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मृतका की जिस डायरी में कॉलेज के काले कारनामे, उसके कई पन्ने गायब: बंगाल पुलिस ने फटी डायरी CBI को सौंपी, पूर्व प्रिंसिपल और टिफिन डिलीवरी बॉय गिरफ्तार

कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में जूनियर महिला डॉक्टर की रेप एवं क्रूरता से की गई हत्या के मामले में केंद्रीय जाँच एजेंसी CBI ने शनिवार (17 अगस्त) को संस्थान के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष को हिरासत में लिया है। इसके अलावा, संस्थान में तोड़फोड़ करके सबूतों को नष्ट करने वाले उपद्रवियों की भी पहचान की गई है। उनमें से कुछ को गिरफ्तार किया गया है। वहीं, मृतका की एक डायरी को भी बंगाल पुलिस ने सीबीआई के हवाले किया है, जिसके कई पन्ने फटे हुए हैं।

दरअसल, 9 अगस्त की रात को मेडिकल कॉलेज के छाती विभाग की 31 वर्षीय डॉक्टर के साथ हुई क्रूरता के सिलसिले में पूछताछ के लिए सीबीआई ने डॉक्टर संदीप घोष को बुलाया था। सीबीआई ने घोष को शुक्रवार (16 अगस्त) को ही पूछताछ के लिए बुलाया था। उन्हें अभी तक रिहा नहीं किया गया है। इतना ही नहीं, घटना के दिन मृतका को खाना पहुँचाने वाले फूड डिलीवरी बॉय को भी हिरासत में लिया है।

सीबीआई के सूत्रों के हवाले से मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रिंसिपल घोष को मेडिकल बिरादरी में चल रहे अवैध घोटालों के बड़े रैकेट के बारे में जानकारी थी। कहा जा रहा है कि इस रैकेट में राज्य सरकार के करीबी कई मशहूर डॉक्टर शामिल हैं। इनमें दवाइयों की अवैध बिक्री, अवैध टेंडर सहित कई तरह के भ्रष्टाचार शामिल हैं। यह भी कहा जाता है कि प्रिंसिपल घोष सीएम ममता बनर्जी के करीबी हैं।

आरजी कर अस्पताल में आंदोलनकारी छात्रों ने संदीप घोष से पूछताछ का स्वागत किया। जूनियर डॉक्टर सौम्यदीप रॉय ने कहा, “हम पहले दिन से ही कह रहे थे कि उनसे पूछताछ होनी चाहिए।” घोष को शुक्रवार को सीबीआई ने तलब किया था। हालाँकि, सीबीआई को सहयोग करने के बजाय घोष कलकत्ता हाई कोर्ट में याचिका दायर गिरफ्तारी से छूट की माँग की थी। हालाँकि, याचिका खारिज हो गई थी।

बंगाल पुलिस ने CBI को मृतका की फटी डायरी सौंपी

मामले की जाँच सीबीआई को ट्रांसफर होने के बाद पश्चिम बंगाल पुलिस ने एजेंसी को एक डायरी भी सौंपी है। सूत्रों के मुताबिक, ये डायरी मृतका की लाश के पास से मिली थी। इस डायरी के कई पन्ने फटे हुए हैं और कई पन्नों के चिथड़े उड़े हुए हैं। कोलकाता पुलिस ने डायरी के फटे हुए पन्नों को भी सीबीआई अधिकारियों को सौंपा है।

सूत्रों के मुताबिक, आमतौर पर हर डॉक्टर के पास एक डायरी होती है जिस पर दवाइयों के नाम लिखे होते हैं। हालाँकि, मृतका के पास मिली डायरी के पन्ने जिस तरह से फटे हुए मिले हैं, उससे शक गहरा रहा है। माना जा रहा है कि मृतका ने इस डायरी में कुछ और भी बातें लिखी थीं। इसी की वजह से डायरी के उन पन्नों को फाड़ दिया गया है।

मृतका के परिजनों का दावा है कि मृतका ने अपनी डायरी में डॉक्टरों, नर्सों, छात्रों और ग्रुप डी कर्मचारियों से जुड़े अवैध रैकेट का उल्लेख किया था। यह रैकेट लंबे समय से अस्पताल में चल रहा था और अस्पताल प्रशासन इस मामले की जाँच करने में विफल रहा है। पीड़िता के पिता ने कहा, “कोलकाता पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए संजय राय के अलावा कुछ बड़े लोग भी इस अपराध में शामिल हैं।”

सबूतों को नष्ट करने के शक में दर्जनों गिरफ्तारी

कोलकाता पुलिस ने अस्पताल परिसर में तोड़फोड़ के मामले में 30 लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार लोगों में सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ता, छात्र, जिम ट्रेनर, डिलीवरी स्टाफ आदि शामिल हैं। पुलिस ने हाल ही में तोड़फोड़ करने वाले 76 लोगों की फोटो-वीडियो जारी किए थे। इनमें से लोगों की मदद से अब तक पाँच आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है।

