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जिस उदयपुर में कन्हैया लाल का गला रेता, वहीं अब सरकारी स्कूल के बाहर छात्र को चाकू मारा: हिंदू संगठनों ने बंद कराया बाजार, धारा 144 लागू

राजस्थान के उदयपुर स्थित एक सरकारी स्कूल के दो छात्रों के झगड़े से सांप्रदायिक तनाव फैल गया है। बताया जा रहा है कि साथ पढ़ने वाले एक मुस्लिम छात्र ने एक हिंदू छात्र को चाकू मार दिया। इसमें वह बुरी तरह घायल हो गया। खबर फैलते ही बड़ी संख्या में लोग जुटे और शॉपिंग मॉल में तोड़फोड़ कर दी। एक गैरेज में खड़ी कारों को भी आग लगा दिया। आखिरकार पुलिस को लाठी चार्ज करनी पड़ी।

उदयपुर शहर के भटियाणी चौहट्टा में शुक्रवार (16 अगस्त 2024) को सुबह एक सरकारी स्कूल के बाहर एक छात्र ने देवराज नाम के छात्र को चाकू मारकर घायल कर दिया। हमला करने वाला छात्र मुस्लिम समुदाय का बताया जा रहा है। इसकी जानकारी मिलते ही स्कूल के शिक्षक घायल हिंदू छात्र को लेकर महाराणा भूपाल सिंह हॉस्पिटल पहुँचे। वहाँ ICU में छात्र का इलाज चल रहा है।

हिंदू छात्र को चाकू मारने की बात फैलते ही हिंदूवादी संगठनों में आक्रोश फैल गया। कई हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता एवं भाजपा पदाधिकारी अस्पताल के पास जुटकर नारेबाजी करने लगे। देखते ही देखते लोगों में आक्रोश बढ़ता गया और हिंदू कार्यकर्ता बाजार पहुँच गए। इसके बाद लोगों ने घटना के विरोध में बाजार बंद करा दिया। वहीं, कुछ लोगों ने वाहनों में तोड़फोड़ कर आग लगा दी।

हिंदूवादी संगठनों ने चेतक सर्किल, हाथीपोल, अश्विनी बाजार, बापू बाजार, दिल्ली गेट और घंटाघर एरिया की दुकानों को बंद करवा दिया है। हालात को देखते हुए इन इलाकों में बड़ी संख्या में पुलिस बल को तैनात कर दिया गया है। कलेक्टर अरविंद पोसवाल ने बताया कि हमला करके फरार हुए नाबालिग छात्र और उसके अब्बू को हिरासत में लिया गया है। इलाके में धारा 144 भी लागू की गई है।

जिला शिक्षा अधिकारी लोकेश भारती ने बताया कि दोनों छात्रों की उम्र लगभग 15 साल है। दोनों राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, भटि्टयाणी चौहट्‌टा में एक ही क्लास में पढ़ते हैं। दोनों के बीच किस बात को लेकर झगड़ा हुआ, इसकी जानकारी सामने नहीं आई है। लंच के दौरान दोनों स्कूल के बाहर निकल गए। इस दौरान मुस्लिम छात्र ने देवराज की जाँघ में दो-तीन बार चाकू घोंप दिया।

स्कूल की प्रिंसिपल ईशा धर्मावत ने बताया कि लंच के करीब 5 से 7 मिनट बाद स्कूल के बाहर से कुछ छात्र चिल्लाते हुए अंदर आए। उन्होंने कहा, “मैंने तुरंत बाहर जाकर देखा तो एक स्टूडेंट घायल अवस्था में पड़ा था। मेरी स्कूटी पर बैठाकर स्टाफ ने उसे तुरंत हॉस्पिटल पहुँचाया।” प्रिंसिपल ने बताया कि दोनों छात्र पढ़ने में अच्छे और दोनों को कभी झगड़ते हुए नहीं देखा गया।

घायल छात्र की स्थिति स्टेबल है। डॉक्टरों का कहना है कि बच्चा जल्दी ही रिकवर हो जाएगा। जिलाधिकारी अरविंद पोसवाल ने लोगों से किसी अफवाह पर ध्यान नहीं देने और शहर का अमन-चैन बनाए रखने में मदद करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि जो अफवाह फैलाएगा, उस पर कार्रवाई की जाएगी। बता दें कि यह वही उदयपुर है, जहाँ कन्हैयालाल दर्जी की गला काटकर हत्या कर दी गई थी।

पर्याप्त इलाज देने के बाद भी अस्पताल में यूनुस की हो गई मौत, परिजनों ने डॉक्टर-नर्स पर हमला बोला: 8 के खिलाफ केस

गुजरात के जूनागढ़ अस्पताल में डॉक्टरों पर हमले की खबर सामने आई है। बताया जा रहा है कि वहाँ यूनुस नाम के मरीज के परिजनों ने डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए उन पर हमला किया। इस घटना में दो डॉक्टर और उनके स्टाफ घायल हो गए। जब अस्पताल के अन्य कर्मचारियों को इस तरह हमले की सूचना मिली तो वो घटना के विरोध में हड़ताल पर चले गए, लेकिन पुलिस ने मौके पर पहुँचकर उन्हें आश्वासन दिया कि वो आरोपितों पर सख्त कार्रवाई करेंगे। इसके बाद 8 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई और 5 लोगों को राउंडअप किया गया। वहीं डॉक्टरों ने भी अपनी हड़ताल वापस ले ली

