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5 वक्त के पक्के नमाज़ी ने की 7 साल की बच्ची से रेप की कोशिश, रिश्तेदारों ने फरार मौलाना को दी पनाह: यूपी पुलिस ने आखिरकार दबोचा

उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में 10 अगस्त को एक 70 वर्षीय मौलाना के खिलाफ 7 साल की नाबालिग बच्ची से रेप की कोशिश का आरोप लगा था। इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। लोगों द्वारा पकड़े जाने के बाद चचा नाम से कुख्यात मौलाना मुख़्तार मज़हब का वास्ता दे कर वहाँ से फरार हो गया था। अब सोमवार (12 अगस्त, 2024) को पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है। फरारी के दौरान मौलाना के रिश्तेदारों ने उसे पनाह दी थी। मौलाना चचा 5 वक्त का नमाज़ी भी है।

यह घटना कानपुर के थाना क्षेत्र ग्वालटोली की है। सोमवार (12 अगस्त) को DCP दिनेश त्रिपाठी ने मौलाना की गिरफ्तारी की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि पुलिस की टीमें लगातार मौलाना की गिरफ्तारी के लिए दबिश दे रहीं थीं। आरोपित मोबाइल फोन नहीं रखता था इस वजह से उसको दबोचने में दिक्कत आ रही थी। लगभग 2 दिनों की फरारी के दौरान मौलाना मुख़्तार अपने कानपुर स्थित रिश्तेदारों के ही घर रुकता था। पुलिस से बचने के लिए वह लगातार लोकेशन भी बदल रहा था। आखिरकार उसे ग्वालटोली के ही एक इलाके से दबोच लिया गया।

पुलिस ने आगे बताया कि गिरफ्तार मौलाना की आस-पड़ोस में सामाजिक छवि अच्छी नहीं थी। वह 5 वक्त का नमाज़ी है। घटना से जुड़ा एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। DCP ने बताया कि इसकी जाँच और जरूरी कानूनी कार्रवाई की जा रही है। आरोपित पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 65(2) और पॉक्सो एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है। बताते चलें कि आरोपित मौलाना को पकड़ने के लिए पुलिस की 5 टीमें लगाई गईं थीं।

ये टीमें पिछले 48 घंटों में कई इलाकों में दबिश दे चुकी थीं। इस बीच पुलिस को सोमवार को मुखबिर से मौलाना की सटीक लोकेशन मिल गई।

क्या था पूरा मामला

बताते चलें कि वारदात जुमे के दिन अर्थात शुक्रवार (9 अगस्त, 2024) रात की है। तब शाम लगभग 7:30 पर मौलाना ने घर के आगे खेल रही एक बच्ची को चॉकलेट का लालच दे कर अंदर बुलाया था। यहाँ उसने पीड़िता के कपड़े उतार दिए थे और खुद भी नंगा हो गया था। वह बच्ची को अपनी हवस का शिकार बनाने ही वाला था कि अचानक आसपास के लोग पहुँच गए थे। उन्होंने मौलाना को रंगे हाथों पकड़ लिया था लेकिन वो कुछ लोगों को मज़हब का वास्ता दे कर फरार हो गया। आखिरकार सोमवार को पुलिस ने मौलाना को दबोच लिया।

‘अपने कॉलेज में बुलाया, टॉप उतार सीने पर हाथ मारा’: अंडरवियर में ‘बुआ’ के साथ 8000 की बात करता धराया सपा नेता नवाब, डिंपल यादव का करता है प्रचार

उत्तर प्रदेश के कन्नौज जिले में पुलिस ने नाबालिग लड़की से रेप के प्रयास में समाजवादी पार्टी के नेता बताए जा रहे नवाब सिंह यादव को गिरफ्तार किया है। नवाब यादव पर आरोप है कि उन्होंने नौकरी देने के बहाने पीड़िता को अपने डिग्री कॉलेज पर बुलाया और बलात्कार का प्रयास किया। जब पुलिस घटनास्थल पर पहुँची तो आरोपित आपत्तिजनक हालत में मिला था। इस घटना का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में नवाब सिंह यादव को अंडरवियर में लेट कर एक महिला से बात करते देखा जा सकता है।

क्या है FIR कॉपी में

कन्नौज की सदर कोतवाली में यह FIR सोमवार (12 अगस्त, 2024) की सुबह लगभग 7 बजे 15 वर्षीया पीड़िता की शिकायत पर दर्ज हुई है। शिकायत में पीड़िता ने बताया है कि 11 अगस्त को वह अपनी बुआ के साथ लखनऊ गई थी। लखनऊ से बुआ और भतीजी रात लगभग 11 बजे वापस लौटीं। वो कन्नौज के तिर्वा में उतरे और ऑटो से नवाब सिंह यादव के डिग्री कॉलेज चंदन महाविद्यालय पहुँचे। यहाँ पर नवाब सिंह ने पीड़िता को नौकरी लगवाने का लालच दे कर बुलवाया था।

