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‘रोल पाने के लिए हमबिस्तर होना पड़ेगा’: अभिनेत्री के दोस्त ने खोला राज़, व्हाट्सएप्प चैट्स भी दिखाए

‘पंड्या स्टोर’ के एक्टर मोहित परमार ने अपनी एक खास फ्रेंड प्रेरणा के साथ हुई कास्टिंग काउच के बारे में बताया है। उन्होंने कहा कि उनकी दोस्त को रोल के बदले हमबिस्तर होने की माँग की गई थी। मोहित परमार ने दुनिया के सामने अब उस कास्टिंग डायरेक्टर प्रेम मल्होत्रा की पोल खोल दी है। इतना ही नहीं, मोहित ने इसको लेकर व्हाट्सएप चैट के सबूत भी सामने रखे हैं।

मोहित परमार ने जो वॉट्सऐप चैट शेयर की है, वह बेहद आपत्तिजनक एवं परेशान करने वाली है। ये चैट कास्टिंग कॉर्डिनेटर ने उनकी एक्ट्रेस दोस्त प्रेरणा को भेजी थी। मैसेज में प्रेम मल्होत्रा ने खुद को स्काईलाइन स्प्री प्रोडक्शन से जुड़ा बताया। उसने प्रेरणा से कहा कि अगर वह रोल चाहती हैं तो उन्हें कॉम्प्रोमाइज करना पड़ेगा।

मोहित परमार ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी में इस बारे में बताया है। सामने आए चैट में प्रेम मल्होत्रा नाम के कास्टिंग डायरेक्टर ने अपना पता भी साझा किया था। मोहित परमार ने चैट को सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए लिखा लिखा, “इस तरह के लोगों से सावधान रहें। ये कास्टिंग डायरेक्टर महिला कलाकारों का शोषण करता है। उनसे हमबिस्तर होने की माँग करता है।”

मोहित परमार ने आगे लिखा, “अगर ये आपसे संपर्क करे या आप इसे किसी ऑडिशन ग्रुप में देखें तो इसे ब्लॉक करें, रिपोर्ट करें और इसके खिलाफ शिकायत दर्ज कराएँ। इस शख्स का नाम प्रेम मल्होत्रा है।” बता दें कि मोहित परमार की जिस दोस्त के साथ ये वाकया हुआ, उनका नाम प्रेरणा है। उन्होंने ये भी इन स्क्रीनशॉट को सोशल मीडिया पर साझा की है।

कास्टिंग काउच नाम का एक धब्बा एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में है, जिसके बारे में एक्ट्रेस चर्चा करती हैं। कई एक्ट्रेसेस इससे जुड़ी अपनी भयानक आपबीती सुना चुकी हैं। अंकिता लोखंडे ने मार्च 2024 में बताया था कि 19 साल की उम्र में वह कास्टिंग काउच का शिकार हुई थीं। इसी तरह ईशा कोप्पिकर ने भी बॉलीवुड के एक बड़े स्टार पर आरोप लगाए थे। सनाया ईरानी ने भी कास्टिंग काउच की आपबीती सुनाई थी।

मोहसिन ने सोते कुत्ते को लाठी से पीट-पीट कर मार डाला: चिल्लाता रहा पशु और देखते रहे लोग, किसी में नहीं हुई रोकने की हिम्मत

छत्तीसगढ़ के गौरेला में मोहसिन खान नामक शख्स ने सड़क किनारे आराम कर रहे एक कुत्ते को पीट-पीट कर बेरहमी से मार डाला। इसका वीडियो भी सामने आया है, जिसे देखने के बाद लोग उसके द्वारा प्रदर्शित की गई क्रूरता की निंदा कर रहे हैं। उक्त सड़क पर घूमने वाला पशु और उस समय सो रहा था। मोहसिन खान उस दौरान बगल से गुजर रहा था, उसने अपने हाथ में एक मोटा डंडा ले रखा था। जैसे ही उसने कुत्ते को सोता हुआ देखा, लाठी से उसे पीटना शुरू कर दिया।

आरोपित ने कुत्ते को इतना पीटा कि वो निरीह पशु बेसुध हो गया। इसके कुछ ही देर बाद उसने दम तोड़ दिया। कुत्ते के चिल्लाने की आवाज़ सुन कर आसपास के लोग ज़रूर बाहर निकले, लेकिन किसी ने भी उसे बचाने की कोशिश नहीं की। कुत्ते की हत्या करने के बाद भी मोहसिन डंडा लेकर आसपास ही घूमता रहा और लोगों को धमकाता रहा। इस दौरान भी किसी ने उसका प्रतिरोध करने का साहस नहीं किया। कुछ पड़ोसियों से उसने झगड़ा भी दिया और उन्हें धमकी दी।

बताया जा रहा है कि कुत्ते को मार डालने के बाद मोहसिन जोर-जोर से चिल्ला भी रहा था। मोहल्ले के लोगों ने उसकी हरकतों से परेशान होकर गौरेला पुलिस थाना को इसकी सूचना दी। बताया जा रहा है कि पहले मोहल्ले वालों को ही पुलिस ने वापस भेज दिया। लेकिन, जैसे ही इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हुआ मामला उच्चाधिकारियों के संज्ञान में आ गया। आरोपित के खिलाफ BNS (भारतीय न्याय संहिता) की धारा-325 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

