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उधार की बिजली से बांग्लादेश में जल रही बत्ती, भारतीय कंपनियों का नहीं चुका पा रहा बकाया: ₹9500+ करोड़ की उधारी, सबसे ज्यादा अडानी पावर का

भारत की बिजली कम्पनियों के बांग्लादेश पर ₹9500 करोड़ से अधिक बकाया हैं। बांग्लादेश में हसीना सरकार के तख्तापलट के बाद यह पैसा लटका हुआ है। बांग्लादेश पर सबसे बड़ा बकाया अडानी पॉवर का है। भारतीय कम्पनियाँ बांग्लादेश को बड़े बकाए के बावजूद उधार बिजली की आपूर्ति कर रही हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बांग्लादेश पर अडानी पॉवर, PTC इंडिया, NTPC, SEIL और पॉवर ग्रिड जैसी कम्पनियों के लगभग 1.15 बिलियन डॉलर (लगभग ₹9600 करोड़) बकाया हैं। इनमें से सबसे बड़ा बकाया अडानी पॉवर का है। उसके लगभग 800 मिलियन डॉलर (लगभग ₹6700 करोड़) बांग्लादेश पर बाकी हैं।

अडानी पॉवर के बाद सबसे अधिक पैसा SEIL एनर्जी का हैं। इसके बांग्लादेश पर लगभग ₹150 मिलियन (लगभग ₹1200 करोड़) बाक़ी हैं। इसी तरह PTC इंडिया के 84.5 मिलियन डॉलर (लगभग ₹600 करोड़) और NTPC की तीन यूनिट के कुल 100 मिलियन डॉलर (लगभग ₹800 करोड़) बाक़ी हैं।

भारतीय बिजली कम्पनियों के यह बकाए 30 जून, 2024 तक के हैं। यह कम्पनियाँ बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन और बड़ी राशि उधार होने के बावजूद अभी तक बिजली आपूर्ति कर रही हैं। ऐसा वह भारत-बांग्लादेश के पुराने रिश्तों को देखते हुए कर रही हैं।

यदि बांग्लादेश का उधार बढ़ता है, तो इन कम्पनियों को अपने फैसले पर दुबारा विचार करना पड़ सकता है। भारतीय कम्पनियाँ लम्बे समय से बांग्लादेश को बिजली की आपूर्ति करती आई हैं। अडानी पॉवर झारखंड के गोड्डा में एक प्लांट के जरिए बांग्लादेश को बिजली देता है।

अडानी पॉवर का यह प्लांट 1.6 गीगावाट क्षमता का है। इसकी पूरी बिजली बांग्लादेश को जाती है। इसने जनवरी 2023 में अपना उत्पादन चालू किया था और यह एक अलग ग्रिड से बांग्लादेश को बिजली देता है। वहीं PTC जैसी कम्पनियाँ बांग्लादेश को 2013 से ही बिजली बेच रही हैं।

इसके अलावा NTPC भी बांग्लादेश को बिजली बेचती है। NTPC ने बांग्लादेश में ही एक प्लांट लगा रखा है जो कि 1300 मेगावाट से अधिक बिजली पैदा करता है। भारत द्वारा दी गई बिजली बांग्लादेश के लिए जरूरी है क्योंकि उसका कपड़ा उद्योग बिजली पर ही आधारित है।

हालाँकि, बढ़ते बकाए के कारण अब आगे इसमें चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। इससे पहले केंद्र सरकार ने बांग्लादेश को आपूर्ति की जाने वाली बिजली को लेकर नियम बदले थे। इनके तहत अडानी पॉवर यह बिजली भारत में भी बेच सकता है। पहले यह इसे केवल बांग्लादेश को ही दे सकता था।

बिजली आपूर्ति का पैसा बकाया होने की समस्या गंभीर होने के पीछे बांग्लादेश का वर्तमान आर्थिक संकट भी है। सत्ता बदलने के अलावा बांग्लादेश आर्थिक परेशानियों से जूझ रहा है। बांग्लादेश की नई सरकार देश में ब्याज दरें बढ़ाने जा रही है ताकि महँगाई से निजात पाई जा सके।

बांग्लादेश के विदेशी मुद्रा के भण्डार पर भी संकट आ रहा है। इसके लिए बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के पास भी पहुँचा है। IMF से भी बांग्लादेश मदद ले रहा है। इन सबके बीच बांग्लादेश में लगातार हो रही हिन्दुओं के विरुद्ध हिंसा और सड़कों पर अशांति के कारण देश की अर्थव्यवस्था पर फर्क पड़ा है।

अमेरिकी कंपनी को सेना ने दिया 73 हजार असॉल्ट राइफल का ऑर्डर, भारत की हथियार निर्माता कंपनी हुई निराश: कहा- हमें स्वदेशी उत्पादों पर गर्व नहीं

भारतीय सेना ने अमेरिकी हथियार निर्माता फर्म सिग सॉर को 73,000 अत्याधुनिक असाल्ट राइफल का आर्डर दिया है। यह राइफल सीमा पर तैनात भारतीय सेना के सैनिकों को दी जाएँगी। इससे पहले भी इसी कम्पनी को 72,000 राइफल का ऑर्डर 2019 में दिया जा चुका है।

राइफल का ऑर्डर दोबारा मिलने पर जहाँ अमेरिकी फर्म ने ख़ुशी जताई है, वहीं एक भारतीय हथियार निर्माता ने अपनी निराशा व्यक्त की है। भारतीय फर्म ने कहा है कि हम अपने बनाए सामान में गर्व करना भूल चुके हैं। उन्होंने कई बातें अपनी राइफलों के विषय में बताई हैं।

राइफल निर्माता सिग सॉर ने सोमवार (26 अगस्त, 2024) को एक प्रेस रिलीज में बताया है कि उसे भारतीय सेना की तरफ से 73,000 राइफल का ऑर्डर मिला है। यह ऑर्डर सिग सॉर कि SIG-716 राइफल के लिए दिया गया है। फर्म ने बताया है कि वह भारत और अमेरिकी रक्षा एजेंसियों के लिए हथियार बनाती है।

फर्म ने बताया है कि वह ऐसी ही 72,400 राइफल पहले ही भारतीय सेना को बेच चुकी है और नया ऑर्डर पूरा होने पर 1.45 राइफल भारतीय सेना के पास होंगी। फर्म ने कहा है कि वह भारतीय सेना के आधुनिकीकरण प्रोग्राम में हिस्सा बनने पर काफी प्रसन्न हैं।

