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2100 जनजातीय छात्रों को सेमीकंडक्टर चिप का प्रशिक्षण देगी मोदी सरकार, IISc को दिया गया बीड़ा: भारत में इस क्षेत्र में आने वाला है लाखों करोड़ का निवेश

जनजातीय समाज के उत्थान के लिए मोदी सरकार लगातार कार्य कर रही है, इसे मुख्यधारा के साथ जोड़ने के लिए कई योजनाएँ चलाई जा रही हैं। वहीं अब विज्ञान एवं तकनीक के क्षेत्र में भी उन्हें आगे बढ़ाया जा रहा है। अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने फैसला लिया है कि जनजातीय समाज के 2100 युवाओं को सेमीकंडक्टर चिप तकनीक में प्रशिक्षित किया जाएगा। बता दें कि भारत में 3 सेमीकंडक्टर प्लांट्स स्थापित किए जाने की योजना है, इसके लिए सवा लाख करोड़ से भी अधिक का निवेश आने वाला है।

इन 2100 जनजातीय युवाओं को प्रशिक्षित करने का बीड़ा ‘भारतीय विज्ञान संस्थान’ (IISc) ने उठाया है। बेंगलुरु स्थित शैक्षिक संस्थान के साथ इसके लिए जनजातीय कार्य मंत्रालय ने करार किया है। बता दें कि ओडिशा जुएल उराँव फ़िलहाल जनजातीय मामलों के मंत्री हैं, वहीं मध्य प्रदेश के दुर्गादास उइके उनके डिप्टी हैं। ट्राइबल कम्युनिटी के छात्रों को ‘सेमीकंडक्टर फेब्रिकेशन एन्ड कैरेक्टराइजेशन’ की ट्रेनिंग दी जाएगी। IISc स्थित ‘सेंटर फॉर नैनो साइंस एन्ड इंजीनियरिंग’ ये कार्यभार सँभालेगा।

केंद्रीय जनजातीय कार्य राज्यमंत्री दुर्गादास उइके ने संसद ने मॉनसून सत्र के दौरान ने आंध्र प्रदेश के अनकापल्ली से भाजपा सांसद CM रमेश के एक सवाल ये जवाब में ये जानकारी दी। भारत सरकार की योजना ‘ट्राइबल रिसर्च इन्फॉर्मेशन, एजुकेशन, कम्यूनिकेश एन्ड इवेंट्स’ (TRE-ECE) के तहत ये प्रोजेक्ट लॉन्च किया गया है। अगले 3 वर्षों में प्रशिक्षण का कार्य पूरा कर लिया जाएगा। इनमें से 2500 छात्रों को बेसिक ट्रेनिंग और बाकी के 600 को एडवांड ट्रेनिंग दी जाएगी।

इसके लिए अप्लाई करने के लिए कोई भारी-भड़कम शर्त भी नहीं रखी गई है, जनजातीय समाज के जिस भी छात्र के पास इंजीनियरिंग की डिग्री है वो इसके लिए पात्र होगा। सेमीकंडक्टर ट्रेनिंग के लिए ‘इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी’ (MeitY) ने इसके लिए 6 नैनो ट्रेनिंग सेंटर स्थापित किए हैं। आरक्षण की नीतियों के हिसाब से इन नैनो प्रशिक्षण सेंटरों पर जनजातीय समाज का प्रतिनिधित्व है। जनजातीय समाज के लिए इतना कार्य करने के बावजूद विपक्षी दल मोदी सरकार को ‘दलित – जनजातीय विरोधी’ कहते हुए भ्रम फैलाते हैं।

फैज़ की कंपनी, शहाबुद्दीन डिलीवरी वाला… हिन्दू यात्री ने मँगाया शाकाहारी भोजन, परोस दिया मांसाहार: रेलवे ने सिर्फ चेतावनी देकर छोड़ा

नई दिल्ली रेलवे जंक्शन के पास एक हिंदू यात्री की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। हिंदू यात्री ने सावन के पवित्र महीने में शाकाहारी स्पेशल थाली का ऑनलाइन ऑर्डर दिया, लेकिन उन्हें शाकाहारी स्पेशल थाली का स्टिकर लगा मांसाहारी भोजन दे दिया गया, जिसके बाद उन्होंने इसकी ऑनलाइन शिकायत रेलवे में दर्ज कराई।

इस मामले में रेलवे ने वेंडर को महज चेतावनी देकर छोड़ दिया। इस मामले में रेस्टोरेंट के मालिक का नाम फैज है, तो खाने की डिलीवरी करने वाले का नाम शहाबुद्दीन कुरैशी है।

पीड़ित शाकाहारी यात्री पल्लव सिंह ने बताया कि उन्होंने शाकाहारी थाली का ऑर्डर दिया था, लेकिन ई-कैटरिंग डिलीवरी करने वाले शहाबुद्दीन कुरैशी ने उन्हें सावन के पवित्र महीने में मांसाहारी भोजन दे दिया। हालाँकि, मांसाहारी भोजन वाली थाली पर ‘वेज स्पेशल थाली’ का स्टिकर चिपका हुआ था।

यह घटना ट्रेन नंबर 12556 में डिलीवरी स्टेशन नई दिल्ली जंक्शन (NDLS) के पास हुई। शिकायत में साझा किए गए विवरण के अनुसार, डिलीवरी सेवा का नाम ज़ूप है और यात्री ने थाली का ऑर्डर सागर बार बी क्यू से दिया था, जिसका मालिक फैज़ नाम का एक व्यक्ति है, जैसा कि थाली के भुगतान के दौरान विक्रेता द्वारा साझा की गई जानकारी से पता चलता है।

इस शिकायत पर ध्यान देते हुए भारतीय रेलवे ने पोस्ट पर टिप्पणी करते हुए कहा, “आपकी शिकायत रेलमदद पर दर्ज कर ली गई है और शिकायत संख्या आपके मोबाइल नंबर पर एसएमएस के माध्यम से भेज दी गई है।”

हालाँकि, बाद में भारतीय रेलवे ने घटना के बारे में बताया कि उसने बदमाश विक्रेता को सिर्फ चेतावनी देकर छोड़ दिया है। साथ ही “भोजन में गड़बड़ी” के लिए ग्राहक को पूरा पैसा वापस कर दिया है।

