मलयालम फिल्म इंडस्ट्री के एक और एक्टर पर यौन शोषण का आरोप लगा है। एक्टर का नाम निविन पॉली है। निविन के खिलाफ केरल के एर्नाकुलम स्थित ओन्नुकल पुलिस थाने में शिकायत दर्ज हुई है। उनके अलावा पीड़िता ने एक महिला समेत अन्य लोगों का नाम भी शिकायत में दिया है। निविन केस में छठे आरोपित हैं। पीड़िता के अनुसार, उनके साथ दुबई में दुष्कर्म हुआ था। वहीं एक्टर के मुताबिक सारे आरोप निराधार हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, शिकायतकर्ता महिला ने बताया कि वह सबसे पहले आरोपित महिला श्रेया के संपर्क में आई थी, जिसने उन्हें यूरोप में केयरगिवर की नौकरी देने का वादा किया था। हालाँकि पीड़िता ने वो नौकरी नहीं की। बाद में महिला ने उन्हें फिल्म का ऑफर दिया। इसके बाद ड्रग्स देकर उनका यौन शोषण हुआ।
महिला के मुताबिक, उनके साथ गलत करने वाले 6 लोग थे। इन सबने अलग-अलग मौकों पर उनके साथ कुछ न कुछ किया। पुलिस ने 40 वर्षीय पीड़िता की आपबीती सुनने के बाद एक्टर और अन्य 5 (एके सुनील, श्रेया, बीनू, बशीर और कुत्तन) के खिलाफ आईपीसी की धारा 354, 376, 450, 342, 506 और 32 के तहत केस दर्ज किया ह
वहीं इस खबर के मीडिया में सामने आने के बाद निविन ने भी सोशल मीडिया पर सफाई पोस्ट की है। “मुझे अपने बारे में एक झूठी खबर है पता चली है, जिसमें मुझ पर शोषण करने का आरोप लगाया गया है। मैं आपको बताना चाहता हूँ कि ये एकदम झूठ है। मैं इन आरोपों को बेबुनियाद साबित करने के लिए पूरी कोशिश करने वाला हूँ। आप लोगों की परवाह के लिए धन्यवाद। आगे सबकुछ कानूनी रूप से देखा जाएगा।”
हेमा कमेटी रिपोर्ट आने के बाद मलयालम इंडस्ट्री बदनाम
गौरतलब है कि मलयालम फिल्म इंडस्ट्री में हेमा कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद से हड़कंप मचा हुआ है। कई एक्टर्स, डायरेक्टर और प्रोड्यूसरों के खिलाफ अब तक यौन शोषण के इल्जाम लग चुके हैं। पिछले दिनों मलयाली फिल्मों के मशहूर एक्टर सिद्दीकी पर दुष्कर्म का आरोप लगा था। वहीं फिल्म निर्देशक रंजीत पर भी रेप केस दर्ज हुआ था। उनसे पहले जयसूर्या और मुकेश के खिलाफ भी महिलाओं ने सामने आकर शिकायत दी थीं। पीड़िताओं का कहना था कि उन्होंने आरोपितों के नाम-पहचान की वजह से कभी अपनी आपबीती किसी को नहीं बताई थी, उन्हें लगता था कि इतने बड़े नामों पर इल्जाम लगाने से उन्हीं पर उंगली उठेगी। हालाँकि हेमा कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद उन्हें हिम्मत मिली।
केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार के सहयोग ना करने की बात करते हुए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। गृह मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि कोलकाता के RG मेडिकल कॉलेज में केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) की तैनाती के बाद सहयोग नहीं कर रहा है। गृह मंत्रालय ने माँग की है कि सुप्रीम कोर्ट बंगाल सरकार को आदेश दे।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, गृह मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल की है। गृह मंत्रालय ने कहा कि RG कर मेडिकल कॉलेज में तैनात CISF सुरक्षाकर्मियों को सुविधा नहीं मिल पा रही हैं। गृह मंत्रालय ने कहा है कि CISF सुरक्षाकर्मियों को RG कर मेडिकल कॉलेज के आसपास रहने की जगह नहीं मिली है।
गृह मंत्रालय ने बताया कि CISF सुरक्षाकर्मियों को अस्पताल से 1 घंटे की दूरी पर रहना पड़ रहा है। उन्हें आने-जाने में रोज काफी टाइम लगता है, इस कारण उनके काम करने की क्षमता भी प्रभावित हो रही है। गृह मंत्रालय ने कहा कि इससे आपात स्थिति से निपटने में भी CISF को दिक्कत हो रही है।
गृह मंत्रालय ने बताया है कि इसने पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव से भी रहने की जगह और कुछ उपकरण भी माँगे थे, जो उपलब्ध नहीं करवाए गए हैं। गृह मंत्रालय ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि वह आदेश की अवमानना के लिए बंगाल सरकार पर कार्रवाई करे।
सुप्रीम कोर्ट ने 20 अगस्त, 2024 को कोलकाता के RG कर मेडिकल कॉलेज में केंद्र सरकार को आदेश दिया था कि वह CISF की तैनाती करे। सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश कोलकाता पुलिस की मेडिकल कॉलेज की सुरक्षा व्यवस्था में विफल रहने पर किया था। इसके बाद केंद्र सरकार ने एक यूनिट की तैनाती यहाँ कर दी थी।
अब गृह मंत्रालय ने पश्चिम बंगाल सरकार से सहयोग ना मिलने की बात कही है। गृह मंत्रालय की दलील है कि उसका CISF को सहयोग ना देना सुप्रीम कोर्ट के निर्णय की अवमानना है और इस पर कार्रवाई होनी चाहिए। मामले की सुनवाई अभी सुप्रीम कोर्ट में होनी बाक़ी है।
