका होता है और ऋण चुकाने की जिम्मेदारी माता-पिता पर होती है।

भारत में, जहाँ 1.3 अरब से अधिक की आबादी संसाधनों के लिए संघर्ष कर रही है, प्रतियोगिता हमेशा कड़ी होती है। अपने बच्चों के लिए एक बेहतर नौकरी और बेहतर जीवन सुनिश्चित करने के लिए माता-पिता अपनी कड़ी मेहनत से कमाई का एक बड़ा हिस्सा कोचिंग क्लासेज और निजी ट्यूशन पर खर्च करते हैं। भारत में एक पूरी इंडस्ट्री निजी कोचिंग के नाम पर फल-फूल रही है, जो नियमित शैक्षणिक घंटों के अलावा होती है, केवल प्रतियोगी और प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी के लिए। तकनीक और इंटरनेट कनेक्टिविटी के आगमन के साथ, निजी ट्यूशन की इंडस्ट्री अब एक विशाल एड-टेक इंडस्ट्री में विकसित हो गई है, जहां लाखों बच्चे और माता-पिता एक-दूसरे से आगे निकलने की दौड़ में शामिल हो रहे हैं।

कई खुलासों के बावजूद, Byju’s के बिक्री प्रतिनिधियों द्वारा शोषण जारी रहा। इस बीच, Byju’s ने छोटे एड-टेक कंपनियों का अधिग्रहण करना जारी रखा। यह स्पष्ट नहीं है कि यह प्रतिस्पर्धा को खत्म करने की रणनीति थी या Byju’s इन कंपनियों से तकनीकें अपनाने का इरादा रखता था। जब तक लगातार विज्ञापन खर्च और अन्य कारक प्रभाव डालने लगे, तब तक स्कूल दोबारा खुल चुके थे। अब जबकि बच्चे नियमित स्कूल जा रहे थे, Byju’s की कक्षाओं के लिए माता-पिता का चयन करने की संख्या में भारी गिरावट आई।

कंपनी, जिसने 2021 में 10,000 करोड़ रुपए कमाने की उम्मीद की थी, ने 2024 में रिपोर्ट के अनुसार कर्मचारियों के वेतन से TDS कटौती के बावजूद इसे सरकार के पास जमा नहीं किया। 24 महीनों में, कंपनी ने शिक्षा क्षेत्र में खराब निर्णयों और अचानक हुए परिवर्तनों के कारण अपनी 90% वैल्यूएशन खो दी।

नवंबर 2023 में, भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने भारतीय क्रिकेट टीम की स्पॉन्सरशिप से संबंधित बकाया राशि को लेकर Byju’s के खिलाफ नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) में मामला दायर किया। Byju’s 2019 से भारतीय क्रिकेट टीम का पार्टनर था और उसकी ब्रांडिंग टीम की जर्सी पर दिखाई देती थी। Byju’s के BCCI के साथ स्पॉन्सरशिप अधिकारों को जून 2022 में बढ़ाया गया था और यह पिछले साल नवंबर में समाप्त हो गया। कंपनी ने कथित तौर पर बोर्ड से 140 करोड़ रुपए की बैंक गारंटी भुनाने और शेष 160 करोड़ रुपए किस्तों में चुकाने का अनुरोध किया था।

सूत्रों के हवाले से आई रिपोर्टों में कहा गया है कि BCCI ने इस विकास की पुष्टि की है लेकिन जोड़ा कि उन्होंने अभी तक कोई समाधान नहीं निकाला है। BCCI के अलावा, Byju’s के इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) और FIFA के साथ भी ब्रांडिंग साझेदारी थी। तीनों का नवीनीकरण इस साल होना था लेकिन कंपनी ने पुष्टि की कि वह किसी भी साझेदारी का नवीनीकरण नहीं करेगी।