इनमें से अधिकांश आरोपित उत्तरी कोलकाता और बैरकपुर कमिश्नरेट के हैं। ईस्ट सिंथी इलाके के निवासी सौमिक दास उन लोगों में से एक है, जिन्होंने अस्पताल में तोड़फोड़ की। गिरफ्तारी के बाद दास ने कहा, “मैं अपने जिम पार्टनर के साथ विरोध करने गया था। मैं भी दूसरों के साथ गया और गेट तोड़ दिया। मुझे अब एहसास हुआ है कि मैंने गलत किया। मुझे इस पर बुरा लग रहा है। मैंने गलती की।”

आधी रात को किए गए विरोध प्रदर्शन के दौरान उपद्रवियों ने अस्पताल के आपातकालीन वार्ड, नर्सिंग स्टेशन, दवा स्टोर और बाह्य रोगी विभाग के कुछ हिस्सों में तोड़फोड़ की। सोशल मीडिया पर एक असत्यापित वीडियो भी सामने आया है जिसमें कोई व्यक्ति ‘सेमिनार हॉल में जाओ’ चिल्लाता हुआ सुनाई दे रहा है। इससे अनुमान लगाया जा रहा है कि अपराध स्थल के साथ छेड़छाड़ करने की योजना बनाई गई थी।

‘मारे गए 650 लोग, अल्पसंख्यकों को बनाया गया निशाना’: बांग्लादेश हिंसा पर UN की रिपोर्ट – बिना ज़रूरत किया गया बल प्रयोग

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय (यूएनएचसीआर) ने एक प्रारंभिक रिपोर्ट में कहा है कि 16 जुलाई से 11 अगस्त के बीच बांग्लादेश में अशांति के दौरान हिंसक घटनाओं में लगभग 650 लोग मारे गए। संयुक्त राष्ट्र ने रिपोर्ट में बताया है कि शेख हसीना सरकार के पतन के बाद बांग्लादेशी सुरक्षा बलों ने विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर अनावश्यक बल का प्रयोग किया, जिसके बाद भीड़ हिंसक हो गई और प्रदर्शनकारियों ने ढाका की सड़कों पर अपना कब्जा कर लिया।

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय ने बांग्लादेश में हुई हिंसा पर एक प्रारंभिक रिपोर्ट जारी की है। ‘बांग्लादेश में हालिया विरोध प्रदर्शन और अशांति का प्रारंभिक विश्लेषण’ शीर्षक वाली 10-पृष्ठ की रिपोर्ट के अनुसार, सुरक्षा बलों ने स्थिति पर नियंत्रण पाने के लिए अनावश्यक और अनुपातहीन बल का प्रयोग किया। इसके मजबूत संकेत हैं, जो आगे की स्वतंत्र जाँच की माँग करते हैं।

यूएन ने कहा कि कथित उल्लंघनों में न्यायेतर हत्याएँ, मनमाने ढंग से गिरफ्तारियां और हिरासत, जबरन गायब करना, यातना और दुर्व्यवहार तथा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण सभा पर गंभीर प्रतिबंध शामिल हैं। रिपोर्ट में कानून और व्यवस्था की तेजी से बहाली की आवश्यकता पर जोर दिया गया। साथ ही आगे की जानमाल हानि, हिंसा और प्रतिशोध की कार्रवाई को रोकने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर तुर्क ने कहा, बांग्लादेश में परिवर्तन यह सुनिश्चित करने का एक मौका था कि शासन अधिकारों और कानून पर आधारित हो। आगे आने वाला बदलाव देश की संस्थाओं में सुधार, उन्हें पुनर्जीवित करने, मौलिक स्वतंत्रता, नागरिक स्थान को बहाल करने और बांग्लादेश में सभी को भविष्य के निर्माण में हिस्सा देने का एक ऐतिहासिक अवसर प्रस्तुत करेगा। कहा, उल्लंघनों के लिए जवाबदेही और पीड़ितों के लिए न्याय आगे बढ़ने के लिए महत्वपूर्ण है। इसके साथ ही एक राष्ट्रीय उपचार प्रक्रिया की आवश्यकता होगी।

नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने यूएन जाँचकर्ताओं को उनके निष्कासन के साथ हुई हिंसा की जाँच करने के लिए आमंत्रित किया है। 84 वर्षीय यूनुस पिछले सप्ताह यूरोप से लौटे हैं और एक अस्थायी प्रशासन का नेतृत्व कर रहे हैं, जो लोकतांत्रिक सुधारों को आगे बढ़ाने की चुनौती का सामना कर रहा है।

इससे पहले, शुक्रवार को बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने प्रधानमंत्री मोदी को फोन किया और हिंदुओं की सुरक्षा का आश्वासन दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, “प्रोफेसर मुहम्मद यूनुस से टेलीफोन पर बात की। बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार ने मौजूदा स्थिति पर विचारों का आदान-प्रदान किया। लोकतांत्रिक, स्थिर, शांतिपूर्ण और प्रगतिशील बांग्लादेश के लिए भारत के समर्थन को दोहराया। उन्होंने बांग्लादेश में हिंदुओं और सभी अल्पसंख्यकों की सुरक्षा, संरक्षा और संरक्षा का आश्वासन दिया।”

