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बांग्लादेश में सड़कों पर उतरे हिंदू, आवामी लीग के लोग, खाई लड़ाई की कसम: सेना की गाड़ी जलाई, हथियार छीने, जवानों ने भाग कर बचाई जान

बांग्लादेश में शेख हसीना सरकार को आरक्षण की आड़ में हिंसा और प्रदर्शन के दम पर उखाड़ फेंका गया और पूरे देश में हिंदुओं के साथ ही आवामी लीग पार्टी के कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया जाने लगा। कई जगहों पर आवामी लीग के नेताओं, कार्यकर्ताओं और हिंदुओं का कल्तेआम किया गया, जिसके बाद अब दोनों तरफ से पलटवार शुरू हो गया है।

बांग्लादेश में ढाका से लेकर खुलना तक हिंदुओं ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया, तो आवामी लीग के नेताओं ने शेख हसीना के गृह जिले गोपालगंज से हुँकार भरी है। उन्होंने शेख हसीना की वापसी तक लड़ाई लड़ने का ऐलान किया है। इस बीच, आवामी लीग के कार्यकर्ताओं और सेना में झड़प भी हो गई, जिसमें सैनिकों समेत कई लोग घायल हो गए। इस दौरान एक सैनिक से उसके हथियार भी छीन लिए गए। वहीं, शेख हसीना ने कहा कि वो जल्द बांग्लादेश लौटेंगी।

हिंदुओं का प्रदर्शन, लगातार दूसरे दिन सड़कों पर लाखों लोग

बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे हमले के खिलाफ हजारों प्रदर्शनकारियों ने ढाका, चटगाँव, बरिसाल, तंगेल और कुरीग्राम जैसे प्रमुख शहरों में प्रदर्शन किया और कहा कि हिंदुओं को बांग्लादेश में रहने का अधिकार है। शेख हसीना के नेतृत्व वाली सरकार को हटाने के बाद देश के विभिन्न हिस्सों में घरों, दुकानों और मंदिरों पर हमलों के विरोध में उन्होंने शनिवार (10 अगस्त) को लगातार दूसरे दिन ढाका में शाहबाग चौराहे को अवरुद्ध कर दिया।

टाइम्स ऑफ इंडिया ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है इस प्रदर्शन के दौरान “अगस्त 2024: बांग्लादेशी हिंदुओं को बचाओ। हमें न्याय और सुरक्षा चाहिए।”, “हिंदुओं को बचाओ”, “मेरे मंदिरों और घरों को क्यों लूटा जा रहा है? हमें जवाब चाहिए”, “स्वतंत्र बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार जारी नहीं रहेगा”, “धर्म व्यक्तियों के लिए है, राज्य सभी के लिए है”, “हिंदुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करें” जैसे नारे लगाए गए।

शाहबाग में प्रदर्शन कर रहे हिंदू अल्पसंख्यकों ने हिंदुओं और उनके घरों, मंदिरों और व्यवसायों पर हुए हमलों के खिलाफ मुआवजे की मांग की है। बांग्लादेश में दो हिंदू संगठनों बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद और बांग्लादेश पूजा उद्जापन परिषद के अनुसार, 5 अगस्त को शेख हसीना के नेतृत्व वाली सरकार को हटाने के बाद से बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदायों के सदस्यों को 52 जिलों में हमलों की कम से कम 205 घटनाओं का सामना करना पड़ा है। हजारों बांग्लादेशी हिंदू हिंसा से बचने के लिए पड़ोसी देश भारत भागने की कोशिश कर रहे हैं।

बैकफुट पर आए मोहम्मद यूनुस, नुकसान पहुँचाने से रोकने की अपील

हिंदुओं के इस विरोध प्रदर्शन को देखते हुए बांग्लादेश की अंतरिम सरकार को बैकफुट पर आना पड़ा है। बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुखिया प्रोफेसर मुहम्मद यूनुस ने शनिवार को अल्पसंख्यक समुदायों खासकर हिंदुओं पर हो रहे हमलों की निंदा करते हुए उन्हें घृणित बताया। उन्होंने पूछा कि क्या वे इस देश के लोग नहीं हैं? आप देश को बचाने में सक्षम हैं, क्या आप कुछ परिवारों को नहीं बचा सकते हैं?

प्रोफेसर यूनुस ने बेगम रोकेया विश्वविद्यालय में छात्रों को संबोधित करते हुए कहा, “आपको कहना चाहिए कि कोई भी उन्हें नुकसान नहीं पहुँचा सकता है। वे मेरे भाई हैं। हमने साथ मिलकर लड़ाई लड़ी है और हम साथ रहेंगे।” उन्होंने छात्रों से सभी हिंदू, ईसाई और बौद्ध परिवारों को नुकसान से बचाने का आग्रह किया।

आवामी लीग के कार्यकर्ताओं ने भी संभाला मोर्चा, सड़कों पर उतरे, सेना से झड़प

बांग्लादेश में हो रहे अत्याचारों के खिलाफ एक तरफ हिंदू सड़कों पर उतरे, तो दूसरी तरफ आवामी लीग के कार्यकर्ता भी सड़कों पर उतर गए हैं। देश में कानून व्यवस्था संभाल रही सेना से भी उनकी झड़प की खबरें आ रही हैं। गोपालगंज जिले में शनिवार को हजारों कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन के दौरान सेना के एक वाहन को आगे के हवाले कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने घटना के दौरान सेना के एक जवान का हथियार भी छीन लिया।

इसघटना में सेना के पाँच जवानों समेत 15 लोग घायल हुए हैं। रिपोर्ट करने दो पत्रकारों के साथ भी मारपीट की गई है। गोपालगंज कैंप के लेफ्टिनेंट कर्नल मकसूदुर रहमान ने स्थानीय मीडिया से घटना की पुष्टि की है।

बांग्लादेश के प्रमुख अखबार प्रथम आलो ने स्थायीय सूत्रों के हवाले से बताया है कि अवामी लीग ने शेख हसीना की वापसी की मांग को लेकर रैली बुलाई थी। इसमें गोपीनाथपुर और जलालाबाद यूनियन के साथ ही आस-पास के क्षेत्रों में हजारों की संख्या में अवामी लीग के नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने ढाका-खुलना राजमार्ग बंद कर दिया।

रास्ता खुलवाने के लिए सेना के एक जवानों की एक टीम मौके पर पहुँची। भीड़ को हटाने के लिए सेना के जवानों ने लाठीचार्ज कर दिया। इस बीच सेना की तरफ से फायरिंग किए जाने से प्रदर्शनकारियों का गुस्सा भड़क गया और जवानों की पिटाई शुरू कर दी। सेना के जवानों को घटनास्थल से भागकर एक घर शरण लेनी पड़ी। प्रदर्शनकारियों ने सेना के एक जवान से हथियार छीन लिए और उनके वाहन को आग लगा दी।

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के गृह जिले गोपालगंज में आवामी लीग के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने सर पर कफन बांधकर शेख हसीना को देश में वापस लाने की कसम खाई। गोपालगंज के कोटालीपारा में जुटे हजारों आवामी लीग कार्यकर्ताओं ने कहा कि शेख हसीना को देश छोड़ने के लिए मजबूर किया गया था। उन्होंने संघर्ष के जरिए उन्हें वापस लाने की शपथ ली।

गोपालगंज जिला आवामी लीग के अध्यक्ष महबूब अली खान ने बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान की तस्वीर के सामने सभी को शपथ दिलाते हुए हा, ‘जब तक आवामी लीग की अध्यक्ष और बंगबंधु की बेटी शेख हसीना जब तक वापसी नहीं आ जाती, हमारा संघर्ष जारी रहेगा। हम सड़कों पर हैं और सड़कों पर ही रहेंगे।’