पीड़िता के मुताबिक, कुछ देर बाद जब उनकी बुआ बाथरूम गईं तब नवाब सिंह यादव बदनीयत हो गया। उसने पीड़िता के कपड़े (टॉप) को उतार दिया। इसके बाद उसने नाबालिग के सीने पर हाथ भी मारा। आखिरकार पीड़िता ने सारी बात अपनी बुआ को बताई। बुआ ने पीड़िता को पुलिस बुलाने की सलाह दी। पुलिस ने घटनास्थल पर पहुँच कर आरोपित को गिरफ्तार कर लिया। नवाब सिंह यादव पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 76 के साथ पॉक्सो एक्ट के तहत भी कार्रवाई की गई है। ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है।

वायरल हो रहा है घटना का वीडियो

इस घटना से संबंधित होने का दावा करते हुए एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में पीड़िता बाहर से पुलिस के साथ कॉलेज के अंदर जा रही है। लड़की पुलिस को बताती है कि वो 9 बजे से पहले ही कॉलेज पहुँच गई थी। जब वो जाने लगी तो नवाब सिंह यादव ने ही उसे रात भर कॉलेज में रुकने के लिए कहा। पुलिस के पहुँचने पर पीड़िता के कपड़े अस्त-व्यस्त हालत में थे। पुलिस ने इस बावत पीड़िता से सवाल भी किया।

इसके बाद पुलिस पीड़िता को ले कर अंदर पहुँचती है। अंदर नवाब सिंह यादव अंडरवियर पहन कर लेटा था और पास बैठी एक महिला से बातें कर रहा था। महिला किसी 8 हजार का जिक्र करती सुनी जा सकती है। पीड़िता ने उस महिला को अपनी बुआ बताया। पुलिस ने दोनों का आपस में संबंध पूछा तो वो कोई जवाब नहीं दे पाए। पहले तो नवाब सिंह यादव ने पुलिस से लेट कर बात की लेकिन बाद में वो उठ कर अपनी पैंट पहनने लगे। पुलिस ने आरोपित के साथ पीड़िता की बुआ को भी कस्टडी में ले लिया था। ऑपइंडिया वायरल वीडियो की पुष्टि नहीं करता।

क्या कहना है पुलिस का

इस मामले में कन्नौज के पुलिस अधीक्षक का भी बयान सामने आया है। उन्होंने बताया कि पीड़िता की शिकायत पर पुलिस घटनास्थल पर पहुँची थी। यहाँ आरोपित आपत्तिजनक हालत में मिला जिसे FIR दर्ज कर के गिरफ्तार कर लिया गया है। आरोपित को अदालत में पेश किया गया है। पुलिस मामले की जाँच व अन्य कानूनी कार्रवाई में जुटी है

बताते चलें कि नवाब सिंह यादव समाजवादी पार्टी का कन्नौज से एक कद्दावर नेता माना जाता है। कुछ स्थानीय लोगों ने बताया कि समाजवादी पार्टी की सरकार में नवाब सिंह यादव की लखनऊ तक तूती बोलती थी। वह खुद को कन्नौज के सांसद का प्रतिनिधि बताता है। छात्र जीवन से ही नवाब सिंह समाजवादी पार्टी से जुड़ा हुआ है। नवाब सिंह यादव के कई फोटो अखिलेश और डिम्पल यादव के साथ सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। आरोपित की गिरफ्तारी के बाद सपा कार्यकर्ताओं ने पुलिस स्टेशन पर जमावड़ा भी लगाया।

BSF की गोली से मारा गया बांग्लादेशी तस्कर अब्दुल्ला: अँधेरे में झाड़ियों के पीछे से जवानों पर धारदार हथियारों से किया था हमला, बीड़ी लेकर जा रहा था अपने मुल्क

बांग्लादेश में तनाव के बीच पश्चिम बंगाल की सीमा पर BSF ने एक तस्कर को मार गिराया है। घटना मुस्लिम बहुल मालदा की है। तस्करों के एक समूह ने ‘सीमा सुरक्षा बल’ पर हमला कर दिया, जिसके बाद BSF ने भी जवाबी गोलीबारी की। उक्त तस्कर बांग्लादेशी है। सोमवार (12 अगस्त, 2024) को सुरक्षा एजेंसी ने खुद बयान जारी कर के इसकी जानकारी दी है। चाँदनी चक बॉर्डर आउटपोस्ट के पास की उक्त घटना है। एक बीएसएफ जवान ने पेट्रोलिंग के दौरान तस्करों को देखा था।

