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हिंदुओं को चुन-चुनकर बनाया निशाना, पर बांग्लादेश में ‘क्रांति का कुत्ता’ बन भौंक रहा न्यूजलॉन्ड्री: कहा- भारतीय मीडिया ने हिंसा को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया

बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार के अनगिनत मामले सामने आए। आधिकारिक तौर पर 270 से अधिक मामले हिंदुओं के खिलाफ हिंसा से ऐसे रहे, जो रिपोर्ट हुए, बाकियों का कुछ पता नहीं चल पाया। लेकिन पश्चिम मीडिया ने जिस तरह से हिंदुओं पर हिंसा के मामलों को लेकर गुमराह करने जैसी रिपोर्टिंग की, अब उसी रास्ते पर भारत की वापमंथी मीडिया भी चल पड़ी है।

दरअसल, बांग्लादेश की अंतरिम यूनुस सरकार ने भारत से चुनिंदा मीडिया संस्थानों को बांग्लादेश का दौरा करवाया, जिन्होंने विदेशी मीडिया की तरह यूनुस सरकार के पक्ष में रिपोर्टिंग करते हुए हिंदुओं के खिलाफ हिंसा को न सिर्फ बेहद कम करके बताया, बल्कि मामूली भी साबित करने की कोशिश की। ऐसी ही कोशिश न्यूजलॉन्ड्री जैसे संदिग्ध वामपंथी न्यूज पोर्टल की तरफ से भी की गई है।

न्यूज़लॉन्ड्री ने न सिर्फ बांग्लादेश में हिंदू विरोधी हिंसा को कमतर दिखाने का प्रयास किया, बल्कि उसने भारतीय मीडिया को ही निशाना बनाने की कोशिश की। इसी क्रम में न्यूज़लॉन्ड्री की पत्रकार स्मिता शर्मा ने 27 अगस्त को बांग्लादेश से एक ग्राउंड रिपोर्ट प्रकाशित किया, जिसमें उन्होंने हिंसा को कमतर बताने और भारतीय मीडिया को बदनाम करने का प्रयास किया।

रिपोर्ट में दावा किया गया कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हुए हमले बढ़ा-चढ़ा कर पेश किए जा रहे हैं। रिपोर्ट में बांग्लादेशी युवाओं से बातचीत की गई, जिन्होंने देश को सुधारने की इच्छा जताई। हालाँकि, रिपोर्ट में कुछ हिंदू लड़कियों को मंदिर जाते हुए दिखाया गया, जिससे यह सुझाव दिया गया कि हिंदू और उनके मंदिर सुरक्षित हैं। लेकिन मंदिरों में देवी-देवताओं की मूर्तियों के सामने लगे लोहे के जाले बताते हैं कि स्थिति गंभीर है, खासकर 5 अगस्त के बाद से, जब कई मंदिरों को तोड़ा गया और मूर्तियों को खंडित किया गया।

मजेदार बात यह रही कि न्यूजलॉन्ड्री के रिपोर्टर ने एक हिंदू लड़की से ‘शायद’ हिंदू मंदिरों पर हमले की खबरों के बारे में पूछा, हालाँकि, इससे पहले कि छात्रा इस बारे में कुछ बोल पाती, प्रोपेगेंडा पोर्टल के रिपोर्टर ने अगला सवाल पूछ लिया। इसके अलावा, रिपोर्ट में स्टूडेंट्स अगेंस्ट डिस्क्रिमिनेशन की केंद्रीय संयोजक नुसरत तबस्सुम से बातचीत की गई, जिन्होंने दावा किया कि किसी भी अवामी लीग के नेता को भीड़ ने पीटा नहीं है।

हालाँकि, अवामी लीग के नेताओं पर हमले और भीड़ द्वारा मारे जाने की कई घटनाएँ सामने आई हैं, जिसमें आधिकारिक तौर पर एक ही शहर में 2 दर्जन से ज्यादा आवामी लीग के कार्यकर्ताओं की हत्या भी शामिल है। वीडियो में सामने आया था कि पोराहाटी यूनियन के अध्यक्ष और जेनेदाह सदर उपजिला अवामी लीग के महासचिव शाहिदुल इस्लाम हिरन को भीड़ ने पीट-पीट कर मार डाला और उनका शव जेनेदाह शहर के केंद्र में पैरा छतर में एक मूर्ति से लटका हुआ पाया गया।

आश्चर्य की बात नहीं है कि न्यूज़लॉन्ड्री के रिपोर्टर ने तबस्सुम के दावे का खंडन करने की जहमत नहीं उठाई, क्योंकि संभवतः इसका उद्देश्य असली जानकारी देना नहीं, बल्कि बांग्लादेश में जो कुछ हुआ, उसे छात्र आंदोलन की आड़ में दबाने की थी। न्यूजलॉन्ड्री ने पूरी कोशिश की है कि बांग्लादेश में जो कुछ हुआ, वह एक ‘क्रांति’ थी, छात्रों की क्रांति थी, और लोगों को हिंदुओं के जातीय सफाए के बजाय केवल इसे ही याद रखना चाहिए।

तबस्सुम ने हिंदू विरोधी हिंसा को क्रांति से जोड़कर घुमाते हुए कहा, “इसे पोस्ट-रिवोल्यूशन डिप्रेशन कहते हैं। ये पूरी दुनिया में होता है। हर क्रांति के बाद एक परीक्षा की घड़ी होती है। उसे बस यही समझिए।”

दरअसल, क्रांति के बाद का समय कठिन होता है, जिसमें हमलावरों ने शेख हसीना के आवास को लूटा, अंडरगारमेंट्स लहराए और शेख मुजीबुर रहमान की मूर्ति पर पेशाब किया। इस्लामी उग्रवादियों द्वारा निर्दोष हिंदू अल्पसंख्यकों पर हमला यह साबित करता है कि तथाकथित छात्र क्रांति सिर्फ एक छात्र क्रांति नहीं थी, बल्कि इसे बीएनपी और जमात-ए-इस्लामी जैसे जिहादी राजनीतिक संगठनों ने हाइजैक कर लिया था, जिन्होंने हिंदुओं को सिर्फ उनके अस्तित्व के कारण निशाना बनाया। लेकिन न्यूज़लॉन्ड्री की पत्रकार स्मिता शर्मा ने इस्लामी उग्रवाद का बचाव करते हुए नुसरत तबस्सुम से हिंदू विरोधी हिंसा को कमतर बताने पर कोई सवाल ही नहीं किया।

न्यूज़लॉन्ड्री ने बांग्लादेश में हिंदू विरोधी हिंसा पर रिपोर्टिंग के लिए भारतीय मीडिया को घेरा

न्यूजलॉन्ड्री के कामों को कुछ इस तरह से समझा जा सकता है कि न्यूज़लॉन्ड्री ने बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ इस्लामी अपराधों की अनदेखी की और यह दिखाने का प्रयास किया कि छात्र विरोध प्रदर्शन जिहादी पार्टियों जैसे बीएनपी और जमात-ए-इस्लामी द्वारा हाइजैक नहीं हुए थे। इसके विपरीत, इन पार्टियों ने हिंदुओं के खिलाफ हिंसा को बढ़ावा दिया।