7.62×51 मिलीमीटर कैलिबर वाली राइफलों के इस ऑर्डर की कुल कीमत ₹837 करोड़ है। इन राइफलों को LOC और LAC पर तैनात भारतीय सेना के जवानों को दिया जाएगा। अभी यह सैनिक पुरानी INSAS या फिर AK-47 उपयोग कर रहे हैं।

सेना इन पुरानी राइफलों में आने वाली दिक्कत के चलते इन्हें बदल रही है। इसी क्रम में इन विदेशी राइफलों को खरीदा गया है। सिग सॉर के अलावा रूसी AK-203 राइफलों का उत्पादन भारत में ही हो रहा है और इस तरह की 35,000 राइफल सेना को इसी वर्ष मिल गई हैं।

अमेरिकी फर्म से होने वाले इस सौदे को दिसम्बर, 2023 में रक्षा मंत्री की अध्यक्षता वाली डिफेन्स एक्विजिशन काउंसिल (DAC) ने मंजूरी दी थी। अब इस सौदे को अंतिम रूप दे दिया गया है। इस सौदे के बाद भारत के रक्षा विशेषज्ञों ने अलग-अलग राय दी है।

विशेषज्ञों ने इसे सेना का विदेशी उत्पादों को तरजीह देने का मामला बताया है। वहीं ऐसी ही राइफल बनाने वाली एक फर्म SSS डिफेन्स के CEO विवेक कृष्णन ने भी इसको लेकर अपनी राय दी है। उन्होंने अपनी राइफल और विदेशी राइफलों का खुले तौर पर टेस्ट करने को कहा है।

SSS डिफेन्स के CEO विवेक कृष्णन ने एक्स (पहले ट्विटर) पर एक पोस्ट लिख कर कहा, “मेरी इच्छा थी कि सरकार ने इनका और ऑर्डर ना दिया होता। बातचीत करने और भारतीय डिज़ाइन और सामग्री पर ज़ोर देने से आसानी से ही से एक या कई कम्पनी सामने आ जातीं। पहले से ली जा चुकीं राइफल के सामने इसका टेस्ट करना काफ़ी आसान होता।”

उन्होंने कहा कि भले ही यह ऑर्डर विदेशी कम्पनी को मिल गया हो लेकिन हम इससे निराश नहीं होंगे। विवेक कृष्णन ने कहा कि उनकी कम्पनी काफी पहले ही भारत ही नहीं दुनिया भर में हथियार बेचने का फैसला कर चुकी है। उन्होंने बताया कि उनके अलावा और कई कम्पनियाँ भी छोटे हथियार बना रही हैं और मेक इन इंडिया में योगदान दे रही हैं।

विवेक कृष्णन ने कहा है कि जैसी परिस्थतियाँ भारत के सामने हैं, उनमें सेना को उनकी कम्पनी से एक ना एक दिन हथियार खरीदने पड़ेंगे। विवेक कृष्णन ने यह भी कहा कि भारत में पहले केवल सरकारी कम्पनियाँ हथियार बनाती रही हैं और इस कारण से हम अपने उत्पादों पर गर्व नहीं कर पाते।

उन्होंने विदेशी राइफल और अपनी राइफल के टेस्ट की माँग भी की है। विवेक कृष्णन ने कहा, ”हम लंबे समय से अपने खरीददार (सेना) से सुनते आ रहे हैं कि हमारे मेटल उतने अच्छे नहीं हैं या हमारे डिजाइन समय से पीछे हैं। मेरा बस इतना कहना है कि हमारे स्वदेशी हथियार को हर कैलिबर में वैश्विक हथियार के सामने रखें और उसका टेस्ट करें। इसके परिणाम खुले तौर पर बताए जाएँ जैसे बाकी सेनाएँ करती हैं। यह दोनों पक्षों के लिए बढ़िया होगा। क्या यह कोई मुश्किल काम है?”

गौरतलब है कि SSS डिफेन्स P-72 नाम से सिग सॉर वाली श्रेणी में ही राइफल बनाती है। वह इसके अलावा कई प्रकार की स्नाइपर राइफल भी बनाती है। SSS डिफेन्स बीते कुछ समय से लगातार सेना से नए ऑर्डर लेने की कोशिश कर रही है लेकिन सरकारी सौदों की धीमी चाल और अन्य कई वजहों से यह संभव नहीं ही सका है।

बेटी कहकर होटल बुलाया, मिलने पहुँची तो किया यौन शोषण: हिरोइन के खुलासे के बाद एक्टर सिद्दीकी पर रेप का केस, जयसूर्या और वामपंथी MLA मुकेश पर भी FIR

मलयालम फिल्म इंडस्ट्री इन दिनों खासी बदनाम हो रखी है। डायरेक्टर से लेकर अभिनेता हर कोई सवालों के घेरे में है। हाल में मशहूर फिल्म एक्टर सिद्दीकी के ऊपर भी गंभीर इल्जाम लगा। एक युवा अभिनेत्री ने उनके खिलाफ म्यूजियम पुलिस थाने में रेप की शिकायत दर्ज कराई। मामले को आईपीसी की धारा 376 और 506 के तहत दर्ज किया गया है।

अपनी शिकायत में उन्होंने बताया कि 2016 में वो और उसके माता पिता एक मूवी प्रीमियर के दौरान सिद्दीकी से मिलने गए थे। इसके बाद वो तिरुवनंतपुरम के होटल में गई। जहाँ उनका यौन शोषण हुआ था। युवती ने बताया कि उन्होंने इस संबंध में 2019 में बताने की कोशिश की थी लेकिन तब उन्हें ऑनलाइन ट्रोलिंग झेलनी पड़ी थी। एक्ट्रेस ने अब शिकायत देते हुए पूरे केस की डिटेल दी।

उन्होंने बताया- “मैंने बस प्लस टू कम्प्लीट ही किया था, जब सोशल मीडिया के जरिए उन्होंने मुझे कॉन्टैक्ट किया। मुझे लगा वह फेक अकाउंट है, लेकिन बाद में पता चला कि वह उनका रियल अकाउंट है। उनकी फिल्म सुखामायीरिकत्ते का प्रीव्यू शो खत्म हुआ था, तब उन्होंने मस्कट होटल में मुझे डिस्कशन के लिए बुलाया था। मैं तब 21 साल की थी। उन्होंने मुझे ‘मोल’ (मलयालम में बेटी) कहकर बुलाया। मैंने कभी नहीं सोचा था कि वह मेरे साथ ऐसा करेंगे। जब मैं वहाँ गई, तो उन्होंने मुझे सेक्सुअली हैरेस किया।”