शेख हसीना का वादा, मैं वापस आऊँगी, अमेरिका पर लगाए गंभीर आरोप

इस बीच, बांग्लादेश से स्वयं निर्वासन झेल रही पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने हुँकार भरी है। उन्होंने अमेरिका पर एक आईलैंड पर कब्जे को लेकर गंभीर आरोप लगाए और बताया कि इस तख्तापलट में अमेरिका का हाथ है। उन्होंने कट्टरपंथियों से भी विदेशी ताकतों के हाथों में न खेलने की अपील की। वहीं, उन्होंने साफ कहा कि वो वापस बांग्लादेश पहुँचेंगी।

इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक अपने करीबी सहयोगियों के माध्यम से भिजवाए एक संदेश में हसीना ने कहा, “मैंने इस्तीफा दे दिया, ताकि मुझे शवों का जुलूस नहीं देखना पड़े। मैं सत्ता में बनी रह सकती थी यदि मैंने सेंट मार्टिन द्वीप की संप्रभुता अमेरिका के सामने समर्पित कर दी होती और उसे बंगाल की खाड़ी में अपना प्रभुत्व स्थापित करने की अनुमति दे दी होती। मैं अपने देश के लोगों से विनती करता हूँ, कृपया कट्टरपंथियों के बहकावे में न आएँ।”

ईटी ने अपनी रिपोर्ट में शेख हसीना के हवाले से कहा, “इन खबरों से मेरा दिल रो रहा है कि मेरी पार्टी आवामी लीग के कई नेता मारे गए, कार्यकर्ताओं को परेशान किया जा रहा है और उनके घरों में तोड़फोड़ और आगजनी की जा रही है। अल्लाह की रहमत से मैं जल्द ही वापस लौटूँगी। आवामी लीग चुनौतियों से लड़कर बार-बार खड़ी हुई है। मैं हमेशा बांग्लादेश के भविष्य के लिए दुआ करूँगी, जिस राष्ट्र का सपना मेरे महान पिता ने देखा था और उसके लिए प्रयास किया। वह देश जिसके लिए मेरे पिता और परिवार ने अपनी जान दे दी।”

जम्मू-कश्मीर के मार्तण्ड मंदिर में भूमि पूजन, बन रहा भव्य शिव मंदिर, श्रद्धालुओं के लिए यात्री निवास भी: इस्लामी और बॉलीवुड वाले बताते थे ‘शैतान की गुफा’

केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में सरकार किस तरह से सक्रिय है और सरकारी फैसलों पर किस तेजी से अमल लाया जा रहा है, उसका एक उदाहरण है विश्व प्रसिद्ध मार्तण्ड मंदिर। कुछ समय पहले तक सदियों से वीरान रहे जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग में स्थित मार्तण्ड मंदिर को लेकर 1 अप्रैल 2024 को बैठक बुलाई गई थी। उस बैठक में क्या फैसले हुए, इसकी जानकारी शायद मीडिया ने देने की जरूरत नहीं समझी। लेकिन इस बैठक से जो निकलकर आया है, वो धरातल पर दिखने लगा है। जी हाँ, मार्तण्ड सूर्य मंदिर, जो वीरानी में था, जिसमें पिछले साल ही एलजी मनोज सिन्हा के पूजा करने के बाद पूजा-पाठ शुरू हुई है, उसके आसपास तेजी से इन्फ्रास्ट्रक्चर बनाया जा रहा है, ताकि मार्तण्ड सूर्य मंदिर तक लोग आसानी से पहुँच सकें।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अनंतनाग के मट्टन में स्थित मार्तण्ड (सूर्य) मंदिर में सरकार यात्री निवास बनवा रही है। 3 मंदिर इस यात्री निवास में दर्जनों कमरे होंगे और अन्य सुविधाएँ भी, ताकि हिंदू तीर्थ यात्री आराम से पूजा पाठ कर सकें और उन्हें किसी तरह की जल्दबाजी न करनी पड़े। यात्री वहाँ आराम भी कर सकें, साथ ही उनके सुरक्षा की भी अच्छी व्यवस्था हो, सरकार कुछ इस तरह के कदम उठा रही है। यही नहीं, सूर्य मंदिर के पास ही भव्य शिव मंदिर का भी निर्माण किया जा रहा है। इसकी शुरुआत भी हो चुकी है।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक, शनिवार (10 अगस्त 2024) को वित्तीय विभाग के विशेष सचिव केके सिद्धा ने निर्माण कार्य का भूमि पूजन कर शिलान्यास किया। इस मौके पर ट्रस्ट के सदस्यों के अलावा बड़ी संख्या में कश्मीरी हिंदुओं ने भाग लिया। इस यात्री निवास का निर्माण मार्तण्ड तीर्थ ट्रस्ट करवा रहा है। यात्री निवास के साथ ही भव्य शिव मंदिर भी बनाया जाएगा। श्रीनगर से लगभग 63 किलोमीटर दक्षिण में मट्टन के केहरिबल क्षेत्र में स्थित यह मंदिर देश के सबसे पुराने सूर्य मंदिरों में से एक माना जाता है और अमूल्य प्राचीन आध्यात्मिक विरासत का प्रतीक है।

बता दें कि 1 अप्रैल को इस मंदिर को लेकर बड़ी बैठक की गई थी। इस बैठक के लिए बाकायदा अधिसूचना जारी की गई थी, जिसमें लिखा था, “संस्कृति विभाग के प्रधान सचिव ने एक बैठक बुलाई है, जिसमें कश्मीर के प्राचीन मंदिरों के जीर्णोद्धार/संरक्षण/सुरक्षा पर चर्चा की जाएगी।”

अयोध्या से लाई कलश भी स्थापित

ओडिशा के कोणार्क और गुजरात के मोढेरा की तरह कश्मीर का मार्तण्ड सूर्य मंदिर भी भगवान सूर्य को समर्पित भव्य हिन्दू मंदिरों में से एक है, जिसका वैभव प्राचीन काल में बहुत बड़ा हुआ करता था। फ़िलहाल ये ASI के संरक्षण में है। राम जन्मभूमि प्राण प्रतिष्ठा वाले दिन 22 जनवरी, 2024 को यहाँ हिन्दू कार्यकर्ताओं ने आकर पूजा-अर्चना भी की थी। वहाँ हनुमान चालीसा का पाठ हुआ, भगवा ध्वज लहराया गया और मंदिर की परिक्रमा की गई।

साल 2022 में सौ से ज्यादा श्रद्धालुओं ने की थी पूजा-अर्चना

इस्लामिक कट्टरपंथी जिस मार्तण्ड मंदिर को शैतान की गुफा कहते थे, वो सदियों से निर्जन पड़ी थी, लेकिन पिछले कुछ सालों में हिंदुओं ने अपने आराध्य की पूजा-पाठ फिर से शुरू कर दी है। आतंकवाद प्रभावित अनंतनाग में मई 2022 में एक साथ सौ से अधिक लोग पहुँचे थे और उन्होंने पूजा-पाठ की थी। पूजा के दौरान श्रद्धालुओं के हाथ में भगवा झंडे भी थे, जिन पर ॐ अंकित था। साथ ही उनके हाथों में देश का राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा भी था। भगवद्गीता का पाठ भी किया गया। बता दें कि एएसआई इस मंदिर में पूजा-पाठ से मना करता है, वो कानूनों का हवाला देता है, लेकिन श्रद्धालुओं के आगे उसकी एक नहीं चलती। हालाँकि सरकार इस दिशा में बिल लाने के बारे में तैयारी कर रही थी, ताकि ऐसे प्राचीन मंदिरों में फिर से पूजा-पाठ शुरू हो सके।

गौरतलब है कि इस्लामिक कट्टरपंथी मार्तण्ड मंदिर के इलाके को शैतान की गुफा कहते हैं। बॉलीवुड से लेकर कथित एजुकेशन प्लेॉफॉर्म्स तक पर इस मंदिर के बारे में झूठ फैलाया जाता रहा है, जिसका अब तीखा विरोध होने लगा है। कुछ समय पहले ही मशहूर ऑनलाइन एजुकेशन प्लेटफॉर्म अनएकेडमी ने अपने लेख में ऐतिहासिक मार्तंड सूर्य मंदिर को “शैतान की गुफा” बताया, जिसके बाद सोशल मीडिया पर बवाल मच गया। सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया के बाद अनएकेडमी को अपनी भूल को सुधारना पड़ा।

