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सुनवाई के दौरान वकील ने उतार लिए कपड़े, गंदे-गंदे इशारे भी किए: एडवोकेट टीके अजान की ‘नग्नता’ से शर्मसार हुआ केरल का कोर्ट, FIR दर्ज

केरल में कोर्ट की सुनवाई के दौरान गंदी हरकत करने पर एक वकील के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। आरोप है कि उस वकील ने एक मामले की सुनवाई के दौरान अपनी नग्न होकर फोटो खींचीं और साथ ही साथ यौन इशारे भी किए।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये घटना 2 सितंबर 2024 की है। बताया जा रहा है कि वकील टीके अजान इडुक्की के थोडुपुझा के अतिरिक्त जिला न्यायाधीश के समक्ष वीडियो कॉन्फ्रेंस करने के जरिए उपस्थित हुए थे। उस समय उन्होंने खुद को बेहद अश्लील ढंग से प्रस्तुत किया।

घटना के बाद न्यायालय ने तुरंत वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुनवाई को बंद कर दिया। साथ ही अदालत ने अपने आदेश में कहा, मामले की सुनवाई के दौरान अपीलकर्ता के वकील ने कुछ हाव-भाव के साथ नग्नता दिखाई, इसलिए मामले को निर्देश के साथ स्थगित कर दिया गया।

कोर्ट ने कि अपीलकर्ता के वकील को अदालत के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के निर्देश दिए और उनके हाव भाव देख गूगल मीट को बंद कर दिया गया। साथ ही मामले की सुनवाई की अगली तारीख 3 अक्टूबर चुनी गई।

बाद में बेंच क्लर्क द्वारा न्यायालय में आरोपित वकील के खिलाफ वकील के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 79 (किसी महिला की शील को अपमानित करने के इरादे से शब्द, इशारा या कार्य) और सार्वजनिक स्थान पर महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाले यौन इशारों या कृत्यों पर केरल पुलिस अधिनियम की धारा 119 (1) (ए) के तहत अपराध के लिए प्राथमिकी दर्ज की गई।

अल्ताफ ने आकाश बनकर दोस्ती की, अकेला देख किया रेप: इस्लाम कबूलने और बुर्का-नमाज से इनकार पर करता था मरापीट, 4 साल की बेटी से दुष्कर्म की धमकी

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में एक महिला ने अल्ताफ नाम के मुस्लिम पर आकाश बनकर उससे दोस्ती करने और फिर शादी का झाँसा देकर रेप करने का आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज कराया है। अल्ताफ ने बाद में महिला पर इस्लाम अपनाकर मुस्लिम बनने का दबाव बनाया। महिला ने इनकार किया तो उसकी 4 साल की बेटी से रेप करने की धमकी दी। पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है।

घटना मुदाराबाद जिले के मझोला थाना क्षेत्र की है। पीड़ित महिला ने अपनी शिकायत में बताया कि वह मुरादाबाद के लाइनपार इलाके की रहने वाली है। वह विवाहित और 4 साल की बच्ची की माँ है। नौकरी करने वह अमरोहा जाती है। वहाँ पर उसकी मुलाकात अल्ताफ से हुई। अल्ताफ ने उसे अपना नाम आकाश बताया और उससे दोस्ती कर ली। धीरे-धीरे अल्ताफ उसे अपने झाँसे में ले लिया।

महिला बताया कि एक दिन वह अपने घर में अकेली थी। इसी दौरान अल्ताफ उससे मिलने मुरादाबाद आया। उसे अकेला पाकर उसने महिला के साथ रेप किया। जब महिला ने इसकी शिकायत करने की बात कही तो वह शादी का झाँसा दिया। महिला का आरोप है कि अल्ताफ ने उसका अश्लील वीडियो भी बना लिया। जब उसे पता चल गया कि आकाश हिंदू नहीं मुस्लिम नहीं तो वह उसे परेशान लगा।

महिला का कहना है कि इस वीडियो के नाम पर उसे ब्लैकमेल करके उसे अपने पति से भी अलग करा दिया। वह वीडियो को वायरल करने की धमकी देकर साथ रहने के लिए मजबूर करने लगा। अल्ताफ ने उस पर माँस खाने और बुर्का पहनने का दबाव डालने लगा। उसे पाँचों वक्त नमाज पढ़ने के लिए कहने लगा। जब वह इनकार करती तो अल्ताफ ने उसके साथ मारपीट करने लगा।

महिला ने कहा, “2 सितंबर 2024 को अल्ताफ मेरे घर आया और धमकी दी कि तुझे इस्लाम कबूल करना होगा। जब मैंने ऐसा करने से इनकार कर दिया तो उसने मेरी 4 साल की बेटी के कपड़े उतार दिए। उसने धमकाया कि अगर मैं इस्लाम कबूल नहीं करूँगी तो वह मेरी बेटी के साथ रेप करेगा। मैं किसी तरह बचकर भागी और थाने पहुँचकर पुलिस को इसकी सूचना दी।”

शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने आरोपित अल्ताफ के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज करके उसे गिरफ्तार कर लिया। SP सिटी कुमार रणविजय सिंह ने बताया कि आरोपित अल्ताफ के खिलाफ पॉक्सो एक्ट समेत विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया है। आरोपित को गिरफ्तार करके उससे पूछताछ की जा रही है।

पंजाब में ₹100 करोड़ का साइबर घोटाला: शिक्षा मंत्री हरजोत बैंस और SP पत्नी ज्योति यादव पर आरोप: AAP नेता बोले- हम बेदाग, मानहानि का मुकदमा करेंगे

पंजाब में एक बड़ा साइबर घोटाला सामने आया है, जिसमें आम आदमी पार्टी (आप) के मंत्री हरजोत बैंस और उनकी पत्नी पुलिस अधीक्षक (एसपी) ज्योति यादव के नाम कथित रूप से जुड़े हैं। मामले में मोहाली की इंस्पेक्टर अमनजोत कौर ने पंजाब पुलिस के महानिदेशक को शिकायत दर्ज कराई है, जिसमें साइबर फ्रॉड और उच्च स्तर की मिलीभगत के गंभीर आरोप हैं। इस बीच, पंजाब के मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने एक्स पर आरोपों को खारिज किया है और कहा कि वो और उनकी पत्नी बेदाग हैं। वो इस मामले में मानहानि का केस करेंगे।

पीटीसी न्यूज के मुताबिक, यह जानकारी आरटीआई कार्यकर्ता माणिक गोयल ने अपने एक्स हैंडल पर शेयर की है। पोस्ट के मुताबिक, साइबर क्राइम यूनिट में पहले काम कर चुकी इंस्पेक्टर अमनजोत कौर ने इस संबंध में पंजाब पुलिस के महानिदेशक के पास शिकायत दर्ज कराई है।

इंस्पेक्टर अमनजोत कौर ने अपनी शिकायत में कहा कि मोहाली के एक बेसमेंट से संचालित एक फर्जी कॉल सेंटर ने विदेशियों से 100 करोड़ रुपये से अधिक की रकम ठगी है। इस घोटाले की प्रारंभिक जाँच अमनजोत ने शुरू की थी, जिसमें विजय राय कपूरिया को गिरफ्तार किया गया था। शिकायत में कहा गया है कि विजय राय कपूरिया का आम आदमी पार्टी के नेता और पंजाब सरकार के शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस से गहरा संबंध है। बैंस और कपूरिया दोनों ही नांगल के रहने वाले हैं। अमनजोत ने आरोप लगाया कि बैंस को इस घोटाले से पार्टी के लिए फंड भी प्राप्त हुआ होगा।

अमनजोत ने आरोप लगाया कि मंत्री हरजोत सिंह बैंस की पत्नी एसपी ज्योति यादव जाँच में बाधा डाल रही हैं और मामले को रोकने के लिए दबाव डाल रही हैं। हालाँकि, जाँच के दौरान उन्हें रोकने की काफी कोशिश की गई। इसी क्रम में उनके खिलाफ फर्जी मुकदमा भी दर्ज कराया गया। इंडियन एक्सप्रेस ने भी इस शिकायत के बारे में खबर छापी है, हालाँकि उसमें मंत्री और उनकी एसपी पत्नी के नाम नहीं दिए गए हैं, लेकिन कॉल सेंटर घोटाले के आरोपितों के बारे में जानकारी दी गई है।