भारतीय रेलवे ने कहा, “भोजन में गड़बड़ी के लिए पूरी राशि वापस कर दी गई है। विक्रेता को भी उचित कार्रवाई की गई है और सख्त चेतावनी दी गई है कि वह भोजन की पैकेजिंग के दौरान अधिक सतर्क रहे और भविष्य में ऐसी शिकायत न करें अन्यथा सख्त कार्रवाई की जाएगी।”

हालाँकि, यह कोई एक घटना नहीं है, जहाँ एक हिंदू ग्राहक ने नॉनवेज मिलावटी भोजन मिलने की शिकायत की हो, जिसमें उनकी धार्मिक भावनाएँ आहत हुईं। इससे पहले, भारतीय रेलवे, एयरवेज या देश के कई हिस्सों में मशहूर स्नैक डिलीवरी करने वाले भोजनालयों से कई चौंकाने वाले मामले सामने आए हैं।

इस सप्ताह की शुरुआत में, 4 अगस्त 2024 को हरिद्वार से कांधला होते हुए गंगाजल लेकर दिल्ली लौट रहे तीर्थयात्रियों को मांसाहारी बिरयानी परोसी गई। तनवीर नाम के आरोपित फेरीवाले को अधिकारियों ने पकड़ लिया और बाद में उसे पुलिस स्टेशन ले जाया गया।

इस साल अप्रैल में गुजरात पुलिस ने वडोदरा स्थित एक समोसा दुकान ‘हुसेनी समोसा सेंटर‘ पर छापा मारा और गोमांस से भरे समोसे बेचने के आरोप में छह लोगों को गिरफ्तार किया, जिसमें रेस्टोरेंट मालिक यूसुफ और नईम शेख भी शामिल थे। महाराष्ट्र के पुणे में भी इसी तरह का मामला सामने आया था, जहाँ टाटा मोटर्स की कैंटीन में समोसे के अंदर कंडोम, पत्थर और तंबाकू भरा हुआ पाया गया था। पुलिस ने इस मामले में 5 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। पता चला कि आरोपित रहीम शेख, अजहर शेख, मजार शेख, अजर शेख और विक्की शेख ने कंपनी द्वारा उनका कॉन्ट्रैक्ट रद्द किए जाने के बाद गुस्से में आकर यह अपराध किया।

जनवरी 2024 में जैन समुदाय से ताल्लुक रखने वाली एक शाकाहारी यात्री को एयर इंडिया की फ्लाइट में शाकाहारी भोजन में चिकन के टुकड़े परोसे गए। गुस्साई महिला ने केबिन क्रू से इसकी शिकायत की, लेकिन इस मामले पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। आखिरकार यात्री वीरा जैन ने सोशल मीडिया पर इस घटना को शेयर किया। एयर इंडिया ने एक्स पर उसकी पोस्ट का जवाब दिया और उससे ट्वीट डिलीट करने का अनुरोध किया।

जुलाई 2022 में दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में एक घटना सामने आई थी, जिसमें एक शाकाहारी छात्र को कथित तौर पर विश्वविद्यालय की केंद्रीय कैंटीन में मांसाहारी सैंडविच परोसा गया था। कैंटीन स्टाफ से शिकायत करने पर छात्र को धक्का देकर अलग कर दिया गया और कहा गया कि कैंटीन में शुद्ध शाकाहारी भोजन उपलब्ध नहीं है।

दिसंबर 2018 में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) से भी ऐसी ही शिकायत सामने आई थी, जहाँ आरोप लगाया गया था कि मांसाहारी भोजन बनाने के लिए इस्तेमाल किए गए तेल में पकाए गए शाकाहारी भोजन को परोसा जा रहा था।

इसके अतिरिक्त, ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिसमें ग्राहकों को मिले खाले में मरे हुए चूहों, तिलचट्टों मिल चुके हैं।

संयोग से, मार्च 2024 में फूड डिलीवरी एग्रीगेटर ज़ोमैटो ने अपने शुद्ध शाकाहारी ग्राहकों को सेवा देने के लिए एक नई सेवा ‘प्योर वेज मोड’ शुरू किया था, लेकिन फिर ये आई़डिया ड्रॉप कर दिया। जोमैटो की कोशिश थी कि ग्राहकों को ‘शुद्ध शाकाहारी‘ भोजन मिल सके और किसी तरह की कोई दिक्कत न हो, क्योंकि जोमैटो पर भी शाकाहारी-मांसाहारी वाली दिक्कतें आ रही थी, लेकिन सोशल मीडिया से लेकर हर जगह मचे हल्ले के बीच जोमैटो ने शुद्ध शाकाहारी वाला आईडिया ड्रॉप कर दिया था।

‘बांग्लादेश के बाद अब भारत की बारी, जल्द दिखेगा असर’: रेजुवान को असम पुलिस ने दबोचा, पूछताछ में कहा – अलकायदा के लिए काम करता हूँ

बांग्लादेश में चल रही उठापटक के बीच भारत में कई कट्टरपंथी लोगों को भड़काने के की कोशिशों में जुट गए हैं। असम पुलिस ने खुद को अलकायदा का सदस्य बताने वाले एक युवक को गिरफ्तार किया है। आरोपित का नाम रेजुवान उल्ला मज़रभुइया है। बुधवार (7 अगस्त, 2024) को रेजुवान ने सोशल मीडिया पर लोगों को असम सहित पूरे भारत में बांग्लादेश जैसी हिंसा के लिए उकसाने की कोशिश की थी। गिरफ्तार आरोपित से पूछताछ के बाद शुक्रवार (9 अगस्त, 2024) को उसे अदालत में पेश किया गया है। मामले में जाँच व अन्य जरूरी कार्रवाई की जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला असम के हैलाकांडी का है। यहाँ के रेजुवान उल्ला मज़रभुइया ने गुरुवार को फेसबुक पर आपत्तिजनक पोस्ट किया। उसने लिखा कि बांग्लादेश के बाद अब भारत की बारी है। साथ ही उसने कहा कि बांग्लादेश का असर जल्द ही भारत में भी दिखने वाला है। इसी दौरान एक अन्य फेसबुक यूजर ने रेजवान उल्ला के बारे में जानकारी माँगी। जवाब में रेजुवान ने बताया कि वो भारत में रहता है लेकिन काम अलक़ायदा के लिए करता है।

