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जिस मुस्तफा को दोस्त समझ कर घर बुलाता था, उसी ने किया 3 साल की बच्ची का बलात्कार: अस्पताल में जूझ रही नाबालिग, मजदूरी करता है परिवार

गुजरात के वलसाड जिले में एक नाबालिग हिन्दू बच्ची से रेप का मामला सामने आया है। पीड़िता की उम्र 3 साल है। आरोपित का नाम गुलाम मुस्तफा है जो पीड़िता के पापा का दोस्त है। रेप के बाद बच्ची की हालत बिगड़ गई है जिसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। पुलिस ने गुलाम मुस्तफा को गिरफ्तार कर लिया है। स्थानीय लोगों ने प्रदर्शन कर के आरोपित को फाँसी देने की माँग की है। घटना मंगलवार (27 अगस्त, 2024) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह घटना वलसाड जिले के उमरगाम तालुका में आने वाले देवधर इलाके की है। यहाँ एक हिन्दू परिवार मेहनत मजदूरी कर के जीवन यापन करता था। इस परिवार में पति-पत्नी और 3 साल की एक बच्ची है। बच्ची के पिता की दोस्ती गुलाम मुस्तफा नाम के युवक से थी। गुलाम मुस्तफा का आना-जाना अक्सर पीड़िता के घर लगा रहता था। 27 अगस्त (मंगलवार) को आरोपित एक बार फिर से पीड़िता के घर उसके पापा से मिलने के बहाने आया था।

गुलाम मुस्तफा ने बच्ची को अकेला देखा और उसे उठा कर बाथरूम में ले गया। यहाँ वो पीड़िता से रेप करने लगा। इधर जब बच्ची घर पर नहीं दिखी तो उसके परिजनों ने खोजबीन शुरू कर दी। कुछ ही देर में पीड़िता की चीखें सुनाई देने पर उसकी माँ उधर गई। यहाँ बच्ची के साथ रेप की कोशिश करते गुलाम मुस्तफा को देखा गया। पीड़िता की माँ को आता देख कर गुलाम मुस्तफा मौके से भाग निकला। गुलाम मुस्तफा की करतूत से पीड़िता की तबियत काफी खराब हो गई। इलाज के लिए उसे अस्पताल में भर्ती करवाया गया है।

इधर बच्ची के परिजनों ने गुलाम मुस्तफा के खिलाफ पुलिस में तहरीर दी। उमरगाम पुलिस ने आरोपित के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं सहित पॉक्सो एक्ट में केस दर्ज कर लिया। पुलिस ने आरोपित की तलाश में ताबड़तोड़ दबिश डालनी शुरू की। आखिरकार पुलिस को मुखबिरों से पता चला कि गुलाम मुस्तफा ने फरार होने के लिए ट्रेन पकड़ ली है। पुलिस ने इस सूचना पर आरोपित को मुंबई जाने वाली ट्रेन से गिरफ्तार कर लिया। पीड़िता का मेडिकल परीक्षण करवाया जा रहा है।

इस बीच गुलाम मुस्तफा की करतूत उजागर होते ही स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। हिन्दू संगठन के सदस्यों सहित तमाम अन्य लोगों का थाने के बाहर जमावड़ा शुरू हो गया। सभी एक स्वर में गुलाम मुस्तफा को फाँसी देने की माँग कर रहे थे। पुलिस ने कड़ी कार्रवाई का भरोसा दे कर लोगों का गुस्सा शाँत करवाया। पीड़िता की माँ से भी बयान लिए गए हैं। पुलिस इसी आधार पर आगे की जाँच व जरूरी कानूनी कार्रवाई अमल में ला रही है।

अमेरिकी महाद्वीप की तीसरी सबसे ऊँची प्रतिमा हनुमान जी की: ‘Statue Of Union’ को ‘आधा मानव, आधा बंदर’ बता रहा Newsweek, कट्टर ईसाई कह रहे ‘शैतान’

टेक्सास में हनुमान जी की 90 फुट ऊँची प्रतिमा का निर्माण हुआ है। वहाँ के ईसाई रूढ़िवादियों ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया है। उधर Newsweek नामक अमेरिकी पत्रिका ने इसकी खबर प्रकाशित करते हुए अपने शीर्षक में हनुमान जी को ‘आधा बंदर, आधा मानव’ लिखा। बता दें कि गुरुवार (15 अगस्त, 2024) को इस प्रतिमा का अनावरण किया गया था। शुगर लैंड के श्री अष्टलक्ष्मी आश्रम में ये कार्य चल रहा था। इसे ‘Statue Of Union’ नाम दिया गया है।

पूरे अमेरिकी महाद्वीप की ये सबसे लंबी मूर्ति है। 151 फुट ऊँची ‘स्टेचू ऑफ लिबर्टी’ इससे ऊँची है। वहीं फ्लोरिडा स्थित हॉलैंडेल बीच पर जो पेगासस एन्ड ड्रैगन स्टेचू है वो 110 फुट की है। Newsweek का दावा है कि कुछ ईसाईयों ने इस प्रतिमा पर आपत्ति जताते हुए इसे ‘शैतानी’ बताया है। ‘वन गॉड’ नाम से कपड़ों की ब्रांड चलाने वाली मॉर्गन एरियल ने इस मूर्ति का वीडियो शेयर करते हुए इसे ‘गंदगी’ बता दिया। ‘एन्ड टाइम हेडलाइंस’ नामक मीडिया संस्थान ने भी इसे ‘शैतानी’ लिखा।

साथ ही उसने हनुमान जी को ‘मंकी गॉड’ भी बताया। ‘AF पोस्ट’ ने भी इसी तरह हनुमान जी को ‘हिन्दू शैतान’ बता दिया। हालाँकि, ‘X’ पर कम्युनिटी नोट्स में लोगों ने स्पष्ट लिख दिया कि हनुमान जी हिन्दू धर्म में एक देवता हैं, जो बुद्धिमत्ता, शक्ति और साहस के प्रतीक हैं। लोगों ने लिखा कि वो अमर हैं, श्रीराम के अनन्य भक्त हैं और ईसाई एंजेल्स से इनकी तुलना करना ठीक नहीं होगा लेकिन वो कुछ इसी तरह हैं, ईश्वर के दूत का भी यहाँ सम्मान किया जाता है।

कुछ कट्टर ईसाई मीडिया संस्थान इतने पगला गए कि वो लिखने लगे कि जहाँ-तहाँ ‘शैतानों’ की मूर्तियाँ लगाए जाने से क्षेत्र को ‘असली गॉड’ के गुस्से का सामना करना पड़ेगा। बता दें कि ये मूर्ति आश्रम की निजी जमीन पर बनी है। दक्षिणी-पश्चिमी हॉस्टन में ये मूर्ति कांस्य से बनी हुई है। कई लोगों ने इसकी आलोचना करने वालों को जवाब दिया है कि हनुमान जी 120 करोड़ हिन्दुओं की श्रद्धा के प्रतीक हैं, जगह-जगह उनके मंदिर हैं। भक्ति भाव और बुद्धिमत्ता के लिए उनका उदाहरण दिया जाता है।

दिल्ली में 9 साल की बच्ची से कब्रिस्तान में काम करने वाले मोहम्मद शरीफ ने किया रेप, ‘तांत्रिक-बाबा’ बता मीडिया ने किया गुमराह: पत्रकारिता का यह कैसा मजहब?

