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हरिद्वार से गंगाजल लेकर लौट रहे लोगों को परोस दी मांसाहारी बिरयानी, विरोध हुआ तो करने लगा झगड़ा: दुकानदार तनवीर यूपी पुलिस की हिरासत में

उत्तर प्रदेश के शामली जिले में हरिद्वार से लौट रहे एक श्रद्धालु को शाकाहारी बता कर मांसाहारी बिरयानी बेचने का मामला सामने आया है। मामले का खुलासा होने पर दोनों पक्षों में धक्का-मुक्की हुई। विवाद की सूचना पर पुलिस ने मौके पर पहुँच कर बिरयानी की दुकान के मालिक को हिरासत में ले लिया है। रविवार (4 अगस्त, 2024) को घटी इस घटना की जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई की जा रही है। हिन्दू संगठनों ने कड़ी कार्रवाई न होने पर बिरयानी मालिक के घर पर धरने का एलान किया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना शामली के थाना क्षेत्र कांधला की है। रविवार को हरियाणा के पानीपत जिले के रहने वाले अनुज कुमार सहित 4 युवक कार से शाम लगभग 6 बजे कांधला बस अड्डे पहुँचे। यहाँ उन्होंने खाने-पीने के कुछ सामान खरीदे। इसी दौरान ठेले पर एक व्यक्ति बिरयानी बेच रहा था। उसने अनुज को बताया कि वो बेज बिरयानी बेच रहा है। दुकानदार ने अनुज और उसके साथियों को बिरयानी खाने के लिए परोस दी। इसी दौरान चारों श्रद्धालुओं में से एक ने दुकानदार का भगौना खोल कर चेक किया।

बताया जा रहा है कि अंदर चिकन बिरयानी भरी हुई थी। इस बात से नाराज हो कर चारों युवकों ने दुकानदार से शिकायत की तो वह लड़ने लगा। हंगामा बढ़ता देख कर मौके पर पुलिस बल पहुँच गया। पुलिस ने आरोपित दुकानदार को हिरासत में ले लिया। पूछताछ में उसने अपना नाम तनवीर बताया है। अनुज सहित चारों युवकों ने तनवीर पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है। युवकों ने बताया कि वो सावन का व्रत रखते हैं और हरिद्वार गंगाजल लेने गए थे। इन सभी ने तनवीर पर अपनी धार्मिक भावनाओं को आहत करने का आरोप लगाया है।

पुलिस ने मामले की जाँच शुरू कर दी है। इस बीच मुज़फ्फरनगर के स्वामी यशवीर भारती का इस घटना पर बयान आया है। उन्होंने आरोप लगाया कि न सिर्फ तनवीर बल्कि कई अन्य मुस्लिम दुकानदार भी मांसाहार, थूक और मूत्र के जरिए हिन्दू श्रद्धालुओं का धर्म भ्र्ष्ट करने की फिराक में हैं। उन्होंने प्रशासन से तनवीर पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है। यशवीर भारती का कहना है कि अगर आरोपित पर कठोर कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई तो वो तनवीर के घर के ही आगे धरना-प्रदर्शन करेंगे।

‘इस्लाम कबूल कर वरना तेजाब डाल दूँगा’ : मैनपुरी में वासिफ अंसारी से तंग आकर हिन्दू लड़की ने लगाई फाँसी, परिजन बोले- लंबे समय से चल रही थी छेड़खानी

उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले में मुस्लिम युवक की छेड़खानी से परेशान एक हिन्दू लड़की ने सोमवार (29 जुलाई 2024) को फाँसी लगाकर आत्महत्या कर लिया था। मृतका BSC की छात्र थी जिस पर इस्लाम कबूल करके निकाह करने का दबाव बनाया जा रहा था। इंकार करने पर लड़की के आपत्तिजनक वीडियो वायरल करने, उसके चेहरे पर तेज़ाब फेंकने की, उसके भाई को मार डालने की धमकी दी जाती थी। आरोपित का नाम वासिफ अंसारी है जिसे रविवार (4 अगस्त) को गिरफ्तार कर लिया गया है। परिजनों का आरोप है कि उन्होंने आरोपित के घर पहले भी शिकायत की थी लेकिन उस पर कोई फर्क नहीं पड़ा।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना मैनपुरी जिले के थानाक्षेत्र कुरावली की है। सोमवार (29 जुलाई) को यहाँ रहने वाली एक लड़की खाना खाने के बाद रात में अपने कमरे में गई। सुबह वह फाँसी के फंदे से झूलती मिली थी। मृतका BSC की छात्रा थी। पीड़िता के परिजनों ने इसकी शिकायत पुलिस में दर्ज करवाई। शिकायत में उन्होंने बताया कि उनकी बेटी से वासिफ अंसारी नाम का युवक लम्बे समय से छेड़खानी कर रहा था। वह स्कूल और बाजार आते-जाते पीड़िता का पीछा करता था और फब्तियाँ कसता था। वासिफ और पीड़िता एक ही मोहल्ले के निवासी हैं।

पीड़िता की माँ ने बताया कि वासिफ अंसारी उनकी बेटी पर हिन्दू धर्म छोड़ कर इस्लाम कबूल करने का दबाव बनाता था। मना करने पर वह लड़की के चेहरे पर तेजाब डालने की धमकी देता था। वह पीड़िता का कोई अश्लील वीडियो होने का दावा करते हुए ब्लैकमेलिंग भी करता था। लड़की को कई बार वासिफ अंसारी ने खुद से निकाह करने का दबाव भी दिया था, जिससे तंग आकर पीड़िता ने इसकी शिकायत अपने घर पर की थी। बाद में लड़की के परिजनों ने वासिफ अंसारी के घर वालों से उलाहना भी दी थी। आरोप है कि तब वासिफ के घर वालों का जवाब था, “जाओ जो करना हो कर लेना।” वासिफ पर भी इन बातों का कोई फर्क नहीं पड़ा था।