रेजुवान ने अपने जवाब में कहा कि वो हमेशा खुद को बांग्लादेश के करीब मानता है। यह बातें रेजुवान ने ‘अमादर हैलाकांडी’ नाम के एक ग्रुप में लिखी थीं। इस कमेंट पर हैलाकांडी पुलिस की नजर पड़ी। पुलिस ने जाँच की और रेजुवान को रंगपुर स्थित उसके घर से गिरफ्तार कर लिया। आरोपित को लाला पुलिस स्टेशन ला कर पूछताछ की गई। पूछताछ में रेजुवान ने बताया कि उसके कनेक्शन पाकिस्तान में सक्रिय अलकायदा के आतंकियों से हैं।

रेजुवान की फेसबुक पोस्ट

हैलाकांडी पुलिस के एडिशनल एसपी क्राइम समीर दप्तर बरुआ ने रेजुवान पर की गई कार्रवाई की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि आरोपित ने अपनी फेसबुक प्रोफ़ाइल पर भी बांग्लादेश से जुड़े आपत्तिजनक पोस्ट किए थे। पुलिस को रेजुवान उल्ला मज़रभुइया के खिलाफ सबूत मिले और इसी के आधार पर उसे गिरफ्तार कर लिया गया है। आरोपित पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 61(2) (आपराधिक साजिश), 147 (भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ना) और 196 (शत्रुता को बढ़ावा देना) के साथ-साथ गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम, 1967 (UAPA) की धारा 39 के तहत कार्रवाई की गई है।

बताते चलें कि बगावत के तेवर दिखा रहा हैलाकांडी का रेजुवान ही ऐसी मानसिकता वाला अकेला व्यक्ति नहीं है। बांग्लादेश में आरक्षण विरोधी प्रदर्शनों को जमात-ए-इस्लामी जैसे कट्टरपंथी समूहों द्वारा हाईजैक किए जाने के बाद उन्हीं हरकतों को भारत में भी दोहराने के खतरनाक मंसूबे कई अन्य लोगों ने भी पाल रखे हैं। कई राज्यों में ऐसे लोगों पर पुलिस ने कार्रवाई की है। ऐसी टिप्पणियाँ करने वालों में कॉन्ग्रेस पार्टी के कई नेता भी शामिल हैं। इन नेताओं में सलमान खुर्शीद और मणिशंकर अय्यर भी शामिल हैं।

राहुल गाँधी ने बांग्लादेश में तख्तापलट की अपनी सहमति दी: बांग्लादेशी पत्रकार ने लगाया आरोप, कहा- खालिदा जिया के बेटे से लंदन में की थी मुलाकात

भारत की प्रमुख विपक्ष दल कॉन्ग्रेस के नेता राहुल गाँधी ने अपनी लंदन यात्रा के दौरान बांग्लादेश की कट्टरपंथी नेता खालिदा जिया के भगोड़े बेटे तारिक रहमान से मुलाकात की थी। खालिदा जिया के जेल में रहने के दौरान तारिक रहमान को बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की कार्यवाहक अध्यक्ष बनाया गया था। राहुल गाँधी और तारिक रहमान पर यह आरोप बांग्लादेश के एक वरिष्ठ पत्रकार ने लगाया है।

बांग्लादेशी समाचार पत्र ‘ब्लिट्ज़’ के संपादक सलाहुद्दीन शोएब चौधरी ने शनिवार (10 अगस्त 2024) को रिपब्लिक टीवी के एक शो में यह दावा किया। चौधरी ने डिबेट के दौरान कहा कि लंदन में हुई यह गुप्त बैठक बांग्लादेश में शेख हसीना की सरकार को उखाड़ फेंकने के लिए अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA और पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI की एक बड़ी साजिश का हिस्सा थी।

सलाहुद्दीन शोएब चौधरी ने दावा किया कि BNP के कार्यवाहक अध्यक्ष तारिक रहमान के साथ हुई उस बैठक में राहुल गाँधी ने इस बात के लिए अपनी सहमति दी, जो आज बांग्लादेश में देखने को मिल रहा है। यानी शेख हसीना को हटाने के लिए दोनों के बीच सहमति बनी। सलाहुद्दीन शोएब चौधरी ने आगे कहा, “बांग्लादेश पर तालिबान ने कब्जा कर लिया है और हिंदुओं का नरसंहार हो रहा है।”

बांग्लादेश के वरिष्ठ पत्रकार के इस दावे पर भाजपा ने कॉन्ग्रेस पर हमला बोला है। भाजपा के IT सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने कहा, “यह गंभीर मामला है। बालक बुद्धि को इस यात्रा के बारे में स्पष्टीकरण देना चाहिए और यह भी बताना चाहिए कि उन्होंने किससे मुलाकात की।” भाजपा नेता सरदार आरपी सिंह ने भी राहुल गाँधी से सवाल किया है।

सरदार आरपी सिंह ने सोशल मीडिया साइट एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, “राहुल गाँधी को लंदन में बीएनपी के तारिक रहमान के साथ अपनी बैठक के बारे में स्पष्ट करना चाहिए। क्या उन्होंने बांग्लादेश में तख्तापलट और हिंदुओं के नरसंहार को आगे बढ़ाने का आदेश दिया था? यह जानकारी बांग्लादेश में बैठे ब्लिट्ज के संपादक सलाउद्दीन चौधरी ने साझा की है।”

सलाहुद्दीन शोएब चौधरी ने 4 अगस्त 2024 को ऑपइंडिया के लिए एक लेख लिखा था, जिसमें उन्होंने बांग्लादेश में तख्ता पलट को लेकर कई गंभीर मुद्दों का खुलासा किया था। उन्होंने कहा था कि शेख हसीना सरकार का तख्ता पलट के लिए छात्रों को आगे करने वाली खालिदा जिया की BNP आतंकी संगठन अल कायदा से जुड़ी हुई है।

उन्होंने यह भी लिखा था कि BNP का कार्यवाहक अध्यक्ष तारिक रहमान इस्लामी आतंकवादी और सजायाफ्ता है। वह साल 2007 से बांग्लादेश से फरार है और ब्रिटेन में रह रहा है। उन्होंने कहा कि तारिक रहमान ने शेख हसीना सरकार के खिलाफ प्रोपेगेंडा फैलाने के लिए डेविड बर्गमैन और जॉन डैनिलोविच जैसे पूर्व अमेरिकी राजनयिकों को लगाया था।

कौन है तारिक रहमान?