अस्पताल में डॉक्टरों पर हमला

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जूनागढ़ सिविल अस्पताल में 15-16 अगस्त की रात एक मरीज को सीने में दर्द की शिकायत पर भर्ती कराया गया था। मरीज का नाम यूनुस था। डॉक्टरों ने उसकी स्थिति देखते हुए उसे जरूरी इलाज दिया, लेकिन बाद में उसे आईसीयू में भर्ती करना पड़ा और फिर वो वेंटिलेटर पर चला गया। बाद में उसकी मौत हो गई। इसी दौरान यूनुस के घरवालों ने डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाया और फिर उनपर हमला कर दिया। घटना में डॉक्टर समेत नर्सिंग स्टाफ गंभीर रूप से घायल हो गए।

पुलिस को जैसे ही इस मामले की सूचना मिली। वो फौरन मौके पर पहुँचे। उन्होंने आरोपितों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया। साथ ही पुलिस अधिकारियों ने डॉक्टरों को उचित और कड़ी कार्रवाई का आश्वासन देते हुए आरोपितों की तलाश करनी शुरू कर दी। पुलिस द्वारा त्वरित एक्शन देख डॉक्टरों ने अपनी हड़ताल वापस ले ली। सब अपनी ड्यूटी पर लौट आए।

ऑपइंडिया ने की पुलिस से बात

ऑपइंडिया ने इस घटना को लेकर जूनागढ़ पुलिस से संपर्क किया। पुलिस ने हमें बताया कि घटना की सूचना मिलते ही पुलिस का काफिला मौके पर पहुँचा और स्थिति को नियंत्रित किया। पुलिस टीम द्वारा भी त्वरित कार्रवाई की गई। सिविल अस्पताल के डॉक्टरों और स्टाफ को आश्वासन दिया गया कि सभी आरोपितों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई की जाएगी। घटना के कुछ ही घंटों बाद पुलिस ने 8 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और 5 को राउंडअप कर लिया है, फिलहाल इस मामले में आगे की जाँच जारी है।

पूरी घटना को लेकर डीएसपी हितेश धांधल्या ने कहा है कि रात में सिविल अस्पताल में ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ पर हमला हुआ था। यहाँ एक परिवार का रिश्तेदार इलाज के लिए आया था और बाद में उसकी मौत हो गई, तो परिजनों ने डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ पर हमला कर दिया। आरोपित के खिलाफ ए डिवीजन पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कर ली गई है और जो भी हमलावर है उसके खिलाफ तत्काल कार्रवाई की गई है।

घटना के बाद डॉक्टरों ने भी कहा है कि वे रात करीब डेढ़ बजे ड्यूटी पर मौजूद थे। इस बीच यूनुस नाम के मरीज को वेंटिलेटर पर रखा गया था। इलाज के दौरान उनकी मौत हो जाने के बाद उनके परिजनों ने डॉक्टरों पर हमला कर दिया और उन्हें पीटना शुरू कर दिया। घटना के बाद पुलिस तुरंत अस्पताल पहुँची और मामले को सुलझाया और डॉक्टरों की हड़ताल खत्म कराई।

भारत सरकार के ‘उपचार’ से बांग्लादेश को आया होश, मुहम्मद यूनुस ने PM मोदी को किया फोन: हिंदुओं की सुरक्षा का दिया भरोसा

हिंदुओं के खिलाफ हिंसा को लेकर लाल किले से चेतावनी देने के बाद बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख सलाहकार मुहम्मद यूनुस ने पीएम मोदी को फोन किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर खुद इसकी जानकारी साझा की है। पीएम मोदी ने भी स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले से बांग्लादेश के हालात का जिक्र किया था।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “प्रोफेसर मुहम्मद यूनुस से फोन पर बात की। मौजूदा स्थिति पर विचारों का आदान-प्रदान किया। लोकतांत्रिक, स्थिर, शांतिपूर्ण और प्रगतिशील बांग्लादेश के लिए भारत के समर्थन को दोहराया। उन्होंने बांग्लादेश में हिंदुओं और सभी अल्पसंख्यकों की सुरक्षा एवं संरक्षा का आश्वासन दिया है।”

बांग्लादेश में शेख हसीना के नेतृत्व वाली सरकार के तख्तापलट के बाद 8 अगस्त को मोहम्मद यूनुस ने अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार के रूप में शपथ ली थी। नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस के कार्यभार सँभालने के बाद पीएम मोदी ने उन्हें शुभकामनाएँ दी थीं। इसके साथ ही बांग्लादेश में हिंदुओं एवं अन्य अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा था।

हालाँकि, इसके बाद भी बांग्लादेश में हिंदुओं के प्रति हिंसा जारी रही। उनके घरों, दुकानों से लेकर मंदिरों तक को निशाना बनाया गया। हत्या से लेकर बलात्कार की अनगिनत घटनाओं को अंजाम दिया गया। बांग्लादेश से हजारों की तलाश में निकलकर बांग्लादेश के हिंदू बंगाल से सटे भारतीय सीमा में घुसने की कोशिश की थी।

इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी ने 15 अगस्त 2024 को स्वतंत्रता दिवस के समारोह में लाल किले से कहा, “बांग्लादेश में जो कुछ भी हुआ है, उसको लेकर पड़ोसी देश के नाते चिंता होना मैं समझ सकता हूँ। मैं आशा करता हूँ कि वहाँ पर हालात जल्द ही सामान्य होंगे। खासकर 140 करोड़ देशवासियों की चिंता है कि वहाँ के हिन्दुओं, वहाँ के अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित हो।”