बता दें कि बांग्लादेश में कई दिनों की अशांति और राजनीतिक उथल-पुथल के बाद अंतरिम सरकार का गठन हुआ। नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस ने देश में अंतरिम सरकार के प्रमुख के रूप में शपथ ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शपथ ग्रहण के बाद मुहम्मद यूनुस को बधाई दी थी और बांग्लादेश में हिंदुओं सहित सभी नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की माँग की थी।

दिनेश की जान ले ली, थाने के बाहर प्रदर्शन करने पहुँचे हिन्दू तो वहाँ भी कर दी पत्थरबाजी: जयपुर में MLA-IPS में कहासुनी, अब भी तनाव

जयपुर के शास्त्री नगर इलाके में दिनेश स्वामी नाम के युवक को पीटकर अधमरा कर दिया जाता है। पीटने वाले शाहरुख और उसके दोस्त फरार हो जाते हैं। दिनेश किसी तरह अपने घर पहुँचता है और हालत खराब होने पर घर वाले उसे लेकर अस्पताल भागते हैं, लेकिन रास्ते में उसकी मौत हो जाती है। इस घटना से गुस्साए लोग शनिवार (17 अगस्त 2024) को शास्त्री नगर थाने में प्रदर्शन कर रहे होते हैं, तभी थाने के बाहर से उन पर पत्थरबाजी कर दी जाती है। इसके बाद माहौल और बिगड़ जाता है। इस बीच, मौके पर पहुँचे बीजेपी विधायक और आईपीएस अधिकारी के बीच कहा-सुनी की भी सूचना मिल रही है। इस पूरे घटनाक्रम की वजह से जयपुर के माहौल के पूरी तरह से तनावपूर्ण होने की खबर है।

अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक, शास्त्री नगर इलाके में ई रिक्शा में सवार लोगों के साथ हुए झगड़े में दिनेश नाम के युवक की मौत के बाद इलाके में तनाव की स्थिति पैदा हो गई है। वहीं, थाने के बाहर लोगों ने धरना दे रहे समाज के लोगों पर पथराव कर दिया। बताया जा रहा है कि विधायक गोपाल शर्मा और हवामहल विधायक बाल मुकुंद आचार्य थाने पहुँचकर समझाइश कर रहे थे। तभी थाने के बाहर धरना दे रहे लोगों पर सामने के मकान से पथराव हुआ, जिसके जवाब में हिंदू समुदाय के लोगों ने भी पथराव किया। पुलिस ने थाने के बाहर बैठे दो युवकों को हिरासत में लिया है।

वहीं, सिविल लाइंस विधायक गोपाल शर्मा और आईपीएस राशि डोगरा के बीच नोकझोंक हो गई। विधायक और उनके सहयोगियों ने पुलिस पर बदतमीजी करने का आरोप भी लगाया। कहा गया कि आईपीएस राशि डोगरा बल प्रयोग करने की कोशिश कर रही हैं। सरकार और पीड़ित पक्ष के बीच सहमति बनाने का प्रयास जारी है। पीड़ित पक्ष एक करोड़ रुपये एक सरकारी नौकरी और एक डेयरी की माँग कर रहा है।

विधायक गोपल शर्मा ने कहा कि हम संवेदनशील है इसलिए हमारे ऊपर हमले होते हैं, लेकिन यह गुंडागर्दी अब अधिक दिनों तक नहीं चलेगी। उन्होंने पुलिस से कहा है कि आरोपी पर सख्त कार्रवाई हो। इस दौरान विधायक बालमुकुंद आचार्य ने कहा कि अपराधी बचेंगे नहीं।

बता दें कि  शुक्रवार रात करीब साढ़े आठ बजे शास्त्री नगर थाना क्षेत्र के आज़ाद नगर में ई-रिक्शा और एक स्कूटी चालक के बीच गाड़ी आगे पीछे करने को लेकर कहासुनी हो गई। इस दौरान ई-रिक्शा पर सवार कुछ युवकों ने स्कूटी सवार दिनेश स्वामी और उसके साथी जितेंद्र के साथ मारपीट की। मारपीट की इस घटना में दिनेश स्वामी गंभीर रूप से घायल हो गए। मारपीट के बाद दोनों पक्ष अपने-अपने घर चले गए। घर पहुँचने पर दिनेश को बेचैनी होने लगी। परिजन उसे तुरंत काँवटिया अस्पताल ले गए, जहाँ इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इसके बाद जमकर हंगामा हुआ।

पुलिस ने आरोपित शाहरुख को गिरफ्तार कर लिया है। उसके साथियों की तलाश की जा रही है। पुलिस ने लोगों से अफवाह न फैलाने की अपील की है। एडिशनल डीसीपी (नॉर्थ) बजरंग सिंह ने बताया है कि मृतक के शव का पोस्टमार्टम कराया गया है। पोस्टमार्टर रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

‘CM पद से इस्तीफा दें ममता बनर्जी, वो फेल हो गई हैं’: निर्भया की माँ ने कोलकाता रेप-हत्या केस में न्याय के लिए उठाई आवाज़, पूछा – मुख्यमंत्री होकर किसके खिलाफ मार्च कर रही थीं?