गौरतलब है कि 9 अगस्त, 2024 को कोलकाता के RG कर मेडिकल कॉलेज में एक डॉक्टर की रेप के बाद हत्या कर दी गई थी। शुरुआत में इसे पुलिस और कॉलेज प्रशासन ने आत्महत्या बताने का प्रयास किया था। इस घटना के बाद देश भर में बवाल हुआ था और डॉक्टर हड़ताल पर चले गए थे। RG कर मेडिकल कॉलेज में भी इस घटना के बाद तोड़फोड़ हुई थी, इसे कोलकाता पुलिस नहीं रोक पाई थी। इसी के चलते सुप्रीम कोर्ट ने यहाँ की सुरक्षा के लिए CISF तैनात करने का आदेश दिया। मामले में अभी CBI जाँच चल रही है।
उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में एक दलित समुदाय की एक महिला के यौन शोषण का मामला सामने आया है। पीड़िता के कपड़े फाड़ दिए गए और छेड़छाड़ की गई। विरोध करने पर उनको जातिसूचक शब्द बोले गए और बेरहमी से मारा गया। 18 अगस्त को घटी इस घटना में आरोपितों के नाम इस्लाम, निजामुद्दीन, क़याम खाँ और मुज़्ज़ीम हैं। मंगलवार (3 सितंबर 2024) को पुलिस ने बताया कि मामले में जाँच व अन्य जरूरी कार्रवाई की जा रही है।
वकील राम वचन वर्मा ने इस मामले की शिकायत मंगलवार (3 सितंबर 2024) को अपने X हैंडल से UP पुलिस को टैग करते हुए की है। शिकायत के मुताबिक घटना गोंडा जिले के थानाक्षेत्र कौड़िया की है। यहाँ के एक गाँव में रहने वाली SC समुदाय (अनुसूचित जाति) की पीड़िता ने 23 अगस्त 2024 को गोंडा जिले के पुलिस अधीक्षक के नाम एक शिकायती पत्र लिखा है। पत्र में पीड़िता ने बताया है कि उनका घर गाँव में पट्टे की जमीन पर बना हुआ है। 18 अगस्त को पीड़िता के पति कहीं बार गए थे और वो घर में अकेली थीं।
आरोप है कि रात में लगभग 9 बजे पीड़िता के घर में इस्लाम, निजामुद्दीन, क़याम खाँ और मुज्जीम घुस गए। इन सभी ने पीड़िता से छेड़खानी शुरू कर दी। विरोध करने पर पीड़िता के कपड़े फाड़ दिए गए बेरहमी से पीटा गया। इसके बाद सभी आरोपितों ने पीड़िता को गंदी-गंदी गालियाँ दीं और जातिसूचक शब्द बोले। शिकायत के मुताबिक आरोपितों ने कहा, “च$रिन के औलाद, तुम मेरा कुछ उखाड़ नहीं पाओगे।” पीड़िता को पिटता देख कर आसपास के लोग डर गए।
प्रभारी निरीक्षक कौड़िया को जांच कर आवश्यक कार्यवाही हेतु निर्देशित किया गया है।
बताया जा रहा है कि पीड़िता के पड़ोस में रहने वाले कुछ बच्चों ने मदद के लिए गुहार लगाई तो लोग जुटने शुरू हो गए। लोगों को आता देख कर आरोपित भाग निकले। जाते-जाते भी आरोपितों ने पीड़िता को धमकाते हुए कहा, “अभी तो इतना मारा-पीटा है। अगर FIR लिखवाओगे तो जान से मार डालूँगा।” पीड़िता ने अपनी शिकायत में आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है। मंगलवार (3 सितंबर) को गोंडा पुलिस ने मामले का संज्ञान लेते हुए जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई के लिए SHO कौड़िया को निर्देशित कर दिया है।
हरियाणा के पलवल में आर्यन मिश्रा नाम के एक युवक की हत्या गलतफहमी के कारण हुई थी। युवक को गोली मारने वाले आरोपितों ने उसे अपराधी समझ लिया था और उनके गौरक्षक होने के अभी तक कोई प्रमाण नहीं मिले हैं। यह जानकारी फरीदाबाद पुलिस ने दी है।
फरीदाबाद पुलिस के असिस्टेंट कमिश्नर अमन यादव ने 3 सितम्बर, 2024 को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस मामले में बताया, “24 अगस्त की रात हुई एक वारदात में एक युवक आर्यन मिश्रा की गोली लगने से मौत हो गई थी। इस संदर्भ में फरीदाबाद पुलिस ने FIR दर्ज करके हत्या के पाँच बाद 5 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है। इनके नाम अनिल, कृष्ण, वरुण, आदेश और सौरभ हैं। वारदात में उपयोग की गई गाड़ी को बरामद कर लिया गया है। यह सभी आरोपित फरीदाबाद के रहने वाले हैं।”
उन्होंने आगे बताया, “अभी तक की जाँच में गलतफहमी के कारण गोली चलने की बात सामने आई है। गोली मारने वालों को लगा कि यह आपराधिक व्यक्ति हैं जो अपराध करने के लिए आए हैं। इसीलिए उन्होंने फायरिंग की। मामला जाँच के अंतर्गत है। आरोपितों के दावों को अभी सत्यापित किया जा रहा है।”
पुलिस ने यह भी बताया कि जिस गाड़ी में आर्यन मिश्रा पर गोली चलाई गई, उसमें कुल पाँच लोग सवार थे, इसी में एक युवक सागर उर्फ़ शैंकी भी था। पुलिस ने बताया कि इस युवक के विरुद्ध पहले से हत्या के प्रयास का एक मामला दर्ज है और जब गाड़ी का पीछा पाँच लोगों ने किया तो उन्हें लगा कि उनके दुश्मन गुट के लोग उनका पीछा कर रहे हैं। पुलिस ने बताया कि इसीलिए गाड़ी भगाने का प्रयास आर्यन और उसके साथियों ने किया होगा। इसी कारण से पीछा कर रहे लोगों का शक और गहराया। इसी के बाद यह घटना हुई।