तारिक रहमान का जन्म 20 नवंबर 1967 को बांग्लादेश की राजधानी ढाका हुआ है। वह बांग्लादेश की पहली महिला पीएम रहीं खालिदा जिया और बांग्लादेश के 7वें राष्ट्रपति रहे जियाउर रहमान के बेटे हैं। उनकी माँ खालिदा जिया इसके पहले वाली सरकार में एक राजनीतिक कैदी थीं। हाल ही में बांग्लादेशी सेना द्वारा देश तख्तापलट करने के बाद वह जेल से रिहा हुई हैं।

रहमान ने अपना राजनीतिक जीवन 1988 में बीएनपी के प्राथमिक सदस्य के रूप में शुरू किया। उन्होंने 1991 में राष्ट्रीय चुनावों के दौरान अपनी माँ के लिए प्रचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। 1996-2001 के दौरान जब अवामी लीग सत्ता में थी, रहमान ने हाशिए पर पड़े लोगों के लिए न्याय की आड़ में सरकार के खिलाफ सक्रिय रूप से आंदोलन चलाया।

यूनाइटेड किंगडम में निर्वासित जीवन बिताने वाले तारिक रहमान 21 अगस्त 2004 को अवामी लीग की रैली पर ग्रेनेड फेंकने के मास्टरमाइंड है। इसमें शेख हसीना को निशाना बनाने के लिए सैन्य-ग्रेड आर्गेस ग्रेनेड से हमला किया गया था। हमले में महिला अवामी लीग की अध्यक्ष और दिवंगत राष्ट्रपति जिल्लुर रहमान की पत्नी इवी रहमान सहित 24 नेता और कार्यकर्ता मारे गए थे।

इस हमले के लिए तारिक रहमान को अदालत ने 10 अक्टूबर 2018 को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। 11 सितंबर 2008 को रहमान इलाज का बहाना बनाकर लंदन भाग गए। ऐसा भी कहा जाता है कि उन्होंने एक लिखित बॉन्ड दिया था कि वह भविष्य में राजनीति में शामिल नहीं होंगे। इसके बाद उन्हें लंदन जाने की अनुमति दी गई थी।

खालिदा ज़िया ने दावा किया कि बांग्लादेश लौटने के बाद उनका बेटा सक्रिय रूप से राजनीति में भाग लेगा। हालाँकि, लंदन से ही तारिक शेख हसीना सरकार के खिलाफ काम करने लगे। इसके बाद तारिक को सजा होने के बाद शेख हसीना सरकार ब्रिटेन की सरकार पर तारिक के प्रत्यर्पण के लिए लगातार दबाव डाल रही थी। हालाँकि, वह इसमें सफल नहीं हुईं।

फाड़ डाला ‘बंगबंधु’ का नाम, जानिए कौन थे हजरत इब्राहिम जिन्हें घोषित किया ‘बांग्लादेश का राष्ट्रपिता’: दिया जाता है अरब को ‘बूतों’ से मुक्त कराने का श्रेय

बांग्लादेश के जिस आंदोलन को भारत का वामपंथी-इस्लामी गिरोह ‘लोकतांत्रिक क्रांति’ और ‘युवा शक्ति की जीत’ कहता नहीं थक रहा था, अब वो हिन्दू विरोधी हिंसा में तब्दील हो गया है। पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया की BNP (बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी) ने JeI (जमात-ए-इस्लामी) के साथ मिल कर हिन्दू मंदिरों पर हमले किए, हिन्दुओं के खिलाफ हिंसा की और उन्हें पलायन को मजबूर किया। इसके साथ ही बांग्लादेश में अब ‘राष्ट्रपिता’ (Father Of Nation) भी बदल गए हैं। आंदोलनकारी भीड़ ने ही ये ऐलान कर दिया है।

असल में गुरुवार (8 अगस्त, 2024) को मदरसा छात्रों की एक भीड़ ने ‘राष्ट्रपिता’ के रूप में शेख मुजीबुर रहमान का नाम हटा कर वहाँ पैगंबर इब्राहिम का नाम लिख दिया। बता दें कि शेख हसीना के पिता शेख मुजीबुर रहमान को ‘बंगबंधु’ कहा जाता रहा है। अब शेख हसीना को इस्तीफा देकर मुल्क छोड़ना पड़ा है, शेख मुजीबुर रहमान की मूर्तियाँ तोड़ी जा रही हैं, मूर्तियों पर पेशाब भी किया जा रहा है। अब भीड़ ने ढाका-भंगा एक्सप्रेसवे का नाम बदलते हुए पैगंबर इब्राहिम को राष्ट्रपिता लिखा। ये बांग्लादेश का पहला एक्सप्रेसवे है।

शेख मुजीबुर रहमान के नेमप्लेट को फाड़ डाला गया और उनकी जगह ‘हजरत इब्राहिम (AS) एक्सप्रेसवे’ नए नाम के रूप में लिख दिया गया। वैसे ये सिर्फ एक प्रतीकात्मकता नहीं है, इसके पीछे एक सन्देश निहित है। बांग्लादेश में धीरे-धीरे कट्टरपंथी संगठनों का प्रभाव बढ़ता जा रहा है। सरकार विरोधी हिंसा के रूप में पुलिसकर्मियों को निशाना बना कर उनकी हत्याएँ की गईं, अब यही इस्लामी कार्यकर्ता पुलिसकर्मियों को ‘सुरक्षा’ दिए जाने की बातें कर रहे हैं।

BNP नेताओं मोहम्मद एहसानुल्लाह और मोरशदल अमीन फैसल ने कहा कि नोआखली स्थित बेगमगंज चौकी पर पुलिस को जमात-ए-इस्लामी और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी सुरक्षा दे रही है। बता दें कि बेगमगंज पुलिस थाने पर ही इस्लामी भीड़ ने हमला किया था। इससे पता चलता है कि जिन संस्थाओं पर सुरक्षा की जिम्मेदारी है, वो खुद अपनी जान को लेकर डरे हुए हैं और इस्लामी गिरोह के शरण के भरोसे हैं। BNP और JeI के 2200 दंगाइयों को जमानत पर रिहा किया गया है। जमात-ए-इस्लामी उत्तर-पूर्व भारत को शेष भारत से अलग करने का इरादा रखता है।

