Home Blog Page 740

‘ये 2015 की बात, तब हम दोनों प्राइवेट सिटीजन थे’: SEBI अध्यक्ष और उनके पति ने हिंडेनबर्ग के आरोपों को नकारा, कहा – अडानी की किसी भी कंपनी में कोई निवेश नहीं

हिंडेनबर्ग ने भारतीय नियामक संस्था SEBI की अध्यक्ष माधवी पुरी और उनके पारी धवल बुच पर आरोप लगाया कि अडानी समूह की संदिग्ध विदेशी कंपनियों में इनकी हिस्सेदारी है। अडानी समूह पहले ही इस रिपोर्ट को हिंडेनबर्ग के पुराने आरोपों और पहले से उपलब्ध सार्वजनिक सूचनाओं की खिचड़ी करार देते हुए दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। वहीं अब बुच दंपति ने भी हिंडेनबर्ग के आरोपों का करारा जवाब दिया है। हिंडेनबर्ग कंपनियों को बदनाम कर के शॉर्ट सेलिंग करता है और पैसे कमाता है।

बुच दंपति ने जारी किए गए बयान में कहा है कि वो पारदर्शिता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताते हुए हिंडेनबर्ग के आरोपों का जवाब दे रहे हैं। इसमें बताया गया है कि माधवी पुरी IIM अहमदाबाद से पढ़ी हुई हैं और उनका बैंकिंग व वित्तीय क्षेत्र में 2 दशक लंबा कॉर्पोरेट करियर रहा है, अधिकतर वो ICICI ग्रुप से जुड़ी रही हैं। वहीं IIT दिल्ली से पढ़े धवल बुच के बारे में बताया गया है कि वो पहले हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड (HUL) और फिर यूनिलीवर ग्लोबल की सीनियर मैनेजमेंट टीम का हिस्सा रहे हैं, उनका 35 वर्षों का कॉर्पोरेट करियर रहा है।

दंपति ने बताया है कि उन दोनों ने अपने वेतन, बोनस और स्टॉक्स में निवेश के माध्यम से पैसे जमा किए हैं, इसीलिए माधवी पुरी के वर्तमान वेतन से उनकी संपत्ति को जोड़ कर देखना दुर्भावनापूर्ण और कुप्रेरित है। जानकारी दी है कि जहाँ 2010 से लेकर 2019 तक धवल ने लंदन और सिंगापुर में यूनिलीवर के लिए काम किया, वहीं 2011 से 2017 तक माधवी सिंगापुर में पहले एक प्राइवेट इक्विटी फर्म की कर्मचारी रहीं और फिर कंसल्टिंग रोल में रहीं।

बुच दंपति ने जानकारी दी है कि जिस निवेश को लेकर हिंडेनबर्ग हंगामा खड़ा कर रहा है वो 2015 का है, माधवी पुरी के SEBI का सदस्य बनने के 2 साल पहले का। हिंडेनबर्ग ने जिस कंपनी का जिक्र किया है, उसमें निवेश की वजह बताते हुए दंपति ने कहा है कि उसके चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर अनिल आहूजा धवल के बचपन के दोस्त हैं और दोनों IIT दिल्ली से पढ़े हैं, वो सिटीबैंक, 3i ग्रुप और जेपी मॉर्गन जैसी कंपनियों में निवेश का उनका लंबा करियर रहा है।

बताया गया है कि जब 2018 में अनिल आहूजा ने उक्त कंपनी में CIO का पद छोड़ दिया तो इनलोगों ने उसमें रखे अपने फंड को निकाल लिया। वहीं 2015 में बुच दंपति सिंगापुर में रह रहे प्राइवेट सिटीजन थे। बताया गया है कि उक्त फंड ने अडानी समूह के किसी भी इक्विटी, या डेरिवेटिव में निवेश नहीं किया। वहीं 2019 में Blackstone में सीनियर एडवाइजर बनाए जाने के पीछे का कारण बताते हुए धवल बुच ने कहा है कि सप्लाई चेन मैनेजमेंट की समझ के कारण उन्हें ये पद दिया गया था।

बयान में बताया गया है कि Blackstone के रियल स्टेट विभाग से धवल कभी जुड़े रहे ही नहीं हैं, और माधवी के SEBI अध्यक्ष बनने से पहले से ही वो इस पद पर हैं। SEBI में माधवी ने Balckstone के मामलों में खुद को Recusal List में रखा है, यानी वो इससे जुड़े फैसले नहीं लेतीं। बताया गया है कि सेबी ने पिछले 2 वर्षों में 300 सर्कुलर जारी किए हैं, ताकि कारोबार करना आसान होता जाए। बोर्ड के सभी सदस्य हितधारकों से राय-विचार के बाद ही फैसले लेते हैं।

साथ ही सिंगापुर और भारत में माधवी पुरी जिन कंपनियों का हिस्सा थीं, उनके बारे में SEBI को पहले ही सूचित कर दिया गया था और उनकी नियुक्ति के साथ ही निष्क्रिय हो गईं। 2019 में धवल ने यूनिलीवर से रिटायर होने के बाद इन कंपनियों के जरिए अपना काम शुरू किया। आरोप लगाया गया है कि नियमों के उल्लंघन के लिए जारी किए गए ‘कारण बताओ नोटिस’ का जवाब देने की बजाए हिंडेनबर्ग SEBI को बदनाम कर रहा है, जहाँ कोड ऑफ कंडक्ट के मुताबिक काम होता है और सारी सूचनाएँ संस्था को पहले ही देनी पड़ती है।

‘$ले #मार, तू हमको रोकेगा’: मुस्लिम भीड़ ने जातिसूचक गालियाँ देकर दलितों को धारदार हथियारों से पीटा, चंद्रशेखर ‘रावण’ के गृह जनपद की घटना

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में दलित समुदाय (SC वर्ग) के लोगों पर मुस्लिम भीड़ द्वारा हमले का आरोप है। धारदार हथियारों से हुए इस हमले के दौरान पीड़ितों को जातिसूचक शब्द बोले गए। हमलावरों ने एक महिला को भी निशाना बनाया है। कुल 3 घायलों को अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती करवाया गया है। पीड़ितों की तहरीर पर इशहाक, साहिल और असगर सहित कुल 5 हमलावरों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है। भीम आर्मी प्रमुख व सांसद चंद्रशेखर रावण के गृहजनपद की यह घटना शुक्रवार (9 अगस्त, 2024) की है। पुलिस मामले की जाँच कर रही है।

