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घास काटने गई बच्ची से नदीम ने साथियों संग किया गैंगरेप, पंचायत ने सुनाया ₹2000 में मामले को रफ़ा-दफ़ा करने का फरमान, अब तक मिल रही है धमकी

बिहार के दरभंगा में 13 साल की एक बच्ची से गैंगरेप का मामला सामने आया है। इस मामले में मोहम्मद नदीम सहित कुल 4 आरोपितों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। आरोपितों ने पीड़िता को चाकू दिखा कर सामूहिक बलात्कार किया था। आरोपित फरार हैं जिसकी तलाश में दबिश दी जा रही है। लगभग 10 दिन पुरानी इस घटना को कुछ लोगों द्वारा समझौते के नाम पर दबाने का प्रयास किया गया था। स्थानीय थाने की पुलिस पर भी कार्रवाई में ढिलाई बरतने का आरोप लगा है। घटना शनिवार (3 अगस्त, 2024) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना दरभंगा के थाना क्षेत्र बड़ागाँव की है। यहाँ के एक गाँव में 3 अगस्त, 2024 को 13 साल की एक नाबालिग लड़की पशुओं के लिए घास काटने सहेली के साथ खेतों में गई थी। वापसी में उसका गट्ठर खुल गया तो उसने सहेली से अपनी माँ को भेजने की बात कहते हुए भेज दिया। लड़की को अकेला देख कर मोहम्मद नदीम अपने 3 साथियों के साथ वहाँ पहुँचा। उसने पीड़िता को चाकू दिखाया और घसीट कर दूर बगीचे में ले गया। यहाँ चारों ने बारी-बारी पीड़िता से गैंगरेप किया।

रेप के दौरान पीड़िता ने चीखने का प्रयास किया तो उसके मुँह को गमछा रख कर बंद कर दिया गया। नाबालिग को कोल्डड्रिंक में नशा भी दिया गया। रेप के बाद आरोपितों ने लड़की को बेहोशी की हालत में सड़क के किनारे छोड़ दिया। कुछ स्थानीय लोगों ने पीड़िता को जैसे-तैसे उसके घर पहुँचाया। बताया जा रहा है कि लड़की के परिजनों ने 4 अगस्त को इस मामले की सूचना गाँव के पंचायत को दी। पंचायत ने फैसला खुद करने की बात करते हुए नाबालिग के घर वालों को 2000 रुपए ले कर मामले को रफा-दफा करने के लिए कहा।

पंचायत में आरोपितों का पक्ष लिया गया। पंचायत के इस फैसले के बाद 3 दिन तक पीड़िता के परिवार वाले चुप रहे। हालाँकि, उन्हें यह फैसला मंजूर नहीं था जिसके चलते उन्होंने 7 अगस्त (बुधवार) को थाना बड़ागाँव में नदीम व 3 अन्य अज्ञात सहित 4 शिकायत दर्ज करवाई। 8 अगस्त को पुलिस और FSL की टीम गाँव में पहुँची और जाँच पड़ताल शुरू की। आरोप है कि थाना स्तर पर पुलिस ने भी कार्रवाई में ढिलाई बरती और 4 दिनों तक पीड़िता का मेडिकल टेस्ट नहीं करवाया। परिजनों के मुताबिक 2 दिनों तक बेहोश रही पीड़िता के गले पर खरोंच के निशान थे और गुप्तांग में सूजन आ गई थी।

पुलिस पर लगे आरोपों पर दरभंगा की एसपी ग्रामीण काव्या मिश्रा ने सफाई दी है। उन्होंने बताया कि 9 अगस्त को पीड़िता और उसकी माँ को थाने बुलाया गया लेकिन अगले 2 दिन शनिवार और रविवार पड़ जाने की वजह से उन्हें वहीं रख लिया गया। सोमवार (12 अगस्त, 2024) को कोर्ट के समक्ष पीड़िता के 164 के बयान दर्ज हुए। पीड़िता का मेडिकल परीक्षण भी करवाया गया है जिसमें अल्ट्रासॉउन्ड भी शामिल है। हालाँकि दरभंगा के एसएसपी IPS जगुनाथ रेड्डी जलारेड्डी ने थाना स्तर पर लापरवाही होने की बात स्वीकारी है। उन्होंने कहा कि वो इसकी जाँच करवा के दोषी पुलिस वालों पर कार्रवाई करेंगे।

पुलिस का कहना है कि मामले की जाँच और अन्य जरूरी कार्रवाई की जा रही है। अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं की गई है। नामजद आरोपित और पीड़िता एक ही समुदाय के हैं। पीड़िता के गाँव के मुखिया ने अपनी सफाई में कहा है कि पंचायत स्तर पर 2 दिन तक आरोपितों की पहचान के प्रयास किए जा रहे थे। उन्होंने आगे बताया कि 2 दिनों में पीड़िता को कई तस्वीरें दिखा का एक आरोपित की पहचान की गई थी। हालाँकि, पीड़िता के घर वालों का आरोप है कि रसूखदार आरोपितों से उन्हें केस वापस लेने की धमकियाँ मिल रहीं हैं।

ममता बनर्जी की कोलकाता पुलिस ने TMC सांसद सुखेंदु शेखर को ‘गलत जानकारी’ का भेजा नोटिस: RG कर हॉस्पिटल रेप मामले में जाँच पर लिखा था पोस्ट

आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल महिला डॉक्टर की बलात्कार के बाद हत्या के मामले में फेक न्यूज फैलाने का आरोप लगाकर कोलकाता पुलिस ने तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रे को नोटिस भेजा है। दरअसल, सुखेंदु ने CBI से कोलकाता पुलिस आयुक्त और आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के पूर्व प्रिंसिपल को हिरासत में लेकर पूछताछ की माँग की थी।