दिल्ली के कंझावला इलाके में एक 9 साल की बच्ची से रेप का मामला सामने आया है। रेप का आरोप कब्रिस्तान में काम करने वाले एक पीर पर लगा है जिसका नाम मोहम्मद शरीफ है। पीड़िता को झाड़-फूँक के बहाने आरोपित कब्रिस्तान में ले गया था। यहीं पर उसने पीड़िता को हवस का शिकार बनाया। पीड़िता को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है। घटना सोमवार (26 अगस्त 2024) की है। टाइम्स नाउ ने आरोपित मोहम्मद शरीफ को अपनी रिपोर्ट में ‘तांत्रिक’ लिखा है।

चित्र- टाइम्स नाउ

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह मामला दिल्ली के कंझावला थानाक्षेत्र का है। यहाँ मंगलवार (27 अगस्त) को पीड़िता के पिता ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत में उन्होंने बताया कि वो फलों का ठेला लगाते हैं। उनकी 2 बेटियाँ और 1 बेटा है। कुछ दिनों से पीड़िता के पिता किसी बीमारी से परेशान थे। इसी बीमारी को झाड़-फूँक से ठीक करने के बहाने 52 वर्षीय मोहम्मद शरीफ पीड़िता के घर अक्सर आता-जाता था। बताया जा रहा है कि आरोपित की नीयत बच्चियों पर खराब हो चुकी थी।

सोमवार (26 अगस्त 2024) को एक बार फिर से मोहम्मद शरीफ पीड़िता के घर आया। उसने राशन देने का बहाना करके पीड़िता को अपने घर बुलाया। हालाँकि राशन लेने पीड़िता का भाई गया। पहला प्लान फेल होने के बाद आरोपित ने पीड़िता को झाड़-फूँक के बहाने अपने पास बुलाया। यहाँ से वो बच्ची को कब्रिस्तान के पास बनी झाड़ियों में ले गया। झाड़ियों में मोहम्मद शरीफ ने पीड़िता से बलात्कार किया। जब पीड़िता रोने लगी तो उसे मुँह बंद रखने के लिए रुपयों का लालच दिया गया।

आरोप है कि मोहम्मद शरीफ ने पीड़िता को धमकाते हुए यह भी कहा कि अगर उसने कहीं बताया तो उसके अब्बा का कत्ल कर दिया जाएगा। पीड़िता घर आई और डर से चुप रही। मंगलवार (27 अगस्त) को अचानक पीड़िता की तबियत खराब हो गई। उसकी बड़ी बहन को शक हुआ तो उसने पूछताछ की। आखिरकार पीड़िता ने सारी बात बता दी। लड़की के पिता ने थाने में तहरीर दी जिसके आधार पर मोहम्मद शरीफ पर FIR दर्ज हो गई। यह केस भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं के साथ पॉक्सो एक्ट में दर्ज हुई।

अपने खिलाफ केस दर्ज होने की जानकारी मिलते ही मोहम्मद शरीफ फरार होने की फिराक में लग गया। हालाँकि उससे पहले ही उसे पुलिस ने दबोच लिया। पीड़िता और आरोपित एक ही समुदाय से हैं। बताते चलें कि टाइम्स नाउ ने कब्रिस्तान पर काम करने और झाड़-फूँक करने वाले मोहम्मद शरीफ को अपनी रिपोर्ट में तांत्रिक कहकर सम्बोधित किया है। ऐसा पहली बार नहीं है कि मीडिया ने किसी झाड़-फूँक वाले को तांत्रिक नाम दिया हो। पहले भी कई मामले देखे गए हैं जब आरोपित का मजहब छिपाने के नाम पर ऐसे प्रयास पत्रकारिता में देखे गए हों।

जो हीरो लेफ्ट पार्टी का MLA, उस पर भी सेक्सुअल अब्यूज के आरोप: मलयालम फिल्म इंडस्ट्री में अब तक 17 मीटू केस, शिकायत करने वाली हिरोइन को मिल रही धमकियाँ

मलयालम फिल्म इंडस्ट्री में महिलाओं के उत्पीड़न पर आधारित जस्टिस हेमा कमेटी की रिपोर्ट जारी होने के बाद से अब तक यौन उत्पीड़न के 17 मामले सामने आ चुके हैं। इस मामले में अब केरल की वामपंथी सरकार भी कदम उठाने को मजबूर हो गई है और अंतत: सत्ताधारी पार्टी सीपीआई-एम के विधायक मुकेश पर गाज गिराई है। एक्टर मुकेश को सिनेमा की नीतियाँ बनाने से जुड़े सरकारी पैनल से हटा दिया गया है। मुकेश के साथ ही एक्टर जयसूर्या पर मीनू मुनीर ने यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं।

एक्ट्रेस मीनू मनीर ने आरोप लगाए थे कि मुकेश और जयसूर्या ने साल 2013 में एक फिल्म के सेट पर उनके साथ गलत व्यवहार किया था, साथ ही जब उन्होंने फिल्मी संगठन-AMMA में शामिल होने के लिए मुकेश की मदद माँगी थी, तो उन्होंने गलत प्रयास किए थे। मीनू मुनीर ने कहा, “इस उद्योग में बहुत शोषण होता है। मैं इसकी गवाह और पीड़ित दोनों हूँ। जब मैं चेन्नई आई तो किसी ने मुझसे संपर्क नहीं किया और न ही पूछा कि क्या हुआ था…” हालाँकि मुकेश ने आरोपों को गलत बताया है और जाँच की माँग की है।

इस बीच, दिग्गज एक्टर मोहनलाल ने AMMA के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया, इसके साथ ही एम्मा को भंग कर दिया गया। वहीं, हेमा कमेटी की रिपोर्ट के बीच, बढ़ते दबाव की वजह से केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने इन ममालों की जाँच के लिए 7 सदस्यीय एसआईटी का गठन किया है।

