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छत्रपति शिवाजी हमारे लिए अराध्य देव, प्रतिमा गिरने पर सिर झुकाकर माफी माँगता हूँ: पालघर में बोले मोदी, वधावन बंदरगाह की रखी आधारशिला

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महाराष्ट्र के सिंधुदुर्ग जिले के राजकोट किले में स्थापित छत्रपति शिवाजी की प्रतिमा गिरने पर माफी माँगी है। पीएम मोदी महाराष्ट्र दौरे पर हैं। जहाँ वो पहले मुंबई और फिर पालघर गए। पीएम मोदी ने मुंबई में एक कार्यक्रम के दौरान माफी माँगते हुए कहा, ‘मैं इस घटना पर सिर झुका कर माफी माँगता हूँ। हमारे लिए शिवाजी आराध्य देव हैं।”

पालघर में पीएम मोदी ने कहा, “2013 में बीजेपी ने मुझे पीएम उम्मीदवार बनाया था। सबसे पहले मैंने रायगढ़ में छत्रपति शिवाजी महाराज की समाधि के सामने एक भक्त के तौर पर बैठकर एक नई यात्रा शुरू की।”

पीएम मोदी ने कहा, “छत्रपति शिवाजी महाराज हमारे लिए सिर्फ एक नाम नहीं हैं…आज मैं सिर झुकाकर अपने भगवान छत्रपति शिवाजी महाराज से माफी माँगता हूँ। हमारे मूल्य अलग हैं, हम वो लोग नहीं हैं जो भारत माता के महान सपूत, इस भूमि के सपूत वीर सावरकर को गाली देते रहें और उनका अपमान करते रहें। वे माफी माँगने के लिए तैयार नहीं हैं, वे अदालत में जाकर लड़ने के लिए तैयार हैं।”

मुंबई के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पालघर पहुँचे। पीएम मोदी ने यहाँ 76,000 करोड़ रुपये की वधावन बंदरगाह की आधारशिला रखी। उन्होंने लगभग 1,560 करोड़ रुपये की 218 मत्स्य पालन परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास भी किया।

बता दें कि 26 अगस्त को 35 फीट ऊंची छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा ढह गई थी। इसके बाद बाद राज्य में इसे लेकर सियासत तेज हो गई थी। इस मामले में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजीत पवार सिंधुदुर्ग ज़िले के राजकोट किला पहुँच कर हालात का जायज़ा लिया था। उन्होंने 2 दिन पहले एक जनसभा के दौरान माफी माँगी थी। वहीं, मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे भी इस मामले में माफी माँग चुके हैं।

शुक्रवार (30 अगस्त 2024) को उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने दौरे की तस्वीरें पोस्ट करते हुए लिखा था, “जो कुछ भी हुआ, उससे हर कोई दुखी है। छत्रपति शिवाजी महाराज हमारे देवता हैं और उनके इतिहास पर हर किसी को गर्व है। इस बारे में मुख्यमंत्री ने मीटिंग की है। एक स्मारक बनाए जाने की कोशिशें हो रही हैं। दोषियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की जाएगी। वे कहीं भी जाएँ, उन्हें पकड़ा जाएगा।”

कंसल्टेंट की हो चुकी है गिरफ्तारी

महाराष्ट्र के सिंधुदुर्ग जिले में छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा गिरने के मामले में शुक्रवार (30 अगस्त 2024) को पहली गिरफ्तारी हुई है। कोल्हापुर से स्ट्रक्चरल कंसल्टेंट को गिरफ्तार किया गया है। कोल्हापुर क्राइम ब्रांच ने सिंधुदुर्ग केस में शुक्रवार तड़के तीन बजे के आसपास स्ट्रक्चरल कंसल्टेंट चेतन पाटिल को गिरफ्तार किया।

गौरतलब है कि सिंधुदुर्ग में छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा का अनावरण 4 दिसंबर, 2023 को किया गया था, जब सिंधुदुर्ग में पहली बार नौसेना दिवस समारोह का आयोजन किया गया था। प्रतिमा का मकसद मराठा नौसेना की विरासत और छत्रपति शिवाजी महाराज के समुद्री रक्षा और सुरक्षा में योगदान के साथ-साथ आधुनिक भारतीय नौसेना के साथ इसके ऐतिहासिक संबंध का सम्मान करना था। इस प्रोजेक्ट का कॉन्सेप्ट और नेतृत्व इंडियन नेवी ने राज्य सरकार के सहयोग से किया था।

15 साल की लड़की को परेशान कर रहा था कलाम मंसूरी, जहर खाकर दे दी जान: नासिक की घटना, परिजनों से भी दिलवाता था धमकी-10 पर केस

महाराष्ट्र की नासिक पुलिस ने 29 अगस्त 2024 को 15 साल की नाबालिग लड़की के आत्महत्या के केस में 10 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। पीड़ित लड़की को 22 साल का कलाम इजहार मंसूरी नाम का मुस्लिम युवक लगातार परेशान करता था। उसके धमकाने से परेशान होकर लड़की ने जान दे दी। रिपोर्ट के मुताबिक, कलाम इजहार मंसूरी के परिवार के लोगों ने भी लड़की को धमकाया था, जिसके बाद उसने जहर खाकर 23 अगस्त को अपनी जान दे दी।

ऑपइंडिया के पास घटना की एफआईआर कॉपी मौजूद है। लड़की के माता-पिता की शिकायत के आधार पर मामले में दर्ज अन्य आरोपितों में नाना खाला (कलाम की माँ), जहाँगीर शेख, बबलू शेख, मुन्ना शेख, लादेन मंसूरी, समीर बबलू शेख, नड्डा मंसूरी शेख, अंजुम सैय्यद और साहिल सैय्यद शामिल हैं। आरोपितों पर भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 107, 351 (2), 3 (5) और 78 तथा POCSO अधिनियम, 2012 की धारा 12 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

एफआईआर के मुताबिक, पीड़ित लड़की को मुख्य आरोपित कलाम वर्ष 2022 से परेशान कर रहा था। उस समय लड़की स्कूल में पढ़ती थी। आरोपित लड़की के घर से स्कूल आने-जाने का रास्ता रोकता था और कहता था कि वह उसे पसंद करता है। कई बार उसने लड़की को बात करने के लिए मजबूर किया और बातचीत के लिए उसका फोन नंबर भी ले लिया। हालाँकि इस बात की शिकायत लड़की ने अपने घर पर की थी, जिसके बाद परिजनों ने बच्ची का ख्याल रखना शुरू कर दिया। उन्होंने आरोपित कलाम के परिजनों से भी उसकी शिकायत की थी और चेतावनी भी दी थी कि वो बच्ची को परेशान न करे। हालाँकि आरोपित ने पीड़िता का पीछा करना और उसे परेशान करना जारी रखा।

कलाम की वजह से परेशान लड़की ने घर से ही 10वीं की बोर्ड परीक्षा दी थी। इसके बाद लड़की को नासिक में 11वीं कक्षा में दाखिला मिल गया था। 23 अगस्त को वो अपने घर से दोपहर के समय निकली थी, लेकिन घर नहीं लौटी। एक घंटे बाद बच्ची की माँ को कॉल आया, जिसमें पता चला कि बच्ची पुलस के पास बेहोश मिली है। ये कॉल आरोपित अंजुम और साहिल सैय्यद ने की थी। दोनों ने बच्ची की माँ से तुरंत अस्पताल पहुँचने के लिए कहा, लेकिन जब तक वो अस्पताल पहुँची, तब तक दोनों लड़के भाग चुके थे।

