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’11 साल में हिंसा की 3600+ घटनाएँ, बांग्लादेशी हिन्दुओं के लिए भारत की संसद में पास हो प्रस्ताव’: 57 बुद्धिजीवियों का पत्र, लिखा – पीड़ितों की मदद के लिए कदम उठाए मोदी सरकार

बांग्लादेश में शेख हसीना द्वारा प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देकर देश छोड़ने के बाद वहाँ हिन्दुओं के खिलाफ हिंसा शुरू हो गई। कई हिन्दुओं की हत्याएँ हुईं, मंदिरों पर हमले हुए। बांग्लादेश-भारत सीमा पर कई पीड़ित हिन्दू पलायन कर के जमे हुए हैं और गुहार लगा रहे हैं कि उन्हें भारतीय सीमा में आने दिया जाए। आँकड़ों की मानें तो ऐसी सवा 200 से भी अधिक घटनाएँ हुई हैं। पीड़ित हिन्दू लगातार भारत से मदद की गुहार लगा रहे हैं, अब तक किसी भी अंतरराष्ट्रीय संस्था या संगठन ने इनके लिए आवाज़ नहीं उठाई है।

अब 57 बुद्धिजीवियों ने बांग्लादेश में हिन्दुओं के नरसंहार पर चिंता जताते हुए भारत सरकार से मदद का आग्रह किया है। हिन्दुओं के उत्पीड़न पर चिंता जताते हुए इन बुद्धिजीवियों ने लिखा कि हिन्दुओं को लक्षित कर के हो रही इस हिंसा ने एक नए पैटर्न की तरफ विश्व का ध्यान आकर्षित कराया है। इस पत्र में मेहरपुर में इस्कॉन मंदिर को जलाए जाने और हिन्दुओं की मॉब लिंचिंग का जश्न मनाए जाने के वीडियो का जिक्र करते हुए बताया गया है कि ये परेशान करने वाली घटनाएँ हैं।

पत्र में कहा गया है कि ऐसी नहीं है कि हिन्दुओं पर हमले की कहीं-कहीं इक्की-दुक्की घटनाएँ हो रही हैं, ऐसा भी नहीं है कि इससे पहले ऐसा नहीं हुआ है। जिक्र किया गया है कि कैसे हिन्दुओं पर हमले का बांग्लादेश में एक पूरा का पूरा इतिहास रहा है, राजनीतिक अस्थिरता के दौरान और तेज़ हो जाता है। याद दिलाया गया है कि कैसे बांग्लादेश जब पूर्वी पाकिस्तान हुआ करता था तब पाकिस्तानी फ़ौज ने 25 लाख हिन्दुओं की हत्याएँ की थीं। 2013 से लेकर अब तक बांग्लादेश में हिन्दुओं पर हमले की 3600 से भी अधिक घटनाएँ हो चुकी हैं।

बांग्लादेश से हिन्दुओं के दुःखद पलायन को याद करते हुए पत्र में आग्रह किया गया है कि उनकी सुरक्षा के लिए कदम उठाया जाए। चुने हुए जनप्रतिनिधियों से अपने-अपने स्तर पर इस मामले को उठाने और भारत सरकार द्वारा उच्चतम स्तर पर इसका समाधान करने के लिए कदम उठाने की अपील की गई है। साथ ही भारतीय संसद से इसके खिलाफ प्रस्ताव पारित करने के लिए कहा गया है। पत्र में अपील की गई है कि अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के साथ मिल कर हिन्दुओं की सुरक्षा के लिए कदम उठाया जाए, पीड़ितों को सहायता से लेकर शरण दिए जाने तक के विकल्पों पर विचार हो।

इस पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों में लेखक विक्रम संपत, अभिनव अग्रवाल, अरुण कृष्णन, हर्ष गुप्ता मधुसूदन, स्मिता बरुआ, वैज्ञानिक आनंद रंगनाथन और इंजीनियर योगिनी देशपांडे शामिल हैं। सभी 57 बुद्धिजीवियों ने एक सुर में दोहराया है कि भारतीय संसद द्वारा इस हिंसा को ‘हिन्दुओं के खिलाफ सांप्रदायिक हिंसा’ की मान्यता दी जाए। साथ ही उन खबरों का रेफरेंस भी लगाया गया है, जिसमें हिन्दुओं पर हमले की बातें हैं। भारत का इस्लामी-वामपंथी गिरोह लगातार इन हमलों को नकार रहा है।

पहले खालिदा जिया को जेल से छोड़ा, अब अंतरिम सरकार का मुखिया बनते ही मोहम्मद यूनुस भ्रष्टाचार में बरी: शेख हसीना के बांग्लादेश छोड़ते ही विरोधियों के जुर्म ‘माफ’

बांग्लादेश में जारी हिंदू विरोधी हिंसा और पुलिस थानों पर हमले के बीच एक तरफ मुल्क की आर्थिक स्थिति बिगड़ रही है, वहीं इसी बीच अंतरिम सरकार के प्रमुख चुने जाने वाले अर्थशास्त्री मोहम्मद यूनुस के ऊपर से एक के बाद एक आपराधिक केस हट रहे हैं।

12 अगस्त 2024 को खबर आई है कि उनके ऊपर से भ्रष्टाचार मामले का केस हट गया है। 84 साल के अर्थशास्त्री मोहम्मद यूनुस ने चंद दिन पहले ही अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार के रूप में शपथ ली थी। उनका नाम उन्हीं छात्रों द्वारा सुझाया गया था जिन्होंने बांग्लादेश में हुए प्रदर्शन का नेतृत्व किया।

मोहम्मद यूनुस इससे पहले अंतरिम सरकार में प्रमुख पद पर शपथ लेते कोर्ट से उन्हें केसों में राहत मिलनी शुरू हो गई थी। जैसे- 7 अगस्त 2024 को भी श्रम कानून उल्लंघन मामले में बरी किया गया था। उस समय उनके साथ ग्रामीण टेलीकॉम के तीन शीर्ष अधिकारियों को भी 25.22 करोड़ टके की हेरफेर मामले में राहत मिली थी। कहा जा रहा है कि आने वाले समय में मोहम्मद यूनुस को कई अन्य मामलों में भी रिहाई मिल सकती है।

इस मामले में भी ढाका के विशेष न्यायाधीश मोहम्मद रबीउल आलम ने मोहम्मद यूनुस के साथ नूरजहाँ और अन्य 12 आरोपितों को बरी किया है। भ्रष्टाचार मामले में आरोपितों में से एक नूरजहाँ को भी अंतरिम सरकार में जगह मिली है।0

इन लोगों के अलावा बता दें कि बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया, जिन्हें शेख हसीना और भारत की धुर विरोधी कहा जाता है उन्हें भी हसीना सरकार के जाते ही रिहाई मिल गई। वो 2018 से भ्रष्टाचार मामले में जेल में बंद थीं। शेख हसीना के जाने के बाद जब उनको रिहाई मिली तो यही अनुमान लगाए गए कि संभव है अगली प्रधानमंत्री देश की खालिदा जिया ही बनें।