अभिनेत्री कहती हैं कि सिद्दीकी का उन्हें बेटी कहना सब एक जाल था। लेकिन वो होटल से बच निकलने में कामयाब हो गई थीं। उनके अनुसार, सिद्दीकी नंबर एक क्रिमिनल हैं। वह जो भी कर रहे हैं सब झूठ हैं जब हेमा कमेटी रिपोर्ट रिलीज हुई थी, तब मैंने उन्हें बात करते सुना था। अगर वह खुद को आईने में देखें, तो एक क्रिमिनल दिखेगा। उनकी वजह से मैंने अपने सपने और मेंटल हेल्थ खोई है। मैंने जहाँ कहीं भी मदद माँगी, कहीं से मदद नहीं मिली।

बता दें कि सिद्दीकी के खिलाफ शिकायत दर्ज होने से पहले 26 अगस्त 2024 को सिद्दीकी ने भी एक शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने कहा था कि एक महिला उनके खिलाफ साजिश रचकर झूठे इल्जाम लगा रही है। हालाँकि शिकायत के एक दिन बाद उन्हें एसोसिएशन ऑफ मलयालम मूवी आर्टिस्ट्स (AMMA) से इस्तीफा देना पड़ा। अब पुलिस एफआईआर दर्ज होने के बाद आगे की जाँच करेगी। वहीं इससे पहले मलयालम फिल्म अभिनेता जयसूर्या और सीपीआईएम विधायक मुकेश के खिलाफ भी महिला अभिनेत्रियों ने शिकायत दर्ज कराई थी।

मनोरमा की न्यूज के मुताबिक दोनों एक्टर्स के विरुद्ध गैर जमानती धाराओं में केस को दर्ज किया गया था। बताया गया था कि महिला अभिनेत्री को होटल के कमरे में बुलाकर गलत काम काम किया। शिकायतकर्ता ने मामले में शिकायतकर्ता ने सात लोगों के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं- मुकेश, जयसूर्या, मनियानपिला राजू,मनियानपिला राजू, एडावेला बाबू, एडवोकेट चंद्रशेखरन, प्रोडक्शन कंट्रोलर विचू और नोबल। शिकायत दर्ज होने के बाद अब इस केस की जाँच की जाँच जारी है।

ट्रेन पलटाने के लिए ट्रैक पर रख दिया लकड़ी का लट्ठा, 2 गिरफ्तारों में ‘किसान नेता’ का बेटा भी: साजिशों पर बोले रेल मंत्री- जाँच जारी, कुछ घटनाएँ परेशान करने वाली

उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद में ट्रेन की पटरी पर लकड़ी का लट्ठा रखने वाले दो युवकों को गिरफ्तार किया है। इनमें से एक युवक एक किसान नेता का बेटा है। इनकी इस कारस्तानी से एक रेल दुर्घटना होते-होते बची थी। इन दोनों की गिरफ्तारी तब हुई है, जब हाल ही में एक पाकिस्तानी आतंकी ने भारत के भीतर ट्रेनों को पलटाने के मंसूबों पर बात की है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसे एक गंभीर मुद्दा बताया है और कहा है कि यह गंभीर चलन है।

फर्रुखाबाद पुलिस ने रेल पटरी पर लकड़ी रखने वाले दो युवक देव सिंह राजपूत और मोंटी कश्यप को गिरफ्तार किया है। इनमें से देव सिंह राजपूत भारतीय किसान यूनियन (लोकशक्ति) के नेता कमलेश कुमार का बेटा है। दोनों ने पूछताछ में खुलासा किया है कि वह प्रसिद्धि पाने के लिए लकड़ी रख ट्रेन पलटना चाहते थे।

दोनों ने 24 अगस्त, 2024 की रात को कासगंज-फर्रुखाबाद रेल लाइन पर लड़की का बोटा डाला था। इन दोनों ने शराब के नशे में यह काम किया था। बताया गया कि फर्रुखाबाद के भटासा हालत के पास इन्होने यह बोटा डाला था। यहाँ पर पहले आम के कुछ पेड़ गिरे थे, जिनकी लड़की यहीं पड़ी थी। इसी में एक बड़ा टुकड़ा उठा कर इन दोनों ने पटरी पर डाल दिया था।

इसके कुछ ही देर के बाद यहाँ से एक रेलगाड़ी भी गुजरी। इस रेलगाड़ी के इंजन में यह लकड़ी का टुकडा टकरा के फंस गया था। लोको पायलट ने ट्रेन को बचाने के लिए इमरजेंसी ब्रेक लगा दिए थे। इसके बाद इंजन से इसे निकाल कर ट्रेन को आगे रवाना किया गया था। इस दौरान बड़ा हादसा होने से बचा था क्योंकि इस रेलगाड़ी में बड़ी संख्या में यात्री सवार थे।

घटना के बाद पुलिस ने इस मामले की जाँच चालू की थी। जाँच में सामने आया था कि अरियारा गाँव के निवासी इन दोनों युवकों का यह कारनामा है। इन दोनों ने पूछताछ में खुलासा किया है कि यह प्रसिद्धि पाने के लिए ट्रेन पलटना चाहते थे और जब ऐसा नहीं हुआ तो यह दिल्ली भागने वाले थे। हालाँकि, यह पहले ही गिरफ्त में आ गए।

यह साजिश ऐसे समय में सामने आई है जब पाकिस्तानी आतंकी फरहतुल्लाह गोरी ने अपने स्लीपर सेल से ट्रेनों को निशाना बनाने को कहा है। फरहतुल्लाह गोरी ने एक वीडियो जारी करके भारत में ट्रेनों को पलटने के लिए प्रेशर कुकर बम और अन्य तरीके अपनाने को कहा है। गोरी ने ट्रेनों के अलावा पेट्रोलियम पाइपलाइनों को निशाना बनाने को भी कहा है।

उसके बयान के बाद सुरक्षा एजेंसियाँ सतर्क हो गई हैं। रेल मंत्रालय भी ऐसी घटनाओं पर नजर बनाए हुए है और जाँच भी कर रहा है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसको लेकर कहा, “यह एक गंभीर मुद्दा है, हम हर घटना की विस्तृत जाँच कर रहे हैं। कई घटनाओं में एक चिंताजनक चलन दिख रहा है। रेलवे कोई आरोप-प्रत्यारोप का विषय नहीं है। रेलवे और रक्षा ऐसी संस्था हैं जो राजनीति के ऊपर हैं। इसमें कहीं पर कोई भी नकारात्मक घटना होती है तो इस पर सरकार, विपक्ष और मीडिया को साथ आना चाहिए। हम रेलवे को सामान्यतः चलाने का प्रयास कर रहे हैं।”