एफआईआर की कॉपी

एफआईआर के मुताबिक, लड़की ने अपनी माँ से कहा था कि उसे डर लग रहा है। पीड़ित की माँग ने बताया, “डॉक्टरों ने जाँच के बाद दवा दी थी, लेकिन वापस लौटते समय उसे उल्टी होने लगी और उसकी मौत हो गई। उसने बताया कि कलाम और उसका परिवार उसे परेशान कर रहा था। शादी के लिए मजबूर करता था। उसकी माँ भी लड़की को धमकाती थी। लड़की ने ही जहाँगीर, बबलू, मुन्ना, लादेन, समीर और नड्डा के नाम भी बताए जो उसे कलाम से शादी करने के लिए मजबूर करते थे।”

लड़की की 23 अगस्त को ही मौत हो गई थी। हालाँकि 25 अगस्त को अंजुम सैय्यद के घर के पास लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज सामने आई। जिसमें अंजुम और साहिल लड़की को स्कूटी पर लेकर जाते दिख रहे हैं। जबकि उन्होंने दावा किया था कि उन्हें लड़की पुल के पास सड़क पर बेहोश मिली थी, जिसके बाद वे उसे अस्पताल ले गए। शक के आधार पर लड़की के माता-पिता ने दोनों पर मामला भी दर्ज कराया है।

ऑपइंडिया को मिली एक्सक्लूसिव जानकारी के अनुसार, लड़की के माता-पिता का मानना ​​है कि लड़की को आरोपी और उसके रिश्तेदारों ने जहर दिया है और फिर साहिल और अंजुम सैय्यद ने उसे अस्पताल में भर्ती कराया। सीसीटीवी फुटेज में देखा जा सकता है कि दोनों आरोपित उसे बाइक पर ले जा रहे हैं। ऑपइंडिया के पास एफआईआर कॉपी के साथ ही सीसीटीवी फुटेज भी है। हालाँकि पुलिस ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए फोन पर कुछ भी जानकारी देने से मना कर दिया।

10 दिन पहले एक नाबालिग लड़की ने कर ली थी आत्महत्या, यासीन कर रहा था परेशान

बता दें कि महाराष्ट्र में 10 दिनों के भीतर इस तरह का यह दूसरा मामला है। 18 अगस्त 2024 को 16 वर्षीय लड़की ने कासिम यासीन पठान नाम के आरोपित से 8 माह तक उत्पीड़ना झेलने के बाद आत्महत्या कर ली थी। लड़की ने महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर जिले के अहेर गाँव में एक कुएँ में कूदकर अपनी जान दे दी थी।

पीड़ित नाबालिग 11वीं में साइंस स्ट्रीम से पढ़ती थी, जबकि आरोपित स्थानीय गैराज में मैकेनिक का काम करता था। लड़की शहर में रह रही थी क्योंकि उसे पढ़ाई के लिए एक निजी कोचिंग सेंटर में दाखिला मिला था। हालाँकि वो रक्षाबंधन के त्योहार के लिए अपने गाँव गई थी।

जानकारी के मुताबिक, आरोपित लड़की को पसंद करता था और उसे अपने प्रेम प्रस्ताव स्वीकार करने के लिए मजबूर करता था। पिछले आठ महीनों में उसने लड़की को धमकाया था कि वो उसका प्रस्ताव मान ले, वर्ना वो उसके भाई की हत्या कर देगा। लड़की ने बचने की बहुत कोशिश की, लेकिन परेशान होकर उसने जान दे दी। अगर वो उसके प्रेम प्रस्ताव को स्वीकार नहीं करेगी, तो वो उसके भाई को मार देगा। लड़की ने आरोपी से बचने के लिए हर संभव कोशिश की लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। परिजनों ने आरोपित को सख्त सजा देने की माँग की है।

जिस देश में हर 5वें दिन बन रहा एक अरबपति, उस देश के सबसे कम उम्र के अमीर को जानते हैं आप: हुरुन लिस्ट में बीजिंग पीछे, मुंबई नंबर 1

‘हुरुन इंडिया’ ने भारत के अमीर हस्तियों की नई लिस्ट जारी की है। लिस्ट में वैसे तो गौतम अडानी, मुकेश अंबानी समेत 300 से अधिक अरबपति भारतीयों के नाम शामिल हैं, लेकिन जो सबसे ज्यादा गौर करने वाला नाम इस लिस्ट में है वो एक 21 साल के उद्यमी का है- Zepto के संस्थापक कैवल्य वोहरा। रिपोर्ट के मुताबिक 21 वर्षीय कैवल्य की कुल संपत्ति तकरीबन 3600 करोड़ रुपए की है। वहीं दूसरे नंबर के कम उम्र वाले युवा उन्हीं के साथी आदित पालिचा हैं। पालिचा के पास 4300 करोड़ रुपए की संपत्ति है।

दोनों दोस्तों ने कोविड महामारी के दौरान आवश्यक वस्तुओं की जल्द और संपर्क रहित डिलीवरी की बढ़ती माँग को पूरा करने के लिए 2021 में Zepto की शुरुआत की। इसके बाद मात्र 19 साल की उम्र से कैवल्य वोहरा ने वेल्थ-हुरुन इंडिया रिच लिस्ट 2022 में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई, तब से हर साल वह इस सूची में शामिल होते रहे हैं।

कैवल्य के बारे में मौजूदा जानकारी बताती है कि उन्होंने दुबाई कॉलेज से स्कूली पढ़ाई पूरी की। इसके बाद स्टैनफोर्ड में कंप्यूटर साइंस प्रोग्राम में एडमिशन लिया। वहीं उनकी मुलाकात आदित से हुई और दोनों ने पढ़ाई छोड़कर जेप्टो कंपनी की शुरुआत की।

कंपनी के भारत में स्विगी, इंस्टामार्ट, जोमैटो जैसे कई प्रतिद्वंद्वी है लेकिन फिर भी ये कंपनी उन्हें बरामबर टक्कर देती है। वहीं इसके संस्थापकों का कंपनी को मार्केट के हिसाब से उत्कृष्ट बनाने का प्रयास और भी ज्यादा लोगों को इस कंपनी की ओर आकर्षित करता है।

और भी युवा है लिस्ट में शामिल

इस लिस्ट में भारत पे वाले शाश्वत नकरानी का भी नाम है जिनकी उम्र मात्र 26 साल है और उनकी संपत्ति 1300 करोड़ रुपए। इसी तरह अलख पांडे का नाम भी इस लिस्ट में है उनके पास 4500 करोड़ की संपत्ति है, ओयो के फाउंडर रितेश अग्रवाल जिनके पास 4500 करोड़ की संपत्ति है वो भी युवा उद्यमियों में आते हैं। लेकिन सबसे कम उम्र की बात करें तो वो कैवल्य वोहरा की ही है।

Zepto कंपनी की बढ़ रही वैल्यूएशन

उनकी कंपनी जेप्टो इसी मकसद से अस्तित्व में लाई गई थी कि कोरोना के बाद जब हर कोई बाहर निकलने से हिचकता था तब इस कंपनी ने 10 मिनट के भीतर घरों पर सब्जी और जरूरी सामान भेजने शुरू किए। इसके बाद इसकी बाजार में वैल्यू बढ़ती गई। आज ये कंपनी देश के विभिन्न इलाकों में सामान पहुँचाने का काम कर रही है। 1000 से ज्यादा इनके पास वर्कफोर्स है और 5000 से ज्यादा प्रोडक्ट से साइट डिलिवर करवाते हैं।

जेप्टो आज और भी ज्यादा चर्चा में है। खबरें बताती हैं कि डिलीवरी ऐप जेप्टो की वैल्यूएशन 40% बढ़कर 5 बिलियन डॉलर (₹41,931 करोड़) हो गई है। कंपनी ने बताया कि इस फंडिंग राउंड में कंपनी ने 340 मिलियन डॉलर (₹2,851 करोड़) जुटाए हैं। पिछले महीने (जून ) प्राइमरी फंडिंग राउंड में 3.6 बिलियन डॉलर (₹30,190 करोड़) की वैल्यूएशन पर 665 मिलियन डॉलर यानी ₹5,577 करोड़ का फंड जुटाया था। ये कंपनी भारत की सबसे तेजी से बढ़ती कंज्यूमर इंटरनेट कंपनियों में से एक है।