मंत्री की एसपी पत्नी पर भी गंभीर आरोप

इंस्पेक्टर अमनजोत कौर ने अपनी शिकायत में मंत्री हरजोत बैंस की पुलिस अधीक्षक (एसपी) पत्नी ज्योति यादव पर आरोप लगाया कि उन्होंने जाँच में रुकावट डालने की कोशिश की और मामले को कमजोर करने के लिए दबाव बनाया। एसपी ज्योति यादव पर यह आरोप लगाया गया है कि उन्होंने प्रोफेसर बलविंदर कौर की मौत के मामले में भी हस्तक्षेप किया था, जिसमें एसपी ज्योति यादव और डीएसपी गुरशेर ने प्रोफेसर बलविंदर कौर से संबंधित कॉल रिकॉर्ड अवैध रूप से माँगे, जिन्होंने 1,158 सहायक प्रोफेसरों से जुड़े विवाद के बीच आत्महत्या कर ली थी।

बलविंदर कौर ने आत्महत्या से पहले एक सुसाइड नोट छोड़ा था। उन्होंने अपने सुसाइड नोट में हरजोत सिंह बैंस का नाम लिखा था। अमनजोत ने कहा कि एसपी ज्योति यादव इस मामले को अपने पति को बचाने के लिए दबा रही थीं। बता दें कि एसपी ज्योति यादव और मंत्री हरजोत बैंस ने बीते साल मार्च महीने में शादी की थी।

अमनजोत कौर ने एक जज पर भी आरोप लगाए हैं कि उन्होंने घोटालेबाजों से संपत्ति स्वीकार की और उनके खिलाफ एक फर्जी एफआईआर दर्ज की। शिकायत में जज का नाम और संपत्ति का विवरण भी दिया गया है। अमनजोत ने इस मामले की निष्पक्ष जाँच की माँग की है और मोहाली पुलिस से केस हटाकर किसी अन्य एजेंसी से जाँच कराने की अपील की है।

यह घोटाला पंजाब के साइबर क्राइम यूनिट से जुड़ा है, जहाँ फर्जी कॉल सेंटर चलाए जा रहे थे। इन कॉल सेंटरों से विदेशियों को निशाना बनाकर ठगी की जा रही थी, और यह राशि धीरे-धीरे करोड़ों में पहुँच गई। कॉल सेंटर के मालिक विजय राय कपूरिया को गिरफ्तार कर लिया गया था, लेकिन जाँच के दौरान कई बड़े नाम सामने आए हैं, जिसमें हरजोत बैंस का नाम भी प्रमुख रूप से उभर कर आया है। अगर इन आरोपों की पुष्टि होती है, तो यह आम आदमी पार्टी के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है, जो भ्रष्टाचार और घोटाले के खिलाफ कड़ा रुख अपनाने का दावा करती है।

हालाँकि हरजोत सिंह बैंस ने सोशल मीडिया पर सफाई दी है कि उनका नाम गलत तरीके से लिया जा रहा है। उन्होंने एक्स पर लिखा, “अभी-अभी मुझे एक दागी अधिकारी द्वारा मेरे और मेरी पत्नी के खिलाफ लगाए गए निराधार आरोपों के बारे में पता चला, जो एक बेदाग रिकॉर्ड वाली एक शानदार आईपीएस अधिकारी हैं। हम मानहानि का मुकदमा दायर करेंगे। अरविंद केजरीवाल के एक सिपाही के रूप में ईमानदारी मेरा धर्म है। मुझे अपनी पत्नी पर गर्व है, जो पेशेवर और ईमानदारी की मिशाल है। हम सच्चाई सामने लाने के लिए किसी भी जाँच का स्वागत करते हैं।”

इंस्पेक्टर ने की न्याय की माँग

अमनजोत कौर ने इस मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र जाँच की माँग की है। उनका कहना है कि यह घोटाला न केवल साइबर क्राइम का मामला है, बल्कि इसमें राजनीतिक हस्तक्षेप और मिलीभगत का भी संदेह है। अब देखना यह है कि पंजाब पुलिस और राज्य सरकार इस मामले में क्या कदम उठाती है। वैसे, यह मामला न केवल राष्ट्रीय बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी अहम है, क्योंकि इसमें विदेशियों को निशाना बनाया गया है। साइबर घोटाले की इस घटना ने एक बार फिर साइबर सुरक्षा और अपराध के खिलाफ कठोर कदम उठाने की आवश्यकता को रेखांकित किया है।

सनातन में महिलाओं का सम्मान देख मुस्लिम महिला ने बेटों संग की घर वापसी, शौहर इरफान खान से थीं दुखी: मेहनाज बनी मीनाक्षी, बच्चे ‘लव-कुश’

मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले में एक मुस्लिम महिला ने अपने पूर्व शौहर की प्रताड़ना से तंग आकर अपने दो बच्चों के साथ हिंदू धर्म अपनाने का निर्णय लिया। इस बदलाव के साथ ही महिला का नाम मेहनाज बी से मीनाक्षी रखा गया है और उनके दोनों बेटों के नाम लव और कुश रखे गए हैं। उन्होंने यह कदम सनातन परंपरा में महिलाओं के प्रति सम्मान और आदर देखकर उठाया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मंदसौर जिले के धमानर गाँव की रहने वाली 30 वर्षीय मेहनाज बी ने बुधवार (4 सितंबर 2024) को अपने दो बेटों के साथ गायत्री मंदिर में शुद्धिकरण प्रक्रिया के तहत हिंदू धर्म अपनाया। शुद्धिकरण के बाद उनका नाम मीनाक्षी और बच्चों के नाम लव और कुश रखे गए।

मीनाक्षी ने बताया कि उसने अपने शौहर इरफान खान के साथ 15 साल पहले निकाह किया था। शुरूआत में सब कुछ ठीक था, लेकिन धीरे-धीरे शौहर और सास-ससुर का व्यवहार बदल गया। वे छोटी-छोटी बातों पर मारपीट करने लगे और उसके साथ अपशब्द कहने लगे। परिवार की स्थिति इतनी दयनीय हो गई कि उसके अब्बू अब्दुल रशीद ने इसे पारिवारिक मामला बताते हुए हस्तक्षेप नहीं किया।

सनातन में महिलाओं का सम्मान

मीनाक्षी ने बताया कि उसने यूट्यूब और अन्य माध्यमों से देखा कि हिंदू धर्म में महिलाओं को सम्मान और इज्जत दी जाती है। यह बात उसे बहुत प्रभावित कर गई। हिंदू धर्म में महिलाओं के प्रति सम्मान और उनकी भूमिका को देखकर उसने हिंदू संगठन के लोगों से संपर्क किया और धर्म परिवर्तन की प्रक्रिया शुरू की।

गायत्री मंदिर में हुए विधिपूर्वक घर वापसी समारोह में करीब डेढ़ घंटे तक मंत्रोचार किया गया। इस दौरान मीनाक्षी और उनके दोनों बेटों को दूध, दही, शहद, गंगाजल, गौमूत्र और गोबर से स्नान करवाया गया। पूजा और आरती के बाद मीनाक्षी और उनके दोनों बेटे लव और कुश ने सनातन धर्म अपनाया।

मीनाक्षी ने बताया कि निकाह के बाद उसके जीवन में जो कठिनाइयाँ आईं, वे अब समाप्त हो गई हैं। अब वह अपने नए जीवन में संतुष्ट और खुशहाल महसूस कर रही हैं। उन्होंने आशा जताई है कि उनके धर्म परिवर्तन की कहानी दूसरों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी और वे भी अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकेंगे। मीनाक्षी ने बताया, “उसका खुद के घर में बहुत अपमान होता था, उन्हें और उनके बच्चों को इज्जत नहीं मिलती थी। उन्हें हर तरह से प्रताड़ित किया जाता था। इस मामले में उसके मायके पक्ष के लोग भी खुलकर साथ नहीं दे पाए, लिहाजा उसने नई दुनिया बसाने के सोची और हिंदू धर्म स्वीकार कर लिया।”