उक्त जवान जब सीमा के पास गश्त कर रहा था तब उसने 5-6 संदिग्धों के एक समूह को देखा जो अपने सिर पर कुछ सामान लेकर आ रहे थे। भारत की तरफ से ये बांग्लादेश में चीजें लेकर जा रहे थे। जवानों ने तुरंत पहचान लिया कि वो तस्कर हैं और उन्हें रुकने के लिए कहा। जवानों की बात को नज़रअंदाज़ करते हुए झाड़ियों के पीछे छिप कर इन तस्करों ने जवानों पर हमला बोल दिया। जवानों ने पहले 2 राउंड की फायरिंग आत्मरक्षा में की, क्योंकि तस्करों के पास खतरनाक धारदार हथियार थे।

BSF की गोलीबारी के बाद इन तस्करों ने अँधेरे और घनी झाड़ियों का फायदा उठा आकर भागना शुरू कर दिया। वो वापस भारतीय सीमा के भीतर ही भागने लगे। इनमें से एक बांग्लादेशी तस्कर बुरी तरह घायल हो गया था और उसे एक नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहीं इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। मृतक की पहचान अब्दुल्लाह के रूप में हुई है। वो बांग्लादेश के छपाई नवाबगंज जिले के ऋषिपारा गाँव का रहने वाला है। वो कई दिनों से तस्करी में लिप्त था।

BSF के पास विजन उपकरण थे, जिस कारण वो इन तस्करों को देख पाए। ये भी कहा जा रहा है कि जिस समूह को BSF ने देखा और जिसने जवानों पर हमला किया, वो अलग-अलग थे। जब कंपनी कमांडर ने आकर तलाशी अभियान चलाया तो बीड़ी के 6 बण्डल मिले। अब्दुल्लाह की मौत मुर्शिदाबाद स्थित महेसिल के अस्पताल में हुई है। बता दें कि बांग्लादेश में तख़्तापलट के बाद हिन्दुओं पर हमले की घटनाएँ बढ़ गई हैं। सीमा पर कई पीड़ित हिन्दू इकट्ठा हैं और बॉर्डर खोलने की माँग कर रहे हैं।

‘हम हिन्दुओं की सुरक्षा में विफल रहे’: जिस हिंसा को नकारते रहे भारत के लिबरल उसके लिए बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने माँगी माफ़ी, हिन्दू छात्रों से मुहम्मद यूनुस की मुलाकात

बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुखिया मुहम्मद यूनुस ने हिन्दू छात्र नेताओं के साथ बैठक की है। तख्तापलट के बाद हिन्दुओं पर लगातार हो रहे हमलों के बीच उन्होंने ये कदम उठाया है। बैठक में हिन्दुओं की सुरक्षा को लेकर चर्चा की जाएगी। 52 जिलों में हिन्दुओं पर हमले की सवा 200 के करीब घटनाएँ हो चुकी हैं। अंतरिम सरकार ने इसे गंभीर चिंता का विषय बताया है। हिन्दू समूहों ने अपनी 8 सूत्रीय माँग मुहम्मद यूनुस के सामने रखी है, जिसमें अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नया कानून बनाना भी शामिल है।

माँग की गई है कि पीड़ित हिन्दुओं को न्याय दिलाने के लिए फास्टट्रैक कोर्ट्स की स्थापना की जाए, हिन्दू कल्याण ट्रस्ट को अपग्रेड कर फाउंडेशन बनाया जाए, शिक्षा बोर्ड को आधुनिक बनाया जाए, शारदीय दुर्गा पूजा के दौरान 5 दिवसीय छुट्टी घोषित की जाए और अल्पसंख्यक कल्याण मंत्रालय का गठन किया जाए। इससे पहले मुहम्मद यूनुस ने इन घटनाओं को घृणित करार देते हुए युवाओं से अपील की थी कि वो हिन्दू, बौद्ध और ईसाई परिवारों की सुरक्षा करें।

अंतरिम सरकार में गृह विभाग के सलाहकार M शखावत हुसैन ने भी माना है कि अल्पसंख्यकों की सुरक्षा में चूक हुई है और उन पर हमले हुए हैं। उन्होंने इसके लिए माफ़ी माँगते हुए कहा कि ये जिम्मेदारी सिर्फ सरकार ही नहीं बल्कि बहुसंख्यक मुस्लिमों की है और दोनों अपना फर्ज निभाने में नाकामयाब रहे हैं। बांग्लादेश की सरकार भले माफ़ी माँग रही हो, भारत में मोहम्मद ज़ुबैर, राना अय्यूब, RJ सायेमा और अरफ़ा खानम शेरवानी जैसे लोग मानने को तैयार ही नहीं हैं कि बांग्लादेश में हिन्दुओं पर हमले हुए हैं।