मुंबई में रहते हैं सबसे ज्यादा अरबपति

वहीं जिस जगह से इस कंपनी की शुरुआत हुई है वो जगह भी अमीरों वाली इस लिस्ट में पीछे नहीं है। हम बात कर रहे हैं मुंबई की है। मुंबई में इतने अरबपति हैं कि हुरुन इंडिया रिच लिस्ट 2024 के अनुसार, मुंबई ने चीन को पीछे छोड़ दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक चीन में अरबपतियों की संख्या में 25% की गिरावट आई है, वहीं भारत में इनकी संख्या में 29% की वृद्धि हुई है। पहले वहाँ की राजधानी शहर बीजिंग में सबसे ज्यादा अरबपति रहते थे पर अब भारत के मुंबई में हैं। लिस्ट के मुताबिक एशिया के 25% अरबपतियों का घर मुंबई में है। इसी के साथ भारत में अरबपतियों की संख्या रिकॉर्ड 334 तक पहुँच गई है। बताया जा रहा है कि भारत को हर पाँचवे दिन एक नया अरबपति मिला और पिछले साल के मुकाबले देश में 75 नए अरबपति जुड़े। लिस्ट में भी 142 नए बिलेनियर शामिल हुए, जो रियल एस्टेट, इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन बिजनेस से जुड़े हैं।

क्या है हुरुन लिस्ट

बता दें कि हुरुन इंडिया की यह लिस्ट, जिसमें भारतीय उद्यमियों का नाम प्रकाशित हुआ है वो अपनी सूची और रिसर्च से भारत में आंत्र्प्रन्योरशिप को बढ़ावा देने पर कार्य करती है। भारत में इसकी लीडरशिप ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से स्नातक पास अनस रहमान जुनैद के हाथ में है। इसके अलावा वैश्विक स्तर पर भी हुरुन की रिपोर्ट अमीरों की सूची के बारे में बताती है। ये अपनी रिपोर्ट भारत के अलावा, चीन, फ्रांस, यूके, यूएसए, ऑस्ट्रेलिया, जापान, कनाडा और लक्जमबर्ग में जारी करती है।

वक्फ बिल पर JPC ने माँगे सुझाव, मुस्लिम संगठनों से भी पक्ष रखने को कहा: जानिए कौन-कैसे बन सकते हैं इस प्रक्रिया का हिस्सा

वक्फ बोर्ड की मनमानी पर लगाम कसने के लिए केंद्र की मोदी सरकार द्वारा लाए गए वक्फ (संशोधन) अधिनियम 2024 पर को चर्चा के लिए संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेजा गया है। जेपीसी की इस पर शुक्रवार (30 अगस्त 2024) को दूसरी बैठक हुई। लोकसभा सचिवालय ने एक विज्ञापन निकालकर इस बिल पर अपना पक्ष रखने के लिए कहा है। साथ ही मुस्लिम संगठनों को भी आमंत्रित किया है।

ऑल इंडिया सुन्नी जमीयत-ए-उलेमा मुंबई, इंडियन मुस्लिम्स फॉर सिविल राइट्स नई दिल्ली, उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड और राजस्थान मुस्लिम वक्फ बोर्ड के प्रतिनिधि शुक्रवार को जेपीसी की बैठक में बिल को लेकर अपना-अपना पक्ष रखे। इससे पहले 31 सदस्यीय जेपीसी की पहली बैठक 22 अगस्त को हुई थी, जो काफी हंगामेदार रही थी।

बैठक में भाजपा और विपक्षी सांसदों के बीच बिल के उद्देश्य और इसके प्रावधानों को लेकर तीखी बहस हुई थी। उसी बैठक में विपक्षी सांसदों की तरफ से यह कहा था कि इस बिल से जुड़े सभी हितधारकों के साथ व्यापक विचार-विमर्श के लिए अखबारों में विज्ञापन दिया जाना चाहिए और उनके सुझाव आमंत्रित करना चाहिए। इसे संसद में 8 अगस्त को पेश किया गया था।

भाजपा के सांसद जगदंबिका पाल की अध्यक्षता वाली इस समिति ने इस बिल से संबंधित लोगों के विचार एवं सुझाव माँगे हैं। इनमें आम लोग, गैर-सरकारी संगठन (NGO), विशेषज्ञ, हितधारी और संस्थान शामिल हैं। जो लोग समिति को अपना सुझाव भेजने के लिए इच्छुक हैं, वे हिंदी या अंग्रेजी में अपने सुझाव की दो कॉपी लोकसभा सचिवालय को भेज सकते हैं।

इसका पता है- जॉइंट सेक्रेटरी(JM), लोकसभा सेक्रेटेरियट, रूम नंबर 440, पार्लियामेंट हाऊस एनेक्सी, नई दिल्ली। इसका पिन कोड 110001 है। फैक्स के लिए नंबर 01123017709 भी जारी किया गया है। इसे [email protected] पर भी ईमेल किया जा सकता है। सुझाव अगले 15 दिनों के भीतर पहुँच जाने चाहिए। इसके बाद ही इस पर विचार किया जा सकेगा।

सुझाव के लिए  लोक सभा सचिवालय की ओर से जारी किए गए विज्ञापन में कहा गया है कि यह सुझाव समिति के रिकॉर्ड का हिस्सा होगा और इसे गोपनीय माना जाएगा। विज्ञापन में यह भी कहा गया है कि जो लोग अपना सुझाव भेजने के अलावा समिति के समक्ष प्रस्तुत होना चाहते हैं, वे इसके बारे में लिख सकते हैं। उन्हें इसका मौका दिया जाएगा।

वक्फ संशोधन विधेयक जेपीसी अध्यक्ष और भाजपा सांसद जगदंबिका पाल ने कहा, “हमने पहली बैठक में भी कहा था कि अगर सरकार ने वक्फ संशोधन 2024 को जेपीसी के पास भेजा है तो हम देश के सभी वक्फ बोर्ड को बुलाएँगे, जिससे सभी की राय को इसमें शामिल किया जा सके। सरकार का मानना ​​है कि एक बेहतर वक्फ संशोधन बिल आए।”

उन्होंने आगे कहा, “ऑल इंडिया सुन्नी जमीयत-उल, ऑल इंडिया मुस्लिम सिविल लिबर्टीज के पूर्व सांसद दीप साहब को बुलाया गया है, साथ ही यूपी और राजस्थान के दो सुन्नी वक्फ बोर्ड को भी बुलाया गया है। हम सभी सदस्य से मिलकर एक व्यापक बिल लाएँगे जो इस वक्फ संशोधन बिल के लिए और देश के लिए बेहतर हो।”

शेख हसीना को हटाने के नाम पर शुरू की जो हिंसा उससे बांग्लादेश में 400 हुए अंधे, 1000+ की हत्या: अंतरिम सरकार में भी नहीं थम रहा खून खराबा

बांग्लादेश में मोहम्मद युनुस की अंतरिम सरकार आने के बाद शेख हसीना की पार्टी के कार्यकर्ताओं से चुन चुन कर बदला लिया जा रहा है। बांग्लादेश के बड़े शहर चटगाँव में खुलेआम आवामी लीग के दो कार्यकर्ताओं की हत्या हमलावरों ने कर दी। इससे पहले हिन्दुओं को बड़े स्तर पर हिंसा का निशाना बनाने की खबर बांग्लादेश के अलग-अलग हिस्सों से आती रही हैं। वहीं अब सामने आया है कि हसीना सरकार का तख्तापलट करने के लिए की गई हिंसा में 1000 लोगों की मौत हुई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, चटगाँव के हथाज़री उपजिला में गुरुवार (29 अगस्त, 2024) दो युवकों की हत्या कर दी गई। इनकी पहचान मसूद कैसर (32) और मोहम्मद अनीस (38) के तौर पर हुई है। यह दोनों अब सत्ता से बाहर हो चुकी शेख हसीना की पार्टी के सक्रिय कार्यकर्ता थे। इन दोनों की हत्या बाइक पर बैठ कर दो आए हमलावरों ने कर दी।