बता दें कि नए कानून के तहत किसी भी पशु की हत्या करने, उसे ज़हर देने या फिर अपंग करने वाली हरकतें करता है तो उसे 5 वर्ष की अधिकतम कारावास के साथ-साथ जुर्माने की सज़ा भी सुनाई जा सकती है। मोहसिन के बारे में ये भी पता चला है कि वो आए दिन मोहल्ले में लोगों के बीच दहशत फैलाने के लिए ऐसी हरकतें करता है और पूर्व में भी एक कुत्ते की हत्या कर चुका है। पुलिस ने अब उसके खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

UP के मुख्यमंत्री के रूप में योगी आदित्यनाथ ने बनाया नया रिकॉर्ड: ध्वजारोहण करते ही मुलायम-मायावती सबको पीछे छोड़ा, देखें लिस्ट में कौन कहाँ

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आजादी के बाद से अब तक सभी मुख्यमंत्रियों के रिकॉर्ड को तोड़ दिया है। वो सबसे लंबे समय तक जिम्मेदारी संभालने वाले यूपी के मुख्यमंत्री बन चुके हैं। उन्होंने बतौर मुख्यमंत्री 3 बार सीएम रहे मुलायम सिंह यादव, 4 बार सीएम रही मायावती, 3 बार सीएम रहे एनडी तिवारी जैसे धुरंधरों को पीछे छोड़ दिया है।

योगी आदित्यनाथ का कीर्तिमान

योगी आदित्यनाथ आजादी के बाद सबसे लंबे कार्यकाल वाले मुख्यमंत्री बन गए हैं। वो लगातार 7 साल और 150 दिन बतौर मुख्यमंत्री रह चुके हैं। यही नहीं, योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश के विधान भवन पर लगातार आठवीं बार ध्वजारोहण करने वाले पहले मुख्यमंत्री भी बन गए हैं। उन्होंने 15 अगस्त को आठवीं बार तिरंगा फहराया।

कॉन्ग्रेस की ओर से सबसे लंबे समय तक डॉक्टर संपूर्णानंद मुख्यमंत्री रह चुके हैं, तो चौधरी चरण सिंह, मुलायम सिंह यादव, मायावती और अखिलेश यादव भी उनके आस-पास नहीं हैं। योगी आदित्यनाथ की गिनती उन नेताओं में होती है, जिनके नेतृत्व में प्रदेश में किसी पार्टी की लगातार दूसरी बार सरकार बनी। 25 मार्च 2022 को जब योगी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली तो उन्होंने नारायण दत्त तिवारी का 37 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ा था।

दिग्गजों को छोड़ा पीछे

वैसे तो बसपा सुप्रीमो मायावती चार बार सीएम रह चुकी हैं। वो 7 साल 16 दिन तक सीएम रही और दूसरे नंबर पर हैं। लेकिन उनके 7 साल 16 दिन का कार्यकाल 4 हिस्सों में बंटा रहा है। मायावती ने भी 8 बार ध्वजारोहण किया है। वहीं, मुलायम सिंह यादव तीन बार में कुल 6 साल 274 दिन मुख्यमंत्री रहे थे।

बता दें कि साल 2017 से बतौर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ प्रदेश में अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन कर रहे हैं। वर्ष 2022 से योगी आदित्यनाथ यूपी विधानसभा में गोरखपुर शहरी विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। वो बतौर सांसद कई कार्यकाल पूरा कर चुके हैं।

योनि और गुदा में डाल देता था वाइब्रेटर, फैजान और समीर ने हिन्दू लड़कियों से किया बलात्कार: नाम बदल कर दोस्ती, फोटो-वीडियो वायरल करने की धमकी

गाजियाबाद में दो मुस्लिम युवकों द्वारा नाम और मजहबी पहचान छिपाकर दो हिंदू लड़कियों से रेप करने का मामला सामने आया है। एक मामला गाजियाबाद के खोड़ा का है। वहीं, दूसरा मामला क्रॉसिंग रिपब्लिक का है। दूसरे मामले में युवती ने आरोप लगाया कि अक्षय बने फैजान ने उसे बंधक बनाकर बलात्कार किया, वाइब्रेटर से प्रताड़ित किया और इस्लाम अपनाने का दबाव बनाया।

उत्तर प्रदेश के बहराइच की रहने वाली युवती ने मानसी अग्रवाल (बदला हुआ नाम) ने पुलिस को दी गई शिकायत में कहा कि वह जुलाई 2015 में वह लखनऊ के एक कॉलेज की छात्रा थी। फेसबुक के माध्यम से उसकी जान-पहचान एक लड़के से हुई। उसने अपना नाम अक्षय बताया। पीड़िता ने बताया कि अक्षय ने खुद को बीटेक अंतिम वर्ष का छात्र बताया था। वह हाथ में कलावा बाँधता था और मंदिर जाता था।