न्यूज़लॉन्ड्री ने भारतीय मुख्यधारा की मीडिया की आलोचना की, यह आरोप लगाते हुए कि उन्होंने हिंदू विरोधी हिंसा को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया। स्मिता शर्मा ने एक बांग्लादेशी लड़की से बातचीत में कहा कि भारतीय टेलीविजन मीडिया सरकार के नैरेटिव और एजेंडे के साथ जुड़ा हुआ है। हालाँकि, कुछ स्वतंत्र आवाजें [जिन्हें ‘एंटी-बीजेपी’ माना जा सकता है] भी काम कर रही हैं। विडंबना यह है कि न्यूज़लॉन्ड्री, जो खुद एंटी-बीजेपी/आरएसएस और एंटी-मोदी प्रोपेगैंडा पर फलती-फूलती है, भारतीय टीवी मीडिया पर नैरेटिव सेट करने का आरोप लगा रही थी। यह उनके खुद के काम को भी सवालों के घेरे में लाता है।

इस मौके पर भी स्मिता शर्मा ने उत्तर भारतीयों को निशाना बनाने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी। शर्मा ने उत्तर भारतीयों को बदनाम करते हुए कहा कि हिंदी भाषी लोग बांग्लादेश में अशांति की रिपोर्ट को अलग नजरिए से देखते हैं, क्योंकि वे ‘व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी’ और फर्जी खबरों के माध्यम से जानकारी प्राप्त करते हैं। वहीं दक्षिण भारत के लोग विभिन्न भाषाएं बोलते हैं और बांग्लादेश व अन्य देशों के प्रति उनकी सोच में कम पूर्वाग्रह होते हैं।

न्यूज़लॉन्ड्री की पत्रकार ने आरोप लगाया कि भारतीय मीडिया ने बांग्लादेश में हिंदू विरोधी हिंसा और सामान्य अशांति को “अत्यधिक बढ़ा-चढ़ाकर” पेश किया। हालाँकि कुछ सोशल मीडिया पोस्ट को छोड़ दें, तो कहीं भी घटनाओं को बढ़ा-चढ़ाकर नहीं बताया गया। अगर भारतीय मीडिया के काम करने के तरीके तो शर्मा अतिशयोक्ति कह रही हैं, तो यह हिंदू पीड़ितों के प्रति इस्लामिक हिंसा को लेकर उनकी असंवेदनशीलता दर्शाता है।

OpIndia अपनी रिपोर्ट में बता चुका है कि बांग्लादेश में किस तरह से हिंदुओं को निशाना बनाया गया। जिसमें जमात-ए-इस्लामी (JeI) ने हिंदू घरों की सूची तैयार की जिन्हें हमले के लिए चुना गया, और हिंदुओं को धमकी दी गई कि वे अपनी जान बचाने के लिए पैसे और अन्य कीमती चीजें दें। इस्लामियों ने हिंदू मंदिरों को तोड़ा और मूर्तियों को खंडित किया। 5 अगस्त के बाद से 200 से अधिक ऐसे हिंदू विरोधी हमले हुए हैं, जबकि भारतीय और पश्चिमी वामपंथी मीडिया इसे ‘राजनीतिक बदला’ कहकर खारिज कर रही थी।

न्यूजलॉन्ड्री दावा किया कि भारतीय मीडिया ने नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के विरोधियों को “इस्लामिक ताकतें” करार दिया, जबकि यह सच्चाई को छिपाने का प्रयास था कि विरोध राजनीतिक और धार्मिक रूप से प्रेरित थे। CAA से भारतीय मुसलमानों को कोई नुकसान नहीं हुआ था, लेकिन विरोधियों ने हिंसक प्रदर्शनों को बढ़ावा दिया, जो 2020 के दिल्ली दंगों में बदल गए। शर्मा ने यह उल्लेख नहीं किया कि कैसे AAP विधायक अमानतुल्लाह खान ने मुस्लिम भीड़ को उकसाया, कैसे AAP पार्षद ताहिर हुसैन की इमारत में 3000 दंगाई इकट्ठा हुए थे, और पेट्रोल बम जमा किए गए थे। न्यूजलॉन्ड्री ने यह भी नहीं बताया कि कैसे मुस्लिम दंगाइयों ने बेरहमी से IB अधिकारी अंकित शर्मा, हिंदू युवक दिलबर नेगी और कई अन्य लोगों की हत्या की। यह केवल इस्लामिक ताकतें नहीं थीं, बल्कि राजनीतिक और वामपंथी मीडिया की ताकतें भी थीं जिन्होंने CAA का विरोध किया, जो केवल पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आए हिंदुओं और अन्य गैर-मुस्लिम अल्पसंख्यकों को नागरिकता प्रदान करता है।

इसके अलावा, न्यूज़लॉन्ड्री के पत्रकार ने यह भी आरोप लगाया कि 2020-21 के किसान आंदोलन में हिस्सा लेने वालों को ‘खालिस्तानी’ बताया गया, जबकि हकीकत ये थी कि खालिस्तानी तत्वों ने किसानों के आंदोलन को हाईजैक करने की कोशिश की, लेकिन न्यूजलॉन्ड्री ने ये तथ्य छिपा लिया। वहीं, ऑपइंडिया ने बताया था कि किसानों के विरोध प्रदर्शन के परिणामस्वरूप 60,000 करोड़ रुपये का व्यापार नुकसान हुआ, खालिस्तानी भावनाओं का फिर से उभार, बलात्कार, हत्या, दंगों आदि जैसी कई आपराधिक गतिविधियाँ हुईं।

न्यूजलॉन्ड्री की रिपोर्ट ये साबित करने के लिए काफी है कि क्यों मोहम्मद यूनुस की सरकार ने चुनिंदा भारतीय ‘पत्रकारों’ को ही बांग्लादेश बुलाया। ये साफ है कि उनकी कोशिश बीएनपी और जमात के आतंकियों द्वारा हिंदुओं के खिलाफ किए गए अत्याचारों को छिपाने की थी और दुनिया को ये बताने की भी कोशिश है कि हिंदुओं को निशाना बनाया जाना सिर्फ इस ‘क्रांति’ का कोलेटरल डैमेज था।

मोहम्मद यूनुस की सरकार तो यही चाहती है कि हिंदुओं के धार्मिक सफाए की चर्चा कहीं न हो और न ही इसकी रिपोर्टिंग हो और न ही विरोध, बल्कि इसे ‘कोलेटरल डैमेज’ यानी मामूली नुकसान मानकर चुप्पी साध ली जाए। क्या सरकारी दौरे पर गए भारतीय पत्रकारों को विदेशी धरती पर भारतीय लोगों और मीडिया को बदनाम करना चाहिए, खासकर तब जब वह देश-सरकार बेशर्मी से इस्लामी कट्टरपंथियों को हिंदू और अन्य अल्पसंख्यक समूहों पर अत्याचार करने दे रहा है?