हमलावरों ने इन्हें गोली मार दी और फिर घटनास्थल से भाग गए। इनमें एक की मौके पर मौत हो गई जबकि दूसरा यहाँ से भागते हुए मारा गया। आवामी लीग कार्यकर्ताओं की हत्या करने वालों का अभी तक कोई सुराग नहीं लग पाया है। पुलिस इस मामले में अब जाँच कर रही है।

इस घटना ने बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के बाद आवामी लीग के कार्यकर्ताओं को लेकर जताई जा रही चिंताओं को और गहरा कर दिया है। इससे पहले भी आवामी लीग के कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को शेख हसीना के बांग्लादेश छोड़ने के बाद निशाना बनाया गया था। हिन्दुओं के खिलाफ भी बांग्लादेश में लगातार हिंसा हुई है।

हिंसा में मारे गए 1000 लोग

बांग्लादेश की अंतरिम सरकार में स्वास्थ्य महकमा संभाल रही नूरजहाँ बेगम ने कहा है कि बीते दिनों देश में हिंसा के कारण लगभग 1000 लोग मारे गए हैं। इसके अलावा 400 लोग इन प्रदर्शन में हुई हिंसा के कारण अंधे हो गए हैं। नूरजहाँ ने बताया है कि शेख हसीना को हटाने के लिए हुई हिंसा के दौरान बड़ी संक्या संख्या में पुलिसकर्मी भी निशाना बने हैं। वर्तमान में कई पुलिसकर्मियों का बांग्लादेश के अस्पतालों में इलाज चल रहा है।

अलग-अलग एजेंसियों ने इस दौरान देश में हुई मौतों का अलग-अलग अनुमान दिया है। सभी का आँकड़ा 600-1000 के बीच है। बांग्लादेश में जुलाई, 2024 में चालू हुई छात्रों का आरक्षण विरोधी आंदोलन जल्द ही शेख हसीना सरकार के विरोध में बदल गया था। इस आंदोलन को जमात-ए-इस्लामी और BNP ने हाइजैक कर लिया था। अगस्त के शुरूआती दिनों तक चले इस आन्दोलन के दौरान बांग्लादेश के भीतर बड़े पैमाने पर पुलिसकर्मियों पर हमला किया गया था। इस दौरान बाकी लोगों को भी निशाना बनाया गया था।

बढ़ती हिंसा के बाद 5 अगस्त,2024 को प्रधानमंत्री शेख हसीना ने इस्तीफ़ा दे दिया था और भारत चली आई थीं। इसके बाद मोहम्मद युनुस को बांग्लादेश की अंतरिम सरकार का प्रमुख बनाया गया था। हालाँकि, इस सरकार के आने के बाद भी बांग्लादेश में शान्ति बहाली नहीं हो पाई है। युनुस सरकार के सत्ता में आने के हफ़्तों बाद भी बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिन्दुओं के विरुद्ध लगातार हिंसा जारी है। इसके अलावा शेख हसीना की पार्टी मंत्री-कार्यकर्ता भी निशाने पर हैं।

सागरमाला की शान बनेगा पालघर, पैदा होंगे 12 लाख रोजगार, 17 हजार हेक्टेयर में होगा फैला: जिस वधावन बंदरगाह की PM मोदी ने रखी नींव, उसके बारे में जानिए सब कुछ

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शुक्रवार (30 अगस्त, 2024) को महाराष्ट्र के दौरे पर हैं। यहाँ वह ग्लोबल फिनटेक समिट और वधावन पोर्ट के शिलान्यास में शामिल हुए हैं। पीएम मोदी ने पालघर में बनाए जाने वाले इस महत्वाकांक्षी पोर्ट का शिलान्यास किया है। यह परियोजना भारत की महत्वपूर्ण इन्फ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में से एक है। इसके जरिए भारत समुद्री यातायात में लम्बी छलाँग लगाने की योजना बना रहा है। बड़ी लागत से बन रहा यह पोर्ट सागरमाला परियोजना का हिस्सा है। एक बार बन जाने पर यह देश के मालवहन के लिए सहायक होगा।

क्या है वधावन पोर्ट परियोजना?

भारत का विदेशी व्यापार बीते कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ा है। इस कारण से आयात-निर्यात में भी तेज बढ़ोतरी हुई है। आयात निर्यात में होने वाली बढ़ोतरी से लगातार भारत में पहले से मौजूद बंदरगाहों पर दबाव बढ़ रहा है। साथ ही अब नए और बड़े बंदरगाहों की जरूरत भी महसूस की जा रही है। इसी क्रम में महाराष्ट्र में वधावन पोर्ट बनाने का निर्णय केंद्र सरकार ने लिया है। इस नए बंदरगाह को जून, 2024 में मोदी सरकार की कैबिनेट बैठक में मंजूरी मिली थी। इसे सागरमाला परियोजना के तहत विकसित किया जा रहा है।

वधावन पोर्ट को पालघर जिले में दहानू में बनाया जा रहा है। इसे बनाने में ₹76,000 करोड़ से अधिक लागत आने का अनुमान है। इसे भारत सरकार और महाराष्ट्र सरकार मिल कर बना रही हैं। भारत सरकार की तरफ से जवाहरलाल नेहरू पोर्ट अथॉरिटी और महाराष्ट्र सरकार मेरीटाइम बोर्ड के जरिए इसमें भागीदार बन रही है। इस पोर्ट में केंद्र सरकार की 76% हिस्सेदारी होगी। वधावन बंदरगाह को पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) के अंतर्गत बनाया जा रहा है।

क्या है खासियत?

वधावन पोर्ट को 17,000 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में विकसित किया जाएगा। यह भारत का 13वां और सबसे बड़ा पोर्ट होगा। इसके लिए समुद्र से भी 1448 हेक्टेयर जमीन का विकास किया जाएगा। वधावन पोर्ट में कुल 9 कंटेनर टर्मिनल होंगे। हर एक टर्मिनल 1000 मीटर लंबा होगा। इसके अलावा वधावन पोर्ट में गैस और लिक्विड पदार्थों के लिए अलग से बर्थ बनाई जाएगी। तटरक्षक बलों के लिए भी अलग से बर्थ की व्यवस्था होगी। इस पोर्ट पर एक बड़ा कार्गो भंडारण क्षेत्र बनाया जाएगा।

वधावन पोर्ट हर साल लगभग 300 मिलियन टन मालवहन क्षमता वाला होग। एक बार तैयार होने पर यह पोर्ट प्रति वर्ष 2.3 करोड़ से अधिक 25 फीट वाले कंटेनर को संभाल सकेगा। वधावन पोर्ट के बन जाने से मुंबई के न्हावा शेवा (JNPT) बंदरगाह पर दबाव कम हो सकेगा। वधावन पोर्ट भारत-मध्य पूर्व-यूरोप गलियारे का भी महत्वपूर्ण हिस्सा होगा। एक बार निर्मित होने पर यह बंदरगाह विश्व के दस सबसे बड़े बंदरगाहों में से एक होगा। अभी मुंद्रा पोर्ट भारत का सबसे बड़ा बंदरगाह है जो विश्व में 26वें नम्बर पर है।

क्या होगा इससे फायदा?