दोनों में धीरे-धीरे नजदीकी बढ़ी और साथ-साथ घुमने लगे। एक दिन अक्षय ने मानसी से कहा कि वह उससे शादी करना चाहता है। जब युवती ने हाँ कर दी तो अक्षय पार्टी करने के बहाने उसे लखनऊ के एक होटल में लेकर गया और वहाँ उससे शादी का झाँसा देकर बलात्कार किया। इसके बाद उसे अक्षय ने सफा पब्लिक स्कूल नाम के एक मुस्लिम स्कूल में उसकी नौकरी लगवा दी।

युवती का आरोप है कि इस दौरान अक्षय एलएसडी, कोकीन, कैमिकल कोक आदि नशा करके उसका यौन शोषण करता करता। इतना ही नहीं वह उससे अप्राकृतिक संबंध भी बनाता था। जब युवती को गर्भ ठहरता तो वह कभी कोल्ड ड्रिंक तो कभी खाने में गर्भनिरोधक डालकर खिला देता था। इससे उसका गर्भ गिर जाता था। इससे उसे भारी पीड़ा होती थी।

युवती ने आगे बताया कि फरवरी 2016 में अक्षय उसे दिल्ली घुमाने के लिए लाया। यहाँ गाजियाबाद के क्रॉसिंग रिपब्लिक में एक फ्लैट लेकर किराए पर रहने लगा। यहाँ भी वह युवती से लगातार रेप करता रहा। युवती का कहना है कि एक दिन अक्षय बाजार से वाइब्रेटर लेकर आया। उसे वह पीड़िता की योनि और गुदा में जबरदस्ती डालता था।

जब युवती उससे शादी के लिए कहती तो वह टालता था। बाद में जब अक्षय उससे शारीरिक संबंध बनाने की कोशिश की तो वह मना कर दी। इस पर अक्षय भड़क गया और उसके अश्लील तस्वीरों एवं वीडियो को सोशल मीडिया पर डालने की धमकी दी। इससे वह डर जाती थी और उसकी बात मानने के लिए मजबूर हो जाती थी। इतना ही नहीं, वह डर से उसके खिलाफ कार्रवाई भी नहीं करती थी।

युवती ने बताया कि साल 2018 में अक्षय की माँ और बहन गाजियाबाद आई। उसने अपनी माँ का परिचय हेमलता और बहन का परिचय कंचन के रूप में करवाया। युवती का कहना है कि बातचीत के दौरान उन लोगों का व्यवहार एवं रहन-सहन अलग लगा। इसी दौरान उसे पता चला कि जिसे वह अक्षय समझ रही थी, उसका असली नाम मोहम्मद फैजान है। उसकी माँ शगुफ्ता परवीन और बहन फौजिया है।

ऑपइंडिया के पास मौजूद शिकायत की कॉपी के अनुसार, अक्षय बने मोहम्मद फैजान की हरकतों के बारे में जब युवती ने उसकी माँ और बहन को बताया तो उन्होंने इस्लाम अपनाने की सलाह दी। युवती का कहना है कि उसकी अम्मी-बहन ने कहा, “अगर फैजान से शादी करनी है तो मुसलमान बनना पड़ेगा, इस्लाम धर्म अपनाना पड़ेगा। हमारे धर्म में 4 निकाह जायज हैं। तू भी पत्नी के रूप में रह लेना।”

मानसी का कहना है कि जब उसने धर्मांतरण से मना किया तो फैजान, उसकी अम्मी शगुफ्ता और बहन फौजिया ने उसके साथ मारपीट की और उसे बंधक बना लिया। इस दौरान फैजान उससे बलात्कार करता रहा। युवती ने आरोप लगाया, “फैजान की बहन फौजिया मुझे मुस्लिम बनाने के लिए तरह-तरह के गंडा ताबीज मेरे गले और हाथों में बाँधती थी। तरह-तरह के झाड़-फूँक और काला जादू करती थी।”

पीड़िता का कहना है कि मार्च 2024 को इन्स्टाग्राम व स्नेपचैट से पता चला है कि फैजान ने किसी मुस्लिम लड़की से निकाह कर लिया है। इतना नहीं नहीं, फैजान ने पीड़िता के नाम से फर्जी प्रोफाइल बना ली और गूगल मैप और अन्य एप्स का प्रयोग करके फोन पर अश्लील एप डाउनलोड करके उसे बदनाम कर दिया। इस कारण से लड़की के घरवालों ने भी उसका साथ छोड़ दिया।

थक-हारकर पीड़िता ने पुलिस कमिश्नर से गुहार लगाई। एडिशनल सीपी दिनेश कुमार पी ने कहा, “बहराइच निवासी युवती की शिकायत पर क्रॉसिंग रिपब्लिक थाने में दुष्कर्म, गर्भपात, आईटी ऐक्ट और धर्म परिवर्तन का केस दर्ज किया गया है। मोहम्मद फैजान, उसकी माँ शगुफ्ता परवीन और बहन फौजिया की गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं।”

गाजियाबाद के खोड़ा में हिंदू युवती से रेप

वहीं, गाजियाबाद के खोड़ा थाना क्षेत्र में रहने वाली एक युवती ने आरोप लगाया है कि उसके मकान के सामने समीर किराए पर रहता था। जामियानगर ओखला निवासी समीर खुद को हिंदू बताता था और माथे पर टीका एवं हाथ में कलावा बाँधता था। फरवरी 2024 से वह उससे बात करने लगा। युवती ने आगे बताया कि 15 मार्च को वह घर में अकेली थी। इसी दौरान समीर पानी माँगने के बहाने आया और दुष्कर्म किया।