मीटू के 17 मामले आए सामने, एक्ट्रेस को मिल रही धमकी

अब तक एक्टरों और फिल्म प्रोड्यूसरों के खिलाफ कुल 17 मामले सामने आ चुके हैं। आरोपितों में सिद्दीकी और रंजीत बालकृष्णन भी शामिल हैं। सिद्दीकी पर बंगाली एक्ट्रेस श्रीलेखा मित्रा ने छेड़छाड़ का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा, “हर कोई इसके बारे में (महिलाओं के यौन शोषण और दुर्व्यवहार के बारे में) जानता है। यह कोई नई बात नहीं है… इस उद्योग में यह आम बात है। समस्या यह है कि इसे सामान्य बात बना दिया गया है।”

वहीं, एम मुकेश, जयसूर्या, मनियानपिला राजू और इदावेला बाबू पर फिल्मों की शूटिंग के दौरान उत्पीड़न का आरोप लगाने वाली एक्ट्रेस मीनू मुनीर ने कहा है कि उन्हें सोशल मीडिया पर धमकियाँ मिल रही हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर मिले धमकी भरे संदेश का स्क्रीनशॉट पोस्ट किया। मामले की जांच कर रही एसआईटी जल्द ही उनका बयान दर्ज करेगी।

एनडीटीवी से बातचीत में मुनीर ने अपना डरावना अनुभव साझा किया। उन्होंने कहा, “फिल्म की शूटिंग के दौरान मुझे एक कड़वा अनुभव हुआ। मैं शौचालय गई थी और जब मैं बाहर आई, तो जयसूर्या ने मुझे पीछे से गले लगाया और मेरी सहमति के बिना मुझे चूमा। मैं चौंक गई और भाग गई।” उन्होंने आगे कहा कि जयसूर्या ने उन्हें और काम देने की पेशकश की, अगर वह उनके साथ रहने को तैयार हों।

अभिनेत्री ने यह भी आरोप लगाया कि एएमएमए की पूर्व सचिव इदावेला बाबू ने उन्हें AMMA की सदस्यता दिलाने में मदद करने के बहाने अपने फ्लैट पर बुलाया और उनका उत्पीड़न किया। वहीं, सत्तारूढ़ सीपीएम के विधायक और अभिनेता मुकेश ने उनकी पेशकश ठुकराने के बाद उन्हें सदस्यता देने से इनकार कर दिया है।

ताजा शिकायत एक्ट्रेस सोनिया मल्हार ने दर्ज कराई है, जिन्होंने आरोप लगाया है कि 2013 में एक एक्टर ने फिल्म सेट पर उनके साथ छेड़छाड़ की थी। एक्ट्रेस ने केरल सरकार द्वारा गठित एसआईटी के सामने शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने मीडिया से आग्रह किया है कि अभिनेता जयसूर्या को उनके आरोपों से न जोड़ा जाए। उन्होंने साफ कर दिया कि उनके साथ बदसलूकी करने वाला दूसरा एक्टर है।

गौरतलब है कि तीन सदस्यीय जस्टिस हेमा कमेटी का गठन सरकार ने साल 2017 में किया था। जस्टिस हेमा कमेटी ने साल 2019 में अपनी रिपोर्ट सरकार को दे दी थी, लेकिन ये रिपोर्ट अभी तक सार्वजनिक नहीं की गई थी। गवाहों और आरोपितों के नाम हटाने के बाद प्रकाशित 235 पन्नों की रिपोर्ट में कहा गया है कि मलयालम फिल्म इंडस्ट्री को 10-15 पुरुष निर्माता, निर्देशक और अभिनेता नियंत्रित करते हैं। इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद से मलयालम फिल्म इंडस्ट्री की काली-करतूतें सामने आने लगी हैं।

उत्तराखंड से 4000 महिलाओं की भर्ती करेगा टाटा समूह, कर्नाटक और तमिलनाडु में देगा नौकरी: तनख्वाह के अलावा रहने-खाने की करेगा व्यवस्था

टाटा समूह पर्वतीय राज्य उत्तराखंड से 4000 महिलाओं को नौकरी देने जा रहा है। टाटा समूह कर्नाटक और तमिलनाडु में स्थित अपने प्लांट के लिए उत्तराखंड से 4000 महिलाओं को भर्ती करेगा। इसकी जानकारी टाटा समूह ने राज्य की पुष्कर धामी सरकार को दी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, टाटा समूह ने नेशनल आपरेंटिस प्रमोशन स्कीम (NAPS) और नेशनल आपरेंटिस ट्रेनिंग स्कीम (NATS) के तहत इन महिलाओं को भर्ती करने का निर्णय लिया है। इसकी जानकारी धामी सरकार को सोमवार (26 अगस्त, 2024) को दी गई है। धामी सरकार पहले से ही युवाओं को रोजगार दिलाने के लिए बड़े कारोबारी घरानों से सम्पर्क करती आई है।

टाटा समूह उत्तराखंड की इन महिलाओं को भर्ती करके इन्हें तमिलनाडु के होसूर और कर्नाटक के कोलार में स्थित अपने प्लांट में नौकरी देगा। नौकरियों के 10वीं और 12वीं को योग्यता माना गया है। 12वीं की योग्यता वालों को NAPS जबकि जिन महिलाओं ने ITI किया है उन्हें NATS के तहत नौकरी दी जाएगी।

टाटा समूह इनकी भर्ती के लिए कुछ टेस्ट लेगा और सफल उम्मीदवारों को होसूर और कोलार में नौकरी दी जाएगी। टाटा समूह इन महिलाओं को बाजार के अनुसार तनख्वाह देने के अलावा इनके रहने और खाने-पीने का भी प्रबंध करेगा। इन्हें फैक्ट्री के पास ही हॉस्टल में ठहराया जाएगा। इसके अलावा इनके फैक्ट्री में आने-जाने का प्रबंध भी टाटा समूह करेगा।

टाटा समूह इन महिलाओं को प्लांट में टेक्नीशियन के तौर पर नौकरी देगा। इन्हें बड़ी मशीनें चलाने का अनुभव दिया जाएगा। इन मशीनों से इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट बनाए जाते हैं। टाटा समूह लगातार इलेक्ट्रॉनिक निर्माण में अपना हिस्सा बढ़ा रहा है।

टाटा समूह ने कुछ समय पहले ही ताईवानी कम्पनी विस्ट्रॉन का अधिग्रहण किया है। यह कम्पनी एप्पल के आईफोन बनाती है। अब टाटा समूह भी इसके जरिए आईफोन निर्माण में उतर आया है। इससे पहले फॉक्सकॉन भारत में बड़े पैमाने पर आईफोन बना रही है।

घरवालों से नाराज होकर अस्पताल पहुँची 14 साल की नाबालिग, 2 स्टाफ ने चाय-नाश्ता करवाकर किया रेप: CCTV फुटेज में दिखने के बाद हुए गिरफ्तार, जोधपुर की घटना