मार्तंड सूर्य मंदिर के इतिहास के बारे में अनएकेडमी के लेख में लिखा था, “मार्तंड सूर्य मंदिर, जिसे शैतान की गुफा भी कहा जाता है, भारत के जम्मू और कश्मीर में अनंतनाग शहर के पास स्थित एक हिंदू तीर्थस्थल है। इसे 8वीं शताब्दी ईस्वी में बनाया गया था और यह हिंदू धर्म के प्रमुख सूर्य देवता सूर्य को समर्पित था; सूर्य को उनके संस्कृत नाम मार्तंड से भी पहचाना जाता है। कश्मीर के पूर्व मुस्लिम सम्राट सिकंदर शाह मिरी के आदेश पर, 15वीं शताब्दी में शाह मिरी साम्राज्य की सेना ने इस मंदिर को ध्वस्त कर दिया था।”

बॉलीवुड फिल्म ‘हैदर’ में मार्तण्ड मंदिर को बताया गया ‘शैतान की गुफा’

साल 2014 में फिल्म निर्माता विशाल भारद्वाज को अपनी फिल्म ‘हैदर‘ में हिंदू परंपराओं को बदनाम करने के लिए व्यापक आलोचना का सामना करना पड़ा था। शाहिद कपूर अभिनीत इस फिल्म में, सूर्य मंदिर को ‘बिस्मिल’ नाम के गाने में शैतान की गुफा कहा गया था। इसमें शाहिद मार्तण्ड सूर्य मंदिर के सामने डाँस करते दिखे हैं और मंदिर में शैतानी आकृति दिखाई देती है। इस गाने का लोगों ने खूब तीखा विरोध किया और कहा कि रचनात्मकता की आड़ लेकर हिंदुओं की भावनाओं का मजाक उड़ाया जा रहा है।

कश्मीर में मार्तण्ड सूर्य मंदिर और सिकंदर ‘बुतशिकन’

कश्मीर के अनंतनाग में स्थित मार्तण्ड सूर्य मंदिर हिंदू वास्तुकला और आध्यात्मिकता का ऐतिहासिक प्रतिनिधित्व करता है। ललितादित्य मुक्तपीड द्वारा 8वीं शताब्दी में निर्मित, मार्तण्ड सूर्य मंदिर प्राचीन भारत की वास्तुकला और सांस्कृतिक कौशल का एक प्रमाण है। हालाँकि, 14वीं शताब्दी के दौरान, सिकंदर शाह मिरी जिसे सिकंदर बुतशिकन (मूर्ति-भंजक) के नाम से भी जाना जाता है, हिंदुओं के खिलाफ अपनी नफरत के लिए मशहूर था, उसने काफ़िरों के मंदिरों को ध्वस्त कर दिया। यह दावा किया जाता है कि इस्लामी कट्टरपंथी ने मार्तण्ड मंदिर के खंडहरों को ‘शैतान की गुफ़ा‘ कहा था, हालाँकि, “शैतान की गुफ़ा” शब्द का उपयोग करने से संबंधित एक स्पष्ट प्रमाण नहीं है। ऐसा कहा जाता है कि कश्मीरी मुसलमान हिंदू मंदिर को शैतान की गुफा कहते हैं। इसके साथ ही बॉलीवुड, मीडिया और इस्लामी कट्टरपंथीवर्षों से हिंदू मंदिरों के इस अपमानजनक अपमान को उचित ठहराने और सामान्य बनाने का प्रयास कर रहे हैं।

हालाँकि अब समय बदल रहा है। मार्तण्ड मंदिर जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए बुनियादी सुविधाएँ होंगी। लोग रुक सकें, इसके लिए यात्री निवास बनाया जा रहा है। शिव मंदिर का भी निर्माण किया जा रहा है। धीरे-धीरे जब पूरे देश से एक बार फिर मार्तण्ड मंदिर पहुँचने वालों का ताँता लग जाएगा, तब शायद शैतान की गुफा जैसे कलंकित शब्दों का इस्तेमाल हमेशा के लिए खत्म हो जाए।

SEBI चीफ ने हिंडनबर्ग पर लगाया चरित्र हनन का आरोप: अमेरिकी शॉर्टसेलर ने माधबी पुरी बुच और अडानी का बताया था व्यवसायिक संबंध, कार्रवाई नहीं करने का आरोप भी

अमेरिकी शॉर्टसेलर हिंडनबर्ग रिसर्च ने एक बार फिर भारतीय संस्था SEBI और अडानी ग्रुप पर आरोप लगाया है। अपनी हालिया रिपोर्ट में हिंडनबर्ग ने कहा है कि SEBI की चीफ माधबी पुरी बुच अडानी से मिली हुई हैं और दोनों के व्यवसायिक संबंध हैं। इसलिए अभी तक अडानी पर कार्रवाई नहीं की गई। इन आरोपों को बुच के पति ने नकार दिया है। वहीं, विपक्षी दलों ने सरकार को घेरा है।

हिंडनबर्ग द्वारा 10 अगस्त को प्रकाशित अपनी रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सेबी की अध्यक्ष माधबी पुरी बुच और उनके पति का ऑफशोर फंड में हिस्सेदारी थी। इस फंड का इस्तेमाल अडानी द्वारा पैसे को इधर-उधर करने के लिए इस्तेमाल किया गया था। रिपोर्ट में कहा गया है, “वर्तमान सेबी अध्यक्ष माधबी बुच और उनके पति धवल बुच के पास ठीक उसी अस्पष्ट ऑफशोर बरमूडा और मॉरीशस फंड में हिस्सेदारी थी, जिसका इस्तेमाल गौतम अडानी के भाई विनोद अडानी ने किया था।”

हिंडनब्रुग रिसर्च ने अपनी रिपोर्ट में सेबी चेयरपर्सन और उनके पति धवल बुच पर आरोप लगाते हुए कहा कि धवल बुच की लिंक्डइन प्रोफ़ाइल में बताया गया है कि वे ब्लैकस्टोन और अल्वारेज़ एंड मार्सल में वरिष्ठ सलाहकार हैं। बुच जुलाई 2019 से ब्लैकस्टोन के साथ काम कर रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है, “ब्लैकस्टोन भारत में एक नए परिसंपत्ति वर्ग REITS के सबसे बड़े निवेशकों और प्रायोजकों में से एक है।”

अडानी के साथ माधबी बुच के संबंधों का दावा

सेबी प्रमुख के लेकर रिपोर्ट में आगे कहा गया है, “व्हिसलब्लोअर के दस्तावेजों से पता चलता है कि माधबी बुच और उनके पति धवल बुच ने पहली बार सिंगापुर में 5 जून 2015 को IPE प्लस फंड 1 के साथ अपना खाता खोला था। इसमें निवेश का स्रोत ‘वेतन’ बताया गया है और बुच पति-पत्नी की कुल संपत्ति 10 मिलियन डॉलर (आज के समय में लगभग 84 करोड़ रुपए) आँकी गई है।”

हिंडनबर्ग की रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि लिंक्डइन प्रोफाइल से पता चलता है कि अप्रैल 2017 में माधबी बुच को सेबी का ‘पूर्णकालिक सदस्य’ नियुक्त किया गया था। माधबी की नियुक्ति से कुछ ही सप्ताह पहले 22 मार्च 2017 को धवल बुच ने मॉरीशस के फंड प्रशासक ट्राइडेंट ट्रस्ट को एक पत्र लिखा। इसमें कहा गया था कि वे खातों को संचालित करने के लिए उन्हें एकमात्र अधिकृत व्यक्ति बनाया जाए। हिंडनबर्ग का कहना है, “ऐसा इसलिए किया गया ताकि राजनीतिक रूप से संवेदनशील नियुक्ति से पहले उनकी पत्नी के नाम वाली संपत्ति स्थानांतरित हो जाए।”