यह मामला सहारनपुर के थाना क्षेत्र नकुड़ में आने वाले गाँव खेड़ा अफगान का है। यहाँ शुक्रवार को अनुसूचित जाति की जाटव बिरादरी से आने वाले राजेश कुमार ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत में उन्होंने बताया कि थोड़े समय पहले उनका एक इन्वर्टर चोरी हो गया था। इस बाबत राजेश के भाई दयाराम ने 9 अगस्त को असगर के बेटे अज्जू, अय्यूब के बेटे शिब्बू, इशहाक, साहिल और असगर से पूछताछ की। इस बात पर ये अज्जू, असगर, साहिल, शिब्बू और इशहाक भड़क उठे। इन सभी ने दयाराम को गंदी-गंदी गालियाँ देनी शुरू कर दी।

जब दयाराम ने गाली देने से रोका तो आरोपितों ने अपने घरों से लाठी-डंडे और फावड़े निकाल लिए। इन्होंने दयाराम को बेरहमी से पीटना शुरू कर दिया। इसी दौरान उधर से गाँव के ही ऋषिपाल गुजरे। उन्होंने मामले में बीच-बचाव की कोशिश की जिस से थोड़ी देर के लिए झगड़ा बंद हो गया। आरोप है कि कुछ देर बाद अज्जू, शिब्बू, साहिल, असगर और इशहाक फिर से हाथों में हथियार ले कर ऋषिपाल के घर पहुँच गए। इन्होंने ऋषिपाल को माँ-बहन की गालियाँ देनी शुरू की।

जब ऋषिपाल ने उन्हें रोका तो आरोपितों ने कहा, “$ले, $मार, गिट्ट#, तू हमको रोकेगा। इसके बाद पाँचों हमलावरों ने ऋषिपाल पर हमला बोल दिया। SC वर्ग के ऋषिपाल को बचाने के लिए उनके भाई कार्तिक और चाची अनीता भी पहुँची। आरोप है कि हमलावरों ने ऋषिपाल के साथ इन दोनों को भी बुरी तरह से पीटा। पीड़ितों की चीख-पुकार सुन कर गाँव के लोग जमा होने लगे। तब हमलावर पीड़ितों को जान से मार डालने की धमकी देते हुए फरार हो गए। हमले में तीनों पीड़ित घायल हो गए जिनको इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया गया है।

अपनी शिकायत में राजेश कुमार ने अज्जू, शिब्बू, इशहाक, असगर और साहिल पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है। इस शिकायत पर पुलिस ने पाँचों आरोपितों के खिलाफ नामजद FIR दर्ज कर ली है। इन सभी पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 191 (2), 115 (2), 352, 333 और 351 (2) के साथ SC/ST एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है। जिस सहारनपुर की यह घटना है वह भीम आर्मी प्रमुख व सांसद चंद्रशेखर रावण का पैतृक जनपद है। फिलहाल पुलिस मामले की जाँच की जा रही है।

पॉक्सो एक्ट सिर्फ पुरुषों पर ही नहीं, महिलाओं पर भी लागू: दिल्ली हाईकोर्ट ने किया साफ – किसी भी अंग में प्रवेश करना बलात्कार

दिल्ली हाई कोर्ट ने साफ कर दिया है कि पॉक्सो एक्ट के तहत मामला सिर्फ पुरुष पर ही नहीं, बल्कि पर भी चल सकता है, क्योंकि यौन अपराधी पुरुष ही नहीं, महिला भी हो सकती है। इसके साथ ही कोर्ट ने कहा कि बच्चों पर यौन हमले में सिर्फ जननांग ही नहीं, बल्कि कोई भी वस्तु प्रवेश कराई जाए, तो वो यौन उत्पीड़न यानी रेप की ही श्रेणी में आता है।

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, शुक्रवार (9 अगस्त 2024) को दिल्ली हाई कोर्ट ने यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) मामले में बड़ा फैसला दिया। हाई कोर्ट ने कहा कि इस अधिनियम के तहत पेनिट्रेटिव (जबरन किसी चीज को अंदर डालना) के जरिए यौन हमले के लिए किसी महिला के खिलाफ भी केस चलाया जा सकता है।

जस्टिस अनूप जयराम भंभानी की बेंच ने कहा कि पॉक्सो अधिनियम की धारा 3, जो पेनिट्रेटिव यौन हमले से संबंधित है, उसके दायरे में किसी वस्तु या शरीर के किसी अंग को प्रवेश कराना, या प्रवेश कराने के लिए बच्चे के शरीर के किसी अंग से छेड़छाड़ करना, या मुँह का प्रयोग करना शामिल है, इसलिए यह कहना पूरी तरह से अतार्किक होगा कि इन प्रावधानों के तहत अपराध के लिए केवल पेनिस के जरिए पेनेट्रेशन की बात कही गई है।

15 पन्ने के आदेश में जस्टिस ने कहा कि पॉक्सो अधिनियम बच्चों को यौन अपराधों से सुरक्षा देने के लिए बनाया गया था। बेशक बच्चे पर अपराध किसी पुरुष या महिला द्वारा किया गया हो। पीठ ने कहा, ‘धारा 3(ए), 3(बी), 3(सी) और 3(डी) में प्रयुक्त सर्वनाम ‘वह’ की व्याख्या इस प्रकार नहीं की जानी चाहिए कि उन धाराओं में शामिल अपराध केवल पुरुष तक ही सीमित हो जाए। यह ध्यान रखना बहुत जरूरी है कि उक्त प्रावधानों में पेनेट्रेटिव यौन हमले के दायरे में कोई वस्तु या शरीर का अंग डालना, या पेनेट्रेशन के लिए बच्चे के शरीर के किसी अंग से छेड़छाड़ करना या मुंह का इस्तेमाल करना शामिल है।’

कोर्ट ने यह टिप्पणी एक महिला द्वारा दाखिल याचिका पर सुनवाई के दौरान कहीं। कोर्ट ने याचिका पर विचार करते हुए अधिनियम के दायरे का विस्तार किया, जिसमें शहर की एक अदालत के मार्च 2024 के आदेश को चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने महिला के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोप तय किए थे। यह मामला 2018 का है। एडवोकेट पीयूष सचदेव के जरिए दायर याचिका में महिला ने तर्क दिया था कि किसी महिला के खिलाफ पेनिट्रेटिव यौन हमला और गंभीर पेनिट्रेटिव यौन हमला का अपराध दर्ज नहीं किया जा सकता, क्योंकि परिभाषा को सीधे पढ़ने से पता चलता है कि इसमें केवल और बार-बार सर्वनाम ‘वह’ का प्रयोग किया गया है।

हाई कोर्ट की विशेष टिप्पणी

पॉक्सो के प्रावधानों से पता चलता है कि पॉक्सो अधिनियम की धारा 3 में प्रयुक्त शब्द ‘वह’ को ये अर्थ नहीं दिया जा सकता कि यह केवल पुरुष के लिए है। इसके दायरे में लिंग भेद के बिना कोई भी अपराधी (महिला और पुरुष दोनों) शामिल होना चाहिए।