राजस्थान के जोधपुर जिले से गैंगरेप का मामला सामने आया है। यहाँ घर से नाराज होकर बाहर निकली एक नाबालिग को 2 युवकों ने हवस का शिकार बनाया है। घटना एक सरकारी अस्पताल के पास घटी है। दोनों आरोपितों को हिरासत में लेकर पुलिस पूछताछ कर रही है। घटना रविवार (25 अगस्त 2024) की है। दोनों आरोपित अस्पताल के संविदाकर्मी बताए जा रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला जोधपुर के महात्मा गाँधी अस्पताल का है। रविवार की रात जोधपुर में सूरसागर थानाक्षेत्र की रहने वाली एक 14 वर्षीया नाबालिग लड़की को उसकी माँ ने किसी बात पर डाँट दिया था। इसी से नाराज होकर लड़की ने घर छोड़ दिया और भटकते हुए वो शहर के महात्मा गाँधी अस्पताल पहुँच गई। यहाँ पीड़िता को अस्पताल के 2 संविदाकर्मी मिले। इन्होंने लड़की को पहले विश्वास में लिया और बाद में उसके साथ गैंगरेप किया। गैंगरेप को अस्पताल के पीछे बने क्वार्टर के पास अंजाम दिया गया।

अगले दिन 26 अगस्त को पुलिस ने पीड़िता को बरामद कर लिया। पीड़िता को उसके परिजनों के हवाले कर दिया गया। यहाँ उसने अपने घर वालों को बताया कि अस्पताल के 2 स्टाफ ने उसके संग बलात्कार किया है। मामले की सूचना फ़ौरन पुलिस को दी गई। पुलिस ने केस दर्ज करके जाँच शुरू कर दी। पीड़िता का मेडिकल परीक्षण करवाया गया, साथ ही उसकी काउंसिलिंग भी करवाई गई। इस बीच पुलिस आरोपितों की पहचान करने में जुट गई।

जाँच के दौरान पुलिस ने अस्पताल के CCTV फुटेज खँगाले। इसी के एक फुटेज में पीड़िता अस्पताल की कैंटीन में 2 युवकों के साथ बैठी नजर आई। यहाँ सभी तीनों लोग मिल कर चाय नाश्ता कर रहे थे। आखिरकार दोनों आरोपितों को चिन्हित करके उनकी गिरफ्तारी के लिए दबिश दी गई। अब दोनों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया है। उनसे पूछताछ की जा रही है।

ऐसे ही नहीं भारत में घुसकर बस जाते हैं बांग्लादेशी… जिस नजीबुल ‘टोपी वाला’ को ATS ने दबोचा उसे क्लीनचिट दे चुका था देवबंद का इंस्पेक्टर सिराजुद्दीन

उत्तर प्रदेश पुलिस के आतंकवाद निरोधक दस्ते (ATS) ने 11 अक्टूबर, 2023 को भारत में बांग्लादेशी घुसपैठ करवाने में मदद कर रहे एक नेटवर्क का भंडाफोड़ किया था। इस दौरान पुलिस ने आदिल उर रहमान अशर्फी, नजीबुल शेख और अबू हुरैरा को गिरफ्तार किया था। इसमें आदिल उर रहमान बांग्लादेशी घुसपैठिया था जो फर्जी पहचान पत्र बनवा कर भारत में रह रहा था। नजीबुल शेख और अबू हुरैरा पश्चिम बंगाल के निवासी थी जो फिलहाल देवबंद में ही रह रहे थे। नजीबुल पर बांग्लादेशी घुसपैठियों को भारत में शरण देने, उनके पहचान पत्र बनवाने और उनके लिए पैसे जुटाने में मदद करने का आरोप है।

खास बात यह है कि इस गिरफ्तारी से पहले नजीबुल शेख का नाम पहले भी 2 बार प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से UP ATS ने अपनी कार्रवाई में लिया था लेकिन दोनों बार उसको सहारनपुर पुलिस ने गिरफ्तार नहीं किया था। ऑपइंडिया ने इस मामले की जमीनी पड़ताल की तो पता चला कि पूर्व में दर्ज जिन केसों में नजीबुल शेख गिरफ्तारी से बच गया था उसकी जाँच इंस्पेक्टर सिराजुद्दीन ने की थी। तब इंस्पेक्टर सिराजुद्दीन देवबंद थाना कोतवाली में इंस्पेक्टर क्राइम के पद पर तैनात थे।

क्या हैं नजीबुल पर आरोप

UP ATS की इस FIR में बताया गया था कि देवबंद दारुल उलूम के सामने परफ्यूम और टोपी बेचने वाला नजीबुल शेख भारत विरोधी कार्यों में फंडिंग कर रहा है। इन कार्यों में बांग्लादेशी घुसपैठियों का फर्जी भारतीय पहचान पत्र बनवाना प्रमुख था। नजीबुल शेख द्वारा भारत में बसाए गए लगभग आधे दर्जन घुसपैठियों का जिक्र ATS की FIR में है। देश विरोधी कार्यों को करने के लिए नजीबुल शेख को हवाला से पैसे भी मिले थे। किस रोहिंग्या या बांग्लादेशी को कौन से शहर में बसाना है यह भी नजीबुल अपने आकाओं के साथ मिल कर तय करता था।

तब ATS ने नजीबुल और उसके अन्य साथियों पर पर विदेशी अधिनियम के अलावा भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 370, 471, 467, 468, 419, 420 और 120 बी के तहत FIR दर्ज की थी। पिछले लगभग 10 महीनों से नजीबुल जेल में है। ATS द्वारा पेश किए गए सबूतों की वजह से उसकी जमानत अर्जी हाईकोर्ट से ख़ारिज हो चुकी है।

दारुल उलूम के मदरसे में पढ़ा, फिर शिफ्ट हुआ देवबंद

ऑपइंडिया ने नजीबुल के बारे में जानकारियाँ जुटाईं। वह मूल रूप से पश्चिम बंगाल के 24 परगना जिले का निवासी है। नजीबुल के अब्बा का नाम शेख अब्दुल कातिर है। नजीबुल की पढ़ाई पश्चिम बंगाल के हरोआ स्थित एक मदरसे से हुई थी। यह मदरसा देवबंद से कनेक्टेड है। इस मदरसे का संचालन अबू सालेह करता था जिसे UP ATS ने जनवरी 2024 में टेरर फंडिंग केस में गिरफ्तार किया है। सालेह पर आतंकी फंडिंग के लिए कुख्यात ब्रिटेन की उम्माह वेलफेयर ट्रस्ट से करोड़ों रुपए लेने का आरोप है।

