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न बेड बचा न, मेडिकल उपकरण… कोलकाता के अस्पताल का हाल देख स्टाफ डरे, चश्मदीद बोले- बाहर से आए थे उपद्रवी: पुलिस ने कहा- जहाँ हुआ डॉक्टर का रेप-मर्डर, वहाँ तोड़फोड़ नहीं

पश्चिम बंगाल के आर जी कर अस्पताल में तोड़फोड़ के बीच सोशल मीडिया पर आज कुछ वीडियोज सामने आई। इन वीडियोज में दिखाया गया कि कैसे सैंकड़ों की भीड़ ने अस्पताल में घुस उपद्रव मचाया और डॉक्टरों को निशाना बनाया। विजुअल्स में प्रदर्शनस्थल पर टूटी कुर्सियाँ, फटे बैनर, टूटी गाड़ी, जूते-चप्पल और अस्पताल के भीतर पलटे गए बेड और मेडिकल उपकरण भी देखे गए।

वीडियो साझा करते हुए कई जगह दावे हुए कि इन उपद्रवियों ने उस स्थल को भी तोडा है जहाँ घटना को अंजाम दिया गया। दावों पर आधारित कई मीडिया रिपोर्ट भी छपी। हालाँकि बाद में बंगाल पुलिस का बयान आया। उन्होंने इस दावे को फर्जी बताया। उन्होंने कहा कि घटना जहाँ अंजाम दी गई वो सेमिनार रूम था। वहाँ तोड़फोड़ नहीं हुई है। झूठी खबर फैलाने पर कार्रवाई की जाएगी।

गौरतलब है कि एक तरह जहाँ बंगाल पुलिस सोशल मीडिया पर फर्जी जानकारी फैलाने वालों पर सख्त कार्रवाई की बात कह रही है। वहीं लोगों का कहना है कि पुलिस को इसी सख्ती से उपद्रवियों के खिलाफ भी एक्शन लेना चाहिए। तमाम चश्मदीद हैं जो रोकर, डरकर पूरी स्थिति बता रहे हैं।

सोशल मीडिया पर एक महिला प्रदर्शनकारी की वीडियो वायरल है। वो चिल्ला-चिल्ला कर कह रही है- “हमें लगातार पीटा जा रहा है। वो हमें मार देंगें। हम प्रदर्शन के लिए आए थे।” इसी तरह अन्य वीडियो में खुद को रेजिडेंट डॉक्टर बताने वाले लोग बता रहे हैं कि कैसे भीड़ उन पर हमला कर रही है। सबको छिपना पड़ रहा है।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, सुभेंदु मलिक नाम के एक वरिष्ठ डॉक्टर ने बताया, “अस्पताल में उपद्रवियों की भीड़ घुसी थी। उन्होंने प्रदर्शनकारी डॉक्टरों पर हमला किया, जिसके बाद सबको भागना पड़ा। उपद्रवियों ने उस बिल्डिंग में भी घुसने की कोशिश की, जहाँ जूनियर डॉक्टर के साथ बलात्कार किया गया और उसकी हत्या कर दी गई। पुलिस इस दौरान मूकदर्शक बनी हुई थी।

अनिकेत मैती नामक एक जूनियर डॉक्टर ने कहा, “हम हमला शुरू होने से बहुत पहले ही उपद्रवियों को अस्पताल के बाहर इकट्ठा होते देख रहे थे। हमने पुलिस से कदम उठाने का अनुरोध किया, लेकिन उन्होंने कुछ नहीं किया। जब उपद्रव शुरू हुआ तो पुलिसकर्मी अस्पताल परिसर के अंदर शरण लेने के लिए भागे।”

सिक्योरिटी गार्ड प्रणय दास ने कहा, “कल रात करीब 1 बजे जब करीब 500-1000 लोग यहाँ आए। हमने यहाँ गेट बंद किया, लेकिन उन्होंने उसे तोड़ दिया। हम दूसरे गेट पर गए, लेकिन उन्होंने उसे भी तोड़ दिया। वे बहुत ज्यादा थे, हम 10-12 लोग और पुलिस थे। इसलिए हम उनका मुकाबला नहीं कर सकते थे। वे अंदर घुस आए और संपत्ति को तहस-नहस कर दिया। उन्होंने हर जगह नुकसान पहुँचाया, कंप्यूटर से लेकर दवाइयों तक। उन्होंने सीसीटीवी कैमरे भी तोड़ दिए।”

गौरतलब है कि पीड़ितों के बयान, सोशल मीडिया पर होते दावों के बीच प्रदेश के भाजपा सांसद जगन्नाथ सरकार ने भी आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा पुलिस केवल कोलकाता पुलिस आयुक्त और ममता बनर्जी के कहने पर काम कर रही है। पुलिस मीडिया पर आरोप लगा रही है लेकिन टीएमसी गुंडे थे जो बाहर से आए और तोड़फोड़ की। भाजपा सांसद का आरोप है कि ये सब ममता बनर्जी करवा रही हैं।

इस्लाम-वामपंथ के नाम पर करोड़ों लोगों का कत्ल हुआ, अब हर साल जहरीली एलोपैथिक दवाएँ खाकर मर रहे करोड़ों: बाबा रामदेव, आर्थिक स्वतंत्रता का किया आह्वान

योग गुरु बाबा रामदेव ने कहा है कि सिंथेटिक एलोपैथी दवाएँ खा कर करोड़ों लोग हर साल मर रहे हैं। बाबा रामदेव ने कहा कि इससे पहले इस्लाम और वामपंथ के नाम पर करोड़ों को लोगों को मारा जा चुका है। बाबा रामदेव ने कहा कि वह देश की आर्थिक आजादी के लिए प्रयास करेंगे।

बाबा रामदेव ने हरिद्वार पतंजलि पीठ में गुरुवार (15 अगस्त, 2024) को तिरंगा फहराया। इसके बाद उन्होंने मीडिया से बात करते हुए चिंता व्यक्त की कि विश्व की संपदा पर मात्र कुछ लोगों का कब्ज़ा है। उन्होंने अंग्रेजों की लूट का भी उदाहरण दिया।

बाबा रामदेव ने कहा, “हमारी प्रतिबद्धता है कि हम राजनीतिक आजादी के साथ-साथ इस देश में आर्थिक आजादी के लिए एक बड़ी क्रान्ति कर रहे हैं और करेंगे। क्योंकि पूरी दुनिया की सम्पत्ति, एश्वर्य और वैभव पर 1% आबादी का एकाधिकार है। साम्राज्यवादी ताकतों ने सारी सम्पत्ति को जकड रखा है।”

उन्होंने आगे कहा, “ईस्ट इंडिया कम्पनी से लेकर अंग्रेजों ने इस देश में एक हजार लाख करोड़ की लूट की है। अभी भी भारत की लाखों करोड़ की अर्थव्यवस्था पर, भारत के शेयर मार्केट से लेकर हर सेक्टर पर, FMCG पर विदेशी ताकतों का कब्जा है। यदि किसी देश की अर्थव्यवस्था पर कब्ज़ा होता है तो यह शर्म की बात है।”