मूल रिपोर्ट अंग्रेजी में प्रकाशित की गई है। मूल रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।

ऑडिशन के नाम पर हीरो को होटल में नंगा करवाया, फोटो खींचकर हिरोइन को भेजी: यौन शोषण में मलयालम फिल्मों के डायरेक्टर रंजीत का भी आया नाम

केरल में फिल्ममेकर रंजीत के खिलाफ एक युवा अभिनेता ने शिकायत दर्ज कराई है। अभिनेता का आरोप है कि रंजीत ने साल 2012 उसका यौन उत्पीड़न किया था। इसके अलावा डायरेक्टर ने उसे जबरन नंगा भी कराया था।

अपनी शिकायत में अभिनेता ने दावा किया कि रंजीत ने उन्हें बेंगलुरु के होटल में ऑडिशन के लिए बुलाया था। वहीं उनके साथ इस घिनौनी हरकत को अंजाम दिया गया। शुरू में उन्हें लगा ये ऑडिशन का ही पार्ट है लेकिन रंजीत ने उनका यौन शोषण करने के बाद उन्हें पैसे ऑफर किए।

केरल पुलिस के अनुसार एक्टर ने ये शिकायत डीजीपी और एसआईटी को दी है। वहीं मीडिया से बात करते हुए बताया रंजीत जब उनका यौन शोषण कर रहा था उस समय एक्ट्रेस के साथ फोन पर था। उसकी नग्न तस्वीरें खींचने के बाद रंजीत ने वो फोटो रेवती को भी भेजी और एक्टर से कहा कि वो रेवती को पसंद आए।

एक्टर ने बताया, “जब रंजीत ने मुझे नग्न खड़े होने के लिए कहा, तो वह एक अभिनेत्री से बात कर रहे थे। मैंने पहले ही उस अभिनेत्री का नाम बता दिया है- रेवती। रंजीत ने मुझे बताया कि यह रेवती थी। मुझे नहीं पता कि रंजीत और रेवती के बीच कोई रिश्ता है या नहीं, लेकिन रंजीत ने मेरी तस्वीरें लीं और उन्हें रेवती को भेज दिया।”

अभिनेता ने कहा, “जब मैंने पूछा कि तस्वीरें किसे भेजी जा रही थीं, तो रंजीत ने कहा कि उन्हें रेवती को भेजा गया था, उन्होंने कहा कि उन्हें जो दिखाई दिया वह उन्हें पसंद आया। यह घटना फिल्म ‘बावुत्तियुडे नामथिल’ के लोकेशन पैक-अप के दौरान हुई। निर्देशक फिल्म के ऑडियो लॉन्च या किसी अन्य संबंधित कार्यक्रम के सिलसिले में वहाँ मौजूद थे।”

उल्लेखनीय है कि रंजीत पर हाल ही में बंगाली अभिनेत्री श्रीलेखा मित्रा ने भी यौन दुराचार का आरोप लगाया था। इसके बाद अभिनेता की शिकायत सामने आई है। अभिनेता ने बताया कि हेमा कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद वह सामने आया है।

गौरतलब है कि हेमा कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद मलयालम फिल्म इंडस्ट्री में तहलका मचा हुआ है। कई युवा कलाकार सामने आकर बता रहे हैं कि उनके साथ किस फिल्म मेकर ने क्या किया। पिछले दिनों एक्टर सिद्दीकी के ऊपर एक युवा अभिनेत्री ने रेप का आरोप लगाया था। इसके अलावा एक्टर जयसूर्या और सीपीआईएम के विधायक मुकेश पर भी अभिनेत्रियों ने यौन शोषण के इल्जाम लगाए थे।

काजी सिस्टम खत्म, निकाह-तलाक का रजिस्ट्रेशन जरूरी: 90 साल बाद असम ने बदला ‘मजहबी कानून’, इसके बारे में जानिए सब कुछ

असम विधानसभा ने गुरुवार (29 अगस्त 2024) को एक विधेयक पारित कर दिया, जिसके बाद मुस्लिम के निकाह और तलाक का सरकारी रजिस्ट्रेशन अनिवार्य हो गया है। असम मुस्लिम विवाह और तलाक का अनिवार्य पंजीकरण विधेयक, 2024 को राजस्व और आपदा प्रबंधन मंत्री जोगेन मोहन ने विधानसभा में पेश किया, जो मुस्लिम विवाह और तलाक अधिनियम 1935 की जगह लेगा। पुराना कानून बाल विवाह की अनुमति देता था और बहुविवाह पर रोक नहीं लगाता था। इसके साथ ही असम सरकार ने मुस्लिमों के निकाह-तलाक में काजियों की भूमिका भी खत्म कर दी है।

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने इस विधेयक के पारित होने पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने गुरुवार के दिन को ऐतिहासिक बताया और कहा कि उनका अगला लक्ष्य बहुविवाह पर प्रतिबंध लगाना है।

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने एक्स पर लिखा, “आज असम की बेटियों के लिए एक ऐतिहासिक दिन है। असम विधानसभा ने मुस्लिम विवाह पंजीकरण विधेयक 2024 को पारित कर दिया है। इस नए कानून के लागू होने के बाद नाबालिका से विवाह की पंजीकरण एक कानूनी अपराध माना जाएगा। इसके अलावा, मुस्लिम विवाह की पंजीकरण अब काज़ी नही, सरकार करेगी। हमारी सरकार का एक ही उद्देश्य है: बेटी चाहे मुस्लिम हो या हिंदू, उसके साथ अन्याय नहीं होना चाहिए। मैं असम की जनता से प्रार्थना करता हूँ कि हमारा साथ दीजिए और इस प्रथा को इतिहास के पन्नों तक सीमित रखिए। एक आधुनिक असम में इस प्रथा की कोई जगह नहीं है।”