अब जब लड़की इस दुनिया में नहीं है मृतिका के पिता का बयान आया है। उन्होंने बताया कि वह दिल्ली में एक स्कूल की गाड़ी चलाकर अपने परिवार का पेट पालते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि वासिफ अंसारी ने फोन पर उनकी बेटी को घर से भगाकर ले जाने की धमकी दी थी। इंकार करने पर मृतका के छोटे भाई को मार डालने की धमकी भी दी थी। पुलिस पर भी आरोप लगाया गया है कि उन्होंने मृतका के पिता पर तहरीर बदलवाने का दबाव डाला था। पीड़ितों ने पुलिस की कार्रवाई से खुद को पूरी तरह से असंतुष्ट बताया है।

पीड़ित परिजनों ने अंत में कहा, “अब हमारी बेटी तो चली गई है। पर आरोपितों को कड़ी से कड़ी सजा मिले ताकि अब किसी और की बेटी के साथ ऐसा न हो।” मैनपुरी के पुलिस अधीक्षक ने इस घटना पर बताया कि वासिफ अंसारी के खिलाफ केस दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस इस मामले की जाँच व अन्य जरूरी कार्रवाई कर रही है।

जिन ‘बंगबंधु’ के कारण बना बांग्लादेश, उनकी ही बुतों को तोड़ रहे इस्लामी कट्टरपंथी: शेख हसीना ने छोड़ा देश, प्रधानमंत्री आवास में घुसे उपद्रवी

भारत के पड़ोसी देश बांग्लादेश में तख्तापलट की आशंका जताई जा रही है। बांग्लादेश में जुलाई-अगस्त माह में हुई देशव्यापी हिंसा के बाद प्रधानमंत्री शेख हसीना के इस्तीफ़ा देने की सूचना आ रही है। बांग्लादेश में इस्लामी कट्टरपंथी प्रधानमंत्री आवास में घुस गए हैं।

प्रधानमंत्री शेख हसीना प्रधानमंत्री आवास ‘गोनोभबन’ छोड़ कर किसी सुरक्षित स्थान पर चली गई हैं। उनके देश छोड़ कर भारत आने की बात मीडिया रिपोर्ट्स में आई है। शेख हसीना के साथ उनकी बहन शेख रिहाना भी बांग्लादेश से बाहर निकल गई हैं। प्रधानमंत्री शेख हसीना के करीबियों ने बताया है कि उनके इस्तीफे का ऐलान उनके देश छोड़ने के कुछ देर बाद किया जाएगा।

शेख हसीना के आवास छोड़ने के साथ ही बांग्लादेश के सेना प्रमुख ने 4 बजे देश के नाम संबोधन जारी करने की बात कही है। बांग्लादेश में जुलाई माह से ही प्रदर्शन चल रहे थे। सबसे पहले यह प्रदर्शन आरक्षण के नाम पर चालू हुए थे। यह प्रदर्शन सुप्रीम कोर्ट द्वारा आरक्षण खत्म किए जाने के बाद रुक गए थे।

हालाँकि, अगस्त माह में फिर से यह प्रदर्शन भड़क गए। इस्लामी कट्टरपंथियों के प्रदर्शन में शेख हसीना के इस्तीफे की मांग भी की गई। कट्टरपंथियों ने कई पुलिसवालों की हत्या कर दी। उन्होंने हिन्दू पत्रकार को भी मार दिया। इसके अलावा कई हिन्दू परिवारों को भी मार दिया गया।

बांग्लादेश में हुई इस हिंसा में सैकड़ों लोग मारे गए हैं। यह भी बताया जा रहा है कि इस हिंसा के कारण बांग्लादेश प्रधानमंत्री राष्ट्रपति को अपना इस्तीफ़ा सौंप दिया है। सेना के बांग्लादेश की सुरक्षा व्यवस्था सँभालने की बात कही जा रही है। प्रधानमंत्री आवास में घुसने वाले इस्लामी कट्टरपंथियों ने लूटपाट भी की है।

बांग्लादेश के संस्थापक बंगबंधु मुजीबुर रहमान की भी मूर्तियाँ बांग्लादेश में तोड़ी गई हैं। उनके ऊपर यह इस्लामी कट्टरपंथी चढ़े हुए हैं।

जब नाराज़ सरदार पटेल देना चाहते थे इस्तीफा… एक अस्थायी प्रावधान के लिए कॉन्ग्रेस मना रही ‘काला दिन’: पत्थरबाजी कम, पर्यटन गुलजार, धड़ाधड़ हो रही फिल्मों की शूटिंग

5 अगस्त , 2019 – ये वो तारीख़ है जब लोकतांत्रिक भारत के इतिहास के सबसे बड़े कलंक को मिटाया गया। यही वो दिन है जब लगता दूसरी बार सत्ता में वापसी के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने अनुच्छेद-370 को निरस्त कर के बलिदानी नेता श्यामा प्रसाद मुखर्जी के सपने ‘एक देश, एक विधान, एक निशान’ को पूरा किया। इसके साथ ही भारत का मस्तक कहे जाने वाले राज्य में न सिर्फ देश का संविधान लागू हुआ, बल्कि वहाँ भड़कती अलगाववाद की आग पर भी पानी पड़ा।

इस वर्ष अनुच्छेद -370 को निरस्त किए जाने को 5 वर्ष हो गए हैं। कॉन्ग्रेस पार्टी, जिसने देश को ये दंश दिया था, वो इसे ‘काला दिन’ के रूप में मना रही है। कॉन्ग्रेस पार्टी ने बाकायदा एक पोस्टर जारी कर के 5 अगस्त को जम्मू कश्मीर के लिए ‘काला दिन’ बताया। पार्टी का कहना है कि इस दिन भाजपा ने जम्मू कश्मीर से राज्य का दर्जा छीन लिया। साथ ही लिखा गया है कि जम्मू कश्मीर की जनता भाजपा को माफ़ नहीं करेगी। असल में राज्य का दर्जा छीने जाने का आरोप लगाना तो बहाना है, असली दिक्कत अनुच्छेद-370 के जाने से है।

