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‘बार-बार ट्रांसफर, माँग रहे थे ₹30 लाख’: डालर सब-इंस्पेक्टर की आत्महत्या में कॉन्ग्रेस MLA का नाम, गर्भवती पत्नी बोलीं – पुलिस वाले भी दे रहे रसूखदारों का साथ

कर्नाटक के यादगिर जिले में कॉन्ग्रेस विधायक और उनके बेटे को जिम्मेदार बता कर एक पुलिसकर्मी ने आत्महत्या कर ली है। मृतक सब-इंस्पेक्टर का नाम परशुराम है जो दलित समुदाय से थे। आरोप है कि राज्य में सत्ताधारी पार्टी कॉन्ग्रेस के विधायक चन्नारेड्डी तन्नूर और उनके बेटे पंपनागौड़ा ने ट्रांसफर से बचने के लिए दारोगा से 30 लाख रुपयों की डिमांड की थी। परशुराम की पत्नी की शिकायत पर पुलिस ने कॉन्ग्रेस MLA और उनके बेटे के खिलाफ विभिन्न धाराओं में FIR दर्ज कर ली है।

मृतक की पत्नी ने पुलिस अधिकारियों पर आरोपित विधायक का साथ देने का आरोप लगाया है। शनिवार (3 अगस्त, 2024) को भाजपा और दलित हित चिंतक संगठनों ने इस मामले सड़क पर उतर कर प्रदर्शन किया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला यादगिर जिले के शहर पुलिस थाने का है। यहाँ तैनात रहे सब इंस्पेक्टर परशुराम का यादगिर टाउन थाने से संसदीय चुनावों के दौरान ट्रांसफर कर दिया गया था। चुनाव के बाद परशुराम फिर शहर में वापस लौटे। बाद में उनकी पोस्टिंग साइबर क्राइम थाने में कर दी गई। कुछ दिनों बाद उन्हें वहाँ से भी रिलीव कर दिया गया। बताया जा रहा है कि 7 महीनों के अंदर बार-बार ट्रांसफर किए जाने से दरोगा परशुराम मानसिक तौर पर काफी परेशान हो गए थे।

मृतक सब-इंस्पेक्टर की पत्नी श्वेता फ़िलहाल गर्भवती हैं। उनका का आरोप है कि उनके पति के बार-बार हो रहे इस तबादले के पीछे कॉन्ग्रेस विधायक चन्नारेड्डी तन्नूर और उनके बेटे पंपनागौड़ा का हाथ था। उन्होंने कहा कि आरोपित बाप बेटे ने उनके पति से ट्रांसफर रुकवाने के नाम पर 30 लाख रुपयों की माँग की थी। श्वेता के मुताबिक ट्रांसफर के बाद से उनके पति लगातार अवसाद में थे और अक्सर रोया करते थे। इस दौरान उन्होंने अपनी पत्नी से कहा था कि उनके मन में आत्महत्या का भी विचार आता है।

इस बीच बच्चे को जन्म देने श्वेता रायचूर स्थित अपने मायके चली गईं। यहाँ उन्हें अपने पति के यादगिर जिले के अस्पताल में भर्ती होने की जानकारी मिली। श्वेता को बताया गया कि परशुराम के नाक और मुँह से खून निकल रहा था। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके पति ने मानसिक तनाव में आ कर मौत को गले लगा लिया। श्वेता ने कॉन्ग्रेस MLA चन्नारेड्डी तन्नूर और उनके बेटे पंपनागौड़ा के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई। शिकायत के आधार पर दोनों आरोपितों पर आत्महत्या के लिए उकसाने सहित कई अन्य धाराओं में FIR दर्ज कर ली गई है।

इस बीच दोनों आरोपितों पर कोई कार्रवाई न होने का आरोप लगा कर कर्नाटक में भारतीय जनता पार्टी और अन्य दलित हित चिंतक संगठनों ने कॉन्ग्रेस सरकार के खिलाफ यादगिर में प्रदर्शन किया है। इन प्रदर्शनों में दिवंगत दारोगा परशुराम की पत्नी श्वेता भी शामिल हुईं। श्वेता ने आरोप लगाया कि जिस विभाग में उनके पति नौकरी किए वही पुलिस वाले न्याय करने के बजाय कॉन्ग्रेस विधायक का साथ दे रहे हैं। श्वेता ने पुलिस वालों से सवाल भी किया कि क्या वो एक विधायक के लिए अपने परिवार को भी दाँव पर लगाने को तैयार हैं ?

भारतीय जनता पार्टी ने मृतक सब इंस्पेक्टर परशुराम के समर्थन में सड़कों पर उतर कर प्रदर्शन किया है। बीजेपी का आरोप है कि पैसे न पाने पर कॉन्ग्रेस विधायक ने एक पुलिसकर्मी को मरने पर मजबूर कर दिया। इस मौके पर चित्तपुर रोड को जाम कर के कर्नाटक सरकार के खिलाफ नारेबाजी हुई। प्रदर्शनकारियों ने तत्काल आरोपित पिता-पुत्र की गिरफ्तारी की माँग की है। कर्नाटक सरकार के गृह मंत्री जी परमेश्वर ने मीडिया से बताया कि मामले की निष्पक्षता से जाँच के आदेश दिए गए हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि सब इंस्पेक्टर परशुराम के पास से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला और उनकी पत्नी की शिकायत के आधार पर जाँच करवाई जा रही है।

बांग्लादेश में फिर से भड़की हिंसा, 55 की मौत: शेख हसीना की पार्टी के कार्यकर्ताओं और पुलिसकर्मियों की हत्या, पूरे मुल्क में कर्फ्यू

बांग्लादेश में आरक्षण विरोधी प्रदर्शनों के हिंसा में तब्दील हो जाने के बाद रविवार (04 अगस्त 2024) को असहयोग आंदोलन शुरु हो गया है। छात्रों की आड़ में विपक्षी पार्टियों और इस्लामिक कट्टरपंथियों ने पूरे देश में हिंसा फैला दी है। कम से कम 55 लोगों की मौत की खबरें हैं, जिसमें अधिकतर लोग आवामी लीग के कार्यकर्ता हैं। पूरे देश में कर्फ्यू लगा दिया गया है।

कथित आरक्षण विरोधी प्रदर्शन के संयोजक द्वारा घोषित, असहयोग आंदोलन के पहले दिन ढाका और बांग्लादेश के अन्य हिस्सों में विभिन्न इलाकों में भीषण झड़पों में 13 पुलिसकर्मियों सहित कम से कम 55 लोग मारे गए और सैकड़ों लोग घायल हो गए। देश भर में चल रहे हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बीच सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने सोमवार, मंगलवार और बुधवार को तीन दिवसीय सामान्य अवकाश की घोषणा की है। मोबाइल इंटरनेट पर बैन लगा दिया गया है। फेसबुक-वॉट्सऐप के बंद होने की सूचना आ रही है। इस बीच, सियालहट से राजधानी ढाका तक लंबे मार्च की घोषणा प्रदर्शनकारियों ने की है, जो मंगलवार (6 अगस्त 2024) तक ढाका पहुँचने वाली है। इस बीच पूरे देश में दुकानें, बैंक सबकुछ बंद रहे हैं, तो रविवार शाम 6 बजे से कर्फ्यू का ऐलान किया गया है।