इससे पहले मोदी सरकार ने ‘बिजली निर्यात नियमों’ में संशोधन का आदेश दिया था। इसका सीधा असर बांग्लादेश पर असर पड़ने वाला था। आदेश में कहा गया कि अडानी पावर का एक कोयला आधारित पावर प्लांट जो अभी तक केवल बांग्लादेश को बिजली बेच सकता था, वो अब भारत को भी बिजली बेचेगा। वहीं, अमित शाह ने हिंदुओं के खिलाफ हिंसा पर नजर रखने के लिए एक कमेटी गठित की है।

‘बांग्लादेश नेशनल हिंदू ग्रैंड अलायंस’ नामक एक गैर-राजनीतिक हिन्दू संगठन ने वहाँ अल्पसंख्यकों को लेकर बड़ा दावा किया है। अलायंस ने दावा किया है कि पाँच अगस्त को शेख हसीना के नेतृत्व वाली सरकार के पतन के बाद से बांग्लादेश के 48 जिलों में 278 स्थानों पर अल्पसंख्यक समुदाय को हमलों और धमकियों का सामना करना पड़ा है।

धारदार हथियारों के साथ घर में घुसी 30-35 लोगों की भीड़, पहले लूटा फिर बारी-बारी से किया रेप: बांग्लादेश के हिंदू महिला की आपबीती, जमात की ‘गारंटी’ पर घर लौटा परिवार

बांग्लादेश में शेख हसीना सरकार के जाने के बाद वहाँ सतखीरा जिले के ताला में एक 35 वर्षीय हिंदू महिला के साथ गैंगरेप का मामला सामने आया है। कालबेला की रिपोर्ट के अनुसार, यह घटना बीती 5 अगस्त को हुई।

पीड़िता ने बताया कि 5 अगस्त की शाम 7 बजे 30-35 लोगों की भीड़ उसके घर में घुस आई और तोड़फोड़ की। सबके हाथ में धारदार हथियार थे। इस भीड़ ने पहले तो घर के दरवाजे और खिड़कियाँ तोड़कर एक बक्सा लूटा उसके बाद उसको एक गौशाला के पीछे ले गए और वहाँ उसे चुप रहने की धमकी देकर सबने बारी-बारी से उसका बलात्कार किया।

घटना के समय महिला का पति घर पर नहीं था उसका खुलना के अस्पताल में इलाज चल रहा था। जब उसे इस घटना का पता चला तो वो असहाय होकर अपना परिवार लेकर इलाके से चला गया। हालाँकि बाद में जमात के स्थानीय नेताओं डॉ कमाल और अब्दुल के आश्वासन पर पीड़िता, उसका पति और बच्चे 13 अगस्त को वापस लौटे। पूछने पर महिला ने बताया कि वो बलात्कारियों की पहचान नहीं कर पाएगी क्योंकि सबके मुँह पर मास्क थे।

इस मामले में ताला पुलिस स्टेशन के प्रभारी अधिकारी मोमिनुल इस्लाम ने दावा किया कि पुलिस को बलात्कार के मामले की जानकारी नहीं दी गई है। प्रभारी ने कहा पीड़ित परिवार से बातचीत कर उनके नाम और पते की जानकारी लेने के बाद ‘आवश्यक कार्रवाई’ की जाएगी।

इस मामले पर मगुरा यूपी के चेयरमैन गणेश देबनाथ ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “मैंने पीड़ितों के परिवारों और पड़ोसियों से बात की है। जब तक राजनीतिक स्थिति सामान्य नहीं हो जाती, मैं मदद नहीं कर पाऊँगा। इसलिए मैं पत्रकारों से अनुरोध करता हूँ कि वे पीड़ित परिवार के साथ खड़े हों।”

गौरतलब है कि 9 अगस्त को बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई ओइक्या परिषद ने एक रिपोर्ट जारी की थी, जिसमें 5 अगस्त को प्रधानमंत्री शेख हसीना के जाने के बाद देश के 52 जिलों में अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्यों, विशेषकर हिंदुओं पर हमलों की 205 घटनाओं का विवरण दिया गया था।

परिषद ने नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री मुहम्मद यूनुस को इन घटनाओं की जानकारी पत्र लिखकर दी थी। संगठन के अध्यक्ष निर्मल रोसारियो ने कहा, “हमें प्रारंभिक जानकारी मिली है कि अब तक 52 जिलों में अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न की कम से कम 205 घटनाएँ हुई हैं। हम सुरक्षा चाहते हैं क्योंकि हमारा जीवन भयावह स्थिति में है। हम रात में जागकर अपने घरों और मंदिरों की रखवाली कर रहे हैं। हमने अपने जीवन में ऐसी घटनाएँ कभी नहीं देखी हैं। हम माँग करते हैं कि सरकार देश में सांप्रदायिक सद्भाव बहाल करे।”

370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर में पहली बार विधानसभा चुनाव, 3 चरणों में पड़ेंगे वोट: नतीजे हरियाणा के साथ 4 अक्टूबर को होंगे घोषित

चुनाव आयोग ने शुक्रवार (16 अगस्त 2024) को जम्मू-कश्मीर और हरियाणा विधानसभा चुनाव की घोषणा कर दी। हालाँकि, उत्तर प्रदेश और बिहार विधानसभा उपचुनाव की तारीखों का भी ऐलान अभी नहीं किया गया है। जम्मू-कश्मीर में 10 साल बाद विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं। वहाँ आखिर बार विधानसभा चुनाव 2014 में हुए थे।