सुखेंदु शेखर रे ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर एक पोस्ट किया था। इसमें इस भयावह अपराध की जाँच को लेकर कई सवाल उठाए गए थे। उन्होंने दावा किया था कि घटना के 3 दिन बाद घटनास्थल पर खोजी कुत्ते का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने इस देरी का कारण पूछा। उन्होंने यह भी सवाल किया कि मुख्य आरोपित संजय रॉय को किसके संरक्षण में इतना शक्तिशाली बना था।

सुखेंदु शेखर रे की पोस्ट

उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा, “सीबीआई को निष्पक्ष रूप से काम करना चाहिए। पूर्व प्रिंसिपल और पुलिस कमिश्नर को हिरासत में लेकर पूछताछ करना ज़रूरी है, ताकि पता चल सके कि आत्महत्या की कहानी किसने और क्यों फैलाई। हॉल की दीवार को क्यों ढहाया गया। इस तरह के सैकड़ों प्रश्न है, जो पूछा जाना चाहिए।”

पुलिस ने कहा कि सुखेंदु शेखर रे का यह दावा कि अपराध स्थल पर तीन दिन बाद खोजी कुत्तों को भेजा गया था, ‘गलत सूचना’ है। कोलकाता पुलिस ने कहा, “यह जानकारी कि खोजी कुत्ता तीन दिन बाद भेजा गया, पूरी तरह से गलत है। खोजी कुत्ता दो बार भेजा गया था, 9 तारीख को और फिर 12 (अगस्त) को। सुखेंदु शेखर रे को बीएनएस की धारा 35(1) के तहत नोटिस भेजा गया है।”

इससे पहले सुखेंदु शेखर इस घटना के विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए थे और पार्टी की नराजगी मोल ली थी। अब उनके पोस्ट से वे TMC नेता भड़क गए हैं। TMC के वरिष्ठ नेता कुणाल घोष ने डॉक्टर रेप-मर्डर केस में कोलकाता के पुलिस आयुक्त से पूछताछ की माँग करने पर सुखेंदु शेखर रे की आलोचना की और कहा कि वे इस माँग का पुरजोर विरोध करते हैं।

कुणाल घोष ने दावा किया कि कोलकाता पुलिस कमिश्नर विनीत कुमार गोयल ने इस मामले में अपनी तरफ से पूरी कोशिश की और वह खुद इस मामले को सँभाल रहे हैं। TMC नेता घोष ने आगे कहा कि इस तरह की पोस्ट, वह भी एक वरिष्ठ पार्टी नेता की तरफ से, बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।

उल्लेखनीय है कि कुणाल घोष ने आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष का बचाव नहीं किया। यहाँ बताना जरूरी है कि कलकत्ता हाई कोर्ट ने मामले को ठीक से नही सँभालने और भीड़ को अस्पताल में तोड़फोड़ करने की अनुमति देने के लिए पुलिस की कड़ी आलोचना की है। अदालत ने पुलिस को इस बात के लिए भी आड़े हाथों लिया कि वह भीड़ से खुद को भी नहीं बचा पाई।

उल्लेखनीय है कि अस्पताल में तोड़फोड़ करने के आरोप में कई टीएमसी समर्थकों को गिरफ्तार किया गया है। भीड़ तीसरी मंजिल पर स्थित सेमिनार रूम में जाना चाहती थी, जहाँ पीड़िता का शव मिला था। हालाँकि, मंजिल संख्या को लेकर भ्रम के कारण उन्होंने दूसरी मंजिल पर तोड़फोड़ की। वहीं, पुलिस बाथरूम में और विरोध कर रहे मेडिकल छात्रों के पीछे छिपी हुई थी।

सिराज अहमद की छेड़खानी से तंग आकर कक्षा 9 की छात्रा ने अपनी ही गर्दन पर चलाया धारदार हथियार, वायरल वीडियो देखने के लिए कलेजा चाहिए

मध्य प्रदेश के सीधी जिले में मुस्लिम युवक द्वारा आए दिन की जा रही छेड़खानी से तंग आकर एक लड़की ने खुद की गर्दन काटने का प्रयास किया है। आरोपित का नाम सिराज अहमद है, जिसको लोगों ने पकड़ कर पुलिस के हवाले कर दिया है। गंभीर हालत में पीड़िता को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। घटना शुक्रवार (16 अगस्त 2024) की है। पुलिस मामले की जाँच कर रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह घटना सीधी जिले के थानाक्षेत्र चुरहट में आने वाले सेमरिया की है। यहाँ शुक्रवार को कक्षा 9 में पढ़ने वाली पीड़िता के परिजनों ने पुलिस में तहरीर दी है। शिकायत में उन्होंने बताया है कि कुछ दिनों पहले एक शादी समारोह में पीड़िता और आरोपित की मुलाकात हुई थी। इसी दौरान सिराज अहमद ने पीड़िता का नंबर ले लिया। वह अक्सर पीड़िता को कॉल करने लगा। साथ ही सिराज लड़की के गाँव और स्कूल के आए दिन चक्कर लगाने लगा। रास्ते में वह लड़की को परेशान करते हुए फब्तियाँ कसता था।