NCPCR भी कंपनी की हरकतों को लेकर जारी की जा चुकी है नोटिस

दिसंबर 2022 में, शीर्ष बाल अधिकार निकाय राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने CEO Byju Raveendran को समन भेजा, उन पर आरोप लगाते हुए कि वे माता-पिता और बच्चों को अपने पाठ्यक्रम खरीदने के लिए लुभाने के लिए गलत तरीकों का उपयोग कर रहे हैं। आयोग ने सीईओ से व्यक्तिगत रूप से उसके समक्ष उपस्थित होने का आग्रह किया और Byju’s द्वारा बच्चों को प्रदान किए गए सभी पाठ्यक्रमों के बारे में जानकारी प्रस्तुत करने के लिए कहा, जिसमें उनके पाठ्यक्रम संरचना, शुल्क, वर्तमान में प्रत्येक पाठ्यक्रम में नामांकित छात्रों की संख्या और इसकी रिफंड पॉलिसी का विवरण शामिल हो।

आयोग ने देखा कि माता-पिता/बच्चों को ऋण आधारित समझौतों में शामिल करने और फिर शोषण करने के लिए गलत तरीकों का इस्तेमाल बच्चों के कल्याण के खिलाफ है और CPCR अधिनियम, 2005 की धारा 13 और 14 के तहत अपने कार्यों और शक्तियों का पालन करते हुए, आयोग ने आपसे अनुरोध किया है कि आप व्यक्तिगत रूप से इसके समक्ष उपस्थित हों और BYJU’S द्वारा बच्चों के लिए चलाए जा रहे सभी पाठ्यक्रमों का विवरण, इन पाठ्यक्रमों की संरचना और शुल्क विवरण, प्रत्येक पाठ्यक्रम में वर्तमान में नामांकित छात्रों की संख्या, BYJU’S की रिफंड नीति, BYJU’S को एक वैध एड-टेक कंपनी के रूप में मान्यता के संबंध में कानूनी दस्तावेज और समाचार रिपोर्ट में किए गए दावों से संबंधित अन्य सभी प्रासंगिक दस्तावेजों के साथ 23 दिसंबर, 2022 को 1400 बजे तक इस मामले से संबंधित विसंगतियों को स्पष्ट करने के लिए प्रस्तुत हों – ऐसा NCPCR के आदेश में कहा गया।

मार्च 2024 में, कंपनी ने बेंगलुरु मुख्यालय को छोड़कर अपने सभी कार्यालयों को खाली कर दिया, जहाँ 1000 कर्मचारी अभी भी काम कर रहे थे। इसने अपने कर्मचारियों को घर से काम करने का आदेश दिया। हालाँकि, कंपनी ने अपने कार्यालय बंद कर दिए, लेकिन कक्षा 6-10 के छात्रों के लिए इसके लगभग 300 ट्यूशन सेंटर का संचालन जारी रखा।

जनवरी 2024 में, कंपनी के प्रमुख हितधारकों ने बायजू रवीन्द्रन को मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के पद से हटाने और उनके अधिकार छीनने के लिए मतदान किया। यह निर्णय एक विशेष बैठक के दौरान लिया गया, जिसमें रवींद्रन और उनके परिवार के सदस्य शामिल नहीं हुए थे।

Byju Raveendran ने अपने निष्कासन का विरोध किया, यह दावा करते हुए कि प्रस्ताव असाधारण आम बैठक के दौरान पारित किया गया था, जिसमें केवल ‘चुने हुए कुछ शेयरधारकों का एक छोटा समूह’ शामिल था। इसके अलावा, एक बयान में, कंपनी ने कहा, “Byju’s दृढ़ता से घोषणा करता है कि हाल ही में संपन्न असाधारण आम बैठक के दौरान पारित प्रस्ताव अवैध और अप्रभावी हैं।”

संस्थापक और पूर्व सीईओ, Byju Raveendran ने Deloitte के कॉर्पोरेट गवर्नेंस के बारे में चिंताओं और संयुक्त राज्य अमेरिका में ऋणदाताओं के साथ कानूनी विवाद सहित संकटों की एक श्रृंखला के बाद प्रमुख निवेशकों का समर्थन खो दिया।

