Homeदेश-समाजबनभूलपुरा हिंसा मामले में HC ने 50 को दी जमानत: नैनीताल पुलिस ने चार्जशीट...

बनभूलपुरा हिंसा मामले में HC ने 50 को दी जमानत: नैनीताल पुलिस ने चार्जशीट नहीं फाइल करने के दावों को नकारा

नैनीताल पुलिस ने बताया, बनभूलपुरा हिंसा से संबंधित कुछ आरोपितों की जमानत होने पर कुछ सोशल मीडिया एवं समाचार पत्रों में तथ्यहीन और भ्रामक खबरें फैलाई गई कि पुलिस ने समय से चार्जशीट नहीं फाइल की इसी वजह से आरोपितों की जमानत हुई।

हल्द्वानी के बनभूलपुरा क्षेत्र में 8 फरवरी को हुई हिंसा और आगजनी के मामले में हाई कोर्ट ने 29 अगस्त को 6 आरोपित महिलाओं समेत 50 लोगों की जमानत मंजूर कर ली है। इस मामले में पहले कहा गया था कि ये जमानत पुलिस द्वारा समय से चार्जशीट जमा न करने के कारण हुई है। हालाँकि बाद में नैनीताल पुलिस ने इस बाबत स्पष्टीकरण दिया और इन खबरों को फेक न्यूज बताया।

नैनीताल पुलिस ने बताया, बनभूलपुरा हिंसा से संबंधित कुछ आरोपितों की जमानत होने पर कुछ सोशल मीडिया एवं समाचार पत्रों में तथ्यहीन और भ्रामक खबरें फैलाई गई कि पुलिस ने समय से चार्जशीट नहीं फाइल की इसी वजह से आरोपितों की जमानत हुई। हालाँकि सच ये है कि यूएपीए के सेक्शन 43डी के अंतर्गत विवेचक को आवश्यकता अनुसार 90 दिन के पश्चात रिमांड अवधि बढ़ाने हेतु आवेदन करने का अधिकार है, उसी को मानते हुए अधीनस्थ न्यायालय द्वारा रिमांड की अवधि 90 दिन से 180 दिन की गई थीं। पुलिस ने 180 दिन से पूर्व चार्जशीट फाइल भी कर दी थी। अत: पुलिस द्वारा समय से चार्जशीट फाइल न करने की खबरें असत्य और भ्रामक हैं।

बता दें कि पहले रिपोर्ट्स में कहा गया था कि हिंसा केस के एक आरोपित बनभूलपुरा निवासी गुलजार सहित 50 अन्य ने जमानत की याचिका लगाते हुए कोर्ट में कहा कि पुलिस की ओर से उनके विरुद्ध 90 दिन के भीतर न तो चार्जशीट दाखिल की गई है और न ही रिमांड बढ़ाने का कारण बताया गया और जमानत भी खारिज कर दी गई।

इसी के बाद मीडिया में ये चला कि पुलिस ने चार्जशीट फाइल नहीं की है। हालाँकि पुलिस की सफाई आने के बाद रिपोर्टें अब अपडेट कर दी गई हैं। रिपोर्ट्स में बताया गया कि सरकारी पक्ष ने कोर्ट को बता दिया था कि पुलिस के पास पर्याप्त आधार और कारण हैं कि रिमांड क्यों बढ़ाई गई।

उल्लेखनीय है कि इस वर्ष फरवरी माह में बनभूलपुरा में अवैध मदरसे और नमाज स्थल को तोड़ने को लेकर 8 फरवरी को काफी बवाल हुआ था। उपद्रवियों ने पुलिस , प्रशासन व नगर निगम की टीम पर पथराव कर दिया था और थाने को भी आग के हवाले कर दिया था। घटना में पाँच लोगों की मौत हो गई थी।

पुलिस ने जाँच के बाद मामले में 107 लोगों को गिरफ्तार किया था। इसमें गुलजार, फुरकीन, मोहम्मद वसीम, शहराज हुसैन, सरीम मिकरानी, मो फैजान, नबी हसन, जीशान, मो फिरोज, मो उजैर, हाजरा बेगम, शहनाज, सोनी, शमशीर, अजीम, शाहबुद्दीन, मो आसिफ, आदिल खान, हुकुम रजा, शाहिल अंसारी, अरबाज, अहमद हसन, माजिद, जीशान, मुजम्मिल, रईस अहमद, गुलजार, मो शाद, मो फरीद, जावेद, शरीफ व मो ईश्तकार आदि का नाम शामिल था। वहीं केस को आईपीसी की धारा 147, 148, 149, 120 बी, 307, 332, 353, 427, 435, उत्तराखंड प्रिवेंशन आफ डैमेज पब्लिक प्रापर्टी, आर्म्स एक्ट आदि के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

दिलजीत दोसांझ की ‘सतलुज’ पर फैलाया जा रहा ‘अर्धसत्य’: इसे कानूनी वजहों से ZEE5 ने हटाया, सरकार ने नहीं लगाया कोई बैन; जानिए पूरा...

सतलुज पर सरकार ने बैन नहीं लगाया बल्कि फिल्म पहले IT नियम, 2021 के नियम 9 के तहत ZEE5 पर रिलीज हुई और बाद में उसी व्यवस्था के तहत उसे हटा भी दिया गया।

बाबू जगजीवन राम: वो दलित नेता जिन्हें कॉन्ग्रेस और लेफ्ट से कभी उनका हक नहीं मिला, क्योंकि वे हिंदू धर्म से नहीं करते थे...

डॉ. आंबेडकर ने जाति व्यवस्था से तंग आकर बौद्ध धर्म अपनाया, तो जगजीवन राम जीवनभर हिंदू समाज के भीतर रहकर ही कुरीतियों को सुधारने के पक्षधर रहे।
- विज्ञापन -