यह सही है कि सर्वनाम ‘वह’ को पॉक्सो अधिनियम में कहीं भी परिभाषित नहीं किया गया है। पॉक्सो अधिनियम की धारा 2(2) के प्रावधान को देखते हुए, किसी को ‘वह’ सर्वनाम की परिभाषा पर वापस लौटना चाहिए, जैसा कि आईपीसी की धारा 8 में है।

इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि पॉक्सो एक्ट बच्चों को यौन अपराधों से बचान के लिए बनाया गया है। चाहे वो अपराध किसी पुरुष या महिला ने किया हो। अदालत को कानून के किसी भी प्रावधान की ऐसी व्याख्या नहीं करनी चाहिए जो विधायी इरादे और उद्देश्य से अलग हो।

पॉक्सो एक्ट में किसी भी वस्तु का प्रवेश बच्चों के निजी अंगों में बात है, न कि केवल शरीर का कोई अंग। इसलिए यह कहना सही नहीं है कि यौन अपराध केवल लिंग के प्रवेश तक ही सीमित है।

पॉक्सो एक्ट की धारा 3(ए), 3(बी), 3(सी) और 3(डी) में उपयोग सर्वनाम ‘वह’ की व्याख्या इस प्रकार नहीं की जानी चाहिए कि उन धाराओं में शामिल अपराध को केवल ‘पुरुष’ तक सीमित कर दिया जाए।

आईपीसी की धारा 375 (बलात्कार), दूसरी ओर पॉक्सो एक्ट की धारा 3 और 5 में बताए गए क्राइम की तुलना करने से सामने आता है कि दोनों अपराध अलग-अलग हैं।

मालदीव में भारत के फंड से कई प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन, 30000 लोगों को सीधा फायदा: लाइन पर आए राष्ट्रपति मुइज्जु, अब जता रहे आभार

भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शनिवार (10 अगस्त 2024) को मालदीव की सबसे बड़ी जल एवं स्वच्छता सहित कई परियोजनाओं का उद्घाटन किया। इस परियोजना से 28 द्वीपों वाले मालदीव की लगभग 30,000 लोगों सीधा फायदा मिलेगा। इस परियोजना के लिए भारत ने 11 करोड़ डॉलर (लगभग 923 करोड़ रुपए) की आर्थिक मदद दी थी।

एस जयशंकर ने कहा, “भारत मालदीव के साथ संबंधों को प्राथमिकता देता है और मालदीव के विकासात्मक सहयोग के लिए भारत प्रतिबद्ध है। मालदीव हमारा साधारण पड़ोसी देश नहीं है, उससे हमारे संबंध बेहद मजबूत हैं।” विदेश मंत्री ने कहा कि भारत अपने पड़ोसी देश मालदीव को हर तरह की सहायता देना जारी रखेगा। उन्होंने दोस्ती निभाने के व्यवहारिक तरीके खोजने की भी बात कही।

दरअसल, राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू के कार्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम में इस परियोजनाओं का वर्चुअल उद्घाटन किया गया। इस अवर पर मालदीव के निर्माण एवं अवसंरचना मंत्री डॉ. अब्दुल्ला मुथथलिब भी मौजूद रहे। उन्होंने जयशंकर का आभार व्यक्त किया। बता दें कि जयशंकर तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर राजधानी माले पहुँचे हैं।

कार्यक्रम के बाद राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने जयशंकर के साथ तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा की। इसके साथ ही उन्होंने पीएम मोदी की तारीफ करते हुए लिखा, “मैं मालदीव का हमेशा समर्थन करने के लिए भारत सरकार, विशेष रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करता हूँ। हमारी स्थायी साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है।”

चीन समर्थक एवं कट्टर भारत विरोधी माने जाने वाले मोहम्मद मुइज्जू ने आगे लिखा, “यह सुरक्षा, विकास व सांस्कृतिक संबंधों में सहयोग के माध्यम से दोनों देशों को करीब ला रही है। हम साथ मिलकर इस क्षेत्र के लिए एक उज्ज्वल, अधिक समृद्ध भविष्य तय कर रहे हैं। भारत हमेशा से मालदीव के सबसे करीबी सहयोगियों और अमूल्य भागीदारों में से एक रहा है।”

मालदीव के विदेश मंत्री मूसा जमीर ने भी ऐसी एक पोस्ट साझा की है। सोशल मीडिया साइट X (पूर्व में ट्विटर) पर साझा किए गए एक पोस्ट में मूसा जमीर ने कहा कि वह भारत की दृढ़ साझेदारी और स्थायी मित्रता के लिए बहुत आभारी हैं। जमीर ने कहा, “हम भारत के साथ मिलकर इस क्षेत्र के लिए उज्ज्वल एवं समृद्ध भविष्य का निर्माण करेंगे।”

विदेश मंत्री मूसा ने कहा कि भारतीय अनुदान से छह उच्च प्रभाव वाली सामुदायिक विकास परियोजनाएँ पूरी की गईं। ये परियोजनाएँ हैं- आर. उन्गूफारू में मानसिक स्वास्थ्य इकाई, एचडीएच. कुलहुधुफुशी में बाल विकास केंद्र, जीडीएच. थिनाधू, एल. गण और एचए. धिधुधू में समावेशी शिक्षा सहायता इकाइयाँ तथा थिमाराफुशी, वेयमांडू और जीए. कोंडे के द्वीपों में स्ट्रीट लाइट।

इसके साथ ही मालदीव के आर्थिक विकास एवं व्यापार मंत्रालय तथा भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) के बीच समझौता हुआ है। यह समझौता अंतर्राष्ट्रीय वित्त अवसरों को बढ़ाएगा, विदेशी निवेश को आकर्षित करेगा तथा मालदीव के आर्थिक विकास के लिए समर्थन प्रदान करेगा। मालदीव के सिविल सेवा आयोग तथा भारत के राष्ट्रीय सुशासन केंद्र के बीच समझौता का नवीनीकरण हुआ है।

मूसा ने आगे कहा, “हम जल्द ही पुनर्ग्रहण और तट संरक्षण परियोजना का हस्तांतरण समारोह और 4-लेन डेटोर लिंक रोड परियोजना का उद्घाटन शुरू करेंगे। दोनों परियोजनाओं को भारत सरकार द्वारा EXIM बैंक के ऋण सहायता के तहत सुविधा प्रदान की गई है। ये परियोजनाएँ अड्डू शहर के लोगों के विकास और समृद्धि में योगदान देंगी।”

भारत समर्थक मोहम्मद सोलिह की सरकार में विदेश मंत्री मोहम्मद अब्दुल्लाह शाहिद ने एक बयान जारी कर कहा है कि ये परियोजनाएँ दिसंबर 2018 में पूर्व राष्ट्रपति सोलिह की भारत की पहली राजकीय यात्रा के दौरान भारत सरकार द्वारा दी गई 800 मिलियन अमेरिकी डॉलर की ऋण सहायता के माध्यम से शुरू की गई थीं और उनके प्रशासन के दौरान इनका उद्घाटन किया गया था।