बांग्लादेश के अलग-अलग हिस्सों में सिराजगंज में 18 की मौत, नरसिंगडी में 6, फेनी में 5, रंगपुर में 4, ढाका, मगुरा, पबना, किशोरगंज और बोगुरा में 3-3, मुंशीगंज और सिलहट में 2-2, बरिशाल, सावर और कुमिला में एक-एक लोगों की मौत हो गई है। इस बीच, सिराजगंज के इनायतपुर पुलिस स्टेशन पर अपराधियों ने हमला कर दिया, जिसमें कम से कम 13 पुलिसकर्मी मारे गए।

जानकारी के मुताबिक, नरसिंगडी में अवामी लीग और भेदभाव विरोधी कोटा आंदोलन के प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प में कम से कम छह अवामी लीग नेताओं की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई और कई अन्य घायल हो गए। डेली स्टार ने सिराजगंज के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (सदर सर्किल) के.एम. शाहिदुल इस्लाम शोहाग के हवाले से बताया कि यह घटना दोपहर करीब एक बजे नरसिंगडी में माधवाधि नगर भवन के बगल में बोरो मस्जिद के सामने घटी।

रविवार (4 जुलाई 2024) की दोपहर किशोरगंज में प्रदर्शनकारियों और अवामी लीग कार्यकर्ताओं के बीच झड़प में एक महिला सहित तीन लोग मारे गए और 100 से अधिक घायल हो गए। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि संघर्ष के दौरान आवामी लीग कार्यालय में तोड़फोड़ की गई और आग लगा दी गई। इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने विरोध जुलूस निकालकर तीन घंटे तक सड़क जाम कर दी।

विपक्षी पार्टी का एक-सूत्रीय एजेंडा

इस बीच, विपक्षी पार्टी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने विरोध प्रदर्शनों के समर्थन के एक-सूत्रीय एजेंडे का ऐलान किया है। प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री शेख हसीना और कैबिनेट के इस्तीफे की माँग की है। विपक्ष ने भी अपने मंसूबे साफ कर दिए हैं, कि उसे येन-केन-प्रकारेण सत्ता चाहिए। बीएनपी के कार्यकर्ता प्रदर्शनों में शामिल होते देखे गए हैं।

भारतीय उप-उच्चायुक्त ने की अपील

ताजा हिंसा के बाद भारत ने बांग्लादेश में रहने वाले अपने नागरिकों से संपर्क में रहने और सतर्क रहने को कहा है। सहायक उच्चायोग ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “भारत के सहायक उच्चायोग, सिलहट के अधिकार क्षेत्र में रहने वाले छात्रों सहित सभी भारतीय नागरिकों से इस कार्यालय के संपर्क में रहने का अनुरोध किया जाता है और उन्हें सतर्क रहने की सलाह दी जाती है। आपात स्थिति के मामले में, कृपया +88-01313076402 पर संपर्क करें।”

काशी विश्वनाथ पर आ रही है फिल्म… प्रोजेक्ट से जुड़े नामों को देख कर चौंक जाएँगे आप: दिखेगी औरंगजेब की क्रूरता और हिन्दुओं की न्यायिक लड़ाई

काशी विश्वनाथ पर फिल्म आ रही है। जी हाँ, आपने बिलकुल ठीक पढ़ा है। अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन अब इसमें कोई शक नहीं बचा है कि वाराणसी में भगवान विश्वनाथ मंदिर पर इस्लामी आक्रांताओं के हमले, हिन्दुओं के संघर्ष और आज भी न्यायालय में चल रही लड़ाई को बड़े पर्दे पर उतारा जाने वाला है। ये एक बड़ा प्रोजेक्ट होगा, जिसमें उत्तर एवं दक्षिण भारत के कई कलाकार काम करेंगे। फिल्म को लेकर काम शुरू हो गया है। हालाँकि, अभी शूटिंग शुरू नहीं हुई है।

ऑपइंडिया को आंतरिक सूत्रों से पता चला है कि काशी विश्वनाथ के इतिहास पर फिल्म बनाने की तैयारी चालू कर दी गई है। इस फिल्म का निर्माण अभिषेक अग्रवाल करेंगे, जो ‘अभिषेक अग्रवाल आर्ट्स’ नामक फिल्म प्रोडक्शन कंपनी चलाते हैं। अभिषेक अग्रवाल इससे पहले 2022 में आई 2 सफल फिल्मों ‘द कश्मीर फाइल्स’ और ‘कार्तिकेय 2’ का निर्माण कर चुके हैं। एक में जहाँ कश्मीरी पंडितों के घाटी से पलायन और इस्लामी क्रूरता को दिखाया गया, वहीं दूसरी एक एडवेंचर फिल्म थी जिसे भगवान श्रीकृष्ण के इतिहास से जोड़ा गया था।

हैदराबाद स्थित फिल्म निर्माता अभिषेक अग्रवाल हाल ही में वाराणसी पहुँचे और वहाँ प्रोफेसर राणा PB सिंह से मुलाकात कर के वाराणसी के इतीहास और वहाँ की संस्कृतिक को समझा। राणा PB सिंह सांस्कृतिक परिदृश्य एवं विरासतों के अध्ययन में दक्षता रखते हैं। ‘वाराणसी हिन्दू विश्वविद्यालय’ (BHU) के ‘इंस्टिट्यूट ऑफ साइंस’ स्थित ‘डिपार्टमेंट ऑफ जियोग्राफी’ में उन्होंने लंबे समय तक कार्य किया है। ऐसे में वो इस फिल्म से जुड़ते हैं तो उनके अध्ययन एवं शोध का लाभ इसे मिलेगा।

उनके बारे में ये भी बता दें कि वो सांस्कृतिक मानवशास्त्र, पौराणिक कथाओं, लोक-कथाओं, धार्मिक-सांस्कृतिक-विरासत परिदृश्य और योजना, भारत (उत्तर), दक्षिण कोरिया, जापान में इन क्षेत्र अध्ययनों के साथ शोध-पत्र प्रकाशित कर चुके हैं। वो अपने प्रोजेक्ट ‘Understanding Place & Envisioning the Cosmos’ के माध्यम से ब्रह्मादिया जटिलताओं का अध्ययन भी कर रहे हैं। अभिषेक अग्रवाल के साथ चर्चा के दौरान उन्होंने फिल्म को लेकर मार्गदर्शन दिया।

जल्द ही राणा PB सिंह को काशी विश्वनाथ फिल्म प्रोजेक्ट के लिए ऑनबोर्ड लिया जाएगा। असल में इस प्रोजेक्ट को लेकर शुरुआत अभिषेक अग्रवाल और विष्णु शंकर जैन के बीच फोन कॉल के दौरान हुई थी। दोनों ने एक घंटा से भी अधिक वीडियो कॉल कर बात की, जिसमें विष्णु जैन एवं उनके पिता हरिशंकर जैन ने काशी विश्वनाथ को लेकर चल रही न्यायिक लड़ाई के बारे में उन्हें समझाया। तभी इस पर फिल्म बनाने का विचार किया गया और इस पर आगे बढ़ा गया।

विष्णु जैन और हरिशंकर जैन काशी विश्वनाथ को अतिक्रमण मुक्त कराने की न्यायिक लड़ाई के सिपाही हैं। काशी विश्वनाथ मंदिर तोड़ कर मुग़ल बादशाह औरंगजेब ने वहाँ ‘ज्ञानवापी मस्जिद’ खड़ी कर दी थी। ज्ञानवापी ढाँचे के तहखाने में हिन्दुओं को पूजा-अर्चना की अनुमति मिल चुकी है। इलाहाबाद हाईकोर्ट से ज्ञानवापी परिसर को सील करने की अनुमति माँगते हुए एक PIL दायर हुई थी, जिसे स्वीकार नहीं किया गया। हालाँकि, जैन पिता-पुत्र की प्रयासों से ज्ञानवापी ढाँचे का सर्वे हुए और वहाँ शिवलिंग होने की बात पता चली, कई हिन्दू प्रतीक भी मिले।