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के RG Kar मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में एक महिला डॉक्टर की बलात्कार और निर्मम हत्या के बाद पूरे देश के मेडिकल कर्मी हड़ताल पर हैं। इसी बीच ‘निर्भया’ की माँ ने अब इस प्रकरण पर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से इस्तीफा माँगा है। आशा देवी ने कहा कि ममता बनर्जी हालात को सँभालने में नाकाम रही हैं। याद हो कि 2012 में दिल्ली में ‘निर्भया’ (बदला हुआ नाम) के साथ एक बस में गैंगरेप हुआ था और उसके बाद उसकी हत्या कर दी गई थी।

आशा देवी ने स्पष्ट कहा कि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करने की बजाए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रही हैं, जनता का ध्यान भटकाने का प्रयास कर रही हैं। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी खुद एक महिला हैं, ऐसे में उन्हें इस मामले में मृतका के परिवार को न्याय दिलाना चाहिए था, दोषियों को सज़ा दिलवानी चाहिए थी। बता दें कि ममता बनर्जी ने इस घटना के विरोध में मौलाली से लेकर डॉरीना क्रॉसिंग तक पैदल मार्च किया था।

उन्होंने दोषियों को कड़ी सज़ा दिए जाने की माँग की थी। लोगों ने उनके इस मार्च पर सवाल उठाया था, क्योंकि वो न सिर्फ राज्य की CM हैं बल्कि स्वास्थ्य मंत्री और गृह मंत्री भी हैं। ‘निर्भया’ की माँ आशा देवी ने कहा कि जब कोलकाता के मेडिकल कॉलेज में इस तरह की घटना हो सकती है तो इसका मतलब है देश में महिलाएँ सुरक्षित नहीं हैं। फ़िलहाल CBI इस मामले की जाँच कर रही है, कोलकाता पुलिस ने सिर्फ एक व्यक्ति को गिरफ्तार कर के इतिश्री कर ली थी।

आशा देवी ने कहा कि उन्हें बहुत दुःख होता है कि 12 वर्षों के बाद भी हमारी बच्चियाँ इसी हालात में हैं, घटना के 5 दिन बाद भी आरोप-प्रत्यारोप चल रहा है। उन्होंने गुंडों द्वारा आधी रात को अस्पताल में घुस कर प्रदर्शनकारियों से मारपीट वाली घटना पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पतालों में अक्सर डॉक्टरों को ही पीट दिया जाता है, ऐसे में पुरुष डॉक्टर की भी मौत हो सकती है। उन्होंने पूछा, “ममता बनर्जी CM होकर भी किसके खिलाफ मार्च कर रही हैं। ”

केंद्र सरकार ने की हड़ताली डॉक्टरों से काम पर लौटने की अपील, सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बनेगा पैनल: देश भर में स्वास्थ्य सेवाएँ प्रभावित

कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज में महिला डॉक्टर के रेप-मर्डर के बाद देशभर के डॉक्टर हड़ताल पर हैं। ओपीडी सेवाएं ठप हो चुकी हैं और मरीजों को बहुत दिक्कतों का सामना करना पड़ा है। इस हड़ताल का नेतृत्व आईएमए कर रहा है, जिसमें आईएमए ने इमरजेंसी सेवाओं को छोड़कर बाकी सभी सेवाएँ ठप करने का निर्देश अस्पतालों को दिया है। इस बीच, केंद्र सरकार ने डॉक्टरों से हड़ताल को खत्म करने की अपील की है। केंद्र सरकार ने कहा है कि वो अस्पतालों में डॉक्टरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक पैनल गठित किया जा रहा है, जिसमें डॉक्टरों की सभी परेशानियों को दूर करने का प्रयास किया जाएगा।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, केंद्र सरकार ने कहा है कि इस पैनल में राज्य सरकारों सहित सभी संबंधित हितधारकों के सुझाव शामिल होंगे, जिन्हें अपने सुझाव साझा करने के लिए आमंत्रित किया जाएगा। सरकार की तरफ से यह आश्वासन तब मिला है जब आईएमए के आह्वान पर देशभर के डॉक्टर 24 घंटे की देशव्यापी हड़ताल कर रहे हैं।

देशभर में डॉक्टरों की हड़ताल का असर दिख रहा है। जोधपुर में करीब 200 से ज्यादा ऑपरेशन्स को स्थगित करना पड़ा, वहीं भोपाल में सैकड़ों डॉक्टरों ने काम बंद कर दिया है। इस हड़ताल के कारण कई अस्पतालों में मरीजों को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। ओपीडी और ओटी सेवाएं भी ठप हो गई हैं, और केवल इमरजेंसी सेवाओं को ही जारी रखा गया है।