प्रेस बयान में उनकी रिहाई को लेकर कहा गया था कि ये फैसला राष्ट्रपति ने विपक्षी पार्टी के सदस्यों के साथ बैठक किया है। वह बांग्लादेश में मार्च 1991 से मार्च 1996 तक और फिर जून 2001 से अक्टूबर 2006 तक बांग्लादेश की प्रधानमंत्री रही थीं और बांग्लादेश के पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान की पत्नी थीं। साल 2007 में बांग्लादेश में हो रहे चुनाव के दौरान फैली हिंसा के दौरान बनी कार्यकारी सरकार ने खालिदा जिया और उनके दो बेटों पर भ्रष्टाचार का मुकदमा दर्ज कराया था. इसी मामले में साल 2018 में उनको सजा सुनाई गई थी

बता दें कि एक ओर बांग्लादेश में भ्रष्टाचार मामले में इस तरह तमाम आरोपित रिहा होते जा रहे हैं। वहीं दूसरी ओर मुल्क के केंद्रीय बैंक निर्णय कैश की कमी के कारण परेशान हैं। उन्होंने पहले निर्णय लिया था कि वो किसी को 2 लाख टके से ज्यादा निकालने की अनुमति नहीं देंगे। बाद में ये रकम और ज्यादा घटाकर 1 लाख टका कर दी गई जिसके कारण आमजन से लेकर व्यापारी तक परेशान हैं।

‘हलाला की औलाद हो तुम’ : पाकिस्तानी युवक भारतीयों का कर रहा था अपमान, दिल्ली के कैब ड्राइवर ने GF समेत गाड़ी से उतारा, Video वायरल

दिल्ली के एक कैब ड्राइवर की वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है। इस वीडियो में वो ड्राइवर पाकिस्तानी शख्स और उसकी गर्लफ्रेंड पर भड़कता दिखाई दे रहा है। उसका आरोप है कि उस पाकिस्तानी शख्स और उसके साथ बैठी युवती ने दिल्ली वालों का अपमान किया। इस पर उस कैब ड्राइवर ने पहले उन्हें ऐसा करने से रोका और बाद में सड़क पर उतार दिया।

वायरल वीडियो में देख सकते हैं कि कैसे पहले पाकिस्तानी मूल के शख्स और उसकी गर्लफ्रेंड से कैब ड्राइवर कहता है कि वो दिल्ली वालों को अपमानित न करे वो इसे बर्दाश्त नहीं करेगा। इस पर लड़की वीडियो बनाते हुए कहती है कि उसके साथ बैठे शख्स ने ऐसा कुछ नहीं कहा है वो सिर्फ कह रहा है कि दिल्ली वाले मतलबपरस्त होते हैं।

लड़की कहती है कि अगर मुंबई वाले दिल्ली के लोगों के लिए कुछ कहें तो सब चलता है लेकिन पाकिस्तानी कह दे तो…। लड़की ये भी कहती है कि कैब ड्राइवर उसे न बताए कि वो ब्राह्मण है क्या है।

कैब ड्राइवर उन्हें समझाने की कोशिश भी करता है। हालाँकि बात फिर बढ़ने लगती है। इसके बाद कैब ड्राइवर उन्हें उतार देता है। इस दौरान युवती कहती है कि रात के साढ़े 12 बजे हैं और ये आदमी हमें सड़क पर उतार रहा है। देख लो ये मोदी जी का भारत है।

इस पर कैब ड्राइवर जवाब देता है– “हाँ, ये हिंदुस्तान है ये तुम्हारा पाकिस्तान नहीं है, तुम हलाला की औलाद हो।”

अब इसी वीडियो को शेयर करते हुए लोग अपनी-अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। एक यूजर का कहना है कि, “पाकिस्तानी शख्स दिल्ली के लोगों का अपमान करता दिखता है और भारतीय लड़की जिसका कोई स्वाभिमान नहीं है वो उसका समर्थन करती है। कैब ड्राइवर को सलाम जो उसने इन्हें कैब से बार फेंका और कहा – हलाला की औलाद जैसे शब्द कहे।'”

इनके अलावा तमाम यूजर्स और भी हैं जो कह रहे हैं कि जो बात पाकिस्तानी शख्स के साथ बैठी लड़की को समझ नहीं आई वो कैब ड्राइवर को समझ आ गई। यही फर्क है वोक लोगों में और राष्ट्रवादियों में। सोशल मीडिया पर ज्यादातर भारतीय इस वीडियो को देखने के बाद कैब ड्राइवर की तारीफ

वन विभाग की जमीन पर चर्च, धर्मान्तरण की शिकायतों के बाद चला बुलडोजर: UP के मिर्जापुर का मामला, कार्रवाई का पैसा अवैध निर्माण करने वाले से ही वसूलेगा प्रशासन

उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में प्रशासन ने सरकारी जमीन पर अवैध रूप से बने एक चर्च पर बुलडोजर चलाया है। इस चर्च से धर्मान्तरण कराए जाने की भी शिकायतें मिल रहीं थीं। चर्च बनाने का आरोप विनोद और रमाकांत नाम के लोगों पर लगा है। इन दोनों को SDM कोर्ट में अपना पक्ष रखने के लिए बुलवाया गया था लेकिन दोनों में से कोई भी हाजिर नहीं हुआ। आखिरकार जरूरी कानूनी औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद रविवार (11 अगस्त 2024) को इस अवैध निर्माण पर बुलडोजर चला दिया गया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला मिर्जापुर के थानाक्षेत्र अहरौरा का है। यहाँ पड़ने वाले चुनार वन रेंज मे बेलखरा और मोहाल कुमिया के पास चर्च का निर्माण हुआ था। स्थानीय लोग इसे 8 साल पुराना निर्माण बताते हैं जो कि वन विभाग की जमीन पर हुआ था। निर्माण का आरोप मिर्जापुर के ही विनोद कुमार और रमाकांत पर लग रहा है। बताया जा रहा है कि इस चर्च से शहर से दूर वन क्षेत्रों में रहने वाले जनजातीय लोगों को धर्मान्तरण का लालच दिया जा रहा था।

इस चर्च के खिलाफ मिली शिकायतों के बाद कुछ समय पूर्व SDM चुनार की अदालत ने इसे बनाने वालों को नोटिस जारी किया। नोटिस में इन दोनों को सभी संबधित कागजातों के साथ हाजिर होने का आदेश दिया गया था। नोटिस पाने के बावजूद रमाकांत और विनोद मजिस्ट्रेट की कोर्ट में हाजिर नहीं हुए। तय सीमा के बाद SDM ने एक नई नोटिस देकर रमाकांत और विनोद को सप्ताह भर में अपना अवैध कब्ज़ा खुद से हटाने के निर्देश दिए। रमाकांत और विनोद ने इस नोटिस का भी कोई जवाब नहीं दिया।