सुप्रीम कोर्ट आदेश दे चुका है कि ज्ञानवापी ढाँचे में जहाँ शिवलिंग मिला उस क्षेत्र को संरक्षित किया जाए, क्योंकि मुस्लिम पहले वहाँ ‘वजू’ के नाम पर अपने पाँव धोते थे। जहाँ तक मीनाक्षी जैन की बात है, उनसे भी अभिषेक अग्रवाल मुलाकात कर चुके हैं। मीनाक्षी जैन एक ऐसी इतिहासकार हैं, जिन्होंने वामपंथी इतिहासकारों से इतर नाम कमाया है और उनके प्रपंचों को ध्वस्त किया है। अयोध्या सहित अन्य मंदिरों को लेकर लड़ाई पर वो पुस्तकें लिख चुकी हैं, कई कार्यक्रमों में वो अपने वक्तव्य रखती रही हैं।

‘द ताशकंद फाइल्स’ (2029), ‘द कश्मीर फाइल्स’ (2022) और ‘द वैक्सीन वॉर’ (2023) के निर्देशक विवेक अग्निहोत्री भी इस फिल्म से जुड़े हुए हैं, लेकिन उन्होंने ये साफ़ नहीं किया है कि वो इसका निर्देशन करेंगे या नहीं। वो फ़िलहाल ‘द दिल्ली फाइल्स’ पर काम कर रहे हैं, जिसमें भारत विभाजन के दौरान पश्चिम बंगाल में हुए हिन्दुओं के नरसंहार की कहानी दिखाई जाएगी। इस फिल्म से भी ‘अभिषेक अग्रवाल आर्ट्स’ जुड़ा हुआ है। अभिषेक अग्रवाल के पिता तेजनारायण अग्रवाल की मौजूदगी में विवेक अग्निहोत्री के साथ कई फिल्मों को लेकर इनकी डील हुई थी।

मीनाक्षी जैन, राणा PB सिंह, विष्णु शंकर जैन, हरिशंकर जैन, विवेक अग्निहोत्री और अभिषेक अग्रवाल – ये ऐसे 6 किरदार हैं जो काशी विश्वनाथ पर बन रही फिल्म का आधार होंगे। आगे अब कौन से अभिनेता-अभिनेत्री इससे जुड़ते हैं, कहानी क्या स्वरूप लेती है और कौन इसका निर्देशन करता है – ये सब समय के साथ पता चलता जाएगा। अभी इसकी पुष्टि समझिए कि फिल्म बन रही है। औरंगजेब के अत्याचार से लेकर संघर्षशील हिन्दुओं की ये कहानी पर्दे पर ज़रूर आ रही है।

बरेली की दलित बस्ती में ‘चंगाई सभा’, गरीबों के धर्मांतरण का प्रयास: हिन्दू संगठनों ने मौके पर पहुँच कर किया विरोध, बाँटे जा रहे थे बाइबिल जैसे साहित्य

उत्तर प्रदेश के बरेली जिले से ईसाई धर्मान्तरण के प्रयास का मामला सामने आया है। यहाँ हिन्दू संगठनों ने एक पादरी पर दलित (SC वर्ग) के लोगों को ईसाई बनाने की कोशिश का आरोप लगाया है। आरोप है कि अनुसूचित जाति के 40-50 लोगों को प्रार्थना सभा के नाम पर जमा कर के उनके धर्मांतरण की साजिश रची गई थी। घटना रविवार (4 अगस्त, 2024) की है। पुलिस मौके पर पहुँच कर जाँच व अन्य जरूरी कार्रवाई में जुट गई है। कुछ लोगों से पूछताछ चल रही है।

यह घटना बरेली के थाना क्षेत्र बहेड़ी की है। यहाँ की गौटिया बस्ती में अधिकतर दलित समुदाय के लोग रहते हैं। ‘बजरंग दल’ का आरोप है कि रविवार की दोपहर लगभग 11:30 पर बाहर से कुछ लोग इस बस्ती में आए और यहाँ के निवासियों के घरों में जा कर प्रार्थना सभा के नाम पर लोगों को जुटाने लगे। मामले की सूचना मिलने पर विहिप और ‘बजरंग दल’ के कार्यकर्ता मौके पर पहुँचे। उन्होंने पाया कि एक जगह लगभग 40-50 लोगों को जुटा कर रखा गया था। ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है।

शिकायत में बताया गया है कि इन सभी के धर्मांतरण की तैयारी की जा रही थी। इस पूरे कार्यक्रम का कर्ताधर्ता एक पादरी बताया जा रहा है। ‘बजरंग दल’ के सदस्यों ने अपने सीनियरों को इसकी सूचना दी। संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी मौके पर पहुँचे और उन्होंने कार्यक्रम का विरोध किया। आरोप है कि इस जमावड़े में बाइबिल सहित अन्य तमाम ईसाई साहित्य भी लाए गए थे। मौके पर एक दान पात्र भी रखा हुआ था। प्रार्थना सभा में एक ब्लैकबोर्ड लगाया गया था। उस ब्लैकबोर्ड में संडे का टाइम टेबल लिखा हुआ है। इस टाइम टेबल में चॉक से ‘प्रभु का धन्यवाद’, ‘तेरा प्यार है’, ‘प्रार्थना’ और ‘गवाही’ जैसे काम लिखे हुए थे।

प्रार्थना सभा में पुरुषों के साथ महिलाएँ और बच्चे भी मौजूद थे। ऑपइंडिया को मिले वीडियो में एक लड़की पुलिस से पहले खुद को हिन्दू बताती है लेकिन बाद में कहती है कि उसने चंगाई किया है और वो परमेश्वर को मानती है। लड़की के हाथ में एक किताब है जिसे ले कर वो कहती है कि परमेश्वर ने उसे जीवन दिया है। अंत में बड़े-बड़े शब्दों में ‘Praise The Lord’ लिखा हुआ था जिसका हिंदी में अर्थ ‘परमेश्वर की स्तुति करो’ होता है। घटनास्थल पर मौजूद लोगों ने पहले खुद को हिन्दू बताया लेकिन जब उनसे ईसाइयों के कार्यक्रम में आने की वजह पूछी गई तो वो कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए।

‘बजरंग दल’ के सदस्य जब कथित प्रार्थना सभा में पहुँचे तो उनकी आरोपितों से नोंकझोंक भी हुई। मामले की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुँची और हालात को काबू किया। ‘बजरंग दल’ और ‘विश्व हिन्दू परिषद’ के लगभग आधे दर्जन पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने पुलिस को शिकायत दे कर दलितों के सामूहिक धर्मांतरण की साजिश का आरोप लगाया। उन्होंने आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है। पुलिस ने मामले की जाँच शुरू कर दी है। कुछ लोगों से पूछताछ की जा रही है।

हिन्दुओं के गाँव से लेकर फाइव स्टार होटल तक, समझिए कैसे जमीन हड़पता है वक्फ बोर्ड: कई मंदिरों पर भी इन्हीं का कब्जा, हिन्दुओं के लिए ऐसा कोई कानून नहीं