नये कानून की खास बातें

  • असम मुस्लिम विवाह और तलाक का अनिवार्य पंजीकरण विधेयक, 2024 नाम के नए अधिनियम के अस्तित्व में आने के साथ ही मुस्लिमों के निकाह-तलाक में काजियों की भूमिका खत्म हो गई है। अब यह काम उप-रजिस्ट्रार करेगा।
  • नए कानून में निकाह के लिए 7 बातें मुख्य रूप से हैं-
  • 1-निकाह के दौरान लड़की की उम्र -18 साल, और लड़के की उम्र -21 साल होनी चाहिए।
  • 2-दोनों पक्षों की सहमति से ही निकाह होना चाहिए, अगर जोर-जबरदस्ती की बात आई, तो 1 माह के अंदर इसकी शिकायत की जा सकती है।
  • 3- जिस जिले में निकाह होना है, उस जिले में लड़की या लड़के का निवास कम से कम 30 दिनों से होना चाहिए। यानी बाहरी जिले के निवासी का उस जिले में सिर्फ निकाह के लिए आने का सिस्टम अब खत्म हो गया है। लड़का और लड़की दोनों गैर-जिले में जाकर निकाह नहीं कर सकते, इसके लिए उस जिले में लड़के या लड़की का 30 दिनों तक रहना जरूरी है।
  • 4- लड़के और लड़की- दोनों ही पक्षों को निकाह के रजिस्ट्रेशन से कम से कम 30 दिन पहले पहचान, उम्र और निवास स्थान से जुड़े कागजात पेश करने होंगे। यानी निकाह की सूचना 1 माह पहले देनी होगी, ये शर्त स्पेशल मैरिज एक्ट की तरह ही है।
  • 5- जोर-जबरदस्ती, कम उम्र, या बाहर के निवास जैसी किसी भी शर्त का उल्लंघन होने पर 30 दिनों के भीतर आपत्ति दर्ज कराई जा सकती है। इसकी जाँच रजिस्ट्रार करेंगे। अगर जाँच के बाद कोई गड़बड़ी पाई जाती है, तो निकाह को रिजेक्ट भी किया जा सकता है। ऐसी स्थिति में जिला रजिस्ट्रार या विवाह महापंजीयक (रजिस्ट्रार जनरल) के सामने अपील की जा सकती है।
  • 6- लड़की या लड़के के नाबालिग होने की सूचना अगर दस्तावेजों की जाँच के दौरान सामने आती है, तो अधिकारी को तुरंत ही इसकी सूचना उच्चाधिकारी (विवाह संरक्षण अधिकारी) को देनी होगी। ये कदम बाल-विवाह निषेध अधिनियम-2006 के तहत अनिवार्य है। इस मामले में सक्षम अधिकारी कानूनी कार्रवाई करेगा।
  • 7- अगर कोई अधिकारी ‘जान बूझकर’ किसी निकाह को गलत तरीके से मंजूरी देता है और उसका रजिस्ट्रेशन करता है, तो उसे 1 साल तक की जेल और 50 हजार रुपए का अर्थदंड भुगतना पड़ सकता है। यानी निकाह को गलत तरीके से मंजूरी देने वाला अधिकारी सीधे उत्तरदायी ठहराया जाएगा।

ये कानून मुस्लिम लॉ कानून से अलग है। उनका उल्लंघन नहीं करते। खास कर नाबालिग लड़कियों के निकाह से जुड़े मामले में। दरअसल, मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के तहत यौवन प्राप्त कर लेने वाली (जिनकी माहवारी शुरू हो गई हो) लड़कियों को शादी के लायक मान लिया जाता है। अगर माहवारी न शुरू हुई हो या इसकी जानकारी न हो, तो 15 साल की उम्र की लड़कियों को निकाह योग्य माना जाता है।

हालाँकि सुप्रीम कोर्ट इस मामले में सुनवाई कर रहा है। जिसमें विवाह के लिए कम से कम कानूनी उम्र को 18 साल करने को लेकर बहस जारी है। अगर सुप्रीम कोर्ट मुस्लिम पर्सनल लॉ पर बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 को लागू (जिसमें 18 साल से कम उम्र की लड़की की शादी अवैध) का फैसला लेता है, तो कानून में बदलाव किया जाएगा और इस उम्र को कड़ाई से 18 वर्ष किया जा सकेगा। हालाँकि मुस्लिम लड़कियों की उम्र को लेकर अलग-अलग हाई कोर्ट ने अलग-अलग समय में अलग-अलग टिप्पणियाँ दी हैं।

विधानसभा में बहस

मनकाचर से एआईयूडीएफ के विधायक अमीनुल इस्लाम ने विधानसभा में कहा कि अगर इस कानून का उद्देश्य सिर्फ बाल-विवाह रोकना है, तो 1935 के अधिनियम को रद्द करने की जरूरत नहीं, बल्कि पुराने कानून में धारा 8 और 10 में संशोधन करके ही ये लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है। इस्लाम ने कहा कि 1935 के कानून में साल 2010 में बदलाव किया गया था, जिसमें निकाह का रजिस्ट्रेशन स्वैच्छिक था। इसे ही सिर्फ अनिवार्य कर देने की जरूरत थी बस।

इस मामले में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने जवाब दिया कि ये संशोधन पर्याप्त नहीं होंगे, और सरकार का इरादा काज़ियों की भूमिका को भी समाप्त करना है। उन्होंने पिछले साल बाल विवाह के खिलाफ सरकार की कार्रवाई का जिक्र किया, जिसमें 4,000 से ज़्यादा लोगों को गिरफ़्तार किया गया था – ज़्यादातर वे पुरुष थे जिन्होंने कम उम्र की लड़कियों से शादी की थी, और उनके रिश्तेदार और धार्मिक पदाधिकारियों ने इन शादियों को संपन्न कराया था।

मुख्यमंत्री ने कहा, “हमने पाया कि काजी बाल विवाह पंजीकृत करते हैं। जब मामले हाई कोर्ट में आए, तो उन्होंने कहा कि उनके पास बाल विवाह पंजीकृत करने का अधिकार है। ऐसे में हाई कोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी क्योंकि काजियों के पास मुस्लिम विवाह और तलाक पंजीकरण अधिनियम के तहत बाल विवाह पंजीकृत करने का अधिकार है। इसका मतलब है कि वे (काजी) सैद्धांतिक रूप में बाल विवाह के खिलाफ नहीं हैं।” उन्होंने कहा कि सरकारी अधिकारी द्वारा पंजीकरण से जवाबदेही बढ़ेगी।

सरमा ने सीमा बनाम अश्विनी कुमार मामले में सुप्रीम कोर्ट के 2006 के फैसले का हवाला दिया जिसमें कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों को विवाहों का अनिवार्य पंजीकरण सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था। “इसका मतलब है कि विवाहों का पंजीकरण करवाने की जिम्मेदारी राज्य को दी गई है। राज्य इसके लिए काजी व्यवस्था पर निर्भर नहीं रह सकता।” उन्होंने काजियों को “निजी संस्था” करार दिया।

इस मामले में इस्लाम ने कहा कि सरकार मुस्लिमों के निकाह को सरल बनाने की जगह कठिन बना रही है। इससे मुस्लिमों को समस्याओं का सामना करना पड़ेगा। इस्लाम ने 30 दिन पहले निकाह के रजिस्ट्रेशन की सूचना देने के अनिवार्य शर्त को लेकर कहा। उन्होंने कहा कि ये मुद्दा स्पेशल मैरिज एक्ट का है, इसे मुस्लिमों के निकाह से जोड़ना सही नहीं होगा।

दिल्ली में चल रहा था किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट, चलाने वाले बांग्लादेशी थे: पुलिस ने 7000+ पन्नों की चार्जशीट की दायर, जाली फाइल, आधार कार्ड मिले

दिल्ली पुलिस ने बांग्लादेशी नागरिकों से जुड़े किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट के मामले में 7,000 पन्नों से ज्यादा की चार्जशीट दायर की है। इस रैकेट का भंडाफोड़ दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने इसी साल जुलाई में किया था। उस समय तीन बांग्लादेशी नागरिकों सहित 50 वर्षीय दिल्ली की महिला डॉक्टर सहित 7 लोगों की गिरफ्तार हुए थे।