लड़की द्वारा कई बार मना करने के बावजूद सिराज की हरकतों में कोई सुधार नहीं हुआ। धीरे-धीरे आरोपित की हरकतें बढ़ने लगीं और वो पीड़िता के स्कूल में घुस कर बदतमीजी करने लगा। शुक्रवार को भी आरोपित ने यही हरकत दोहराई। आखिरकार परेशान होकर पीड़िता स्कूल से बाहर निकली। उसने बाहर निकल कर जूता बनाने वाले एक दुकानदार के यहाँ से धारदार हथियार उठाया और अपनी ही गर्दन पर ताबड़तोड़ वार कर डाले। छात्रा की सहेलियों ने पीड़िता को रोकने की काफी कोशिश की लेकिन वो नाकाम रहीं।

इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में अपनी गर्दन पर कई वार करने के बाद आखिरकार पीड़िता जमीन पर गिर पड़ीं। अन्य छात्राओं ने अपनी सहेली को संभालने का प्रयास किया। पीड़िता को आसपास के लोगों ने अस्पताल में भर्ती करवाया है, जहाँ उनकी हालत गंभीर बनी हुई है।

स्कूल के बाहर मौजूद लोगों ने सिराज अहमद को दौड़ा कर पकड़ लिया। पकड़े जाने पर सिराज अहमद हाथ पैर जोड़ कर भागने की फिराक में था। पुलिस बुला कर आरोपित को सौंप दिया गया। पीड़िता के परिजनों की शिकायत के आधार पर सिराज को BNS (भारतीय न्याय संहिता) की विभिन्न धाराओं के तहत गिरफ्तार कर लिया गया है।

साबरमती एक्सप्रेस बेपटरी मामले में आतंकी साजिश, जाँच के लिए पहुँची ATS: रेल पटरी के टुकड़े को ट्रैक पर रखा गया, पेंच और गार्टर से कसा गया, वेल्डिंग के भी निशान

कानपुर में साबरमती एक्सप्रेस (19168) के 22 डिब्बे पटरी से उतरने के मामले में आतंकी साजिश की आशंका बढ़ती जा रही है। जिस तरह से पटरी से छेड़खानी की गई थी, उससे लगता है कि ट्रेन को पलटने और अधिक-अधिक लोगों को हताहत करने का साजिश थी। हालाँकि, ट्रेन पटरी से उतरी, लेकिन कोई हताहत नहीं हुआ। इस मामले में अब IB के बाद अब ATS भी जाँच में जुड़ गई है।

इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के बाद अब एंट्री टेररिस्ट स्कवॉयड (ATS) की टीम जाँच के लिए कानपुर पहुँची है। इस मामले में जूही के सीनियर सेक्शन इंजीनियर महेंद्र प्रताप सिंह सिसोदिया ने पनकी थाने में FIR दर्ज कराई है। FIR में कहा गया है कि ट्रैक पर पटरी का टुकड़ा रखा गया था। इसकी टक्कर के बाद ट्रेन पटरी से उतरी। रेल मेंत्री अश्विनी वैष्णव ने भी यही बात कही थी।

हादसे के बाद वैष्णव ने कहा था कि ट्रेन का इंजन पटरी पर रखी किसी भारी चीज से टकराया था। इंजन पर टकराने के निशान हैं और IB अपना काम कर रही है। वहीं, रेलवे के अधिकारियों का कहना है कि साजिश का शक इसलिए भी है कि साबरमती एक्सप्रेस के आने से 1 घंटा 20 मिनट पहले इसी ट्रैक से पटना एक्सप्रेस गुजरी थी। उस समय लाइन क्लीयर थी।

FIR में कहा गया है कि साबरमती एक्सप्रेस वाराणसी से अहमदाबाद जा रही थी। इसे लोको पायलट एपी बुंदेला चला रहे थे। 17 अगस्त की रात ट्रेन 2.27 बजे गोविंदपुरी-भीमसेन स्टेशन के पास पहुँची। 1338/21-19 KM पॉइंट पर मध्य अप लाइन में भारी वस्तु दिखाई दी। देखते ही लोको पायलट/सह लोको पायलट ने इमरजेंसी ब्रेक लगाया, लेकिन भारी वस्तु इंजन के कैटल गार्ड से टकरा गई।

टक्कर के कारण कैटल गार्ड मुड़ गया। इसके अलावा आगे के पहिए और 22 बोगी पटरी से उतर गए। लोको पायलट ने झाँसी कंट्रोल रूम को 2.30 बजे इसकी सूचना दी। वहाँ पुरानी रेल का टुकड़ा मिला।इसमें फ्रेश हीटिंग के निशान मिले। इससे लगता है कि पटरी से उतारने के लिए लोहे के टुकडे़ को ट्रैक पर रखा गया था। आशंका है कि रेल का टुकड़ा ट्रैक पर किसी अज्ञात व्यक्ति ने रखा।

मौके पर 2-3 पटरी के टुकड़े (बोल्डर) मिले थे। यही बोल्डर रेलवे ट्रैक पर रखे गए थे। इन बोल्डर को पेंच और गार्डर से कसा गया था, ताकि ट्रेन के झटके से यह निकले नहीं और ट्रेन इनके ऊपर से तेजी से गुजरकर बेपटरी हो जाए और अधिकतम तबाही हो। हालाँकि, ट्रेन की स्पीड 80-90 किलोमीटर प्रतिघंटे थी और लोको पायलट ने संदेहास्पद वस्तु को देखकर इमरजेंसी ब्रेक मारी थी।

वहीं, एटीएस के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि जब भी कोई ट्रेन पटरी से उतरती है तो एटीएस मौके पर पहुँचकर अपने स्तर पर जाँच करती है। एटीएस को साबरमती एक्सप्रेस हादसे की रिपोर्ट जल्द से जल्द लखनऊ मुख्यालय को सौंपेने के लिए कहा गया है। फिलहाल, लोहे की पटरी रखने वाले लोगों की पहचान के लिए सबूत जुटाए जा रहे हैं।