बांग्लादेश में हिन्दू लगातार अपनी सुरक्षा को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, साथ ही भारतीय सीमा पर भी उन्होंने पलायन किया है। उधर इस्लामी भीड़ ने 1971 का वो मेमोरियल भी तोड़ डाला, जिसमें पाकिस्तानी सेना को बांग्लादेशियों पर क्रूरता करते हुए दिखाया गया है। इसी के बाद बांग्लादेश का गठन हुआ था। जिस पाकिस्तान के फौजियों ने यहाँ महिलाओं के साथ बलात्कार किया था, अब उसी पाकिस्तान के लिए बांग्लादेश के लोग मूर्तियाँ तोड़ रहे हैं।

क्रिकेटर शिवम दुबे की बीवी का ‘इस्लाम’ जागा, महिला के लिए लिखा- वक्त आ गया है इसकी खबर लेने का: शादी से पहले भी करती थी हिंदूफोबिक पोस्ट लाइक

भारतीय क्रिकेटर शिवम दुबे की बीवी अंजुम खान ने सोशल मीडिया पर महिला कार्यकर्ता व राहुल गाँधी से अक्सर सवाल करने वाली नाजिया इलाही खान के खिलाफ मुस्लिमों को भड़काने का काम किया है। अंजुम ने अपने पोस्ट में मुस्लिमों से अपील की है कि वो लोग नाजिया इलाही का बहिष्कार करें और उनकी खबर लें।

इंस्टाग्राम पर साझा की गई स्टोरी में अंजुम ने लिखा, “नबी की शान पर गुस्ताखी होने पर आपको गुस्सा नहीं आता तो आपका ईमान मर चुका है और अगर आपका ईमान जिंदा है तो रिपोस्ट करिए।” आगे अंजुम खान ने कहा, “सभी साथियों से गुजारिश है अब इस नाजिया इलाही खान की खबर लेने का वक्त आ गया है। मुस्लिमों के खिलाफ बोलते-बोलते ये हमारे आका के बारे में बहुत बेहूदा बातें कर रही है।”

बता दें कि ये पहली बार नहीं है जब अंजुम ने इस तरह से कट्टर इस्लावादी विचारधारा की मुरीद होने का प्रमाण दिया हो। इससे पहले उनका नाम हिंदू घृणा फैलाने वाले ट्वीट को लाइक करने पर उछला था। साल 2021 में कुछ पोस्ट सामने आए थे जिसे अंजुम ने लाइक किया हुआ था।

इन पोस्टों में से कुछ में लिखा था, “किसी को यूँ ही नहीं मिल जाती अंधभक्ति इस संसार में। इसके लिए पिछ#ड़े पर मुहर लगानी पड़ती है आसाराम के दरबार में।” इसी तरह एक लाइक किए गए ट्वीट में ‘संघियों’ को भला-बुरा कहा गया है और भाजपा को ‘गोबर भक्तों वाली पार्टी’ बताया गया है। साकिब शेख नाम के एक व्यक्ति के जिस ट्वीट को लाइक किया गया है, उसमें हिंदुस्तान को बाबा आदम का देश बताते हुए लिखा है, “तू अपनी माँ से जाकर पूछ किसकी औलाद है। कहीं कोई मुल्ला न निकल जाए।”

अंजुम के ये पोस्ट उस समय ज्यादा चर्चा में आए थे जब भारतीय क्रिकेट टीम के खिलाड़ी शिवम दुबे ने उनसे निकाह किया था। दोनों का निकाह 16 जुलाई 2021 को प्राइवेट समारोह में हुआ था। उसी के बाद AnjumKh60183110 नाम के हैंडल के बारे में दावे हुए थे कि ये शिवम दुबे की पत्नी अंजुम खान का है। इस अकॉउंट को उस समय खुद शिवम दुबे भी फॉलो करते थे इसलिए लोगों ने इसी अकॉउंट द्वारा लाइक पोस्टों को निकालकर सवाल उठाया था।

दलित बच्ची से निकाह कर बना दिया मुस्लिम, अब जमीन में दफन है लाश: अब्बा सहित धराया मुर्तजा, मृतका की विधवा माँ को भी फँसा रखा था

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में दलित समाज की एक नाबालिग लड़की के धर्मांतरण और बाल विवाह मामले में पुलिस ने रविवार (11 अगस्त, 2024) को 1 मौलवी सहित 2 आरोपितों को गिरफ्तार किया है। पीड़िता के पिता की मौत के बाद उसकी माँ को झाँसे में ले कर एक मुस्लिम युवक से बाल विवाह करवाया गया था। बाद में बच्चे को जन्म देने के दौरान पीड़िता की अस्पताल में मौत हो गई थी। मौत के बाद पीड़िता को चुपके से इस्लामिक तौर तरीकों से दफना दिया गया था। इस मामले में पीड़िता की माँ और निकाह करने वाले मुर्तजा को पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है।