आख़िरकार रविवार को जिले की राजस्व टीम पुलिस बल और बुलडोजर के साथ चर्च पर पहुँची। यहाँ सभी जरूरी कार्रवाई पूरी करके चर्च को जमींदोज किया गया। इस कार्रवाई में मौजूद मिर्जापुर के पुलिस अधीक्षक IPS अभिनंदन ने बताया कि पिछले कुछ समय से चर्च से अवैध तौर पर धर्मान्तरण की शिकायतें भी आ रहीं थीं। धर्मान्तरण केस में पुलिस ने FIR दर्ज की है जिसकी जाँच जारी है। बकौल पुलिस अधीक्षक अवैध तौर पर धर्मान्तरण व जमीन कब्ज़ाने जैसे असामाजिक व गैर कानूनी कामों में शामिल लोगों की पहचान करवाई जा रही है और उन सभी पर कठोर कार्रवाई की जाएगी। वहीं SDM राजेश वर्मा ने कहा है कि अवैध निर्माण के ध्वस्तीकरण की कार्रवाई में हुए खर्च की भरपाई भी रमाकांत और विनोद कुमार से की जाएगी।

महाराष्ट्र, उत्तराखंड, ओडिशा… भारत में शरण के लिए सीमा पर खड़े हैं बांग्लादेश के हिंसा पीड़ित, इधर देशभर में पकड़े जा रहे मुस्लिम घुसपैठिए: फर्जी आधार कार्ड भी मिले

भारत में अवैध रूप से घुसने वाले बांग्लादेशी घुसपैठियों की धरपकड़ तेज हो गई है। इन दिनों कई लोग पकड़े गए हैं जिनके पास से फर्जी आधार कार्ड बरामद हुए हैं। पुलिस ने नवी मुंबई से 5 बांग्लादेशियों को गिरफ्तार किया है। रुड़की से एक धरा गया है और ओडिशा में भी 34 मजदूरों को बांग्लादेशी होने के संदेह पर हिरासत में लिया गया था। इनके पास से भी फर्जी पहचान पत्र मिले थे।

रुड़की में बांग्लादेशी गिरफ्तार

हरिद्वार के रुड़की से गिरफ्तार होने वाले शख्स का नाम रहीमुल है जो कि बांग्लादेश के हाकीमपुर का रहने वाला है। वह करीब तीन महीने पहले बिना पासपोर्ट के अवैध रूप से पश्चिम बंगाल में बीजापुर में दाखिल हुआ था। कुछ दिन पहले पुलिस को बताया गया कि एक संदिग्ध युवक सैन्य क्षेत्र से सटे ढंडेरा इलाके में दिखा है। पुलिस ने उसे पकड़कर हिरासत में लिया तो उसके बाद से फर्जी पहचान पत्र मिला।

सख्ती से पूछताछ पर उसने बताया कि लगभग तीन महीने पहले एक इंजीनियर उसे सीमा पर छोड़ गया था और कहा था कि नौकरी लग जाएगी। इसके बाद उसने कुछ और बहाना बनाया। बार-बार बरगलाए जाने पर सुरक्षाकर्मी सख्त हुए तब उसने बताया कि पश्चिम बंगाल में बीजापुर सीमा में तीन महीने पहले दाखिल हुआ था। इसके बाद वो रुड़की आया। अब पुलिस ये पता लगाने का प्रयास कर रही है कि रहीमुल को छोड़ने वाला कौन है और किसने उसकी मदद की।

महाराष्ट्र में 5 बांग्लादेशी गिरफ्तार

वहीं महाराष्ट्र के नवी मुंबई में अवैध रूप से बांग्लादेश के पाँच नागरिकों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने रविवार (11 अगस्त 2024) को इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया उन्होंने एक गुप्त सूचना के आधार पर शनिवार को कोपरखैरणै क्षेत्र में स्थित एक आवासीय परिसर में छापा मारकर 4 महिलाएँ और 1 पुरुष को गिरफ्तार किया है।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने बताया कि उन्हें इन लोगों से पूछताछ के दौरान पता चला है कि पाँचों जाली जाली दस्तावेजों के आधार पर भारत में दाखिल हुए थे। उन्होंने बताया कि चारों महिलाओं की उम्र 34 से 45 वर्ष के बीच है। महिलाएँ घरेलू सहायिका का काम करती हैं, जबकि पुरुष की उम्र 38 साल है और वह घरों में पुताई का काम करता है

अब पुलिस ने बताया कि पाँचों बांग्लादेशी नागरिकों के खिलाफ आईपीसी की धाराओं के तहत धोखाधड़ी और जालसाजी के साथ-साथ पासपोर्ट (भारत में प्रवेश) नियम-1950 और विदेशी अधिनियम-1946 के प्रावधानों के तहत एफआईआर की गई है।

ओडिशा में 34 मजदूर हिरासत में

इसी तरह ओडिशा के संबलपुर में 34 मजदूरों को हिरासत में लिया गया था। पुलिस का कहना था कि ये बांग्लादेशी हैं या नहीं ये तो नहीं पता लेकिन ये पता है कि इनके पास से फर्जी पहचान पत्र मिले हैं। पुलिस ने इन्हें छोड़ दिया है मगर इनकी गतिविधियों पर लगातार नजर है।

शहर में पहले भी अवैध घुसपैठ की बात सामने आती रही है इसलिए मामले की संवेदनशीलता देखते हुए जाँच पड़ताल की जा रही है। एक टास्क फोर्स का गठन भी हुआ है इसके दो अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, एक डीएसपी और संबंधित थाने के थानेदार, सहायक और सब इंस्पेक्टर आदि शामिल हैं।

जमात से जुड़ा है OBC समाज की बच्ची का बलात्कारी राजू खान, मौलानाओं के साथ 40 दिन घूमा: झूठी ग़रीबी दिखा रहा मीडिया, अम्मी ने बताया – सपा नेता मोईद ने दिया वकील

उत्तर प्रदेश के अयोध्या जिले में सोमवार (29 जुलाई, 2024) को OBC समुदाय की एक नाबालिग बच्ची से गैंगरेप का मामला सामने आया था। इस केस में समाजवादी पार्टी का नेता मोईद खान और उसका नौकर राजू खान नामजद हुआ था। पुलिस ने दोनों आरोपितों को गिरफ्तार कर के जेल भेज दिया है। ऑपइंडिया ने राजू खान के परिवार से सम्पर्क किया। राजू खान की अम्मी का दावा है कि उनका बेटा जमात से जुड़ा हुआ है। रेप केस में जेल जाने से पहले जमाती राजू खान मौलानाओं के साथ 40 दिनों तक राजधानी दिल्ली सहित देश के कई हिस्सों में घूमा था।

राजू खान मूल रूप से उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले का रहने वाला है। उसका घर लहरपुर थाना क्षेत्र के गाँव मूड़ीखेड़ा में है। योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में भाजपा की सरकार बनने से पहले लहरपुर थानाक्षेत्र में मेरठ की तरह पुरानी गाड़ियों के पार्ट्स बेचे जाते थे। इसमें कई बार चोरी के भी वाहन मिल जाया करते थे। जिस मूड़ीखेड़ा गाँव का राजू खान रहने वाला है वह मुस्लिम बहुल है। गाँव में हिन्दुओं के SC, OBC व सामान्य वर्ग के लोगों की बेहद कम तादाद है।