वक्फ के माध्यम से जमीन हड़पना कोई कल्पना नहीं है। ऐसी खबरें आये दिन सुनने को मिलती रहती हैं, जहाँ वक्फ बोर्ड ने सार्वजनिक या निजी भूमि को वक्फ के रूप में पंजीकृत करने की माँग की है। इसमें तमिलनाडु में एक पूरा हिंदू गाँव, सूरत में सरकारी इमारतें, बेंगलुरु में तथाकथित ईदगाह मैदान, हरियाणा में जठलाना गाँव, हैदराबाद का पाँच सितारा होटल आदि शामिल हैं।

भूमि हड़पने के तीन सबसे सामान्य रूप हैं- किसी भूमि पर कब्रिस्तान के रूप में दावा करना, मजार/दरगाह बनाना और सार्वजनिक भूमि पर नमाज पढ़ना शामिल है। सार्वजनिक जमीनों पर शायद इसलिए नमाज पढ़ी जाती है, ताकि उसे वक्फ संपत्ति के रूप में दावा किया जा सकता है। पिछली कुछ स्थितियाँ एवं दावे इनसे संबंधित और इससे भी बढ़कर मिले हैं।

इन घटनाओं से पता चलता है कि गैर-समायोजित कानून और इसके द्वारा बनाया गया भूमि हड़पने वाला भ्रष्ट अभिजात वर्ग सामाजिक संघर्ष और सांप्रदायिक वैमनस्य के लिए हिन्दुओं की सम्पतियों के खिलाफ एक सोचा-समझा तंत्र है। वक्फ संस्था कानूनी रूप से अनावश्यक है। वक्फ की कानूनी संस्था और बोर्ड की नौकरशाही का अस्तित्व सिर्फ इस्लामवादी राजनीति के लिए एक गढ़ के रूप में ही समझ में आता है।

हालाँकि, यहाँ ध्यान दिया जा सकता है कि एक धर्मनिरपेक्ष देश में केवल एक तर्कसंगत कानूनी प्रणाली को आम हित में काम करना चाहिए, सिर्फ ‘पहचान को चिह्नित करने वाले’ के रूप में नहीं। वक्फ का कानून आज जिस स्थिति में है, वह सार्वजनिक शांति, सांप्रदायिक सद्भाव के लिए खतरनाक है। यह निजी संपत्ति अधिकारों का उल्लंघन करता है और संभावित रूप से चरमपंथी राजनीति को प्रोत्साहित करता है।

वक्फ अधिनियम 1995 और वक्फ न्यायशास्त्र आज जिस स्थिति में है, वह स्पष्ट रूप से संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत दिए गए समानता के अधिकार का उल्लंघन है। यह अधिनियम एक समुदाय की संपत्तियों और धार्मिक प्रतिष्ठानों के एक वर्ग को बहिष्कृत करने के लिए प्रक्रियात्मक और वास्तविक सुरक्षा की एक विशेष प्रणाली बनाता है।

वक्फ मशीनरी कैसे काम करती है, इसे एक उदाहरण से समझा जा सकता है। मान लीजिए कि मिस्टर X का मिस्टर Y की ज़मीन के पास एक ज़मीन है। भूमि का अच्छी तरह से सीमांकन नहीं किया गया है और संभवतः विवादित भी है, क्योंकि इसे वक्फ उपयोगकर्ता द्वारा विवादित बनाया जा सकता है। इसके लिए किसी दस्तावेज़ की आवश्यकता भी नहीं है। फिर वह इसे वक्फ बोर्ड में पंजीकृत कराता है।

बोर्ड भूमि के बारे में पूछताछ करने के लिए बाध्य है और यदि मिस्टर X को पता चलेगा तो वह पंजीकरण का विरोध भी कर सकता है। हालाँकि, एक बार फिर बोर्ड के पास यह निर्णय लेने की पूरी शक्ति है कि वह भूमि वास्तव में वक्फ संपत्ति है या नहीं। जैसा कि पहले निर्दिष्ट किया गया है, वक्फ बोर्ड एक राजनीतिक निकाय है, जिसे वक्फ की रक्षा और बढ़ावा देने का अधिकार है।

इसलिए, निकाय के समक्ष कार्यवाही का मध्यकालीन व्यवस्था क़ाज़ी के समक्ष की तुलना में उचित परिणाम निकलने की अधिक संभावना नहीं है। राज्य प्रशासन वक्फ बोर्ड के निर्देश का पालन करने के लिए कानूनी रूप से बाध्य है। ऐसे में मिस्टर X के पास ट्रिब्यूनल में एक छोटी सी अपील होगी। यह इकाई भारी पूर्वाग्रह से ग्रस्त होगी। इसके निर्णय के खिलाफ कोई और वैधानिक अपील नहीं है।

ऐसे में मिस्टर X के लिए यह विशेष रूप से कठिन होगा, यदि भूमि को अधिनियम की धारा 4 के तहत वक्फ के राज्य सर्वेक्षण द्वारा (बोर्ड द्वारा पंजीकरण के आधार पर) वक्फ के रूप में सीमांकित किया गया है। इस सबके बीच, मिस्टर X का सामना न केवल मिस्टर Y से होगा, बल्कि वक्फ फंड और हजारों कर्मचारियों द्वारा समर्थित पूरी वक्फ नौकरशाही से होगा।

इस दौरान मिस्टर X को आपराधिक मुकदमे से भी डराया जाएगा और बताया जाएगा कि यह साल 2013 के संशोधनों को अधिनियम में जोड़ा गया है। बेशक, मिस्टर X वक्फ अधिकारियों को रिश्वत की पेशकश कर सकते हैं और इस लहर से बाहर निकल सकते हैं या फिर उन्हें अपनी जमीन को मिस्टर Y के हाथ में जाते हुए देखते रह जाना होगा।

वक्फ बोर्ड भ्रष्टाचार का एक अद्भुत स्रोत है। भारत में इस्लाम फैलाने के लिए कॉन्ग्रेस की सरकार ने वक़्फ़ बोर्ड का गठन किया था। इतिहास के अनुसार, इस्लाम की उत्पत्ति 7वीं शताब्दी ईस्वी में मक्का और मदीना में इस्लाम के पैगंबर मुहम्मद के मिशन से हुई थी। 622 ईस्वी में पैगंबर मुहम्मद यतुरिब शहर (अब मदीना कहा जाता है) चले गए। वहाँ उन्होंने अरब की जनजातियों को एकजुट करना शुरू किया।

इस्लाम के तहत नियंत्रण लेने के लिए वे साल 630 में मक्का लौट आए और सभी बुत (मूर्तियों) को नष्ट करने का आदेश दे दिया। लगभग 632 ईस्वी में जब उनकी मृत्यु हुई तब तक अरब की लगभग सभी जनजातियाँ नष्ट हो चुकी थीं। शुरुआती मुस्लिम कबीले इस्लाम के प्रचार-प्रसार के लिए विश्व भर मे फैलने के लिए निकले।

8वीं शताब्दी ईस्वी तक उमय्याद खिलाफत में इस्लाम पश्चिम में लाइबेरिया से लेकर पूर्व में सिंधु नदी तक फैल गया। वहीं, सनातन इस्लाम के आने से सदियों पुराना है। ये वही सनातन धर्म है, जिसके मुख्य मंदिरों पर मुस्लिमों का कब्ज़ा है। आज के समय मे वे हमारे मंदिरों को वक़्फ़ की प्रॉपर्टी कहते हैं। जैसे श्रीकृष्ण जन्मभूमि, श्री काशी विश्वनाथ का असली स्वयंभू शिवलिंग, जो ज्ञानवापी परिसर में स्थित है।