हिंदू युवा वाहिनी के प्रदेश प्रभारी चैतन्य सिंह राजपूत ने बताया कि मेहनाज ने करीब दो से तीन माह पहले घर वापसी के लिए संपर्क किया था। सभी कानूनी प्रक्रियाओं को पूरा कर गायत्री परिवार मंदिर में घर वापसी का आयोजन किया गया। अब मीनाक्षी और उनके दोनों बेटे लव और कुश बहुत खुश हैं। राजपूत ने बताया कि वे अब तक 40 महिलाओं, 5 पुरुष और 2 बच्चों की पूरी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए घर वापसी करवा चुके हैं, और सभी खुशहाल जीवन जी रहे हैं।

हिंदू युवा वाहिनी के प्रतिनिधियों का कहना है कि धर्म परिवर्तन की इस प्रक्रिया ने उन लोगों को नया जीवन देने में मदद की है जो अपने पूर्व जीवन से दुखी थे। अब वे एक नई शुरुआत के साथ एक बेहतर जीवन जी रहे हैं।

शिमला में अवैध बनी 5 मंजिला मस्जिद के खिलाफ हिंदुओं का प्रदर्शन: कॉन्ग्रेस सरकार में मंत्री बोले- यहाँ महिलाओं का चलना मुश्किल, हो रहा लव जिहाद

हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में एक मस्जिद के अवैध निर्माण को लेकर लोगों में आक्रोश फैल गया है। संजौली उपनगर में सैकड़ों लोग इस अवैध निर्माण के खिलाफ एकजुट होकर संजौली बाजार में विरोध मार्च निकाला और फिर मस्जिद का घेराव किया। वहीं, कॉन्ग्रेस सरकार में मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि संजौली बाज़ार में महिलाओं का चलना मुश्किल हो गया है और लव जिहाद की घटनाएँ हो रही हैं।

प्रदेश सरकार में मंत्री अनिरुद्ध सिंह के बयान के बाद AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री एवं भाजपा नेता जयराम ठाकुर ने भी इसका विरोध किया है।इतना ही नहीं, राज्य सरकार में मंत्री अनिरुद्ध सिंह धरने में भी पहुँचे और सभा को संबोधित भी किया। हिंदू संगठनों ने इस गिराने के लिए राज्य सरकार को दो दिन का अल्टीमेटम दिया है। 

अपनी सरकार पर निशाना साधते हुए अनिरुद्ध सिंह ने कहा, “संजौली बाजार में महिलाओं का चलना मुश्किल हो गया है। चोरियाँ हो रही हैं। लव जिहाद जैसी घटनाएँ हो रही हैं, जो प्रदेश और देश के लिए खतरनाक हैं। इस मस्जिद का अवैध निर्माण हुआ है। पहले एक मंजिल बनाई गई, फिर बिना अनुमति लिए इसे 5 मंजिल की मस्जिद बना दी गई है। प्रशासन ने इसका बिजली-पानी क्यों नहीं काटा?”

उन्होंने कहा कि बाजार में होने वाली अभद्र टिप्पणियों का वे स्वयं गवाह हैं। राज्य की सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार में ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने आगे कहा कि क्षेत्र में हो रहे झगड़ों और हिंसा के पीछे स्थानीय लोगों का हाथ नहीं है, बल्कि यह बाहरी तत्वों द्वारा शुरू किया गया है। इसके बाद ही स्थानीय लोगों ने प्रतिक्रिया दी है।

उन्होंने मुख्यमंत्री से माँग की है कि काम करने के लिए राज्य में आने वाले व्यक्तियों का सही तरीके से सत्यापन किया जाना चाहिए। मंत्री ने कहा कि केवल हिमाचली बोनाफाइड नागरिकों को ही तहबाज़ारी का लाइसेंस दिया जाना चाहिए। विपक्षी दल भाजपा ने भी इस मामले में अनिरुद्ध सिंह का समर्थन किया। अब कॉन्ग्रेस सरकार पर इस मामले में कार्रवाई को लेकर दबाव बढ़ गया है।

दरअसल, देवभूमि क्षेत्रीय संगठन के अध्यक्ष रुमित सिंह ठाकुर के नेतृत्व में स्थानीय लोगों ने शिमला में गुरुवार (5 सितंबर) को यह मार्च निकाला। मलाणा क्षेत्र में 1 सितंबर को व्यवसायी यशपाल सिंह पर कुछ मुस्लिमों ने हमला कर दिया था। इस हमले में उनके सिर पर 14 टाँके लगे हैं। इसके बाद गुस्साए लोगों ने वहाँ भी एक मस्जिद के सामने प्रदर्शन करके उसे गिराने की माँग की।

ओवैसी की प्रतिक्रिया और अनिरुद्ध सिंह का पलटवार

AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने हिमाचल प्रदेश के मंत्री अनिरुद्ध सिंह के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस भी अब भाजपा की भाषा बोलने लगी है। ओवैसी ने सोशल मीडिया साइट एक्स (पूर्व में ट्विटर) एक वीडियो पोस्ट किया और कहा, “क्या हिमाचल की सरकार भाजपा की है या कांग्रेस की? हिमाचल की ‘मोहब्बत की दुकान’ में नफ़रत ही नफ़रत है।”

ओवैसी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए अनिरुद्ध सिंह ने कहा, “मन्दिर-मस्जिद निजी संपत्ति नहीं हैं। यहाँ वैध और अवैध का मामला है। अवैध तो अवैध है।” उन्होंने कहा कि ओवैसी की राजनीति केवल एक समुदाय के दम पर चलती है। वह अपना राज्य सँभालें। बाहर से आने वाले लोगों का मुद्दा गंभीर है और उनकी पहचान करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि आपराधिक पृष्ठभूमि के लोग हिमाचल आ रहे हैं।

वहीं, शिमला नगर निगम के आयुक्त भूपेंद्र अत्री ने बताया कि मस्जिद के लिए केवल एक मंजिल के निर्माण की अनुमति दी गई थी, लेकिन अवैध रूप से तीन और मंजिलें बनाई गई हैं। उन्होंने कहा कि यह मामला कोर्ट में विचाराधीन है और वक्फ बोर्ड को भी इसमें पार्टी बनाया गया है। उन्होंने कहा कि मामला कोर्ट में जाने के बाद कोई निर्माण नहीं हुआ है।

हिंदू जागरण मंच के पूर्व प्रांत अध्यक्ष कमल गौतम ने कहा कि जिस जगह पर मस्जिद बनी है, वह हिमाचल प्रदेश सरकार की भूमि है। ऐसा खुद सरकार भी मान रही है। उन्होंने कहा कि वक्फ बोर्ड कोई बोर्ड नहीं है, बल्कि भू माफिया है। कमल गौतम ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में अपराधियों शरण स्थली बन गई है और यह पवित्र भूमि खतरे में आ गई है।

बता दें कि सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली कॉन्ग्रेस सरकार में कैबिनेट मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने बुधवार (4 सितंबर 2024) को विधानसभा में इस मामले को उठाया। उन्होंने कहा कि हिमाचल में अब रोज नए लोग आ रहे हैं। कहीं से जमात वाले आ रहे हैं, जिनका कोई अता-पता नहीं है। क्या ये रोहिंग्या मुसलमान हैं? उन्होंने कहा कि वे खुद एक-दो लोगों को जानते हैं, जो बांग्लादेश से आए हैं।

ग्रामीण विकास मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने खुलासा किया कि इस मस्जिद का अवैध तौर पर अब तक 6,357 वर्ग फुट में अवैध निर्माण हो गया है। इससे भी बढ़कर चिंता की बात है कि जो व्यक्ति केस की सुनवाई में आ रहा था, उसके बारे में साल 2023 में निगम को पता चलता है कि उसका केस से लेना-देना ही नहीं है। उन्होंने पूछा कि क्या निगम के अफसरों ने उसके कागज चेक नहीं किए?

