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प्रयागराज के मदरसे पर चलेगा बुलडोजर, सीलिंग के बाद निकाले गए कर्मचारी-छात्र: चल रहा था जाली नोट का कारखाना, दी जाती थी हिंदू विरोधी तालीम

प्रयागराज प्रशासन ने हाल ही में जामिया हबीबिया मदरसा पर एक बड़ी कार्रवाई करते हुए उसे सील कर दिया और ध्वस्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। जामिया हबीबिया मदरसा में 2700 वर्गफुट पर अवैध निर्माण किया गया है। इसके अलावा, मदरसे में नकली नोटों की छपाई, आतंकवादी गतिविधियों के लिए फंडिंग, और विदेशों से अवैध रूप से पैसे आने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं, जिसके बाद ये मदरसा प्रशासन की नजर में आया था। इस मदरसे में कट्टरपंथी तालीम दी जा रही थी, जिसके लिए विदेशों से फंडिंग आती थी। यही नहीं, ये मदरसा यूपी सरकार के पास पंजीकृत भी नहीं है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब प्रयागराज के मदरसा जामिया हबीबिया मस्जिदे आजम को जमींदोज करने की तैयारी हो रही है। अवैध निर्माण के चलते प्रयागराज विकास प्राधिकरण (PDA) ने बुधवार (4 सितंबर 2024) को मदरसे को सील कर दिया था। प्रशासन के मुताबिक, यह मदरसा बिना किसी वैध अनुमति के बनाया गया था, और इसके निर्माण के लिए किसी भी सरकारी एजेंसी से मंजूरी नहीं ली गई थी। यह मदरसा करीब 1.5 बीघा जमीन पर बना है, जो नियमों के खिलाफ है। जमीन की अनुमानित कीमत ₹100 करोड़ से अधिक आँकी गई है। सूत्रों के मुताबिक, पीडीए ने मदरसे के जिम्मेदारों को अवैध निर्माण पर जवाब देने के लिए कहा है। संतोषजनक जवाब न मिलने पर मदरसे के अवैध निर्माण पर पीडीए की टीम जल्‍द ही बुलडोजर चला सकती है।

जानकारी के मुताबिक, प्रयागराज के अतरसुईया में संचातिल जामिया हबीबिया मदरसे में करीब सौ छात्र इस्लामिक शिक्षा ले रहे थे, इसमें से 70 छात्र मौजूद थे, जिन्हें उनके घर भेज दिया गया है। जामिया हबीबिया मदरसा 84 साल पुराना है। इसकी मान्यता यूपी मदरसा बोर्ड से नहीं ली गई थी। यह मदरसा सिर्फ सोसाइटी के रजिस्ट्रेशन पर संचालित हो रहा था। जामिया हबीबिया मदरसे में 28 अगस्त को नकली नोट की फैक्ट्री पकड़ी गई थी। जिसमें मदरसे का कार्यवाहक प्रिंसिपल मौलवी मोहम्मद तफसीरुल आरीफीन भी गिरफ्तार हुआ था। मदरसे में नकली नोटों की फैक्ट्री पकड़े जाने के बाद आईबी और दूसरी जाँच एजेंसियाँ भी सक्रिय हो गयी हैं।

आरोप है कि जामिया हाबिया के मदरसे के प्रिंसिपल तफसिरुल और मदरसे के मौलाना ज़ाहिर खान ने ही नकली नोट की फैक्ट्री मदरसे में शुरू की थी। प्रिंसिपल के कमरे से सौ-सौ रुपये के एक लाख 30 हज़ार के नकली नोट बरामद हुए थे, जबकि बाद में प्रिंसिपल के कमरे से स्पीड पोस्ट की पर्चियाँ और कुछ भड़काऊ किताबें मिली थी। इस भड़काऊ किताब को लेकर खुफिया एजेंसियां भी मौलाना और मदसे के प्रिंसिपल के कट्टरपंथी संगठनों से रिश्ते की जाँच कर रही है।

सीलिंग के लगभग आधे घंटे के बाद प्रयागराज विकास प्राधिकरण की टीम भी मदरसे पर पहुँची। प्राधिकरण ने वहाँ मदरसे के अवैध होने का बोर्ड लगा दिया। इस बोर्ड पर लिखा था, “अनधिकृत होने के कारण यह निर्माण सील किया गया है। इस निर्माण में सील को तोड़ना, पुनः निर्माण की कोशिश करना तथा किसी प्रकार का क्रय-विक्रय करना अवैधानिक एवं दंडनीय अपराध है।”

प्रयागराज में बिना मान्यता के 72 मदरसे, कार्रवाई होनी तय

इन सब के बीच प्रयागराज में मदरसों पर बड़ा खुलासा हुआ है। प्रयागराज जिले में 72 मदरसे बिना मान्‍यता के संचालित पाए गए हैं। इन भी एक्‍शन की तैयारी शुरू हो चुकी है। मदरसा जामिया हबीबिया मस्जिदे आजम में नकली नोट छापने के खुलासे के बाद प्रयागराज जिले में संचालित 267 मदरसों में 72 बिना मान्‍यता के चलते पाए गए हैं। अल्पसंख्यक विभाग ने बिना मान्यता के मदरसों का डेटा शासन को भेज दिया है। माना जा रहा है कि जल्द ही बिना मान्यता वाले इन मदरसों के खिलाफ एक्शन शुरू होगा।

गौरतलब है कि प्रयागराज पुलिस द्वारा इस मदरसे में नकली नोट छापने का खुलासा किया था। इसके बाद IB और ATS की टीम जाँच में शामिल हो गई है। मदरसे का मौलवी तफसीरुल पिछले 6 वर्षों से बच्चों को RSS विरोधी और मजहबी कट्टरपंथ का पाठ पठा रहा था। जाँच एजेंसियाँ यहाँ से पढ़ाई कर चुके 630 बच्चों की पड़ताल कर रही है।

जाँच के दौरान यह पता चला कि इस मदरसे को विभिन्न इस्लामी मुल्कों से फंडिंग की जा रही थी। जिन मुल्कों से इस मदरसे को फंडिंग मिल रही थी, उनमें तुर्किए, दुबई और अन्य अरब देश भी शामिल हैं। इन देशों से इस मदरसे को करोड़ों रुपए की फंडिंग की जा रही थी। पुलिस के रडार पर वो खातेदार भी हैं, जिनके एकाउंट में विदेशों से पैसे आते थे।