देश भर में ऐसे हज़ारों मंदिर एवं धर्मस्थान हैं, जिन्हें खंडित करके उन पर मस्जिद थोप दिए गए। मथुरा का शाही ईदगाह, वाराणसी का ज्ञानवापी मस्जिद, अयोध्या में कभी रहा बाबरी मस्जिद, धार का भोजशाला आदि ये सब जगह नमाज पढ़ने के लिए नहीं थी, बल्कि मुस्लिम आक्रांताओं की विजय की निशानियों में हमारे मुख्य तीर्थस्थलों को परिवर्तित किया गया था। आज ये सब वक़्फ़ के कब्जे मे है।

‘कच्छा पहन कर क्लास में आते हैं अवध ओझा सर, सेक्स की बातें करते हैं’: UPSC की छात्रा ने कैमरे के सामने खोली पोल, पूछा – क्या हम एंटी-नेशनल हैं?

देश की राजधानी दिल्ली में अपने सपनों को पंख लगाने लाखों बच्चे तैयारी के लिए आते हैं। उन्हीं बच्चों में से तीन की ओल्ड राजेंद्र नगर की लाइब्रेरी में पानी भरने से जान चली गई। एक छात्र की करंट लगने से मौत हो गई, तो एक छात्रा ने मकान मालिक की वसूली से तंग आकर जान दे दी। इन सबके बीच यूपीएससी एस्पिरेंट्स सड़कों पर हैं। वो न्याय माँग रहे हैं। वो व्यवस्था सुधार की बात कर रहे हैं, लेकिन उन्हें आंदोलन को ‘बिना नेता’ वाला कहकर खारिज करने की बात भी सामने आ रही है। इस बीच, अवध ओझा, विकास दिव्यकीर्ति जैसे मशहूर शिक्षकों के खिलाफ छात्र आवाज भी उठा रहे हैं।

नवयुग टीवी नाम के यू-ट्यूब चैनल का एक क्लिप तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक छात्रा ने अवध ओझा को गुंडा करार दिया। यही नहीं, छात्रा ने कहा कि वो कहने को इतिहास पढ़ाते हैं, लेकिन करते हैं सिर्फ ज्ञान की बातें, उनका सिलेबस तक पूरा नहीं है। छात्रा ने कहा कि वो अवध ओझा से पढ़ चुकी है, लेकिन अवध ओझा क्लास में कच्छा पहनकर ही आ जाता है। छात्रा ने कहा कि जब उसने इस पर आपत्ति की, तो बस, मुस्कराकर टाल दिया गया।

प्रदर्शन कर रहे एक छात्र ने कहा कि यू-ट्यूब वाले वायरल करने के लिए पैसे लेते हैं। वायरल टीचर्स का पढ़ाई में योगदान शून्य होता है। उन्हें देखकर देश के कोने-कोने से बच्चे दिल्ली आ रहे हैं और ओल्ड राजेंद्र नगर जैसी जगहों पर फंस जाते हैं। यहाँ बच्चों को सिर्फ कमोडिटी समझा जाता है। कोई जिम्मेदारी लेने वाला नहीं है।

एक छात्र ने पूरी क्रोनोलॉजी समझाते हुए कहा, “बच्चे यू-ट्यूब वालों के चक्कर में यहाँ आ जाते हैं। फिर उनसे उगाही शुरू हो जाती है। रूम रेंट वाला दलाल एक महीने का किराया लेता है। 15-20 हजार रुपए महीने के लगते हैं। 1500 रुपए माह की लाइब्रेरी हादसे के बाद 5000-6000 रुपए में कर दी गई है। 10 हजार से ज्यादा खाने-पीने में चला जाता है। हर महीने 35-40 हजार रुपए माँ-बाप अपनी प्रॉपर्टी बेचकर बर्बाद कर रहे हैं।”

प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि विकास दिव्यकीर्ति हों या अवध ओझा, इन्हें छात्रों से मुलाकात करके उनकी समस्याओं को सुनना चाहिए, न कि एएनआई, लल्लनटॉप, अनकट जैसे संस्थानों में अपनी बात रख देने से। उन्हें तो तीन दिन तक यही नहीं पता चला कि असल में हुआ क्या है।

कई छात्रों ने दावा किया है कि उनके मकान मालिकों ने, पीजी संचालकों ने, कोचिंग सेंटर चलाने वालों ने कहा कि ये सारा मामला 15-20 दिनों में शांत हो जाएगा, क्योंकि उनके पास पैसा है और सबकुछ मैनेज हो जाएगा। ऐसे में कुछ बदलने वाला नहीं है। एक छात्र ने कहा कि यहाँ किस लेवल की वसूली हो रही है, इसे इसी बात से समझ सकते हैं कि कुछ लाइब्रेरी में ताला लगते ही लाइब्रेरी की फीस 1500 रुपए से बढ़ाकर 5 हजार से 6000 रुपए प्रति माह कर दी गई है। यहाँ छात्रों से हर कोई सिर्फ पैसे लूटना चाहता है। जिंदगी की कोई कीमत ही नहीं है।

बच्चों से अपने प्राइवेट पार्ट पर मालिश करवाता था मदरसा टीचर चाँद मोहम्मद, दीनी तालीम के बहाने कमरे में बुलाता था: ग्रामीणों का प्रदर्शन, कहा – संचालक ने करवा दिया फरार

उत्तर प्रदेश के शामली जिले में एक मदरसे के अंदर नाबालिग छात्र से कुकर्म किए जाने का मामला सामने आया है। कुकर्म का आरोप यहाँ पढ़ाने वाले मौलाना पर लगा है जिसका नाम चाँद मोहम्मद बताया जा रहा है। चाँद मोहम्मद पर यह भी आरोप है कि वो बच्चों से अपने प्राइवेट पार्ट में तेल की मालिश करवाता था। पीड़ित छात्र अनाथ बताया जा रहा है। घटना के बाद मौलाना फरार है जिसे मदरसे से निकाल दिया गया है। पुलिस इस घटना को बच्चों का आपसी झगड़ा बता रही है।

यह घटना शामली जिले के थाना क्षेत्र गढ़ी पुख्ता की है। यहाँ के मुमताजनगर में आने वाले गाँव गुराना में ‘जामिया अरबिया तालीमुल कुरआन’ नाम का मदरसा है। इस मदरसे में बाहरी और गाँव के तमाम छात्र दीनी और मज़हबी तालीम लेते हैं। मदरसे का संचालक इस्रायल है। इसी में एक अनाथ छात्र भी पढ़ता है जिसके माता-पिता अब दुनिया में नहीं हैं। वो अपने ननिहाल में पाला जा रहा है। आरोप है कि मदरसे में पढ़ाने के लिए नियुक्त मौलाना चाँद मोहम्मद ने अनाथ छात्र के साथ कई बार अप्राकृतिक सेक्स किया।

ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि मौलाना की हवस के शिकार कुछ अन्य छात्र भी बने हैं। बताया गया कि पढ़ाई खत्म होने के बाद वह छात्रों को अपने कमरे में बुलाता था। यहाँ वो बच्चों से अपने प्राइवेट पार्ट की मालिश करवाया करता था। इसके बाद वो छात्रों से कुकर्म किया करता था। कुकर्म के बाद चाँद मोहम्मद बच्चों को जान से मारने की धमकी दे कर मुँह बंद रखने को कहता था। कुछ छात्रों की आपसी बातचीत से यह खबर पूरे गाँव में फ़ैल गई। ग्रामीणों ने घटना पर गुस्सा जताना शुरू कर दिया।