5 अगस्त, 2024 से ही पाकिस्तान और बांग्लादेश की सोशल मीडिया पर भारत विरोधी पोस्ट्स छाए हुए हैं। भारत की ख़ुफ़िया एजेंसियों के पास भी रिपोर्ट है कि JeI के जरिए पाकिस्तानी ISI सप्तभगिनी प्रदेश को शेष भारत से अलग करने की साजिश पर काम कर रहा है। उत्तर-पूर्वी भारत के उग्रवादी संगठनों और नेताओं से संपर्क साधने के लिए एक पूर्व ब्रिगेडियर और एक पूर्व कर्नल को लगाया गया है। गजवा-ए-हिन्द वाले फिर से फड़फड़ा रहे हैं। ‘बंगलास्तान’ पर काम किया जा रहा है, जिसमें ये लोग पश्चिम बंगाल के अलावा नॉर्थ-ईस्ट इंडिया और बिहार के सीमांचल को भी रखते हैं।

आइए, अब आपको बताते हैं कि ‘हजरत इब्राहिम’ कौन थे। इस्लाम में उन्हें सबसे बड़े महापुरुषों में से एक में रखा जाता है, इराक के बेबीलॉन में उनका जन्म हुआ था। वो ‘बुतपरस्ती’ के खिलाफ थे, पत्थर और लकड़ी से बनी मूर्तियों का विरोध करते थे। कथा कुछ यूँ है कि एक रात अल्लाह ने सपने में उनसे उनके एकलौते बेटे को बलिदान के रूप में माँगा। माउंट अराफात पर वो अपने बेटे इस्माइल को लेकर गए, इस्माइल का भी अल्लाह में यकीन था और वो भी तैयार हो गए, लेकिन ऐन मौके पर अल्लाह ने हस्तक्षेप किया और उन्हें रोका, वो परीक्षा में पास हुए।

फिर अल्लाह ने उन्हें एक भेड़ दिया, क़ुरबानी के लिए। उनकी याद में मुस्लिम आज भी ईद-उल-अज़हा बनाते हैं। इस दिन मुस्लिम दुनिया भर में करोड़ों पशुओं की क़ुरबानी देते हैं, फिर उन्हें खाते हैं। इस्लाम में बाद में इस्माइल को भी पैगंबर का दर्जा मिला। पैगंबर मुहम्मद को हजरत इब्राहिम का प्रपौत्र बताया जाता है। काबा और मक्का को इन्हीं पिता-पुत्र (इब्राहिम और इस्माइल) द्वारा निर्मित किया गया माना जाता है। कहा जाता है कि उन्होंने अरब क्षेत्र को ‘बूतों’ से मुक्त किया। ‘हज यात्रा’ की शुरुआत इस्माइल ने ही की थी। इनका बाइलबिल में भी जिक्र है।

70 साल का मौलाना चच्चा, 8 साल की बच्ची का कपड़ा उतारा, खुद भी हो गया नंगा: पकड़ा गया तो मज़हब का वास्ता देकर हुआ फरार, UP पुलिस की 5 टीमें तलाश में

उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में 70 वर्षीय एक मौलाना पर 8 साल की नाबालिग बच्ची से रेप की कोशिश का आरोप लगा है। आरोपित मौलाना का नाम मुख़्तार है। उसे लोग मौलाना चच्चा नाम से भी बुलाते हैं। लोगों ने आरोपित को नग्न हालत में पकड़ लिया गया था लेकिन पंचायत कर मामले को निबटाने के चक्कर में आरोपित फरार हो गया। मुख़्तार की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की 5 टीमें अलग-अलग जगहों पर लगातार दबिश दे रही है। उसके रिश्तेदारों और परिजनों से भी पूछताछ चल रही है। घटना शुक्रवार (9 अगस्त 2024) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला कानपुर शहर के थानाक्षेत्र ग्वालटोली का है। यहाँ शुक्रवार को एक महिला ने पुलिस में तहरीर दी है। तहरीर में महिला ने बताया है कि शुक्रवार की शाम 7:30 के आसपास उनकी 8 वर्षीया बेटी घर के बाहर खेल रही थी। तभी मौलाना चच्चा नाम से चर्चित मुख़्तार ने बच्ची को चॉकलेट का लालच देकर अपने पास बुलाया। बच्ची उसकी बातों में आकर पास चली गई। मौलना बच्ची को गोद में लेकर बदनीयती से अपने कमरे में घुस गया। यहाँ उसने पीड़िता के कपड़े उतार दिए और खुद भी नंगा होकर रेप करने का प्रयास करने लगा।

आरोपित की इस हरकत से बच्ची बेहद डर गई। वह जोर-जोर से चिल्लाने लगी। बच्ची की चीखें सुन कर आसपास के लोग जमा हो गए। उन्होंने झाँक कर अंदर मौलाना मुख़्तार की करतूत देखी। आखिकरकार कुछ लोगों ने गेट को तोड़ दिया और अंदर घुस गए।

लोगों ने मौलाना को पकड़ा तो वह हाथ जोड़ कर खुद को छोड़ देने की दुहाई देने लगा। उसने मज़हब का वास्ता दिया तो कुछ लोग इस मामले को आपसी पंचायत के जरिए निबटाने की कोशिश करने लगे। इसी बीच मौका पाकर मौलाना फरार हो गया।

कुछ ही देर बाद मामले की सूचना पुलिस को मिली। पुलिस फ़ौरन मौके पर पहुँच गई और मौलाना की गिरफ्तारी के प्रयास में जुट गई। मौलाना की तलाशी में पुलिस की 5 टीमें बनाई गई है। ये टीमें न सिर्फ मौलाना मुख़्तार के रिश्तेदारों और परिजनों से पूछताछ में जुटी हैं बल्कि अलग-अलग स्थानों पर छापेमारी भी कर रही हैं।

कानपुर सेंट्रल के ACP ने बताया कि आरोपित पर पॉक्सो एक्ट सहित अन्य धाराओं में FIR दर्ज कर ली गई है। पीड़िता का मेडिकल परीक्षण करवाया जा रहा है। फिलहाल बच्ची स्वस्थ व सुरक्षित है। मामले में जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

प्राइवेट पार्ट से खून, आँख-मुँह-पेट-गर्दन-हाथ-पैर पर चोट: कोलकाता के सरकारी मेडिकल कॉलेज के भीतर डॉक्टर की रेप के बाद हत्या, मामले को दबाने का आरोप