माँ की गोद में सोती 2 साल की हिंदू बच्ची से पहले किया रेप, जब चीखने लगी तो मार कर नाले में फेंक दिया: मोहम्मद हदीस का बेटा मोईस गिरफ्तार, UP पुलिस ने पैर में मारी गोली

उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में 2 साल की हिन्दू बच्ची की बलात्कार के बाद हत्या कर दी गई है। रेप का आरोप मोहम्मद हदीस के बेटे मोईस पर लगा है। रेप करने के बाद खुद को घिरता देख कर मोईस ने बच्ची को नाले में फेंक दिया था। आरोपित को पुलिस ने मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया है। आरोपित के पास से अवैध हथियार और गोला बारूद बरामद हुआ है। पुलिस मोईस के साथियों की भी पड़ताल कर रही है। घटना शुक्रवार (16 अगस्त 2024) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना मेरठ के थानाक्षेत्र सदर बाजार की है। यहाँ की झुग्गियों में रहने वाला एक हिन्दू परिवार शुक्रवार की रात अपने घर के बाहर सो रहा था। इन सदस्यों में 2 साल की एक बच्ची भी थी, जो अपनी माँ के साथ सो रही थी। शुक्रवार-शनिवार की रात लगभग 1:30 पर नशे में धुत होकर मोईस वहाँ पहुँचा। वह सो रही बच्ची को उठा कर भागने की कोशिश करने लगा। तभी पास सो रहे एक बच्चे की आँख खुल गई। उसने शोर मचा दिया तो मोईस पीड़िता को लेकर भागने लगा। मोईस की करतूत का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

बताया जा रहा है कि मोईस बच्ची को लेकर नाले के पास सुनसान इलाके में चला गया। यहाँ उसने पीड़िता से रेप किया। जब पीड़िता चिल्लाने लगी तो उसने जोर से मुँह दबा दिया। इस वजह से बच्ची ने दम तोड़ दिया।

इस बीच आसपास के लोग जुटने लगे तो उसने पीड़िता को नाले में फेंक दिया और फरार होने की कोशिश करने लगा लेकिन पकड़ लिया गया। तभी मामले की सूचना पर पुलिस पहुँच गई। पुलिस ने बच्ची के बारे में पूछा तो 2 घंटे तक आरोपित झूठ बोलता रहा। बाद में उसने पीड़िता का शव नाले से बरामद करवाया। आरोपित पर BNS (भारतीय न्याय संहिता) की धाराओं के साथ पॉक्सो एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है।

पुलिस पर हमला करके फरार होने की कोशिश

मोईस मूल रूप से बिहार के पूर्णिया जिले का निवासी है। जब आरोपित को पुलिस पकड़ कर कोर्ट में पेश करने ले जा रही थी, तब मोईस हाथ छुड़ा कर भागने लगा। उसने बड़े शातिराना अंदाज में हथकड़ी से हाथ भी छुड़ा लिया। कुछ ही देर में मोईस कैंट के भूसामंडी इलाके में पहुँच गया। यहाँ पर वो एक खंडहर में छिपने की कोशिश करने लगा। तभी वहाँ पुलिस पहुँच गई। पुलिस ने आरोपित को सरेंडर करने के लिए कहा तो वो गोलियाँ बरसाने लगा। एक गोली घेराबंदी कर रहे एक सब इंस्पेक्टर के कान के पास से निकल गई।

पुलिस ने भी मजबूरन आत्मरक्षा में गोली चलाई। ये गोलियाँ मोईस के दोनों घुटनों में लगीं और वो नीचे गिर कर चिल्लाने लगा। आखिरकार पुलिस टीम ने मोईस को दबोच लिया। आरोपित के पास से कट्टा और कारतूस बरामद किया गया है।

पुलिस ने मोईस पर खुद पर किए गए हमले की अलग से FIR दर्ज करवाई है। यह FIR भारतीय न्याय संहिता की धारा 109 के साथ आयुध अधिनियम के सेक्शन 3/25/27 के तहत दर्ज हुई है। मोईस को न्यायिक अभिरक्षा में कोर्ट में पेश किया गया है। मेरठ के एसएसपी विपिन टाडा ने बताया कि मोईस को हथियार देने वाले उसके सहयोगियों के बारे में भी जानकारी जुटाई जा रही है।

नूपुर शर्मा के बाद अब महंत रामगिरि के लिए ‘सर तन से जुदा’ के नारे, पैगंबर मुहम्मद के अपमान का आरोप: महंत ने कहा- जो भी बोला, वो उनकी किताब में

महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव घोषणा से पहले इस्लामी कट्टरपंथियों द्वारा एक बार फिर नूपुर शर्मा जैसी स्थिति पैदा करने की कोशिश की जा रही है। इस बार मोहरा बनाया गया है कि महाराष्ट्र के नासिक के सरला द्वीप के महंत रामगिरि को। बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा को लेकर दिए गए उनके बयान के एक हिस्से को आपत्तिजनक बताकर कुछ कट्टरपंथी राज्य का माहौल खराब करने में लगे हैं।

मुस्लिम समुदाय के कुछ लोगों ने इस्लाम के पैगंबर मुहम्मद के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी का आरोप लगाकर महंत रामगिरि के खिलाफ ना मुकदमा भी दर्ज करवाया है। इतना ही नहीं, उनके बयान के अगले दिन यानी शुक्रवार (16 अगस्त 2024) को बंद का आह्वान करके माहौल खराब करने की कोशिश भी की। इसमें सर तन से जुदा के नारे लगाए गए। सोशल मीडिया पर भी धमकी दी जा रही है।

हालात को देखते हुए पुलिस ने महंत रामगिरि की सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए हैं। कट्टरपंथियों का कहना है कि महंत रामगिरि को अविलंब गिरफ्तार किया जाए। हालाँकि, महंत रामगिरि का कहना है कि उन्होंने कुछ भी गलत नहीं कहा है। जो कहा कि वो किताब में लिखी हुई है। उन्होंने कहा कि लोग ही इसका गलत मतलब निकाल रहे हैं। वहीं, हिंदू समुदाय भी महंत रामगिरि के समर्थन में आगे आया है।

इस्लाम और पैगंबर के अपमान के आरोप पर महंत रामगिरि ने क्या कहा?