ग्रामीणों का आरोप है कि मामला बढ़ता देख कर मदरसा संचालक इस्रायल ने मौलाना चाँद मोहम्मद को चुपके से फरार करवाए दिया। कुछ ग्रामीण मीडिया के सामने भी आए और उन्होंने फरार मौलाना के साथ मदरसा संचालक पर भी कानूनी कार्रवाई की माँग की है। वहीं इस मामले में गढ़ी पुख्ता के थाना प्रभारी प्रवेश कुमार ने मीडिया से बताया कि पुलिस को मौखिक शिकायत मिली थी। इस शिकायत पर जाँच की गई तो मामला बच्चों में आपसी झगड़े का निकल कर सामने आया है।

हालांकि इस मामले में ग्रामीणों की राय पुलिस से जुदा है। ग्रामीणों का आरोप है कि मदरसा संचालक केस को दबाने की कोशिश कर रहे हैं। मदरसे के मैनेजमेंट के अन्य सदस्यों ने भी घटना को सही बताते हुए फरार मौलाना पर कार्रवाई की माँग उठाई है। उन्होंने यह भी कहा कि चाँद मोहम्मद की नियुक्ति या निकाले जाने से पहले मदरसा संचालक ने मैनेजमेंट के किसी अन्य सदस्य से राय मशविरा भी नहीं किया।

जिस मोईद खान को बचा रहे अखिलेश यादव, वह भदरसा दंगों का आरोपित, सपा नेता की पढ़ाई कक्षा दूसरी तक… कमाई करोड़ों में: दोस्त राशिद और उसके अब्बू भी दंगों में रहे शामिल

अयोध्या में OBC समाज की नाबालिग लड़की से गैंगरेप करने वाले समाजवादी पार्टी के नेता एवं स्थानीय सांसद अवधेश प्रसाद के करीबी मोईद खान बेहद कम समय में करोड़ों का मालिक बन बैठा है। मोईद खान सिर्फ दूसरी कक्षा तक पढ़ा-लिखा है और वह मदरसे में। इसके बावजूद उसने पिछले 15 सालों में 50 करोड़ रुपए से अधिक की संपत्ति बना ली है। वह 2012 के भदरसा दंगे का भी आरोपित रहा है।

रेप की घटना सामने आने के बाद सीएम योगी आदित्यनाथ ने पीड़ित से मुलाकात की थी। उसके बाद उन्होंने स्थानीय एसएचओ रतनलाल शर्मा और अखिलेश गुप्ता को निलंबित करने का आदेश जारी करने के साथ ही मोईद खान की संपत्तियों की जाँच का भी आदेश दिया था। इसके बाद राजस्व विभाग की टीम सक्रिय हो गई और जाँच शुरू कर दी। हालाँकि, अखिलेश यादव मोईन के पक्ष में खुलकर खड़े हो गए हैं।

ADM प्रशासन अनिरुद्ध प्रताप सिंह ने बताया कि अभी मोईद खान की एक करोड़ रुपए की जमीन चिह्नित हुई है। उसकी बेकरी सरकारी तालाब की जमीन पर 3000 स्क्वायर फीट में बनी थी। इसको प्रशासन ने तोड़ दिया है। इस बीच पिछले 48 घंटे में अयोध्या और आसपास के कई लोग शिकायत लेकर आए हैं कि उनकी जमीन पर मोईद खान ने जबरन कब्जा किया है। इन सबकी जाँच चल रही है।

भदरसा के मुख्य बाजार में भी मोईद खान की एक बिल्डिंग है। वहाँ भी प्रशासन पहुँचा था, लेकिन उसे अभी तोड़ा नहीं गया है, क्योंकि उसमें पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की एक ब्रांच संचालित हो रही है। जिला प्रशासन ने PNB बैंक को इस मकान को खाली करने का नोटिस दिया है। माना जा रहा है कि बैंक द्वारा मकान खाली करने के बाद इसे भी तोड़ दिया जाएगा।

दैनिक भास्कर की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट के मुताबिक, जाँच के दौरान यह बात भी सामने आई है कि समाजवादी पार्टी का नेता मोईद खान साल 2012 में हुए भदरसा दंगे का आरोपित रह चुका है। मोईद खान साल 2012 से ही समाजवादी पार्टी का नगर अध्यक्ष है। सपा से पहले वह कॉन्ग्रेस के लिए चुनाव का काम-काज देखता था। साल 2012 से उसका राजनीतिक और आर्थिक रसूख बढ़ता गया है।

इतना ही नहीं, मोईद खान का दोस्त और भदरसा नगर पंचायत अध्यक्ष राशिद खान भी भदरसा दंगे का आरोपित रहा है। राशिद खान समाजवादी पार्टी का नेता है। उसकी अखिलेश यादव और अवधेश प्रसाद के साथ तस्वीरें वायरल हो रही हैं। अयोध्या गैंगरेप का खुलासा होने के बाद राशिद खान ने मोईद को बचाने के लिए पीड़ित परिवार को जान से मारने की धमकी भी दी थी। इस मामले में FIR दर्ज हो चुकी है।

पुलिस को दी गई शिकायत में कहा गया है कि मोहम्मद राशिद खान ने पीड़िता के घर घुसकर उस पर सुलह करने का दबाव डाला था। उसने धमकी देते हुए कहा था, “सुलह नहीं करोगी तो जान से जाओगी।” इसको लेकर शिकायतकर्ता ने पुलिस ने कानूनी कार्रवाई करने का आग्रह किया है। शिकायत के आधार पर पुलिस ने FIR दर्ज कर ली है।

भदरसा दंगा जब हुआ था, उस समय नगर पंचायत का अध्यक्ष मोहम्मद अहमद था। मोहम्मद अहमद वर्तमान नगर पंचायत अध्यक्ष मोहम्मद राशिद का अब्बू था। अहमद दंगा भड़काने का मुख्य आरोपित था। उस पर मिट्टी का तेल बँटवाकर दंगे को भड़काने का आरोप लगा था। उस समय प्रदेश में सपा की सरकार थी। लोगों का कहना है कि सपा नेता होने का फायदा मोईद खान को मिला और वह बच गया।

मोईद खान के मोहल्ले वालों का कहना है कि वह ज्यादा पढ़ा-लिखा नहीं है। वह मदरसे में दो साल ही गया था। इसके बाद पढ़ाई छोड़कर व्यवसाय करने में लग गया। उसने कई व्यवसाय किए, लेकिन कुछ चला नहीं। इसके बाद उसने जमीनों का काम करने लगा। इस काम में उसने जमकर पैसा बनाया। उस दौरान वह 18 साल था और कॉन्ग्रेस के दफ्तर में बैठने लगा था। 2012 में वह सपा में शामिल हो गया।

जिस बेकरी को प्रशासन ने तोड़ा है, उसे मोईद खान ने 6 साल पहले शुरू की थी। वहीं, एक और बेकरी की दुकान को सील कर दिया गया है। मोईन बेकरी वाली को भी कब्जा किया था। मोईद खान कब्रिस्तान, चकबंदी की सरकारी जमीनें और लोगों की जमीनों पर कब्जा कर उन्हें बेच देता था। पिछले कुछ दिनों में कई लोगों ने पुलिस प्रशासन में मोईन द्वारा उनकी जमीनों पर कब्जे की शिकायत की है।