केंद्र सरकार ने 5 अगस्त, 2019 को संसद में बिल पेश कर के अनुच्छेद-370 को निरस्त कर दिया और लद्दाख को जम्मू कश्मीर से अलग करते हुए दोनों को अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेश घोषित किया। लद्दाख के लोगों ने इसके लिए केंद्र सरकार को धन्यवाद भी किया, वहाँ नए सिरे से विकास कार्य शुरू हुए क्योंकि वहाँ सड़क, रेलवे, टनल, पुल और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर बने। वहाँ पर्यटन बढ़ा। लद्दाख रणनीतिक लिहाज से भी भारत के लिए एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है।

असल में अनुच्छेद-370 को अनुच्छेद-306A को संशोधन कर के लाया गया था। ये बात तब की है, जब भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और कश्मीर के नेता शेख अब्दुल्ला क़रीबी मित्र हुआ करते थे। जवाहरलाल नेहरू ने जम्मू कश्मीर के लिए एक मिनी कैबिनेट बना रखी थी, जिसमें मौलाना अबुल कलाम आज़ाद, गोपालस्वामी अयंगर और कैलाश नाथ काटजू शामिल थे। ‘कॉन्ग्रेस वर्किंग कमिटी’ (CWC) चाहती थी कि सरदार वल्लभभाई पटेल कश्मीर मुद्दे को देखें, लेकिन उन्हें ही किनारे कर दिया गया।

उदाहरण के लिए , नवंबर 1947 में केंद्रीय गृह मंत्रालय की अनुमति लिए बिना ही गोपालस्वामी अयंगर ने जम्मू कश्मीर के लिए पंजाब से 150 वाहन मँगा लिए। जब सरदार पटेल ने आपत्ति जताई तो नेहरू ने कह दिया कि उन्हें समझ नहीं आ रहा कि गृह मंत्रालय इसमें कहाँ से आ गया। नेहरू का कहना था कि वो उन प्रस्तावों से पीछे हटने का कोई इरादा नहीं रखते, जिसके लिए वो खुद को जिम्मेदार मानते हैं। सरदार पटेल इतने व्यथित हुए कि उन्होंने इस्तीफा भी लिख लिया था, लेकिन उन्होंने इसे भेजा नहीं।

यहाँ तक कि सरदार पटेल जम्मू कश्मीर के लिए नीतियाँ बनाने में शेख अब्दुल्ला की भूमिका होने के पक्ष में भी नहीं थे। उनका कहना था कि किसी राज्य का भारत का हिस्सा बनना और वहाँ हमारे मुख्य प्रावधानों का लागू न होना बहुत बड़ी विसंगति है। उन्होंने कहा था कि जब भी शेख अब्दुल्ला पीछे हटते हैं, वो जम्मू कश्मीर की जनता के प्रति अपने कर्तव्यों का हवाला देते हैं, लेकिन भारत सरकार या प्रधानमंत्री के प्रति वो अपना कोई कर्तव्य नहीं समझते। पटेल ने स्पष्ट कहा था कि इसमें उनकी स्वीकृति का कोई सवाल ही नहीं उठता।

जब पहली बार जम्मू कश्मीर को बाकी राज्यों से अलग प्रकार का दर्जा दिए जाने का ड्राफ्ट लाया गया था, तब जवाहरलाल नेहरू अमेरिका में थे और यहाँ गोपालस्वामी अयंगर जिम्मेदारी सँभाल रहे थे। बताया जाता है कि कॉन्ग्रेस पार्टी में इस ड्राफ्ट का जम कर विरोध हुआ था। साथ ही विरोध प्रदर्शन भी होने लगे थे। तब अयंगर ने पटल को फोन कर के बचाव करने के लिए कहा, पटेल उन्हें शांति से सुनते रहे। चूँकि जवाहरलाल नेहरू विदेश में थे, ऐसे में पटेल को अयंगर का साथ देना पड़ा।

जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद-370 को निरस्त किए जाने के बाद से काफी बदलाव आए हैं। 2019 से पहले प्रदेश अलगाववाद से जूझ रहा है, छात्र-छात्राओं तक को पत्थरबाजी में लगा दिया गया था। आँकड़ों की मानें तो पत्थरबाजी में 99% कमी आई है। साथ ही राज्य में नई फिल्म पॉलिसी भी लागू हुई। इससे क्या सकारात्मक बदलाव आया, इसे आप इसी से समझिए कि साल 2023 में 102 फिल्मों और वेब सीरीज की शूटिंग वहाँ हुई है।

जम्मू कश्मीर हिमालय पर स्थित राज्य है, ऐसे में वहाँ पर्यटन में अपार संभावनाएँ हैं। अब यहाँ का पर्यटन उद्योग रोजगार का सबसे बड़ा माध्यम बन रहा है। 2023 में देश-विदेश से 2.10 करोड़ पर्यटक देश-विदेश से घूमने के लिए आए। 2024 की बात करें तो 6 महीनों में 1 करोड़ से भी अधिक पर्यटक यहाँ पहुँच चुके हैं। इससे प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से काफी रोजगार पैदा हो रहा है। दुकानदारों की कमाई बढ़ रही है। जो लोग ट्रांसपोर्टेशन वगैरह के कारोबार में हैं, उनकी भी अच्छी कमाई हो रही है।

RSS के सर-सहकार्यवाह अरुण कुमार ने हाल ही में बताया कि अनुच्छेद-370 को निरस्त किए जाने जैसा फैसला कैसे संभव हो पाया। कई लोग इसे असंवैधानिक बताते हैं, इसके जवाब देते हुए अरुण कुमार बताते हैं कि आर्टिकल-370 कोई विशेष राज्य का दर्जा नहीं है, स्वायत्ता का दर्जा नहीं था, बल्कि ये सिर्फ एक प्रावधान था, जो जम्मू कश्मीर में केंद्रीय संविधान की अवधि जम्मू कश्मीर में आगे बढ़ाने का माध्यम था। अतः, उन्होंने कहा कि इसका कार्य पूरा हो गया था और अब इसकी कोई आवश्यकता नहीं थी।