जमाती है राजू खान

ऑपइंडिया ने राजू खान की अम्मी आएशा से बात की। आएशा ने बताया कि राजू खान मज़हबी अक़ीदों का पालन करता था और गाँव के आसपास के मौलानाओं की सोहबत (संगति) में रहता था। राजू खान अक्सर मुस्लिमों की जमातों में देश के तमाम हिस्सों में जाया करता था। उसकी अम्मी ने बताया कि रेप केस में जेल जाने से कुछ ही समय पहले राजू खान 40 दिनों की जमात से वापस लौटा था। यह जमात राजधानी दिल्ली सहित देश के कई अन्य हिस्सों में गई थी।

राजू खान को अपने साथ पड़ोस के गाँव लच्छनपुर का कोई मौलाना ले कर गया था। कई बार पूछने पर भी राजू की अम्मी ने मौलाना का नाम नहीं बताया।

मोईद खान के बेटे ने ही किया है राजू का वकील

पिछले कुछ समय से मोईद खान का परिवार मीडिया के सामने आ कर सारा दोष पीड़िता और राजू खान पर डालने का प्रयास कर रहा है। हालाँकि, राजू खान की अम्मी की बात मानी जाए तो अंदरखाने अभी दोनों आरोपित एक दूसरे से न सिर्फ जुड़े हैं बल्कि आपसी मदद भी कर रहे हैं। जब ऑपइंडिया ने आरोपित की अम्मी से पूछा कि क्या उन्होंने राजू खान का केस देखने के लिए कोई वकील किया तो उन्होंने अवधी भाषा में कहा, “मोईद कय लड़िका केहे हईंन।” अर्थात राजू खान के लिए वकील का इंतज़ाम मोईद खान के बेटे ने किया है।

जिस से कभी मिली भी नहीं, उसकी भी बेगुनाही का दावा

ऑपइंडिया ने राजू खान की अम्मी से सवाल किया किया वो मोईद से कितनी बार मिली हैं। जवाब आया कि एक भी बार नहीं। फिर हमने पूछा कि उन्हें क्या लगता है कि क्या उनका बेटा रेपिस्ट है ? जवाब में राजू की अम्मी ने न सिर्फ अपने बेटे बल्कि मोईद खान को भी बेगुनाह बताने लगीं। हमने सवाल किया कि जिस से आप कभी मिली भी नहीं उसकी बेगुनाही का दावा कैसे कर सकती हैं ? इस पर राजू की अम्मी का अवधी में जवाब था, “अब भैया हम कुछू नाय जानित।” अर्थात हम इस बारे में कुछ नहीं जानते।

बना है पक्का घर, विक्टिम कार्ड में दिखाया जा रहा टूटा हिस्सा

राजू खान की तलाश में जो भी मीडियाकर्मी गाँव मूडीखेड़ा जा रहा है उसे आरोपित की अम्मी एक टूटा-फूटा घर दिखा रहीं हैं। इसी जर्जर हिस्से को मीडिया का वामपंथी वर्ग आदतन राजू खान की गरीबी साबित करने पर तुला हुआ है। नाम प्रकाशित न करने की शर्त पर एक स्थानीय पत्रकार ने ऑपइंडिया को बताया कि राजू खान के भाइयों ने गाँव में पक्के मकान बनवा रखे हैं। आरोपित की अम्मी अपने बेटों के उन मकानों को नहीं दिखा रहीं हैं जो ठीक से बने हैं।

पूरा घर छोड़ कर राजू खान के घर के इसी हिस्से को दिखा रही है वामपंथी मीडिया

स्थानीय पत्रकार का दावा है कि ‘विक्टिम कार्ड’ खेलने के लिए अन्य भाइयों द्वारा बनाए गए मकानों के बजाय एक जर्जर हिस्से को ही बार-बार दिखाया जा रहा है। हमें यह भी बताया गया कि जब कोई व्यक्ति अन्य भाइयों के मकानों की जानकारी हासिल कर लेता है तब राजू खान की अम्मी कहती हैं कि उनके बाकी बेटे उनसे अलग हो चुके हैं। हालाँकि, इस अलगाव घटना के दिन तक कोई भी कागजी प्रमाण आरोपित का परिवार अभी तक सार्वजनिक नहीं किया है। अन्य भाइयों की पड़ताल न होने पाए इसलिए कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यहाँ तक अफवाह उड़ा गई गई कि वो सभी डर से फरार हो गए हैं।

5 भाई, 4 बहनों का भरा पूरा परिवार

बताते चलें कि अयाज खान का बेटा राजू कुल 5 भाई और 4 बहनें हैं। राजू के अब्बू और अन्य भाई मिला कर हर माह इतने पैसे कमा रहे हैं जो एक परिवार के गुजर-बसर के लिए पर्याप्त माना जाता है। राजू खान का भी रहना और खाना-पीना मोईद की बेकरी फैक्ट्री में फ्री था। उनकी अम्मी का दावा है कि राजू सैलरी का अधिकतर हिस्सा घर भेजता था। बताया यह भी जा रहा है कि पुलिस की पूछताछ में राजू खान ने मोईद की तमाम पोल-पट्टी खोली है और पुलिस को उसके सबूत भी उपलब्ध करवाए हैं।

पिछली बार कमाए थे ₹344 करोड़, अबकी कितना का लक्ष्य लेकर चल रहा हिंडेनबर्ग? SEBI की नोटिस का खीझ उतार रहा, समझिए कैसे अडानी के खिलाफ बुने जाल में खुद फँसा

गौतम अडानी के भाई विनोद अडानी हैं, जो दुबई में रहते हैं। बरमूडा स्थित ‘Global Dynamic Opportunities Fund’ में उनका निवेश है। इस कंपनी में मॉरीशस के ‘IPE Plus Fund’ में निवेश किया।इसके बाद इस फंड में 2015 में माधवी पुरी और उनके पति धवल बुच ने अकाउंट खोला। फिर धवल बुच ने 2018 में ₹7.32 करोड़ रुपए निकाल लिए। कंपनी Indian Infoline ने इस लेनदेन को पूरा कराया। माधवी पुरी भारतीय नियम संस्था SEBI की अध्यक्ष हैं, वहीं उनके पति धवल बुच कॉर्पोरेट में बड़े-बड़े पदों पर रहे हैं।

अडानी को बर्बाद न कर पाने की खीझ निकाल रहा हिंडेनबर्ग

ऊपर जो दावे किए गए हैं, वो हम नहीं कह रहे बल्कि अमेरिका की एक शॉर्टसेलर संस्था ‘हिंडेनबर्ग रिसर्च’ ने कहा है। शॉर्टसेलर का अर्थ होता है, ये अंदाज़ा लगा कर शेयरों को शॉर्ट करना, कि कंपनी को लेकर कोई नकारात्मक खबर आने वाली है। पिछली बार जनवरी 2023 में हिंडेनबर्ग ये आरोप लेकर आया था कि अडानी समूह ने अपनी कंपनी के शेयरों के भाव जानबूझकर बढ़ा दिए। उस रिपोर्ट के बाद कुछ ही महीनों में गौतम अडानी की संपत्ति में 60% की गिरावट आई।