इसके बाद उन्होंने जहरीली दवाओं से लोगों की मौत का मुद्दा उठाया। बाबा रामदेव ने कहा, “एलोपैथी की जहरीली दवाएँ खाकर करोड़ों लोगों की मौत हो रही है। अंग्रेजों ने अपना साम्राज्य कायम करने के लिए 10 करोड़ लोगों का क़त्ल किया। इस्लाम के नाम पर करोड़ों लोग मारे गए। लेनिन और माओ की क्रान्ति की नाम पर भी करोड़ों लोग मारे गए। लेकिन अब हर साल निर्दोष लोग जहरीली और सिंथेटिक दवाएँ खाकर मर रहे हैं। पतंजलि इसके विरुद्ध आन्दोलन मुखर करेगा।”

गौरतलब है कि बाबा रामदेव इससे पहले भी एलोपैथिक दवाओं से होने वाले साइड इफेक्ट के दुष्परिणामों पर बोलते आए हैं। हाल ही में उनको इस संबंध में कोर्ट में कानूनी लड़ाई भी लड़नी पड़ी थी। सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें माफ़ी माँगने को भी कहा था।

स्वतंत्रता दिवस पर बांग्लादेश के हिंदुओं के लिए खड़ा हुआ भारत: बोले PM मोदी- सुरक्षा सुनिश्चित हो, RSS प्रमुख ने कहा- बेवजह हो रहे हमले, रक्षा करना हमारी जिम्मेदारी

भारत के 78वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर पड़ोसी देश बांग्लादेश में इस्लामी हिंसा से पीड़ित हिन्दुओं की सुरक्षा का मामला उठा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लालकिले की प्राचीर से जहाँ हालातों के जल्द सामान्य होने की आशा की तो वहीं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा कि हिन्दुओं की सुरक्षा भारत की जिम्मेदारी है।

पीएम मोदी ने अपने लालकिले से संबोधन के दौरान स्पष्ट रूप से हिन्दुओं के लिए आवाज उठाई। गुरुवार (15 अगस्त, 2024) को पीएम मोदी ने अपने भाषण में कहा, “बांग्लादेश में जो कुछ भी हुआ है, उसको लेकर पड़ोसी देश के नाते चिंता होना मैं समझ सकता हूँ। मैं आशा करता हूँ कि वहाँ पर हालात जल्द ही सामान्य होंगे। खासकर 140 करोड़ देशवासियों की चिंता है कि वहाँ के हिन्दुओं, वहाँ के अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित हो।”

पीएम मोदी ने इससे पहले बांग्लादेश की नई अंतरिम सरकार के मुखिया मोहम्मद युनुस को बधाई देते समय भी हिन्दुओं और अल्पसंख्यकों पर हमलों को लेकर चिंता जताई थी और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की थी। बांग्लादेश पर प्रधानमंत्री मोदी ने दूसरी बार लालकिले से सार्वजनिक रूप से बात की है।

पीएम मोदी के अलावा RSS प्रमुख भागवत ने भी बांग्लादेशी हिन्दुओं को लेकर चिंता व्यक्त की। उन्होंने नागपुर स्थित RSS मुख्यालय में गुरुवार को तिरंगा फहराने के कार्यक्रम में कहा, “हम अब स्थिति देख सकते हैं। पड़ोसी देश में हिंसा हो रही है और वहाँ रहने वाले हिंदुओं को बिना किसी कारण के इसका निशाना बनाया जा रहा है।”

आगे उन्होंने कहा, “भारत में दूसरों की मदद करने की परंपरा रही है। हमने देखा है कि भारत ने कभी किसी पर हमला नहीं किया, बल्कि पिछले कुछ वर्षों में मुसीबत में फंसे लोगों की मदद ही की, भले ही उनका व्यवहार हमारे साथ कैसा भी रहा हो।”

RSS प्रमुख ने इस दौरान बांग्लादेश मामले की तरफ इशारा करते हुए भारत सरकार के रोल को लेकर बात की। उन्होंने कहा, “हमारे देश की यह जिम्मेदारी है अस्थिरता और अराजकता की आँच झेल रहे लोगों को किसी परेशानी, अन्याय और अत्याचार का सामना ना करना पड़े। कुछ मामलों में सरकार को अपने स्तर पर भी देखना पड़ता है, लेकिन उसे ताकत तभी मिलती है जब समाज अपना कर्तव्य निभाता है और देश के प्रति प्रतिबद्धता दिखाता है।”

गौरतलब है कि बांग्लादेश में प्रधानमंत्री शेख हसीना के 5 अगस्त, 2024 को इस्तीफे के बाद से लगातार हिन्दुओं के विरुद्ध हिंसा जारी है। शेख हसीना के भारत आने के बाद से लगतार हिन्दुओं को निशाना बनाया जा रहा है और उनके मंदिरों को तोड़ा जा रहा है। हिन्दुओं के घरों में घुस कर भी तोड़फोड़ और लूट की गई है। कई हिन्दुओं की हत्या भी की गई है। भारत लगातार बांग्लादेश से हिन्दुओं की सुरक्षा को लेकर अपनी चिंता व्यक्त कर रहा है।

बांग्लादेश में हिंदू विरोधी हिंसा के बीच मोदी सरकार ने शुरू किया ‘उपचार’, बिजली बेचने वाला नियम बदला: मजहबी कट्टरपंथियों पर ‘स्ट्राइक’ से दुखी हुई कॉन्ग्रेस

बांग्लादेश में जारी हिंसा के बीच मोदी सरकार ने ‘बिजली निर्यात नियमों’ में संशोधन को लेकर एक फैसला लिया है। ताजा आदेश में कहा गया है कि अडानी पावर का एक कोयला आधारित पावर प्लांट जो अभी तक केवल बांग्लादेश को बिजली बेच सकता था, वो अब भारत को भी बिजली बेचेगा।

माना जा रहा है कि मोदी सरकार सरकार ने यह फैसला बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे हमले के बीच इसलिए लिया है ताकि बांग्लादेश की अंतरिम सरकार पप दबाव बन सके। इसके अलावा संभव है कि ये फैसला कंपनी को बांग्लादेश में चल रहे हालातों के कारण पैदा होने वाले जोखिम से बचाने के लिए लिया गया हो। हालाँकि कॉन्ग्रेस नेता जयराम रमेश को इसमें भी समस्या है। उन्होंने इस फैसले की बाबत सोशल मीडिया पर सवाल उठाए हैं।