PM मोदी की ‘स्वच्छ भारत मिशन’ के सामने आने लगे अच्छे परिणाम, शोध में खुलासा: भारत में शिशु मृत्यु दर में आई भारी कमी, सालाना 70000 शिशुओं की बच रही जान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शुरू किया गया स्वच्छ भारत मिशन (SBM) अब एक महत्वपूर्ण सफलता की कहानी बनकर उभरा है। एक नई रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार, स्वच्छ भारत मिशन ने भारत में हर साल 60,000 से 70,000 शिशुओं की जान बचाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

सुमन चक्रवर्ती, सोयरा गुने, टिम ए. ब्रुकनर, जूली स्ट्रोमिंगर और पार्वती सिंह द्वारा किए गए अध्ययन “स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय निर्माण और भारत में शिशु मृत्यु दर” को नेचर पत्रिका में प्रकाशित किया गया है। इसमें इस बात पर जोर दिया गया है कि स्वच्छ भारत कार्यक्रम के तहत शौचालय निर्माण से देश में शिशु और पाँच साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर में कमी आई है। यही नहीं, देश में स्वच्छता को लेकर जागरुकता भी आई है, जिसके दूरगामी परिणाम अब आने शुरू हो गए हैं। स्वच्छ भारत अभियान की वजह से सालाना 60-70 हजार शिशुओं की जान भी बच रही है।

स्वच्छ भारत मिशन की शुरुआत 2 अक्टूबर 2014 को महात्मा गाँधी की जयंती के दिन हुई थी। इसका मुख्य उद्देश्य भारत में खुले में शौच की आदतों को समाप्त करना और स्वच्छता को बढ़ावा देना है। इस मिशन के अंतर्गत, ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में शौचालयों का निर्माण, स्वच्छता शिक्षा, और स्वच्छता प्रबंधन के लिए कई पहल किए गए हैं।

स्वच्छ भारत मिशन ने भारत के विभिन्न हिस्सों में स्वच्छता की स्थिति में सुधार लाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इसके तहत स्वच्छ शौचालयों का निर्माण, स्वच्छता पर जागरूकता अभियान, और स्वच्छता प्रबंधन के लिए विभिन्न योजनाएँ लागू की गई हैं। इस लेख में, हम स्वच्छ भारत मिशन के प्रभाव और शिशु मृत्यु दर में कमी के प्रमुख आँकड़े और विश्लेषण प्रस्तुत करेंगे।

शिशु मृत्यु दर में कमी के आँकड़े

स्वच्छता में सुधार के परिणामस्वरूप, भारत में शिशु मृत्यु दर (IMR) में महत्वपूर्ण कमी देखी गई है। नई रिपोर्ट के अनुसार, स्वच्छ भारत मिशन ने हर साल 60,000 से 70,000 शिशुओं की जान बचाई है।

शिशु मृत्यु दर में कमी: यह शोधपत्र शिशु मृत्यु दर (आईएमआर) और 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर (यू5एमआर) पर शौचालय निर्माण के प्रभाव का अनुमान दो-तरफ़ा निश्चित-प्रभाव प्रतिगमन मॉडल का उपयोग करके लगाता है। इसमें पाया गया कि जिन जिलों में स्वच्छ भारत मिशन के तहत 30% घरों में शौचालय बने थे, उनमें प्रति 1,000 जीवित जन्मों पर 5.3 शिशु मृत्यु दर और 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर में 6.8 की कमी आई, जो बाल जीवित रहने की दरों पर बेहतर स्वच्छता के परिणाम को दर्शाता है।

वार्षिक जीवन बचत: एक नई अध्ययन रिपोर्ट के अनुसार, स्वच्छ भारत मिशन हर साल 60,000 से 70,000 शिशुओं की जान बचाने में सफल रहा है। इस आँकड़े से यह स्पष्ट होता है कि स्वच्छता में सुधार का प्रत्यक्ष प्रभाव शिशु मृत्यु दर पर पड़ा है।

स्वच्छता का प्रभाव: स्वच्छता की स्थिति में सुधार और स्वच्छ शौचालयों की उपलब्धता के कारण, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में, शिशु मृत्यु दर में कमी आई है। 2014 में 38 मिलियन स्वच्छ शौचालयों की संख्या अब 2023 तक 100 मिलियन से अधिक हो गई है।

डायरिया और संक्रामक बीमारियों में कमी: स्वच्छता में सुधार के कारण, डायरिया जैसी संक्रामक बीमारियों में भी कमी आई है। डायरिया के मामलों में 2014 से 2023 तक 20% की कमी देखी गई है। इसके साथ ही, अन्य संक्रामक बीमारियों जैसे कि हैज़ा और कॉलरा के मामलों में भी कमी आई है।

स्वच्छ भारत मिशन की सफलताएँ

इस शोध पत्र के मुताबिक, साल 2011 से 2020 तक 640 जिलों को कवर करने वाले सभी भारतीय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के डेटा का उपयोग किया गया है। इस अध्ययन का उद्देश्य बच्चों के स्वास्थ्य पर इस विशाल स्वच्छता कार्यक्रम के प्रभाव का आकलन करना है। लेखकों ने कार्यक्रम के तहत शौचालय प्राप्त करने वाले घरों के जिला प्रतिशत हिस्से पर ध्यान केंद्रित किया है, जो स्वच्छता तक बेहतर पहुँच और शिशु मृत्यु दर में कमी के बीच स्पष्ट संबंध दर्शाता है।

स्वच्छ शौचालयों का निर्माण: मिशन के तहत, 2014 से 2024 तक भारत में 100 मिलियन से अधिक शौचालयों का निर्माण किया गया है। इसके परिणामस्वरूप पहले के 30% के मुकाबले अब अधिकतम ग्रामीण घरों में अब स्वच्छ शौचालय की सुविधा उपलब्ध है।

स्वच्छता शिक्षा और जागरूकता: स्वच्छ भारत मिशन ने स्वच्छता शिक्षा के लिए कई अभियान चलाए हैं। स्कूलों और समुदायों में स्वच्छता के महत्व के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए कार्यक्रम चलाए गए हैं, जिनसे लोगों को स्वच्छता की आदतें अपनाने में मदद मिली है।

स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार: स्वच्छता की दिशा में उठाए गए कदमों के साथ, भारतीय सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं में भी सुधार किया है। स्वास्थ्य केंद्रों में स्वच्छता और सुविधाओं की स्थिति में सुधार हुआ है, जिससे लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हो रही हैं।

भविष्य की योजनाएँ और चुनौतियाँ

स्वच्छ भारत मिशन की सफलता के बावजूद, कुछ चुनौतियाँ अभी भी मौजूद हैं। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता की स्थिति को बनाए रखना और सुधारना एक सतत प्रक्रिया है। सरकार ने आगामी वर्षों में निम्नलिखित योजनाएँ बनाईं हैं:

  • स्वच्छता का स्थायित्व: स्वच्छता को स्थायी रूप से बनाए रखने के लिए, नियमित निगरानी और रखरखाव के लिए योजनाएं बनाई जा रही हैं। स्वच्छता की आदतों को जन-आंदोलन के रूप में बनाए रखने के लिए शिक्षा और जागरूकता अभियानों को जारी रखा जाएगा।
  • नए शौचालयों का निर्माण: शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में और अधिक स्वच्छ शौचालयों का निर्माण जारी रहेगा। विशेष रूप से उन क्षेत्रों में ध्यान केंद्रित किया जाएगा जहां स्वच्छता की सुविधाएँ अभी भी अपर्याप्त हैं।
  • स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार: स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए सरकार ने कई नई योजनाएं बनाई हैं। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और अस्पतालों में स्वच्छता और सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए निवेश किए जाएंगे।

स्वच्छ भारत मिशन ने भारत में स्वच्छता और स्वास्थ्य के क्षेत्र में महत्वपूर्ण सुधार किए हैं, विशेष रूप से शिशु मृत्यु दर में कमी लाने में। इस मिशन के तहत उठाए गए कदमों के परिणामस्वरूप, स्वच्छता की स्थिति में सुधार हुआ है और हर साल 60,000 से 70,000 शिशुओं की जान बचाई गई है। स्वच्छता में सुधार और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के माध्यम से, भारत एक स्वस्थ और स्वच्छ भविष्य की ओर बढ़ रहा है। हालाँकि, चुनौतियाँ अभी भी हैं, लेकिन सरकार की योजनाओं और मिशन की सफलता से यह स्पष्ट है कि भारत स्वच्छता और स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक नई दिशा में अग्रसर है।