अबू सालेह के मदरसे में पढ़ते हुए नजीबुल शेख देवबंद दारुल उलूम से जुड़े कई लोगों के सम्पर्क में आया। उसका देवबंद में आना-जाना भी हो गया। माना जाता है कि पूरी तरह से सोची-समझी साजिश के तहत शेख नजीबुल पश्चिम बंगाल के मदरसे की पढ़ाई कर के देवबंद में शिफ्ट हो गया था। यहाँ उसने दारुल उलूम के ठीक सामने सेंट और टोपी की दुकान खोल ली। इस दुकान पर दारुल उलूम देवबंद में पढ़ने वाले दुनिया भर के छात्र खरीदारी के लिए आने लगे। शेख नजीबुल इन सबमें अपने काम के लोग तलाशने लगा।

दुकान बस नाम की, असल धंधा हवाला का

ऑपइंडिया द्वारा जुटाई गई जानकारी के मुताबिक, नजीबुल शेख की सेंट और इस्लामी टोपी की दुकान केवल नाम भर के लिए थी। उसके पास विदेशों से हवाला का पैसा आने लगा। इसमें सबसे ज्यादा पैसे बांग्लादेश से आए। इन पैसों का उपयोग नजीबुल भारत में घुसपैठ कर के आए बांग्लादेशियों के पहचान पत्र और अन्य कागजात बनाने में करता था। नजीबुल ने कई घुसपैठियों को देवबंद व आसपास रहने की भी व्यवस्था करवाई थी। उसके खाते में कई संदिग्ध लेन-देन भी पाए गए हैं।

ATS का यह भी आरोप है कि हवाला से मिले पैसों से भारत में अवैध मस्जिदें बनवाने का भी काम हो रहा था। पैसों के इस लेन-देन में अब्दुल्ला गाजी, अब्दुल अव्वल और गफ्फार का नाम भी सामने आया था। साथ ही देवबंद के तार दिल्ली से भी जुड़े पाए गए थे। नजीबुल के साथ गिरफ्तार हुए आदिल उर रहमान ने भी पूछताछ में कई खुलासे किए थे। उसने बताया कि उसके भी फर्जी पहचान पत्र बनवाने में नजीबुल ने बड़ा रोल अदा किया था। नजीबुल का एक भाई सीमा सुरक्षा बल (BSF) में भी तैनात बताया जा रहा है।

इसकी टोपी उसके सर

यहाँ ये गौर करने योग्य है कि जो टोपियाँ नजीबुल अपनी दुकान में बेचता था वो ज्यादातर बांग्लादेश में बनी होती थी। इन्ही टोपियों को खरीदने के नाम पर नजीबुल बांग्लादेश में पैसे का लेन-देन करता था। बांग्लादेश में मौजूद घुसपैठियों के रिश्तेदार और परिजन टोपी के थोक विक्रेता को वहीं पर पैसे दे दिया करते थे। उन पैसों के बदले वहाँ से टोपियाँ देवबंद में नजीबुल की दुकान पर आ जाती थीं। इन्हीं टोपियों को फिक्स जगह बेच कर नजीबुल यहाँ मौजूद घुसपैठियों को पैसे बाँट देता था।

2022 में ही पकड़ा जाता नजीबुल, अगर इंस्पेक्टर सिराजुद्दीन ने न दी होती क्लीन चिट

जिस नजीबुल को UP ATS ने अक्टूबर 2023 में जेल भेजा उसे साल 2022 में ही गिरफ्तार कर लिया गया होता लेकिन तब सहारनपुर पुलिस के थाना देवबंद की जाँच में उसका नाम निकाल दिया गया था। ये बात है 28 अप्रैल, 2022 की। तब UP ATS के इंस्पेक्टर सुधीर कुमार उज्ज्वल ने सहारनपुर जिले के थाना देवबंद में एक FIR दर्ज करवाई थी। इस FIR में उन्होंने बांग्लादेशी घुसपैठ का एक बड़ा नेटवर्क ध्वस्त किया था। तब उन्होंने अपनी FIR में स्पष्ट रूप से दारुल उलूम देवबंद के आगे सेंट और टोपी बेचने वाले दुकानदार का जिक्र किया था।

FIR में दुकान का बाकायदा पता भी मेन रशीदिया मार्किट लिखा हुआ था। सुधीर कुमार उज्ज्वल की इस FIR में बताया गया था कि दारुल उलूम देवबंद के आगे सेंट टोपी बेचने वाला दुकानदार बांग्लादेशी घुसपैठियों से कनेक्टेड है। तब इसकी जाँच देवबंद में तैनात रहे इंस्पेक्टर सिराजुद्दीन ने की थी। सिराजुद्दीन ने अपनी जाँच रिपोर्ट में सेंट और टोपी वाले दुकानदार के खिलाफ सबूत नहीं पाने का जिक्र किया। उन्होंने कोर्ट में चार्जशीट भी लगा दी। इस चार्जशीट से नजीबुल का हौसला और बढ़ गया। हालाँकि, वो अपने आपराधिक कार्यों को और सतर्कता से करने लगा था।

दूसरी FIR में भी साफ़ बच गया था नजीबुल

इंस्पेक्टर सिराजुद्दीन की जाँच रिपोर्ट में पहली बार बच निकलने के बाद दूसरी बार नजीबुल फिर उसी देवबंद थाने से फँसते-फँसते बचा। तब 19 जुलाई 2024 को UP ATS के इंस्पेक्टर सुधीर कुमार उज्ज्वल ने एक और FIR दर्ज करवाई थी। इस FIR में उन्होंने 2 बांग्लादेशी घुसपैठियों को गिरफ्तार किया था जिनके नाम हबीबुल्लाह और अहमदुल्लाह हैं। इन दोनों के पास फर्जी कागजातों से बनवाए गए भारतीय पहचान पत्र और मोबाइल सिम बरामद हुए थे।

बताया जा रहा है कि हबीबुल्लाह नामक घुसपैठिए के सेंट और टोपी की दुकान लगाने वाले नजीबुल से संबंध थे। इस केस की भी जाँच देवबंद थाने में तैनात रहे इंस्पेक्टर सिराजुद्दीन को दी गई थी। हालाँकि इंस्पेक्टर सिराजुद्दीन लगातार दूसरी बार इस पूरे मामले में नजीबुल शेख की भूमिका तलाशने में असफल रहे थे। इसी वजह से एक ही विवेचक द्वारा की गई लगातार 2 जाँचों के बावजूद नजीबुल बचता रहा। ये तब का मामला है जब UP ATS का अपना खुद का थाना नहीं था। तब ATS को जाँच व अन्य कार्र्रवाई के लिए उस थानाक्षेत्र पर निर्भर रहना पड़ता था जहाँ घटनास्थल होता था।