युवती का कहना है कि जब उसने विरोध किया तो उसने शादी करने की बात कह करके उसे चुप करा दिया। इसके बाद मार्च महीने में वह उसे कोर्ट ले गया और शादी के कागजों पर उसके हस्ताक्षर करा लिए। युवती ने कहा कि कोर्ट में उसे पता लगा कि समीर हिंदू नहीं, बल्कि मुस्लिम है। उसने विरोध किया, लेकिन समीर उससे शादी करने की बात कहते हुए ब्लैकमेल करने लगा।

युवती ने बताया कि जुलाई में समीर उसे मुंबई ले गया और वहाँ एक अज्ञात स्थान पर रखकर उसके साथ दुष्कर्म किया। वहाँ समीर ने उसका धर्म परिवर्तन कराकर उसे मुस्लिम बनाने का भी प्रयास किया। पीड़िता ने किसी तरह उसने अपने पिता को फोन करके पूरा बात बताई। इसके बाद उसके पिता वहाँ पहुँचे और उसे घर ले आए। पीड़िता की शिकायत के बाद पुलिस ने आरोपित समीर को गिरफ्तार कर लिया है।

न गार्ड न ठीक से प्रकाश की व्यवस्था… बंगाल के जिस अस्पताल में हुई बलात्कार-हत्या वहाँ महिला आयोग ने पाई कई खामियाँ, गंदे पड़े थे शौचालय

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता स्थित RG Kar मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में एक महिला डॉक्टर की बलात्कार और हत्या के मामले की जाँच CBI को सौंप दी गई है, क्योंकि स्थानीय पुलिस ने कार्रवाई में लापरवाही बरती। वहीं अब ‘राष्ट्रीय महिला आयोग’ (NCW) ने घटनास्थल का दौरा कर वहाँ कई खामियाँ पाई हैं। NCW ने पाया कि जहाँ पर बलात्कार और हत्या की घटना हुई, वहाँ पर अचानक से सामान वगैरह को ठीक करने का काम शुरू कर दिया गया।

क्षतिग्रस्त चीजों को भी फिर से ठीक करवा दिया गया। NCW ने कहा कि कोलकाता पुलिस ने घटनास्थल को तुरंत सील नहीं किया। NCW ने इस मामले का स्वतः संज्ञान लिया है। 31 वर्षीय महिला डॉक्टर के साथ हुए जघन्य अपराध के मामले में जाँच से लेकर सुरक्षा और बुनियादी ढाँचे में भी काफी खामियाँ थीं। आश्चर्य की बात कि वहाँ घटना के दौरान एक गार्ड तक मौजूद नहीं था। नाइट शिफ्ट के दौरान ऑन कॉल इंटर्न, डॉक्टरों और नर्सों की सुरक्षा के लिए कोई व्यवस्था नहीं थी।

राष्ट्रीय महिला आयोग ने अपनी रिपोर्ट में ये भी पाया कि सबूतों से छेड़छाड़ की संभावना जताई है। साथ ही घटनास्थल पर अचानक से नवीनीकरण का कार्य शुरू किए जाने पर भी सवाल उठाया। मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में शौचालय गंदे हैं, प्रकाश की उचित व्यवस्था नहीं है, और साथ ही सुरक्षा कारणों का अभाव है। घटना के बाद इस्तीफा देने वाले पूर्व प्रधानाध्यापक डॉ संदीप घोष से भी पूछताछ अभी तक अधूरी है। NCW ने कहा कि तुरंत यहाँ की व्यवस्था सही की जाए।

इस घटना को लेकर देश भर के डॉक्टरों ने शनिवार (17 अगस्त, 2024) को अस्पतालों में OPD बंद रखा। कोलकाता में लगातार 8वें दिन विरोध प्रदर्शन जारी रहा। अब तक इस मामले में सिर्फ एक ही शख्स को गिरफ्तार किया गया है, जबकि विशेषज्ञ कह रहे हैं कि ये एक व्यक्ति का काम नहीं है। प्रदर्शनों के कारण कर्नाटक में डॉक्टरों की सुरक्षा को लेकर सरकार ने बैठक बुलाई है। दिल्ली AIIMS में भी प्रोटेस्ट मार्च निकाला गया। CBI ने भी क्राइम सीन का इंस्पेक्शन किया है।

शाहरुख़ ने साथियों संग मिल कर दिनेश को पीट-पीट कर मार डाला, स्कूटी आगे-पीछे करने को लेकर हुआ था मामूली विवाद: सड़क पर उतरे लोग