सरकार का अनुमान है कि वधावन पोर्ट के कारण लगभग 12 लाख रोजगार पैदा होंगे। साथ ही बड़ी संख्या में बड़े जहाज भारत आने के कारण समुद्री भाड़े की कीमतों में भी कमी आएगी। इसके अलावा क्षमता बढ़ जाने के कारण बड़े जहाज यहाँ आकर अपनी आपूर्तियाँ ले सकेंगे, इससे भी कमाई होगी। वधावन पोर्ट बन जाने से पालघर के इस इलाके का भी काफी विकास होगा और यहाँ की आबादी के लिए स्वरोजगार के नए मौके भी खुलेंगे। इस परियोजना के निर्माण के दौरान ही बड़ी संख्या में लोगों की जरूरत होगी।

क्या होता है ‘स्त्रीधन’, जिसे वापस नहीं माँग सकता पिता, जिस पर पति का नहीं होता अधिकार: सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा- महिला ही इसकी मालकिन

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि ‘स्त्रीधन’ महिला की विशिष्ट संपत्ति है और उसके पिता महिला की स्पष्ट अनुमति के बिना उसके ससुराल वालों से स्त्रीधन की वसूली का दावा नहीं कर सकते। जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस संजय करोल की पीठ ने एक तलाकशुदा महिला के पिता द्वारा दर्ज कराई गई FIR को खारिज कर दिया। इसमें महिला के पूर्व ससुराल वालों से उसके ‘स्त्रीधन’ (उपहार और आभूषण) को वापस दिलाने की माँग की गई थी।

अदालत ने कहा, “इस न्यायालय द्वारा विकसित न्यायशास्त्र के तहत स्त्री (पत्नी या पूर्व पत्नी) ‘स्त्रीधन’ की एकमात्र स्वामी है। इसमें कहा गया है कि पति का इस पर कोई अधिकार नहीं है और इसी से यह निष्कर्ष निकाला जाना चाहिए कि जब तक बेटी जीवित, स्वस्थ और अपने ‘स्त्रीधन’ की वसूली के लिए कदम उठाने के फैसले लेने में पूरी तरह सक्षम हो, तब तक इस पर पिता का भी कोई अधिकार नहीं है।”

पीठ ने कहा, “हम पाते हैं कि कानून ऐसी स्थिति के लिए प्रावधान करता है जहाँ एक महिला कानूनी रूप से अपनी पसंद के व्यक्ति को कोई भी ऐसा कार्य करने के लिए अधिकार दे सकती है, जिसे वह स्वयं कर सकती है। पावर ऑफ अटॉर्नी अधिनियम, 1882 की धारा 5 के ‘विवाहित महिलाओं की पावर ऑफ अटॉर्नी’ का प्रावधान है।” कोर्ट ने माना कि पिता-पुत्री के बीच इस तरह का कोई एग्रीमेंट नहीं था।

सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि यह नहीं माना जा सकता कि विवाह के समय दिया जाने वाला दहेज और पारंपरिक उपहार दुल्हन के सास-ससुर को सौंप दिया जाता है और इस पर दहेज निषेध अधिनियम 1961 की धारा 6 के प्रावधान लागू होंगे। इस धारा में प्रावधान है कि विवाह के संदर्भ में किसी महिला के अलावा किसी अन्य व्यक्ति द्वारा प्राप्त किया गया कोई भी दहेज एक निश्चित अवधि के भीतर उस महिला को हस्तांतरित किया जाना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि ऐसा दहेज, जब तक हस्तांतरित नहीं किया जाता, महिला के लाभ के लिए ट्रस्ट के रूप में रखा जाएगा। इसे हस्तांतरित न करने की स्थिति में कारावास और/या जुर्माने का प्रावधान है। न्यायालय ने कहा, “बोब्बिली रामकृष्ण राजा यादाद एवं अन्य बनाम आंध्र प्रदेश राज्य मामले में इस न्यायालय ने माना है कि विवाह के समय दहेज और पारंपरिक उपहार देने से यह अनुमान नहीं लगाया जा सकता कि ऐसी वस्तुएँ माता-पिता-ससुर को सौंपी गई हैं, जिससे दहेज निषेध अधिनियम 1961 की धारा 6 के तत्व आकर्षित होते हैं।”

न्यायालय ने कहा कि महिला के तलाक के पाँच साल से अधिक समय के बाद और उसके दोबारा विवाह करने के तीन साल बाद दर्ज की गई एफआईआर में कोई दम नहीं है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने पिता द्वारा दर्ज कराई गई FIR को रद्द कर दिया। दरअसल, शिकायतकर्ता ने अपनी बेटी के पूर्व ससुराल वालों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई, जिसमें उन पर उसका ‘स्त्रीधन’ रोकने का आरोप लगाया था।

पिता ने आरोप लगाया था कि साल 1999 में उसकी बेटी की शादी के समय उसे 40 कसुला सोना और अन्य सामान शामिल दिया गया था। बेटी ने साल 2016 में अपने पति को तलाक दे दिया था और 2018 में संयुक्त राज्य अमेरिका में दोबारा शादी कर ली थी। पिता ने बेटी के पूर्व ससुराल वालों के खिलाफ जनवरी 2021 में मामला दर्ज करके इस स्त्रीधन को वापस दिलाने की माँग की थी।

स्त्रीधन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी दिया था निर्णय

विवाहित महिलाओं को मिलने वाले ‘स्त्रीधन’ को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि स्त्रीधन किसी दंपत्ति (पति एवं पत्नी) की संयुक्त संपत्ति नहीं बन सकता। यह पत्नी का धन होता है और पति का अपनी पत्नी की संपत्ति पर कोई अधिकार नहीं है। पति इस धन का इस्तेमाल संकट के समय कर सकता है, लेकिन उसे उसे वापस करना होगा।

स्त्रीधन से संबंधित एक वैवाहिक विवाद का निपटारा करते हुए सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संजीव खन्ना और दीपांकर दत्ता की खंडपीठ ने कहा कि पूरे स्त्रीधन पर सिर्फ महिला का अधिकार है। कोर्ट ने कहा कि उसके विवाह से पहले, विवाह के दौरान या विवाह के बाद महिला को दिए गए उपहार जैसे कि पैसा, आभूषण, जमीन, बर्तन और माता-पिता, सास-ससुर, रिश्तेदारों और दोस्तों से मिले अन्य उपहार स्त्रीधन हैं।

पीठ ने कहा, “यह एक स्त्री की पूर्ण संपत्ति है, जिसे वह अपनी मर्जी से इस्तेमाल करने का पूरा अधिकार रखती है। पति का उसके स्त्रीधन पर कोई नियंत्रण नहीं है। वह अपने संकट के समय इसका इस्तेमाल कर सकता है, लेकिन उसका नैतिक दायित्व है कि वह इसे या इसके मूल्य को अपनी पत्नी को लौटाए। यह संयुक्त संपत्ति नहीं है। स्त्रीधन पर पति का मालिक के रूप में कोई अधिकार या स्वतंत्र प्रभुत्व नहीं है।”

अदालत ने कहा कि यदि स्त्रीधन का दुरुपयोग किया जाता है तो किसी व्यक्ति या उसके परिवार के सदस्यों पर IPC की धारा 406 के तहत आपराधिक विश्वासघात का मुकदमा चलाया जा सकता है। कोर्ट ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में विवाद का निबटारा आपराधिक मामलों की तरह उचित संदेह से परे सबूत के आधार पर नहीं, बल्कि संभावनाओं की अधिकता के आधार पर किया जाना चाहिए।

दरअसल, केरल की रहने वाली एक महिला ने आरोप लगाया था कि जब वह शादी करके ससुराल आई तो पहले ही दिन उसके पति ने उसके सारे गहने छीन लिए। जब दोनों के बीच रिश्ता खराब हो गया और अलग होने का फैसला लिया तो उसने पति से अपने गहने वापस माँगे, लेकिन पति ने वो गहने उसे नहीं दिए। इसके बाद इसे वापस पाने के लिए पारिवारिक न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।