नियमों का उल्लंघन कर विदेशी में निवेश

फरवरी 2024 में, बेंगलुरु इकाई, जो विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के संभावित उल्लंघनों की जाँच कर रही थी, ने निष्कर्ष निकाला कि रवींद्रन को देश छोड़ने से रोकने के लिए एलओसी की आवश्यकता है। पिछले तीन वर्षों में रवींद्रन ने ज्यादातर समय दिल्ली और दुबई के बीच यात्रा करते हुए बिताया है। स्थिति की जानकारी रखने वालों ने दावा किया कि वह इस सप्ताह की शुरुआत में बेंगलुरु गए थे। पिछले सप्ताह रवींद्रन एक कार्य यात्रा के लिए दिल्ली में थे, उक्त सूत्रों के अनुसार जिन्होंने समाचार एजेंसी को जानकारी दी थी। इकोनॉमिक टाइम्स से बात करते हुए, रवींद्रन ने दावा किया कि वह इस समय दुबई में हैं। उन्होंने कहा था कि वह इस सप्ताह की शुरुआत में अमीरात के लिए रवाना हुए थे और यह भी कहा कि “मैं कल सिंगापुर की यात्रा करूंगा”।

पहले उल्लेख किए गए व्यक्तियों में से एक ने आरोप लगाया कि एलओसी के लिए BOI में आवेदन करने का निर्णय ‘निवेशकों के हित’ को ध्यान में रखते हुए लिया गया था। एक शीर्ष सरकारी अधिकारी के अनुसार, एक बार जब एलओसी जारी हो जाता है, तो भले ही रवींद्रन विदेश में हों, वापस आने के बाद उन्हें देश छोड़ने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उस व्यक्ति ने कहा, “एलओसी खुलने के बाद यह सुनिश्चित किया जाएगा कि निवेशकों का हित सुरक्षित रहे और बिना किसी कठिनाई के मामले को उसके तार्किक निष्कर्ष तक पहुँचाया जा सके।”

Think & Learn Pvt Ltd, जो Byju’s और रवींद्रन की मूल कंपनी है, को पिछले साल नवंबर में एजेंसी द्वारा 9362.35 करोड़ रुपए के कथित FEMA उल्लंघनों के बारे में कारण बताओ नोटिस दिए गए थे। उस समय एक बयान में, ED ने कहा था कि कई आरोपों के जवाब में जाँच की गई थी, जिसमें Byju’s के विदेशी निवेश और उसके व्यापार व्यवहार के बारे में जानकारी दी गई थी।

ईडी ने रेखांकित किया, “कंपनी ने भारत के बाहर भी बड़े पैमाने पर विदेशी प्रेषण और विदेशों में निवेश किया था, जो कथित तौर पर FEMA, 1999 के प्रावधानों का उल्लंघन कर रहे थे और भारत सरकार को राजस्व का नुकसान हुआ था।” पिछले साल 27 और 28 अप्रैल के दौरान, एजेंसी ने Byju’s की सुविधाओं के साथ-साथ रवींद्रन के घर की तलाशी ली थी। कंपनी द्वारा किए गए घरेलू और विदेशी निवेश से संबंधित दस्तावेज जब्त किए गए थे।

कंपनी के साथ क्या हो रहा था, इस सब के बीच, एक घटना ने सभी का ध्यान आकर्षित किया जब एक परिवार ने Byju’s के कार्यालय में लगे टीवी को हटा लिया क्योंकि कंपनी ने लर्निंग प्रोग्राम के लिए रिफंड देने से इनकार कर दिया था। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, वीडियो में दिखाई दे रहे परिवार ने अपने बेटे के लिए टैबलेट और लर्निंग प्रोग्राम के लिए रिफंड का अनुरोध किया था, लेकिन उन्होंने उसका उपयोग नहीं किया था। अपना पैसा वापस पाने के कई हफ्तों के प्रयास के बाद और कई बाधाओं को पार करने में असफल रहने के बाद, गुस्साए परिवार ने एडटेक कंपनी के कार्यालय में घुसकर वहां लगे टीवी को हटा लिया। वीडियो में दिख रहे पुरुष ने ऑफिस स्टाफ से कहा कि जब उसका रिफंड चुका दिया जाएगा तो वह टीवी वापस ले जाए।