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से 30 सितंबर 2024 तक जम्मू-कश्मीर में चुनाव कराने का आदेश दिया था। जम्मू-कश्मीर में 5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 हटने के बाद यह पहला विधानसभा चुनाव होगा। मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने कहा, “विधानसभा चुनाव तीन चरणों में 18 सितंबर, 25 सितंबर और 1 अक्टूबर को मतदान होगा। वहीं 4 अक्टूबर को मतगणना होगी।”

बताते चलें कि जम्मू-कश्मीर में अब विधानसभा सीटों की संख्या बढ़कर 90 हो गई है। जम्मू में अब 43 सीटें और कश्मीर में 47 सीटें हैं। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) लिए 24 सीटें रिजर्व रखी गई हैं। हालाँकि, यहाँ चुनाव नहीं होंगे। वहीं, लद्दाख में विधानसभा नहीं है। इस तरह से कुल 114 सीटें में से सिर्फ 90 पर चुनाव कराए जाएँगे।

इससे पहले जम्मू-कश्मीर में कुल 111 सीटें थीं, जिनमें 87 सीटों पर चुनाव होते थे। इनमें से 37 सीटें जम्मू में, 46 सीटें कश्मीर में और 4 सीटें लद्दाख में होती थीं। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के लिए 24 सीटें रखी गई थीं। नए परिसीमन ने जम्मू संभाग के सांबा, कठुआ, राजौरी, किश्तवाड़, डोडा और उधमपुर में एक-एक सीट बढ़ी है। वहीं, कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में एक सीट बढ़ाई गई है।

मुख्य चुनाव आयुक्त कुमार ने कहा, “वादे पूरे करने की सच्ची भावना के तहत, यहाँ चुनाव प्रचार का समय कम है और मौसम भी अनुकूल है। जम्मू-कश्मीर में चुनाव 3 चरणों में होंगे। हमें अमरनाथ यात्रा खत्म होने का इंतजार था।” उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में इस समय 87.09 लाख मतदाता हैं। इनमें से 20 लाख से अधिक मतदाता युवा हैं। 20 अगस्त को फाइनल वोटर लिस्ट जारी होगी।

हरियाणा की कुल 90 सीटों के लिए सिर्फ एक चरण में ही 1 अक्टूबर को होगा। वहीं, जम्मू-कश्मीर विधानसभा के साथ ही यहाँ भी मतों की गणना होगी। हरियाणा को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा, “हरियाणा में 2 करोड़ से ज्यादा मतदाता हैं। 90 में से 73 सीटें सामान्य हैं। यहाँ 20,269 पोलिंग स्टेशन हैं और 150 से ज्यादा मॉडल पोलिंग बूथ होंगे।”

जिस ‘कांतारा’ के लिए ऋषभ शेट्टी ने छोड़ा मांसाहार, प्रसाद खाकर करते रहे शूटिंग… उसी फिल्म के लिए मिला ‘बेस्ट एक्टर’ का नेशनल अवॉर्ड, लोग बोले- सबसे डिजर्विंग

70वें नेशनल फिल्म अवार्ड में विजेताओं के नाम की घोषणा आज कर दी गई। इस लिस्ट में शर्मिला टैगोर, नीना गुप्ता, मनोज बाजपेयी के साथ साउथ हीरो ऋषभ शेट्टी का भी नाम है।

ऋषभ शेट्टी को मुख्य भूमिका में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता की कैटेगरी में अवार्ड मिला है। वहीं नित्या मेनन (तिरुचित्रम्बलम के लिए) और मानसी पारेख (कच्छ एक्सप्रेस के लिए) को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्रियों में हैं। शर्मिला टैगोर और मनोज बाजपेयी अभिनीत ‘गुलमोहर’ ने सर्वश्रेष्ठ हिंदी फिल्म का पुरस्कार जीता।

नेशनल अवार्ड के विजेताओं के नामों की घोषणा के साथ ही कंतारा फिल्म के ऋषभ शेट्टी एक बार फिर चर्चा में आ गए हैं। उन्हें इस बार बेस्ट एक्टर का अवार्ड मिला है। लोग उन्हें बधाई दे रहे हैं और कहा जा रहा है कि जैसी एक्टिंग उन्होंने कंतारा में की है, वो इसको डिजर्व करते थे।

बता दें कि कंतारा फिल्म साल 2022 में आई थी। इस फिल्म का आधार वनवासी हिन्दू संस्कृति में देव की महत्ता दिखाना था। इसका लेखन, निर्देशन करने के साथ ऋषभ शेट्टी ने खुद इसमें मुख्य भूमिका निभाई थी।

ऋषभ की एक्टिंग देखने के बाद तब भी उनकी तारीफ हुई थी, लेकिन जब लोगों को पता चला था कि इस फिल्म के लिए उन्होंने कितनी मेहनत की तो किसी को विश्वास नहीं हुआ था कि आज भी अभिनेता ऐसे किरदारों के पीछे छिपी भावनाओं का सम्मान करते हैं।

बताया जाता है कि ऋषभ ने इस फिल्म में ‘दैव कोला’ वाले दृश्य की शूटिंग से लगभग एक महीने पहले ही उन्होंने मांसाहार का त्याग कर दिया था। इसके अलावा फिल्म में एक दृश्य है, जिसमें ऋषभ शेट्टी की पीठ पर आग वाली छड़ी से वार किया जाता है।