हिंडनबर्ग ने अपनी रिपोर्ट में कहा है, “26 फरवरी 2018 को माधबी बुच के निजी ईमेल पर भेजे गए अकाउंट डिटेल में संरचना का ‘जीडीओएफ सेल 90 (आईपीईप्लस फंड 1)’ बताया गया था। विनोद अडानी द्वारा उपयोग किया हुआ तथा मॉरीशस-पंजीकृत इस शेल कंपनी में उस समय बुच की हिस्सेदारी का कुल मूल्य $872,762.25 (लगभग 7.33 करोड़ रुपए) थी। SEBI प्रमुख रहते हुए माधबी बुच ने 25 फरवरी 2018 को अपने निजी जीमेल अकाउंट को इंडिया इंफोलाइन को ईमेल किया और कहा कि वह अपने पति से नाम से व्यवसाय कर रही हैं और इस फंड के उनके यूनिट को रिडीम किया जाए।”

SEBI पर कार्रवाई नहीं करने के आरोप

हिंडनबर्ग ने अपनी रिपोर्ट में कहा, “हमें संदेह है कि अडानी समूह में संदिग्ध ऑफशोर शेयरधारकों के खिलाफ सार्थक कार्रवाई करने में सेबी की अनिच्छा, अध्यक्ष माधबी बुच की गौतम अदानी के भाई विनोद अडानी द्वारा इस्तेमाल किए गए ठीक उसी फंड का उपयोग करने में मिलीभगत से उपजी हो सकती है। आज तक सेबी ने इंडिया इंफोलाइन द्वारा संचालित अन्य संदिग्ध अडानी शेयरधारकों: ईएम रिसर्जेंट फंड और इमर्जिंग इंडिया फोकस फंड के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की है।”

हिंडनबर्ग ने कहा, “हमारी मूल रिपोर्ट में हमने अन्य फंडों के अलावा ईएम रिसर्जेंट फंड और इमर्जिंग इंडिया फोकस फंड नामक दो मॉरीशस संस्थाओं की पहचान की। दोनों संस्थाओं को इंडिया इंफोलाइन (जिसे अब 360 वन कहा जाता है) के संबंधित पक्षों के रूप में प्रकट किया गया था और इसकी वार्षिक रिपोर्टों के अनुसार, इसके कर्मचारियों द्वारा देखरेख की जाती थी। हमने पाया कि [इन फंडों के] ट्रेडिंग पैटर्न से पता चलता है कि स्टॉक पार्किंग संस्थाओं और संदिग्ध ऑफशोर संस्थाओं ने अडानी की कुछ सूचीबद्ध कंपनियों के वॉल्यूम और/या मूल्य को कृत्रिम रूप से बढ़ा दिया हो सकता है।”

हिंडनबर्ग का अडानी पर आरोप

रिपोर्ट में कहा गया है कि ‘आईपीई प्लस फंड’ एक छोटा ऑफशोर ऑरिशियस फंड है, जिसे अडानी के एक निदेशक ने इंडिया इंफोलाइन (आईआईएफएल) के माध्यम से स्थापित किया है। इंडिया इंफोलाइन एक वेल्थ मैनेजमेंट फर्म है, जिसका वायरकार्ड (wirecard scandal) घोटाले से संबंध है। उसने कहा कि गौतम अडानी के भाई विनोद अडानी ने इसका इस्तेमाल भारतीय बाजारों में निवेश करने के लिए किया।

अमेरिकी शॉर्टसेलर आरोप लगाया, “इस निवेश में अडानी समूह को बिजली उपकरणों के ओवर इनवॉइसिंग यानी कीमत से अधिक राशि से प्राप्त धन शामिल था।” हिंडनबर्ग ने दावा किया कि उसकी रिपोर्ट में बताया गया है कि राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) के दस्तावेजों में आरोप लगाया गया है कि अडानी ने प्रमुख बिजली उपकरणों के आयात मूल्यांकन को बेहद बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया और भारतीय जनता से धन हड़पने और उसे सफेद करने के लिए ऑफशोर मुखौटा संस्थाओं का उपयोग किया था।

गौतम अडानी के भाई पर आरोप लगाते हुए हिंडनबर्ग ने आगे कहा, “एक जटिल संरचना में विनोद अडानी नियंत्रित कंपनी ने बरमूडा में ‘ग्लोबल डायनेमिक ऑपर्च्युनिटीज फंड’ में निवेश किया था। बरमुडा एक ब्रिटिश विदेशी क्षेत्र और टैक्स हेवन है। इस फंड ने मॉरीशस में पंजीकृत एक फंड आईपीई प्लस फंड 1 में निवेश किया। मॉरीशर एक अन्य टैक्स हेवन देश है।”

हिंडनबर्ग ने कहा, “अडानी समूह पर हमारी मूल रिपोर्ट को लगभग 18 महीने हो चुके हैं। इसमें इस बात के पुख्ता सबूत पेश किए गए थे कि भारतीय समूह (अडानी) ‘कॉर्पोरेट इतिहास में सबसे बड़ा घोटाला’ कर रहा था। हमारी रिपोर्ट ने ऑफशोर, मुख्य रूप से मॉरीशस-आधारित फर्जी कंपनियों के एक जाल को उजागर किया, जिनका इस्तेमाल संदिग्ध अरबों डॉलर के अघोषित लेनदेन, निवेश और शेयरों के हेरफेर के लिए किया गया।”

रिपोर्ट में आगे कहा गया है, “तब से सबूतों और 40 से ज़्यादा स्वतंत्र मीडिया जाँचों के बावजूद भारतीय प्रतिभूति नियामक SEBI ने अडानी समूह के खिलाफ़ कोई सार्वजनिक कार्रवाई नहीं की है। मीडिया ने बताया है कि सेबी अडानी समूह पर सिर्फ़ सांकेतिक, तकनीकी उल्लंघन का आरोप लगा सकता है, भले ही मामले की कितनी भी गंभीरता हो।”

सु्प्रीम कोर्ट के बयान का हवाला देते हुए हिंडनबर्ग ने कहा, “भारतीय सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि सेबी ने इन शेयरधारकों की जाँच में कोई ठोस नतीजा नहीं निकाला है। जून 2024 के अंत में अडानी के सीएफओ जुगेशिंदर सिंह ने अडानी समूह को दिए गए विनियामक नोटिसों को ‘तुच्छ’ बताया था। जाहिर तौर पर प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही उन्होंने उनकी गंभीरता की संभावना को खत्म कर दिया।”

माधबी बुच ने बताया चरित्रहनन

सेबी चेयरपर्सन माधबी बुच ने हिंडनबर्ग द्वारा लगाए गए आरोपों का खंडन करते हुए उन्हें ‘निराधार’ और ‘चरित्र हनन’ का प्रयास बताया है। उन्होंने कहा, “10 अगस्त 2024 को हिंडनबर्ग रिपोर्ट में हमारे खिलाफ लगाए गए आरोपों के संदर्भ में हम यह बताना चाहेंगे कि हम रिपोर्ट में लगाए गए निराधार आरोपों और आक्षेपों का दृढ़ता से खंडन करते हैं। इनमें कोई सच्चाई नहीं है। हमारा जीवन और वित्त एक खुली किताब है।”

माधबी ने आगे कहा, “पिछले कई वर्षों में सेबी को सभी आवश्यक जानकारियाँ पहले दी जा चुकी हैं। हमें किसी भी वित्तीय दस्तावेजों के बारे में बताने में कोई हिचकिचाहट नहीं है। इनमें वे भी शामिल हैं, जो उस अवधि से संबंधित हैं, जब हम पूरी तरह से निजी नागरिक थे। हम इसे किसी भी अधिकारी के सामने प्रस्तुत करने के तैयार हैं। इसके अलावा, पूर्ण पारदर्शिता के हित में हम नियत समय में एक विस्तृत बयान जारी करेंगे।”