मृतक आर्यन मिश्रा और उसके साथियों तथा हत्या के आरोपितों के बीच पुरानी रंजिश होने के दावे से पुलिस ने इनकार किया है। पुलिस ने कहा है कि अभी ऐसी कोई बात सामने नहीं आई है। पुलिस ने हत्या आरोपितों के गौरक्षक होने को लेकर कहा कि अभी यह बात भी स्पष्ट नहीं हुई है। पुलिस ने कहा कि अभी तक की जाँच में यह सामने नहीं आया है कि हत्या के आरोपित किसी संगठन से जुड़े हुए थे। उनकी पृष्ठभूमि की जाँच भी चल रही है।
गौरतलब है कि 24 अगस्त, 2024 की रात फरीदाबाद-पलवल रास्ते में डस्टर गाड़ी में सवार पाँच युवकों पर फायरिंग की गई थी। इस फायरिंग में गाड़ी में सवार युवक आर्यन मिश्रा (19) को कंधे के पास गोली लगी थी। उसे अस्पताल पहुँचने पर मृत घोषित कर दिया गया था। इस मामले में मृतक के परिजनों ने आरोप लगाया है कि आर्यन को गौरक्षकों ने धोखे से गोतस्कर समझ लिया और गोली चलाई। इस मामले में पुलिस ने 5 लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस जाँच में इन लोगों के गौरक्षक होने की बात अभी तक सामने नहीं आई है।
हाल में नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुई ‘आईसी-814- द कंधार हाईजैक’ फिल्म को लेकर सोशल मीडिया पर उठ रहे सवालों के बीच सीरिज के निर्माता, निर्देशक और कलाकारों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके तमाम सवालों पर बात की। इस दौरान नसीरुद्दीन शाह भी मंच पर मौजूद थे। उनसे जब 1999 की घटना पर बातचीत हुई तो उन्होंने बताया कि उनपर हाईजैक की खबर सुनने के बाद असर क्या हुआ था।
पत्रकारों से बातचीत के दौरान नसीरुद्दीन शाह ने कहा, “मैं उस वक्त 50 साल का था। मैं बहुत परेशान हो गया था, क्योंकि मुझे डर था इससे इस्लामोफोबिया की लहर उठ सकती थी। खुशकिस्मती रही कि तब ऐसा नहीं हुआ, लेकिन मुझे याद है कि मैं स्थिति को लेकर बहुत चिंतित था और सोच रहा था कि यह किस ओर ले जाएगा।”
नसीरुद्दीन शाह ने आगे कहा, “जब पूरी विपदा से निपट लिया गया, तब आखिर में मेरे मन में द्वंद्व चल रहा था। जब डील पूरी हुई, तो मैं असहज था। मुझे नहीं पता कि ऐसा क्यों लगा, लेकिन महसूस किया कि पैसेंजर और पायलेट मुश्किल दौर से गुजरे थे।”
नसीरुद्दीन शाह के इस बयान के बाद अब एक बार फिर ये सवाल उठ रहे हैं कि क्या कहीं यही असली वजह तो नहीं है कि जो सीरीज में जानबूझकर आतंकियों के असली नाम बताने की जगह उनके कोडवर्ड को ज्यादा बताया गया और ये दिखाया गया कि वो लोग कितने ज्यादा अच्छे इंसान थे।
Naseeruddin Shah says when IC 814 Hijack happened, he was worried about 'Islamophobia'.
"I feared that it would lead to Islamophobia"
Is this why the Web Series whitewashed the Terrorists and showed them good human beings?
लोगों का कहना है कि अगर कोई अपराध किसी मजहब से जुड़े आतंकियों ने किया है तो फिर उसकी जानकारी देने से इस्लामोफोबिया कैसे फैल जाएगा। इसके अलावा ये भी कहना है कि जिस समय पूरी दुनिया उन यात्रियों की सलामती की दुआ कर रहा था, उस समय में भी ये व्यक्ति सिर्फ इस्लाम के बारे में ही सोच रहा था।
उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने लखनऊ में ऐसा भड़काऊ बयान दिया है, जिस पर हंगामा मचना तय है। अखिलेश यादव ने समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा, “साल 2027 में सपा सरकार बनते ही यूपी के सारे बुलडोजरों का रुख गोरखपुर की तरफ होगा।”
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अखिलेश यादव ने कहा, “विधानसभा चुनाव में भाजपा का सफाया होगा और देश की राजनीति उसके चुनावी परिणाम से प्रभावित होगी। इस चुनाव में प्रदेश में समाजवादी सरकार बनते ही पूरे प्रदेश के बुलडोजरों का रुख गोरखपुर की तरफ होगा।” अखिलेश यादव ने मंगलवार (3 सितंबर 2024) को सपा के मुख्यालय में कार्यकर्ताओं की बैठक के दौरान यह बात कही।
सपा अध्यक्ष ने दावा किया कि भाजपा की सरकार में निर्दोष लोगों को सताया जा रहा हैं। 2027 में समाजवादी सरकार बनते ही पूरे प्रदेश के बुलडोजरों का रूख गोरखपुर की तरफ होगा। उन्होंने कहा कि भाजपा का राजनीतिक चरित्र ही विकास विरोधी है। पिछले सात वर्षों में भाजपा ने विकास के नाम पर कोई काम नहीं किया है और न ही भाजपा नेतृत्व के पास विकास का कोई विजन है।
अखिलेश ने कहा कि भाजपा का एजेंडा समाज में नफरत फैलाकर सामाजिक सद्भाव बिगाड़ कर अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा को पूरा करना है। समाजवादी पार्टी का प्रत्येक कार्यकर्ता भाजपा के इन मंसूबों को कभी भी पूरा नहीं होने देगा। जनता समझ रही है कि उसको समाजवादी सरकार बनने पर ही तमाम समस्याओं से छुटकारा मिल सकेगा।