उन्होंने बताया कि भारत का संविधान बनने के बाद एक प्रश्न खड़ा हो गया, जिस पर 17 अक्टूबर, 1949 में चर्चा हुई। इस दिन जम्मू कश्मीर को लेकर चर्चा हुई, लेकिन महाराजा हरि सिंह ने विलय के कागज पर हस्ताक्षर नहीं किया। जम्मू कश्मीर का विलय डोमिनियन में होना था, जिसे बाद में रिपब्लिक बनना था। अरुण कुमार बताते हैं कि हरि सिंह ने कहा कि जम्मू कश्मीर का कुछ हिस्सा शत्रु के पास है और भारत ने UN में कुछ प्रतिद्धताएँ जता दी हैं, एक तरफ जनमत संग्रह की बातें होती हैं और दूसरी तरफ वहाँ पूरी तरह भारत का संविधान लागू कर देना ठीक नहीं होगा।

तब निर्णय हुआ कि रक्षा, विदेश, संचार एवं आनुषंगिक मामलों पर तो सहमति बन गई। इसके अलावा राज्य सरकार की सहमति से चीजें लागू करने की बात की गई, फिर संविधान सभा में इस पर चर्चा होगी। योजना कुछ यूँ थी कि जम्मू कश्मीर में जब सरकार बनेगी तब उनकी अनुशंसा से वहाँ जम्मू कश्मीर में भारत का संविधान लागू कर दिया जाएगा। अरुण कुमार ने बताया कि अनुच्छेद-370 अस्थायी था, भारत सरकार के संविधान की बहुत सारी धाराओं की आयु कम थी, इसे खत्म करने के लिए संसद के समर्थन की भी ज़रूरत नहीं थी।

उन्होंने बताया कि इसमें सिर्फ 425 शब्द थे। अरुण कुमार ने बताया कि असली काम राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने किया, संसद की ज़रूरत ही नहीं थी। उन्होंने बताया कि संविधान के हिसाब से 370(1)(d) के तहत राष्ट्रपति को अधिकार था कि वो निर्णय लें, और राज्यपाल की सहमति से ये आदेश दिया गया क्योंकि सरकार की अनुपस्थिति में राज्यपाल ही वहाँ सरकार थे। इस तरह भारत का सारा संविधान हर एक संशोधन के साथ जम्मू कश्मीर में लागू हो गया।

बड़ी बात ये है कि आज जो लोग संविधान सिर पर लेकर नाचते हैं, उन्होंने ही ये सुनिश्चित किया था कि जम्मू कश्मीर में भारत का यही संविधान लागू नहीं हो। अब कॉन्ग्रेस वहाँ संविधान लागू किए जाने को ‘काला दिन’ बता रही है। जम्मू कश्मीर में चुनाव भी होंगे, उसे राज्य का दर्जा भी मिलेगा – मोदी सरकार पहले ही ये साफ़ कर चुकी है। फिर जम्मू कश्मीर ऐसा ही होगा, जैसे भारत के बाकी राज्य हैं। एक अस्थायी प्रावधान के लिए भारत के संविधान को नीचा दिखाना कहाँ तक उचित है?

PM मोदी ने कहा था- ED द्वारा जब्त पैसा गरीबों को देंगे, रोज वैली घोटाला पीड़ितों से हुई शुरुआत: जानिए सहारा में डूबा कितना पैसा अब तक निवेशकों को मिला

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लोकसभा चुनाव 2024 से पहले ऐलान किया था कि सरकार गरीबों से फर्जीवाड़े द्वारा लिया गया पैसा वापस करेगी। यह पैसा घोटालेबाजों की जब्त सम्पति से लौटाया जाएगा। अब इस दिशा में काम चालू हो गया है। मोदी सरकार ने रोज वैली और सहारा घोटाला का पैसा पीड़ितों को लौटाना चालू कर दिया है।

प्रधानमंत्री के वादे के अनुसार, प्रवर्तन निदेशालय (ED) पश्चिम बंगाल के रोज वैली घोटाले के ₹12 करोड़ को पीड़ितों को लौटाएगा। इस संबंध में कोलकाता के एक कोर्ट ने 24 जुलाई, 2024 को ED को आदेश दिया है। ED ने रोज वैली ग्रुप की ₹12 करोड़ की 14 FD जब्त की थीं।

कोर्ट के आदेशनुसार अब उन्हें एक कमिटी को हस्तांतरित कर दिया जाएगा। यह कमिटी वह पैसा उन लोगों को लौटाएगी जो इस घोटाले का शिकार हुए हैं। इसके लिए उन लोगों से आवेदन लिए जाएँगे जिनका पैसा इसमें डूबा है। ED का यह कदम पीएम मोदी की पहल के बाद हुआ है।

पीएम मोदी ने मई, 2024 में एक इंटरव्यू के दौरान कहा था कि वह उन गरीबों को पैसा लौटाने के लिए कानूनी रास्ता देख रहे हैं। उन्होंने कहा था कि यह पैसा वही होगा जो लूटने वालों ने इकट्ठा किया है और एजेंसियों ने उसे इकट्ठा किया है। ED ने इसके लिए PMLA कानून का ही सहारा लिया है।

गौरतलब है कि रोज वैली कम्पनी पर देश के 10 राज्यों में निवेशकों के साथ ₹10,000 का घोटाला करने का आरोप है। रोज वैली कम्पनी ने भोले भाले निवेशकों को उनके निवेश पर 17% तक के ब्याज का झांसा देकर हजारों करोड़ रूपए जमा करवाए और उन्हें पैसा वापस नहीं किया।

सहारा वालों को भी वापस मिला पैसा

रोज वैली घोटाले के अलावा सहारा में जिन निवेशकों का पैसा डूबा है, उन्हें भी मोदी सरकार ने पैसा लौटाना चालू कर दिया है। केंद्र सरकार ने इस संबंध में जानकारी देश के सामने भी रखी है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार (5 अगस्त, 2024) को लोकसभा में इस विषय में बताया।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि सहारा निवेशकों के साथ हुए फर्जीवाड़े में पूरा मामला सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हो रहा है। उन्होंने बताया कि सहारा की तीन कम्पनियाँ SEBI के अंतर्गत आती हैं। इन तीन कम्पनियों ने 17,526 निवेशकों को ₹138 करोड़ लौटाए हैं। यह पैसा सहारा द्वारा जमा करवाए गए पैसे से ही दिया गया है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि निवेशकों को कई बार पैसा लेने के लिए कहा जा चुका है लेकिन जितने आवेदन आए हैं उसी हिसाब से पैसा दिया गया है। उन्होंने बताया कि SEBI से सम्बन्धित मामले में पैसा लेने के लिए निवेशक आगे नहीं आ रहे।