फर्रुखाबाद के अलावा अलीगढ़ और राजस्थान में भी रेल पटरियों पर सीमेंट के ब्लॉक और पहिया रखने की घटनाएँ सामने आई थीं। राजस्थान में वन्दे भारत ट्रेन पलटने की साजिश की जा रही थी। वहीं अलीगढ़ वाले मामले में अहसान नाम के एक युवक को गिरफ्तार किया गया था।

कोई मौलवी, कोई आलिम… सब फेक करेंसी से कर रहे थे ‘मजहब’ मजबूत, प्रयागराज के मदरसे में छापे जा रहे थे जाली नोट: ₹100 देने पर मिलते थे 3 नकली नोट

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले में बुधवार (28 अगस्त 2024) को पुलिस ने नकली नोट बनाने के एक गिरोह का पर्दाफाश किया है। यह गिरोह एक मदरसे से ऑपरेट हो रहा था जहाँ 100-100 रुपए के जाली नोट छापे जा रहे थे। पुलिस ने मदरसे में छापा मार कर 1 लाख 30 हजार रुपए के नकली नोट बरामद किए हैं। इस केस में ओडिशा के जाहिर खान सहित कुल 4 आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार आरोपितों में मदरसे का मौलवी तफसीरुल भी शामिल है। पकड़े गए आरोपितों से पूछताछ की जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना प्रयागराज जिले के अतरसुइया इलाके की है। यहाँ पर एक मदरसा है जिसका नाम जामिया हबीबिया मस्जिद-ए-आज़म है। पुलिस को पिछले कई दिनों से यहाँ पर संदिग्ध गतिविधियों की सूचना मिल रही थी। यहाँ पर कई बाहरी लोगों का आना-जाना लगा रहता था। पुलिस ने इस मदरसे पर बारीक नजर रखनी शुरू कर दी। जब पुलिस को इत्मीनान हो गया कि मदरसे में सब सही नहीं चल रहा तब बुधवार (28 अगस्त) को यहाँ दबिश दी गई।

पुलिस मदरसे के अंदर घुसी तब वहाँ एक प्रिंटिंग मशीन पर 3 लोग कुछ छापते नजर आए। जाँच के बाद पता चला कि तीनों नकली नोटों की छपाई कर रहे थे। इन तीनों से पूछताछ हुई तो इन्होंने इस गैरकानूनी काम में मदरसे के प्रिंसिपल की भी मिलीभगत बताई। 25 वर्षीय प्रिंसिपल का नाम मोहम्मद तफसीरुल है जो पेशे से मौलवी है। पुलिस ने चारों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया। पकड़े गए अन्य आरोपितों में 18 वर्षीय मोहम्मद अफ़ज़ल, 18 वर्षीय मोहम्मद शाहिद और 23 वर्षीय जाहिर खान का नाम है।

ज़ाहिर खान उर्फ़ अब्दुल ज़ाहिर मूल रूप से ओडिशा का रहने वाला है। वह मदरसे में आलिम है। पढ़ाई के बाद जाहिर मदरसे में ही पढ़ाने लगा था। वहीं हाईस्कूल पास मोहम्मद अफ़ज़ल के अब्बा मोईद अहमद कपड़े की दुकान पर काम करते हैं। कक्षा 8 पास मोहम्मद शाहिद मदरसे में मौलवी बनने आया था लेकिन बाद में वह नकली नोट छापने वाले रैकेट से जुड़ गया। हाईस्कूल पास मौलवी तफसीरुल के अब्बा भी मदरसे में पढ़ाते थे। पूछताछ में आरोपितों ने बताया कि वो पिछले 3 महीनों से नकली नोटों के इस काले कारोबार को संचालित कर रहे थे।

मदरसे की तलाशी ली गई तो वहाँ से 1 लाख 30 हजार रुपए के नकली नोट बरामद हुए। नकली नोट बनाने के लिए प्रिंटर और अन्य मशीनें ओडिशा के भद्रक निवासी अब्दुल ज़ाहिर ने अपने भाई से मँगवाई। ज़ाहिर का भाई भी पहले प्रयागराज में आधार कार्ड बनवाने का काम कर चुका है। 100 रुपयों के नोट में लोग ज्यादा जाँच पड़ताल नहीं करते, यही सोच कर आरोपितों ने इसे छापना शुरू किया था। अधिकतर नोटों को प्रयागराज के अलग-अलग हिस्सों में दुकानरों को धोखे से दिया जाता था।

आरोपितों ने बाजार में कितनी नकली नोट चलाए हैं इसकी जाँच पुलिस कर रही है। अनुमानित राशि लगभग 5 लाख रुपए बताई जा रही है। पकड़े गए आरोपित अपने काले कारोबार को चलाने के लिए युवाओं को अपने साथ जोड़ रहे थे। उनको 100 रुपए असली देने पर 300 रुपए नकली दिए जाते थे। अब पुलिस टीमें इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की पड़ताल कर रही है। नकली नोट छापने वाले प्रिंटर व अन्य मशीनों को जब्त कर लिया गया है। पुलिस मामले में जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई कर रही है।

इन सभी आरोपितों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा सिविल लाइंस थाने में भारतीय न्याय संहिता की धारा 178, 179, 180, 181 और 182 (1) के तहत कार्रवाई की गई है। इस मामले की जाँच के लिए इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) की टीम भी पहुँच गई है।

‘मेरे भी घर में बहन-बेटियाँ, कैसे चुप बैठता?’: सुनिए भगवाधारी संन्यासी को, जो तिरंगा लेकर बंगाल पुलिस के सामने डटे रहे

कोलकाता में छात्रों द्वारा बुलाए गए ‘नबन्ना मार्च’ को रोकने के लिए पुलिस ने वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया। सड़क पर प्रदर्शनकारियों को पानी की बौछारों से पीछे ढकेलने की कोशिश की गई। इस बीच, एक वीडियो सामने आया, जिसमें हावड़ा पुल पर भगवा वस्त्र पहने एक बुजुर्ग तिरंगा लेकर पुलिस के सामने डटे रहे और पानी की बौछारें झेलते रहे, लेकिन भागे नहीं।

इस मामले में टीएमसी ने सवाल उठाया कि छात्रों के प्रदर्शन में इन बुजुर्ग का क्या काम था? हालाँकि अब वो बुजुर्ग मीडिया के सामने आए हैं। उनका नाम है बलराम बोस। बलराम बोस ने कहा कि छात्रों ने अपने प्रदर्शन में हर घर से एक व्यक्ति को प्रदर्शन में शामिल होने का अनुरोध किया था। मेरे भी घर में बेटी है, बहन हैं। ऐसे में मैं कैसे घर में बैठ सकता था।