राजस्थान के उदयपुर में हिंदू-मुस्लिम बवाल के बीच राजधानी जयपुर में ई-रिक्शा सवार मुस्लिम युवकों ने दिनेश नाम के हिंदू युवक की सड़क पर इतनी पिटाई कर दी, कि दिनेश ने दम तोड़ दिया। दिनेश स्कूटी पर सवार था और अपने साथी जितेंद्र के साथ कहीं जा रहा था, तभी शाहरुख खान और उसके ई-रिक्शा सवार दोस्तों के साथ गाड़ी आगे-पीछे करने को लेकर विवाद हो गया, जिसमें शाहरुख और उसके दोस्तों ने दिनेश की जमकर पिटाई कर दी। दिनेश की घर पहुँचने के बाद हालत बिगड़ गई, जिसके बाद उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उसकी मौत हो गई।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये मामला जयपुर के शास्त्री नगर इलाके का है। जहाँ शुक्रवार (16 अगस्त 2024) को दिनेश स्वामी नाम के युवक को शाहरुख और उसके साथियों ने जमकर पीटा। दिनेश को गंभीर हालत में काँवटिया अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ इलाज के दौरान दिनेश की मौत हो गई। दिनेश की मौत के बाद शनिवार (17 अगस्त 2024) को शास्त्री नगर थाने में जमकर हंगामा हुआ। उसके परिवार और समर्थकों ने पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की माँग की।

बताया जा रहा है कि शुक्रवार रात करीब साढ़े आठ बजे शास्त्री नगर थाना क्षेत्र के आज़ाद नगर में ई-रिक्शा और एक स्कूटी चालक के बीच गाड़ी आगे पीछे करने को लेकर कहासुनी हो गई। इस दौरान ई-रिक्शा पर सवार कुछ युवकों ने स्कूटी सवार दिनेश स्वामी और उसके साथी जितेंद्र के साथ मारपीट की। मारपीट की इस घटना में दिनेश स्वामी गंभीर रूप से घायल हो गए। मारपीट के बाद दोनों पक्ष अपने-अपने घर चले गए। घर पहुँचने पर दिनेश को बेचैनी होने लगी। परिजन उसे तुरंत काँवटिया अस्पताल ले गए, जहाँ इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इसके बाद जमकर हंगामा हुआ।

इस घटना के बाद इलाके में धारा-144 भी लगा दी गई। वहीं, पुलिस ने आरोपित शाहरुख को गिरफ्तार कर लिया है। उसके साथियों की तलाश की जा रही है। पुलिस ने लोगों से अफवाह न फैलाने की अपील की है। एडिशनल डीसीपी (नॉर्थ) बजरंग सिंह ने बताया है कि मृतक के शव का पोस्टमार्टम कराया गया है। पोस्टमार्टर रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

अमित मालवीय के खिलाफ किया था ट्वीट, दिल्ली हाई कोर्ट ने सपा को कहा – डिलीट करो: BJP नेता पर लगाया था रेप का आरोप

दिल्ली हाई कोर्ट ने शुक्रवार (16 अगस्त 2024) को समाजवादी पार्टी को भाजपा आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय के खिलाफ एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लगाए गए बलात्कार के आरोपों को हटाने का आदेश दिया। मालवीय के वकीलों ने कोर्ट में तर्क दिया कि वे एक प्रमुख राजनीतिक दल से जुड़े हैं और उन्होंने समाज में प्रतिष्ठा है, जिसे धूमिल करने की कोशिश की गई है।

जस्टिस विकास महाजन की अदालत के समक्ष मालवीय की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद नायर और नलिन कोहली उपस्थित हुए। अरविंद नायर ने तर्क दिया, “इस तरह के बयान किसी के लिए नहीं दिए जा सकते… इससे हर दिन नुकसान हो रहा है। लाखों लोगों ने इसे (X पर पोस्ट को) देखा है।” उन्होंने ट्वीट हटाने के लिए कोर्ट से अंरिम आदेश की माँग की।

जस्टिस महाजन ने इस पर सहमति जताते हुए कहा कि आदेश दस्ती (हाथ से भेजे जाने वाले कोर्ट नोटिस की सेवा) के जरिए दिया जाएगा। दरअसल, अमित मालवीय ने अखिलेश यादव के राजनीतिक दल समाजवादी पार्टी पर मानहानि का मुकदमा किया है। यह मुकदमा अधिवक्ता सुरजेंदु शंकर दास और एनी मित्तल के जरिए दायर किया गया है।

दरअसल, यह विवाद अयोध्या में सपा नेता मोईद खान पर लगे बलात्कार के आरोपों से जुड़ा है। इस मामले में राजू खान को भी आरोपित किया गया है। अखिलेश यादव ने 3 अगस्त को ट्वीट किया कि इस मामले में डीएनए टेस्ट होना चाहिए और दोषियों को सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि अगर आरोप झूठे साबित होते हैं तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।

उसी दिन अमित मालवीय ने अखिलेश यादव के ट्वीट का हवाला देते हुए पूछा कि वह डीएनए टेस्ट के जरिए क्या साबित करना चाहते हैं। सपा की आलोचना करते हुए अमित मालवीय ने ट्विट में लिखा, “आने वाले दिनों में जहाँ-जहाँ सपा जीतेगी, वहाँ-वहाँ हर गाँव में पिछड़े समाज की बेटियों और बहुओं के साथ इस तरह के दुष्कर्म की खबरें खूब आएँगी।”