ATS का खुला अपना थाना तो दबोच लिया गया नजीबुल शेख

देवबंद कोतवाली में दर्ज हुए 2 अलग-अलग मुकदमों में बच जाने के बाद नजीबुल काफी हद तक रिलेक्स हो गया था। इस बीच उत्तर प्रदेश ATS का अपना खुद का थाना लखनऊ में खुल गया। तब न सिर्फ FIR बल्कि जाँच का भी अधिकार ATS के पास आ गया। आखिरकार 11 अक्टूबर 2023 को UP ATS ने नजीबुल शेख को उसके साथी सहित दबोच लिया। नजीबुल शेख के खिलाफ ATS ने कोर्ट में कई सबूत पेश किए हैं। पिछले लगभग 10 महीनों से नजीबुल लखनऊ जेल में बंद है। उसकी जमानत अर्जी हाईकोर्ट से भी ख़ारिज हो चुकी है।

गोवा के हर उम्मीदवार को ₹90 लाख देने का अरविंद केजरीवाल ने किया था वादा, AAP ने ली थी ₹45 करोड़ की रिश्वत: दिल्ली शराब घोटाले में CBI का खुलासा

केन्द्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) ने दिल्ली शराब घोटाला में कोर्ट को बताया है कि आम आदमी पार्टी (AAP) को शराब घोटाले में ₹45 करोड़ की रिश्वत ली थी। CBI ने यह भी बताया है कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने गोवा विधानसभा चुनाव में हर उम्मीदवार को ₹90 लाख देने का वादा किया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मंगलवार (27 अगस्त, 2024) को कोर्ट यह सभी जानकारी दी है। CBI इस मामले में अब चौथी सप्लीमेंट्री चार्जशीट लगाने जा रही है। कोर्ट में इस चार्जशीट लगाने को लेकर ही बहस चल रही थी। इस सप्लीमेंट्री चार्जशीट में CM केजरीवाल, AAP विधायक दुर्गेश पाठक और ऑरबिन्दो फार्मा के डायरेक्टर पी सारथ रेड्डी, कारोबारी अमित अरोड़ा समेत पाँच लोगों को आरोपित बनाया गया है। इसकी सुनवाई के दौरान CBI ने कोर्ट के सामने कई जानकारियाँ रखी हैं।

CBI ने कोर्ट को बताया कि AAP को ₹45 करोड़ की रिश्वत शराब घोटाला मामले में प्राप्त हुई थी। यह रिश्वत साउथ ग्रुप से मिली थी, जिसे शराब घोटाला मामले में फायदा पहुँचाया गया था। CBI ने यह बताया कि साउथ ग्रुप ने यह पैसा गोवा चुनाव के लिए दिया था। CM केजरीवाल ने इस दौरान गोवा चुनावों में AAP उम्मीदवारों को फंड की कमी ना होने देने की बात कही थी।

CBI ने खुलासा किया है कि CM केजरीवाल गोवा विधानसभा चुनाव के सभी 40 उम्मीदवारों को ₹90-₹90 लाख देने की बात कही थी ताकि वह आराम से चुनाव लड़ सकें। केजरीवाल ने AAP गोवा को इस बात का भरोसा दिया था कि उन्हें पैसे की कमी नहीं होने दी जाएगी।

CBI ने बताया है कि ऑरबिंदों फार्मा के पी सारथ रेड्डी ने ₹14 करोड़ की रिश्वत BRS नेता के कविता को दी थी। यह रिश्वत आगे के कविता के माध्यम से AAP तक पहुँच गई। पी सारथ रेड्डी इस मामले में सरकारी गवाह है। CBI ने पहले बताया है कि रिश्वत का यह पूरा पैसा साउथ ग्रुप से आया था।

मामले की सुनवाई दौरान CBI ने यह भी खुलासा किया कि गोवा चुनाव के दौरान MLA दुर्गेश पाठक यहाँ के इंचार्ज थे और पैसे का सारा लेनदेन उन्हीं के माध्यम से हुआ। कोर्ट ने इस मामले में अब अगली सुनवाई 3 सितम्बर को करने को कहा है।

गौरलतब है कि CM केजरीवाल समेत AAP के कई नेताओं पर आरोप है कि दिल्ली में शराब नीति बदल कर उन्होंने कुछ कारोबारियों को फायदा पहुँचाया। उन पर आरोप है कि इस फायदा पहुँचाने के बदले में उन्होंने बड़ी रिश्वत ली, इसे गोवा चुनाव में खर्च किया गया। इस मामले में दिल्ली CM अरविन्द केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया समेत कई नेता आरोपित हैं।

जन्माष्टमी की छुट्टी में सरकारी स्कूल में घुसे हाशिम-कासिम, भीतर बना डाली ‘बहन की कब्र’ : कौशांबी में UP पुलिस ने दबोचा

उत्तर प्रदेश के कौशाम्बी जिले में एक सरकारी स्कूल के अंदर कब्र बनाने का मामला सामने आया है। यह कब्र जन्माष्टमी की छुट्टी पर चुपके से बनाई गई थी। प्रिंसिपल की शिकायत पर पुलिस ने FIR दर्ज करके जाँच शुरू कर दी है। आरोपितों के नाम कासिम और हाशिम हैं। मंगलवार (27 अगस्त 2024) को पुलिस ने दोनों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। प्रशासन ने करवाए गए अवैध निर्माण को ढहा दिया है।

यह मामला कौशाम्बी जिले के थानाक्षेत्र पश्चिम शरीरा का है। यहाँ आषाढ़ा उच्च माध्यमिक विद्यालय है जिसमें सभी समुदाय के बच्चे एक साथ पढ़ाई करते हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सोमवार को जन्माष्टमी की छुट्टी थी। मंगलवार को जब स्कूल खुला तो अंदर एक कब्र बन चुकी थी। अध्यापकों को याद आया कि एक व्यक्ति काफी पहले से अपनी बहन की कब्र स्कूल के अंदर होने का दावा करता आ रहा था। हालाँकि वो अपने दावे के समर्थन में कोई सबूत पेश नहीं कर पाया।

आखिरकार स्कूल के प्रिंसिपल ने अपने उच्चाधिकारियों को पूरे मामले से अवगत करवाया। आनन-फानन में प्रशासनिक अमला स्कूल पहुँचा। यहाँ उन्होंने देखा कि अंदर न सिर्फ पक्की कब्र बना दी गई थी बल्कि उसके एक तरफ शिलापट भी जोड़ दिया गया था। प्रशासन ने फ़ौरन ही किए गए नवनिर्माण को ध्वस्त किया। प्रिंसिपल से तहरीर ली गई। इस तहरीर में मवाना गाँव के 40 साल के कासिम और 48 वर्षीय हाशिम को नामजद किया गया। इसी तहरीर पर दोनों आरोपितों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 170, 126 व 135 के तहत केस दर्ज कर लिया गया।