वहीं, भारत समर्थक मालदीवियन डेमोक्रेटिक पार्टी ने राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा भारत नीति में अचानक बदलाव किए जाने का स्वागत किया है। पार्टी ने कहा है कि मालदीव को हमेशा से भरोसा रहा है कि जब भी मालदीव ‘अंतरराष्ट्रीय 911’ डायल करेगा तो भारत हमेशा सबसे पहले जवाब देगा।

मुख्य विपक्षी दल मालदीवियन डेमोक्रेटिक पार्टी के अध्यक्ष अब्दुल्ला शाहिद ने शनिवार को विदेश मंत्री एस जयशंकर से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी मुइज्जू सरकार से अपने अधिकारियों की कार्रवाइयों, झूठ और गैर-जिम्मेदाराना टिप्पणियों के लिए सार्वजनिक रूप से माफी माँग करती है, जिसके परिणामस्वरूप मालदीव के विदेशी और आर्थिक दृष्टिकोण को नुकसान पहुँचा है।

दरअसल, इस साल मई में भारत ने मालदीव को 50 मिलियन डॉलर (लगभग 420 करोड़ रुपए) की सहायता देने की घोषणा की थी। इसके मालदीव के विदेश मंत्री मूसा ने उस समय अपने पोस्ट में कहा था, “मैं मालदीव को 50 मिलियन डॉलर के ट्रेजरी बिल के रोलओवर के साथ महत्वपूर्ण बजटीय सहायता के लिए विदेश मंत्री एस जयशंकर और भारत सरकार को धन्यवाद देता हूँ। यह सद्भावना का सच्चा संकेत है, जो मालदीव और भारत के बीच दीर्घकालिक मित्रता का प्रतीक है।”

‘मेरी सिपाही पत्नी के हेड कॉन्स्टेबल नसरुद्दीन से अवैध संबंध, दरगाहों पर ले जाता है’: राजेश यादव ने SP से लगाई न्याय की गुहार, बेरोजगार बीवी को पढ़ाया-लिखाया था

महराजगंज जिले में तैनात उत्तर प्रदेश पुलिस की एक महिला कॉन्स्टेबल के पति ने अपनी ही पत्नी के खिलाफ उसके सीनियर अधिकारियों को शिकायत दी है। शिकायत में महिला सिपाही का साथी हेड कॉन्स्टेबल से अवैध संबंध होना बताया गया है। महिला सिपाही यादव बिरादरी की है जबकि आरोपित हेड कॉन्स्टेबल का नाम नसरुद्दीन खान है। आरोप है कि दोनों को एक साथ पकड़ लेने पर पीड़ित पति की पिटाई भी की गई है।

गुरुवार (8 अगस्त, 2024) को महिला के पति राजेश यादव ने जिले के पुलिस अधीक्षक से न्याय की गुहार लगाई है। ऑपइंडिया से बात करते हुए महिला सिपाही के पति ने कहा कि उन्हें डर है कि कहीं उनकी पत्नी ने इस्लाम तो कबूल नहीं कर लिया है।

यह मामला महराजगंज जिले के थाना क्षेत्र सिंदुरिया का है। यहाँ पर तैनात यादव बिरादरी की एक महिला कॉन्स्टेबल के पति राजेश ने गुरुवार को जिले के पुलिस अधीक्षक को एक प्रार्थना पत्र दिया है। प्रार्थना पत्र में राजेश यादव ने बताया कि उनकी पत्नी साल 2018 बैच की सिपाही है जो फिलहाल सिंदुरिया थाने में तैनात है। आरोप है कि इसी थाने में तैनात साल 2006 बैच के हेड कॉन्स्टेबल नसरुद्दीन खान से उनकी पत्नी के अवैध संबंध हैं। महिला सिपाही की तरह से नसरुद्दीन खान भी न सिर्फ पहले से शादीशुदा बल्कि बाल-बच्चेदार भी है।

मूल रूप से आज़मगढ़ जिले के रहने वाले राजेश लगभग 10 साल से मुंबई में रह कर प्राइवेट जॉब करते हैं। वह साल भर में 2 या 3 बार ही गाँव आ पाते हैं। राजेश यादव के अनुसार, उनकी पत्नी अपने तैनाती वाले थाने के सामने ही प्राइवेट क्वार्टर में अपने एक बच्चे को ले कर रहती है। आरोप है कि इसी क्वार्टर में हेड कॉन्स्टेबल नसरुद्दीन खान भी उनकी बीवी के साथ रहता है। जब राजेश नसरुद्दीन से इसकी वजह पूछते हैं तो उन्हें अपनी बीवी से पूछने की सलाह दी जाती है।

शिकायत में आगे बताया गया है कि बुधवार (7 अगस्त, 2024) को रात लगभग 8 बजे राजेश अपनी पत्नी से मिलने उनके कमरे पर पहुँचे। यहाँ उन्होंने दोनों को एक साथ पाया। इसकी वजह पूछने पर उनकी बीवी और नसरुद्दीन ने उन्हें जान से मार डालने की धमकियाँ देनी शुरू कर दी। राजेश इन धमकियों का वीडियो बनाने की कोशिश करने लगे तो उनकी बीवी और नसरुद्दीन भड़क उठे। उन्होंने मिल कर राजेश की पिटाई की और उन्हें कमरे से धक्के मार कर बाहर कर दिया।

अपनी बीवी की इस हरकत से राजेश ने खुद को बेहद अपमानित और परेशान बताया है। उन्होंने जिले के SP से बताया है कि वो पहले भी दोनों आरोपितों की शिकायत कर चुके हैं लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। राजेश ने हेड कॉन्स्टेबल नसरुद्दीन और अपनी सिपाही बीवी पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है। ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है।

कहीं इस्लाम तो नहीं कबूल कर लिया

ऑपइंडिया ने पीड़ित पति राजेश यादव से बात की। राजेश ने बताया कि उन्हें इस बात का डर सता रहा है कि उनकी पत्नी ने इस्लाम तो नहीं कबूल कर लिया। बकौल राजेश दीवान नसरुद्दीन उनकी बीवी को अक्सर गोरखपुर ले जाता है। राजेश को कहीं से यह भी सूचना मिली है कि नसरुद्दीन उनकी बीवी को मज़ारों और दरगाहों में भी ले जाता है।

