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पश्चिम बंगाल में डॉक्टरों की सुरक्षा और ममता बनर्जी की सरकार: 2021 और 2023 से नहीं लिया सबक, अब 2024 की वीभत्स घटना से कठघरे में TMC की नीतियाँ

पश्चिम बंगाल में हाल ही में हुए डॉक्टर की रेप और मर्डर की घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इस घटना ने मेडिकल कॉलेजों में हो रही सुरक्षा व्यवस्थाओं की खामियों को उजागर कर दिया है। आरजी कर मेडिकल कॉलेज, कोलकाता में हुई इस घटना ने मेडिकल समुदाय के बीच गहरे आक्रोश को जन्म दिया है। इस क्रूर घटना में एक महिला डॉक्टर के साथ रेप और हत्या की घटना सामने आई है, जिससे मेडिकल समुदाय में भय और असुरक्षा की भावना बढ़ गई है।

पहले भी हुई घटनाएँ, नहीं लिया सबक

यह पहली बार नहीं है जब पश्चिम बंगाल में डॉक्टरों के साथ दुर्व्यवहार की घटनाएँ सामने आई हैं। साल भर पहले, एक जूनियर डॉक्टर पर एक मरीज के परिजनों द्वारा हिंसक हमला किया गया था। इसमें TMC के ही एक नेता की गिरफ्तारी भी हुई थी। उस कारण से राज्यव्यापी हड़ताल हुई थी। उस समय, डॉक्टरों की सुरक्षा को लेकर राज्य सरकार ने कई वादे किए थे, लेकिन हकीकत में स्थिति में कोई खास सुधार नहीं दिखा। 

इसके बाद भी डॉक्टरों के खिलाफ हिंसा और दुर्व्यवहार की घटनाएँ लगातार सामने आती रहीं। 2021 में एक अन्य डॉक्टर पर शारीरिक हमला हुआ, जब एक मरीज की मौत के बाद उसके परिवार ने डॉक्टर पर दोषारोपण किया था। इस घटना के बाद भी सरकार ने कड़ी सुरक्षा का भरोसा दिलाया था, लेकिन ऐसा लगता है कि वादों का असर वास्तविकता में देखने को नहीं मिला।

डॉक्टरों के खिलाफ बढ़ते अपराध: एक गंभीर समस्या

पश्चिम बंगाल में डॉक्टरों के खिलाफ अपराधों की संख्या बढ़ती जा रही है। राज्य में डॉक्टरों की सुरक्षा को लेकर चिंताएँ लगातार बढ़ रही हैं। यह चिंता सिर्फ डॉक्टरों की नहीं, बल्कि उन मरीजों की भी है, जो इन डॉक्टरों पर अपने जीवन का भरोसा करते हैं। जब डॉक्टर ही सुरक्षित नहीं होंगे, तो वे अपने मरीजों की देखभाल कैसे कर पाएँगे? 

डॉक्टरों के खिलाफ बढ़ते अपराध और हिंसा के पीछे कई कारण हो सकते हैं, जिनमें स्वास्थ्य सेवाओं की कमी, मरीजों के बीच बढ़ती असंतोष, और कानून-व्यवस्था की कमजोर स्थिति शामिल हैं। लेकिन इस सब के बीच, डॉक्टरों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए। डॉक्टरों को न केवल अपने काम के दौरान, बल्कि अपने घरों और जीवन में भी सुरक्षित महसूस करने का अधिकार है।

राज्य सरकार की नीतियों पर सवाल

पश्चिम बंगाल सरकार ने डॉक्टरों की सुरक्षा के लिए जो नीतियाँ और कदम उठाए हैं, वे अब गंभीर रूप से सवालों के घेरे में हैं। डॉक्टरों के खिलाफ हो रही हिंसा और दुर्व्यवहार की घटनाएँ यह दिखाती हैं कि राज्य सरकार की नीतियों में बड़ी खामियाँ हैं। 

पश्चिम बंगाल सरकार ने पहले भी डॉक्टरों की सुरक्षा के लिए उपायों की घोषणा की थी, लेकिन हाल की घटनाओं ने इन वादों की सच्चाई को उजागर कर दिया है। सरकार की नीतियों की नाकामी का परिणाम यह हुआ है कि डॉक्टर खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं, और इसका सीधा असर मरीजों की देखभाल पर पड़ता है। 

सुरक्षा की माँग और राज्यव्यापी आंदोलन की आशंका

चिकित्सा समुदाय में इस समय व्यापक असंतोष है। डॉक्टरों और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े कर्मचारियों ने इस मामले की सीबीआई की माँग की है, ताकि दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिल सके। इसके साथ ही, डॉक्टरों के संगठनों ने संकेत दिया है कि अगर सरकार ने इस दिशा में त्वरित और प्रभावी कदम नहीं उठाए, तो राज्यव्यापी हड़ताल की संभावनाएँ प्रबल हो सकती हैं।

डॉक्टरों की सुरक्षा को लेकर राज्य सरकार की उदासीनता से चिकित्सा समुदाय में भारी निराशा है। डॉक्टरों के लिए एक सुरक्षित कार्य वातावरण सुनिश्चित करना अत्यावश्यक है। अगर सरकार ने इस मुद्दे को गंभीरता से नहीं लिया, तो इसका असर पूरे राज्य की चिकित्सा सेवाओं पर पड़ेगा। 