(इस लेख को मूल रूप से हमारी अंग्रेजी वेबसाइट पर प्रकाशित किया गया था, जिसे आप यहाँ क्लिक कर पढ़ सकते हैं।)

नीतीश कुमार, शरद पवार, महबूबा मुफ्ती… सब ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ के समर्थन में, कोविंद कमिटी की रिपोर्ट पर मोदी सरकार की मुहर: शीतकालीन सत्र में बिल की संभावना

मोदी कैबिनेट ने एक देश एक चुनाव (ONOE) को लेकर पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद वाली समितियों की सिफारिशें मान ली हैं। देश में एक साथ विधानसभा-लोकसभा चुनाव करवाने की तरफ बढ़ाए गए इस कदम को लेकर अब शीतकालीन सत्र में बिल पेश किया जाएगा।

नई दिल्ली में बुधवार (18 सितम्बर, 2024) को हुई कैबिनेट बैठक में रिपोर्ट के आधार पर एक देश एक चुनाव को मंजूरी दी गई। कैबिनेट के इस फैसले को लेकर केन्द्रीय रेल और आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि सरकार दो चरण में एक देश एक चुनाव को लागू करना चाहती है।

अश्विनी वैष्णव ने कहा कि पहले चरण में देश में लोकसभा-विधानसभा चुनाव एक साथ करवाए जाएँगे। इसके बाद दूसरे चरण में पंचायत और निकाय चुनाव एक साथ सम्पन्न करवाए जाएँगे। वैष्णव ने कहा, “कमिटी ने एक देश एक चुनाव पर बनाई गई कमिटी की संस्तुतियों को स्वीकार कर लिया है।”

उन्होंने आगे कहा, “1951 से 1967 के बीच एकसाथ चुनाव होते थे। 1999 में विधि आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि विधानसभा और लोकसभा चुनाव एक साथ हों, इससे विकास होता रहे और खर्च कम हो तथा साथ ही जो पुलिस और कानून व्यवस्था की सस्म्या होती है वह नहीं हो।”

उन्होंने आगे बताया, “इसको लेकर संसदीय समिति ने भी दो चरण में चुनाव करवाने की संस्तुति दी थी, इसीलिए पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में एक कमिटी बनाई गई थी। उसने अलग-अलग क्षेत्र के विशेषज्ञों और नेताओं से भी बातचीत की। कमिटी के सामने अधिकांश देशों ने एक देश-एक चुनाव का समर्थन किया है।”

एक देश एक चुनाव को लेकर तैयार की गई रिपोर्ट के अनुसार, 2019 में हुई एक सर्वदलीय बैठक में 19 दलो शामिल हुए थे। रिपोर्ट में बताया गया है कि इसमें 16 दल एक देश एक चुनाव के पक्ष में थे जबकि 3 दल इसके विरोध में थे। समर्थन करने वालों में PDP, NCP और BRS भी शामिल थे। वहीं AIMIM, RSP और CPM ने इसका विरोध किया था।

एक देश एक चुनाव को लेकर सरकार ने कहा कि वह एक समान वोटर लिस्ट बनाएगी। सरकार का कहना है कि वह लोकतंत्र में एक साथ मिलकर इस बड़े निर्णय को लागू करना चाहती है जिससे देश की प्रगति जारी रहे। सरकार ने यह भी कहा कि वह आगे इस संबंध में आम सहमति बनाने का प्रयास करेगी।

कॉन्ग्रेस, आम आमदी पार्टी समेत कई दलों ने कैबिनेट के इस प्रस्ताव का विरोध किया है। कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि वह इसे नहीं मानते हैं और लोकतंत्र में यह नहीं चलेगा। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र को चलाने के लिए जब चाहिए तब चुनाव करवाना पड़ेगा।