यह मामला लखनऊ कमिश्नरेट के दक्षिणी क्षेत्र में आने वाले थाना मोहनलालगंज का है। यहाँ 30 जून 2024 को अनुसूचित जाति (SC वर्ग) के एक व्यक्ति ने पुलिस में तहरीर दी थी। तहरीर देने वाले व्यक्ति ने बताया था कि उनके बड़े भाई की मृत्यु 2 साल पहले हो चुकी है। आरोप है कि मृतक की पत्नी का अवैध संबंध पड़ोस में ही रहने वाले मुर्तजा नाम के युवक से हो गया था। मुर्तजा अक्सर मृतक की पत्नी से मिलने उसके घर आने-जाने लगा। इसी दौरान मुर्तजा की गंदी नजर मृतक की 15 वर्षीया बेटी पर भी पड़ी। वह नाबालिग से निकाह की जिद पर अड़ गया।

मुर्तजा से कथित प्यार के जाल में फँसी नाबालिग की माँ ने आखिरकार हामी भर दी। साल 2023 में नाबालिग से उम्र में कई साल बड़े मुर्तजा का निकाह नाबालिग से हो गया। इस निकाह के साथ पीड़िता को इस्लाम कबूल करवा दिया गया। नाबालिग का निकाह और धर्मांतरण UP के ही बहराइच जिले की एक मस्जिद में हुआ। इस मस्जिद का मौलवी मोहम्मद अहमद इन करतूतों में सक्रिय रूप से शामिल रहा। इस्लाम कबूल करवाने के बाद मस्जिद में ही पीड़िता को नया नाम सानिया दिया गया। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है।

पीड़िता के चाचा ने बताया कि उस समय उन सभी ने धर्मांतरण और बाल विवाह का विरोध किया था। तब आरोपितों ने धमकी देते हुए मुँह बंद रखने के लिए कहा था। निकाह के कुछ ही दिनों बाद नाबालिग पीड़िता गर्भवती हो गई। बच्चे को जन्म देने से पहले की पीड़िता की तबीयत बिगड़ी जिसकी वजह से उसकी मौत हो गई। मौत के बाद पीड़िता को चुपके से इस्लामी तौर-तरीकों से दफना दिया गया। इस बाबत जब शिकायतकर्ता ने हालचाल जानना चाहा तो आरोपितों ने एक बार उसे धमकाया और अपने काम से काम रखने ही हिदायत दी।

आरोप है कि मुर्तजा आपराधिक स्वभाव और हिन्दू लड़कियों पर गंदी नजर रखने वाला इंसान है। इस शिकायत पर पुलिस ने 30 जून, 2024 को ही FIR दर्ज कर ली थी। यह केस IPC की धारा 376 और 504 के साथ SC/ST एवं पॉक्सो एक्ट में दर्ज हुआ है। आरोपितों पर बाल विवाह अधिनियम के तहत भी कार्रवाई की गई है। पुलिस ने 2 जुलाई, 2024 को ही आरोपित मुर्तजा और मृतका की माँ को गिरफ्तार कर के जेल भेज दिया था।

जाँच के दौरान इन करतूतों में मौलवी मोहम्मद अहमद और मुर्तजा के अब्बा मुश्ताक अली की भी संलिप्तता प्रकाश में आई। रविवार (11 अगस्त) को पुलिस ने इन दोनों आरोपितों को भी दबोच कर जेल भेज दिया। मामले में जाँच व अन्य कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

वायनाड पीड़ितों की मदद के नाम पर कॉन्ग्रेस नेता ने इकट्ठा किया चंदा, फंड दूसरी जगह लगा दिया: यूथ कॉन्ग्रेस अध्यक्ष ने ही खोली पोल, विवाद बढ़ने पर हटे पीछे

केरल के वायनाड में जो प्रकृति आपदा के कारण हुआ उसके बाद देश भर में कोशिश हो रही है कि पीड़ितों की कैसे भी हर संभव मदद की जा सके। इस क्रम में आरएसएस के स्वयंसेवक जमीन पर उतरकर अपनी जी-जान लगाए हुए हैं, वहीं दूसरी ओर कोझिकोड कॉन्ग्रेस के कुछ कार्यकर्ता हैं जिन्हें लेकर खबर फैली कि वो पीड़ितों के लिए राहत फंड एकत्रित करने के नाम पर घोटाला कर रहे हैं। बाद में इस खबर से यू-टर्न ले लिया गया, लेकिन चर्चा अब भी है कि कहीं कॉन्ग्रेस को बदनामी से बचाने के लिए कहीं ये पैसों का गबन न छिपाया जा रहा हो।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ये जानकारी सामने आई थी कि कोझिकोड के चेलानूर निर्वाचन क्षेत्र के युवा कॉन्ग्रेस के उपाध्यक्ष ने पीड़ितों की मदद के नाम पर पैसे इकट्ठा करके उनका दुरुपयोग किया। रिपोर्ट्स ये भी बताती हैं कि इस बारे में शिकायत पहले खुद निर्वाचन क्षेत्र के अध्यक्ष अजल दिवानंदन ने ही की थी। हालाँकि बाद में वो पलट गए।