जानकारी के मुताबिक, 12 अगस्त 2024 को जारी बिजली मंत्रालय के एक मेमो में, विशेष रूप से पड़ोसी देश को बिजली की आपूर्ति करने वाले जनरेटर (बिजली कंपनियाँ) को नियंत्रित करने वाले 2018 के दिशानिर्देशों में संशोधन की बात कही गई थी। इसमें कहा गया था कि अगर पावर स्टेशन कंपनियाँ पूरी बिजली नहीं बेच पा रही हैं या फिर पावर पर्चेंज एग्रीमेंट के तहत उन्हें भुगतान में देरी हो रही है तो भारत सरकार ऐसे पावर जेनरेटिंग स्टेशन को भारतीय ग्रिड के साथ जोड़ने की इजाजत दी जाएगी जिससे देश की सीमाओं के भीतर बिजली बेच सकें।

वर्तमान में भारत में ऐसा केवल एक संयंत्र है जो पड़ोसी देश को अपनी 100% बिजली निर्यात करने के अनुबंध के तहत है। यह झारखंड में स्थित में अडानी पावर का 1,600 मेगावाट (मेगावाट) का गोड्डा संयंत्र है। गोड्डा स्थित पावर प्लांट से अडानी पावर पर्चेंज एग्रीमेंट के तहत बांग्लादेश को 800 मेगावाट बिजली बेच रही है जिसके लिए बांग्लादेश पावर डेवलपमेंट बोर्ड के साथ 2017 में करार हुआ था। उस समय भी इस एग्रीमेंट पर काफी सवाल उठाए गए थे और अब जब इसे लेकर संशोधन हुए हैं तो भी सवाल उठाए जा रहे हैं।

इस आदेश के बाद कॉन्ग्रेस नेता जयराम रमेश ने अपने एक्स पर ट्वीट किया है। उन्होंने कहा, “अडानी झारखंड में बिजली पैदा करने और बांग्लादेश को आपूर्ति करने के लिए ऑस्ट्रेलिया से कोयला आयात करता है। यह एकमात्र कंपनी है जिसे बिजली खरीद समझौते के माध्यम से ऐसा करने की अनुमति दी गई है और ये बहुत विवादास्पद रहा है। अब कंपनी को वह बिजली भारत में ही बेचने की अनुमति मिल गई है। अडानी को पहले कोयले के आयात पर मुनाफा मिल ही रहा था, अब भारत के लोगों को ये बिजली बेचने पर उन्हें और भी मुनाफा मिलेगा। मोदी है तो मुमकिन है!”

बांग्लादेश में मार-काट रहे इस्लामी कट्टरपंथी, पर ABC के लिए भारतीय मीडिया की मंशा ‘खतरनाक’: विदेशी मीडिया को हिंदुओं के खिलाफ हिंसा में दिखा ‘राजनीतिक एंगल

बांग्लादेश में शेख हसीना के सत्ता के हटने के बाद से लगातार देश में हिन्दू विरोधी हिंसा जारी है। 5 अगस्त, 2024 के बाद से कम से कम 205 ऐसे मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें हिन्दुओं पर इस्लामी कट्टरपंथियों ने अत्याचार किया है। इन सब के बीच देसी-विदेशी मीडिया का वामपंथी प्रलाप जारी है। इसी कड़ी में ऑस्ट्रेलियन ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन (ABC) हिन्दुओं पर हुए हमलों को हल्के में लिया है और हिन्दुओं की दुर्दशा का जिम्मेदार उन्हें ही बता दिया है। ABC का दावा है कि बांग्लादेश में हिन्दू विरोधी हिंसा ‘राजनीति से प्रेरित’ है।

हिन्दू विरोधी हिंसा में ABC को दिखा ‘राजनीतिक एंगल’

13 अगस्त को मेघना बाली और हन्ना जोन्स द्वारा लिखे गए ‘हिन्दुस इन बांग्लादेश फील बिट्रेड बाई अटैक्स आफ्टर गवर्नमेंट आउस्टर’ शीर्षक से प्रकाशित एक लेख में, ABC ने सबसे पहले इस बारे में बात की कि कैसे हिंदुओं, उनके घरों और मंदिरों पर हमला किया गया, उन्हें धमकाया गया, उन्हें छोड़ने के लिए मजबूर किया गया और कैसे हिन्दू खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। हालाँकि, इसमें आगे ABC अपने प्रोपेगेंडा पर उतर आया और हिन्दुओं के खिलाफ हो रही इस्लामी हिंसा पर लीपापोती करने लगा।

ABC बांग्लादेश हिन्दू

जहाँ ABC रिपोर्ट ने खुद हिन्दुओं के विरुद्ध हिंसा की बात स्वीकारी है वहीं वह यह नहीं बता पा रहा कि उन पर यह हमले उनकी धार्मिक पहचान को लेकर हो रहे हैं। 5 अगस्त से लगातार हमलों का शिकार हो रहे हिन्दुओं के विरुद्ध हिंसा का कारण ABC को उनकी धार्मिक पहचान नहीं बल्कि राजनीतिक दिखी है। ABC का मानना है कि बांग्लादेश में हिन्दुओं के विरुद्ध इस्लामी कट्टरपंथी इसलिए हिंसा कर रहे हैं क्योंकि वह कथित तौर पर पूर्ववर्ती हसीना सरकार के समर्थक थे।

कायदे में ABC को सवाल करना चाहिए कि मुस्लिम भीड़ मंदिरों पर हमला क्यों कर रही है और हिन्दू देवताओं की मूर्तियों को क्यों नष्ट कर रही है, क्या हिन्दू देवता भी अवामी लीग के समर्थक हैं? ABC को यह बताना चाहिए कि यदि यह हिंसा धार्मिक आधार पर नहीं हो रही तो आखिर इस्लामी भीड़ एक हिन्दू व्यक्ति का निजी अंग क्यों देखती है और खतना ना होने की पुष्टि करती है। आखिर क्यों इस्लामी कट्टरपंथी इसके बाद ‘हिन्दू-हिन्दू’ कह कर चिल्लाएँगे यदि यह हिंसा धार्मिक आधार पर नहीं हो रही।

जहाँ यह बात ठीक है कि अवामी लीग के हिन्दू और मुस्लिम, दोनों ही धर्मों के नेताओं को निशाना बनाया गया है वहीं ऐसी एक भी घटना सामने नहीं आई है जिसमें इस्लामी कट्टरपंथियों ने राजनीतिक बदला लेने के लिए मस्जिदों को जलाया या तोड़फोड़ की हो। बांग्लादेश से कुछ सूफी दरगाहों पर हमले की खबरें जरूर सामने आई हैं, लेकिन यह हमले भी इसलिए हुए क्योंकि सूफी इस्लामी विचारधारा को मानने वालों का किसी भी थोड़ी सी उदार विचारधारा से समन्वय नहीं हो सकता।