इसके बाद समाजवादी पार्टी के मीडिया सेल के ट्विटर हैंडल ने अमित मालवीय पर प्रतिक्रिया व्यक्त की और बलात्कार के आरोपित लोगों के साथ भाजपा नेताओं की तस्वीरों के साथ एक्स पर एक पोस्ट डाली। इसमें पीएम नरेंद्र मोदी की आसाराम बापू और सीएम योगी आदित्यनाथ की स्वामी चिन्मयानंद के साथ तस्वीर शामिल थी।

समाजवादी पार्टी के मीडिया सेल के ट्वीट में आगे कहा गया था कि ऐसी चर्चा थी कि मालवीय महिलाओं को होटल के अपने कमरे में बुलाकर उनका बलात्कार करते थे और पुरुषों से उनके अवैध संबंधों की बातें करते थे। इस ट्वीट पर अमित मालवीय ने आपत्ति जताई थी और मानहानि का मुकदमा किया था। इसके बाद अब कोर्ट ने इसे हटाने का आदेश दिया है।

नमाज में डिस्टर्ब की बात कह मस्जिद के पास रोकी अवंतीबाई लोधी की शोभायात्रा: बच्चे के घायल होने के आरोप में पथराव, मेरठ में कई थानों की पुलिस तैनात

उत्तर प्रदेश के मेरठ में वीरांगना अवंती बाई लोधी की शोभायात्रा पर मुस्लिमों द्वारा पथराव करने के बाद सांप्रदायिक तनाव फैल गया है। दरअसल, मस्जिद के सामने डीजे बजाने के विवाद और फिर मुस्लिम बच्चे पर स्पीकर गिरने के बाद मुस्लिमों ने शोभायात्रा पर पथराव करते हुए इसमें शामिल लोगों के साथ मारपीट की। इसके बाद दूसरे पक्ष ने भी पथराव किया।

शुक्रवार (16 अगस्त) को वीरांगना अवंती बाई लोधी का जन्मदिन था। इस अवसर पर लोधी युवा संगठन ने विशाल शोभायात्रा निकाली थी। शोभायात्रा शिवशक्ति नगर स्थित दुर्जन सिंह लोधी मंदिर से शुरू हुई। इसके बाद इंदिरा नगर, ब्रह्मपुरी, लोधों का पुल, ईश्वरपुरी, कबाड़ी बाजार और वैली बाजार से होते हुए रात करीब 10 बजे खैरनगर पहुँची।

NBT के अनुसार, शोभायात्रा जब हौज वाली मस्जिद के पास पहुँची तो मुस्लिमों ने म्यूजिक बजाने पर आपत्ति जाहिर की। उन्होंने कहा कि डीजे बजाने से उन्हें नमाज अता कर रहे लोगों को परेशानी हुई। हालाँकि, किसी तरह मामले को रफा-दफा कर दिया गया। इसी दौरान शाद पुत्र शाकिर निवासी खैरनगर नाम के एक लड़के के घायल होने की बात कही गई।

मुस्लिमों का आरोप था कि शोभायत्रा में शामिल म्यूजिक सिस्टम का एक स्पीकर उस बच्चे के ऊपर गिरने से वह घायल हुआ गया। इसे बहाना बनाकर मुस्लिमों शोभायात्रा पर पथराव कर दिया। कुछ लोगों ने शोभायात्रा में शामिल लोगों के साथ मारपीट भी की। अचानक हमले से लोधी समाज दंग रह गया और बचाव में इन लोगों ने भी पथराव कर दिया।

सांप्रदायिक टकराव की सूचना मिलते ही एसपी आयुष विक्रम सिंह कई थानों की पुलिस के साथ मौके पर पहुँच गए। पुलिस ने खैरनगर सहित घंटाघर के बाजार बंद करा दिए। पुलिस ने कड़ी सुरक्षा में शोभायात्रा संपन्न कराने के बाद अतिथियों का सम्मान कराया। तनाव के चलते खैरनगर में पुलिस बल तैनात किया गया है।

वहीं, भाजपा के एक नेता ने दावा किया कि शोभायात्रा का आखिरी डोला आ रहा था। इसी दौरान अचानक उसका जेनरेटर खराब हो गया। लोधी समाज के युवक जब जेनरेटर ठीक करने लगे तो मुस्लिमों ने जेनरेटर की चाबी निकाल ली। विरोध करने पर मुस्लिमों ने उनसे मारपीट की और उनके कपड़े फाड़ दिए। इसके साथ ही पथराव भी किया।

भाजपा नेता का कहना है कि ऐसा करने वालों पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) लगना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह शोभायात्रा साल 2006 से लगातार निकल रही है। वहीं, शोभायात्रा की आयोजक समिति के सदस्य प्रवीन लोधी का कहना है कि उनकी यात्रा में शामिल म्यूजिक सिस्टम का स्पीकर नहीं गिरा था। बालक किसी और चीज से घायल हुआ।

MUDA घोटाला, कर्नाटक CM सिद्धारमैया पर ही केस: पत्नी की सस्ती जमीन का सरकारी अधिग्रहण… बदले में पॉश कॉलनी में 38000+ वर्ग फीट जमीन

कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने मैसूर शहरी विकास प्राधिकरण (MUDA) मामले में राज्य की कॉन्ग्रेस सरकार के मुखिया सिद्धारमैया के खिलाफ केस चलाने की अनुमति दे दी है। राज्यपाल ने बीते दिनों MUDA भूमि घोटाले में मुख्यमंत्री के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए कैबिनेट की राय माँगी थी। हालाँकि, राज्य कैबिनेट ने इसे कॉन्ग्रेस सरकार को अस्थिर करने की कोशिश बताया है।

राज्यपाल ने मुख्यमंत्री के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए राय माँगने पर गुरुवार (15 अगस्त) को कैबिनेट बैठक हुई थी। इसमें राज्यपाल को कारण बताओ नोटिस वापस लेने की सलाह दी गई। इसके बाद राज्यपाल ने इस संबंध में कानूनी विशेषज्ञों से राय ली और फिर मुख्यमंत्री सिद्दारमैया के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी दे दी।

MUDA भ्रष्टाचार मामले में शिकायतकर्ताओं ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 17 और 19 तथा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 218 के तहत मुख्यमंत्री के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी माँगी थी। भ्रष्टाचार विरोधी एक्टिविस्ट टीजे अब्राहम समेत कई शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि MUDA में अवैध आवंटन से राज्य को 45 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है।

शिकायत में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, उनकी पत्नी पार्वती, बेटे और MUDA के आयुक्त के खिलाफ मुकदमा चलाने की माँग की गई थी। बता दें कि मुख्य विपक्षी दल भाजपा इस घोटाले की जाँच की माँग लंबे समय से करती आ रही है। भाजपा ने इस साल जुलाई में मुख्यमंत्री कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन करते हुए सीद्धारमैया की इस्तीफे तथा सीबीआई जाँच की माँग की थी।

क्या है MUDA घोटाला?

शॉर्ट में MUDA (मुडा) कहलाने वाला मैसूर शहरी विकास प्राधिकरण कर्नाटक की विकास एजेंसी है, जो मैसूर में शहरी विकास और बुनियादी ढाँचे का विकास करती है। यह दिल्ली के DDA और नोएडा के Noida ऑथिरिटी की तरह ही है। इन एजेंसियों की तरह ही MUDA भी लोगों को किफायती कीमत पर आवास उपलब्ध कराने का काम करता है। 

शहरी विकास के दौरान अपनी जमीन खोने वाले लोगों के लिए MUDA एक योजना लेकर आई थी। साल 2009 में पहली बार लागू की गई इस योजना का नाम 50:50 था। इसमें जमीन खोने वाले लोग विकसित भूमि के 50 प्रतिशत के हकदार थे। यह 30’x40’ आयाम के लगभग 9 विकसित भूखंडों के बराबर है और वे इसे मौजूदा बाजार दर पर किसी को भी बेचने के लिए स्वतंत्र थे।

50:50 योजना में घोटाला

आरोप है कि ये भूखंड अवैध रूप से उन लोगों को आवंटित किए, गए जो खुद को भूमिहीन बता रहे थे। इस घोटाले में बिचौलियों की भूमिका के अलावा MUDA अधिकारियों की सक्रिय मिलीभगत का भी संदेह है। एक रिपोर्ट के अनुसार, 15 जून 2024 को दो भूमिहीनों को भूखंड आवंटित करने के आदेश किए गए थे।

इनमें तत्कालीन MUDA आयुक्त दिनेश कुमार ने 8.14 एकड़ भूमि के मूल मालिक के उत्तराधिकारी को 98,206 वर्ग फुट विकसित भूमि आवंटित की। इस भूमि को MUDA ने गोकुलम लेआउट के विकास के लिए अधिग्रहित किया था। मैसूर में गोकुलम लेआउट के लिए अधिग्रहण की कार्यवाही 1968 में शुरू हुई थी।

सीएम सिद्धारमैया की पत्नी को दिया गया लाभ

राज्य में जब भाजपा की सरकार आई तो उसने साल 2020 में इस योजना को बंद कर दिया। आरोप है कि इस योजना के बंद हो जाने के बाद भी MUDA ने 50:50 योजना के तहत जमीनों का अधिग्रहण और आवंटन जारी रखा। इस योजना के तहत वर्तमान सीएम सिद्धारमैया की पत्नी पार्वती को लाभ पहुँचाया गया। MUDA के इस घोटाले में प्राधिकरण के आयुक्त पर भी आरोप हैं।

पार्वती की 3 एकड़ और 16 गुंटा भूमि MUDA द्वारा अधिग्रहित की गई। मैसूर के बाहरी इलाके केसारे में यह जमीन मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की पत्नी पार्वती के भाई मल्लिकार्जुन स्वामी ने साल 1996 में खरीदा था। इसके बाद उन्होंने साल 2010 में इसे पार्वती को उपहार में दे दिया था। आरोप है कि MUDA ने इस जमीन का अधिग्रहण किए बिना ही इस पर देवनूर तृतीय चरण की योजना विकसित कर दी। 