बलराम घोष ने एएनआई से बातचीत में कहा, “आंदोलन का आह्वान छात्रों ने किया था, लेकिन कहा गया था कि हर घर से एक व्यक्ति इसमें शामिल हो। मेरे घर में भी महिलाएँ हैं। इसलिए हमें उनकी सुरक्षा के बारे में चिंतित होना चाहिए। अगर समाज अच्छा और सुरक्षित रहेगा, तो महिलाओं का सम्मान होगा। जहाँ महिलाओं का सम्मान नहीं होता, वहाँ भगवान नहीं रहते…आंदोलन में हिस्सा लेते हुए, मेरा मानना ​​था कि हमें अपनी आवाज नबन्ना तक पहुँचानी है।”

उनसे पूछा गया कि वो प्रदर्शन के दौरान पुलिस वालों को क्या इशारा कर रहे थे, इसके जवाब में बलराम घोष ने कहा, “जब पानी का बौछार हो रहा था, तब मेरे मन में अरविंद घोष की बात याद आई कि अगर कोई काम मन से करना हो, तभी करना चाहिए। ऐसे में मेरे मन में उनकी बात आई कि अगर नबन्ना तक हमें अपनी बात पहुँचाती है, तो फिर पहुँचानी है। मैं अगर मर भी जाता, तो कोई बात नहीं। मैं पुलिस वालों से कह रहा था कि जो पुलिस लोग सिस्टम की गुलामी करते हैं, मैं उस गुलामी की हथकड़ी को छोड़कर बाहर आने के लिए कह रहा था। कि आप हमारे साथ नबन्ना चलो, नहीं तो पानी की बौछार हमारे ऊपर करते रहो।”

उन्होंने कहा, “एक सनातनी हूँ, भगवान शिव का भक्त हूँ…मैं नहीं चाहता कि कोई राजनीतिक दल इस आंदोलन को प्रभावित करे या भटकाए। हमें न्याय चाहिए और कुछ नहीं।”

बीजेपी नेत्री लॉकेट चटर्जी ने बलराम घोष का वीडियो एक्स पर शेयर करते हुए लिखा था, “अराजकता का अंत करो, फासीवाद का अंत करो। हम सभी टीएमसी के अत्याचार का अंत करने की माँग करते हैं। पानी की बौछारों के बीच हाथ में तिरंगा लेकर यह व्यक्ति अत्याचार के खिलाफ अपने दृढ़ निश्चय को दर्शा रहा है। ममता बनर्जी, मैं उनके साथ खड़ी हूँ, राज्य के लोग उनके साथ खड़े हैं और पूरा देश उनके साथ खड़ा है।”

बता दें कि आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में महिला डॉक्टर की रेप के बाद हत्या के मामले में न्याय की माँग करते हुए छात्रों ने प्रदर्शन का आह्वान किया था। छात्रों ने ममता बनर्जी के इस्तीफे की माँग करते हुए मंगलवार (27 अगस्त 2024) ‘नबन्ना अभियान’ की घोषणा की थी और नबन्ना बिल्डिंग कूच करने का ऐलान किया था। इस प्रदर्शन को रोकने के लिए कोलकाता पुलिस ने छात्रों पर जमकर लाठीचार्ज किया था और पानी की बौछारों, बैरिकेडिंग की सहायता ली थी। यही नहीं, छात्र प्रदर्शनकारियों को बड़ी संख्या में गिरफ्तार भी किया गया है, जिसके खिलाफ बीजेपी ने पूरे दिन प्रदर्शन किया और बुधवार (28 अगस्त) को भी ये प्रदर्शन जारी रहा।

स्कूल जा रहीं 2 नाबालिग हिन्दू लड़कियों का अपहरण कर जंगल में ले गया शादाब और अनस, फिर किया बलात्कार: रोते-रोते परिजनों को बताया हाल

उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में 2 नाबालिग हिन्दू लड़कियों से रेप का मामला सामने आया है। रेप का आरोप अनस और शादाब पर लगा है। घटना के समय दोनों पीड़िताएँ स्कूल जा रहीं थीं। रास्ते से शादाब और अनस ने पीड़िता को अपहरण कर के बलात्कार किया। पुलिस ने इस केस में केस दर्ज कर के दोनों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। घटना शनिवार (24 अगस्त, 2024) की है।

यह घटना गोंडा जिले थाना क्षेत्र खोंडरे का है। यहाँ 24 अगस्त को एक पीड़िता के पिता ने पुलिस में शिकायत दी है। शिकायत में पीड़ित ने बताया कि उनकी 13 वर्षीया बेटी सुबह अपनी सहेली के साथ स्कूल गई थी। पीड़िता की सहेली भी हिन्दू है जिसकी मर 16 वर्ष है। आरोप है कि इसी दौरान रास्ते में ही अनस और शादाब नाम के 2 युवकों ने दोनों सहेलियों का अपहरण कर लिया। अनस और शादाब के साथ 2 अन्य अज्ञात लोग भी इस घटना में शामिल थे। अपहरण के लिए बाइकों का प्रयोग किया गया था।

जब पीड़िताओं के परिजनों को इस घटना की जानकारी हुई तो उन्होंने अपनी बेटियों की खोजबीन शुरू कर दी। खोजबीन चल ही रही थी कि जंगल के पास एक पेट्रोल पम्प पर दोनों आरोपित देखे गए। इनके साथ दोनों पीड़िताएँ भी मौजूद थीं। अपने परिजनों को देख कर पीड़िताएँ रोने लगीं। उन्होंने बताया कि अनस और शादाब ने उनके साथ जंगल में रेप किया है। जब पीड़िताओं के परिजनों ने दोनों आरोपितों को पकड़ना चाहा तो वो हाथ छुड़ा कर फरार हो गए। शिकायत में पीड़िता के पिता ने दोनों आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है।

पुलिस ने इस शिकायत पर अनस और शादाब को नामजद करते हुए FIR दर्ज कर ली है। इन दोनों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं धाराओं 137 (2), 87 और 70 (2) के अलावा पॉक्सो एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है। ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है। सोमवार (26 अगस्त) को गोंडा पुलिस ने बताया कि दोनों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया है। मामले में जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

जम्मू-कश्मीर में जमात-ए-इस्लामी के 4 नेताओं के साथ ही अफजल गुरु का भाई भी चुनाव मैदान में: मोदी सरकार की नीतियों ने तोड़ा अलगाववादियों का हौसला, भारत की संप्रभुता-अखंडता की खा रहे कसम

केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर में विधानसभा चुनाव का ऐलान हो चुका है। इस चुनाव में जमात-ए-इस्लामी जैसी कट्टरपंथी संगठनों के नेता भी चुनाव मैदान में उतर रहे हैं, जिसने 1987 के बाद से लगातार लोकतांत्रिक कार्यकलापों का बहिष्कार किया है। यही नहीं, इस चुनाव में आतंकवादी अफजल गुरु का भाई एजाज गुरु भी अपनी किस्मत आजमा रहा है। यही नहीं, पूर्व अलगाववादियों ने तहरीक-ए-आवाम नाम की राजनीतिक पार्टी भी बनाई है।

आतंकवाद की नर्सरी से जुड़े लोगों का लोकतंत्र में लौटा विश्वास!