इस मामले में साल 2009 में एक पारिवारिक न्यायालय ने महिला के पक्ष में फैसला सुनाया और उसके पति को उसे 8.9 लाख रुपए देने का आदेश दिया। हालाँकि, इस फैसले के खिलाफ पति केरल उच्च न्यायालय चला गया। हाई कोर्ट ने पारिवारिक न्यायालय के आदेश को रद्द कर दिया और कहा कि पत्नी यह साबित करने में विफल रही कि उसका स्त्रीधन उसके पति ने छीन लिया था।

महिला ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। साक्ष्यों की जाँच के बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पारिवारिक अदालत का फैसला सही था। हाई कोर्ट ने अदालत में देरी से आने के लिए महिला की ईमानदारी पर संदेह करके गलती की। शीर्ष न्यायालय ने निर्देश दिया कि पारिवारिक अदालत के फैसले के 15 साल बीत गए हैं। इसलिए पति अपने पत्नी को अब 25 लाख रुपए का भुगतान करे।

क्या होता है स्त्रीधन?

आधुनिक कानून बनने से पहले देश में महिलाओं को संपत्ति का अधिकार नहीं था। उसकी शादी-विवाह में जो दहेज दी जाती थी, उसे उसका हिस्सा मान लिया जाता था। अब महिलाओं को तमाम तरह के अधिकार दिए गए हैं। हालाँकि, महिलाएँ अपने पिता की संपत्ति में आज भी हिस्सा नहीं माँगती और दहेज के रूप में पिता से मिली रकम और शादी खर्च को ही अपना हिस्सा मान लेती हैं।

हालाँकि, समय के साथ सोच में बदलाव हुआ है। इसके पीछे कानून में बदलाव एक महत्वपूर्ण कारण है। अब बेटियों को अपने पिता की संपत्ति में भाइयों की तरह ही बराबर का अधिकार है। इसके साथ ही ससुराल के धन में भी उसके अधिकार निर्धारित किए गए हैं। इसके अलावा, कानून में उसे अन्य कई तरह के अधिकार दिए गए हैं। हिंदू कानूनों में इनकी विस्तृत चर्चा है।

इन्हीं में से एक है स्त्रीधन की अवधारणा। हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम 1956 के अधिनियम के तहत महिलाओं को ‘स्त्रीधन’ का पूर्ण मालिक बताया गया है। हिंदू कानून के तहत स्त्रीधन में चल या अचल, किसी तरह की संपत्ति हो सकती है। स्त्रीधन में महिला की शादी से पहले, शादी के दौरान और शादी के बाद मिली संपत्ति को शामिल किया गया है।

शादी से पहले अगर महिला को माता-पिता या किसी अन्य रिश्तेदार आदि से उपहार में मिली संपत्ति स्त्रीधन है। इसी तरह शादी के दौरान शादी के दौरान मिली संपत्ति एवं उपहार भी स्त्रीधन है। उसके बच्चे के जन्म के दौरान बच्चे को जो उपहार या संपत्ति मिलती है, वह स्त्रीधन मानी गई है। अगर शादी के बाद महिला के पति की मौत हो जाती है तो उसे विधवा के रूप में जो उपहार या संपत्ति मिलती है, वह स्त्रीधन है।

स्त्रीधन, दहेज एवं स्त्री की संपत्ति में अंतर

यहाँ स्त्रीधन और स्त्री की संपत्ति में अंतर है। स्त्रीधन वह संपत्ति है, जिसे महिला अपने अनुसार खर्च कर सकता है या अपनी इच्छा के अनुसार उसके स्वामित्व का हस्तांतरण कर सकती है। इसी तरह, जिस संपत्ति पर महिलाओं की सीमित शक्ति होती है, जिसका उपयोग तो किया जा सकता है, लेकिन उसकी इच्छानुसार उसका हस्तांतरण (अधिकार का बदलाव) नहीं किया जा सकता वह स्त्री संपत्ति है।

स्त्रीधन दहेज से अलग होता है। स्त्रीधन में महिला को उसके परिवार, उसके पति और उसके पति के परिवार द्वारा दिए जाने वाले स्वैच्छिक उपहार शामिल होते हैं। यह जोर-जबरदस्ती या किसी दबाव में नहीं दिया जाता है। यह कानून सम्मत है। दूसरी ओर, दहेज विशेष रूप से विवाह के लिए लेनदेन से जुड़ा हुआ है। दहेज भारत में दहेज निषेध अधिनियम 1961 के तहत निषिद्ध है।

प्रतिभा रानी बनाम सूरज कुमार के ऐतिहासिक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दहेज और स्त्रीधन के बीच अंतर स्पष्ट किया है। इस मामले में याचिकाकर्ता महिला को दहेज के लिए परेशान किया गया और उसे ससुराल वालों ने घर से निकाल दिया। उसने धारा CrPC की धारा 125 के दायर की। इसे पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया। हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस निर्णय को पलट दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि 1. विवाह के दौरान अग्नि के समक्ष फेरे से पहले दिए गए उपहार। 2. बारात के दौरान दुल्हन के रूप में महिला को दिए गए उपहार। 3. ससुर और सास द्वारा प्यार के प्रतीक के रूप में दिए गए उपहार और दुल्हन द्वारा बड़ों के चरणों में प्रणाम करने के समय दिए गए उपहार। 4. दुल्हन के पिता, माता और भाई द्वारा दिए गए उपहार…. ये सभी स्त्रीधन हैं।

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा था कि स्त्रीधन का संयुक्त स्वामित्व पति का सह-स्वामित्व नहीं माना जा सकता है। एक महिला हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम 1956 की धारा 14 और हिंदू विवाह अधिनियम 1955 की धारा 27 के तहत स्त्रीधन की पाने के लिए अपने पति के खिलाफ मुकदमा दायर कर सकती है।

स्त्री की संपत्ति: हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम 1956 की धारा 14 के अनुसार, किसी महिला द्वारा निम्नलिखित स्रोतों से प्राप्त संपत्ति उसकी पूर्ण संपत्ति होती है, जब तक कि इस पर किसी उपहार, डिक्री, आदेश या पुरस्कार की शर्तों में अन्यथा उल्लेख न किया गया हो। ऐसी संपत्ति के अधिग्रहण के स्रोतों में निम्नलिखित शामिल हो सकते हैं:

विवाह से पहले, उसके दौरान और बाद में प्राप्त उपहार (चल और अचल संपत्ति दोनों)।

पारिवारिक संपत्ति के विभाजन के दौरान उसके हिस्से के रूप में प्राप्त संपत्ति।

किसी समझौते के लिए प्रतिफल के रूप में प्राप्त संपत्ति।

सेवा, पेशे, व्यवसाय आदि के माध्यम से अर्जित और संचित संपत्ति।

भरण-पोषण के बदले में प्राप्त संपत्ति।

अपने स्त्रीधन से खरीदी गई संपत्ति।

महिला को विरासत में मिली संपत्ति।

किसी अन्य तरीके से अर्जित संपत्ति, जैसे डिक्री या पुरस्कार के तहत या प्रतिकूल कब्जे के माध्यम से।

13 साल की उम्र में शादी, ददिया ससुर का ₹100 का कर्जा चुकाने के लिए राइस मिल में 10 साल करती रही बंधुआ मजदूरी: बेटी को नहीं दिया पढ़ने

इरुला जनजाति की एक युवा लड़की, जब महज 13 साल की थी, तब उसकी शादी 15 साल के एक रिश्तेदार से कर दी गई। उसे ये पता नहीं था कि शादी के बाद जिस हसीन जिंदगी के वो सपने देख रही है, वो सपने उसके दूल्हे के दादा द्वारा महज 100 रुपए की उधारी के लिए कुचल दिए जाएँगे और वो बंधुआ मजदूरी करने के लिए मजबूर कर दी जाएगी।