इंडिया टीवी से बात करते हुए महंत रामगिरि ने कहा कि 15 अगस्त को समागम में वे राजधर्म की बातें कर रहे थे। इसी दौरान उन्होंने बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार को लेकर कहा था कि ‘हम हिंदू सावधान नहीं होंगे तो ये अराजक तत्व ज्यादा आगे बढ़ेंगे तो बांग्लादेश जैसी परिस्थिति हमारे यहाँ भी आ सकती है’। इसी में उन्होंने पैगंबर मुहम्मद से जुड़ा उदाहरण दिया था। यह उदाहरण इस्लामी किताबों में ही लिखा है।

उनके बयान को लेकर मुस्लिमों में हंगामे पर उन्होंने कहा, “मेरे शब्द विवादित नहीं है। उसे विवादित बनाया रहा है। मेरा प्रवचन डेढ़ घंटे का था। उस डेढ़ घंटे के प्रवचन में मैं भीष्म पितामह और युधिष्ठिर जी का संवाद बता रहा था। जब कृष्ण जी भीष्म पितामह से मिलने जाते हैं तो भीष्म पितामह उन्हें धर्म का उपदेश देते हैं। उसमें राजनीति का उपदेश देते हैं। राजधर्म बताते हैं।”

उस संदर्भ की चर्चा करते हुए उन्होंने आगे कहा, “पहला उपदेश बताते हुए भीष्म पितामह कहते हैं कि किसी भी राजा को राज्य में अन्याय को सहन नहीं करना चाहिए। अन्याय की प्रतिकार करने की शक्ति होते हुए भी कोई प्रतिकार नहीं करता है तो वो पाप करता है। इसीलिए अन्याय का प्रतिकार होना चाहिए। इसी बात की हम चर्चा कर रहे थे।”

महंत रामगिरि ने कहा, “इसी चर्चा में बात निकली बांग्लादेश की, क्योंकि बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार हो रहा है। महिलाओं से बलात्कार हो रहा है और हिंदू पलायन के लिए तत्पर है। वहाँ रहना नहीं चाहते, क्योंकि वहाँ नर्क जैसी स्थिति है। इस विषय पर चर्चा करते हुए हमने वो उदाहरण (जिस पर पैगंबर का अपमान बताकर बवाल किया जा रहा है) दिया था। इसका गलत अर्थ लगाकर इसे मुद्दा बनाया गया है।”

उनके बयान को लेकर मुस्लिम समाज में नराजगी पर महंत रामगिरि ने कहा, “मुस्लिम लोगों को नाराज नहीं होना चाहिए। हमने जो कहा वो सत्य कहा है। जो कहा वो उनकी किताब में लिखा हुआ है। इसलिए नाराज होने की कोई आवश्यकता नहीं।” माफी माँगने की बात पर उन्होंने कहा, “सबका अपना-अपना सोचना है। हमने जो बता दिया, वो बता दिया। बस।”

उनके बयान को लेकर उन्हें मिल रहीं धमकियों और सर तन से जुदा करने के नारे लग पर महंत रामगिरि ने कहा, “मुझे अभी तक धमकी नहीं मिली। हमारा देश संविधान से चलता है। अगर हमारी बात पर किसी को आपत्ति है तो उसके लिए कानून है… कोर्ट है। अगर किसी को आपत्ति है तो केस दर्ज कर सकते हैं। हम उसका जवाब कोर्ट में देंगे।”

FIR और सुरक्षा के कड़े प्रबंधन

महंत रामगिरि के बयान को लेकर महाराष्ट्र का माहौल खराब करने की कोशिश की जा रही है। उनकी गिरफ्तारी को लेकर जगह-जगह प्रदर्शन हो रहे हैं और सर तन से जुदा जैसे आपत्तिजनक नारे लगाए जा रहे हैं। नासिक के कुछ इलाकों में भीड़ हिंसक भी हो गई। हालाँकि, पुलिस ने हस्तक्षेप करके स्थिति को नियंत्रित कर लिया। फिलहाल शहर में तनावपूर्ण शांति है, लेकिन सुरक्षा के कड़े प्रबंध हैं।

अधिकारियों ने कहा कि पुराने नासिक भद्रकाली इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। एसआरपीएफ इकाइयों को भी बुलाया गया है। स्थिति अब नियंत्रण में है और दोनों समूहों के 15 लोगों के खिलाफ दंगा फैलाने का मामला दर्ज किया गया है। बताते दें कि बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा को लेकर सकल हिंदू समाज द्वारा निकाली की गई रैली पर मुस्लिमों ने हमला कर दिया था।

विरोध को देखते हुए मुंब्रा पुलिस ने रामगिरि महाराज के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 302 (धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने के इरादे से बात कहना) सहित कई अन्य धाराओं मेें मामला दर्ज किया है। इनमें धर्म के आधार पर समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना, शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान करना और आपराधिक धमकी देने से संबंधित धाराएँ शामिल हैं।