RG कर मेडिकल कॉलेज रेपकांड में संदीप घोष ने की थी सबूतों को नष्ट करने की कोशिश? BJP का आरोप- घटना के अगले दिन पूर्व प्रिंसिपल ने जारी किया था रेनोवेशन ऑर्डर

कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में डॉक्टर के रेप-मर्डर केस केस में पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष पर सबूत मिटाने के आरोप लगते रहे हैं। मृतका के माता-पिता और जूनियर्स डॉक्टर्स ने सबूत मिटाने के आरोप लगाए थे। इस बीच, एक पत्र वायरल हो रहा है, जिसमें दावा किया गया है कि ये पत्र संदीप घोष ने जारी किया था और रेप-मर्डर के दूसरे ही दिन अस्पताल के सेमीनार हॉल में तोड़फोड़ और सबूत मिटाने की कोशिश की थी।

आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में डॉक्टर के रेप-मर्डर केस में गुरुवार (5 सितंबर 2024) को पश्चिम बंगाल बीजेपी प्रमुख सुकांत मजूमदार ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि रेप की घटना के अगले दिन ही मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष ने लेटर लिखकर सेमिनार हॉल के पास रेनोवेशन करवाने का ऑर्डर दिया था। बता दें कि सेमिनार हॉल वही जगह है, जहाँ डॉक्टर की रेप के बाद हत्या कर दी गई।

केंद्रीय मंत्री और बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने कथित तौर पर संदीप घोष द्वारा जारी पत्र भी शेयर किया है, जिसमें संदीप घोष के हस्ताक्षर भी हैं। बीजेपी नेता सुकांत मजूमदार ने एक्स पर लिखा, ”आरजी कर मेडिकल कॉलेज के पूर्व डायरेक्टर संदीप घोष द्वारा साइन किया गया यह आदेश 10 अगस्त का है, जो पीड़िता की मौत के ठीक एक दिन बाद का है। सहकर्मियों और प्रदर्शनकारियों द्वारा घटनास्थल के साथ छेड़छाड़ के आरोपों के बावजूद, पुलिस आयुक्त ने इससे इनकार किया है।”

पत्र के मुताबिक संदीप घोष ने लोक निर्माण विभाग को पत्र लिखा था और टॉयलेट रेनोवेशन की अनुमति माँगी थी। संदीप घोष ने ऑन ड्यूटी डॉक्टरों के लिए टॉयलेट रूम बनाने हेतु निर्माण का आदेश दिया था। निर्देश में साफ दिख रहा है कि संदीप घोष ने लोकनिर्माण विभाग के सिविल और इलेक्ट्रिकल इंजीनियर को यह निर्देश दिया था।

सीबीआई पहले ही सुप्रीम कोर्ट में कह चुकी है कि घटनास्थल से सबूत गायब हो गए हैं। ऐसे में घटनास्थल तोड़ने का निर्देश भी प्रासंगिक है। सीबीआई पहले ही इस मामले का जिक्र कोर्ट में कर चुकी है।

इस मामले में कई मीडिया रिपोर्ट्स पहले ही दावा कर रही थीं कि संदीप घोष ने घटना स्थल के पास मरम्मत कार्य का आदेश दिया था, जिससे साक्ष्यों से छेड़छाड़ की संभावना पर सवाल उठाए जा रहे हैं। इस पत्र के वायरल होने के बाद सत्तारूढ़ पार्टी और पुलिस पर सवाल उठने लगे हैं। बीजेपी का आरोप है कि कॉलेज प्रशासन और राज्य सरकार ने इस घटना को छुपाने की कोशिश की है।

गौरतलब है कि 9 अगस्त 2024 के तड़के कोलकाता के आरजी कर अस्पताल में नाइट ड्यूटी के दौरान महिला डॉक्टर से रेप के बाद हत्या की गई थी। इस मामले में जब अन्य डॉक्टर इंसाफ माँगने प्रदर्शन पर उतरे तो उन्हें उपद्रवियों द्वारा डराया-धमकाया गया था। साथ ही अस्पताल में भी तोड़फोड़ हुई थी।

कला, विज्ञान, गणित… 1000 साल तक सब फूले-फले, फिर ‘कुल (जाति) की राजनीति’ में डूब गया सबसे ताकतवर गणराज्य: क्या जातीय जनगणना पर सियासत करने वाले इससे सीखेंगे?

देश में जाति जनगणना का मुद्दा गर्माया हुआ है। विपक्ष इसे एक ब्रह्मास्त्र के रूप में इस्तेमाल करने की योजना बना रहा है। कॉन्ग्रेस के राहुल गाँधी ने तो यहाँ तक धमकी दे दी कि इसे किसी भी कीमत पर कराना ही होगा। वहीं, बिहार की लालू यादव की पार्टी राजद भी इसे जातीय अस्मिता से जोड़ने का प्रयास कर रही है, जो कि लोकतंत्र के लिए घातक सिद्ध हो सकता है।

बिहार की पूर्व राजद-जदयू सरकार ने बिहार में जाति सर्वे कराया भी और इसको आधार बनाकर बिहार में जातिगत आरक्षण की सीमा को 65 प्रतिशत तक दिया था। हालाँकि, आरक्षण की इस सीमा को कोर्ट ने खारिज कर दिया। अब राजद के तेजस्वी यादव और कॉन्ग्रेस के राहुल गाँधी इस जाति जनगणना को पूरे देश में लागू कराने की माँग कर रहे हैं।

अगर जातिगणना हो और उसके आधार पर समाज के निचले पायदान पर लोगों के सरकार कल्याणकारी नीतियाँ बनाए तो यह समाज और लोकतंत्र के बेहद सराहनीय कदम होगा। रॉबर्ट डाहल ने भी कहा है, “किसी देश में स्थिर लोकतंत्र की संभावनाएँ बेहतर होती हैं, यदि उसके नागरिक और नेता लोकतांत्रिक विचारों, मूल्यों और प्रथाओं का दृढ़ता से समर्थन करते हैं।”

हालाँकि, सत्ता पाने के लिए जिस तरह से जातीय गणना को जाति अस्मिता से जोड़ा जा रहा है और उससे समाज में वैमनस्यता और कटुता फैलती जा रहा है। देश में जिस तरह से इस विवाद को हवा दी जा रही है, वैसे में भारत जैसे बहुला वाले देश यह कदम भयावह साबित हो सकता है। वर्तमान में कुछ राजनेताओं की महत्वकांक्षा को देखते हुए यह समाज को जोड़ने के बजाय तोड़ने वाला साबित हो सकता है।

अमेरिकी राजनेता, वकील, राजनयिक एवं लेखक ज़ॉन ऐडम ने लगभग 250 वर्ष पहले कहा था, “मैं यह नहीं कहता कि लोकतंत्र समग्र रूप से और लंबे समय में राजतंत्र या अभिजाततंत्र से ज़्यादा हानिकारक रहा है। लोकतंत्र कभी भी अभिजाततंत्र या राजतंत्र जितना टिकाऊ नहीं रहा है और न ही हो सकता है। लेकिन, जब तक यह टिका रहता है, यह इन दोनों से ज़्यादा ख़ूनी होता है। याद रखें, लोकतंत्र कभी भी लंबे समय तक नहीं टिकता। यह जल्द ही बर्बाद हो जाता है, थक जाता है और खुद को मार डालता है। अभी तक ऐसा कोई लोकतंत्र नहीं आया जिसने आत्महत्या न की हो।”

हालाँकि, जॉन ऐडम जैसे विचारकों का यह दृष्टांत पश्चिमी सभ्यता के संदर्भ में हो सकता है, जहाँ आधुनिक लोकतंत्र या गणतंत्र का उदय ही 17वीं शताब्दी में उदय हुआ। हालाँकि, भारत इस मामले में अलग है। भारत खासकर बिहार, जहाँ जातीय जनगणना का बीज बोया गया, वहाँ सदियों पहले लोकतंत्र का वटवृक्ष फैल चुका था, जो आज की प्रमुख वैश्विक राज प्रणाली का अहम हिस्सा है। लेकिन, कुछ मामलों में यह संदर्भ कथन सटीक बैठता है।