पश्चिम बंगाल ही नहीं, एशिया में कभी सबसे बड़े मेडिकल कॉलेज रहे आर जी कर मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में एक डॉक्टर के साथ बेरहमी कर उसकी हत्या कर दी गई। ये हत्या मेडिकल कॉलेज के सेमिनार हॉल में हुई, जो रात के 3 बजे से सुबह 5 बजे के बीच अंजाम दी गई। इस मामले में छात्रों ने लीपा-पोती का आरोप लगाकर प्रदर्शन किया है। डॉक्टर आर जी कर मेडिकल कॉलेज में पोस्ट-ग्रेजुएट सेकंड ईयर की स्टूडेंट थी। वो गुरुवार की रात ड्यूटी कर रही थी और आराम करने के लिए सेमिनार हॉल में चली गई थी, जहाँ उसके साथ ये बर्बरता की गई।

बेरहमी की इंतिहाँ पार

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये मामला शुक्रवार (9 अगस्त 2024) का है, जब सुबह के समय डॉक्टर क्षत-विक्षत हालत में मिली। उस समय वो बेहोश थी। उसे तुरंत इलाज देना शुरू किया गया, लेकिन उसने दम तोड़ दिया। पुलिस ने ट्रेनी डॉक्टर के शव का पोस्टमॉर्टम भी कराया है। शुरुआती पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में यौन उत्पीड़न और हत्या की बात सामने आई है। रिपोर्ट में कहा गया है, “उसकी दोनों आँखों और मुँह से खून बह रहा था, चेहरे और नाखून पर चोटें थीं। पीड़िता के निजी अंगों से भी खून बह रहा था। उसके पेट, बाएँ पैर…गर्दन, दाएँ हाथ और…होंठों पर भी चोटें थीं।”

बताया जा रहा है कि उसके मुँह में कपड़ा ठूंसकर उसके साथ हैवानियत की। एक दो बार नहीं कई बार रेप किया गया। उसका प्राइवेट पार्ट बुरी तरह से जख्मी हो गया था और लगातार खून बह रहा था। हालाँकि पुलिस ने पहले इसे आत्महत्या बताया था, लेकिन अर्धनग्न शरीर की हालत कुछ और ही बयाँ कर रही थी। जिसके बाद छात्रों ने जमकर हंगामा किया और फिर छात्रा के शव का पोस्टमार्टम किया गया।

चार पन्नों की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के अनुसार, महिला डॉक्टर के गुप्तांग से खून बह रहा था। शरीर के अन्य हिस्सों में चोट के निशान थे। उसकी दोनों आँखों और मुँह से खून बह रहा था, चेहरे और नाखून पर चोट के निशान थे। उसके पेट, बाएँ पैर, …गर्दन, दाएँ हाथ, अनामिका और… होंठों पर भी चोट के निशान थे। कोलकाता पुलिस के एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अपराध तड़के तीन से 6 बजे के बीच हुआ। महिला डॉक्टर की गर्दन भी टूटी पाई गई है।

सूत्रों ने बताया कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने डॉक्टर के माता-पिता को फोन किया और उन्हें दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया। पीड़िता के पिता ने कहा, “मेरी बेटी की हत्या करने से पहले उसके साथ बलात्कार किया गया है। उसके शरीर पर चोट का निशान इसका सबूत है। वह अर्धनग्न अवस्था में मिली है। सच को छिपाने का प्रयास किया जा रहा है।”

वहीं, कोलकाता पुलिस ने अपराध की जाँच के लिए एक विशेष जाँच दल (एसआईटी) का गठन किया है। लाश की जो स्थिति थी, उससे पता चला है कि आरोपी ने हैवानियत की सारी इंतहा पार कर दी थी। इस मामले बीजेपी की वरिष्ठ नेता अग्निमित्र पॉल ने कहा कि बच्ची के शरीर पर जख्म था, इलाज के बाद पीड़िता की मौत हो गई। उन्होंने डॉक्टर के शव का शाम के समय पोस्टमॉर्टेम कराए जाने का भी विरोध किया और पूछा, “शाम को पोस्टमॉर्टम क्यों किया गया?”

कोलकाता के डॉक्टर मानस गुमटा ने इस घटना को हैरान करने वाला बताया। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल गुंडों के हाथों में चला गया है। हमें लगता है कि प्रशासन तथ्यों को दबाने की कोशिश कर रहा है, तभी उसने शुरुआत में इसे आत्महत्या करार दिया। हमारी माँग है कि पोस्टमार्टम आरजी कर अस्पताल के बाहर के डॉक्टरों द्वारा किया जाना चाहिए।

‘1 घंटे में इस्तीफा दो, नहीं तो परिणाम भुगतो’: मुख्य न्यायाधीश को धमकी, बांग्लादेश में सुप्रीम कोर्ट सहित हाई कोर्ट को मुस्लिम भीड़ ने घेरा

बांग्लादेश में प्रधानमंत्री शेख हसीना का तख्ता पलटने के बाद प्रदर्शनकारी छात्रों के वेश में कट्टरपंथियों ने अब सर्वोच्च न्यायालय को निशाना बनाया है। प्रदर्शनकारी शनिवार (10 अगस्त 2024) की सुबह सुप्रीम कोर्ट को घेर लिए और मुख्य न्यायाधीश सहित सभी न्यायाधीशों से इस्तीफे की माँग की। कहा जा रहा है कि मुख्य न्यायाधीश सहित सभी जज कोर्ट से भाग गए हैं।

दरअसल, शेख हसीना के इस्तीफा देकर भारत चले जाने के बाद नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व में बांग्लादेश में एक अंतरिम सरकार का गठन किया गया है। मुख्य न्यायाधीश ने अंतरिम सरकार से परामर्श किए बिना ही न्यायालय के सभी जजों की एक बैठक बुला ली थी। इसके बाद प्रदर्शनकारियों की भीड़ न्यायालय परिसर पहुँचकर उसे घेर लिया।

प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि न्यायालय के न्यायाधीश एक साजिश रच रहे थे, जिसके कारण लोगों में आक्रोश फैल गया और उनसे जवाबदेही की माँग की गई। तनाव बढ़ने पर न्यायालय की बैठक रद्द कर दी गई। हालाँकि, प्रदर्शनकारी रूके नहीं सुप्रीम कोर्ट को घेरना जारी रखा। उन्होंने मुख्य न्यायाधीश को पद छोड़ने के लिए एक घंटे का अल्टीमेटम दिया है।

इस बैठक से पहले कार्यवाहक सरकार के सलाहकार आसिफ महमूद ने मुख्य न्यायाधीश को ‘फासीवाद का मित्र’ बताते हुए उनके इस्तीफे की माँग की थी। इसके साथ ही उन्होंने पूर्ण न्यायालय की बैठक को रद्द करने का अल्टीमेटम भी जारी किया था। मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पूर्ण न्यायालय की बैठक में आम तौर पर न्यायपालिका की प्रशासनिक गतिविधियों सहित विभिन्न एजेंडों पर चर्चा होती है।