रामगिरि महाराज के खिलाफ राज्य के नासिक और छत्रपति संभाजीनगर जिलों में भी कई प्राथमिकी दर्ज गई हैं। पुलिस ने नासिक के येवला और छत्रपति संभाजीनगर जिले के वैजापुर में पुलिस ने बताया कि वैजापुर में एक स्थानीय व्यक्ति की शिकायत के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की गई है। शिकायतकर्ता ने कहा कि उनके शब्दों से मुस्लिमों की धार्मिक भावनाएँ आहत हुई हैं।

महंत गिरि के साथ खड़े हुए सीएम शिंदे

महाराष्ट्र के संभाजीनगर में महंत रामगिरि के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के कुछ घंटे बाद सीएम एकनाथ शिंदे उनके कार्यक्रम में शामिल हुए। इस दौरान महंत रामगिरि के साथ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि महाराष्ट्र में उनकी सरकार के रहते किसी भी धार्मिक नेता को कोई समस्या नहीं होगी।

सीएम शिंदे ने कहा, “हमारी सरकार को ऐसे महान संतों का आशीर्वाद प्राप्त है। महाराष्ट्र में संतों को कोई छू भी नहीं सकता।” दरअसल सीएम शिंदे रामगिरि महाराज द्वारा नासिक के सिन्नार में आयोजित अखंड हरिनाम सप्ताह कार्यक्रम में शामिल होने के लिए पहुँचे थे।

कार्यक्रम में सीएम शिंदे के साथ पहुँचेमंत्री गिरीश महाजन ने कहा कि रामगिरि महाराज के बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया जा रहा है। महाराज ने किसी मुद्दे पर कुछ कहा है तो उसे तोड़-मरोड़ कर पेश करना और सोशल मीडिया पर शेयर करना गलत है। उन्होंने कहा कि पुलिस इस मामले की जाँच करके उचित कदम उठाएगी।

कौन हैं महंत रामगिरि?

नासिक जिले में सिन्नर तालुका के शाह पंचाले गाँव में एक धार्मिक आयोजन हुआ था। इसमें 15 अगस्त को महंत रामगिरि ने बांग्लादेश के हिंदुओं पर अत्याचार का मुद्दा उठाया था। रामगिरि महाराज पूरे महाराष्ट्र में सरला द्वीप के मठाधीश के रूप में जाने जाते हैं। ऐसा माना जाता है कि सरला द्वीप का निर्माण गोदावरी नदी के विभाजन से हुआ है।

छत्रपति संभाजीनगर, नासिक, जालना, जलगाँव क्षेत्र में महंत रामगिरि के भक्तों का एक बड़ी संख्या रहती है। महंत रामगिरि के बड़े-बड़े राजनेता और उद्योगपति शिष्य है। माना जाता है कि राज्य की राजनीति में भी उनका गहरा प्रभाव है। महंत रामगिरि का कहना है कि उनके भक्तों में मुस्लिमों की बड़ी संख्या है और धार्मिक आयोजनों में वे भी भाग लेते हैं।

महिला डॉक्टर से मारपीट, मुँह पर खून से सनी पट्टी और गंदी-गंदी गालियाँ: कोलकाता के बाद मुंबई शर्मसार, पुलिस ने दर्ज की FIR

महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में एक रेजिडेंट डॉक्टर पर हमले की खबर है। आरोप है कि नशे में धुत लगभग आधे दर्जन लोगों ने एक महिला डॉक्टर की पिटाई कर दी। हमले का आरोप एक मरीज के साथ आए कुछ लोगों पर लगा है। घटना के बाद आरोपित फरार हो गए हैं। पुलिस ने केस दर्ज करके मामले की जाँच और आरोपितों की तलाश शुरू कर दी है। घटना रविवार (18 अगस्त 2024) की सुबह की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना मुंबई के सायन इलाके की है। सायन मार्ड एसोसिएशन के महासचिव अक्षय मोरे ने इस घटना की जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि यहाँ के लोकमान्य तिलक म्युनिसिपल अस्पताल में शनिवार-रविवार की रात 12:30 से 1:00 के बीच चेहरे पर चोट खाया एक मरीज अस्पताल में भर्ती हुआ। मरीज के साथ लगभग 5-6 अटेंडेंट (तीमारदार) भी थे। मरीज के चेहरे पर पहले से कुछ पट्टियाँ बंधीं थीं। महिला डॉक्टर रूटीन प्रक्रिया के तहत ये पट्टियाँ खोलने लगीं। तभी मरीज के साथ आए तीमारदार डॉक्टर को गंदी-गंदी गालियाँ देने लगे।

महिला डॉक्टर ने गालियाँ देने का विरोध किया तो मरीज के तीमारदारों ने पीड़िता की पिटाई शुरू कर दी। इसी दौरान मरीज ने भी अपने चेहरे पर लगी खून से सनी पट्टी नोच कर डॉक्टर के चेहरे पर लगानी शुरू कर दी। बताया गया है कि मरीज और उसके साथ आए तीमारदार नशे में धुत थे।

पीड़िता की चीख-पुकार सुन कर अस्पताल में मौजूद अन्य नर्स व सिक्योरिटी गार्ड मौके पर पहुँचे। लोगों को जुटता देख कर आरोपित घायल मरीज को साथ लेकर मौके से रफूचक्कर हो गए। कुछ ही देर बाद इस घटना की शिकायत पुलिस में दर्ज करवाई गई।

सायन अस्पताल के डॉक्टरों की एसोशिएशन ने भी पुलिस से मिल कर अपनी सुरक्षा की चिंता जताई है। उन्होंने अस्पतालों की सुरक्षा बढ़ाने का भी आग्रह किया है। आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की माँग के साथ इन सभी डॉक्टरों ने कोलकाता की घटना पर भी दुःख प्रकट किया।