लिच्छवी गणराज्य का उदय एवं अंत

भारत में आज से लगभग 2600 साल पहले बिहार की धरती पर लिच्छवी गणराज्य का उदय हुआ था। यह वज्जि संघ का हिस्सा था। इस गणतंत्र में आज के भारत की तरह की बहुलता थी। यह गणतंत्र बहुत फला-फूला, लेकिन आखिरकार हर गणराज्य कुलों के बीच सत्ता को लेकर आंतरिक विवाद और संघर्ष बढ़ने लगे और आखिरकार इसका पतन हो गया।

दरअसल, मगध साम्राज्य के बगल में लिच्छवी गणराज्य था। इसकी राजधानी वैशाली (बिहार) थी। यहाँ शासन की पद्धति गण या संघ के तौर पर थी। इसे गणराज्य के रूप में आज चित्रित किया जाता है। इस संघ में लगभग 8 कुल के शामिल थे, जिन्हें अष्टकुल कहा जाता है। यह वज्जि संघ नेपाल तक फैला हुआ था। इन सभी राज्यों, जिन्हें महाजनपद कहा जाता है, के प्रमुख यानी राजा इसमें भाग लेते थे।

बौद्ध धर्मग्रंथ ‘दीघ निकाय’ में इस बारे में विस्तृत चर्चा है। ये राजा सभा में एकत्रित होकर गणराज्य के आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक एवं रणनीतिक पहलू पर चर्चा करते थे और सर्वसम्मति से गणराज्य की भलाई के लिए काम करते थे। हालाँकि, लिच्छवी सहित जितने भी 16 गणराज्य एवं राजशाही थी, सबका प्रमुख क्षत्रिय (राजपूत) ही होता था। इनमें शाक्य, चेदी आदि गणराज्य भी शामिल हैं।

उस दौरान मगध साम्राज्य का शासक आजातशत्रु लिच्छवी गणराज्य पर आक्रमण करने की योजना बनाई। उन्होंने अपने मंत्री वस्सकार को साथ लेकर भगवान बुद्ध से सलाह लेने के लिए पहुँचे। हालाँकि, भगवान बुद्ध ने इसकी अनुमति नहीं दी। इस तरह लिच्छवी गणराज्य इतना ताकतवर हो गया था, चाहकर भी कोई राज्य इसे जीत नहीं पाता था।

बुद्ध ने लिच्छवि गणतंत्र के भविष्य पर टिप्पणी करते हुए अपने प्रिय शिष्य आनंद से कहा था, “जब तक वे (लिच्छवी गणराज्य के कुल प्रमुख) अपने अपनी सभा में एक साथ मिल-बैठकर निर्णय लेंगे, परस्पर विचार-विमर्श से समस्याओं को सुलझाएँगे, सहमतियों का सृजन करेंगे, अपने वरिष्ठ लोगों का सम्मान करेंगे तब तक उनका गणतंत्र जीवित रहेगा।”

इस तरह यह राज्य आज से लगभग 1000 सालों तक चलता रहा। इस दौरान इस संघ में शामिल राज्यों में हर क्षेत्र में उन्नति हुई। कला, साहित्य, ज्ञान, विज्ञान, आयुर्वेद, चिकित्सा, दर्शन, गणित आदि का खूब विकास हुआ। छोटे-छोटे राज्यों की आपसी शक्ति ने लिच्छवी गणराज्य को अजेय बना दिया था। हालाँकि, आपसी झगड़े ने बाद में इसे कमजोर बना दिया।

गुरुस्वामी अपने एक लेख में लिखते हैं, “गणराज्य का राजा या प्रमुख को हमेशा क्षत्रिय होता था… लिच्छवि, जो वर्तमान नेपाल में काठमांडू घाटी और उत्तरी बिहार के एक बड़े हिस्से पर शासन करते थे, लगभग 7,000 परिवार प्रमुखों एक सभा द्वारा शासित होते थे।” लिच्छवी गणराज्य में तीन प्रमुख पदाधिकारी मिलकर काम करते थे – शासक प्रमुख, उप प्रमुख और सेना प्रमुख।

वज्जि संघ के रूप में लिच्छवी, चेदी, शाक्य आदि जितने भी 8 महाजनपद थे बेहद ताकतवर थे। हालाँकि, गणराज्य होने के कारण इनके प्रमुख युद्ध जैसी राष्ट्रीय महत्व की विषय पर सर्वसम्मति से आगे बढ़ जाते थे, लेकिन आंतरिक राजनीतिक एवं प्रणाली को लेकर उनके बीच अक्सर खींचतान होती रहती थी। लिच्छवी, शाक्य, चेदी गणराज्य में भी यही कहानी थी।

लिच्छवी गणराज्य में कहा जाता है कि कुलीन 7000 परिवार के प्रमुख शामिल थे, जिनमें व्यापारी से लेकर हर वर्ग के लोग शामिल थे। इनमें स्त्रियाँ, ब्राह्मण, दास और नाई को शामिल होने की इजाजत नहीं थी। इस हर वर्ग के लोग अपने-अपने समाज के लिए सभाओं में खींचतान करते। उनके लिए अधिक-अधिक रियायत या फिर अपना प्रभाव चाहते थे।

इससे इन गणराज्यों में वैचारिक विभाजन हो गया। वैचारिक विभाजन के साथ ही उनमें सत्ता संघर्ष भी गहरा होता गया। ये सब कुछ सिर्फ राष्ट्र के बजाय सिर्फ अपने वर्ग को महत्व देने का परिणाम था। परिणाम ये हुआ कि लिच्छवी सहित ये सभी गणराज्य अपनी सत्ता को बचाए रखने पर विशेष ध्यान देने लगे। इससे इनके राजतंत्र वाले मगध एवं कोशल जैसे पड़ोसियों की इन पर निगाह पैनी होती गई।

आपसी खींचतान एवं संघर्ष में लिच्छवी कमजोर हो गए। जो लोकतंत्र की जननी थी, वो अब कमजोर हो चली थी। आखिरकार मगध साम्राज्य के साथ युद्ध में लिच्छवियों की हार हुई। इस तरह मगध ने एक-एक करके सभी जनपदों एवं महाजनपदों को अपने अंदर समाहित कर लिया। इस तरह 16 संघर्ष में लिच्छवि और वज्जियों का नाश हो गया। बाद में गुप्त साम्राज्य में अंतत: नष्ट हो गया।

लिच्छवी सहित अन्य गणराज्यों के पतन का प्रमुख कारण आंतरिक सत्ता संघर्ष एवं प्रभावशाली गुट द्वारा उस सिंहासन पर नियंत्रण की कोशिश के अलावा, उनमें समय के साथ लोकतांत्रिक शासन के प्रति प्रतिबद्धता कम होती गई। आंतरिक सत्ता संघर्ष से लिच्छवियों की एकता और सामूहिक निर्णय लेने की प्रक्रिया कमजोर हो गई। इससे शासन के अधिक निरंकुश और केंद्रीकृत रूपों का मार्ग प्रशस्त हुआ।

आधुनिक लोकतंत्र के लिए सीख

आपसी तालमेल, सत्ता संघर्ष, राष्ट्र के बजाय गुट को प्राथमिकता के कारण जिस लिच्छवी गणराज्य ने दुनिया को पहला लोकतंत्र दिया, वह कमजोर होकर तबाह हो गया। आज की आधुनिक राजनीति को उससे सीखने की जरूरत है। वर्तमान व्यवस्था को यह सीखने की जरूरत है कि सत्ता में किसी एक गुट का प्रभाव समाज उसे निरंकुश बना देता है। निरंकुश समाज में असंतोष उत्पन्न होता है और आखिरकार यह पतन का रास्ता सुनिश्चित करता है।

आज की राजनीति में जाति जनगणना के नाम पर गुटों का, जिसे जाति कहना उचित होगा, सत्ता संघर्ष चल रहा है। इसका केंद्र जाति जनगणना है। इस जाति जनगणना में किसी नेता ने ये नहीं कहा कि सर्वे इस बात की हो कि विकास में क्रम में कितने परिवार पीछे छूट गए हैं, उनकी संख्या गिनी जाए। जाति के आधार पर आज के समाज में अमीर-गरीब का निर्धारण नहीं हो सकता।