माधबी पुरी बुच और उनके पति धवल बुच ने एक संयुक्त प्रेस बयान में कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि हिंडनबर्ग रिसर्च, जिसके खिलाफ सेबी ने प्रवर्तन कार्रवाई की है और कारण बताओ नोटिस जारी किया है, ने उसी के जवाब में चरित्र हनन का प्रयास करने का विकल्प चुना है। बता दें कि जुलाई 2024 में सेबी ने हिंडनबर्ग को कारण बताओ नोटिस जारी किया था।

रिपोर्ट पर राजनीति शुरू

इस रिपोर्ट के बाद कॉन्ग्रेस, टीएमसी, शिवसेना ठाकरे गुट ने राजनीतिक हमला बोला है। कॉन्ग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि ‘अडानी मेगा घोटाले’ की जाँच करने में सेबी की अनिच्छा को लंबे समय से देखा जा रहा है। उन्होंने कहा, “जनता के दबाव में सेबी के बोर्ड ने 28 जून 2023 को सख्त रिपोर्टिंग नियम फिर से लागू किए।”

उन्होंने आगे कहा, “इसने 25 अगस्त 2023 को सुप्रीम कोर्ट की विशेषज्ञ समिति को बताया कि वह 13 संदिग्ध लेन-देन की जाँच कर रहा है। फिर भी जाँच कभी सफल नहीं हुई। सच्चाई यह है कि देश के सर्वोच्च अधिकारियों की मिलीभगत का पता अडानी के महाघोटाले की पूरी जांच के लिए जेपीसी (संयुक्त संसदीय समिति) गठित करके ही लगाया जा सकता है।”

वहीं, तृणमूल कॉन्ग्रेस की नेता महुआ मोइत्रा ने कहा, “क्रोनी कैपिटलिज्म अपने चरम पर है”। उन्होंने पूछा कि क्या सीबीआई और ईडी मामले दर्ज करेंगे। एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर मोइत्रा ने लिखा, “असली अडानी स्टाइल- यहाँ तक ​​कि सेबी के चेयरमैन भी उनके समूह में निवेशक हैं। क्रोनी कैपिटलिज्म अपने चरम पर है। CBI और ED – क्या आप POCA और PMLA के मामले दर्ज करेंगे या नहीं?”

केजरीवाल के ‘शीशमहल’ मामले में 3 इंजीनियरों समेत कुल 7 सस्पेंड: जब कोरोना में मर रहे थे दिल्ली के लोग, CM के सरकारी घर में लगाई जा रही थी करोड़ों की टाइल्स-टोंटी-टट्टी शीट

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर ‘शीश महल’ मामले में मुसीबत में पड़ सकते हैं। अभी तो पीडब्ल्यूडी के इंजीनियरों पर लगातार गाज गिर रही है। पीडब्ल्यूडी ने अरविंद केजरीवाल के बंगले के पुनर्निर्माण के समय हेर-फेर करने वाले 3 बड़े इंजीनियरों को सस्पेंड कर दिया है। वो दिल्ली में तैनाती का काम पूरा करके दूसरी जगहों पर तैनात थे, लेकिन उन पर गड़बड़ी के चलते गाज गिराई गई है। बता दें कि सीएम केजरीवाल के आधिकारिक निवास 6 फ्लैग स्टाफ रोड के निर्माण पर काफी हल्ला मच चुका है। इस घर और दफ्तर में बदलाव के लिए करोड़ों रुपए पानी की तरह बहाए गए, यही नहीं, इस बंगले में लाखों के परदे लगाए गए।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (CPWD) ने अपने जिन इंजीनियरों को सस्पेंड किया है, उनके नाम एडीजी (सिविल) सीपीडब्ल्यूडी अशोक कुमार राजदेव, चीफ इंजीनियर प्रदीप कुमार परमार और सुपरिटेंडेंट इंजीनियर अभिषेक राज हैं। इन तीनों की तैनाती उस समय दिल्ली सरकार के लोक निर्माण विभाग में थी। इन तीनों के अलावा अन्य पाँच और इंजीनियर बंगले के निर्माण के दौरान की गई अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार पाए गए हैं।

मौजूदा समय में अशोक कुमार राजदेव और प्रदीप कुमार परमार की पोस्टिंग केंद्रीय लोक निर्माण विभाग में गुवाहाटी और अभिषेक राज की पोस्टिंग भी केंद्रीय लोक निर्माण विभाग के अंतर्गत खड़गपुर में है। तीनों इंजीनियरों के दिल्ली से बाहर तैनात होने के चलते सतर्कता विभाग ने महानिदेशक(सीपीडब्ल्यूडी) से इनको निलंबित करने और इनके खिलाफ बड़ा जुर्माना लगाने का अनुरोध किया था। बता दें कि इससे पहले चार इंजीनियरों में से दो को भी उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना के निर्देश पर निलंबित किया जा चुका है। वहीं एक रिटायर्ड इंजीनियर के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए सीपीडब्ल्यूडी से सिफारिश की गई है।

इन बड़े इंजीनियरों पर क्या हैं आरोप?

सतर्कता विभाग के अनुसार, इन इंजीनियरों ने दिल्ली सरकार के तत्कालीन पीडब्ल्यूडी मंत्री की मिलीभगत से एक अत्यावश्यक धारा का इस्तेमाल करते हुए मुख्यमंत्री के लिए नए बंगले के निर्माण की अनुमति दी, जबकि ऐसी कोई जरूरत नहीं थी। साल 2020 में कोरोना महामारी के दौरान एक तरफ वित्त विभाग पैसे कम खर्च कर रहा था, तो दूसरी तरफ परिस्थितियों के उलट जाते हुए इन अधिकारियों ने न सिर्फ घर को आपातकालीन स्थितियों की तरह बनवाया, बल्कि करोड़ों रुपए की गड़बड़ी की गई और लागत को कई गुना बढ़ा दिया गया।

सतर्कता विभाग ने बताया कि इंटीरियर्स में बदलाव, बेहतर कैटेगरी के पत्थर के फर्श, बेहतरीन लकड़ी के दरवाजे, ऑटोमेटिक स्लाइडिंग ग्लास दरवाजे आदि के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए। सीबीआई इस पूरे मामले की अब जाँच कर रही है। बता दें कि अरविंद केजरीवाल के बंगले के पुनर्निर्माण पर 45 करोड़ से अधिक रुपए खर्च किए गए, जिसमें विदेश से टाइल्स मंगाई गई, पर्दे मंगाए गए। वहीं, आरटीआई से ये भी खुलासा हुआ है कि 2015 से 2022 तक अरविंद केजरीवाल के बंगले की देख-रेख और छोटे-मोटे मरम्मत के नाम पर 29 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं।

‘आपने सारी सुविधा दी, आप भी देश के लिए संघर्ष कर रहे’: अमन सेहरावत ने PM मोदी को दिया धन्यवाद, ओलंपिक के हीरो से बोले प्रधानमंत्री – अपने स्टेडियम को ही बना लिया था घर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केरल के वायनाड में आई प्राकृतिक जल-आपदा के बाद की स्थिति का निरीक्षण किया, साथ ही पीड़ितों से भी मुलाकात की। उन्होंने वहीं से पेरिस ओलंपिक 2024 में फ्री स्टाइल रेसलिंग (57 किलोग्राम वर्ग) में कांस्य पदक जीत कर भारत का नाम रोशन करने वाले अमन सेहरावत को भी बधाई दी। अमन सेहरावत ने मात्र 11 वर्ष की उम्र में अपने माता-पिता को खो दिया था। पीएम मोदी की उनसे बातचीत का वीडियो भी सामने आया है।