मीडिया में सूत्रों के हवाले से दी जा रही खबर के अनुसार, 7,112 पन्नों की चार्जशीट में कुल दस लोगों को आरोपित बनाया गया है। इस आरोप-पत्र को पिछले हफ्ते शहर की एक अदालत में दायर किया गया था।

इसमें पुलिस ने बताया कि महिला डॉक्टर, डी विजय राजकुमारी, जो दक्षिण-पूर्व दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल में फीस-फॉर-सर्विस के आधार पर किडनी ट्रांसप्लांट सर्जन के रूप में काम कर रही थी, वह कथित तौर पर 2021 और 2023 के बीच बांग्लादेश के लगभग 15 लोगों के किडनी ट्रांसप्लांट में शामिल थीं।

चार्जशीट के अनुसार, डॉ राजकुमारी ने ये सारी सर्जरियाँ नोएडा के यथार्थ अस्पताल में की थी, जहाँ वह एक विजिटर्स सलाहकार थीं। गिरफ्तार किए गए अन्य लोगों में डॉक्टर की एक सहायक, विक्रम सिंह और तीन बांग्लादेशी नागरिक – रासेल, मोहम्मद सुमन मियाँ और मोहम्मद रोकोन उर्फ ​​रहुल सरकार उर्फ ​​बिजय मंडल शामिल हैं।

अपनी जाँच के दौरान पुलिस ने आरोपितों के कब्जे से कई चीजें बरामबद कीं। जैसे 23 स्टैंप, मरीजों और किडनी दाताओं की जाली फाइलें, जाली आधार कार्ड आदि। पुलिस अधिकारी ने इस पूरे रैकेट का सरगना रासेल को बताया।

छानबीन में पता चला कि रासेल 2019 में भारत आया था और उसने एक बांग्लादेशी मरीज को अपनी किडनी दे दी थी। अपनी सर्जरी के बाद, रासेल ने अपना इसे अपना धंधा बना लिया। अधिकारी ने कहा कि वह विभिन्न हितधारकों के बीच संवाद स्थापित करता था। बांग्लादेश के संभावित किडनी दाताओं और यहाँ के मरीजों से संपर्क स्थापित करता था। उसका एक सहयोगी, इफ्ती, बांग्लादेश से दाताओं को लेकर आता था।

जल्दी आइए, आपकी बेटी की तबीयत बहुत खराब है: RG कर अस्पताल में ट्रेनी डॉक्टर की रेप-हत्या के बाद परिजनों को किया गया कॉल, सामने आए रिकॉर्डिंग में खुली झूठ की परतें

कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में 8-9 अगस्त 2024 की रात डॉक्टर के रेप-मर्डर केस में अहम मोड़ आ गया है। अब तक दावा किया जाता रहा है कि डॉक्टर के पिता को बेटी के सुसाइड की जानकारी फोन पर दी गई थी, जबकि उसका रेप और मर्डर हुआ था, लेकिन अब वो फोन रिकॉर्डिंग भी सामने आ गई है, जिसमें डॉक्टर के पिता को आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के असिस्टेंट सुप्रिटेंडेंट ने फोन कॉल करके बेटे के सुसाइड की बात कही थी।

आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में डॉक्टर की मौत सुबह 3 से 4 बजे के बीच हुई जबकि माता-पिता को पहली कॉल 10 बजकर 53 मिनट पर की गई। पहली कॉल में बताया गया कि आपकी बेटी की तबियत खराब है। पहली कॉल में लड़की के मम्मी-पापा से झूठ बोला गया। थोड़ी देर बाद दूसरी कॉल की गई, जिसमें बताया गया कि बेटी की हालत बहुत खराब है। तीसरी कॉल सबके सामने की गई थी, जिसमें बताया गया कि बेटी ने सुसाइड कर लिया है। इस मामले में मृतक डॉक्टर के परिवार से लगातार झूठ बोला जा रहा था।

पहली कॉल में आरजी कर अस्पताल के असिस्टेंट सुप्रिटेंडेंट को माता-पिता से अस्पताल आने का आग्रह करते हुए सुना जा सकता है। वे कहते हैं, “आपकी बेटी की तबीयत ठीक नहीं है। क्या आप तुरंत अस्पताल आ सकते हैं?” पिता को लगा कि कुछ गड़बड़ है, इसलिए उन्होंने और जानकारी माँगी, जिस पर स्टाफ सदस्य ने केवल इतना कहा, “वह ठीक नहीं है। हम उसे भर्ती कर रहे हैं। क्या आप जल्दी आ सकते हैं?” जब इस पर और अधिक जोर दिया गया तो स्टाफ सदस्य ने झिझकते हुए कहा, “जब आप यहाँ आएँगे तो डॉक्टर आपको बताएँगे कि क्या हुआ था। हमें आपका नंबर मिला और हमने आपको फोन किया क्योंकि आप परिवार के सदस्य हैं।”

दूसरा कॉल कुछ ही देर बाद आया, जिसमें अस्पताल का वही कर्मचारी और भी परेशान लग रहा था। “उसकी हालत बहुत गंभीर है। कृपया जल्द से जल्द आएँ,” उसने आग्रह किया। पिता, जो अब और भी अधिक चिंतित हो गया था, ने जानना चाहा कि आखिर हुआ क्या था, लेकिन जवाब अस्पष्ट रहा, “डॉक्टर समझाएँगे। कृपया जल्दी से जल्दी आएँ”। जब पिता ने पूछा कि उनसे कौन बात कर रहा है, तो भ्रम और बढ़ गया। स्टाफ़ सदस्य ने स्पष्ट किया, “मैं सहायक अधीक्षक हूँ,” और आगे कहा, “मैं डॉक्टर नहीं हूँ।” जवाब पाने के लिए बेताब पिता ने पूछा कि क्या कोई डॉक्टर मौजूद है, लेकिन बिना किसी स्पष्टीकरण के अचानक कॉल कट गई।

तीसरी और अंतिम कॉल ने स्थिति की भयावह वास्तविकता को उजागर किया। स्टाफ़ सदस्य, जो बहुत चिंतित लग रहा था, ने कहा, “उसने आत्महत्या कर ली होगी या मर गई होगी। पुलिस यहाँ है। हम अस्पताल में हैं, सबके सामने, यह कॉल कर रहे हैं”। इन कॉलों से प्रशिक्षु डॉक्टर की मौत की परिस्थितियों और अस्पताल द्वारा स्थिति से निपटने के तरीके पर गंभीर सवाल उठे हैं।

कोलकाता रेप मर्डर केस की सीबीआई जाँच चल रही है। देशभर में इस हत्याकांड को लेकर डॉक्टर्स और अन्य संगठन प्रदर्शन कर रहे हैं।