पुलिस ने मामले की जाँच-पड़ताल शुरू कर दी है। अस्पताल में लगे CCTV फुटेज के साथ अन्य तमाम साक्ष्यों से हमलावरों की तलाश शुरू कर दी गई है। मामले में जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जा रही है।

अल्पसंख्यक संस्थान RTE के तहत बच्चों का नहीं कर सकते नामांकन, बॉम्बे हाई कोर्ट ने याचिका खारिज कर कहा- यह संविधान का उल्लंघन होगा

बॉम्बे उच्च न्यायालय की औरंगाबाद पीठ ने कहा है कि अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम 2009 (आरटीई अधिनियम) के 25% कोटे में सामाजिक रूप से वंचित बच्चों को प्रवेश नहीं दे सकते। ऐसा वे स्वेच्छा से भी नहीं कर सकते। न्यायालय ने इसे संविधान की अवमानना बताया है।

जस्टिस मंगेश एस पाटिल और जस्टिस शैलेश पी ब्रह्मेे की पीठ ने कहा कि इस तरह के प्रवेश की अनुमति देना संवैधानिक संरक्षण का उल्लंघन होगा, जो अल्पसंख्यक संस्थानों को आरटीई अधिनियम से छूट देता है। इसके बाद कोर्ट ने याचिकाकर्ता की याचिका खारिज कर दी और और कहा कि अल्पसंख्यक संस्थान आरटीई कोटा का विकल्प नहीं चुन सकते।

हाई कोर्ट की पीठ ने कहा, “एक बार जब सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ ने आरटीई अधिनियम को संविधान के अनुच्छेद 30(1) के विरुद्ध मान लिया है, तो यह न्यायालय संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत शक्तियों का प्रयोग करते हुए याचिकाकर्ताओं जैसे अल्पसंख्यक संस्थानों को आरटीई अधिनियम के प्रावधानों के अधीन होने की अनुमति नहीं दे सकता।”

अदालत ने आगे कहा, “भले ही वे (अल्पसंख्यक संस्थान) आरटीई कोटे के तहत छात्रों को प्रवेश देने के लिए तैयार और इच्छुक हों, उन्हें ऐसा करने की अनुमति केवल आरटीई अधिनियम के प्रावधानों को उन पर लागू करके ही दी जा सकती है, जो कि प्रमति शैक्षिक और सांस्कृतिक ट्रस्ट (सुप्रा) में घोषणा के आधार पर अपने आप में निषिद्ध है।”

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, बॉम्बे हाई कोर्ट के औरंगाबाद पीठ का यह निर्णय आरटीई अधिनियम की धारा 1(5) पर आधारित था। इसमें स्पष्ट रूप से कहा गया है कि यह अल्पसंख्यक संस्थानों लागू नहीं होता है। कोर्ट ने प्रमति शैक्षिक और सांस्कृतिक ट्रस्ट मामले में सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय का भी उल्लेख किया।

इस निर्णय में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अल्पसंख्यक संस्थानों पर आरटीई अधिनियम लागू करना संविधान के अनुच्छेद 30(1) के ‘अधिकार से बाहर’ होगा। यह अनुच्छेद अल्पसंख्यकों को अपनी पसंद के शैक्षणिक संस्थान स्थापित करने और उनका प्रशासन करने के अधिकारों की गारंटी देता है। कोर्ट ने यह फैसला 14 अगस्त को सुनाया था।

याचिकाकर्ताओं ने आरटीई अधिनियम और इसके तहत बनाए गए 2011 नियमों के कुछ प्रावधानों की वैधता को चुनौती दी थी। उनका तर्क था कि ये अनुच्छेद 14, 19 (1) और 30 के तहत उनके संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन करते हैं। हालांकि, अदालत ने इन दावों को खारिज कर दिया और कहा कि याचिकाकर्ता आरटीई अधिनियम या नियमों की वैधता को चुनौती नहीं दे सकते।

याचिकाओं को खारिज करते हुए न्यायालय ने माना कि इज़ाक इंग्लिश मीडियम स्कूल ने पहले भी आरटीई कोटे के तहत छात्रों को प्रवेश दिया था और शैक्षणिक वर्ष 2017-18 से 2019-20 के लिए उसे प्रतिपूर्ति (Reimburse) नहीं की गई थी। न्यायालय ने सरकार को दावे की जाँच कर छह सप्ताह के भीतर स्कूल को प्रतिपूर्ति करने का निर्देश दिया है।

दरअसल, यह मामला अहमदनगर के इज़ाक इंग्लिश मीडियम स्कूल और आनंद मेडिकल एंड एजुकेशन फाउंडेशन से जुड़ा था। ये दोनों ही अल्पसंख्यक संचालित इंग्लिश मीडियम स्कूल चलाते हैं। इन संस्थानों ने 15 मार्च 2013 को जारी एक परिपत्र से जुड़े सरकारी निर्देश को चुनौती दी थी। इसमें अल्पसंख्यक स्कूलों को आरटीई अधिनियम के 25% कोटे से बाहर रखा गया था।

स्कूलों ने तर्क दिया था कि उन्हें स्वैच्छिक रूप से आरटीई कोटे के तहत छात्रों को प्रवेश देने की अनुमति दी जानी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने पिछले वर्षों में कोटे के तहत प्रवेश लेने वाले छात्रों के लिए प्रतिपूर्ति की भी माँग की। हालाँकि, न्यायालय ने इन तर्कों को खारिज कर दिया।