इसके अलावा वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ने यह भी बताया कि सहारा की सहकारी कम्पनियों में भी करोड़ों छोटे-बड़े लोगों ने पैसा जमा करवाया था। उन्होंने बताया कि देश में केन्द्रीय सहकारिता मंत्रालय बनने के बाद SEBI के पास पड़ा सहारा का जमा किया ₹5000 करोड़ कोर्ट के आदेश से जमा करने वालों को लौटाने का प्रयास चालू हुआ था।

वित्त मंत्री ने बताया कि इसके लिए केंद्र सरकार ने एक पोर्टल बनाया था। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने सहारा की सहकारी समिति में पैसा जमा करने वाले 4.63 लाख लोगों को ₹374 करोड़ अब तक लौटाए हैं। इसमें और भी कार्रवाई आगे चल रही है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पर्ल समूह में हुई धोखाधड़ी के पैसे को लेकर भी बात की। उन्होंने बताया कि पर्ल समूह में पैसा जमा करवाने वाले 20 लाख से अधिक लोगों को ₹1021 करोड़ लौटाया जा चुका है। वित्त मंत्री ने इस मामले में बताया कि उन लोगों को ही पैसा दिया जा रहा है जिनके दावे सही हैं।

वही इस्लाम, वही कट्टरपंथ: आज जिस आग में जल रहा बांग्लादेश, कभी उसी आग में एक ही रात में कर दिया गया था शेख हसीना के परिवार का सफाया

बांग्लादेश में प्रधानमंत्री शेख हसीना के इस्तीफे की माँग में आज पूरे मुल्क में हिंसा हो रही है। उनके इस्तीफे के नाम पर पुलिस थानों पर हमले किए जा रहे हैं, सुरक्षाकर्मियों का कत्ल हो रहा है, निर्दोष हिंदुओं को बेवजह निशाना बनाया जा रहा है, सरकार को डराया जा रहा है… इन हालातों में वहाँ की सेना कह रही है कि वो स्थिति को नियंत्रित कर लेंगे, हालाँकि उनके द्वारा किए गए प्रयास से ऐसा लग नहीं रहा। उलटा अनुमान तो लगने लगे हैं कि सेना अब प्रधानमंत्री शेख हसीना से मुल्क की कमान ले सकती है। ये अनुमान ही कारण है जिसकी वजह से साल 1975 में बांग्लादेश में जो हुआ उसे याद करना जरूरी है जब सेना के कुछ बागी अधिकारियों के कारण शेख हसीना के घर में 20 लाशें गिरी थीं और बांग्लादेश की राजनीति में उथल-पुथल हुई थी।

बात 15 अगस्त 1975 की है। बांग्लादेश के संस्थापक और मुल्क के पहले राष्ट्रपति ‘बंगबंधु’ शेख मुजीब-उर-रहमान को परिवार समेत मौत के घाट उतारा था। शेख मुजीब-उर-रहमान को यकीन नहीं था कि उनके अपने ही लोग उनके खिलाफ बगावत कर सकते हैं, इसीलिए उन्होंने भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ के दिए इनपुट को नकार दिया। उन्होंने रॉ के संस्थापक आरएन काव द्वारा आगाह किए जाने पर जवाब दिया था- ‘ये मेरे बच्चे हैं मुझे नुकसान नहीं पहुँचाएँगे।’

शेख मुजीब-उर-रहमान उस समय अपने और अपने परिवार पर मंडराने वाले खतरे को समझ ही नहीं पाए। हकीकत वही थी जिसके लिए भारतीय खुफिया एजेंसी उन्हें आगाह कर रहे थी। अगस्त 1975 में बांग्लादेश के सेनाध्यक्ष जनरल शफीउल्ला को सेना की दो बटालियन के बिना किसी आदेश के शेख मुजीब के घर की ओर बढ़ने की सूचना मिली। उन्होंने शेख मुजीब को फोन मिलाया, लेकिन लाइन व्यस्त थी। बहुत कोशिशों के बाद उनका शेख मुजीब से संपर्क हुआ। शेख मुजीब गुस्से में बोले, “शफीउल्ला तोमार फोर्स आमार बाड़ी अटैक करोछे। तुमि जल्दी फोर्स पठाओ (तुम्हारे फोर्स ने मेरे घर पर हमला किया है, जल्दी सेना भेजो)।”

एंथनी मैस्करेनहास अपनी किताब ‘बांग्लादेश ए लेगसी ऑफ ब्लड’ में इस घटना का जिक्र करते हुए लिखते हैं, “शेख मुजीब को देखते ही मोहिउद्दीन नर्वस हो गया। उसके मुँह से केवल इतना ही निकला, सर आपनी आशुन (सर आप आइए)। मुजीब ने चिल्ला कर कहा-क्या चाहते हो? क्या तुम मुझे मारने आए हो? भूल जाओ। पाकिस्तान की सेना ऐसा नहीं कर पाई। तुम किस खेत की मूली हो?” तभी स्टेनगन लिए मेजर नूर ने प्रवेश किया और मोहिउद्दीन को धक्का देते हुए पूरी स्टेनगन खाली कर दी। मुजीब मुँह के बल गिरे और शेख मुजीब उर रहमान के बाद देखते ही देखते उस घर में मौजूद हर शख्स का सफाया हो गया।