शादी के समय थीं बेरोजगार, सिपाही बनते ही बिगड़ गईं

राजेश यादव ने हमें आगे बताया कि उनकी शादी साल 2017 में हुई थी। तब उनकी बीवी बेरोजगार थीं। वो शिक्षिका बनना चाहती थीं जिसमें राजेश यादव ने उन्हें पढ़ाने आदि में काफी मदद की। राजेश अपनी पत्नी को तब मुंबई भी साथ ले कर गए थे। साल 2018 में राजेश की पत्नी उत्तर प्रदेश पुलिस में कॉन्स्टेबल बन गईं। ट्रेनिंग के बाद वो पहले महराजगंज जिले की कोतवाली नगर में रहीं। यहाँ से दूसरी तैनाती के तौर पर वो इसी जिले के सिंदुरिया थाने पर आईं। यहीं पर उन्हें उम्र में लगभग 15 साल बड़ा हेड कांस्टेबल नसरुद्दीन मिला था।

खुद को रिलायंस कम्पनी का मैनेजर बताता था नसरुद्दीन

राजेश यादव ने हमें आगे बताया कि वो नसरुद्दीन की हरकतों से लगभग ढाई साल से परेशान हैं। शुरुआत में उन्हें तब शक हुआ जब नसरुद्दीन वक्त-बेवक्त उनकी बीवी को कॉल और मैसेज करता था। एक दिन राजेश ने पलट कर दीवान नसरुद्दीन के नंबर पर कॉल किया तो उसने अपना परिचय लखनऊ की रिलायंस कम्पनी में नौकरी कर रहे एक मैनेजर के तौर पर दिया। हालाँकि, आरोप है कि बाद में वही नसरुद्दीन उनकी बीवी के साथ शौहर के तौर पर रहने लगा।

नसरुद्दीन की बीवी अपने शौहर की मददगार

राजेश यादव ने ऑपइंडिया को आगे बताया कि हेड कॉन्स्टेबल नसरुद्दीन ने अपनी बीवी और बच्चों को गोरखपुर में कहीं शिफ्ट कर रखा है। यह पूछे जाने पर कि क्या नसरुद्दीन की बीवी अपने शौहर के किसी और महिला से रिश्ते पर ऐतराज नहीं करती, राजेश यादव ने कहा, “मुस्लिमों में 1 से ज्यादा बीवियाँ रखने की इजाजत है। नसरुद्दीन की बीवी को सब पता है लेकिन उसको अपने शौहर के महिला सिपाही से रिश्तों पर कोई एतराज नहीं है।”

नहीं दे रहा कोई साथ, आता है आत्महत्या का विचार

राजेश यादव ने अपनी बीवी और दीवान नसरुद्दीन को बर्खास्त करने की माँग की है। उन्होंने कहा कि वो कोर्ट से आज नहीं तो कल अपने बच्चे को वापस ले लेंगे। राजेश यादव अब अपनी बीवी के साथ किसी भी हालत में नहीं रहना चाहते। वो किसी भी हाल में खुद को मिले धोखे व अपने अपमान की सजा अपनी बीवी व हेड नसरुद्दीन को दिलाना चाहते हैं। बकौल राजेश यादव, न्याय की लड़ाई में वो पिछले ढाई साल से लड़ कर परेशान हो चुके हैं और अब उनके मन में आत्महत्या जैसे विचार भी आते हैं।

राजेश यादव ने हमें यह भी बताया कि कई बार की तरह इस दफा भी उनको पुलिस के सीनियर अधिकारियों से बस कार्रवाई का भरोसा मिला है। कहीं से उन्हें यह भी पता चला है कि अब तक की कार्रवाई के नाम सिर्फ दीवान नसरुद्दीन को पास के ही किसी और थाने में भेज दिया गया है। इस मामले में अभी तक महराजगंज पुलिस की तरफ से कोई आधिकारिक वक्तव्य जारी नहीं किया गया है। पुलिस का वर्जन आने के बाद उसे खबर में अपडेट किया जाएगा।

महराजगंज पुलिस के मुताबिक, पूरे मामले की जाँच डिप्टी एसपी सदर को सौंप दी गई है।

KFC ने शाकाहारी ग्राहक को खिला दिया मांसाहारी बर्गर, कोर्ट ने लगाया ₹12000 का जुर्माना: Zoop ने सावन में रेलयात्री को परोसा था मांस

चंडीगढ़ में उपभोक्ता अदालत ने केएफसी पर 12 हजार का जुर्माना लगाया है, जिसमें से 7 हजार रुपए ग्राहक को देने और 5 हजार रुपए केस के खर्च के लिए हैं। केएफसी ने शाकाहारी ग्राहक को माँसाहारी बर्गर परोस दिया, जिसके बाद ग्राहक ने केस कर दिया था।

जानकारी के मुताबिक, ये मामला चंडीगढ़ के सेक्टर 35 में स्थित केएफसी के ब्रांच से जुड़ा है, जहाँ 2023 में ये विवाद सामने आया था। चंडीगढ़ के अनिरुद्ध गुप्ता ने बताया कि वह और उनकी पत्नी केएफसी के नियमित ग्राहक हैं, लेकिन उनकी पत्नी कट्टर शाकाहारी हैं। गुप्ता ने आरोप लगाया कि 3 मई, 2023 को उन्होंने केएफसी के ऑनलाइन ऐप पर अपने लिए चिकन बकेट और अपनी पत्नी के लिए क्लासिक वेज क्रिस्पर ऑर्डर किया और 696.59 रुपये का यूपीआई भुगतान किया।

गुप्ता ने आरोप लगाया, “जब मेरी पत्नी ने हमें डिलीवर किए गए बर्गर का पहला निवाला खाया, तो उसे कुछ अजीब सा महसूस हुआ। उसने तुरंत मुझे बुलाया और बर्गर दिखाया। मैं यह देखकर हैरान रह गया कि बर्गर में चिकन था। चूँकि मेरी पत्नी शुद्ध शाकाहारी है, इसलिए उसे तुरंत उल्टी होने लगी।” शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि केएफसी मैनेजर की लापरवाही के कारण उसकी पत्नी मानसिक रूप से परेशान है और अत्यधिक तनाव में है।

केएफसी मैनेजर ने जवाब में कहा, “शिकायत गलत और तुच्छ आधार पर केएफसी से पैसे ऐंठने और ब्रांड को बदनाम करने के दुर्भावनापूर्ण इरादे और गुप्त उद्देश्य से दर्ज की गई है। शिकायतकर्ता ने यह बात छिपाई कि दिया गया ऑर्डर टेकअवे ऑर्डर था जिसे व्यक्ति ने जाँच के बाद लिया था। केएफसी ने बताया कि उसकी पैकिंग पर शाकाहारी खाने के लिए ग्रीन निशान लगा होता है, जबकि माँसाहारी खाने के लिए लाल निशान।