पूर्व इंस्पेक्टर ने उठाए गंभीर सवाल

इस बीच, कोलकाता के आरजी कर अस्पताल में महिला ट्रेन डॉक्टर के साथ रेप और हत्या मामले में एक और बड़ा दावा सामने आया है। ममता सरकार में काम करने वाले पूर्व इंस्पेक्टर अरिंदम आचार्या ने पुलिस पर बड़ा सवाल उठा दिया है। अरिंदम आचार्य ने बताया कि पुलिस ने सबसे पहले तो केस में जाँच करने में देरी की। उन्होंने शाम को पोस्टमार्टम कराए जाने पर भी सवाल उठाए। अरिंदम के मुताबिक, पोस्टमार्टम रिपोर्ट गलत है। अरिंदम ने कहा जिस डॉक्टर को पोस्टमार्टम करना था उससे केवल जबरन साइन कराए गए, ये बात उनको डॉक्टर ने बताया है।

अरिंदम ने कहा मैं खुद पुलिस ऑफिसर रहा हूँ। इस तरह की घटना में पुलिस क्वेस्ट रिपोर्ट तैयार करती है। विसरा भी सुरक्षित करती है, लेकिन कहाँ है ये सब? क्वेस्ट रिपोर्ट में स्कफल के निशान को समझा जाता है। अरिंदम ने बताया कि इस तरह की घटना में लड़की छटपटाई होगी और जो रेप या मर्डर किया होगा, उससे बचने के लिए उसके नाखूनों या मुट्ठी में निशान होंगे। वो मुट्ठी बंद अगर होती है, तो पोस्टमार्टम से ही खुलती है, इसकी रिपोर्ट कहां है?

बता दें कि आरजी कर अस्पताल के सेमीनार हॉल में 9 अगस्त की सुबह एक ट्रेनी महिला डॉक्टर का शव अर्धनग्न अवस्था में मिला था। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में यह बात सामने आई थी कि हत्या से पहले ट्रेनी डॉक्टर के साथ रेप किया गया था। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में डॉक्टर की मौत सुबह तीन से चार बजे के बीच होने की पुष्टि हुई। इस मामले में मुख्य आरोपित संजय रॉय का पॉलीग्राफ टेस्ट भी कराया जा चुका है।

अमरोहा में आदिल ने अमन बनकर हिंदू लड़की को फाँसकर किया रेप, फिर कराया धर्म-परिवर्तन: असम में अलोम अहमद ने कॉलेज छात्रा को बनाया हवस का शिकार

उत्तर प्रदेश से लेकर असम तक लव जिहाद के मामले सामने आए हैं। उत्तर प्रदेश के अमरोहा में आदिल ने इंस्टाग्राम पर अपनी पहचान छिपाकर अमन नाम से आईडी बनाई, फिर एक हिंदू लड़की को अपने जाल में फंसा लिया। उसने हिंदू लड़की के साथ रेप किया। वहीं, असम में अलोम अहमद नाम के मुस्लिम युवक ने एक हिंदू छात्रा को अपने प्रेम जाल में फंसाया और शारीरिक संबंध बनाए। बाद में वो लड़की से पीछा छुड़ाने लगा, तो उसकी सच्चाई पता चली।

अमरोहा में आदिल बना अमन, हिंदू लड़की का रेप के बाद कराया धर्मांतरण

अमरोहा में आदिल नाम के लव जिहादी ने इंस्टाग्राम पर अमन बनकर युवती को प्रेमजाल में फंसाया फिर शादी का झांसा देकर उसके साथ कई बार रेप किया। यही नहीं, उसने लड़की को तमंचा दिखाकर जान से मारने की धमकी भी दी। लड़की ने बताया कि वो बड़ी मुश्किल से एसपी ऑफिस पहुँची और आरोपित के खिलाफ केस दर्ज कराया।

पीड़िता ने अपनी शिकायत में पुलिस को बताया कि एक साल पहले अमन नाम के युवक से उसकी इंस्टाग्राम पर दोस्ती हुई थी। गरीब परिवार से होने के चलते उसने शादी के हामी भर दी। आरोपित आदिल उसे अपने घर अमरोहा ले गया। जहाँ उसे पता चला कि अमन असल में आदिल है। इसके बाद आदिल ने युवती का धर्म परिवर्तन कराया और उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। 20 दिन बाद वो किसी तरह आदिल के चंगुल से निकली और एसपी दफ्तर में शिकायत दर्ज कराई।

मामले में अपर पुलिस अधीक्षक राजीव कुमार सिंह ने बताया कि एक तहरीर प्राप्त हुई है। लड़की को धोखा देकर शारीरिक संबंध बनाए गए हैं। लड़की को उसकी सच्चाई पता चली, तो उसे तमंचा दिखाकर धमकाया गया। उन्होंने कहा कि हमने केस दर्ज कर लिया है और कार्रवाई की जा रही है।

असम में अलोम अहमद ने झांसा देकर हिंदू छात्रा की लूटी अस्मत

दूसरा मामला असम के गुवाहाटी का है। यहाँ चाँदमारी इलाके में मुस्लिम आरोपित अलोम अहमद ने हिंदू छात्रा को अपने जाल में फंसाया। मामले की शुरुआत गुवाहाटी के जेबी लॉ कॉलेज से हुई। जहाँ पर पढ़ रही हिन्दू लड़की की दोस्ती एक मुस्लिम लड़के से हुई। कुछ दिनों बाद दोस्ती प्यार में बदल गई और उन दोनों के बीच शारीरिक संबंध बन गए। शारीरिक संबंध बनाने के बाद अहमद ने पीड़ित लड़की से वादा किया कि वह उससे शादी कर लेगा। लेकिन कुछ समय बाद उसने हिन्दु लड़की से शादी करने से मना कर दिया। जिसको लेकर दोनों के बीच इस बात को लेकर काफी विवाद हुआ।

अहमद के मना करने पर लड़की ने पुलिस में उसकी शिकायत कर दी। जिसके बाद मंगलवार (27 अगस्त 2024) को आरोपित अलोम अहमद को धुबरी स्थित उसके घर से गिरफ्तार कर लिया। आरोपित के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 69 (विवाह, नौकरी या पदोन्नति का झूठा वादा करने और अपनी असली पहचान छिपाने जैसे धोखे से हासिल किए गए यौन संबंधों को अपराध मानती है।) के तहत केस दर्ज किया गया है।

दूसरे समुदाय के ‘कबाड़ी’ जबरन घर में घुसे, मारपीट कर 13 साल की लड़की से किया गैंगरेप: पीड़िता के परिजनों का आरोप, पुलिस ने मुख्य आरोपित फैजान को दबोचा

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में कबाड़ियों द्वारा घर में घुसकर 13 साल की एक नाबालिग लड़की से रेप को अंजाम दिया है। घटना को अंजाम देकर आरोपित मौके से फरार हो गए हैं, जिनमें से मुख्य आरोपित फैजान को गिरफ्तार कर लिया गया है। परिवार का दावा है कि बच्ची के साथ गैंगरेप हुआ है। सभी आरोपितों की गिरफ्तारी की माँग को लेकर लोगों ने प्रदर्शन भी किया।