बता दें कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का गृहजिला गोरखपुर ही है। गोरखपुर में गोरक्षधाम पीठ के वो महंत हैं। अखिलेश यादव का इशारा किस तरह है, इस बात के कयास लगने शुरू हो गए हैं।
इस बीच, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अखिलेश यादव के गृह जिला मैनपुरी पहुँचे थे। यहाँ उन्होंने विकास योजनाओं का उद्धाघन और शिलान्यास किया, साथ ही अखिलेश यादव और उनके चाचा शिवपाल यादव पर जोरदार हमला बोला। योगी आदित्यनाथ ने मैनपुरी में कहा कि जो मैनपुरी कभी वीवीआईपी जिला माना जाता था, वो आज विकास की दौड़ में पिछड़ कैसे गया? उन्होंने कहा कि साल 2017 से पहले यूपी में हर नौकरी बिकती थी, उसकी नीलामी होती थी। वसूली में चाचा और भतीजा समान भागीदार होते थे।
उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले में एक मदरसे के अंदर नाबालिग छात्र से कुकर्म का मामला सामने आया है। कुकर्म का आरोप मदरसे के ही मौलाना पर लगा है जिसका नाम साकिब है। पीड़ित छात्र की उम्र 13 साल है। मौलाना पीड़ित को अक्सर अपने कमरे में बुलाता था और अप्राकृतिक सेक्स करता था। मंगलवार (3 सितंबर, 2024) को पुलिस ने केस दर्ज कर के आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह मामला गाजियाबाद के थानाक्षेत्र अंकुर विहार का है। यहाँ की डाबर चौकी क्षेत्र में मंगलवार को पीड़ित छात्र के अब्बा ने शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत में उन्होंने बताया है कि उनका 13 वर्षीय बेटा पिछले कुछ समय से दीनी तालीम हासिल कर रहा था। छात्र इसी मदरसे के हॉस्टल में कई अन्य सहपाठियों के साथ रहता था। यहाँ पढ़ाने वाला मौलाना नाबालिग पर गंदी नजर रखने लगा। वह छात्र को अक्सर रात में अपने कमरे के अंदर बुला कर कुकर्म करता था।
शिकायतकर्ता ने आगे बताया कि जब उनका बेटा कुकर्म का विरोध करता था तो मौलाना उसे फेल कर देने की धमकी देते हुए चुप करा देता था। इसी के साथ वह कहीं किसी से बताने पर पीड़ित को मार डालने जैसी बातें भी किया करता था। बच्चे ने इन धमकियों से डर कर काफी समय तक मुँह बंद रखा। आखिरकार कुछ दिनों बाद बर्दाश्त से बाहर होने पर उसने अपने परिजनों को सारी बात बता दी। पीड़ित छात्र के पिता ने पुलिस में तहरीर दी और आरोपित मौलाना साकिब के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की है।
पीड़ित के पिता की तहरीर पर पुलिस ने संज्ञान लिया है और FIR दर्ज कर ली है। इस FIR में मौलाना साकिब को नामजद किया गया है। साकिब पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के साथ पॉक्सो एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है। अंकुर विहार के ACP भास्कर वर्मा ने मंगलवार को इस घटना की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि आरोपित मौलाना साकिब को गिरफ्तार कर लिया गया है। मामले में जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
फेक न्यूज की फैक्ट्री और ऑल्ट न्यूज़ के को-फाउंडर मोहम्मद जुबैर ने बीजेपी नेता नुपूर शर्मा को जिहादियों के निशाने पर लाने जैसी ही कोशिश बीजेपी नेता और महाराष्ट्र के विधायक नितेश राणे के साथ की है। क्लिपकटुए के नाम से बदनाम मोहम्मद जुबैर ने नितेश राणे का संदर्भ को काटकर एक एडिटेड वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शेयर किया और उन्हें इस्लामिक कट्टरपंथियों के निशाने पर ला दिया।
मोहम्मद जुबैर के इस पोस्ट के बाद नितेश राणे के खिलाफ भी सोशल मीडिया पर इस्लामिक कट्टरपंथियों ने निशाने पर ले लिया और फिर उसकी इस कोशिश में वामपंथी खेमा भी शामिल हो गया, ठीक उसी तरह, जैसे बीजेपी की प्रवक्ता रही नुपूर शर्मा के खिलाफ इस्लामिक कट्टरपंथियों की भीड़ लग गई थी। दरअसल, नितेश राणे ने महाराष्ट्र में रामगिरी महाराज के खिलाफ जिहादियों की ओर से चलाई जा रही ‘सर तन से जुदा’ की मुहिम के खिलाफ प्रतिक्रिया दी थी और उनका बचाव किया था। इसके बाद जुबैर की कोशिशों के चलते खुद नीतीश राणे अब जिहादियों के निशाने पर आ चुके हैं।
मोहम्मद जुबैर ने नितेश राणे को लेकर एक्स पर लिखा, चुनावी राज्य महाराष्ट्र में, भाजपा विधायक नितेश राणे कहते हैं ‘तुम्हारी मस्जिदों के अंदर आकर चुन चुन कर मारेंगे’। यह पहली बार नहीं है, बल्कि अतीत में उनके द्वारा कई ऐसे मुस्लिम विरोधी नफ़रत भरे भाषण दिए गए हैं। उनके खिलाफ़ पहले भी कई एफआईआर दर्ज की गई हैं, लेकिन वह मुस्लिमों के खिलाफ़ नफ़रत भरे भाषण और नरसंहार की धमकियाँ देना जारी रखते हैं, क्योंकि उन्हें पता है कि प्रधानमंत्री @narendramodi और वरिष्ठ भाजपा सदस्य उनके साथ हैं। पीएम नरेंद्र मोदी का सबका साथ सबका विकास सबका विश्वास सिर्फ़ दिखावा है।”