दिवानंदन की शिकायत के अनुसार, उपाध्यक्ष अश्विन एडावलथ और कार्यकर्ता अनस ने पीड़ितों की मदद के नाम पर पहले धन जुटाया और बाद में उसे गबन कर लिया। शिकायत में यह भी कहा गया है कि दोनों व्यक्तियों ने आवश्यक वस्तुओं को इकट्ठा करने के लिए चेलनूर में कोई कागजी काम नहीं किया और विवादास्पद रूप से धन उगाही की, जिससे हकीकत में जो जरूरत के पैसे जमा होने थे वो नहीं हो पाए।

बताया जा रहा है कि इस मामले में विवाद बढ़ने और शिकायत लीक होने के बाद राज्य नेतृत्व ने हस्तक्षेप किया। पहले जहाँ खबर आई थी कि अध्यक्ष की शिकायत के खिलाफ उपाध्यक्ष ने कहा है कि वो जाकर प्रदेश नेतृत्व से शिकायत करेंगे वहीं बाद में पता चला कि शिकायत दर्ज कराने वाले निर्वाचन क्षेत्र के अध्यक्ष ने खुद ही इस मामले में यू-टर्न ले लिया है। उनका कहना है कि उसने ऐसी कोई शिकायत दी ही नहीं। वहीं युवा कॉन्ग्रेस के जिला नेतृत्व ने भी इनकार किया है और कहा कि चेनन्नूर में धन उगाही से संबंधित कोई भी शिकायत उनके संज्ञान में आई ही नहीं है।

केरल में कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं के इस प्रकार के यूटर्न के बीच ये खबर सोशल मीडिया पर खूब शेयर हो रही। आंध्र प्रदेश के भाजपा के राज्य उपाध्यक्ष विष्णु वर्धन रेड्डी ने कहा, कॉन्ग्रेस न केवल भ्रष्टाचार में लिप्त है बल्कि अब अपने स्वार्थ के लिए एक आपदा का फायदा उठाकर नई नीचता पर उतर गई है। यह मानवता के साथ घिनौना विश्वासघात है!

अयोध्या में मोईद, कन्नौज में नवाब: अब अखिलेश-डिंपल यादव का करीबी गिरफ्तार, नाबालिग को नौकरी के लिए बुलाया… कपड़े उतार रेप की कोशिश

उत्तर प्रदेश के कन्नौज जिले में समाजवादी पार्टी के एक नेता पर नाबालिग लड़की से रेप की कोशिश का आरोप लगा है। पीड़िता अपनी बुआ के साथ सपा नेता नवाब सिंह यादव के डिग्री कॉलेज में नौकरी माँगने गई थी। यहाँ पर नवाब सिंह यादव ने पीड़िता से छेड़छाड़ करते हुए उसके कपड़े तक उतरवा डाले। पीड़िता की बुआ ने फोन कर पुलिस को बुलाया। अखिलेश यादव के करीबी बताए जा रहे आरोपित पर FIR दर्ज कर के गिरफ्तार कर लिया गया है। घटना रविवार (11 अगस्त।, 2024) की है।

घटना कन्नौज के कोतवाली नगर की है। यहाँ के गाँव अडंगापुर में समाजवादी पार्टी के नेता और पूर्व ब्लॉक प्रमुख नवाब सिंह यादव का चौधरी चंदन सिंह महाविद्यालय है।

यहाँ नवाब सिंह ने पीड़िता के कपड़े उतार दिए और छेड़खानी करने लगा। पीड़िता ने इसका विरोध किया तो मामले की जानकारी बाहर खड़ी उनकी बुआ को हो गई। उन्होंने फ़ौरन डायल 112 पर कॉल कर के पुलिस बुला ली। पुलिस ने आरोपित को हिरासत में ले लिया। बताया जा रहा है कि उस समय पीड़िता आपत्तिजनक हालात में थी। आरोपित के साथ पीड़िता व उसकी बुआ को कोतवाली सदर लाया गया। यहाँ पीड़िता द्वारा तहरीर ली गई जिस पर नवाब सिंह यादव के खिलाफ पॉक्सो एक्ट सहित भारतीय न्याय संहिता की गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया गया।