अभिनेता ने बताया था कि फिल्म का छड़ी वाला दृश्य एकदम वास्तविक है, ऐसे में उनकी पीठ पर जले के कई निशान भी आ गए थे। उन्होंने बताया कि हाव-भाव और एक्शन के कारण अभिनय वाला कार्य कठिन था।

ऋषभ शेट्टी ने यह भी जानकारी दी थी ‘दैव कोला’ नृत्य के दौरान उन्हें शरीर पर 50-60 किलो का अतिरिक्त वजन ढोना था। ‘दैव कोला’ अलंकार के बाद वो सिर्फ नारियल पानी लेते थे, और कुछ नहीं।

इस दृश्य को फिल्माने से पहले और इसके बाद उन्हें प्रसाद खाने के लिए दिया जाता था। दिन का अंत होने तक उन्हें काफी थकावट हो जाती थी। उन्होंने बताया कि फिर भी वो काम करते थे, ताकि दूसरे लोगों की ऊर्जा कम न हो।

ऋषभ शेट्टी ने बताया था कि वो शूटिंग के दौरान हुई कठिनाइयों की बात नहीं करते, लेकिन अब मीडिया पूछ रही है तो उन्हें ये सब बताना पड़ रहा है। उन्होंने पीठ पर आग से दागे जाने वाले दृश्य को लेकर कहा कि भले ही ये दर्दनाक था, उनके मन में ये बात थी कि उन्हें ये करना है।

गौरतलब है कि ये फिल्म 14 अक्टबूर 2022 को सिनेमाघरों में आई थी। मात्र 15 दिनों में इस फिल्म ने 275 करोड़ की कमाई कर ली थी। इस फिल्म के लिए हर किसी ने ऋषभ शेट्टी की तारीफ की थी। इस फिल्म को मात्र 16 करोड़ के बजट में बनाया गया था।

स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रम में मुस्लिम छात्रों ने लगाए पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे, मध्य प्रदेश पुलिस ने एक को दबोचा: BJP नेताओं के विरोध के बाद बाकियों की तलाश जारी

मध्य प्रदेश के विदिशा में गुरुवार (15 अगस्त 2024) को स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रम के बाद मंच पर ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के आपत्तिजनक नारे लगाए। इसका वीडियो वायरल हो गया है। भाजपा कार्यकर्ता इसकी शिकायत लेकर पुलिस थाने पहुँचे और शिकायत देकर आरोपितों को तुरंत गिरफ्तार करने की माँग की है। पुलिस ने एक छात्र को हिरासत में लिया है और बाकियों की पहचान की जा रही है।

भाजपा नेता संजय जैन ने बताया 15 अगस्त को लटेरी तहसील परिसर में स्वतंत्रता दिवस पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। कार्यक्रम के समापन पर कुछ छात्र ‘भारत माता की जय’ के नारे लगा रहे थे। इसी दौरान कुछ मुस्लिम छात्रों ने ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगाए। इसके बाद वहाँ विवाद की स्थिति बन गई।

भाजपा नेताओं द्वारा दिया गया ज्ञापन (साभार: नई दुनिया)

विवाद की स्थिति बनते ही मौके पर पुलिस पहुँच गई और ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगाने वाले छात्रों में से एक छात्र को पकड़ लिया। हालाँकि, उसके बाकी साथी भागने में सफल रहे। अब इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। भाजपा नेताओं ने ज्ञापन देकर बाकी लोगों को भी गिरफ्तार करने की माँग की है।

पुलिस ने एक छात्र को पकड़ लिया है। छात्र नाबालिग बताया जा रहा है। लटेरी के एसडीओपी अजय मिश्रा ने बताया कि इस मामले में एक नाबालिग को हिरासत में लिया गया है। उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों की शिकायत पर मुकदमा दर्ज करके इस घटना में शामिल अन्य लोगों को भी पकड़ने के प्रयास किए जा रहे है।

‘यह बंगाल सरकार की नाकामी, अस्पताल को बंद कर देना चाहिए’: हाई कोर्ट ने ममता सरकार को रगड़ा, कोलकाता के जिस हॉस्पिटल में रेप-मर्डर वहाँ ‘भीड़’ ने किया था उपद्रव

कोलकाता के मेडिकल कॉलेज में जूनियर डॉक्टर की रेप के बाद बर्बर तरीके से हत्या के बाद प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों पर हमले का कलकत्ता हाई कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया है। हाई कोर्ट ने शुक्रवार (16 अगस्त 2024) को घटनास्थल पर सबूतों को मिटाने के लिए शुरू किए गए निर्माण कार्य को राज्य सरकार से पूछा कि क्या वहाँ मरम्मत का कार्य इतना जरूरी थी। इसके अलावा आरजी कर मेडिकल अस्पताल में प्रदर्शनकारी डॉक्टरों पर हुए हमलों को लेकर भी राज्य सरकार पर सवाल उठाया है।

हाई कोर्ट के उठाए सवालों पर राज्य सरकार की ओर से पेश अधिवक्ता ने कहा कि पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की थी, लेकिन 5000 से 7000 लोगों की भीड़ ने आगे बढ़ते हुए अवरोधकों को तोड़ दिया। इसमें कई पुलिसकर्मी घायल भी हो गए। इस पर मुख्य न्यायाधीश टीएस शिवगनम और न्यायमूर्ति हिरणमय भट्टाचार्य की खंडपीठ ने इसे खुफिया जानकारी हासिल करने में पुलिस की नाकामी बताया है।