बता दें कि 9 अगस्त को कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज में एक प्रशिक्षु डॉक्टर के साथ हुए रेप और मर्डर की घटना के बाद 14 अगस्त को इसी अस्पताल में हिंसा हुई थी। इसके बाद आईएमए ने देशभर में विरोध प्रदर्शन की घोषणा की। इस घटना के बाद से पश्चिम बंगाल सरकार की कार्रवाई पर भी सवाल उठ रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि जब तक उनकी सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होती, तब तक हड़ताल जारी रहेगी।

आईएमए के प्रमुख ने कहा है कि अस्पतालों में केवल आपातकालीन सेवाएं ही जारी रहेंगी। उन्होंने केंद्र सरकार से डॉक्टरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। आईएमए का कहना है कि डॉक्टरों की जान की हिफाजत उनका मौलिक अधिकार है। उन्होंने यह भी कहा कि हम ऐसी कोई मांग नहीं कर रहे हैं, जिसे सरकार पूरा न कर सके। डॉक्टरों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।

खुर्रम और किजार शहजाद ने सिख महिला का अपहरण किया, बंधक बना कर 9 महीने तक करते रहे गैंगरेप: पाकिस्तान में हैवानियत, ननकाना साहिब की है पीड़िता

पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की क्या स्थिति है, ये किसी से छिपी नहीं है। लाहौर समेत पाकिस्तान के कब्जे वाले पंजाब में सिख महिलाओं के साथ मुस्लिमों के अत्याचार की वारदातें सामने आती रही हैं। कहीं, सिख लड़कियों को अगवा कर उन्हें मुस्लिम बना देना और उनके साथ अधेड़ मुस्लिम का निकाह करा देना, तो कहीं नई नवेली दुल्हन को अगवा कर लेना। इस बीच, पाकिस्तान के ननकाना साहिब की रहने वाली एक सिख महिला को 2 सगे भाईयों ने अगवा कर लिया और करीब 9 महीने तक उसके साथ गैंगरेप करते रहे। यही नहीं, इस दौरान उन्होंने महिला के नाबालिग बच्चे को भी बंदी बनाकर रखा।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पीड़ित महिला ननकाना साहिब की रहने वाली है। वो तलाकशुदा है। महिला की मुस्लिम सहेली ने सालों पहले उसकी पहचान खुर्रम शहजाद नाम के व्यक्ति से कराई थी। करीब 9 महीने पहले महिला ने अपने नाबालिग बेटे को फैसलाबाद उसकी मौसी के घर छोड़ने के लिए खुर्रम शहजाद के हवाले किया था, लेकिन खुर्रम शहजाद ने अपने भाई किजार के साथ मिलकर नाबालिग लड़के को अगवा कर लिया और महिला को फैसलाबाद के बाहरी इलाके सोहैबाबाद आने को मजबूर किया। महिला जब अपने बच्चे को लेने पहुँची, तो दोनों भाईयों ने उसे भी बंदी बना लिया।

खुर्म और किजार शहजाद ने पिछले 9 महीनों से उसे बंदी बनाकर गैंगरेप किया। इस मामले की खुलासा तब हुआ, जब किसी तरह से ये सूचना पुलिस तक पहुँची। पुलिस ने छापेमारी करते हुए 14 अगस्त 2024 को महिला और उसके बच्चे को बरामद किया और खुर्रम-किजार को गिरफ्तार कर लिया है। बताया जा रहा है कि महिला के रिश्तेदान की शिकायत पर ये कार्रवाई की गई, जहाँ महिला को दिसंबर 2023 से ही बंधक बनाकर रखा गया था और गैंगरेप किया जा रहा था। दोनों महिला को प्रताड़ित भी करते थे, ताकि वो किसी तरह का विरोध न कर सके।

बता दें कि पाकिस्तान के आजादी वाले दिन ही 14 अगस्त को ही बेल्जियम की एक महिला के साथ गैंगरेप की घटना सामने आई थी, जहाँ गैंगरेप के बाद महिला का हाथ-पाँव बाँधकर सड़क पर मरने के लिए फेंक दिया गया था। ये दोनों ही घटनाएँ एक के बाद एक सामने आई हैं।

बजरंग पूनिया ने तिरंगा को जूते तले कुचला, वहीं पर थे कॉन्ग्रेस सांसद दीपेंदर हुड्डा: विनेश फोगाट के बहाने गर्माई हरियाणा की राजनीति, गाँव में भी सजा पंडाल

तय मानक से अधिक वजन होने के कारण ओलंपिक फाइनल में हिस्सा लेने से अयोग्य घोषित की जा चुकीं भारतीय पहलवान विनेश फोगाट का शनिवार (17 अगस्त, 2024) को दिल्ली एयरपोर्ट पर स्वागत किया गया। इस दौरान जंतर-मंतर के ‘पहलवान आंदोलन’ में दिखे चेहरे साक्षी मलिक और बजरंग पूनिया भी वहाँ मौजूद थे। वहीं रोहतक से चौथी बार सांसद बने दीपेंदर सिंह हुड्डा भी इस दौरान गाड़ी पर मौजूद थे। इन्होंने गाड़ी पर खड़े होकर रैली भी निकाली।