जिस कन्हैया लाल की अस्थि को विसर्जन का इंतजार, उनकी हत्या में गिरफ्तार जावेद को हाई कोर्ट ने दी जमानत: इसकी ही रेकी के बाद उदयपुर में काटा गया था हिंदू दर्जी का गला

उदयपुर में कन्हैया लाल तेली की हत्या करने में इस्लामी आतंकियों की मदद करने के आरोपित जावेद को जमानत मिल गई है। जावेद कन्हैया लाल के पड़ोस की दुकान पर काम करता था। जावेद कन्हैया लाल की हर एक गतिविधि पर नजर रख रहा था।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, राजस्थान हाई कोर्ट के जस्टिस पंकज भंडारी और जस्टिस प्रवीर भंडारी ने जावेद को जमानत देने का आदेश दिया। जावेद ने इस संबंध में हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। याचिका में जावेद ने कहा था कि उसके खिलाफ मामले में पक्का सबूत नहीं है।

जावेद ने कहा कि उसे NIA ने बिना सबूतों के पकड़ा है। जावेद ने यह भी दावा किया कि उसके विरुद्ध कॉल डिटेल या CCTV फुटेज में सबूत नहीं है और वह लम्बे समय से जेल में बंद है। ऐसे में उसे जमानत दे दी जाए। उसकी अपील का विरोध भी हुआ। कोर्ट में सरकारी वकील ने कहा कि वह हत्यारों के मुखबिर तंत्र में शामिल था और उसे जमानत नहीं मिलनी चाहिए।

हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान सरकारी वकील की दलील को नहीं माना और जावेद को जमानत दिए जाने का आदेश दिया। इससे पहले एक और आरोपित को इस मामले में जमानत मिल चुकी है। आरोपित फरहाद मोहम्मद को इस मामले में जमानत मिली थी।

गौरतलब है कि 28 जून, 2022 को उदयपुर में दर्जी की दुकान करने वाले कन्हैया लाल तेली की गौस मुहम्मद और रियाज ने हत्या कर दी थी। इस मामले में NIA को जाँच सौंपी गई थी। कन्हैया लाल तेली की हत्या के मामले में मुख्य आरोपितों के अलावा उनके मददगारों को भी गिरफ्तार किया था।

इस मामले में NIA की चार्जशीट में जावेद के रोल के बारे में बताया गया था। NIA चार्जशीट में बताया गया था कि 19 साल के जावेद को कन्हैया लाल की हत्या की साजिश में शामिल किया गया था। जावेद का काम कन्हैया लाल की गतिवधियों पर नजर रखना था।

जावेद कन्हैया लाल की दुकान के पास ही एक चूड़ी की दुकान पर काम करता था। उसने कातिलों को कन्हैया लाल द्वारा दुकान पर की जा रही पूरी दिनचर्या की जानकारी लगातार अपडेट की। आरोप है कि जावेद की जानकारी के आधार पर ही दोनों हत्यारे आगे बढ़े।

कन्हैया लाल हत्याकांड के मामले में अभी तक मुकदमा चल ही रहा है। इस मामले में साजिशकर्ताओं और हत्यारों को सजा नहीं सुनाई गई है। इस कारण से कन्हैया लाल का परिवार निराश हो चुका है। कन्हैया लाल के बड़े बेटे यश साहू ने प्रण लिया था कि वह तब तक अपने पिता के हत्यारों की अस्थियाँ विसर्जित नहीं करेंगे जब तक हत्यारों को फांसी ना हो जाए।

इसके अलावा यश साहू ने नंगे पैर रहने और साथ ही केश ना कटवाने का निर्णय लिया है। ऐसे में अब तक कन्हैया लाल का परिवार न्याय की राह तक रहा है, उनके बेटे नंगे पैर चल रहे हैं और अस्थियाँ गंगाजी में जाने की राह तक रही हैं। लेकिन इस बीच जावेद को जमानत मिल रही है।

नाम है सुमैया खान, लेकिन शालू बनकर लड़कों को फँसाती थी… पहली बार मुस्लिम युवक बना शिकार फिर हुआ हनी ट्रैप गैंग का खुलासा: रुहीना खान करवाती थी मामला सेटल, मास्टरमाइंड है फिरोज

उत्तर प्रदेश के मेरठ से हनी ट्रैप कर उगाही करने वाला ऐसा गिरोह पकड़ा गया है, जो अमीर लड़कों की पहचान करता, उन्हें अपने ट्रैप में फाँसता और फिर लाखों की उगाही करता। इस गिरोह का मास्टरमाइंड फिरोज नाम का युवक है, जिसमें हिंदू पहचान के साथ सुमैया खान उर्फ शालू लड़कों से संबंध बनाती थी और फिर फिरोज के साथ रुहीना खान उर्फ सिमरन और बाकी के सदस्य उगाही किया करते थे। खास बात ये है कि गिरोह अधिकतर हिंदू लड़कों को अपनी जाल में फंसाता था। हालाँकि मेरठ में जिस काँड में वो पकड़े गए, उन्होंने तब आकिल नाम के मुस्लिम युवक को अपना शिकार बनाया था।

ये मामला तब खुला, जब मेरठ के परतापुर थाने में ये गिरोह खुद ही पहुँच गया और रेप का मुकदमा दर्ज करने का दबाव बनाने लगा परतापुर पुलिस को शक होने पर जब कड़ाई से पूछताछ की गई, तब हनी ट्रैप का मामला सामने आ गया। इस दौरान गैंग के सदस्यों ने भागने की भी कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें दबोच लिया। पुलिस ने कुल 7 लोगों को गिरफ्तार किया है और गिरोह के पास से कार, बाइक, नकली आधार कार्ड व सात मोबाइल बरामद किए हैं।

जानकारी के मुताबिक, रात के वक्त गैंग की सदस्य दिल्ली की रहने वाली सुमैया शालू बनकर और दूसरी महिला रूहीना रेकी किए गए नंबर पर मिस्ड कॉल करती थी। मिस्ड कॉल देखकर सामने वाला व्यक्ति कॉल करता था तो उसे सॉरी बोलकर फोन रख दिया जाता था। लेकिन इसके बाद फिर मैसेज या मिस्ड कॉल की जाती थी और यहीं से बातों का सिलसिला आगे बढ़ाया जाता था। मीठी-मीठी बातें करके लोगों को धीरे-धीरे जाल में फंसाया जाता था।