बांग्लादेश की राजधानी ढाका के धनमंडी में यह नरसंहार रोड नंबर 32 के हाउस नंबर 677 में 15 अगस्त 1975 को हुआ था। उस तारीख के बाद शेख मुजीबुर रहमान के परिवार से सिर्फ दो लोग जिंदा बचे थे एक मौजूदा प्रधानमंत्री शेख हसीना और दूसरी शेख रेहाना। इन दोनों बहनों की जान भी इसलिए बच पाई क्योंकि ये जर्मनी में थीं। अगर उस समय ये दोनों बहनें घर में होती तो शायद इन्हें भी बागी अधिकारी मौत के घाट उतार चुके होते।

इस पूरे हत्याकांड को अंजाम देने वाले कर्नल फारूक रहमान, मेजर हुदा सहित पाँच हत्यारों को ढाका की केंद्रीय जेल में 2010 में फाँसी दी गई थी। इसके अलावा हत्या में शामिल अब्दुल मजीद को कोरोना समय के बीत साल 2020 में फाँसी हुई थी। वह मजीद शेख मुजीबुर रहमान के 12 हत्यारों में शामिल था। वो पाकिस्तान और भारत में डेरा जमाने से पहले लीबिया में छिपा हुआ था।जब शेख हसीना की सरकार बांग्लादेश में बनी तो उन्होंने पिता के हत्यारों को सजा देनी शुरू कर दी। इसी क्रम में अब्दुल मजीद का नंबर भी आया और कोरोना पाबंदियों के बीच उसे फाँसी पर लटकाया गया।

मालूम हो कि 1975 में जिस तरह से बंगबंधु के परिवार को घेरकर मारा गया था वैसे स्थिति 1971 में भी आई थी। तब, उन्हें पाकिस्तानी सेना ने घेरा था मगर तब एक भारतीय कर्नल अशोक तारा उन्हें सुरक्षित बचाकर बाहर ले आए थे। मगर अफसोस 1975 में शेख मुजीब उर रहमान को बचाने वाला कोई था। उनके अपनों ने ही उनकी पीठ पर खंजर घोंपा था जिन्हें वो अपना बच्चा कहते थे।

MCD में नियुक्त कर सकते हैं LG, दिल्ली सरकार की सलाह जरूरी नहीं: सुप्रीम कोर्ट, जानिए कौन होते हैं एल्डरमैन जिनकी नियुक्ति पर था विवाद

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली नगर निगम (MCD) में नामित सदस्यों की नियुक्ति पर केजरीवाल सरकार को झटका दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि MCD में मनोनीत सदस्यों की नियुक्ति का अधिकार दिल्ली के उपराज्यपाल (LG) को है और वह इसके लिए दिल्ली सरकार की सलाह पर काम करने के लिए बाध्य नहीं हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (5 अगस्त, 2024) को यह निर्णय दिया। चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस पीएस नरसिम्हन ने यह निर्णय दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दिल्ली नगर निगम में 10 मनोनीत सदस्यों की नियुक्ति का अधिकार उपराज्यपाल को है और इसके लिए वह दिल्ली सरकार की सलाह या सहायता मानने पर निर्भर नहीं है। कोर्ट ने कहा कि दिल्ली LG को यह शक्तियाँ उसे 1993 के MCD कानून से मिलती हैं।

कोर्ट ने कहा, “1993 का दिल्ली नगर निगम अधिनियम ने पहली बार LG को मनोनीत करने की शक्ति प्रदान की थी। LG द्वारा उपयोग की गई शक्ति उस योजना को दर्शाती है, जिसके अंतर्गत शक्ति बाँटी गई है। दिल्ली LG से अपेक्षा की जाती है कि वे कानून के अनुसार काम करें ना कि मंत्रिपरिषद की सहायता और सलाह के अनुसार।”

सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला 15 माह पहले रिजर्व कर लिया था और अब सुनाया है। यह फैसला सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली की AAP सरकार की याचिका पर दिया है। AAP सरकार ने MCD में मनोनीत सदस्यों की राज्यपाल द्वारा नियुक्ति के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई थी।

AAP सरकार ने दलील दी थी कि LG ने बिना सरकार के सलाह के ही MCD में नियुक्तियाँ की और 1991 के कानून के बाद पहली बार यह हुआ। AAP सरकार ने दलील दी थी कि LG या तो सरकार के दिए गए नाम मानें या फिर इससे अपनी असहमति जताने के साथ इसे राष्ट्रपति को भेज दें।

गौरलतब है कि AAP सरकार लगातार LG के विरुद्ध कई मामलों में सुप्रीम कोर्ट जाती रही है। इस निर्णय से दिल्ली की केजरीवाल सरकार को बड़ा झटका लगा है। वर्तमान में MCD को लेकर दिल्ली में काफी गुस्सा है। MCD में वर्तमान में AAP सत्ता में है। MCD में कुल 250 सदस्य होते हैं। इनमें से 240 सीटों पर चुनाव होता है जबकि 10 सीटों पर सदस्यों को नामित किया जाता है। इनको मनोनीत करने का अधिकार अब राज्यपाल को मिल गया है। इन्हें एल्डरमैन कहा जाता है।

कुरान की कसम तुझे मार दूँगा… मदरसे में भिड़े दो नाबालिग और एक रात हो गई मोहम्मद अयान की हत्या, पूछताछ के बाद पुलिस ने 12 साल के बच्चे को पकड़ा

उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले में गुरुवार-शुक्रवार (1-2 अगस्त 2024) की रात को एक मदरसे में 12 साल के छात्र की हत्या कर दी गई थी। हत्या चाकुओं से गोद कर की गई थी। इस मामले में पुलिस ने जाँच के बाद रविवार (4 अगस्त) को उसी मदरसे में पढ़ने वाले दूसरे नाबालिग छात्र को गिरफ्तार किया। हत्या की वजह कुछ दिनों पहले दोनों छात्रों में गाली-गलौज होना बताया जा रहा है। पुलिस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई कर रही है।