बृजविहार इलाके में थाने के सामने लोगों ने गुरुवार (29 अगस्त) की शाम को प्रदर्शन किया। लोगों ने बलात्कारियों को अविलंब फाँसी देने की माँग की है। प्रदर्शन के दौरान भड़के लोगों ने आरोपित की कबाड़ी की दुकान के बाहर रखे सामान और वाहनों में तोड़फोड़ कर दी। एक ई-रिक्शे को फूंक दिया। मामला दो समुदायों से जुड़ा है। तनाव को देखते हुए पुलिस अधिकारी घटनास्थल पर मौजूद हैं।

पीड़िता बच्ची की चाची का कहना है कि बुधवार (28 अगस्त 2024) की शाम को घर के सभी बड़े महिला-पुरुष सदस्य काम पर गए हुए थे। इसी दौरान कबाड़ खरीदने और बेचने का काम करने वाले तीन-चार लड़के पीछे का गेट फाँदकर घर के अंदर घुस आए। घर में उनकी लड़की अकेली थी। इस दौरान लड़की के साथ मारपीट की गई। जब वह अचेत हो गई तो उसके साथ गैंगरेप किया गया।

हालाँकि, पुलिस का कहना है कि 29 अगस्त की सुबह जब पीड़िता की माँ एवं उसके परिवार के लोग थाने आए तो उन्होंने सिर्फ एक व्यक्ति पर रेप करने का आरोप लगाया था। इस मामले में तत्काल मुकदमा दर्ज करते हुए आरोपित को गिरफ्तार कर लिया गया था। बकौल पुलिस, अब पीड़ित परिवार तीन-चार युवकों पर गैंगरेप का आरोप लगा रहा है। मामले की जाँच गहनता से की जाएगी।

सहायक पुलिस आयुक्त रजनीश उपाध्याय ने बताया कि पीड़िता की माँ ने गुरुवार की सुबह थाना लिंक रोड पर शिकायत दर्ज कराई। उपाध्याय ने आगे बताया कि पीड़िता की माँ ने तहरीर में लिखा कि उसकी नाबालिग बेटी के साथ दूसरे समुदाय के कबाड़ का काम करने वाले व्यक्ति ने मारपीट और रेप की। शिकायत पर मुकदमा दर्ज करके एक आरोपित को गिरफ्तार कर लिया गया है।

इस मामले में हिंदू संगठन भी आगे आ गए हैं। हिंदू नेता आशीष पाल ने कहा कि आरोपित की कबाड़ी की दुकान के पास असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगा रहता है। उन्होंने कहा कि इसी यहाँ अपराधियों के मन में पुलिस का खौफ नहीं रह गया है। इस घटना में शामिल आरोपितों के नाम फैजान, रेहान, राशिद, वसीम बताए जा रहे हैं। हालाँकि, पुलिस का कहना है कि वह गैंगरेप की जाँच कर रही है।

कॉन्ग्रेस नेता शशि थरूर के खिलाफ दर्ज मानहानि के मामले को रद्द करने से कोर्ट का इनकार, पीएम मोदी को बताया था ‘शिवलिंग पर बैठा बिच्छू’

दिल्ली हाई कोर्ट ने गुरुवार (29 अगस्त 2024) को कॉन्ग्रेस नेता शशि थरूर के खिलाफ मानहानि के मामले को खारिज करने से इनकार कर दिया। इसके अलावा, अदालत ने मामले में ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर पिछली रोक भी हटा दी है। कॉन्ग्रेस नेता शशि थरूर ने साल 2018 के बैंगलोर साहित्य महोत्सव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तुलना ‘शिवलिंग पर बैठे बिच्छू’ से की थी।

न्यायमूर्ति अनूप कुमार मेंदीरत्ता की पीठ ने कहा कि दिल्ली उच्च न्यायालय को ‘इस स्तर पर कार्यवाही रद्द करने का कोई आधार नहीं मिला है’। उन्होंने दोनों पक्षों को 10 सितंबर 2024 को निचली अदालत में पेश होने का भी निर्देश दिया। साल 2020 में दिल्ली उच्च न्यायालय ने थरूर के खिलाफ कार्यवाही पर रोक लगा दी थी।

मानहानि का यह मुकदमा दिल्ली भाजपा के नेता राजीव बब्बर द्वारा दायर की गई है। इस मामले में शशि थरूर को तलब करने के निचली अदालत के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने यह रोक जारी की है। अप्रैल 2019 में ट्रायल कोर्ट ने बब्बर द्वारा साल 2018 में दायर आपराधिक मानहानि शिकायत के जवाब में थरूर को तलब किया था।

दिल्ली की एक अदालत ने जून 2019 में शशि थरूर को जमानत दे दी थी। बब्बर ने दावा किया कि अक्टूबर 2018 में बैंगलोर लिटरेचर फेस्टिवल के दौरान शशि थरूर द्वारा की गई टिप्पणी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तुलना ‘शिवलिंग पर बैठे बिच्छू’ से की गई थी।

बब्बर ने तर्क दिया कि यह बयान उनकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाला और भाजपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों के लिए अपमानजनक है। वहीं, थरूर ने मानहानि से संबंधित भारतीय दंड संहिता की धारा 499 और 500 के तहत दायर की गई शिकायत को रद्द करने की माँग की थी।

‘रेप की तुलना साइकिल चलाने से करना महिलाओं का मजाक’: जिस अकाली नेता ने कहा कि ‘कंगना से पूछो रेप कैसे होता है’ उसे BJP सांसद ने लताड़ा

हिमाचल प्रदेश के मंडी लोकसभा सीट से बीजेपी सांसद कंगना रनौत ने पूर्व अकाली सांसद सिमरनजीत सिंह मान के उस विवादित बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है जिसमें उन्होंने कहा था कि कंगना को ‘रेप का तजुर्बा’ है। कंगना ने इस बयान की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि यह टिप्पणी न केवल अपमानजनक है बल्कि महिलाओं के दर्द और पीड़ा को छोटा करने का प्रयास भी है।

कंगना ने सिमरनजीत के बयान पर तीखा जवाब दिया। कंगना ने मान के बयान को महिलाओं के सम्मान और उनके खिलाफ होने वाले अत्याचार जैसे गंभीर मुद्दे को संवेदनशील और महिलाओं का मजाक उड़ाने सरीखा बताया।

कंगना रनौत ने एक्स पर लिखा, “ऐसा लगता है कि यह देश रेप को महत्वहीन बनाना कभी बंद नहीं करेगा। आज इस वरिष्ठ नेता ने रेप की तुलना साइकिल चलाने से कर दी। इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि मजे के लिए महिलाओं के खिलाफ रेप और हिंसा इस पितृसत्तात्मक राष्ट्र की मानसिकता में इतनी गहरी जड़ें जमा चुकी है कि इसका इस्तेमाल महिलाओं को चिढ़ाने या उनका मजाक उड़ाने के लिए किया जाता है। भले ही वह एक हाई प्रोफाइल फिल्म निर्माता या राजनेता ही क्यों न हो।”