हाई कोर्ट की पीठ ने कहा, “आम तौर पर पुलिस के पास खुफिया शाखा होती है। हनुमान जयंती पर भी ऐसी ही घटना हुई। अगर 7,000 लोग इकट्ठा हो जाते हैं तो यह मानना ​​मुश्किल होता कि राज्य पुलिस को पता नहीं था। आप किसी भी कारण से सीआरपीसी की धारा 144 के आदेश पारित करते हैं।”

पीठ ने आगे कहा, “जब इतना हंगामा हो रहा हो तो आपको (राज्य सरकार एवं पुलिस को) पूरे इलाके की घेराबंदी कर देनी चाहिए थी। यह राज्य की मशीनरी की पूरी तरह से विफलता है। क्या इस बर्बरता को रोका जा सकता था, यह सवाल बाद में आता है। सभी सुविधाओं को तोड़ने का क्या कारण हो सकता है?”

हाई कोर्ट की पीठ ने कहा, “हमारे विचार से पुलिस को घटना के लिए जिम्मेदार घटनाओं का पूरा क्रम रिकॉर्ड में दर्ज करना चाहिए। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अस्पताल में काम करने वाले डॉक्टर, जो वर्तमान में विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, उन्हें अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने के लिए पर्याप्त सुरक्षा दी जानी चाहिए। हमने पहले भी डॉक्टरों को मरीजों का इलाज करने के उनके दायित्व की याद दिलाई थी।”

न्यायमूर्ति शिवगनम की अध्यक्षता वाली पीठ ने जूनियर डॉक्टर से रेप एवं हत्या वाली जगह पर मरम्मत के सवाल को लेकर भी राज्य सरकार को कठघरे में खड़ा किया। पीठ ने राज्य सरकार से उन आरोपों पर जवाब देने को कहा, जिसमें अपराध स्थल से सबूत मिटाने के लिए नवीनीकरण का काम करने का आरोप लगाया गया है।

इस पर पश्चिम बंगाल की ओर से पेश वकील ने इन आरोपों का खंडन किया और कहा, “ये सभी आरोप कि पीओ (घटनास्थल) को ध्वस्त कर दिया गया है, नष्ट कर दिया गया है… सही नहीं हैं। जो विध्वंस कार्य हुआ वह पीओ के पास नहीं था।” राज्य के वकील ने कहा कि नवीनीकरण का काम डॉक्टरों के लिए एक शौचालय के लिए था। हालाँकि, अदालत ने इस कदम के समय पर सवाल उठाया।

इस पर न्यायालय ने सवाल किया, “आखिर इतनी जल्दी क्या थी? आप किसी भी जिला न्यायालय परिसर में जाइए, देखिए कि महिलाओं के लिए कोई शौचालय है या नहीं! मैं यह जिम्मेदारी के साथ कह रहा हूँ। पीडब्ल्यूडी ने क्या किया है? हम मरीजों को दूसरे अस्पताल में शिफ्ट कर देंगे और (आरजी कर) अस्पताल को बंद कर देंगे। यही सबसे अच्छा होगा।”

राज्य की ओर से पेश महाधिवक्ता ने कहा कि अपराध स्थल के अवशेषों को सुरक्षित रखा जाएगा। उन्होंने कहा, “मुद्दा पी.ओ. का है। अभी तक पी.ओ. पर कोई तोड़फोड़ नहीं हुई है।” इसके बाद पीठ ने पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी की सरकार को घटनास्थल का तस्वीरों के साथ हलफनामा दायर करने के लिए कहा, ताकि यह दिखाया जा सके कि अपराध स्थल अभी भी बरकरार है।

मुख्य न्यायाधीश शिवगनम ने राज्य सरकार को लताड़ते हुए कहा, “पश्चिम बंगाल के नागरिक के रूप में आपको भी परेशान होना चाहिए। आप यहीं पैदा हुए और पले-बढ़े हैं! इससे आपको भी दुख होना चाहिए! इससे मुझे भी दुख होता है!”

बता दें कि कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में एक जूनियर डॉक्टर की रेप के बाद उसकी क्रूरता से हत्या कर दी गई थी। इसके विरोध में पूरे देश के डॉक्टर प्रदर्शन कर रहे हैं। मेडिकल कॉलेज में प्रदर्शन के दौरान 14 अगस्त को हजारों की भीड़ वाली उपद्रवियों ने प्रदर्शन करने वाले डॉक्टरों पर हमला कर दिया था। इसके साथ अस्पताल में बड़े पैमाने पर तोड़फोड़ की थी।

लखनऊ के जिस Video से पूरा देश हुआ शर्मिंदा, उसमें बाहर आते ही पवन यादव बोला- अखिलेश यादव और सपा का आभारी हूँ: पुलिस ने बताया- नहीं मिली है क्लीनचिट

बीते दिनों लखनऊ के गोमती नगर में जल जमाव के दौरान एक युवती से बदसलूकी मामले में गिरफ्तार हुए पवन यादव को आज जमानत मिली है। जेल से रिहा होने के बाद उन्होंने सबसे पहले अखिलेश यादव का धन्यवाद किया है। मीडिया को दिए अपने बयान में उसने ऐसे दिखाया कि उसकी गलती नहीं थी फिर भी उसे पकड़ा गया। हालाँकि पुलिस ने विज्ञप्ति जारी कर जानकारी दी कि आरोपित के ऊपर से आरोप नहीं हटे हैं।