इस दौरान लोगों ने कुछ ऐसा देखा, जिसके बाद बजरंग पूनिया की जम कर आलोचना होने लगी। असल में देखा गया कि रैली के दौरान बजरंग पूनिया कार की बोनट पर खड़े थे। वो जहाँ खड़े थे, वहाँ नीचे राष्ट्रध्वज तिरंगा का निशान बना हुआ था। कार की बोनट पर जहाँ तिरंगा का निशान बना हुआ था, वहीं पर जूते रख कर बजरंग पूनिया खड़े थे। कार भीड़ के बीच एयरपोर्ट के बाहर निकलने की कोशिश कर रही थी। इसी दौरान बजरंग पूनिया इससे लापरवाह दिखे कि वो तिरंगे को जूते से कुचल रहे हैं।

सबसे बड़ी बात कि इस दौरान वहाँ खड़े दीपेंदर हुड्डा, साक्षी मलिक या फिर विनेश फोगाट तक ने भी उन्हें रोकने तक की कोशिश नहीं की। इस दौरान लगातार नारेबाजी भी हो रही थी। वहीं मीडिया वाले भी लगातार हंगामा कर रहे थे। अंत में बजरंग पूनिया ने मीडियाकर्मियों की माइक लेकर विनेश फोगाट के सामने रख दिया। वहीं बजरंग पूनिया के समर्थक उनका बचाव करते हुए इसे अनजाने में हुई गलती बता रहे हैं। लेकिन, सवाल ये है कि फिर राष्ट्रध्वज बोनट पर चस्पाया ही क्यों गया था?

वहीं विनेश फोगाट ने कहा कि हमारी लड़ाई अभी तक खत्म नहीं हुई है। हरियाणा के बलाली गाँव में भी विनेश फोगाट के स्वागत के लिए तैयारियाँ की गई हैं। विनेश फोगाट ने कहा कि पहलवान आंदोलन के दौरान की वो अपनी तस्वीरें देखती हैं तो उन्हें बहुत दुःख होता है। वहीं विनेश फोगाट के कोच वॉलर एकॉस ने कहा है कि उन्हें लगता था कि वजन घटाने के चक्कर में विनेश फोगाट की मौत भी हो सकती है। बता दें कि विनेश का वजन मात्र 100 ग्राम अधिक रह गया था जिस कारण उन्हें बाहर कर दिया गया।

तुर्किए की संसद में लात-घूसे, फर्श पर फैल गया खून: सांसद को ‘आतंकवादी’ कहने शुरू हुआ विवाद, पूर्व फुटबॉलर ने बरसाए मुक्के

तुर्किए की संसद में सांसद आपस में ही भिड़ गए। मारपीट के दौरान सत्ता और विपक्ष दोनों तरफ के सांसदों में जम कर लात और घूँसे चले। इस मारपीट में दर्जनों सांसद शामिल रहे। इस दौरान कई सांसद बचाव भी करते दिखे। बताया जा रहा है कि तुर्किए की संसद की फर्श में हर तरफ खून बिखरा दिखा।

रायटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ये बवाल उस समय शुरू हुआ जब एक विपक्षी डिप्टी पर हमला किया गया, क्योंकि उसने अपने सहयोगी को संसद में शामिल करने के लिए कहा था, जो सरकार विरोधी प्रदर्शनों की साजिश रचने के आरोप में जेल में बंद था और फिर सांसद चुना गया था। वीडियो फुटेज में साफ दिखा कि सत्तारूढ़ एकेपी पार्टी के सांसद पोडियम पर खड़े अहमत सिक को मुक्का मारने के लिए दौड़े। इसके तत्काल बाद दर्जनों अन्य सांसद इस मारपीट और हाथापाई में शामिल हो गए, जबकि कुछ सांसदों ने दूसरों को रोकने की कोशिश की।

संसद में हंगामा तब शुरू हुआ, जब सत्तारूढ़ एकेपी पार्टी के सदस्य अल्पे ओजालान ने वामपंथी वर्कर्स पार्टी ऑफ तुर्किए के सांसद अहमत सिक पर हमला किया। जिन्होंने केन अताले के साथ सरकार के व्यवहार की निंदा की थी। उन्होंने कहा कि “यह कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि आप अताले को आतंकवादी कहते हैं।” उन्होंने सत्तारूढ़ बहुमत की ओर इशारा करते हुए कहा कि “सभी नागरिकों को पता होना चाहिए कि इस देश के सबसे बड़े आतंकवादी उन बेंचों पर बैठे लोग हैं।” संसद में मौजूद एक शख्स ने बताया कि पूर्व फुटबॉलर ओजालान मंच पर आए और सिक को धक्का देकर जमीन पर गिरा दिया।

इस दौरान राष्ट्रपित एर्दोगन संसद में मौजूद नहीं थे। बताया जा रहा है कि स्पीकर के पोडियम की सफेद सीढ़ियों पर खून के छींटे पड़े देखे गए, जिसे बाद में संसद के कर्मचारियों ने साफ किया। करीब आधे घंटे तक चले इस हंगामे में कम से कम दो सांसद गंभीर रूप से घायल हो गए, जिसकी वजह से संसद की कार्यवाही रोकनी पड़ी।