बता दें कि पूर्व सांसद सिमरनजीत सिंह मान ने कहा, “आप कंगना से पूछ सकते हैं कि रेप कैसे होता है ताकि लोगों को उसके बारे में बताया जा सके। उन्हें बड़ा अनुभव है।” जब मान से पूछा गया कि कंगना रनौत को रेप का तजुर्बा कैसे है? इसके जवाब में मान ने कहा- “जैसे आप साइकिल चलाते हैं तो आपको साइकिल चलाने का तजुर्बा हो जाता है। उनको रेप का तजुर्बा है।”

मान से फिर पूछा गया कि क्या वे कंगना रनौत की बात कर रहे हैं। इस पर मान ने कहा कि बिल्कुल, वह कंगना रनौत की बात कर रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि सिमरनजीत सिंह मान खालिस्तान के भी समर्थक होने के नाते जाने जाते हैं। ऑपरेशन ब्लू स्टार-सिख विरोधी दंगों के विरोध में उन्होंने सरकारी नौकरी छोड़ी थी। बाद में उनपर हत्या की साजिश से लेकर देशद्रोह तक के केस दर्ज हुए थे। 5 साल भागलपुर जेल में बंद रहने के बाद में उन्होंने 1989 में चुनाव लड़ा और 93.92 फीसद वोट पाकर सांसद बने। फिर 1999 में भी तरनतारन सीट को जीता।

इसके बाद वो अपने विवादित बयान के कारण 2 साल पहले चर्चा में आए थे उन्होंने सरदार भगत सिंह को आतंकवादी कहा था। इस बार उन्होंने ये प्रतिक्रिया उस समय दी है जब किसान प्रदर्शन को लेकर कंगना का दिया बयान काफी सुर्खियों में रहा। अभिनेत्री ने अपने बयान में कहा था कि अगर भारतीय नेतृत्व मजबूत नहीं होता तो प्रदर्शन से बांग्लादेश जैसे हालात हो सकते थे।

उन्होंने कहा था कि किसान आंदोलन में शवों को लटका पाया गया था, उस दौरान रेप हुआ था। उन्होंने इन सबके पीछे चीन और यूएस तक कहा हाथ कहा था। हालाँकि बाद में पार्टी नेतृत्व ने जब उन्हें इस बयान के लिए फटकार लगाई उसके बाद उन्होंने कहा था कि वो आगे से शब्दों का चयन करते समय सवाधानी बरतेंगी।

CM सिद्धारमैया को सत्ता से बेदखल करने की कोशिश हुई तो बांग्लादेश का हाल होगा: कर्नाटक के कॉन्ग्रेसी विधायक ने दी गीदड़भभकी, कहा- PM मोदी के घर धावा बोलेंगे

बांग्लादेश में शेख हसीना सरकार के पतन के बाद से कॉन्ग्रेस और उसके सहयोगी पार्टियाँ ठीक वही सपना देख रही हैं, जिसमें बांग्लादेश में हिंसा के दम पर शेख हसीना को अलोकतांत्रित तरीके से अपना देश छोड़कर भागना पड़ा। कर्नाटक में कॉन्ग्रेस नेता और विधायद जीएस पाटिल भी ऐसा ही सपना देख रहे हैं। दरअसल, कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया पर जाँच की तलवार लटकी है, ऐसे में जीएस पाटिल ने कहा कि अगर सिद्धारमैया की ताकत को कम करने की कोशिश हुई, या वो सत्ता से बेदखल हुए, तो भारत में भी बांग्लादेश जैसा हाल हो जाएगा।

गजेंद्रगढ़ में तालुक अहिंदा यूनियन द्वारा आयोजित विरोध प्रदर्शन के दौरान जीएस पाटिल ने ये विवादित बयान दिया। पाटिल ने धमकी देते हुए कहा, “वह दिन दूर नहीं जब लोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास पर धावा बोलेंगे, ठीक वैसे ही जैसे बांग्लादेश में हुआ था।”

विधायक ने दावा किया कि मोदी सरकार राज्यपाल के माध्यम से कॉन्ग्रेस पार्टी के नेतृत्व वाली कर्नाटक सरकार को कमजोर करने का प्रयास कर रही है। पाटिल ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार द्वारा पूँजीपतियों के हितों को आम जनता के हितों से अधिक प्राथमिकता दे रही है, जबकि सिद्धारमैया का प्रशासन जनता के हित में है। पाटिल ने कहा, “सिद्धारमैया ऐसी योजनाएँ लागू कर रहे हैं जो राज्य में सभी समुदायों के विकास का समर्थन करती हैं।”

जीएस पाटिल ने आरोप लगाया कि राज्यपाल ने पहले बीजेपी और जेडीएस नेताओं के खिलाफ चार्जशीट दाखिल होने के बावजूद मुकदमा चलाने की अनुमति नहीं दी थी, लेकिन महज एक कार्यकर्ता की शिकायत के आधार पर सिद्धारमैया के खिलाफ़ मुकदमा चलाने की अनुमति दे दी है। पाटिल ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर देश को ख़तरनाक रास्ते पर ले जाने और देश में राजनीतिक अशांति पैदा करने का आरोप लगाया।

इस बीच, बीजेपी नेताओं ने उनके बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। विजयपुरा लोकसभा सीट से बीजेपी सांसद रमेश जिगाजिनागी ने उनके बयान की निंदा की और कहा कि कॉन्ग्रेस नेताओं में बुद्धि और समझ की कमी है। वो जनता को धोखा दे रहे हैं। सांसद ने कहा कि कॉन्ग्रेस प्रशासन राज्य के विकास में योगदान देने में विफल रहा है।

गौरतलब है कि कुछ दिन पहले ही कॉन्ग्रेस के एमएलसी इवान डिसूजा ने राज्यपाल थावर चंद गहलोत को धमकी दी थी कि अगर उन्होंने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की जाँच के लिए दिए गए अपने निर्देश को वापस लेने से इनकार कर दिया तो उनका “बांग्लादेश जैसा हश्र” होगा। उन्होंने घोषणा की, “अगर राष्ट्रपति राज्यपाल को वापस भेजने में विफल रहते हैं, तो राज्यपाल के कार्यालय को बांग्लादेश की प्रधानमंत्री जैसी ही स्थिति का सामना करना पड़ेगा, जिन्हें रात के दौरान अचानक अपना पद छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा था। हमारी अगली लड़ाई ‘चलो राज्यपाल कार्यालय’ के नारे के साथ होगी।”

बता दें कि 17 अगस्त को राज्यपाल थावर चंद गहलोत ने मैसूर शहरी विकास प्राधिकरण (MUDA) जमीन के आवंटन में अनियमितताओं के बारे में सिद्धारमैया के खिलाफ जाँच को अधिकृत मंजूरी दी। सिद्धारमैया ने राज्यपाल के आदेश को कर्नाटक उच्च न्यायालय में चुनौती देकर जवाब दिया। उच्च न्यायालय ने ट्रायल कोर्ट को 29 अगस्त की सुनवाई तक मुख्यमंत्री के खिलाफ कोई भी आगे की कार्रवाई करने से रोकने का आदेश दिया है।