ये गैंग बेहद ही शातिर है, मिस्ड कॉल से शुरू हुई दोस्ती झूठे प्यार में बदलकर अवैध संबंधों तक पहुँच जाती थी। कई बार अवैध संबंध बनने के बाद पैसे की डिमांड शुरू होती थी। जब तक पैसा आ रहा है तो ठीक नहीं तो फिर दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज कराने की धमकी और या मुकदमा दर्ज कराकर ब्लैकमेलिग की डील शुरू होती थी।

एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह ने बताया कि परतापुर थाना क्षेत्र के एक शादीशुदा युवक ने रिपोर्ट दर्ज कराई। उसने बताया कि कुछ दिन पहले उसके मोबाइल पर एक महिला का फोन आया। महिला ने किसी जरूरी काम से मिलने की बात कही। युवक ने उसका फोन काट दिया। कुछ समय बाद युवक ने महिला को कॉल करके पूछा कि उसका नंबर कहां से मिला है। महिला ने बताया कि आपका नंबर मेरी सहेली रूहीना उर्फ सिमरन ने दिया है। फोन पर बात करते-करते दोनों दोस्ती की बात करने लगे। महिला ने अपना नाम शालू शर्मा बताया। तीन सितंबर की शाम छह वो युवक से मिलने के लिए मेरठ आ गई।

दिल्ली रोड रिठानी स्थित व्यू बैली होटल में दोनों ने कमरा लिया। युवक ने महिला से शारीरिक संबंध बनाए। होटल से बाहर आए तो शालू ने कहा कि यहां तो मेरे भइया, भाभी आ गए हैं। होटल के बाहर एक स्विफ्ट गाड़ी और बाइक खड़ी थी। उन लोगों ने युवक को जबरदस्ती गाड़ी में डाल लिया। दिल्ली रोड पर काफी देर तक घुमाते रहे। पिटाई करते हुए 50 लाख रुपये की माँग करने लगे। पैसे नहीं देने पर जान से मारने और दुष्कर्म के मुकदमे में फंसाने की धमकी दी। बाद में मामला 10 लाख रुपए में सेट हो गया। लेकिन जब पैसा नहीं मिला, तो दबाव बनाने के लिए युवक अकील को लेकर ये गिरोह परतापुर पुलिस थाने पहुँच गया।

परतापुर थाने पहुँचकर शालू शर्मा ने बताया कि वह यमुना नगर की निवासी है और परतापुर के युवक ने झांसे में लेकर मेरठ बुलाकर उससे रेप किया। बातचीत के दौरान दरोगा मोहित सक्सेना को शक हुआ। पुलिस ने युवक को बुलाया और दूसरी ओर होटल में जांँच शुरू की गई। इस दौरान शालू के साथ भाई-भाभी बनकर आए दोनों लोग थाने से निकल भागे। पुलिस ने पीछा करके इन्हें परतापुर फ्लाईओवर के पास दबोच लिया। जांच शुरू हुई और पीड़ित को थाने लाकर पूछताछ की तो उसने अगवा करने और 50 लाख रुपये की रकम मांगने की बात बताई। इसके बाद खुलासा हुआ कि यह पूरा गैंग हनीट्रैप में फंसाकर लोगों से वसूली करता है।

पुलिस की जांच में हनीट्रैप गैंग का बड़ा खुलासा हुआ। पता चला कि दिल्ली, वेस्ट यूपी, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और हिमाचल समेत कई राज्यों में यह गैंग सक्रिय है। 50 से ज्यादा लोगों को यह गैंग हनीट्रैप में फंसाकर वसूली कर चुका है। इस गिरोह में कई महिलाएं और अलग अलग जिलों के लोग शामिल हैं। लोगों को झांसे में लेकर गैंग की महिलाएं यौन संबंध बनाती थी। इसके बाद पीड़ित को उठाकर मुकदमे की धमकी दी जाती और वसूली की जाती थी। हालाँकि मेरठ में इस गिरोह का भंडाफोड़ हो गया।

आकिल की तहरीर पर अपहरण, रंगदारी, धमकी देने समेत कई गंभीर धारा में मुकदमा दर्ज किया है। महिला ने बनवाया हुआ था फर्जी आधार कार्ड महिला के पास से पुलिस ने तलाशी में शालू शर्मा नाम का आधार कार्ड बरामद हुआ। इस आधार कार्ड में छेड़छाड़ कर बनाया गया था। पुलिस ने इस आधार पर बाकी धाराएं भी बढ़ाई हैं। बताया गया कि ये गिरोह अधिकतर हिंदू युवकों को शिकार बनाता था, लेकिन आकिल के मामले में इनकी पोल खुल गई और पकड़े गए।

पुलिस ने इस मामले में 1-आसिफ निवासी बी-426 गली-8, राजीव नगर थाना हर्ष विहार पूर्वी दिल्ली, 2-फिरोज निवासी सी-306 राजीव नगर बैक कालोनी मंडावली, थाना हर्ष विहार दिल्ली, 3-फहीम निवासी 8/जी शहीदनगर साहिबाबाद , गाजियाबाद, 4-अनिकेत निवासी सैनिक कॉलोनी, कसेरूखेडा, थाना लालकुर्त्ती मेरठ 5. दीपक निवासी डीलना, थाना भोजपुर गाजियाबाद के साथ ही सुमैया खान उर्फ शालू शर्मा, रुहीना खान उर्फ सिमरन निवासी दिल्ली को गिरफ्तार किया है।

एसपी सिटी मेरठ आयुष विक्रम सिंह ने बताया कि इस गिरोह के पास से जो मोबाइल फोन बरामद हुए हैं उसमें कुछ वीडियो भी मिली हैं जबकि काफी वीडियो गैंग की महिलाओं ने डिलीट भी कर दी थी। पूरे गैंग से पूछताछ में कई बड़ी जानकारियाँ हाथ लगी हैं। कितने लोगों को निशाना बनाया और कितना पैसा ठगा इसकी जाँच कर रहें हैं। हनी ट्रैप में फंसाकर कितने लोगों पर दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज कराया गया है, उसकी भी जाँच की जा रही है।