केंद्रीय डॉक्टर संरक्षण अधिनियम की माँग

इस दुखद घटना के बाद, डॉक्टरों ने केंद्रीय डॉक्टर संरक्षण अधिनियम के शीघ्र कार्यान्वयन की माँग की है। इस अधिनियम के तहत न केवल डॉक्टरों बल्कि सभी स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा को सुनिश्चित किया जाएगा। डॉक्टरों ने सरकार से इस कानून के लिए समयबद्ध कार्य योजना की भी माँग की है। साथ ही, उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि अगर उनकी माँगें पूरी नहीं की जाती हैं, तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे।

समाधान और आगे का रास्ता

राज्य सरकार को डॉक्टरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे। इसके लिए न केवल नए कानूनों की आवश्यकता है, बल्कि मौजूदा कानूनों को भी सख्ती से लागू करना होगा। अस्पतालों में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना, डॉक्टरों के साथ किसी भी प्रकार की हिंसा पर कड़ी सजा का प्रावधान करना, और मरीजों व उनके परिजनों को स्वास्थ्य सेवाओं के बारे में जागरूक करना महत्वपूर्ण है। 

इसके अलावा, सरकार को चिकित्सा पेशेवरों के साथ संवाद स्थापित करना चाहिए और उनकी समस्याओं को समझकर समाधान निकालना चाहिए। डॉक्टरों की सुरक्षा सिर्फ एक नीतिगत मुद्दा नहीं है, यह समाज की स्वास्थ्य सेवाओं की बुनियाद से जुड़ा हुआ सवाल है। अगर डॉक्टर सुरक्षित नहीं होंगे, तो स्वास्थ्य सेवाओं का ढाँचा कमजोर पड़ जाएगा। 

निष्कर्ष

पश्चिम बंगाल में डॉक्टरों के खिलाफ बढ़ती हिंसा और दुर्व्यवहार की घटनाओं ने राज्य सरकार की नीतियों और सुरक्षा उपायों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अगर इस दिशा में तत्काल कदम नहीं उठाए गए, तो यह राज्य की चिकित्सा सेवाओं के लिए एक बड़ा संकट खड़ा कर सकता है। डॉक्टरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार को अब ठोस और प्रभावी कदम उठाने होंगे।

हादसा या साजिश: कानपुर में साबरमती एक्सप्रेस के 22 डिब्बे पटरी से उतरे, ट्रैक पर रखा था लोहे का भारी सामान: रेल मंत्री बोले- IB मामले की कर रही जाँच

साबरमती एक्सप्रेस के 22 डब्बे शनिवार-रविवार (16-17 अगस्त) की रात 2.35 बजे पटरी से उतर गए। यह हादसा कानपुर के गोविंदपुरी से थोड़ी दूर आगे हुई। यात्रियों के हताहत होने की सूचना नहीं है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि पटरी पर लोहे के भारी समान से टकराकर डिब्बे पटरी से उतरे। मामले की जाँच खुफिया एजेंसी IB कर रही है।

जिस समय यह घटना हुई, उस समय साबरमती एक्सप्रेस (19168) उत्तर प्रदेश के वाराणसी से गुजरात के अहमदाबाद जा रही थी। ट्रेन के डिब्बे पटरी से उतरते ही यात्रियों में हड़कंप मच गया। घटना की सूचना मिलते ही रेलवे के कर्मी, पुलिस और फायर विभाग के आला अधिकारी मौके पर पहुँचे और राहत एवं बचाव कार्य शुरू कर दिया।

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि इस घटना में कोई भी यात्रा या रेल कर्मचारी घायल नहीं हुआ है। उन्होंने सोशल मीडिया साइट X (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट में लिखा, “साबरमती एक्सप्रेस (वाराणसी से अहमदाबाद) का इंजन आज सुबह 02:35 बजे कानपुर के पास ट्रैक पर रखी किसी वस्तु से टकराया और पटरी से उतर गया।”

उन्होंने आगे लिखा, “इंजन पर भारी टक्कर के निशान पाए गए हैं। सबूतों को सुरक्षित रख लिया गया है। आईबी और यूपी पुलिस इस मामले में काम कर रही है। यात्रियों या कर्मचारियों को कोई चोट नहीं आई है। यात्रियों के लिए आगे अहमदाबाद की यात्रा के लिए ट्रेन की व्यवस्था कर दी गई है।” आशंका है कि जानबूझकर लोहे के भारी समान ट्रैक पर रखे गए थे।

इस हादसे को लेकर ट्रेन के ड्राइवर ने भी कहा है कि हादसा प्रथम दृष्टया बोल्डर के इंजन से टकराने की वजह से हुआ है। ड्राइवर ने कहा कि जैसे ही बोल्डर इंजन से टकराया, वैसे ही इंजन का कैटल गार्ड मुड़ गया। घटना के बाद DRM, ADRM, कमर्शियल हेड, टेक्निकल हेड, मेडिकल टीम पहुँच गए हैं। अधिकारियों ने कहा कि ट्रैक की मरम्मत करके ट्रेन सेवा बहाल करने की कोशिश की जा रही है।

राहुल गाँधी ब्रिटिश नागरिक, पासपोर्ट भी विदेशी: सुब्रमण्यम स्वामी पहुँचे दिल्ली हाई कोर्ट, कहा- उनकी भारतीय नागरिकता रद्द की जाए

भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी की नागरिकता का मुद्दा एक बार फिर उठाते हुए दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। स्वामी ने अपनी याचिका में हाई कोर्ट से केंद्रीय गृह मंत्रालय को निर्देश देने की माँग की है कि वह लोकसभा में विपक्ष के नेता (LOp) राहुल गाँधी की भारतीय नागरिकता रद्द करने के उनके आवेदन पर निर्णय ले।

सुब्रमण्यम स्वामी की इस याचिका पर अगले सप्ताह सुनवाई होने की संभावना है। यह याचिका अधिवक्ता सत्य सभरवाल के माध्यम से दायर की गई है। दरअसल, स्वामी ने साल 2019 में गृह मंत्रालय को पत्र लिखकर आरोप लगाया था कि बैकऑप्स लिमिटेड नाम की एक कंपनी साल 2003 में यूनाइटेड किंगडम में पंजीकृत हुई थी। राहुल गाँधी इसके सचिव एवं निदेशकों में से एक थे।

बकौल स्वामी, 10 अक्टूबर 2005 और 31 अक्टूबर 2006 को कंपनी के वार्षिक रिटर्न में राहुल गाँधी ने अपनी नागरिकता ब्रिटिश बताई थी। 17 फरवरी 2009 को कंपनी के विघटन आवेदन में भी उनकी नागरिकता ब्रिटिश बताई गई थी। उन्होंने कहा कि राहुल गाँधी के पास ब्रिटिश पासपोर्ट है। स्वामी ने इसे भारतीय संविधान के अनुच्छेद 9 और भारतीय नागरिकता अधिनियम 1955 का उल्लंघन बताया है।

दरअसल, गृह मंत्रालय ने 29 अप्रैल 2019 को राहुल गाँधी को एक पत्र लिखकर उनसे एक पखवाड़े (15 दिन) के भीतर इस संबंध में सही स्थिति से अवगत कराने के लिए कहा था। हालाँकि, स्वामी ने तर्क दिया है कि इस पत्र के पाँच साल से अधिक समय बीत जाने के बावजूद गृह मंत्रालय की ओर से अभी भी स्पष्ट नहीं किया गया है कि इस पर क्या निर्णय लिया गया है।

बता दें कि राहुल गाँधी की नागरिकता को लेकर एक व्यक्ति ने सूचना के अधिकार यानी आरटीआई के तहत केंद्रीय गृह मंत्रालय से जानकारी माँगी थी। हालाँकि, मंत्रालय ने कोई भी जानकारी देने से इनकार कर दिया था। जवाब में मंत्रालय ने कहा कि आरटीआई अधिनियम की धारा 8(1)(एच) और (जे) के तहत कोई खुलासा नहीं किया जा सकता है। जानकारी देने से जाँच प्रक्रिया बाधित होगी।

राहुल गाँधी की नागरिकता पर सवाल उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट में भी एक याचिका दाखिल की गई थी। उसमें गृह मंत्रालय को जल्द जाँच के निर्देश दिए जाने की माँग की गई थी। तब उस समय के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने उस याचिका को खारिज कर दी थी। इसके साथ ही उन्होंने इस पर टिप्पणी की थी।

तत्कालीन चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा था कि अगर कोई कंपनी किसी फॉर्म में राहुल गाँधी को ब्रिटिश नागरिक बता देती है तो इसका मतलब यह नहीं कि वे ब्रिटिश नागरिक हो गए। इस मामले में राहुल गाँधी की बहन प्रियंका गाँधी वाड्रा ने भी उनका बचाव किया था। प्रियंका ने कहा था कि पूरे देश को पता है कि राहुल भारत में जन्मे हैं और भारतीय हैं।

बांग्लादेश में हिंदू उत्पीड़न के खिलाफ नासिक में रैली निकाल रहे थे हिंदू संगठन, मुस्लिमों ने किया हमला: जलगाँव में भी पथराव से तनाव, पुलिस बल तैनात

बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हो रहे अत्याचार के खिलाफ सकल हिंदू समाज ने शुक्रवार (16 अगस्त 2024) को महाराष्ट्र बंद का आह्वान किया था। बंद के दौरान नासिक और जलगाँव में पथराव से तनाव फैल गया है। दोनों जगहों से कई तस्वीरें एवं वीडियो सामने आए हैं। हालात को सँभालने के लिए आखिरकार पुलिस को लाठी चार्ज करना पड़ा है।

दरअसल, नासिक में बंद के दौरान मुस्लिम समुदाय के कुछ लोगों ने अपनी दुकानें बंद करने से इनकार कर दिया। इसके कारण दो गुटों के बीच विवाद उत्पन्न हो गया। वहीं भद्रकाली इलाके में विरोध में निकाली जा रही रैली पर कुछ कट्टरपंथियों ने पथराव कर दिया। इससे हालात तनाव हो गए। इस घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुँची और स्थिति को नियंत्रित कर लिया।

दरअसल, भद्रकाली इलाके में मुस्लिम दुकानदारों ने अपनी दुकानें बंद करने से इनकार कर दिया था। इसके बाद हिंदू सकल समाज के लोग वहाँ बाइक से बंद कराने के लिए पहुँचे तो उन पर पथराव करा दिया गया। इस दौरान हालात को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को लाठी चार्ज भी करना पड़ा। कहा जा रहा है कि इसमें कई लोग घायल हो गए हैं।

नेटवर्क18 के कंसल्टिंग एडिटर राहुल शिवशंकर ने पोस्ट किया, “नासिक में बाइक रैली का विरोध करते हुए हिंदू समूहों पर हमला किया गया। भद्रकाली इलाके में हिंसक झड़प और पथराव हुआ। कई लोग घायल हो गए। पुलिस ने व्यवस्था बहाल कर दी है। समझ में नहीं आता कि बांग्लादेश में हिंदुओं के समर्थन में कोई सक्रिय रूप से विरोध क्यों करेगा? वह भी भारतीय धरती पर!”

बांग्लादेश में हिंदू समाज के खिलाफ हिंसा को लेकर नासिक रोड परिसर के सुभाष रोड, देवलाली गाँव स्टेशन रोड, डॉक्टर बाबासाहेब आंबेडकर रोड, छत्रपति शिवाजी पुतला चौक परिसर, बिटको चौक, मुक्तिधाम परिसर, जेल रोड, सिन्नर फाटा क्षेत्र में स्थित दुकानें बंद रहीं। सुरक्षा के लिए पुलिस ने अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए हैं। साथ ही लोगों से अफवाहों पर ध्यान नहीं देने की अपील की है।

वहीं, जलगाँव में बांग्लादेशी हिंदुओं पर अत्याचार को लेकर निकाले जा रहे विरोध प्रदर्शन के दौरान पत्थरबाजी को लेकर दो समुदायों के बीच हालात तनावपूर्ण हो गए। पुलिस ने किसी अनहोनी से बचने के लिए यहाँ भी इलाके में भारी पुलिस बल की तैनाती की है। लोगों को अफवाहों पर ध्यान नहीं देने का आदेश दिया गया है।

जिस उदयपुर में कन्हैया लाल का गला रेता, वहीं अब सरकारी स्कूल के बाहर छात्र को चाकू मारा: हिंदू संगठनों ने बंद कराया बाजार, धारा 144 लागू

राजस्थान के उदयपुर स्थित एक सरकारी स्कूल के दो छात्रों के झगड़े से सांप्रदायिक तनाव फैल गया है। बताया जा रहा है कि साथ पढ़ने वाले एक मुस्लिम छात्र ने एक हिंदू छात्र को चाकू मार दिया। इसमें वह बुरी तरह घायल हो गया। खबर फैलते ही बड़ी संख्या में लोग जुटे और शॉपिंग मॉल में तोड़फोड़ कर दी। एक गैरेज में खड़ी कारों को भी आग लगा दिया। आखिरकार पुलिस को लाठी चार्ज करनी पड़ी।

उदयपुर शहर के भटियाणी चौहट्टा में शुक्रवार (16 अगस्त 2024) को सुबह एक सरकारी स्कूल के बाहर एक छात्र ने देवराज नाम के छात्र को चाकू मारकर घायल कर दिया। हमला करने वाला छात्र मुस्लिम समुदाय का बताया जा रहा है। इसकी जानकारी मिलते ही स्कूल के शिक्षक घायल हिंदू छात्र को लेकर महाराणा भूपाल सिंह हॉस्पिटल पहुँचे। वहाँ ICU में छात्र का इलाज चल रहा है।

हिंदू छात्र को चाकू मारने की बात फैलते ही हिंदूवादी संगठनों में आक्रोश फैल गया। कई हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता एवं भाजपा पदाधिकारी अस्पताल के पास जुटकर नारेबाजी करने लगे। देखते ही देखते लोगों में आक्रोश बढ़ता गया और हिंदू कार्यकर्ता बाजार पहुँच गए। इसके बाद लोगों ने घटना के विरोध में बाजार बंद करा दिया। वहीं, कुछ लोगों ने वाहनों में तोड़फोड़ कर आग लगा दी।

हिंदूवादी संगठनों ने चेतक सर्किल, हाथीपोल, अश्विनी बाजार, बापू बाजार, दिल्ली गेट और घंटाघर एरिया की दुकानों को बंद करवा दिया है। हालात को देखते हुए इन इलाकों में बड़ी संख्या में पुलिस बल को तैनात कर दिया गया है। कलेक्टर अरविंद पोसवाल ने बताया कि हमला करके फरार हुए नाबालिग छात्र और उसके अब्बू को हिरासत में लिया गया है। इलाके में धारा 144 भी लागू की गई है।

जिला शिक्षा अधिकारी लोकेश भारती ने बताया कि दोनों छात्रों की उम्र लगभग 15 साल है। दोनों राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, भटि्टयाणी चौहट्‌टा में एक ही क्लास में पढ़ते हैं। दोनों के बीच किस बात को लेकर झगड़ा हुआ, इसकी जानकारी सामने नहीं आई है। लंच के दौरान दोनों स्कूल के बाहर निकल गए। इस दौरान मुस्लिम छात्र ने देवराज की जाँघ में दो-तीन बार चाकू घोंप दिया।

स्कूल की प्रिंसिपल ईशा धर्मावत ने बताया कि लंच के करीब 5 से 7 मिनट बाद स्कूल के बाहर से कुछ छात्र चिल्लाते हुए अंदर आए। उन्होंने कहा, “मैंने तुरंत बाहर जाकर देखा तो एक स्टूडेंट घायल अवस्था में पड़ा था। मेरी स्कूटी पर बैठाकर स्टाफ ने उसे तुरंत हॉस्पिटल पहुँचाया।” प्रिंसिपल ने बताया कि दोनों छात्र पढ़ने में अच्छे और दोनों को कभी झगड़ते हुए नहीं देखा गया।

घायल छात्र की स्थिति स्टेबल है। डॉक्टरों का कहना है कि बच्चा जल्दी ही रिकवर हो जाएगा। जिलाधिकारी अरविंद पोसवाल ने लोगों से किसी अफवाह पर ध्यान नहीं देने और शहर का अमन-चैन बनाए रखने में मदद करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि जो अफवाह फैलाएगा, उस पर कार्रवाई की जाएगी। बता दें कि यह वही उदयपुर है, जहाँ कन्हैयालाल दर्जी की गला काटकर हत्या कर दी गई थी।

पर्याप्त इलाज देने के बाद भी अस्पताल में यूनुस की हो गई मौत, परिजनों ने डॉक्टर-नर्स पर हमला बोला: 8 के खिलाफ केस

गुजरात के जूनागढ़ अस्पताल में डॉक्टरों पर हमले की खबर सामने आई है। बताया जा रहा है कि वहाँ यूनुस नाम के मरीज के परिजनों ने डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए उन पर हमला किया। इस घटना में दो डॉक्टर और उनके स्टाफ घायल हो गए। जब अस्पताल के अन्य कर्मचारियों को इस तरह हमले की सूचना मिली तो वो घटना के विरोध में हड़ताल पर चले गए, लेकिन पुलिस ने मौके पर पहुँचकर उन्हें आश्वासन दिया कि वो आरोपितों पर सख्त कार्रवाई करेंगे। इसके बाद 8 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई और 5 लोगों को राउंडअप किया गया। वहीं डॉक्टरों ने भी अपनी हड़ताल वापस ले ली।

अस्पताल में डॉक्टरों पर हमला

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जूनागढ़ सिविल अस्पताल में 15-16 अगस्त की रात एक मरीज को सीने में दर्द की शिकायत पर भर्ती कराया गया था। मरीज का नाम यूनुस था। डॉक्टरों ने उसकी स्थिति देखते हुए उसे जरूरी इलाज दिया, लेकिन बाद में उसे आईसीयू में भर्ती करना पड़ा और फिर वो वेंटिलेटर पर चला गया। बाद में उसकी मौत हो गई। इसी दौरान यूनुस के घरवालों ने डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाया और फिर उनपर हमला कर दिया। घटना में डॉक्टर समेत नर्सिंग स्टाफ गंभीर रूप से घायल हो गए।

पुलिस को जैसे ही इस मामले की सूचना मिली। वो फौरन मौके पर पहुँचे। उन्होंने आरोपितों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया। साथ ही पुलिस अधिकारियों ने डॉक्टरों को उचित और कड़ी कार्रवाई का आश्वासन देते हुए आरोपितों की तलाश करनी शुरू कर दी। पुलिस द्वारा त्वरित एक्शन देख डॉक्टरों ने अपनी हड़ताल वापस ले ली। सब अपनी ड्यूटी पर लौट आए।

ऑपइंडिया ने की पुलिस से बात

ऑपइंडिया ने इस घटना को लेकर जूनागढ़ पुलिस से संपर्क किया। पुलिस ने हमें बताया कि घटना की सूचना मिलते ही पुलिस का काफिला मौके पर पहुँचा और स्थिति को नियंत्रित किया। पुलिस टीम द्वारा भी त्वरित कार्रवाई की गई। सिविल अस्पताल के डॉक्टरों और स्टाफ को आश्वासन दिया गया कि सभी आरोपितों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई की जाएगी। घटना के कुछ ही घंटों बाद पुलिस ने 8 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और 5 को राउंडअप कर लिया है, फिलहाल इस मामले में आगे की जाँच जारी है।

पूरी घटना को लेकर डीएसपी हितेश धांधल्या ने कहा है कि रात में सिविल अस्पताल में ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ पर हमला हुआ था। यहाँ एक परिवार का रिश्तेदार इलाज के लिए आया था और बाद में उसकी मौत हो गई, तो परिजनों ने डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ पर हमला कर दिया। आरोपित के खिलाफ ए डिवीजन पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कर ली गई है और जो भी हमलावर है उसके खिलाफ तत्काल कार्रवाई की गई है।

घटना के बाद डॉक्टरों ने भी कहा है कि वे रात करीब डेढ़ बजे ड्यूटी पर मौजूद थे। इस बीच यूनुस नाम के मरीज को वेंटिलेटर पर रखा गया था। इलाज के दौरान उनकी मौत हो जाने के बाद उनके परिजनों ने डॉक्टरों पर हमला कर दिया और उन्हें पीटना शुरू कर दिया। घटना के बाद पुलिस तुरंत अस्पताल पहुँची और मामले को सुलझाया और डॉक्टरों की हड़ताल खत्म कराई।

भारत सरकार के ‘उपचार’ से बांग्लादेश को आया होश, मुहम्मद यूनुस ने PM मोदी को किया फोन: हिंदुओं की सुरक्षा का दिया भरोसा

हिंदुओं के खिलाफ हिंसा को लेकर लाल किले से चेतावनी देने के बाद बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख सलाहकार मुहम्मद यूनुस ने पीएम मोदी को फोन किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर खुद इसकी जानकारी साझा की है। पीएम मोदी ने भी स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले से बांग्लादेश के हालात का जिक्र किया था।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “प्रोफेसर मुहम्मद यूनुस से फोन पर बात की। मौजूदा स्थिति पर विचारों का आदान-प्रदान किया। लोकतांत्रिक, स्थिर, शांतिपूर्ण और प्रगतिशील बांग्लादेश के लिए भारत के समर्थन को दोहराया। उन्होंने बांग्लादेश में हिंदुओं और सभी अल्पसंख्यकों की सुरक्षा एवं संरक्षा का आश्वासन दिया है।”

बांग्लादेश में शेख हसीना के नेतृत्व वाली सरकार के तख्तापलट के बाद 8 अगस्त को मोहम्मद यूनुस ने अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार के रूप में शपथ ली थी। नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस के कार्यभार सँभालने के बाद पीएम मोदी ने उन्हें शुभकामनाएँ दी थीं। इसके साथ ही बांग्लादेश में हिंदुओं एवं अन्य अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा था।

हालाँकि, इसके बाद भी बांग्लादेश में हिंदुओं के प्रति हिंसा जारी रही। उनके घरों, दुकानों से लेकर मंदिरों तक को निशाना बनाया गया। हत्या से लेकर बलात्कार की अनगिनत घटनाओं को अंजाम दिया गया। बांग्लादेश से हजारों की तलाश में निकलकर बांग्लादेश के हिंदू बंगाल से सटे भारतीय सीमा में घुसने की कोशिश की थी।

इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी ने 15 अगस्त 2024 को स्वतंत्रता दिवस के समारोह में लाल किले से कहा, “बांग्लादेश में जो कुछ भी हुआ है, उसको लेकर पड़ोसी देश के नाते चिंता होना मैं समझ सकता हूँ। मैं आशा करता हूँ कि वहाँ पर हालात जल्द ही सामान्य होंगे। खासकर 140 करोड़ देशवासियों की चिंता है कि वहाँ के हिन्दुओं, वहाँ के अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित हो।”

इससे पहले मोदी सरकार ने ‘बिजली निर्यात नियमों’ में संशोधन का आदेश दिया था। इसका सीधा असर बांग्लादेश पर असर पड़ने वाला था। आदेश में कहा गया कि अडानी पावर का एक कोयला आधारित पावर प्लांट जो अभी तक केवल बांग्लादेश को बिजली बेच सकता था, वो अब भारत को भी बिजली बेचेगा। वहीं, अमित शाह ने हिंदुओं के खिलाफ हिंसा पर नजर रखने के लिए एक कमेटी गठित की है।

‘बांग्लादेश नेशनल हिंदू ग्रैंड अलायंस’ नामक एक गैर-राजनीतिक हिन्दू संगठन ने वहाँ अल्पसंख्यकों को लेकर बड़ा दावा किया है। अलायंस ने दावा किया है कि पाँच अगस्त को शेख हसीना के नेतृत्व वाली सरकार के पतन के बाद से बांग्लादेश के 48 जिलों में 278 स्थानों पर अल्पसंख्यक समुदाय को हमलों और धमकियों का सामना करना पड़ा है।

धारदार हथियारों के साथ घर में घुसी 30-35 लोगों की भीड़, पहले लूटा फिर बारी-बारी से किया रेप: बांग्लादेश के हिंदू महिला की आपबीती, जमात की ‘गारंटी’ पर घर लौटा परिवार

बांग्लादेश में शेख हसीना सरकार के जाने के बाद वहाँ सतखीरा जिले के ताला में एक 35 वर्षीय हिंदू महिला के साथ गैंगरेप का मामला सामने आया है। कालबेला की रिपोर्ट के अनुसार, यह घटना बीती 5 अगस्त को हुई।

पीड़िता ने बताया कि 5 अगस्त की शाम 7 बजे 30-35 लोगों की भीड़ उसके घर में घुस आई और तोड़फोड़ की। सबके हाथ में धारदार हथियार थे। इस भीड़ ने पहले तो घर के दरवाजे और खिड़कियाँ तोड़कर एक बक्सा लूटा उसके बाद उसको एक गौशाला के पीछे ले गए और वहाँ उसे चुप रहने की धमकी देकर सबने बारी-बारी से उसका बलात्कार किया।

घटना के समय महिला का पति घर पर नहीं था उसका खुलना के अस्पताल में इलाज चल रहा था। जब उसे इस घटना का पता चला तो वो असहाय होकर अपना परिवार लेकर इलाके से चला गया। हालाँकि बाद में जमात के स्थानीय नेताओं डॉ कमाल और अब्दुल के आश्वासन पर पीड़िता, उसका पति और बच्चे 13 अगस्त को वापस लौटे। पूछने पर महिला ने बताया कि वो बलात्कारियों की पहचान नहीं कर पाएगी क्योंकि सबके मुँह पर मास्क थे।

इस मामले में ताला पुलिस स्टेशन के प्रभारी अधिकारी मोमिनुल इस्लाम ने दावा किया कि पुलिस को बलात्कार के मामले की जानकारी नहीं दी गई है। प्रभारी ने कहा पीड़ित परिवार से बातचीत कर उनके नाम और पते की जानकारी लेने के बाद ‘आवश्यक कार्रवाई’ की जाएगी।

इस मामले पर मगुरा यूपी के चेयरमैन गणेश देबनाथ ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “मैंने पीड़ितों के परिवारों और पड़ोसियों से बात की है। जब तक राजनीतिक स्थिति सामान्य नहीं हो जाती, मैं मदद नहीं कर पाऊँगा। इसलिए मैं पत्रकारों से अनुरोध करता हूँ कि वे पीड़ित परिवार के साथ खड़े हों।”

गौरतलब है कि 9 अगस्त को बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई ओइक्या परिषद ने एक रिपोर्ट जारी की थी, जिसमें 5 अगस्त को प्रधानमंत्री शेख हसीना के जाने के बाद देश के 52 जिलों में अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्यों, विशेषकर हिंदुओं पर हमलों की 205 घटनाओं का विवरण दिया गया था।

परिषद ने नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री मुहम्मद यूनुस को इन घटनाओं की जानकारी पत्र लिखकर दी थी। संगठन के अध्यक्ष निर्मल रोसारियो ने कहा, “हमें प्रारंभिक जानकारी मिली है कि अब तक 52 जिलों में अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न की कम से कम 205 घटनाएँ हुई हैं। हम सुरक्षा चाहते हैं क्योंकि हमारा जीवन भयावह स्थिति में है। हम रात में जागकर अपने घरों और मंदिरों की रखवाली कर रहे हैं। हमने अपने जीवन में ऐसी घटनाएँ कभी नहीं देखी हैं। हम माँग करते हैं कि सरकार देश में सांप्रदायिक सद्भाव बहाल करे।”

370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर में पहली बार विधानसभा चुनाव, 3 चरणों में पड़ेंगे वोट: नतीजे हरियाणा के साथ 4 अक्टूबर को होंगे घोषित

चुनाव आयोग ने शुक्रवार (16 अगस्त 2024) को जम्मू-कश्मीर और हरियाणा विधानसभा चुनाव की घोषणा कर दी। हालाँकि, उत्तर प्रदेश और बिहार विधानसभा उपचुनाव की तारीखों का भी ऐलान अभी नहीं किया गया है। जम्मू-कश्मीर में 10 साल बाद विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं। वहाँ आखिर बार विधानसभा चुनाव 2014 में हुए थे।

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से 30 सितंबर 2024 तक जम्मू-कश्मीर में चुनाव कराने का आदेश दिया था। जम्मू-कश्मीर में 5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 हटने के बाद यह पहला विधानसभा चुनाव होगा। मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने कहा, “विधानसभा चुनाव तीन चरणों में 18 सितंबर, 25 सितंबर और 1 अक्टूबर को मतदान होगा। वहीं 4 अक्टूबर को मतगणना होगी।”

बताते चलें कि जम्मू-कश्मीर में अब विधानसभा सीटों की संख्या बढ़कर 90 हो गई है। जम्मू में अब 43 सीटें और कश्मीर में 47 सीटें हैं। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) लिए 24 सीटें रिजर्व रखी गई हैं। हालाँकि, यहाँ चुनाव नहीं होंगे। वहीं, लद्दाख में विधानसभा नहीं है। इस तरह से कुल 114 सीटें में से सिर्फ 90 पर चुनाव कराए जाएँगे।

इससे पहले जम्मू-कश्मीर में कुल 111 सीटें थीं, जिनमें 87 सीटों पर चुनाव होते थे। इनमें से 37 सीटें जम्मू में, 46 सीटें कश्मीर में और 4 सीटें लद्दाख में होती थीं। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के लिए 24 सीटें रखी गई थीं। नए परिसीमन ने जम्मू संभाग के सांबा, कठुआ, राजौरी, किश्तवाड़, डोडा और उधमपुर में एक-एक सीट बढ़ी है। वहीं, कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में एक सीट बढ़ाई गई है।

मुख्य चुनाव आयुक्त कुमार ने कहा, “वादे पूरे करने की सच्ची भावना के तहत, यहाँ चुनाव प्रचार का समय कम है और मौसम भी अनुकूल है। जम्मू-कश्मीर में चुनाव 3 चरणों में होंगे। हमें अमरनाथ यात्रा खत्म होने का इंतजार था।” उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में इस समय 87.09 लाख मतदाता हैं। इनमें से 20 लाख से अधिक मतदाता युवा हैं। 20 अगस्त को फाइनल वोटर लिस्ट जारी होगी।

हरियाणा की कुल 90 सीटों के लिए सिर्फ एक चरण में ही 1 अक्टूबर को होगा। वहीं, जम्मू-कश्मीर विधानसभा के साथ ही यहाँ भी मतों की गणना होगी। हरियाणा को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा, “हरियाणा में 2 करोड़ से ज्यादा मतदाता हैं। 90 में से 73 सीटें सामान्य हैं। यहाँ 20,269 पोलिंग स्टेशन हैं और 150 से ज्यादा मॉडल पोलिंग बूथ होंगे।”

जिस ‘कांतारा’ के लिए ऋषभ शेट्टी ने छोड़ा मांसाहार, प्रसाद खाकर करते रहे शूटिंग… उसी फिल्म के लिए मिला ‘बेस्ट एक्टर’ का नेशनल अवॉर्ड, लोग बोले- सबसे डिजर्विंग

70वें नेशनल फिल्म अवार्ड में विजेताओं के नाम की घोषणा आज कर दी गई। इस लिस्ट में शर्मिला टैगोर, नीना गुप्ता, मनोज बाजपेयी के साथ साउथ हीरो ऋषभ शेट्टी का भी नाम है।

ऋषभ शेट्टी को मुख्य भूमिका में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता की कैटेगरी में अवार्ड मिला है। वहीं नित्या मेनन (तिरुचित्रम्बलम के लिए) और मानसी पारेख (कच्छ एक्सप्रेस के लिए) को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्रियों में हैं। शर्मिला टैगोर और मनोज बाजपेयी अभिनीत ‘गुलमोहर’ ने सर्वश्रेष्ठ हिंदी फिल्म का पुरस्कार जीता।

नेशनल अवार्ड के विजेताओं के नामों की घोषणा के साथ ही कंतारा फिल्म के ऋषभ शेट्टी एक बार फिर चर्चा में आ गए हैं। उन्हें इस बार बेस्ट एक्टर का अवार्ड मिला है। लोग उन्हें बधाई दे रहे हैं और कहा जा रहा है कि जैसी एक्टिंग उन्होंने कंतारा में की है, वो इसको डिजर्व करते थे।

बता दें कि कंतारा फिल्म साल 2022 में आई थी। इस फिल्म का आधार वनवासी हिन्दू संस्कृति में देव की महत्ता दिखाना था। इसका लेखन, निर्देशन करने के साथ ऋषभ शेट्टी ने खुद इसमें मुख्य भूमिका निभाई थी।

ऋषभ की एक्टिंग देखने के बाद तब भी उनकी तारीफ हुई थी, लेकिन जब लोगों को पता चला था कि इस फिल्म के लिए उन्होंने कितनी मेहनत की तो किसी को विश्वास नहीं हुआ था कि आज भी अभिनेता ऐसे किरदारों के पीछे छिपी भावनाओं का सम्मान करते हैं।

बताया जाता है कि ऋषभ ने इस फिल्म में ‘दैव कोला’ वाले दृश्य की शूटिंग से लगभग एक महीने पहले ही उन्होंने मांसाहार का त्याग कर दिया था। इसके अलावा फिल्म में एक दृश्य है, जिसमें ऋषभ शेट्टी की पीठ पर आग वाली छड़ी से वार किया जाता है।

अभिनेता ने बताया था कि फिल्म का छड़ी वाला दृश्य एकदम वास्तविक है, ऐसे में उनकी पीठ पर जले के कई निशान भी आ गए थे। उन्होंने बताया कि हाव-भाव और एक्शन के कारण अभिनय वाला कार्य कठिन था।

ऋषभ शेट्टी ने यह भी जानकारी दी थी ‘दैव कोला’ नृत्य के दौरान उन्हें शरीर पर 50-60 किलो का अतिरिक्त वजन ढोना था। ‘दैव कोला’ अलंकार के बाद वो सिर्फ नारियल पानी लेते थे, और कुछ नहीं।

इस दृश्य को फिल्माने से पहले और इसके बाद उन्हें प्रसाद खाने के लिए दिया जाता था। दिन का अंत होने तक उन्हें काफी थकावट हो जाती थी। उन्होंने बताया कि फिर भी वो काम करते थे, ताकि दूसरे लोगों की ऊर्जा कम न हो।

ऋषभ शेट्टी ने बताया था कि वो शूटिंग के दौरान हुई कठिनाइयों की बात नहीं करते, लेकिन अब मीडिया पूछ रही है तो उन्हें ये सब बताना पड़ रहा है। उन्होंने पीठ पर आग से दागे जाने वाले दृश्य को लेकर कहा कि भले ही ये दर्दनाक था, उनके मन में ये बात थी कि उन्हें ये करना है।

गौरतलब है कि ये फिल्म 14 अक्टबूर 2022 को सिनेमाघरों में आई थी। मात्र 15 दिनों में इस फिल्म ने 275 करोड़ की कमाई कर ली थी। इस फिल्म के लिए हर किसी ने ऋषभ शेट्टी की तारीफ की थी। इस फिल्म को मात्र 16 करोड़ के बजट में बनाया गया था।