किसी राजनेता ने ये नहीं कहा कि इस देश में कितने ऐसे परिवार हैं, जिन्हें दोनों वक्त का भोजन नहीं मिल रहा है। कितने ऐसे परिवार हैं जिन्हें स्वास्थ्य-शिक्षा नहीं मिल रहा है। हर राजनीतिक दल ने सिर्फ यही बात कही कि जाति जनगणना की जाए, ताकि पता लगाया जा सके जातियों की जनसंख्या कितनी है ताकि उसके अनुपात में आरक्षण व्यवस्था लागू की जा सके।

यह माँग अव्यवहारिक एवं अखंडता के लिए खतरे वाला है। जैसा कि हमने देखा कि लिच्छवी सहित अन्य गणराज्यों में किसी कुल (आज के संदर्भ में जाति) का प्रभाव बढ़ा तो वह सत्ता पर अधिकार की बात सोचने लगा और उसका केंद्रीकरण हुआ। जाति जनगणना को आधार बनाकर पिछड़े वर्ग के लिए और आरक्षण की माँग की जा रही है।

वहीं, समय-समय पर पिछड़े वर्ग में अन्य जातियों को भी जोड़ने की माँग होती रहती है। सत्ता प्राप्ति के लिए इनमें अन्य जातियाँ जोड़ी भी जाति हैं, लेकिन उन्हें इसका लाभ नहीं मिल पाता, क्योंकि इन वर्गों में जो जातियाँ समृद्ध और सक्षम हो चुकी हैं वे इसका लाभ स्वयं उठा लेती है। इससे आपसी भेद एवं संघर्ष बढ़ने का खतरा हो जाता है।

जाति जनगणना हो, लेकिन निचले पायदान पर खड़े लोगों की भलाई के लिए हो। यह पता लगाने के लिए हो कि इस देश में हर जाति की संख्या कितनी है और उनमें कितने प्रतिशत गरीब एवं अक्षम हैं, ताकि उस वर्ग का संपूर्ण लाभ उठा लेने वाले सक्षम एवं समृद्ध लोगों को बाहर निकाला जा सके। खुद को लोकतंत्र का रक्षक कहने वाले राहुल गाँधी और तेजस्वी यादव जैसे नेता इसकी गंभीरता समझें।

हम भारत में कई सिंगापुर बनाना चाहते हैं: बोले PM मोदी, सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम विकसित करने को दोनों देशों ने मिलाया हाथ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लुक-ईस्ट नीति के तहत पहले ब्रुनेई, फिर सिंगापुर की यात्रा पर पहुँचे। पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत और सिंगापुर के बीच 4 अहम समझौते हुए। इस दौरान भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर भी मौजूद रहे। इस दौरान पीएम मोदी ने कहा, “हम भी भारत में अनेक सिंगापुर बनाना चाहते हैं और हमें खुशी है कि हम इस दिशा में मिलकर कोशिश कर रहे हैं। हमारे बीच जो मंत्रियों की राउंड टेबल की बनी है, वो एक पाथ ब्रेकिंग मैकेनिज्म है। डिजिटलाइजेशन, मोबिलिटी और एडवांस मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में सहयोग की दिशा में इनिशिएटिव की पहचान बन गई है।”

सिंगापुर दौरे पर पीएम मोदी ने इस दिशा में अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हुए कहा, “हम भारत में कई सिंगापुर बनाना चाहते हैं।” उनका यह बयान न केवल भारत के विकास की दिशा में एक बड़ा संकेत है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि सरकार देश को एक वैश्विक तकनीकी और आर्थिक हब के रूप में उभरते हुए देखना चाहती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सिंगापुर के पीएम लॉरेंस वोंग के साथ सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र की अग्रणी सिंगापुरी कंपनी एईएम का दौरा किया। उन्हें वैश्विक सेमीकंडक्टर मूल्य सीरीज में एईएम की भूमिका, इसके संचालन और भारत के लिए योजनाओं के बारे में जानकारी दी गई।

भारत में “कई सिंगापुर” बनाने का सपना

सिंगापुर अपनी उन्नत अवसंरचना, समृद्ध अर्थव्यवस्था और बेहतरीन शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए जाना जाता है। पीएम मोदी के लिए “कई सिंगापुर” बनाने का सपना भारत के शहरों और औद्योगिक केंद्रों को वैश्विक मानकों पर खड़ा करना है। यह सपना केवल शहरी विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें उद्योग, तकनीकी नवाचार, शिक्षा, और स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में व्यापक सुधार शामिल हैं। पीएम मोदी का यह विचार भारत के हर क्षेत्र को उन्नत और आत्मनिर्भर बनाने पर केंद्रित है। सिंगापुर की तर्ज पर भारत के बड़े शहरों में वैश्विक स्तर की अवसंरचना और सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, जिससे रोजगार, नवाचार और तकनीकी विकास को बढ़ावा मिलेगा।

सिंगापुर के प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद पीएम मोदी ने कहा, “मैं आपके गर्मजोशी भरे स्वागत के लिए आपका आभार व्यक्त करता हूं। प्रधानमंत्री का पद संभालने के बाद यह हमारी पहली मुलाकात है। मेरी तरफ से आपको बहुत-बहुत बधाई। मुझे विश्वास है कि 4G के नेतृत्व में सिंगापुर और भी तेजी से प्रगति करेगा। सिंगापुर सिर्फ एक देश नहीं है, सिंगापुर हर विकासशील देश के लिए प्रेरणा है। हम भारत में भी कई सिंगापुर बनाना चाहते हैं और मुझे खुशी है कि हम इस दिशा में मिलकर काम कर रहे हैं। हमारे बीच जो मंत्रिस्तरीय गोलमेज बैठक हुई है, वह एक पथ-प्रदर्शक व्यवस्था है।”

भारत में सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग ईकोसिस्टम विकसित करने के प्रयासों और इस क्षेत्र में सिंगापुर की ताकत को देखते हुए, दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय सहयोग का विस्तार करने का फैसला लिया है। भारत-सिंगापुर मंत्रिस्तरीय गोलमेज की दूसरी मीटिंग के दौरान, दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने के लिए सेमीकंडक्टर पर ध्यान केंद्रित करते हुए एडवांस मैन्युफैक्चरिंग को एक पिलर के रूप में जोड़ने पर सहमति व्यक्त की। दोनों पक्षों ने भारत-सिंगापुर सेमीकंडक्टर ईकोसिस्टम साझेदारी पर समझौता ज्ञापन भी पूरा किया है।

पीएम नरेंद्र मोदी सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, “मेरे दोस्त प्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग के साथ आज भी चर्चा जारी रही। हमारी बातचीत कौशल, प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य सेवा, एआई और अन्य क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर केंद्रित रही। हम दोनों ने व्यापार संबंधों को बढ़ावा देने की जरूरत पर सहमति व्यक्त की है।”

सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री: नई आर्थिक क्रांति की शुरुआत

भारत में सेमीकंडक्टर उद्योग का विकास पीएम मोदी की “मेक इन इंडिया” और “आत्मनिर्भर भारत” योजनाओं का अहम हिस्सा है। सेमीकंडक्टर, जिसे तकनीकी दुनिया की रीढ़ कहा जाता है, आधुनिक उपकरणों जैसे स्मार्टफोन, कंप्यूटर, और यहां तक कि ऑटोमोबाइल में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री का विकास न केवल भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता को सुनिश्चित करेगा, बल्कि यह देश को वैश्विक प्रौद्योगिकी आपूर्ति श्रृंखला में महत्वपूर्ण स्थान दिलाएगा।

पीएम मोदी का यह मानना है कि भारत को सेमीकंडक्टर के निर्माण के क्षेत्र में अग्रणी बनाकर देश को वैश्विक स्तर पर एक नया पहचान दिलाया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि सेमीकंडक्टर निर्माण का विस्तार भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगा और इसे तकनीकी विकास के नए युग में प्रवेश करने में मदद करेगा। इसके साथ ही, भारत अब सेमीकंडक्टर चिप निर्माण के लिए एक वैश्विक हब बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इसका लक्ष्य है कि भारत की सेमीकंडक्टर उत्पादन क्षमता को 2030 तक वैश्विक बाजार में मजबूत प्रतिस्पर्धा के रूप में स्थापित किया जाए। इस दिशा में कई कंपनियां पहले ही भारत में अपने उत्पादन केंद्र खोल चुकी हैं, और यह सिलसिला तेजी से बढ़ रहा है।