हालाँकि, मई 2024 आते-आते अडानी समूह ने सारे घाटे को रिकवर कर दिया। इसके लिए कुछ प्रोजेक्ट्स को कुछ दिनों के लिए ठण्डे बस्ते में डाला गया और कंपनी के खर्च में कटौती की गई। लंबी कानूनी लड़ाई से भी कंपनी को जूझना पड़ा। SEBI से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक में मामला गया। गौतम अडानी ने अपने 60वें जन्मदिन पर 60,000 करोड़ रुपए की चैरिटी का संकल्प लिया था, वो खबर दब है और वो दुनिया के अमीरों की सूची में शीर्ष 20 से बाहर हो गए।

उधर शॉर्टसेलिंग करने वाले हिंडेनबर्ग को जुलाई 2024 में SEBI ने ‘कारण बताओ नोटिस’ भेजा। इसके अगले ही महीने जब बांग्लादेशी हिन्दुओं पर हमले की 200+ घटनाएँ सामने आ चुकी हैं, अचानक से हिंडेनबर्ग घोषणा करता है कि वो भारत के लिए कुछ नया जारी करने वाला है और फिर ये नई रिपोर्ट आ जाती है जिसमें पुराने आरोपों और पहले से ही उपलब्ध सूचनाओं की एक खिचड़ी तैयार कर के परोस दिया गया है। इसके लिए टाइमिंग का भी बखूबी ध्यान रखा गया – शनिवार को रिपोर्ट आई, रविवार को दिन भर माहौल बना, सोमवार को बाजार गिरने की आशंका है।

पुरी-बुच दंपति का लंबा कॉर्पोरेट करियर

धवल बुच का 35 वर्षों से भी अधिक का करियर रहा है कॉर्पोरेट वर्ल्ड में। हिंडेनबर्ग का ये दावा भी झूठा निकल गया कि Blackstone नामक कंपनी में उन्हें पद दिया गया जबकि उनका रियल एस्टेट को लेकर कोई अनुभव नहीं था। क्या कॉर्पोरेट वर्ल्ड में कोई ऐसा व्यक्ति MD, CEO या एडवाइजर नहीं बन सकता, जो पहले इन पदों पर न रहा हो? ब्लैकस्टोन के रियल एस्टेट विभाग से धवल बुच का कोई लेना-देना नहीं था, ऊपर से माधवी पुरी ने SEBI में ब्लैकस्टोन से जुड़े मामलों में खुद को ‘Recusal List’ में रखा है।

जो लोग SEBI की कार्यप्रणाली से परिचित हैं, उन्हें पता है कि संस्था का अध्यक्ष कोई तानाशाह नहीं होता या फिर वो चाह कर भी एकतरफा फैसले नहीं ले सकता। अब आप सोचिए, बोर्ड में कई सदस्य होते हैं और वो कई हितधारकों और यहाँ तक की आम जनता से भी राय लेकर फैसले लेते हैं, ऐसे में आखिर कैसे माधवी पुरी ब्लैकस्टोन को फायदा पहुँचा सकती हैं? उनके पति जब इस कंपनी में गए, तब तो वो सेबी की चेयरपर्सन बनी भी नहीं थीं। ऊपर से निवेश का जो मामला लेकर आया गया है वो 2015 का है।

जी हाँ, 9 साल पहले का। जबकि माधवी पुरी 2018 में SEBI में पूर्णकालिक सदस्य बनती हैं। उससे पहले वो कॉर्पोरेट जगत में पदाधिकारी थीं। वेतन और बोनस से लेकर निवेश तक से पैसे कमाए इस दंपति ने, इसमें बुरा क्या है? धवल बुच यूनिलीवर में लंबे समय तक कार्यरत रहे, पत्नी माधवी ICICI में बड़े पदों पर रहीं। वो IIM से पढ़ी हैं, उनके पति IIT से निकले हुए हैं। क्या दोनों मिल कर 35 वर्षों में 84 करोड़ रुपए की संपत्ति नहीं बना सकते? ये असंभव तो नहीं है अंतरराष्ट्रीय कंपनियों में शीर्ष पदों पर रहने वालों के लिए।

हिंडेनबर्ग का ये रिपोर्ट पूरी तरह शातिराना और Hitjob प्रतीत होता है। जिस ‘IPE Plus Fund’ की बात हो रही है, उसका अब तक अडानी समूह की किसी भी कंपनी से कोई संबंध नहीं निकला है। हिंडेनबर्ग ने ऐसा कोई दस्तावेज नहीं दिया है, जिससे प्रतीत हो कि इस कंपनी में अडानी समूह का या फिर अडानी समूह का इस कंपनी में निवेश हो। India Infoline कह रही है कि ये एक वैध फंड था जो सारे नियमों की परीक्षण प्रक्रिया से होकर गुजरा है और सब कुछ पारदर्शी है।

आगे चलते हैं, हिंडेनबर्ग कहता है कि माधवी पुरी ने 2018 में SEBI से जुड़ने के बाद कंपनी से अपने पैसे निकाल लिए। ये तो अच्छी बात होनी चाहिए, क्योंकि इससे ‘हितों के टकराव’ का जो आरोप लग रहा है वो खत्म ही हो गया। कॉर्पोरेट में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम करने वाले लोगों के कई देशों में निवेश होते हैं, जब सारी सूचनाएँ उन्होंने सेबी को पहले से दे रखी है तो उसे सार्वजनिक कर के हिंडेनबर्ग क्या साबित करना चाहता है? साफ़ है, कुछ बातें जो आम जनता को नहीं पता है उन बातों को नकारात्मक माहौल बना कर पेश करना ही इनकी मंशा है।

अडानी और पुरी-बुच दंपति ने एक-एक आरोप का दिया जवाब

अडानी समूह ने अपने वित्तीय लेनदेन को खुली किताब बताया है, Indian Infoline कह रहा है कि उसके फंड का अडानी से कोई संबंध ही नहीं है। हिंडेनबर्ग इस पूरे आरोप को अनिल आहूजा पर खेल रहा है, जो कभी अडानी की कंपनी में बड़े पद पर हुआ करते थे। 2017 में वो अडानी समूह से अलग हो गए, तो हिंडेनबर्ग का मानना गई कि ऊपर जिस कंपनी का जिक्र है उसमें बुच दंपति ने पैसे लगाए, कंपनी ‘अडानी के आदमी’ की थी, इसीलिए SEBI का अडानी से कनेक्शन था।

जबकि बुच दंपति ने बयान जारी कर के बता दिया है कि अनिल आहूजा और धवल बुच बचपन के दोस्त हैं, दोनों ने IIT दिल्ली से पढ़ाई की है। ऊपर से अनिल आहूजा कई बड़े कंपनियों से जुड़े रहे हैं, केवल अडानी समूह से ही नहीं। फिर हिंडेनबर्ग की रिपोर्ट का आधार ही गलत है। हाँ, इसे सही कहा जा सकता था जब अनिल आहूजा अब भी अडानी की कंपनी में होते। और एक और मजेदार बात, क्या आपको पता है बुच दंपति की उस कंपनी में कितने शेयर थे? डेढ़ प्रतिशत।

जी हाँ, मात्र 1.5 प्रतिशत शेयर। सवाल ये है कि क्या कोई 2 लोग जिनका किसी फंड में मात्र डेढ़ प्रतिशत शेयर हो वो उस फंड को अपने इशारे पर नचा सकते हैं और ये तय कर सकते हैं कि वो किससे क्या डील करेगा? खासकर उस कंपनी में जहाँ इस तरह के निवेशक नहीं बल्कि इन्वेस्टमेंट मैनेजर ये सब तय करते हैं। लेकिन नहीं, हिंडेनबर्ग ने ऐसा साबित करने की कोशिश की है जैसे उक्त कंपनी धवल और माधवी की ही हो। कौन सा नशा लेकर इस रिपोर्ट को तैयार किया गया है?