हिन्दू विरोधी हिंसा की खबरें दिखाने पर भी ABC को ऐतराज

इस्लामी कट्टरपंथियों के भरपूर बचाव के बाद ABC बताता है कि बांग्लादेश में हो रही हिन्दू विरोधी हिंसा को भारतीय मीडिया ने रिपोर्ट किया इसलिए उलझन बढ़ गई। ABC के अनुसार, बांग्लादेश में इस्लामी कट्टरपंथियों की हिन्दू विरोधी हिंसा रिपोर्टिंग करने वाला भारतीय मीडिया चिंताओं को बढ़ा रहा था। ABC चाहता है कि बांग्लादेश में हिन्दुओं को इस्लामी कट्टरपंथी मारते रहे और भारत का मीडिया भी विदेशी मीडिया की तरह चुप बैठा रहे।

ABC से पहले हाल ही में, ऑपइंडिया ने बताया था कि कैसे क़तर का सरकारी मीडिया आउटलेट अल जज़ीरा दावा कर रहा था कि बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमलों की रिपोर्टिंग करने वाले भारतीय मीडिया घराने ‘इस्लामोफोबिक’ और ‘अलार्मिस्ट’ हैं। ABC ने भी मुस्लिमों के हिन्दू मंदिरों को बचाने वाले भोंपू को एक बार फिर बजाया। लेकिन यह नहीं बता पाया कि यह हमले आखिर हो क्यों रहे थे। इस्कॉन मेहरपुर मंदिर के प्रवक्ता सहित हिन्दू नेताओं ने कहा कि 1980 के दशक से हिंदुओं को लगातार निशाना बनाया जा रहा है और उन पर अत्याचार किया जा रहा है।

इसके बावजूद, एबीसी, न्यूयॉर्क टाइम्स और अल जजीरा जैसे वामपंथी और इस्लामी कट्टरपंथियों से सहानुभूति रखने वाले मीडिया समूह दुनिया को यह विश्वास दिलाना चाहते हैं कि भले ही हिन्दू मंदिरों पर हमला किया जा रहा हो, हिन्दू महिलाओं को निशाना बनाया जा रहा हो, लेकिन हिंदुओं का नरसंहार धार्मिक नहीं बल्कि ‘राजनीतिक रूप से प्रेरित’ है।

हिन्दू विरोधी मानसिकता से घिरा है ABC

हालाँकि, यह पहली बार नहीं है जब ABC ने हिन्दू विरोधी हिंसा को छिपाया हो। ऑपइंडिया ने पिछले साल बताया था कि कैसे ABC ने देश में खालिस्तान समर्थक गतिविधियों को छुपाया और ऐसा दिखाया कि हिंदुओं ने खालिस्तानी कट्टरपंथियों पर हमला किया। इस साल जून में ABC ने भारत विरोधी एक डाक्यूमेंट्री बनाई थी। इसमें उसने मोदी सरकार पर ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले खालिस्तानियों की हत्या की योजना बनाने का आरोप लगाया था। अवनी डायस द्वारा लिखा गया यह प्रचार लेख इंडोफोबिया और खालिस्तानी कट्टरपंथियों के प्रति प्रेम से भरा हुआ था।

(यह लेख मूल रूप से अंग्रेजी में श्रद्धा पाण्डेय ने लिखा है, इसे पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।)

कोलकाता के RG Kar अस्पताल में भीड़ का उपद्रव, दावा- जिस जगह महिला डॉक्टर का रेप-मर्डर उसे तबाह किया: तोड़फोड़ के Videos वायरल, बोली बीजेपी- TMC ने गुंडों को भेजा

पश्चिम बंगाल के आर जी कर अस्पताल में महिला के साथ हुई वीभत्सता मामले में इंसाफ माँग रहे डॉक्टरों पर हमले की खबर है। सोशल मीडिया पर तमाम वीडियो सामने आई है जिसमें हिंसक भीड़ को अस्पताल में घुस तोड़-फोड़ करते देखा जा सकता है। साथ ही उन डॉक्टरों को भी सुना जा सकता है जो बता रहे हैं कि कैसे उन्हें निशाना बनाया गया लेकिन न पुलिस कुछ कर पाई और न ही सरकार। इस मामले को भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी ने भी उठाया है। उन्होंने हमले का इल्जाम ममता बनर्जी की तृणमूल कॉन्ग्रेस पर लगाया है।

डॉक्टरों की वायरल वीडियो

डॉक्टरों की वायरल होती वीडियो में देख सकते हैं कि वो बता रहे हैं कि वो महिलाएँ एक शांतिपूर्ण मार्च करने वाली थी, लेकिन तभी वहाँ एकदम से बहुत सारा मॉब इकट्ठा हो गया और पुलिस उन्हें रोक नहीं पाई। सबलोगों को अपनी जान बचाकर भागना पड़ा। जो लोग उनके सामने आ रहे थे वो सब उनको मार रहे थे। डॉक्टरों को भी चोट लगी है और मरीजों को भी निशाना बनाया गया।

डॉक्टर बताते हैं कि सब कोई अलग-अलग जगह छिपा हुआ है। महिला डॉक्टर अलग छिपी हैं। किसी का कॉन्टैक्ट पुलिस से नहीं हो पा रहा है। बस खबर मिल रही है कि बाहर से तीन हजार- चार हजार लोगों की भीड़ आ रही है। वो लोग प्रदर्शन स्थल की कुर्सियाँ वगैरह सब तोड़ चुके हैं। उन्होंने अलग-अलग वार्ड में घुसकर उत्पात मचाया है। इमरजेंसी से लेकर गाइनी हर वार्ड तोड़ा गया है। पुलिस मदद की जगह आगे-आगे भाग रही है। ये सब प्रशासन की विफलता है।

ट्रक में भरकर आए उपद्रवी

बता दें कि एक तरफ हिंसक भीड़ से छिपे डॉक्टर वीडियो बनाकर अपनी जान बचाने के लिए मदद की गुहार लगा रहे हैं तो वहीं कुछ और वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आई है। इस वीडियो में दावा किया जा रहा है कि जिस भीड़ ने डॉक्टरों के ऊपर हमला किया था उन्हें ट्रक से लाया गया था। ये लोग कहाँ से आए थे और कौन इन्हें लाया था कुछ पता नहीं चल सका है।

केवल इस भीड़ के इकट्ठा होने के बाद जो हुआ उसके विजुअल्स आ रहे हैं। सैंकड़ों की भीड़ को हल्ला करके अस्पताल में तोड़फोड़ करते देखा जा सकता है। वीडियो बनाने वाला शख्स कहता है, “हम लोग यहाँ के रेजिडेंट डॉक्टर हैं। आप यहाँ के हालात देख सकते हैं। हजारों की संख्या में ये भीड़ आई है और सबपर हमला किया। सबूत मिटाने की कोशिश हुई। वहीं लोकल पुलिस कुछ भी कंट्रोल करने में असमर्थ है। डॉक्टर छिपकर-दौड़कर अपनी जान बचा रहे हैं। केंद्रीय बल भेजकर हमें सुरक्षा मुहैया कराई जाए।”