स्रोत-एक्स
जुबैर ने चंद्रबाबू नायडू और नीतीश कुमार को टैग करते हुए लिखा, “आपके गठबंधन सहयोगियों का एक विधायक अल्पसंख्यक मुस्लिम समुदाय को लगातार धमका रहा है। आप कब तक आँखें मूँदे रहेंगे और ऐसे भाषणों को अनदेखा करते रहेंगे।” उसने विपक्षी दलों के कई नेताओं को भी टैग किया और राणे की बातों की ओर ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की।
नितेश राणे के खिलाफ मैदान में उतर गया वामपंथी इकोसिस्टम
मोहम्मद जुबैर के ट्वीट के साथ ही सोशल मीडिया पर सक्रिय वामपंथी इकोसिस्टम जिसमें पत्रकार, कार्यकर्ता भी हैं, उन्होंने नितेश राणे को निशाने पर ले लिया। कथित पत्रकार राजदीप सरदेसाई, जिसकी पत्नी टीएमसी की राज्यसभा सांसद है, उसने एक्स पर लिखा, “ध्यान देने वाली खबर: अहमदनगर में बीजेपी विधायक नितेश राणे द्वारा सबसे बेशर्मी से नफरत और हिंसा भड़काने वाला भाषण। दो एफआईआर दर्ज की गईं। उनकी जगह विधानसभा में नहीं बल्कि जेल में है। जो भी कहना है, उसे कहने की यह छूट कहाँ से आती है?” राजदीप ने अपनी पोस्ट गुस्से वाली इमोजी के साथ समाप्त की।
Story that caught the eye: Most brazen hate and incitement to violence speech imaginable by BJP MLA Nitesh Rane in Ahmednagar. Two FIRs filed. His place is not in assembly but in jail. Where does this impunity to say whatever you will come from? ? pic.twitter.com/V8lK1LodnH
इसके बाद फेक न्यूज फैलाने में माहिर जाकिल अली त्यागी ने लिखा, “मुस्लिमों को मारने की धमकी देने वाले नितेश राणे की शिकायत उसके पूर्व मुख्यमंत्री व वर्तमान सांसद बाप नारायण राणे से की जा रही थी कि अपने बेटे को समझाए, लेकिन बाप की भी इसी हफ़्ते की वीडियो सामने आ गई जिसमें वो मुस्लिमों को निकालकर मारने की बात कर रहा है!”
मुस्लिमों को मारने की धमकी देने वाले नितेश राणे की शिकायत उसके पूर्व मुख्यमंत्री व वर्तमान सांसद बाप नारायण राणे से की जा रही थी कि अपने बेटे को समझाए, लेकिन बाप की भी इसी हफ़्ते की वीडियो सामने आ गई जिसमें वो मुस्लिमों को निकालकर मारने की बात कर रहा है!pic.twitter.com/loTfX956c3
सोशल मीडिया हैंडल इंस्पायरट्रेल ने एक्स पर हिंदी में एक पोस्ट में लिखा, “BJP विधायक नितेश राणे मुसलमानों को मस्जिदों में घुसकर चुन चुन कर मारने कि खुलेआम बातें करता दिख रहा है… क्या इनपर किसी तरह कि क़ानूनी कार्रवाई का प्रावधान नहीं? अगर है तो कार्रवाई क्यों नहीं होती? क्या BJP ने इन जैसों को पूरा समर्थन दें रखा है?”
Must Retweet ⚠️ BJP विधायक नितेश राणे
मुसलमानों को मस्जिदों में घुसकर चुन चुन कर मारने कि खुलेआम बातें करता दिख रहा है…
क्या इनपर किसी तरह कि क़ानूनी कार्रवाई का प्रावधान नहीं? अगर है तो कार्रवाई क्यों नहीं होती?
अल जजीरा के पत्रकार वाजिद खान ने लिखा, “बीजेपी के इस बोने विधायक नीतीश राणा ने मुसलमानों को धमकी दी है, कि वह मस्जिदों में घुस कर मुस्लिमों का क़त्लेआम करेंगे। जब तक इस मलून की गिरफ़्तारी नहीं हो जाती, तब तक मेरे साथ लिखते रहिए। #ArrestNitishRana”
भाजपा के इस बोने विधायक नीतीश राणा ने मुसलमानों को धमकी दी है की वह मस्जिदों में घुस कर मुसलमानो को क़त्लेआम करेंगे .
नितीश राणे ने इस्लामिक कट्टरपंथियों को दी थी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी
जुबैर की यह पोस्ट सोशल मीडिया पर नितेश राणे के उस बयान के बाद आई है जिसमें उन्होंने एक जनसभा में कहा था, “हम तुम्हारी मस्जिदों में घुसेंगे और एक-एक करके तुम्हें मारेंगे। इसे ध्यान में रखना।” हालाँकि बीजेपी ने राणे के इस बयान से खुद को अलग कर लिया है।
महाराष्ट्र के दबंग भाजपा विधायक तथा हमारे भाई @NiteshNRane की Gहादीयो को खुली चुनौती। अगर हमारे राम गिरी महाराज को कुछ किया तो घुस कर मारेंगे।
इस्लामिक कट्टरपंथियों ने जवाब देने पर बनाया हथियार
दिलचस्प बात यह है कि नितेश राणे पर हमला करने वाले लोग तब चुप थे जब देश भर में रामगिरी महाराज के खिलाफ “सर तन से जुदा” के नारे लगाए जा रहे थे। एक्स यूजर jxh45 ने रामगिरी महाराज के खिलाफ लगाए जा रहे ऐसे नारों का एक थ्रेड बनाया। एक पोस्ट में यूजर ने लिखा, “मोहम्मद जुबैर, राजदीप सरदेसाई और कई अन्य, अहमदनगर में बीजेपी विधायक नितेश राणे के भाषण का संदर्भ दिए बिना गुमराह कर रहे हैं। इस्लामिस्ट और मौलवी पिछले एक महीने से खुलेआम नफरत भरे भाषण और गाली-गलौज कर रहे हैं – जिनमें से अधिकांश को मीडिया द्वारा नजरअंदाज किया जाता है।”
Mohammed Zubair, Rajdeep Sardesai and many others, are misleading without giving context to BJP MLA Nitish Rane speech in Ahmednagar.