बाद में पार्वती ने जमीन अधिग्रहण का दावा करते हुए मुआवजे के लिए आवेदन किया। उनकी जमीन के बदले पार्वती को मैसूर के एक महंगे इलाके विजयनगर III और IV फेज में उन्हें 14 साइटें आवंटित की गईं। यह आवंटन 50:50 अनुपात योजना के तहत कुल 38,284 वर्ग फीट का था। इस आवंटन में विपक्ष मुख्यमंत्री और उनकी पत्नी पर घोटाले का आरोप लगा रहा है।


अल्लाह के सिवाय इबादत लायक कोई नहीं: तिरंगे पर लिखवाई कुरान की आयतें, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने माना झंडे का अपमान, चलता रहेगा 6 मुस्लिमों पर केस

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने भारतीय झंडा तिरंगा का अपमान करने के मामले में 6 मुस्लिमों के खिलाफ शुरू की गई आपराधिक कार्रवाई को रद्द करने से इनकार कर दिया है। ये सभी आरोपित एक धार्मिक जुलूस में अपने हाथों में तिरंगा लेकर चल रहे थे। इन तिरंगे पर इस्लामी किताब कुरान की आयतें एवं कलमा लिखा हुआ था।

मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस विनोद दिवाकर ने कहा कि प्रथम दृष्ट्या आरोपित द्वारा किया गया कृत्य भारतीय ध्वज संहिता 2002 के तहत दंडनीय है। जस्टिस दिवाकर ने आगे कहा कि आवेदकों द्वारा राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण अधिनियम 1971 की धारा 2 का उल्लंघन किया गया है।

अदालत ने कहा कि भारतीय ध्वज तिरंगा धार्मिक नैतिकता और सांस्कृतिक मतभेदों से परे राष्ट्र की एकता और विविधता का प्रतीक है। अदालत ने कहा, “यह भारत की सामूहिक पहचान और संप्रभुता का प्रतिनिधित्व करने वाला एक एकीकृत प्रतीक है। तिरंगे के प्रति अनादर का कृत्य दूरगामी सामाजिक-सांस्कृतिक प्रभाव डाल सकता है, विशेष रूप से भारत जैसे विविधतापूर्ण समाज में।”

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि तिरंगा पर कुरान की आयतें एवं कलमा आदि लिखने की घटनाओं का फायदा वे लोग उठा सकते हैं जो सांप्रदायिक विवाद पैदा करना चाहते हैं या विभिन्न समुदायों के बीच गलतफहमियों को बढ़ावा देना चाहते हैं। इसलिए कुछ व्यक्तियों के कार्यों का उपयोग पूरे समुदाय को कलंकित करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।

दरअसल, उत्तर प्रदेश की जालौन पुलिस ने पिछले साल आरोपित गुलामुद्दीन एवं 5 अन्य लोगों के खिलाफ राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण अधिनियम 1971 अधिनियम की धारा 2 के तहत मामला दर्ज किया था। इस मामले में आरोपितों ने जमानत की माँग करते हुए अदालत का रुख किया था। उनके वकील ने तर्क दिया कि जाँच से यह पता नहीं चला कि FIR में उल्लेखित झंडा तिरंगा है या तीन रंगों वाला कोई अन्य झंडा।

आरोपितों के वकील ने आगे तर्क दिया कि पुलिस रिकॉर्ड पर ऐसा कोई सबूत नहीं ला सकी, जिससे यह पता चले कि अधिनियम की धारा 2 और 3 में निर्दिष्ट राष्ट्रीय ध्वज के साथ कोई शरारत की गई थी। वकील ने यह भी कहा कि पुलिस ने एफआईआर दर्ज करने के बाद राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा को प्लांट किया था और आरोपितों को झूठे मामले में फँसाया गया था।

वहीं, राज्य सरकार की ओर से पेश एडिशनल गवर्नमेंट एडवोकेट (AGA) ने कहा कि जूलुस के दौरान तिरंगा लगाया गया था। इस दौरान देखा गया कि तिरंगे पर अरबी में कुछ लिखा हुआ है। बात में पता चला कि ये आयत और कलमा हैं। इस मामले में पुलिस कॉन्स्टेबल खुर्शीद आलम, एशानुल्लाह और रामदास ने कोर्ट में अपना बयान दर्ज कराया है।

सरकारी वकील ने कहा, “जब शहर काजी मौलाना साबिर अली को जालौन तलब कर पढ़वाया गया तो उन्होंने कहा कि इसमें अरबी में ला इलाही इलिल्लाह मुहम्मद उल रसूल अल्लाह लिखा था, जिसका अर्थ है- अल्लाह के सिवाय कोई इबादत करने लायक नहीं है।” इसके अलावा, मुस्लिमों के पैगंबर मुहम्मद के नवाजे अली की तलवार ‘जुल्फकार’ से संबंधित आयत लिखी हुई थी।

तमाम तर्कों को सुनने के बाद कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी और कहा कि इस पर निर्णय ट्रायल कोर्ट ही ले सकता है। अदालत ने कहा कि समन आदेश में ऐसी कोई अवैधता, विकृति या अन्य कोई महत्वपूर्ण त्रुटि नहीं पाई गई है, जिससे सीआरपीसी की धारा 482 के तहत शक्तियों के प्रयोग में न्यायालय द्वारा हस्तक्षेप करने का औचित्य सिद्ध हो सके।