हिरोइन को भेजी अपने लिंग की तस्वीर, लिखा- मैं दर्शन से बेहतर… बदले में ऐसी मौत दी कि रूह काँप जाए: पवित्रा गौड़ा के कारण ही रेणुकास्वामी का मर्डर, चार्जशीट पेश

कन्नड़ एक्टर दर्शन, उसकी गर्लफ्रेंड पवित्रा गौड़ा और बाकी साथियों ने गंदे मैसेज भेजने वाले रेणुकास्वामी को यातनाएँ देकर मारा था। रेणुकास्वामी को झूठ के आधार पर बेंगलुरु बुलाया गया था और फिर उसे लगातार अलग-अलग तरह की शारीरिक यातनाएँ दी गईं। जब इससे भी मन नहीं भरा तो हत्या कर दी गई। यह सारे खुलासे इस मामले में दाखिल चार्जशीट से हुए हैं। मामले में पुलिस ने 17 आरोपितों के विरुद्ध 3991 पन्नों की एक चार्जशीट दायर की है।

पुलिस ने जो चार्जशीट दाखिल की है, उससे काफी डरावनी जानकारियाँ सामने आई हैं। चार्जशीट के अनुसार, मृतक रेणुकास्वामी एक्टर दर्शन की गर्लफ्रेंड पवित्रा गौड़ा से नफरत करता था। वह दर्शन का बड़ा फैन था और मानता था कि रेणुकास्वामी के कारण दर्शन का पारिवारिक जीवन तबाह हो गया है। वह पवित्रा गौड़ा को दर्शन से दूर करना चाहता था। इसके लिए वह लगातार पवित्रा गौड़ा को परेशान करता था। चार्जशीट में बताया गया है कि वह एक फेक आईडी बना कर पवित्रा गौड़ा को मैसेज करता था।

पवित्रा गौड़ा इससे परेशान थी। एक दिन रेणुकास्वामी ने अपने लिंग की तस्वीर पवित्रा गौड़ा को भेज दी थी। उसने कहा कि वह दर्शन से बेहतर है। वह @gautamks_1990 नाम से एक आईडी बनाकर पवित्रा गौड़ा को परेशान करता था। चार्जशीट में बताया गया है कि पवित्रा ने एक दिन दर्शन के मैनेजर पवन को इस मामले से निपटने को कहा था। पवन ने यह बात दर्शन तक पहुँचा दी। इससे दर्शन आग बबूला हो गया और रेणुकास्वामी को सजा देने के लिए प्लान बनाने लगा।

उसने अपने साथियों के माध्यम से रेणुकास्वामी को बेंगलुरु बुलाने का प्लान बनाया। इसके लिए एक व्यक्ति ने रेणुकास्वामी से बातचीत करना चालू किया। उसने रेणुकास्वामी से वादा किया कि वह उसे दर्शन से मिलवाएगा और फोटो भी खिंचवाएगा। उसने रेणुकास्वामी की सारी जानकारी इन्स्टाग्राम के माध्यम से ही इकट्ठा कर ली। इसके बाद उसने रेणुकास्वामी को चित्रदुर्गा से बुलवा लिया। चित्रदुर्गा से बाहर निकलते ही रेणुकास्वामी को दर्शन के लोगों ने पकड़ लिया।

रेणुकास्वामी को इसके बाद बेंगलुरु लाया गया। यहाँ उसे एक पार्किंग वाली जगह पर रखा गया। रेणुकास्वामी को यहाँ लाने के बाद दर्शन और पवित्रा गौड़ा को बुलाया गया। एक्टर दर्शन का कहना था कि वह रेणुकास्वामी को उसके कामों की सजा देगा। दर्शन ने यहाँ पहुँच कर रेणुकास्वामी को परेशान करना चालू किया। दर्शन और उसके साथियों ने यहाँ रेणुकास्वामी को यातनाएँ देना चालू किया। रेणुकास्वामी को यहाँ बिजली के झटके दिए गए। एक विशेष मशीन से उसके गुप्तांगों को बिजली के लगातार झटके दिए जाते रहे।

चार्जशीट में बताया गया है कि दर्शन समेत बाकी लोगों ने रेणुकास्वामी को आसपास खड़ी गाड़ियों में लड़ाया। उसके शरीर पर कई जगह वार किए, कई अंगों को नुकसान पहुँचाया गया। उसके मुंह में मांसाहारी भोजन डाला गया। रेणुकास्वामी इस बीच गिड़गिडाता रहा। उसने मना किया कि वह मांस नहीं खाता। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में रेणुकास्वामी के सर पर भी चोट निकली है। दर्शन और उसके साथियों की प्रताड़ना के कारण रेणुकास्वामी की मौत हो गई। इसके बाद इन लोगों ने उसकी लाश को फिंकवा दिया।

बेंगलुरु पुलिस की चार्जशीट में कई फोटो भी दाखिल किए गए हैं, जिनमे रेणुकास्वामी बुरी हालत में है। यह तस्वीरें उसको यातनाएँ देने के बाद ली गईं थी। कुछ तस्वीरें वायरल भी हुई हैं। रेणुकास्वामी का खून दर्शन और पवित्रा के कपड़ों पर भी मिला है। यह दोनों इस समय इस मामले में जेल में बंद हैं। अब चार्जशीट दाखिल होने के बाद उनके विरुद्ध मामला चलेगा।

‘यदि भारत नहीं पसंद तो बंद कीजिए अपना धंधा’: जानिए Wikipedia को ब्लॉक करने की क्यों मिली चेतावनी, ANI ने क्यों दिल्ली हाई कोर्ट में किया है केस?