कुर्सी तोड़ी, पंखे उखाड़े

एक अन्य वीडियो जिसे एम्स दिल्ली के डॉ दत्ता ने साझा किया है उसमें भीड़ को स्टेज की कुर्सियाँ, पंखे आदि तोड़ते साफ तौर पर देखा जा सकता है, लेकिन पुलिस आसपास कहीं नजर नहीं आ रही है। भीड़ इस दौरान अस्पताल के इमरजेंसी में घुसने का प्रयास करती है लेकिन कोई सफलता भी नहीं मिलती।

डॉ सौरभ इस ट्वीट के नीच आशंका जताते हैं कि बंगाल हॉरर पर हो रहे शांतिपूर्ण प्रदर्शन को बंद कराने के लिए इन गुर्गों की मदद ली गई जो कि संभवत: टीएमसी से हो सकते हैं।

डॉक्टर अनन्या जामवाल ने भी एक वीडियो साझा की है इस वीडियो में दिखाया गया है कि हिंसक भीड़ हॉस्टलों में दीवार चढ़कर घुस रही है और डॉक्टरों को मार रही है। बंगाल सरकार फेल हो गई है। डॉक्टरों को बचाओ।

भाजपा नेता ने टीएमसी पर लगाया आरोप

गौरतलब है कि इस मामले की वीडियोज साझा करते हुए भारतीय जनता पार्टी के नेता सुवेंदु अधिकारी ने भी उठाया है। सुवेंदु अधिकारी ने अपने ट्वीट में अस्पताल में घुसी भीड़ को टीएमसी की भीड़ बताया। उन्होंने कहा, “ममता बनर्जी ने अपने टीएमसी गुंडों को आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पातल के पास गैर राजनीतिक विरोध रैली में भेजा। उन्हें लगता है कि वे पूरी दुनिया में सबसे चतुर व्यक्ति हैं और लोग उनकी इस चालाको को समझ नहीं पाएँगे। प्रदर्शनकारी के रूप में दिखने वाले उनके गुंडे भीड़ में शामिल होकर आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के अंदर तोड़फोड़ की। उन्हें पुलिस द्वारा सुरक्षित मार्ग दिया गया।”

भाजपा नेता ने ये भी कहा कि रेजिडेंट डॉक्टर, पीजीटी और इंटर्न धरना मंच पर तोड़फोड़ करने वालों को पहचान गए। उन्होंने इस मामले में बंगाल राज्यपाल के हस्तक्षेप की माँग की। साथ ही सीबीआई से कहा कि इस बात पर ध्यान दिया जाए कि कैसे बेशर्मी से सबूत मिटाने के प्रयास हुए हैं।

लाल किले से PM मोदी ने दिए UCC के संकेत, कहा- मौजूदा कानून कम्युनल, सेक्युलर सिविल कोड की जरूरत: ‘वन नेशन-वन इलेक्शन’ पर राजनीतिक दलों से साथ आने का आह्वान

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश के 78वें स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त, 2024) के मौके पर लाल किले की प्राचीर से स्वतंत्रता के लिए लड़ने वालों को नमन किया है। प्रधानमंत्री मोदी ने स्वतंत्रता सेनानियों के साथ ही वर्तमान में देश के निर्माण और रक्षा में लगे लोगों के प्रति श्रद्धाभाव प्रकट किया है।

पीएम मोदी ने लाल किले की प्राचीर से उन लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त की है, जिनके परिजन प्राकृतिक आपदा में मारे गए हैं। पीएम ने अपने भाषण में कहा कि आजादी के पूर्व 40 करोड़ देशवासियों ने वन्दे मातरम के बल पर भारत की आजादी के सपने की तरफ कदम बढ़ाए और गुलामी की जंजीरों को तोड़ दिया।

पीएम मोदी ने यहाँ से कहा कि यदि 40 करोड़ लोग गुलामी से मुक्ति पा सकते हैं तो अगर 140 करोड़ भारतीय एक दिशा में एक लक्ष्य के लिए चलें तब हम 2047 में विकसित भारत बना सकते हैं। पीएम ने कहा कि देश के लिए जीने की प्रतिबद्धता विकसित भारत बना सकती है।

पीएम मोदी ने कहा कि देश के लोगों ने विकसित भारत को लेकर अपने सुझाव भी दिए हैं। इसमें भारत को मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने से लेकर मीडिया को ग्लोबल बनाने और स्थानीय निकायों में भ्रष्टाचार हटाने से लेकर देश की यूनिवर्सिटी को विश्व स्तर बनाने का सुझाव दिए गए।

लालकिले की प्राचीर से सरकार की उपलब्धियाँ गिनाई। उन्होंने याद दिलाया कि लाल किले से जो भी ऐलान किए गए, उन पर काम हुआ है। उन्होंने जल जीवन मिशन, हर घर बिजली और स्वच्छता अभियान में मिली सफलत का जिक्र यहाँ किया।

पीएम मोदी ने अपने भाषण में आजादी के बाद विकास के मोर्चे पर पूर्ववर्ती सरकारों के सुस्ती बरतने को लेकर भी बात की। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद देश ने वह समय देखा है जब होता है, चलता है, अगली पीढ़ी देखेगी वाला माहौल बनाया गया था। पीएम मोदी ने कहा कि कुछ भी नया करने के प्रयास नहीं हो रहे थे।

पीएम मोदी ने कहा कि उनकी सरकार ने बड़े रिफार्म देश को दिए। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार की रिफार्म के प्रति प्रतिबद्धता किसी मज़बूरी या अखबारों के सम्पादकीयों के लिए नहीं बल्कि देश को मजबूती देने के लिए है। पीएम मोदी ने कहा कि देश में आए बदलाव बौद्धिक चर्चा के लिए नहीं हैं।

पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार किसी राजनीतिक दबाव के चलते सुधार नहीं करती है। उन्होंने बैंकिंग क्षेत्र में हुए बदलावों की चर्चा भी की। पीएम मोदी ने कहा कि बैंकिंग क्षेत्र में बदलावों के कारण देश का माध्यम वर्ग आगे बढ़ता है।

पीएम मोदी ने कहा कि वर्तमान में देश का युवा लम्बी छलाँग मारना चाहता है। उन्होंने कह कि यह समय देश का गोल्डन एरा है, हमें इसमें अपने संकल्पों को पकड़ कर चलना होगा। पीएम मोदी ने कहा कि देश के स्पेस सेक्टर में सैकड़ों स्टार्टअप आ गए हैं, यह रिफार्म के कारण है।

पीएम मोदी ने कहा कि देश का मध्यम वर्ग देश को बहुत कुछ देता है, ऐसे में देश का कर्तव्य है कि उसके जीवनस्तर को सुधार जाए। पीएम मोदी ने कहा कि 2047 तक जब विकसित भारत बनेगा तो सरकार का जीवन में दखल कम होने को लेकर प्रयास होगा।