हालाँकि आदेश की रसीदों का अध्ययन करने के बाद आयोग ने कहा कि “इससे स्पष्ट रूप से संकेत मिलता है कि केएफसी आउटलेट ने रसीदों में उल्लिखित शाकाहारी क्रिस्पर बर्गर देने के बजाय चिकन से भरा नॉन-वेज क्रिस्पर बर्गर दिया, जो बर्गर की तस्वीरों से स्पष्ट है और यह केएफसी प्रबंधक की ओर से सेवा में स्पष्ट कमी और लापरवाही को दर्शाता है, खासकर तब जब प्रबंधक शिकायतकर्ता द्वारा दिए गए सबूतों को किसी भी ठोस दस्तावेजी साक्ष्य के माध्यम से खारिज करने में बुरी तरह विफल रहा है”।

आयोग ने कहा कि उपरोक्त चर्चा से एक बात स्पष्ट है कि केएफसी प्रबंधक ने शिकायतकर्ता को सेवा प्रदान करते समय लापरवाही बरती और शिकायतकर्ता की पत्नी, जो शुद्ध शाकाहारी है, को गलत तरीके से मांसाहारी खाद्य पदार्थ दिया, जिससे उसकी भावनाओं को ठेस पहुँची और उसे मानसिक पीड़ा और तनाव का सामना करना पड़ा। आयोग ने केएफसी प्रबंधक को आदेश दिया कि वह शिकायतकर्ता को मानसिक पीड़ा और उत्पीड़न के लिए मुआवजे के रूप में 7,000 रुपये और मुकदमे की लागत के लिए 5,000 रुपये का भुगतान करे।

कई मामले पहले भी आ चुके हैं सामने

बता दें कि 2 दिन पहले 9 अगस्त को ऐसा ही मामला दिल्ली से सामने आया था, जहाँ एक ग्राहक ने शाकाहारी थाली मंगाई थी, लेकिन शाकाहारी डिब्बे में बंद खाना मांसाहारी निकला था। रेस्टोरेंट चलाने वाले आरोपित का नाम फैज है और उसका सागर बार-बी-क्यू नाम से रेस्तराँ है। ये मामला रेलवे से भी जुड़ा था, लेकिन रेलवे ने कोई जुर्माना लगाने की बजाय सिर्फ फटकार लगाकर मामले को रफा-दफा कर दिया था।

इसी तरह से इस सप्ताह की शुरुआत में, 4 अगस्त 2024 को हरिद्वार से कांधला होते हुए गंगाजल लेकर दिल्ली लौट रहे तीर्थयात्रियों को मांसाहारी बिरयानी परोसी गई। तनवीर नाम के आरोपित फेरीवाले को अधिकारियों ने पकड़ लिया और बाद में उसे पुलिस स्टेशन ले जाया गया।

इस साल अप्रैल में गुजरात पुलिस ने वडोदरा स्थित एक समोसा दुकान ‘हुसेनी समोसा सेंटर‘ पर छापा मारा और गोमांस से भरे समोसे बेचने के आरोप में छह लोगों को गिरफ्तार किया, जिसमें रेस्टोरेंट मालिक यूसुफ और नईम शेख भी शामिल थे। महाराष्ट्र के पुणे में भी इसी तरह का मामला सामने आया था, जहाँ टाटा मोटर्स की कैंटीन में समोसे के अंदर कंडोम, पत्थर और तंबाकू भरा हुआ पाया गया था। पुलिस ने इस मामले में 5 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। पता चला कि आरोपित रहीम शेख, अजहर शेख, मजार शेख, अजर शेख और विक्की शेख ने कंपनी द्वारा उनका कॉन्ट्रैक्ट रद्द किए जाने के बाद गुस्से में आकर यह अपराध किया।

जनवरी 2024 में जैन समुदाय से ताल्लुक रखने वाली एक शाकाहारी यात्री को एयर इंडिया की फ्लाइट में शाकाहारी भोजन में चिकन के टुकड़े परोसे गए। गुस्साई महिला ने केबिन क्रू से इसकी शिकायत की, लेकिन इस मामले पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। आखिरकार यात्री वीरा जैन ने सोशल मीडिया पर इस घटना को शेयर किया। एयर इंडिया ने एक्स पर उसकी पोस्ट का जवाब दिया और उससे ट्वीट डिलीट करने का अनुरोध किया।

जुलाई 2022 में दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में एक घटना सामने आई थी, जिसमें एक शाकाहारी छात्र को कथित तौर पर विश्वविद्यालय की केंद्रीय कैंटीन में मांसाहारी सैंडविच परोसा गया था। कैंटीन स्टाफ से शिकायत करने पर छात्र को धक्का देकर अलग कर दिया गया और कहा गया कि कैंटीन में शुद्ध शाकाहारी भोजन उपलब्ध नहीं है।

दिसंबर 2018 में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) से भी ऐसी ही शिकायत सामने आई थी, जहाँ आरोप लगाया गया था कि मांसाहारी भोजन बनाने के लिए इस्तेमाल किए गए तेल में पकाए गए शाकाहारी भोजन को परोसा जा रहा था।

‘किसी ने उकसाया था या खुद पहन कर आईं हिजाब’: जाँच की जद में कानपुर के कॉलेज की 3 मुस्लिम छात्राएँ, प्रिंसिपल ने समझाया तो कहा था – नाम काट दो, लेकिन…

उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में कॉलेज के अंदर हिजाब पहन कर आई 3 छात्राओं के मामले का जिलाधिकारी (DM) ने संज्ञान लिया है। एक सप्ताह पुराने इस मामले में उन्होंने उपजिलाधिकारी (SDM) को मामले की जाँच के आदेश दे दिए हैं। यह आदेश शनिवार (10 अगस्त, 2024) को दिया गया है। वहीं तीनों छात्राओं के अभिभावकों ने अपनी गलती मानी है। उन्होंने भविष्य में छात्राओं को स्कूल द्वारा निर्धारित ड्रेस में भी भेजने का आश्वासन दिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शनिवार को कानपुर के जिलाधिकारी राकेश सिंह ने मामले का संज्ञान लिया है। उन्होंने उपजिलाधिकारी रश्मि लांबा को पूरे घटनाक्रम की जाँच कर के रिपोर्ट इसी माह 17 अगस्त तक प्रेषित करने का आदेश दिया है। यह जाँच 3 बिंदुओं पर होनी है। पहला ये कि क्या छात्राएँ शुरू से ही कॉलेज में पढ़ती थीं और अपनी खुद की मर्जी से हिजाब बाँध कर आईं थीं। जाँच का दूसरा बिंदु यह है कि छात्राओं को ड्रेस कोड की जानकारी थी या नहीं।

तीसरे बिंदु में जाँचा जाएगा कि कहीं तीनों छात्राओं को कॉलेज में हिजाब पहन कर जाने के लिए किसी ने उकसाया तो नहीं था?