‘रहीम शेख’ (बदला हुआ नाम) के घर पर चला बुलडोजर, बेटे ने हिन्दू छात्र को चाकू से गोद डाला था: ICU में जूझ रहे पीड़ित के लिए CM भजनलाल शर्मा ने भेजी डॉक्टरों की टीम

राजस्थान में भाजपा के सत्ता में आने और भजनलाल शर्मा के मुख्यमंत्री बनने का असर अब साफ़ दिख रहा है। देवराज नामक हिन्दू छात्र को चाकू गोदने वाले मुस्लिम किशोर के घर पर अब बुलडोजर चला है। देवराज अभी भी अस्पताल में जीवन और मौत के बीच जूझ रहा है। दीवान शाह अली कॉलोनी स्थित ‘रहीम शेख’ (बदला हुआ नाम) के घर पर बुलडोजर चला। इस दौरान नगर निगम और वन विभाग के कर्मियों के अलावा बड़ी संख्या में पुलिस बल की तैनाती रही।

नगर निगम के कर्मचारियों ने बुलडोजर चलाने से पहले घर से सारा सामान निकाल कर बाहर किया, फिर घर की बिजली काटी गई। बता दें कि ‘रेहान शेख’ (बदला हुआ नाम) ने अपने क्लासमेट पर ही हमला कर दिया था। हमले से 3 दिन पहले का एक व्हाट्सएप्प चैट भी सामने आया है, जिसमें आरोपित किसी अन्य दोस्त के साथ कर पीड़ित पर हमला करने की साजिश रच रहा है। उदयपुर में धारा-163 लागू किए जाने के साथ-साथ ही 24 घंटे के लिए इंटरनेट भी सस्पेंड किया गया है।

शुक्रवार (16 अगस्त, 2024) की इस घटना के बाद शहर में कई जगह आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाएँ हुई हैं, कारों को भी आग के हवाले कर दिया गया। जाँच में पता चला कि उक्त घर वन विभाग की जमीन पर बना हुआ है। वन विभाग ने घर पर नोटिस चस्पा कर अतिक्रमण हटाने के लिए भी कहा था। JCB की कार्रवाई के दौरान कई लोग वहाँ जमा हो गए। दोनों छात्र 10वीं कक्षा में पढ़ते हैं। इस घटना के कारण शहर के सारे स्कूल भी बंद रहे।

शिक्षा विभाग ने आदेश जारी किया है कि स्कूलों में चाकू, कैंची, कोई अन्य धारदार हथियार या किसी प्रकार की भी नुकीली चीज बच्चों को न लाने दिया जाए। साथ ही विद्यार्थियों के बैग्स की नियमित तौर पर जाँच का आदेश भी दिया गया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देश पर 3 डॉक्टरों की विशेष टीम घायल छात्र का उपचार करने आई है, जिसमें एक किडनी विशेषज्ञ भी शामिल हैं। वो फ़िलहाल ICU में है। बीच में उसकी मौत की अफवाह भी उड़ी, जिसे पुलिस ने नकारा है।

मदरसों में गैर-मुस्लिम बच्चों को शिक्षा देने पर रोक, फर्जीवाड़ा पाए जाने पर मान्यता होगी रद्द: मध्य प्रदेश के हर मदरसे की जाँच के आदेश

मध्य प्रदेश के भिंड, मुरैना, श्योपुर, रीवा सहित कई जिलों के मदरसों में सरकारी अनुदान हासिल करने के लिए बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा चल रहा है। खुलासे के बाद श्योपुर के 80 में से 56 मदरसों की मान्यता रद्द कर दी गई है। अब मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार ने शिक्षा विभाग को राज्य के सभी मदरसों का भौतिक सत्यापन करने के लिए कहा है। हिंदू बच्चों उनका पंजीकरण रद्द होगा।

सत्यापन के दौरान किसी भी मदरसे में फर्जी तरीके से गैर-मुस्लिम या मुस्लिम बच्चों के नाम पाए जाते हैं या बच्चों को उनके अभिभावकों की अनुमति के बिना धार्मिक शिक्षा दी जा रही होगी तो उनकी मान्यता रद्द की जाएगी। स्कूल शिक्षा विभाग ने शुक्रवार (16 अगस्त 2024) को यह नोटिस जारी किया है। यह राज्य की मोहन यादव सरकार ने आदेश जारी किया है।

जारी आदेश में कहा गया है कि यह विषय राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) नई दिल्ली द्वारा संज्ञान में लाया गया है कि प्रदेश के मदरसों में शासकीय अनुदान प्राप्त किए जाने के उद्देश्य से अनेक गैर मुस्लिम बच्चों के नाम फर्जी रूप से छात्र/छात्राओं के रूप में दर्ज हैं। इसका शीघ्र सत्यापन कराए जाने की जरूरत है। 