दिल्ली हाई कोर्ट ने गुरुवार (5 सितंबर 2024) को विकिपीडिया (Wikipedia) को कोर्ट की अवमानना ​​का नोटिस जारी किया। कोर्ट ने संस्थान को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर वह भारतीय न्यायापालिका की बातों को नहीं मानेगा तो भारत में उसका व्यवसाय बंद करने के लिए सरकार को निर्देश देगा। कोर्ट ने कहा, “अगर भारत पसंद नहीं है तो यहाँ से अपना बंद कर लीजिए।”

दरअसल, यह मामला न्यूज एजेंसी ANI से जुड़े केस से संबंधित है। ANI के विकिपीडिया पेज पर किसी ने अपमानजनक एडिट कर दिया था। इसको लेकर ANI ने प्लेटफॉर्म से कहा था कि वह उस शख्स का नाम बताए, जिसने उसके पेज को एडिट किया था। इसको लेकर कोर्ट में मामला चला और कोर्ट ने ऐसा करने के लिए विकिपीडिया को आदेश दिया। हालाँकि, प्लेटफॉर्म ने कोर्ट के आदेश को नहीं माना था।

दिल्ली हाई कोर्ट के न्यायाधीश नवीन चावला ने इस मामले में विकिपीडिया के वकील की इस दलील पर कड़ी आपत्ति जताई कि उन्हें अदालत में पेश होने में समय लगा, क्योंकि यह संस्था भारत में स्थित नहीं है। कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि वह इस मामले को और बर्दाश्त नहीं करेगा। कोर्ट ने कहा कि वह जरूरी हुआ सरकार से इसे देश में बंद करने के लिए कहेगा।

जस्टिस चावला ने कहा, “मैं अवमानना ​​का मुकदमा चलाऊँगा। यह प्रतिवादी विकिपीडिया के भारत में इकाई नहीं होने का सवाल नहीं है। हम यहाँ आपके व्यापारिक लेन-देन बंद कर देंगे। हम सरकार से विकिपीडिया को ब्लॉक करने के लिए कहेंगे। पहले भी आप लोगों ने यह तर्क दिया है। अगर आपको भारत पसंद नहीं है तो कृपया भारत में काम न करें।”

कोर्ट ने विकिपीडिया के अधिकृत प्रतिनिधि को अगली सुनवाई के दौरान कोर्ट में उपस्थित रहने को कहा है। इस मामले की अगली सुनवाई कोर्ट ने 25 अक्टूबर 2024 को निर्धारित की है। इससे पहले समन जारी होने के बाद विकिपीडिया का प्रतिनिधि 20 अगस्त 2024 को न्यायालय के समक्ष उपस्थित हुआ था।

क्या है विकिपीडिया और ANI के बीच विवाद?

समाचार एजेंसी ANI ने विकिपीडिया के ऊपर 2 करोड़ रुपए का मानहानि मुकदमा दायर किया है। एएनआई का आरोप है कि विकिपीडिया अपने प्लेटफॉर्म पर उसके लिए अपमानजनक एडिटिंग करने की लोगों को अनुमति दे रहा है। ANI के पेज पर उसे समाचार एजेंसी की जगह सरकार का प्रचार उपकरण कह दिया गया है। इसको लेकर ANI ने दिल्ली हाईकोर्ट में केस दायर किया है।

ANI ने आरोप लगाया है कि विकिपीडिया अपने प्लेटफॉर्म पर मौजूद समाचार एजेंसी के पेज पर कथित रूप से अपमानजनक सामग्री प्रकाशित करवा रहा है और उन्होंने कोर्ट से इसी सामग्री को हटाने व रोकने की माँग की है। इसके साथ ही अभी तक जो एडिटिंग करके अपमान किया गया उस पर 2 करोड़ रुपए का हर्जाना देने को कहा।

विकिपीडिया पर लिखा है- ये साइट (ANI) वर्तमान में केंद्र सरकार के लिए प्रचार उपकरण के रूप में काम करने, फर्जी समाचार वेबसाइटों के विशाल नेटवर्क से सामग्री वितरित करने और घटनाओं की गलत रिपोर्टिंग करता है। इसके अलावा विकिपीडिया पर ANI के नए प्रबंधन पर भी कई तरह के आरोप लगाए गए हैं।

इसके पेज पर यह भी लिखा गया है कि ANI का नया प्रबंधन द्वारा पत्रकारिता का आक्रमक मॉडल इस्तेमाल किया जा रहा है, जहाँ सिर्फ और सिर्फ फोकस अधिक रेवेन्यू पर है। इसके साथ ही इसके कई पूर्व कर्मचारियों ने यहाँ के मैनेजमेंट पर गलत एवं अमानवीय बर्ताव करने का आरोप लगाया है।

घर में माँ-बाप के सामने पड़ा था बेटी का शव और वे दे रहे थे पैसे… क्या यही है बंगाल पुलिस की मानवता: डॉक्टर बिटिया के अपने पूछ रहे सवाल, क्या ममता बनर्जी सरकार के पास है जवाब?

कोलकाता के आरजी कर अस्पताल में हुई डॉक्टर की रेप-हत्या मामले में पीड़ित परिजनों ने गंभीर आरोप लगाकर एक बार फिर कोलकाता पुलिस पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मृतिका के माता-पिता ने जहाँ पुलिस पर घूस देने का आरोप लगाया है। वहीं पीड़िता की मौसी ने कोलकाता पुलिस की मानवता पर सवाल खड़े किए हैं।

सामने आई वीडियो और खबरों के अनुसार, पीड़िता की मौसी ने कहा, “जब घर में माता-पिता के सामने बेटी का शव पड़ा था, तब पुलिस पैसे दे रही थी, क्या यही पुलिस की मानवता है? जब तक अंतिम संस्कार नहीं हुआ, तब तक 300-400 पुलिसवाले हमें घेरे हुए थे, लेकिन अंतिम संस्कार के बाद वहाँ एक भी पुलिसकर्मी नहीं दिखा। परिवार क्या करेगा, वे कैसे घर जाएँगे, पुलिस ने कोई जिम्मेदारी नहीं ली। अंतिम संस्कार होने तक पुलिस सक्रिय थी और उसके बाद, वे पूरी तरह से गायब हो गए…क्या यही पुलिस की मानवता है। पुलिस ने कहा कि उन्होंने अपनी सारी जिम्मेदारियाँ पूरी कर दी हैं। क्या इसे ही जिम्मेदारी निभाना कहते हैं।”

बता दें क इससे पहले पीड़िता के माता-पिता ने भी कोलकाता पुलिस की भूमिका पर कई सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था, “पुलिस एकदम शुरुआत से ही केस को निपटाने का प्रयास कर रही है। हमें बॉडी को देखने की इजाजत भी नहीं थी। हमें उस समय भी थाने के बाहर इंतजार करना पड़ा जब शव को पोस्टमार्टम के लिए ले जाया जा रहा था। बाद में जब शव मिला तो एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने हमें पैसे देने की बात कही, जो हमने फौरन नकार दी।”

उन्होंने कहा था, “हमारी बेटी इस अस्पताल में खत्म हो गई। हम चाहते थे कि वह डॉक्टर बने, हमारे पास कई सवाल हैं। सुबह 11 बजे उन्होंने मुझे बताया कि उसने आत्महत्या कर ली है। हमें उसे देखने में 3 घंटे लग गए। हमने पुलिस से उसे देखने के लिए विनती की। उन्हें पोस्टमार्टम करने में देरी क्यों हुई? पीड़िता के पिता ने कहा कि शाम 6.40 से 7 बजे तक मैंने एफआईआर दर्ज की, उन्होंने एफआईआर देर से क्यों दर्ज की? उन्होंने अप्राकृतिक मौत क्यों दर्ज की?”