ऐसी स्थिति में बाजार के लिए यही प्रार्थना की जा सकती है कि भगदड़ की स्थिति न बने और निवेशक शांत रहें, जब शेयरों के भाव गिरें तब खरीद की जाए। पिछली बार अडानी के शेयरों के भाव गिरे थे, जिन्होंने खरीदा उन्होंने खूब फायदा कमाया। वित्तीय वर्ष 2024 में अडानी समूह ने 55% का लाभ कमाया, इतनी नकारात्मकता के बावजूद। शेयरों के भी भाव बढ़े। अडानी के खाद्य उत्पाद भी बिकते हैं, कंपनी के पास पोर्ट्स से लेकर जमीन तक अच्छा इंफ्रास्ट्रक्चर है – ऐसे में जो सोचते हैं कि कंपनी सिर्फ कागज पर ही लाखों करोड़ की है और ये डूब जाएगी, वो गलत हैं।

जिस ‘Agora’ नामक कंपनी में धवल बुच और माधवी पुरी का हिस्सा बताया गया है, इसका जिक्र आपको धवल बुच के LinkedIn प्रोफाइल पर भी मिल जाएगा। यानी, सब कुछ उन्होंने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर भी घोषित कर रखा है, ऊपर से वो कह रहे हैं कि नियामक संस्थाओं को इस बारे में सूचित किया ही गया था। फिर इसमें गड़बड़ कहाँ है? ये भी आरोप लगाया गया कि REIT क्षेत्र को लेकर माधवी पुरी मुखर थीं, ब्लैकस्टोन भी रियल एस्टेट में डील करता है तो ये ‘हितों का टकराव’ है।

Recusal वाली बात हटा भी दें तो ये सिर्फ माधवी पुरी का ही नहीं मानना है कि REIT (रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट) भारत में उभरता हुआ क्षेत्र है लेकिन फिर भी अमेरिका वगैरह से वो काफी पीछे है। ऐसे में विश्लेषकों का भी मानना है कि शॉपिंग मॉल से लेकर दफ्तरों वगैरह के लिए रियल एस्टेट में निवेश और फिर निवेशकों को उससे मिलने वाले मुनाफे वाली व्यवस्था भारत में अभी और बढ़ेगी। अब भारत को वैश्विक शक्तियों से प्रतियोगिता करनी है तो निवेश आकर्षित करने के लिए नियम बनाने होंगे, कुछ नियमों में बदलाव करना होगा, कारोबार आसान होता जाए यही तो SEBI का काम है।

पिछले 2 वर्षों में SEBI द्वारा 300 से अधिक सर्कुलर जारी किए जाने की बात बताई गई है, तो इसमें से एकाध से ब्लैकस्टोन को सहूलियत मिल ही गई हो तो इससे क्या साबित होता है? निवेशकों और कारोबारी कंपनियों का काम और कठिन बनाना थोड़े न भारत सरकार और इसकी संस्थाओं का काम है। हाँ, हिंडेनबर्ग चाहता है कि भारत के सारे नियम-कानून कठिन होते चले जाएँ और देश 1991 से पहले वाली नेहरूवाड़ी व्यवस्था में जाकर तबाह हो जाए, तो अलग बात है।

समझिए क्या चाहता है भारत विरोधी गिरोह विशेष

ऊपर से भारत का एक गिरोह विशेष लगातार अडानी समूह और मोदी सरकार को भला-बुरा कहने में लगा है इस रिपोर्ट के आधार पर। अडानी समूह को लेकर सिर्फ एक जाँच की रिपोर्ट आनी बाक़ी है। सुप्रीम कोर्ट जनवरी 2024 में ही अडानी को क्लीनचिट दे चुका है। तब तक 24 में से 22 मामलों की जाँच पूरी हो चुकी थी, मार्च में एक और की हो गई। सिर्फ एक बाकी है। सेबी ने स्पष्ट बताया है कि वो सिर्फ REIT ही नहीं, जिस भी एसेट क्लास में देश को फायदा है उन सभी को बढ़ावा देता है।

दुनिया के कई देशों में उथल-पुथल मचाने के लिए फंडिंग करने वाले अरबपति कारोबारी जॉर्ज सोरोस के भारत को लेकर नापाक इरादे अब तक सबको पता है और वो यहाँ ‘अभिव्यक्ति की आज़ादी’ को लेकर चिंता भी जता चुके हैं, ऐसे में उनकी फंडिंग वाले संगठन OCCRP द्वारा भी अडानी पर लगाए गए आरोपों को सुप्रीम कोर्ट नकार चुका है। SIT जाँच भी नकार दी गई। CJI डीवाई चंद्रचूड़ ने खुद इस पीठ की अध्यक्षता की थी। उन्होंने कहा था कि किसी तीसरी संस्था की बिना सबूत की रिपोर्ट को आधार नहीं बनाया जा सकता।

आशा है, हिंडेनबर्ग के खिलाफ जिन अनियमितताओं के आरोप लगे हैं और उसे जो नोटिस जारी किया गया है, बिना दबाव के उस दिशा में कार्रवाई जारी रहेगी। खासकर ऐसी स्थिति में जब महुआ मोइत्रा जैसी TMC सांसद पोस्ट पर पोस्ट करती है और वीडियो बनाती है तो लग जाता है कि गिरोह की मंशा नेक नहीं है। दर्शन हीरानंदानी याद होंगे आपको? महुआ मोइत्रा की संसद सदस्यता चली गई थी और आवास खाली करना पड़ा था, इसी में कारण छिपा है उनके आज के विरोध का।

उन पर आरोप लगे थे कि उन्होंने दुबई स्थित कारोबारी दर्शन हीरानंदानी को फायदा पहुँचाने के लिए संसद में सवाल पूछे और बदले में महँगे-महँगे तोहफे लिए जिसमें पर्स से लेकर आईफोन तक शामिल था। बड़ी बात तो ये पता चली कि सवाल ऐसे-ऐसे थे जिनसे अडानी को नुकसान हो और उनके प्रतिद्वंद्वियों को फायदा। अब आप समझ जाइए, उनकी सक्रियता का कारण। विपक्ष के सभी नेता भी अपना-अपना उल्लू सीधा करने में लगा हुआ है। इनका निशाना भारतीय बाजार है, भारत की अर्थव्यवस्था है।