Islamists & Maulvis have been openly making hate speeches & behe@dings, since last one month – most of which is ignored by media.
अगस्त के तीसरे सप्ताह में, कर्नाटक के बेलगावी के खानपुर कस्बे में स्थानीय पुलिस स्टेशन/कलेक्टर कार्यालय के बाहर इस्लामिक कट्टरपंथियों ने रामगिरी महाराज की हत्या के लिए नारेबाजी कर उकसाया।
Speech from last week's rally in Khanapur town, in Karnataka's Belagavi.
The speech was outside local Police station/collector's office.
The organizers said – "Is mulk ke Musalman maaf nahi karenge, hum sab ki zimmedari hai, ki humkumat ki zariya se isse maut ke ghat utarenge". pic.twitter.com/y9aHgou4a2
Maulana allegedly said – "A Mujahid had said in a Parliament – they're 80,000, or 80 lakhs, or 80 crores; if it comes to Prophet, we will keep them at our feet".@SpBagalkote, @DgpKarnatakapic.twitter.com/EC8nj2M8Yr
कर्नाटक के कलबुर्गी में इस्लामिक कट्टरपंथियों ने ‘सर तन से जुदा’ के नारे लगाए।
Open rallies to impose Sharia held in Karnataka's Kalaburagi (Gulbarga).
Muslim mobs chanted: "Gustakh nabi ki ek hi saaza, phasi ki saaza"…
Kalaburagi is known to be stronghold of Congress President Mallikarjun Kharge; his son-in-law and son, are MP and MLAs from that place. pic.twitter.com/QLI2afv8An
नितेश राणे ने अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर पर दी प्रतिक्रिया
महाराष्ट्र के अहमदनगर में नितेश राणे के खिलाफ 2 एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं। इस मामले में बीजेपी विधायक नितेश राणे ने सवाल उठाते हुए कहा, “हिंदू समुदाय को क्यों धमकाया जा रहा है?”
पुलिस के अनुसार, रविवार को अहमदनगर जिले के श्रीरामपुर और तोपखाना पुलिस क्षेत्राधिकार में दो अलग-अलग मौकों पर भड़काऊ भाषण देने के लिए राणे के खिलाफ दो मामले दर्ज किए गए। नितेश राणे ने अहमदनगर में सकल हिंदू समाज आंदोलन के दौरान यह टिप्पणी की। राणे ने सोमवार (2 सितंबर 2024) को एएनआई से कहा, “संविधान और पुलिस को अपना काम करना चाहिए। हिंदू समुदाय को क्यों धमकाया जा रहा है? अगर वे (मुस्लिम) धमकी भरी भाषा में बात कर सकते हैं, तो हम भी ऐसा ही कर सकते हैं। मैं आपको 10 से 15 यूट्यूब चैनल दिखा सकता हूँ, जिन्होंने रामगिरी महाराज को खुलेआम धमकाया है और हिंदुओं के खिलाफ खुलेआम नफरत फैलाई है। कल मैंने हिंदू गब्बर सिंह होने के बारे में जो बयान दिया, उसका मकसद हिंदू समुदाय को यह बताना है कि उन्हें किसी से नहीं डरना चाहिए।”
राणे ने कहा कि वे महंत रामगिरी महाराज के समर्थन में सामने आए हैं। उन्होंने कहा, “कल (रविवार) मैं अहिल्यानगर और श्रीरामपुर में था। हम महंत रामगिरी महाराज के समर्थन में वहाँ गए थे। उनके द्वारा दिए गए बयान में कुछ भी नया नहीं था। दस मुस्लिम विद्वान पहले ही इस तथ्य का उल्लेख कर चुके हैं कि रामगिरी महाराज ने क्या कहा।” नितेश राणे ने दावा किया कि जो लोग भी रामगिरी महाराज का समर्थन कर रहे हैं, उन्हें जान से मारने की धमकियाँ मिल रही हैं।
नितेश राणे ने कहा, “जो कोई भी रामगिरी महाराज का समर्थन कर रहा है और अपने सोशल मीडिया स्टेटस पर यह बात डाल रहा है, उसे जान से मारने की धमकियाँ मिल रही हैं। पिछले हफ़्ते पुणे में रामगिरी महाराज के खिलाफ़ एक रैली के दौरान ‘सर तन से जुदा’ के नारे लगाए गए थे। वे ऐसा कह सकते हैं, लेकिन अगर हम उसी भाषा में हिंदू समुदाय के समर्थन में सामने आते हैं, तो हमसे सवाल क्यों किए जाते हैं?”
रामगिरी महाराज ने क्या कहा?