वहीं रिपोर्ट के मुताबिक, पीड़िता के चाचा ने भी बताया कि पुलिस ने उन लोगों से सफेद कागज पर साइन करने को कहा था, लेकिन परिवार ने इससे मना कर दिया और कागजों को फाड़ दिया। उन्होंने कहा कि बेटी को गए एक महीना होने वाला है लेकिन अभी तक इस मामले में कोई खुलासा नहीं हुआ।

बता दें कि पिछले महीने 9 अगस्त को आरजी कर अस्पताल में महिला डॉक्टर के साथ हुई रेप-हत्या मामले में पिछले दिनों बंगाल में काफी बवाल रहा था। महिला डॉक्टर के लिए इंसाफ माँगने जब लोग सड़कों पर उतरे तो उनके ऊपर भीड़ ने हमला कर दिया था। हालाँकि कल, फिर से कोलकाता में न्याय माँगने के लिए लोग सामने आए। इस बार सैंकड़ों की तादाद में इकट्ठा होकर लोगों ने कैंडल मार्च निकाला और पीड़िता को इंसाफ दिलाने की माँग की।

फंड 6 गुना कम, लेकिन ओलंपिक के मुकाबले अब तक जीत चुके हैं 4 गुना अधिक मेडल… पैरालंपिक खिलाड़ियों ने बताया क्या होता है ‘विनिंग माइंडसेट’, जानिए कैसे आया यह बदलाव

फ्रांस की राजधानी पेरिस में वर्तमान में (4 सितम्बर-8 सितम्बर) पैरालंपिक खेलों का आयोजन हो रहा है। इसमें दुनिया भर के दिव्यांग खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं। भारत से भी इन खेलों में 84 एथलीट भेजे गए हैं। भारत के इन खिलाड़ियों ने इस बार पुराने सारे रिकॉर्ड ध्वस्त करते हुए मेडल की झड़ी लगा दी है। शूटिंग से लेकर तीरंदाजी तक भारत को गोल्ड-सिल्वर मिल रहे हैं। उन खेलों में भी गोल्ड मेडल आए हैं, जिनमें इससे पहले ब्रान्ज तक की कल्पना नहीं की जाती थी।

पैरालंपिक खेलों में गुरुवार (5 सितम्बर, 2024) तक भारतीय खिलाड़ी कुल 24 मेडल जीत चुके थे। इन 24 में से 5 गोल्ड, 9 सिल्वर जबकि 10 ब्रांज मेडल हैं। भारत को तीरंदाजी, शूटिंग और बैडमिन्टन जैसे खेलों में गोल्ड हासिल किए हैं। इसके अलावा शॉटपुट और जैवलिन थ्रो जैसे खेलों में भारत में सिल्वर जबकि कई खेलों में ब्रांज मेडल हासिल हुए हैं। पेरिस पैरालंपिक में भारत ने 2021 के टोक्यो ओलंपिक का रिकॉर्ड तोड़ दिया है।

पैरालंपिक में भारत के प्रदर्शन की चारों तरफ चर्चा हो रही है। शीतल देवी और अवनी लखेड़ा जैसे खिलाड़ियों को देशव्यापी स्तर पर ख्याति मिली है। दोनों ही खिलाड़ियों ने गोल्ड मेडल हासिल किए हैं। भारत के पैरालंपिक में प्रदर्शन को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी लगातार हौसला बढ़ा रहे हैं। वह मेडल जीतने वाले खिलाड़ियों से लगातार बातचीत कर रहे हैं। भारत का पैरालंपिक दल भी इस बीच पूरे जोश में है, रिकॉर्ड टूटने के बाद भारत के और अधिक मेडल जुटने की आशा है।

भारत के पैरालंपिक का यह प्रदर्शन इसलिए भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि बीते कुछ सालों में ही इसमें क्रांतिकारी बदलाव आए हैं। चाहे इन खेलों की फंडिंग हो या फिर खिलाड़ियों की ट्रेनिंग, सभी मोर्चों पर बड़े बदलाव हुए हैं। एक रिपोर्ट बताती है कि पेरिस में होने वाले इन पैरालंपिक खेलों के लिए भारत सरकार ने 2021-24 के बीच ₹74 करोड़ खर्च किए हैं। टोक्यो पैरालंपिक खेलों के लिए केंद्र सरकार ने ₹26 करोड़ खर्च किए थे, यानी इस बार के खेलों के लिए सरकार ने बजट में लगभग 2.8 गुने की बढ़ोतरी कर दी।

पैरालंपिक खेलों की चर्चा मात्र भारत के रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन या फिर उस पर हुए खर्चे के कारण ही नहीं हो रही, इसका एक कारण और भी है। जुलाई-अगस्त माह में पेरिस में हुए ओलंपिक खेलों में भारत का प्रदर्शन भी इसका एक बड़ा कारण हैं। इन खेलों में भारत का प्रदर्शन ठीकठाक ही कहा जा सकता है। भारत ने ओलंपिक खेलों में कुल 6 मेडल जीते। इसमें से 5 ब्रांज और 1 सिल्वर मेडल था। भारत ओलंपिक में एक भी गोल्ड मेडल नहीं पा सका। गोल्ड मेडल के लिए भारत की सबसे बड़ी उम्मीद नीरज चोपड़ा भी कुछ कारणों से सिल्वर पर अटक गए।