यह घटना बलरामपुर जिले के थानाक्षेत्र तुलसीपुर की है। यहाँ नेपाल सीमा से कुछ ही किलोमीटर दूरी पर इटवा रोड पर मदरसा जामिया नईमिया अरबी कॉलेज है। इसी मदरसे के कक्षा 2 में दीनी और मज़हबी तालीम लेने वाले 12 वर्षीय छात्र मोहम्मद अयान की 2 अगस्त की रात को निर्ममता से चाकुओं से गोद कर हत्या कर दी गई थी, तब अयान के अब्बा महफूज़ आलम ने इस घटना की शिकायत पुलिस में दर्ज करवाई थी। पुलिस ने यह मामला भारतीय न्याय संहिता की धारा 103 (3), के तहत दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी थी।

मृतक बलरामपुर जिले के ही थानाक्षेत्र जारवा का रहने वाला था। जाँच के दौरान पता चला कि इसी मदरसे में बलरामपुर जिले का ही निवासी एक अन्य 12 वर्षीय छात्र भी दीनी और मज़हबी तालीम लेता है। 5-6 दिनों पहले मोहम्मद अयान की आरोपित से किसी बात कर नोकझोंक हो गई थी, तब अयान ने अपने सहपाठी को माँ-बहन की गंदी-गंदी गालियाँ दी थीं। बताया जा रहा है कि तब मोहम्मद अयान ने ईशा की नमाज़ के बाद मस्जिद में कुरान की कसम खाई थी कि वो जुम्मेरात तक आरोपित छात्र को मार डालेगा।

बताया जा रहा है कि मोहम्मद अयान द्वारा मस्जिद में कुरान की कसम खा कर दी गई इस धमकी को आरोपित ने गंभीरता से लिया। उसने सोचा कि क्यों न वो ही पहले आगे बढ़ कर मोहम्मद अयान को मार डाले। यही सोच कर उसने एक चाकू खरीदा और अपने सूटकेस में छिपा कर रख लिया। 1 अगस्त को वह रात में मदरसे के कमरा नंबर 15 में चाकू ले कर गया। यहाँ मोहम्मद अयान कुछ अन्य छात्रों के साथ सो रहा था। आरोपित भी जाकर मोहम्मद अयान के बगल में लेट गया और सबके गहरी नींद में आने का इंतज़ार करने लगा।

पुलिस की पूछताछ में आरोपित ने बताया कि जब उसे विश्वास हो गया कि सब लोग गहरी नींद में हैं तब उसने बिस्तर से अयान का मुँह और गर्दन जोर से दबा दिया। बिस्तर में दबा होने की वजह से अयान की चीख अन्य छात्र नहीं सुन पाए। इसी दौरान आरोपित ने साथ लाए चाकू से अयान के पेट में कई वार किए। काफी देर तक जब अयान के शरीर में कोई हलचल नहीं हुई तो आरोपित छात्र वहाँ से चुपके से निकल गया। निकलते हुए उसने बिस्तर से मृतक का शरीर ढक दिया।

आरोपित ने अपने कमरे में आकर अयान के खून से सने कपड़े उतारे और उन्हें सूटकेस में छिपा दिया। इसी दौरान आरोपित ने नए कपड़े पहने और अनजान बन कर घूमने लगा। शुरुआती पूछताछ में आरोपित ने पुलिस को इधर-उधर घुमाने की कोशिश की लेकिन बाद में उसने सब कुछ सच-सच उगल दिया। आरोपित बाल अपचारी को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस ने आरोपित की निशानदेही पर उसके खून से सने कपड़े बरामद कर लिए हैं। आगे की जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

भारतीय हॉकी की जिस ‘दीवार’ को भेद न सके अंग्रेज, उनसे कभी पूछा गया था- क्या आप पाकिस्तानी हैं: टोक्यो ओलंपिक में भी श्रीजेश के दम से ही आया था मेडल

पेरिस ओलंपिक 2024 में भारत की हॉकी टीम के सेमीफाइनल में पहुँचने के बाद गोलकीपर परात्तू रवींद्रन श्रीजेश की काफी चर्चा है। चारों ओर श्रीजेश की तारीफ हो रही है। कोई उन्हें हॉकी का ‘लीजेंड’ कह रहा है तो कोई उन्हें भारतीय हॉकी की ‘दीवार’ बता रहा है। कारण है रविवार को मैच के वक्त किया गया उनका प्रदर्शन।

दरअसल, रविवार (4 अगस्त 2024) को क्वार्टर फाइनल मुकाबले में जिस समय भारतीय टीम के खिलाड़ी रोहिदास को रेड कार्ड दिखाकर बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था, उस समय टीम पर प्रेशर बना, लेकिन पेनल्टी शूट आउट में 4-2 से ब्रिटेन को हराकर भारत सेमीफाइनल में एंट्री कर गया।

पेनल्टी शूटआउट के समय श्रीजेश ने जैसे ही दूसरा गोल रोका। हर तरफ से भारत की जीत का शोर गूँजने लगा। कॉमेंट्री कर रहे लोग भी कुछ पल को शांत हो गए। फिर एकदम से रुंधे गले से आवाज आई और श्रीजेश को लीजेंड कहते सुना गया। श्रीजेश की यह तारीफ करने वाले कोई और नहीं बल्कि प्रसिद्ध कमेंटेटर सुनील तनेजा थे।

सोशल मीडिया पर भी उनके गोल रोकने के टेक्निक की फोटो सोशल मीडिया पर शेयर करके उनको सरकार से सम्मान दिलाने की माँग हो रही है। एक यूजर ने लिखा, “ये कल्पना से बाहर की बात है कि कोई गोलकीपर भी मैच जिता सकता है पर श्रीजेश ने ऐसा एक बार नहीं कई बार कर के दिखाया है। बड़े मैच तो अपने दम पर जीताना उनकी आदत बन गई है। आस्ट्रेलिया के खिलाफ और कल इंग्लैंड के खिलाफ जीत में उनका योगदान सबसे बड़ा रहा है।”

बता दें कि ये पहली बार नहीं है कि मैच में जीत के लिए सारा श्रेय श्रीजेश को दिया जा रहा हो। टोक्यो ओलंपिक के वक्त भी जब पुरुषों की हॉकी टीम ने कास्य पदक जीता था। उस समय भी श्रीजेश की काफी चर्चा हुई थी, लोगों ने उनकी तुलना हॉकी के भगवान से की थी और तब भी उन्हें भारतीय हॉकी टीम की दीवार का टैग दिया गया था। उनके लाजवाब प्रदर्शन के लिए उन्हें पूर्व में कई बार तमाम तारीफें मिली हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक बार उन्हें अपने ही देश में पाकिस्तानी कह दिया गया था।