दरअसल, मुख्य न्यायाधीश ने 10:30 बजे पूर्ण कोर्ट की बैठक बुलाई थी, ताकि मौजूदा परिस्थितियों में न्यायालय कैसे काम कर सकता है, इस पर एवं अन्य मुद्दों पर चर्चा की जा सके। प्रदर्शनकारियों ने इसे न्यायिक तख्ता पलट बता दिया। अंतरिम सरकार में युवा एवं खेल मंत्रालय के सलाहकार आसिफ महमूद ने फेसबुक पर पोस्ट करके मुख्य न्यायाधीश को तत्काल इस्तीफे की चेतावनी दी।

आसिफ महमूद ने कहा, “फासीवाद से पोषित और विभिन्न कुकृत्यों में शामिल सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने सरकार से कोई चर्चा किए बिना पूर्ण न्यायालय की बैठक बुलाई है। पराजित ताकतों द्वारा कोई भी साजिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी। छात्र और वकील पहले ही विरोध में इकट्ठा होना शुरू कर चुके हैं।” प्रदर्शनकारियों ने सुप्रीम कोर्ट के साथ-साथ हाई कोर्ट को भी घेर लिया है।

छात्र आंदोलन के एक अन्य समन्वयक हसनत अब्दुल्ला ने शनिवार की सुबह फेसबुक लाइव पर आकर कहा, “छात्रों और नागरिकों के विद्रोह की रक्षा और न्यायपालिका के तख्तापलट को रोकने के लिए उच्च न्यायालय को घेर लें।” इस आह्वान के बाद हजारों की संख्या में पहुँचे छात्र प्रदर्शनकारियों ने सुप्रीम कोर्ट को घेर लिया।

इसके बाद में फेसबुक पोस्ट में उन्होंने कहा, “हमने पहले ही मुख्य न्यायाधीश के इस्तीफे की माँग की थी। अगर वे छात्रों के खिलाफ रुख अपनाते हैं और उन्हें भड़काते हैं तो उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।” उनके तत्काल और बिना शर्त इस्तीफे की माँग करते हुए अब्दुल्ला ने कहा, “हसीना को सत्ता से हटाने वाली जनता आपको कुर्सी से उतारने में आधा घंटा भी नहीं लगाएगी।”

इतना ही नहीं, मुख्य न्यायाधीश के आधिकारिक आवास पर भी प्रदर्शनकारियों ने हमला कर दिया और वहाँ रखे सारे सामान को अपने साथ ले गए। हालाँकि, उन्होंने इस भवन में आग नहीं लगाई। हमले के दौरान किसी ने प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश नहीं की। 5 अगस्त को बांग्लादेश में तख्ता पलट के बाद से ही वहाँ कोई सुरक्षाकर्मी नहीं है। सभी भाग गए हैं।

पुलिस की गैर मौजूदगी में कोई भी व्यक्ति बिना रोक-टोक मुख्य द्वार से अंदर आ-जा सकता है। शुक्रवार (9 अगस्त 2024) को राजधानी के हरे रोड स्थित मुख्य न्यायाधीश के आवास के मुख्य द्वार पर कोई सुरक्षा गार्ड ड्यूटी पर नहीं दिखा। अंदर घर का सामान बिखरा पड़ा था। घटना के बाद से उस मकान में कहीं कोई नहीं दिख रहा है और ना ही कोई सुरक्षाकर्मी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 5 अगस्त की दोपहर को अचानक हुए हमले के कुछ देर पहले ही मुख्य न्यायाधीश ओबैदुल हसन घर से निकल गए थे। उस दिन मुख्य न्यायाधीश के आवास के सामने जज कॉम्प्लेक्स आवासीय इमारत पर भी हमला हुआ था और भीड़ न्यायाधीशों को गालियाँ दे रही थीं। उनमें से कुछ लोग बाड़ फाँदकर अंदर घुस गए थे और इमारत पर हमला कर तोड़फोड़ की थी।

बता दें कि अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना के नेतृत्व वाली अवामी लीग सरकार की अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण बांग्लादेश (ICT-B) में पूर्व मुख्य अभियोजक बैरिस्टर तूरीन अफरोज पर भी हमला किया गया है। तूरीन ने साल 1971 के मुक्ति संग्राम के दौरान मानवता के खिलाफ अपराधों के लिए कई रजाकरों के खिलाफ मुकदमों की पैरवी की थी।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इस्लामी भीड़ ने उनके घर को घेर लिया और उन पर हमला किया। हमलावरों ने उन्हें पकड़कर जबरन उनके बाल काट दिए और उनके पैरों को घायल कर दिया। सोशल मीडिया पर इस घटना की कई परेशान करने वाली तस्वीरें वायरल हो रही हैं, जिसे पीड़िता की बताई जा रही हैं। हालाँकि, ऑपइंडिया इन तस्वीरों की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं कर सका।

तूरीन अफ़रोज़ ने 6 अगस्त 2024 को इंडिपेंडेंट टेलीविज़न से कहा, “उन्होंने (हमलवारों ने) पूछा- ‘तुमने हिजाब क्यों नहीं पहना है? तुम्हारी माँ देश छोड़कर चली गई है। तुम क्यों नहीं गईं?’ उन्होंने लगातार मेरे पैरों पर पेंसिल से वार किया। मैं मधुमेह से पीड़ित हूँ। मेरी 16 वर्षीय बेटी मेरे साथ थी। मैं बहुत डरी हुई थी। अगर उन्होंने उसके साथ बलात्कार किया होता तो एक माँ के तौर पर मैं क्या करती?”