तर्क बार-बार ये दिया जा रहा है कि ये ‘स्मॉल रिटेल इन्वेस्टर्स’ के साथ धोखा है, यही बात राहुल गाँधी वीडियो जारी कर के कह रहे हैं। बाजार गिराने और भारत के तीसरे सबसे बड़े कंपनी समूह के तबाह होने से छोटे निवेशकों को क्या फायदा होगा? साफ़ है, उन्हें बड़ा नुकसान होगा। अब समझ जाइए छोटे निवेशकों के पक्ष में हैं ये लोग या विपक्ष में। आपको पता है पिछली बार हिंडेनबर्ग ने अडानी के शेयरों को शॉर्ट कर के कितनी कमाई की थी? लगभग 344 करोड़ रुपए। जी हाँ, संगठन ने खुद 4.10 मिलियन डॉलर कमाई की बात कबूली थी

‘अत्याचार बंद करो’: बांग्लादेशी हिन्दुओं के लिए कनाडा में विरोध प्रदर्शन, भारत की सीमा पर इकट्ठा हुए पीड़ितों को समझा रही BSF

बांग्लादेश में शेख हसीना की सरकार का तख्तापलट होने के बाद वहाँ मुस्लिम भीड़ अल्पसंख्यकों को लगातार निशाना बना रही है। खासतौर पर हिन्दुओं पर हमले किए जा रहे हैं। उनके घरों, दुकानों और मंदिरों को निशाना बनाया जा रहा है। कई हिन्दू बांग्लादेश छोड़ कर भारत में शरण लेने की कोशिशों में बॉर्डर पर जमे हुए हैं। यहाँ BSF ने उन्हें रोक रखा है। हिन्दुओं पर हो रहे इस अत्याचार के खिलाफ दुनिया भर में आवाज उठने लगी है। कनाडा में एक बड़ा जुलूस निकाला गया है जिसमें बांग्लादेश एक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की माँग उठाई गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक शनिवार (10 अगस्त 2024) को कनाडा के टोरंटो शहर में हजारों लोग जमा हुए। इन लोगों में महिलाएँ, बच्चे, युवा और वृद्ध सभी लोग शामिल थे। इस प्रदर्शन का आयोजन एक बांग्लादेशी हिंदी समूह ने किया था। लोगों को जुटने के लिए टोरंटो के सिटी हॉल के पास मौजूद नाथन फिलिप्स स्क्वायर नाम की जगह बताई गई थी। इन प्रदर्शनकारियों के हाथों में बैनर दिख रहे थे। बैनरों में ‘बांग्लादेश के हिन्दुओं की रक्षा करो’ जैसे स्लोगन लिखे हुए थे।

प्रदर्शनकारियों ने एकजुटता दिखाते हुए एक जुलूस निकाला। इस जुलूस में बांग्लादेश के हिन्दुओं पर हो रहे अत्याचार के खिलाफ नारेबाजी हुई। प्रदर्शनकारियों ने कनाडा सरकार से माँग की है कि वो बांग्लादेश में हिन्दुओं की रक्षा और फिर से लोकतंत्र की बहाली के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर दबाव बनाए। प्रदर्शनकारियों में शामिल ज्योति दत्ता ने अपने सम्बोधन में बताया कि वो दुनिया को संदेश देना चाहती हैं कि बंगलदेश के हिन्दुओं को उनके हाल पर नहीं छोड़ने दिया जाएगा। प्रदर्शन को दुनिया भर के हिन्दू संगठनों ने समर्थन दिया है।

हजारों शरणार्थियों को बॉर्डर पर रोका गया

वहीं मज़हबी चरमपंथ से प्रताड़ित कई बांग्लादेशी हिन्दू भारत में शरण लेने के प्रयास में जुट गए हैं। हजारों हिन्दुओं की भीड़ इस समय भारत-बांग्लादेश के बॉर्डर पर जुटी हुई है। केंद्रीय मंत्री और शिवसेना नेता मिलिंद देवड़ा ने एक वीडियो शेयर करते हुए इस हालात को बेहद दर्दनाक बताया है। वायरल वीडियो में कई लोगों को सीमा के पास पानी में खड़े देखा जा सकता है। इसमें महिलाएँ और बच्चे भी शामिल हैं। वो भारत में घुसना चाह रहे हैं लेकिन BSF (सीमा सुरक्षा बल) ने उन्हें रोक रखा है।

शिवसेना नेता मिलिंद देवड़ा ने अफ़सोस जताते हुए अंतर्राष्ट्रीय नियमों का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि अगर वो चाहें भी तो बॉर्डर पर मौजूद लोगों को भारत में प्रवेश नहीं करा सकते हैं। हालाँकि उन्होंने भरोसा दिया कि बातचीत जारी है जिसके बाद उन सभी शरणार्थियों की पूरी मदद की जाएगी।

‘ये 2015 की बात, तब हम दोनों प्राइवेट सिटीजन थे’: SEBI अध्यक्ष और उनके पति ने हिंडेनबर्ग के आरोपों को नकारा, कहा – अडानी की किसी भी कंपनी में कोई निवेश नहीं

हिंडेनबर्ग ने भारतीय नियामक संस्था SEBI की अध्यक्ष माधवी पुरी और उनके पारी धवल बुच पर आरोप लगाया कि अडानी समूह की संदिग्ध विदेशी कंपनियों में इनकी हिस्सेदारी है। अडानी समूह पहले ही इस रिपोर्ट को हिंडेनबर्ग के पुराने आरोपों और पहले से उपलब्ध सार्वजनिक सूचनाओं की खिचड़ी करार देते हुए दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। वहीं अब बुच दंपति ने भी हिंडेनबर्ग के आरोपों का करारा जवाब दिया है। हिंडेनबर्ग कंपनियों को बदनाम कर के शॉर्ट सेलिंग करता है और पैसे कमाता है।

बुच दंपति ने जारी किए गए बयान में कहा है कि वो पारदर्शिता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताते हुए हिंडेनबर्ग के आरोपों का जवाब दे रहे हैं। इसमें बताया गया है कि माधवी पुरी IIM अहमदाबाद से पढ़ी हुई हैं और उनका बैंकिंग व वित्तीय क्षेत्र में 2 दशक लंबा कॉर्पोरेट करियर रहा है, अधिकतर वो ICICI ग्रुप से जुड़ी रही हैं। वहीं IIT दिल्ली से पढ़े धवल बुच के बारे में बताया गया है कि वो पहले हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड (HUL) और फिर यूनिलीवर ग्लोबल की सीनियर मैनेजमेंट टीम का हिस्सा रहे हैं, उनका 35 वर्षों का कॉर्पोरेट करियर रहा है।

दंपति ने बताया है कि उन दोनों ने अपने वेतन, बोनस और स्टॉक्स में निवेश के माध्यम से पैसे जमा किए हैं, इसीलिए माधवी पुरी के वर्तमान वेतन से उनकी संपत्ति को जोड़ कर देखना दुर्भावनापूर्ण और कुप्रेरित है। जानकारी दी है कि जहाँ 2010 से लेकर 2019 तक धवल ने लंदन और सिंगापुर में यूनिलीवर के लिए काम किया, वहीं 2011 से 2017 तक माधवी सिंगापुर में पहले एक प्राइवेट इक्विटी फर्म की कर्मचारी रहीं और फिर कंसल्टिंग रोल में रहीं।