कश्मीर में आतकंवाद और अलगाववाद की जननी और पोषक कही जाने वाले प्रतिबंधित जमात-ए-इस्लामी के चार पूर्व नेताओं ने चुनावी दंगल में उतरते हुए बतौर निर्दलीय अपना-अपना नामांकन जमा कराया। इसमें पुलवामा विधानसभा सीट से जमात-ए-इस्लामी के पूर्व नेता तलत मजीद, कुलगाम विधानसभा क्षेत्र से जमात-ए-इस्लामी से जुड़े सयार अहमद रेशी, देवसर विधानसभा क्षेत्र से जमात-ए-इस्लामी से जुड़े रहे नजीर अहमद बट ने नामांकन कराया है।

इसके अलावा सरजन अहमद बागे उर्फ सरजन बरकती उर्फ आजादी चाचा ने शोपियाँ के जेनपोरा विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय पर्चा भरता है। वो टेरर फंडिंग के मामले में जेल में है। तो संसद हमले में फाँसी की सजा पाने वाले आतंकी अफजल गुरु का भाई एजाज गुरु भी उत्तरी कश्मीर में सोपोर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहा है। हालाँकि इन लोगों ने तहरीक-ए-आवाम नाम की पार्टी बनाई है, लेकिन अभी तक चुनाव आयोग से पार्टी के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है, ऐसे में सभी निर्दलीय ही मैदान में हैं।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक, तलत मजीद कहा कि मौजूदा वैश्विक राजनीतिक परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए,जम्मू कश्मीर में जो हालात हैं, उन्हें देखते हुए मेरा मानना है कि हमारा चुनावी प्रक्रिया में शामिल होने का वक्त आ चुका है। कश्मीर मुद्दे पर आज से पहली मेरी क्या राय थी, वह सार्वजनिक है। जमात-ए-इस्लामी और हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के मौजूदा राजनीतिक परिदृश्यकों ध्यान में रखते हुए आगे बढ़ना चाहिए। बतौर कश्मीरी हमें अतीत में नहीं बल्कि वर्तमान में जीना चाहिए और एक बेहतर भविष्य के लिए आगे बढ़ने का प्रयास करना चाहिए।

बता दें कि 1987 तक जमात-ए-इस्लामी ने जम्मू-कश्मीर में हुए लगभग हर विधानसभा चुनाव में भाग लिया है। जम्मू कश्मीर में 1972 में हुए विधानसभा चुनाव में जमात-ए-इस्लामी के 22 में से 5, 1977 के विधानसभा चुनाव में 19 में एक प्रत्याशी ने जीत दर्ज की जबकि 1983 के चुनाव में इसने 26 उम्मीदवार मैदान में उतारे और सभी हार गए। इसके बाद 1987 में मुस्लिम यूनाइटेड फ्रंट के बैनर तले कश्मीर में चुनाव लड़ने वाले जमात के 4 सदस्यों ने जीत हासिल की थी। तब से जमात ए इस्लामी ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया में हिस्सा नहीं लिया।

यहाँ ये बात फिर से ध्यान दिलाना जरूरी है कि भारत में वही व्यक्ति राजनीतिक गतिविधियों में भाग ले सकता है, जिसने भारत की एकता और अखंडता की शपथ ली हो। खासकर राजनीतिक पार्टियों से जुड़े मामलों में ऐसा ही है। भारत के 16वें संविधान संसोधन के मुताबिक, वही राजनीतिक दल भारत के लोकतंत्र का हिस्सा बन सकेंगे, जिन्होंने भारत की संप्रभुता और अखंडता के प्रति शपथ लिया हो। भारत के 16वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1963 के तहत, भारत की संप्रभुता और अखंडता के हित में भाषण और अभिव्यक्ति, शांतिपूर्ण सभा, और संघ की आज़ादी पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगाए गए हैं। इसके अलावा, विधायकों, मंत्रियों, न्यायाधीशों, और सीएजी को जो शपथ और घोषणाएं लेनी होती हैं, उनमें भी संप्रभुता और अखंडता की अवधारणाएँ जोड़ी गईं।

प्रमुख राजनीतिक पार्टियों ने उतारे उम्मीदवार

जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव के लिए मुख्य राजनीतिक पार्टियों ने अपने उम्मीदवारों की घोषणा भी कर दी है। बीजेपी ने 2 तिहाई सीटों पर उम्मीदवार उतार दिए हैं, तो कॉन्ग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस साथ में चुनाव लड़ रहे हैं। पीडीपी भी अपने उम्मीदवारों के नाम घोषित कर रही है। अन्य छोटे-मोटे दल भी अपने उम्मीदवारों को मैदान में उतार रहे हैं। माकपा ने कॉन्ग्रेस-नेकॉं के साथ गठबंधन किया है, तो पैंथर्स पार्टी भी उनके साथ है।

गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव तीन चरणों में 18 सितंबर, 25 सितंबर और 1 अक्टूबर को होंगे। नतीजे 4 अक्टूबर को घोषित किए जाएँगे। पहले चरण के लिए नामांकन 27 अगस्त, दूसरे चरण के लिए 5 सितंबर और तीसरे चरण के लिए 12 सितंबर से दाखिल किए जाएँगे। इस चुनाव में कश्मीरी प्रवासियों के लिए दिल्ली,  जम्मू और उधमपुर में स्पेशल पोलिंग बूथ बनाए गए हैं।

जम्मू-कश्मीर में कुल 90 निर्वाचन क्षेत्र हैं जिनमें से 74 जनरल, 9 अनुसूचित जाति और 7 अनुसूचित जनजाति के लिए हैं। केंद्रशासित प्रदेश में मतदाताओं की संख्या कुल 87.09 लाख हैं जिसमें 44.46 लाख पुरुष और 42.62 लाख महिला मतदाता हैं। जम्मू-कश्मीर में युवा मतदाताओं की संख्या 20 लाख है। पिछले साल दिसंबर में सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को 30 सितंबर तक जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव कराने का निर्देश दिया था।

जनजातीय महिलाओं का यौन शोषण, शरिया अदालत, बलात्कार-हत्या, डॉक्टरों की पिटाई, BJP नेता पर गोलीबारी… अराजकता की किस हद के बाद लगता है राष्ट्रपति शासन?