बताते चलें कि मामला 3 अगस्त 2024 का है। घटना कानपुर के बिल्हौर इलाके में पड़ने वाले सरकारी इंटर कॉलेज की है। यहाँ पढ़ने वाली 3 मुस्लिम छात्राएँ पिछले कुछ समय से हिजाब पहन कर आने लगी थीं। स्कूल की महिला टीचर ज्योति ने उन्हें टोका और निर्धारित ड्रेस में ही आने की हिदायत दी। हालाँकि इस हिदायत का छात्राओं पर कोई असर नहीं पड़ा। उन्होंने अपनी शिक्षिका से कहा कि भले ही उनके नाम काट दिए जाएँ पर हो हिजाब में ही पढ़ने आएँगी।

बाद में ये मामला स्कूल के प्रधानाचार्य सुरजीत सिंह यादव तक पहुँचा। उन्होंने भी छात्राओं को समझाने की कोशिश की। हालाँकि, उनकी कोशिश बेअसर रही। तीनों छात्राओं ने उन्हें साफ कह दिया कि भले ही उनके नाम काट दिए जाएँ पर वो हिजाब ही पहन कर स्कूल आएँगी। इस बात को छात्राओं ने लिखित तौर पर भी दे दिया। आखिरकार प्रिंसिपल ने कड़े कदम उठाए और स्कूल में निर्धारित ड्रेस के अलावा कुछ और पहन कर आने वाले छात्र-छात्राओं के प्रवेश पर रोक लगा दी।

प्रिंसिपल सुरजीत सिंह ने तीनों छात्राओं के अभिभावकों को भी पूरे घटनाक्रम से अवगत करवा दिया। बताया जा रहा है कि तीनों छात्राओं के अभिभावकों ने गलती को स्वीकार किया है। उन्होंने भविष्य में छात्राओं को स्कूल द्वारा निर्धारित ड्रेस में भी भेजने का आश्वासन दिया है। तीनों छात्राएँ इंटरमीडिएट में पढ़ती हैं।

‘तू मरना चाहता है क्या’: अमेरिका में ‘फ्री फिलिस्तीन’ का नारा लगा कर यहूदी शख्स को चाकुओं से गोदा, लगातार बढ़ रहे नफरती हमले

अमेरिका में यहूदियों पर हमले लगातार बढ़ रहे हैं। ताजे मामले में शनिवार (10 अगस्त 2024) को न्यूयॉर्क शहर में एक युवा यहूदी को चाकुओं से गोद दिया गया। ये हमला चबाड मूवमेंट के हेक्वॉर्टर के बाहर हुआ, जिसमें एक काले मुस्लिम ने ‘फ्री फिलिस्तीन’ का नारा लगाते हुए यहूदी युवक पर चाकुओं से हमला कर दिया। यही नहीं, उसने हमले से पहले उस युवक को ‘तू मरना चाहता है क्या?’ कह कर धमकाया भी।

स्थानीय यहूदी याकोव बेहरमैन ने इस सूचना दी है। उन्होंने एक्स पर लिखा कि वो पीड़ित को जानते हैं। बेहरमैन ने पोस्ट किया कि शब्बत के दौरान, एक युवा अश्वेत पुरुष हमलावर ने यहूदी व्यक्ति से पूछा, “क्या तू मरना चाहता है?” और फिर चाकू घोंप दिया। इस हमले में घायल युवक को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उसका इलाज जाती है।

इस मामले में स्थानीय लोगों ने हमलावर को दौड़ाकर पकड़ लिया और पुलिस के आने के बाद उसे पुलिस को सौंप दिया, जिसके बाद पुलिस ने हमलावर को गिरफ्तार कर लिया।

बेहरमैन ने पोस्ट किया, “मैं पुष्टि कर सकता हूं कि आज सुबह करीब 2 बजे क्राउन हाइट्स में ईस्टर्न पार्कवे और किंग्स्टन एवेन्यू के पास, चबाड मुख्यालय के करीब हेट क्राइम के तहत चाकू से हमला हुआ।”

बेहरमैन ने आगे बताया कि, “अपराधी, जो 20 साल की उम्र का एक काला व्यक्ति था, ने “फ़्री फ़िलिस्तीन” का नारा लगाया और पीड़ित के साथ बहस करने के बाद उसे चाकू घोंप दिया।

उन्होंने आगे लिखा, “स्थानीय लोगों ने हमलावर का पीछा किया और उसे तब तक हिरासत में रखा जब तक पुलिस उसे गिरफ्तार करने के लिए नहीं आ गई। यह एक बेहद गंभीर घटना है। पीड़ित की हत्या हो सकती थी। हेड क्राइम का ये मामला न्यूयॉर्क और पूरे संयुक्त राज्य अमेरिका में कुछ स्थानीय राजनेताओं और नेताओं द्वारा प्रचारित यहूदी विरोधी उकसावे और घृणा के खतरनाक प्रभाव को उजागर करता है।” उन्होंने संयुक्त राज्य अमेरिका में यहूदी विरोधी बयानबाजी की वजह से पड़ रहे असर को लेकर भी बात की।

बता दें कि पिछले साल 7 अक्टूबर को इजरायल पर हमास के आतंकी हमले के बाद से अमेरिका में बहुत सारे यहूदी विरोधी प्रदर्शन और नफरत भरे भाषण देखने को मिले हैं। कई विश्वविद्यालयों में भी फिलिस्तीन समर्थक प्रदर्शनों के बीच यहूदी विरोधी प्रदर्शन हुए हैं ।

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के बाद अब बैंक के गवर्नर का इस्तीफा: बांग्लादेश में एक-एक कर पद छोड़ रहे बड़े अधिकारी, कुलपति से लेकर UGC अध्यक्ष तक भागे

बांग्लादेश के हालात बिगड़ते जा रहे हैं। शेख हसीना के प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देकर देश छोड़ने के बाद से वहाँ हिंसा फैली हुई है। हिंदुओं और शेख हसीना के पार्टी के नेताओं के साथ-साथ उनकी सरकार के दौरान के वरिष्ठ अधिकारियों को निशाना बनाया जा रहा है। इसी तरह का दबाव सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और बांग्लादेश बैंक के गवर्नर पर बनाकर उनसे इस्तीफा ले लिया गया।

दरअसल, बांग्लादेश बैंक के गवर्नर अब्दुर रौफ तालुकदार ने भी प्रदर्शनकारियों की हिंसा से डरकर अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। हालाँकि, उनका इस्तीफा अभी तक स्वीकार नहीं किया गया है। वहीं, ढाका विश्वविद्यालय के कुलपति एएसएम मकसूद कमाल ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। यही वो यूनिवर्सिटी है, जहाँ से छात्रों से अपना आंदोलन शुरू किया था।