दरअसल, रामगिरी महाराज ने प्राचीन हिंदू धर्मग्रंथों का उल्लेख करते हुए लोगों से धार्मिक जीवन जीने की अपील की थी। उन्होंने शुक्रवार (16 अगस्त 2024) को नासिक के सिन्रर क्षेत्र के पंजले गाँव में एक प्रवचान दिया था, जिसमें कथित तौर पर उन्होंने पैगंबर मोहम्मद पर अपमानजनक टिप्पणी की थी। उनकी टिप्पणी के बाद मुस्लिम समुदाय भड़क गया और तब से उनके खिलाफ लगातार प्रदर्शन हो रहे हैं और ‘सर तन से जुदा’ के नारे लगाते हुए उनको मौत की सजा देने की माँग की जा रही है।
रामगिरी महाराज ने जो कुछ भी कहा, उसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। प्रवचन के दौरान उन्होंने कहा कि कई बड़े इस्लामिक लोगों ने महिलाओं के साथ अच्छा बर्ताव नहीं किया। उनकी इस टिप्पणी के बाद छत्रपति संभाजीनगर से लेकर नासिक, मुंबई और पुणे समेत महाराष्ट्र के कई जिलों में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हो रहा है। उनके खिलाफ मुस्लिमों की मजहबी भावनाओं को ठेस पहुँचाने को लेकर कई एफआईआर दर्ज कराई जा चुकी है।
जुबैर ने राणे के साथ वही किया, जैसा उसने नुपूर शर्मा के खिलाफ किया था
ये बात नहीं भूलना चाहिए कि कैसे बीजेपी की पूर्व प्रवक्ता नुपूर शर्मा को इस्लामिक कट्टरपंथियों ने कैसे बलि का बकरा बनाया था। उसकी शुरुआत क्लिपकटुए मोहम्मद जुबैर ने ही की थी। बता दें कि मई 2022 में, जुबैर ने जानबूझकर टाइम्स नाउ पर हुई एक बहस से नूपुर शर्मा की एक क्लिप को एडिट करके शेयर किया था। जुबैर ने उस वीडियो को इस तरह से शेयर किया, जिसमें लग रहा था कि नुपूर इस्लाम को निशाना बना रही थी। खास बात ये है कि उसी डिबेट में तसलीम रहमानी ने भगवान शिव का अपमान किया था, लेकिन क्लिपकटुअ ने उसे नहीं दिखाया।
जुबैर के इस क्लिपकटुए क्रित्य की वजह से नुपूर को ‘ईशनिंदा करने वाला’ घोषित कर दिया गया और तालिबान और अलकायदा समेत कई इस्लामी संगठनों ने उनके लिए मौत की सजा की माँग की। यही नहीं, नुपूर के खिलाफ कई मौलवियों ने भी बयान जारी किए। जुबैर यहीं नहीं रुका। उसने नूपुर की क्लिप को गलत तरीके से इंटरनेशनल लेवल पर शेयर करवाया, जिसकी वजह से कतर और कई इस्लामी संगठनों ने बयान जारी किए।
दुखद बात यह है कि बीजेपी ने नूपुर शर्मा से दूरी बना ली और उन्हें पार्टी से सस्पेंड कर दिया। उस दौरान और बाद में पूरे देश में विरोध प्रदर्शन हुए। इस्लामी भीड़ ने अपना गुस्सा जाहिर करने के लिए हिंसा का रास्ता चुना और सार्वजनिक और निजी संपत्तियों को नुकसान पहुँचाया। हिंदुओं और नूपुर शर्मा के प्रति नफरत इस हद तक थी कि हिंदू दर्जी कन्हैया लाल और हिंदू व्यापारी उमेश कोल्हे की हत्या इस्लामिक आतंकवादियों ने सिर्फ़ इसलिए कर दी क्योंकि उन्होंने सोशल मीडिया पर नूपुर का समर्थन किया था। दो साल बाद भी नूपुर शर्मा शायद ही कभी सार्वजनिक रूप से सामने आई हों। उन्हें अपनी जान की सुरक्षा के लिए कड़ी सुरक्षा के बीच बेहद सावधानी से घूमना पड़ता है। दूसरी ओर भगवान शिव का अपमान करके शर्मा को भड़काने वाला तस्लीम रहमानी बिना किसी परिणाम का सामना किए खुलेआम घूम रहा है और टीवी चैनलों की डिबेट में हिस्सा ले रहा है।
महाशय राजपाल का मामला
इस्लाम के खिलाफ़ दिए गए बयानों के लिए गैर-मुसलमानों को निशाना बनाना कोई नई बात नहीं है; यह हमेशा से से होता आ रहा है। ऐतिहासिक रिकॉर्ड बताते हैं कि 1920 के दशक में “रंगीला रसूल” प्रकाशित करने के लिए महाशय राजपाल की हत्या इसी वजह से की गई थी।
चाहे नितेश राणे हों, नुपुर शर्मा हों या महाशय राजपाल, घटनाओं का सिलसिला एक जैसा ही है। इस्लामी भीड़ द्वारा लगाए गए हिंसक, अपमानजनक और यहाँ तक कि खुलेआम हत्या के नारे को मोहम्मद जुबैर और वामपंथी मीडिया द्वारा नजरअंदाज कर दिया जाता है, लेकिन बदले की कार्रवाई या चेतावनी देने वाले किसी भी बयान को अपराध घोषित कर दिया जाता है।
यह समाचार मूल रूप से अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित किया गया है। मूल रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
उत्तर प्रदेश के बदायूँ जिले से ‘लव जिहाद’ का मामला सामने आया है। यहाँ एक हिन्दू लड़की ने सोहैल पर नाम बदल कर निकाह करने और फिर इस्लाम कबूल करने के दबाव का आरोप लगाया है। पीड़िता चंडीगढ़ के एक कॉल सेंटर में जॉब करती थी जिसे मांस खाने और नमाज़ पढ़ने पर भी मजबूर किया गया था। इंकार करने पर सोहैल और उसके परिवार वालों ने मिल कर पीड़िता की पिटाई भी की। मंगलवार (3 सितंबर 2024) को दी गई इस शिकायत पर पुलिस ने जाँच शुरू कर दी है।