समाचार एजेंसी एनएआई के अनुसार, पवन यादव ने जेल से निकलने के बाद कहा, “मैं समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव का आभारी हूँ। जब घटना घटी तो मैं वहाँ नहीं था… मैं वीडियो में शामिल नहीं था। सीएम योगी आदित्यनाथ को गलत जानकारी दी गई होगी। जो अधिकारी कहेंगे वही तो मानेंगे। उन्होंने शायद मेरा नाम इसलिए लिया क्योंकि मेरा नाम ‘पवन यादव’ है। अखिलेश जी ने कहा है कि अगर मैंने कुछ गलत नहीं किया है तो मुझे डरने की जरूरत नहीं है। मुझे बहुत बेहतर महसूस हुआ।”

वहीं अखिलेश यादव ने इस मामले में बयान दिया कि गोमती नगर घटना में जो लड़के पकड़े गए और जिसका विधानसभा में नाम लिया गया वह मिलने आया है। अखिलेश यादव के अनुसार वे बेचारा चाय पी रहा था उसी दौरान पुलिसवालों ने उसको पकड़ लिया। उन्होंने कहा ये जाँच का विषय है जिसके बाद ये लोग छूट जाएँगे।

अखिलेश यादव ने आगे अधिकारियों को धमकाने वाले अंदाज में कहा जिन अधिकारियों ने अपना रुतबा बढ़ाने के लिए और सरकार की इमेज बनाने के लिए इनको पकड़ा और थाने में ले जाकर हाथ जोड़कर जो तस्वीर छापी। मैं उनसे कहूँगा कि उनको मत भूलना और मैं भी उनको नहीं भूलूँगा। विधानसभा में और भी नाम पढ़े जाने चाहिए थे, लेकिन केवल दो नाम पढ़े गए।

बता दें कि पवन यादव द्वारा मीडिया में दिए गए बयान और लगाए गए आरोप के बाद यूपी पुलिस ने भी इस बाबत बयान जारी कर बताया कि अभी ये साबित नहीं हुआ है कि पवन यादव घटना में शामिल नहीं था। पुलिस ने बताया पवन यादव के खिलाफ जो भी कार्रवाई हुई है वो विधिपूर्ण ढंग से हुई है। अभी तक प्राप्त जानकारी के अनुसार, उसके खिलाफ स्थानीय स्तर पर पूर्व में में तीन अभियोग पहले से पंजीकृत हैं। जिसमें आरोप पत्र प्रेषित है और वर्तमान प्रकरण की विवेचना पुलिस द्वारा की जा रही है। साक्ष्य के आधार पर विवेचना का निस्तारण किया जाएगा। अभी आरोपित को न तो क्लीन चिट दी गई है और न ही उसे आरोप मुक्त किया गया है।

बता दें कि 31 जुलाई को लखनऊ में बारिश हुई थी जिससे गोमती नगर में ताज होटल के पास काफी पानी भर गया था। उस समय पानी में करीबन 25-30 लड़के वहाँ खड़े होकर हुड़दंग कर रहे थे। तभी एक लड़की अपने दोस्त की वजह से वहाँ गुजरी। इस दौरान लड़कों ने न केवल उस पर पानी फेंका बल्कि उसके साथ बदसलूकी भी की। बाद में घटना की वीडियो वायरल हुई तो दो दर्जन आरोपितों को पुलिस ने पकड़ा और फिर सीएम योगी ने ये मुद्दा सदन में उठाया। आरोपित का नाम पवन यादव बताया गया। इसी के बाद अखिलेश यादव भड़के।

कोलकाता के अस्पताल में रेड-मर्डर पर उठाई आवाज तो महिला डॉक्टर के घर पहुँच गई बंगाल पुलिस, कहा- पोस्ट डिलीट करो, थाने आकर मिलो: कई और नेटिजन्स को भी नोटिस

कोलकाता गैंगरेप मामले में सोशल मीडिया पर आवाज उठाने वालों के खिलाफ कोलकाता पुलिस एक्शन ले रही है। कई मामले सामने आए हैं जहाँ सोशल मीडिया यूजर्स ने बताया कि उन्हें कोलकाता का मुद्दा उठाने पर पुलिस से नोटिस मिले। 16 अगस्त को एक महिला डॉक्टर ने अपने ट्वीट के जरिए बताया कि मामले से संबंधित ट्वीट करने पर कोलकाता पुलिस उनके घर पहुँची थी और वहाँ से उनसे कॉल करवाकर कहा कि वो अपने ट्वीट डिलीट करें और अगले दिन थाने में आकर मिलें।

एक्स हैंडल @epicnephrin_e से किए गए ट्वीट में लड़की ने पूरे वाकये को साझा किया है। उन्होंने बताया, “15 अगस्त को शाम 7:30 बजे के करीब कोलकाता पुलिस ने मेरे पते के बारे में पूछना शुरू किया। पड़ोसियों से घरवालों को पता चला कि पुलिस मुझे ढूँढ रही है। उनका कहना था कि उन्हें समन देना है। हालाँकि घर पहुँचने के बाद उन्हें मेरे भाई-भाभी मिले। उन्होंने उनसे मुझे कॉल करने को कहा। पूछा गया- क्या तुमने बर्दवान यूनिवर्सिटी के मामले पर कुछ लिखा है। इस पर मैंने ‘हाँ’ कहा।”