बांग्लादेश यूजीसी के चेयरमैन काजी शाहिदुल्लाह ने बीमारी का बहाना बनाकर अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने रविवार को अपना इस्तीफा शिक्षा मंत्रालय को भेज दिया। वह पिछले साल 28 मई को यूजीसी अध्यक्ष के रूप में चुने गए थे। काजी शाहिदुल्लाह ने पहले 2009-2013 के दौरान बांग्लादेश के राष्ट्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति के रूप में कार्य किया था।

वहीं, बांग्लादेश सिक्योरिटी एंड एक्सचेंज कमीशन (BCEC) के चेयरमैन प्रोफेसर शिबली रुबायत उल इस्लाम ने भी अपने पद से इस्तीफा दिया है। उन्होंने इस्तीफा का कारण निजी बताया है। शिबली रुबायत उल इस्लाम ने अपना इस्तीफा वित्तीय संस्थान विभाग के प्रभारी मोहम्मद अब्दुर रहमान खान को भेजा है।

बता दें कि शनिवार को बांग्लादेश के मुख्य न्यायाधीश ओबैदुल हसन और शीर्ष अपीलीय प्रभाग के पाँच अन्य जजों ने इस्तीफा दे दिया था। न्यायिक व्यवस्था के चरमाने के साथ ही सैयद रेफत अहमद को बांग्लादेश को नया चीफ जस्टिस नियुक्त किया गया है। छात्रों ने चीफ जस्टिस पर आरोप लगाया था कि वे पूर्व पीएम शेख हसीना के करीबी हैं।

दरअसल, शनिवार को सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायिक व्यवस्था को चलाने के लिए फुल कोर्ट बैठक बुलाई थी। बैठक शुरू होने से पहले अंतरिम सरकार में शामिल कुछ नेताओं ने छात्रों को उकसाते हुए कहा कि वे सुप्रीम कोर्ट को घेर लें। उन्होंने मुख्य न्यायाधीश पर न्यायिक तख्तापलट का आरोप लगाया हुए इस्तीफे के लिए एक घंटे का अल्टीमेटम दिया था।

प्रदर्शनकारियों को सुप्रीम कोर्ट घेरते हुए मुख्य न्यायाधीश सहित सभी न्यायाधीश वहाँ से भाग गए थे। हालाँकि, बाद में सब ने इस्तीफा दे दिया। इस बैठक से पहले कार्यवाहक सरकार के सलाहकार आसिफ महमूद ने मुख्य न्यायाधीश को ‘फासीवाद का मित्र’ बताते हुए उनके इस्तीफे की माँग की थी। इसके साथ ही उन्होंने पूर्ण न्यायालय की बैठक को रद्द करने का अल्टीमेटम भी जारी किया था।

उधर, कट्टरपंथियों का हमला झेल रहा हिंदू समुदाय सड़कों पर उतर आया है। उनका साथ देने के लिए शेख हसीना की आवामी लीग के कार्यकर्ता भी मैदान में हैं। उन्होंने देश में अल्पसंख्यक सुरक्षा कानून लागू करने और अल्पसंख्यक समुदाय पर हमला करने वालों पर त्वरित कार्रवाई के लिए विशेष न्यायाधिकरणों के गठन की माँग की है। उन्होंने अल्पसंख्यकों के लिए संसद में 10 प्रतिशत आरक्षण की भी माँग की।

‘हमारे वित्तीय लेनदेन खुली किताब, अपनी मुनाफाखोरी के लिए झूठ बोल रहा हिंडेनबर्ग’: विदेशी संस्था को अडानी समूह का करारा जवाब, कहा – पुराने आरोपों को ही दोहराया

गौतम अडानी की कंपनी समूह ने अमेरिका स्थित हिंडेनबर्ग रिसर्च द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट को नकार दिया है। बता दें कि हिंडेनबर्ग ने अपनी नई रिपोर्ट में दावा किया है कि भारतीय नियामक संस्था SEBI की अध्यक्ष माधवी पुरी और उनके पति धवल बुच के गौतम अडानी से संबंध हैं, जिस कारण एजेंसी ने अडानी समूह पर कार्रवाई नहीं की। साथ ही मॉरीशस और बरमूडा स्थित कंपनियों में अडानी का निवेश होने का दावा किया गया और आरोप लगाया गया कि बुच दंपति के उन कंपनियों से संबंध हैं। कंपनी समूह ने खुद को पारदर्शिता के प्रति प्रतिबद्ध बताते हुए कहा कि सारे नियम-कानूनों का पालन किया गया है।

अडानी समूह ने बयान जारी कर इन आरोपों को दुर्भावनापूर्ण, शरारतपूर्ण और भ्रम फैलाने वाला बताया है। स्टॉक एक्सचेंजों के लिए जारी किए गए बयान में अडानी समूह ने कहा है कि विदेश में इसके जितने भी निवेश हैं, वो सभी पूर्णतः पारदर्शी हैं। अडानी समूह पोर्ट से लेकर पॉवर तक में डीलिंग करता है। उसने कहा है कि हिंडेनबर्ग ने पुराने आरोपों को ही रिसाइकल कर के फिर से जारी कर दिया है, जबकि उन आरोपों को लेकर अच्छी-खासी जाँच हो चुकी है और मार्च 2023 में ही सुप्रीम कोर्ट इन्हें नकार चुका है।

अडानी समूह ने कहा है कि जो सूचनाएँ पहले से ही सार्वजनिक हैं, उन्हें ही इकट्ठा कर के पहले से तय निष्कर्ष पर पहुँचने की कोशिश की गई है। बयान में कहा गया है कि तथ्यों एवं कानून की अवहेलना करते हुए व्यक्तिगत मुनाफाखोरी के लिए ये सब किया गया है। अडानी समूह ने इन आरोपों को पूर्णतया नकारते हुए कहा कि जनवरी 2024 में भी सुप्रीम कोर्ट ने इन्हें आधारहीन पाया था। अडानी समूह ने कहा कि विदेश में उसकी संरचनाओं के संबंध में कई सार्वजनिक दस्तावेजों में पूरी जानकारी दी गई है।

गौतम अडानी के नेतृत्व वाले कंपनी समूह ने कहा कि अनिल आहूजा अडानी पॉवर में 2007-2008 के दौरान 3i इन्वेस्टमेंट फंड के नॉमिनी डायरेक्टर थे, उसके बाद 2017 तक अडानी एंटरप्राइजेज के डायरेक्टर रहे। हिंडेनबर्ग की रिपोर्ट को अपनी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचाने के लिए जानबूझकर किए गए कुत्सित प्रयास बताते हुए अडानी समूह ने कहा कि इसमें उल्लेखित व्यक्तियों या मामलों से उसका कोई व्यावसायिक संबंध नहीं है। अडानी समूह ने कहा कि हमारे वित्तीय लेनदेन खुली किताब की तरह हैं, सेबी को सारी जानकारी दी जाती है।