अब आलोचना भी गुनाह! RG कर रेप-हत्या मामले में छात्र ने CM ममता बनर्जी को घेरा तो बंगाल पुलिस ने किया गिरफ्तार

पश्चिम बंगाल में अपराध चाहे जितना बढ़ जाए, लेकिन वहाँ की सीएम ममता बनर्जी और पुलिस की आलोचना नहीं की सकती है। इसी तरह की गलती युवक ने कर दी। उसने आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में जूनियर महिला डॉक्टर के बलात्कार-हत्या मामले को लेकर ममता बनर्जी की आलोचना कर दी। इसके बाद पश्चिम बंगाल पुलिस ने शुक्रवार (16 अगस्त) को उसे गिरफ्तार कर लिया।

रिपोर्ट के अनुसार, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी करने वाले युवक की पहचान 23 वर्षीय सागनिक लाहा के रूप में हुई है। सागनिक पेशे से पॉलिटेक्निक का छात्र हैं। उन्होंने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में बंगाल की सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) सुप्रीमो ममता बनर्जी पर हमला बोला था। पुलिस का आरोप है कि छात्र ने ममता बनर्जी के खिलाफ ‘अपमानजनक शब्दों’ का इस्तेमाल किया था।

सोशल मीडिया पोस्ट करने के तुरंत बाद सागनिक लाहा को टीएमसी समर्थकों ने परेशान करना शुरू कर दिया। इससे पॉलटेक्निक का यह छात्र डर गया। आखिरकार ममता बनर्जी के समर्थकों ने सागनिक लाहा के खिलाफ पुलिस थाने में शिकायत दर्ज करा दी। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने शुक्रवार रात अलीपुरद्वार जंक्शन से उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

जेल में सागनिक लाहा (साभार: ईटीवी भारत)

सागनिक लाहा की वकील दीपशिखा रॉय ने बताया कि उनके क्लाइंट लाहा पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 79, 294 और 296A तथा सूचना प्रौद्योगिकी की धारा 67A के तहत मामला दर्ज किया गया है। शनिवार (17 अगस्त) को लाहा को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया गया।

मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने सागनिक लाहा को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। वकील दीपशखा रॉय ने बताया, “इनमें से एक गैर-जमानती आरोप है, अन्य जमानती अपराध हैं… उसकी जमानत खारिज कर दी गई है। वह 31 अगस्त तक हिरासत में रहेगा।” लाहा ने ETV से कहा, “मैं अपने माता-पिता की बदौलत अपना दिन गुजारने की कोशिश कर रहा हूँ। आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।”

मुस्लिम लड़की से प्रेम करता था दलित सूरज… अब पेड़ से लटका मिला युवक का शव: इरशाद-अशफाक सहित 15 पर FIR

उत्तर प्रदेश के बरेली में सूरज नाम के एक दलित युवक की नृशंस हत्या इसलिए कर दी गई, क्योंकि वह एक मुस्लिम लड़की से प्यार करता था। वह अपनी प्रेमिका के साथ भाग चुका था। इसके बाद लड़की के परिजनों ने सूरज की हत्या की धमकी दी थी। आखिरकार उसकी हत्या कर दी गई और सूरज का शव शनिवार (17 अगस्त 2024) को पेड़ से लटका हुआ मिला।

मृतक के परिजनों की तहरीर के आधार पर लड़की के पिता छुट्टन, भाई तस्लीम, इरशाद हुसैन पत्रकार, अशफाक, रहमान समेत 10-15 अज्ञात के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 191(2), 103(1), 238, 352, 351(2), 3(2)v के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। इसके साथ ही इन पर SC-ST Act की धाराएँ भी लगाई गई हैं।

बरेली के एडिशनल एसपी मुकेश चंद्र मिश्रा ने कहा का कहना है कि मामले की जाँच की जा रही है और तथ्‍यों के आधार पर आरोपितों से पूछताछ की जाएगी। उन्होंने कहा पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है। गाँव में शांति भंग ना हो इसके लिए पुलिस बल को तैनात किया गया है। वहीं, आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की माँग को लेकर हिंदू संगठन मृतक के यहाँ पहुँचे।

सूरज बरेली के शीशगढ़ कस्बे का रहने वाला था। उसका शव फतेहगंज पश्चिम में मिला है। पुलिस के अनुसार, सूरज और एक 16 साल की मुस्लिम युवती के बीच प्रेम प्रसंग की बात सामने आई है। दोनों 10 अगस्त को कहीं चले गए थे। सूरज उत्तराखंड के रूद्रपुर में प्राइवेट नौकरी कर रहा था। युवती भी उसके साथ ही रह रही थी।

इस बीच जब लड़की के परिवार ने अपहरण करने के आरोप लगाते हुए लड़की के परिवार ने सूरज के खिलाफ थाना शीशगढ़ में अपहरण का मामला भी दर्ज कराया था। इसके बाद पुलिस ने युवती को बरामद कर लिया था और शुक्रवार (16 अगस्त 2024) को कोर्ट में उसका बयान भी दर्ज कराया था। वहीं, पुलिस सूरज को तलाश कर रही थी, लेकिन वह फरार था।

इसी बीच भिटौली नगला के समीप पेड़ पर शनिवार (17 अगस्त 2024) को फंदे से लटकता हुआ एक शव बरामद हुआ। यह शव 25 वर्षीय सूरज का था। शव को कब्जे में लेकर पुलिस ने पोस्‍टमार्टम के लिए भेज दिया है। इसके बाद फारेंसिक टीम और अन्‍य ने मौके पर पहुँचकर सबूत जुटाए। इस मामले में अब आगे की जाँच हो रही है।