केस दर्ज करके पुलिस ने आरोपितों की तलाश शुरू कर दी। पुलिस ने अपनी रिपोर्ट में यह माना है कि कासिम और हाशिम की करतूत से भीड़ जमा हो गई थी और शांति भंग होने का खतरा भी पैदा हो गया था। मंगलवार (27 अक्टूबर 2024) को पुलिस ने हाशिम और कासिम को गिरफ्तार कर लिया। इन दोनों को कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए अदालत में पेश किया गया है। फिलहाल मामले की जाँच व अन्य वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। स्कूल में बच्चों की पढ़ाई फिर से सामान्य रूप से चल रही है।

हिंदू घृणा में सनी सुनीता विश्वनाथ ने जन्माष्टमी को बनाया आतंकवाद की ढाल, हमास पर महाभारत-गीता से डाला पर्दा: हमारे देवताओं से दूर रहो ‘द वायर’

प्रोपेगेंडा पोर्टल द वायर ने 26 अगस्त 2024 को हिंदू विरोधी और भारत विरोधी अमेरिकी संगठन हिंदू फॉर ह्यूमन राइट्स की कार्यकारी निदेशक सुनीता विश्वनाथ का एक लेख प्रकाशित किया। इस लेख में सुनीता ने गाजा में फिलिस्तीनियों की पीड़ा और महाभारत में भगवान कृष्ण और पांडवों द्वारा झेली गई यातनाओं के बीच तुलना करने का प्रयास किया। उन्होंने हिंदुओं से कृष्ण जन्माष्टमी पर हमास आतंकवादियों के प्रति सहानुभूति रखने को कहा।

द वायर के माध्यम से सुनीता विश्वनाथ द्वारा पेश की गई उपमा न केवल बहुत ही गलत है, बल्कि भ्रामक भी है। महाभारत में पांडवों के बारे में बताया गया है, जो धर्म के अवतार थे और उन्होंने अधर्म का प्रतिनिधित्व करने वाले कौरवों के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी। महाभारत के महान युद्ध का मार्गदर्शन भगवान कृष्ण ने न्याय और सत्य को लाने के लिए किया था।

द वायर के लेख का स्क्रीनशॉट

दूसरी ओर फिलिस्तीनी आतंकवादी संगठन हमास महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों सहित नागरिकों को बिना किसी गलती के निशाना बना रहा है, साथ ही यहूदियों के नरसंहार और इजरायल राज्य के विनाश की बात कर रहा है। यह साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत हैं कि अधिकांश फिलिस्तीनी हमास का समर्थन करते हैं और दुनिया के नक्शे से इजरायल को मिटा देना चाहते हैं।

सुनीता ने फिलिस्तीनियों की इजरायल से दुश्मनी की तुलना पांडवों के धर्मयुद्ध से करते महाभारत के सार को विकृत कर दिया है। उन्होंने उस हमास के लिए सहानुभूति बटोरने की कोशिश की है, जो अच्छाई से कोसों दूर है।

अगर हम समानताएँ देखना चाहें तो हमास की हरकतें कौरवों से ज़्यादा मिलती-जुलती हैं क्योंकि जिस तरह कौरव छल और विश्वासघात के ज़रिए पांडवों का सफाया करना चाहते थे, उसी तरह हमास, उसके समर्थक और उससे जुड़े आतंकी संगठन इजरायल का सफाया करना चाहते हैं। इसके अलावा, यह पहचानना ज़रूरी है कि महाभारत उत्पीड़न बनाम प्रतिरोध की कहानी नहीं है, बल्कि यह बुराई पर अच्छाई की जीत, अत्याचार पर न्याय की जीत की कहानी है। उस संदर्भ में, हमास की तुलना कभी भी पांडवों या कृष्ण से नहीं की जा सकती। हमास की असली तुलना कौरवों और बुरी ताकतों से ही हो सकती है।

इजरायल कंस नहीं है: दोनों की तुलना गलत

सुनीता ने अपने लेख में इजरायल को कंस के रूप में चित्रित किया है, जो भगवान कृष्ण का दुष्ट मामा है। ऐसी तुलना पूरी तरह से भ्रामक और गलत है। कंस एक क्रूर शासक था, जो कृष्ण को मरवाना चाहता था क्योंकि भविष्यवाणी के अनुसार, कृष्ण ही उसके पतन का कारण बनने वाले थे। कंस ने कृष्ण को तब मारने की कोशिश की थी, जब वह एक शिशु थे और तब तक अपने प्रयास जारी रखे जब तक कि कृष्ण ने अंततः कंस को मार नहीं दिया।

7 अक्टूबर को जो हुआ, उस पर वापस लौटते हुए, आतंकवादी हमले में मासूम बच्चों को किसने मारा? यह हमास था। अगर हमास ने मासूम बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को बिना सोचे-समझे मार डाला, तो हमास और उसके समर्थकों को जो प्रतिशोध झेलना पड़ा, उसकी तुलना भगवान कृष्ण ने बचपन में अपने पूरे जीवन में जो झेला, उससे कैसे की जा सकती है?

कंस का शासन क्रूरता, भय और अन्याय से भरा था। दूसरी ओर, इजरायल एक संप्रभु लोकतांत्रिक राज्य है, जहाँ अन्य धर्मों के लोग भी स्वतंत्रता का आनंद लेते हैं। उसे हमास के आतंकवादी हमलों से खुद का बचाव करने का पूरा अधिकार है। ये तो हमास और उससे जुड़े आतंकवादी संगठन हैं, जो इजरायल को नक्शे से मिटा देना चाहते हैं। इजरायल ने जो किया वह एक बदला था और गाजा में जो हुआ वह 7 अक्टूबर को फिलिस्तीनी आतंकवादी संगठन हमास द्वारा किए गए आतंकवादी हमले का कोलेटरल डैमेज था।

इस प्रकार, इजरायल को कंस के बराबर मानना ​​गुमराह करने वाला और गलत तरीके से पेश करना है, ताकि इजरायल-हमास संघर्ष की एक अलग कहानी बनाई जा सके। कंस एक अत्याचारी था। उसने अपनी शक्ति के डर से लोगों को कैद किया और मार डाला। यह हमास से बहुत मिलता-जुलता है जिसने 7 अक्टूबर को निर्दोष इजरायलियों और विदेशी नागरिकों की हत्या की और इजरायल के बदले के डर से 250 से अधिक लोगों को बंधक बना लिया।