कुछ ऐसी ही कहानी है कुप्पाम्मल की। अब कुप्पाम्मल की उम्र 40 साल से ज्यादा हो चुकी है। वो इरुला जनजाति की हैं। करीब 2 दशक पहले उन्हें तमिलनाडु की एक चावल मिल से बंधुआ मजदूरी से मुक्ति मिली थी। उन्होंने गुरुवार (29 अगस्त 2024) को हैदराबाद में आयोजित एक सेमिनार में अपनी कहानी बताई।

हैदराबाद में आयोजित मानव तस्करी पर राष्ट्रीय तकनीकी परामर्श में ‘द न्यू इंडियन एक्सप्रेस’ से उन्होंने बताया, “हमें लगभग 24 घंटे काम करना पड़ता, सप्ताह के सातों दिन। मिल में काम करने वाले पुरुष सदस्य चावल और धान की बोरियों को इधर-उधर उठाकर रखते थे, तो महिलाएँ धान को साफ करती और चावल को साफ करती। हमें खाना बनाने का भी समय नहीं मिलता था।”

कुप्पाम्मल ने आगे बताया, “आप जानते हैं, हम रात 8 बजे के आसपास दलिया बनाना शुरू करते थे और रात 10 बजे तक हम खाना खाकर, सफाई करके अपना काम जारी रख लेते थे। रात के खाने में हम जो दलिया बनाते थे, वही अगले दिन का नाश्ता होता था। ऐसा 10 साल तक चलता रहा।”

चावल मिल में काम करने के 10 सालों के दौरान कुप्पाम्मल के एक बच्चे की भी मौत हो गई। इसके बाद उन्हें अपनी दो छोटी बेटियों को भी मिल में काम पर लगाना पड़ा। उन्होंने कहा, “मेरी सबसे बड़ी बेटी सात साल की हो गई और हम अभी भी मिल में थे और उसे पढ़ाई के लिए बाहर जाने की अनुमति नहीं थी। तभी हमने फैसला किया कि हमें बाहर जाना होगा और इंटरनेशनल जस्टिस मिशन ने हमें बचाने में मदद की।”

कुप्पाम्मल को उस नर्क से निकले अब 2 दशक का समय बीच चुका है। वो तिरुवल्लूर में मुक्त बंधुआ मजदूर एसोसिएशन (आरबीएलए) का हिस्सा है, मानव तस्करी से बचे अन्य लोगों के साथ मिलकर उनके जीवन को फिर से सँवारने का प्रयास कर रही है। आरबीएलए, जो तमिलनाडु के पाँच जिलों के लगभग 10,000 पीड़ितों का संगठन है, ने अपने समुदाय के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने के लिए सरकार के साथ मिलकर काम किया है।

कुप्पाम्मल ने बताया, “सरकार ने अब समुदाय के लोगों के लिए काम करने और कमाने के लिए दो ईंट भट्टे बनवाए हैं। इसके अलावा ब्लॉक प्रिंटिंग की पहल भी चल रही है, जिसका मैं हिस्सा हूँ।”

कुप्पाम्मल की ये कहानी बंधुआ मजदूरी की दर्दनाक सच्चाई को सामने लाती है। बंधुआ मजदूरी पर भारत देश में कानूनी रोक है। इसके बावजूद ऐसी घटनाओं का होना समाज पर काले-धब्बे की तरह है।

जब तक घर-सड़कों पर न दिखे मगरमच्छ, मॉनसून लगता आधा-अधूरा: विश्वामित्र नदी है आशियाना, इसलिए बाढ़ आते ही वडोदरा भ्रमण पर निकल जाते हैं जलचर

गुजरात के वडोदरा में पिछले दिनों बाढ़ के कारण स्थिति बेहद खराब रही। लोग जहाँ अपने जान बचाने के लिए सड़कों पर निकलने से बच रहे थे वहीं सड़क पर मगरमच्छ दिख रहे थे। ये नजारा विश्वामित्र नदी में पानी कम होने के बाद देखने को मिला। इसके बाद इन मगरमच्छों को बचाने के लिए तुरंत अभियान चलाया गया और इन्हें इनके सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया गया।

जब ऑपइंडिया ने वडोदरा वन विभाग के रेंज फॉरेस्ट ऑफिसर करण सिंह राजपूत से संपर्क किया, तो उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों में बनी बाढ़ की स्थिति से लेकर 29 अगस्त, 2024 तक वडोदरा से 14 से अधिक मगरमच्छों को बचाया गया है। पानी घटते समय भी वन विभाग और स्थानीय गैर सरकारी संगठनों की मदद से आज अधिकतम 7 मगरमच्छों को बचाया गया।

चार दिन में 14 मगरमच्छों का रेस्क्यू

करण सिंह ने बताया इन 14 मगरमच्छों को 4 दिन के भीतर रेस्क्यू किया गया। सबसे लंबा मगरमच्छ कारेलीबाग का था, जो करीब 15 फीट लंबा था। उनसे जब पूछा गया कि कैसे ये मगरमच्छ और वडोदरावासी साथ रह लेते हैं और फर्क भी नहीं पड़ता। इस पर करण सिंह ने बताया- “वडोदरा में करुणा अभियान के साथ हमारे 1300 स्वयंसेवक पंजीकृत हैं, जो विभिन्न प्राणियों और वन्यजीवों के संरक्षण के लिए काम करते हैं। फिलहाल 15 से 20 ऐसे एनजीओ बाढ़ की स्थिति में ग्राउंड पर हैं। सभी एनजीओ में 50-60 लोग सेवा दे रहे हैं और वे सभी लोग हमारे साथ जुड़ गए हैं। आप कह सकते हैं कि वडोदरा के लोग मगरमच्छों के बारे में इतने जागरूक हैं कि इन दोनों प्रजातियों के बीच घर्षण नगण्य हो जाता है।

इसी तरह चारुण सिंह ने बताया कि सिर्फ मगरमच्छ ही नहीं, करीब 70 साँपों को भी सफलतापूर्वक रेस्क्यू किया गया है। उनके मुताबिक वडोदरा वन विभाग बाढ़ से पहले ही हर तरह की स्थिति से निपटने के लिए तैयार था। विभाग ने पर्याप्त मगरमच्छ पकड़ने वाले पिंजरे, परिवहन वाहन और अन्य सभी तैयारियाँ की थीं।

आगे ऑपइंडिया के जरिए उन्होंने वडोदरावासियों से भविष्य में सावधान रहने को भी कहा, क्योंकि जैसे-जैसे पानी घटेगा, मगरमच्छ बाहर आएँगे। उन्होंने मगरमच्छ या किसी वन्यजीव बचाव या आपातकालीन स्थिति के लिए 9429558883 या 9429558886 पर संपर्क करने को भी कहा।

विश्वामित्र नदी मगरमच्छों का घर क्यों है?