मोईन खान के 4 बेटे हैं। उसके सबसे बड़े बेटे का नाम जहीर, फिर नदीम, नफीस और सबसे छोटे बेटे का नाम जावेद है। उसकी 2 बेटियाँ भी हैं। उसके 3 बेटे उसके साथ मिलकर बेकरी का काम संभालते हैं बड़ा जहीर बेटा दुकान चलाता है और 2 बेटे- नदीम एवं नफीस बेकरी को बेचने के लिए सेल्समैन का काम करते हैं। वहीं, छोटा बेटा जावेद अभी पढ़ाई कर रहा है।

परमारथ के कारने, साधुन धरा सरीर… मरने के बाद भी 5 रोगियों को जीवन दे गए 25 साल के काँवड़ यात्री सचिन, सड़क दुर्घटना में हो गया था देहांत

कबीरदास ने कभी एक प्रसिद्ध दोहा कहा था, जिसकी पंक्ति थी – ‘परमारथ के कारने, साधुन धरा शरीर’ अर्थात सज्जन लोगों का जन्म ही दूसरों की भलाई के लिए होता है। यह दोहा आज के समय में भी चरितार्थ किया है 25 साल के काँवड़ यात्री सचिन खंडेलवाल ने, जिनका सड़क दुर्घटना में देहांत हो गया है। 25 साल के छोटे से जीवन में महादेव शिव के परम भक्त द्वारा जो भी समय हुआ वो उन्होंने समाज के हित में किया। अब मृत्यु के बाद उनकी देह से दान किए गए अंगों से 5 गंभीर रूप से बीमार लोगों को नया जीवन मिला है।

‘टाइम्स ऑफ़ इंडिया’ के मुताबिक, काँवड़ यात्री सचिन खंडेलवाल हरिद्वार से गंगाजल ले कर वापस अपने घर हरियाणा के महेंद्रगढ़ की तरफ लौट रहे थे। रास्ते में रुड़की के पास एक कार ने उन्हें टक्कर मार दी। इस हादसे में सचिन गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें इलाज के लिए ऋषिकेश स्थित AIIMS में भर्ती करवाया गया। डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद सचिन को बचाया नहीं जा सका। सचिन का शोक संतृप्त परिवार एम्स में शव लेने आया तो डॉक्टरों ने वहाँ परिजनों से उनकी अंगदान के बारे में इच्छा पूछी।

सचिन के घर वालों ने उन मरीजों की तरफ देखा जो जीवन और मौत से संघर्ष कर रहे थे। परिजन फ़ौरन तैयार हो गए। दान के तौर पर सचिन की किडनी, पैंक्रियाज, लीवर और आँखों को चयनित किया गया। सचिन की किडनी, अग्नाशय और लीवर को चंडीगढ़ के पोस्ट-ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च और दिल्ली के इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलियरी साइंसेज में भेजा गया। इसी के साथ मृतक काँवड़ यात्री द्वारा दान की गई आँखों से अब उत्तराखंड के 2 नेत्र रोगी शनिवार (3 अगस्त) से इस दुनिया को देख रहे हैं।

कुल मिला कर सचिन खंडेलवाल के अंगदान से 5 अलग-अलग लोगों को नई जिंदगी मिली है। एम्स ऋषिकेश की डॉ. मीनू सिंह ने कहा, “सचिन ने कई लोगों को जीवन का तोहफा दिया है। एम्स उन्हें हमेशा एक साइलेंट हीरो के तौर पर याद रखेगा।” दिवंगत काँवड़ यात्री के भाई पंकज खंडेलवाल ने कहा, “यही एक रास्ता था जिससे सचिन कुछ और साल जी सकता था। मेरा मानना ​​है कि जो लोग अंगदान कर सकते हैं, उन्हें अपने प्रियजनों को मृत्यु के बाद भी जीवित रखना चाहिए।” अंगदान के बाद एम्स में सचिन के शव को पूरे सम्मान के साथ अंतिम संस्कार के लिए उनके परिजनों को सौंप दिया है।

मुस्लिम देश बांग्लादेश को अस्थिर कर रहा इस्लामी आतंकवाद, सिर्फ मुखौटा है ‘छात्र आंदोलन’: पाकिस्तान, ISI, जमात सब खा रहे मलाई

बांग्लादेश में आरक्षण विरोधी प्रदर्शन की आड़ में पूरे देश को जला दिया गया। कर्फ्यू, गोलीबारी, लूट, हत्याओं का सिलसिला चल उठा। कोर्ट के आदेश से लागू हुए आरक्षण को सुप्रीम कोर्ट ने फिर से हटा लिया, जिसके बाद आरक्षण विरोधी हिंसा की आग में जल रहे बांग्लादेश में शाँति आ जानी चाहिए थे, लेकिन बांग्लादेश में शांति की जगह अब प्रदर्शनकारी सरकार के इस्तीफे की माँग पर उतर आए हैं।

ऐसे में अब ये बात धीरे-धीरे ही सही, सामने आ रही है कि जो आरक्षण विरोधी हिंसा और प्रदर्शन हुए थे, वो सिर्फ छात्रों का गुस्सा नहीं, बल्कि उनके गुस्से को इस्तेमाल करने वाले इस्लामिक आतंकवादी थे। विपक्षी पार्टी बीएनपी थी। पाकिस्तानी आईएसआई के इशारे चलने वाली जमात थी, जिसपर बांग्लादेश ही नहीं, रूस भी प्रतिबंध लगा चुका है।

छात्र आंदोलन के 157 संयोजकों में से एक नाहिद इस्लाम ने 4 अगस्त 2024 से ‘पूर्ण अहसयोग‘ आंदोलन का ऐलान किया है, जिसमें शेख हसीना और उनके मंत्रिमंडल का इस्तीफा माँगा गया है। कथित छात्र आंदोलन की तरफ से इस राजनीतिक असहयोग आंदोलन के छेड़ने के पीछे के चेहरे अब बेनकाब हो रहे हैं। जो बताता है कि आरक्षण विरोधी प्रदर्शन और हिंसा के पीछे राजनीतिक, कट्टरपंथी इस्लामिक ताकतें और देश विरोधी ताकतों ने हाथ मिलाया हुआ है।

बता दें कि 3 अगस्त को ही बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने आंदोलनकारी छात्रों से विरोध प्रदर्शन को समाप्त करने और हिंसा को खत्म करने के लिए प्रधानमंत्री आवास पर वार्ता के लिए बुलाया था। ये बातचीत बिना शर्त होनी थी। उन्होंने प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए छात्रों को भी रिहा करने के लिए कहा था। लेकिन ‘आरक्षण विरोधी छात्र आंदोलन’ के कन्वेनरों ने बातचीत के पीएम हसीना के न्यौते को ठुकरा दिया। नाहिद इस्लाम ने कहा कि आपातकाल या कर्फ्यू को कोई बांग्लादेशी स्वीकार नहीं करेगा और न ही हम कोई बातचीत करेंगे।

नाहिद ने ये जरूर कहा कि सरकार आंदोलनकारियों के देखते ही गोली मार देने वाला आदेश वापस ले, साथ ही कहा कि ‘हत्यारी सरकार’ के साथ अब कोई बातचीत नहीं होगी, क्योंकि काफी समय बीत चुका है। यही नहीं, उन्होंने अख्तर हुसैन और आरिफ सोहेल को रिहा करने की भी माँग की।