आरोपित को गिरफ्तार कर लिया गया है। पीड़िता का मेडिकल परीक्षण के साथ काउंसिलिंग भी करवाई जा रही है। गिरफ्तार किया गया सपा नेता अखिलेश यादव का बेहद करीबी बताया जा रहा है। उसकी कई तस्वीरें अखिलेश और डिम्पल यादव के अलावा कई बड़े सपा नेताओं के साथ वायरल हो रहीं हैं। अपनी सफाई में नवाब सिंह यादव ने खुद पर लगे आरोपों को राजनैतिक साजिश करार दिया है। नवाब सिंह यादव की गिरफ्तारी की सूचना पाते ही उनके कई समर्थक थाने पर जुटने शुरू हो गए। इन समर्थकों में अधिकतर समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता हैं। इन्होंने आरोपित के समर्थन में नारेबाजी भी की।

ये मामला तब आया है, जब अयोध्या में सपा नेता मोईद खान और उसके नौकर राजू खान पर निषाद समाज की नाबालिग लड़की के सामूहिक बलात्कार का आरोप लगा। जिस बेकरी की दुकान में ये घटना हुई, मोईद खान के उस प्रतिष्ठान को बुलडोजर चला कर ध्वस्त कर दिया गया है। मोईद खान अयोध्या से सपा सांसद अवधेश प्रसाद का करीबी है। दोनों की साथ में कई तस्वीरें भी सामने आई हैं। अवधेश प्रसाद के लिए मोईद खान ने चुनाव प्रचार भी किया था।

’11 साल में हिंसा की 3600+ घटनाएँ, बांग्लादेशी हिन्दुओं के लिए भारत की संसद में पास हो प्रस्ताव’: 57 बुद्धिजीवियों का पत्र, लिखा – पीड़ितों की मदद के लिए कदम उठाए मोदी सरकार

बांग्लादेश में शेख हसीना द्वारा प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देकर देश छोड़ने के बाद वहाँ हिन्दुओं के खिलाफ हिंसा शुरू हो गई। कई हिन्दुओं की हत्याएँ हुईं, मंदिरों पर हमले हुए। बांग्लादेश-भारत सीमा पर कई पीड़ित हिन्दू पलायन कर के जमे हुए हैं और गुहार लगा रहे हैं कि उन्हें भारतीय सीमा में आने दिया जाए। आँकड़ों की मानें तो ऐसी सवा 200 से भी अधिक घटनाएँ हुई हैं। पीड़ित हिन्दू लगातार भारत से मदद की गुहार लगा रहे हैं, अब तक किसी भी अंतरराष्ट्रीय संस्था या संगठन ने इनके लिए आवाज़ नहीं उठाई है।

अब 57 बुद्धिजीवियों ने बांग्लादेश में हिन्दुओं के नरसंहार पर चिंता जताते हुए भारत सरकार से मदद का आग्रह किया है। हिन्दुओं के उत्पीड़न पर चिंता जताते हुए इन बुद्धिजीवियों ने लिखा कि हिन्दुओं को लक्षित कर के हो रही इस हिंसा ने एक नए पैटर्न की तरफ विश्व का ध्यान आकर्षित कराया है। इस पत्र में मेहरपुर में इस्कॉन मंदिर को जलाए जाने और हिन्दुओं की मॉब लिंचिंग का जश्न मनाए जाने के वीडियो का जिक्र करते हुए बताया गया है कि ये परेशान करने वाली घटनाएँ हैं।

पत्र में कहा गया है कि ऐसी नहीं है कि हिन्दुओं पर हमले की कहीं-कहीं इक्की-दुक्की घटनाएँ हो रही हैं, ऐसा भी नहीं है कि इससे पहले ऐसा नहीं हुआ है। जिक्र किया गया है कि कैसे हिन्दुओं पर हमले का बांग्लादेश में एक पूरा का पूरा इतिहास रहा है, राजनीतिक अस्थिरता के दौरान और तेज़ हो जाता है। याद दिलाया गया है कि कैसे बांग्लादेश जब पूर्वी पाकिस्तान हुआ करता था तब पाकिस्तानी फ़ौज ने 25 लाख हिन्दुओं की हत्याएँ की थीं। 2013 से लेकर अब तक बांग्लादेश में हिन्दुओं पर हमले की 3600 से भी अधिक घटनाएँ हो चुकी हैं।

बांग्लादेश से हिन्दुओं के दुःखद पलायन को याद करते हुए पत्र में आग्रह किया गया है कि उनकी सुरक्षा के लिए कदम उठाया जाए। चुने हुए जनप्रतिनिधियों से अपने-अपने स्तर पर इस मामले को उठाने और भारत सरकार द्वारा उच्चतम स्तर पर इसका समाधान करने के लिए कदम उठाने की अपील की गई है। साथ ही भारतीय संसद से इसके खिलाफ प्रस्ताव पारित करने के लिए कहा गया है। पत्र में अपील की गई है कि अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के साथ मिल कर हिन्दुओं की सुरक्षा के लिए कदम उठाया जाए, पीड़ितों को सहायता से लेकर शरण दिए जाने तक के विकल्पों पर विचार हो।