पीएम मोदी का “कई सिंगापुर” बनाने का विचार केवल मेट्रोपॉलिटन शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका लक्ष्य है कि देश के हर हिस्से में विकास की रोशनी पहुँचाई जाए। प्रधानमंत्री ने यह स्पष्ट किया है कि भारत के हर राज्य में सिंगापुर जैसे उन्नत शहरों के विकास के लिए योजनाएँ बनाई जा रही हैं। इन नए शहरों में आधुनिक अवसंरचना, स्मार्ट सिटी सुविधाएं, और तकनीकी उद्योगों का विकास होगा, जिससे न केवल शहरी इलाकों का विकास होगा, बल्कि ग्रामीण इलाकों में भी आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। इससे देश के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच की खाई को पाटने में मदद मिलेगी।

पीएम मोदी का विज़न केवल घरेलू सुधारों तक सीमित नहीं है, बल्कि उनका लक्ष्य है कि भारत वैश्विक स्तर पर एक प्रमुख भूमिका निभाए। सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री के विकास के साथ भारत को वैश्विक प्रौद्योगिकी आपूर्ति श्रृंखला में महत्वपूर्ण स्थान मिलने की उम्मीद है। इससे न केवल भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी, बल्कि देश की वैश्विक प्रतिष्ठा भी बढ़ेगी। भारत अब वैश्विक निवेशकों और उद्योगपतियों के लिए एक आकर्षक स्थल बनता जा रहा है, जहां तकनीकी विकास और नवाचार के अवसर हैं। सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री में भारत के कदम से यह सुनिश्चित होगा कि देश वैश्विक तकनीकी परिदृश्य में अग्रणी बने और अपनी स्थिति को और सशक्त बनाए।

पीएम मोदी का “कई सिंगापुर” बनाने का विज़न और सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री का विकास भारत को एक नई ऊँचाई पर ले जाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। सेमीकंडक्टर उत्पादन न केवल देश को तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बनाएगा, बल्कि इससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और वैश्विक स्तर पर भारत की साख मजबूत होगी। देश को सिंगापुर जैसी आधुनिक और उन्नत शहरी सुविधाओं से सुसज्जित करने का पीएम मोदी का सपना भारत को एक नई दिशा देगा, जहाँ न केवल तकनीकी विकास होगा, बल्कि समग्र आर्थिक और सामाजिक सुधारों को भी गति मिलेगी।

‘कश्मीर की आजादी’ पर बहस चाहती थी ऑक्सफोर्ड यूनियन, डायरेक्टर विवेक अग्निहोत्री ने ठुकराया न्योता: कहा- जब तक कश्मीरी पंडित वापस नहीं लौटते, तब नहीं होगी कोई चर्चा

द कश्मीर फाइल्स फिल्म के डायरेक्टर विवेक रंजन अग्निहोत्री ने बताया है कि उन्होंने ऑक्सफोर्ड यूनियन का एक न्योता ठुकरा दिया है। उन्हें ऑक्सफोर्ड ने कश्मीर की आजादी पर बात करने के लिए बुलाया था। अग्निहोत्री ने कहा कि उन्हें यह कार्यक्रम भारत और कश्मीर विरोधी लगा, इसलिए उन्होंने यह निमंत्रण ठुकराया।

ऑक्सफोर्ड यूनियन ने कश्मीर के आजाद देश बनने की की वकालत करते हुए एक बहस का आयोजन किया था। विवेक रंजन अग्निहोत्री ने इसको लेकर कहा कि इस तरह की बहस का आयोजन भारत की संप्रुभता को सीधी चुनौती देना है। अग्निहोत्री ने यह निमंत्रण ठुकराने पर एक पत्र भी लिखा है।

अग्निहोत्री ने ऑक्सफोर्ड यूनियन को लिखे हुआ पत्र में कहा, “ना केवल 140 करोड़ भारतीयों के लिए बल्कि 1990 के कश्मीर नरसंहार के सैकड़ों हज़ारों विस्थापित हिंदू पीड़ितों के लिए मुझे यह ना केवल अप्रिय बल्कि अपमानजनक भी लगता है। इसे बहस के रूप में पेश करना एक त्रासदी को पार्लर गेम में बदलने जैसा है जहाँ लोगों की जिन्दगी दांव पर है और उसकी कीमत कोई स्याही नहीं बल्कि लोगों का खून है।”

अग्निहोत्री ने अपने पत्र में लिखा, “जब तक इस्लामी आतंकवादियों की धमकियों के कारण अपनी मातृभूमि से विस्थापित कश्मीरी हिंदू वापस नहीं लौट पाते, तब तक कश्मीर की संप्रभुता पर कोई बहस नहीं हो सकती।” सोसायटी ने दरअसल कश्मीर को एक आजाद देश बताया था और कहा था कि हिन्दुओं के नरसंहार पर बनी द कश्मीर फाइल्स विवादास्पद है।

ऑक्सफोर्ड यूनियन सोसाइटी ने विवेक अग्निहोत्री को “यह सदन कश्मीर के एक स्वतंत्र राज्य में विश्वास करता है” नाम की एक बहस पर बात करने के लिए आमंत्रित किया था। इसने उनकी फिल्म को विवादास्पद तो बताया था लेकिन कहा था कि वह आज के समय में बात करने के लिए उपलब्ध सबसे उपयुक्त लोगों में से एक हैं।

अग्निहोत्री को भेजे गए निमंत्रण में कहा गया था कि इस मुद्दे पर बहस 24 अक्टूबर, 31 अक्टूबर, 7 नवंबर, 14 नवंबर, 21 नवंबर, 28 नवंबर और 5 दिसंबर को बहस होगी। अग्निहोत्री से पूछा गया था कि वह किस दिन आने में सुविधा महसूस करेंगे। हालाँकि, अग्निहोत्री ने इस बहस में भाग लेने से मना कर दिया।

ये बात गौर करने वाली है कि यह वही सोसाइटी है जिसने वर्ष 2022 में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में अग्निहोत्री के कार्यक्रम रद्द कर दिए थे। तब अग्निहोत्री ने कहा था कि ऑक्सफोर्ड यूनियन सोसाइटी के तत्कालीन अध्यक्ष पाकिस्तानी थे और उनका नजरिया भारत विरोधी था।

उन्होंने तब कहा था कि उनका कार्यक्रम रद्द करके यूनिवर्सिटी के हिन्दू छात्रों के साथ ज्यादती की गई है और ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि यहाँ हिन्दू अल्पसंख्यक हैं। अग्निहोत्री ने बताया था कि ऑक्सफोर्ड में उनका कार्यक्रम कुछ घंटे पहले ही रद्द कर दिया गया था।

तब उन्होंने कहा था, “मुझे ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में बोलना था क्योंकि ऑक्सफोर्ड यूनियन ने मुझे बहुत पहले आमंत्रित किया था। ईमेल के ज़रिए इस बात पर रजामंदी भी हो गई थी। लेकिन उसके कुछ घंटे पहले ही उन्होंने कहा कि माफ़ करें हमसे गलती हो गई। मुझसे पूछे बिना ही उन्होंने तारीख़ बढ़ा दी जब छात्र यहाँ नहीं होते, ऐसे कार्यक्रम करने का कोई मतलब नहीं है।”

कश्मीर फाइल्स फिल्म

विवेक अग्निहोत्री की द कश्मीर फाइल्स 1990 के दशक में घाटी से कश्मीरी पंडितों के बाहर निकाले जाने पर आधारित है। फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर अच्छी कमाई की थी। कई राज्यों ने इसे टैक्स-फ्री कर दिया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर गृह मंत्री अमित शाह और यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने फिल्म की तारीफ की थी।

फिल्म को ज्यादातर दर्शकों ने खुले दिल से देखा था। लेकिन, लेकिन समाज के एक वर्ग, खासकर लिबरल और इस्लामी कट्टरपंथियों ने फिल्म का विरोध किया था, उनका दावा था कि यह अल्पसंख्यकों की भावनाओं को ठेस पहुंचाती है।”

director vivek ranjan agnihotri declines invitation of oxford union for debate on kashmir freedom