ऐसे ही एक कन्वेनर अबू बकर मजूमदार ने बांग्लादेश के प्रमुख समाचार पत्र ‘प्रथन अलो’ से कहा कि अब बातचीत का मौका नहीं है। फैसला सड़कों से आएगा। कन्वेनर आसिफ महमूद ने भी सोशल मीडिया पर ‘हत्यारी सरकार’ और आवामी लीग के साथ किसी भी तरह की बातचीत के लिए हम तैयार नहीं हैं। यही नहीं, इस असहयोग आंदोलन के लिए 15 सूत्री दिशानिर्देश भी जारी किए गए हैं, जिसमें…

  • 1- किसी को भी कोई टैक्स नहीं देना चाहिए।
  • 2- किसी भी तरह का यूटिलिटी बिल न भरें, मसलन पानी-बिजली का बिल।
  • 3-सभी सरकारी और निजी संस्थान, कार्यालय, न्यायालय, मिलें और कारखाने बंद रहेंगे। कर्मचारियों को महीने के अंत में अपना वेतन लेना चाहिए।
  • 4- शैक्षणिक संस्थान बंद रहेंगे।
  • 5- प्रवासी लोगों को बैंकिंग माध्यम से कोई भी धन प्रेषण नहीं भेजना चाहिए।
  • 6- सभी सरकारी बैठकों, सेमिनारों और कार्यक्रमों का बहिष्कार करें।
  • 7- बंदरगाह कर्मचारियों को कोई भी सामान नहीं उतारना चाहिए।
  • 8- मिलें और कारखाने बंद रहेंगे। आरएमजी श्रमिकों को काम पर नहीं जाना चाहिए।
  • 9- सार्वजनिक परिवहन स्थगित रहेगा। श्रमिकों को काम पर नहीं जाना चाहिए।
  • 10- बैंक सिर्फ जरूरी लेन-देन के लिए रविवार को खुलेंगे।
  • 11- पुलिस अपने स्टेशनों पर केवल नियमित ड्यूटी करेगी तथा प्रोटोकॉल, दंगा या प्रदर्शनों को रोकने से जुड़ी ड्यूटी नहीं करेगी।
  • 12- देश से कोई भी धन बाहर नहीं ले जाया जाना चाहिए, तथा कोई भी विदेशी लेनदेन नहीं होना चाहिए।
  • 13- बीजीबी (बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश) और नौसेना को छोड़कर, अन्य बल अपनी छावनियों में ही रहेंगे। बीजीबी और नौसेना अपने बैरकों और तटीय क्षेत्रों में रहेंगे।
  • 14- नौकरशाह सचिवालय नहीं जाएँगे। डीसी या उपजिला अधिकारी अपने-अपने कार्यालयों में नहीं जाएँगे।
  • 15- लक्जरी सामान की दुकानें, शोरूम, होटल, मोटल और रेस्तराँ बंद रहेंगे।

बता दें कि कथित आरक्षण और भेदभाव विरोधी प्रदर्शनों के कन्वेनर ने जब प्रधानमंत्री की बातचीत की पेशकश को ठुकराया, उससे कुछ समय पहले ही अल-कायदा से जुड़ी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के प्रचारक डेविड बर्गमैन ने पीएम के प्रस्ताव को अस्वीकार करने की अपील की थी। ये इस बात का अच्छा-खासा संकेत है कि आरक्षण विरोधी प्रदर्शन पूरी तरह से सरकार विरोधी प्रदर्शन हैं, जिन्हें बर्गमैन का बॉस तारिक रहमान मैनेज कर रहा है। तारिक रहमान इस्लामिक आतंकवादी है और सजायाफ्ता भी, जो साल 2007 से बांग्लादेश से फरार है और यूके में रह रहा है।

बर्गमैन के अलावा भी बीएनपी ने जॉन डैनिलोविच जैसे पूर्व अमेरिकी राजनयिकों को भी झूठ फैलाने के लिए काम पर लगाए हुए हैं, जो काफी सालों तक अलकायदा से जुड़ी पार्टी-बीएनपी के लिए काम कर चुका है। यही नहीं, बीएनपी का महासचिव फखरुल इस्लाम आलमगीर तो अवामी लीग सरकार को तुरंत माफी माँगने और इस्तीफा देने के लिए भी कह चुका है। बताया जा रहा है कि लंदन में रहने वाला तारिक रहमान बीएनपी के धनी मेंबर्स से सरकार के खिलाफ चल रहे आंदोलन को पैसे देने के लिए और छात्र आंदोलन के नेताओं के साथ लगातार संपर्क में रहने का निर्देश दे चुका है। तारिक रहमान जैसे इस्लामिक आतंकवादी पर 2008 से ही अमेरिका ने वीजा-बैन लगाया हुआ है।

बांग्लादेशी अर्थव्यवस्था को नष्ट करना है मकसद?

कथित आरक्षण विरोधी आंदोलन का नेतृत्व कर रहे नेताओं की ओर से जारी 15 सूत्रीय एजेंडे पर नजर डालें तो एक ही लक्ष्य नजर आता है- बांग्लादेश की समृद्ध अर्थव्यवस्था को नष्ट करना और देश को पाकिस्तान जैसे दिवालिया राष्ट्र में बदलना।

देशव्यापी हिंसा और आतंकवादी कारनामों का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 1 अगस्त, 2024 को बांग्लादेश सरकार ने जमात-ए-इस्लामी और इसकी छात्र शाखा इस्लामी छात्र शिबिर पर बैन लगा दिया और इन्हें आतंकवाद विरोधी अधिनियम 2009 की धारा 18/1 के तहत आतंकवादी संगठन घोषित किया। जमात-ए-इस्लामी का मतलब है “इस्लाम का समूह” और छात्र शिबिर का मतलब है “छात्र शिविर”।

रूस के प्रमुख दैनिक समाचार पत्र रोसिस्काया गजेटा के अनुसार, जमात-ए-इस्लामी को भी आतंकवादी संगठन घोषित किया गया है और रूस में प्रतिबंधित कर दिया गया है।

बांग्लादेश को बर्बाद करने के लिए अमेरिकी सीआईए और पाकिस्तानी आईएसआई द्वारा रची गई इन तथाकथित छात्र विरोध प्रदर्शनों का असली चरित्र अब सामने आ चुका है, जिससे ये साफ है कि बांग्लादेश को इस्लामवादी, जिहादी और आतंकवादी तत्वों के गठजोड़ से गंभीर खतरा है, जो देश को अस्थिर करना चाहते हैं।

शांतिपूर्ण बातचीत को नकारना और विनाशकारी निर्देश जारी करना एक ऐसे एजेंडे को दर्शाता है जिसका उद्देश्य बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था को पंगु बनाना और अराजकता को भड़काना है। ऐसे में इस महत्वपूर्ण समय में प्रधानमंत्री शेख हसीना और बांग्लादेश के देशभक्त नागरिकों को देश की संप्रभुता और सुरक्षा को बनाए रखने के लिए निर्णायक और अडिग कार्रवाई करनी चाहिए। क्योंकि नरमी बरतने का समय बीत चुका है। एक स्थिर और समृद्ध राज्य के रूप में बांग्लादेश का अस्तित्व इन सुनियोजित आतंकवादी कामों से कड़ाई से निपटने की वजह से ही बच पाएगा।