इस पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों में लेखक विक्रम संपत, अभिनव अग्रवाल, अरुण कृष्णन, हर्ष गुप्ता मधुसूदन, स्मिता बरुआ, वैज्ञानिक आनंद रंगनाथन और इंजीनियर योगिनी देशपांडे शामिल हैं। सभी 57 बुद्धिजीवियों ने एक सुर में दोहराया है कि भारतीय संसद द्वारा इस हिंसा को ‘हिन्दुओं के खिलाफ सांप्रदायिक हिंसा’ की मान्यता दी जाए। साथ ही उन खबरों का रेफरेंस भी लगाया गया है, जिसमें हिन्दुओं पर हमले की बातें हैं। भारत का इस्लामी-वामपंथी गिरोह लगातार इन हमलों को नकार रहा है।

पहले खालिदा जिया को जेल से छोड़ा, अब अंतरिम सरकार का मुखिया बनते ही मोहम्मद यूनुस भ्रष्टाचार में बरी: शेख हसीना के बांग्लादेश छोड़ते ही विरोधियों के जुर्म ‘माफ’

बांग्लादेश में जारी हिंदू विरोधी हिंसा और पुलिस थानों पर हमले के बीच एक तरफ मुल्क की आर्थिक स्थिति बिगड़ रही है, वहीं इसी बीच अंतरिम सरकार के प्रमुख चुने जाने वाले अर्थशास्त्री मोहम्मद यूनुस के ऊपर से एक के बाद एक आपराधिक केस हट रहे हैं।

12 अगस्त 2024 को खबर आई है कि उनके ऊपर से भ्रष्टाचार मामले का केस हट गया है। 84 साल के अर्थशास्त्री मोहम्मद यूनुस ने चंद दिन पहले ही अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार के रूप में शपथ ली थी। उनका नाम उन्हीं छात्रों द्वारा सुझाया गया था जिन्होंने बांग्लादेश में हुए प्रदर्शन का नेतृत्व किया।

मोहम्मद यूनुस इससे पहले अंतरिम सरकार में प्रमुख पद पर शपथ लेते कोर्ट से उन्हें केसों में राहत मिलनी शुरू हो गई थी। जैसे- 7 अगस्त 2024 को भी श्रम कानून उल्लंघन मामले में बरी किया गया था। उस समय उनके साथ ग्रामीण टेलीकॉम के तीन शीर्ष अधिकारियों को भी 25.22 करोड़ टके की हेरफेर मामले में राहत मिली थी। कहा जा रहा है कि आने वाले समय में मोहम्मद यूनुस को कई अन्य मामलों में भी रिहाई मिल सकती है।

इस मामले में भी ढाका के विशेष न्यायाधीश मोहम्मद रबीउल आलम ने मोहम्मद यूनुस के साथ नूरजहाँ और अन्य 12 आरोपितों को बरी किया है। भ्रष्टाचार मामले में आरोपितों में से एक नूरजहाँ को भी अंतरिम सरकार में जगह मिली है।0

इन लोगों के अलावा बता दें कि बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया, जिन्हें शेख हसीना और भारत की धुर विरोधी कहा जाता है उन्हें भी हसीना सरकार के जाते ही रिहाई मिल गई। वो 2018 से भ्रष्टाचार मामले में जेल में बंद थीं। शेख हसीना के जाने के बाद जब उनको रिहाई मिली तो यही अनुमान लगाए गए कि संभव है अगली प्रधानमंत्री देश की खालिदा जिया ही बनें।

प्रेस बयान में उनकी रिहाई को लेकर कहा गया था कि ये फैसला राष्ट्रपति ने विपक्षी पार्टी के सदस्यों के साथ बैठक किया है। वह बांग्लादेश में मार्च 1991 से मार्च 1996 तक और फिर जून 2001 से अक्टूबर 2006 तक बांग्लादेश की प्रधानमंत्री रही थीं और बांग्लादेश के पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान की पत्नी थीं। साल 2007 में बांग्लादेश में हो रहे चुनाव के दौरान फैली हिंसा के दौरान बनी कार्यकारी सरकार ने खालिदा जिया और उनके दो बेटों पर भ्रष्टाचार का मुकदमा दर्ज कराया था. इसी मामले में साल 2018 में उनको सजा सुनाई गई थी

बता दें कि एक ओर बांग्लादेश में भ्रष्टाचार मामले में इस तरह तमाम आरोपित रिहा होते जा रहे हैं। वहीं दूसरी ओर मुल्क के केंद्रीय बैंक निर्णय कैश की कमी के कारण परेशान हैं। उन्होंने पहले निर्णय लिया था कि वो किसी को 2 लाख टके से ज्यादा निकालने की अनुमति नहीं देंगे। बाद में ये रकम और ज्यादा घटाकर 1 लाख टका कर दी गई जिसके कारण आमजन से लेकर व्यापारी तक परेशान हैं।