अमन सेहरावत को बहुत-बहुत बधाई देते हुए पीएम मोदी ने उनके उज्जवल भविष्य के लिए भी शुभकामनाएँ दी। प्रधानमंत्री ने कहा कि अमन ने अपने नाम के अनुसार सारे देश का मन भर दिया है। अमन सेहरावत ने ब्रॉन्ज मेडल जीतने के बाद पीएम मोदी से कहा, “देशवासियों का आशीर्वाद था, ऊपर से आपकी मेहनत थी। इतनी सुविधा आपने दी। सबकी मेहनत से ये मेडल आया है।” वहीं पीएम मोदी ने कहा कि बहुत कम खिलाड़ी ऐसे होते हैं जो छत्रसाल स्टेडियम को ही अपना घर बना लें, वहाँ अपने-आप को खपा दें।

प्रधानमंत्री की इस बात जवाब देते हुए अमन सेहरावत ने कहा कि उन्होंने प्रैक्टिस के लिए छत्रसाल स्टेडियम को अपना घर बना लिया था। अमन सेहरावत के जीवन को प्रेरक बताते हुए पीएम मोदी ने जिक्र किया कि वो मेडल लेकर आने वाले सबसे छोटी उम्र के भरिया एथलीट हैं, उनके नाम इतना लंबा समय है ऐसे में वो देशवासियों की झोली को खुशियों से भर देंगे। इस पर अमन सेहरावत ने वादा किया कि वो 2028 के लॉस एंजेल्स ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतेंगे, इसके लिए पूरी मेहनत करेंगे।

पीएम मोदी ने अमन की सफलता पर पूरा विश्वास जताते हुए उनके संघर्षों का जिक्र किया, इस पर अमन सेहरावत ने कहा कि आप भी तो संघर्ष कर रहे हो। हालाँकि, पीएम मोदी ने कहा कि आप रजाई ओढ़ कर सोना चाहें फिर भी नहीं सो सकते, दिन-रात मेहनत करनी पड़ती है। प्रधानमंत्री ने कहा कि देश की आशा को भरने के लिए अमन सेहरावत ने भरपूर काम किया। उन्होंने कहा कि गोल्ड हो, सिल्वर हो या ब्रॉन्ज हो, अपने देश को बहुत दिया है और हर देशवासी सीना तान कर के अमन का नाम ले रहा है।

जम्मू कश्मीर में आतंकियों से मुठभेड़, 2 जवान बलिदान: 4 आतंकियों का स्केच जारी, सेना ने सील किया अनंतनाग का इलाका

जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले में सुरक्षा बलों और आतंकवादियों के बीच जारी मुठभेड़ में शनिवार (10 अगस्त 2024) को दो वीरगति को प्राप्त हुए हैं। इस मुठभेड़ में एक जवान समेत तीन लोग घायल भी हुए हैं। अधिकारियों ने बताया कि घायल जवानों को अस्पताल पहुँचाया गया है और आतंकवादियों के भागने के रास्तों को सील कर दिया गया है। सुरक्षाबलों ने इलाके को घेर लिया है।

जानकारी के मुताबिक, दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले के कोकेरनाग के गागरमांडू वन क्षेत्र के अहलान में ये मुठभेड़ हुई। अधिकारियों ने बताया कि पुलिस और सुरक्षा बलों की एक टीम ने एक विशेष इनपुट पर अहलान में घेराबंदी व तलाशी अभियान शुरू किया था। तलाशी अभियान के दौरान छिपे हुए आतंकवादियों ने सुरक्षा बलों पर गोलीबारी शुरू कर दी, जिसमें 2 जवान वीरगति को प्राप्त हुए। इस पूरे इलाके को सेना ने सील कर दिया है और सर्च ऑपरेशन छेड़ दिया है। सेना आतंकवादियों के साथ ही आतंकवादियों के मददगारों को भी पकड़ने की कोशिश कर रही है।

सेना की श्रीनगर स्थित चिनार कोर ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि विशिष्ट खुफिया इनपुट के आधार पर, भारतीय सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ द्वारा सामान्य क्षेत्र कोकरनाग, अनंतनाग में एक संयुक्त अभियान शुरू किया गया। इसी बीच आतंकवादियों की तरफ से गोलीबारी शुरू कर दी गई। सुरक्षा बलों की तरफ से भी जवाबी गोलीबारी की गई। फिलहाल कोकेरनाग ऑपरेशन में 2 जवान वीरगति को हो गए हैं। वहीं दो नागरिक और एक अन्य जवान घायल हो गए हैं, जिनका इलाज किया जा रहा है। इलाके में अभी भी सर्च ऑपरेशन चल रहा है।

जैश से जुड़े आतंकवादियों की तलाश

सुरक्षाबलों पर हमले के बाद आतंकी घने जंगल में भाग गए, जिसके बाद अब सेना पूरे इलाके में तलाशी अभियान चला रही है। माना जा रहा है कि ये आतंकी जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े हैं। उनके डोडा से इस इलाके में घुसने की जानकारी भी मिल रही है। अब सुरक्षाबल उनके मददगारों की भी तलाश कर रहे हैं।

चार आतंकियों के स्क्रेच जारी

जम्मू-कश्मीर में आतंकी गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए भारतीय सेना युद्ध स्तर पर ऑपरेशन ऑल आउट चला रही है। इसी कड़ी में कठुआ पुलिस ने 4 आतंकवादियों के स्केच जारी किए हैं। इन चारों आंतकियों को आखिरी बार मल्हार, बानी और सियोजधार के ढोक इलाके में देखा गया था। पुलिस ने प्रत्येक आतंकवादी पर कार्रवाई योग्य सूचना देने वाले को 5 लाख रुपये का इनाम भी रखा है।

बता दें कि कठुआ जिले में 8 जुलाई को मचेदी के घने जंगल में सेना के गश्ती दल पर आतंकवादियों द्वारा घातक हमला किया गया था, जिसकी वजह से सेना के एक जूनियर कमीशंड अधिकारी (जेसीओ) सहित पाँच सैनिक वीरगति को प्राप्त हुए थे।

UN दफ्तर के बाहर प्रदर्शन, अमेरिकी सांसदों ने भी उठाई आवाज़: जान बचा कर निकले हिन्दुओं ने बताया – हमारे घरों पर किया हमला

बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के नाम पर जो उत्पात हो रहा है, उसकी आवाज पूरी दुनिया में सुनी जा रही है। बांग्लादेश में हिदुओं का सफाया हो रहा है, तो आवामी लीग के समर्थकों को भी मारा जा रहा है। पार्षद से लेकर सांसद तक मार दिए जा रहे हैं। भारत में हिंदू बांग्लादेशी हिंदुओं को बचाने की माँग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं, तो ये प्रदर्शन अब संयुक्त राष्ट्र के मुख्यालय तक पहुँच गया है। यही नहीं, भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद राजा कृष्णमूर्ति ने अमेरिकी सरकार से भी हस्तक्षेप की माँग की है कि वो बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों को रोकने के लिए कोई कदम उठाए।

संयुक्त राष्ट्र के मुख्यालय पर प्रदर्शन

बांग्लादेश में हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों की सुरक्षा की माँग करते हुए शनिवार (10 अगस्त 2024) को संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के बाहर बड़ी संख्या में लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया। इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व वॉशिंगटन स्थित एक एनजीओ हिंदू एक्शन ने किया। एनजीओ हिंदू एक्शन ने न्यूयॉर्क में भी कई स्थानों पर विरोध प्रदर्शन किया। एनजीओ ने बांग्लादेश में हिंदुओं को निशाना बनाकर की जा रही हिंसा के खिलाफ बोलने के लिए कई अमेरिकी प्रतिनिधियों की प्रशंसा की।