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा है कि पश्चिम बंगाल की राजधानी स्थित कोलकाता के RG Kar मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में महिला डॉक्टर के बलात्कार और हत्या की भयानक घटना से वो निराश और भयभीत हैं। उन्होंने छात्रों और डॉक्टरों के विरोध प्रदर्शन का संज्ञान लेते हुए कहा है कि अपराधी कहीं छिप कर बैठे हुए हैं। उन्होंने याद किया है कि कैसे उन्हें राखी बाँधने आई छात्रों ने उनसे आश्वासन माँगा था कि देश में फिर से ‘निर्भया’ (2012 में दिल्ली में गैंगरेप) जैसी घटना फिर नहीं दोहराई जाएगी।

राष्ट्रपति ने उन बच्चों को बताया था कि जहाँ एक तरफ ये राज्य की जिम्मेदारी है कि वो हर नागरिक की सुरक्षा सुनिश्चित करे, सबको, खासकर लड़कियों को, आत्मरक्षा के तकनीक और मार्शल आर्ट्स सीखने चाहिए। अपने बयान में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा है कि ये वो मानसिकता है जो महिलाओं कमतर आँकती है – कम योग्य, कम ताकतवर, कम प्रतिभावान। अब आप सोचिए, हालात कितने भयावह हैं जब राष्ट्रपति को एक घटना को लेकर इस तरह का बयान जारी करना पड़ा हो।

पूरा मामला कोलकाता स्थित RG Kar मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल का है। वहाँ एक महिला डॉक्टर का बलात्कार कर उसे बेरहमी से मार डाला गया। इस घटना में शामिल संजय रॉय नामक एक शराबी शख्स को गिरफ्तार किया गया जो कोलकाता पुलिस का वॉलंटियर था। वो जिस बाइक का इस्तेमाल कर रहा था वो भी पुलिस कमिश्नर के नाम पर रजिस्टर्ड थी। पीड़िता को इतनी बेरहमी से मारा गया था कि उसके आँख-नाक से खून निकल रहे थे, प्राइवेट पार्ट क्षत-विक्षत था और पाँव 90 डिग्री पर मुड़े हुए थे।

परिवार को पहले बताया गया कि ये आत्महत्या है। सुप्रीम कोर्ट ने भी माना कि FIR दर्ज करने में देरी हुई। पश्चिम बंगाल सरकार की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल पेश हुए, जो समाजवादी पार्टी के राज्यसभा सांसद भी हैं। पीड़िता के परिवार ने भी कहा था कि हड़बड़ी में अंतिम संस्कार पुलिस-प्रशासन ने कराया। जब डॉक्टर प्रदर्शन करने उतरे तो RG Kar मेडिकल कॉलेज-हॉस्पिटल में आधी रात के दौरान गुंडों की भीड़ पहुँची और घटनास्थल को तहस-नहस कर दिया, प्रदर्शनकारियों की पिटाई की गई।

इधर TMC के नेता CBI के पास जाँच जाने के बाद CBI को भला-बुरा कहने लगे। मोदी सरकार को तानाशाह बताने वाली महुआ मोइत्रा जैसी सांसद अपनी पुलिस की गलतियाँ छिपाने लगीं। कोलकाता पुलिस ने सोशल मीडिया के जरिए इस प्रकरण में न्याय माँगने वालों को चुन-चुन कर नोटिस भेजा। पत्रकार सागरिका घोष जो TMC की राज्यसभा सांसद भी हैं, वो चुप हैं। उनके पति और ‘इंडिया टुडे’ के कंसल्टिंग एडिटर राजदीप सरदेसाई रोज कुछ न कुछ ट्वीट कर के सरकार का बचाव करते हैं।

इधर पश्चिम बंगाल में युवा सड़कों पर उतरे और ‘नबन्ना अभियान’ चलाया, यानी विरोध प्रदर्शन किया। पुलिस ने आँसू गैस के गोलों से लेकर पानी की बौछार और लाठीचार्ज तक का सहारा लिया। बांग्लादेश में हिन्दू विरोधी हिंसा को ‘क्रांति’ कहने वालों की जुबान पर लगाम लग गया और वो यहाँ प्रदर्शनकारियों को ही गुंडा बताने लगे। पुलिसिया दमन के खिलाफ अगले दिन भाजपा ने बंद बुलाया तो भाटपारा में भाजपा नेता प्रियांगु पांडेय की गाड़ी को घेर कर उन पर गोलीबारी की गई, बम फेंके गए।

RG Kar मेडिकल कॉलेज-अस्पताल में इससे पहले भी कई संदिग्ध मौतें हो चुकी हैं, दबी जुबान से वहाँ सेक्स-ड्रग्स रैकेट चलने की बातें हुईं। हालाँकि, CBI की चार्जशीट से पहले कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। फिर भी, जिस तरह से प्रिंसिपल संदीप घोष का तुरंत ट्रांसफर किया गया, जिस तरह उनके रसूख की बात सामने आई और पता चला कि इससे पहले 2 बार वो अपना ट्रांसफर रुकवा चुके हैं – दाल में बहुत कुछ काला है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक दिन पैदल मार्च कर के न्याय की माँग कर इतिश्री कर ली, जब वो सिर्फ CM ही नहीं बल्कि राज्य की गृह और स्वास्थ्य मंत्री भी हैं।

अब भाजपा के बंद के बाद ममता बनर्जी असम, ओडिशा, बिहार, झारखंड और दिल्ली को जलाने की बातें कह रही हैं। उन्होंने उलटे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को ही भला-बुरा कहना शुरू कर दिया और पूछने लगीं कि वो पहलवान आंदोलन पर क्यों चुप थीं। सवाल करने लगीं कि क्या भाजपा के खिलाफ बोलना कठिन है? ये पश्चिम बंगाल ही है जहाँ संदेशखली में शाहजहाँ शेख और उसके गुर्गों ने मिल कर जनजातीय समाज की महिलाओं का यौन शोषण किया था। उसे गिरफ्तार करने गई ED की टीम पर हमला हुआ था।