स्कूली शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने कहा कि मदरसों में पढ़ने वाले छात्रों के भौतिक सत्यापन की रिपोर्ट जल्द देने को निर्देश दिए हैं। गैर-मुस्लिमों को शिक्षा देने या मुस्लिम बच्चों के नाम फ़र्ज़ी तरीके से दर्ज करने या किसी भी धर्म के बच्चे को बिना अभिभावकों की अनुमति के दीनी तालीम देने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

बता दें कि इस महीने के शुरू में मध्य प्रदेश के भिंड, मुरैना, श्योपुर, रीवा आदि जिलों के मदरसों में सरकारी अनुदान हासिल करने के लिए बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े का पता चला था। मदरसों की रजिस्टर में फर्जी तरीकों से अधिक से अधिक बच्चों का नामांकन दिखाया गया था। इनमें कई हिंदू बच्चे भी शामिल थे। खुलासे के बाद श्योपुर के 80 में से 56 मदरसों की मान्यता रद्द कर दी गई थी।

रिपोर्ट के मुताबिक, जिन हिंदू बच्चों का दाखिला मदरसे में दिखाया गया थे, वे सरकारी या प्राइवेट स्कूलों में पढ़ते हैं। ये कभी मदरसा नहीं गए। इन बच्चों के माता-पिता को भी पता नहीं है कि उनके बच्चों का नाम मदरसों में दर्ज है। दरअसल, मदरसा संचालकों ने इन बच्चों की ‘समग्र’ आईडी जुटाकर मदरसे में फर्जी तरीके से एडमिशन दिखाया है। इस तरह यहाँ पढ़ने वाले छात्रों में मुस्लिमों से अधिक हिंदू हैं।

ये सारा मसला राज्य सरकार से मिलने वाले फंड को लेकर है। मध्य प्रदेश में सरकार की ओर से मदरसों में पढ़ने वाले 100 बच्चों के लिए हर महीने 50,000 रुपए से 60,000 रुपए तक की मदद दी जाती है। इसके अलावा भी मध्य प्रदेश की सरकार की ओर से इन मदरसों को कई अन्य तरह की मदद दी जाती है। इनमें शिक्षकों को तनख्वाह से लेकर अनाज भी शामिल है।

अगर किसी मदरसे में 100 बच्चे हैं और हर महीने उनकी उपस्थिति 70 प्रतिशत रहती है तो फि 2.10 क्विटंल गेहूँ, खाना बनाने के लिए 11440 रुपए, रसोइए को देने के लिए 4,000 रुपए का महीना जैसी सुविधाएँ मिलती हैं। इसके अलावा, इन मदरसों में पढ़ाने वाले स्नातक शिक्षक को 3000 हजार रुपए और पोस्ट ग्रेजुएट को 6,000 रुपए मासिक का वेतन मिलता है।

भिंड के बीटीआई रोड इलाके में संचालित मदरसा हुसैनी फॉर ऑनली गर्ल्स में कुल 77 बच्चे हैं, जिनमें 44% हिंदू हैं। भिंड के 11 महावीर नगर में बीटीआई स्कूल के पीछे अलीमुद्दीन के मकान में संचालित मदरसा दीन-ए-अकबर और हुसैनी प्रोग्राम फॉर ऑनली गर्ल्स में 83 विद्यार्थी हैं, जिनमें 53 प्रतिशत छात्र हिंदू हैं। भिंड के सुभाष नगर में संचालित मदरसा मस्जिद नवी में 87 छात्र हैं, जिनमें 44% हिंदू हैं।

अगर भिंड और मुरैना में मदरसों की बात करें तो इन मुरैना में 70 और भिंड में 67 मदरसे चल रहे हैं। दोनों जिलों के कुल 137 मदरसों में 3,880 हिंदू बच्चों के नाम अंकित हैं। उल्लेखनीय है कि प्रदेश में सबसे अधिक मुस्लिम आबादी बुरहानपुर जिले की है, फिर भी वहाँ 23 मदरसे हैं। यह फर्जीवाड़ा अनुदान और मिड डे मील का अनाज एवं पैसा हड़पने के लिए किया जा रहा है।

वहीं, श्योपुर जिले के मदरसों में हिंदू बच्चों के नाम सरकारी मदद लेने के खुलासे के बाद मंगलवार (30 जुलाई 2024) को यहाँ से 80 में से 56 मदरसों पर यह कड़ी कार्रवाई की गई है। इनकी मान्यता रद्द कर दी गई है। इसके साथ ही स्कूली शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप ने सभी जिलों में संचालित मदरसों की भौतिक सत्यापन की जाँच में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं।

यहाँ कई ऐसे छात्र हैं, जिनका नाम साल 2004 में भी दर्ज था और फिर 2018 एवं 2023 में भी उनका शामिल किया गया है। यहाँ के मदरसे में छात्र के रूप में एक नाम मानव गोयल का भी है, जो सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं। प्रिया मित्तल डॉक्टर हैं। ज्योत्सना गोयल भी डॉक्टर हैं। इनका भी नाम इन मदरसों में दर्ज है। ऐसे अनेकों नाम पर जिन पर सरकार से अनुदान और खाद्यान्न लिए जा रहे थे।