यह मामला बदायूँ के थाना क्षेत्र बिसौली का है। यहाँ मंगलवार को एक हिन्दू लड़की ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत में पीड़िता ने बताया कि वह मूल रूप से बदायूँ की रहने वाली है। साल 2023 में पीड़िता चंडीगढ़ के एक कॉल सेंटर में जॉब करती थी। यहीं पर पीड़िता को सोहैल पहली बार मिला था जिसने अपना परिचय हिन्दू के तौर पर दिया था। उसने पीड़िता को विश्वास में लिया और साथ रहने वाला। इस दौरान आरोपित ने पीड़िता से कई बार रेप किया जिस से वो गर्भवती हो गई।
पीड़िता ने आगे बताया कि कुछ दिनों बाद उसने एक बेटी को जन्म दिया। बेटी के जन्म के बाद सोहैल पीड़िता को ले कर बदायूँ आ गया। घर आ कर पीड़िता को सोहैल के मुस्लिम होने और खुद को धोखा मिलने की जानकारी हुई। बदायूं ला कर सोहैल और उसके घर वाले पिछले 3 महीने से पीड़िता को टॉर्चर करने लगे। इस टॉर्चर में सोहैल का अब्बा नियामु, उसकी अम्मी रुखसाना के साथ उसकी बहनें रुबीना और जेबा शामिल हैं। आरोप है कि ये सभी मिल कर पीड़िता को एक बंधक जैसे रखते हैं। ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है।
प्रकरण के सम्बन्ध में थाना प्रभारी बिसौली को जाँच कर आवश्यक कार्यवाही हेतु निर्देशित किया गया है ।
शिकायतकर्ता पीड़िता के मुताबिक, उनकी बेटी को माँ से दूर रखा जाता है। छोटी-छोटी बातों पर उसके साथ मारपीट की जाती है। इस दौरान पीड़िता को हिन्दू धर्म त्याग कर इस्लाम कबूल करने के लिए कहा जाता था। जब पीड़िता ने आरोपितों की बात मानने से इंकार कर दिया तो मंगलवार को इन सभी आरोपितों ने पीड़िता को बेरहमी से पीटा और बेटी को छीन कर घर से भगा दिया। पीडिता ने सभी आरोपितों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की है। बदायूं पुलिस ने मामले का संज्ञान ले कर जाँच शुरू कर दी है।
उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में एक हिन्दू लड़की पर मुस्लिम युवक द्वारा जबरन निकाह का दबाव बनाने का मामला सामने आया है। एक प्राइवेट स्कूल में टीचर पीड़िता ने पुलिस अधीक्षक से मिल कर शिकायत दर्ज करवाई है। आरोपित का नाम तनवीर उर्फ़ चाँद बाबू है जो कि सजावट का काम करता है। चाँदबाबू उर्फ़ तनवीर ने पीड़िता की बहन को भी अपशब्द बोले और उलाहना ले कर गए अन्य परिजनों को भी घर से भगा दिया। सोमवार (2 सितंबर 2024) को पुलिस ने केस दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी है।
यह मामला गोंडा जिले के कोतवाली शहर का है। यहाँ सोमवार (2 सितंबर) को OBC समुदाय की हिन्दू पीड़िता ने पुलिस अधीक्षक से मिल कर शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत के बाद पीड़िता ने मीडिया से बात की। महिला ने बताया कि वो जब भी स्कूल पढ़ाने जाती है तो तनवीर उर्फ़ चाँद बाबू उसका पीछा करता है। रास्ते में चाँद बाबू पीड़िता के पीछे कुछ छिड़कता जिसका विरोध करने पर वह खुद से निकाह करने का दबाव बनाता है। कई दिनों तक प्रताड़ित होने के बाद पीड़िता ने अपनी माँ को सारी बात बताई।
पीड़िता की माँ चाँद बाबू के घर उलाहना ले कर गई। आरोप है कि तब चाँद बाबू के घर वाले एकजुट हो गए और सभी ने मिल कर पीड़िता की माँ को गंदी-गंदी गालियाँ देते हुए भगा दिया। इसी दौरान चाँद बाबू के घर वालों ने पीड़िता की माँ को तलवार दिखा कर कहा, “निकाह करवा दो वर्ना जान से मार डालेंगे।” महिला टीचर की माँ इस हरकत से डर गईं। उन्होंने खुद को बचाने के लिए वहाँ हामी भरी और भाग कर थाने पहुँच गईं। बकौल पीड़िता पुलिस चौकी और कोतवाली पर उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई।
पीड़िता ने आगे बताया कि पुलिस की सुस्ती की वजह से चाँद बाबू और मनबढ़ हो गया। वो पीड़िता के साथ उनकी बहन को भी छेड़ने लगा। उसकी गंदी हरकतें स्कूल के साथ बाजार या मोहल्ले में भी कहीं आते-जाते शुरू हो गईं। पीड़िता की बहन की शादी तय हुई तो चाँद बाबू ने उसको भी तुड़वाने की धमकी दी। चाँद बाबू कोतवाली क्षेत्र की ही एक मस्जिद के पास रहता है। वह फूलों की सजावट का काम करता है और साथ ही में गुब्बारों का ठेला भी लगाता है। चाँद बाबू की ये हरकतें पिछले 2 महीने से लगातार जारी हैं।
प्रभारी निरीक्षक कोतवाली नगर को जांच कर आवश्यक कार्यवाही हेतु निर्देशित किया गया है।
शिकायत में महिला टीचर ने आगे बताया कि वो और उनकी बहन जब कहीं भी आते-जाते हैं तब चाँद बाबू सबको दिखा कर उनका वीडियो बनाता है। विरोध करने पर चाँद बाबू पीड़िता के पूरे परिवार का नरसंहार करने की धमकियाँ देता है। बकौल पीड़िता चाँद बाबू को ऐसी सजा मिले कि वो दोबारा किसी और लड़की को परेशान न करे। सोमवार (2 सितंबर, 2024) को गोंडा पुलिस ने बताया कि मामले की जाँच व अन्य जरूरी कार्रवाई के लिए SHO गोंडा कोतवाली को निर्देशित कर दिया गया है।