पश्चिम बंगाल ही था वो जहाँ चोपरा में TMC नेता ताजेमुल को शरिया अदालत लगा कर महिलाओं को बाँध कर उनकी पिटाई करते हुए देखा गया था। ये वही पश्चिम बंगाल है जहाँ इस घटना का बचाव करते हुए सत्ताधारी दल के विधायक हमीदुल रहमान ने राज्य को ‘मुस्लिम राष्ट्र’ करार दिया था। और पीछे जाएँ तो ये वही पश्चिम बंगाल है जहाँ चुनावों के दौरान विपक्षी दलों के कार्यकर्ताओं के खिलाफ बड़े पैमाने पर हिंसा होती है, उनके घरों को तबाह कर दिया जाता है, उन्हें पलायन को मजबूर होना पड़ता है।

हमने भाजपा के दफ्तरों में परिवार सहित रातें बिताते लोगों के वीडियो देखे हैं। पश्चिम बंगाल में सरकार के विरोध की स्वतंत्रता नहीं है। हमने देखा है कैसे प्रदर्शनकारी चिकित्साकर्मियों को तृणमूल कॉन्ग्रेस के नेताओं ने धमकाते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तरफ उठने वाली हर उँगली तोड़ दी जाएगी। एक अन्य नेता ने कहा कि जब डॉक्टरों को लोग पीटेंगे तो उन्हें बचाने कोई नहीं आएगा। बदहाली से जूझते पश्चिम बंगाल में उद्योग-धंधे भी चौपट हैं, चुनाव दर चुनाव हिंसा होती रहती है तो क्या अब वहाँ राष्ट्रपति शासन नहीं लगाया जाना चाहिए?

पश्चिम बंगाल में पंचायत चुनावों तक में भी जम कर हिंसा होती है। सवाल ये है कि क्या वहाँ लोकसभा और विधानसभा चुनाव निष्पक्ष तरीके से हो पाते होंगे? चुनाव बाद अर्धसैनिक बलों के रहते भी हिंसा जारी रहती है, यानी पूरा पुलिस-प्रशासन सत्ताधारी दल की मुट्ठी में है। शिक्षक भर्ती से लेकर राशन तक में घोटाला हुआ है। आखिर अराजकता की वो कौन सी सीमा है जिसे पार करने के बाद राष्ट्रपति शासन लगाया जाता है? अब पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन लगा कर निष्पक्ष चुनाव कराए जाएँ बड़ी संख्या में अर्धसैनिक बलों को लगा कर, यही एक उपाय बचा है।

‘राहुल गाँधी का अपना कोई विचार नहीं, सिर्फ कुर्सी के पीछे भाग रहे हैं’: कंगना रनौत बोलीं- इंदिरा गाँधी से उनकी तुलना सिर्फ मजाक

हिमाचल प्रदेश की मंडी लोकसभा सीट से बीजेपी सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत ने राहुल गाँधी को ‘बिना विचार’ वाला करार दिया और कहा कि उनके पास अपना कोई विचार नहीं है। कंगना रनौत ने कहा कि राहुल गाँधी सिर्फ कुर्सी के पीछे भाग रहे हैं, जबकि उन्हें खुद नहीं पता कि उन्हें क्या चाहिए।

इंडिया टुडे के साथ एक इंटरव्यू में कंगना रनौत ने खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि राहुल गाँधी का अपना कोई रास्ता नहीं है। कंनगा ने कहा, “वह (राहुल गाँधी) एक गड़बड़झाला है। वह अपने भाषणों और अपने आचरण में एक गड़बड़झाला है।” उन्होंने यह भी कहा कि राहुल गाँधी द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर हमला करने के लिए संसद में भगवान शिव की तस्वीर का इस्तेमाल करने से संबंधित विवाद के दौरान, वह केवल यही सोचती थीं कि राहुल गाँधी की “ड्रग जाँच होनी चाहिए।”

कंगना रनौत ने राहुल के लिए Total mess शब्द का इस्तेमाल करते हुए कहा कि राहुल के पास कोई विजन नहीं है। उनका खुद का कोई रास्ता नहीं है। वह टोटल Mess हैं। वह अपने व्यवहार में भी इसी तरह के हैं और उनके भाषणों में भी इसी तरह की गड़बड़ी देखने को मिलती है।

हिमाचल की मंडी लोकसभा सीट से बीजेपी सांसद कंगना रनौत ने कहा कि हाल ही में उन्होंने किसान आंदोलन को लेकर जो बयान दिया था, उसे लेकर पार्टी नेतृत्व ने उन्हें फटकार लगाई है। उन्होंने कहा कि वह भविष्य में अपने शब्दों के चयन को लेकर अधिक सावधान रहेंगी। कंगना ने कहा कि मुझे अभी बहुत आगे जाना है। मैं आगे पार्टी के हिसाब से ही बात करने की कोशिश करूँगी। उन्होंने कहा, “मैं रहूँ या न रहूँ, भारत रहना चाहिए”

बता दें कि कंगना रनौत की फिल्म इमरजेंसी 6 सितंबर 2024 को रिलीज होने जा रही है। यह फिल्म पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी द्वारा देश पर थोपे गए आपातकाल के बारे में है।

कंगना रनौत से जब राहुल की तुलना इंदिरा गाँधी से करने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, “यह एक मजाक है। प्लीज देश के साथ इस तरह के मजाक मत करिए।” कंगना ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी की तुलना में राहुल का रास्ता बिल्कुल अलग है। ऐसा लगता है कि उनके पास किसी तरह के ठोस विचार नहीं हैं, जिस तरह के किसी नेता के होने चाहिए। वह सिर्फ कुर्सी के पीछे हैं और हर बार अपना रास्ता बदल लेते हैं।

इंदिरा गाँधी के बारे में बात करते हुए रनौत ने कहा कि उनकी विचारधाराएँ और राजनीति उनके पिता जवाहरलाल नेहरू से अलग थी, जिन्हें रनौत ने “लिबरलों का प्रिय” करार दिया। वहीं, रनौत ने इंदिरा गाँधी के बारे में कहा, ‘वो सोशलिस्ट नहीं थीं।” उन्होंने इंदिरा गाँधी को ध्रुवीकरण करने वाली शख्सियत करार दिया। कंगना ने कहा कि “उन्हें सबसे ज्यादा प्यार किया जाता था और (फिर भी) सबसे ज्यादा नफरत भी की जाती थी।”