दूसरी ओर, इजरायल दमन करने के लिए प्रेरित नहीं है। यहूदी देश और उसके लोग अपनी भूमि पर शांतिपूर्वक रहना चाहते हैं और उन्होंने सालों से गाजा में दो-राष्ट्र सिद्धांत के आधार पर बुनियादी ढाँचे के निर्माण में मदद की है। हमास ने क्या किया? उसने इजरायल पर हमलों के लिए गाजा में इजरायल द्वारा विकसित बुनियादी ढाँचे का इस्तेमाल किया। यहाँ तक ​​कि गाजा में लगाए गए पाइपों का इस्तेमाल इजरायल पर हमला करने के लिए रॉकेट बनाने के लिए किया गया।

हमास पर इजरायल का बदला लोगों पर अत्याचार करने की इच्छा से प्रेरित नहीं है। वास्तव में इजरायल ने फिलिस्तीन के लोगों को सुरक्षित स्थान पर जाने के लिए कई चेतावनियाँ भेजीं क्योंकि वे हमास के प्रतिष्ठानों पर हमला करने जा रहे थे। हालाँकि अपनी बदमाशी की वजह से हमास ने फिलिस्तीन के लोगों को गाजा छोड़ने की अनुमति नहीं दी। सुनीता यहाँ बेवजह हिंदुओं के देवताओं को घसीट रही हैं, ताकि कहानी को तोड़-मरोड़ कर पेश किया जा सके और हमास के पापों को किसी तरह के धार्मिक संघर्ष के रूप में पेश किया जा सके।

भगवद्गीता की शिक्षाओं की गलत व्याख्या कर रही सुनीता

सुनीता ने अपने लेख में अपनी कहानी को सही ठहराने के लिए भगवद गीता का हवाला देने का प्रयास किया। सुनिया ने दावा किया कि हिंदुओं को फिलिस्तीनियों के लिए खड़ा होना चाहिए क्योंकि भगवान कृष्ण हमें सभी की भलाई के लिए प्रयास करना और दूसरों के सुख-दुख को अपना मानना ​​सिखाते हैं। हालाँकि वह शिक्षाओं के बारे में सही हैं, लेकिन उस संदर्भ का गलत इस्तेमाल किया है।

द वायर के लेख का स्क्रीनशॉट

भगवद गीता एक आध्यात्मिक मार्गदर्शक है। यह धर्म के महत्व और न्याय को लक्ष्य मानकर सही काम करने की आवश्यकता को सिखाती है। कृष्ण ने अर्जुन को धर्म के अनुसार काम करना सिखाया, भले ही यह कठिन लगे। यहूदियों के प्रति हिंसा और घृणा फैलाने वाले हमास जैसे आतंकवादी संगठन का समर्थन करना भगवद गीता के माध्यम से भगवान कृष्ण की शिक्षाओं के अनुरूप नहीं है। भगवान कृष्ण धर्म का पालन करने वालों की सुरक्षा की वकालत करते हैं, न कि ऐसे कार्यों का समर्थन करते हैं, जिनमें निर्दोष लोगों को नुकसान पहुँचाया गया हो या उनकी हत्या की गई हो, जबकि हमास ने वही किया है।

हिंदू फॉर ह्यूमन राइट्स: छद्म हिंदू विरोधी लकड़बग्घे

सुनीता हिंदू फॉर ह्यूमन राइट्स (HfHR) की कार्यकारी निदेशक हैं, जो अमेरिका में स्थित एक हिंदू विरोधी और भारत विरोधी संगठन है। यह संगठन खुद को मानवाधिकारों के रक्षक के रूप में पेश करता है। हालाँकि, इसके हिंदू विरोधी चरित्र का कई बार पर्दाफाश हो चुका है। HfHR अक्सर अपने कथानक को आगे बढ़ाने के लिए हिंदू प्रतीकों और शिक्षाओं का इस्तेमाल करता है। इस लेख में भी सुनीता ने महाभारत और भगवान कृष्ण की शिक्षाओं का इस्तेमाल करके एक आतंकवादी संगठन और उसके समर्थकों के लिए समर्थन जुटाने की कोशिश की। ऐसा करके HfHR ने एक बार फिर अपने असली रंग और विचारधारा को उजागर किया है।

एचएफएचआर और सुनीता जैसे व्यक्ति हिंदू प्रथाओं और मान्यताओं की आलोचना करने से पहले सांस नहीं लेते। हिंदू ग्रंथों की उनकी चुनिंदा नाराजगी और उनकी व्याख्याओं को तोड़-मरोड़ कर पेश करना, जैसा कि उन्होंने यहाँ किया, यह दर्शाता है कि उनका प्राथमिक लक्ष्य मानवाधिकारों की रक्षा करना नहीं है, बल्कि झूठे आख्यानों के साथ हिंदू पहचान को धरती से मिटाना है। सुनीता ने हमास के साथ गठबंधन किया और इजरायल-हमास संघर्ष को इस तरह से पेश किया कि इजरायल को गलत तरीके से बदनाम किया जा सके। इस प्रकार, एचएफएचआर की कार्यकारी निदेशक ने मानवाधिकार संगठन के रूप में अपना हिंदू विरोधी रूप दिखाया।

हिंदू देवताओं को राजनीतिक तुलना से रखें बाहर

इजरायल-हमास संघर्ष में गलत तुलना करने के लिए सनातन धर्म की शिक्षाओं का दुरुपयोग न केवल बौद्धिक रूप से बेईमानी है, बल्कि दुनिया भर के हर समझदार हिंदू के लिए अपमानजनक है जो इन पवित्र कथाओं का सम्मान करते हैं। महाभारत सिर्फ़ एक और कहानी नहीं है। यह सनातन धर्म का इतिहास है, बुराई पर धार्मिकता की जीत की कहानी। इसलिए इसे राजनीतिक एजेंडे को पूरा करने के लिए तोड़-मरोड़कर या गलत तरीके से पेश नहीं किया जाना चाहिए। खासकर जो इसकी शिक्षाओं के बिल्कुल विपरीत हैं।

सुनीता, HfHR जैसे संगठनों और द वायर जैसे मीडिया घरानों को हिंदू देवताओं को अपने घटिया प्रोपेगेंडा से बाहर रखना चाहिए क्योंकि यह स्पष्ट है कि वे हिंदू धर्म के सच्चे सार का सम्मान नहीं कर सकते। हमास और पांडवों के बीच तुलना न केवल गलत है बल्कि ऐसा सोचना भी बेहद घटिया है। यह धार्मिक धार्मिकता की आड़ में हिंसा और आतंकवाद को वैध बनाने का प्रयास है। अब समय आ गया है कि इन झूठी कहानियों को सामने लाया जाए और उन्हें हाथ से निकलने से पहले ही रोक दिया जाए।

यह लेख मूल रूप से अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित है। मूल लेख पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें