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कुवैत से फोन पर ही बीवी को दिया तीन तलाक, फिर पाकिस्तान से ले आया नई बीवी: एयरपोर्ट पर लैंड करते ही दबोचा गया रहमान

राजस्थान में रहमान नाम के एक शख्स को गिरफ्तार किया है, जिसने अपनी बीवी को फोन पर ही तीन तलाक दे दिया था। 35 वर्षीय रहमान को भारत में लैंड करते ही एयरपोर्ट से ही हिरासत में ले लिया गया। उसने अपनी बीवी को कुवैत से ही फोन पर तीन तलाक देकर एक पाकिस्तानी महिला से निकाह रचा लिया था। वो वहाँ पर काम करता था। रहमान की सोशल मीडिया के जरिए मेहविश से मुलाकात हुई थी और सऊदी अरब में दोनों ने निकाह कर लिया था।

मेहविश भी एक टूरिस्ट वीजा पर पिछले महीने राजस्थान के चूरू में आई थी और रहमान के अब्बा-अम्मी के साथ रह रही है। पुलिस ने बताया कि हनुमानगढ़ के भादरा की रहने वाली 29 वर्षीय फरीदा बानो ने ने पिछले महीने ही अपने शौहर रहमान के खिलाफ FIR दर्ज कराई थी। उसने बताया था कि न सिर्फ उसे फोन पर तीन तलाक दिया गया, बल्कि दहेज़ के लिए भी प्रताड़ित किया जाता था। वो कुवैत से जैसे ही जयपुर एयरपोर्ट पर उतरा, हनुमानगढ़ पुलिस ने उसे दबोच लिया।

वहाँ गिरफ्तार करने से पहले उससे शुरुआती पूछताछ भी की गई। वहाँ से उसे पुलिस थाने लाया गया, फिर अगले दिन गिरफ़्तारी की कार्रवाई की गई। रहमान और फरीदा बानो का निकाह 2011 में हुआ था। इन दोनों का एक बेटा और एक बेटी भी है। रहमान कुवैत में ट्रांसपोर्ट सेक्टर में काम करता था। जब वो मेहविश को चूरू में लेकर आया, तब फरीदा बानो ने उसके खिलाफ FIR दर्ज कराई। मेहविश अपने अम्मी-अब्बू के साथ मायने में ही रह रही है।

बता दें कि भारत में मोदी सरकार द्वारा कानून बनाए जाने के बाद तीन बार ‘तलाक’ शब्द कह कर तलाक देना असंवैधानिक है। पुलिस ने बताया कि रहमान और उसकी पहली बीवी फरीदा बानो के बीच पहले से ही अनबन थी, आगे की पूछताछ में और बातें पता चलेंगी। मेहविश फ़िलहाल 45 दिनों के टूरिस्ट वीजा पर भारत में ही है। बता दें कि तीन तलाक के खिलाफ कानून बनने के बाद इससे पीड़ित कई महिलाओं को न्याय मिला है, पहले शरिया के तहत मुस्लिम पुरुष बीवी को बिना कागज़ी प्रक्रिया के छोड़ सकते थे।

जम्मू में सेना ने 4 आतंकियों को मार गिराया, कैप्टन दीपक सिंह बलिदान: अमेरिकी हथियार बरामद, सेनाध्यक्ष और NSA के साथ रक्षा मंत्री की बैठक

स्वतंत्रता से एक दिन पहले यानी 14 अगस्त 2024 को जम्मू-कश्मीर के डोडा में सेना ने चार आतंकियों को मार गिराया है। हालाँकि, इस दौरान सेना के कैप्टन दीपक सिंह भी वीरगति को प्राप्त हो गए। ऑपरेशन के दौरान एक स्थानीय नागरिक के भी घायल होने की खबर है। खबर लिखे जाने तक सेना का ऑपरेशन जारी था। इस बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने NSA और सेना प्रमुख से मुलाकात की है।

डोडा में असार फॉरेस्ट एरिया में चल रहे एनकाउंटर को कैप्टन दीपक सिंह लीड कर रहे थे। वे 48 राष्ट्रीय राइफल से हैं। टीम ने चार आतंकियों को मार गिराया है। उनके पास वअमेरिकी एम-4 राइफल, एके-47 राइफल और तीन बैग में भारी मात्रा में विस्फोटक मिले हैं। बता दें कि 16 जुलाई 2024 को भी डोडा के डेसा इलाके में मुठभेड़ के दौरान एक कैप्टन समेत 5 जवान बलिदान हो गए थे।

अधिकारियों ने बताया कि सेना को जानकारी मिली कि शिवगढ़-अस्सार क्षेत्र में कुछ विदेशी आतंकी छिपे हुए हैं। इसके बाद सेना ने सर्च ऑपरेशन शुरू किया। इस बीच घने जंगलों के बीच एनकाउंटर शुरू हो गया। इसी दौरान आतंकियों की गोली कैप्टन दीपक सिंह को जा लगी। उनके दाहिने सीने में तीन गोली लगी थी। उन्हें तुरंत सैन्य अस्पताल लाया गया, जहाँ उन्होंने अंतिम साँसें लीं।

दीपक सिंह के बलिदान पर व्हाइट नाइट कॉर्प्स ने सोशल मीडिया पर लिखा, “White Knight Corps के सभी अधिकारी बहादुर कैप्टन दीपक सिंह के सर्वोच्च #बलिदान को सलाम करते हैं, जिन्होंने अपनी चोटों के कारण दम तोड़ दिया। White Knight Corps गहरी संवेदना व्यक्त करता है और इस दुख की घड़ी में शोक संतप्त परिवार के साथ खड़ा है।” नॉदर्न कमांड ने भी दुख व्यक्त किया है।

जम्मू-कश्मीर की घटना को लेकर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दिल्ली में बैठक बुलाई है। इस बैठक में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल, थलसेना के प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी और सुरक्षा एजेंसियों के प्रमुख शामिल हुए। बैठक में किन मुद्दों पर चर्चा हुई है, इसकी जानकारी अभी तक सामने नहीं आई है।

बताते चलें कि स्वतंत्रता दिवस से पहले कई राज्यों में अलर्ट जारी किया गया है। वहीं, जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। जम्मू संभाग में सेना के लगभग 3000 जवानों और सीमा सुरक्षा बल (BSF) के लगभग 2000 जवानों को तैनात किया गया है। वहीं, असम राइफल्स के भी लभग 2000 जवान तैनात हैं।

दरिंदों ने शरीर को तड़पा कर मारा, ‘आत्मा’ को तड़पा रही TMC की महिला सांसदों की चुप्पी: सवाल पूछेंगे तो होंगे ब्लॉक, संदेशखली और चोपरा के बाद अब कोलकाता देखिए

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता स्थित RG Kar मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में एक 31 वर्षीय महिला डॉक्टर के साथ बलात्कार की घटना सामने आई, जिस पर पूरा देश उबल रहा है। पश्चिम बंगाल में तो मेडिकल सेवाएँ ही ठप्प हैं, क्योंकि डॉक्टर व नर्सिंग कर्मचारी हड़ताल पर हैं। कैंडल मार्च निकाले जा रहे हैं, विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं और सोशल मीडिया पर हैशटैग चलाए जा रहे हैं। लेकिन, मीडिया और सेलेब्रिटीज का एक बड़ा हिस्सा इस घटना पर चुप्पी साधे हुए हैं।

खासकर महिला जनप्रतिनिधियों से ये अपेक्षा की जाती है कि वो महिलाओं के उत्पीड़न से जुड़े मुद्दों पर मुखर होंगी, लेकिन पश्चिम बंगाल में इसका उलटा हो रहा है। सत्ताधारी दल की मुखिया और राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद एक महिला हैं। TMC के 29 सांसदों में से 11 महिलाएँ हैं, जिसमें अक्सर विवादों में रहने वाली महुआ मोइत्रा भी शामिल हैं। इस मुद्दे पर आवाज़ उठाना या न्याय दिलाने की कोशिश करना तो दूर की बात है, महुआ मोइत्रा उलटे सवाल पूछने वालों को सोशल मीडिया पर ब्लॉक कर रही हैं।

उदाहरण के लिए पत्रकार अजीत अंजुम को ले लीजिए। उसी गिरोह के पत्रकार हैं, भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ वीडियो बना-बना कर YouTube से मोटी कमाई करते हैं। 62.70 लाख सब्सक्राइबर्स वाले अजीत अंजुम ने जब कोलकाता की इस घटना को लेकर महुआ मोइत्रा से ‘X’ पर एक सवाल पूछा, जिसके बाद कृष्णानगर से तृणमूल सांसद ने उन्हें ब्लॉक कर दिया। इसके बाद अजीत अंजुम सवाल दागने लगे कि आप एक सवाल नहीं सुन सकतीं, आपको सिर्फ पूछना आता है, अभिव्यक्ति की आज़ादी पर सिर्फ प्रवचन देना आता है?

महुआ मोइत्रा पर दुबई स्थित कारोबारी दर्शन हीरानंदानी से महँगे तोहफे व कैश लेकर अपने संसद वाले आईडी-पासवर्ड का गलत इस्तेमाल कर के अडानी के खिलाफ सवाल पूछने का आरोप लगा, जिसके बाद उनकी संसद सदस्यता भी चली गई थी। अभी जब हिंडेनबर्ग ने अडानी और सेबी के खिलाफ रिपोर्ट प्रकाशित किया, तब भी महुआ मोइत्रा ने जम कर एक स्वदेशी कंपनी और भारतीय नियामक संस्था के खिलाफ अभियान चलाया। वहीं उनके ही राज्य में हुई एक क्रूर घटना पर वो चुप रहीं।

एक ऐसी जघन्य घटना, जिसमें मृतक महिला के शरीर में 150 मिलीग्राम सीमेन पाया गया। परिजनों का कहना है कि इस हत्या को आत्महत्या साबित करने की कोशिश की गई थी। आरोप है कि सबूत मिटाने के लिए वहाँ कंस्ट्रक्शन का काम शुरू कर दिया गया है। हाईकोर्ट भी इतना बिफर गया कि उसने प्रिंसिपल संदीप घोष को छुट्टी पर जाने के लिए कह दिया। परिजन जब खबर सुन कर अस्पताल पहुँचे तो पीड़िता के दोनों पाँव 90 डिग्री के हिसाब से फैले हुए थे, उसकी आँखों से खून बह रहा था। पाँव ही नहीं बल्कि पेट, होठ और उँगलियों पर भी जख्म के निशान थे।

कुछ इस तरह से सामूहिक बलात्कार किया गया, जैसे अपराधी सनकी किस्म के रहे हों। खैर, हर बलात्कारी सनकी ही होता है क्योंकि वो समाज का कभी हो ही नहीं सकता। पीड़िता के गुप्तांगों के साथ भी ज्यादती की गई थी। घटना कॉलेज से सेमिनार हॉल की है, जहाँ महिला रेजिडेंट डॉक्टर ने अपने साथियों के साथ डिनर किया था। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से पता चला कि 2 बार गला घोंटा गया था। CBI इस मामले की जाँच कर रही है, क्योंकि कोलकाता पुलिस पर ही गड़बड़ी के आरोप लग रहे हैं।

कई डॉक्टर ही कह रहे हैं कि ये अब तक के सबसे जघन्य अपराधों में से एक है, शायद ही पीड़िता के शरीर का कोई हिस्सा था जिसे छोड़ा गया। नाक से भी खून बह रहा था, ललाट पर भी जख्म थे। इस मामले में एक आरोपित को गिरफ्तार किया गया है, लेकिन मेडिकल विशेषज्ञों का कहना है कि ये अकेले एक व्यक्ति का काम नहीं है। गिरफ्तार आरोपित कोलकाता पुलिस का ही सिविल वॉलंटियर था और नजदीकी थाने में तैनात था। पीड़िता पिछले 2 वर्षों से वही काम कर रही थी, घटना के पहले उसने 36 घंटे की ड्यूटी की थी।

ऐसी घृणित घटना पर सवाल पूछने पर सत्ताधारी दल की ऐसी महिला सांसद ब्लॉक कर दे रही हैं, जो खुद को संसद से लेकर सड़क तक ‘सरकार से कड़े सवाल पूछने वाली’ बता कर पेश करती रही है। कभी वो भारत में लोकतंत्र न होने का दावा करती है तो कभी अंबानी-अडानी को प्राथमिकता दिए जाने का आरोप लगाती है। यूपी के हाथरस में एक घटना पर पूरे देश की मेनस्ट्रीम मीडिया वहाँ पहुँच गई थी, अब न तो वैसी रिपोर्टिंग हो रही है और न ही मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का इस्तीफा माँगा जा रहा है।

पश्चिम बंगाल के लिए ये चीजें नई बात नहीं है। हाल ही में हमने देखा कि कैसे ताजेमुल शेख अपनी ‘शरिया अदालत’ चला रहा था और इसके तहत वो किसी महिला को जमीन पर पटक कर पीट रहा था तो किसी महिला को बाँध कर सड़कों पर परेड निकाल रहा था। चोपरा के TMC विधायक हमीदुल रहमान ने पश्चिम बंगाल को ‘मुस्लिम राष्ट्र’ बताते हुए इस कृत्य का बचाव किया। हमने देखा था कि कैसे ED पर हमला करने वाले शाहजहाँ शेख और उसके गुर्गों ने संदेशखाली में जनजातीय समाज की महिलाओं का यौन शोषण किया और उसे बचाने के लिए राज्य सरकार को सुप्रीम कोर्ट की फटकार भी लगी।

एक तरफ मोदी सरकार ने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पारित कर के ये सुनिश्चित किया है कि भारत के संसदीय क्षेत्रों के पुनर्गठन के बाद एक तिहाई सांसद महिलाएँ हों, वहीं दूसरी तरफ TMC की 11 महिला सांसद चुप हैं क्योंकि बलात्कार की ये घटना उनकी पार्टी के राज में हुई है। जम्मू कश्मीर के कठुआ और उत्तर प्रदेश के हाथरस की घटना पर जिन सेलेब्रिटीज को भारतीय होने में शर्म आ रही थी, वो भी चुप हैं। ये कब बोलेंगे पता नहीं, लेकिन हाँ, ब्लॉकिंग में ये अभी मास्टर बने हुए हैं।

झारखंड में सावन में निकाली जा रही थी कलश यात्रा, कट्टरपंथी मुस्लिमों ने कर दिया हमला: BJP नेता बाबूलाल मरांडी बोले- हिंदुओं के लिए काल है हेमंत सरकार

झारखंड के गढ़वा में सावन के सोमवारी के अवसर पर निकाली गई कलश यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं पर मुस्लिमों ने हमला कर दिया है। इस हमले में सात से अधिक लोग घायल हो गए हैं। इस मामले में सात लोगों के खिलाफ नामजद और 40-50 अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है। भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी ने कहा कि हेमंत सोरेन की सरकार हिंदुओं के लिए काल बन गई है।

मामला गढ़वा के मेराल प्रखंड स्थित चामा गाँव का है। यहाँ सावन के पवित्र महीने की सोमवारी (12 अगस्त 2024) के अवसर पर कलश यात्रा निकाली गई थी। इस कलश यात्रा में बड़ी संख्या में महिलाएँ, बच्चे और युवा शामिल थे। दुलदुलवा गाँव से कलश यात्रा दानरो नदी पेशका के लिए निकली थी। कलश यात्रा में जल भरकर श्रद्धालु ‘जय श्रीराम’ एवं ‘जय भोलेनाथ’ के उद्घोष के साथ लौट रहे थे।

कलश यात्रा चामा गाँव के मुस्लिम समुदाय के टोले से होकर गुजर रही थी। कलश यात्रा जब दिलदार अंसारी के घर के पास पहुँची तो लगभग पचास की संख्या में मुस्लिमों ने लाठी-डंडे और कुल्हाड़ी उन पर हमला कर दिया। इस हमले में सात लोग घायल हो गए हैं। हमलावरों में दिलदार अंसारी, लमगीर अंसारी, परवाना अंसारी, इमरान अंसारी, हबीब अंसारी, मुन्ना अंसारी के साथ लगभग 50 अज्ञात लोग भी थे।

घटना की सूचना मिलते ही मौके पर पुलिस बल पहुँचा और स्थिति को काबू किया और यात्रा को पूरा करवाया। इस घटना को लेकर ग्रामीणों के आवेदन दिया। इसके आधार पर पुलिस ने नामजद एवं अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज किया है। ग्रामीणों का आरोप है कि फरवरी 2024 में शिवरात्रि के दिन इसी स्थान पर कुछ लोगों ने श्रद्धालुओं के साथ मारपीट की थी।

इस घटना को लेकर भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी ने राज्य हेमंत सोरेन की सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि हेमंत सोरेन की सरकार झारखंड के हिंदुओं के लिए काल बन गई है। उन्होंने कहा कि वोटबैंक की राजनीति के चलते हेमंत सरकार में ऐसी घटनाओं पर कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है। सिर्फ बांग्लादेश भर में नहीं, बल्कि झारखंड में भी हिंदू खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।

सोशल मीडिया साइट X (पूर्व में ट्विटर) पर बाबूलाल मरांडी ने लिखा, “गढ़वा में हिंदू परिवारों को निशाना बनाया जा रहा है, कभी स्कूल में सरस्वती वंदना करने पर रोक लगाई जाती है तो कभी कलश यात्रा पर हमला किया जाता है। एक महीने के अंदर ही यह दूसरी घटना है, जहाँ हिन्दू समाज पर, हिंदू समाज के रीति रिवाजों पर हमला किया गया है।”

झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल ने आगे कहा, “झारखंड में हिन्दू समाज पर हमले की घटनाएँ कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। साजिश के तहत ऐसी घटनाओं को हेमंत सरकार के संरक्षण में अंजाम दिया जा रहा है। हेमंत सरकार द्वारा एक विशेष धर्म को संरक्षण देकर हिंदू धर्म का संहार करने का कुत्सित प्रयास किया जा रहा है।”

शफी परम्बिल जीतकर बन गया लोकसभा का सांसद, पर किसने फैलाई हिंदुओं के खिलाफ घृणा यह आज भी गुत्थी: जानिए क्या है केरल का ‘काफिर’ स्क्रीनशॉट केस

देश में लोकसभा चुनाव समाप्त हुए 2-3 माह से ज्यादा बीत गए हैं लेकिन केरल के वडकारा लोकसभा क्षेत्र में शुरू हुआ ‘काफिर’ पोस्ट वाला विवाद अभी तक नहीं थमा है। सीपीआईएम और कॉन्ग्रेस एक दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं। सीपीआईएम का कहना है कि कॉन्ग्रेस ने मजहब के नाम पर वोट माँगा जबकि कॉन्ग्रेस का कहना है कि सीपीआईएम ने चुनावों में ध्रुवीकरण के लिए ऐसा खुद की। अब पुलिस को जाँच करते हुए 100 दिन से ज्यादा बीत गए हैं लेकिन आरोपित का पता नहीं चल पा रहा है। पुलिस ने इस केस में मेटा तक को आरोपित बना दिया है। फिर भी कोई सुराग नहीं मिला। बार-बार सारी जाँच उन्हीं लोगों पर आकर रुक जाती है जिन्होंने इस मामले में आरोप लगाए थे

‘काफिर’ स्क्रीनशॉट मामला क्या है?

चुनावों के बीच वडकारा में वायरल हुए काफिर वाले स्क्रीनशॉट में दो प्रत्याशियों के नाम थे। एक कॉन्ग्रेस के शफी परम्बिल की (जो अब जीतकर सांसद बन चुके हैं) और दूसरी कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया की प्रत्याशी ‘के के शैलजा’ का। सामान्य प्रचार करना हर प्रत्याशी के लिए उस समय आम था, लेकिन इस पोस्ट में साफ-साफ तौर पर मजहब का मुद्दा उठाया गया था इसलिए इस पर सबका ध्यान गया। पोस्ट में लिखा था “शफी एक मुस्लिम है जो दिन में 5 बार नमाज पढ़ता है और दूसरी महिला काफिर है। वोट देने से पहले जरूर सोचना कि किसे वोट देना चाहिए। वोट हमारे अपनों के लिए करिए।”

कैसे खुला काफिर स्क्रीनशॉट केस?

ऑन मनोरमा की रिपोर्ट के मुताबिक, इस पोस्ट को लेकर ये दिखाते हुए कि कैसे मजहब के नाम पर वोट माँगा जा रहा है, 25 अप्रैल को CPIM के यूथ विंग डीवाईएफआई ब्लॉक कमेटी के अध्यक्ष रिबेश आरएस ने इसे ‘रेड एनकाउंटर’ ग्रुप में डाला। इसके बाद अमल राम नाम के शख्स ने इसे उठाकर रेड बटालियन नाम के ग्रुप में डाला। फिर मनीष नाम के लड़के ने इसका स्क्रीनशॉट लिया और दोपहर 3 बजे स्क्रीनशॉट को 1 लाख फॉलोवर वाले ‘अंबादिमुक्कु सखक्कल’ फेसबुक पेज पर प्रसारित किया गया।

पेज पर स्क्रीनशॉट पोस्ट करने के बाद मनीष को कुछ शंका हुई तो कुछ देर बाद उन्होंने उसे डिलीट कर दिया, लेकिन बाद में पता चला कि तब तक इसे कई नेता उठा चुके थे। पोराली शाहजी ने इसे अपने 8 लाख फॉलोवर वाले अकॉउंट से शेयर किया। इसके बाद सीपीएम स्टेट कमेटी की सदस्य एमएलए केके ललिता ने भी इसे साझा किया। धीरे-धीरे ये हर जगह फैल गया। इस बीच सीपीआई (एम) के नेताओं ने इस पोस्ट का स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए हर जगह फैलाया कि कैसे शफी के मजहब के नाम पर कॉन्ग्रेस राज्य में वोट माँग रही है। इस दौरान IUML और कॉन्ग्रेस दोनों पार्टियों की आलोचना हुई। बताया गया कि ये पोस्ट मुस्लिम स्टूडेंट्स फेडरेशन के कोझिकोड जिला सचिव मुहम्मद खासिम पीके द्वारा ‘यूथ लीग नेदुम्ब्रमन्ना’ व्हॉट्सएप ग्रुप में फैलाया गया।

पोस्ट के बाद हुई तीन शिकायतें

आरोप के बाद IUML और कॉन्ग्रेस ने तुरंत इसका विरोध किया और कहा कि ये सीपीएम ने खुद किया है। उनका उद्देश्य मतदाताओं का ध्रुवीकरण करना है। खासिम का कहना था कि उसने तो खुद पहली बार ये संदेश 25 अप्रैल को अपने नाम से सीपीएम समर्थक फेसबुक पेज पर प्रसारित होते देखा जिसके बाद उन्होंने इस मामले में वडकारा थाने में जाकर शिकायत दी।

हालाँकि तब तक इस मामले में सीपीएम नेता सी भास्करन शिकायक दर्ज करवा चुके थे। केस (410/2024) में उन्होंने खासिम के खिलाफ समाज में नफरत फैलाने का आरोप लगाया था। इसमें आईपीसी की धारा 153 ए के तहत केस दायर करवाया था। इसके बाद एक अलग मामला 25 अप्रैल की देर रात निदुंबरमन्ना यूथ लीग शाखा समिति के महासचिव इस्माइल एमटी की शिकायत पर दर्ज किया गया, जिन्होंने पुलिस को बताया कि जिस व्हॉट्सएप को लेकर बताया जा रहा है कि पोस्ट वायरल हुआ वो तो असल में है ही नहीं।

कैसे शुरू हुई कार्रवाई

इस तरह इस मामले में तीन अलग-अलग शिकायतें सामने आईं। पुलिस ने अपनी जाँच शुरू की लेकिन कई दिन बीत जाने के बाद भी इसमें कोई कार्रवाई नहीं हुई। खासिम ने इसके बाद उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया और माँग की कि इस केस में पुलिस को स्वतंत्र और निष्पक्ष जाँच करने के निर्देश दिए जाएँ। कोर्ट ने पुलिस को निर्देश दिए कि वो 31 मई तक प्रोग्रेस रिपोर्ट दें। पुलिस ने इस बाबत 10 जून को एक रिपोर्ट दी जिसमें बताया गया कि उनकी जाँच में खासिम का नाम कहीं से कहीं नहीं मिल रहा कि उसने ऐसा पोस्ट पोस्ट बनाया उलटा उनकी जाँच घूम-फिकर सिर्फ कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया के नेताओं के फोन नंबरों पर ही रुक रही है।

जाँच के दौरान पुलिस ने 28 जून को फोन नंबरों के जरिए ‘अंबादिमुक्क साखक्कल कन्नूर’ के दो एडमिन की पहचान की। वे मनीष और सजीव थे। 29 जून को पुलिस ने मनीष का बयान लिया, जिसने बताया कि उसे ‘रेड बटालियन’ नाम के एक व्हाट्सएप ग्रुप से स्क्रीनशॉट मिला था। मनीष ने पुलिस को बताया कि उसने एक घंटे के भीतर ही पोस्ट डिलीट कर दिया क्योंकि
उसे स्क्रीनशॉट की प्रामाणिकता पर संदेह हो गया था। (कुछ हफ़्तों बाद, उसने पेज भी निष्क्रिय कर दिया)। हालाँकि फिर भी पुलिस ने मनीष के iPhone X की जाँच की और उसके बयान की पुष्टि की।

30 जून को पुलिस ने अमल राम का बयान लिया। उसने पुलिस को बताया कि उसे रेड एनकाउंटर नाम के दूसरे वॉट्सऐप ग्रुप से स्क्रीनशॉट मिला था। अमल के iPhone 13
Pro की भी जाँच की गई। स्क्रीनशॉट को रिबेश ने 25 अप्रैल को दोपहर 2.13 बजे पोस्ट किया था। पुलिस ने रिबेश के रेडमी नोट 7 फोन की जाँच की, लेकिन यह पता नहीं लगा
पाई कि उसे स्क्रीनशॉट कहाँ से मिला। पुलिस ने उससे जब सवाल किए किए तो उसने जवाब बस यही दिया कि उसे इसका स्रोत नहीं पता।

काफिर स्क्रीनशॉट मामले में आरोपित कौन?

बता दें कि पुलिस को इस मामले की जाँच करते-करते 2-3 महीने बीत गए हैं लेकिन ये अभी तक ये नहीं पता चला है कि किसने चुनाव के माहौल में सांप्रदायिकता भड़काने के लिए ये पोस्ट बनाया था। पुलिस इस मामले में ‘मेटा’ कंपनी को भी आरोपित बना चुकी है कि वो पता नहीं लगा पा रहे सांप्रदायिक पोस्ट किसने साझा किया।

13 अगस्त को भी इस मामले में कोर्ट में सुनवाई हुई। वडकारा स्टेशन हाउस ऑफिसर (एसएचओ) ने कहा कि पुलिस ने डीवाईएफआई वडकारा ब्लॉक कमेटी के अध्यक्ष रिबेश आरएस का मोबाइल फोन फॉरेंसिक जाँच के लिए जब्त कर लिया है, क्योंकि उन्हें कथित रूप से मनगढ़ंत संदेश फैलाने वाले शुरुआती लोगों में से एक पाया गया है।

पुलिस ने पोराली शाजी के एडमिन वहाब नामक व्यक्ति का फोन भी जब्त कर लिया है जो एक गुमनाम लेकिन मुखर रूप से सीपीएम समर्थक फेसबुक पेज है। अभी तक बताया जा रहा है कि पुलिस ने चार सीपीएम समर्थकों का मामले में बयान दर्ज किया। वहीं खासिम ने कहा कि पुलिस को रिबेश को आरोपित बनाना चाहिए था क्योंकि क्यों उसने स्क्रीनशॉट का स्रोत बताने से इनकार कर दिया था। इसके अलावा खासिम के वकील व आईयूएमएल के राज्य महासचिव मोहम्मद शाह ने भी कहा कि जब पता चल गया है कि 153ए के तहत अपराध हुआ तो इस मामले में एफआईआर होनी चाहिए।

जिनके बनाए रामलला अयोध्या के भव्य राम मंदिर में विराजमान, उन्हें वीजा देने से अमेरिका ने किया इनकार: विश्व कन्नड़ सम्मेलन में मूर्तिकार अरुण योगीराज को होना था शामिल

अयोध्या में भगवान राम की जन्मभूमि पर बने भव्य मंदिर में स्थापित रामलला की मूर्ति बनाकर पूरी दुनिया को हैरान कर देने वाले अरुण योगीराज को अमेरिका ने वीजा देने से मना कर दिया है। अमेरिका में वो एक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए जाने वाले थे, लेकिन अमेरिका ने उनके वीजा अप्लिकेशन को रिजेक्ट कर दिया है। अरुण योगीराज को विश्व कन्नड़ सम्मेलन में शामिल होना था।

रिपब्लिक की रिपोर्ट के मुताबिक, अयोध्या के राम जन्मभूमि मंदिर में रामलला की मूर्ति बनाने वाले मूर्तिकार अरुण योगीराज को अमेरिका ने वीजा से इनकार कर दिया है। अरुण योगीराज के पारिवारिक सूत्रों ने रिपब्लिक कन्नड़ को इसकी पुष्टि की है। योगीराज 30 अगस्त से 1 सितंबर 2024 तक रिचमंड, वर्जीनिया में ग्रेटर रिचमंड कन्वेंशन सेंटर में होने वाले 12वें AKKA विश्व कन्नड़ सम्मेलन में हिस्सा लेने वाले थे। हालाँकि अमेरिका द्वारा वीजा देने से इनकार करने के बाद कार्यक्रम के आयोजकों को झटका लगा है।

अरुण योगीराज का वीजा अप्लिकेशन रिजेक्ट होने के बाद उनके परिजनों ने नाराजगी जताई है। परिजनों का कहना है कि यह उनकी अंतरराष्ट्रीय मान्यता और हाल ही में वैश्विक प्रदर्शन के बावजूद हुआ है। मूर्तिकार अरुण योगीराज के परिजनों का कहना है कि उनकी पत्नी पहले भी अमेरिका की यात्रा कर चुकी हैं, जिससे इनकार करना अप्रत्याशित है, क्योंकि सभी व्यवस्थाएँ पहले से ही मौजूद थीं। उनका एकमात्र उद्देश्य कार्यक्रम में शामिल होना और तुरंत वापस लौटना था।

परिजनों का कहना है कि अरुण योगीराज इस यात्रा का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे, क्योंकि ये अयोध्या के कार्यक्रम को पूरा करने के बाद ये उनकी पहली छुट्टी होती।

बताया जा रहा है कि राम लला की मूर्ति बनाने के लिए मशहूर मूर्तिकार अरुण योगीराज के वीजा आवेदन को अस्वीकार करने के लिए अमेरिका ने कोई आधिकारिक कारण भी नहीं बताया है। योगीराज ने रिचमंड, वर्जीनिया में एसोसिएशन ऑफ कन्नड़ कूटस ऑफ अमेरिका द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में भाग लेने के लिए लगभग दो महीने पहले वीजा के लिए आवेदन किया था। हालाँकि, 10 अगस्त को बिना किसी कारण का हवाला दिए उनके आवेदन को कैंसल कर दिया गया था।

‘भं$यों, यहाँ रहना है तो मुस्लिमों की गुलामी करनी होगी’: घर में घुस दलित महिला को गाली, बताया – नगपालिका चेयरमैन आबिद अली ने दी बांग्लादेश बना देने की धमकी

उत्तर प्रदेश के बरेली स्थित आँवला में नगरपालिका अध्यक्ष सैय्यद आबिद अली पर एक सफाईकर्मी की पत्नी को धमकी देने का आरोप लगा है। साथ ही उसने भारत को बांग्लादेश बनाने की भी धमकी दी। सफाई कर्मचारी की पत्नी ने अपनी पीड़ा बताते हुए ये भी कहा कि उन्हें जातिसूचक गाली दी गई है। सोनी नामक महिला ने कहा कि हमारे घर के सामने मुस्लिमों के फल के ठेले लगते हैं, जिन्हें हटाने के लिए दलित समूह चेयरमैन के पास शिकायत लेकर गया था।

पीड़ित महिला के अनुसार, चेयरमैन सैय्यद आबिद अली ने कहा, “भं$यो, दब कर रहना है तो यहाँ रहो वरना यहाँ भी बांग्लादेश बना देंगे। तुमलोग नीच जाति के हो।” पीड़ित महिला ने आगे बताया कि उनके पति को भी सेवा से बरख़ास्त करने की धमकी दी गई। चेयरमैन ने ये भी कहा कि घर में घुस कर मारेंगे। महिला ने बताया कि मुस्लिम लोग उनसे पाँव छुवाते हैं, उनके घरों के सामने ठेले लगाते हैं। दलितों का कहना है कि अगर उनकी सुनवाई नहीं हुई तो उन्हें मजबूरन पलायन करना पड़ेगा।

पीड़ित महिला सोनी ने कहा कि हम सब बहुत परेशान हैं। इस मामले में किला बजरिया अड्डा के रहने वाले सफाई कर्मचारी मायाराम की पत्नी सोनी ने मंगलवार (13 अगस्त, 2024) को आँवला थाना के प्रभारी निरीक्षक को शिकायती पत्र देते हुए कहा है कि मुस्लिम लोग फल का ठेला लगा कर घर का रास्ता बंद कर देते हैं। उन्होंने लिखा कि वाहिद अली का बेटा सैय्यद आबिद अली अपने लोगों को लेकर आया और कहने लगा कि तुमलोग मुस्लिमों की गुलामी करो वरना तुम्हारे घरों को नेस्तनाबूत कर देंगे।

शिकायत में ये भी बताया गया है कि मुस्लिमों को इनके घरों में घुसा कर दंगे कराने की धमकी दी गई, इस दौरान गाँव के ही रजनीश तिवारी और अमन तिवारी ने आकर बीच-बचाव किया। इन दोनों ने मैं को समझाया, लेकिन इनके सामने भी ये गाली बकते रहे और घर तुड़वाने की धमकी देते रहे। कानूनी कार्यवाही की माँग करते हुए बताया गया है कि परिवार भयभीत है। इस दौरान 2012 की किसी घटना की भी आरोपित याद दिला रहे थे और उसे दोहराने की धमकी दे रहे थे।

आबिद अली के बारे में बता दें कि वो समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी का हिस्सा रह चुका है। मार्च 2024 में सपा छोड़ कर बसपा में शामिल होते हुए उसने कहा था कि सपा ने केवल मुस्लिमों को वोट बैंक समझ कर ठगा है। उन्होंने सपा में गुटबाजी हावी होने की बात भी कही थी। बसपा ने उसे आँवला लोकसभा क्षेत्र से प्रत्याशी भी बनाया था लेकिन उसकी जमानत जब्त हो गई थी और उसे 9% वोट भी नहीं मिल पाए थे।

तमिलनाडु के भगवती अम्मा मंदिर में 100+ दलित परिवारों ने की पूजा-अर्चना, वर्षों से प्रवेश नहीं करने दे रहे थे पिछड़े: पुजारी के लिए सरकार से करेंगे माँग

तमिलनाडु में दलितों के वर्षों के संघर्ष के बाद आखिरकार मंदिर में प्रवेश की अनुमति मिल गई है। सोमवार (12 अगस्त 2024) की रात को 100 से ज़्यादा दलित परिवारों ने तमिलनाडु के पुडुकोट्टई के कुलवाईपट्टी गाँव में स्थित भगवती अम्मा मंदिर में प्रवेश किया। पिछड़े वर्ग के लोगों ने दलितों को इस मंदिर में प्रवेश से वंचित कर दिया था।

दरअसल, पिछले साल अक्टूबर में आयोजित एक शांति बैठक और स्थानीय अधिकारियों के प्रयासों के बाद यह सफलता मिली है। 12 अगस्त को दलित समुदाय के 100 से ज्यादा लोगों ने ना सिर्फ इस प्रसिद्ध मंदिर में प्रवेश किया, बल्कि पोंगल पकाने और करगम ले जाने सहित कई अनुष्ठान भी किए। इस मंदिर में प्रवेश के दलित समुदाय के लोग वर्षों से माँग कर रहे थे।

दलित समुदाय के एक सदस्य शक्तियारथिनम ने कहा, “कई सालों के संघर्ष के बाद हमने आखिरकार पूजा करने के अपने अधिकार का प्रयोग किया। हालाँकि 7 साल पहले मंदिर के अभिषेक के दौरान हमसे सलाह ली गई थी, लेकिन जातिगत पूर्वाग्रह के कारण हमारे योगदान को अस्वीकार कर दिया गया था।”

एक अन्य ग्रामीण इलियाराजा ने बताया कि दलितों के प्रवेश के दिन पुजारी आदि अनुपस्थित थे। उन्होंने कहा, “हम सरकार के हिंदू धार्मिक एवं धर्मार्थ बंदोबस्ती विभाग से एक पुजारी की माँग करेंगे, जो दलितों की उपस्थिति का सम्मान करता हो।” दरअसल, मद्रास हाई कोर्ट के हाल के आदेश के बाद दलितों ने अरनथांगी के पास कामाक्षी अम्मा मंदिर में मंडागापडी अनुष्ठान में भाग लिया।

बता दें कि पिछले साल जनवरी में दलितों के करीब 300 पुरुष, महिलाएँ और बच्चे को पूरी पुलिस सुरक्षा के साथ मंदिर में प्रवेश किया गया। इन्हें मंदिर में नहीं घुसने दिया जाता है। तिरुवन्नामलाई के थंडारामपट्टू में मुथु मरियम्मन मंदिर हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती बोर्ड के अंतर्गत आता है। दलित परिवारों को पिछले 80 वर्षों से मंदिर में प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई थी।

ओडिशा के मेडिकल कॉलेज में 2 महिला मरीजों से डॉक्टर ने किया रेप, टेस्ट के लिए बुलाया था: पिटाई के बाद ICU में कराना पड़ा भर्ती

ओडिशा के कटक में स्थित मशहूर एससीबी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में एक वरिष्ठ डॉक्टर ने जाँच के बहाने 2 महिला मरीजों के साथ रेप किया। उसे कटक की मंगलाबाग पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। रेप का मामला सामने आने के बाद उस रेजिडेंट डॉक्टर को मरीजों के परिजनों ने जमकर पीटा, जिसके बाद उसे आईसीयू में भर्ती कराना पड़ा था। हैरानी की बात ये है कि जिन महिला मरीजों का रेप किया गया, उसकी रिश्तेदार उसी मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई कर रही है।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, आरोपित रेजिडेंट डॉक्टर का नाम दिलबाग सिंह ठाकुर है। वो एमपी के भोपाल का रहने वाला है। ये घटना रविवार (11 अगस्त 2024) की है। जब उसने इकोकार्डियोग्राम टेस्ट करने के लिए महिलाओं को अपने पास बुलाया। ये टेस्ट शुक्रवार को ही होना था, लेकिन डॉक्टर ने महिलाओं को रविवार को बुलाया। आरोपित डॉक्टर कार्डियोलॉजी डिपार्टमेंट में काम करता है।

कटक के अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (एडीसीपी) अनिल मिश्रा ने बताया, “आरोपित डॉक्टर ने शुक्रवार की जगह महिलाओं को रविवार को जाँच के लिए बुलाया और तय एसओपी का पालन नहीं किया। इस जाँच के दौरान एक महिला नर्स या सहायक को मौजूद होना था। लेकिन उसने अकेले ही ये किया। इस दौरान उसी मेडिकल कॉलेज में पढ़ने वाली रिश्तेदार छात्रा ने कहा कि वो महिलाओं के साथ अंदर जाएगी, लेकिन उसे भी अंदर नहीं जाने दिया। उसने महिलाओं के साथ टेस्ट के दौरान रेप किया।”

पुलिस सूत्रों ने बताया कि 11 अगस्त को मंगलाबाग थाने में दर्ज शिकायत में “यौन उत्पीड़न” के आरोप लगाए गए थे, जिसके आधार पर पुलिस ने जाँच शुरू की। भारतीय न्याय संहिता की धारा 62 (2) (ई) के तहत मामला दर्ज किया गया था। एक महिला पुलिस अधिकारी ने पहले ही दोनों पीड़ितों का बयान दर्ज कर लिया था, जबकि पुलिस ने जाँच के तहत उनकी मेडिकल जाँच भी कराई थी। बताया जा रहा है कि पीड़ित के परिजनों, जूनियर डॉक्टरों ने आरोपित डॉक्टर की जमकर पिटाई भी की थी, जिसके बाद उसे आईसीयू में भर्ती कराना पड़ा था, हालाँकि बाद में पुलिस ने आरोपित डॉक्टर को गिरफ्तार कर लिया।

डॉक्टर की कथित पिटाई पर एडीसीपी ने कहा कि आरोपित के परिजनों ने भी मारपीट की शिकायत दर्ज कराई है। एडीसीपी ने कहा, “हमने मंगलवार (13 अगस्त 2024) को मामला भी दर्ज कर लिया है और जाँच की जा रही है।” हालाँकि अस्पताल प्रबंधन ने इस विषय पर चुप्पी साथ ली है। वहीं, ओडिशा के स्वास्थ्य विभाग की तरफ से 3 सदस्यीय समिति का गठन किया गया है, जो जाँच रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी।

इस मेडिकल कॉलेज की शुरुआत उड़ीसा मेडिकल कॉलेज के तौर पर साल 1944 में की गई थी, जिसका नाम 1951 में बदलकर एससीबी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल कर दिया गया। यहाँ ओडिशा के साथ ही पश्चिम बंगाल से भी लोग इलाज के लिए पहुँचते हैं।

‘भारत माता की जय’ तो बोलना ही होगा मौलाना… जो नारा स्वतंत्रता का प्रतीक उसे आज बता रहे ‘संघी’, कल कहेंगे- बलिदानियों को नमन करना इस्लाम में हराम

मुस्लिम समाज के कई नेताओं को अपने भाषणों में और इन्फ्लुएंसर्स को सोशल मीडिया में ये कहते हुए देखा गया है कि ‘वन्दे मातरम्’ कहना उनके मजहब के खिलाफ है। उनका तर्क ये होता है कि इस्लाम में अल्लाह के सिवा किसी के भी सामने झुकने की अनुमति नहीं है। एक तरफ ये कहते हैं कि माँ के क़दमों में जन्नत होती है, वहीं दूसरी तरफ मातृभूमि को नमन करना इनके मजहब में हराम है। वहीं अब मुल्ले-मौलवियों को ‘भारत माता की जय’ से भी दिक्कत हो रही है।

जानने वाली बात ये भी है कि इन्हें कोई ‘भारत माता की जय’ कहने के लिए मजबूर नहीं कर रहा, बल्कि स्कूलों में इन्होंने मुस्लिम बच्चों को ये नारा लगाते हुए देख लिया इसीलिए ये भड़के हुए हैं। ‘ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन’ के मौलाना साजिद रशीदी ने एक वीडियो जारी कर के कहा है कि जब वो बुधवार (14 अगस्त, 2024) को सुबह के साढ़े 8-9 बजे के करीब दिल्ली के तुर्कमान गेट से निकले तो उन्होंने एक विद्यालय के छात्रों का जुलूस देखा। अगले दिन आने वाले स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में ये जुलूस निकाला जा रहा था।

मौलाना साजिद रशीदी का कहना है कि इस जुलूस में शिक्षकों द्वारा मुस्लिम बच्चों से ‘भारत माता की जय’ के नए लगवाए जा रहे हैं। मौलाना ने इन्हें ‘संघी’ जेहन वाले शिक्षक बताते हुए कहा कि ये मुस्लिम बच्चों के मन में उनकी आस्था के खिलाफ अपनी आस्था घुसाने का प्रयास कर रहे हैं। मौलाना ने इन शिक्षकों के खिलाफ सरकार से कार्रवाई की माँग करते हुए मुस्लिम माँ-बाप से भी अपील की कि वो अपने बच्चों को ऐसे मौकों पर समझा कर भेजें कि अगर इस्लाम के खिलाफ उनसे कुछ करवाने की कोशिश की जाए तो वो इसकी मुखालफत करें।

मौलाना साजिश रशीदी के लिए ऐसी बयानबाजी कोई नई बात नहीं है। इससे पहले भी वो अपनी इस्लामी कट्टरपंथी मानसिकता का परिचय दे चुके हैं। उन्होंने राम मंदिर का विरोध करते हुए भी धमकाया था कि इसे तोड़ कर भविष्य की मुस्लिम पीढ़ियाँ मस्जिद बना देंगी। इसी तरह उन्होंने वक्फ बिल में संशोधन का विरोध करते हुए कहा था कि मुस्लिम अगर किसानों की तरह सड़कों पर नहीं आएँगे तब तक मोदी सरकार बाज आने वाली नहीं है। यूपी में मदरसों के सर्वे का भी विरोध करते हुए उन्होंने कहा था कि सर्वे के लिए आने वाले कर्मचारियों का स्वागत चप्पल से किया जाएगा।

अब साजिश रशीदी को बच्चों के ‘भारत माता की जय’ कहने से दिक्कत है। जब बच्चे स्कूल यूनिफॉर्म में होते हैं और वहाँ पढ़ने जाते हैं, तब सब बरबाद होते हैं। बचपन में बच्चे किसी भी उत्सव को लेकर खासे उत्साहित रहते हैं। स्वतंत्रता और गणतंत्र दिवस सिर्फ एक त्योहार नहीं है बल्कि बच्चों में देशभक्ति की भावना को प्रबल करने और हमारे स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि देने का भी एक माध्यम हैं। अब कल को ये भी कहा जा सकता है कि श्रद्धांजलि देना भी अपराध है, स्वतंत्रता सेनानियों को नमन करना भी अपराध है।

बच्चों के मन में देशभक्ति की भावना जितनी प्रबल होगी, वो उतना ही अपनी मिट्टी से और समाज से प्यार करें। वो स्वतंत्रता का मोल समझेंगे। लेकिन, एक खास कौम अपने मजहब को देश से ऊपर रखने की कोशिश में इसका विरोध करती है। पहले बुर्का-हिजाब के लिए कॉलेज की मुस्लिम छात्राओं को भड़काया गया, अब स्कूली बच्चों को भड़काया जा रहा है। उनके अभिभावकों को भड़काया जा रहा है। बच्चों को शिक्षकों का सम्मान करना सिखाया जाना चाहिए, लेकिन ये बच्चों को शिक्षकों से मजहब के लिए झगड़ा करना सिखा रहे हैं।

‘भारत माता की जय’ कोई भाजपा का दिया हुआ नारा नहीं है, बल्कि इस देश को स्वतंत्र कराने के लिए बलिदान देने वाले सेनानी भी ये नारा लगाते थे। इस नारे से उन्हें जोश और ऊर्जा प्राप्त होती थी। खुद भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू कहते थे कि इस देश की मिट्टी, जंगल और पहाड़ से लेकर करोड़ों लोग जो हैं वो सब भारत माता हैं। जब हमारे सेना के जवान सीमा पर दुश्मन से लड़ते हैं तब भी वो ‘भारत माता की जय’ कहते हैं, उनके कारण ही ये देश सुरक्षित है और अंदर बैठ कर साजिद रशीदी जैसे लोग इस तरह की बकैती करते रहते हैं।

‘भारत माता की जय’ का अर्थ हुआ इस देश को हम माँ के रूप में मानते हैं और इसकी विजय की कामना करते हैं। इसमें कौन सा शब्द गलत है? क्या इसका भाव गलत है? भारत में बच्चे अपने देश के लिए नारे नहीं लगाएँगे तो क्या पाकिस्तान, तुर्की या सऊदी अरब के लिए नारेबाजी करेंगे? ये नारा तो किसी वेद-पुराण में भी नहीं लिखा है, फिर दिक्कत क्यों? अगर लिखा भी होता तो ये भारत की संस्कृति से निकले ग्रन्थ हैं, भारत के हैं, भारत में रहने वाले हर एक व्यक्ति को यहाँ की संस्कृति, साहित्य और धर्म का सम्मान करना चाहिए।

सन् 1873 में किरण चंद्र बंदोपाध्याय के एक नाटक ‘भारत माता’ से ये शब्द लोकप्रिय हुआ था। कलकत्ता में 1860 के करीब से हिन्दू मेला लगना शुरू हुआ था, जिसमें राष्ट्रवादी विचारधारा का प्रचार-प्रसार किया जाता था। इस नाटक में दिखाया गया था कि भारत माता की संपदा व संसाधन छीन लिए गए हैं, उनके उद्योग-धंधे और खादी के उद्योग बर्बाद कर दिए गए हैं और उनके बच्चे सूखा व भुखमरी से जूझ रहे हैं। इस नाटक के जरिए संदेश दिया गया कि इस देश को माँ मान कर इसकी स्वतंत्रता के लिए हमें प्रयास करना चाहिए।

इतने पवित्र मूल से निकले इतने पवित्र सन्देश को आखिर गाली कैसे दी जा सकती है, इससे किसी को आपत्ति कैसे हो सकती है? किसी विदेशी मजहब को इस देश में रह कर मातृभूमि से ऊपर रखने की यही सोच है जो कट्टरपंथी और आतंकवाद के रूप में तब्दील होती जा रही है। बालमन के उत्साह को खत्म कर के मजहबी घृणा भर देने से देश का नुकसान है, लेकिन इन्हें क्या। तुर्की में खलीफा की स्थापना के लिए सुदूर भारत में खून बहाने वालों को आखिर इस देश की क्या फ़िक्र!