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कॉन्ग्रेस नेता शशि थरूर के खिलाफ दर्ज मानहानि के मामले को रद्द करने से कोर्ट का इनकार, पीएम मोदी को बताया था ‘शिवलिंग पर बैठा बिच्छू’

शशि थरूर के बयान के बाद भाजपा नेता राजीव बब्बर ने मामला दर्ज कराया था। उन्होंने तर्क दिया कि यह बयान उनकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाला और भाजपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों के लिए अपमानजनक है। वहीं, थरूर ने मानहानि से संबंधित भारतीय दंड संहिता की धारा 499 और 500 के तहत दायर की गई शिकायत को रद्द करने की माँग की थी।

दिल्ली हाई कोर्ट ने गुरुवार (29 अगस्त 2024) को कॉन्ग्रेस नेता शशि थरूर के खिलाफ मानहानि के मामले को खारिज करने से इनकार कर दिया। इसके अलावा, अदालत ने मामले में ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर पिछली रोक भी हटा दी है। कॉन्ग्रेस नेता शशि थरूर ने साल 2018 के बैंगलोर साहित्य महोत्सव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तुलना ‘शिवलिंग पर बैठे बिच्छू’ से की थी।

न्यायमूर्ति अनूप कुमार मेंदीरत्ता की पीठ ने कहा कि दिल्ली उच्च न्यायालय को ‘इस स्तर पर कार्यवाही रद्द करने का कोई आधार नहीं मिला है’। उन्होंने दोनों पक्षों को 10 सितंबर 2024 को निचली अदालत में पेश होने का भी निर्देश दिया। साल 2020 में दिल्ली उच्च न्यायालय ने थरूर के खिलाफ कार्यवाही पर रोक लगा दी थी।

मानहानि का यह मुकदमा दिल्ली भाजपा के नेता राजीव बब्बर द्वारा दायर की गई है। इस मामले में शशि थरूर को तलब करने के निचली अदालत के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने यह रोक जारी की है। अप्रैल 2019 में ट्रायल कोर्ट ने बब्बर द्वारा साल 2018 में दायर आपराधिक मानहानि शिकायत के जवाब में थरूर को तलब किया था।

दिल्ली की एक अदालत ने जून 2019 में शशि थरूर को जमानत दे दी थी। बब्बर ने दावा किया कि अक्टूबर 2018 में बैंगलोर लिटरेचर फेस्टिवल के दौरान शशि थरूर द्वारा की गई टिप्पणी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तुलना ‘शिवलिंग पर बैठे बिच्छू’ से की गई थी।

बब्बर ने तर्क दिया कि यह बयान उनकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाला और भाजपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों के लिए अपमानजनक है। वहीं, थरूर ने मानहानि से संबंधित भारतीय दंड संहिता की धारा 499 और 500 के तहत दायर की गई शिकायत को रद्द करने की माँग की थी।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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