बुच दंपति ने जानकारी दी है कि जिस निवेश को लेकर हिंडेनबर्ग हंगामा खड़ा कर रहा है वो 2015 का है, माधवी पुरी के SEBI का सदस्य बनने के 2 साल पहले का। हिंडेनबर्ग ने जिस कंपनी का जिक्र किया है, उसमें निवेश की वजह बताते हुए दंपति ने कहा है कि उसके चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर अनिल आहूजा धवल के बचपन के दोस्त हैं और दोनों IIT दिल्ली से पढ़े हैं, वो सिटीबैंक, 3i ग्रुप और जेपी मॉर्गन जैसी कंपनियों में निवेश का उनका लंबा करियर रहा है।

बताया गया है कि जब 2018 में अनिल आहूजा ने उक्त कंपनी में CIO का पद छोड़ दिया तो इनलोगों ने उसमें रखे अपने फंड को निकाल लिया। वहीं 2015 में बुच दंपति सिंगापुर में रह रहे प्राइवेट सिटीजन थे। बताया गया है कि उक्त फंड ने अडानी समूह के किसी भी इक्विटी, या डेरिवेटिव में निवेश नहीं किया। वहीं 2019 में Blackstone में सीनियर एडवाइजर बनाए जाने के पीछे का कारण बताते हुए धवल बुच ने कहा है कि सप्लाई चेन मैनेजमेंट की समझ के कारण उन्हें ये पद दिया गया था।

बयान में बताया गया है कि Blackstone के रियल स्टेट विभाग से धवल कभी जुड़े रहे ही नहीं हैं, और माधवी के SEBI अध्यक्ष बनने से पहले से ही वो इस पद पर हैं। SEBI में माधवी ने Balckstone के मामलों में खुद को Recusal List में रखा है, यानी वो इससे जुड़े फैसले नहीं लेतीं। बताया गया है कि सेबी ने पिछले 2 वर्षों में 300 सर्कुलर जारी किए हैं, ताकि कारोबार करना आसान होता जाए। बोर्ड के सभी सदस्य हितधारकों से राय-विचार के बाद ही फैसले लेते हैं।

साथ ही सिंगापुर और भारत में माधवी पुरी जिन कंपनियों का हिस्सा थीं, उनके बारे में SEBI को पहले ही सूचित कर दिया गया था और उनकी नियुक्ति के साथ ही निष्क्रिय हो गईं। 2019 में धवल ने यूनिलीवर से रिटायर होने के बाद इन कंपनियों के जरिए अपना काम शुरू किया। आरोप लगाया गया है कि नियमों के उल्लंघन के लिए जारी किए गए ‘कारण बताओ नोटिस’ का जवाब देने की बजाए हिंडेनबर्ग SEBI को बदनाम कर रहा है, जहाँ कोड ऑफ कंडक्ट के मुताबिक काम होता है और सारी सूचनाएँ संस्था को पहले ही देनी पड़ती है।

‘$ले #मार, तू हमको रोकेगा’: मुस्लिम भीड़ ने जातिसूचक गालियाँ देकर दलितों को धारदार हथियारों से पीटा, चंद्रशेखर ‘रावण’ के गृह जनपद की घटना

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में दलित समुदाय (SC वर्ग) के लोगों पर मुस्लिम भीड़ द्वारा हमले का आरोप है। धारदार हथियारों से हुए इस हमले के दौरान पीड़ितों को जातिसूचक शब्द बोले गए। हमलावरों ने एक महिला को भी निशाना बनाया है। कुल 3 घायलों को अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती करवाया गया है। पीड़ितों की तहरीर पर इशहाक, साहिल और असगर सहित कुल 5 हमलावरों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है। भीम आर्मी प्रमुख व सांसद चंद्रशेखर रावण के गृहजनपद की यह घटना शुक्रवार (9 अगस्त, 2024) की है। पुलिस मामले की जाँच कर रही है।

यह मामला सहारनपुर के थाना क्षेत्र नकुड़ में आने वाले गाँव खेड़ा अफगान का है। यहाँ शुक्रवार को अनुसूचित जाति की जाटव बिरादरी से आने वाले राजेश कुमार ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत में उन्होंने बताया कि थोड़े समय पहले उनका एक इन्वर्टर चोरी हो गया था। इस बाबत राजेश के भाई दयाराम ने 9 अगस्त को असगर के बेटे अज्जू, अय्यूब के बेटे शिब्बू, इशहाक, साहिल और असगर से पूछताछ की। इस बात पर ये अज्जू, असगर, साहिल, शिब्बू और इशहाक भड़क उठे। इन सभी ने दयाराम को गंदी-गंदी गालियाँ देनी शुरू कर दी।

जब दयाराम ने गाली देने से रोका तो आरोपितों ने अपने घरों से लाठी-डंडे और फावड़े निकाल लिए। इन्होंने दयाराम को बेरहमी से पीटना शुरू कर दिया। इसी दौरान उधर से गाँव के ही ऋषिपाल गुजरे। उन्होंने मामले में बीच-बचाव की कोशिश की जिस से थोड़ी देर के लिए झगड़ा बंद हो गया। आरोप है कि कुछ देर बाद अज्जू, शिब्बू, साहिल, असगर और इशहाक फिर से हाथों में हथियार ले कर ऋषिपाल के घर पहुँच गए। इन्होंने ऋषिपाल को माँ-बहन की गालियाँ देनी शुरू की।

जब ऋषिपाल ने उन्हें रोका तो आरोपितों ने कहा, “$ले, $मार, गिट्ट#, तू हमको रोकेगा। इसके बाद पाँचों हमलावरों ने ऋषिपाल पर हमला बोल दिया। SC वर्ग के ऋषिपाल को बचाने के लिए उनके भाई कार्तिक और चाची अनीता भी पहुँची। आरोप है कि हमलावरों ने ऋषिपाल के साथ इन दोनों को भी बुरी तरह से पीटा। पीड़ितों की चीख-पुकार सुन कर गाँव के लोग जमा होने लगे। तब हमलावर पीड़ितों को जान से मार डालने की धमकी देते हुए फरार हो गए। हमले में तीनों पीड़ित घायल हो गए जिनको इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया गया है।

अपनी शिकायत में राजेश कुमार ने अज्जू, शिब्बू, इशहाक, असगर और साहिल पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है। इस शिकायत पर पुलिस ने पाँचों आरोपितों के खिलाफ नामजद FIR दर्ज कर ली है। इन सभी पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 191 (2), 115 (2), 352, 333 और 351 (2) के साथ SC/ST एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है। जिस सहारनपुर की यह घटना है वह भीम आर्मी प्रमुख व सांसद चंद्रशेखर रावण का पैतृक जनपद है। फिलहाल पुलिस मामले की जाँच की जा रही है।