पीएम मोदी ने लालकिले की प्राचीर से कहा कि तीसरी बार उन्हें सरकार बनाने का मौका मिला है, जो जनता का आशीर्वाद है। उन्होंने इसके लिए देश का धन्यवाद दिया है। पीएम मोदी ने कहा कि नई शिक्षा नीति के कारण देश में बदलाव आ रहे हैं।

पीएम मोदी ने कहा कि वह नहीं चाहते कि देश के माध्यम वर्गीय परिवारों के बच्चे बाहर पढ़ने जाएँ। उन्होंने कहा कि देश में ही ऐसी व्यवस्था बने इससे विदेशों से बच्चे यहाँ पढ़ने आएँ। पीएम मोदी ने कहा कि वह देश में स्किल डेवलपमेंट का क्षेत्र बढ़ाना चाहते हैं।

पीएम मोदी ने ऐलान किया कि देश में अगले 25 वर्षों में 75000 मेडिकल की सीटें बनाई जाएँगी। उन्होंने बजट में देश ग्रीन इकॉनमी के लिए किए गए प्रयासों को भी बताया। उन्होंने कहा कि ऑर्गनिक फ़ूड के लिए भारत को सबसे अग्रणी देश बताया।

पश्चिम बंगाल में एक डॉक्टर के साथ बलात्कार और हत्या की हत्या की घटना की तरफ भी पीएम मोदी ने इशारा किया। पीएम मोदी ने कहा कि एक समाज के नाते हमें गंभीरता से सोचना होगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकारों को समाज में विश्वास पैदा करने के लिए ऐसी घटनाएँ करने वालों के विरुद्ध एक्शन लेना होगा।

पीएम मोदी ने अपील की कि जब महिलाओं के साथ अपराध करने वालों को सजा हो तो इस पर चर्चा की जाए, ताकि ऐसे लोगों के मन में डर बैठे। पीएम मोदी ने रक्षा बजट को लेकर बात की और कहा कि हम इस क्षेत्र में हम आत्मनिर्भर हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब हम रक्षा उत्पाद निर्यात कर रहे हैं।

पीएम मोदी ने कहा कि देश ने अब तक जो भी लक्ष्य बनाए हैं, वह पूरे किए हैं। उन्होंने इसके लिए पेरिस समझौते का उदाहरण दिया। पीएम मोदी ने कहा कि देश ग्रीन हाइड्रोजन को लेकर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि इससे बड़ी संख्या में नौकरियाँ पैदा होंगी।

2036 में ओलम्पिक भारत में आयोजित करवाने के लिए भी पीएम मोदी ने वकालत की है। उन्होंने कहा कि भारत बड़े काम आयोजित कर सकता है। उन्होंने कहा कि ओलम्पिक देश में आयोजित करवाने के लिए प्रयास किए जाएँगे।

पीएम मोदी ने यहाँ कहा कि विश्व भारत के आगे बढ़ने से चिंतित ना हो। उन्होंने कहा कि भारत युद्ध का देश नहीं बल्कि बुद्ध का देश है। पीएम मोदी ने कहा कि देश भ्रष्टाचार के कारण सरकारी व्यवस्थाओं से खिन्न हुआ है। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार से उनकी लड़ाई जारी रहेगी।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने यहाँ बांग्लादेश को लेकर भी अपनी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि जल्द वहाँ हिन्दुओं की सुरक्षा सुनिश्चित होनी चाहिए। पीएम मोदी ने कहा कि देश के संविधान को 75 वर्ष हो रहे हैं, ऐसे में हमें कर्तव्य के भाव को आगे बढ़ाना जरूरी है।

पीएम मोदी ने लालकिले की प्राचीर से यूनिफार्म सिविल कोड को लेकर बात की। उन्होंने कहा कि वर्तमान में जो सिविल कोड है, वह एक प्रकार का कम्युनल सिविल कोड है। उन्होंने कहा कि ऐसे में अब इस मामले में चर्चा करते हुए आधुनिक समय में सेक्युलर सिविल कोड बनाने की आवश्यकता है।

पीएम मोदी ने लालकिले से एक देश एक चुनाव को लेकर भी अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि वर्तमान में हर योजना चुनाव से जोड़ी जाती है। उन्होंने देश के राजनीतिक दलों से आह्वान किया है कि वह एक देश एक चुनाव के लिए आगे आएँ। उन्होंने कहा कि यह देश अब दृढ़ संकल्प से चलने के लिए प्रतिबद्ध है।

जब नेहरू फहरा रहे थे तो फँस गया ध्वज, किशन सिंह ने 80 फुट ऊपर चढ़ बचाई लाज: संघी निकले इसीलिए नहीं दिया कोई सम्मान, कहानी एक कॉन्ग्रेस अधिवेशन की

प्रत्येक स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस के अवसर पर देश में उत्साह चरम पर होता है, खासकर बच्चों में राष्ट्रध्वज तिरंगा के प्रति प्यार देखते ही बनता है और देशभक्ति गानों से वातावरण जोशीला हो उठता है। ये समय होता है बलिदानी स्वतंत्रता सेनानियों को नमन करने का, ये अवसर होता है इस देश को अखंड बनाए रखने का संकल्प लेने का, ये मौका होता है इस मिट्टी की महक में रम जाने का। लेकिन, साजिद रशीदी जैसे कुछ मौलाना होते हैं जो इस मौके का इस्तेमाल घृणा फैलाने के लिए करते हैं और ‘भारत माता की जय’ नारे को इस्लाम में ‘हराम’ बताते हैं।

वहीं अरफ़ा खानम शेरवानी जैसी कट्टर इस्लामी पत्रकार इस मौके का इस्तेमाल करती हैं ये कहने के लिए कि RSS ने कभी राष्ट्रध्वज तिरंगा नहीं फहराया, इसीलिए वो देशभक्त संगठन नहीं है। वो इस दौरान कहती हैं कि मुस्लिमों ने भारत को अपनी मातृभूमि के रूप में चुना, लेकिन सांप्रदायिक रूप से उन्हें परेशान करने वाले लोग आज ‘राष्ट्रवाद’ की बात करते हैं। इस दौरान प्रपंची पत्रकार ये भूल जाती हैं कि राष्ट्रध्वज को न फराना अलग बात है और इसके लिए जान दे देना दूसरी बात।

आइए, आपको एक पुराने किस्से के जरिए समझाते हैं उदाहरण देकर। बात है 1936 की। तब महाराष्ट्र के जलगाँव स्थित फैज़पुर में कॉन्ग्रेस का अधिवेशन आयोजित हुआ था। ये इसीलिए भी महत्वपूर्ण था, इसके 2 कारण हो सकते हैं – पहला, ये INC का 50वाँ सेशन था और दूसरा, पहली बार किसी ग्रामीण इलाके में कॉन्ग्रेस के अधिवेशन का आयोजन हुआ। ये वो समय था जब कॉन्ग्रेस पार्टी जनता की माँगों की तरफ बढ़ रही थी, इसीलिए इसमें जो ‘किसान मैनिफेस्टो’ पारित किया गया उसमें खेती की जमीनों पर टैक्स कम करने समेत किसान संघों को मान्यता देने और लेवी वसूली खत्म करने की माँग की गई।