अमेरिकी रिपब्लिकन सांसद पैट फॉलन ने भी बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों को निशाना बनाए जाने की घटनाओं पर चिंता व्यक्त की और इनकी निंदा की। रिपब्लिकन सांसद पैट फॉलन ने कहा था, “मैं बांग्लादेश में चल रही राजनीतिक हिंसा और धार्मिक उत्पीड़न की कड़ी निंदा करता हूं। मैं अंतरिम सरकार से अनुरोध करता हूं कि वह बांग्लादेशी लोगों के साझा हित में काम करे और इस हिंसा को तुरंत खत्म करे।” उन्होंने कहा, “हिंदुओं, बौद्धों, ईसाइयों और किसी भी अन्य धार्मिक अल्पसंख्यक को निशाना बनाना निंदनीय है। जिन लोगों ने हिंसा के इन कृत्यों को भड़काया और उनमें भाग लिया, उन्हें जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए।” भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद श्रीथानेदार ने भी बांग्लादेश में हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों पर हमले की घटनाओं पर कड़ी नाराजगी जाहिर की और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की माँग की।

भारतीय-अमेरिकी सांसद राजा कृष्णमूर्ति ने अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन को पत्र लिखकर उनसे देश में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा को समाप्त करने में बांग्लादेशी सरकार की सहायता करने का आग्रह किया। कृष्णमूर्ति ने ब्लिंकन से अनुरोध किया कि वह बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख मुहम्मद यूनुस से बात करें और हिंसा को समाप्त करें तथा अपराधियों को न्याय के दायरे में लाएँ।

बांग्लादेश के जेसोर में होटल फूँका, 25 लोगों की मौत, बचकर भागे लोगों ने सुनाई आपबीती

इस बीच, बांग्लादेश में हो रही हिंसा से बचकर भारत भाग आए कुछ लोगों ने अपनी आपबीती भास्कर के साथ साझा की है। असम से बांग्लादेश अपने बिजनेस के सिलसिले में गए रजिउल इस्लाम बेहद बुरी हालत में भारत लौट पाए हैं। वो जेसोर में थे, जब साबिर होटल इंटरनेशनल पर बीएनपी के गुंडों और प्रदर्शनकारियों ने हमला बोल दिया। होटल साबिर इंटरनेशनल आवामी लीग के सांसद और पार्टी महासचिव शाहीन चकलाघर का है। दंगाइयों ने इस होटल में आग लगा दी। इस आग से बचकर निकले रजिउल ने बताया कि लोग डरे हुए थे, हर तरफ चीख पुकार मची थी। मैं और मेरे भाई ने रूप की खिड़की से छलाँग लगा दी।

रजिउल इस्लाम असम के हैं। उनके साथ उनका भाई भी बांग्लादेश से बचकर निकलने में सफल रहे। दोनों होटल साबिर इंटरनेशनल में थे, जब 5 अगस्त को भीड़ ने उन पर धावा बोला। दोनों के पैर टूट गए हैं। रजिउल ने कहा, “बांग्लादेश में हालात भयावह हैं। हर तरफ हिंसा हो रही है। मैं अपने भाई के साथ होटल की चौथी मंजिल पर था, जब साबिर इंटरनेशनल होटल को दंगाइयों ने फूँक दिया। भाई ने खिड़की से छलाँग लगा दी। कई अन्य लोगों ने भी लगाई। लोग टूट-फूट गए, लेकिन जिन कमरों में खिड़की नहीं थी, उनमें लोग बाहर नहीं निकल पाए। 2 दर्जन से ज्यादा लोगों की दम घुटने से मौत हो गई। अब हम कोलकाता जाकर अपना इलाज कराएँगे। हालत बेहद खराब है। हम बचकर आ गए, यही बहुत है।”

रजिउल इस्लाम अपने भाई के साथ जब असम पहुँचे, तो कुल 65 लोगों ने उनके साथ असम में एंट्री की। इनमें से कुछ बांग्लादेशी भी हैं। जो अवामी लीग पार्टी से जुड़े हुए हैं। बांग्लादेशी नागरिक रियाज भी उनमें से एक हैं। वो बिजनेस वीजा पर भाग निकले हैं। उन्होंने कहा कि आवामी लीग से जुड़े होने की वजह से बीएनपी के लोग उन्हें नुकसान पहुँचाते। बीवी-बच्चों और परिवार के पास वीजा नहीं है, तो वो वहीं फँसे हैं। किसी तरह से अभी जान बचानी प्राथमिकता है।

हिंदुओं और मंदिरों को बनाया गया निशाना

जेसोर में रहने वाले एक हिंदू परिवार ने अपनी पहचान छिपाते हुए बताया, “हमलावरों की भीड़ मेरे घर में घुस गई। वो करीब 15-20 लोग थे। हम पड़ोसी के घर में छिपे हुए थे। उन्होंने खिड़कियाँ तोड़ी और घर को तोड़ा। उन्होंने मंदिर तोड़े और हिंदुओं को निशाना बनाने के लिए ढूँढते रहे।” बता दें कि बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे लगातार अत्याचारों की वजह से बड़ी संख्या में पलायन की भी खबर आ रही है। भारत से लगी सीमा पर कई जगहों पर हिंदू पहुँचे हुए हैं और वो भारत में एंट्री के लिए अनुमति माँग रहे हैं। हालाँकि भारत सरकार ने एक बड़ी कमेटी का गठन किया है, जो इन मामलों पर नजर रख रही हैं।

बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हो रहे अपराधों पर हिंदू-बौद्ध-ईसाई-ओइक्या परिषद के महासचिव राणा दासगुप्ता ने कहा, “भीड़ के निशाने पर सिर्फ सरकारी संस्थाएं और मुक्ति संग्राम की उपलब्धियाँ ही नहीं, बल्कि अल्पसंख्यक भी हैं। अल्पसंख्यकों पर देश के कई हिस्सों में हमले हुए। कालीगंज से लेकर खुलना तक हमले किए गए। मंदिरों-दुकानों को निशाना बनाया गया। जमीनों पर कब्जा किया जा रहा है।”

नंगा होकर 14 साल की बच्ची को हवस का शिकार बना रहा था 77 साल का शेर मोहम्मद, पीड़िता की बहन को धक्का देकर भाग निकला: मानसिक बीमार है लड़की

उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में 14 साल की एक नाबालिग बच्ची से रेप किए जाने का मामला सामने आया है। पीड़िता मानसिक तौर पर बीमार है। रेप का आरोप 77 साल के एक वृद्ध पर लगा है जिसका नाम शेर मोहम्मद है। पीड़िता के परिजनों ने शेर मोहम्मद को नग्न अवस्था में देख भी लिया था। खुद को घिरता देख कर आरोपित फरार हो गया। घटना रविवार (4 अगस्त, 2024) की है। गुरुवार (8 अगस्त, 2024) को पुलिस ने शेर मोहम्मद को गिरफ्तार कर लिया है। मामले में जाँच व अन्य जरूरी कार्रवाई की जा रही है।

यह घटना उन्नाव के थाना क्षेत्र बारासगवर की है। रविवार (4 अगस्त) को यहाँ के एक गाँव में रहने वाले एक व्यक्ति ने पुलिस में तहरीर दी थी। तहरीर में उन्होंने बताया कि वो मजदूर हैं जो रोजी-रोटी की तलाश में पत्नी सहित अक्सर घर से बाहर ही रहते हैं। शिकायतकर्ता 2 बच्चियों का पिता है जो घर पर ही रहती हैं। इन्हीं में से 14 वर्षीया छोटी बेटी की मानसिक हालात ठीक नहीं है। रविवार को पीड़िता छत पर सो रही थी। इसी दौरान 77 साल का शेर मोहम्मद (शेर खान) भी वहाँ पहुँच गया।

बताया जा रहा है कि शेर मोहम्मद मानसिक रूप से बीमार पीड़िता को अपने साथ कमरे में ले गया। यहाँ उसने बच्ची से बलात्कार किया। छोटी बहन की आवाज सुन कर शिकायतकर्ता की बड़ी बेटी की आँख खुली। वह नीचे आई तो देखा कि शेर मोहम्मद उनकी छोटी बहन को निर्वस्त्र कर कर रेप कर रहा था। पीड़िता की बड़ी बहन यह देख कर चिल्लाई और शेर मोहम्मद को पकड़ लिया। शेर मोहम्मद ने पीड़िता की बहन को धक्का दिया और भाग निकला। शिकायतकर्ता ने आरोपित पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है। ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है।