इसके अलावा विनेश फोगाट का पक्का हो चुका सिल्वर मेडल फाइनल मुकाबले से पहले उनका वजन बढ़ने के कारण हाथ से निकल गया। इस मामले में पेरिस से लेकर दिल्ली तक बवाल हुआ। किसी ने इसमें साजिश की बात कही तो किसी ने विनेश के स्टाफ को दोषी ठहराया। कहीं उनके लिए एक खाप मेडल बनाया गया तो अब उनकी राजनीतिक पारी शुरू होने की बात हो रही है। खैर, इन सब बातों पर दुबारा चर्चा का कोई ख़ास फायदा नहीं है, अंतिम सत्य यह है कि हमने मेडल नहीं मिल सका और विनेश का करियर भी इसी के साथ समाप्त हो गया।

विनेश और नीरज के अलावा कई खिलाडी अंतिम मौके पर चूके और भारत को मेडल नहीं मिले। ओलंपिक में भारत के कुल 117 एथलीट पहुँचे थे, इनमें 5 ही मेडल के साथ वापस लौट सके। 2024 पेरिस ओलंपिक पर केंद्र सरकार ने कुल ₹470 करोड़ खर्चे थे। कई खिलाड़ियों को विदेश में ट्रेनिंग लेने के लिए भेजा गया था, बाकियों को भी सर्वोत्तम सुविधाएँ मुहैया करवाई गईं थी। हालाँकि, अंत में इसका कोई ख़ास अच्छा परिणाम नहीं निकला और भारत मेडल की तालिका में काफी नीचे रहा।

अगर दोनों खेलों की फंडिंग की बात की जाए तो लगभग 6 गुने का अंतर है लेकिन अगर मेडल जीतने की बात की जाए तो पैरालंपिक खिलाड़ियों ने 4 गुने अधिक मेडल हासिल किए हैं। इसमें भी बड़ी बात ये है कि उन्होंने कई गोल्ड मेडल हासिल किए हैं और उन खेलों में किए हैं जहाँ भारत मजबूत नहीं माना जाता रहा है। जहाँ यह बात बिलकुल ठीक है कि किसी भी देश को अपने खिलाड़ियों को किसी खेल में प्रवीण करने के लिए अच्छे इन्फ्रा और ट्रेनिंग की आवश्यकता होती है और इसके लिए अच्छे खासे फंड भी लगते हैं।

वहीं इस बात को भी मानना होगा कि खिलाड़ियों का अपना मनोबल और जीतने की आकांक्षा और उनका जूनून इससे बड़ा फैक्टर है और पैरालंपिक खिलाड़ियों ने यह मनोबल दिखाया है। उन्होंने यह दिखाया है कि शारीरिक रूप से अक्षम होने के बाद भी कैसे मानसिक दबाव झेलते हुए जीत हासिल की जाती है। इन खिलाड़ियों ने यह भी दिखाया है कि पुराने प्रदर्शन को और कितना बेहतर किया जा सकता है और जो भी सुविधाएँ उन्हें देश ने दी हैं, उसका सर्वोत्तम उपयोग कैसे किया जा सकता है।

अब देखना ओगा कि क्या ओलंपिक खिलाड़ी अगले खेलों में कैसा प्रदर्शन दिखाते हैं, उनसे आशा की जाएगी कि वह अपने पैरालंपिक के साथियों से सीख लेते हुए मेडल तालिका के रिकॉर्ड तोड़ें और जो भी चूक पेरिस ओलंपिक में हुई, उनको पीछे छोड़ते हुए विनिंग माइंडसेट दिखाएँ।

OpIndia Impact: लव जिहाद आरोपित सोहैल अम्मी-अब्बा संग गिरफ्तार, हिंदू युवती पर बना रहा था इस्लाम कबूलने और मांस खाने का दबाव

उत्तर प्रदेश के बदायूँ में हिंदू युवती के साथ लव जिहाद करने वाले सोहैल को अम्मी-अब्बा संग गिरफ्तार कर लिया गया है। पीड़िता ने पुलिस को बताया था कि कैसे सोहैल नाम के युवक ने उससे नाम बदलकर फँसाया और फिर उसपर इस्लाम कबूल करने का, मांस खाने का और नमाज आदि पढ़ने का दबाव बनाने लगा। जब लड़की ने ऐसा करने से मना किया तो सोहैल के घरवालों ने उसे पीटा और बेटी लेकर उसे घर से निकाल दिया।

जानकारी के मुताबिक मामला 3 सितंबर को बदायूँ के बिसौली थाना में दर्ज हुआ था। हिंदू लड़की ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराते हुए बताया था कि 2023 में पीड़िता चंडीगढ़ के एक कॉल सेंटर में जॉब करती थी। यहीं पर पीड़िता को सोहैल पहली बार मिला था जिसने अपना परिचय हिन्दू के तौर पर दिया था। उसने पीड़िता को विश्वास में लिया और फिर लिव-इन में साथ रहने लगा। इस दौरान आरोपित ने पीड़िता से कई बार रेप किया जिस से वो गर्भवती हो गई।

पीड़िता ने आगे बताया कि कुछ दिनों बाद उसने एक बेटी को जन्म दिया। बेटी के जन्म के बाद सोहैल पीड़िता को लेकर बदायूँ आ गया, जहाँ उसे सोहैल के मुस्लिम होने और खुद को धोखा मिलने की जानकारी हुई। लड़की के मुताबिक बदायूँ आने के बाद सोहैल और उसके घरवाले उसे खूब प्रताड़ित करते थे।

पीड़िता ने बताया कि टॉर्चर देने वालों में सोहैल का अब्बा नियामु, उसकी अम्मी रुखसाना के साथ उसकी बहनें रुबीना और जेबा शामिल हैं। पीड़िता का यह भी आरोप था कि ये सभी मिल कर पीड़िता को एक बंधक जैसे रख रहे थे। उसे उसकी माँ से बात नहीं करने दी जाती थी। छोटी-छोटी बातों पर मारा पीटा जाता था। इसके अलावा उसे हिंदू धर्म त्यागकर इस्लाम कबूल करने को भी कहा जाता था।

पुलिस ने इस मामले में स्थानीय थाना बिसौली में सोहैल समेत पाँचों आरोपितों के विरुद्ध सुसंगत धाराओं एवं धर्म परिवर्तन निषेध अधिनियम के अंतर्गत अभियोग पंजीकृत कराया था। अब इस मामले में कार्रवाई करते हुए आरोपितों को पकड़ने की खबर आई है।

क्या असम में किडनी की बढ़ती बीमारियों के पीछे हैं मियाँ मुस्लिम? CM हिमंता बिस्वा सरमा ने किया आगाह, कहा- उनसे नहीं खरीदे मछली, यूरिया का कर रहे हैं इस्तेमाल