यावल तालुका में स्थित फैज़पुर में अपने अध्यक्षीय संबोधन में पंडित जवाहरलाल नेहरू ने समाजवाद को अपनाने और पूँजीवाद को हराने की बातें की। पहली बार इसमें ‘ऑल इंडिया किसान सभा’ की सहभागिता रही। ये वो समय था जब कॉन्ग्रेस ‘स्वराज ध्वज’ का इस्तेमाल करती थी, जिसे 1931 में अपनाया गया था। इसमें सबसे ऊपर केसरिया रंग था, उसके नीचे सफ़ेद और सबसे नीचे हरा। आज भी यही है। लेकिन, तब चक्र की जगह इसमें चरखा बना होता था।

जिस वाकये की हम बात कर रहे हैं, उसका जिक्र पुडुचेरी के उप-राज्यपाल रहे पत्रकार एवं इतिहासकार केवल रतन मलकानी ने अपनी पुस्तक ‘The RSS Story‘ में किया है। जब कॉन्ग्रेस के तत्कालीन अध्यक्ष जवाहरलाल नेहरू झंडा फहराने लगे, उस दौरान झंडा अचानक से ऊपर ही फँस गया। बता दें कि झंडा फहराने को ‘Flag Unfurling’ कहते हैं, इसमें झंडा पहले ही स्तम्भ के ऊपरी हिस्से की तरफ बँधा होता है और नीचे से ऊपर नहीं जाता है। राष्ट्रपति गणतंत्र दिवस (26 जनवरी) को झंडा फहराती हैं, वहीं प्रधानमंत्री स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त) को ध्वजारोहण करते हैं।

खैर, तो जब जवाहरलाल नेहरू झंडा फहराने चले तो झंडा ऊपर से रस्सी के साथ अटक गया और इससे उनकी बेइज्जती भी हो गई। तभी किशन सिंह नाम का एक युवा आगे आया और उसने 80 फुट ऊँचे झंडे के पोल पर चढ़ कर उसे ठीक किया। हजारों लोगों ने ताली बजा कर उसकी प्रशंसा की, ‘वाह-वाह’ से कॉन्ग्रेस का अधिवेशन गूँज उठा। खुले अधिवेशन में उसे सम्मानित किए जाने की भी बात की गई। लेकिन, तभी पता चला कि किशन सिंह नाम वो राजपूत युवक RSS (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) से जुड़ा हुआ है।

चूँकि वो ‘संघी’ निकला, इसीलिए उसे सम्मानित करने का विचार त्याग दिया गया। RSS के संस्थापक और तत्कालीन सरसंघचालक डॉ KB हेडगेवार को ये ठीक नहीं लगा और उन्होंने धुलिया के देवपुरा शाखा में किशन सिंह को बुला कर सार्वजनिक रूप से सम्मानित किया और उन्हें चाँदी का कप सौंपा। उस समय कॉन्ग्रेस का ध्वज ही स्वतंत्रता का और देश का ध्वज माना जाता था, ऐसे में एक संघी ने झंडे का सम्मान बचाया। ‘RSS राष्ट्रध्वज से घृणा करता है’ – ये एजेंडा फ़ैलाने वाले इस घटना पर कुछ बोलेंगे?

ये घटना कहती है कि RSS द्वारा राष्ट्रध्वज को तब न फहराया जाता विभिन्न संगठनों और स्वतंत्रता सेनानियों के बीच झंडे के स्वरूप को लेकर मतभेद का एक रूप हो सकता है, लेकिन फिर भी RSS स्वीकृत झंडे के सम्मान को लेकर इतना प्रतिबद्ध था कि एक संघी ने 80 फुट चढ़ कर झंडा और नेहरू दोनों की लाज बचाई। असल में 1931 में कॉन्ग्रेस के कराची अधिवेशन में ध्वज के लिए जो समिति बनाई गई थी, उसने तो भगवा झंडे का ही प्रस्ताव दिया था जिसे नकार दिया गया था।

उस समिति में तत्कालीन कॉन्ग्रेस अध्यक्ष और भविष्य में आज़ाद भारत के गृह मंत्री बनने वाले सरदार वल्लभभाई पटेल, ‘खिलाफत आंदोलन’ के नेता व आज़ाद भारत के पहले शिक्षा मंत्री बनने वाले मौलाना अबुल कलम आज़ाद, ‘शिरोमणि अकाली दल’ (SAD) के अध्यक्ष रहे मास्टर तारा सिंह, ‘गुजरात विद्यापीठ’ के तत्कालीन कुलपति एवं लेखक काका कालेलकर, अमेरिका से पढ़ कर लौटे ‘कॉन्ग्रेस सेवा दल’ के संस्थापक NS हार्डिकर, आंध्र प्रदेश के नेता पट्टाभि सीतारमैया और खुद नेहरू भी शामिल थे।

आपको पता है इस समिति ने क्या प्रस्ताव दिया था? इस समिति ने प्रस्ताव दिया था कि राष्ट्रध्वज केसरिया रंग का होना चाहिए, जिसमें बाईं तरफ ऊपर कोने में नीले रंग में चरखा होना चाहिए। हालाँकि, सांप्रदायिक दबाव में आकर कॉन्ग्रेस ने उस झंडे को स्वीकार नहीं किया। बाद में लाल रंग को केसरिया से स्थानांतरित कर दिया गया और उसे सबसे ऊपर कर दिया गया। फिर भी, संघ ने कॉन्ग्रेस द्वारा चुने गए झंडे का सम्मान किया। जहाँ तक बात ध्वज की है, RSS का अपना भगवा ध्वज है और दिसंबर 1934 में महात्मा गाँधी भी उसे सैल्यूट कर चुके हैं।

ये उस समय के स्वतंत्रता सेनानियों और संगठनों में परस्पर सम्मान की भावना का उदाहरण है। RSS के अध्यक्ष डॉ KB हेडगेवार ने महात्मा गाँधी के नमक सत्याग्रह में भी हिस्सा लिया था। संघ के लोग स्वतंत्रता के विभिन्न आंदोलनों में शामिल थे। प्रपंची अक्सर RSS द्वारा एक संगठन के रूप में कॉन्ग्रेस के हर फैसले में साथ न रहने का आरोप लगाते हैं, लेकिन ये भूल जाते हैं कि कभी सुभाष चंद्र बोस से लेकर चंद्रशेखर आज़ाद जैसे बलिदानियों की राहें भी कॉन्ग्रेस से जुदा थीं और RSS राष्ट्र-निर्माण का संगठन रहा है, राजनीतिक नहीं।

बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार के खिलाफ अमेरिका चुप, दुनिया भर मानवाधिकार पर देते रहता है ‘ज्ञान’: व्हाइट हाउस ने कहा- हमारे पास कहने को कुछ नहीं

राष्ट्रपति जो बाइडेन के नेतृत्व वाली अमेरिकी सरकार ने बांग्लादेश में हिंदुओं एवं अन्य अल्पसंख्यकों के खिलाफ हो रहे अत्याचारों पर टिप्पणी से इनकार कर दिया है। एक सवाल के जवाब में व्हाइट हाउस की प्रवक्ता जीन पियरे ने कहा कि उनके पास कहने के लिए कुछ नहीं है। पियरे ने शेख हसीना के इस दावे का भी खंडन किया है, जिसमें उन्होंने पद से हटाने में अमेरिका का हाथ बताया था।

दरअसल, मंगलवार (12 अगस्त) को व्हाइट हाउस की आधिकारिक प्रवक्ता जीन पियरे ने एक प्रेस ब्रीफिंग को संबोधित किया। इस दौरान ललित नाम के एक पत्रकार ने उनसे बांग्लादेश में चल रहे घटनाक्रम और अमेरिका-भारत संबंधों पर सवाल पूछे। उन्होंने जीन पियरे को बताया कि सप्ताह के अंत में कई हिंदू अमेरिकी समूहों ने व्हाइट हाउस के सामने विरोध मार्च निकाला था।

ब्रीफिंग के दौरान पत्रकार ने बताया कि उन अमेरिकी समूहों ने राष्ट्रपति से बांग्लादेश में अमेरिकियों और हिंदुओं के खिलाफ अत्याचारों को रोकने के लिए कदम उठाने का आग्रह किया। डेमोक्रेटिक पार्टी के दो हिंदू सांसदों – राजा कृष्णमूर्ति और श्री थानेदार ने भी प्रशासन को पत्र लिखकर बांग्लादेश में हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यक समूहों के खिलाफ इन अत्याचारों को रोकने में उनकी मदद माँगी है।

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए व्हाइट हाउस के प्रवक्ता जीन पियरे ने कहा, “हम निश्चित रूप से स्थिति पर नज़र जारी रखेंगे। मेरे पास इसके अलावा और कुछ कहने को नहीं है।” पियरे ने कहा कि जब भी मानवाधिकारों की बात आती है तो राष्ट्रपति हमेशा सार्वजनिक रूप से और निजी तौर पर भी जोरदार और स्पष्ट रूप से बोलते रहे हैं। उनके पास अभी कहने को कुछ भी नहीं है।

ललित ने व्हाइट हाउस के प्रवक्ता से बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के इस आरोप के बारे में भी पूछा कि उन्हें सत्ता से बाहर इसलिए कर दिया गया क्योंकि अमेरिका बांग्लादेश द्वीप को चाहता था। पूर्व बांग्लादेशी प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्हें इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया गया, क्योंकि वह सेंट मार्टिन द्वीप को देने की अमेरिका की माँग से सहमत नहीं थीं।

उनके आरोपों का जवाब देते हुए व्हाइट हाउस के प्रवक्ता पियरे ने कहा, “इसमें हमारी कोई संलिप्तता नहीं है। ऐसी कोई भी रिपोर्ट या अफवाह कि संयुक्त राज्य सरकार इन घटनाओं में शामिल है, पूरी तरह से झूठी है। यह बांग्लादेशी लोगों के लिए और उनके द्वारा चुना गया विकल्प है। हमारा मानना ​​है कि बांग्लादेशी लोगों को बांग्लादेशी सरकार का भविष्य तय करना चाहिए और हम इसी पर कायम हैं।”

बता दें कि शेख हसीना ने आरोप लगाया था कि उन्हें सत्ता से बेदखल करने के पीछे अमेरिका का हाथ है। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने उन्हें प्रधानमंत्री पद से हटाने की साजिश रची, क्योंकि उन्होंने सेंट मार्टिन द्वीप को अमेरिका को सौंपने से इनकार कर दिया था। बंगाल की खाड़ी पर प्रभाव जमाने के लिए अमेरिका इसे कब्जाना चाहता है। हिंसा के बाद शेख हसीना फिलहाल बांग्लादेश छोड़कर भारत में हैं।

3 बार के ग्रैमी विजेता लेकर आए ‘जन-गण-मन’ की नई प्रस्तुति: 14000 जनजातीय बच्चों ने गाकर बनाया विश्व रिकॉर्ड, हरिप्रसाद चौरसिया से लेकर लंदन का बैंड तक शामिल

भारत के स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर ग्रैमी अवॉर्ड विजेता संगीतकार रिकी केज ने राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ का नया एडिशन लॉन्च किया है। इस संस्करण में ब्रिटिश ऑर्केस्ट्रा, पंडित हरि प्रसाद चौरसिया, राकेश चौरसिया, अमान एवं अयान अली बंगश, शेख महबूब सुभानी, कालीशाबी महबूब, गिरिधर उडुपा जैसे संगीत उस्तादों की प्रस्तुति शामिल है। इसके अलावा, इसमें 14000 जनजातीय बच्चे भी शामिल हैं।

रिकी केज ने बुधवार (14 अगस्त 2024) की शाम को सोशल मीडिया साइट X (पूर्व में ट्विटर) पर नए संस्करण का वीडियो शेयर किया। इसके साथ ही उन्होंने लिखा, “भारत के राष्ट्रगान का शानदार गायन साझा करने का सौभाग्य मुझे प्राप्त हुआ। इसमें भारत के शीर्ष दिग्गज संगीतकार, 100 सदस्यीय ब्रिटिश ऑर्केस्ट्रा और 14000 आदिवासी बच्चों का समूह शामिल हैं! हमने गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड भी जीता है।”

तीन बार प्रतिष्ठित ग्रैमी अवॉर्ड जीतने वाले रिकी केज ने आगे कहा, “कृपया शेयर करें, देखें, इस्तेमाल करें, लेकिन सम्मान के साथ। यह अब आपका है। हर जगह हर भारतीय को मेरा विनम्र उपहार। जय हिंद! स्वतंत्रता दिवस 2024 की शुभकामनाएँ।” इस वीडियो में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी टैग किया है। इसमें जिन 14,000 जनजातीय बच्चों की बात कही गई है, वे ओडिशा के रहने वाले हैं।

वीडियो में किन-किन महारथियों का चित्रण किया गया है, उनके बारे में भी उन्होंने बताया है। उन्होंने अपनी पोस्ट में आगे लिखा, “इसमें पंडित हरिप्रसाद चौरसिया, राकेश चौरसिया, अमान और अयान अली बंगश, राहुल शर्मा, जयंती कुमारेश, शेख और कालीशाबी महबूब, गिरिधर उडुपा, रॉयल फिलहारमोनिक ऑर्केस्ट्रा (यूके), कलिंगा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज शामिल हैं।”