जब श्रीजेश को अपने ही देश में सुनना पड़ा ‘पाकिस्तानी’

बात साल 2013 की है। मुंबई मिरर में प्रकाशित एक​ रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय खिलाड़ी श्रीजेश को नहीं पहचान पाने पर शिवसैनिकों की काफी किरकिरी हुई थी। शिवसेना के प्रतिनिधि ने राष्ट्रीय भारतीय हॉकी टीम के गोलकीपर श्रीजेश से पूछा था, ”क्या आप पाकिस्तानी हैं?” ये सुनते ही श्रीजेश हैरान हो गए थे। हालाँकि, उन्होंने जबाव देने में बिल्कुल भी देर नहीं लगाई। टीम इंडिया के खिलाड़ी ने शिवसैनिको से कहा था, “यार अपने इंडिया के प्लेयर को तो पहचानते नहीं हो, पाकिस्तानी प्लेयर्स को कैसे पहचानोगे।”

ये वाकया उस समय का है जब 2013 में हॉकी इंडिया लीग में हिस्सा लेने के लिए भारत आए पाकिस्तानी खिलाड़ियों के विरोध में मुंबई में शिवसैनिकों ने जमकर हंगामा किया था। उस समय शिवसैनिकों ने हॉकी इंडिया के दफ्तर पहुँचकर वहाँ पर जमकर बवाल काटा था। इसके साथ ही शिवसैनिक पाकिस्तानी खिलाड़ियों को वापस भेजने की माँग भी कर रहे थे। उस समय मुंबई हॉकी संघ के अधिकारियों ने करीब 150 शिवसेना के प्रदर्शनकारियों को बताया था कि आयोजन स्थल पर कोई भी पाकिस्तानी खिलाड़ी मौजूद नहीं है। हालाँकि बाद में मुंबई हॉकी एसोसिएशन के एक अधिकारी ने बाद में मिरर को बताया कि पाकिस्तानी खिलाड़ी वास्तव में आयोजन स्थल पर ही मौजूद थे। 

‘लव जिहाद’ रोकने के लिए UP के रास्ते पर असम, आजीवन कारवास का आएगा कानून: बोले CM सरमा- इजाजत के बाद ही एक दूसरे की प्रॉपर्टी खरीद सकेंगे हिंदू-मुस्लिम

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने ऐलान किया है कि राज्य सरकार स्थानीय जनसांख्यिकी की सुरक्षा के लिए जल्द ही कई कानून लाएगी। CM सरमा ने ऐलान किया है कि राज्य के कुछ इलाकों में मुस्लिमों के जमीन खरीदने पर भी रोक लगाई जाएगी और साथ ही लव जिहाद के विरुद्ध भी कड़ा कानून बनाया जाएगा।

CM हिमंता बिस्वा सरमा ने यह ऐलान रविवार (4 अगस्त, 2024) को भाजपा की राज्य कार्यकारिणी की बैठक में किया। उन्होंने कह़ा कि वह कुछ दिनों में लव जिहाद को लेकर क़ानून लाएंगे जिसमें आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान होगा। इसके अलावा उन्होंने ऐलान किया कि राज्य के मूल निवासियों के भूमि अधिकारों को बचाने के लिए भी कानून लाया जाएगा।

CM सरमा ने कहा कि वह ऐसा कानून लाएँगे, जिसमें हिन्दू-मुस्लिम एक दूसरे की जमीन बिना मुख्यमंत्री अनुमति के नहीं खरीद सकेंगे। उन्होंने ऐलान किया कि असम के गोलपाड़ा जिले में एक समुदाय के लोगों की जमीन की बिक्री की बिलकुल ही इजाजत नहीं दिया जाएगी क्योंकि वह इस जिले में अल्पसंख्यक हो चुके हैं।

इसके अलावा असम के जनजातीय समुदाय के लोगों के भूमि अधिकारों की रक्षा के लिए भी एक कानून बनाया जाएगा। असम CM हिमंता बिस्वा सरमा ने इस बीच नौकरियों को लेकर भी बात की। उन्होंने 1 लाख नौकरियों का वादा राज्य से किया था। यह वादा पूरा हो चुका है।

CM सरमा ने ऐलान किया कि राज्य में सरकारी नौकरियों में उन लोगों को ही लिया जाएगा, हो असम राज्य में जन्मे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसा राज्य की बदलती जनसांख्यिकी को लेकर बढती चिंताओं के चलते किया जा रहा है। नौकरियों में स्थानीय लोगों को लेने की नीति दो महीने के भीतर लाई जाएगी।

CM सरमा ने लव जिहाद पर एक्शन की बात भी कही है। उन्होंने ऐलान किया कि राज्य में जो भी व्यक्ति लव जिहाद के जरिए धर्म परिवर्तन करवाते पकड़ा जाएगा, उसे आजीवन कारावास की सजा का क़ानून बनाया जाएगा। CM सरमा इससे पहले भी राज्य में बदलती जनसांख्यिकी का मुद्दा उठाते रहे हैं।

उन्होंने हाल ही में छत्तीसगढ़ में बताया था कि असम में 1951 में मुस्लिम आबादी 12% थी जो अब बढ़ कर 40% हो चुकी है। उन्होंने कहा था कि 2041 तक असम मुस्लिम बाहुल्य राज्य बन जाएगा। उन्होंने झारखंड में बढ़ती घुसपैठ को लेकर भी चेताया थ।

लव जिहाद को लेकर हाल ही में उत्तर प्रदेश विधानसभा में भी एक कानून पास किया गया है। उत्तर प्रदेश में जबरन धर्मांतरण रोकने वाले कानून को और भी मजबूत किया गया है। इसके अंतर्गत अब आजीवन कारावास का प्रावधान किया गया है इसमें जुर्माने की राशि भी बढ़ाई गई है।