असम मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा का एक और बयान मीडिया सुर्खियों में है। इस बार उन्होंने नागाँव और मोरीगाँव में मछली उद्योग करने वाले उन लोगों पर निशाना साधा है जो मछली पालन में यूरिया का इस्तेमाल कर करते हैं।

उन्होंने बुधवार (5 सितंबर 2024) को कहा, “पिछले चार सालों में नागाँव और मोरीगाँव में मछली पालन करने वाले लोगों की वजह से राज्य में किडनी की बीमारियाँ बढ़ रही हैं।” सीएम ने कहा कि इन दोनों जिलों में उत्पादक मछली पालन में यूरिया का इस्तेमाल करते हैं। उन्होंने ये भी बताया कि नागाँव और मोरीगाँव में अप्रवासी मुस्लिम (मियाँ) मछली उद्योग पर हावी हैं। ऐसे लोगों से मछली लेना खतरनाक साबित हो सकता है।

उन्होंने ट्वीट कर कहा, असम के कुछ लोग जानबूझकर यूरिया से भरी हुई मछली जनता तक पहुँचा रहे हैं। जनता को सतर्क रहना चाहिए, सरकार भी कार्रवाई कर रही है। वह बोले ऐसे लोगों से मछली न खरीदें जो व्यापार बढ़ाने के लिए शॉर्टकट का रास्ता अपनाते हैं। उन्होंने कहा कि मछली उत्पादन बढ़ाने के जैविक तरीके हैं। अगर मछली उत्पादन के लिए शॉर्टकट रास्ता अपनाया जाता रहेगा। तो यह काम नहीं करेगा।

वह बोले- मछली असम में लोगों के आहार और संस्कृति का अभिन्न अंग है। राज्य को हर महीने लगभग 40000 मीट्रिक टन मछली चाहिए होती है। यहाँ मोरीगाँव नागाँव और कछार राज्य के शीर्ष मछली उत्पादक हैं। उन्होंने ऊपरी असम के लोगों से भी कहा कि वह बाजार पर कब्जा करें, लेकिन लड़ाई करके नहीं बल्कि लोगों के अच्छे स्वास्थ्य के लिए।

बता दें कि कुछ दिन पहले असम के नागाँव में एक नाबालिग के साथ विशेष समुदाय के लड़कों द्वारा गैंगरेप की घटना को अंजाम दिया गया था। सीएम सरमा ने उस समय भी तीखी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने कहा था कि आजकल इन लोगों की हिम्मत बहुत बढ़ गई है। लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है।

डॉक्टरी पढ़ने गई हिंदू लड़की, सहपाठी दानिश खान इस्लाम कबूल कर निकाह का बनाने लगा दबाव: विरोध करने पर पीटा, राम मंदिर पर की अपमानजनक बातें

कर्नाटक के उडुपी में मेडिकल की पढ़ाई करने वाले एक मुस्लिम छात्र दानिश ने एक हिन्दू सहपाठी पर इस्लाम कबूल करने का दबाव बनाया। ऐसा ना करने पर उसने छात्रा के साथ मारपीट की और उसका यौन शोषण करने की कोशिश की। दानिश ने हिंदुत्व और राम मंदिर पर भी अपमानजनक बातें कहीं। दानिश को अब एक शिकायत के बाद गिरफ्तार कर लिया गया है।

दानिश खान मणिपाल मेडिकल यूनिवर्सिटी में मेडिकल की पढ़ाई पढ़ता है। पीड़िता हिन्दू छात्रा भी यहीं पढ़ती है। दानिश खान के खिलाफ छात्रा ने पुलिस में FIR दर्ज करवाई थी। उसके खिलाफ 31 अगस्त, 2024 को भारतीय न्याय संहिता की धारा 74, 75 (1), 75 (1) (i), 75 (2), 78 और 302 के तहत मामला दर्ज किया गया था।

उडुपी पुलिस के अनुसार, दानिश ने अपने साथ ही पढ़ने वाली एक हिन्दू छात्रा से पहले दोस्ती की और फिर उसे अपने प्रेम जाल में फंसा लिया। छात्रा ने शिकायत ने बताया कि 22 जनवरी, 2024 को जब अयोध्या में श्रीराम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा के दौरान हिंदुत्व और प्रभु श्रीराम पर अपमानजनक टिप्पणी की।

11 मार्च, 2024 को दानिश खान जबरन छात्रा के कमरे में घुस आया और उस पर इस्लाम अपनाने और निकाह करने का दबाव बनाने लगा। छात्रा की शिकायत के अनुसार, जब उसने इस्लाम कबूल कर निकाह करने से मना कर दिया तो खान आगबबूला हो गया और मारपीट पर उतारू हो गया।

दानिश खान ने हिन्दू छात्रा के बाल खींच लिए, उसको पीटना चालू कर दिया और उसको गलत तरीके से छुआ भी। दानिश खान ने छात्रा को धमकाया कि अगर उसकी माँगे नहीं मानी तो इसके काफी गंभीर नतीजे होंगे। इसके बाद छात्रा डर गई, दानिश खान यहीं नहीं रुका।

दानिश खान ने छात्रा पर दबाव बनाया कि वह उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। छात्रा के विरोध के बावजूद दानिश खान लगातार उसको फोन से परेशान करता रहा और उसके अश्लील वीडियो और फोटो सोशल मीडिया पर डाल देने की धमकी भी देता रहा।

छात्रा ने पुलिस को दी गई शिकायत में कहा कि 28 अगस्त, 2024 तक लगातार दानिश उसे परेशान करता रहा। छात्रा से जब यह मामला बर्दाश्त के बाहर हो गया तो उसने पुलिस से इस मामले में शिकायत की। उडुपी पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद मंगलवार (4 सितम्बर, 2024) को दानिश को दबोच लिया।

इस घटना के बाद स्थानीय हिंदू संगठनों ने दानिश के खिलाफ कार्रवाई की माँग की है। मणिपाल के एक व्यक्ति ने कहा, “यह केवल व्यक्तिगत उत्पीड़न का मामला नहीं है, यह लोगों के अपने धर्म का स्वतंत्र रूप से और बिना किसी दबाव के पालन करने के अधिकार पर हमला है।”