बांग्लादेश बॉर्डर पर पीड़ित-भयभीत हिन्दुओं का जमावड़ा: बसी-बसाई गृहस्थी और चल-अचल सम्पत्ति छोड़ कर भागे, नाले में घुस कर भारत आने का प्रयास

बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने सोमवार (5 अगस्त 2024) को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। इसी इस्तीफे के बाद 15 वर्षों तक चली उनकी सत्ता का अंत हो गया। शेख हसीना के इस्तीफे के बाद से पूरे बांग्लादेश में अराजकता का माहौल है। बड़े पैमाने पर हो रही हिंसा में मज़हबी कट्टरपंथियों ने वहाँ के हिन्दुओं को खासतौर पर निशाना बनाया है। अपने घरों, दुकानों और मंदिरों पर हमले से डरे-सहमे कई हिन्दू भारत में पनाह लेने के प्रयास में जुटे हुए हैं। बताया जा रहा है कि भारत-बांग्लादेश सीमा पर हजारों की तादाद में हिन्दू पहुँच गए हैं।

रिपोर्ट्स और वायरल हो रहे कुछ वीडियो के मुताबिबांग्लादेशी हिन्दुओं को अपने देश में बड़े पैमाने पर हिंसा का सामना करना पड़ रहा है। इसी वजह से वो अपनी बसी-बसाई गृहस्थी के साथ चल-अचल सम्पत्ति छोड़ कर भाग रहे हैं। इन्हें भारत-बांग्लादेश की अंतरराष्ट्रीय सीमा पर इकट्ठा होते देखा गया है।

एक वायरल वीडियो में तो कुछ लोगों को भारत में घुसने के लिए एक नाले में लाइन से खड़ा देखा जा सकता है। यह नाला बांग्लादेश के लालमोनिरहाट जिले में है, जो इंटरनेशनल बाड़ से लगभग 400 मीटर की दूरी पर है।

BSF (सीमा सुरक्षा बल) ने कूच बिहार सीमा पर बांग्लादेशी नागरिकों के एक बड़े जत्थे को भारत में घुसने से रोक दिया है। बांग्लादेश में चल रही उथल-पुथल को लेकर सीमा सुरक्षा बल पहले से ही सक्रिय है।

पश्चिम बंगाल राज्य में कूच बिहार जिले के सीतलकुची इलाके में पथनटुली बॉर्डर पड़ता है। इस बॉर्डर पर लोगों के जमावड़े की सूचना पर सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) की गुवाहाटी फ्रंटियर एक्टिव हुई। उसने भारत में प्रवेश की कोशिश कर रहे लोगों के एक बड़े समूह को बॉर्डर पर ही रोक दिया।

पथनटुली के रहने वाले इकरामुल हक ने कहा, “सुबह 9 से 9.30 बजे के बीच में बांग्लादेश के कुछ लोग सीमा पर जमा होकर भारत में घुसने की कोशिश करने लगे।” इकरामुल हक का दावा है कि कई लोग अभी भी भारत-बांग्लादेश बॉर्डर के आसपास ही घूम रहे हैं।

बीएसएफ और बांग्लादेशी बॉर्डर गार्ड्स बांग्लादेश (बीजीबी) ने आपस में मिल कर यह सुनिश्चित किया कि सीमा पर किसी भी तरफ से कोई भी घुसपैठ न होने पाए। BSF के हवाले से बताया गया है कि सीमा पूरी तरह से सील है।

नमाज पढ़ते 100 आतंकियों को इजरायल ने उड़ाया: स्कूल को कमांड सेंटर के रूप में चला रहा था हमास, रॉकेट से किया तबाह

फिलिस्तीन के हमास आतंकियों के खिलाफ इजरायल लगातार कार्रवाई कर रहा है। एक ताजा हवाई हमले में 100 से अधिक फिलिस्तीनियों की मौत हो गई है। ये सभी एक स्कूल में नमाज पढ़ रहे थे। इजरायल ने पूर्वी गाजा में इस स्कूल को निशाना बनाकर यह हमला किया था। इजरायल का कहना है कि यह स्कूल नहीं, बल्कि आतंकियों का कमांड पोस्ट था।

इजरायल की सेना IDF ने कहा है कि उसने हमास के एक कमांड पोस्ट पर हमला किया है। इस कमांड पोस्ट को आतंकवादियों ने गाजा शहर के दाराज स्थित अल-तबईन स्कूल में स्थापित किया था और इजरायल के खिलाफ काम कर रहे थे। वहीं, आतंकी संगठन हमास द्वारा संचालित नागरिक सुरक्षा एजेंसी का कहना है कि मारे गए लोग आम नागरिक हैं।

IDF ने अपने बयान में कहा कि हमला करने से पहले नागरिकों को नुकसान पहुँचाने की संभावना को कम करने के लिए सटीक हथियारों से कई हमले किए। IDF ने हमास पर अंतर्राष्ट्रीय कानून का व्यवस्थित रूप से उल्लंघन करने, नागरिक आश्रयों से काम करने और आबादी को मानव ढाल के रूप में इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है।

हमसा द्वारा चलाए जा रहे सिविल डिफेंस एजेंसी के प्रवक्ता महमूद बसल ने अंतरराष्ट्रीय न्यूज एजेंसी एएफपी को बताया, “तीन इज़रायली रॉकेट उस स्कूल पर गिरे, जिसमें विस्थापित फ़िलिस्तीनी रह रहे थे।” गाजा के सरकारी मीडिया कार्यालय का कहना है कि हमले में 100 से अधिक लोग मारे गए हैं। वहीं, दर्जनों लोग घायल हुए हैं।

हमास ने एक बयान में कहा, “इजरायली हमले में फज्र की नमाज अता कर रहे विस्थापित फिलिस्तीनी नागरिकों को निशाना बनाया गया।” इससे पहले भी इजरायल ने फिलिस्तीन विस्थापितों से भरे दो स्कूलों को निशाना बनाया था। इस हमले में 30 से अधिक लोग मारे गए थे और दर्जनों लोग घायल हुए थे।

वहीं, 4 अगस्त को किए गए उस समय में गाजा के हमामा स्कूल को निशाना बनाया गया था। इसमें 17 लोग मारे गए थे। इससे पहले 1 अगस्त को इजरायल ने अल-मुगराबी स्कूल पर रॉकेट दागे थे। इसमें 15 लोगों की मौत हुई थी। इजरायल का स्पष्ट कहना है कि इन स्कूलों में हमास के आतंकी हैं, जो कमांड सेंटर के रूप में काम कर रहे हैं।

बता दें कि हमास के आतंकियों ने पिछले साल 7 अक्टूबर को गाजा पट्टी से दक्षिणी इजरायल में हथियारों के साथ घुसपैठ करके हमला कर दिया था। इस दौरान लगभग 1200 लोगों को मार दिया गया था और सैकड़ों महिला-पुरुषों को बंदी बना लिया गया था। उनके साथ मारपीट और रेप जैसी अमानवीय घटनाएँ हुई थीं। इसके बाद इजरायल ने फिलिस्तीन पर कार्रवाई शुरू की थी।