इस शिकायत पर पुलिस ने शेर मोहम्मद को नामजद करते हुए FIR दर्ज कर ली है। यह FIR भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 333, 65 (1) और 115 (2) के साथ पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज हुई है। पुलिस टीमों ने आरोपित की तलाश शुरू की। लगभग 4 दिनों तक दी गई दबिश के बाद आखिरकार 8 अगस्त को पुलिस ने शेर मोहम्मद को दबोच लिया। वह अपने गाँव के ही सरकारी स्कूल के पास छिपा हुआ था। आरोपित को आगे की कार्रवाई के लिए कोर्ट में पेश किया गया। मामले में जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई की जा रही है। आरोपित और पीड़िता एक ही समुदाय से हैं।

CM हेमंत सोरेन ने जिस मॉल का किया था उद्घाटन, उसमें काँवड़ियों की ‘नो एंट्री’: ‘प्रोटोकॉल’ का बनाया बहाना

सावन के पवित्र मबीने में झारखंड की राजधानी रांची में काँवड़ियों के साथ दुर्व्यवहार की खबर सामने आई है। रांची के एक मशहूर मॉल में काँवड़ियों को सिर्फ इसलिए अंदर जाने से रोक दिया गया, क्योंकि वो बिना चप्पल-जूते के थे। ये काँवड़िए काँवड़ यात्रा पर पैदल-बिना चप्पल जूते के चलते हैं, लेकिन मॉल ऑफ रांची में उनका चप्पल न पहने होना ही उनकी नो-एंट्री की वजह बन गई। खास बात ये है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने ही पिछले साल अगस्त महीने में इस मॉल का उद्घाटन किया था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, राजधानी रांची के सबसे बड़े मॉल में कावड़ियों के साथ दुर्व्यवहार करने का मामला तूल पकड़ने लगा है। मॉल ऑफ रांची में नंगे पाव पहुँचे काँवड़ियों को अंदर जाने से मना कर दिया गया। जिन लोगों को मॉल के प्रोटोकॉल का हवाला देकर घुसने से रोका गया, वे लोग देवघर स्थित बाबा धाम की काँवड़ यात्रा के बाद रांची लौटे थे। उनका कहना है कि काँवड़िया की वेशभूषा में होने की वजह से उन्हें रोका गया।

इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसके बाद बवाल मच गया। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी नेता बाबूलाल मरांडी ने इस मामले में कार्रवाई की माँग की है। उन्होंने वीडियो को री-ट्वीट करते हुए लिखा, “मॉल प्रबंधन द्वारा शिवभक्तों को मॉल के अंदर प्रवेश करने से रोकना खेदजनक है। @DC_Ranchi मामले का संज्ञान लेकर उचित कारवाई करें।”

रोके गए काँवड़ियों में से एक सुशांत चौबे ने कहा कि वे लोग देवघर में पैदल काँवड़ यात्रा पूरी तरह लौटे थे। रास्ते में ‘मॉल ऑफ रांची’ दिखा तो वे जरूरत का सामान और जूता-चप्पल खरीदने के लिए अंदर जाने लगे, इस पर उन्हें पहले गार्ड ने रोक दिया। इसके बाद मैनेजर ने प्रोटोकॉल का हवाला दिया और कहा कि नंगे पाँव आए लोगों को एंट्री नहीं दी जा सकती।

हेमंत सोरेन ने काटा था फीता

बताया जा रहा है कि मॉल का उद्घाटन एक साल पहले 17 अगस्त को झारखंड के मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन और प्रसिद्ध फ़िल्म निर्माता प्रकाश झा ने किया था। लेकिन अब ठीक एक साल बाद इस मॉल के वजह से तो रांची का नाम मीडिया की सुर्खियों में है, वो भी गलत काम की वजह से।

मॉल के मैनेजर ने माँगी माफी

मॉल के मैनेजर नीतीश अग्रवाल ने बेहद साधारण सी सफाई देते हुए कहा कि इन काँवड़ियों की सुरक्षा को देखते हुए मॉल में इंट्री नहीं दी गई, क्योंकि वे सभी नंगे पाँव थे। वे लोग फर्श पर फिसल सकते थे। मॉल के प्रोटोकॉल में इसका विशेष ध्यान रखने की हिदायत दी गई है। हालाँकि उन्होंने ये भी कहा कि बाद में काँवड़ियों को एंट्री दे दी गई थी।

बौद्ध देश म्यांमार ने ड्रोन हमला कर बिछा दी 200 रोहिंग्या मुस्लिमों की लाशें: बांग्लादेश में घुसपैठ की कर रहे थे कोशिश, अपनों के शवों को ढूँढ रहे लोग

जहाँ एक तरफ भारत में कई रोहिंग्या घुसपैठिए दर्जी दस्तावेज बना कर बैठे हुए हैं और विभिन्न प्रकार के अपराधों में भी लिप्त पाए जाते हैं, वहीं पड़ोसी देश म्यांमार में रोहिंग्या मुस्लिमों पर वार किया जा रहा है। बांग्लादेश में अराजकता का माहौल है, शेख हसीना को प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देकर मुल्क से भागना पड़ा। उसके बाद नोबेल विजेता मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार का गठन किया गया है। इसी बीच मुफीद माहौल देख कर म्यांमार के रोहिंग्या मुस्लिम बांग्लादेश में घुसपैठ करने लगे।

प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि सीमा के पास ही म्यांमार ने इन रोहिंग्या मुस्लिमों की लाशें बिछा दी। उनके रिश्तेदार अपनों के शवों को ढूँढ रहे हैं। ये घटना सोमवार (5 अगस्त, 2024) की बताई जा रही है, जिसका खुलासा अब हुआ है। इस घटना के 4 गवाह सामने आए हैं। इस हमले में एक गर्भवती महिला और उसकी 2 साल की बेटी की भी मौत हो गई। म्यांमार में जुंटा सेना और बागियों की झड़प के बीच रखाइन में ये पहला बड़ा हमला है। इस घटना के लिए ‘अराकान आर्मी’ को जिम्मेदार बताया जा रहा है।

हालाँकि, उसने और म्यांमार की सेना दोनों ने इस घटना से खुद को अलग कर लिया है। मृतकों के स्पष्ट आँकड़े अब तक सामने नहीं आए हैं। वीडियो में देखा गया कि दलदली क्षेत्र में लाशें बिछी हुई हैं और आसपास उनके सूटकेस और बैग्स के अलावा अन्य सामानों के ढेर लगे हुए हैं। वहाँ से बच कर निकले कुछ लोगों ने बताया कि उन्होंने 70 लाशें देखी हैं, जबकि कुछ ने 200 का आँकड़ा दिया है। घटना म्यांमार के तटीय शहर माउंगडॉ के पास की है। मोहम्मद इलियास ने बताया कि उसकी गर्भवती पत्नी और 2 साल की बेटी मारी गई।

ड्रोन का इस्तेमाल कर गोलियाँ बरसाई गईं। कई लोग बचने के लिए जमीन पर लेट गए। 28 वर्षीय शमशुद्दीन अपनी पत्नी और नए जन्मे बच्चे के साथ किसी तरह बच निकला, उसने बताया कि लोग दर्द से कराह रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों और बांग्लादेश की मीडिया का कहना है कि दोनों देशों की सीमा निर्धारित करने वाली नाफ़ नदी में भाग रहे रोहिंग्या मुस्लिमों की नाव भी डूब गई, जिसमें कई मरे। UN ने कहा कि उसे इन घटनाओं का पता है, लेकिन कितने लोग मरे हैं वो इसकी पुष्टि नहीं कर सकता। म्यांमार से अब तक 7.30 लाख रोहिंग्या भाग चुके हैं।