अब सवाल यह भी आता है कि विश्वामित्र नदी में ही इतने सारे मगरमच्छ क्यों हैं? गुजरात में और भी कई नदियाँ हैं, उनमें इतने मगरमच्छ क्यों नहीं? इस सवाल के जवाब में जिला वन विभाग के आरएफओ करण सिंह कहते हैं, “विश्वामित्र नदी को मगरमच्छों का गढ़ कहा जा सकता है। वडोदरा शहर की भौगोलिक स्थिति और मगरमच्छों के लिए विश्वामित्र नदी की उपयुक्तता भी इसके लिए जिम्मेदार है। शहर के बीच से बहने वाली नदी इतनी गहरी है कि यह मगरमच्छों के लिए आसान आश्रय बन जाती है। वहीं एक वजह मध्य गुजरात की जलवायु भी है, जो मगरमच्छों के प्रजनन के लिए काफी अनुकूल है। ये मीठे पानी के मगरमच्छ हैं और विश्वामित्र नदी का संरक्षित विस्तार उनके प्रजनन और अंडे देने के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान करता है।”

विश्वामित्र नदी का विस्तार मगरमच्छों के लिए अनुकूल (साभार: BBC)

विश्वामित्र नदी में रहने वाले मगरमच्छों के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा, “नर और मादा मगरमच्छों का प्रजनन काल गर्मी के दिनों की शुरुआत के साथ शुरू होता है। मई में मादा मगरमच्छ जमीन में गड्ढा खोदती है और उसमें अपने अंडे देती है। गहरे पेड़ों और वनस्पतियों से आच्छादित नदी तल मगरमच्छ के अंडे बढ़ने के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान करता है। दूसरी ओर, विश्वामित्री नदी गहरी होने के कारण मगरमच्छों के लिए पर्याप्त भोजन भी उपलब्ध कराती है। कुछ स्थानों के अलावा जहाँ नदी का पानी सूख जाता है, नदी के कई हिस्से ऐसे हैं जहाँ गहरा पानी है, जहाँ मगरमच्छ रहते हैं, जहाँ उन्हें पर्याप्त मात्रा में भोजन मिल सकता है। इस प्रकार विश्वामित्री नदी के विस्तार को जाल लगाकर प्रतिबंधित कर दिया गया है, लेकिन कभी-कभी यदि मवेशी इस क्षेत्र में प्रवेश कर जाते हैं, तो मगरमच्छ उन्हें भी मार देते हैं।”

विश्वामित्र नदी में कितने मगरमच्छ रहते हैं

जून में टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार , वडोदरा शहर को दो भागों में बाँटने वाली विश्वामित्र नदी के 17 किलोमीटर के दायरे में 300 से अधिक मगरमच्छ रहते हैं। आखिरी बार मगरमच्छों की गिनती साल 2020 में की गई थी और उस वक्त इनकी संख्या 275 थी। यह जानकर आश्चर्य होता है कि एक शहर के बीच में इतने सारे मगरमच्छ रहते हैं।

वडोदरा के विश्वामित्री में एक मगरमच्छ की दलदली प्रजाति पाई गई

गौरतलब है कि ये सिर्फ विश्वामित्र नदी के बारे में है। बाकी भौगोलिक स्थिति के अनुसार, नदी को मुख्य रूप से अजवा झील से पानी मिलता है और झील बहुत सारे मगरमच्छों का घर भी है। इसके अलावा वडोदरा के आसपास जंबुवा और देव नदियों में भी मगरमच्छों की अच्छी संख्या है। हाल ही में वाघोडिया तालुका के गुटल गाँव में मगरमच्छ के हमले का मामला सामने आया था। विश्वामित्र नदी में सुलभता के कारण मगरमच्छों की संख्या लगातार बढ़ रही है। यह भी कहा जाता है कि विश्वामित्र नदी में हर एक किलोमीटर के दायरे में 6 से अधिक मगरमच्छ रहते हैं।

कुल प्रजातियाँ कितनी

दुनिया में मगरमच्छों की कुल 23 प्रजातियाँ हैं, जिनमें से तीन भारत में पाई जाती हैं। खारे पानी के मगरमच्छ और मीठे पानी के मगरमच्छ के बीच भी अंतर हैं। हमारे वडोदरा में पाई जाने वाली मगरमच्छ की प्रजाति को ‘मार्श मगरमच्छ’ कहा जाता है। इस प्रजाति के मगरमच्छों को खुर वाले शिकारी के रूप में जाना जाता है। उन्हें अपने पैरों से शिकार का पीछा करने और उसे पकड़ने की कला में महारत हासिल है। चूँकि दलदली मगरमच्छ के जबड़े उलटे व्यवस्थित होते हैं, एक बार जब शिकार इसके जबड़ों में फंस जाता है तो उसका बचना असंभव होता है। इस मगरमच्छ की काटने की शक्ति तीन टन है।

शिकार करते समय दलदली मगरमच्छ छोटी दूरी तक 8 मील प्रति घंटे की रफ़्तार से दौड़ सकते हैं। वह जितनी तेजी से दौड़ सकता है या चल सकता है, उतनी ही तेजी से वह तैर भी सकता है। दलदली मगरमच्छ 10 से 12 मील प्रति घंटे की गति से तैर सकते हैं, और कुछ मामलों में इससे भी तेज़। मार्श मगरमच्छ प्रजाति के मगरमच्छों को मध्यम आकार की प्रजाति माना जाता है। इन मगरमच्छों की लंबाई 8 से 15 फीट तक होती है।

अगर हम इनके जीवन काल की बात करें तो मगरमच्छों का जीवन काल आमतौर पर 50 से 80 साल तक होता है। इसका प्रजनन काल सर्दी की समाप्ति और गर्मियों में गर्मी की शुरुआत के साथ शुरू होता है। गर्मी की शुरुआत के साथ, वे नदी के तल और कुछ मामलों में बिलों में अपने अंडे देते हैं। मानसून की शुरुआत में अंडों से उनके बच्चे निकलते हैं और बड़ा आकार लेते हैं।

मलकीत सिंह को ‘बौना’ कह चिढ़ाता था निहंग, विरोध करने पर घर में घुसकर काट डाला: पंजाब के अमृतसर की घटना, हत्या के बाद से फरार

अमृतसर में मलकीत सिंह नाम के युवक की पड़ोसी निहंग ने इसलिए हत्या कर दी, क्योंकि मलकीत सिंह खुद को चिढ़ाने का विरोध करता था। दरअसल, मलकीत सिंह की लंबाई कम होने की वजह से निगंह सुखदेव सिंह समेत कई लोग उसे बौना कहकर चिढ़ाते थे। इसका वो विरोध करता था। इस बात को लेकर निहंग सुखदेव से मलकीत का झगड़ा भी हुआ था, जिसमें परिजनों ने सुलह करवाई थी, लेकिन बुधवार (28 अगस्त 2024) की रात सुखदेव ने मलकीत की जान ले ली।

अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक, ये वारदात कंबो थाना इलाके के जहाँगीर गाँव की है। जानकारी के मुताबिक, कद में छोटा होने की वजह से मलकीत को निहंग सुखदेव अक्सर चिढ़ाता था। इसी बात को लेकर हुए विवाद में बुधवार की देर रात निहंग सुखदेव मलकील के घर में घुस गया और धारदार हथियार से उसकी हत्या कर दी। उसने पहले भी मलकीत को जान से मारने की धमकी दी थी। बताया जा रहा है कि जब निहंग सुखदेव सिंह मलकीत के घर में घुसा, तब मलकीत अकेला ही था। वो मलकीत की हत्या के बाद से फरार है।

बताया जा रहा है कि बुधवार (28 अगस्त 2024) की रात में भी निहंग सुखदेव मलकीत को चिढ़ा रहा था। मलकीत ने विरोध किया, तो वह छत के जारिए घर के अंदर दाखिल हुआ और मलकीत को पीटने लगा, साथ ही धारदार हथियार से हमला कर दिया। मलकीत माता-पिता का इकलौता बेटा था। उसकी दो बहनें हैं। इस हमले में मलकीत ने दम तोड़ दिया।

इस मामले में थाना कंबो के इंचार्ज एस.आई. शमशेर सिंह ने कहा कि मृतक मलकीत सिंह के शव को कब्जे में ले पोस्टमार्टम की कार्रवाई के लिए भेज दिया गया है। वहीं दूसरी ओर निहंग सुखदेव सिंह के विरुद्ध हत्या का केस दर्ज कर उसकी धर पकड़ के लिए छापामारी की जा रही है।