पोस्ट के अनुसार, आगे बातचीत में पुलिस ने पूछा- ” ‘तुमने पोस्ट की प्रमाणिकता जाँची थी।’ मैंने कहा- ‘मैंने इस बारे में मीडिया हाउस के लेख देखे थे, लेकिन मैंने लोगों के स्टेटस में जो एंगल देखा, उस पर पूरी तरह से विश्वास कर लिया। मैंने सत्यापन के बाद पोस्ट के नीचे इसे संपादित किया था।” डॉक्टर को आगे कहा गया- “कृपया पोस्ट को हटा दें और बिना पुष्टि किए आगे कोई जानकारी पोस्ट न करें और कल टाउन थाने में रिपोर्ट करें।'” महिला डॉक्टर के पोस्ट के अनुसार, पुलिस के आगे उनके भाई ने हाथ जोड़े, माँ रोती रहीं। वो लोग उन लोगों को कॉल कर रहे थे जिन्हें वो समझते थे कि मामला संभाल लेंगे। वो असहाय हो गए थे। भाई से सब पूछ रहे थे कि आखिर पुलिस क्यों उनके बारे में पूछ रही थी।

जानकारी के अनुसार, ये महिला डॉक्टर पिछले कुछ दिन से इस मामले पर लगातार आवाज उठा रही हैं। वह इस केस में न्याय की गुहार लगा रही हैं, लेकिन उनकी आवाज दबाने के प्रयास हो रहे हैं। 14 अगस्त को टीएमसी समर्थक ने उन्हें खुलेआम धमकाया था कि वह सुनिश्चित करेंगी कि पुलिस उनके पास आकर रहे। इसके अलावा अन्य ट्वीट भी सामने आए थे जिसमें टीएमसी समर्थक लगातार उन्हें धमका रहे थे। डॉक्टर के अनुसार, इन्हीं धमकियों के बाद पुलिस उनके घर तक आ गई और परिवार से कहकर पोस्ट डिलीट करने को कहा।

बता दें कि ये मामला अकेला नही है जहाँ सोशल मीडिया यूजर को आवाज उठाने पर कोलकाता पुलिस का डर दिखाया गया हो। कई यूजर्स हैं जो कह रहे हैं कि उन्हें नोटिस मिला है। एक्स की एक्टिव यूजर और लेखिका शेफाली वैद्य ने बताया कि उन्हें कोलकाता पुलिस से नोटिस मिला है।

अपने पोस्ट में उन्होंने बताया, “मुझे कोलकाता पुलिस से यह धमकी भरा पत्र मिला, क्योंकि मैंने कुछ सवाल पूछे थे और अपनी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का प्रयोग किया था। यह ममता प्रशासन द्वारा कोलकाता पुलिस की शक्ति का उपयोग करके आम नागरिकों की आवाज को दबाने का स्पष्ट मामला है। मैं एक आम नागरिक हूँ, जो पीड़िता के साथ जो हुआ, उससे इतनी निराश हूँ कि मैंने बोलने का फैसला किया। लेकिन जाहिर है, कोलकाता पुलिस को स्वतंत्र आवाजें पसंद नहीं हैं। एक महिला और एक मां के रूप में, मुझे अपनी सुरक्षा का डर है। हम सभी जानते हैं कि कोलकाता पुलिस क्या कर सकती है और हम सभी जानते हैं कि पश्चिम बंगाल में ममता के खिलाफ बोलने की हिम्मत करने वाली महिलाओं के साथ क्या होता है।”

एक अन्य एक्स उपयोगकर्ता ने भी आरजी कर अस्पताल में बलात्कार और हत्या की शिकार डॉक्टर के लिए न्याय की माँग करने पर उसे मिले धमकी भरे नोटिस के बारे में पोस्ट किया। उन्होंने कहा कि जब पुलिस पूरी तरह राज्य सरकार के हाथ में हो और नागरिकों की आवाज दबाने की कोशिश करे तो वाकई कुछ नहीं सकता।

प्रदर्शनकारियों पर हमला

गौरतलब है कि बंगाल के आरजी कर अस्पताल में महिला डॉक्टर के साथ हुई वीभत्सता के बाद सैंकड़ों प्रदर्शनकारी सड़क पर उतरकर इंसाफ माँग रहे है। 14 अगस्त को इन प्रदर्शनकारियों पर हमला हुआ था। उपद्रवियों ने अस्पताल में घुस तोड़फोड़ की थी जिसके बाद आशंका जताई गई थी कि कहीं ये सब सबूत मिटाने के लिए तो नहीं हुआ। भाजपा नेता ने भी इस संबंध में आरोप लगाए थे। हालाँकि बाद में कोलकाता पुलिस ने बयान जारी किया कि ये बात झूठ है कि घटनास्थल से छेड़छाड़ हुई है। हकीकत यह है घटनास्थल सेमिनार रूम है और वो सुरक्षित है।

इसी तरह एक अन्य सवाल किया गया था कि कोलकाता पुलिस ने मृतिका का शव क्यों जलाया। इस पर पुलिस ने जवाब दिया कि शव उन्होंने नहीं जलाया बल्कि पीड़िता के परिवार ने जलाया है। वहीं एक अन्य सवाल जिसमें पूछा गया था कि घटना के अचानक बाद रेनोवेशन का कार्य कैसे शुरू हुआ, इस पर पुलिस ने कोई जवाब नहीं दिया।